बिहार : कृषि एवं वन संसाधन / बिहार बोर्ड-10 Geography Solutions खण्ड (क) इकाई-5.

बिहार बोर्ड वर्ग-10वाँ Geography Solutions
खण्ड (क)

इकाई-5. बिहार : कृषि एवं वन संसाधनकृषि एवं वन संसाधन


बिहार : कृषि एवं वन संसाधन  

वस्तुनिष्ट प्रश्नोत्तर
1. बिहार में कितने प्रतिशत क्षेत्र में खेती की जाती है?
(a) 50
(b) 60
(c) 80
(d) 36.5
उत्तर- (b) 60
2. राज्य की कितनी प्रतिशत जनसंख्या कृषि कार्य में लगी हुई है?
(a) 80
(b) 75
(c) 65
(d) 86
उत्तर- (a) 80
3. इनमें से कौन गन्ना उतपादक जिला नहीं है?
(a) दरभंगा
(b) पश्चिम चंपारण
(c) मुजफ्फरपुर 
(d) रोहतास
उत्तर- (d) रोहतास
4. बिहार के जूट उत्पादन में-
(a) वृद्धि हो रही है
(b) गिरावट हो रही है
(c) स्थिर है
(d) इनमें कोई नहीं
उत्तर- (b) गिरावट हो रही है
5. तम्बाकू उत्पादन क्षेत्र है-
(a) गंगा का उत्तरी मैदान
(b) गंगा का दक्षिणी मैदान
(c) हिमालय की तराई
(d) गंगा का दियारा
उत्तर- (d) गंगा का दियारा
6. कोसी नदी घाटी परियोजना का आरंभ हुआ-
(a) 1950 में
(b) 1948 में
(c) 1952 में
(d) 1954 में
उत्तर- (d) 1954 में
7. गण्डक परियोजना का निर्माण किस स्थान पर हुआ-
(a) बेतिया
(b) बाल्मीकीनगर
(c) मोतिहारी
(d) छपरा
उत्तर- (b) बाल्मीकीनगर
8. बिहार में नहरों द्वारा सर्वाधिक सिंचाई किस जिले में होती है?
(a) रोहतास
(b) सिवान
(c) गया
(d) पश्चिमी चंपारण
उत्तर- (a) रोहतास
9. बिहार में कुल कितने अधिसूचित क्षेत्र में वन का विस्तार है?
(a) 6374 कि०मी०
(b) 6370 कि०मी०
(c) 6380 कि०मी०
(d) 6350 कि०मी०
उत्तर- (a) 6374 कि०मी०
10. कुशेश्वर स्थान किस ज़िला में स्थित है?
(a) वैशाली में
(b) दरभंगा में
(c) बेगूसराय में
(d) भागलपुर में
उत्तर- (b) दरभंगा में
11. काँवर झील स्थित है-
(a) दरभंगा जिला में
(b) भागलपुर जिला में
(c) बेगूसराय जिला में
(d) मुज़फ़्फ़रपुर जिला में
उत्तर- (c) बेगूसराय जिला में
12. संजय गांधी जैविक उद्यान किस नगर में स्थित है?
(a) राजगीर
(b) बोधगया
(c) बिहारसरीफ
(d) पटना
उत्तर- (d) पटना 
लघु उत्तरीय  प्रश्नोत्तर :
प्रश्न 1. बिहार में धान की फसल के लिए उपयुक्त भौगोलिक दशाओं का उल्लेख करें।
उत्तर- बिहार में धान की फसल के लिए उपयुक्त भौगोलिक दशाएं निम्नलिखित है:-
 (i)तापमान  – 20-27° से. ग्रे.  
  (ii) वर्षा – 75-200 सेमी. 
 (iii)  मिट्टी- उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी
 (iv) भूमि – समतल 
प्रश्न 2. बिहार में दलहन के उत्पादन एवं वितरण का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर- उत्पादन- बिहार में दलहन फसलों में चना, मसूर, खेसारी, मटर, मूंग, अरहर, उड़द तथा कुरथी प्रमुख हैं।
वितरण- चना, अरहर, मूंग, मसूर, आदि की खेती यों तो बिहार के सभी जिलों में होती है परंतु गंगा के दक्षिणी इलाका इसके लिए ज्यादा प्रसिद्ध है। दलहन उत्पादन में पटना जिला का स्थान सबसे आगे है, जबकि औरंगाबाद और कैमूर क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर है।
प्रश्न 3. कृषि बिहार की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है- इस कथन की व्याख्या कीजिए।
उत्तर- बिहार एक कृषि प्रधान राज्य है। इसकी तीन-चौथाई भूमि कृषि क्षेत्र के अंतर्गत आती है तथा यहाँ की 80 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है। झारखंड के अलग हो जाने के बाद बिहार के लोगों के लिए कृषि का महत्व अधिक बढ़ गया है। कृषि के अलावे यहाँ अन्य रोजगार के साधनों का अभाव है। अतः कृषि बिहार की अर्थव्यवस्था का की रीढ़  है।
प्रश्न 4. नदी घाटी परियोजनाओं के मुख्य उद्देश्यों को लिखें।
उत्तर- नदी घाटी  परियोजना के विकास के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित है-
● बाढ़ नियंत्रण
● मृदा अपरदन पर रोक
● पेयजल एवं सिंचाई हेतु जलापूर्ति
● विद्युत उत्पादन
● उद्योगों के जलापूर्ति
● परिवहन
● मनोरंजन
● वन्य जीव संरक्षण, मत्स्य पालन, जल कृषि, पर्यटन इत्यादि।
प्रश्न 5. बिहार के नहरों के विकास से सम्बंधित समस्याओं को लिखिए।
उत्तर- बिहार के नहरों के विकास से सम्बंधित समस्याएं निम्नालिखित है:-
(i) दक्षणी बिहार की अधिकांश नदियाँ बरसाती है जिससे जलापूर्ति की समस्या उत्पन्न होती है।
(ii) पूंजी का अभाव
(iii) धरातल का स्वरूप
(iv) सरकार की इच्छाशक्ति का अभाव
(v) जल का असमान वितरण
प्रश्न 6. बिहार के किस भाग में सिंचाई की आवश्यकता है और क्यों?
उत्तर- बिहार के दक्षिणी भाग में सिंचाई की आवश्यकता अधिक है क्योंकि दक्षिणी बिहार की अधिकांश नदियाँ बरसाती है साथ ही  यहाँ नहरों का विकास उतना अधिक नहीं हुआ है।
प्रश्न 7. बिहार में वनों के अभाव के चार कारणों को लिखिए।
उत्तर- बिहार में वनों के अभाव के चार कारण निम्नलिखित है:-
(i) बिहार विभाजन के बाद अधिकतर वनाच्छादित क्षेत्र झारखण्ड में चला गया है। वर्तमान में बिहार में 6.87% भौगोलिक क्षेत्र में ही वन है।
(ii) कृषि एवं निर्मित क्षेत्रों के विस्तार के कारण वनों का विनाश काफी तेजी से हुआ है।
(iii) वनों के महत्व से संबंधित जागरुकता का अभाव है।
(iv) वनों की अंधाधुंध कटाई के कारण भी यहाँ वनों का अभाव है।
प्रश्न 8. संक्षेप में शुष्क पतझड़ वन की चर्चा कीजिए।
उत्तर- बिहार के पूर्वी मध्यवर्ती भाग तथा दक्षिणी-पश्चिमी पहाड़ी भागों में इस प्रकार के वनों का विस्तार है। कैमूर और रोहतास जिले में इसका अधिक विस्तार है। यहाँ के प्रमुख वृक्ष खैर, बहेड़ा, प्लास, महुआ, अमलतास, शीशम, नीम, हर्रे आदि हैं।
प्रश्न 9. बिहार में ऐसे जिलों का नाम लिखिए जहाँ वन विस्तार एक प्रतिशत से भी कम है।
उत्तर- बिहार के सिवान, सारण, भोजपुर, बक्सर, पटना, गोपालगंज, वैशाली, मुजफ्फरपुर, मोतीहारी, दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, बेगुसराय, मधेपुरा, खगड़िया, नालन्दा जिलों में एक प्रतिशत से भी कम भूमि में वन मिलते हैं।
प्रश्न 10. बिहार में स्थित राष्ट्रीय उद्यान एवं अभ्यारण्यों की संख्या बतायें और दो अभ्यारण्यों की चर्चा करें।
उत्तर- यहाँ 14 अभयारण्य एवं एक राष्ट्रीय उद्यान है। बिहार का संजय गांधी जैविक उद्यान एकलौता राष्ट्रीय उद्यान है।
        दरभंगा जिला में कुश्वेश्वर स्थान वन्य जीवों के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है। बेगुसराय जिला अन्तर्गत मंझौल अनुमंडल में 2500 एकड़ पर फैला कांवर झील एक पक्षी विहार है जहाँ 300 प्रजातियों के पक्षियों का अध्ययन एक साथ संभव है।
 
दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर :
प्रश्न 1. बिहार की कृषि की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा करें।
उत्तर- बिहार एक कृषि प्रधान राज्य है और यहाँ की 90 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है, साथ ही यहाँ की 80 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है। झारखण्ड के अलग हो जाने के बाद बिहार के लोगों के लिए कृषि का महत्व और अधिक बढ़ गया है। 
     यहाँ की कृषि निम्नलिखित समस्याओं से जूझ रही है :- 
  • कृषि का परंपरागत तरीका।
  • किसानों का शिक्षा एवं पूंजी का अभाव होना।
  • खेतों के छोटा आकार।
  • उन्नत किस्म के कृषि यंत्रों का अभाव।
  • परम्परागत बीजों का अभाव।
  • सिचाई की समुचित व्यवस्था का अभाव।
  • वर्षा की अनियमितता अर्थात मानसून पर निर्भरता।
  • बाढ़ एवं सुखाड़ की समस्य।
  • अंधाधुन रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग।
  • मिट्टी का कटाव और भूमि निम्नीकरण की समस्या।
  • रूढ़िवादिता एवं अंधविश्वास।
  • यातायात के साधनों का अभाव।
  • खेतों का दूर-दराज में स्थित होना इत्यादि।

प्रश्न 2. बिहार में कौन-कौन सी फसलें लगाई जाती हैं ? किसी एक फसल के मुख्य उत्पादनों की व्याख्या कीजिए।

उत्तर- बिहार की प्रमुख फसलों में धान, गेहूँ, मकई, जौ, गन्ना, तम्बाकू, मडुआ, ज्वार, दलहन और तेलहन हैं। इसके अतिरिक्त सब्जियों, फल, फूल की भी खेती बड़े पैमाने पर की जाती है।

धान- धान बिहार की खाद्यान फसलों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। भदई, अगहनी तथा गरमा, अर्थात धान की तीन फसलें लगाई जाती हैं और इसकी खेती राज्य के सभी भागों में की जाती हैं। 2006-07 में यहाँ 33-54 लाख हेक्टेयर भूमि पर लगभग 50 लाख टन धान का उत्पादन दर्ज किया गया।

         उत्तरी तथा पूर्वी भागों में भदई धान की खेती की जाती है, जबकि अगहनी धान की खेती पूरे राज्य में की जाती है।

