15. Range (परास / परिसर / विस्तार)

Range

(परास)



Range

परिचय

       परास (Range) प्रसरण का सबसे सरल और प्रारम्भिक मापक है। यह किसी आँकड़ा-समूह में सबसे बड़े मान (L) और सबसे छोटे मान (S) के बीच का अंतर दर्शाता है। इससे यह पता चलता है कि आँकड़े कितनी सीमा तक फैले हुए हैं।

     दूसरे शब्दों में किसी श्रृंखला के सबसे बड़े मूल्य और सबसे छोटे मूल्य के अंतर को परिसर या विस्तार कहते है।

परिभाषा (Definition)

    परास वह अंतर है जो किसी श्रेणी के अधिकतम मान और न्यूनतम मान के बीच होता है।

सूत्र (Formula)

Range (R) = L−S

जहाँ,

= सबसे बड़ा मान (Largest Value / Observation)

= सबसे छोटा मान (Smallest Value / Observation)

परास का गुणांक (Coefficient of Range)

     परास के तुलनात्मक अध्ययन के लिए परास का गुणांक प्रयोग किया जाता है।

Coefficient of Range = (L − S) / (L + S)

✍️ विशेषता:- इसका मान 0 और 1 के बीच होता है।

उदाहरण (Example)

मान लीजिए आँकड़े हैं: 5, 8, 12, 20, 25

L = 25

S = 5

Range

R = 25−5 = 20

Coefficient of Range

(25−5) / (25+5) = 20/30 =0.67

परास के लाभ (Merits)

✍️ Dispersion के सभी methods में यह सबसे सरल व आसान है।

✍️ प्रारम्भिक विश्लेषण के लिए उपयोगी।

✍️ आँकड़ों के फैलाव का त्वरित अनुमान देता है।

परास की सीमाएँ (Demerits)

✍️ Range is not based on each and every observation of the series.

✍️ केवल दो चरम मानों (L और S) पर आधारित।

✍️ चरम मानों के परिवर्तन से बहुत प्रभावित।

✍️ संपूर्ण आँकड़ा-समूह का सही प्रतिनिधित्व नहीं करता।

✍️ We can not calculate Range for open end classification.

उपयोग (Uses)

✍️ मौसम विज्ञान (तापमान का अंतर)

✍️ शेयर बाजार (उच्चतम–न्यूनतम भाव)

✍️ खेल, परीक्षा अंकों का प्रारम्भिक विश्लेषण

✍️ उद्योगों में quality नियंत्रण में उपयोगी

✍️Everyday life (सब्जी या कोई सामान का range)

निष्कर्ष (Conclusion)

    परास प्रसरण का सबसे सरल मापक है, परन्तु इसकी सीमाओं के कारण गहन सांख्यिकीय विश्लेषण में अन्य मापकों (चतुर्थक विचलन, माध्य विचलन, मानक विचलन) का प्रयोग अधिक उपयुक्त माना जाता है।



NOTE: Type of series

(i) Indivisual Series

(ii) Discrete Series

(iii) Continuous Series 

                   ⇓

(a) Exclusive Series

(b) Inclusive Series

उदाहरण (Example)

(i) Indivisual Series

1. 13, 20, 7, 15, 29, 35 इस सीरीज का Range और Coefficient of Range निकालें।

हल:

L = 35

S = 7

Range = L – S = 35 – 7 = 28

Coefficient of Range = (L-S)/(L+S)

= (35 – 7)/(35 + 7) = 28/42 = 0.67

2.  50, 69, 92, 85, 55, 20, 30 इस सीरीज का Range और Coefficient of Range निकालें।

हल:

L = 92

S = 20

Range = L – S =92-20 = 72

Coefficient of Range = (L-S)/(L+S)

= (92-20)/(92+20) = 72/112 = 0.64

(ii) Discrete Series (खंडित श्रेणी)

3. दिए गये सीरीज का Range और Coefficient of Range निकालें।

x f
5 3
10 7
15 5
20 12
25 9

हल:

