15. Home remedies to stay healthy (स्वस्थ रहने के घरेलु उपाय)

15. Home remedies to stay healthy

(स्वस्थ रहने के घरेलु उपाय)



1. हाथ पैर बेवजह कापते हैं तो रात को खाना खाने के बाद एक लौंग चबाकर गर्म पानी पी लें। कुछ ही दिनों में आराम मिल जाएगा।



2. दूध में मखाने उबालकर खाने से हाथ-पैर, घुटनों और कमर का दर्द ठीक रहता है। हड्डियाँ मजबूत होती हैं और खून की कमी भी नहीं होती है।



3. सेब का छिलका उतार कर और नमक लगाकर सुबह खाली पेट खाने से पुराने से पुराना सर दर्द खत्म हो जाता है।



4. एक गिलास पानी में पान के पत्तों को उबालकर पी लें। इससे छाती में जमी बलगम दूर हो जाएगी और इससे खांसी में आराम मिलेगा।



5. प्याज के रस में शक्कर डालकर शर्बत बनाकर दस से पंद्रह दिनों तक सेवन कीजिए। पथरी गल कर बाहर निकल जाएगी।



6. कुकर में बनी दाल नहीं खानी चाहिए। क्योंकि कुकर में सिर्फ दाल गलती है जबकि पकती नहीं है। जिससे एसिड प्रॉब्लम हो सकती है।



7. जब भी शराब पीने की इच्छा करें। एक चम्मच शहद में अदरक के रस की दो से तीन बूंदे मिलाकर सेवन करें। इससे शराब पीने की इच्छा तुरंत मर जाएगी।



8. क्या आपको पता है सोयाबीन को दो घंटे भिगोकर, मसल कर, जहरीले जाग निकालकर ही उपयोग करना चाहिए।



9. मखाने खाने से शरीर में शुगर रोग खत्म होता है। क्योंकि इसको खाने से शरीर में इंसुलेशन बनता है जिससे आप शुगर से निजात पा सकते हैं।



10. चालीस दिन तक सात बादाम, मिश्री, सौफ प्रत्येक दस ग्राम पीसकर रात को गर्म दूध के साथ लेने से मस्तिष्क की दुर्बलता दूर होती है।



11. भोजन के साथ कच्ची हरी मिर्च खाना बहुत ही लाभदायक होता है क्योंकि कच्ची हरी मिर्च खाने से चेहरे के दाग धब्बे खत्म होते हैं।



12. सरसों के तेल में नमक मिलाकर मालिश करने से छाती में जमी हुई बलगम की गांठे निकल जाती हैं।



13. आयुर्वेद की सबसे शक्तिशाली सब्जी कंटोला है। यह एक ऐसी सब्जी है जो मीट, चिकेन से 50 गुना ज्यादा ताकतवर और प्रोटीन से भरपूर होती है। इसे खाने से कई सारी समस्या ठीक होती हैं।



14. डायबिटीज के मरीजों को दूध के साथ काजू खाने चाहिए! क्योंकि दूध और काजू दोनों का सेवन करने से शुगर लेवल कंट्रोल होता है।



15. एक नींबू को आधा काट कर उसमें कुछ लौंग लगा लीजिए और इन्हें घर के सभी कोनों में रख दीजिए। ऐसा करने से एक भी मच्छर नहीं आएगा।



16. एक चुकंदर को छोटे टुकड़ों में काट कर दो गिलास पानी में उबाल लें और पानी ठंडा होने पर उसे पी लें। गुर्दे की पथरी साफ हो जाएगी।



17. रात को सोने से पहले नाभि पर सरसों का तेल लगाने से पेट संबंधी बीमारियाँ दूर होती हैं और होंठ फटना भी बंद हो जाएंगे।



18. देसी घी में काली मिर्च मिलाकर गर्म दूध के साथ पीने से आंतो में रूका मल नरम और ढीला होकर बाहर निकल जाता है।



19. आपके हाथ पैरों में अगर बहुत दर्द होता है तो इसकी वजह चाय है। चाय का असर हमारी हड्डियों पर पड़ता है।



20. मूंग में मांस से कई गुना ज्यादा प्रोटीन पाया जाता है यदि आप लगातार इसका सेवन करते हैं तो शरीर ताकतवर और मजबूत बनता है।



Home remedies

21. यदि किसी का बाल झड़ रहा हो तो 20 लौंग को आधे कटोरी पानी में 10 मिनट तक उबालकर और उसे फिर ठंडे होने के बाद बाल में लगाकर रातभर छोड़ दे, इसी तरह एक सप्ताह तक दोहराने के बाद बाल झरना बंद हो जायेगा।



22. वजन कम करने के सर्वोत्तम उपाय

➤ दूध की जगह दही खाएं,

➤ ग्रीन टी पियें,

➤ ठंडा पानी न पियें,

➤ नारियल पानी पियें.

