Archives July 2022

अध्याय 2 भौतिक स्वरूप एवं उच्चावच

खण्ड (अ) अध्याय 2 भौतिक स्वरूप एवं उच्चावच

बिहार बोर्ड के 9वीं कक्षा का भूगोल विषय का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

सरल एवं आसान शब्दों में उत्तर देना सीखें


अध्याय 2 भौतिक स्वरूप एवं उच्चावच

अध्याय 2 भौतिक स्वरूप

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

1. निम्नलिखित में से कौन-सी चोटी भारत में स्थित नहीं है?
(क) के2
(ख) कामेट
(ग) माउण्ट एवरेस्ट
(घ) नंदादेवी
उत्तर- (ग) माउण्ट एवरेस्ट
2. बिहार के उत्तर-पश्चिमी किनारे पर हिमालय की कौन-सी श्रेणी है?
(क) महान हिमालय
(ख) शिवालिक
(ग) मध्य हिमालय
(घ) पूर्वी हिमालय
उत्तर- (ख) शिवालिक
3. हिमालय के निर्माण में कौन-सा सिद्धांत सर्वमान्य है?
(क) महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत
(ख) भूमंडलीय गतिशीलता सिद्धांत
(ग) प्लेट विवर्तनिक सिद्धांत
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर- (ग) प्लेट विवर्तनिक सिद्धांत
4. सैडल चोटी की ऊँचाई है।
(क) 515 मी०
(ख) 460 मी०
(ग) 642 मी०
(घ) 738 मी०
उत्तर- (घ) 738 मी०
5. भारत का सबसे प्राचीन भूखंड है?
(क) प्रायद्वीपीय पठार
(ख) विशाल मैदान
(ग) उत्तर का पर्वतीय भाग
(घ) तटीय भाग
उत्तर- (क) प्रायद्वीपीय पठार
लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
1. हिमालय के तीन समांतर श्रेणिओं का नाम लिखें। 
उत्तर- हिमालय के तीन समांतर श्रेणिओं का नाम-
(i) महान या आंतरिक हिमालय या हिमाद्रि,
(ii) लघु हिमालय या मध्य हिमालय,
(iii) बाहरी हिमालय या उपहिमालय अथवा शिवालिक
2. काराकोरम के सबसे ऊँचे पर्वत शिखर का क्या नाम है?
उत्तर – काराकोरम के सबसे ऊँचे पर्वत शिखर के2 (माउंट गॉडविन ऑस्टिन) है।
3. कौन सा तटीय मैदान अपेक्षाकृत अधिक चौड़ा है?
उत्तर- पूर्वी तटीय मैदान पश्चिमी तटीय मैदान की अपेक्षा अधिक चौड़ा है। इसकी चौड़ाई 160 से 350 किलोमीटर तक है। यह भाग उत्तर में गंगा के मुहाने से दक्षिण में कन्याकुमारी (केमोरीन) अंतरीप तक फैला है। 
4. तटीय मैदान में स्थित तीन झीलों का नाम लिखें।
उत्तर – तटीय मैदान में स्थित तीन झीलों का नाम- चिल्का झील(उड़ीसा), पुलिकट झील(तमिलनाडु) तथा बेम्बनाड झील (केरल) है।
5. पश्चिमी घाट पर्वत का दूसरा नाम क्या है ?
उत्तर – पश्चिमी घाट पर्वत का दूसरा नाम सह्याद्रि है। 
6. मध्य गंगा के मैदान की चार विशेषताएँ बताएँ।
उत्तर- मध्य गंगा के मैदान की चार विशेषताएँ निम्नलिखित है-
(i) यह मैदान जलोढ़ मिट्टी से बना है।
(ii) यह मैदान कृषि कार्यों के लिए काफी उपयुक्त है।
(iii) यह मैदान समुद्र तल से 240 मीटर तक ऊँचा है। 
(iv) इसका विस्तार उत्तर भारत के उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड के कुछ भाग तथा पश्चिम बंगाल राज्यों में फैला है।
7. हिमालय और प्रायद्वीपीय पर्वतों के दो प्रमुख अंतर बताएँ। 
उत्तर – हिमालय और प्रायद्वीपीय पर्वतों के दो प्रमुख अंतर निम्नलिखित है-
(i) हिमालय पर्वतों की औसत ऊंचाई 6100 मीटर है जबकि प्रायद्वीपीय पठारों की औसत ऊंचाई 600 से 900 मीटर है।
(ii) हिमालय पर्वत अर्धवृत्त(चाप) के रूप में फैला हुआ है जबकि प्रायद्वीपीय पठार त्रिभुजाकार आकृति के रूप में फैला हुआ है।
8. ‘खादर’ तथा ‘बांगर’ किसे कहते हैं?
उत्तर- खादर- नई जलोढ़ मिट्टी को खादर कहा जाता है।
यह काफी उपजाऊ मिट्टी होती है। यहाँ गहन कृषि कार्य किया जाता है।
बांगर- पुरानी जलोढ़ मिट्टी को बांगर कहा जाता है । यह अपेक्षाकृत कम उपजाऊ मिट्टी होती है । इस क्षेत्र की मृदा में चुनेदार निक्षेप पाया जाता है। 
9. पूर्वी घाट तथा पश्चिमी घाट में अंतर बताएँ।
उत्तर- पूर्वी घाट तथा पश्चिमी घाट में निम्नलिखित अंतर  है- 
(i) पूर्वी तटीय मैदान पश्चिमी तटीय मैदान की अपेक्षा अधिक चौड़ा है।
(ii) पूर्वी तटीय मैदान के उत्तरी भाग को गोलकुंडा तट तथा दक्षिणी भाग को कोरोमंडल तट कहते हैं जबकि पश्चिमी तटीय मैदान के उत्तरी भाग को कोंकण तथा दक्षिणी भाग को मालाबार तटीय मैदान कहते हैं।
(iii) पूर्वी तटीय मैदान की औसत चौराई 160 से 350 किलोमीटर तक है जबकि पश्चिमी तटीय मैदान की औसत चौड़ाई 10.60 किलोमीटर के मध्य है।
(iv) पूर्वी तटीय मैदान उत्तर में गंगा के मुहाने से दक्षिण में कन्याकुमारी अंतरीप तक फैला है जबकि पश्चिमी तटीय मैदान उत्तर में खंभात की खाड़ी से लेकर दक्षिण में कन्याकुमारी अंतरिप तक फैला है।
(v) पूर्वी तटीय मैदान की सभी नदियाँ मुहाने पर डेल्टा का निर्माण करती है जबकि पश्चिमी तटीय मैदान की सभी नदियाँ  ज्वारनदमुख (एस्चुयरी) का निर्माण करती है।
  
