आपदा काल में वैकल्पिक संचार व्यवस्था / बिहार बोर्ड-10 Geography Solutions खण्ड (ख) इकाई-5.

बिहार बोर्ड वर्ग-10वाँ Geography Solutions
खण्ड (ख) 

इकाई-5. आपदा काल में वैकल्पिक संचार व्यवस्था

आपदा काल में वैकल्पिक संच


आपदा काल में वैकल्पिक संचार व्यवस्था

वस्तुननिष्ठ प्रश्नोत्तर
1. सामान्य संचार व्यवस्था के बाधित होने का मुख्य कारण है-
(a) केबुल का टूट जाना
(b) संचार टावरों की दूरी
(c) टावरों की ऊँचाई में कमी
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर- (a) केबुल का टूट जाना
2. संचार का सबसे लोकप्रिय साधन है-
(a) सार्वजनिक टेलीफोन
(b) मोबाइल
(c) वॉकी-टॉकी
(d) रेडियों
उत्तर- (b) सार्वजनिक टेलीफोन
3. सुदूर संवेदी उपग्रह (रिमोट सेंसिंग उपग्रह) का प्रयोग किसलिए होता है?
(a) दूर संचार के लिए
(b) मौसम विज्ञान के लिए
(c) संसाधनों की खोज एवं प्रबंधन हेतु
(d) दूरदर्शन के लिए
उत्तर- (b) संसाधनों की खोज एवं प्रबंधन हेतु
लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. सामान्य संचार व्यवस्था के बाधित होने के प्रमुख कारणों को लिखिए।
उत्तर – सामान्य संचार व्यवस्था के बाधित होने के प्रमुख कारण निम्नलिखित है-
◆ केबल टूट जाने,
◆ बिजली आपूर्ति का बाधित होना,
◆ संचार भवनों के ध्वस्त होने पर संचार यंत्रों का क्षतिग्रस्त हो जाना, और
◆ ट्रांसमीशन टावर का क्षतिग्रस्त हो जाना, इत्यादि।
प्रश्न 2. प्राकृतिक आपदा में उपयोग होने वाले किसी एक वैकल्पिक संचार माध्यम की चर्चा कीजिए।
उत्तर – प्राकृतिक आपदा में उपयोग होने वाले वैकल्पिक संचार माध्यम में रेडियो संचार, एमेच्योर अथवा हेम रेडियो तथा उपग्रह संचार है।
रेडियो संचार- रेडियो तरंग इलेक्ट्रोमैग्नेटिक होती है, जिसे एंटीना द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान तक प्रेषित किया जाता है। रेडियो तरंगे निम्न, उच्च और अत्यधिक उच्च फ्रीक्वेंसी की हो सकती है। रेडियो रिसीवर को किसी खास फ्रीक्वेन्सी पर रखकर हम खास संकेत प्राप्त कर सकते है । जैसे, लंबी दूरी से सम्पर्क साधने के लिए उच्च फ्रीक्वेंसी की तरंगों तथा बहुत अधिक फ्रीक्वेंसी वाली तरंगों का प्रयोग कम दूरी के लिए किया जाता है। अत्यधिक उच्च फ्रीक्वेन्सी के बैंडों का प्रयोग हाथ वाला वायरलेस कहा जाता है वाकी-टॉकी जैसे बिना तार के यंत्रों का प्रयोग ऐसे समय में महत्वपूर्ण होता है।
 
दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. प्राकृतिक आपदा में वैकल्पिक संचार माध्यमों का विवरण प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर – प्राकृतिक आपदा में उपयोग होने वाले वैकल्पिक संचार माध्यम में रेडियो संचार, एमेच्योर अथवा हेम रेडियो तथा उपग्रह संचार है।
रेडियो संचार- रेडियो तरंग इलेक्ट्रोमैग्नेटिक होती है, जिसे एंटीना द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान तक प्रेषित किया जाता है। रेडियो तरंगे निम्न, उच्च और अत्यधिक उच्च फ्रीक्वेंसी की हो सकती है। रेडियो रिसीवर को किसी खास फ्रीक्वेन्सी पर रखकर हम खास संकेत प्राप्त कर सकते है। जैसे, लंबी दूरी से सम्पर्क साधने के लिए उच्च फ्रीक्वेंसी की तरंगों तथा बहुत अधिक फ्रीक्वेंसी वाली तरंगों का प्रयोग कम दूरी के लिए किया जाता है। अत्यधिक उच्च फ्रीक्वेन्सी के बैंडों का प्रयोग हाथ वाला वायरलेस कहा जाता है वाकी-टॉकी जैसे बिना तार के यंत्रों का प्रयोग ऐसे समय में महत्वपूर्ण होता है।
एमेच्योर अथवा हेम रेडियो- एमेच्योर रेडियो को हेम रेडियो भी कहा जाता है। इसके लिए आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता नहीं होती है। वास्तव में हेम रेडियो में कुछ विशेष फ्रीक्वेंसी की तरंगों का प्रयोग अन्तर्राष्ट्रीय दूर संचार नियमों के अनुसार होती है, जिनका नियंत्रण भारत में संचार मंत्रालय के अधीन बेतार प्रयोजन एवं समन्वय स्कन्ध द्वारा किया जाता है। एमेच्योर अथवा हेम रेडियो ने बड़ी प्राकृतिक आपदाओं में अन्य संचार साधनों के अवरुद्ध होने पर भी सफलतापूर्वक कार्य किया है। इस प्रकार इसे वैकल्पिक संचार माध्यमों में सबसे अधिक प्रभावशाली अनुभव किया गया है। 1999 में उड़ीसा में आए भीषण चक्रवात (Super Cyclone) और 2001 में गुजरात में भूकम्प के दौरान एमेच्यूर स्वंयसेवकों ने प्रशंसनीय सेवा प्रदान की है।
उपग्रह संचार-  इस प्रणाली में रेडियो में रिले स्टेशन तथा संचार उपग्रह अंतरिक्ष मे होता है और पृथ्वी पर घटने वाली किसी भी प्राकृतिक आपदा से इसे कोई नुकसान नहीं होता है इसीलिए यह विधि आपदा के समय अधिक विश्वसनीय है।
                             आपदा प्रबन्धन में सर्वाधिक उपयोग में लाया जानेवाला संचार साधन उपग्रह फोन है। यह फोन बहुत ही विश्वसनीय साफ आवाज में डाटा संचार की सुविधा प्रदान करता है। भारत सरकार द्वारा विभिन्न राज्यों/जिलों और आपदा प्रभावित क्षेत्रों को आपदाओं से निपटने के लिए पोर्टेबल उपग्रह फोन से लैस कर रही है।
प्रश्न 2. निम्नलिखित पर नोट लिखिए।
(i) हेम रेडियों- एमेच्योर रेडियो को हेम रेडियो भी कहा जाता है। इसके लिए आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता नहीं होती है। वास्तव में हेम रेडियो में कुछ विशेष फ्रीक्वेंसी की तरंगों का प्रयोग अन्तर्राष्ट्रीय दूर संचार नियमों के अनुसार होती है, जिनका नियंत्रण भारत में संचार मंत्रालय के अधीन बेतार प्रयोजन एवं समन्वय स्कन्ध द्वारा किया जाता है। एमेच्योर अथवा हेम रेडियो ने बड़ी प्राकृतिक आपदाओं में अन्य संचार साधनों के अवरुद्ध होने पर भी सफलतापूर्वक कार्य किया है। इस प्रकार इसे वैकल्पिक संचार माध्यमों में सबसे अधिक प्रभावशाली अनुभव किया गया है। 1999 में उड़ीसा में आए भीषण चक्रवात (Super Cyclone) और 2001 में गुजरात में भूकम्प के दौरान एमेच्यूर स्वंयसेवकों ने प्रशंसनीय सेवा प्रदान की है।
(ii) उपग्रह संचार- इस प्रणाली में रेडियो में रिले स्टेशन तथा संचार उपग्रह अंतरिक्ष मे होता है और पृथ्वी पर घटने वाली किसी भी प्राकृतिक आपदा से इसे कोई नुकसान नहीं होता है इसीलिए यह विधि आपदा के समय अधिक विश्वसनीय है।

        आपदा प्रबन्धन में सर्वाधिक उपयोग में लाया जानेवाला संचार साधन उपग्रह फोन है। यह फोन बहुत ही विश्वसनीय साफ आवाज में डाटा संचार की सुविधा प्रदान करता है। भारत सरकार द्वारा विभिन्न राज्यों/जिलों और आपदा प्रभावित क्षेत्रों को आपदाओं से निपटने के लिए पोर्टेबल उपग्रह फोन से लैस कर रही है।


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आपदा और सह-अस्तित्व / बिहार बोर्ड-10 Geography Solutions खण्ड (ख) इकाई 6.

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खण्ड (ख) 

इकाई 6. आपदा और सह-अस्तित्व

आपदा और सह


आपदा और सह-अस्तित्व

वस्तुननिष्ठ प्रश्नोत्तर

1. निम्नलिखितमें कौन प्राकृतिक आपदा है?
(a) आग लगना
(b) बम विस्फोट
(c) भूकंप
(d) रासायनिक दुर्घटनाएँ
उत्तर- (c) भूकंप
2. भूकंप संभावित क्षेत्रों में भवनों की आकृति कैसी होनी चाहिए?
(a) अण्डाकार
(b) त्रिभुजाकार
(c) चौकोर
(d) आयताकार
उत्तर- (d) आयताकार
3. भूस्खलन वाले क्षेत्र में ढलान पर मकानों के निर्माण क्या है?
(a) उचित
(b) अनुचित
(c) लाभकारी
(d) उपयोगी
उत्तर- (b) अनुचित
4. सुनामी प्रभावित क्षेत्र में मकानों के निर्माण कहाँ करना चाहिए?
(a) समुद्र के निकट
(b) समुद्र तट से दूर
(c) समुद्र तट से दूर ऊँचाई पर
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर- (c) समुद्र तट से दूर ऊँचाई पर
5. बाढ़ से सबसे अधिक हानि होती है-
(a) फसल को
(b) पशुओं को
(c) भवनों को
(d) उपरोक्त सभी को
उत्तर- (d) उपरोक्त सभी को
 
6.कृषि सुखाड़ होता ही-
(a) जल के अभाव में
(b) मिट्टी की नमी के अभाव में
(c) मिट्टी के क्षय के कारण
(d) मिट्टी की लवणता के कारण
उत्तर- (b) मिट्टी की नमी के अभाव में
 
लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. भूकम्प के प्रभावों  को कम करने वाले उपायों को लिखिए।
उत्तर – भूकम्प के प्रभावों को कम करने के लिए निम्नलिखित उपायों करना चाहिए-
◆  दो मकानों के बीच की सड़कों या गलियों को चौड़ा रखना चाहिए।
◆  मकान छोटा और आयताकार बनाना चाहिए।
◆  नींव को मजबूत एवं भूकम्परोधी होनी चाहिए।
◆ दरवाजे तथा खिड़कियों की स्थिति भूकम्परोधी होनी चाहिए।
◆ लंबी दीवारों को सहारा देने हेतु ईंट-पत्थर या कंक्रीट के कॉलम होने चाहिए।
 प्रश्न 2. सुनामी सम्भावित क्षेत्रों में गृह निर्माण पर अपना विचार प्रकट कीजिए।
उत्तर- सुनामी संभावित क्षेत्रों में ऐसे मकान का निर्माण हो जो भूकम्प एवं सुनामी लहरों के प्रभाव को न्यून कर सके।
प्रश्न 3. सुखाड़ में मिट्टी की नमी को बनाये रखने के लिए आप क्या करेंगे।
उत्तर- सुखाड़ जैसे प्राकृतिक आपदा को विभिन्न विधियों को अपनाकर इसकी विभीषिका को कम किया जा सकता है। जैसे, जल संसाधन का वैज्ञानिक विकास और प्रबंधन द्वारा जल की समस्या का समाधान किया जा सकता है; क्योंकि सुखाड़ के समय जल के अभाव से न केवल मिट्टी की नमी समाप्त हो जाती है, बल्कि सभी प्राणियों को जान तक बचाना मुश्किल हो जाता है। जल विभाजक के विकास की योजना ऐसी स्थिति में बहुत सहायक होती है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न1.भूस्खलन अथवा बाढ़ जैसी प्राकृतिक विभीषिकाओं का सामना आप किस प्रकार कर सकते हैं। विस्तार से लिखिए।

उत्तर- भूस्खलन अथवा बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं का होना स्वभाविक है, इसे रोका नहीं जा सकता है बल्कि इसके मुकाबले/सामना के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए और आपदा पूर्व ही तैयारी करनी चाहिए ताकि कम से कम क्षति हो सके और याधिक से अधिक लोगों को जान-माल सुरक्षा मिल सके। ऐसा न हो कि हम यह समझ कर नजर अंदाज कर दें कि यह सब एक प्राकृतिक प्रकोप है, इसका सामना करना मनुष्य के लिए असंभव है।


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जीवन रक्षक आकस्मिक प्रबंधन / बिहार बोर्ड-10 Geography Solutions खण्ड (ख) इकाई-4.

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खण्ड (ख)

इकाई-4. जीवन रक्षक आकस्मिक प्रबंधन 

जीवन रक्षक आकस्मिक प्रबं


जीवन रक्षक आकस्मिक प्रबंधन 

वस्तुननिष्ठ प्रश्नोत्तर

1. बाढ़ के समय निम्नलिखित में से किस स्थान पर जाना चाहिए?
(a) ऊँची भूमि वाले स्थान पर
(b) गाँव के बाहर
(c) जहाँ हैं उसी स्थान पर
(d) खेतों में
उत्तर- (a) ऊँची भूमि वाले स्थान पर
 
2. मलबे के नीचे दबे हुए लोगों को पता लगाने के लिए किस यन्त्र की मदद ली जाती है?
(a) दूरबीन
(b) इंफ्रारेड कैमरा
(c) हेलीकॉप्टर
(d) टेलिस्कोप
उत्तर- (b) इंफ्रारेड कैमरा
 
3. आग से जलने की स्थिति में जले हुए स्थान पर क्या प्राथमिक उपचार करना चाहिए?
(a) ठंडा पानी डालना
(b) गर्म पानी डालना
(c) अस्पताल पहुँचाना
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर- (a) ठंडा पानी डालना
 
4. बस्ती/मकान में आग लगने की स्थिति में क्या करना चाहिए?
(a) अग्निशामक यंत्र को बुलाना
(b) दरवाजे-खिड़कियाँ लगाना
(c) आग बुझने तक इंतजार करना
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर- (a) अग्निशामक यंत्र को बुलाना
 
5. सुनामी किस स्थान पर आता है?
(a) स्थल
(b) समुद्र
(c) आसमान
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर- (b) समुद्र
 
लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. जीवन रक्षक आकस्मिक प्रबंधन से आप क्या समझते है?
उत्तर- जीवन रक्षक आकस्मिक प्रबन्धन ही किसी भी प्रशासन की सफलता की कसौटी होती है। इसके अंतर्गत आपदा के आते ही प्रभावित लोगों को आपदा से निजात दिलाना ही प्रमुख उद्देश्य होता है। अलग-अलग प्रकार के प्राकृतिक आपदाओं के आकस्मिक प्रबन्धन में अलग-अलग प्रकार की प्राथमिकताएं होती है।
 
