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खण्ड (अ) अध्याय 7 भारत के पड़ोसी देश (अ) नेपाल

 खण्ड (अ) अध्याय 7 भारत के पड़ोसी देश
(अ) नेपाल

बिहार बोर्ड के 9वीं कक्षा का भूगोल विषय का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

सरल एवं आसान शब्दों में उत्तर देना सीखें



अध्याय 7 भा
 
वस्तुननिष्ठ प्रश्नोत्तर 
1. नेपाल की सीमा भारत के किस राज्य से मिलती है?
(क) अरुणाचल प्रदेश
(ख) मणिपुर
(ग) सिक्किम
(घ) पंजाब
उत्तर- (ग) सिक्किम
 
2. महाभारत लेख क्या है?
(क) पर्वत श्रृंखला
(ख) लेखागार
(ग) मैदान
(घ) राजमहल
उत्तर- (क) पर्वत श्रृंखला
 
3. गण्डक नदी को नेपाल में किस नाम से जाना जाता है? 
(क) काली गण्डक नदी
(ख) नारायणी नदी
(ग) त्रिशुल नदी
(घ) कृष्णा नदी
उत्तर- (ख) नारायणी नदी
लघुउत्तरीय प्रश्नोत्तर  
 
1. नेपाल के सर्वोच्च शिखर का नाम एवं ऊँचाई बताएँ।
उत्तर- विश्व का सर्वोच्च शिखर माउंट एवरेस्ट जिसकी ऊँचाई 8848 मीटर है। नेपाल तिब्बत सीमा पर अवस्थित है। स्थानीय लोग इस चोटी को सागरमाथा के नाम से पुकारते हैं।
 
2. नेपाल की तीन प्रमुख नदियों के नाम लिखें।
उत्तर- नेपाल में पूर्व से पश्चिम तीन प्रमुख नदी तंत्र का क्रम है क्रमशः कोसी, गण्डक तथा घाघरा नदी। यहाँ की सबसे लंबी नदी करनाली है जो घागरा की सहायक नदी है।
 
3. नेपाल के पड़ोसी देश और सीमावर्ती भारतीय राज्यों का नाम लिखें।
उत्तर  –  नेपाल के उत्तर में तिब्बत (चीन) स्थित है। जिसके बीच महान हिमालय दीवार जैसा खड़ा है। अन्य तीन तरफ से भारत के राज्य पड़ते हैं। नेपाल के पूर्व में सिक्किम एवं पश्चिम बंगाल, पश्चिम में उत्तराखंड तथा दक्षिण में बिहार एवं उत्तर प्रदेश राज्य स्थित है।
 
दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर 
 
1. नेपाल की अर्थव्यवस्था का विवरण दीजिए।
उत्तर- नेपाल में जीवन-निर्वाह कृषि के साथ-साथ पशुपालन मुख्य व्यवसाय है। यहाँ 18% भूभाग पर खेती होती है।
 
              नेपाल में खनिजों का घोर अभाव है। अभ्रक यहाँ मुख्य खनिज है। अल्प मात्रा में लिग्नाइट, तांबा, कोबाल्ट आदि मिलते हैं। शक्ति के साधन के रूप में भारत के सहयोग से देवी घाट जल विद्युत परियोजना चालू किया गया है। यहाँ जल विद्युत विकास की असीम संभावनाएँ है। किंतु इसका विकास नहीं के बराबर हुआ है। 
 
            औद्योगिक दृष्टि से नेपाली पिछड़ा देश है। बड़े उद्योग स्थापित होने वाले कारकों का अभाव है। यहाँ कृषि एवं वन आधारित उद्योगों का विकास किया जा रहा है। यहाँ सूती वस्त्र, चीनी, जूट, चमड़ा,वनस्पति तेल, तंबाकू, दियासलाई, कागज तथा लुग्दी इत्यादि का निर्माण होता है। सीमेंट तथा कृषि उपकरण भी बनाए जा रहे हैं। यहाँ के प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक स्थल तथा पर्वतारोहण सैलानियों को आकर्षित करते हैं। यहाँ पर्यटन उद्योग का तेजी से विकास हो रहा है।
 
2. नेपाल की जलवायु, मृदा और जलप्रभाव का वर्णन कीजिए।
उत्तर- नेपाल की जलवायु शीत प्रधान है। यहाँ की जलवायु भू आकृतियों से प्रभावित है। दक्षिण के तराई वाले भाग को छोड़कर सभी स्थानों पर तापमान कम रहता है। क्योंकि 75% भूभाग की ऊँचाई समुद्र तल से काफी ऊँचा होता है। काठमांडू का तापमान जाड़ें में 2° सेंटीग्रेट से भी नीचे चला जाता है। जबकि गर्मी में 30° सेंटीग्रेट तक पहूँच जाता है। यहाँ का वार्षिक औसत तापमान 10℃ है। यहाँ का वार्षिक औसत तापमान 10℃ है। यहाँ मार्च से अगस्त तक ग्रीष्म ऋतु तथा सितंबर से फरवरी तक शीत ऋतु रहता है। गर्मी में मानसूनी हवाओं से नेपाल के पूर्वी भाग में 200 सेंटीमीटर तथा पश्चिमी भाग में 100 सेंटीमीटर वार्षिक वर्षा होती है। जाड़े में देश के उत्तरी भाग में हिमपात होते हैं तथा शीतकालीन चक्रवातीय वर्षा भी होती है।
 
3. नेपाल की अर्थव्यवस्था पर उद्योगों के प्रभाव का वर्णन कीजिए।
उत्तर- नेपाल में खनिजों का घोर अभाव है। अभ्रक यहाँ मुख्य खनिज है। अल्प मात्रा में लिग्नाइट,तांबा, कोबाल्ट आदि मिलते हैं। शक्ति के साधन के रूप में भारत के सहयोग से देवी घाट जल विद्युत परियोजना चालू किया गया है। यहाँ जल विद्युत विकास की असीम संभावनाएँ है। किंतु इसका विकास नहीं के बराबर हुआ है।  

              औद्योगिक दृष्टि से नेपाली पिछड़ा देश है। बड़े उद्योग स्थापित होने वाले कारकों का अभाव है। यहाँ कृषि एवं वन आधारित उद्योगों का विकास किया जा रहा है। यहाँ सूती वस्त्र, चीनी, जूट, चमड़ा, वनस्पति तेल, तंबाकू, दियासलाई, कागज तथा लुग्दी इत्यादि का निर्माण होता है। सीमेंट तथा कृषि उपकरण भी बनाए जा रहे हैं। यहाँ के प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक स्थल तथा पर्वतारोहण सैलानियों को आकर्षित करते हैं। यहाँ पर्यटन उद्योग का तेजी से विकास हो रहा है।


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खण्ड (अ) अध्याय 6 जनसंख्या

 खण्ड (अ) अध्याय 6 जनसंख्या

बिहार बोर्ड के 9वीं कक्षा का भूगोल विषय का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