दीर्घ उत्तरीय  प्रश्नोत्तर
1. उत्तर के विशाल मैदान के विशेषताओं को लिखें।
उत्तर- उत्तर के विशाल मैदान के निम्नलिखित विशेषताएँ हैं-
(i) हिमालय पर्वत के दक्षिण और दक्षिणी पठार के उत्तर तीन प्रमुख नदी प्रणालियों (सिंधु, गंगा एवं ब्रह्मपुत्र) और उसकी सहायक नदियों से बना यह विशाल मैदान सिंधु-गंगा-ब्रह्मपुत्र का मैदान कहलाता है।
(ii) यह मैदान जलोढ़ मिट्टी से बना हुआ काफी उपजाऊ है।
(iii) यह भारत का ही नहीं बल्कि विश्व का सबसे अधिक उपजाऊ और सघन जनसंख्या वाला मैदान है।
(iv) यह 700000 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्रफल में फैला हुआ है।
(v) पूरब से पश्चिम इसकी लंबाई लगभग 2400 किलोमीटर है तथा 150 से 500 किलोमीटर चौड़ा है।
(vi) पश्चिमी मैदान का ढाल उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम और पूर्वी मैदान का ढाल उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूरब की ओर है।
(vii) इस विशाल मैदान को मोटे तौर पर चार उप-भागों में बाँटा गया है- पश्चिमी मैदान या पंजाब का मैदान, राजस्थान का मैदान, मध्यवर्ती मैदान या गंगा का मैदान तथा ब्रह्मपुत्र का मैदान या पूर्वी मैदान।
2. प्रायद्वीपीय पठार को विभाजित कर किसी एक की चर्चा विस्तार से करें।
उत्तर- प्रायद्वीपीय पठार को मुखयतः दो भागों में विभाजित किया गया है- 
(क) मध्य उच्चभूमि  तथा
(ख) दक्कन का पठार
(क) मध्य उच्चभूमि–   मध्य उच्च भूमि का अधिकांश भाग मालवा का पठार कहलाता है। यह पठारी भाग पूरब में महादेव श्रृंखला और उत्तर-पश्चिम में अरावली और मध्य में विंध्याचल श्रृंखला से घिरा हुआ है। इसके पश्चिम में राजस्थान का मरुस्थलीय क्षेत्र है। यहाँ बहने वाली नदियों में चंबल, सिंधु, बेतवा तथा केन है। इसकी ढाल दक्षिण-पश्चिम से उत्तर पूरब की ओर है। यह भाग पश्चिम में चौड़ा और पूर्व में संकीर्ण है। इसके पूर्वी विस्तार को स्थानीय रूप से बुलंडेलखंड तथा बघेलखंड के नाम से जाना जाता है। इसके सुदूर पूर्व के विस्तार को मुख्यतः दामोदर और स्वर्णरेखा नदियों द्वारा अपवाहित, छोटानागपुर का पठार कहा जाता है।
         विंध्याचल के दक्षिण में इन्हीं के समानांतर सतपुड़ा पर्वत तथा पूर्व में अमरकंटक और छोटानागपुर का पठार है। सतपुड़ा की 1350 मीटर ऊँची धूपगढ़ चोटी पंचमढ़ी पहाड़ी पर है। इस क्षेत्र में छोटानागपुर का पठार भी एक सुस्पष्ट पठारी इकाई है। इसका विस्तार बिहार राज्य के गया जिला के दक्षिणी सीमा तक है । इस पठारी भाग में बहने वाली नदियाँ दामोदर, सोन और स्वर्णरेखा है। इसका पश्चिमी मध्यवर्ती भाग 1100 मीटर ऊँचा है जो ‘पात क्षेत्र’ कहलाता है और छोटानागपुर का सबसे ऊँचा पठारी क्षेत्र है। रांची का पठार इसके पूर्व में है तथा इसकी ऊँचाई औसत 600 मीटर है। तीसरा पठार निचले हजारीबाग का पठार है जिसकी ऊँचाई औसत 300 मीटर है। यहाँ पारसनाथ की पहाड़ी 1365 मीटर ऊँची है।                                                                     
            सतपुड़ा पर्वत के दक्षिण में तापी की घाटी है। नर्मदा और तापी दोनों नदियाँ भ्रंश घाटीयों से होकर बहती है। अरावली की पहाड़ियाँ दक्षिण-पश्चिम में गुजरात से लेकर उत्तर-पूर्व में दिल्ली तक फैली है। दिल्ली के निकट इसे दिल्ली की पहाड़ियाँ कहते हैं। अरावली की औसत ऊँचाई 300.920 मीटर तक है किंतु दक्षिण-पश्चिम में आबू के निकट इनकी सबसे ऊँची चोटी माउंट आबू की गुरुशिखर 1722 मीटर ऊँचा है।
 
3. हिमालय पर्वत श्रृंखला की विशेषताओं का वर्णन करें।
उत्तर- भारत के उत्तरी सीमा पर फैला हिमालय पर्वत श्रेणी भूगर्भीय रूप से नवीन एवं बनावट के दृष्टिकोण से वलित  (मोड़दार) पर्वत श्रृंखला है। ये पर्वत श्रृंखलाएँ पश्चिम से पूर्व दिशा में सिंधु और ब्रह्मपुत्र के बीच करीब 2500 कि.मी. की लंबाई में अर्धवृत्त के रूप में फैला हुआ है। इसका क्षेत्रफल लगभग 5 लाख वर्ग कि.मी. है। यह विश्व की सबसे ऊंची पर्वत श्रेणी है। इसकी चौड़ाई कश्मीर में 500 कि.मी. एवं अरुणाचल प्रदेश में मात्र 160 कि.मी. है। पश्चिमी भाग की अपेक्षा पूर्वी भाग की ऊँचाई में अधिक विविधता पाई जाती है और इसकी तीन समानांतर श्रृंखलाएं हैं-
(i) महान या आंतरिक हिमालय या हिमाद्री-
          सबसे उत्तरी भाग में स्थित श्रृंखला को महान या आंतरिक हिमालय या हिमाद्री कहते हैं। यह सबसे अधिक सतत श्रृंखला है। इसकी औसत ऊंचाई 61 मीटर है। इस श्रृंखला की विशेषता यह है कि इसमें सर्वाधिक ऊँचे शिखर तथा हिमालय के सभी प्रमुख शिखर हैं । जैसे-माउंट एवरेस्ट, के2, कंचनजंगा, मकालू, धौलागिरी, नंगापर्वत, अन्नपूर्णा, कामेट, नामचा बरुआ, गुरुला मांधाता इत्यादि। 
                महान हिमालय का ऊपरी भाग हमेशा बर्फ से ढका रहता है तथा इससे बहुत से हिमानियों का प्रवाह होता है । जम्मू कश्मीर के उत्तर में कुछ अन्य पर्वत श्रेणियाँ भी फैली है। इनमें जास्कर पर्वत श्रेणी महान हिमालय का ही एक श्रेणी है। जास्कर के उत्तर में लद्दाख पर्वत श्रेणी है। हिमालय के उत्तर में काराकोरम पर्वत श्रेणी है जिसे ट्रांस हिमालय भी कहा जाता है। इसका शिखर के2 भारत का सबसे ऊँचा और संसार का दूसरा सबसे ऊँचा शिखर है। इसे गॉडविन ऑस्टिन तथा गौरीनंदा पर्वत के नाम से भी जाना जाता है। 
(ii) लघु हिमालय या मध्य हिमालय-
        महान हिमालय के समानांतर दक्षिण में स्थित श्रृंखला को लघु हिमालय अथवा मध्य हिमालय कहते हैं। यह हिमालय की सबसे अधिक कँटी-छँटी श्रृंखला है तथा इसका निर्माण अत्यधिक संपीड़न तथा परिवर्तित शैलों से हुआ है। इसकी ऊँचाई 1800 मीटर से 4500 मीटर के बीच तथा चौड़ाई 50 कि.मी. है। यहाँ की कुछ चोटियाँ 5000 मीटर से अधिक ऊँची है। नदियाँ 1000 मीटर तक गहरे गॉर्ज से होकर बहती है। शीत ऋतु में इस क्षेत्र में तीन चार महीने बर्फ गिरती है क्योंकि ग्रीष्म ऋतु में यहाँ मौसम शीतल और स्वास्थ्यवर्धक होता है। कश्मीर की पीरपंजाल श्रेणी इसी भाग में स्थित है। यहाँ के पर्यटन स्थलों में कश्मीर की घाटी शिमला, मसूरी, नैनीताल, दार्जिलिंग आदी है। यहाँ की सभी पर्वत श्रेणियाँ घनी सदाबहार वनों से ढके रहते हैं तथा इस क्षेत्र में कुछ घास के मैदान भी है जिसे कश्मीर में मर्ग जैसे-गुलमर्ग, खिलनमर्ग और सोनमर्ग कहते हैं।
(iii) शिवालिक- 
           हिमालय के सबसे दक्षिणी श्रृंखला को बाहरी हिमालय, उपहिमालय अथवा शिवालिक कहा जाता है। यह हिमालय की सबसे निचली श्रृंखला है। यह पश्चिम में पोतवार के पठार क्षेत्र से प्रारंभ होकर पूरब की ओर तीस्ता नदी तक फैला है। इसकी औसतन ऊँचाई 1200 कि.मी. है तथा चौड़ाई 10 से 50 कि.मी. है। यह हिमालय का सबसे नवीनतम पर्वतीय भाग है। इसमें कुछ विस्तृत घाटियाँ भी है जिन्हें दून या द्वार कहते हैं। जैसे- देहरादून, कोटलीदून एवं पाटलीदून, बुटवाल, कांगड़ाघाटी, अलीपुरद्वार इत्यादि।
         
