16. MAJOR PRESSURE BELTS OF THE WORLD / विश्व की प्रमुख वायुदाब पेटियाँ

16. MAJOR PRESSURE BELTS OF THE WORLD

(विश्व की प्रमुख वायुदाब पेटियाँ)



विश्व की प्रमुख वायुदाब पेटियाँ⇒

           धरातल पर इकाई क्षेत्रफल पर वायु द्वारा लगाया जाने वाला बल को वायुदाब कहते है। धरातल पर औसतन 1013 mb वायुदाब लगता है। विश्व में सर्वाधिक वायुदाब साईबेरिया में स्थित बैकाल झील के ऊपर मापा गया है और सबसे कम वायुदाब उत्तरी अमेरिका में आने वाले टॉरनेडो चक्रवात के केंद्र में मापा गया है। अत: इससे स्पष्ट होता है कि निम्न वायुमंडलीय क्षेत्र में सभी जगह वायुदाब परिस्थितियाँ एक सामान नहीं है। वायुदाब की विषमता मुख्यतः तीन कारणों से उत्पन्न होती है-

1. सूर्य का तलीय प्रभाव

2. कोरियालिसिस प्रभाव

3. स्थलमंडल और जलमंडल के वितरण में विषमता

         ये तीनों कारकों के कारण ही वायुदाब में विषमताएँ उत्पन्न होती है फिर भी ये अक्षांशीय विस्तार को बनाये रखते है। जलवायुवेताओं ने वायुदाब का अध्ययन कर यह बतलाया है की वायुदाब पेटी दो प्रकार के होते है–

(A) निम्न वायुदाब पेटी

1. विषुवतीय निम्न वायुदाब पेटी

2. उ० गोलार्द्ध की उपध्रुवीय निम्न वायुदाब पेटी

3. द० गोलार्द्ध की उपध्रुवीय निम्न वायुदाब पेटी

(B) उच्च वायुदाब पेटी 

1.  उ० गोलार्द्ध की ध्रुवीय उच्च वायुदाब पेटी 

2.  उ० गोलार्द्ध की उपोष्ण कटिबंधीय उच्च वायुदाब पेटी

3.  द० गोलार्द्ध की ध्रुवीय उच्च वायुदाब पेटी

4.. द० गोलार्द्ध की उपोष्ण कटिबंधीय उच्च वायुदाब पेटी

MAJOR PRESSURE BELTS

         उपरोक्त वर्गीकरण से स्पष्ट है कि पुरे पृथ्वी पर कुल सात वायुदाब पेटी मिलते हैं जिसमें तीन निम्न और चार उच्च वायुदाब पेटी है। इनका वितरण उपरोक्त चित्र में देखा जा सकता है।

विश्व की प्रमुख वायुदाब प

विषुवतीय निम्न वायुदाब पेटी

        इसका विस्तार 5°N से 5°S के बीच विषुवतीय क्षेत्रों में पाया जाता है। यहाँ पर निम्न वायुदाब का प्रमुख कारण सालों भर सूर्य के लम्बवत किरण पड़ने के कारण उच्च तापमान का होना है। इसके परिणाम यह होता है कि दोनों गोलार्द्धों से आने वाली हवा प्रारंभ में आपस में मिलकर अंतरउष्ण अभिसरण (डोलड्रम/शांत पेटी) का निर्माण करती है। उसके बाद सूर्य के तापीय प्रभाव के कारण वायु गर्म होकर ऊपर उठने की प्रवृति रखती है जिससे संवहन तरंग का निर्माण होता है और अंतत: स्थायी निम्न वायुदाब क्षेत्र का निर्माण होता है।

उपोष्ण कटिबंधीय उच्च वायुदाब पेटी

           इसका विस्तार दोनों गोलार्द्धों में 30° से 35° अक्षांश के बीच हुआ है। इसके उत्पत्ति के दो प्रमुख कारण है-

(i) तुलनात्मक दृष्टि से इस क्षेत्र में कोरियालिसिस प्रभाव और सूर्य के तापीय प्रभाव कम होना है।

(ii) विषुवतीय प्रदेश और उपध्रुवीय प्रदेश से उठने वाली वायु उपरी वायुमंडल में क्षैतिज हो जाती है और ठंडा होकर पुन: इस प्रदेश में बैठने की प्रवृति रखती है। जिसके कारण उपोष्ण कटिबंधीय उच्च वायुदाब पेटी का निर्माण होता है।

उपध्रुवीय निम्न वायुदाब पेटी

       इसका निर्माण दोनों गोलार्द्धों में 60° से 65° अक्षांश के बीच हुआ है। इसकी उत्पत्ति का प्रमुख कारण पृथ्वी का घूर्णन गति या कोरियालिसिस प्रभाव है। कोरियालिसिस प्रभाव के कारण पृथ्वी के सतह से सटे वायु के कण ऊपर की ओर ऊठने की प्रवृति रखती है। इसका सर्वाधिक प्रभाव मध्य अक्षांशीय क्षेत्रों में (खासकर 60° से 65°) के बीच होता है।

ध्रुवीय उच्च वायुदाब पेटी   

         इसका विस्तार दोनों गोलार्द्धों में 70° से 90° अक्षांश के बीच हुआ है। इसके उत्पत्ति के दो प्रमुख कारण है-

◆ ध्रुवीय क्षेत्रों में सालोंभर तापमान का निम्न होना।

◆ उपध्रुवीय क्षेत्र से ऊपर उठने वाली वायु का पुन: 70° से 90° के बीच बैठना।

वायुदाब पेटी में मौसमी संशोधन         

        यद्धपि ऊपर में बतलाये गए सभी वायुदाब की पेटियाँ स्थायी प्रकृति की होती है। लेकिन सूर्य के उत्तरायण और दक्षिणायन होने से थोड़ा बहुत अक्षांशीय खिसकाव भी होती है। सामान्तय: यह खिसकाव 2° से 7° अक्षांश तक होता है। लेकिन उत्तरी गोलार्द्ध में यह खिसकाव मौसमी विशेषताओं के दृष्टिकोण से अधिक महत्पूर्ण है। उ० गोलार्द्ध में स्थल एवं जल के असमान वितरण के कारण विरूपित हो जाती है। जबकि द० गोलार्द्ध में जलमंडल के समान वितरण के कारण अपने अक्षांशीय स्थिति को बनाये रखते है।

      उ० गोलार्द्ध में जब गर्मी की ऋतू होती है तो विषुवतीय वायुदाब पेटी उत्तर की ओर खिसकर स्थलीय भागों में 30°N से 35°N अक्षांश के बीच चली आती है। अर्थात सम्पूर्ण भारतीय उपमहाद्वीप और द०पू०, द० USA निम्न वायुदाब क्षेत्र में बदल जाते है जिसके कारण यहाँ कई मौसमी, स्थानीय और चक्रवातीय वायु का निर्माण होता है।

        शीत ऋतु में सूर्य दक्षिणायन हो जाता है जिसके कारण उ० गोलार्द्ध की सभी वायुदाब पेटियाँ दक्षिण की ओर खिसकने की प्रवृति रखती है। तिब्बत के पठार के अत्यधिक ऊँचाई होने के कारण सम्पूर्ण चीन और साइबेरिया ध्रुवीय उच्च वायुदाब पेटी में बदल जाती है। और उपोष्णकटिबंधीय उच्च वायुदाब क्षेत्र जाफना प्रायद्वीप के पास पहुँच जाती है। तिब्बतीय क्षेत्र में ध्रुवीय उच्च वायुदाब क्षेत्र के बनने से बुरान,पुर्गा जैसे स्थानीय हवा का जन्म होता है।

       लेकिन द० गोलार्द्ध में इस तरह का कोई परिवर्तन नहीं होता है। 30°S से 35°S अक्षांश के बीच निर्मित होने वाली उपोष्ण उच्च वायुदाब करीब 9 महीने तक स्थिर रहती है। यह विश्व का सर्वाधिक स्थिर वायुदाब पेटी है। इसे अश्व अक्षांश के नाम से भी संबोधित करते है क्योंकि औपनिवेशिक काल में वायुमंडलीय विशेषताओं का पूर्ण ज्ञान नहीं था तो घोड़ा से लदे जहाज डूबने लगते थे तो कुछ घोड़ों को समुद्र में फेंक कर जहाज के दबाव को कम कर दिया जाता था। इसी कारण से इसे अश्व अक्षांश भी कहते है।

17. Winds (हवाएँ)

17. हवाएँ (Winds)



हवाएँ

       हवा तीन प्रकार के होते है- 

1. प्रचलित हवा

     वैसी हवा जो सलोंभर निश्चित दिशा में बहती है। जैसे- वाणिज्यिक हवा, पछुआ हवा, ध्रुवीय हवा।

2. मौसमी हवा

       वैसी हवा जो मौसमी विशेष में निश्चित दिशा में बहती है।

3. स्थानीय हवा

        वैसी हवा जो स्थानीय परिस्थितियों के प्रभाव से उत्पन्न होती है। ये प्रभाव इसके दिशा निर्धारित करते है। यही कारण है कि अलग-अलग स्थानीय हवा के अलग-अलग दिशा होती है।

स्थायी /प्रचलित/ग्रहीय वायु

      उच्च वायुदाब पेटियाँ ही वायु के स्रोत क्षेत्र होते हैं। H.P. से ही वायु L.P. की ओर चला करती है। फेरल नियम के अनुसार उत्तरी गोलार्ध में वायु दायीं ओर और दक्षिणी गोलार्ध में वायु बायीं ओर मुड़ जाती है। अपने मार्ग से विचलन का प्रमुख कारण पृथ्वी की घूर्णन गति है। अतः पृथ्वी रूपी ग्रह का प्रभाव वायु पर पड़ता है इसलिए ऐसे वायु को ग्रहीय वायु करते हैं। यह तीन प्रकार के होते हैं

1. वाणिज्यक/व्यापारिक/सन्मार्गी वायु

2. पछुआ वायु

3. ध्रुवीय वायु

1. वाणिज्यक/व्यापारिक/सन्मार्गी वायु-

       इसका स्रोत क्षेत्र उपोष्ण भार का क्षेत्र होता है। उत्तरी गोलार्ध में इसकी दिशा उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर तथा दक्षिणी गोलार्ध में दक्षिण-पूरब से उत्तर-पश्चिम की ओर होती है। इस हवा का लक्ष्य क्षेत्र विषुवतीय निम्न भार का केंद्र होता है।

      दोनों गोलार्द्धों से चलने वाली वाणिज्यिक हवाएँ विषुवतीय निम्न वायुदाब के अंतर्गत मिलने की प्रवृत्ति रखती है। जिसे अंतर उष्ण अभिसरण क्षेत्र (ITCZ) कहते हैं। इस अभिसरण के बाद वायुदाब में थोड़ी वृद्धि होती है जिसके कारण वायु में गतिशीलता समाप्त हो जाती है, जिसे शांत पेटी या डोलड्रम की स्थिति उत्पन्न होती है। डोलड्रम का निर्माण प्रायः समुद्री सतह पर होता है। विषुवतीय क्षेत्र में वायु के अभिसरण से प्रतिरोधी विषुवतीय वायु भी उत्पन्न होती है जिसे विषुवतीय पछुआ हवा कहते हैं।

2. पछुआ वायु

      इस वायु का भी स्रोत क्षेत्र उपोष्ण उष्ण वायुदाब का क्षेत्र होता है लेकिन इसका लक्ष्य क्षेत्र उपध्रुवीय निम्नवायु दाब का क्षेत्र होता है। उतरी गोलार्द्ध में इसकी दिशा दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूरब की ओर और दक्षिणी गोलार्द्ध में उतर-पश्चिम से दक्षिण-पश्चिम की ओर होती है। यह निम्न अक्षांश से उच्च अक्षांश की ओर जाने वाली वायु है जिसके  कारण तापमान में सामान्यतः कमी आती है।

      इस वायु का अभिसरण ध्रुवीय वायु से होता है। ध्रुवीय वायु अत्यधिक ठंडा जबकि उसके तुलना में पछुआ वायु गर्म होता है। इसीलिए दोनों मिलकर एक वाताग्र का निर्माण करते है और अंततः वाताग्र के सहारे (शीतोष्ण कटिबन्धीय चक्रवात) की उत्पति होती है।

      दक्षिण गोलार्द्ध में पछुआ वायु तुलनात्मक दृष्टि से अधिक स्थिर और बाधारहित मार्ग से गुजरती है क्योंकि दक्षिण गोलार्द्ध में समुद्र का विस्तार अधिक हुआ है। जब पछुआ हवा 40° दक्षिण अक्षांश के पास से गुजरती है तो उसे गरजता चालीसा कहते है। 50°S अक्षांश के पास प्रचण्ड पचासा/गरजता पचासा और 60°S अक्षांश के पास चीखता साठा कहलाता है।

3. ध्रुवीय वायु

      इसका स्रोत क्षेत्र ध्रुवीय उच्च वायुदाब का क्षेत्र होता है और लक्ष्य क्षेत्र उपध्रुवीय निम्न वायुदाब का क्षेत्र होता है। दक्षिणी गोलार्द्ध में उतर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में दक्षिण-पूरब से उत्तर-पश्चिम की ओर चलती है। ध्रुवीय वायु की पछुआ वायु से मिलकर शीतोष्ण चक्रवात को जन्म देती है।

निष्कर्ष:

     ऊपर के तथ्यों से स्पष्ट है कि विश्व के जलवायु और मौसमी परिस्थतियों के निर्माण में वायुदाब पेटी और स्थायी हवा का विशेष योगदान है।

स्थानीय हवा/LOCAL WINDS

         स्थानीय वायु मौसम विज्ञान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है क्योंकि ये बादल निर्माण में मदद करते है। यह दो प्रकार का होता है।

(A) गर्म स्थानीय वायु

(B) ठंडी स्थानीय वायु

(A) गर्म स्थानीय वायु 

1. सिरक्को (Sirocco)

◆ यह हवा सहारा मरुस्थल में उत्पन्न होकर भूमध्यसागरीय भागों में प्रवाहित होती है।

◆ तापमान 3.7℃

◆ सापेक्ष आर्द्रता 10-20%

◆ यह हवाएँ लगातार 24 घंटे से 43 घंटे तक चला करती है।

◆ स्रोत क्षेत्र- सहारा मरुस्थल

◆ धूल के कणों से वायुमंडल इतना अंधेरा हो जाता है कि सूर्य भी दिखाई नहीं पड़ता।

◆ यह हवाएँ भूमध्य सागर को पार करके दक्षिण फ्रांस तथा इटली पहुँचती है तो इनमें आर्द्रता की मात्रा अधिक पाई जाती है। इस आर्द्रता को यह भूमध्य सागर से प्राप्त कर लेती है।