सरल एवं आसान शब्दों में उत्तर देना सीखें



अध्याय 6 जनसंख्या
वस्तुननिष्ठ प्रश्नोत्तर  
1. भारत में सर्वाधिक साक्षरता दर किस राज्य की है?
(क) पश्चिम बंगाल
(ख) महाराष्ट्र
(ग) बिहार
(घ) केरल
उत्तर- (घ) केरल
2. भारत की औसत आयु संरचना क्या है?
(क) 64.6 वर्ष
(ख) 64.9 वर्ष
(ग) 81.6 वर्ष
(घ) 70.2 वर्ष
उत्तर- (क) 64.6 वर्ष (2001)
3. 2001 ई० की जनगणना में प्रति 1000 पुरुषों पर महिलाओं के अनुपात की क्या स्थिति है?
(क) 927 महिलाएँ
(ख) 990 महिलाएँ
(ग) 933 महिलाएँ
(घ) 1010 महिलाएँ
उत्तर- (ग) 933 महिलायें
4. भारत का औसत जनसंख्या घनत्व प्रति वर्ग कि०मी० क्या है?
(क) 318 व्यक्ति
(ख) 325 व्यक्ति
(ग) 302 व्यक्ति
(घ) 288 व्यक्ति
उत्तर – (ख) 325 व्यक्ति
लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर 
1. 1951 ई० में भारत की जनसंख्या कितनी थी?
उत्तर – 1951 ई० में भारत की जनसंख्या 361 लाख  थी।
2. भारत में 2001 ई० में नगरीय जनसंख्या का प्रतिशत क्या था?
उत्तर – भारत में 2001 ई० में नगरीय जनसंख्या का प्रतिशत 27.78 था।
3. केरल में प्रति एक हजार पुरुषों पर महिलाओं की संख्या क्या है?
उत्तर – केरल में प्रति एक हजार पुरुषों पर महिलाओं की संख्या 1058 है । (जनगणना 2001 के अनुसार)
4. भारत की साक्षरता दर का वर्णन करें।
उत्तर – साक्षरता जनसंख्या का बहुत ही महत्वपूर्ण संसाधनात्मक गुण होता है। स्पष्टत: केवल एक शिक्षित और जागरूक नागरिक ही बुद्धिमत्तापूर्ण निर्णय ले सकता है तथा शोध एवं विकास के कार्यों को कर सकता है। साक्षरता स्तर में कमी आर्थिक प्रगति में गंभीर बाधक होता है।
            भारत की साक्षरता के स्तर में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है 2001 ई० की जनगणना के अनुसार देश की साक्षरता दर 64.84% पुरुषों का 73% एवं महिलाओं की 53.67% है। परंपरागत मान्यताओं के कारण महिलाओं की साक्षरता दर कम है। लेकिन इसमें तेजी से सुधार हो रहा है।
5. भारत के लिंग अनुपात की विशेषताओं को बताएँ।
उत्तर – प्रति 1000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या को लिंग अनुपात कहा जाता है। यह जानकारी किसी दिए गए समय में, समाज में पुरुषों एवं महिलाओं के बीच समानता की सीमा मापने के लिए एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक सम्यक है। देश में लिंग अनुपात महिलाओं के पक्ष में नहीं है। सन 1951 से 2001 के बीच के लिंग अनुपात की सारणी इस प्रकार है-
जनगणना वर्ष             लिंग अनुपात
 1951 –                          946
  1961 –                          941
  1971 –                          930
  1981 –                         934
  1991 –                          929
  2001 –                         933
भारत में लिंग अनुपात 1951-2001
6. जनगणना से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर – एक निश्चित समय अंतराल की आधिकारिक गणना को जनगणना कहते हैं। भारत में सबसे पहले 1872 ई० में जनगणना की गई थी। सन 1881 में पहली बार संपूर्ण जनगणना की गई थी। उसी समय से प्रत्येक 10 वर्ष पर जनगणना होती है। भारतीय जनगणना जनसांख्यिकी, समसामयिक तथ्यों तथा आर्थिक आँकड़ों का सबसे बड़ा स्रोत है।
 
दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर
1. भारत की जनसंख्या वृद्धि की विशेषताओं को बताएँ।
उत्तर – भारत की जनसंख्या वृद्धि की विशेषताएँ मुख्यतः चार हैं-
(i) जन्मदर
(ii) मृत्युदर
(iii) प्रवास तथा
(iv) व्यावसायिक संरचना।
(i) जन्मदर- एक वर्ष में प्रति हजार व्यक्तियों में जितने बच्चों का जन्म होता है, उसे जन्मदर कहते हैं। यह जनसँख्या वृद्धि का एक प्रमुख घटक है क्योंकि भारत में हमेशा जन्मदर मृत्युदर से अधिक रहा है। भारत की आबादी 1951 में 36 करोड़ 10 लाख से बढ़कर 2011 में 1 अरब 21 करोड़ हो गई।
(ii) मृत्युदर- एक वर्ष में प्रति हजार व्यक्तियों के मरने की संख्या को मृत्युदर कहा जाता है। मृत्युदर में तेजी से गिरावट भारत की जनसंख्या में वृद्धि की दर का प्रमुख कारण है। 1980 तक उच्च जन्मदर में धीमी गति से एवं मृत्युदर में तीव्र गति से गिरावट के कारण जन्मदर और मृत्युदर में काफी बड़ा अन्तर आ गया है । इसके कारण जनसंख्या में विस्फोट हो गया।
(iii) प्रवास-  लोगों का एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में चले जाने को प्रवास कहते हैं। प्रवास केवल जनसंख्या के आकार को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि उम्र एवं लिंग के वृद्धि में ग्रामीण-नगरीय प्रवास के कारण शहरों तथा नगरों की जनसंख्या में नियमित वृद्धि हुई है। 1951 में कुल जनसंख्या की 17.29% नगरीय जनसंख्या थी, जो 2011 में बढ़ कर 37.8% हो गई।
(iv) व्यावसायिक संरचना- आर्थिक रूप से क्रियाशील जनसंख्या का प्रतिशत विकास का एक महत्त्वपूर्ण सूचक है। विभिन्न प्रकार के व्यवसायों के अनुसार किए गए जनसंख्या के आर्थिक वितरण को व्यावसायिक संरचना कहते हैं। भारत एक कृषि प्रधान देश है अत: 64% जनसंख्या गाँवों में कृषि कार्य पर आधारित है। शहरों में जीविका-निर्वाह के साधनों के बढ़ने से सुरक्षा के ख्याल से भी नगरों की संख्या बढ़ रही है।
2. भारत के विषम जनसंख्या घनत्व वर्णन कीजिए।
उत्तर – जनसंख्या घनत्व का तात्पर्य भूमि के प्रति इकाई पर आधिवासिस होने वाली जनसंख्या है। भारतीय जनगणना विभाग द्वारा स्तरीय मापक के रूप में प्रति वर्ग किलोमीटर को एक इकाई माना गया है। इस दृष्टि से भारत की जनगणना 2001 के अनुसार भारत का औसत जनसंख्या घनत्व 325 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है। लेकिन इसमें भारी विषमता है। मैदानी राज्यों में सर्वाधिक घनत्व है। तटीय राज्यों में भी काफी घनत्व है। लेकिन इसमें भारी वविषमता है। मैदानी राज्यों में आदिवासी आर्थिक संरचनात्मक सुविधा की कमी के कारण, कम घनत्व पाए जाते हैं। पठारी राज्यों में सामान्य घनत्व की स्थिति है। 

             भारतीय राज्यों में सर्वाधिक घनत्व पश्चिम बंगाल का है। यहाँ औसतन प्रति वर्ग किलोमीटर 904 व्यक्ति रहते हैं। इसके बाद क्रमशः बिहार(881), केरल(819), का स्थान आता है। सबसे कम घनत्व अरुणाचल प्रदेश अर्थात पर्वतीय राज्य का है जहां औसत घनत्व मात्र 13 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है। केंद्र शासित प्रदेशों को सम्मिलित कर देखा जाए तो सर्वाधिक दिल्ली में है। यह 9340 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है। लेकिन सबसे कम घनत्व अरुणाचल प्रदेश में ही है। केंद्र शासित प्रदेशों में  निकोबार द्वीप समूह का घनत्व 34 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है।


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खण्ड (अ) अध्याय 5 प्राकृतिक वनस्पति एवं वन्य प्राणी

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बिहार बोर्ड के 9वीं कक्षा का भूगोल विषय का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

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अध्याय 5 प्राकृतिक वनस्पत
वस्तुननिष्ठ प्रश्नोत्तर 
 
रिक्त स्थानों की पूर्ति करें-
(1) भारत में तापमान चूँकि सर्वत्र पर्याप्त है । अतः तापमान की मात्रा वनस्पति के प्रकार को यहां निर्धारित करती है ।
 
(2) धरातल पर एक विशिष्ट प्रकार की वनस्पति या प्राणी जीवन वाले पारिस्थितिक तंत्र को जीवोम कहते है ।
 
(3) मनुष्य भी पारिस्थितिक तंत्र का एक अभिन्न अंग है ।
 
(4) घड़ियाल मगरमच्छ की एक प्रजाति विश्व में केवल भारत देश में पाया जाता है
 
(5) देश में जीव मंडल निचय (आरक्षित क्षेत्र) की कुल संख्या 14 है जिसमें 4 को विश्व के जीव मंडल निचयों में सम्मिलित किया गया है ।
 