          उपर्युक्त विभाजन के अतिरिक्त हिमालय को पश्चिम से पूर्व तक स्थित क्षेत्रों के आधार पर भी विभाजित किया गया है । इस वर्गीकरण को नदी घाटियों की सीमा के आधार पर किया गया है। उदाहरण के लिए सतलज एवं सिंधु के बीच स्थित हिमालय के भाग को पंजाब हिमालय के नाम से जाना जाता है। कश्मीर हिमालय भी इसी के अंतर्गत है। सतलज तथा काली नदियों के बीच स्थित हिमालय के भाग को कुमायुँ हिमालय के नाम से जाना जाता है। काली तथा तीस्ता नदियाँ नेपाल हिमालय का तथा दिहांग(ब्रह्मपुत्र) नदियाँ असम हिमालय का सीमांकन करती है।
 
ज्ञात करें
1. हिमालय में पायी जाने वाली प्रमुख हिमानियों एवं दर्रों के नाम।
उत्तर- हिमालय में पायी जाने वाली प्रमुख हिमानियाँ- गंगोत्री, यमुनोत्री, सियाचिन, बिआको, बतूरा इत्यादि।
हिमालय में पायी जाने वाली प्रमुख दर्रे- जोजिला, बुर्जिल, शिपकिला, नाथुला, जैलेप्ला इत्यादि।
2. भारत के उन राज्यों के नाम बताएँ जहाँ हिमालय के ऊँचे शिखर स्थित हैं।
उत्तर- के2(माउंट गॉडविन ऑस्टिन) – जम्मू कश्मीर
 कंचनजंगा- सिक्किम
नंगापर्वत- जम्मू-कश्मीर
कामेट- उत्तराखण्ड
नामचा बरुआ- अरुणाचल प्रदेश 
3. मसूरी, नैनीताल एवं रानीखेत की स्थिति बताएँ और राज्यों के नाम लिखें।
उत्तर- 
मसूरी(अक्षांश-30°45’N,देशांतर -78°08’E)-उत्तराखंड 
नैनीताल(अक्षांश-29°24’N,देशांतर-79°25’E)-उत्तराखंड 
रानीखेत(अक्षांश-29°40’N,देशांतर-79°33’E)-उत्तराखंड
4. विश्व का सबसे बड़ा नदी द्वीप माजुली किस नदी और किस राज्य में स्थित है?
उत्तर- विश्व का सबसे बड़ा नदी द्वीप माजुली ब्रह्मपुत्र नदी  असम राज्य में स्थित है।
5. भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी कहाँ स्थित है?

उत्तर- भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी बैरन द्वीप है जो अंडमान निकोबार द्वीप समूह में स्थित है।


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अध्याय 1 स्थिति एवं विस्तार

 खण्ड (अ) अध्याय 1 स्थिति एवं विस्तार

बिहार बोर्ड के 9वीं कक्षा का भूगोल विषय का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