◆ इटली में जब बारिश होती है तो इन बालू के कणों के कारण वर्षा की बूँदे लाल रंग की हो जाती है जिसे Blood Rain कहते हैं।

◆ सिरक्को को अलग-अलग देश में अलग-अलग नाम से जानते हैं।

(i) खमसिन

◆ मिस्र के डेल्टा की ओर चलने वाली धूल भरी आँधी है जिसका स्रोत क्षेत्र सहारा है।

◆ प्रायः वसंत ऋतु में ही चलती है।

(ii) लेवेची

◆ स्पेन में सहारा क्षेत्र से चलने वाली हवा।

(iii) लेस्ट

◆ मदिरा तथा कनारी द्वीप समूह में चलने वाले गर्म एवं शुष्क पूर्वी हवाओं को, जो सहारा के उष्ण मरुस्थल से चलती है, लेस्ट के नाम से पुकारा जाता है।

(iv) हरमट्टान

◆ इस पवन की उत्पत्ति शीतकाल में सहारा मरुस्थलीय क्षेत्र में होती है।

◆ यह पश्चिम अफ्रीका के सहारा से उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम दिशा में चलने वाले गर्म एवं अति शुष्क हवा है।

◆ गिनी के तट पर इसका प्रभाव शीतलकारी होता है।

◆ नाइजीरिया और घाना में इसे डॉक्टर हवा कहते हैं क्योंकि वहाँ के निवासियों को आर्द्र मौसम से राहत देती है।

◆ परंतु सहारा के मरुस्थल में यह पवन ऊँट के काफीलों के लिए काफी कष्टदायक होती है।

2. ब्रिकफील्डर (Brick Filder)

◆ ऑस्ट्रेलिया में मरुस्थलीय प्रदेशों में चलने वाले गर्म एवं शुष्क पवन को ब्रिकफील्डर कहा जाता है।

◆ दक्षिण आस्ट्रेलिया (एडिलेड के पश्चिम) में उत्तर से दक्षिण की ओर चलने वाली हवा है।

3. ब्लैक रोलर

◆ उत्तरी अमेरिका के विशाल मैदान में दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूरब की ओर तेज धूल भरी आँधियाँ चला करती है। जिनसे कभी-कभी मार्ग में पड़ने वाली इमारतें रेत के ढेर के नीचे दब जाती है। इन स्थानीय हवा को ब्लैक रोलर कहा जाता है।

◆ स्रोत क्षेत्र- कोलरेडो के मरुस्थलीय क्षेत्र (न्यू मैक्सिको)

◆ प्रभाव- मिसीसिपी मिसौरी के मध्यवर्ती क्षेत्र में

◆ धूल कण का आकार बड़ा-बड़ा होता है।

4. शामल

◆ मेसोपोटामिया तथा फारस की खाड़ी की ओर उत्तर-पूरब से चलने वाली गर्म हवा को शामिल कहा जाता है।

◆ इराक में चलने वाली हवा है।

◆ वस्तुतः यह सिमूम हवा ही है।

5. नार्वेस्टर

◆ न्यूजीलैंड में वहाँ की पर्वत मालाओं से उत्पन्न गर्म, शुष्क तथा  झोंकेंदार पवन को नॉर्वेस्टर कहा जाता है।

6. गिबली

◆ लीबिया में सहारा क्षेत्र में चलने वाली हवा।

7. चिली

◆ ट्यूनीशिया की स्थानीय हवा जो सहारा क्षेत्र से चलती है।

◆ यह धूल भरी आंधी के समान है।

8. सिमूम

◆ अफ्रीका एवं अरब के मरुस्थलों में गर्म एवं शुष्क आँधियाँ चलती है जिनको सिमूम कहते हैं।

◆ यह अरब मरुस्थल के मध्य से चलने वाली हवा है जो इराक और कुवैत की ओर (पर्शियन गल्फ) चलती है।

◆ इनके साथ रेत की मात्रा अधिक होती है जिससे दृश्यता समाप्त हो जाती है।

◆ यह बवण्डर की तरह उठती है।

◆ यह दमघोंटू हवा है।

9. लू 

◆ गर्मी के महीने में उत्तरी भारत में चलने वाली पश्चिमी एवं उत्तर-पश्चिमी गर्म तथा अत्यधिक शुष्क वायु को लू कहते हैं।

◆ थार के मरुस्थल से उत्तरी भारत एवं पाकिस्तान के मैदान में मई एवं जून में प्रवाहित होती है।

◆ इनकी गति पर प्रायः 20 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक होती है।

◆ उत्तर में लू दोपहर के थोड़ा पहले से सूर्यास्त तक प्रभावित होती है।

◆ मानसून के आविर्भाव के साथ लू खत्म हो जाती है।

◆ यह गर्म हवा है जिसकी धूलकण बनारस तक और इसका प्रभाव भागलपुर तक रहता है।

◆ तापमान- 40℃ से 50℃

◆ इसे Heat Waves भी कहते हैं।

10. काराबूरान

➤ यह मध्य एशिया के तारिम बेसिन और गोबी मरूस्थल से चलने वाली गर्म हवा है।

➤ यह धूल से भरी वायु है।

➤ मध्य एशिया में लोएस का मैदान का निर्माण इसी वायु से हुआ है।

11.  सांता आना (Santa Ana)

➤ पर्वतीय क्षेत्रों में स्थित घाटियों में जब ऊँचाई पर एकत्रित वायु पूंज तीव्र गति से नीचे उतरती है, तो उन शुष्क और गर्म हवाओं को फॉल विन्डस (fall winds) की संज्ञा प्रदान की जाती है।

➤ उ० अमेरिका के कैलिफोर्निया में सांताआना कैनियन (घाटी) से होकर तटवर्ती मैदानों (कैलिफोर्निया) की ओर चलने वाली धूल भरी आँधी को सांताआना कहा जाता है।

➤ ये आंधियाँ उत्तर अथवा उत्तर- पू० की ओर से चलती है।

➤ उत्पति का मूल स्थान- ग्रेट बेसिन

➤ शुष्कता अत्यधिक

➤ अत्यधिक शुष्क एवं गर्म हवाओं से कैलीफोर्निया के फल के बगीचों की अपार क्षति होती है।

➤ प्रबल वेग

➤ इन हवाओं से पेड़ सूख जाती है तथा जंगलों में आग लग जाती है।

➤ हवा में रेत की महीन कणों की मात्रा अधिक होने के कारण श्वास लेना भी कठिन हो जाता है।

12. योमा (Yoma)

➤ सांताआना के समान जापान में चलने वाली गर्म हवा को योमा कहा जाता है।

➤  पश्चिमी तट पर ताप को बढ़ा देता है।

➤ यह जाड़े की ऋतु में साइ‌बेरिया से आने वाली ठंडी हवा के प्रभाव को कम करती है।

➤ इसका प्रभाव होन्शू द्वीप पर पड़ता है।

13. जोंडा (zonda)

➤ एंडीज पर्वत से प० पेंटागोनियाँ में चलने वाली स्थानीय हवाओं को जोंडा कहते है।

➤ यह सांताआना के समान है।

➤ पम्पास प्रदेश (द० अमेरिका) में चलने वाली है।

➤ यह पम्पास के मैदान में चारे की फसल पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है।

➤ यह घाटियों से एंडीज पर्वत के पूरब की ओर उतरने वाली हवा है।

14. फॉन (Fochn)

➤ उन पर्वतीय क्षेत्रों में जहाँ चक्रवातीय तुफान चला करते हैं, फॉन नामक गर्म और शुष्क स्थानीय हवायें पायी जाती है।

➤ इनकी उत्पति पर्वतों के वायु विमुख ढाल की ओर वायु के अवतलन के कारण होती है।

➤ यह आल्प्स से उत्तर की ओर चलने वाली हवा है।

➤ चीनूक और फॉन का तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से 15 डिग्री सेल्सियस तक होता है इसलिए जाड़े के लिए यह उपयुक्त होती है।

➤ इस स्थानीय हवा को तथा ऑस्ट्रिया तथा जर्मनी में फॉन कहा जाता है।

➤ इसका प्रभाव स्वीटजरलैंड पर भी पड़ता है।

➤ यह हवा सेब, अंगूर की खेती के लिए उपयुक्त होती है।

15. चिनूक (chinook)

➤ संयुक्त राज्य अमेरिका (उत्तरी अमेरिका) में रॉकी पर्वत के पश्चिमी ढाल के सहारे चढ़ती है एवं पूर्वी ढाल के सहारे गर्म होकर उतरती है जो कोलेरेडो से कोलंबिया तक के प्रांतों को प्रभावित करती है।

➤ इन हवाओं को पश्चिमी कनाडा तथा USA में चिनूक कहा जाता है।

➤ ये हवाएं अधिकांशत: जाड़े के ऋतु में प्रभावित होती है।

➤ मृत घाटी सियरा नेवादा के पवन विमुख ढाल पर स्थित है।

➤ फॉन तथा चिनूक हवाओं के गर्म होने के दो प्रमुख कारण है:-

(i) वायु अभिमुख ढाल पर आरोही पवन में संघनन की गुप्त ऊष्मा द्वारा वायु के तापमान में वृद्धि है।

(ii) उन हवाओं के अवरोहण के समय संपीडन के कारण उनके तापमान में अतिरिक्त वृद्धि है।

➤ इसके तापमान बढ़ने की दर 10 से 15 मिनट में 3ºC से 10ºC तक रहती है। 24 घंटे में 12 से 15ºC तापमान बढ़ जाता है।

➤ इसे हिम भक्षिणी Snow Eaters भी कहा जाता है।

➤चिनूक हवा शुष्क रुद्दोष्म दर से गर्म होता है

अन्य गर्म हवा

16. बाग्यो (Bayuio)

➤ फिलिपिंस में चलने वाली उष्ण कटिबंधीय चक्रवातीय हवा है

➤ यह उष्ण कटिबन्धीय चक्रवात भी है।

17. सुखोवे

➤ रूस एवं कजाकिस्तान में चलने वाली गर्म हवा है।

18. गोरिच

➤ ईरान में प्रवाहित होने वाली गर्म एवं शुष्क पवन है।

19. मारिन

➤ द० फ्रांस में बहने वाली गर्म एवं आर्द्र पवन है।

20. अयाला

➤ फ्रांस के मध्य मैसिफ में चलने वाली गर्म हवा है।

21. कोयम बैग

➤ यह इंडोनेशिया में चलने वाली गर्म हवा है।

➤ इससे तम्बाकू के फसल को हानि होती है।

22. सिस्टन (seistan या 120 दिन की पवन)

➤ पूर्वी ईरान की गर्म हवा है।

23. वीरोजन (virozon)

➤ पेरू तथा चिली के प० तटों पर बहने वाली हवा है।

24. वेन्डावेल्स (vendavales)

➤ जिब्राल्टर तथा स्पेन के पूर्वी तट पर चलने वाली ठंडी हवा को वेन्डावेल्स कहते है।

25. टेम्पोराल्स (Temporals)

➤ मध्य अमेरिका के प्रशांत तट पर की हवा है।

➤ मैक्सिको की भी हवा है।

26. सोमून (Somun)

➤ ईरान में कुर्दिस्तान पर्वत से उत्तर-पश्चिम की हवा है।

27. हबूब (Haboob)

➤ सूडान में उत्तर-पूर्व दिशा की ओर चलने वाली हवा है।

➤ स्रोत- सहारा मरुस्थल

28. ग्रेगल

➤ पश्चिमी यूरोप में उत्तर-पूर्व दिशा की ओर चलने वाली हवा है।

29. मेस्ट्रो (Maestro)

➤ भूमध्यसागरीय क्षेत्र से उ०-प० (स्पेन और पुर्तगाल की ओर चलने वाली हवा)

30. बर्ग

➤ द० अफ्रीका में फॉन के समान वायु, जो आंतरिक पठारी भाग से तटवर्ती क्षेत्र की ओर चलती है।

नोट:- प्रमुख गर्म हवाएँ-

फॉन, चिनुक, सिमूम, सिरॉको।

ब्रिकफिल्डर, ब्लैक रोलर, काराबुरान, हरमट्टान।।

खमसिन, गिबली, चिली, जोंडा।

लू, सोलैनो, कोयमबैंग, अयाला।।

शांताआना, योमा, शामल, नार्वेस्टर।

बर्ग, बाग्यो, गोरिच, सुखोवे।।

(B) ठंडी स्थानीय वायु

गुरुत्व पवन (Gravity Winds):-

     समुद्र के तटवर्ती क्षेत्रों में जहां पठार अथवा पर्वतों से घिरे मैदानी भाग है वहां शीत ऋतु में भारी मात्रा में शीतल वायु एकत्रित हो जाती है। इन पठारों अथवा पर्वतों के ढालों से खिसक कर वायु की कुछ राशि घाटियों तथा नदी कंदराओं में एकत्रित हो जाती है।

     साधारण स्थिति में ये हवाएं मंद पवन या समीर के रूप में तट की ओर प्रवाहित होती है। किंतु जब कभी चक्रवातों का आगमन होता है तो न्यून वायु भार व्यवस्था के अंतर्गत शीतल और भारी वायु राशि प्रबल वेग के रूप में तट की ओर प्रवाहित होने लगती है। इस प्रकार के पवनों को अवरोही पवन, गुरुत्व पवन, फॉल विंड्स (Fall Winds), ड्रेनेज विंड्स (Drainage Winds) अथवा केटाबेटिक विंड्स आदि कई नामों से अलंकृत किया जाता है।

    इन अवरोही पवनोंं को विभिन्न स्थानों पर भिन्न-भिन्न से जाना जाता है:-

गुरुत्व पवन (Gravity Winds):-

(i) बोरा (Bora)

➤ बोरा एक शीतल स्थानीय पवन है जो उत्तर/उ०-पू० दिशा से एड्रियाटिक सागर के उत्तरी तट पर चला करता है।

➤ इन पवनों का वेग 128 km/h से लेकर 196 km/h hota है।

➤ तीव्र झोंका के साथ चलने वाली शीतल हवा है।

➤ यह आल्प्स पर्वत की हवा है।

➤ यह आल्प्स पर्वत के दर्रों से आनेवाली हवा है।

➤ यह फॉन का उल्टा हवा है।

➤ यह इटली, यूनान, युगोस्लाविया के तट पर कष्टकर स्थिति उत्पन्न करती है।

➤ रसेदार फसलों के लिए हानिकारक है।

(ii) गिरती पवन (Fall Winds)

नार्वेजियन तट पर इसको गिरती पवन (Fall Winds) कहा जाता है।

(iii) मिस्ट्रल (Mistral)

➤ फ्रांस के भूमध्यसागरीय तट पर गुरुत्व पवन को मिस्ट्रल कहा जाता है।

➤ यह द० फ्रांस की हवा है जो मध्यवर्ती यूरोप से आती है और भूमध्यसागर की ओर बहती है।

➤ रसेदार फसलों के लिए हानिकारक होती है।

हिमझंझा (Blizzard)

➤ अत्यधिक सर्द, वेगवान तथा हिमकणों से युक्त पवन को हिम झंझा कहा जाता है।

➤ प्रारंभ में इस पवन का नामकरण USA स्थित रॉकी पर्वत के पूर्व की ओर मैदानी भागों में चलने वाली बर्फीली आंधियों के लिए किया गया था।

➤ इनकी उत्पत्ति शीतकालीन चक्रवातों के पृष्ठ भाग में स्थित प्रतिचक्रवातों से होती है।

➤ इनमें भारी मात्रा में हिमकण प्रवाहित होती है।

➤ यह जाड़े की ऋतु में उत्तरी अमेरिका में ध्रुवीय प्रदेश से आने वाली हवा है।

➤ कपास, प्याज के लिए हानिकारक साबित होता है।

➤ इससे उत्तरी अमेरिका में पाला पड़ने लगता है।

➤ आजकल उच्च अक्षांशों में चलने वाली पवनों में यदि हिमकण मिश्रित होते है तो उन्हें ब्लिजार्ड कहा जाता है।

➤ अंटार्कटिका में प्राय: ऐसे हिमझंझावत चला करते है जिनमें पवन का वेग कभी-कभी 80 Km/h तथा तापमान -7ºC होता है।

(i) बुरान (Buran)/ पुर्गा

➤ सोवियत रूस तथा मध्य साइबेरिया में उ०-पू० से चलने वाली अत्यधिक सर्द हवाओं को बुरान कहा जाता है तथा बर्फीली आंधियों को पूर्गा (Purga) कहते है।

(ii) बाइज (Bise)/लेवांतर

➤ शीत ऋतु में प्रबल वेग से चलने वाली अत्यधिक ठंडी हवाओं को दक्षिणी फ्रांस में बाइज कहा जाता है तथा स्पेन में लेवांतर (Levanter) कहा जाता है। स्रोत क्षेत्र- Northerly Winds.