कारण बताओ-
 
(1) हिमालय के दक्षिणी ढलान पर उत्तरी ढलान की अपेक्षा सघन वन पाए जाते हैं।
उत्तर – हिमालय के उत्तरी ढाल जहाँ बहुत अधिक वर्षा होती है वहाँ अत्यंत सघन वनस्पति एवं सदाबहार वृक्ष पाए जाते हैं। इसके विपरीत हिमालय के दक्षिणी ढलान उत्तरी ढलान की अपेक्षा वृष्टि छाया में पड़ता है वहाँ वनस्पति की सघनता एवं उसका प्रकार इससे प्रभावित होते हैं। अर्थात हिमालय के उत्तर से दक्षिण की ओर बढ़ने पर वर्षा की मात्रा एवं उसकी अवधि घटती जाती है। इसका सीधा  प्रभाव वनस्पति की सघनता वृक्षों की ऊँचाई एवं उसके किस्म पर देखने को मिलती है।
 
(2) उष्णकटिबंधीय वर्षा वन में धरातल लता वितानों से ढका हुआ है।
उत्तर – उष्ण कटिबंधीय वर्षा वन में धरातल लता वितानों से ढका हुआ है क्योंकि यहाँ  सदाबहार जंगल मिलते हैं। इस क्षेत्रों में 200 सें० मी० से अधिक वर्षा होती है । इस क्षेत्र में अधिक वर्षा और ऊँचे तापमान के कारण वृक्षों की काफी अधिक वृद्धि होती हैं। वन काफी सघन होते हैं। इसके कारण सूर्य प्रकाश धरातल पर नहीं पहुंच पाता है। अत्यधिक वर्षा के कारण यहाँ विभिन्न प्रकार की लताएँ वृक्षों से लिपटी रहती हैं तथा धरातल विभिन्न प्रकार की झाड़ियों से आच्छादित रहता है।
 
(3) जैव विविधता में भारत बहुत धनी है।
उत्तर – हमारा देश भारत विश्व की मुख्य 12 जैव-विविधता वाले देशों में से एक है। लगभग 47000 विभिन्न जातियों के पौधे पाए जाने के कारण यह देश विश्व में दसवें स्थान पर और एशिया के देशों में चौथे स्थान पर है। भारत में लगभग 15000 फूलों के पौधे हैं जो कि विश्व में फूलों के पौधे का 6% है। इस देश में बहुत से बिना फूलों के पौधे हैं जैसे कि फर्न, शैवाल(एलेगी) तथा कवक(फंजाई) भी पाए जाते हैं।
           वनस्पति की भाँति ही भारत विभिन्न प्रकार के प्राणी संपत्ति में भी धनी है। यहाँ जीवों की लगभग 90000 प्रजातियाँ मिलती है। देश में लगभग 2000 से अधिक पक्षियों की प्रजातियाँ पाई जाती है। यह कुल विश्व का 13% है। यहाँ मछलियों की 2546 प्रजातियाँ है जो विश्व के लगभग 12% है। भारत में विश्व के 5 से 8% तक उभयचरी, सरीसृप तथा स्तनधारी जानवर भी पाए जाते हैं।
          इस प्रकार कहा जा सकता है कि हमारा देश जैव-विविधता में बहुत धनी है।
(4) झाड़ी एवं कँटीले वन में पौधों की पत्तियाँ रोएँदार मोमी गद्देद्दार एवं छोटी होती है।
उत्तर- क्योंकि इस प्रकार के वनस्पति गुजरात, राजस्थान, हरियाणा के आर्द्र-शुष्क क्षेत्र, उत्तर प्रदेश का दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र, मध्य प्रदेश का उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र आदी क्षेत्रों में पाए जाते हैं। जहाँ झाड़ी एवं कँटीले वन के लिए पानी की माँग सबसे महत्वपूर्ण है। अतः इसे प्राप्त करने के लिए इनकी जड़ें अत्यंत गहरी होती है। पानी को अधिक से अधिक बचा कर रखा जा सके इसलिए इनके तने मोटे होते हैं या पत्तियाँ मोटी, रोएँदार या गूद्देदार होती है। भौतिक वातावरण के साथ प्राकृतिक वनस्पति के समायोजन का यह अनूठा उदाहरण है।
लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर-
 
(1) सिंपलीपाल जीवमंडल निचय कहाँ है?
उत्तर – सिंपली पाल जीव मंडल निचय उड़ीसा में है।
 
(2) बिहार किस प्रकार के वनस्पति प्रदेश में आता है?
उत्तर – बिहार उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वनस्पति प्रदेश में आता है।
 
(3) हाथी किस वनस्पति प्रदेश में पाया जाता है?
उत्तर – स्तनधारी जीवो में हाथी सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। यह भारत के उष्णार्द्र वनों में पाए जाते हैं।
 
(4) भारत में पाए जाने वाले कुछ संकटग्रस्त वनस्पति एवं प्राणी के नाम बताएँ।
उत्तर – कुछ संकटग्रस्त प्राणियों के नाम- काला हिरण, मगरमच्छ, समुद्री गाय, लाल पांडा इत्यादि ।
 
(5) बिहार में किस वन्य प्राणी को सुरक्षित रखने के लिए वाल्मीकि नगर में प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है।
उत्तर – बिहार का वाल्मीकि नगर में प्रोजेक्ट मूल रूप से बाघों को सुरक्षित रखने के लिए चलाया जा रहा है। परन्तु यह गैंडों के लिए भी अनुकूल है। इसे देखते हुए ही सरकार इसको गैंडों के लिए भी सुरक्षित करने का प्रयास कर रही है। 
 
दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर-
 
(1) पारिस्थितिक तंत्र किसे कहते हैं?
उत्तर- किसी क्षेत्र में पेड़-पौधे तथा जीव-जंतु आपस में अपने भौतिक पर्यावरण से अन्तर्सम्बन्धित होकर जिस तंत्र का निर्माण करते हैं, उसे पारिस्थितिक तंत्र कहा जाता है। पृथ्वी पर पादपों तथा जीवो का वितरण मुख्यतः जलवायु द्वारा निर्धारित होता है। किसी क्षेत्र के पादपों की प्रकृति काफी हद तक उस क्षेत्र के प्राणी जीवन को प्रभावित करती है। जब वनस्पति बदल जाती है तो प्राणी जीवन भी बदल जाता है।
 
(2) भारत में पादपों तथा जीवों का वितरण किन कारकों द्वारा प्रभावित होता है?
उत्तर – पृथ्वी पर पेड़-पौधे तथा जीवों का वितरण काफी हद तक भौतिक दशाएँ एवं जलवायु से प्रभावित होता है।भारत में पादपों तथा जीवों का वितरण निम्नलिखित कारकों द्वारा प्रभावित होता है-
◆ भू-भाग का स्वरूप
◆ मिट्टी
◆ तापमान
◆ सूर्य का प्रकाश
◆ वर्षण, इत्यादि।
 
(3) वनस्पति जगत एवं प्राणी जगत हमारे अस्तित्व के लिए क्यों आवश्यक है?
उत्तर- पृथ्वी पर पेड़-पौधे तथा जीवों का वितरण काफी हद तक भौतिक दशाएँ एवं जलवायु से प्रभावित होता है, खास किस्म के प्राणी जगत को संरक्षण देते हैं। जब किसी जगह की वनस्पति बदल जाती है तो वहाँ के रहने वाले जीव-जंतुओं को प्रभावित करती है और उनकी भी संख्या तथा किस्म बदल जाती है। किसी भी जगह के पेड़-पौधें तथा जीव-जंतु अपने भौतिक वातावरण से अंतरसंबंधित होते हैं तथा एक दूसरे से भी संबंधित होते हैं।
           अतः यह तीनों आपस में मिलकर एक पारिस्थितिक तंत्र का निर्माण करते हैं। मनुष्य भी इस पारिस्थितिकी तंत्र का एक अभिन्न अंग है। मनुष्य वनों को जब अपने लाभ के लिए काटता है तो वह पारिस्थितिक तंत्र में बदलाव लाता है तथा अपने भौतिक वातावरण की गुणवत्ता में गिरावट लाता है इससे पेड़-पौधों, जड़ी-बूटियों एवं जीव-जंतुओं की कई प्रजातियाँ लुप्त हो गई है या लुप्त होने के कगार पर पहुँच गया है। इस प्रकार हमारे अस्तित्व के लिए वनस्पति जगत एवं प्राणी जगत अति आवश्यक है।
 