सरल एवं आसान शब्दों में उत्तर देना सीखें 


अध्याय 1 स्थिति एवं विस्तार

 अध्याय 1 स्थिति

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

 1. क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का विश्व में कौन-सा स्थान है?
(क) 7 वाँ
(ख) 9 वाँ
(ग) 5 वाँ
(घ) 8 वाँ
उत्तर- (क) 7 वाँ
2. भारत के अक्षांशीय एवं देशांतरीय विस्तार में लगभग कितने डिग्री का अंतर है?
(क) 45°
(ख) 40°
(ग) 30°
(घ) 35°
उत्तर- (ग) 30°
3. भारत की मानक मध्यान्ह रेखा का मान है-
(क) 83°30′
(ख) 81°35′
(ग) 82°30′
(घ) 80°30′
उत्तर- (ग) 82°30′
4. भारत की स्थलीय सीमा रेखा तटीय सीमा रेखा के लगभग कितनी बड़ी है?
(क) आधी
(ख) दुगुनी
(ग) तिगुनी
(घ) चौगुनी
उत्तर- (ख) दुगुनी
5. भारत एवं चीन के बीच सीमा रेखा का नाम है?
(क) रेडक्लिफ लाइन
(ख) मैकमोहन रेखा
(ग) ग्रीनवीच लाइन
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर- (ख) मैकमोहन रेखा
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
(1) भारत का क्षेत्रफल 32.8 वर्ग किलोमीटर है जो विश्व के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 2.4 प्रतिशत है।
(2) भारत का मुख्य भूभाग 8°4′ उत्तर से 37°6′ उत्तर अक्षांश तथा  68°7′ पूर्व देशांतर से 97°25′ देशांतर तक है।
(3) भारत में कुल 28 राज्य एवं 9 केंद्र शासित प्रदेश हैं।
(4) श्रीलंका भारत से मन्नार की खाड़ी एवं पाक जलसंधि द्वारा अलग हुआ है।
(5) कोसी नदी को बिहार का शोक कहते हैं जो हिमालय के कैलाश पर्वत से निकलती है।
कारण बताओ-
(1) भारत का अक्षांशीय एवं देशांतरीय विस्तार लगभग समान है किंतु भूमि पर दोनों की वास्तविक दूरी समान नहीं है, क्यों?
उत्तर- भारत का अक्षांशीय एवं देशांतरीय विस्तार लगभग समान है किंतु भूमि पर दोनों की वास्तविक दूरी समान नहीं है क्योंकि पृथ्वी पर दो अक्षांशों के बीच की दूरी विषुवत रेखा से ध्रुव तक समान रहते हैं परंतु दो देशांतरों के बीच की दूरी जैसे-जैसे ध्रुव की ओर बढ़ते जाते हैं कम होती जाती है।
(2.) भारत के अरुणाचल प्रदेश के निवासी सौराष्ट्र के निवासियों की तुलना में सूर्योदय होने से 2 घंटा पहले ही  उठ जाते हैं, क्यों?
उत्तर- भारत के अरुणाचल प्रदेश के निवासी सौराष्ट्र के निवासियों की तुलना में सूर्योदय होने से 2 घंटा पहले ही उठ जाते हैं क्योंकि भारत में अरुणाचल प्रदेश और कच्छ के बीच स्थानीय समय में 2 घंटे का अंतर है। जब अरुणाचल प्रदेश में सूर्योदय होता है उस समय कच्छ में अंधेरा रहता है और वहाँ 2 घंटे बाद सूर्योदय होता है। ऐसा दोनों में 30° देशांतरीय विस्तार के कारण होता है।
          चूँकि  पृथ्वी 24 घंटे में 360° देशांतर घूम जाती है। अतः 1° देशांतर पार करने में पृथ्वी को 4 मिनट का समय लगता है। सौराष्ट्र और अरुणाचल प्रदेश के बीच 30° देशांतर का अंतर है। अतः 30°×4 मिनट = 120 मिनट यानी दो घंटा हुआ।
(3.) भारत के जम्मू-कश्मीर राज्य में जाड़े की ऋतु में जहाँ लोग गर्म कपड़ों में लिपटे रहते हैं वहीं दक्षिणी राज्य केरल के निवासी खुले बदन एवं लूंगी में रहते हैं, क्यों?
उत्तर- भारत का उत्तरी किनारा जम्मू-कश्मीर राज्य में है तथा 37°6′ अक्षांश रेखा इसके उत्तरी किनारे से गुजरती है। अतः विषुवत रेखा से यह काफी दूरी पर है तथा सूर्य की किरणें यहाँ अत्यंत तिरछी पड़ती है परिणामतः यहाँ सूर्य ताप कम मिलता है और जाड़े की ऋतु में अत्यधिक ठंडक पड़ती है। इसके विपरीत भारत का दक्षिणी भाग केरल और तमिलनाडु राज्य विषुवत रेखा के काफी निकट है। अतः यहाँ सूर्य की किरणें अपेक्षाकृत सीधी पड़ती है और सूर्य ताप अधिक मिलता है। इस तरह जाड़ें में जम्मू-कश्मीर में पुरुष गर्म कपड़े और चादरों में लिपटे रहते हैं वहीं केरल का किसान लुंगी पहने नगें बदन खेती करता है।
(4.) भारत की तटीय सीमा रेखा काफी लंबी है, क्यों?
उत्तर- भारत के प्रायद्वीपीय भाग तीनों ओर पूर्व में बंगाल की खाड़ी, पश्चिम में अरब सागर तथा दक्षिण में हिंद महासागर से घिरा हुआ है। इसी प्रायद्वीपीय आकार के कारण भारत की तटीय सीमा इतनी लंबी है तथा हिंद महासागर के मध्य भाग में स्थित है।
लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर-
(1.)  भौगोलिक क्षेत्रफल के दृष्टिकोण से भारत से बड़े सभी देशो का नाम क्रमवार से लिखें।
उत्तर- भौगोलिक क्षेत्रफल के दृष्टिकोण से भारत से बड़े सभी देशो का नाम क्रमवार से- 1.रूस  2.कनाडा  3.चीन 4.यू. एस. ए.  5.ब्राजील  6.ऑस्ट्रेलिया  7.भारत
(2.) बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में स्थित भारत के द्वीप समूह का नाम लिखें।
उत्तर- बंगाल की खाड़ी स्थित द्वीप समूह- अंडमान निकोबार द्वीप समूह।
अरब सागर में स्थित द्वीप समूह- लक्षद्वीप
(3.) भारत की स्थलीय सीमा रेखा को छूने वाले सभी पड़ोसी देशों का नाम लिखें।
उत्तर- भारत की स्थल सीमा 7 देशों को छूती है । इन देशों के नाम इस प्रकार है – पाकिस्तान, अफ़गानिस्तान, चीन, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश तथा म्यानमार।
(4.) भारत के कौन से राज्य अन्तर्राष्ट्रीय सीमा तथा समुद्र तट को स्पर्श नहीं करते हैं।
उत्तर- हरियाणा, दिल्ली, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ तथा झारखंड राज्य अन्तर्राष्ट्रीय सीमा तथा समुद्र तट को स्पर्श नहीं करते हैं।
(5.) जलसंधि किसे कहते है?
उत्तर-  जल का वह संकीर्ण हिस्सा जो दो बड़े जलाशयों अर्थात सागरों को जोड़ता है उसे जलसंधि कहते हैं।  
            जैसे- पाक जलसंधि भारत के तमिलनाडु राज्य और श्रीलंका के उत्तरीप्रान्त के जाफना जिले के बीच में स्थित एक जलसंधि है। यह जलसंधि पूर्वोत्तर में पाक खाड़ी को दक्षिण-पश्चिम में स्थित मन्नार की खाड़ी से जोड़ती है।
 
दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर-
(1.) भारत के अक्षांशीय एवं देशांतरीय विस्तार का इसके समय पर क्या प्रभाव पड़ता है? स्पष्ट करें।
उत्तर-  अक्षांशीय विस्तार का किसी भी देश के समय पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है इसके कारण केवल सर्दी गर्मी का प्रभाव पड़ता है। किसी भी देश के समय निर्धारण में केवल उस देश का  देशांतरीय विस्तार का प्रभाव पड़ता है भारत का अक्षांशीय एवं देशांतरीय विस्तार दोनों लगभग समान 30° है। 
       
       भारत में अरुणाचल प्रदेश और कच्छ के बीच स्थानीय समय में 2 घंटे का अंतर है। जब अरुणाचल प्रदेश में सूर्योदय होता है उस समय कच्छ में अंधेरा रहता है और वहाँ 2 घंटे बाद सूर्योदय होता है । ऐसा दोनों में 30°  देशांतरीय विस्तार के कारण होता है। 
                 
          चूँकि  पृथ्वी 24 घंटे में 360° देशांतर घूम जाती है। अतः 1° देशांतर पार करने में पृथ्वी को 4 मिनट का समय लगता है। सौराष्ट्र और अरुणाचल प्रदेश के बीच 30° देशांतर का अंतर है। अतः 30°×4 मिनट = 120 मिनट यानी दो घंटा हुआ।

                भारत की मानक देशांतर रेखा 82°30′ पूर्वी देशांतर है जो इलाहाबाद के नैनी से होकर गुजरती है। मानक मध्याह्न रेखा चुनते समय इस बात का ध्यान रखा जाता है कि वह देश के बीचो बीच से गुजरती हो तथा 7°30′ का गुणांक हो ताकि  7°30′ देशांतरीय दूरी पर स्थित स्थानों के बीच 30 मिनट का समयांतर हो।


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अध्याय-7. राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की जीवन रेखाएँ / NCERT CLASS 10 Geography Solutions (हिंदी माध्यम)

NCERT CLASS- 10 Geography Solutions

(हिंदी माध्यम) 

अध्याय- 7. राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की जीवन रेखाएँ



राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था

1. बहुवैकल्पिक प्रश्नोत्तर

1. निन्म में से कौन-से दो दूरस्थ स्थित स्थान पूर्वी-पश्चिमी गलियारे से जुड़े है?

(क) मुम्बई तथा नागपूर

(ख) मुम्बई और कोलकात्ता

(ग) सिलचर तथा मुम्बई

(घ) नागपूर तथा सिलीगुड़ी

उत्तर – (ग) सिलचर तथा मुम्बई

2. निन्मलिखित में से परिवहन का कौन-सा साधन वहनांरण हानियों तथा देरी को घटाता है?

(क) रेल परिवहन

(ख) पाइपलाइन

(ग) सड़क परिवहन

(घ) जल परिवहन

उत्तर –(ख) पाइपलाइन

3. निम्न में से कौन-सा राज्य हजीरा-विजयपुर-जगदीशपुर पाइप लाइन से नहीं जुड़ा है?