➤ तापमान हिमांक से नीचे चला जाता है जबकि मिस्ट्रल का तापमान हिमांक से ऊपर रहता है।

(iii) पैम्पीरो (Pampero)

➤ द० अमेरिका में अर्जेंटीना के पंपास क्षेत्र में उरुग्वे से प्रचंड वेग वाली सर्द हवाएं चला करती है जिन्हें वहां पैम्पीरो कहते है।

➤ इन हवाओं के साथ धूल भरी आंधियां भी चला करती है।

(iv) पापागायो (Papagayo)

➤ कोस्टा रीका के उत्तरी-पश्चिमी तट तथा समीपवर्ती प्रशांत तटवर्ती क्षेत्रों में पापागायो की खाड़ी में शीतकालीन उत्तर-पूर्वी हवाएं चलती है जिन्हें उस खाड़ी के नाम पर पापागायो कहा जाता है।

➤ ये हवाएं बड़ी प्रचंड होती है।

(v) टेहुयांटिपेकर (Tehuanterpecer)

➤ दक्षिणी मैक्सिको तथा उत्तरी मध्य अमेरिका से जाड़े के मौसम में धूलभरी तेज आंधियाँ चला करती है जिसे टेहुयांटिपेकर कहा जाता है।

➤ कोलेरेडो और ग्रेट बेसिन से जाड़े की ऋतु में चलती है।

(vi) फ्राइजेम (Friagem)

➤ ब्राजील के उष्ण कटिबंधीय कम्पोज तथा मध्य अमेजन घाटी में मई तथा जून के महीनों में भीषण शीत लहरी का प्रकोप हो जाता है, फ्राइजेम कहा जाता है।

➤ इन सर्द हवाओं का प्रकोप 3 से 5 दिन रहता है।

➤ जाड़े की ऋतु में एंडीज पर्वत से नीचे उतरने वाली हवा है।

➤ यह भी आनंददायक हवा है।

सदर्न बस्टर (Southern Buster)

➤ ध्रुवीय प्रदेशों से द० ऑस्ट्रेलिया (न्यू साउथ वेल्स) में प्रवाहित होने वाली हवा है।

नेवाडोह

➤ यह दक्षिणी अमेरिका के एंडीज के हिम क्षेत्रों से इक्वाडोर की उच्च घाटियों में प्रवाहित होने वाली पवन है।

➤ यह एक पर्वत समीर है।

ट्रामोण्टाना

➤ पश्चिमी भूमध्यसागरीय क्षेत्र में शीत काल में प्रवाहित होने वाली शुष्क एवं शीतल हवा है।

केप डाक्टर

➤ द० अफ्रीका के पठारी क्षेत्र से दक्षिणी तट की ओर बहती है।

➤ इस हवा को टेबल क्लॉथर कहा जाता है क्योंकि यह पवन पर्वतीय क्षेत्रों में बादलों का निर्माण करती है।

नार्दर (Norther)

➤ यह वास्तव में एक ध्रुवीय पवन है जो अवरोध के अभाव के कारण दक्षिण में अमेरिका के टेक्सास एवं खाड़ी तटीय क्षेत्रों तक पहुंच जाती है।

➤ इसका अगला क्रम मध्य अमेरिका में Norte कहलाता है।

विलीवाव (Willywaw)

➤ यह एक गुरुत्व पवन है।

➤ अंटार्कटिका में शीतल और भारी हवाएं पठारी ढालों से नीचे उतरकर तीव्र वेग से चलती है जिसे विलीवाव कहा जाता है।

➤ अलास्का में इस पवन को बिलिबॉब कहते है।

➤ जब सूर्य दक्षिणायन होती है तब यह पवन चलती है।

मौसमी हवा या सामयिक पवन

      मौसम के अनुसार या समय के साथ चलने वाली हवा को मौसमी हवा कहते हैं। यह कुल तीन प्रकार के होते हैं-

1. स्थलीय समीर और सागर समीर 

2. पर्वत समीर और घाटी समीर 

3. मानसून पवनें

1. स्थलीय समीर और सागर समीर (Land Breeze and Sea Breeze)

➤ दिन के समय समुद्र के निकटवर्ती क्षेत्र, समुद्र की तुलना में जल्दी गर्म हो जाते हैं जिससे स्थल पर LP का और समुद्र पर HP का निर्माण हो जाता है जिससे हवा समुद्र से स्थल की ओर प्रवाहित होने लगती है, इसे सागरीय या समुद्री समीर कहते हैं। 

➤ इसके विपरीत रात के समय पार्थिव विकिरण के कारण स्थलीय भाग सागरीय भाग की तुलना में शीघ्रता से ठंडी हो जाती है जिससे स्थल पर HP एवं समुद्र पर LP का निर्माण होता है, जिसके कारण हवा स्थल से समुद्र की ओर चलने लगती है, इसे स्थलीय समीर कहते हैं।

हवाएँ

स्थलीय समीर और समुद्री समीर की निम्नलिखित विशेषताएँ है-

◆ 24 घंटे में इनकी दिशा में दो बार परिवर्तन होता है।

◆ ये समीर तटीय क्षेत्रों को एक पतली पेटी में प्रभावित करती है।

◆ इसी समीर के कारण तटीय क्षेत्रों में मौसम हमेशा सम बना रहता है। दिन के समय समुद्र से आने वाली हवा के कारण वायु में आर्द्रता की मात्रा अधिक रहती है जबकि स्थालीय समीर के कारण रात के समय मौसम शीतल हो जाता है। यही कारण है कि तटीय क्षेत्रों में अवस्थित नगरों में आर्थिक गतिविधियाँ देर रात तक संचालित होती रहती है।

2. पर्वत समीर और घाटी समीर

➤ ऊँचे पर्वतीय क्षेत्रों में दो प्रकार की दैनिक हवाएँ चलती है- पर्वत समीर एवं घाटी समीर।

➤ दिन के समय पर्वतीय ढाल वाला क्षेत्र घाटियों की तुलना में जल्दी एवं अधिक गर्म हो जाते हैं जिससे ढलानों पर LP और घाटी में HP का निर्माण हो जाता है। जिसके कारण पवन का संचरण ढालों के सहारे नीचे से ऊपर की ओर होने लगती है, इसे घाटी समीर कहते हैं।

➤ इसके विपरीत रात्रि के समय बढ़ती ऊँचाई के कारण तापमान में कमी आ जाती है जिससे पर्वतों के ऊपरी क्षेत्रों में हवा ठंडी एवं भारी हो जाती है एवं HP का निर्माण कर लेती है जबकि घाटी में LP की स्थिति बनती है। अतः हवा पर्वतीय ढालों के सहारे नीचे की ओर संचरित होने लगती है, इसे पर्वतीय समीर कहा जाता है।

विशेषताएँ

◆ यह एक दैनिक हवा है जो पर्वतीय ढालों के सहारे चलती है। घाटी समीर ‘एनाबेटिक हवा’ है जबकि पर्वतीय समीर एक ‘केटाबेटिक’ हवा है।

◆ उष्ण एवं शीतोष्ण प्रदेशों में 35° से 50° अक्षांश के बीच इस हवा को स्पष्ट रूप से महसूस किया जा सकता है।

◆ यह हेडली सेल के विपरीत कार्य करता है। इसी समीर के कारण पर्वतीय क्षेत्रों में फलों के बागान, नगरों का विकास, या अधिवासी क्षेत्र का निर्माण न तो घाटी में होता है और न ही पर्वतीय कटकों पर बल्कि इनका विकास पर्वतीय ढलान पर होता है।

3. मानसूनी हवा

      यह मौसम विशेष की हवा है। हेडली महोदय ने इसे परिभाषित करते हुए कहा है कि मानसून एक ऐसी हवा है जो 6 महीने स्थल से समुद्र की ओर और अगले 6 महीने समुद्र से स्थल की ओर चलती है।

विशेषताएँ

◆ मानसून की उत्पत्ति के संबंध में चार सिद्धांत दिए हैं-

(i) तापीय सिद्धांत

(ii) पछुआ हवा सिद्धांत

(iii) जेट स्ट्रीम सिद्धांत और

(iv) अलनीनो सिद्धांत

◆ यह एक अनिश्चिताओं से भरी हुई हवा है क्योंकि इसके आने और जाने की तिथि अनिश्चित है।

◆ इसकी विश्वसनीयता संदिग्ध है।

◆ वर्षा का वितरण एवं मात्रा दोनों अनिश्चित है।

◆ बादल विस्फोट की घटना घटित होती है।

◆ इस हवा की उत्पत्ति 8° से 35° अक्षांश के बीच में होती है। इसका विस्तार भारतीय उपमहाद्वीप, उत्तरी-पूर्वी आस्ट्रेलिया, दक्षिण-पूर्वी ब्राजील, दक्षिणी चीन, मेडागास्कर, संयुक्त राज्य अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य इत्यादि में हुआ है।



हवाओं से सम्बंधित पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ट प्रश्नोत्तर



 

1. व्यापारिक हवाएँ (Trade winds) किन अक्षांशों से किन अक्षांशों की ओर बहती है?

[A] विषुवत रेखा से उष्ण कटिबन्ध की ओर
[B] उष्ण कटिबन्ध से ध्रुवीय क्षेत्रों की ओर
[C] अश्व अक्षांशों से विषुवत रेखा की ओर
[D] उपर्युक्त सभी

2. उच्च दाब क्षेत्र से भूमध्य सागर की ओर चलने वाली पवनें होती है-

[A] पछुआ हवाएँ
[B] व्यापारिक पवनें
[C] व्यापारिक पवनें
[D] समुद्री पवनें

3. व्यापारिक हवाएँ होती है-

[A] नियमित व स्थिर
[B] अनियमित
[C] अंशतः अनियमित
[D] उपर्युक्त में कोई नहीं

4. पूरे वर्ष एक ही दिशा में प्रवाहित होने वाली पवनें क्या कहलाती है?

[A] स्थानीय पवन
[B] सामाजिक पवन
[C] सनातनी पवन
[D] ध्रुवीय पवन

5. उपोष्ण उच्च दाब से विषुवत रेखीय निम्न दाब की ओर चलने वाली पवनें क्या कहलाती है?

[A] व्यापारिक पवनें
[B] ध्रुवीय पवनें
[C] पछुआ पवनें
[D] गरजता चालीसा

6. व्यापारिक पवनें कहाँ से चलती है?

[A] विषुवतीय निम्न दाब से
[B] ध्रुवीय उच्च दाब से
[C] उपोष्ण उच्च दाब से
[D] अधोध्रुवीय निम्न दाब से

7. वे नियमित हवाएँ जो कि ‘गरजता चालीसा’, ‘प्रचण्ड पचासा’ तथा ‘चीखता साठा’ के उपनाम से जानी जाती है, निम्न में से किस प्रकार की हवाएँ है?

[A] ध्रुवीय
[B] पछुआ
[C] चक्रवातीय
[D] व्यापारिक

8. दहाड़ता चालीसा क्या है?

[A] 40° दक्षिणी अक्षांश की जलधारा
[B] 40° उत्तरी अक्षांश की जलधारा
[C] दक्षिणी गोलार्द्ध में 40° अक्षांश के पास चलने वाली तेज हवा
[D] इनमें से कोई नहीं

9. भयंकर पचासा चलते हैं-

[A] 50° उत्तरी अक्षांश पर
[B] 50° दक्षिणी अक्षांश पर
[C] 50° N से 60° N के मध्य
[D] इनमें से कोई नहीं

10. चीखता साठा पवन प्रवाहित होती है-

[A] 60° पूर्वी देशान्तर के निकट
[B] 60° पश्चिमी देशान्तर के निकट
[C] 60° उत्तरी अक्षांश के निकट
[D] 60° दक्षिणी अक्षांश के निकट

11. मानसून शब्द का तात्पर्य है-

[A] हवाओं का सदैव एक ओर ही बहना
[B] हवाओं का बहुत तेजी से बहना
[C] हवाओं का बहुत धीमी गति से बहना
[D] हवाओं के रूख का बदलना

12. मानसूनी हवाएँ-

[A] उच्च दाब क्षेत्र से उच्च दाब क्षेत्र की ओर चलती है।
[B] उच्च दाब क्षेत्र से निम्न दाब क्षेत्र की ओर चढ़ती है।
[C] निम्न दाब क्षेत्र से उच्च दाब क्षेत्र की ओर चलती है।
[D] निम्न दाब क्षेत्र से निम्न दाब क्षेत्र की ओर चलती है।

13. आल्पस पर्वत के उत्तरी भाग में बहने वाली उष्ण शुष्क स्थानीय हवाओं को क्या कहा जाता है?