मानचित्र कौशल
 
भारत में मानचित्र पर निम्नलिखित को प्रदर्शित करें-
 
(1) भारत के वनस्पति प्रदेश
उत्तर-
(2) भारत के 14 जीव मंडल निचय

उत्तर –


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अध्याय 4 जलवायु

 खण्ड (अ)  अध्याय 4 जलवायु  

बिहार बोर्ड के 9वीं कक्षा का भूगोल विषय का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

सरल एवं आसान शब्दों में उत्तर देना सीखें



 
अध्याय 4 जलवायु
1. वस्तुननिष्ठ प्रश्नोत्तर
1. जाड़े में तमिलनाडु के तटीय भागों में वर्षा का क्या कारण है?
(क) दक्षिण-पश्चिम मॉनसून
(ख) उत्तर-पूर्वी मॉनसून
(ग) शीतोष्ण कटिबन्धीय चक्रवात
(घ) स्थानीय वायु परिसंचरण
उत्तर- (ख) उत्तर-पूर्वी मॉनसून
2. दक्षिण भारत के सन्दर्भ में कौन-सा तथ्य गलत है?
(क) दैनिक तापांतर कम होता है।
(ख) वार्षिक तापांतर कम होता है।
(ग) तापांतर वर्ष भर कम रहता है।
(घ) विषम जलवायु पायी जाती है।
उत्तर- (ग) तापांतर वर्ष भर कम रहता है।
3. जब सूर्य कर्क रेखा पर सीधा चमकता है, तो उसका क्या प्रभाव होता है?
(क) उत्तरी पश्चिमी भारत में उच्च वायुदाब रहता है।
(ख) उत्तरी पश्चिमी भारत में निम्न वायुदाब रहता है।
(ग) उत्तरी पश्चिमी भारत में तापमान एवं वायुदाब में कोई परिवर्तन नहीं होता है।
(घ) उत्तरी पश्चिमी भारत में मॉनसून लौटने लगता है।
उत्तर- (ख) उत्तरी पश्चिमी भारत में निम्न वायुदाब रहता है।
4. विश्व में सबसे अधिक वर्षा किस स्थान पर होती है?
(क) सिलचर
(ख) चेरापूँजी
(ग) मौसिमराम
(घ) गुवाहाटी
उत्तर- (ग) मौसिमराम
5. मई महीने में पश्चिम बंगाल में चलने वाली धूल भरी आंधी को क्या कहते है?
(क) लू
(ख) व्यापारिक पवन
(ग) काल वैशाखी
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर- (ग) काल वैशाखी
6. भारत में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून का आगमन कब होता है?
(क) 1 मई से
(ख) 1 जून से
(ग) 1 जुलाई से
(घ) 1 अगस्त से
उत्तर- (ख) 1 जुलाई से
7. जाड़े में सबसे ज्यादा ठंडा कहाँ पड़ता है?
(क) गुलमर्ग
(ख) पहलगाँव
(ग) खिलनमर्ग
(घ) जम्मू
उत्तर- (ग) खिलनमर्ग
8. उत्तर -पश्चिमी भारत में शीतकालीन वर्षा का क्या कारण है?
(क) ऊत्तर-पूर्वी मॉनसून
(ख) दक्षिण-पश्चिम मॉनसून
(ग) पश्चिमी विक्षोभ
(घ) उष्ण कटिबंधीय चक्रवात
उत्तर- (ग) पश्चिमी विक्षोभ
9. ग्रीष्म ऋतु का कौन स्थानीय तूफान है जो कहवा की खेती के लिए उपयोगी होती है?
(क) आम्र वर्षा
(ख) फूलों वाली बौछार
(ग) काल वैशाखी
(घ) लू
उत्तर- (ख) फूलों वाली बौछार
2. कोष्टक में से सही शब्द चुनकर रिक्त स्थानों को भरें।
(क) जनवरी में चेन्नई का तापमान कोलकाता से अधिक रहता है।
(ख) उत्तर भारत में वर्षा पूरब की अपेक्षा पश्चिम की ओर अधिक होती है।
(ग) मानसून शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम अरब के नागरिकों ने किया था।
(घ) पश्चिम घाट पहाड़ के पश्चिमी भाग में अधिक वर्षा होती है।
(ड़) पर्वत का पवन विमुख भाग वृष्टि छाया का प्रदेश होता है।
3. निम्नलिखित के भौगोलिक कारण बताइए-
(क) पश्चिमी राजस्थान एक मरुस्थल है।
उत्तर- पश्चिमी राजस्थान एक मरुस्थल है जिसके मुख्य कारण है –
◆ अरावली पर्वत की दिशा पवनों के समानांतर होना, और
◆ पाकिस्तान से आने वाली गर्म एवं शुष्क हवाएँ न केवल अरब सागर की मानसूनी पवनों को ऊपर उठने से रोकती है, बल्कि नमी को भी कम कर देती है। इससे इन हवाओं की वर्षा करने की शक्ति और भी कम हो जाती है।
(ख) तमिलनाडु में जाड़े में वर्षा होती है।
उत्तर – तमिलनाडु में लौटती मानसून तथा उत्तरी पूर्वी मानसून से जाड़े में वर्षा होती है। जनवरी-फरवरी में उत्तरी पूर्वी शुष्क हवाएँ बंगाल की खाड़ी से गुजरती हुई जलवाष्प ग्रहण कर भारत के दक्षिण पूर्वी भाग में (तमिलनाडु) वर्षा करती है। इस वर्षा से वहाँ जाड़ें में चावल की कृषि होती है।
(ग) भारतीय कृषि मॉनसून के साथ जुआ है।
उत्तर –  भारतीय मानसून कभी पहले और कभी देर से आती है। कभी अतिवृष्टि एवं कभी अनावृष्टि लाती है। फलत: फसलें प्रभावित होती है तथा बाढ़ एवं सूखा जैसी आपदाएँ लाती है। यही कारण है कि भारतीय कृषि मानसून के साथ जुआ है।
(घ) मौसिनराम में विश्व की सर्वाधिक वर्षा होती है।
उत्तर – मौसिनराम में विश्व की सर्वाधिक वर्षा (1140सेमी०) होती है क्योंकि यहाँ गारो, खासी, जयंतिया पहाड़ियाँ कीपनुमा आकृति में फैली है एवं समुद्र की ओर से खुली हुई है। अतः बंगाल की खाड़ी से आने वाली हवाएँ अधिक वर्षा लाती है। 
(ड़) ऊटी में सालोभर तापमान काफी नीचे रहता है।
उत्तर – चूँकि हम जानते है कि जैसे-जैसे समुद्र तल से धरातल की ऊँचाई बढ़ती जाती है, वायुमंडल विरल होता जाता है तथा तापमान घटता जाता है। यही कारण है कि निम्न अक्षांश में स्थित उटकमंड अर्थात ऊटी (तमिलनाडु) में तापमान काफी कम रहता है। इसीलिए यहाँ गर्मी में काफी संख्या में पर्यटक भी आते हैं।
लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर 
4. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें।
(क) जाड़े के दिनों में भारत में कहाँ-कहाँ वर्षा होती है?
उत्तर – जाड़े के दिनों में भारत में दो क्षेत्रों में वर्षा होती है- एक उत्तरी-पश्चिमी भाग (राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश तथा बिहार) तथा दूसरा दक्षिण-पूर्वी तटीय भाग में (तमिलनाडु कथा केरल)।
              उत्तर-पश्चिम भारत में चक्रवातीय वर्षा होती है जो दिसंबर से मार्च तक पूर्वी भूमध्य सागर से इराक, ईरान तथा पाकिस्तान के रास्ते भारत पहुँचती है। यह वर्ष मात्र 3 से 6 सेंटीमीटर ही होती है। पर रबी फसलों के लिए काफी लाभदायक होती है। जनवरी-फरवरी में उत्तरी पूर्वी शुष्क हवाएँ बंगाल की खाड़ी से गुजरती हुई जलवाष्प ग्रहण कर भारत के दक्षिण पूर्वी भाग में (तमिलनाडु) वर्षा करती है। इस वर्षा से वहाँ जाड़ें में चावल की कृषि होती है।
(ख) फेरेल का क्या नियम है?