Note : ऐसे series में Frequency को ignore करना है।

L = 25

S = 5

Range = L – S = 25 – 5 = 20

Coefficient of Range = (L-S)/(L+S)

= (25-20)/(25+5) = 20/30 = 0.67

4. दिए गये सीरीज का Range और Coefficient of Range निकालें।

x f
133 9
180 2
80 4
95 5
40 3
132 10

हल:

L = 180

S = 40

Range = L – S = 180 – 40 = 140

Coefficient of Range = (L-S)/(L+S)

= (180-40)/(180+40) = 140/220 = 0.63

(iii) Continuous Series : (a) Exclusive Series

5. दिए गये सीरीज का Range और Coefficient of Range निकालें।

x f
20-25 2
25-30 5
30-35 9
35-40 4
40-45 7

हल:

Note : ऐसे Series में भी Frequency को ignore करना है।

L = 45

S = 20

Range = L – S = 45 – 20 = 25

Coefficient of Range = (L-S)/(L+S)

= (45-20)/(45+20) = 25/65 = 0.38

(b) Inclusive Series

5. दिए गये सीरीज का Range और Coefficient of Range निकालें।

x f
20-24 2
25-29 5
30-34 9
35-39 4
40-44 7

हल:

       सबसे पहले यहाँ Inclusive Series को Exclusive Series में बदलते है और यहाँ भी Frequency को ignore करना है।

इसके लिए (24+25)/2 = 49/2 = 24.5 इसी तरह सभी निकालें।

x f
19.5-24.5 2
24.5-29.5 5
29.5-34.5 9
34.5-39.5 4
39.5-44.5 7

अब, L = 44.5

S = 19.5

Range = L – S = 44.5-19.5 = 25

Coefficient of Range = (L-S)/(L+S)

= (44.5-19.5)/(44.5+19.5) =25/63 = 0.40

14. Measurement of Dispersion (प्रसरण / अपकिरण / विचलन / प्रकीर्णन / फैलाव का मापन)

Measurement of Dispersion

(प्रसरण का मापन)

Measurement of Dispersion

परिचय

     सांख्यिकी में केवल केन्द्रीय प्रवृत्ति के माप (Mean, Median, Mode) से किसी आँकड़ा-समूह की पूर्ण जानकारी नहीं मिलती। दो अलग-अलग आँकड़ा-समूहों का औसत समान हो सकता है, परंतु उनके मानों का फैलाव (विचलन) अलग-अलग हो सकता है। आँकड़ों के इसी फैलाव या बिखराव को प्रसरण (Dispersion) कहा जाता है। अतः प्रसरण का मापन यह बताता है कि आँकड़े अपने केन्द्रीय मान (Mean, Median, Mode) से कितनी दूरी तक फैले हुए हैं।

सरल शब्दों में, प्रसरण का मापन आँकड़ों की अस्थिरता, विविधता तथा समानता/असमानता को मापने का साधन है।

✍️ Dispersion measures the extent to which the items vary from some central value.

✍️ Average deviation is known as dispersion.

✍️ Central value- Mean, Median, Mode

✍️ Dispersion is also known as scatter, spread or variation.

Example 

(i) 2, 4, 9

AM = Σx/n

    x̄  = 2+4+9/3

      x̄  = 15/3

      x̄  = 3

(ii)

Series A Series B Series C
100 98 1
100 99 2
100 100 3
100 101 4
100 102 490
x̄ = 500/5 = 100 500/5 = 100 500/5 = 100

       यह तालिका दर्शाती है कि तीनों श्रेणियों (Series A, B और C) का औसत (̄ = 100) समान है, लेकिन मानों का वितरण अलग-अलग है। Series A में कोई प्रसरण नहीं, Series B में कम प्रसरण, जबकि Series C में अत्यधिक प्रसरण है।

प्रसरण की परिभाषा

        कई विद्वानों ने अपकिरण को परिभाषित किया है जिनमें निम्न प्रमुख हैं :-

(1) बुक्स एवं डिक (B. C. Brooks and W. F. L. Dick) के अनुसार, “अपकिरण अथवा प्रसार, एक केन्द्रीय मूल्य के इर्द-गिर्द चर मूल्यों (variables) के विचरण अथवा बिखराव की सीमा है।”