[A] खमसिन
[B] सिराँको
[C] चिनूक
[D] फॉन

14. अर्जेण्टीना के पम्पास क्षेत्र में उरूग्वे की ओर से प्रचण्ड वेग से चलने वाली ठंडी हवाओं को क्या कहा जाता है?

[A] टपीरो
[B] पैम्पीरा
[C] हरमट्टन
[D] काराबुरान

15. न्यूजीलैंड में उच्च पर्वतीय क्षेत्रों से उतरने वाली गर्म शुष्क एवं धूल भरी स्थानीय हवा निम्न में से किस नाम से जानी जाती है?

[A] ब्रिक फील्डर
[B] ट्रैमोण्टेन
[C] नारवेस्टर
[D] साण्टाअना

 

16. सं० रा० अमेरिका के पश्चिमी तट से प्रारम्भ होकर रॉकी पर्वत को पार करके उसके नीचे उतरने वाली गर्म एवं शुष्क हवा किस नाम से जानी जाती है?

[A] फॉन
[B] नार्दन
[C] चिनूक
[D] साण्टाअना

17. निम्नलिखित में से कौन सुमेलित नहीं है?

[A] चिनूक- चीन
[B] खमसिन- मिस्र
[C] सिराँको- इटली
[D] गिबिली- लीबिया

18. यूरोप में जूरा पर्वत से जेनेवा झील की तरफ रात्रि में चलने वाली शीतल एवं शुष्क पवन को किस नाम से जाना जाता है?

[A] तालविण्ड
[B] सोलैनी
[C] मिस्ट्रल
[D] जोरान

19. रॉकी पर्वत के पूर्वी ढालों पर उतरने वाली हवा को संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा में क्या कहा जाता है?

[A] सिराँको
[B] चिनूक
[C] खमसिन
[D] हरिकेन

20. निम्न में से कौन-सी स्थानीय ठंडी हवा नहीं है?

[A] मिस्ट्रल
[B] बोरा
[C] खमसिन
[D] ब्लिजार्ड

21. निम्न में से कौन ठंडी स्थानीय हवा है?

[A] मिस्ट्रल 
[B] पैम्पीरो
[C] बोरा
[D] उपर्युक्त सभी

22. निम्नलिखित में से कौन-सी वायु स्विट्‌जरलैंड में उत्तरी आल्पस के विमुख ढाल पर बहती है?

[A] फॉन
[B] मिस्ट्रल
[C] सिराँको
[D] चिनूक

23. चिनूक है एक-

[A] स्थानीय हवा
[B] स्थायी हवा
[C] सनातनी हवा
[D] समुद्री जलधारा

24. निम्नलिखित में कौन सुमेलित नहीं है?

[A] मिस्ट्रल- फ्रांस
[B] सिराँको- आस्ट्रेलिया
[C] यामो- जापान
[D] खमसिन- मिस्र

 

25. सुमेलित कीजिए-

सूची-I (स्थानीय हवा)  सूची-II (देश)

a. चिनूक 1. सं० रा० अ०

b. सिराँको 2. आस्ट्रेलिया

c. ब्रिक फील्डर 3. फ्रांस

d. मिस्ट्रल 4. इटली

कूट: a b c d

[A] 1 4 2 3
[B] 1 4 3 2
[C] 4 1 2 3
[D] 4 1 3 2

26. निम्नलिखित में से कौन-सी स्थानीय पवन इटली में ‘रक्त की वर्षा’ लाती है?

[A] सिमूम
[B] सामून
[C] सिराँको
[D] शामल

27. निम्नलिखित में से कौन-सी स्थानीय पवन ‘हिम भजी’ के नाम से जानी जाती है?

[A] चिनूक
[B] फॉन
[C] हरमट्टन
[D] सिरॉको

28. निम्नलिखित में से कौन-सी स्थानीय पवन को ‘डाक्टर वायु’ भी कहा जाता है?

[A] फॉन
[B] चिनूक
[C] हरमट्टन
[D] सिरॉको

29. निम्नलिखित में से कौन-सी स्थानीय पवन अफ्रीका में गिनी तट के लोगों को आर्द्र मौसम से राहत प्रदान करती है?

[A] मिस्ट्रल
[B] हरमट्टन
[C] खमसिन
[D] सिमूम

 

30. निम्नलिखित में से कौन-सी गर्म स्थानीय पवन कैलिफोर्निया में फल के बगीचों को काफी नुकसान पहुँचाती है?

[A] जोण्डा
[B] सान्ताअना
[C] नार्दर
[D] चिनूक

31. निम्नलिखित में से कौन-सी स्थानीय पवन मध्य यूरोप के पर्वतीय क्षेत्र से यूगोस्लाविया के एड्रियाटिक तट की ओर प्रवाहित होती है?

[A] मिस्ट्रल
[B] फॉन
[C] बोरा
[D] बुरान

32. निम्नलिखित में से कौन ठंडी स्थानीय पवन नहीं है?

[A] जूरन
[B] जोण्डा
[C]  बुरान
[D] पापाग्यो

33. निम्नलिखित में से कौन ठंडी स्थानीय पवन है?

[A] खमसिन
[B] सिरॉको
[C] हरमट्टन
[D] फ्राइजेम

34. सुमेलित कीजिए-

सूची-I (स्थानीय पवन) सूची-II (देश)

a. खमसिन 1. मिस्र

b. चिली 2. ट्यूनीशिया

c. गिबिली 3. लीबिया

d. लेवेच 4. स्पेन

कूट: a b c d

[A] 1 2 3 4 
[B] 2 1 3 4
[C] 1 2 4 3
[D] 4 2 3 1

35. सुमेलित कीजिए-

सूची-I (स्थानीय पवन)  सूची-II (देश)

a. सिरॉको 1. फिलीपीन्स

b. ब्रिक फिल्डर 2. आस्ट्रेलिया

c. सामून 3. ईरान

d. बाग्यो 4. इटली

कूट: a b c d

[A] 1 2 3 4
[B] 2 1 3 4
[C] 4 2 3 1
[D] 4 3 2 1

35. Metrological Instruments : Functions of Wind Vane, Anemometer, Barometer, Rain Gauge and Dry and Wet Bulb Thermometer

Metrological Instruments: Functions of

Wind Vane, Anemometer, 

Barometer, Rain Gauge

and Dry and Wet Bulb Thermometer

1.  WIND VANE (वात् दिग्दर्शी)

WIND VANE (वात् दिग्दर्शी):-

       इस यंत्र से वायु की दिशा ज्ञात की जाती है। इसे भारतीय मौसम विज्ञान संस्थान द्वारा निर्धारित 10 मीटर की ऊँचाई पर लगाया जाता है, ताकि पवन में कोई रुकावट न हो। इस यंत्र में तीन भाग होते हैं-

(1) एक भाग तीर,

(2) दूसरा भाग पूँछ तथा

(3) तीसरा भाग लम्बवत् धुरी।

        वात् दिग्दर्शी दो प्रकार के होते हैं:-

(1) तीर वाला वात् दिग्दर्शी एवं

(2) कुक्कुट वाला वात् दिग्दर्शी।

     धुरी एवं ऊपर के तीर या कुक्कुट की व्यवस्था इस प्रकार रहती है कि तनिक भी हवा चलने पर यह घूमने लगे। हवा चलने से यह तीर हवा की ओर इशारा करता है अर्थात् जिधर से हवा आती है, उधर उसका तीर होता है। इस यंत्र के निचले भाग में लगी छड़ में चार छड़े लगी रहती है जिन पर दिशाओं के नाम लिखे रहते है, यथा-उत्तर, पूरब, दक्षिण तथा पश्चिम।

     यहाँ एक बात अधिक ध्यान देने की है कि हवा का नामकरण उसी ओर होता है जिधर से हवा आती है, जैसे- यदि हवा पश्चिम की ओर से चल रही है तो उसे पछुआ पवन कहा जायेगा। जिधर से हवा आती है, उधर तीर का नुकीला भाग होता है। जिस यंत्र में तीर के स्थान पर मुर्गा लगा रहता है, उसे वेदर कॉक (Weather Cock) या मौसम कुक्कुट कहा जाता है।

ARROW-TYPE WIND VANE



COCK-TYPE WIND VANE

(WEATHERCOCK)

 



2. Anemometer (पवन वेगमापी)

Anemometer (पवन वेगमापी):-

     इस यंत्र द्वारा हवा की गति ज्ञात की जाती है। इसमें चार कटोरियाँ भुजाओं द्वारा एक लम्बी छड़ी में इस तरह लगी रहती है कि वे आसानी से घूम सके। जब हवा चलती है तो ये कटोरियाँ भी घूमने लगती है। इस छड़ी के निचले भाग में एक छड़ी लगी रहती है जिसमें डायल पर चक्करों की संख्या अंकित रहती है। इसकी सहायता से वायु की गति प्रति घण्टा किलोमीटर ज्ञात कर लेते है। वात् दिग्दर्शी की तरह इस यंत्र को भी धरातल से लगभग 10 मीटर की ऊँचाई पर लगाते हैं।

ANEMOMETER

 



3.  BAROMETER (वायुदाबमापी यंत्र)

BAROMETER (वायुदाबमापी यंत्र):-

    इस यंत्र द्वारा वायुदाब ज्ञात किया जाता है। ये बैरोमीटर प्रमुखतः दो प्रकार के होते हैं-

(1) पारायुक्त बैरोमीटर एवं

(2) निर्द्रव बैरोमीटर।

     इसके अतिरिक्त, अब स्वतः वायुदाब लेखी (Barograph) का प्रयोग किया जाने लगा है जिनका विवरण नीचे दिया जा रहा है।

फॉर्टिन वायुदाब मापी (Fortin’s Barometer)-

     फॉर्टिन बैरोमीटर की रचना फॉर्टिन महोदय ने की थी। उसी के नाम पर इसे फॉर्टिन बैरोमीटर कहा जाता है। यह पारायुक्त वायुदाब मापी है। यह साधारण वायुदाब मापी का परिष्कृत रूप है। इसमें 90 सेण्टीमीटर लम्बी एक काँच की नली होती है जिसमें पारा भरा होता है। इस नली का ऊपरी सिरा बन्द तथा निचला खुला रहता है। निचले सिरे पर नोंक बनी रहती है जो पारे में भरे पात्र में डूबी रहती है। इस बर्तन के नीचे एक चमड़े की थैली के नीचे पेंच लगा रहता है जिसको ढीला करने या कसने पर बर्तन में पारे की ऊँचाई को घटाया या बढ़ाया जा सकता है।

      प्याले तथा नली में पारे की तली को बढ़ने के लिए खुली जगह होती है। मापक का शून्य बताने के लिए हाथीदाँत का नोकदार संकेतक होता है जो दाब नापते समय प्याले से भरे हुए पारे के तल को स्पर्श करता है। नली में पारे का तल पढ़ने के लिए वर्नियर कैलिपर्स मापक होता है। यह सारा यत्र धातु के एक पाइप में बन्द रहता है तथा हुकों द्वारा लकड़ी के तख्ते पर कसा रहता है। इस पूरे यंत्र को काँच के एक शोकेस में रखकर दीवाल पर टाँग दिया जाता है।

     सर्वप्रथम संकेतांक की नोंक को पारे के तल पर स्पर्श कराना चाहिए। यह क्रिया नीचे लगे पेंच द्वारा होती है। यह क्रिया शून्य समायोजन (Zero Adjustment) कहलाती है। अब पारे की सतह पढ़ने के लिए वर्नियर अल्पतमांक ज्ञात करते हैं तथा वर्नियर को पारे की ऊपरी सतह से उठाकर तब तक धीरे-धीरे नीचे लाते हैं जब तक कि वह पारे के सर्वोच्च तल को न छूने लगे। मापक तथा वर्नियर दोनों की नाप जोड़ देने पर वायुदाब आ जाता है। कई बार नाप लेकर उसका मध्यमान ज्ञात कर लिया जाता है।

FORTIN’S BAROMETER

Barometer

        फॉर्टिन बैरोमीटर से वायुदाब लेते समय निम्नांकित सावधानियाँ बरतनी चाहिए-

(1) बैरोमीटर को ऊर्ध्वाधर कर लेना चाहिए।

(2) प्याले में पारे के तल को संकेतक से ठीक-ठीक स्पर्श करना चाहिए।

(3) वर्नियर मापक के निचले सिरे भी नली में पारे के उत्तल तल के उच्चतम बिन्दु से आँख को उसी ऊँचाई पर रखकर स्पर्श करना चाहिए।

      बैरोमीटर (वायुदाबमापी) से निम्न बातों का ज्ञान होता है-

(1) बैरोमीटर से ऊँचाई का ज्ञान होता है-

     जैसे-जैसे ऊँचाई बढ़ती जाती है, वायु का दाब कम होता जाता है फलतः बैरोमीटर को ऊँचाई पर ले जाने से उसका पारा धीरे-धीरे गिरने लगता है। समुद्र तल से 900′ ऊँचाई पर बैरोमीटर से पारे की ऊँचाई लगभग 1″ कम हो जाती है। इस प्रकार प्रत्येक 900′ चढ़ने पर ऊँचाई 1″ कम हो जाती है।

(2) बैरोमीटर से आँधी या तूफान आने का ज्ञान प्राप्त होता है-

     यदि बैरोमीटर का पारा शीघ्रता से गिर रहा है तो यह आँधी या तूफान आने का संकेत करता है क्योंकि उस स्थान का दबाव कम होने के कारण बैरोमीटर का पारा एकदम नीचे गिर जाता है। चारों ओर से ऊँचे दबाव वाले स्थानों से पवनें उस स्थान की ओर बड़े वेग से चलने लगती हैं। यही पवनें तूफान व आँधी का स्वरूप धारण कर लेती है।

(3) बैरोमीटर से मौसम की स्वच्छता का ज्ञान होना-

      यदि बैरोमीटर में पारा धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ने लगे तो समझ लीजिए कि मौसम साफ एवं स्वच्छ होने जा रहा है क्योंकि पारे का चढ़ना अधिक दबाव का द्योतक है। दाब बढ़ने पर वायु अन्य स्थानों को बहने लगती है।

(4) वायुमण्डल के नम होने या वर्षा होने का अनुमान किया जाता है-

    जब बैरोमीटर का पारा धीरे-धीरे नीचे गिरता है तो मौसम के नम होने या वर्षा की सम्भावना की जाती है।

(5) तापमान का ज्ञान होता है-

     जैसे-जैसे तापमान बढ़ता जाता है, वायु गरम होकर हल्की हो जाती है और उसका दबाव घटता जाता है जिससे बैरोमीटर में पारा नीचे गिरने लगता है।