प्रश्न 2. बाढ़ की स्थिति में अपनाए जाने वाले आकस्मिक प्रबंधन का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर – बाढ़ के आते ही जान-माल और मवेशी पर भारी संकट आ जाता है। अतः पहली प्राथमिकता बाढ़ को रोकना नहीं बल्कि बाढ़ से लोगों को बचाना है। सुरक्षित स्थान पर पहुँचाने के बाद भोजन और पेयजल की व्यवस्था आवश्यक है। बच्चों के लिए दूध की व्यवस्था, महामारी से बचने के लिए गर्म जल, गर्म भोजन, तथा छोटे से जगह में मिलजुलकर रहने के लिये वातावरण बनाना आकस्मिक प्रबंधन का ही हिस्सा है।
 
प्रश्न 3. भूकम्प एवं सुनामी की स्थिति में आकस्मिक प्रबंधन की चर्चा संक्षेप में कीजिए।
उत्तर – भूकम्प एवं सुनामी की स्थिति में आकस्मिक प्रबंधन का तीन प्रमुख कार्य होता है –
(i) बच्चे हुए विस्थापित लोगों को राहत कैम्प में ले जाना या उसे सभी प्रकार की आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना।
(ii) वैसे लोगों को मलबे से निकालना जो अभी भी दबे हुए है।
(iii) अकाल मृत्यु प्राप्त आम लोगों को और जानवरों को सही स्थानों पर दफनाकर या धार्मिक रीतियों के अनुरूप अंतिम संस्कार करना। ऐसा न करने से महामारी फैलने की संभावना रहती है।
 
प्रश्न 4. आकस्मिक प्रबन्धन में स्थानीय प्रशासन की भूमिका का वर्णन करें।
उत्तर – आकस्मिक प्रबंधन में स्थानीय प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके लिए आवश्यक है कि वे राहत शिविर का निर्माण करें। वहाँ सभी उपकरण और प्राथमिक उपचार की सामग्रीयाँ उपलब्ध कराएं तथा एम्बुलेंस, डॉक्टर, अग्निशामक इत्यादि की व्यवस्था में तत्परता दिखायें । कागजी दाव पेंच में न पड़कर राहत राशि और राहत सामग्री को पहुँचाकर आपदा प्रबंधन को सरल तथा सहज बना सकते हैं।
 
प्रश्न 5. आग लगने की स्थिति में क्या प्रबंधन करना चाहिए?  उल्लेख करें।
उत्तर –  आग लगने की स्थिति में  निम्नलिखित प्रबंधन करना चाहिए-
(i) आग में फंसे हुए लोगों को बाहर निकलना।
(ii) घायलों को तत्काल प्राथमिक उपचार देकर अस्पताल पहुंचाना।
(iii) आग के फैलाव को रोकना इत्यादि।
 
दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर
 
प्रश्न 1. जीवन रक्षक आकस्मिक प्रबंधन से आप क्या समझते है?
उत्तर – जीवन रक्षक आकस्मिक प्रबन्धन ही किसी भी प्रशासन की सफलता की कसौटी होती है। इसके अंतर्गत आपदा के आते ही प्रभावित लोगों को आपदा से निजात दिलाना ही प्रमुख उद्देश्य होता है। अलग-अलग प्रकार के प्राकृतिक आपदाओं के आकस्मिक प्रबन्धन में अलग-अलग प्रकार की प्राथमिकताएं होती है।
 
प्रश्न 2. आकस्मिक प्रबंधन में स्थानीय प्रशासन एवं स्वंयसेवी संस्थाओं की भूमिका का विस्तार से उल्लेख कीजिए।
उत्तर – आकस्मिक प्रबंधन में स्थानीय प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके लिए आवश्यक है कि वे राहत शिविर का निर्माण करें। वहाँ सभी उपकरण और प्राथमिक उपचार की सामग्रीयाँ उपलब्ध कराएँ तथा एम्बुलेंस, डॉक्टर, अग्निशामक इत्यादि की व्यवस्था में तत्परता दिखायें। कागजी दाव पेंच में न पड़कर राहत राशि और राहत सामग्री को पहुँचाकर आपदा प्रबंधन को सरल तथा सहज बना सकते हैं।

                 प्रबंधन की अग्रिम पंक्ति में गाँव और मुहल्ले के लोग हो सकते है। इसके लिए युवकों को मानसिक रूप से सुदृढ़ और तकनीकी रूप से प्रशिक्षित करने की जरूरत है। यह कार्य स्वयंसेवी संस्थाएं कर सकती है। वस्तुतः स्वंयसेवी संस्थाओं के लिए आवश्यक है कि वे न सिर्फ युवकों को प्रेरित और प्रशिक्षित करें वरन लोगों को फिल्म या विडियो को दिखाकर बहादुरी के कारनामों को दिखायें जिससे कि आपदाओं से लड़ने की मानसिक दृढ़ता उत्पन्न होगी। अतः स्वयंसेवी संगठन तो सेवाभाव से स्वतः ओतप्रोत होते है। फिर भी, उन्हें निरंतर प्रशिक्षित करते रहना चाहिए कि आपदा के समय वे जाती, धर्म, स्त्री- पुरुष इत्यादि की भावना से ऊपर उठकर काम करें।


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प्राकृतिक आपदा एवं प्रबंधन : भूकम्प एवं सुनामी / बिहार बोर्ड-10 Geography Solutions खण्ड (ख) इकाई-3.