उत्तर – फेरेल के नियम के अनुसार उत्तरी गोलार्ध में चलने वाली पवन दाहिनी ओर एवं दक्षिणी गोलार्ध में चलने वाली पवन बायीं ओर मुड़ जाती है। ऐसा विषुवत रेखा पर घूर्णन की गति तेज एवं ध्रुवों पर धीमी होने के कारण होता है।
(ग) जेट स्ट्रीम क्या है?
उत्तर – क्षोभ मंडल की ऊपरी परतों में अर्थात क्षोभ सीमा के समीप पश्चिम से पूर्व की ओर अत्यंत तीव्र गति से चलने वाली पवन धाराओं को जेट स्ट्रीम कहा जाता है। यह पवन धाराएँ 6000 से 12000 मीटर की ऊँचाई के बीच दोनों ही गोलार्द्धों के चारों ओर वर्ष भर निरंतर प्रवाहित होती रहती है।
             भारतीय मानसून की उत्पत्ति पर उष्ण पूर्वी जेट एवं उपोष्ण जेट का प्रभाव पड़ता है।
(घ) भारतीय मॉनसून की तीन प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
उत्तर – भारतीय मॉनसून की तीन प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित है –
(i) मानसून वर्षा भू-आकृति द्वारा नियंत्रित होती है।
(ii) भारत की कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था में मानसून का महत्वपूर्ण योगदान है।
(iii) मानसून कभी पहले और कभी देर से आती है। कभी अतिवृष्टि एवं कभी अनावृष्टि लाती है। फलत: फसलें प्रभावित होती है तथा बाढ़ एवं सूखा जैसी आपदाएँ लाती है।
(ड़) लू से आप क्या समझते हैं?
उत्तर – ग्रीष्म ऋतु में उत्तर व उत्तर-पश्चिमी भारत में चलने वाले प्रबल गर्म हवाओं को लू कहा जाता है। 
(च) मॉनसून का विस्फोट क्या ह ?
उत्तर – जून के प्रारंभ में जब संपूर्ण उत्तरी भारत में अत्यधिक निम्न वायुदाब का क्षेत्र उपस्थित होता है। तब हिंद महासागर की ओर से दक्षिणी-पश्चिमी मानसून द्वारा अचानक तेज गरज एवं चमक के साथ होने वाली वर्षा मानसून का विस्टफोट या फटना कहलाता है।
(छ) भारत के अत्यधिक गर्म एवं ठंडे क्षेत्रों के नाम बताइए।
उत्तर – भारत का सबसे गर्म स्थान राजस्थान स्थित गंगानगर (55℃) एवं सबसे ठंडे स्थान कश्मीर के द्रास (-45℃) है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर
(क) भारत की मॉनसूनी जलवायु के क्षेत्रीय विभिन्नताओं को सोदाहरण समझाइए।
उत्तर – भारत के विभिन्न भागों में मानसूनी वर्षा की मात्रा में काफी अंतर पाया जाता है एक ओर जहाँ मासिनराम जैसे स्थान पर 1141 सें०मी० वर्षा होती है तो वहीं दूसरी ओर थार एवं लद्दाख के मरुस्थल में वर्षा की मात्रा मात्र 25 सेंटीमीटर से भी कम होती है। अधिक वर्षा के क्षेत्रों में विभिन्नता कम एवं कम वर्षा के क्षेत्रों में विभिन्नता और अधिक पाई जाती है। 
                     ऐसा पाया गया है कि 10 वर्षों में केवल दो वर्ष ही मानसून समय पर आकर समय पर समाप्त होता है। मानसूनी वर्षा भी निरंतर नहीं होती बल्कि इसमें अंतराल पाया जाता है। अगस्त के महीने में यह अंतराल काफी लंबा हो जाता है। यूं तो मानसून की अवधि 4 महीने है परंतु इन 4 महीनों में वास्तविक वर्षा के दिन 40 से 45 के बीच होते हैं। भारत का अधिकांश भाग कुल वर्ष का 80% इसी समय प्राप्त करता है। वर्षा इतनी मूसलाधार होती है कि अक्सर कहा जाता है कि मानसूनी वर्षा में बादल जल बरसाते नहीं बल्कि उड़ेलते हैं।   जिन भागों में मानसून सबसे पहले आता है वहाँ वह सबसे अधिक समय तक रहता है एवं जहाँ देर से पहुँचता है वहाँ से जल्दी लौट जाता है। केरल में मानसून की अवधि 5 जून से 30 नवंबर है, जबकि पंजाब के मैदान में यही अवधि 1 जुलाई से 30 सितंबर है।
                     इस प्रकार कहा जा सकता है कि भारत की मानसूनी जलवायु में क्षेत्रीय विभिन्नता अत्यधिक पाई जाती है।
(ख) भारत में कितनी ऋतुएँ में पाई जाती है ? किसी एक का भौगोलिक विवरण दीजिए ।
उत्तर – भौगोलिक दृष्टि से तथा मौसम विभाग के अनुसार भारत में मुख्यत: निम्नलिखित चार ऋतुएँ ही है –
(i) शीत ऋतु – मध्य नवंबर से मध्य मार्च तक।
(ii) ग्रीष्म ऋतु – मध्य मार्च से मध्य जून तक।
(iii) वर्षा ऋतु – मध्य जून से मध्य सितंबर तक तथा
(iv) लौटती मानसून ऋतु – मध्य सितंबर से 30 नवंबर तक।
(ii) ग्रीष्म ऋतु – जैसे-जैसे सूर्य की किरणें उत्तर की ओर लम्बवत होते जाती है, भारत में गर्मी बढ़ती जाती है। जून तक सूर्य कर्क रेखा के ऊपर लंबवत हो जाती है जिससे भारत में प्रचंड गर्मी पड़ने लगती है। दक्षिण भारत के पठारों की ऊँचाई तथा समुद्र की निकटता के कारण तापमान कम रहता है किंतु उत्तर भारत में औसत तापमान मई में 38℃ से अधिक रहता है। दिन का तापमान तो 40℃ तक चला जाता है। हवा अत्यंत शुष्क हो जाती है। आकाश में बादलों का नामोनिशान नहीं रहता वनस्पति, तलाब, कुआँ आदी सूख जाते हैं। दक्षिणी भारत की अधिकतर नदियाँ जल की एक रेखा मात्र रह जाती है। सामान्यत: उत्तर भारत, दक्षिण भारत की अपेक्षा जाड़ें में ज्यादा ठंडा तथा गर्मी में ज्यादा गर्म रहता है। तिरुअनंतपुरम का वार्षिक तापांतर केवल 2.8℃ है।जबकि दिल्ली का तपांतर 30℃ हो जाता है।
              भारत के दक्षिण पश्चिम तटीय भाग में हवा अरब सागर की ओर से आती है जिससे वर्षा होती है किंतु देश के अन्य भागों का मौसम शुष्क रहता है। इस समय उत्तर भारत में चलने वाली पछुआ हवा अत्यंत गर्म एवं शुष्क होती है। जिसे ‘लू’ कहते हैं। इसी समय बिहार एवं पश्चिम बंगाल के आस-पास धूल भरी आँधी चलती है। पश्चिम बंगाल में इसे नॉर्वेस्टर या काल बैसाखी कहा जाता है। यह प्रायः शाम के 3:00 बजे के आस-पास आती है तथा थोड़ी वर्षा भी करती है। इस वर्षा से असम के चाय की फसल को काफी लाभ मिलता है। इससे आम की फसल को काफी नुकसान पहुँचता है। अतः इन आँधियों को कर्नाटक में “आम की बौछार” भी कहा जाता है। 
(ग) भारत की जलवायु के मुख्य कारकों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – भारत की जलवायु को नियंत्रित करने वाले कारकों के लिए एक शब्द LANDFORMS का प्रयोग किया जाता है। यह जलवायु को प्रभावित करते हैं –
L -Latitude (अक्षांश)
A -Altitude (ऊँचाई)
N -Nearness From Sea-(समुद्र से निकटता)
D – Direction of wind (पवन की दिशा)
F -Forest (वन)
O -Ocean Current (सामुद्रिक जलधारा)
R – Rainfall (वर्षा)
M -Mountain(पहाड़/पर्वत)
S -Soil(मिट्टी)
           