निर्द्रव वायुदाब मापी (Aneroid Barometer)-

      एनीरॉइड ग्रीक भाषा के शब्द Aneros से बना है जिसमें ‘A’ का अर्थ नहीं तथा ‘Neros’ का अर्थ द्रव से लगाया जाता है अर्थात् इसमें कोई द्रव नहीं होता है। यह धातु की एक चादर का बना घड़ी के आकार का एक डिब्बा होता है जिसकी सतह लहरदार होती है। यंत्र की हवा यंत्रों द्वारा निकाल दी जाती है। इस डिब्बे का ऊपरी भाग बहुत हल्की चादर का बना होता है जो थोड़े-से दबाव से प्रभावित होता है।

      वायुदाबमापी के डिब्बे के मध्य का सम्बन्ध एक लीवर तथा कमानी द्वारा ऊपरी भाग में लगी सुई से होता है। हवा के दबाव के कारण डिब्बे का ऊपरी भाग ऊपर-नीचे होता है जो ऊपरी भाग में लगी सुई के द्वारा वायुदाब बताता है। ऊपरी भाग पर आँधी, वर्षा, परिवर्तन, बहुत शुष्क आदि चिह्न बने रहते हैं। इस प्रकार इनकी सहायता से मौसम की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

ANEROIDS BAROMETER

वायुदाब लेखी (Barograph)-

     यह आधुनिकतम उपकरण है जिसमें वायुदाब स्वतः अंकित होता है क्योंकि वायुदाब किसी व्यक्ति द्वारा नहीं पढ़ा जाता है अपितु ग्राफ पेपर पर स्वतः अंकित होता रहता है। इसमें एक बेलन के ऊपर ग्राफ पेपर लगा रहता है तथा इसके भीतर एक घड़ी लगी रहती है जो बेलन को घुमाती है। एक सप्ताह में बेलन एक चक्र पूरा कर लेता है।

      इस प्रकार इस यंत्र द्वारा दैनिक वायुदाब सरलता से ज्ञात कर लिया जाता है। इससे आगामी मौसम के बारे में जानकारी प्राप्त करने में अधिक सहायता मिलती है।

वायुदाब का स्वरूप (Nature of Airpressure):-

     वायुदाब का स्वरूप या इसकी मात्रा का रूप दो प्रकार का होता है-

(1) निम्न बायुदाब:-

     निम्न वायुदाब क्षेत्र में समदाब रेखाएँ अण्डाकार या वृत्ताकार होती है। इसमें केन्द्रीय भाग में वायु का दबाव कम (Low Pressure) तथा बाहर वायुदाब अधिक होता है। इसे चक्रवात भी कहते है। ये वर्षा सूचक है क्योंकि हवाएँ बाहर से केन्द्र की ओर चलती हैं।

(2) उच्च वायुदाब:-

     यह अधिक वायुदाब वाले होते हैं जिनके केन्द्रीय भाग में वायु का दबाव अधिक (High Pressure) तथा बाहर वायुदाब कम होता है। यह साफ एवं शुष्क मौसम का सूचक है। इसमें हवाएँ केन्द्र से बाहर की ओर चलती हैं। इन्हें प्रतिचक्रवात कहते हैं।



4. Rain Gauge (वर्षामापी यंत्र)

Rain Gauge (वर्षामापी यंत्र):-

       साधारणतः वर्षामापी कई प्रकार के होते हैं। इस यंत्र द्वारा किसी निश्चित समय में होने वाली वर्षा की मात्रा ज्ञात की जाती है। साधारणतः यह धातु का बेलन के आकार का एक खोल होता है। इसके ऊपरी भाग में एक कीप (Funnel) लगी रहती है। इस कीप का व्यास बेलन के व्यास के बराबर होता है। वर्षा के समय इसे खुले मैदान में रख दिया जाता है जिससे धीरे-धीरे वर्षा का जल इसमें एकत्रित होता रहता है।

       वर्षा समाप्त होने पर इस जल को अलग से काँच के एक बड़े बर्तन में डालते हैं जिसकी आकृति गिलास जैसी होती है, इसे नपना गिलास कहते हैं। इसमें सेण्टीमीटर या इंच के चिह्न लगे रहते हैं जिनसे वर्षा की मात्रा ज्ञात कर लेते हैं।

     ज्ञातव्य है कि जब बेलन तथा कीप के व्यास बराबर होते हैं तो वर्षा की मात्रा आसानी से ज्ञात हो जाती है किन्तु यह आवश्यक नहीं है कि वे दोनों सदैव बराबर हों। नपना गिलास भी विभिन्न प्रकार के वर्षामापियों के लिए भिन्न-भिन्न होते है। यदि फनल तथा नपना गिलास का व्यास पता हो तो निम्न सूत्र द्वारा नपना गिलास में पानी की ऊँचाई ज्ञात की जा सकती है-

नपना गिलास में पानी की ऊँचाई= कीप का व्यास/नपना गिलास का व्यास

RAIN GAUGE

वर्षालेखी (Rainograph)-

      यह स्वतः वर्षालेखी यंत्र होता है जिसमें वर्षा की मात्रा तथा अवधि दोनों का एक ग्राफ पेपर पर स्वतः आलेखन होता है। इसमें एक घूमता हुआ बेलन होता है जो 24 घण्टे में एक पूरा चक्कर कर लेता है। बेलन के चारों ओर एक ग्राफ लगा रहता है।

     इस ग्राफ का सम्बन्ध लीवर द्वारा एक तैरने वाली वस्तु से होता है। लीवर में एक कलम लगी रहती है जो ग्राफ पेपर को स्पर्श करती है। जब वर्षा होती है तो जल कीप द्वारा नीचे बेलन में गिरता है जिससे लीवर में कम्पन होता है जिसका प्रभाव कलम पर पड़ता है। यह कलम ग्राफ पेपर पर आलेखन करती है।



5. Dry and Wet Bulb Thermometer (शुष्क एवं आर्द्र बल्ब तापमापी)

Dry and Wet Bulb Thermometer (शुष्क एवं आर्द्र बल्ब तापमापी):-

      इस तापमापी के द्वारा तापमान तथा आर्द्रता ज्ञात की जाती है। इसमें एक बोर्ड पर दो तापमापी लगे रहते है। इनमें से एक तापमापी का बल्ब शुष्क तथा दूसरे का गीला रखा जाता है। इसे गीला रखने के लिए बल्ब पर मलमल की पतली पट्टी लिपटी रहती है जिसका एक सिरा नीचे पानी से भरे बर्तन में डूबा रहता है, शुष्क तापमापी का तापमान आर्द्र बल्ब के तापमान से सदैव अधिक रहता है। जितनी अधिक वायु शुष्क होगी, उतना ही अधिक दोनों तापमापियों के पाठ्यांकों में अन्तर होगा। किसी समय दोनों तापमापियों के अन्तर की सहायता से वायु की सापेक्षिक आर्द्रता (Relative Humidity) ज्ञात कर लेते हैं।

DRY

AND

WET BULB THERMOMETER

Metrological Instruments

     किसी वायु पुंज में किसी तापमान पर जितनी अधिकतम जलवाष्प समा सकती है और जितने प्रतिशत वायु में उपस्थित है, उसे सापेक्षिक आर्द्रता कहते हैं अर्थात् किसी निश्चित तापमान पर निश्चित आयतन वाली वायु की आर्द्रता शक्ति तथा उसमें उपस्थित आर्द्रता की वास्तविक मात्रा के अनुपात को सापेक्ष या सापेक्षिक आर्द्रता कहा जाता है।

      उदाहरणार्थ, 70° फारेनहाइट पर आर्द्रता सामर्थ्य 8 ग्रेन है, यदि इसकी वास्तविक आर्द्रता 4.1 ग्रेन है तो सापेक्ष आर्द्रता होगी-

सापेक्ष आर्द्रता = निरपेक्ष आर्द्रता / आर्द्रता सामर्थ्य x 100

= 4.1/8×100

= 51.25%

तापमान की मापनियों का परिवर्तन-

      तापमान प्रायः फारनेहाइट, सेण्टीग्रेड तथा रियूमर में ज्ञात किया जाता है। फारनेहाइट पैमाने का आविष्कार जर्मन विद्वान डेनियल फारनेहाइट ने 1714 ई. में किया था। सेण्टीग्रेड मापनी का आविष्कार स्वीडन के प्रसिद्ध खगोलज्ञ एण्डर्स सेल्सियस ने 1742 ई. में किया था। रियूमर मापनी का आविष्कार फ्रांसीसी वैज्ञानिक रियूमर ने किया था। इन इकाइयों में नापे गये तापमान को निम्नलिखित सूत्र द्वारा परिवर्तित किया जा सकता है-

F-32/180 = C/100 = R/80

या

F-32/9 = C/5 = R/4

14. Composition of The Atmosphere (वायुमण्डल का संगठन)

14. Composition of The Atmosphere

(वायुमण्डल का संगठन)


वायुमण्डल ⇒

Composition of The Atmosphere

 

      ठोस पृथ्वी के चारों ओर गैंसों का एक आवरण मिलता है जिसे वायुमण्डल (Atmosphere) कहते हैं। इसकी कई विशेषताएँ है। जैसे:-

➤ वायुमण्डल के ही अंतर्गत कई प्रकार के मौसमी एवं जलवायु सबंधित घटनाएँ घटित होती है।

➤ हमारा वायुमण्डल गैस, जलवाष्प और धुलकण से निर्मित है।

➤ जलवाष्प की उपस्थिति के कारण ही मौसमी घटनायें घटित होती है।

➤ हमारा वायुमंडल कई उप-पेटियों में विभक्त है।

➤ वायुमण्डल में प्रतिरोधात्मक क्षमता है।

➤ गुरुत्वाकर्षण बल के कारण वायुमंडल पृथ्वी से चिपका हुआ है।

➤ वायुमण्डल में वायुदाब, वायुसंचरण, जलवायु परिवर्तन जैसे गुण पाये जाते हैं।

➤ वायुमण्डल अपने आपको लगातार स्वच्छ बनाए रखता है।

वायुमण्डल का संगठन (Composition of the Atmosphere)

      हमारा वायुमण्डल मुख्यत: गैस, जलवाष्प और धुलकण से निर्मित है। वायुमण्डल को निर्मित करने वाले संघटन की चर्चा नीचे कर रहे हैं-

(1) गैस (Gases)- हमारा वायुमंडल कई प्रकार के गैसों से निर्मित हैं।

क्रम गैस सूत्र आयतन (% में)
1. नाइट्रोजन N2 78.03
2. ऑक्सीजन O2 20.95
3. आर्गन Ar 0.93
4. कार्बन डाई ऑक्साइड CO2 0.036
5. नियॉन Ne 0.002
6. हीलियम He 0.0005
7. क्रिप्टन Kr 0.001
8. जेनन Xe 0.00009
9. हाइड्रोजन H2 0.00005

       उपरोक्त तालिका से स्पष्ट है कि वायुमण्डल में नाइट्रोजन की मात्रा सर्वाधिक है। वायुमण्डल में यह दो कार्यों को सम्पन्न करता है-

(i) ऑक्सीकरण की क्रिया को मंद करता है या रोकता है।

(ii) नाइट्रोजन चक्र को संचालित करता है।

➤ हमारे वायुमण्डल में दूसरा सबसे महत्वपूर्ण गैस ऑक्सीजन है जो ऑक्सीकरण तथा प्रज्वलन की क्रिया में मदद करता है। साथ ही जैविक श्वसन क्रिया का प्रमुख आधार है।

➤ हमारे वायुमण्डल में तीसरा सबसे महत्वपूर्ण गैस अक्रिय गैसे हैं। जैसे- आर्गन, नियॉन इत्यादि।

➤ सभी अक्रिय गैसों को मिलाने पर वायुमण्डल में इनकी मात्रा 1% है। इनमें भी सर्वाधिक आर्गन (0.93%) है। ये वायुमण्डल में अति अल्प मात्रा में मौजूद है। वायुमण्डल में रहकर यह कई प्रकार के रासायनिक पदार्थ को निष्क्रिय करती है।

➤ हमारे वायुमण्डल में ऑक्सीजन का एक अपरूप ओजोन (O3) के रूप में मौजूद है।

➤ यह गैस समताप मण्डल के ओजोन परत में पायी जाती है।

➤ यह सूर्य से आने वाली हानिकारक किरणों को शोखकर पृथ्वी को सुरक्षित करती है, इसलिए ओजन परत को “वायुमण्डल का छतरी” कहा जाता है।

➤ हमारे वायुमण्डल का अगला महत्वपूर्ण गैस ग्रीनहाउस गैसें हैं।

➤ इसके अंतर्गत CO2, CO, CFC, CH4 (मिथेन) जैसे गैसों को शामिल करते हैं।

➤ इनमें सिर्फ CO2 को छोड़कर शेष सभी गैस वायुमण्डल में प्रदूषक के रूप में मौजूद रहते हैं।

➤ CO2 गैस प्राकृतिक रुप से वायुमण्डल में मौजूद रहता है।

➤ CO2 गैस ही पार्थिव विकिरण को अवशोषित कर वायुमण्डल को गर्म बनाये रखता है।

➤ CO2 को “वायुमण्डल का कम्बल” भी कहा जाता है।

➤ अंतिम महत्वपूर्ण गैस हाइड्रोजन है जो जलवाष्प एवं जल के निर्माण में मदद करता है।

       सामान्यतः समुद्रतल से 80 Km की ऊँचाई तक गैस समान अनुपात में पाये जाते हैं लेकिन उसके बाद गैंसों का भिन्न -2 स्तर पाया जाता है। जैसे:-

      ऊँचाई               गैसों का स्तर
(i) 90 – 200 किमी०- N2 गैस के अणुओं का स्तर
(ii) 200-400 किमी०- O2 गैस के परमाणु का स्तर
(iii) 1100-3500 किमी०- He गैस का स्तर
(iv) 3500-10000 किमी०- H2 परमाणु का स्तर

(2) जलवाष्प (Water Vapour)-

➤ जलवाष्प हमारे वायुमण्डल का दूसरा प्रमुख संघटक है।

➤ यह वायुमण्डल में 12 किमी० की ऊँचाई तक पायी जाती है। लेकिन 90% हिस्सा 8 किमी० की ऊँचाई तक ही मिलती है।

➤ कभी-2 वायु में चलने वाले संवहन तरंगों के कारण जलवाष्प को 50 किमी० की ऊँचाई तक पहुँचा दी जाती है।

➤ ये जलवाष्प ब्रह्माण्डीय धुल-कणों के साथ मिलकर विश्व में सबसे ऊँचाई पर मिलने वाले बादल “निशा दीप्ति बादल” का निर्माण करती है।

➤ वायुमण्डलीय जलवाष्प के कारण ही वर्षण क्रिया, बादल निर्माण क्रिया, कुहरा, कुहासा, ओस और आर्द्रण की क्रिया होती है।