➤नमक कम खाएं.

➤ प्रतिदिन नींबू का सेवन करें,

➤ नींबू और मेथी अतिरिक्त चर्बी जमा नहीं करते इसलिए इन्हें जरूर खाएं,

➤ सुबह-शाम गर्म पानी पियें।

➤ खाना खाने के बाद पानी न पियें, 60 मिनट बाद गुनगुना पानी पियें,

➤ एक चम्मच मेथी को रात में भिगोकर रख दें और सुबह इसे खाएं,

➤ काली चाय भी ले सकते हैं, लेकिन इसमें दूध न मिलाएं,

➤ तुलसी, हरी चाय और अदरक से तैयार हर्बल पानी पिएं।

12. Important Grasslands of the World (विश्व के महत्वपूर्ण घास के मैदान)

Important Grasslands of the World

(विश्व के महत्वपूर्ण घास के मैदान)



➤ शीतोष्ण घास प्रदेश (Temperate Grasslands)

पम्पास- अर्जेंटीना, उरुग्वे, ब्राजील

प्रेयरी- उत्तरी अमेरिका

डाउंस- आस्ट्रेलिया

वेल्ड- दक्षिण अफ्रीका

स्टेपीज- पश्चिम रूस, मध्य एशिया (यूरेशिया)

केंटरबरी- न्यूजीलैंड

पुस्ताज- हंगरी (यूरोप)

बुग्याल और मर्ग- भारत

नोट: गढ़वाल हिमालय में पाए जाने वाले उच्च अक्षांशीय अल्पाइन घास भूमियों को ‘बुग्याल’ कहा जाता है।

important-grasslands

➤ उष्णकटिबन्धीय घास प्रदेश (Tropical Grasslands)

सवाना- पूर्वी अफ्रीका (केन्या, तंजानिया), वेनेजुएला, कोलंबिया, ब्राजील

लानोज- वेनेजुएला

कैम्पास- ब्राजीलियन उच्च भूमि

पार्कलैंड- दक्षिणी अफ्रीका

सेल्वास- अमेजन बेसिन

सेराडो- ब्राजील

पटाना- श्रीलंका

साहेल (अकेसिया सवाना)- अफ्रीका महाद्वीप में लाल सागर से अटलांटिक सागर तक एक पट्टी के रूप में

प्रमुख प्रश्नोत्तर

1. निम्न में से कौन शीतोष्ण कटिबंधीय घासभूमि नहीं है?

(A) पम्पाज     

(B) लानोज

(C) पुस्ताज     

(D) कैण्टरबरी

उत्तर- (B) लानोज

2. कनाडा के मध्य अक्षांशीय घास के मैदान कहलाते हैं?

(A) प्रेयरी

(B) पम्पास

(C) स्टेपी

(D) डाउन्स

उत्तर- (A) प्रेयरी

3. निम्नलिखित में से उष्ण कटिबंधीय घास के मैदान हैं?

1. कैम्पोस

2. पम्पास

3. सवाना

4. स्टेपी

कूट: 

(A) 1 और 4

(B) 1 और 3

(C) 2 और 3

(D) 1 और 2

उत्तर- (B) 1 और 3

4. निम्नलिखित में से कौन शीतोष्ण कटिबंधीय घासभूमि है?

(A) सवाना

(B) कैम्पोस

(C) वेल्ड

(D) लानोज

उत्तर- (C) वेल्ड

5. निम्न में से कौन शीतोष्ण कटिबंधीय घासभूमि है?

(A) सवाना

(B) कैम्पोस

(C) वेल्ड

(D) लानोज

उत्तर- (C) वेल्ड

6. अर्जेण्टीना में पाये जाने वाले शीतोष्ण कटिबंधीय घास के मैदान को क्या कहा जाता है?

(A) वेल्ड

(B) लानोज

(C) पम्पास

(D) स्टेपी

उत्तर- (C) पम्पास

7. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए और सही उत्तर का चयन कीजिए-

सूची-I (घासभूमियाँ)  सूची-II (अवस्थिति)

अ. पम्पास  1. उत्तरी एशिया

ब. डाउन्स  2. ऑस्ट्रेलिया

स. स्टेपी    3. अर्जेंटीना

द. प्रेयरी    4. उत्तरी अमेरिका

कूट:

      अ. ब. स. द.

(A) 3 2  4  1

(B) 3 2  1  4

(C) 2 3  4  1

(D) 2 3  1  4

उत्तर- (B) 3 2  1  4

8. निम्न में से कौन उष्ण कटिबंधीय घासभूमि कहलाते हैं?