(2) प्रो. किंग (W. I. King) के शब्दों में, “अपकिरण शब्द का प्रयोग यह स्पष्ट करने के लिए किया जाता है कि एक दिये गये समूह के पद-मूल्यों में भिन्नता है। दूसरे शब्दों में, उसके मूल्यों में एकरूपता का अभाव है। “

(3) प्रो. कॉनर (L. R. Connor) के अनुसार, “अपकिरण उस सीमा, जिस तक व्यक्तिगत पद विलित है, की एक माप है।”

क्रॉक्सटन और काउडेन के अनुसार-

      “प्रसरण वह माप है जो यह दर्शाता है कि किसी श्रृंखला के व्यक्तिगत मान औसत के चारों ओर किस सीमा तक बिखरे हुए हैं।

प्रसरण के मापन की आवश्यकता (महत्त्व)

    प्रसरण के मापन की आवश्यकता निम्न कारणों से होती है-

✍️ आँकड़ों की स्थिरता या अस्थिरता का ज्ञान

✍️ दो या अधिक श्रृंखलाओं की तुलना

✍️ औसत की विश्वसनीयता जाँचने हेतु

✍️ जोखिम (Risk) और अनिश्चितता के विश्लेषण में

✍️ नीति निर्माण, योजना तथा अनुसंधान में सहायता

✍️ आर्थिक, भौगोलिक एवं सामाजिक अध्ययनों में उपयोग

प्रसरण के मापन के प्रकार

   प्रसरण के मापन को मुख्यतः दो भागों में बाँटा जाता है-

1. निरपेक्ष माप (Absolute Measures)

2. सापेक्ष माप (Relative Measures)

(1) निरपेक्ष माप (Absolute Measure):-

     जब किसी श्रेणी के बिखराव की माप निरपेक्ष रूप में उस श्रेणी की इकाई में ही व्यक्त की जाती है तो वह अपकिरण की निरपेक्ष माप कहलाती है, जैसे कीमत रुपयो में, लम्बाई मीटर में, वजन किलोग्राम में व्यक्त किया जाता है। यदि यह कहा जाए कि श्रमिको के एक समूह की औसत मजदूरी ₹200 है तथा अपकिरण ₹ 15 है तो यह मद अपकिरण का निरपेक्ष माप कहलाएगा।

    अपकिरण के ऐसे मापों की तुलना तभी सम्भव होती है जब दो श्रेणियाँ एक जैसी हो तथा उन्हें एक जैसी इकाइयां, जैसे-किलोग्राम, रुपये आदि द्वारा प्रकट किया जाए। यदि वितरण दो अलग समंकों से सम्बन्धित है तथा इनकी इकाइयाँ भिन्न है है तो ये माप तुलना में सहायक नहीं होते।

(2) सापेक्ष माप (Relative Measure):-

      जैसा कि हमने अध्ययन किया कि अपकिरण के निरपेक्ष माप में यह दोष है कि इसमें विभिन्न श्रेणियों की इकाइयों अलग-अलग होने पर उनमें परस्पर तुलना सम्भव नहीं होती है। अतः इनके मापों को तुलना योग्य बनाने के लिए इनको सापेक्ष रूप में बदला जाता है। अपकिरण के निरपेक्ष माप को श्रेणी के माध्य भाग देने पर जो अनुपात आता है, उसे अकिरण की सापेक्ष माप कहते हैं।

      उदाहरण के लिए, यदि कहा जाए कि भारत में 27 प्रतिशत व्यक्ति निर्धनता रेखा से नीचे है तो यह सापेक्ष माप होगी। सापेक्ष माप को ज्ञात करने के लिए मध्य मूल्य को औसत से भाग कर दिया जाता है या उसका प्रतिशन ज्ञात किया जाता है। स्पष्ट है कि सापेक्ष माप समंक श्रेणी की इकाई में व्यक्त न होकर एक अनुपात या प्रतिशत के रूप में व्यक्त होती है। इसे अपकिरण गुणांक (Co-efficient of Dispersion) भी कहते है।