➤ वायुमण्डल में जलवाष्प की आपूर्ति पृथ्वी के धरातल से ही वाष्पोत्सर्जन, वाष्पीकरण, उर्ध्वपातन (ठोस से गैस) की क्रिया द्वारा होता है।

नोट: वाष्पोत्सर्जन की दर को जिस यंत्र द्वारा मापा जा सकता है उसे पोटोमीटर कहते हैं।

(3) धुलकण (Dust Particle)-

➤ वायुमण्डल का तीसरा सबसे प्रमुख संघटक धूलकण है।

➤ वायुमण्डल में इसकी आपूर्ति दो स्थानों से होती है- ब्रह्माण्ड और पृथ्वी के धरातल से।

➤ ब्रह्मण्ड से मिलने वाले धुलकण को ब्रह्मण्डलीय धूलकण कहते हैं।

➤ ये धुलकण दूसरे ग्रह, उपग्रह से विखण्डित होकर पृथ्वी पर गिरने वाला पदार्थ है।

➤ कभी-2 इनके आकार इतनी बड़ी होती है कि पृथ्वी पर उल्का वृष्टि की घटना घटती है।

➤ पार्थिव धूलकण का मुख्य स्रोत धरातल है।

➤ ये परागण एवं हाइग्रोस्कोपिक (आर्द्रताग्राही) कण के रूप में मौजूद रहते हैं।

➤ वायुमण्डल में सर्वाधिक धुलकण की आपूर्ति समुद्र तटीय भागों से होती है।

➤ ये धूलकण वायुमंडल में जाकर जल की तुलना में पहले ठण्डी होने की प्रवृत्ति रखते हैं। इस कणों के इर्द-गिर्द आर्द्रता या जलवाष्प का संघनन होने लगता है जिससे जलबून्दों का निर्माण होने लगता है।

➤ सामान्य तौर पर वायुमण्डल में 12 Km की ऊँचाई तक धूलकण पाये जाते हैं लेकिन इसका अधिकांश भाग 5 किमी० की ऊँचाई तक मिलते हैं।

निष्कर्ष:

        सैद्धांतिक रूप से हमारा वायुमण्डल गैस, जलवाष्प और धूलकण से निर्मित है। लेकिन तीव्र औद्योगिकीकरण, नगरीकरण, बढ़ती जनसंख्या इत्यादि के कारण कई प्रदूषक तत्व वायुमण्डल में छोड़े जा रहे हैं जिसके कारण वायु प्रदूषण, ओजोन क्षरण, ग्लोबल वार्मिंग, अम्ल वर्षा जैसी घटनायें घटित हो रही हैं। अत: आवश्यकता इस बात का है कि वायुमण्डल में मौजूद गैस, जलवाष्प एवं धुलकण के अनुपात को नियत बनाकर रखा जाय।



वायुमण्डल का संगठन से सम्बंधित पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ट प्रश्नोत्तर



1. पृथ्वी के वायुमण्डल का कितना प्रतिशत भाग 29 km की ऊँचाई तक पाया जाता है?

[A] 29%
[B] 57%
[C] 76%
[D] 97%

2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?

[A] वायुमण्डल की ऊपरी सीमा लगभग 10,000 km की ऊँचाई तक है।
[B] वायुमण्डल का 50% भाग 5-6 km की ऊँचाई तक सीमित है।
[C] ऊँचाई में वृद्धि के साथ-साथ जलवाष्प की मात्रा में वृद्धि होती है।
[D] वायुमण्डल के निचले स्तर में भारी गैस एवं ऊपरी स्तर में हल्की गैसों की प्रधानता है।

3. वायुमण्डल का सर्वाधिक स्थायी तत्व है-

[A] नाइट्रोजन
[B] ऑक्सीजन
[C] कार्बन डाइऑक्साइड
[D] जलवाष्प

4. वायुमण्डल में सर्वाधिक कौन-सी गैस मिलती है?

[A] ऑक्सीजन
[B] हाइड्रोजन
[C] नाइट्रोजन
[D] कार्बन डाइऑक्साइड

5. वायुमण्डल में सर्वाधिक मात्रा में विद्यमान अक्रिय गैस कौन-सी है?

[A] ऑर्गन
[B] क्रिप्टॉन
[C] हीलियम
[D] नियॉन

6. वायुमण्डल मुख्यतः गर्म होता है-

[A] सूर्य की सीधी किरणों से
[B] पृथ्वी से विकिरण द्वारा
[C] पृथ्वी के अंदर की ऊष्मा से
[D] पृथ्वी की गति के घर्षण से

7. निम्न में से कौन-सा युग्म वायुमण्डल की गैसों की बढ़ती मात्रा को दर्शाता है?

[A] ओजोन, कार्बन डाइऑक्साइड, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन
[B] नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड, ओजोन
[C] कार्बन डाइऑक्साइड, ओजोन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन
[D] आर्गन, नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड

8. निम्नलिखित में से कौन-सी गैस ग्रीन हाऊस प्रभाव के लिये उत्तरदायी है?

[A] क्लोरीन
[B] ऑक्सीजन
[C] कार्बन डाइऑक्साइड
[D] हाइड्रोजन

9. सूर्य की तीव्र किरणों द्वारा झुलसने से वायुमण्डल की कौन-सी गैस हमारी रक्षा करती है?

[A] ऑक्सीजन
[B] नाइट्रोजन
[C] ओजोन
[D] आर्गन

10. पृथ्वी के वायुमण्डल में पायी जाने वाली निम्नलिखित गैसों का सही अवरोही क्रम क्या होगा?

1. नाइट्रोजन 2. कार्बन डाइऑक्साइड 3. ऑक्सीजन 4. आर्गन 5. नियॉन

कूट :

[A] 1, 3, 2, 4, 5
[B] 1, 3, 4, 2, 5
[C] 1,3, 2, 5, 4
[D] 1, 2, 3, 5, 4

11. भू-पृष्ठ से परावर्तित अवरक्त विकिरण के अवशोषण द्वारा भू-वायुमण्डल के तापमान में वृद्धि की प्रक्रिया को क्या कहते हैं?

[A] सुनामी
[B] ग्रीन हाउस प्रभाव
[C] सौर तापन
[D] भूकम्पीय प्रभाव

12. वायुमण्डल में नाइट्रोजन की प्रतिशतता है-

[A] 70%
[B] 71%
[C] 78%
[D] 21%

13. पृथ्वी के धरातल से ऊपर की ओर वायुमण्डल के विभिन्न स्तरों का सही अनुक्रम है-

[A] क्षोभ मण्डल, समताप मण्डल, आयन मण्डल, मध्य मण्डल
[B] समताप मण्डल, क्षोभ मण्डल, आयन मण्डल, मध्य मण्डल
[C] क्षोभ मण्डल, समताप मण्डल, मध्य मण्डल, आयन मण्डल
[D] समताप मण्डल, क्षोभ मण्डल, मध्य मण्डल, आयन मण्डल

14. वायुमण्डल को क्षोभ मण्डल, समताप मण्डल आदि परतों में विभाजित करने का मुख्य आधार क्या है?

[A] तापमान
[B] वायुदाब
[C] संघटन
[D] घनत्व

 

15. क्षोभ मण्डल की धरातल से औसत ऊँचाई लगभग कितनी है?

[A] 8 किमी०
[B] 18 किमी०
[C] 22 किमी०
[D] 14 किमी०

16. निम्नलिखित में से किस मण्डल को संवहन मण्डल भी कहा जाता है?

[A] क्षोभ मण्डल
[B] आयन मण्डल
[C] समताप मण्डल
[D] मध्य मण्डल

17. किस ऋतु में क्षोभ मण्डल की ऊँचाई में वृद्धि हो जाती है?

[A] शीत ऋतु
[B] वर्षा ऋतु
[C] ग्रीष्म ऋतु
[D] इनमें से कोई नहीं

18. क्षोभ मण्डल की धरातल से अधिकतम ऊँचाई है-

[A] 6 किमी०
[B] 12 किमी०
[C] 8 किमी०
[D] 18 किमी०

19. क्षोभ मण्डल में तापमान की सामान्य ह्रास की 1°C प्रत्येक-

[A] 146 मी० हेतु
[B] 165 मी० हेतु
[C] 156 मी० हेतु
[D] 176 मी० हेतु

20. क्षोभ मण्डल के सम्बन्ध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?

[A] यह वायुमण्डल का सघनतम परत है।
[B] बादलों का निर्माण क्षोभ मण्डल में ही होता है।
[C] क्षोभ मण्डल की ऊपरी सीमा पर समताप सीमा स्थित है।
[D] इनमें से कोई नहीं

21. क्षोभ मण्डल एवं समताप मण्डल के बीच स्थित संक्रमण क्षेत्र को क्या कहा जाता है?

[A] समताप सीमा
[B] मध्य सीमा
[C] क्षोभ सीमा
[D] बाह्य सीमा

22. पृथ्वी के वायुमण्डल का सर्वाधिक घनत्व कहाँ पर होता है?

[A] क्षोभ मण्डल
[B] मध्य मण्डल
[C] समताप मण्डल
[D] आयन मण्डल

23. वायुमण्डल में दैनिक मौसम परिवर्तन निम्नलिखित में से किसके कारण होते हैं?

[A] क्षोभ मण्डल
[B] आयन मण्डल
[C] मध्य मण्डल
[D] समताप मण्डल

 

24. क्षोभ मण्डल (Troposphere) वायुमण्डल का निचला स्तर है जिसकी ऊँचाई भूमध्य रेखा पर होती है-

[A] 10 मील तक
[B] 6 मील तक
[C] 9 मील तक
[D] 4 मील तक

25. मेघ गर्जन वायुमण्डल की किस परत में होता है?

[A] आयन मण्डल
[B] क्षोभ मण्डल
[C] ओजोन मण्डल
[D] समताप मण्डल

26. परिवर्तन मण्डल या क्षोभ मण्डल में तापमान-

[A] ऊँचाई के साथ घटता है।
[B] ऊँचाई के साथ बढ़ता है
[C] अपरिवर्तित रहता है।
[D] पहले घटता है पुनः बढ़ता है।

27. समताप मण्डल (Stratosphere) है-

[A] वायुमण्डल का मध्यस्थ प्रदेश
[B] वायुमण्डल का ऊपरी प्रदेश
[C] वायुमण्डल का निचला प्रदेश
[D] क्षोभ सीमा के ऊपर स्थित प्रदेश

28. वायुमण्डल की किस सतह में तापमान में बहुत अधिक उतार-चढ़ाव नहीं होता?

[A] समताप मण्डल
[B] बाह्य मण्डल
[C] क्षोभ मण्डल
[D] ताप मण्डल

 

29. ओजोन परत अवस्थित है-

[A] क्षोभ मण्डल में
[B] क्षोभ सीमा में
[C] समताप मण्डल में
[D] प्रकाश मण्डल में

30. समताप मण्डल में ओजोन परत का कार्य है-

[A] भूमण्डलीय ताप को स्थिर रखना
[B] भूकम्पों की आवृति को घटाना
[C] मानसूनों की विफलता को बचाना
[D] भूतल पर पराबैंगनी विकिरणपात को रोकना

31. सुपर सोनिक (Supersonic) विमानों की उड़ान के लिये सर्वाधिक सुविधाजनक वायुमण्डलीय परत है-

[A] क्षोभ मण्डल
[B] मध्य मण्डल
[C] समताप मण्डल
[D] आयन मण्डल

32. समताप मंडल के सम्बन्ध में निम्न में से कौन-सा कथन असत्य है?

[A] समताप मण्डल का विस्तार 50 किमी० की ऊँचाई तक पाया जाता है।
[B] समताप मंडल की सीमा आयन मण्डल से मिलती है।
[C] इस मण्डल में बादलों का अभाव पाया जाता है।
[D] इस मण्डल में धूल कण और जलवाष्प की मात्रा काफी कम होती है।

33. ओजोन परत के प्रतिवर्ष 7 प्रतिशत की दर से अवक्षय के कारण उसमें 10 मिलियन वर्ग किमी० आकार का एक बड़ा छिद्र बन गया है। यह छिद्र अवस्थित है-

[A] आर्कटिक के ऊपर
[B] ध्रुवों के ऊपर
[C] अंटार्कटिका के ऊपर
[D] अमेरिका एवं यूरोप के ऊपर

34. दीर्घ रेडियो तरंगें पृथ्वी की किस सतह से परावर्तित होती है?

[A] क्षोभ मण्डल
[B] क्षोभ सीमा
[C] आयन मण्डल
[D] समताप मण्डल

35. संचार उपग्रह किस वायुमण्डलीय स्तर में स्थित होते हैं?

[A] समताप मण्डल
[B] क्षोभ मण्डल
[C] आयन मण्डल
[D] बर्हिमण्डल

36. वायुमण्डल में ओजोन स्तर के अवक्षय का कारण निम्नलिखित में से कौन-सा रसायन है?

[A] सल्फर डाइऑक्साइड
[B] कार्बन डाइऑक्साइड
[C] नाइट्रस ऑक्साइड
[D] क्लोरो-फ्लोरो कार्बन

37. रेडियो की लघु तरंगें आयन मण्डल की किस परत से परावर्तित होकर धरातल पर आती है?

[A] S परत
[B] E परत
[C] F परत
[D] D परत

38. ऊपर से नीचे की ओर वायुमण्डल की विभिन्न परतों की सीमाओं (Pause) का कौन-सा क्रम सही है?

[A] मैग्निटोपॉज, मेसोपॉज, स्ट्रेटोपॉज, ट्रोपोपॉज
[B] मेसोपॉज, स्ट्रेटोपॉज, ट्रोपोपॉज, मैग्निटोपॉज
[C] ट्रोपोपॉज, स्ट्रेटोपॉज, मेसोपॉज, मैग्निटोपॉज
[D] स्ट्रेटोपॉज, ट्रोपोपॉज, मैग्निटोपॉज, मेसोपॉज

39. वायुमण्डल के किस भाग में जलवाष्प की कुल मात्रा का 90 प्रतिशत भाग विद्यमान रहता है?

[A] आयन मण्डल
[B] क्षोभ मण्डल
[C] ओजोन मण्डल
[D] समताप मण्डल

40. वायुमण्डल के किस परत को रसायन मण्डल कहते हैं?

[A] मध्य मण्डल
[B] क्षोभ मण्डल
[C] आयन मण्डल
[D] ओजोन मण्डल

41. किस वायुमण्डलीय परत को ‘मौसमी परिवर्तन की छत’ के नाम से जाना जाता है?