(क) मध्य प्रदेश

(ख) गुजरात

(ग) महाराष्ट्र

(घ) उत्तर प्रदेश

उत्तर – (ग) महाराष्ट्र

4. इनमें से कौन-सा पत्तन पूर्वी तट पर स्थित है जो अंत: स्थलीय तथा अधिकतम गहराई का पत्तन है तथा पूर्ण सुरक्षित है?

(क) चेन्नई

(ख) तूतीकोरिन

(ग) पारादीप

(घ) विशाखापत्तनम

उत्तर – (घ) विशाखापत्तनम

5. निन्म में से कौन-सा परिवहन साधन भारत में प्रमुख साधन है?

(क) पइपलाइन

(ख) सड़क परिवहन

(ग) रेल परिवहन

(घ) वायु परिवन

उत्तर – (ग) रेल परिवहन

6. निम्न में से कौन-सा शब्द दो या अधिक देशों के व्यापार को दर्शाता है-

(क) आन्तरिक व्यापार

(ख) बाहरी व्यापार

(ग) अन्तराष्ट्रीय व्यापार

(घ) स्थानिक व्यापार

उत्तर – (ग) अन्तराष्ट्रीय व्यापार

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए।

(i) सड़क परिवहन के तीन गुण बताएँ।

उत्तर-  सड़क परिवहन के तीन गुण निम्नलिखित है-

       ● अपेक्षाकृत कम व्यक्तियों, कम दूरी व कम वस्तुओं के परिवहन में सड़क मितव्ययी है।

       ●  रेलवे लाइन की अपेक्षा सड़कों की निर्माण लागत बहुत कम है।

       ●  सड़क परिवहन परिवहन, अन्य परिवहन साधनों के उपयोग में एक कड़ी के रूप में भी कार्य करता है, जैसे सड़कें, रेलवे स्टेशन, वायु व समुद्री पतनों को जोड़ती है।

(ii) रेल परिवहन कहाँ पर अत्यधिक सुविधाजनक परिवहन साधन है तथा क्यों?

उत्तर-  भारत में रेल परिवहन, वस्तुओं तथा यात्रियों के परिवहन का प्रमुख साधन है। रेल परिवहन अनेक कार्यों में सहायक है जैसे- व्यापार भ्रमण, तीर्थ यात्राएँ व लंबी दूरी तक समान का परिवहन आदी। भारत के उत्तरी मैदानों में रेल परिवहन अत्यधिक सुविधाजनक है क्योंकि उत्तरी मैदान अपनी विस्तृत समतल भूमि, सघन जनसंख्या घनत्व, संपन्न कृषि व प्रचुर संसाधनों के कारण रेल परिवहन के विकास व वृद्धि में सहायक रहा है। कुछ वर्ष पहले भारत के महत्वपूर्ण आर्थिक क्षेत्र में पश्चिमी तट के साथ कोंकण रेलवे के विकास ने यात्री व वस्तुओं के आवागमन को सुविधाजनक बनाया है।

(iii) सीमांत सड़कों का महत्व बताएँ।

उत्तर – भारत सरकार प्राधिकरण के अधीन सीमा सड़क संगठन है जो देश के सीमांत क्षेत्रों में सड़कों का निर्माण व उनकी देख-रेख करता है। यह संगठन 1960 में बनाया गया जिसका कार्य उत्तर तथा उत्तरी-पूर्वी क्षेत्रों में सामरिक महत्व की सड़कों का विकास करना था। इन सड़कों के विकास से दुर्गम क्षेत्रों में अभिगम्यता बढ़ी है तथा ये इन क्षेत्रों के आर्थिक विकास में भी सहायक हुई है।

(iv) व्यापार से आप क्या समझते है?  स्थानीय व अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में अंतर स्पष्ट करें।

उत्तर- राज्यों व देशों में व्यक्तियों के बीच वस्तुओं का आदान प्रदान व्यापार कहलाता है। बाजार एक ऐसी जगह है जहाँ इसका विनिमय होता है।

अंतर्राष्ट्रीय व्यापार- दो या अधिक देशों के मध्य होने वाले वस्तुओं के आदान-प्रदान अर्थात व्यापार को ही अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कहा जाता है। यह समुद्री, हवाई व स्थलीय मार्गो द्वारा हो सकता है।

स्थानीय व्यापार- देश के अंदर दो या अधिक लोगों के मध्य होने वाले वस्तुओं के आदान-प्रदान अर्थात व्यापार को ही स्थानीय व्यापार कहा जाता है। ये शहरों, कस्बों व गाँवों में होता है।

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 120 शब्दों में दीजिए।

(i) परिवहन तथा संचार के साधन किसी देश की जीवन रेखा तथा अर्थव्यवस्था क्यों कहे जाते हैं?

उत्तर- परिवहन एवं संचार साधन तथा आर्थिक गतिविधियों के विकास के मध्य सकारात्मक संबंध है। परिवहन की महत्ता का वर्णन प्राचीन भारतीय धर्मग्रंथों में भी मिलता है। इनकी महत्ता आज भी विद्यमान है परंतु इसके रूप, गुण एवं गति में अवश्य ही परिवर्तन आया है।

       परिवहन एवं संचार के साधन प्रादेशिक विकास के साथ-साथ आम जनजीवन को भी प्रभावित करते हैं। पंचायत स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक समाज में शांति का माहौल बनाए रखने में पुलिस तथा सैनिकों के आने जाने तथा बातचीत करने के लिए यह साधन जरूरी है। परंतु इनके विकास का स्तर संस्कृति के स्तर से निर्धारित होता है। भारत जैसे विशाल भौगोलिक आकार एवं विविध संस्कृतियों वाले देश में परिवहन एवं संचार के विभिन्न साधन एक-दूसरे को जोड़ने का कार्य करते हैं। यही नहीं, संचार के साधन सामाजिक-सांस्कृतिक स्तर को ऊँचा उठाने में भी योगदान देते हैं। भारत का पाकिस्तान, नेपाल एवं बांग्लादेश के साथ परिवहन संपर्क दो देशों के बीच की सामाजिक-सांस्कृतिक विकास का सूचक है।

        परिवहन एवं संचार साधनों के बिना किसी भी प्रकार की आर्थिक क्रिया लगभग असंभव है। ये  साधन हमारे जैविक पक्ष को भी प्रभावित करते हैं। जन्म से लेकर मृत्यु तक हमारा जीवन इन्हीं साधनों पर आश्रित होता है। जीवन जीने के लिए अनाज एवं शाक-सब्जी तथा फलों की आपूर्ति में इन्हीं साधनों का सहारा लेना पड़ता है। अतः इस प्रकार कहा जा सकता है कि परिवहन तथा संचार के साधन किसी देश की जीवन रेखा तथा अर्थव्यवस्था कहे जाते हैं।

(ii) पिछले 15 वर्षों में अंतरराष्ट्रीय व्यापार की बदलती प्रवृत्ति पर एक लेख लिखें।

उत्तर- सभी देश अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर निर्भर है क्योंकि संसाधनों की उपलब्धता क्षेत्रीय है अर्थात इनका वितरण असमान है आयात तथा निर्यात व्यापार के घटक है। आयात व निर्यात का अंतर ही देश के व्यापार संतुलन को निर्धारित करता है। अगर निर्यात मूल्य आयात  मूल्य से अधिक हो तो उसे अनुकूल व्यापार संतुलन कहते हैं। ठीक इसके विपरीत निर्यात की अपेक्षा अधिक आयात असंतुलित व्यापार कहलाता है।