(A) लोनाज

(B) वेल्ड

(C) प्रेयरी

(D) स्टेपी

उत्तर- (A) लोनाज

9. निम्नलिखित में सही सुमेलित है-

(A) डाउन्स- ऑस्ट्रेलिया

(B) कैम्पास- ब्राजील

(C) पार्कलैंड- अफ्रीका

(D) उपर्युक्त सभी

उत्तर- (D) उपर्युक्त सभी

10. निम्नलिखित में सही सुमेलित नहीं है-

(A) दक्षिण अफ्रीका- वेल्ड

(B) अर्जेंटीना- पम्पास

(C) ऑस्ट्रेलिया- डाउंस

(D) ब्राजील- लानोज

उत्तर- (D) ब्राजील- लानोज

11. दक्षिण अफ्रीका में चरागाह क्षेत्र को क्या कहा जाता है?

(A) डाउन्स

(B) स्टेपी

(C) प्रेयरी

(D) वेल्ड

उत्तर- (D) वेल्ड

12. पम्पास एवं स्टेपी निम्नलिखित में से किस श्रेणी में आते हैं?

(A) उच्च अक्षांशीय घासभूमि

(B) मध्य अक्षांशीय घासभूमि

(C) निम्न अक्षांशीय घासभूमि

(D) उपरोक्त में से कोई नहीं

उत्तर- (C) निम्न अक्षांशीय घासभूमि

13. पटाना नामक उष्ण कटिबंधीय घास के मैदान निम्न में से किस देश में पाये जाते हैं?

(A) ब्राजील

(B) हंगरी

(C) श्रीलंका

(D) इण्डोनेशिया

उत्तर- (C) श्रीलंका

14. सवाना घास भूमियाँ मुख्यत: कहाँ पायी जाती है?

(A) मध्य एशिया में

(B) उत्तरी अमेरिका में

(C) उत्तरी मध्य अफ्रीका में

(D) ऑस्ट्रेलिया में

उत्तर– (C) उत्तरी मध्य अफ्रीका में

15. सुमेलित नहीं है-

(A) कैंटरबरी- न्यूजीलैंड

(B) वेल्ड- दक्षिण अफ्रीका

(C) पार्कलैंड- ब्राजील

(D) लानोज- वेनेजुएला

उत्तर– (C) पार्कलैंड- ब्राजील

16.  विश्व में किस घास के मैदान को विश्व के रोटी का टोकरी कहा जाता है

(A) डाउन्स

(B) स्टेपी

(C) प्रेयरी

(D) वेल्ड

उत्तर- (B) स्टेपी 

11. विश्व में सर्वाधिक ऊँचा, लम्बा, गहरा, बड़ा, छोटा व प्रथम

11. विश्व में सर्वाधिक ऊँचा, लम्बा, गहरा, बड़ा, छोटा व प्रथम

General Geography Capsule 10

सामान्य भूगोल



1. भारत की सबसे बड़ी तथा खारे जल की झील है

➤ चिल्का झील (उड़ीसा)

2. विश्व की सबसे बड़ी तथा खारे जल की झील है

➤ कैस्पियन सागर (रूस) 

3. भारत की सबसे बड़ी मीठे जल की झील है

➤ वुलर झील (जम्मू-कश्मीर) 

4. विश्व की सबसे बड़ी ताजे पानी की झील है

➤ सुपीरियर झील (अमेरिका)

5. भारत की सबसे बड़ी कृत्रिम झील है

➤ गोविन्द सागर झील

6. विश्व की सबसे गहरी झील है

➤ बैकाल झील (रूस)

7. विश्व की सबसे बड़ी कृत्रिम झील है

➤ वोल्गा झील (घाना)

8. भारत का सबसे बड़ा रेगिस्तान है

➤ थार मरूभूमि (राजस्थान)

9. विश्व का सबसे बड़ा रेगिस्तान है

➤ सहारा मरूभूमि (अफ्रिका)

10. भारत का सबसे ऊँचा बाँध है

➤ भाखड़ा बाँध (सतलज नदी, पंजाब)

11. भारत का सबसे लम्बा बाँध है

➤ हीराकुण्ड बाँध (महानदी, उड़ीसा)

12. विश्व का सबसे ऊँचा बाँध है

➤ रोगुन्वस्की (तजाकिस्तान, रूस)

13. भारत का सबसे ऊँचा जलप्रपात है

➤ जोग या गरसोप्पा (शरावती नदी, कर्नाटक)

14. विश्व का सबसे ऊँचा जलप्रपात है

➤ एंजिल (वेनेजुएला)