          सौर किरणों के सीधा या तिरछा होने पर सौर ऊर्जा की मात्रा में अंतर हो जाता है। सूर्य की किरणें निम्न अक्षांशों ऊपर सीधी तथा उच्च अक्षांशों पर  तिरछी पड़ती है। यही कारण है कि वविषुवत रेखा से ध्रुवों की ओर बढ़ने पर तापमान घटता जाता है। जैसे-जैसे समुद्र तल से धरातल की ऊँचाई बढ़ती जाती है, वायुमंडल विरल होता जाता है तथा तापमान घटता जाता है। यही कारण है कि निम्न अक्षांश में स्थित उटकमंड अर्थात ऊटी (तमिलनाडु) में तापमान काफी कम रहता है और गर्मी में काफी संख्या में पर्यटक यहाँ आते हैं। कहीं भी तापमान बढ़ने पर वायुदाब घटता है तथा तापमान घटने पर वायुदाब बढ़ता है।
     
            पवन उच्च वायुदाब से निम्न वायुदाब की ओर बहने लगते हैं। ऐसे में यदि जल भाग से पवन आते हैं तो उसमें पर्याप्त नमी होती है जिससे वर्षा होती है किंतु स्थल भाग से आने वाले पवन शुष्क होते हैं। जलवायु को समुद्र निश्चित रूप से प्रभावित करता है। जल देर से गर्म एवं देर से ठंडा होता है। अतः समुद्र तटीय भाग जाड़ें में ज्यादा ठंडी नहीं होता और गर्मी में ज्यादा गर्म भी नहीं होता। किंतु स्थल भाग जल्द गर्म एवं जल्द ठंडा हो जाता है। अतः महाद्वीप का मध्य भाग जाड़ें में अति ठंडा तथा गर्मी में अति गर्म हो जाता है। 
             समुद्र के नजदीक वाले भूभाग में सम तथा समुद्र से दूर के भू-भाग विषम जलवायु पायी जाती है। गर्म या ठंडी सामुद्रिक जलधाराएँ जिस तरह से गुजरती है उसे प्रभावित करती है। ऊँचे पर्वत वाष्पयुक्त पवन को रोककर कराता है जिससे पौनोभिमुख भाग में मूसलाधार पर्वतीय वर्षा होती है पर पर्वत के पीछे वाला पवनोविमुख भाग वर्षा से बंचित रह जाता है जिसे वृष्टि छाया प्रदेश का कहा जाता है। वन बादल को आकर्षित करता है तथा सूर्य के प्रखर किरणों से बचाता है। मिट्टी के प्रकार भी तापमान को प्रभावित करते हैं। बलुई या कांकड़ीली मिट्टी जल्द गर्म होकर तापमान में वृद्धि करते हैं पर चिकनी या जलोढ़ मिट्टी जल्द गर्भ नहीं होता है।
(घ) जेट धाराएँ क्या है तथा भारतीय जलवायु पर उसका क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर – जेट धाराएँ एक संकरी पट्टी में स्थित एवं क्षोभमंडल में अत्यधिक ऊँचाई (12000 मीटर से अधिक) वाले पश्चिमी हवाएँ होती है। इनकी गति गर्मी में 110 कि०मी० प्रति घंटा एवं सर्दी में 184 कि०मी० प्रति घंटा होती है। बहुत सी अलग-अलग जीत धाराओं को पहचाना गया है। उनमें सबसे स्थिर मध्य अक्षांशीय एवं उपोष्ण कटिबंधीय जेट धाराएँ हैं।
        जेट धाराएँ लगभग 27° से 30° उत्तरी अक्षांश के बीच स्थित होती है, इसलिए इन्हें उपोष्ण कटिबंधीय पश्चिमी जेट धाराएँ कहा जाता है। भारत में ये जेट धाराएँ ग्रीष्म ऋतु को छोड़कर पूरे वर्ष हिमालय के दक्षिण में प्रवाहित होती है। इस पश्चिमी प्रवाह के द्वारा देश के उत्तर एवं उत्तर-पश्चिमी भाग में पश्चिमी चक्रवाती वीक्षोभ आते हैं। गर्मियों में सूर्य की आभासी गति के साथ ही उपोष्ण कटिबंधीय पश्चिमी जेट धारा हिमालय के उत्तर में चली जाती है। एक पूर्वी जेट धारा जिसे उपोष्ण कटिबंधीय पूर्वी जेट धारा कहा जाता है गर्मी के महीनों में प्रायद्वीपीय भारत के ऊपर लगभग 14° उत्तरी अक्षांश में प्रवाहित होती है।
(ड़) भारत में होने वाली मानसूनी वर्षा एवं उसकी विशेषताओं को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर- अरबी शब्द मौसिम (ऋतु) से मॉनसून शब्द की उत्पति हुई है। इस शब्द का उपयोग सर्प्रथम अरब के नाविक अरब सागर में चलने वाली उन हवाओं के लिए किया करते थे जो ऋतु के बदलते ही अपनी दिशा भी लेते थे। भारत में बोल-चाल की भाषा में मानसून का अर्थ वर्षा से है। अच्छा मानसून का अर्थ अच्छी वर्षा से है। भारत में इन हवाओं की दिशा 6 माह दक्षिण-पश्चिम और 6 माह उत्तर-पूरब रहती है। अतः इन्हें क्रमशः दक्षिण-पश्चिम मॉनसून तथा उत्तर-पूर्व मानसून कहा जाता है। भारतीय मानसून की विशेषताएँ निम्नलिखित है-
◆ दक्षिण-पश्चिम मानसून की वर्षा मौसमी है जो जून से सितंबर तक होती है।
◆समुद्र से दूरी बढ़ने पर वर्षा की मात्रा घटती हैं। कोलकाता में 162.5 सेमी०, पटना में 135 सेमी० इलाहाबाद में 100 सेमी० तथा दिल्ली में केवल 67 सेमी० वर्षा होती है।
◆ मानसून वर्षा भू-आकृति द्वारा नियंत्रित होती है।
◆ गर्मी में वर्षा मूसलाधार होती है जिससे पानी का बहाव बढ़ जाता है और मृदा अपरदन की गति तेज हो जाती है। कई क्षेत्र बाढ़ के चपेट में आ जाते हैं।
◆ भारत की कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था में मानसून का महत्वपूर्ण योगदान है।
◆ मानसूनी वर्षा का भारत में वितरण अससमान है जो औसत 12 सेमी० से 1180 सेमी० के बीच पाया जाता है। 
◆ मानसून कभी पहले और कभी देर से आती है। कभी अतिवृष्टि एवं कभी अनावृष्टि लाती है। फलत: फसलें प्रभावित होती है तथा बाढ़ एवं सूखा जैसी आपदाएँ लाती है।
(च) एल नीनो एवं ला निना में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – एल नीनो-
           एल नीनो स्पेनिश शब्द है जिसका अर्थ शिशु(Child) है। वास्तव में एल नीनो एक गर्म जलधारा है जो दक्षिण अमेरिका के पेरू एवं इक्वाडोर देशों के प्रशांत तटीय भाग में 3 से 7 वर्ष के अंतराल पर उत्पन्न होती है। इस गर्म जलधारा के कारण जल का तापमान अचानक 5℃ से 10℃ तक बढ़ जाता है। यह जलधारा पूर्वी द्वीप समूह क्षेत्र में पहुँचती है तो वहाँ निम्न वायुदाब का क्षेत्र बन जाता है। इसके कारण दक्षिण-पश्चिम मानसून पवन का कुछ अंश इस निम्न दाब की ओर आकर्षित हो जाता है। परिणामस्वरूप उत्तरी भारत में सामान्य से कम वर्षा होती है तथा सूखे की समस्या उत्पन्न हो जाती है। 1987 का सूखा एल नीनो के कारण ही पड़ा था। ऐसा मौसम वैज्ञानिकों का कहना है दूसरी ओर जिस वर्ष यह गर्म जलधारा प्रकट नहीं होती उस वर्ष भारत में मानसून सामान्य रहता है तथा अच्छी वर्षा होती है और कभी-कभी बाढ़ उत्पन्न हो जाता है। एल नीनो के अध्ययन से मानसून का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है।
ला निना–
        इसकी उत्पत्ति भी कभी-कभी पेरू तट पर होती है। यह ठंडी जलधारा भी पूर्वी द्वीप समूह क्षेत्र में पहुँचकर वायुदाब को बढ़ा देती है। इस उच्च वायुदाब से चारों ओर आर्द्र हवाएँ चलती है। इसकी कुछ मात्रा भारत पहुँचकर दक्षिण-पश्चिम मानसून हवा में जल की मात्रा बढ़ा देती है जिससे सामान्य से अधिक वर्षा होती है। जिसके कारण अनेक भागों में बाढ़ की समस्या उत्पन्न हो जाती है। इसके कारण आस्ट्रेलिया, दक्षिण पूर्व एशिया तथा चीन में भी भारी वर्षा होती है।
नोट :- जलवायु को नियंत्रित करने वाले कारकों के लिए एक शब्द LANDFORMS का प्रयोग किया जाता है। यह जलवायु को प्रभावित करते हैं-
L -Latitude (अक्षांश)
A -Altitude (ऊँचाई)
N -Nearness From Sea-(समुद्र से निकटता)
D – Direction of wind (पवन की दिशा)
F -Forest (वन)
O -Ocean Current (सामुद्रिक जलधारा)
R – Rainfall (वर्षा)
M -Mountain(पहाड़/पर्वत)
S -Soil(मिट्टी)
6. मानचित्र कला
पूर्ण पृष्ठ पर भारत का मानचित्र बनाकर निम्नलिखित को दर्शाइए –
(क) 400 से.मी. से अधिक वर्षा का क्षेत्र।
उत्तर –
(ख) 200 से.मी. से कम वर्षा का क्षेत्र।
उत्तर – 
(ग) भारत में दक्षिण-पश्चिमी मॉनसून की दिशा।
उत्तर – 
(घ) शीतकालीन वर्षा वाले क्षेत्र।
उत्तर –
(ड़) चेरापूँजी, मौसिमराम, जोधपुर, मंगलोर, उंटी, नैनीताल।