         भारत से निर्यात की जानेे वाली वस्तुओं मेंं इंजीनियरिंग सामान, पेट्रोलियम उत्पाद, रत्न और आभूषण, रसायन एवं संबंधित उत्पाद, वस्त्र, कृषि एवं संबद्ध उत्पाद, अयस्क एवं खनिज तथा अन्य सामान शामिल है। जबकि आयात की जाने वाली वस्तुओं में पेट्रोलियम एवं संबंधित उत्पाद, मशीनरी इलेक्ट्रॉनिक सामान, सोना और चांदी, उर्वरक, रसायन, अलौह धातुएँ एवं अन्य सामान शामिल है।

        अंतरराष्ट्रीय व्यापार में पिछले 15 वर्षों में भारी बदलाव आया है। वस्तुओं के आदान-प्रदान की अपेक्षा सूचनाओं, ज्ञान तथा प्रौद्योगिकी का आदान-प्रदान बढ़ा है। भारत अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक सॉफ्टवेयर महाशक्ति के रूप में उभरा है तथा सूचना प्रौद्योगिकी के माध्यम से अत्यधिक विदेशी मुद्रा अर्जित कर रहा है।

प्रश्न पहेली

1. उत्तरी-दक्षिणी गलियारे(Corridor) का उत्तरी छोर।

उत्तर – श्रीनगर

2. राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-2 का नाम।

उत्तर – शेरशाह सूरी मार्ग

3.दक्षिण रेलवे खंड का मुख्यालय।

उत्तर – सिकंदराबाद

4. 1.676 मीटर चौड़ाई वाले रेलमार्ग का नाम।

उत्तर – बड़ी लाइन

5. राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-7 का दक्षिणतम किनारा।

उत्तर – कन्याकुमारी

6. एक नदीय पत्तन।

उत्तर – कोलकाता

7. उत्तरी भारत का व्यस्ततम रेलवे जंक्शन।

उत्तर- मुगलसराय जंक्शन वर्तमान नाम पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन



अध्याय-6. विनिर्माण उद्योग / NCERT CLASS 10 Geography Solutions

NCERT CLASS -10 Geography Solutions

(हिंदी माध्यम)

अध्याय-6. विनिर्माण उद्योग



 
विनिर्माण उद्योग

 1. बहुवैकल्पिक प्रश्नोत्तर

1. निम्न से कौन-सा उद्योग चुना पत्थर को कच्चे माल के रूप में प्रयुक्त करता है?

(क) एल्युमिनियम

(ख) चीनी

(ग) सीमेंट

(घ) पटसन

उत्तर – (ग) सीमेंट

2. निन्म से कौन सी एजेंसी सार्वजानिक क्षेत्र में स्टील को बाजार में उपलब्ध कराती है?

(क) हेल (HAIL)

(ख) सेल (SAIL)

(ग) टाटा स्टील

(घ) एम एन सी सी (MNCC)

उत्तर – (ख) सेल (SAIL)

3. निन्म से कौन-सा उद्योग बॉक्साइट को कच्चे माल के रूप में प्रयोग करता है?

(क) एल्युमिनियम

(ख) सीमेंट

(ग) पटसन

(घ) स्टील

उत्तर – (क) एल्युमिनियम

4. निन्म से कौन-सा उद्योग दूरभाष, कम्प्यूटर आदि संयंत्र निर्मित करते है?

(क) स्टील

(ख) एल्युमिनियम

(ग) इलेक्ट्रॉनिक

(घ) सूचना प्रौद्योगिकी

उत्तर –(ग) इलेक्ट्रॉनिक

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए।

(i) विनिर्माण क्या है?

उत्तर-  कच्चे पदार्थ को मूल्यवान उत्पाद में परिवर्तित कर अधिक मात्रा में वस्तुओं के उत्पादन को विनिर्माण या वस्तु निर्माण कहा जाता है।

जैसे- कागज लकड़ी से, चीनी गन्ने से, लोहा-इस्पात लौह अयस्क से तथा एलमुनियम बॉक्साइट से निर्मित होता है।

(ii) उद्योगों की अवस्थिति को प्रभावित करने वाले तीन भौतिक कारक बताएँ।

उत्तर- उद्योगों की अवस्थिति को प्रभावित करने वाले तीन भौतिक कारक निम्नलिखित है-

● कच्चे माल की उपलब्धता।

● शक्ति के साधन व जल की उपलब्धता।

● अनुकूल जलवायु।

(iii) औद्योगिक अवस्थिति को प्रभावित करने वाले तीन मानवीय कारक बताएँ।

उत्तर- औद्योगिक अवस्थिति को प्रभावित करने वाले तीन मानवीय कारक निम्नलिखित है-

● श्रमिक, पूंजी तथा बाजार की उपलब्धता।

● परिवहन की सुविधा।

● बैंकिंग सुविधा तथा सरकारी नीतियाँ।

(iv) आधारभूत उद्योग क्या है ? उदाहरण देकर बताएँ।

उत्तर – लौह और इस्पात उद्योग एक आधारभूत उद्योग है; क्योंकि अन्य सभी भारी, हल्के और मध्यम उद्योग इनसे बनी मशीनरी पर निर्भर करते हैं। इसे अन्य उद्योगों का जनक भी कहा जाता है। विविध प्रकार के इंजीनियरिंग सामान निर्माण सामग्री, रक्षा, चिकित्सा, टेलीफोन, वैज्ञानिक उपकरण और विभिन्न प्रकार के उपभोक्ता वस्तुओं के निर्माण के लिए इस्पात की आवश्यकता होती है।

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 120 शब्दों में दीजिए।

(i) समन्वित इस्पात उद्योग मिनी इस्पात उद्योगों से कैसे भिन्न है? इस उद्योग की क्या समस्याएँ हैं? किन सुधारों के अंतर्गत इसकी उत्पादन बढ़ी है?

उत्तर-

मिनी इस्पात उद्योग- मिनी इस्पात उद्योग छोटे संयंत्र है जिनमें विद्युत भट्टी, रद्दी इस्पात व स्पंज आयरन का प्रयोग होता है। इनमें री-रोलर्स होते हैं जिनमें इस्पात सिल्लियों का इस्तेमाल किया जाता है। यह हल्के स्टील या निर्धारित अनुपात के मृदु व मिश्रित इस्पात का उत्पादन करते हैं।

समन्वित इस्पात उद्योग- समन्वित इस्पात संयंत्र एक बड़ा संयंत्र होता है। जिसमें कच्चे माल को एक स्थान पर एकत्रित करने से लेकर इस्पात बनाने उसे ढालने और उसे आकार देने तक की की प्रत्येक क्रिया की जाती है।

समस्याएँ- इस उद्योगों की भारत में निम्नलिखित समस्याएँ हैं-

(क) उच्च लागत तथा कोकिंग कोयले की सीमित उपलब्धता

(ख) कम श्रमिक उत्पादकता

(ग) ऊर्जा की अनियमित पूर्ति

(घ) अविकसित अवसंरचना इत्यादि।

सुधार- निजी क्षेत्र में उद्यमियों के प्रयत्न से तथा उदारीकरण व प्रत्यक्ष विदेशी निवेश ने इस उद्योग को प्रोत्साहन दिया है। इस्पात उद्योग को अधिक स्पर्धावान बनाने के लिए अनुसंधान और विकास के संसाधनों को नियत करने की आवश्यकता है।

(ii) उद्योग पर्यावरण को कैसे प्रदूषित करते है?