15. भारत की सबसे लम्बी नहर है

➤ इंदिरागांधी नहर या राजस्थान नहर (राजस्थान)

16. विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा है

➤ सुन्दरवन डेल्टा (भारत)

17. विश्व की सबसे लम्बी नदी है

➤ नील नदी (मिस्र)

18. विश्व की सबसे चौड़ी नदी है

➤ आमेजन (द० अमेरीका)

19. विश्व की सबसे छोटी नदी है

➤ डी नदी ( USA)

20. विश्व का सबसे बड़ा नहर है

➤ स्वेज नहर (1869 ई. में निर्मित)

21. विश्व का सबसे बड़ा नदी द्वीप है

➤ माजूली (ब्रह्मपुत्र नदी, असम)

22. विश्व का सबसे छोटा नदी द्वीप है

➤ उमानंद (असम)

23. विश्व का सबसे बड़ा महाद्वीप है

➤ एशिया 

24. विश्व का सबसे छोटा महाद्वीप है

➤ आस्ट्रेलिया

25. सबसे बड़ा एवं गहरा महासागर है

➤ प्रशांत महासागर

26. विश्व का सबसे छोटा महासागर है

➤ आर्कटिक महासागर

27. सबसे बड़ा द्वीप है

➤ ग्रीनलैण्ड (डेनमार्क)

28. सबसे बड़ा द्वीप समूह है

➤ इण्डोनेशिया

29. सबसे बड़ा प्रायद्वीप है

➤ अरब प्रापद्वीप

30. झील के अन्दर झील है

➤ मेनीटू (कनाडा)

31. सबसे बड़ा जलडमरूमध्य है

➤ डेविस जलडमरूमध्य

32. सबसे बड़ी खाड़ी है

➤ मैक्सिको की खाड़ी

33. क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा देश है

➤ रूस

34. क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे छोटा देश है

➤ वेटिकन सिटी

35. भारत की सबसे लम्बी सुरंग है

➤ जबाहर सुरंग (जम्मू-कश्मीर)

36. विश्व का सबसे व्यस्त व्यापारिक नदी है

➤ राईन नदी (जर्मनी)

37. विश्व की सर्वाधिक सीमाओं वाला देश है

➤ चीन (14 देशों के साथ)

38. विश्व में सर्वाधिक ऊँचाई पर स्थित झील है

➤ टिटिकाका (द० अमेरीका)

39. विश्व में सबसे निचले स्थान पर स्थित झील है

➤ मृतसागर (प्रशांत महासागर में

40. विश्व की सबसे ऊँची जाग्रत ज्वालामुखी है

➤ कोटोपैक्सी (इक्वेडोर, दक्षिण अमेरिका में)

41. संसार का सबसे छोटा ज्वालामुखी है

➤ ताल (फिलीपिंस)

42. एशिया का सबसे बड़ा रेगिस्तान है

➤ गोबी (मंगोलिया)

43. सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान है

➤ मासिनराम (मिजोरम, भारत)

44. लम्बा प्लेटफार्म है

➤ खड़गपुर (प. बंगाल)

45.  सबसे लम्बी रेलवे है 

➤ ट्रांस साइबेरियन रेलवे (6000 मील)

नोट:  रूस का यह प्रमुख रेलमार्ग पश्चिम में सेंट पीटर्सबर्ग से पूरब में प्रशान्त महासागर तट पर स्थित ब्लाडीवोस्टक तक जाता है।

विश्व में सर्वाधिक ऊँचा

46. लम्बा मुहाना किस नदी का है

➤ ओब (रूस)

47. सर्वाधिक ज्वालामुखी है 

➤ इंडोनेशिया में

48. सबसे ऊँची राजधानी है 

➤ ल्हासा (तिब्बत)

49. बड़ी दीवार है

➤ चीन की दीवार (2225 किमी०)

50. सबसे ऊँचा नगर है

➤ बेन चुआन (चीन, 16000 फुट)

31. Wind Rose / Star Diagram (पवनारेख / तारा आरेख)

31. Wind Rose / Star Diagram

(पवनारेख / तारा आरेख)



         पवनारेखों को तारा आरेख भी कहा जाता है। किसी स्थान के पवनों की दिशा तथा बारंबारता प्रकट करने के लिए इस आरेख का प्रयोग किया जाता है।

      तारा आरेखों को वृत्त या घड़ी आरेख (Clock Diagram), रोज आरेख (Rose Diagram) तथा वेक्टर आरेख (Vector Diagram) आदि विभिन्न नामों से पुकारा जाता है। इन आरेखों के द्वारा सदिश या वेक्टर मूल्यों को केंद्र या मूल बिंदु से संबंधित दिशाओं में सरल रेखाएँ या कॉलम खींचकर प्रकट करते हैं तथा इन आरेखों या कॉलमों की लंबाइयों को दिए हुए मूल्यों के अनुपात में मापनी (Scale) के अनुसार निश्चित करते हैं।