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खण्ड (ख)

इकाई-3. प्राकृतिक आपदा एवं प्रबंधन : भूकम्प एवं सुनामी

प्राकृतिक आपदा एवं प्रबं


प्राकृतिक आपदा एवं प्रबंधन : भूकम्प एवं सुनामी

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर
1. महासागर की तली पर होने वाले कम्पन्न को किस नाम से जाना जाता है?
(a) भूकंप
(b) चक्रवात
(c) सुनामी
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर- (c) सुनामी
 
2. 26 दिसंबर,2004 को विश्व के किस हिस्से में भयंकर सुनामी आया था?
(a) पश्चिम एशिया
(b) प्रशांत महासागर
(c) अटलांटिक महासागर
(d) बंगाल की खाड़ी
उत्तर- (d) बंगाल की खाड़ी
3.भूकंप से पृथ्वी की सतह पर पहुंचने वाली सबसे पहली तरंग को किस नाम से जाना जाता है?
(a) पी-तरंग
(b) एस-तरंग
(c) एल-तरंग
(d) टी-तरंग
उत्तर- (a) पी-तरंग
4. भूकंप केंद्र के ऊर्ध्वाधर पृथ्वी पर स्थित केंद्र को क्या कहा जाता है?
(a) भूकंप केंद्र
(b) अधि केंद्र
(c) अनु केंद्र
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर- (b) अधि केंद्र
5. भूकम्प अथवा सुनामी से बचाव का इनमें से कौन सा तरीका सही नहीं है?
(a) भूकंप के पूर्वानुमान को गंभीरता से लेना,
(b) भूकंप निरोधी भवनों का निर्माण मरना,
(c) गैर-सरकारी संगठनों द्वारा राहत कार्य हेतु तैयार रहना,
(d) भगवान भरोसे बैठे रहना।
उत्तर- (d) भगवान भरोसे बैठे रहना।
 
लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. भूकम्प के केंद एवं अधिकेंद्र के बीच अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – अधिकेंद्र- भूपटल पर वे केंद्र जहाँ भूकम्प के तरंग का सर्वप्रथम अनुभव होता है, उसे अधिकेंद्र कहा जाता है।
भूकम्प केंद्र– भूपटल के नीचे का वह स्थल जहाँ भूकम्पीय कम्पन्न प्रारम्भ होता है, उसे भूकम्प केंद्र कहा जाता है।
 
प्रश्न 2. भूकम्पीय तरंगों से आप क्या समझते है ? प्रमुख भूकम्पीय तरंगों के नाम लिखिए।
उत्तर – भूकम्प के समय उठनेवाले कम्पन को तरंग कहा जाता है। यह मुख्यतः प्राथमिक (P), द्वितीयक(S), तथा (L) तरंगों में बाँटा जाता है।
◆ P तरंग सबसे पहले पृथ्वी की सतह पर पहुंचता है।
◆S तरंग अनुप्रस्त तरंग है और इसकी गति प्राथमिक तरंग से कम होती है।
◆ L तरंग भूपटलीय सतह पर उत्पन्न होती है, इसकी गहनता सबसे कम होती है। धीमी गति के साथ क्षैतिज रूप से चलने के कारण यह किसी स्थान पर सबसे बाढ़ में पहुँचती है। लेकिन यह सर्वाधिक विनाशकारी तरंग होती है।
 
प्रश्न 3. भूकम्प और सुनामी के बीच अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – भूकम्प हमेशा स्थलखण्ड पर उत्पन्न होती है जबकि सुनामी हमेशा समुद्र में ही उत्पन्न होती है। अर्थात जब कम्पन्न स्थलखण्ड पर होती है तो उसे भूकम्प और जब कम्पन्न समुद्र तल में होती है तो उसे सुनामी कहा जाता है।
 
4. सुनामी से बचाव के कोई तीन उपाय बताइए?
उत्तर – सुनामी से बचाव के कोई तीन उपाय निम्नलिखित है –
(i) सुनामी के पूर्वानुमान हेतु समुद्र के बीच में स्टेशन/प्लेटफार्म बनाने की जरूरत है।
(ii) इसके प्रभाव को कम करने के लिए कांक्रीट तटबंध बनाना चाहिए।
(iii) राज्य सरकार या गैर-सरकारी संस्थाओं द्वारा तटीय प्रदेश में रहनेवाले लोगों को सुनामी से बचाव का प्रशिक्षण देने की व्यवस्था करनी चाहिए।
 
दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर
 प्रश्न 1. भूकम्प क्या है? भारत को प्रमुख भूकम्प क्षेत्रों में विभाजित करते हुए सभी क्षेत्रों का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
उत्तर –  भूकम्प दो शब्दों के मिलने से बना है -भू +कम्प
भू=भूपटल 
कम्प =कम्पन
                इस प्रकार भूपटल में उत्पन्न होने वाला किसी भी प्रकार के कम्पन को भूकम्प कहते है। 
                       भारत के अधिकांश भूकम्प भ्रंशघाटी के सहारे आते है। ये भ्रंशघाटी हिमालय पर्वतीय क्षेत्र एवं प्रायद्वीपीय भारत दोनों में स्थित है। भारत में भूकम्पीय पेटी को प्रायः तीन पेटी में बांटकर अध्ययन करते है-