अपकिरण मापने की विधियाँ (Method of  Measuring Dispersion)

        अपकिरण मापने की विधियाँ इस प्रकार है-

Measures of Dispersion
Absolute Measure (Same unit) Relative Measure (Unit free)
1. Rane 1. Coefficient of Range
2. Quartile Deviation 2. Coefficient of Quartile Deviation
3. Mean Deviation 3. Coefficient of Mean Deviation
4. Standard Deviation 4. Coefficient of Standard Deviation
5. Variance 5. Coefficient of Variance

निष्कर्ष:

     प्रसरण का मापन सांख्यिकी का एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण अंग है। केवल औसत आँकड़ों की पूरी तस्वीर प्रस्तुत नहीं कर सकता, जब तक कि उसके साथ प्रसरण का अध्ययन न किया जाए।

    परास, चतुर्थक विचलन, औसत विचलन, परिवर्तन तथा मानक विचलन ये सभी प्रसरण के विभिन्न स्तरों को समझने में सहायक हैं। विशेष रूप से मानक विचलन और परिवर्तन गुणांक आधुनिक सांख्यिकीय विश्लेषण में सर्वाधिक उपयोगी माने जाते हैं।

    अतः किसी भी आँकड़ा-विश्लेषण को पूर्ण और विश्वसनीय बनाने के लिए प्रसरण के मापन का अध्ययन अनिवार्य है।



नोट: सिर्फ सांख्यिकीय माध्य का ज्ञान रखने वाले एक व्यक्ति ने सपरिवार नदी पार करने से पहले नदी की औसत गहराई और अपने परिवार की औसत ऊँचाई ज्ञात की।

    नदी की औसत गहराई 4 फीट तथा उसके परिका की औसत ऊँचाई 5 फीट थी। इस विश्वास के साथ सभी लोग नदी पार करने लगे, परन्तु एक स्थान पर नहीं की गहराई 10 फीट थी जहाँ वह परिवार डूब गया।

   यदि उस व्यक्ति ने नदी की अधिकतम गहराई और आने परिवार के सदस्यों की न्यूनतम ऊँचाई को गणना कर ली होती तो शायद यह कहावत सुनने को नहीं मिलती कि-

लेखा जोखा ज्यों का त्यों,

सारा कुनबा डूबा क्यों।

    वह व्यक्ति सपरिवार डूब गया क्योंकि उसे अपकिरण की माप की जानकारी नहीं थी। अपकिरण की माप से हमे इस बात की जानकारी मिलती है कि आंकड़े औसत से कितनी दूरी पर अवस्थित है।

     उपर्युक्त लघु-कथा यह स्पष्ट करती है कि विभिन्न पद-मूल्यों का माध्य में विचलन महत्वपूर्ण होता है। किसी देश में औसत आय अथवा सम्पति काफी अधिक हो सकती है, साथ ही वहाँ उसके वितरण में पर्याप्त असमानता के कारण अधिकांश जनसंख्या निर्धनता की सीमा के नीचे हो सकती है। इस प्रकार के विचलनों को मापना तथा उन्हें एक संख्या में व्यक्त करना आवश्यक होता है।

Chapter 7 Landforms and their Evolution (भू-आकृतियाँ तथा उनका विकास)

Chapter 7 Landforms and their Evolution

(भू-आकृतियाँ तथा उनका विकास)

(भाग – 1 : भौतिक भूगोल के मूल सिद्धांत)

बिहार बोर्ड तथा NCERT कक्षा 11वीं के भूगोल का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर



1. बहुवैकल्पिक प्रश्न एवं उनके उत्तर

(i) स्थलरूप विकास की किस अवस्था में अधोमुख कटाव प्रमुख होता है?

(क) तरुणावस्था

(ख) प्रथम प्रौढ़ावस्था

(ग) अन्तिम प्रौढ़ावस्था

(घ) वृद्धावस्था

उत्तर- (क) तरुणावस्था

(ii) एक गहरी घाटी जिसकी विशेषता सीढ़ीनुमा खड़े ढाल होते हैं; किस नाम से जानी जाती है?