      किसी स्थान पर दिशाओं के अनुसार वर्ष में पवनों की बारंबारता दिखलाने के लिए यह आरेख बहुत उपयोगी होते हैं परंतु आर्थिक वितरण जैसे व्यापार की दिशा अथवा विभिन्न दिशाओं में जनसंख्या के स्थानांतरण के आंकड़ों को भी इन आरेखों के द्वारा प्रदर्शित किया जा सकता है।

पवनारेख के प्रकार (Types of Wind Rose)

1. साधारण पवनारेख (Simple Wind Rose):-

    इस आरेख के द्वारा किसी स्थान की एक वर्ष में पवन की दिशा तथा शांत दिनों की संख्या को प्रदर्शित किया जाता है। पवन चलने के दिनों को लंबी रेखाओं द्वारा तथा शांत पवन वाले दिनों को केन्द्र पर बनाये गये छोटे वृत्त के भीतर अंकों में लिखकर इंगित करते हैं।

उदाहरण:

(i) निम्नलिखित आँकड़ों की सहायता से जयपुर का पवनारेख बनाइए।

Wind Direction / पवन की दिशा
N NE E SE S SW W NW Calm
No. of Days 24 23 25 15 29 58 77 79 17

रचना विधि:

      साधारण पवनारेख बनाने हेतु पहले सुविधानुसार कोई अर्द्धव्यास लेकर एक छोटा वृत्त खींचते हैं एवं इसके भीतर शांत पवनों की दिश (17) लिखते हैं। इसके बाद वृत्त के केन्द्र से दी हुई दिशाओं की ओर सरल रेखाएँ खींचते हैं। अब इन रेखाओं में किसी उचित मापनी के अनुसार वृत्त की परिधि से मापते हुए संबंधित दिनों की संख्या के बराबर दूरियाँ काटकर रेखाओं के सिरों का सरल रेखाओं द्वारा मिला देते हैं। इस प्रकार बने अष्टभुज के प्रत्येक कोने पर उसकी दिशा लिख देते हैं एवं आरेख के नीचे दिनों की मापनी बनाकर Windrose पूर्ण कर लेते हैं।

       सामान्यतः साधारण पवन आरेख में पवन की आठ दिशाएँ (उत्तर, उत्तर-पूर्व, पूर्व, दक्षिण-पूर्व, दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम, पश्चिम तथा उत्तर-पश्चिम) प्रकट की जाती है परंतु आवश्यकता होने पर उत्तर-उत्तर पूर्व, उत्तर पूर्व-पूर्व आदि शेष आठ दिशाओं की पवनों की बारंबारताओं को भी आरेख में प्रदर्शित किया जा सकता है।

2. पवन तथा दृश्यता रोज (Wind and Visibility Rose):

     ये साधारण पवनारेखों की भाँति ही बनाए जाते हैं, परन्तु इनमें केवल इतना अंतर है कि इस आरेख में किसी स्तंभ की लंबाई उस दिशा में चलने वाली पवनों के कुल दिनों में उत्तम दृश्यता (Good Visibility) अथवा अत्यल्प दृश्यता (Bad Visibility) के दिनों की बारंवारता का प्रतिशत प्रकट करती है।

उदाहरण :

(ii) किसी काल्पनिक स्थान पर प्रेक्षित निम्नलिखित आँकड़ों के आधार पर एक पवन तथा दृश्यता रोज की रचना कीजिए।

 पवन की दिशा
पवन की बारम्बारता (दिन) N NE E SE S SW W NW Calm
30 20 30 50 12 20 80 100 23
अत्यल्प दृश्यता की बारंबारता (दिन) 12 14 18 20 3 3 8 5 –

रचना विधि:

    पवन तथा दृश्यता रोज बनाने के लिए सर्वप्रथम एक छोटा वृत्त बनाकर उसमें शांत दिनों की संख्या (23) लिख दिया जाता है। उसके बाद कोई उचित मापनी लेकर पहले बतलाई गयी विधि के अनुसार वृत्त की परिधि से संबंधित दिशाओं में अत्यल्प दृश्यता की बारंबारताओं के प्रतिशत मूल्यों के बराबर लंबाईयों वाले स्तंभ खींचा जाता है। अंत में अब आरेख के नीचे मापनी बनाकर आरेख पूर्ण कर लिया जाता है।

Wind Rose

14. Uniform Civil Code (समान नागरिक संहिता)

14. Uniform Civil Code

(समान नागरिक संहिता)