       धान का सबसे अधिक उत्पादन पश्चिमी चंपारण, रोहतास तथा औरंगाबाद में होता है, इन तीन जिलों में बिहार का 18 प्रतिशत से अधिक धान का उत्पादन होता है। पहले स्थान पर पश्चिमी चम्पारण है जबकि रोहतास और औरंगाबाद का क्रमशः द्वितीय और तृतीय स्थान है। यदि क्षेत्रफल की दृष्टि से देखा जाय तो रोहतास (5.76%) अव्वल है।

प्रश्न 3. बिहार की मुख्य नदी घाटी परियोजनाओं का नाम बतायें एवं सोन अथवा कोसी परियोजना के महत्व पर प्रकाश डालें।

उत्तर- बिहार की मुख्य नदी घाटी परियोजनाएँ निम्नलिखित हैं:-

  • सोन नदी घाटी परियोजना
  • गण्डक नदी घाटी परियोजना
  • कोसी नदी घाटी परियोजना
  • दुर्गावती जलाशय परियोजना
  • चन्दन बहुआ परियोजना
  • बागमती परियोजना
  • बरनार जलाशय परियोजना।

सोन नदी घाटी परियोजना- यह बिहार की सबसे पुरानी और पहली नदी घाटी परियोजना है। इसका विकास अंग्रेज सरकार ने 1874 में सिंचाई के लिए किया था। इससे डेहरी के पास से पूरब एवं पश्चिम की ओर नहरें निकाली गई हैं। जिसकी कुल लंबाई 130 किमी0 थी। इस परियोजना से पटना, गया, औरंगाबाद, भोजपुर, बक्सर, रोहतास इत्यादि जिलों में सिंचाई की जाती है। इस परियोजना से सूखा प्रभावित क्षेत्र को सिंचाई की सुविधा प्राप्त होने से बिहार का दक्षिणी पश्चिमी क्षेत्र का प्रति हेक्टेयर उत्पादन काफी बढ़ गया जिससे इस क्षेत्र में धान की खेती अधिक होती है। इस कारण से इस क्षेत्र को बिहार का ‘चावल का कटोरा’ कहा जाता है।

         इस परियोजना के अन्तर्गत जल-विद्युत उत्पादन के लिए शक्ति-गृहों की स्थापना की गई है। पश्चिमी नहर पर डेहरी के पास 6.6 मेगावाट उत्पादन क्षमता का शक्ति-गृह स्थापित है। इसी प्रकार पूर्वी नहर शाखा पर बारूण नामक स्थान पर 3.3 मेगावाट क्षमता का शक्ति गृह का निर्माण किया गया है। सोन नदी पर इन्द्रपुरी के पास एक बाँध का निर्माण प्रस्तावित है जिससे 450 मेगावाट पनबिजली उत्पादन का लक्ष्य है।

कोसी नदी घाटी परियोजना- यह परियोजना नेपाल सरकार, भारत सरकार और बिहार सरकार के सामूहिक प्रयास का फल है। इसका मुख्य उद्देश्य नदी के बदलते मार्ग को रोकना, उपजाऊ भूमि की बर्बादी पर नियंत्रण, भयानक बाढ़ से क्षति पर रोक, जल से सिंचाई का विकास, पन बिजली उत्पादन, मत्स्य पालन, नौकायान एवं पर्यावरण पर नियंत्रण आदि है।

           इस परियोजना को कई चरणों में पूरा किया गया है। पहले चरण में मार्ग परिवर्तन पर नियंत्रण, बिहार, नेपाल सीमा पर स्थित हनुमाननगर स्थान पर बैराज का निर्माण, बाढ़ नियंत्रण के लिए दोनों ओर तटबंध का निर्माण, पूर्वी एवं पश्चिमी कोसी नहर एवं उसकी शाखाओं का निर्माण सम्मिलित किया गया।

         पूर्वी नहर तथा इसकी प्रमुख सहायक नहरों द्वारा 14 लाख एकड़ भूमि में सिंचाई की जाती है। इससे पूर्णिया, सहरसा, मधेपुरा और अररिया जिलों में सिंचाई की जाती है। पश्चिमी नहर से नेपाल एवं बिहार के मधुबनी एवं दरभंगा जिलों में सिंचाई की जाती है।

प्रश्न 4. बिहार में वन्य जीवों के संरक्षण पर विस्तार से चर्चा करें।
उत्तर- बिहार में वन एवं वन्य प्राणियों के संरक्षण के लिए आदि काल से कई रीति-रिवाजों का प्रचलन है। कई धार्मिक अनुष्ठान तो वृक्षों के नीचे ही किए जाते हैं। कई ऐसे आंचलिक त्योहार भी हैं जो वृक्षों के नीचे ही किए जाते हैं। इस राज्य में परम्परागत रूप से वट, पीपल, आँवला और तुलंसी के पौधों की पूजा की जाती है। हमारे यहाँ चींटी से लेकर साँप जैसे विषैले जन्तु को भोजन दिया जाता है और उनकी पूजा की जाती है। पक्षियों को भी दाने दिए जाने का प्रचलन है। साथ ही वन्य प्राणियों के संरक्षण के लिए कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। यहाँ संजय गाँधी जैविक उद्यान एवं अन्य 14 अभयारण्य हैं। जैसे- बेगुसराय जिला अन्तर्गत कांवर झील, दरभंगा जिला अन्तर्गत कुशेश्वर स्थान इत्यादि।

                 वन एवं वन्य प्राणियों के संरक्षण में राज्य सरकार की  कई संस्थाएँ भी कार्यरत हैं। इनमें वन, पर्यावरण एवं जल संसाधन विकास विभाग प्रमुख हैं। इनके अतिरिक्त इस क्षेत्र में कई स्वयंसेवी संस्थाएँ भी काम कर रही हैं। इनमें प्रयास, तरुमित्र , प्रत्यूष और भागलपुर में मंदार नेचर क्लब इत्यादि प्रमुख है।


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परिवहन, संचार एवं व्यापार / BSEB CLASS -10 Geography Solutions

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खण्ड (क)

इकाई-4. परिवहन, संचार एवं व्यापारपरिवहन


परिवहन, संचार एवं व्यापार

वस्तुनिष्ट प्रश्नोत्तर
 1. स्वतंत्रता प्राप्ति के समय देशमें सड़कों की कुल लंबाई कितनी थी?
(a) 2.42 लाख कि०मी०
(b) 1.46 लाख कि०मी०
(c) 3.88 लाख कि०मी०
(d) 5.78 लाख कि०मी०
उत्तर- (c) 3.88 कि०मी०
2. पक्की सड़कों की लंबाई की दृष्टि से प्रथम स्थान पर कौन राज्य है?
(a) बिहार
(b) महाराष्ट्र
(c) तमिलनाडु
(d) केरल
उत्तर- (b) महाराष्ट्र 
3. निम्नलिखित में से कौन सड़कों का एक वर्ग नहीं है?
(a) पूरब-पश्चिम गलियारा
(b) एक्सप्रेस वे
(c) स्वर्णिम त्रिभुज राजमार्ग
(d) सीमांत सड़के
उत्तर- (c) स्वर्णिम त्रिभुज राजमार्ग 
4. भारत के किन शहरों में मेट्रो रेल सेवा उपलब्ध है?
(a) कोलकाता एवं दिल्ली
(b) दिल्ली एवं मुम्बई
(c) कोलकाता एवं चेन्नई
(d) दिल्ली एवं बेंगलुरु
उत्तर- वर्तमान समय में उपर्युक्त सभी शहरों में मेट्रो रेल सेवा उपलब्ध है। 
5. किस वर्ष इंडियन एयरलाइंस को इंडियन नाम दिया गया?
(a) 2006
(b) 2003
(c) 2008
(d) 2005
उत्तर- (d) 2005 
6. भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण के गठन किस वर्ष किया गया था?
(a) 1986
(b) 1988
(c) 1985
(d) 1989
उत्तर- (a) 1986
7. इन्नौर पत्तन किस राज्य में स्थित है?
(a) गुजरात
(b) गोवा
(c) तमिलनाडु
(d) कर्नाटक
उत्तर- (c) तमिलनाडु
8. भारत को कुल कितने डाक क्षेत्रों में बाँटा गया है?
(a) 7
(b) 5
(c) 6
(d) 8
उत्तर- (d) 8 
9. देश में कितने विशेष आर्थिक क्षेत्र विकसित है?
(a) 10
(b) 7
(c) 15
(d) 5
उत्तर- (b) 7
10. फाल्ट विशेष आर्थिक क्षेत्र कहाँ स्थित है?
(a) बिहार
(b) प०बंगाल
(c) केरल
(d) उड़ीसा
उत्तर- (b) प०बंगाल
लघु उत्तरीय  प्रश्नोत्तर: 
प्रश्न 1.भारत में सड़कों के प्रादेशिक वितरण का वर्णन प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर- पक्की सड़कों की लंबाई की दृष्टि से महाराष्ट्र को देश में प्रथम स्थान प्राप्त है। यहाँ 2.70 लाख किमी. लंबी पक्की सड़कें हैं। दसरे स्थान पर उत्तर प्रदेश एवं तीसरे स्थान पर उड़ीसा है। यहाँ क्रमशः 2.47 लाख एवं 2.36 लाख किमी. सड़कें हैं। पक्की सड़कों की सबसे कम लंबाई वाला राज्य लक्षद्वीप है। यहाँ मात्र 01 किलोमीटर लंबी पक्की सड़क है। सड़कों के घनत्व की दृष्टि से केरल प्रथम, गोआ द्विताय और उड़ीसा तृतीय स्थान पर है।
                     उत्तर भारत में सड़कों का सर्वाधिक घनत्व पंजाब में 122 किलोमीटर प्रति 100 वर्ग किलोमीटर है। इसके बाद उत्तर प्रदेश एवं पश्चिम बंगाल का स्थान आता है। उत्तर-पूर्वी राज्यों में त्रिपुरा प्रथम एवं नागालैंड दूसरे स्थान पर है। पूरे देश में सड़कों का सर्वाधिक घनत्व दिल्ली में है।
प्रश्न 2. भारतीय रेल परिवहन की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर-भारतीय रेल परिवहन की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित है:-
  •  दो  बड़े शहरों एवं महानगरों के बीच तीव्र गति से चलने वाली राजधानी एवं शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेनों का परिचालन किया जा रहा है।
  • माल ढुलाई के लिए प्राइवेट कंटेनर एवं वैगन, माल-गाड़ियों में लगाई जा रही है।
  • ट्रेनों की दुर्घटना को रोकने के लिए इंजनों में ए. सी. डी. की व्यवस्था की गयी है।
  • 1 अगस्त, 1947 से रेल मंत्रालय ने रेल यात्री बीमा योजना शुरू की है।
  • कोलकाता एवं दिल्ली में मेट्रो रेल के तहत भूमिगत रेल सेवा दी जा रही है।
  • राजस्थान में शाही रेल गाड़ी ‘पैलेस ऑन व्हील्स’ तथा महाराष्ट्र में डेक्कन ऑडेसी’ रेलगाड़ियाँ चलाई जा रही हैं।
  • पर्वतीय भागों में स्थित पर्यटक स्थलों तक पहुँचने के लिए तथा मनोरंजनपूर्ण यात्रा के लिए नैरो गेज एवं स्पेशल गेज वाली रेलें चलाई जा रही हैं। इनमें शिमला उटी, माउंट आबू, दार्जिलिंग इत्यादि की रेल सेवाएं शामिल हैं।
  • एशिया की सबसे बड़ी और विश्व की तीसरी बड़ी रेल प्रणाली है।
  • विश्व की सबसे अधिक विद्युतीकृत रेलगाड़ियाँ रूस के बाद भारत में ही चलती हैं।
  • बड़ी मात्रा में रोजगार उपलब्ध कराना।
  • आरामदायक एवं सस्ता परिवहन।