[A] समताप मण्डल
[B] आयन मण्डल
[C] क्षोभ मण्डल
[D] मध्य मण्डल

42. हवाई जहाज प्राय: किस मण्डल में उड़ते हैं-

[A] क्षोभ मण्डल
[B] मध्य मण्डल
[C] समताप मण्डल
[D] बाह्य मण्डल

43. वायुमण्डल की सबसे निचली परत कहलाती है-

[A] मध्य मण्डल
[B] क्षोभ मण्डल
[C] आयन मण्डल
[D] समताप मण्डल

44. पृथ्वी की सतह से सबसे दूर वायुमण्डलीय परत किस नाम से विदित है?

[A] आयन मण्डल
[B] समताप मण्डल
[C] बहिर्मण्डल
[D] क्षोभ मण्डल

45. वायुमण्डल में सबसे अधिक ओजोन कहाँ पर केन्द्रित है?

[A] आयनोस्फीयर
[B] स्ट्रेटोस्फीयर
[C] मीसोस्फीयर
[D] ट्रोपोस्फीयर

46. समुद्रतल पर औसत वायुदाब कितना होता है?

[A] 1003.25 मिलीबार
[B] 1023.25 मिलीबार
[C] 1013.25 मिलीबार
[D] 1034.25 मिलीबार

47. वायुदाब प्रायः सर्वाधिक होता है जब वायु होती है-

[A] ठण्डी तथा शुष्क
[B] उष्ण तथा शुष्क
[C] ठण्डी तथा नम
[D] उष्ण तथा नम

48. वायुदाब में अचानक आने वाली कमी निम्न में से किसका सूचक होती है?

[A] स्वच्छ मौसम
[B] अत्यधिक शीतल मौसम
[C] तूफानी मौसम
[D] वर्षा का मौसम

49. सामान्य वायुदाब पाया जाता है-

[A] पर्वतों पर
[B] सागरतल पर
[C] रेगिस्तान में
[D] धरातल के 5 km ऊपर

50. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?

[A] सागर तल पर वायुदाब अधिकतम होता है।
[B] वायुदाब को मिलीबार (mb) में मापा जाता है।
[C] किसी भी स्थान पर वायुदाब दो बार बढ़ता एवं दो बार घटता है।
[D] उपर्युक्त सभी।

51. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?

[A] वायुदाब के घटने-बढ़ने की क्रिया को ‘वायुदाब उच्चावचन’ (Barometric tide) कहते हैं।
[B] वायुदाब में उतार-चढ़ाव विषुवत रेखा से ध्रुवों की ओर कम होता जाता हैं।
[C] 60° अक्षांश के बाद वायुदाब का दैनिक उतार चढ़ाव नहीं देखा जाता है।
[D] उपर्युक्त सभी।

 

52. ग्लोब पर दाब कटिबंधों (pressure belts) की संख्या कितनी है?

[A] 5
[B] 6
[C] 7
[D] 9

53. विषुवतीय निम्न दाब पेटी का विस्तार विषुवत रेखा के दोनों ओर कितने अक्षांश तक मिलता है?

[A] 5°
[B] 10°
[C] 15°
[D] 20°

54. डोलड्रम पेटी का विस्तार सामान्यतः पाया जाता है-

[A] 0° – 5° उत्तर
[B] 0° – 5° दक्षिण
[C] 0°- 10° उत्तर
[D] 5°N – 5° दक्षिण

55. डोलड्रम क्षेत्र की विशेषता होती है-

[A] निम्न दाब एवं वायु का अवतलन
[B] निम्न दाब एवं मन्द पूर्वी पवन
[C] सामान्य दाब एवं वायु का अवतलन
[D] निम्न दाब एवं शान्त पवन

56. शांत पेटी किस रेखा के दोनों ओर पायी जाती है?

[A] भूमध्य रेखा
[B] कर्क रेखा
[C] मकर रेखा
[D] आर्कटिक वृत्त

57. विश्व के सभी उष्ण मरुस्थल निम्न में से किस पेटी में स्थित हैं?

[A] विषुवतीय निम्न दाब पेटी
[B] उपोष्ण कटिबंधीय उच्च दाब पेटी
[C] उपध्रुवीय निम्न वायुदाब पेटी
[D] ध्रुवीय उच्च वायुदाब पेटी

13. Structure of The Atmosphere (वायुमण्डल की संरचना)

13. Structure of The Atmosphere

(वायुमण्डल की संरचना)


वायुमण्डल की संरचना-

         हमारी पृथ्वी वायु की एक पतली परत से चरों ओर से घिरी हुई है जिसका विस्तार पृथ्वी की सतह से कई किलोमीटर ऊपर तक है, जिसे वायुमंडल कहते हैं।

➤ हमारे वायुमंडल की उत्पत्ति लगभग 1 अरब वर्ष पहले हुआ। लेकिन वर्तमान स्वरूप में 58 करोड़ वर्ष पूर्व में आया।

➤ अमेरिकी भूगोलवेता स्ट्रॉलर के अनुसार धरातल से 80 हजार किमी० की ऊँचाई तक वायुमंडल मौजूद है। 

➤ आयतन के दृष्टिकोण से 97% हिस्सा 29 किमी० की ऊँचाई तक और द्रव्यमान के दृष्टिकोण से 50% हिस्सा 5.6 किमी० की ऊँचाई तक मौजूद है।

➤ हमारे वायुमंडल में 95% हिस्सा गैसों का और 5% जलवाष्प एवं धूलकणों का है।

      वायुमण्डल की संरचना का अध्ययन कई विधियों से सम्पन्न किया गया है जिससे ज्ञात होता है कि हमारा वायुमण्डल कई सकेन्द्रीय पेटियों में विभक्त है। जैसे:-

(A) प्रमुख मण्डल

(1) क्षोभ मण्डल / परिवर्तन मण्डल

(2) समताप मण्डल

(3) मध्य मण्डल

(4) ताप या आयन मण्डल

(5) बर्हिमण्डल

(6) चुम्बकीय मण्डल

(B) गौण मण्डल

(i) क्षोभ सीमा

(ii) समताप सीमा

(iii) मध्य सीमा

Structure of The Atmosphere

(1) क्षोभ मण्डल / परिवर्तन मण्डल (Troposphere):-             

➤ यह वायुमण्डल का सबसे नीचला परत है जो धरातल से 8 से 18 किमी० की ऊँचाई तक पायी जाती है।

➤ सूर्य के तापीय प्रभाव के कारण विषुवत रेखा पर इसकी ऊँचाई अधिक 18 किमी० और ध्रुवों पर 8 किमी० है।

➤ इसमें सम्पूर्ण वायुमंडल का 75% भार पाया जाता है।

➤ सभी प्रकार की मौसमी घटनाएँ इसी मण्डल में घटित होती हैं। जैसे:- बादल का फटना, वर्षण, कुहरा, कुहासा आदि।      

➤ क्षोभमण्डल के ऊपरी भाग में तेज गति से चलने वाली वायु को जेटस्ट्रीम कहते है।

➤ क्षोभमण्डल में नीचे से ऊपर जाने पर तापमान में कमी प्रति 165 मी० की ऊँचाई पर 1ºC और प्रत्येक 1,000 मी० पर 6.5ºC या प्रति 1 हजार फीट की ऊँचाई पर 3.6ºF की कमी आती है।

➤ क्षोभमण्डल के ऊपरी भाग में तापमान घटकर -45°C से -80°C तक पहुँच जाता है।

➤ अत्याधिक मौसमी घटनायें घटित होने के कारण इसे परिवर्तन मंडल भी कहते हैं।

(2) समताप मण्डल (Stratosphere):-

➤ यह मण्डल क्षोभमण्डल के ऊपरी भाग में पायी जाती है।

➤ इसका अधिकतम ऊपरी विस्तार धरातल से 50 km तक है।

➤ इस मण्डल में ओजोन गैस की उपस्थिति के कारण बढ़ते हुए ऊँचाई के साथ तापमान में बढ़ोतरी होती है।

➤ इस मण्डल के ऊपरी भाग में तापमान बढ़‌कर 0°C तक पहुँच जाता है।

➤ समताप मण्डल में 25-35 km के बीच ओजोन गैस की एक घना परत पायी जाती है जो सूर्य से आने वाली पराबैगनी किरणों को अवशोषित कर धरातल को सुरक्षित रखती है।

➤ ओजोन परत का सर्वप्रथम खोज रामसन महोदय ने किया था।           

➤ समताप मंडल प्राय: जलवाष्प, धूलकण से रहित होता है। परन्तु कभी-2 इस मण्डल में हल्के मेघ का निर्माण होता है जिसे Mother of Pearl Cloud कहते हैं।

(3) मध्यमण्डल (Mesosphere):-

➤ मध्यमण्डल धरातल से 80km की ऊँचाई तक पायी जाती है।

➤ इस मंडल में बढ़ते हुए ऊँचाई के साथ तापमान में कमी आती है।

➤ मध्यमण्डल के ऊपरी भाग में तापमान घटकर -80°C से -100°C तक पहुँच जाता है।

➤ इस मण्डल में ब्रह्माण्डलीय धूल कण के कारण Noctilucent Cloud “निशादीप्ति बादल” का निर्माण होता है।

(4) तापमंडल (Thermosphere) / आयनमंडल (Inosphere):-

➤ ताप या आयनमण्डल मध्यमंडल के ऊपरी भाग में पायी जाती है।

➤ इसकी ऊपरी सीमा धरातल से 500 km की ऊँचाई तक पायी जाती है।

➤ इस मंडल में तापमान बढ़‌कर 25°C तक पहुँच जाता है।

➤ इसमें आयनीकृत गैस पाये जाते हैं, इसलिए इसे आयनमंडल भी कहते हैं।

➤ इसमें ध्रुवीय ज्योति की घटना घटती है जिसे उत्तरी गोलार्द्ध में “अरोरा बोरियालेसिस” और दक्षिणी गोलार्द्ध में “अरोरा ऑस्ट्रेलेसिस“ कहते हैं।

⇒ तापमंडल को पुन: कई परतों में बांटा जाता है। जैसेः-

क्रम उप परत मोटाई विशेषता
1  D परत 80-90 किमी० ➤ सूर्यास्त के समय समाप्त हो जाता है।

➤ यह लघु रेडियों तरंगों को परावर्तित करता है।

2 E परत 90-130 किमी० ➤ इसे क्रनेली हेवीसाइट परत भी कहते है।

➤ इसमें मध्यम एवं दीर्घ रेडियों तरंगों का परावर्तन होता है।

3 विशिष्ट E परत 110 किमी० ➤ उल्का पिंड घुसने के दौरान बनता है।
4 E परत 150 किमी० ➤ इसे एफलिटन परत भी कहते है।
5 F1 तथा F2 परत 150-380 किमी० ➤ इसे Appleton परत भी कहते है।

➤ यह परत सूर्य धब्बा दिखाई देने के दौरान बनता है।

6 G परत 400-500 किमी०

➤ यह सभी प्रकार के रेडियों तरंगों का परावर्तन करता है।

 

(5) बर्हिमण्डल / आयतन मण्डल (Exosphere):-

➤ धरातल से बर्हिमण्डल की ऊँचाई 2000 km तक है।

➤ इसकी ऊपरी सीमा पर तापमान बढ़कर 1000ºC तक पहुँच जाता है।

➤ इस मंडल में गैसों का इतना आयनीकरण हो जाता है कि गैस के अणु परमाणु के रूप में मिलने लगते है।

➤ इसी मण्डल में गैसों के अलग-अलग परत पाये जाते हैं।

(6) चुम्बकीय मण्डल:-

➤ यह वायुमंडल का सबसे उपरी परत है।

➤ इसकी ऊपरी सीमा 80 हजार किमी० तक संभावित है।

➤ इस मंडल को कुछ विद्वान वायुमण्डल का हिस्सा नहीं मानते हैं।

➤ इस मंडल में गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव नगण्य हो जाता है।

➤ इस मंडल में गैस के अणु इलेक्ट्रॉन एवं प्रोटोन में टूट जाते हैं।

➤ इस मंडल में विभिन्न प्रकार के कॉस्मिक किरणों का प्रभाव होता है। इस मंडल में सौर लपट का प्रभाव पड़ता है।

(B) गौण मण्डल- उपरोक्त प्रमुख मंडलों के अलावे भी तीन गौण मंडल भी पाये जाते हैं। जैसे:-

(i) क्षोभ सीमा

➤ स्थिति- क्षोभ मंडल और समताप मंडल के बीच की संक्रमण की पेटी

➤ मोटाई-1.5 किमी०

(ii) समताप सीमा

➤ समताप मंडल और मध्यमंडल के बीच की संक्रमण की पेटी

➤ मोटाई-5 किमी०

(iii) मध्य सीमा

➤ मध्यमंडल और तापमंडल के बीच की संक्रमण की पेटी

➤ मोटाई-10 किमी०           

➤ ये तीनों पेटियाँ एक संक्रमण पेटी के समान है जिसमें किसी भी प्रकार की मौसमी घटनाएँ नहीं घटती है।

       रासायनिक संघटन के दृष्टिकोण से वायुमण्डल को दो भागों में बाँटते है :-

(1) सममण्डल:-

         इसके अंतर्गत क्षोभ मंडल, समताप मंडल और मध्यमंडल को शामिल किया जाता है। इसमें गैसों का अनुपात एक समान रहता है।

(2) विषममण्डल:-

➤ इसके अंतर्गत तापमंडल, बर्हिमण्डल एवं चुम्बकीय मण्डल को शामिल करते हैं।

➤ इसमें बढ़ते हुए ऊँचाई के साथ गैसों के अनुपात में परिवर्तन होते रहता है।



वायुमण्डल की संरचना  से सम्बंधित पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ट प्रश्नोत्तर



1. पृथ्वी के वायुमण्डल का कितना प्रतिशत भाग 29 km की ऊँचाई तक पाया जाता है?

[A] 29%
[B] 57%
[C] 76%
[D] 97%

2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?

[A] वायुमण्डल की ऊपरी सीमा लगभग 10,000 km की ऊँचाई तक है।
[B] वायुमण्डल का 50% भाग 5-6 km की ऊँचाई तक सीमित है।
[C] ऊँचाई में वृद्धि के साथ-साथ जलवाष्प की मात्रा में वृद्धि होती है।
[D] वायुमण्डल के निचले स्तर में भारी गैस एवं ऊपरी स्तर में हल्की गैसों की प्रधानता है।

3. वायुमण्डल का सर्वाधिक स्थायी तत्व है-

[A] नाइट्रोजन
[B] ऑक्सीजन
[C] कार्बन डाइऑक्साइड
[D] जलवाष्प

4. वायुमण्डल में सर्वाधिक कौन-सी गैस मिलती है?

[A] ऑक्सीजन
[B] हाइड्रोजन
[C] नाइट्रोजन
[D] कार्बन डाइऑक्साइड

5. वायुमण्डल में सर्वाधिक मात्रा में विद्यमान अक्रिय गैस कौन-सी है?