Uniform Civil Code

परिचय

➤ भारतीय संविधान के भाग 4 (राज्य के नीति निदेशक तत्त्व) के तहत अनुच्छेद 44 के अनुसार भारत के सभी नागरिकों के लिये एक समान नागरिक संहिता लागू होगी। इसका व्यावहारिक अर्थ है कि भारत के सभी धर्मों के नागरिकों के लिये एक समान धर्मनिरपेक्ष कानून होना चाहिये। हालांकि संविधान के संस्थापकों ने राज्य के नीति निदेशक तत्त्व के माध्यम से इसको लागू करने की जिम्मेदारी बाद की सरकारों को हस्तांतरित कर दी थी।

➤ इस कानून के तहत व्यक्तिगत कानून, संपत्ति संबंधी कानून और विवाह, तलाक तथा गोद लेने से संबंधित कानूनों में समानता है।

नोट: वर्तमान समय में भारत में अधिकतर व्यक्तिगत कानून धर्म के आधार पर तय किये जाते हैं। हिंदू, सिख, जैन और बौद्ध धर्मों के व्यक्तिगत कानून हिंदू विधि से संचालित किये जाते हैं, वहीं मुस्लिम तथा ईसाई धर्मों के लोंगों के लिए अपना अलग व्यक्तिगत कानून हैं। मुस्लिम समुदाय के लोगों का कानून शरीयत पर आधारित है, जबकि अन्य धार्मिक समुदायों के लोगों के लिए व्यक्तिगत कानून भारतीय संसद द्वारा बनाए गए कानून पर आधारित हैं। वर्तमान समय में गोवा ही एकमात्र ऐसा राज्य है जहाँ पर समान नागरिक संहिता लागू है।

➤ इस संहिता की जड़ें 1867 के पुर्तगाली नागरिक संहिता में मिलती हैं, जिसे पुर्तगालियों द्वारा लागू किया गया था और बाद में इसे वर्ष 1966 में नए संस्करण के साथ बदल दिया। गोवा में सभी धर्मों के लोगों के लिए विवाह, तलाक, विरासत आदि के संबंध में समान कानून हैं।

महत्वपूर्ण बिंदुः

➤ सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि राष्ट्र ने अभी तक अपने नागरिकों के लिये एक समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रयास नहीं किया है।

➤ सुप्रीम कोर्ट ने अनेकों ऐतिहासिक निर्णयों में सरकार से UCC को लागू करने का आह्वान किया है और समय-समय पर न्यायालय ने केंद्र सरकार से इस पर अपना रुख भी स्पष्ट करने को कहा है।

➤ सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि संविधान के संस्थापकों ने उम्मीद जताई थी कि एक दिन राज्य समान नागरिक संहिता की अपेक्षाओं को पूरा करेंगे और नियमों का एक समान सेट प्रत्येक धर्म के रीति-रिवाजों जैसे- विवाह, तलाक आदि के अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों की जगह लेगा।

➤ वर्ष 1956 में हिंदू कानूनों को संहिताबद्ध कर दिया गया था, लेकिन देश के तभी नागरिकों के लिये एक समान नागरिक संहिता लागू करने का गंभीर प्रयास नहीं किया गया है।

➤ मोहम्मद अहमद खास बनाम शाह बानो बेगम के ऐतिहासिक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने एक तलाकशुदा मुस्लिम महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला दिया और समुदाय के व्यक्तिगत कानूनों की बजाय भारत के कानून CrPC को प्राथमिकता दी थी।

➤ इस फैसले में अदालत ने यह भी कहा था कि संविधान का अनुच्छेद-44 वर्तमान समय में एक बेकार पड़ा हुआ आर्टिकल बनकर रह गया है।

UCC का इतिहास

➤ UCC का इतिहास 100 साल से भी ज्यादा पुराना है।

➤ UCC का इतिहास 19वीं शताब्दी में भी खोजा जा सकता है, जब शासकों ने अपराधों, सबूतों और अनुबंधों से संबंधित भारतीय कानून के संहिताकरण में एकरूपता की आवश्यकता पर बल दिया था। हालांकि, तब विशेष रूप से सिफारिश की गई थी कि हिंदुओं और मुसलमानों के व्यक्तिगत कानूनों को इस तरह के कानून से बाहर रखा जाना चाहिए।

➤ ब्रिटिश लोग एकेश्वरवादी ईसाई था, इस कारण उनके लिए भारत में चल रही जटिल प्रथाओं को समझना मुश्किल था। साथ ही अंग्रेजो का मुख्य उद्देश्य भारत से पैसा लूटना था, इसलिए वे इस प्रकार के विवाद में नहीं पड़ना चाहता था।