प्रश्न 3.भारत के विभिन्न डाक चैनल का संक्षेप में विवरण दीजिए।

उत्तर- (i) राजधानी चैनल- नई दिल्ली से 5 विशेष राज्यों की राजधानीयों के लिए यह डाक सेवा है जिसके लिए पीले रंग की पत्र-पेटियाँ प्रयोग में लाई जाती हैं।

(ii) मेट्रो चैनल- बेंगलूरू, कोलकाता, चेन्नई, दिल्ली, मुम्बई एवं हैदराबाद के लिए यह डाक सेवा है। इसके लिए नीले रंग वाली पत्र-पेटियों का उपयोग करना चाहिए।

(iii) ग्रीन चैनल- स्थानीय पिनकोड अंकित डाक पत्रों को हरे रंग वाली पत्र-पेटी में डाला जाता है।

(iv) दस्तावेज चैनल- समाचार पत्रों एवं विभिन्न पत्रिकाओं को भेजने के लिए यह डाक सेवा है।

(v) भारी चैनल- यह डाक सेवा बड़े व्यावसायिक संगठनों के डाक पत्रों के लिए है।

(vi) व्यापार चैनल -यह डाक सेवा छोटे व्यापारिक संगठनों के डाक पत्रों के लिए उपलब्ध है।

प्रश्न 4.भारत की निर्यात एवं आयात वाली वस्तुओं का उल्लेख कीजिए।

उत्तर- निर्यात की जाने वाली वस्तुएँ- इंजीनियरी सामान, पेट्रोलियम उत्पाद, रत्न और आभूषण, रसायन एवं संबद्ध उत्पाद, वस्त्र, कृषि एवं संबंध उत्पाद, अयस्क एवं खनिज इत्यादि।
आयात की जाने वाली वस्तुएं- पेट्रोलियम एवं संबंधित उत्पाद, मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक सामान, सोना और चाँदी, उर्वरक, रसायन, अलौह धातुएँ एवं अन्य सामान है।
 
प्रश्न 5. भारत के प्रमुख राष्ट्रीय जलमार्गों के बारे में लिखिए।

उत्तर- भारत के पाँच आंतरिक जलमागों को राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित किया गया है। ये जलमार्ग निम्नलिखित हैं-

 (i)राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या 1- यह इलाहाबाद से हल्दिया के बीच 1620 किमी. की लंबाई में है।

(ii) राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या 2- यह सदिया से धुबरी तक 891 किमी. की लम्बाई में ब्रह्मपुत्र नदी में विकसित है। इसका उपयोग भारत और बंगलादेश साझेदारी में करते है।

(iii) राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या 3– कोलम से कोट्टापुरम 205 किमी. लंबा यह जलमार्ग चंपाकारा तथा उद्योगमंडल नहरों सहित पश्चिमी तट नहर में विकसित है। 

(iv) राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या 4- यह गोदावरी कृष्णा नदियों के सहारे 1095 किमी. में फैला है। पुडुचेरी–काकीनाडा नहर के सहारे यह जलमार्ग आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु एवं पुडुचेरी में फैला है।

(v) राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या 5- यह जलमार्ग उड़ीसा राज्य में ईस्ट-कोस्ट कनाल, मताई नदी, ब्राह्मणी नदी एवं महानदी डेल्टा के सहारे 623 किमी. की लंबाई में विकसित की जा रही है।

 दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर: 
प्रश्न 1. भारत के अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर- भारत के अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार की निम्नलिखित विशेषताएं है –
  • समुद्र द्वारा अधिक व्यापार होने के कारण इस देश में बन्दरगाहों का महत्व बढ़ता जा रहा है।
  • निर्यात की वस्तुओं की संख्या तथा मात्रा में दिनानुदिन वृद्धि होती जा रही है।
  • निर्यात के साथ-साथ आयात व्यापार भी बढ़ता जा रहा है।
  • कृषि के सामान तथा औद्योगिक उत्पादनों में वृद्धि होने से अनुकूल व्यापार संतुलन की प्रवृत्ति स्पष्ट हो रही है।
  • भारत सोने चांदी और रत्नों का आयातकर उनके आभूषण तैयार करके पुनः निर्यातकर आय प्राप्त करता है ।
  • देश में इंजीनियरिंग वस्तुओं, साइकिल, सिलाई की मशीनें, बिजली के पंखे इत्यादि का उत्पादन बढ़ा है और इन वस्तुओं के निर्यात में वृद्धि हुई है।
  • भारत का विदेशी व्यापार से भारत में प्रति व्यक्ति आय विकसित देशों की तुलना में बहुत कम होती है। भारत में विदेशी व्यापार से प्रति व्यक्ति आय विकसित देशों की तुलना में बहुत कम होती है।
  • भारत का 95% विदेशी व्यापार समुद्री मार्ग द्वारा होता है, केवल नेपाल, बांगलादेश और पाकिस्तान के साथ-स्थल और नदियों के द्वारा व्यापार होता है।
  • भारत का विदेशी व्यापार, व्यापारिक समझौतों के अनुसार होता है।
  • वर्तमान समय में भारत अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सॉफ्टवेयर महाशक्ति के रूप में उभर रहा है। परिणामस्वरूप, सूचना प्रौद्योगिकी के व्यापार से भी भारत अत्यधिक विदेशी मुद्रा अर्जित कर रहा है।
  • भारत का विदेशी व्यापार प्रधानतः कोलकाता, मुम्बई, चेन्नई, कोचीन, पाराद्वीप, कांडला तथा विशाखापट्नम बन्दरगाहों से होता है।
  • भारत का अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार विभिन्न नए-नए देशों में बढ़ता जा रहा है और नए-नए बाजार बनते जा रहे हैं।

प्रश्न 2.भारत में पाई जानेवाली विभिन्न प्रकार की सड़कों का विस्तृत विवरण दीजिए।

उत्तर- नागपुर सड़क योजना (1943) के आनुसार भारत के समस्त सड़कों को चार वर्गों में रखा गया है:-
(i) राष्ट्रीय राजमार्ग/ महामार्ग
(ii) राज्य राजमार्ग/ प्रांतीय राजमार्ग
(iii) जिला सड़कें
(iv) ग्रामीण सड़कें
(i) राष्ट्रीय राजमार्ग/ महामार्ग- ये सड़कें देश के विभिन्न राज्यों की राजधानियां, औद्योगिक नगरों तथा पत्तनों को आपस में जोड़ने का काम करता है। इस दृष्टि से राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-7 सबसे लंबा राष्ट्रीय राजमार्ग है। वाराणसी, जबलपुर, नागपुर, हैदराबाद, बेंगलुरू एवं मदुरई होते हुए कन्याकुमारी तक इस राजमार्ग की लंबाई 2369 किमी. है।
देश में कुल 228 राष्ट्रीय राजमार्ग हैं, जिनकी कुल लंबाई 66590 किमी. है। सड़कों की कुल लंबाई का यह मात्र 2% है जो यातायात के 40% भाग को ढोता है।
(ii) राज्य राजमार्ग/ प्रांतीय राजमार्ग- ये राज्य की राजधानी को विभिन्न जिला मुख्यालयों और प्रमुख शहरों से जोड़ता है। यह राष्ट्रीय राजमार्गों से भी जुड़ी हुई है। देश में ऐसे सड़कों की लम्बाई कुल सड़कों का मात्र 4% है।
(iii) जिला सड़कें- ये जिला मुख्यालय का संपर्क जिले के अन्य महत्वपूर्ण स्थलों, कस्बों और प्रखंड मुख्यालयों से कराती है। देश के कुल सड़कों में इनका हिस्सा 14% है।
(iv) ग्रामीण सड़कें- ग्रामीण क्षेत्रों को परस्पर जोड़ने के कारण ये सड़के काफी महत्वपूर्ण है। इसके अंतर्गत देश की कुल सड़कों का 80% भाग शामिल है। प्रधानमंत्री सड़क योजना के अन्तर्गत इनका विकास किया जा रहा है।
इसके अतिरिक्त शहरी सड़के एवं विभिन्न योजनाओं के तहत बनी सड़के भी है।
सीमांत सड़कें- राजनीतिक एवं सामरिक दृष्टि से सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कों का निर्माण आवश्यक है। भारत में इन सड़कों का निर्माण एवं रख-रखाव सीमा सड़क संगठन करता है। जिसका गठन 1960 में किया गया था। इन्हीं सड़कों के माध्यम से सीमा पर सैनिकों के लिए आवश्यक सामानों को भेजा जाता है। युद्ध के समय इन सड़कों का महत्व काफी अधिक हो जाती है।
 
प्रश्न 3. भारतीय अर्थव्यवस्था में परिवहन एवं संचार साधनों की महता को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर- परिवहन एवं संचार के साधन किसी भी क्षेत्र या राष्ट्र के समुचित विकास में आधार का कार्य करते हैं। ये साधन उत्पादन एवं उपभोग अथवा माँग एवं आपूर्ति के बीच संबंध स्थापित करते हैं। इसीलिए इन्हें राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा कहा जाता है।संचार के साधनों का महत्व निम्नलिखित है-
  • बड़ी मात्रा में खाद्यान्नों एवं अन्य आवश्यक सामग्रियों को आवश्यक स्थानों पर पहुँचाता है।
  • व्यापारिक गतिविधियों की सूचनाओं का आदान प्रदान होता है जिससे व्यापार में सहायता मिलती है।
  • बाढ़, तूफान, आतंकी गतिविधियों से संबंधित जानकारियां लोगों तक पहुँचाने एवं उन्हें इसके प्रति जागरूक अथवा सचेत करने में संचार के साधनों का उल्लेखनीय योगदान है।
  • ये कच्चे माल को निर्माण स्थल पर एकत्र करते हैं।
  • परिष्कृत उत्पादों को देश के विभिन्न हिस्सों में पहुंचाते हैं।
  • यह देश की रक्षा में लगी हुई सेनाओं के लिए आहार, गोलाबारूद और अन्य आवश्यक सामानों की आपूर्ति करता है।
प्रश्न 4.  भारत मे पाइपलाइन परिवहन का वर्णन कीजिए।
उत्तर-  पाइपलाइन का उपयोग मुखयतः नगरों में जल वितरण के लिए किया जाता है। परंतु आजकल यह परिवहन का एक प्रमुख साधन बन गया है । कच्चे पेट्रोलियम तेल तथा प्राकृतिक गैस के परिवहन के लिये यह सुगम, सक्षम एवं सुविधाजनक साधन बन गया है। ठोस पदार्थों का घोल बनाकर भी इसे एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजा जा सकता है। 
         भारत मे कच्चा तेल परिवहन के लिये पूर्वी तथा उत्तर-पूर्वी भारत और पश्चिमी भारत मे पाइपलाइनें बिछाई गई। 1959 में ऑयल इंडिया लिमिटेड की स्थापना एक निगम के रूप में हुई थी और इसने असम के नहरकटिया तेल क्षेत्र से बरौनी के तेलशोधक कारखाने तक एशिया की पहली सबसे लंबी 1157 किमी० भूमिगत पाइपलाइन का निर्माण किया था। 1986 में इसे बढ़ाकर कानपुर तक ले जाया गया। 
         भारतीय गैस प्राधिकरण लिमिटेड (गेल) देश में लगभग 4500 किलोमीटर लम्बे गैस पाइपलाइन का संचालन करता है। गुजरात मे हजीरा से उत्तर प्रदेश के जगदीशपुर तक 1730 किलोमीटर लंबा हजीरा-बीजापुर-जगदीशपुर गैस पाइपलाइन है। इसे ही एच०बी०जे० गैस पाइपलाइन कहा जाता है। 