उत्तर-


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वस्तुननिष्ठ प्रश्नोत्तर

1. लक्ष्मीसागर झील किस राज्य में स्थित है?
(क) मध्यप्रदेश
(ख) उत्तर प्रदेश
(ग) बिहार
(घ) झारखंड
उत्तर – (ग) बिहार 
2. निम्न में से कौन लवणीय झील है?
(क) वूलर
(ख) डल
(ग) सांभर
(घ) गोविंदसगर
उत्तर – (ग) सांभर
3. गंगा नदी पर गांधी सेतु किस शहर के निकट अवस्थित है?
(क) भागलपुर
(ख) कटिहार
(ग) पटना
(घ) गया
उत्तर – (ग) पटना
4. कौन-सी नदी भ्रंश घाटी से होकर बहती है?
(क) महानदी
(ख) कृष्णा
(ग) तापी
(घ) तुंगभद्रा
उत्तर – (ग) तापी
5. कौन-सी नदी प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लंबी नदी है?
(क) नर्मदा
(ख) गोदावरी
(ग) कृष्णा
(घ) महानदी
उत्तर – (ख) गोदावरी
6. सिंधु जल समझौता कब हुआ था?
(क) 1950
(ख) 1955
(ग) 1960
(घ) 1965
उत्तर – (ग) 1960
7. शांग-पो किस नदी का उपनाम है?
(क) गंगा
(ख) ब्रह्मपुत्र
(ग) सतलज
(घ) गोदावरी
उत्तर – (ख) ब्रह्मपुत्र
8. इनमें से गर्म जल का जल प्रपात कौन है?
(क) ककोलत
(ख) गरसोप्पा
(ग) ब्रह्मकुंड
(घ) शिवसमुद्रम
उत्तर – (ग) ब्रह्मकुंड 
9. कोसी नदी का उदगम स्थल है?
(क) गंगोत्री
(ख) मानसरोवर
(ग) गोसाईधाम
(घ) सतपुड़ा श्रेणी
उत्तर – (ग) गोसाईधाम
लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर 
1. जल विभाजक का क्या कार्य है ? एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर – दो दिशाओं में नदियों के प्रवाह को अलग करने वाले उच्च पर्वतीय/पठारी क्षेत्र को जल विभाजक कहा जाता है। अर्थात इसका मुख्य कार्य दो अपवाह बेसिनों को अलग करना है। सिंधु एवं गंगा नदी के मध्य अरावली के उच्च भूमि जल विभाजक का एक उदाहरण है। अरावली नगर गंगा एवं सिंधु के जल विभाजक पर बसा हुआ है। अरावली से सुंदरबन तक मैदान की लंबाई 1800 कि.मी. है। इसकी ढाल 1मीटर/प्रति6 कि.मी. की दर से सुंदरवन की तरफ घटता जाता है।
2.  भारत में सबसे विशाल नदी द्रोणी कौन सी है?
उत्तर – भारत में सबसे विशाल गंगा नदी द्रोणी  है। इसकी कुल लंबाई 2525 किलोमीटर है। 
3. सिंधु एवं गंगा नदियाँ कहाँ से निकलती है?
उत्तर – सिंधु नदी तिब्बत के समीप मानसरोवर झील से निकलकर दक्षिण-पश्चिम की ओर बहती हुई भारत में जम्मू कश्मीर के लद्दाख जिले में प्रवेश करती है। 
             गंगा नदी की मुख्यधारा भागीरथी की उत्पत्ति हिमालय स्थित गंगोत्री हिमानी के गोमुख से हुआ है। अलकनंदा उत्तराखंड स्थित देवप्रयाग में भागीरथी से मिल जाती है तथा गंगा नदी के नाम से प्रवाहित होती है। 
3. गंगा की दो प्रारंभिक धाराओं के नाम लिखिए? ये कहाँ पर एक-दूसरे से मिलकर गंगा नदी का निर्माण करती है?
उत्तर – गंगा नदी की पहली प्रारंभिक धारा भागीरथी तथा दूसरी प्रारम्भिक धारा अलकनंदा है। भागीरथी देवप्रयाग(उत्तराखंड) में अलकनंदा से मिलकर गंगा नदी का निर्माण करती है। 
5. लंबी धारा होने के बावजूद तिब्बत के क्षेत्रों में ब्रह्मपुत्र में कम गाद(शिल्ट) क्यों है?
उत्तर- लंबी धारा होने के बावजूद तिब्बत के क्षेत्रों में ब्रह्मपुत्र में कम गाद(सिल्ट) होती है क्योंकि ब्रह्मपुत्र का उद्गम क्षेत्र तिब्बत एक सीत एवं शुष्क क्षेत्र है जहाँ नदी के जल में सिल्ट की मात्रा नगन्य होती है।
6. कौन सी दो प्रायद्वीपीय नदियाँ धसान घाटी से होकर बहती है ? समुद्र में प्रवेश करने के पहले वे किस प्रकार की आकृतियों का निर्माण करती है ?
उत्तर- प्रायद्वीपीय भारत की दो नदियाँ नर्मदा और तापी धसान घाटी से होकर बहती है। समुद्र में प्रवेश करने से पहले ये दोनों नदियाँ  मुहाने पर ज्वारनदमुख का निर्माण करती है।
 
दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर
1. हिमालय तथा प्रायद्वीपीय भारत की नदियों की मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर – हिमालय की नदियों की मुख्य विशेषताएँ- हिमालय की अधिकांश नदियाँ बारहमासी अथवा स्थायी है। इन्हें वर्षा के जल के अतिरिक्त पर्वत की चोटियों पर जमें हिम के पिघलने से सालोंभर जलापूर्ति होती रहती है। सिंधु एवं ब्रह्मपुत्र जैसी भारत की प्रमुख नदियाँ हिमालय से निकलती है। इन नदियों ने प्रवाह के क्रम में पर्वतों को काटकर गॉर्ज का निर्माण किया है।
प्रायद्वीपीय भारत की नदियों की मुख्य विशेषताएँ- यहाँ के अधिकांश नदियाँ मौसमी है जिसका स्रोत वर्षा जल का है। ग्रीष्म ऋतु एवं शुष्क मौसम में जब वर्षा नहीं होती यहाँ की बड़ी-बड़ी नदियों का जलस्तर घटकर छोटी-छोटी धाराओं या नलिकाओं में परिणत हो जाता है। इनमें से कुछ नदियाँ पठारी भाग तथा पश्चिमी घाट पर्वत से निकलकर पश्चिम की ओर बहती हुई अरब सागर में गिरती है। किंतु, प्रायद्वीपीय भारत के अधिकांश नदियाँ पश्चिमी घाट से निकलकर बंगाल की खाड़ी में गिरती है। यह नदियाँ छिछली और कम लंबी है। यह नदियाँ अनेक जगहों पर जलप्रपात का निर्माण करती है। बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियों द्वारा डेल्टा और अरब सागर में गिरने वाली नदियों द्वारा ज्वारनदमुख(एश्चुअरी) का निर्माण होता है। 
2.  प्रायद्वीपीयपठार के पूर्व एवं पश्चिम की ओर प्रवाहित होने वाली नदियों की तुलना कीजिए।
उत्तर- प्रायद्वीपीयपठार के पूर्व एवं पश्चिम की ओर प्रवाहित होने वाली नदियों की तुलना इस प्रकार है-
(i) प्रायद्वीपीय पठार के पूर्व की ओर बहने वाली नदियों में मुख्यतः महानदी, गोदावरी, कृष्णा एवं कावेरी है जबकि पश्चिम की ओर बहने वाली नदियों में मुख्यतः नर्मदा एवं ताप्ती है।
(ii) पूर्व की ओर बहने वाली सभी नदियाँ बंगाल की खाड़ी में गिरती है जबकि पश्चिम की ओर बहने वाली सभी नदियाँ अरब सागर में गिरती है।
(iii) बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली सभी नदियाँ डेल्टा का निर्माण करती हैं जबकि अरब सागर में गिरने वाली नदियाँ ज्वारनदमुख/एस्चुयरी का निर्माण करती हैं।
(iv) पूर्व की ओर बहने वाली नदियों के मुहाने के निकट नदियों के गति धीमी रहती है जबकि पश्चिम की ओर बहने वाली नदियों के मुहाने के निकट नदियों की गति तीव्र होती है।
3. भारत की अर्थव्यवस्था में नदियों के महत्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर- नदी अपवाह क्षेत्र मानवीय सभ्यता एवं संस्कृति की जननी है। भारत के आर्थिक विकास में नदियों का स्थान महत्वपूर्ण रहा है। नदियाँ आदिकाल से ही मानव जीवन गतिविधियों का साधन रहा है। नदियाँ विभिन्न सभ्यताओं और संस्कृतियों की जन्मस्थली के साथ मानव सभ्यता का पालना भी है। नदियों के जलप्रपात जल विद्युत शक्ति उत्पादन केंद्र के साथ-साथ पर्यटन के आकर्षक केंद्र भी है। प्राचीन काल में सड़क एवं वायुमार्ग के साधन के अभाव में यह परिवहन का सर्वाधिक उपयुक्त साधन था। आज यहाँ राष्ट्रीय जलमार्ग का भी विकास हो रहा है। सामरिक दृष्टि से भी नदियाँ आज उपयोगी हो गई है।
          नदियों के प्रभाव की वजह से ही कृषि भूमि आज 40% भूभाग जलोढ़ मिट्टी से ढंका हुआ है। जो नदी घाटी डेल्टा और तटीय प्रदेशों में फैले हुए हैं। गंगा, सिंधु, गंगा-ब्रह्मपुत्र के डेल्टा एवं मैदानी क्षेत्र में जलोढ़ की प्रचुरता है। उत्तर बिहार में कोसी, बागमती और गंडक आदि नदियाँ प्रतिवर्ष बड़ी मात्रा में जलोढ़ का निक्षेप करती है जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी हुई है। 
4. भारत में झीलों के प्रकार का वर्णन उदाहरण सहित कीजिए।
उत्तर- निर्माण की दृष्टि से झीलों के निम्नांकित प्रकार है-
(i) धँसान घाटी झील- धँसान घाटी में जब जलजमाव होता है तब इस प्रकार का झील बन जाता है। अफ्रीका में इस प्रकार की झील की संख्या अधिक है। विक्टोरिया, रुडोल्फ, न्यासा इसके उदाहरण है। भारत में तिलैया बांध द्वारा धँसान घाटी में कृत्रिम झील बनाया गया है।
(ii) गोखुर झील- नदियों में जब अवसाद की मात्रा बढ़ जाती है या भूमि की ढाल कम हो जाती है तब उसके मार्ग में भी विसर्पण पैदा होने लगता है। अंततः विसर्पित भाग कटकर मुख्यधारा से अलग हो जाती है, जिसका आकार गाय के ‘खुर’ के समान होता है । इसे गोखुर या परित्यक्त झील भी कहा जाता है। उत्तरी बिहार में इस प्रकार के झील पाए जाते हैं । बेतिया का सरैयामान या बेगूसराय का कांवर झील इसके उदाहरण है।
(iii) क्रेटर झील- जब ज्वालामुखी के क्रेटर से राख और लावा का आना बंद हो जाता है तब क्रेटर में वर्षा का जल जमा होकर झील में परिणत हो जाता है। बोलिविया का टिटीकाका और टर्की का बॉन झील इसके उदाहरण है । भारत में लोनार झील इसी प्रकार से निर्मित हुआ है।
(iv) लैगून झील- स्पिट तथा रोधिका के द्वारा समुद्र तटीय प्रदेशों में जब समुद्री जल समुद्र से अलग कर लिए जाते हैं तब ऐसे झील लैगून कहलाते हैं । लैगून का उदाहरण भारत स्थित  चिल्का झील एवं पुलिकट झील है।
(v) अवरोधक झील- कभी-कभी पर्वतीय प्रदेशों में भूस्खलन के कारण चट्टानें गिरकर नदियों के प्रवाह को रोक देते हैं तो इससे भी झील बन जाते हैं इसे अवरोधक झील कहते हैं।
(vi) हिमानी झील- हिमालय क्षेत्र में हिमालय द्वारा निर्मित झीलों में नैनीताल, भीमताल, सातताल, आदि सुंदर उदाहरण है।

(vii) भूगर्भीय क्रिया से निर्मित झील- जम्मू कश्मीर में वूलर झील मीठे पानी की भारत की सबसे बड़ी झील है। जल विद्युत पैदा करने के लिए नदियों पर बांध लगाए जाने से भी झील का निर्माण हुआ है। जैसे-भाखड़ा-नांगल परियोजना के विकास से गोविंद सागर झील का निर्माण हुआ है। लोकटक एवं बड़यानी जैसे कई मीठे पानी की झील के साथ-साथ राजस्थान का लवण युक्त सांभर झील इसी प्रकार के झील हैं। प्रायः यह देखा गया है कि मरुस्थलीय अथवा अर्द्ध शुष्क क्षेत्रों में झील खारे पानी की झील होते हैं जबकि ठंडे प्रदेशों के तथा पर्वतीय प्रदेशों के झूलों का जल मीठा होता है।


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