1) हिमालय भूकम्पीय पेटी- यहाँ प्रायः भीषण भूकम्प आते है क्योंकि यहाँ यूरोपियन एवं इंडियन प्लेट अभिसरण के स्थिति में है। प्लेटों के अभिसरण के कारण हिमालय क्षेत्र में कई भ्रंशरेखा का निर्माण हुआ है। जैसे– भारत के अधिकांश भूकम्प भ्रंशघाटी के सहारे आते है । ये भ्रंशघाटी हिमालय पर्वतीय क्षेत्र एवं प्रायद्वीपीय भारत दोनों में स्थित है । भारत में भूकम्पीय पेटी को प्रायः तीन पेटी में बांटकर अध्ययन करते है              हिमालय प्रदेश में सर्वाधिक भूकम्प कुमायूं हिमालय में आती है। 1991 ई० में आया उत्तर काशी का भूकम्प सबसे प्रसिद्ध है। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में 2006 ई० में मुज़फ़्फ़राबाद का भूकम्प प्रसिद्ध है।

2) उत्तरी मैदानी क्षेत्र- यह हिमालय से सटा हुआ है। यहाँ पर भयंकर भूकम्प की संभावना बनी रहती है। 1934 में आया भयंकर भूकम्प का केंद्र बिन्दु दरभंगा में अवस्थित था। उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों में भूकम्प आने का प्रमुख कारण शिवालिक हिमालय के दक्षिण भाग में Front Fault/अग्र भ्रंश का पाया जाना है।

3) प्रायद्वीपीय भारत– प्रायद्वीपीय भारत प्रायः भूकम्प रहित क्षेत्र है क्योंकि यह प्राचीनतम चट्टानों से निर्मित दृढ़ भूखण्ड है । फिर भी यहाँ पर अपवाद स्वरूप कई भूकम्प रिकॉर्ड किये गए है। जैसे -1956 में कच्छ का भूकम्प, 1967 में कोयना का भूकम्प, 1993 में लातूर(महाराष्ट्र) का भूकम्प, 1997 में जबलपुर का भूकम्प, 26 जनवरी 2001 को आया भूज का भूकम्प प्रसिद्ध है।

             प्रायद्वीपीय भारत में छोटे-छोटे कई घाटी मिलते है। जैसे- सोन के सहारे सोन भ्रंश, नर्मदा के नर्मदा  भ्रंश, दामोदर के दामोदर भ्रंश, गोदावरी के सहारे गोदावरी भ्रंश, कृष्णा के सहारे कृष्णा भ्रंश, कावेरी के सहारे ग्रेट म्योर भ्रंश, महाराष्ट्र में कोयना & कुदिवाड़ी भ्रंश, और असम में मेघालय पर्वत के सहारे कोपील भ्रंश पाये जाते है। 

                इन्हीं भ्रंशों के सहारे अकसर भूकम्प आते रहते है।

प्रश्न 2. सुनामी से आप क्या समझते है? सुनामी से बचाव के उपायों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर – समुद्र के अंदर उत्पन्न होने वाले भूकंप को सूनामी(Tsunami) कहते है। सूनामी जापानी शब्द है जिसका अर्थ समुद्री तरंग होता है।
        सुनामी से बचाव के उपाय निम्नलिखित है-
(i) सुनामी के पूर्वानुमान हेतु समुद्र के बीच में स्टेशन/प्लेटफार्म बनाने की जरूरत है।
(ii) इसके प्रभाव को कम करने के लिए कांक्रीट तटबंध बनाना चाहिए।
(iii) राज्य सरकार या गैर-सरकारी संस्थाओं द्वारा तटीय प्रदेश में रहनेवाले लोगों को सुनामी से बचाव का प्रशिक्षण देने की व्यवस्था करनी चाहिए।
 
प्रश्न 3. भूकम्प एवं सुनामी के विनाशकारी प्रभाव से बचने के उपायों का वर्णन कीजिए।
उत्तर – भूकम्प और सुनामी  के विनाशकारी प्रभाव से बचने के उपाय निम्नलिखित है-
           भूकम्प के विनाशकारी प्रभाव से बचने के उपाय-
(i)  भूकम्प का पूर्वानुमान की व्यवस्था करना।
(ii) भूकम्प रोधी तकनीकी के आधार पर भवनों का निर्माण।
(iii) जान माल की सुरक्षा हेतु विशेष सुरक्षा बल की व्यवस्था।
(iv) भूकम्प की बर्बादी को रोकने में प्रशानिक सतर्कता भी अति आवश्यक है।
(v)  भूकम्प जैसी आपदा होने पर जात-पात और धर्म को भूलकर मदद के लिए सभी को आगे आना चाहिए।
         सुनामी के विनाशकारी प्रभाव से बचने के उपाय- 
(i) सुनामी के पूर्वानुमान हेतु समुद्र के बीच में स्टेशन/प्लेटफार्म बनाने की जरूरत है।
(ii) इसके प्रभाव को कम करने के लिए कांक्रीट तटबंध बनाना चाहिए।

(iii) राज्य सरकार या गैर-सरकारी संस्थाओं द्वारा तटीय प्रदेश में रहनेवाले लोगों को सुनामी से बचाव का प्रशिक्षण देने की व्यवस्था करनी चाहिए।