उत्तर- यद्यपि उद्योगों की भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका है, तथापि इनके द्वारा बढ़ते भूमि, वायु, जल तथा पर्यावरण प्रदूषण को भी नकारा नहीं जा सकता। उद्योग मुख्यतः चार प्रकार के प्रदूषण के लिए उत्तरदायी है- (क) वायु (ख) जल (ग) भूमि तथा (घ) ध्वनि। प्रदूषण करने वाले उद्योगों में ताप विद्युतगृह भी सम्मिलित है।

(क) वायु प्रदूषण- अधिक अनुपात में अनचाहे गैसों की उपस्थिति जैसे सल्फर डाइऑक्साइड तथा कार्बन मोनोऑक्साइड वायु प्रदूषण का कारण है।

(ख) जल प्रदूषण- उद्योगों द्वारा कार्बनिक तथा अकार्बनिक अवशिष्ट पदार्थों के नदी में छोड़ने से जल प्रदूषण फैलता है। जल प्रदूषण के प्रमुख कारक – कागज, लुग्दी, रसायन, वस्त्र तथा रंगाई उद्योग, तेल शोधनशालाएँ, चमड़ा उद्योग तथा इलेक्ट्रोप्लेटिंग उद्योग है।

(ग) भूमि प्रदूषण- मृदा व जल प्रदूषण आपस में संबंधित है। मलबे का ढेर विशेषकर कांच, हानिकारक रसायन, औद्योगिक बहाव, पैकिंग, लवण तथा कूड़ा-करकट मृदा को अनुपजाऊ बनाता है। वर्षा के जल के साथ ये प्रदूषक जमीन से रिसते हुए  भूमिगत जल तक पहुंचकर उसे भी प्रदूषित कर देते हैं।

(घ) ध्वनि प्रदूषण- औद्योगिक तथा निर्माण कार्य, कारखानों के उपकरण, जेनरेटर, लकड़ी चीरने के कारखाने, गैस यांत्रिकी तथा विद्युत ड्रिल भी अधिक ध्वनि उत्पन्न करते हैं। ध्वनि प्रदूषण से खिन्नता तथा उत्तेजना ही नहीं वरन श्रवण असक्षमता,  हृदय गति, रक्तचाप तथा अन्य कायिक व्यथाएँ भी बढ़ती है । अनचाही ध्वनि, उत्तेजना व मानसिक चिंता का स्रोत है।

(iii) उद्योगों द्वारा पर्यावरण निम्नीकरण को कम करने के लिए उठाए गए विभिन्न उपायों की चर्चा करें?

उत्तर- उद्योगों द्वारा पर्यावरण निम्नीकरण को कम करने के लिए उठाए गए विभिन्न उपाय निम्नलिखित है-

● जहां भूमिगत जल का स्तर कम है वहां उद्योगों द्वारा इसके अधिक निष्कासन पर कानूनी प्रतिबंध होना चाहिए।

● वायु में निलंबित प्रदूषण को कम करने के लिए कारखानों में ऊँची चिमनियाँ, चिमनियों में इलेक्ट्रोस्टेटिक अवक्षेपण, स्क्रबर उपकरण तथा गैसीय प्रदूषक पदार्थों को जड़त्वीय रूप से पृथक करने के लिए उपकरण होना चाहिए।

● कारखानों में कोयले की अपेक्षा तेल व गैस के प्रयोग से धुएँ के निष्कासन में कमी लाई जा सकती है।

●  जेनरेटर में साइलेंसर लगाया जा सकता है।

● ऐसी मशीनरी का उपयोग किया जाए जो ऊर्जा सक्षम हो तथा कम ध्वनि प्रदूषण करे।

● नदियों व तालाबों में गर्म जल तथा अवशिष्ट पदार्थों को प्रवाहित करने से पहले उनका शोधन करना चाहिए।

●  जल की आवश्यकता पूर्ति हेतु वर्षा जल संग्रहण करना चाहिए।

● ध्वनि अवशोषित करने वाले उपकरणों के इस्तेमाल के साथ कानों पर शोर नियंत्रण उपकरण भी पहनने चाहिए  इत्यादि।


अध्याय-5. खनिज तथा ऊर्जा संसाधन / NCERT CLASS 10 Geography Solutions

 
NCERT CLASS -10 Geography Solutions
(हिंदी माध्यम)

अध्याय -5. खनिज तथा ऊर्जा संसाधन



 
खनिज तथा ऊर्जा

1. बहुवैकल्पिक प्रश्नोत्तर

1. निम्नलिखित में से कौन-सा खनिज अपक्षयित पदार्थ के अपशिष्ट भार को त्यागता हुआ चट्टानों के अपघटन से बनता है?

(क) कोयला

(ख) बॉक्साइट

(ग) सोना

(घ) जस्ता

उत्तर – (ख) बॉक्साइट

2. झारखण्ड के कोडरमा निम्नलिखित से किस खनिज का अग्रणी उत्पादक है?

(क) बॉक्साइट

(ख) अभ्रक

(ग) लौह अयस्क

(घ) ताँबा

उत्तर – (ख) अभ्रक

3. निन्मलिखित चट्टानों में से किस चट्टान के स्तरों में खनिजों का निक्षेपण और संचयन होता है?

(क) तलहटी चट्टानें

(ख) कायांतरित चट्टानें

(ग) आग्नेय चट्टानें

(घ) इनमें से कोई नहीं

उत्तर – (क) तलहटी चट्टानें

4. मोनाजाइट रेत में निम्नलिखित में से कौन-सा खनिज पाया जाता है?

(क) खनिज तेल

(ख) युरेनियम

(ग) थोरियम

(घ) कोयला

उत्तर – (ग) थोरियम

2.निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए।

(i) निम्नलिखित में अंतर 30 शब्दों से अधिक न दें।

(क) लौह एवं अलौह खनिज

उत्तर-

लौह खनिज- वैसे खनिज जिसमें लोहे का अंश अधिक पाया जाता है वे लौह युक्त खनिज कहलाते हैं। जैसे – लौह अयस्क, मैंगनीज, निकिल, टंगस्तान इत्यादि।

अलौह खनिज- वैसे  खनिज जिसमें लोहे का अंश न्यूनतम या नहीं के बराबर होता है वे अलौह युक्त खनिज कहलाते हैं। जैसे – सोना, चांदी, शीशा, बॉक्साइट , टीन इत्यादि।

(ख) परम्परागत तथा गैर परम्परागत ऊर्जा साधन

उत्तर-

परम्परागत ऊर्जा साधन- कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस जैसे खनिज ईंधन जो जीवाश्म ईंधन के नाम से भी जाने जाते हैं ये पारंपरिक ऊर्जा संसाधन है तथा ये समाप्य संसाधन है।

गैर परम्परागत ऊर्जा साधन- बायोगैस, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, ज्वारीय एवं तरंग ऊर्जा, भूतापीय ऊर्जा एवं जैव ऊर्जा जो नवीकरणीय ऊर्जा के नाम से भी जाने जाते हैं ये गैर पारंपरिक ऊर्जा संसाधन है तथा ये समाप्य संसाधन नहीं है।

(ii) खनिज क्या है?

उत्तर – खनिज निश्चित अनुपात रासायनिक एवं भौतिक विशिष्टताओं  के साथ निर्मित एक प्राकृतिक पदार्थ है। दूसरे शब्दों में, खनिज निश्चित रासायनिक संयोजन एवं विशिष्ट आंतरिक परमाणविक रचना वाले ठोस प्राकृतिक पदार्थ को कहा जाता है।  संक्षेप में खान से निकाले गए पदार्थ को खनिज कहते है । जैसे – कोयला, पेट्रोलियम, सोना, लौह अयस्क इत्यादि।

(iii) आग्नेय तथा कायान्तरित चट्टानों में खनिजों का निर्माण कैसे होता है?