         ठोस पदार्थों के परिवहन की दृष्टि से कुद्रेमुख-मंगलौर पाइपलाइन लौह अयस्क के लिये उदयपुर जिला स्थित महन की खानों से देबारी प्रगलक कारखाना तक रॉक फास्फेट सांद्र के परिवहन के लिए पाइपलाइन प्रसिद्ध है।


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इकाई-3. निर्माण उद्योग / बिहार बोर्ड-10 Geography Solutions खण्ड (क)

बिहार बोर्ड वर्ग-10वाँ Geography Solutions

खण्ड (क) इकाई-3. निर्माण उद्योग

निर्माण उद्योग


निर्माण उद्योग

वस्तुनिष्ट प्रश्नोत्तर
 1. इनमें से कौन औद्योगिक अवस्थिति का कारक नहीं है?
(a) बाजार
(b) जनसंख्या
(c) पूंजी
(d) ऊर्जा
उत्तर- (b) जनसंख्या
 2. भारत में सबसे पहले स्थापित लौह इस्पात कंपनी निम्नांकित में से कौन है?
(a) भारतीय लौह और इस्पात कंपनी (IISCO)
(b) टाटा लौह इस्पात कंपनी (TISCO)
(c) बोकारो स्टील सिटी
(d) विश्वेश्वरैया लौह और इस्पात उद्योग
उत्तर- (b) टाटा लौह इस्पात कंपनी (TISCO)
 3. पहली आधुनिक सूती निम्न मिल मुम्बई में स्थापित की गई थी, क्योंकि
(a) मुम्बई एक पत्तन है।
(b) यह कपास उतपादक क्षेत्र के निकट स्थित है।
(c) मुम्बई में पूंजी उपलब्ध थी।
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर- (d) उपर्युक्त सभी
 4. निम्नांकित में से कौन उद्योग कृषि पर आधारित नहीं है?
(a) सूतीवस्त्र
(b) सीमेंट
(c) चीनी
(d) जूट
उत्तर- (b) सीमेंट
 5. हुगली औद्योगिक प्रदेश का केन्द्र है?
(a) कोलकता-रिसड़ा
(b) कोलकाता-कोन्नागरि
(c) कोलकाता-मोदिनीपुर
(d) कोलकाता-हावड़ा
उत्तर- (d) कोलकाता-हावड़ा
 6. निम्नलिखित में से कौन उद्योग सार्वजनिक क्षेत्र के अंतर्गत आता है?
(a) जे०के ० सीमेंट उद्योग
(b) टाटा लौह एवं इस्पात
(c) बोकारो लौह इस्पात उद्योग
(d) रेमण्ड कृत्रिम वस्त्र उद्योग
उत्तर- (c) बोकारो लौह इस्पात उद्योग
 7. इनमें से कौन उपभोक्ता उद्योग है?
(a) पेट्रो – रसायन
(b) लौह-इस्पात
(c) चीनी उद्योग
(d) चितरंजन लोकोमोटिव
उत्तर- (c) चीनी उद्योग
 8. निम्नलिखित में से कौन छोटे पैमाने का उद्योग है?
(a) चीनी उद्योग
(b) कागज उद्योग
(c) खिलौना उद्योग
(d) विद्युत उपकरण उद्योग
उत्तर- (c) खिलौना उद्योग
9. भोपाल त्रासदी में किस गैस का रिसाव हुआ था?
(a) कार्बन डाइऑक्साइड
(b) कार्बन मोनोऑक्साइड
(c) मिथाई आइसोसाइनाइट
(d) सल्फर डाईऑक्साइड
उत्तर- (c) मिथाई आईसोसाइनाइट
लघु उत्तरीय  प्रश्नोत्तर:
प्रश्न 1. विनिर्माण से आप क्या समझते हैं?
उत्तर- कच्चे मालों द्वारा जीवनोपयोगी वस्तुएं तैयार करना विनिर्माण उद्योग कहलाता है। वर्तमान समय में यह किसी भी राष्ट्र के विकास एवं सम्पन्नता का सूचक है। जैसे – कपास से कपड़ा, गन्ने से चीनी, लौह-अयस्क से लोहा एवं इस्पात, बॉक्साइट से एल्युमिनियम आदि का निर्माण होता है।
प्रश्न 2. सार्वजनिक और निजी उद्योग में अंतर स्पष्ट करें?
उत्तर- सार्वजनिक उद्योग- वैसे उद्योग जिनका संचालन सरकार स्वयं करती है, सार्वजनिक उद्योग कहलाता है। इसमें भारी तथा आधारभूत उद्योग सम्मिलित है। जैसे- दुर्गापुर, भिलाई, राउरकेला लोहा इस्पात केन्द्र।
निजी उद्योग- वैसे उद्योग जिनका स्वामित्व किसी एक व्यक्ति या संस्था के पास होता है निजी उद्योग कहलाता है। जैसे-टाटा आयरन एण्ड स्टील कंपनी।
प्रश्न 3. उद्योगों के स्थानीयकरण के तीन कारकों को लिखिए।
उत्तर- उद्योगों के स्थानीयकरण के तीन कारक निम्नलिखित हैं:-
  (i) कच्चा माल
 (ii) अनुकूल जलवायु
 (iii) मानवीय संसाधन।
प्रश्न 4. कृषि आधारित उद्योग और खनिज आधारित उद्योग के अंतर को स्पष्ट करें।
उत्तर- कृषि आधारित उद्योग-  ऐसे उद्योग जिसके लिए कच्चा माल कृषि से प्राप्त होता है। उसे कृषि आधारित उद्योग कहते है। जैसे- सुतीवस्त्र उद्योग, रेशमी और ऊनी वस्त्र उद्योग, चीनी उद्योग, चाय उद्योग, कहवा उद्योग, जूट उद्योग।
खनिज आधारित उद्योग– ऐसे उद्योग जो अपने कच्चे माल के लिए खनिजों पर निर्भर है, उसे खनिज आधारित उद्योग कहते हैं। लोहा एवं इस्पात, सीमेंट तथा रसायन उद्योग।
प्रश्न 5. स्वामित्व के आधार पर उद्योगों को उदाहरण सहित वर्गीकृत कीजिए।
उत्तर- (i) सार्वजनिक उद्योग- वैसे उद्योग जिनका संचालन सरकार स्वयं करती है, सार्वजनिक उद्योग कहलाता है। इसमें भारी तथा आधारभूत उद्योग सम्मिलित है । जैसे- दुर्गापुर, भिलाई, राउरकेला लोहा इस्पात केन्द्र।
(ii) संयुक्त अथवा सहकारी उद्योग- जब उद्योगों में दो या दो से अधिक व्यक्तियों या सहकारी समितियों का योगदान हो तो उसे संयुक्त अथवा सहकारी उद्योग कहा जाता है। जैसे आइल इंडिया लिमिटेड, महाराष्ट्र के चीनी उद्योग,अमूल्य(गुजरात) इसके उत्तम उदाहरण है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर :
प्रश्न 1.उदारीकरण, निजीकरण और वश्वीकरण से आप क्या समझते हैं? वैश्वीकरण का भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ा है? इसकी व्याख्या करें?
उत्तर- उदारीकरण- उद्योग तथा व्यापार को लालफीता शाही के अनावश्यक प्रतिबंधों से मुक्त करके अधिक प्रतियोगी बनाना उदारीकरण कहा जाता है।
निजीकरण- निजीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें उद्योगों का स्वामित्व किसी एक व्यक्ति या संस्था के पास होता है निजीकरण कहलाता है। इसके परिणामस्वरूप अर्थव्यवस्था पर सरकारी एकाधिकार कम या समाप्त हो जाता है।
वैश्वीकरण- वैश्वीकरण का अर्थ है देश की अर्थव्यवस्था को विश्व की अर्थव्यवस्था के साथ जोड़ना, अर्थात् प्रत्येक देश का अन्य देशों के साथ बिना किसी प्रतिबंध के पूँजी, तकनीकी एवं व्यापारिक आदान-प्रदान ही वैश्वीकरण है।
वैश्वीकरण का भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव   
            भारत सरकार की नवीन आर्थिक नीतियाँ वैश्वीकरण को परिभाषित करने में लगी हुई हैं। हमारा उद्देश्य भारतीय अर्थव्यवस्था का विश्व की अन्य अर्थव्यवस्थाओं के साथ सामंजस्य स्थापित करना है।
             इसके अन्तर्गत सभी वस्तुओं के आयात में खुली छूट, सीमा शुल्क में कमी, विदेशी पूँजी की मुक्त प्रवाह की अनुमति, सेवा क्षेत्र विशेषकर बैंकिंग, बीमा और जहाज रानी क्षेत्रों में विदेशी पूंजी निवेश की छूट और रुपयों को पूर्ण परिवर्तनशील करना है। इन उद्देश्यों की पूर्ति हेतु भारतीय अर्थव्यवस्था का तेजी से वैश्वीकरण हो रहा है। परिणामस्वरूप कई क्षेत्रों में उत्साहवर्द्धक उपलब्धियाँ प्राप्त हुई हैं। विदेशी मुद्रा का भण्डार काफी बढ़ गया है, किन्तु हाल ही में निर्यात और कृषि दरों में गतिरोध उत्पन्न हुआ है। विश्वव्यापी मंदी के बावजूद चीन की छोड़कर अन्य विकासशील देशों की तुलना में भारत में सकल घरेलू उत्पाद की दर अधिक है। किन्तु सामाजिक क्षेत्रों की प्रगति संतोषजनक नहीं है। रोजगार सृजन के अवसर कम हुए हैं। गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम प्रभावित हुआ है। अनाज का विपुल भंडार रहते हुए भी भारी संख्या में भारतवासी कुपोषण के शिकार हैं। इसका मुख्य कारण उनमें क्रयशक्ति की कमी है।
              वैश्वीकरण स स्वदेशी उद्योगों विशेषकर कुटीर एवं लघु उद्योगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। यह बात स्पष्ट रूप से कही जा सकती है कि वैश्वीकरण से हमारी अर्थव्यवस्था पर और औद्योगिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
प्रश्न 2.भारत में सूचना एवं प्रौद्योगिकी उद्योग का विवरण दीजिए।
उत्तर- इस उद्योग को ज्ञान आधारित उद्योग भी कहते हैं क्योंकि इसमें उत्पादन के लिए विशिष्ट नए ज्ञान, उच्च प्रौद्योगिकी और निरंतर शोध और अनुसंधान की आवश्यकता रहती है।
                         यह वह उद्योग है जो मुख्यतः सूचना प्रौद्योगिकी से संबंधित है। इसने देश के आर्थिक ढाँचे तथा लोगों की जीवनशैली में बहुत क्रांति ला दी है। इस उद्योग के अन्तर्गत आनेवाले उत्पादों में ट्रांजिस्टर से लेकर टी. वी., टेलीफोन, पेपर, राडार, सेल्यूलर टेलीकॉम, लेजर, जैव प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष उपकरण, कम्प्यूटर की यंत्र सामग्री (हार्डवेयर) तथा प्रक्रिया सामग्री (सॉफ्टवेयर) इत्यादि हैं। इन्हें उच्च प्रौद्योगिकी भी कहते हैं।
                           इनके प्रमुख उत्पादक केन्द्र बंगलूर, मुम्बई, दिल्ली, हैदराबाद, पूणे, चेन्नई, कोलकता, कानपुर तथा लखनऊ हैं। इसके अतिरिक्त 20 सॉफ्टवेयर प्रौद्योगिकी पार्क हैं जो सॉफ्टवेयर विशेषज्ञों को एकल विंडो सेवा तथा उच्च ऑकड़े संचार सुविधा प्रदान करते हैं। इसका प्रमुख महत्व रोजगार उपलब्ध कराना है। पिछले दो या तीन वर्षों से यह उद्योग विदेशी मुद्रा प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन गया है। जिसका कारण तेजी से बढ़ता व्यवसाय प्रक्रिया बाह्यस्रोतीकरण है। इससे जुड़ी अर्थव्यवस्था को ज्ञान अर्थव्यवस्था भी कहा जाता है।
प्रश्न 3.भारत में सूतीवस्त्र उद्योग के वितरण का वर्णन करें।
उत्तर- सूतीवस्त्र बनाने में भारत का एकाधिकार बहुत प्राचीन काल से चला आ रहा है। परन्तु पहली आधुनिक सूती मिल की स्थापना सन् 1818 ई. में कोलकता के निकट फोर्ट ग्लास्टर नामक स्थान पर की गयी जो कुछ समय बाद बंद हो गई और पहली सफल मिल मुम्बई में सन् 1854 ई. में काबस जी नानाभाई डाबर ने लगाई के साथ ही भारत में आधुनिक वस्त्र उद्योग का विकास होने लगा । वर्तमान में यह भारत का सबसे विशाल उद्योग है जो कृषि के बाद दूसरा बड़ा रोजगार प्रदान करता है।
वितरण :-
                देश के अधिकांश सूती वस्त्र मिलें महारष्ट्र, गुजरात, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडू, उत्तर प्रदेश, पंजाब में मिलता है।