स्वतंत्रता के बाद UCC पर चर्चा

➤ भारत की स्वतंत्रता के बाद UCC पर अलग-अलग विचार थे। कुछ सदस्यों का मानना ​​था कि UCC भारत जैसे अलग-अलग धर्मों और संप्रदायों वाले देश में लागू करना ठीक या बेहतर नहीं होगा, जबकि अन्य का मानना ​​था कि UCC देश में अलग-अलग समुदायों के बीच एक देश-एक कानून की तर्ज पर लोगों में सद्भाव लाएगा।

UCC पर आंबेडकर और नेहरू का विचार

➤ डॉ. बी.आर. अम्बेडकर का इस मुद्दे पर मानना ​​था कि UCC कोई थोपा हुआ नहीं बल्कि केवल एक प्रस्ताव था। वहीं, देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू का कहना था, “मुझे नहीं लगता कि वर्तमान समय में भारत में मेरे लिए इसे आगे बढ़ाने का प्रयास करने का समय आ गया है।”

PM मोदी और UCC

➤ भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समान नागरिक संहिता की पुरजोर वकालत करते हुए विरोधियों से सवाल किया कि दोहरी व्यवस्था से देश कैसे चलेगा? उन्होंने साथ ही कहा कि संविधान में भी सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार का उल्लेख है।

➤ पीएम मोदी ने हाल ही में एक चुनावी रैली के दौरान कहा था कि भाजपा ने तय किया है कि वह तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति के बजाय ‘संतुष्टिकरण’ के रास्ते पर चलेगी।

➤ उन्होंने यह भी कहा था विपक्ष समान नागरिक संहिता के मुद्दे का इस्तेमाल मुस्लिम समुदाय को गुमराह करने और भड़काने के लिए कर रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय मुसलमानों को यह समझना होगा कि कौन से राजनीतिक दल उन्हें भड़काकर उनका फायदा लेने के लिए उनको कमजोर बर्बाद कर रहे हैं।

➤ साथ ही प्रधानमंत्री ने कहा था, “हम देख रहे हैं समान नागरिक संहिता के नाम पर लोगों को भड़काने का काम हो रहा है। एक घर में परिवार के एक सदस्य के लिए एक कानून हो, दूसरे के लिए दूसरा, तो क्या वह परिवार चल पाएगा। फिर ऐसी दोहरी व्यवस्था से देश कैसे चल पाएगा? हमें याद रखना है कि भारत के संविधान में भी नागरिकों के समान अधिकार की बात कही गई है।”

UCC के पक्ष में तर्क

➤ भारतीय संविधान की प्रस्तावना में 42वें संशोधन के माध्यम से धर्मनिरपेक्षता शब्द को जोड़ा गया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि भारतीय संविधान का उद्देश्य भारत के समस्त नागरिकों के साथ धार्मिक आधार पर किसी भी भेदभाव को समाप्त करना है लेकिन वर्तमान समय तक समान नागरिक संहिता के लागू न हो पाने के कारण भारत में एक बड़ा वर्ग अभी भी धार्मिक कानूनों की वजह से अपने अधिकारों से वंचित है।

➤ मूल अधिकारों में विधि के शासन की अवधारणा विद्यमान है लेकिन इन्हीं अवधारणाओं के बीच लैंगिक असमानता जैसी कुरीतियाँ भी व्याप्त हैं। विधि के शासन के अनुसार, सभी नागरिकों हेतु एक समान विधि होनी चाहिये लेकिन आजादी के 75 वर्षों के बाद भी जनसंख्या का एक बड़ा वर्ग अपने मूलभूत अधिकारों के लिये संघर्ष कर रहा है। इस प्रकार समान नागरिक संहिता का लागू न होना एक प्रकार से विधि के शासन और संविधान की प्रस्तावना का उल्लंघन है।

➤ सामासिक संस्कृति के सम्मान के नाम पर किसी वर्ग की राजनीतिक समानता का हनन करना संविधान के साथ-साथ संस्कृति और समाज के साथ भी अन्याय है क्योंकि प्रत्येक संस्कृति तथा सभ्यता के मूलभूत नियमों के तहत महिलाओं और पुरुषों को समान अधिकार प्राप्त होता है लेकिन समय के साथ इन नियमों को गलत तरीके से प्रस्तुत कर असमानता उत्पन्न कर दी जाती है।

➤ धार्मिक रुढ़ियों की वजह से समाज के किसी वर्ग के अधिकारों का हनन रोका जाना चाहिये साथ ही विधि के समक्ष समता की अवधारणा के तहत सभी के साथ समानता का व्यवहार करना चाहिये।