उत्तर – आग्नेय तथा कायांतरित चट्टानों में खनिज दरारों, जोड़ों, भ्रंशों व विदरों में मिलते हैं । छोटे जमाव शिराओं के रूप में और वृहद जमाव परत के रूप में पाए जाते हैं इनका निर्माण भी अधिकतर उस समय होता है जब ये तरल अथवा किसी गैसीय अवस्था में दरारों के सहारे भू-पृष्ठ की ओर धकेल जाते हैं । ऊपर आते हुए ये ठंडे होकर जम जाते हैं मुख्य धात्विक खनिज जैसे – जस्ता, तांबा, जिंक और शीशा आदी इसी तरह शिराओं व जमाव के रूप में प्राप्त होते हैं।

         अनेक खनिज अवसादी चट्टानों के अनेक अनेक संस्तरों या परतों में पाए जाते हैं । इनका निर्माण क्षैतिज परतों में निक्षेपण, संचयन व जमाव का परिणाम है । कोयला तथा कुछ अन्य प्रकार के लौह अयस्कों का निर्माण लंबी अवधि तक अत्यधिक ऊष्मा व दबाव का परिणाम है । अवसादी चट्टानों में दूसरी श्रेणी के खनिजों में जिप्सम, पोटाश, नमक और सोडियम सम्मिलित है । इनका निर्माण विशेषकर शुष्क प्रदेशों में वाष्पीकरण के फलस्वरुप होता है।

(iv) हमें खनिजों के संरक्षण की क्यों आवश्यकता हैं?

उत्तर – खनिज क्षयशील एवं अनवीकरणीय संसाधन है। इनकी मात्रा सीमित है। इनका पुनर्निर्माण असंभव है। खनिज उद्योगों का आधार है किन्तु औद्योगिक विकास के लिए खनिजों का अतिशय दोहन एवं उपयोग उनके अस्तित्व के लिए संकट है। अतः खनिजों का संरक्षण एवं प्रबंधन आवश्यक है। खनिज संसाधन के विवेकपूर्ण उपयोग तीन बातों पर निर्भर है –

★ खनिजों के निरंतर दोहन पर नियंत्रण,

★उनका बचतपूर्वक उपयोग तथा

★कच्चे माल के रूप में सस्ते विकल्पों की खोज।

          खनिजों पर नियंत्रण के अलावे उनके विकल्पों को खोजना, खनिजों के अपशिष्ट पदार्थों को बुद्धिमतापूर्वक उपयोग, पारिस्थितिकी पर पड़ने वाले कुप्रभाव पर नियंत्रण, खनिज निर्माण के लिए चक्रीय पद्धति को अपनाना प्रबंधन कहलाता है। यदि खनिजों के संरक्षण के साथ-साथ प्रबंधन पर ध्यान दिया जाए तो खनिज संकट से निबटा जा सकता है।

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 120 शब्दों में दीजिए।

(i) भारत में कोयले का वितरण का वर्णन कीजिए।

उत्तर- भूगर्भिक दृष्टि से भारत के समस्त कोयला भंडार को दो मुख्य भागों में बांटा जा सकता है।

(क) गोंडवाना समूह- गोंडवाना समूह में भारत के 96 प्रतिशत कोयले का भण्डार है इससे कुल उत्पादन का 99 प्रतिशत भाग प्राप्त होता है। यहाँ के कोयले का निर्माण 20 करोड़ वर्ष पूर्व में हुआ था। गंडवाना कोयला क्षेत्र मुख्यतः चार नदी घाटियों में पाये जाते हैं-

(क) दामोदर घाटी क्षेत्र

(ख) सोन नदी घाटी क्षेत्र

(ग) महानदी घाटी क्षेत्र तथा

(घ) वार्धा-गोदावरी घाटी क्षेत्र।

          गोंडवाना समूह का कोयला क्षेत्र भारत के निम्नलिखित राज्यों में पाया जाता है:-

झारखण्ड – कोयले के भण्डार एवं उत्पादन की दृष्टि से इसका स्थान  देश में प्रथम है। यहाँ के प्रमुख कोयला उत्पादक क्षेत्र- झरिया, बोकारो, गिरिडीह, कर्णपुरा, रामगढ़ इत्यादि हैं।

छत्तीसगढ़- सुरक्षित भण्डार की दृष्टि से इस राज्य का स्थान तीसरा किंतु उत्पादन में यह भारत का दूसरा बड़ा राज्य है। यहाँ देश का 15 प्रतिशत सुरक्षित भण्डार है लेकिन उत्पादन 16 प्रतिशत होता है। यहाँ का उत्पादक क्षेत्र है चिरिमिरी, कुरसिया, विश्रामपुर, झिलमिली, सोनहाट, लखनपुर, हासदो-अरंड, कोरबा एवं मांड-रायगढ़ इत्यादि।

उड़ीसा- यहाँ देश का एक चौथाई कोयले का भण्डार है। यहाँ का मुख्य उत्पादक क्षेत्र है तालचर।

महाराष्ट्र- यहाँ भारत का मात्र 3 प्रतिशत कोयला सुरक्षित है। यहाँ के मुख्य उत्पादक क्षेत्र-चाँदा-वर्धा, कांपटी तथा बंदेर हैं।

मध्यप्रदेश- यहाँ देश का मात्र 7 प्रतिशत कोयला का भण्डार है। सिंगरौली, सोहागपुर, जोहिल्ला, उमरिया, सतपुड़ा क्षेत्र इत्यादि मुख्य उत्पादक क्षेत्र हैं।

पश्चिम बंगाल- यह राज्य देश के सुरक्षित भण्डार की दृष्टि से चौथा एवं उत्पादन में 7वां है। रानीगंज यहाँ का मुख्य उत्पादक क्षेत्र है।

(ख) टर्शियरी समूह- गोंडवाना समूह के बाद टर्शियरी समूह के कोयले का निर्माण हुआ। यह 5.5 करोड़ वर्ष पुराना है। टर्शियरी कोयला मुखयतः असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और नगालैंड में पाया जाता  है।

(ii) भारत में सौर ऊर्जा का भविष्य उज्जवल है। क्यों?

उत्तर- भारत में सौर ऊर्जा का भविष्य उज्ज्वल है क्योंकि भारत एक उष्णकटिबंधीय देश है। यहाँ सौर ऊर्जा के दोहन की असीम संभावनाएँ हैं। फोटोवोल्टाइक प्रौद्योगिकी द्वारा धूप को सीधे विद्युत में परिवर्तित किया जाता है। भारत के ग्रामीण तथा सुदूर क्षेत्रों में सौर ऊर्जा तेजी से लोकप्रिय हो रही है।

       भारत का सबसे बड़ा सौर ऊर्जा संयंत्र भुज के निकट माधोपुर में स्थित है, जहाँ सौर ऊर्जा से दूध के बड़े बर्तनों को कीटाणु मुक्त किया जाता है। ऐसी अपेक्षा है कि सौर ऊर्जा के प्रयोग से ग्रामीण घरों में उपलों तथा लकड़ी पर निर्भरता को न्यूनतम किया जा सकेगा। फलस्वरुप यह कम लागत वाला पर्यावरण के अनुकूल तथा निर्माण में आसान होने के कारण ऊर्जा के स्रोतों की अपेक्षा ज्यादा लाभदायक है और  इससे कृषि में भी खाद्य की पर्याप्त आपूर्ति होगी । इस प्रकार कहा जा सकता है कि भारत में सौर ऊर्जा का भविष्य काफी उज्जवल है।



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