महाराष्ट्र- यह भारत का सबसे बड़ा सूती वस्त्र तैयार करने वाला राज्य है। यहाँ के मुख्य केन्द्र मुम्बई, शोलापुर, पूणे, वर्धा, नागपुर, औरंगाबाद और जलगाँव हैं।

गुजरात- इसके प्रमुख केन्द्र अहमदाबाद, बड़ौदा, सूरत, भड़ोंच, पोरबंदर, भावनगर एवं नादियार हैं।

पश्चिम बंगाल- इसके मुख्य केन्द्र आवड़ा, मुर्शिदाबाद, हुगली और श्रीरामपुर हैं।

उत्तर प्रदेश- इसके मुख्य केन्द्र मानपुर, मुरादाबाद, आगरा और मोदीनगर हैं।

मध्य प्रदेश- ग्वालियर, उज्जैन, इंदौर और देवास इसके प्रमुख केन्द्र हैं।

तमिलनाडु- सूती कपड़ों की सर्वाधिक मिलें है। प्रमुख केंद्र  कोयम्बटूर, चेन्नई, मुदैर, तिरुनबेली इत्यादि है।


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Geography Solutions कृषि / बिहार बोर्ड-10 खण्ड (क) इकाई-2.

बिहार बोर्ड वर्ग-10वाँ खण्ड (क) इकाई-2. Geography Solutions कृषिGeography Solutions कृषि


Geography Solutions कृषि

1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें:
 
प्रश्न (क) भारत के दो सबसे महत्वपूर्ण अनाजों के नाम बताओ।

उत्तर- धान और गेहूँ।

प्रश्न (ख) भारत में कौन से तीन प्रमुख मोटे अनाज उगाए जाते हैं?
उत्तर- ज्वार, बाजरा तथा रागी।

प्रश्न  (ग) भारत की तीन नकदी फसलों के नाम बताओ।

उत्तर- भारत की तीन नकदी फसल- गन्ना, कपास एवं तम्बाकू  है।

 प्रश्न (घ)  हमारे देश की सबसे प्रमुख रोपण फसल कौन-सी है?

उत्तर- हमारे देश की सबसे प्रमुख रोपण फसल चाय, कॉफी, रबड़, गन्ना, एवं केला है।

2. अंतर बताओ:

प्रश्न  (क)  नकदी फसल और रोपण फसल।

उत्तर- नकदी फसल- वैसे फसल जिसके उत्पादन को सीधे बाजार में बेचकर नकद पैसा प्राप्त किया जा सकता है, नकदी फसल कहलाता है। जैसे-गन्ना,कपास, केला, तंबाकू इत्यादि। 
रोपण फसल– वैसे फसल जिसे एक बार लगाकर कई वर्षों तक उत्पादन प्राप्त किया जाता है, रोपण कृषि कहलाता है। जैसे–चाय, कॉफी, रबड़, गन्ना, केला इत्यादि।

प्रश्न (ख) व्यापारिक कृषि और निर्वाहक कृषि।

उत्तर– व्यापारिक कृषि- वैसी कृषि जिसे मुख्या रूप सेे व्यापारिक उद्देश्य के लिए किया जाता हो, व्यापारिक कृषि कहलाता है। जैसे-चाय, कॉफी, रबर इत्यादि।
 
 निर्वाहक कृषि- वैसे कृषि जिसका मुख्य उद्देश्य जीवन का निर्वहन करना होता है, निर्वाहक कृषि कहलाती है जैसे-धान, गेहूँ।
 
3. निम्नलिखित में से प्रत्येक के लिए एक शब्द लिखो :
 
प्रश्न (क) हमारे देश में मानसून के आरंभ में बोई जाने वाली और शरद ऋतु में काटी जाने वाली फसल।
उत्तर- खरीफ फसल
 
प्रश्न (ख) वर्षा के पश्चात जाड़े में बोई जाने वाली और वसंत में काटी जाने वाली फसलें।
उत्तर- रबी फसल
 
प्रश्न (ग) भूमि जिसे खेती करके छोड़ दिया गया है ताकि उर्वरता लौट सके और उस पर पुनः खेती हो सके।
उत्तर- चालू परती भूमि।

प्रश्न (घ) कारखाने के उत्पादन से मिलती-जुलती वैज्ञानिक तथा व्यापारिक ढंग से की जाने वाली एक फसली खेती।

उत्तर-चाय
 
लघु उत्तरीय  प्रश्नोत्तर : 
प्रश्न 1. भारत में उपजने वाली दो खाद्य; नकदी एवं रेशेवाली फसलों का नाम लिखो।
उत्तर- भारत मे उपजने वाली
 दो खाद्य फसल- धान, गेहूँ। 
 दो नकदी फसल- गन्ना, तम्बाकू। 
 दो रेशेवाली फसल- कपास, जूट।

प्रश्न 2. उपर्युक्त फसलों के उत्पादन करने वाले दो प्रमुख राज्यों का नाम लिखो।

उत्तर-  निम्नलिखित फसल उत्पादन करने वाले दो प्रमुख राज्य-
धान- पश्चिम बंगाल, उत्तरप्रदेश।
गेहूँ – पंजाब, उत्तर प्रदेश। 
गन्ना- उ. प्र., महाराष्ट्र।
तम्बाकू- आंध्र प्रदेश, तेलंगाना
कपास—महाराष्ट्र, गुजरात
जूट- पश्चिम बंगाल, असम।
प्रश्न 3. भारत में उपजाई जाने वाली वर्षाधीन फसलों के नाम लिखो।
उत्तर- भारत में उपजाई जाने वाली वर्षाधीन फसल- धान, गेहूँ, जूट, ज्वार इत्यादि। 
प्रश्न 4. शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद में कृषि के योगदान की चर्चा कीजिए।
उत्तर –भारत मे कृषि को राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। आज भी देश के लगभग 63 प्रतिशत लोग रोजगार और आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर है। अनेकों भारतीय कृषि उत्पाद विदेशों को नियत किया जाता है जिससे देश को विदेशी मुद्रा प्राप्त होता है । गरम मसाले, चाय, रुई आदि ऐसे ही कृषि उत्पाद है।
          अनेकों कृषि उत्पाद से भारतीय उद्योगों को कच्चे माल की आपूर्ति की जाती है । जैसे- कच्ची रुई(सूती वस्त्र उद्योग का), गन्ना(चीनी उद्योग का), चाय की पत्तियाँ(चाय उद्योग का), जड़ी-बूटियाँ(औषधि-निर्माण उद्योग का) कच्चा जूट(जूट उद्योग का)। इन सभी उद्योगों के विकास से देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है।
              परन्तु दुर्भाग्य की बात यह है कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से आज तक सकल घरेलू उत्पाद में कृषि का योगदान लगातार घट रहा है । जो एक गंभीर चिन्ता का विषय है। कृषि में गिरावट समाज के अन्य क्षेत्रों में गिरावट लाएगा तथा यह क्षेत्रीय विषमता को बढ़ावा देगा। 
प्रश्न 5. भारतीय कृषि की निम्न उत्पादकता के कारणों को संक्षेप में लिखिए।
उत्तर–
कृषि

प्रश्न 6. हरित क्रांति से आप क्या समझते है?