[A] ऑर्गन
[B] क्रिप्टॉन
[C] हीलियम
[D] नियॉन

6. वायुमण्डल मुख्यतः गर्म होता है-

[A] सूर्य की सीधी किरणों से
[B] पृथ्वी से विकिरण द्वारा
[C] पृथ्वी के अंदर की ऊष्मा से
[D] पृथ्वी की गति के घर्षण से

7. निम्न में से कौन-सा युग्म वायुमण्डल की गैसों की बढ़ती मात्रा को दर्शाता है?

[A] ओजोन, कार्बन डाइऑक्साइड, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन
[B] नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड, ओजोन
[C] कार्बन डाइऑक्साइड, ओजोन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन
[D] आर्गन, नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड

8. निम्नलिखित में से कौन-सी गैस ग्रीन हाऊस प्रभाव के लिये उत्तरदायी है?

[A] क्लोरीन
[B] ऑक्सीजन
[C] कार्बन डाइऑक्साइड
[D] हाइड्रोजन

9. सूर्य की तीव्र किरणों द्वारा झुलसने से वायुमण्डल की कौन-सी गैस हमारी रक्षा करती है?

[A] ऑक्सीजन
[B] नाइट्रोजन
[C] ओजोन
[D] आर्गन

10. पृथ्वी के वायुमण्डल में पायी जाने वाली निम्नलिखित गैसों का सही अवरोही क्रम क्या होगा?

1. नाइट्रोजन 2. कार्बन डाइऑक्साइड 3. ऑक्सीजन 4. आर्गन 5. नियॉन

कूट :

[A] 1, 3, 2, 4, 5
[B] 1, 3, 4, 2, 5
[C] 1,3, 2, 5, 4
[D] 1, 2, 3, 5, 4

11. भू-पृष्ठ से परावर्तित अवरक्त विकिरण के अवशोषण द्वारा भू-वायुमण्डल के तापमान में वृद्धि की प्रक्रिया को क्या कहते हैं?

[A] सुनामी
[B] ग्रीन हाउस प्रभाव
[C] सौर तापन
[D] भूकम्पीय प्रभाव

12. वायुमण्डल में नाइट्रोजन की प्रतिशतता है-

[A] 70%
[B] 71%
[C] 78%
[D] 21%

13. पृथ्वी के धरातल से ऊपर की ओर वायुमण्डल के विभिन्न स्तरों का सही अनुक्रम है-

[A] क्षोभ मण्डल, समताप मण्डल, आयन मण्डल, मध्य मण्डल
[B] समताप मण्डल, क्षोभ मण्डल, आयन मण्डल, मध्य मण्डल
[C] क्षोभ मण्डल, समताप मण्डल, मध्य मण्डल, आयन मण्डल
[D] समताप मण्डल, क्षोभ मण्डल, मध्य मण्डल, आयन मण्डल

14. वायुमण्डल को क्षोभ मण्डल, समताप मण्डल आदि परतों में विभाजित करने का मुख्य आधार क्या है?

[A] तापमान
[B] वायुदाब
[C] संघटन
[D] घनत्व

 

15. क्षोभ मण्डल की धरातल से औसत ऊँचाई लगभग कितनी है?

[A] 8 किमी०
[B] 18 किमी०
[C] 22 किमी०
[D] 14 किमी०

16. निम्नलिखित में से किस मण्डल को संवहन मण्डल भी कहा जाता है?

[A] क्षोभ मण्डल
[B] आयन मण्डल
[C] समताप मण्डल
[D] मध्य मण्डल

17. किस ऋतु में क्षोभ मण्डल की ऊँचाई में वृद्धि हो जाती है?

[A] शीत ऋतु
[B] वर्षा ऋतु
[C] ग्रीष्म ऋतु
[D] इनमें से कोई नहीं

18. क्षोभ मण्डल की धरातल से अधिकतम ऊँचाई है-

[A] 6 किमी०
[B] 12 किमी०
[C] 8 किमी०
[D] 18 किमी०

19. क्षोभ मण्डल में तापमान की सामान्य ह्रास की 1°C प्रत्येक-

[A] 146 मी० हेतु
[B] 165 मी० हेतु
[C] 156 मी० हेतु
[D] 176 मी० हेतु

20. क्षोभ मण्डल के सम्बन्ध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?

[A] यह वायुमण्डल का सघनतम परत है।
[B] बादलों का निर्माण क्षोभ मण्डल में ही होता है।
[C] क्षोभ मण्डल की ऊपरी सीमा पर समताप सीमा स्थित है।
[D] इनमें से कोई नहीं

21. क्षोभ मण्डल एवं समताप मण्डल के बीच स्थित संक्रमण क्षेत्र को क्या कहा जाता है?

[A] समताप सीमा
[B] मध्य सीमा
[C] क्षोभ सीमा
[D] बाह्य सीमा

22. पृथ्वी के वायुमण्डल का सर्वाधिक घनत्व कहाँ पर होता है?

[A] क्षोभ मण्डल
[B] मध्य मण्डल
[C] समताप मण्डल
[D] आयन मण्डल

23. वायुमण्डल में दैनिक मौसम परिवर्तन निम्नलिखित में से किसके कारण होते हैं?

[A] क्षोभ मण्डल
[B] आयन मण्डल
[C] मध्य मण्डल
[D] समताप मण्डल

 

24. क्षोभ मण्डल (Troposphere) वायुमण्डल का निचला स्तर है जिसकी ऊँचाई भूमध्य रेखा पर होती है-

[A] 10 मील तक
[B] 6 मील तक
[C] 9 मील तक
[D] 4 मील तक

25. मेघ गर्जन वायुमण्डल की किस परत में होता है?

[A] आयन मण्डल
[B] क्षोभ मण्डल
[C] ओजोन मण्डल
[D] समताप मण्डल

26. परिवर्तन मण्डल या क्षोभ मण्डल में तापमान-

[A] ऊँचाई के साथ घटता है।
[B] ऊँचाई के साथ बढ़ता है
[C] अपरिवर्तित रहता है।
[D] पहले घटता है पुनः बढ़ता है।

27. समताप मण्डल (Stratosphere) है-

[A] वायुमण्डल का मध्यस्थ प्रदेश
[B] वायुमण्डल का ऊपरी प्रदेश
[C] वायुमण्डल का निचला प्रदेश
[D] क्षोभ सीमा के ऊपर स्थित प्रदेश

28. वायुमण्डल की किस सतह में तापमान में बहुत अधिक उतार-चढ़ाव नहीं होता?

[A] समताप मण्डल
[B] बाह्य मण्डल
[C] क्षोभ मण्डल
[D] ताप मण्डल

 

29. ओजोन परत अवस्थित है-

[A] क्षोभ मण्डल में
[B] क्षोभ सीमा में
[C] समताप मण्डल में
[D] प्रकाश मण्डल में

30. समताप मण्डल में ओजोन परत का कार्य है-

[A] भूमण्डलीय ताप को स्थिर रखना
[B] भूकम्पों की आवृति को घटाना
[C] मानसूनों की विफलता को बचाना
[D] भूतल पर पराबैंगनी विकिरणपात को रोकना

31. सुपर सोनिक (Supersonic) विमानों की उड़ान के लिये सर्वाधिक सुविधाजनक वायुमण्डलीय परत है-

[A] क्षोभ मण्डल
[B] मध्य मण्डल
[C] समताप मण्डल
[D] आयन मण्डल

32. समताप मंडल के सम्बन्ध में निम्न में से कौन-सा कथन असत्य है?

[A] समताप मण्डल का विस्तार 50 किमी० की ऊँचाई तक पाया जाता है।
[B] समताप मंडल की सीमा आयन मण्डल से मिलती है।
[C] इस मण्डल में बादलों का अभाव पाया जाता है।
[D] इस मण्डल में धूल कण और जलवाष्प की मात्रा काफी कम होती है।

33. ओजोन परत के प्रतिवर्ष 7 प्रतिशत की दर से अवक्षय के कारण उसमें 10 मिलियन वर्ग किमी० आकार का एक बड़ा छिद्र बन गया है। यह छिद्र अवस्थित है-

[A] आर्कटिक के ऊपर
[B] ध्रुवों के ऊपर
[C] अंटार्कटिका के ऊपर
[D] अमेरिका एवं यूरोप के ऊपर

34. दीर्घ रेडियो तरंगें पृथ्वी की किस सतह से परावर्तित होती है?

[A] क्षोभ मण्डल
[B] क्षोभ सीमा
[C] आयन मण्डल
[D] समताप मण्डल

35. संचार उपग्रह किस वायुमण्डलीय स्तर में स्थित होते हैं?

[A] समताप मण्डल
[B] क्षोभ मण्डल
[C] आयन मण्डल
[D] बर्हिमण्डल

36. वायुमण्डल में ओजोन स्तर के अवक्षय का कारण निम्नलिखित में से कौन-सा रसायन है?

[A] सल्फर डाइऑक्साइड
[B] कार्बन डाइऑक्साइड
[C] नाइट्रस ऑक्साइड
[D] क्लोरो-फ्लोरो कार्बन

37. रेडियो की लघु तरंगें आयन मण्डल की किस परत से परावर्तित होकर धरातल पर आती है?

[A] S परत
[B] E परत
[C] F परत
[D] D परत

38. ऊपर से नीचे की ओर वायुमण्डल की विभिन्न परतों की सीमाओं (Pause) का कौन-सा क्रम सही है?

[A] मैग्निटोपॉज, मेसोपॉज, स्ट्रेटोपॉज, ट्रोपोपॉज
[B] मेसोपॉज, स्ट्रेटोपॉज, ट्रोपोपॉज, मैग्निटोपॉज
[C] ट्रोपोपॉज, स्ट्रेटोपॉज, मेसोपॉज, मैग्निटोपॉज
[D] स्ट्रेटोपॉज, ट्रोपोपॉज, मैग्निटोपॉज, मेसोपॉज

39. वायुमण्डल के किस भाग में जलवाष्प की कुल मात्रा का 90 प्रतिशत भाग विद्यमान रहता है?

[A] आयन मण्डल
[B] क्षोभ मण्डल
[C] ओजोन मण्डल
[D] समताप मण्डल

40. वायुमण्डल के किस परत को रसायन मण्डल कहते हैं?

[A] मध्य मण्डल
[B] क्षोभ मण्डल
[C] आयन मण्डल
[D] ओजोन मण्डल

41. किस वायुमण्डलीय परत को ‘मौसमी परिवर्तन की छत’ के नाम से जाना जाता है?

[A] समताप मण्डल
[B] आयन मण्डल
[C] क्षोभ मण्डल
[D] मध्य मण्डल

42. हवाई जहाज प्राय: किस मण्डल में उड़ते हैं-

[A] क्षोभ मण्डल
[B] मध्य मण्डल
[C] समताप मण्डल
[D] बाह्य मण्डल

43. वायुमण्डल की सबसे निचली परत कहलाती है-

[A] मध्य मण्डल
[B] क्षोभ मण्डल
[C] आयन मण्डल
[D] समताप मण्डल

44. पृथ्वी की सतह से सबसे दूर वायुमण्डलीय परत किस नाम से विदित है?

[A] आयन मण्डल
[B] समताप मण्डल
[C] बहिर्मण्डल
[D] क्षोभ मण्डल

45. वायुमण्डल में सबसे अधिक ओजोन कहाँ पर केन्द्रित है?

[A] आयनोस्फीयर
[B] स्ट्रेटोस्फीयर
[C] मीसोस्फीयर
[D] ट्रोपोस्फीयर

46. समुद्रतल पर औसत वायुदाब कितना होता है?

[A] 1003.25 मिलीबार
[B] 1023.25 मिलीबार
[C] 1013.25 मिलीबार
[D] 1034.25 मिलीबार

47. वायुदाब प्रायः सर्वाधिक होता है जब वायु होती है-

[A] ठण्डी तथा शुष्क
[B] उष्ण तथा शुष्क
[C] ठण्डी तथा नम
[D] उष्ण तथा नम

48. वायुदाब में अचानक आने वाली कमी निम्न में से किसका सूचक होती है?

[A] स्वच्छ मौसम
[B] अत्यधिक शीतल मौसम
[C] तूफानी मौसम
[D] वर्षा का मौसम

49. सामान्य वायुदाब पाया जाता है-

[A] पर्वतों पर
[B] सागरतल पर
[C] रेगिस्तान में
[D] धरातल के 5 km ऊपर

50. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?

[A] सागर तल पर वायुदाब अधिकतम होता है।
[B] वायुदाब को मिलीबार (mb) में मापा जाता है।
[C] किसी भी स्थान पर वायुदाब दो बार बढ़ता एवं दो बार घटता है।
[D] उपर्युक्त सभी।

51. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?

[A] वायुदाब के घटने-बढ़ने की क्रिया को ‘वायुदाब उच्चावचन’ (Barometric tide) कहते हैं।
[B] वायुदाब में उतार-चढ़ाव विषुवत रेखा से ध्रुवों की ओर कम होता जाता हैं।
[C] 60° अक्षांश के बाद वायुदाब का दैनिक उतार चढ़ाव नहीं देखा जाता है।
[D] उपर्युक्त सभी।

 

52. ग्लोब पर दाब कटिबंधों (pressure belts) की संख्या कितनी है?

[A] 5
[B] 6
[C] 7
[D] 9

53. विषुवतीय निम्न दाब पेटी का विस्तार विषुवत रेखा के दोनों ओर कितने अक्षांश तक मिलता है?

[A] 5°
[B] 10°
[C] 15°
[D] 20°

54. डोलड्रम पेटी का विस्तार सामान्यतः पाया जाता है-

[A] 0° – 5° उत्तर
[B] 0° – 5° दक्षिण
[C] 0°- 10° उत्तर
[D] 5°N – 5° दक्षिण

55. डोलड्रम क्षेत्र की विशेषता होती है-

[A] निम्न दाब एवं वायु का अवतलन
[B] निम्न दाब एवं मन्द पूर्वी पवन
[C] सामान्य दाब एवं वायु का अवतलन
[D] निम्न दाब एवं शान्त पवन

56. शांत पेटी किस रेखा के दोनों ओर पायी जाती है?

[A] भूमध्य रेखा
[B] कर्क रेखा
[C] मकर रेखा
[D] आर्कटिक वृत्त

57. विश्व के सभी उष्ण मरुस्थल निम्न में से किस पेटी में स्थित हैं?

[A] विषुवतीय निम्न दाब पेटी
[B] उपोष्ण कटिबंधीय उच्च दाब पेटी
[C] उपध्रुवीय निम्न वायुदाब पेटी
[D] ध्रुवीय उच्च वायुदाब पेटी

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