(क) U- आकार की घाटी

(ख) अन्धी घाटी

(ग) गॉर्ज

(घ) कैनियन

उत्तर- (घ) कैनियन

(iii) निम्न में से किन प्रदेशों में रसायनिक अपक्षय प्रक्रिया यान्त्रिक अपक्षय प्रक्रिया की अपेक्षा अधिक शक्तिशाली होती है?

(क) आर्द्र प्रदेश

(ख) शुष्क प्रदेश

(ग) चूना-पत्थर प्रदेश

(घ) हिमनद प्रदेश

उत्तर- (ग) चूना-पत्थर प्रदेश

(iv) निम्न में से कौन-सा वक्तव्य लेपीज (Lapies) शब्द को परिभाषित करता है?

(क) छोटे से मध्यम आकार के उथले गर्त।

(ख) ऐसे स्थलरूप जिनके ऊपरी मुख वृत्ताकार व नीचे से कीप के आकार के होते हैं।

(ग) ऐसे स्थलरूप जो धरातल से जल के टपकने से बनते हैं।

(घ) अनियमित धरातल जिनके तीखे कटक व खाँच हों।

उत्तर- (क) छोटे से मध्यम आकार के उथले गर्त।

लेपीज (Lapies) का सही अर्थ है – चूना पत्थर वाले क्षेत्रों में पाई जाने वाली अनियमित सतह, जिन पर तीखे कटक (ridges) और खांचे (grooves) बने होते हैं।

(v) गहरे, लम्बे व विस्तृत गर्त या बेसिन जिनके शीर्ष दीवार खड़े ढाल वाले व किनारे खड़े व अवतल होते हैं, उन्हें क्या कहते हैं?

(क) सर्क

(ख) पाश्विक हिमोढ़

(ग) घाटी हिमनद

(घ) एस्कर

उत्तर- (क) सर्क

(vi) यू-आकार की घाटी बनती है

(क) बाढ़ क्षेत्र में

(ख) चूना क्षेत्र में

(ग) प्रौढ़ नदी क्षेत्र

(घ) हिमानी नदी क्षेत्र में

उत्तर- (घ) हिमानी नदी क्षेत्र में

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए

(i) चट्टानों में अध: कर्तित विसर्प और मैदानी भागों में जलोढ़ के सामान्य विसर्प क्या बताते हैं?

उत्तर- चट्टानों में अध:कर्तित विसर्प (inverted relief) दर्शाते हैं कि कठोर शिलाओं पर कटाव कम हुआ है और वे ऊँचे बने रहते हैं। जबकि मैदानी भागों में जलोढ़ के सामान्य विसर्प यह बताते हैं कि अवसादों पर अधिक क्षरण-संवहन होता है, जिससे निचले, समतल और व्यापक भू-आकृतियाँ बनती हैं।

(ii) घाटी रंध्र अथवा युवाला का विकास कैसे होता है?

उत्तर- डोलाइन घोलरन्ध्र का ही विकसित रूप है। डोलाइन एक अस्थायी झील के समान होता है। कुछ समय के बाद इसके जल संरोध के सहारे भूमिगत हो जाते हैं और झील सूख जाती है।

     जब दो डोलाइन आसपास होते हैं तो बढ़ते-बढ़ते उनके बीच की दीवार टूट कर गिर जाती है और वे आपस में मिल जाते हैं। इससे एक वृहद् गड्ढे का निर्माण होता है, जो युवाला (Uvalas) कहलाता है।

Chapter 7 Landforms and their Evolution

(iii) चूनायुक्त चट्टानी प्रदेशों में धरातलीय जल प्रवाह की अपेक्षा भौमजल प्रवाह अधिक पाया जाता है, क्यों?