उत्तर- भारत में 1967-68 में पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कृषि उत्पादन में हुए क्रांतिकारी परिवर्तन को हरित क्रांति कहा जाता है। भारत में इसके जन्मदाता महान कृषि वैज्ञानिक एम. एस. स्वामीनाथन थे। इसमें मुख्यतः नए बीजों, खादों, और उर्वरकों का प्रयोग तथा सुनिश्चित जलापूर्ति की व्यवस्था के फलस्वरूप कुछ अनाजों की उपज में अधिक वृद्धि हुई।

प्रश्न 7. भारतीय कृषि के (5)पाँच प्रमुख विशेषताओं को लिखिए।

उत्तर– भारतीय कृषि के (5) पाँच प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखिति है-
 (i) यह देश के आर्थिक जीवन का प्राण है।
(ii) यहाँ की विशाल जनसंख्या के लिए भोजन कृषि से ही प्राप्त होता है।
(iii) जलवायु मिट्टी एवं धरातल की विविधता के कारण भारत में फसलों की विविधता भी पायी जाती है।
(iv) राष्ट्रीय आय में भारतीय कृषि का मुख्य योगदान है।
(v) इससे अनेकों कृषि जन्य उद्योगों को कच्चे माल की आपूर्ति होते है।
प्रश्न 8. भारत में उपजाए जानेवाले प्रमुख खाद्य एवं व्यावसायिक फसलों के नाम लिखिए।
उत्तर– भारत में उपजाए जानेवाले प्रमुख खाद्य फसल- धान, गेहूँ एवं व्यावसायिक फसल- गन्ना, कपास, तम्बाकू है।
 कारण बताओ:
 प्रश्न 1. कपास की खेती दक्कन प्रदेश की काली मिट्टी में अधिकांशतः होती है।
उत्तर- कपास की खेती दक्कन प्रदेश की काली मिट्टी वाले क्षेत्रों में अधिक की जाती है क्योंकि काली मिट्टी में अधिक समय तक नमी को धारण करने की क्षमता होती है जो  कपास की फसल के लिए बहुत जरूरी है। यही कारण है कि कपास की खेती दक्कन प्रदेश की काली मिट्टी में अधिकांशतः होती है। 
प्रश्न 2. गन्ने की उपज उत्तरी भारत की अपेक्षा दक्षिण भारत में अधिक है।
उत्तर- दक्षिण भारत में गन्ने के उत्पादन के लिए उत्तर भारत से अधिक अनुकूल परिस्थितियाँ उपलब्ध हैं। साथ ही दक्षिण भारत में उत्पन्न गन्ने का रस अधिक मीठा होता है जबकि उत्तर  भारत में इसकी मिठास कम होती है। यही कारण है कि गन्ने की उपज उत्तरी भारत की अपेक्षा दक्षिण भारत में अधिक है। 
प्रश्न 3. भारत कपास का आयात एवं निर्यात दोनों करता है।
उत्तर- भारत में उत्पादित कपास छोटे रेशेवाली होती है जिसकी गुणवत्ता भी कम होती है अतः ऐसे कपास को कम कीमत पर निर्यात कर उच्च गुणवत्ता एवं लम्बे रेशेवाली कपास का भारत आयात करता है। इसी कारण से भारत कपास का आयात एवं निर्यात दोनों करता है। 
प्रश्न 4. भारत विश्व का एक अग्रणी चाय निर्यातक देश है।
उत्तर- भारत चाय उत्पादन में विश्व का दूसरा बड़ा देश है। यह अपने कुल उत्पादन का 75% भाग निर्यात कर देता है। भारत से लगभग 20 देशों में चाय का निर्यात होता है। भारतीय चाय की गुणवत्ता अच्छी होती है जिसकी माँग विदेशों में अधिक है। यही कारण है कि भारत विश्व का एक अग्रणी चाय निर्यातक देश बन गया है। इसका मुख्य आयातक देश ग्रेट ब्रिटेन है।

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(ड़) शक्ति (ऊर्जा) संसाधन / बिहार बोर्ड-10 Geography Solutions खण्ड (क) इकाई 1

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खण्ड (क) इकाई 1 (ड़) शक्ति (ऊर्जा) संसाधन

शक्ति


(ड़) शक्ति (ऊर्जा) संसाधन

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोतर 
1. किस राज्य में खनिज तेल का विशाल भंडार है?
(a) असम
(b) राजस्थान
(c) बिहार
(d) तमिलनाडु
उत्तर- (a) असम
2. भारत के किस स्थान पर पहला परमाणु ऊर्जा केंद्र स्थापित किया गया था?
(a) कलपक्कम
(b) नरौरा
(c) राणाप्रताप सागर
(d) तारापुर
उत्तर- (d) तारापुर 
3. कौन सा ऊर्जा स्रोत अनवीकरणीय है?
(a) जल
(b) सौर
(c) कोयला
(d) पवन
उत्तर- (c) कोयला
4. प्राथमिक ऊर्जा का उदाहरण नहीं है?
(a) कोयला
(b) विद्युत
(c) पेट्रोलियम
(d) प्राकृतिक गैस
उत्तर- (b) विद्युत
5. ऊर्जा का गैर-पारम्परिक स्रोत है।
(a) कोयला
(b) विद्युत
(c) पेट्रोलियम
(d) सौर-ऊर्जा
उत्तर- (d) सौर-ऊर्जा
6. गोंडवाना समूह के कोयले का निर्माण हुआ था।
(a) 20 करोड़ वर्ष पूर्व
(b) 20 लाख वर्ष पूर्व
(c) 20 हजार वर्ष पूर्व
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर- (a) 20 करोड़ वर्ष पूर्व 
7. भारत में कोयले का सर्वप्रमुख उतपादक राज्य है:
(a) पश्चिम बंगाल
(b) झारखण्ड
(c) उड़ीसा
(d) छत्तीसगढ़
उत्तर- (b) झारखण्ड
8. सर्वोत्तम कोयले का प्रकार कौन-सा है?
(a) एंथ्रासाइट
(b) पीट
(c) लिग्नाइट
(d) बिटुमिनस
उत्तर- (a) एंथ्रासाइट
9. मुम्बई हाई क्यों प्रसिद्ध है?
(a) कोयले के निर्यात हेतु
(b) तेल शोधक कारखाना हेतु
(c) खनिज तेल हेतु
(d) परमाणु शक्ति हेतु
उत्तर- (c) खनिज तेल हेतु
10. भारत का प्रथम तेल शोधक कारखाना कहाँ स्थित है?
(a) मधुरा
(b) बरौनी
(c) डिगबोई
(d) गुवाहाटी
उत्तर- (c) डिगबोई
11. प्राकृतिक गैस किस खनिज के साथ पाया जाता है?
(a) यूरेनियम
(b) पेट्रोलियम
(c) चुना पत्थर
(d) कोयला
उत्तर- (b) पेट्रोलियम
12. भाखड़ा नंगल परियोजना किस नदी पर अवस्थित है?
(a) नर्मदा
(b) झेलम
(c) सतलज
(d) व्यास
उत्तर- (c) सतलज
13. दक्षिण भारत की सबसे बड़ी नदी घाटी परियोजना है?
(a) तुंगभद्रा
(b) शारावती
(c) चंबल
(d) हीराकुण्ड
उत्तर- (a) तुंगभद्रा 
14. ताप विद्युतकेंद्र का उदाहरण है?
(a) गया
(b) बरौनी
(c) समस्तीपुर
(d) कटिहार
उत्तर- (d) बरौनी
15. यूरेनियम का प्रमुख उतपादक स्थल है:
(a) डिगबोई
(b) झरिया
(c) घाटशिला
(d) जादूगोड़ा
उत्तर- (d) जादूगोड़ा
16. एशिया सबसे बड़ा परमाणु विद्युत गृह है:
(a) तारापुर
(b) कलपक्कम
(c) नरौरा
(d) कैगा
उत्तर- (a) तारापुर
17. भारत के किस राज्य में सौर-ऊर्जा के विकास की सर्वाधिक संभावनाएं हैं?
(a) असम
(b) अरुणाचल प्रदेश
(c) राजस्थान
(d) मेघालय
उत्तर – (c) राजस्थान
18. ज्वारीय एवं तरंग ऊर्जा उत्पादन हेतु भारत के सर्वाधिक अनुकूल परिस्थितियां कहाँ पायी जाती है?
(a) मन्नार की खाड़ी में
(b) खम्भात की खाड़ी में
(c) गंगा नदी में
(d) कोसी नदी में
उत्तर- (b) खम्भात की खाड़ी में
लघु उत्तरीय  प्रश्नोत्तर:
प्रश्न 1.पारम्परिक एवं गैर-पारम्परिक ऊर्जा स्रोतों के तीन-तीन उदाहरण लिखिए।
उत्तर- पारम्परिक ऊर्जा स्रोत – कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, लकड़ी इत्यादि।
गैर-पारम्परिक ऊर्जा स्रोत– बायो गैस, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा, भूतापीय ऊर्जा।
प्रश्न 2. गोण्डवाना समूह के कोयला क्षेत्रों के नाम लिखिए।
उत्तर- गोण्डवाना समूह के कोयला क्षेत्र- 
(i) दामोदर घाटी
(ii) सोन घाटी
(iii) महानदी घाटी
(iv) वर्धा-गोदावरी घाटी।
प्रश्न 3. झारखण्ड राज्य के मुख्य कोयला उत्पादक क्षेत्रों के नाम अंकित कीजिए।
उत्तर-   झारखण्ड राज्य के मुख्य कोयला उत्पादक क्षेत्रों के नामझरिया, बोकारो, गिरीडीह, कर्णपुरा, रामगढ़।
 प्रश्न 4. कोयले के विभिन्न प्रकारों के नाम लिखिए।
उत्तर-   कोयले के विभिन्न प्रकारों के नाम-
(i) ऐंथासाइट
(ii) बिटुमिनस
(iii) लिग्नाइट
(iv) पीट।
प्रश्न 5. पेट्रोलियम से किन-किन वस्तुओं का निर्माण होता है?
उत्तर-  पेट्रोलियम से  गैसोलीन, डीजल, किरासन, तेल, स्नेहक, कीटनाशक दवाएँ, पेट्रोल, साबुन, कृत्रिम रेशा, प्लास्टिक इत्यादि वस्तुओं का निर्माण होता है।
 प्रश्न 6. सागर सम्राट क्या है?
उत्तर- यह मुम्बई तट से 176 किलोमीटर दूर स्थित एक जलयान है जो पानी के भीतर तेल के कुएँ खोदने का कार्य करता है।
 प्रश्न 7. किन्हीं चार तेल शोधक कारखाने का स्थान निर्दिष्ट कीजिए।
उत्तर- असम का डिग्बोई, मुम्बई का तारापुर, बिहार का बरौनी, उत्तर प्रदेश का मथुरा। 
प्रश्न 8. जल विद्युत उत्पादन के कौर-कौन से मुख्य कारक हैं?
उत्तर- जल विद्युत उत्पादन के निम्नलिखित कारण है:- 
   भौतिक दशाएँ –  
  •  सदावाहिनी नदी में प्रचुर जल की राशि
  • नदी मार्ग में ढाल
  • जल का तीव्र वेग
  • प्राकृतिक जल-प्रपात का होना
      आर्थिक दशाएँ-
  • सघन औद्योगिक, 
  • वाणिज्यिक विकास एवं आबाद क्षेत्रों जैसे बाजार
  • पर्याप्त पूँजी निवेश
  • परिवहन  के साधन
  • प्रौद्योगिकी ज्ञान
  • ऊर्जा के अन्य स्रोतों का अभाव।
प्रश्न 9. नदी घाटी परियोजनाओं को बहुउद्देश्यीय क्यों कहा जाता है?
उत्तर- क्योंकि नदी घाटी परियोजनाओं से एक साथ कई उद्देश्यों की पूर्ति होती है, जैसे-
  • सिंचाई के साथ पनबिजली उत्पन्न करना।
  • बाढ़ का नियंत्रण।
  • मृदा अपरदन का नियंत्रण।
  • मत्स्य पालन।
  • पर्यटक स्थल का विकास।
  •  यातायात की सुविधा का विकास।
प्रश्न 10. निम्नलिखित नदी घाटी परियोजनाएँ किन-किन राज्यों में अवस्थित है- हीराकुण्ड, तुंगभद्रा, रिहन्द।
उत्तर-
हीराकुण्ड– उड़ीसा में
तुंगभद्रा– आंध्रप्रदेश में
रिहन्द– उत्तर प्रदेश में 
प्रश्न 11. ताप शक्ति क्यों समाप्य संसाधन है?
उत्तर- ताप शक्ति संयंत्रों में तापीय विद्युत का उत्पादन करने के लिए कोयला, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस का उपयोग होता है। ये सभी जीवाश्म का भंडार सीमित है जो समाप्त हो जायेंग। इसीलिए इसे समाप्य संसाधन कहा जाता है।
 