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खण्ड (ख) इकाई 2. प्राकृतिक आपदा एवं प्रबंधन : बाढ़ और सुखाड़ / बिहार बोर्ड-10 Geography Solutions

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खण्ड (ख)

इकाई-2. प्राकृतिक आपदा एवं प्रबंधन : बाढ़ और सुखाड़

प्राकृतिक आपदा


प्राकृतिक आपदा एवं प्रबंधन : बाढ़ और सुखाड़

वस्तुननिष्ठ प्रश्नोत्तर
1. नदियों में बाढ़ आने का प्रमुख कारण क्या है?
(a) जल की अधिकता
(b) नदी की तली में अवसाद का जमाव
(c) वर्षा का अधिकता
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर- (d) उपर्युक्त सभी

2. बिहार का कौन सा क्षेत्र बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र है?
(a) पूर्वी बिहार
(b) दक्षिणी बिहार
(c) पश्चिमी बिहार
(d) उत्तरी बिहार
उत्तर- (d) उत्तरी बिहार

3. निम्लिखित में से किस नदी को बिहार का शोक कहा जाता है?
 (a) गंगा
(b) गंडक
(c) कोसी
(d) पुनपुन
उत्तर- (c) कोसी
4. बाढ़ क्या है? 
(a) प्राकृतिक आपदा
(b) मानव जनित आपदा
(c) सामान्य आपदा
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर- (a) प्राकृतिक आपदा
5. सूखा किस प्रकार की आपदा है?
(a) प्राकृतिक आपदा
(b) मानवीय आपदा
(c) सामान्य आपदा
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर- (a) प्राकृतिक आपदा
6. सूखे की स्थिति किस प्रकार आती है? 
(a) अचानक
(b) पूर्व सूचना के अनुसार
(c) धीरे-धीरे
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर- (c) धीरे-धीरे
7. सूखे के लिए जिम्मेवार कारक है:
(a) वर्षा की कमी
(b) भूकंप
(c) बाढ़
(d) ज्वालामुखी
उत्तर- (a) वर्षा की कमी
8. सूखे से बचाव का एक मुख्य तरीका है- 
(a) नदियों को आपस में जोड़ देना
(b) वर्षा जल संग्रह करना
(c) बाढ़ की स्थिति उत्पन्न करना
(d) इनमें से कोई नहीं

उत्तर- (b) वर्षा जल संग्रह करना
 
लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. बाढ़ कैसे आती है? स्पष्ट करें।
उत्तर – जब मानसूनी वर्षा अत्यधिक होती है तो नदियों का जलस्तर में अचानक काफी वृद्धि हो जाती है जिससे बाढ़ की समस्या उत्पन्न हो जाती है।
 
प्रश्न 2. बाढ़ से होनेवाली हानियों की चर्चा करें।
उत्तर – बाढ़ से होनेवाली हानियाँ निम्नलिखित है –
●महामारी फैलना
●मकानों का गिरना
●फसलों की बर्बादी
●सडकों का टूटना
●जन धन की अपार क्षति इत्यादि।
 
प्रश्न 3. बाढ़ से सुरक्षा हेतु अपनाई जानेवाली सावधानियों को लिखें।
उत्तर – बाढ़ से सुरक्षा हेतु अपनाई जाने वाली सावधानियाँ निम्नलिखित है-
(i) मकानों की नींव तथा दीवार सीमेंट और कंक्रीट की होनी चाहिए।
(ii) स्तम्भ(Pillar) आधारित मकान होनी चाहिए और स्तम्भ की गहराई काफी होनी चाहिए।
(iii) बाढ़ के बाद जल निकालने की तत्कालिक व्यवस्था होनी चाहिए।
(iv) नदी के किनारे तथा नदी के सकरी ढालों पर मकानों के निर्माण नहीं करना चाहिए। ऐसे जगहों पर मकान की दूरी कम से कम 250 मीटर की दूरी पर होना चाहिए।
 
प्रश्न 4. बाढ़ नियंत्रण के लिए उपाय बतायें।
उत्तर – बाढ़ नियंत्रण के लिए निम्नलिखित उपाय किये जा सकते है-
(i) बाढ़ नियंत्रण के लिए बाँध और तटबंध की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए।
(ii) नदियों के गाद का समय-समय पर सफाई होना चाहिए।
 
प्रश्न 5. सूखे की स्थिति को परिभाषित करें।
उत्तर –  जब किसी क्षेत्र में औसत वार्षिक वर्षा की मात्रा 25 प्रतिशत से अधिक की कमी आ जाती है तो उसे सूखाड़ की स्थिति माना जाता है। सामान्तया  50 से०मी० से कम वर्षा वाले क्षेत्रों में प्रायः प्रतिवर्ष सूखाड़ की स्थिति उत्पन्न होती है।
 
प्रश्न 6.  सुखाड़ के लिए जिम्मेवार कारकों का वर्णन करें।
उत्तर – मुख्यतया वर्षा की भारी कमी के कारण ही सूखाड़ की स्थिति उत्पन्न होती है।
 