➤ वैश्वीकरण के वातावरण में महिलाओं की भूमिका समाज में महत्त्वपूर्ण हो गई है, इसलिये उनके अधिकारों और उनकी स्वतंत्रता में किसी भी प्रकार की कमी उनके व्यक्तित्त्व तथा समाज के लिये हानिकारक है।

➤ राजनीतिक लाभ के कारण कई बार सरकारें इन धार्मिक मुद्दों में छेड़छाड़ से बचती हैं इसलिये सरकारों को भी ऐसे मामलों को धार्मिक मुद्दों के बजाय व्यक्तिगत अधिकारों की दृष्टि से देखना चाहिये। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा शाहबानो मामले में दिये गए निर्णय को तात्कालीन राजीव गांधी सरकार ने धार्मिक दबाव में आकर संसद के कानून के माध्यम से पलट दिया था।

➤ सर्वोच्च न्यायालय ने संपत्ति पर समान अधिकार और मंदिर प्रवेश के समान अधिकार जैसे न्यायिक निर्णयों के माध्यम से समाज में समता हेतु उल्लेखनीय प्रयास किया है इसलिये सरकार तथा न्यायालय को समान नागरिक संहिता को लागू करने के लिए समग्र एवं गंभीर प्रयास भी करने चाहिये।

UCC के विरोध में तर्क

➤ समान नागरिक संहिता का मुद्दा किसी सामाजिक या व्यक्तिगत अधिकारों के मुद्दे से हटकर एक राजनीतिक मुद्दा बन गया है, इसलिये जहाँ एक ओर कुछ राजनीतिक दल इस मामले के माध्यम से राजनीतिक तुष्टिकरण कर रहे है, वहीं दूसरी ओर कई राजनीतिक दल इस मुद्दे के माध्यम से धार्मिक ध्रुवीकरण का प्रयास कर रहे हैं।

➤ हिंदू या किसी और धर्म के मामलों में बदलाव उस धर्म के बहुसंख्यक समर्थन के बगैर नहीं किया गया है, इसलिये राजनीतिक तथा न्यायिक प्रक्रियाओं के साथ ही धार्मिक समूहों के स्तर पर मानसिक बदलाव का प्रयास किया जाना अति आवश्यक है।

➤ सामासिक संस्कृति की विशेषता को भी वरीयता दी जानी चाहिये क्योंकि समाज में किसी धर्म के असंतुष्ट होने से अशांति की स्थिति बन सकती है।

UCC पर विधि आयोग (Law Commission) का विचार:

➤ विधि और न्याय मंत्रालय द्वारा वर्ष 2016 में समान नागरिक संहिता से संबंधित मुद्दों के समग्र अध्ययन हेतु विधि आयोग का गठन किया गया।

➤ विधि आयोग ने कहा कि समान नागरिक संहिता का मुद्दा मूलाधिकारों के तहत अनुच्छेद 14 और 25 के बीच द्वंद्व से प्रभावित है।

➤ भारतीय बहुलवादी संस्कृति के साथ ही महिला अधिकारों की सर्वोच्चता के मुद्दे को इंगित किया।

➤ मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा की जा रही कार्यवाहियों के मद्देनजर विधि आयोग ने कहा कि महिला अधिकारों को वरीयता देना प्रत्येक धर्म और संस्थान का कर्तव्य होना चाहिये।

➤ विधि आयोग के अनुसार, समाज में असमानता की स्थिति उत्पन्न करने वाली समस्त रुढ़ियों की समीक्षा की जानी चाहिये। इसलिये सभी निजी कानूनी प्रक्रियाओं को संहिताबद्ध करने की जरूरत है जिससे उनसे संबंधित पूर्वाग्रह और रूढ़िवादी तथ्य सामने आ सकें।

➤ वैश्विक स्तर पर प्रचलित मानवाधिकारों की दृष्टिकोण से सर्वमान्य व्यक्तिगत कानूनों को वरीयता मिलनी चाहिये। लड़कों और लड़कियों की विवाह की 18 वर्ष की आयु को न्यूनतम मानक के रूप में तय करने की सिफारिश की गई जिससे समाज में समानता स्थापित की जा सके।

निष्कर्ष:

   इस प्रकार निष्कर्षत: कहा जा सकता है कि भारत के सभी धर्मों एवं समाजों की प्रगति और सौहार्द्रता हेतु उस धर्म और समाज में विद्यमान सभी पक्षों के बीच समानता का भाव होना अत्यंत आवश्यक है। इसलिये यह अपेक्षा की जा सकती है कि वर्तमान समय में बदलती परिस्थितियों के मद्देनजर समाज की संरचना में परिवर्तन होना चाहिये।

स्रोत: hindi.business-standard.com, द हिन्दू and drishtiias.com

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