प्रश्न 12. परमाणु शक्ति किन-किन खनिजों से प्राप्त होता है?
उत्तर- परमाणु शक्ति इल्मेनाइट, बैैनेडियम, एंटीमनी, ग्रेफाइट, यूरेनियम, मोनाजाइट इत्यादि खनिजों से प्राप्त होता है।
 
प्रश्न 13. मोनाजाइट भारत में कहाँ-कहाँ उपलब्ध है?
उत्तर- भारत में मोनाजाइट केरल राज्यों में प्रचुरता से पाया जाता है। इसके अतिरिक्त, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, उड़ीसा इत्यादि के तटीय क्षेत्रों में यह उपलब्ध है।
 
प्रश्न 14. सौर ऊर्जा का उत्पादन कैसे होता है ?
उत्तर- जब फोटोवोल्टाइक सेलों में विपाश्ति सूर्य की किरणों को ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है तो सौर ऊर्जा का उत्पादन होता है।
प्रश्न 15. भारत के किन-किन क्षेत्रों में पवन ऊर्जा के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ हैं ?
उत्तर-  भारत में पवन ऊर्जा के लिए राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र तथा कर्नाटक में अनुकूल परिस्थितियाँ विद्यमान हैं।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर :
प्रश्न 1. शक्ति संसाधनों का वर्गीकरण विभिन्न आधारों के अनुसार सोदाहरण स्पष्ट कीजिए?
उत्तर – शक्ति संसाधनों का वर्गीकरण विभिन्न आधारों के अनुसार निम्नलिखित हैं:-
A. उपयोग स्तर के आधार पर शक्ति के दो प्रकार है-
(i) सतत शक्ति – सौर किरणें, भूमिगत ऊष्मा, पवन, प्रवाहित जल इत्यादि।
(ii) समापनीय शक्ति – कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस इत्यादि।

B. उपयोगिता के आधार पर ऊर्जा को दो भागों में विभाजित किया जाता है 

(i) प्राथमिक ऊर्जा – कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस एवं रेडियोधर्मी खनिज।
(ii) गौण ऊर्जा- विद्युत, क्योंकि यह प्राथमिक ऊर्जा से प्राप्त किया जाता है ।

C. स्रोत की स्थिति के आधार पर शक्ति को दो भागों में बाँटा जाता है-

(i) क्षयशील शक्ति संसाधन- कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस तथा आण्विक खनिज।
(ii) अक्षयशील शक्ति संसाधन- प्रवाही जल, पवन, लहरें, सौर शक्ति इत्यादि।
D. संरचनात्मक गुणों के आधार पर ऊर्जा के दो स्रोत है-
(i) जैविक ऊर्जा स्रोत- मानव एवं अन्य प्राणी।
(ii) अजैविके ऊर्जा स्रोत- जल शक्ति, पवन शक्ति, सौर शक्ति तथा ईंधन शक्ति।

E. समय के आधार पर शक्ति संसाधन दो प्रकार होते है-

(i) पारम्परिक शक्ति संसाधन- कोयला, पेट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैसा
(ii) गैर-पारम्परिक शक्ति संसाधन- सूर्य, पवन, ज्वार, परमाणु ऊर्जा, गर्म झरने इत्यादि।
 