प्रश्न 7. सुखाड़ से बचाव के तरीकों उल्लेख करें।
उत्तर –  सूखाड़ से बचाव हेतु दो प्रकार की योजनाएँ आवश्यक है- दीर्घकालिन और लघुकालीन योजनाएँ दीर्घकालिन योजना के अंतर्गत- नहर, तालाब, कुआँ, पाइन, आहर के विकास की जरूरत है।
 
दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर 
प्रश्न 1.  बिहार में बाढ़ की स्थिति का वर्णन करें।
उत्तर – बिहार भारत का सबसे अधिक बाढ़ ग्रसित राज्य है, यहां उत्तरी बिहार में 76 प्रतिशत से अधिक आबादी बाढ़ की तबाही के लगातार खतरे में निवास करते है। बिहार में भारत के बाढ़ प्रभावित का 16.50 प्रतिशत और बिहार के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का 22.10 प्रतिशत आबादी है। बिहार का भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 73.06 प्रतिशत अर्थात 68800 वर्ग किमी० बाढ़ प्रभावित है। यहाँ प्रत्येक वर्ष के कारण करोड़ों की सम्पति के साथ-साथ मानव एवं पशुओं का जीवन भी नष्ट हो जाता है। उत्तरी बिहार के जिले मानसून के दौरान कम से कम पाँच प्रमुख बाढ़ पैदा करने वाली नदियों-महानंदा, कोसी, बागमती, बूढ़ी गण्डक और गण्डक नदी जो कि नेपाल में उत्पन्न होती है, के लिए सुरक्षित नहीं है। कुछ दक्षिणी जिले भी सोन, पुनपुन और फल्गु नदियों से बाढ़ की चपेट में आ जाते है। हाल ही में 2017 की बाढ़ ने उत्तरी बिहार के 19 जिलों को प्रभावित किया जिसमें 514 लोगों की जाने चली गई और लगभग 2 करोड़ लोग प्रभावित हुए।
 
प्रश्न 2. बाढ़ के कारणों एवं इसकी सुरक्षा संबंधी उपायों का विस्तृत वर्णन करें।
उत्तर – बाढ़ आने के निम्नलिखित कारण है-
(i) नदी में उफान- कभी-कभी निरंतर वर्षा से विस्तृत क्षेत्र का पानी छोटी नालियों और नालों से बहकर अंततः नदी में ही मिल जाती है जिससे विस्तृत क्षेत्र जलमग्न हो जाता है।
(ii) हिमगलन- कुछ नदियों का स्रोत हिमाच्छादित होता है। बर्फ के बहुत अधिक मात्रा में पिघलने से नदियों में अचानक बहुत अधिक पानी बहने लगता है । जिससे बाढ़ की स्थिति होती है।
(iii) लगातार भारी वर्षा का होना- लम्बे समय तक लगातार वर्षा होने से प्रभावित क्षेत्र जलमग्न हो जाता है।
(iv) मानवीय क्रियाकलाप- अंधाधुंध वनों की कटाई से पर्वतीय नदियों के पानी के प्रवाह अवरुद्ध नहीं हो पाता है। जिससे बाढ़ की समस्या उत्पन्न हो जाता है।
बाढ़ से सुरक्षा संबंधी अपनाई जाने वाली उपायों निम्नलिखित है-
(i) मकानों की नींव तथा दीवार सीमेंट और कंक्रीट की होनी चाहिए।
(ii) स्तम्भ (Pillar) आधारित मकान होनी चाहिए और स्तम्भ की गहराई काफी होनी चाहिए।
(iii) बाढ़ के बाद जल निकालने की तत्कालिक व्यवस्था होनी चाहिए।
(iv) नदी के किनारे तथा नदी के सकरी ढालों पर मकानों के निर्माण नहीं करना चाहिए। ऐसे जगहों पर मकान की दूरी कम से कम 250 मीटर की दूरी पर होना चाहिए।
 
प्रश्न 3. सुखाड़ के कारणों एवं इनके बचाव के तरीकों का विस्तृत वर्णन करें।
उत्तर – मुख्यतया वर्षा की भारी कमी के कारण ही सूखाड़ की स्थिति उत्पन्न होती है।
सूखाड़ से बचाव हेतु दो प्रकार की योजनाएँ आवश्यक है-
(i) दीर्घकालिक और
(ii)लघुकालीन योजनाएँ
(i) दीर्घकालिक योजनाएँ- राष्ट्रीय स्तर पर कुछ योजनाएँ दीर्घकालिक समस्या को ध्यान में रखकर बनाना चाहिए। जैसे-
◆ भूमिगत जल के भंडार को नलकूपों द्वारा खींचकर सिंचाई या पीने के लिए उपयोग किया जा सकता है।
◆ नहर या पाइपलाइन का प्रबंध करना चाहिए।
◆ वन रोपण को प्रोत्साहन करना चाहिए।
◆ नदियों का परस्पर जोड़कर सूखा क्षेत्र में जल भेजा जा सकता है।
(ii) लघुकालिन या तत्कालीन योजनाएँ- राष्ट्रीय या राज्य स्तर पर सुख से निपटने के लिए लघुकालिन या तत्कालीन योजनाएँ बनाने पर भी ध्यान देना चाहिए। जैसे-
◆ अनाज का विशेष कोष की व्यवस्था करना।
◆ पशुओं के चारे के भंडारण की व्यवस्था करना।
◆ पेयजल का सुरक्षित भंडारण की व्यवस्था होना।

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