प्रश्न 2. भारत में पारम्परिक शक्ति के विभिन्न स्रोतों का विवरण प्रस्तुत कीजिये?
उत्तर- पारम्परिक शक्ति स्रोत के अन्तर्गत कोयला, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस जैसे खनिज ईंधन सम्मिलित हैं।
(i) कोयला- यह शक्ति और ऊर्जा का महत्वपूर्ण स्रोत है। जनवरी 2008 तक भारत में 1200 मीटर की गहराई तक पाये जाने वाले कोयले का कुल अनुमानित भण्डार 26454 करोड़ टन आँका गया था। भारत में 96 प्रतिशत गोंडवाना समूह का और 4 प्रतिशत टर्शियरी समूह का कोयला पाया जाता है।
(ii) पेट्रोलियम- यह शक्ति के समस्त साधनों में सर्वाधिक महत्वपूर्ण एवं व्यापक रूप से उपयोगी संसाध है। आधुनिक युग में कोई भी राष्ट्र इसके बिना अपने अस्तित्व को कायम नहीं रख सकता है। यह शक्ति स्रोत के साथ-साथ अनेक उद्योग का कच्चा माल भी है। जैसे- गैसोलीन, डीजल, किरासन तेल, स्नेहक, कीटनाशक दवाएँ, पेट्रोल, साबुन, कृत्रिम रेशा, प्लास्टिक इत्यादि बनाये जाते हैं। भारत विश्व का मात्र एक प्रतिशत पेट्रोलियम पैदा करता है। भारत प्रथम बार 1866 में ऊपरी असम घाटी में तेल के कुएँ खोदे गये।1959 में खम्भात के तेल क्षेत्र की खोज हुई। 1975 ई० में मुम्बई हाई में तेल का पता चल गया । इसके बाद भारत में पेट्रोलियम के उत्पादन में वृद्धि होने लगी । 
(iii) प्राकृतिक गैस- यह हमारे वर्तमान जीवन में बड़ी तेजी से एक महत्वपूर्ण ईंधन बनता जा रहा है। इसका उपयोग विभिन्न उद्योगों में मशीन को चलाने में, विद्युत उत्पादन में, खाना पकाने में, मोटर गाड़ियां चलाने में किया जा रहा है।
                  भारत में एक अनुमान के अनुसार प्राकृतिक गैस की संचित भंडार 700 अरब घन मीटर है । 1984 में प्राकृतिक गैस प्राधिकरण की स्थापना देश की प्राकृतिक गैसों के परिवहन, वितरण एवं विपणन हेतु किया गया जो 5340 किलोमीटर गैस पाइप लाइन द्वारा देश भर में फैले उपभोक्ताओं की आवश्यकता पूर्ति करता है।
प्रश्न 3. गोंडवाना काल के कोयले का भारत में वितरण पर प्रकाश डालिये?
उत्तर- गोंडवाना समूह में भारत के 96 प्रतिशत कोयले का भण्डार है इससे कुल उत्पादन का 99 प्रतिशत भाग प्राप्त होता है। यहाँ के कोयले का निर्माण 20 करोड़ वर्ष पूर्व में हुआ था। गंडवाना कोयला क्षेत्र मुख्यतः चार नदी घाटियों में पाये जाते हैं-
(क) दामोदर घाटी क्षेत्र 
(ख) सोन नदी घाटी क्षेत्र
(ग) महानदी घाटी क्षेत्र तथा
(घ) वार्धा-गोदावरी घाटी क्षेत्र।
               गोंडवाना समूह का कोयला क्षेत्र भारत के निम्नलिखित राज्यों में पाया जाता है:-
झारखण्ड- कोयले के भण्डार एवं उत्पादन की दृष्टि से इसका स्थान  देश में प्रथम है। यहाँ के प्रमुख कोयला उत्पादक क्षेत्र-झरिया, बोकारो, गिरिडीह, कर्णपुरा, रामगढ़इत्यादि हैं।
छत्तीसगढ़- सुरक्षित भण्डार की दृष्टि से इस राज्य का स्थान तीसरा किंतु उत्पादन में यह भारत का दूसरा बड़ा राज्य है। यहाँ देश का 15 प्रतिशत सुरक्षित भण्डार है लेकिन उत्पादन 16 प्रतिशत होता है। यहाँ का उत्पादक क्षेत्र है चिरिमिरी, कुरसिया, विश्रामपुर, झिलमिली, सोनहाट, लखनपुर, हासदो-अरंड, कोरबा एवं मांड-रायगढ़ इत्यादि।
उड़ीसा- यहाँ देश का एक चौथाई कोयले का भण्डार है। यहाँ का मुख्य उत्पादक क्षेत्र है तालचर।
महाराष्ट्र- यहाँ भारत का मात्र  3 प्रतिशत कोयला सुरक्षित है। यहाँ के मुख्य उत्पादक क्षेत्र–चाँदा-वर्धा, कांपटी तथा बंदेर हैं।
मध्यप्रदेश- यहाँ देश का मात्र 7 प्रतिशत कोयला का भण्डार है। सिंगरौली, सोहागपुर, जोहिल्ला, उमरिया, सतपुड़ा क्षेत्र इत्यादि मुख्य उत्पादक क्षेत्र हैं।
पश्चिम बंगाल- यह राज्य देश के सुरक्षित भण्डार की दृष्टि से चौथा एवं उत्पादन में 7वां है। रानीगंज यहाँ का मुख्य उत्पादक क्षेत्र है।
प्रश्न 4. कोयले का वर्गीकरण कर उनकी विशेषताओं का उल्लेख को स्पष्ट कीजिए?
उत्तर- कार्बन की मात्रा के आधार पर कोयला को निम्नलिखित चार वर्गों में रखा गया है:-
(i) ऐंथ्रासाइट (Anthracite)- यह सर्वोच्च कोटि का कोयला है जिसमें कार्बन की मात्रा 90% से अधिक होती है। यह जलने पर धुआँ नहीं देता साथ ही साथ देर तक अत्यधिक ऊष्मा देता है। इसे कोकिंग कोयला भी कहा गया है तथा धातु गलाने के काम आता है।
(ii) बिटुमिनस- इसमें कार्बन की मात्रा 70 से 90% होती है। इसे परिष्कृत कर कोकिंग कोइला बनाया जा सकता है। भारत का अधिकतर कोयला इसी श्रेणी का है।
(iii) लिग्नाइट- यह निम्न कोटि का कोयला है । जीसमें कार्बन की मात्रा 30 से 70% होती है। यह धुआँ अधिक एवं ऊष्मा कम देता है। इसे भूरा कोयला भी कहते हैं।
(iv) पीट- इसमें कार्बन 30% से कम पाया जाता है । यह पूर्व केे दलदली क्षेत्र में पाया जाता है।
प्रश्न 5. भारत में खनिज तेल के वितरण का वर्णन कीजिए?
उत्तर- भारत में मुख्यतः पाँच  तेल उत्पादक क्षेत्र हैं–
(i) उत्तरी-पूर्वी प्रदेश- यह देश का सबसे पुराना तेल उत्पादक क्षेत्र है, जहाँ 1886 ई० में तेल के लिए खुदाई की गई थी । ऊपरी असम घाटी, अरुणाचल प्रदेश, नागालैण्ड आदि का विशाल तेल क्षेत्र इसके अन्तर्गत आते है।
(ii) गुजरात क्षेत्र- यह क्षेत्र खम्भात के बेसिन एवं गुजरात के मैदान में विस्तृत है। यहाँ पहली बार 1958 में तेल का पता चला था। इसके मुख्य उत्पादक अंकलेश्वर, कलोल, नवगाँव, कोसांबा, मेहसाना इत्यादि हैं।
(iii) मुम्बई हाई क्षेत्र- यह मुम्बई तट से 176 किमी दूर उत्तर-पश्चिम दिशा में अरब सागर में स्थित है। यहाँ 1975 से तेल खोजने का कार्य शुरू हुआ।
(iv) पूर्वी तट प्रदेश- यह कृष्णा-गोदावरी और कावेरी नदियों के बेसिन तथा मुहाने के समुद्री क्षेत्र में  फैला हुआ है।
(v) बाड़मेर बेसिन- इस बेसिन के मंगला क्षेत्र में सितम्बर 2009 से उत्पादन शुरू हो गया है। यहां प्रतिदिन 56000 बैरल तेल का उत्पादन हो रहा है । 2012 तक यह भारत का 20% पेट्रोलियम उत्पादन करेगा।
प्रश्न 6. जल विद्युत उत्पादन हेतु अनुकूल भौगोलिक एवं आर्थिक कारकों की विवेचना करें।
उत्तर- जल विद्युत उत्पादन हेतु अनुकूल भौगोलिक दशाएँ  निम्नलिखित हैं – 
            भौतिक दशाएँ- 
◆ सदावाहिनी नदी में प्रचुर जल की राशि
◆ नदी मार्ग में ढाल
◆ जल का तीव्र वेग
◆ प्राकृतिक जल-प्रपात का होना
           आर्थिक दशाएँ-
◆ सघन औद्योगिक, 
◆ वाणिज्यिक विकास एवं आबाद क्षेत्रों जैसे बाजार
◆ पर्याप्त पूँजी निवेश 
◆ परिवहन  के साधन
◆ प्रौद्योगिकी ज्ञान
◆ ऊर्जा के अन्य स्रोतों का अभाव।
प्रश्न 7. संक्षिप्त भौगोलिक टिप्पणी लिखें-भाखड़ा-नंगल परियोजना, दामोदर घाटी परियोजना, कोसी परियोजना, हीराकुण्ड परियोजना, रिहन्द परियोजना और तुंगभद्रा परियोजना।
उत्तर- (i) भाखड़ा-नंगल परियोजना- सतलज नदी पर हिमालय प्रदेश में विश्व के सर्वोच्च बाँधों में एक भाखड़ा बांध की ऊंचाई 225 मीटर है। यह भारत की सबसे बड़ी परियोजना है, जहाँ चार शक्ति-गृह बनाये गए हसि। क भाखड़ा में, दो गंगुवाल में और एक कोटला में स्थापित होकर 7 लाख किलोवाट विद्युत उत्पादन कर पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तरांचल, उत्तरप्रदेश, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान तथा जम्मू व कश्मीर राज्यों के कृषि एवं उद्योगों में क्रांतिकारी परिवर्तन ला दिया है।
(ii) दामोदर घाटी परियोजना- यह परियोजना दामोदर नदी के भयंकर बाढ़ से झारखण्ड एवं पश्चिम बंगाल को बचाने के साथ-साथ तलैया, मैथन, कोनार और पंचेत पहाड़ी में बाँध बनाकर 1300 मेगावाट जल विद्युत उत्पन्न करने में सहायक है। इसका लाभ बिहार, झारखण्ड एवं पश्चिम बंगाल को प्राप्त है।
(ii) कोसी परियोजना- उत्तर बिहार का अभिशाप कोसी नदी पर हनुमान नगर(नेपाल) में बाँध बनाकर 20000 किलोवाट बिजली उत्पन्न किया जा रहा है। जिसकी आधी बिजली नेपाल को तथा शेष बिहार को प्राप्त होती है।
(iv) रिहन्द परियोजना- सोन की सहायक नदी पर रिहन्द उत्तरप्रदेश में 934 मीटर लम्बा बाँध और कृत्रिम झील ‘गोविन्द बल्लभ पंत सागर’ का निर्माण कर बिजली उत्पादित की जाती है। इस योजना से 30 लाख किलोवाट विद्युत उत्पादन करने की क्षमता है। यहाँ की बिजली का उपयोग रेणुकूट के अल्युमिनियम उद्योग, चुर्क के सीमेंट उद्योग, मध्य भारत के रेल मार्गों का विद्युतिकरण तथा हजारों नलकूपों के लिए किये जाते है।
(v) हीराकुण्ड परियोजना- महानदी पर विश्व का सबसे लम्बा बाँध (4801) मीटर बनाकर 2.7 लाख किलोवाट बिजली उत्पादन किया जाता है। इससे उड़ीसा एवं आस-पास के कृषि क्षेत्र एवं उद्योग में उपयोग किया जाता है।
(vi) तंगभद्रा परियोजना- यह कृष्णा नदी की सहायक नदी तुंगभद्रा पर आंध्रप्रदेश में स्थित दक्षिण भारत की सबसे बड़ी नदी घाटी परियोजना है जो कर्नाटक एवं आंध्रप्रदेश के सहयोग से तैयार हुआ है। इसकी बिजली उत्पादन क्षमता 1 लाख किलोवाट है जो सिंचाई के साथ-साथ सैकड़ों छोटे-बड़े उद्योगों को बिजली आपूर्ति करता है।
प्रश्न 8. भारत के किन्हीं चार परमाणु विद्युत गृह का उल्लेख कीजिए तथा उनकी विशेषताओं को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर- भारत के चार परमाणु विद्युत गृह निम्न हैं-
(i) तारापुर परमाणु विद्युत गृह- यह एशिया का सबसे बड़ा परमाणु विद्युत गृह है। यहाँ जल उबालने वाली दो परमाणु भट्ठियाँ हैं जिनमें प्रत्येक की उत्पादन क्षमता 200 मेगावाट से अधिक है । अब यहाँ यूरेनियम के स्थान पर थोरियम से प्लूटोनियम बनाकर विद्युत उत्पन्न किए जा रहे हैं, क्योंकि भारत थोरियम के भण्डार में काफी समृद्ध है।
(ii) कलपक्कम परमाणु विद्युत गृह- तमिलनाडु में स्थित यह परमाणु गृह स्वदेशी प्रयास से बना है। यहाँ 335 मेगावाट के दो रिएक्टर क्रमश: 1983 एवं 1985 र्य करना शुरू कर दिया हैं।
(iii) नरौरा परमाणु विद्युत गृह- यह उत्तर प्रदेश के बुलंद शहर के पास स्थित है। यहाँ भी 235 मेगावाट के दो रिएक्टर हैं।
(iv) ककरापास परमाणु विद्युत गृह- गुजरात राज्य में समुद्र के किनारे स्थित इस परमाणु गृह में 1992 से विद्युत उत्पादन प्रारम्भ हुआ है।
प्रश्न 9. शक्ति संसाधनों के संरक्षण हेतु कौन-कौन  कदम उठाये जा सकते हैं? आप उसमें कैसे मदद पहुंचा सकते हैं?
उत्तर- ऊर्जा संकट एक विश्व-व्यापी समस्या का रूप ले चुका है। इसके समाधान के निम्नलिखित उपाए किए जा रहे हैं-
(i) ऊर्जा के प्रयोग में मितव्ययिता- ऊर्जा संकट से बचने के लिए प्रथमतः ऊर्जा के उपयोग में मितव्ययिता बरती जाय। इसके लिए तकनीकी विकास आवश्यक है। ऐसे मोटर गाड़ियों का निर्माण हो जो कम तेल में ज्यादा चलते है। अनावश्यक बिजली का उपयोग रोककर हम ऊर्जा की बचत बड़े स्तर पर कर सकते हैं।
(ii) ऊर्जा के नवीन क्षेत्रों की खोज- ऊर्जा संकट समाधान की दिशा में परम्परागत ऊर्जा के नये क्षेत्रों का अन्वेषन किया जाय। इस दिशा में भारत में 1970 के बाद काफी तेजी आई है तथा अनेक नये-नये पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस के भण्डार का पता लगाया जा चुका है। अरब सागर, कृष्णा-गोदावरी क्षेत्र, राजस्थान क्षेत्र आदि में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस के स्रोत प्राप्त हुए हैं। इसके लिए सुदूर-संवेदी सूचना प्रणाली का भी उपयोग हो रहा है।
(iii) ऊर्जा के नवीन वैकल्पिक साधनों का उपयोग- वैकल्पिक ऊर्जा में पारम्परिक एवं गैर-पारम्परिक दोनों ही ऊर्जा सम्मिलित हैं। इन में से कुछ तो सतत् नवीकरणीय हैं तो कुछ समापनीय हैं । आज वैकल्पिक ऊर्जा में जल विद्युत, पवन ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा, जैव ऊर्जा, भूतापीय ऊर्जा, सौर ऊर्जा आदि का विकास कर उपयोग करना शक्ति के संसाधनों को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। जीवाश्म ऊर्जा के अत्यधिक उपयोग से प्रदूषण, स्वास्थ्य एवं जलवायु परिवर्तन की आशंका प्रबल हो गई है। अतः इसके स्थान पर वैकल्पिक ऊर्जा स्रोंतों पर ध्यान देना होगा।
(iv) अंतर्राष्टीय सहयोग– ऊर्जा संकट से बचने के लिए अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है। विश्व के सभी राष्ट्र आपसी मतभेद को भुलाकर ऊर्जा संकट के समाधान हेतु आम सहमति से नीति निर्धारण करें नहीं तो आनेवाले दिनों में यह विश्व के लिए दुःखदायी साबित होगा।
                       इस संदर्भ में संयुक्त राष्ट्र संघ (U.N.O.) आर्गनाइजेशन ऑफ पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कन्ट्रीज(OPEC), विश्व व्यापार संगठन(WTO), दक्षिण एशियाई 8 देशों का संगठन (G-8) जैसी अंतरष्ट्रीय संस्थाएँ महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
           इन सब के अलावे मैं अपने क्रियाकलाप में परिवर्तन कर इसमें सहायता कर सकता हूँ। जैसे-
★बिजली के बल्बों एवं अन्य उपकरणों का आवश्यकतानुसार प्रयोग कर।
★स्वचालित वाहनों के बजाय पैदल चलकर या साइकिल का अधिक उपयोग कर।
★गैर-परंपरागत ऊर्जा स्रोतों जैसे सौर ऊर्जा, बायोगैस इत्यादि का उपयोग कर।
★लोगों को इस संबंध में अपनी क्षमतानुसार जागरूक कर।

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