उत्तर- चूनायुक्त (Limestone) चट्टानी प्रदेशों में चट्टानें अधिक दरारदार तथा भंगुर होती हैं, जिनमें जल शीघ्रता से नीचे समा जाता है। सतह पर जल लंबे समय तक ठहर नहीं पाता, इसलिए धरातलीय जल प्रवाह कम और भूमिगत जल प्रवाह अधिक विकसित होता है। इसी कारण कार्स्ट स्थलरूप भी बनते हैं।

(iv) हिमनद घाटियों में कई रैखिक निक्षेपण स्थलरूप मिलते हैं। इनकी अवस्थिति व नाम बताएं।

उत्तर- हिमनद घाटियों में आगे बढ़ते और पिघलते ग्लेशियर रैखिक निक्षेपण स्थलरूप बनाते हैं। इनमें मोराइन (लैटरल, मेडियल, टर्मिनल), एस्कर, ड्रमलिन और आउटवॉश प्लेन प्रमुख हैं। ये इसलिए बनते हैं क्योंकि बर्फ के साथ खिंचती चट्टानें घाटी की दिशा में लंबवत रूप से निक्षेपित होती रहती हैं।

(v) मरुस्थलीय क्षेत्रों में पवन कैसे अपना कार्य करती है? क्या मरुस्थलों में यही एक कारक अपरनदित स्थलरूपों का निर्माण करता है?

उत्तर- मरुस्थलीय क्षेत्रों में पवन मुख्य रूप से अपवाहन (Deflation), अपघर्षण (Abrasion), सन्निघर्षण (Attrition) और परिवहन-निक्षेपण के माध्यम से कार्य करती है, जिससे बालू के टीले, ज्यूगेन, यार्डांग, गारा, छत्रक शिला,  बालूस्तूप, लोएस मैदान आदि बनते हैं।

    परंतु केवल पवन ही नहीं तापीय विस्तार-संकुचन, आकस्मिक व भारी वर्षा, और यांत्रिक अपक्षय भी मरुस्थलों में अपरदित स्थलरूपों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए

(i) आर्द्र व शुष्क जलवायु प्रदेशों में प्रवाहित जल ही सबसे महत्त्वपूर्ण भू-आकृतिक कारक है। विस्तार से वर्णन करें।

उत्तर- आर्द्र एवं शुष्क जलवायु प्रदेशों में प्रवाहित जल (Running Water) सबसे महत्त्वपूर्ण भू-आकृतिक कारक माना जाता है, क्योंकि यही भूमि के अपरदन, परिवहन एवं निक्षेपण की प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है।

   आर्द्र जलवायु प्रदेशों में वर्षा की मात्रा अधिक होती है। यहाँ नदियाँ, झरने एवं सतही जल निरंतर प्रवाहित होते रहते हैं। अधिक वर्षा के कारण रासायनिक अपक्षय तीव्र होता है तथा नदियाँ भूमि को काटकर V-आकार की घाटियाँ, घुमावदार नदियाँ (मेन्डर), बाढ़ मैदान, जलप्रपात एवं डेल्टा जैसी भू-आकृतियों का निर्माण करती हैं। इन क्षेत्रों में प्रवाहित जल का कार्य दीर्घकालिक एवं निरंतर होता है, जिससे परिदृश्य में व्यापक परिवर्तन दिखाई देता है।

     शुष्क जलवायु प्रदेशों में वर्षा बहुत कम होती है, परंतु जब अल्पकालिक एवं तीव्र वर्षा होती है, तब प्रवाहित जल अचानक शक्तिशाली रूप धारण कर लेता है। यहाँ अस्थायी नदियाँ (वाडी/अरॉय) बनती हैं, जो तीव्र अपरदन करती हैं। इनके द्वारा गॉर्ज, कैनियन, अल्यूवियल फैन एवं पेडीमेंट जैसी भू-आकृतियाँ विकसित होती हैं। यद्यपि जल का प्रवाह अल्पकालिक होता है, फिर भी उसका प्रभाव अत्यंत प्रभावशाली होता है।

  इस प्रकार स्पष्ट है कि आर्द्र और शुष्क दोनों जलवायु प्रदेशों में प्रवाहित जल भू-आकृतिक विकास का प्रमुख कारक है, जो विभिन्न स्थलरूपों के निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाता है।

(ii) चूना चट्टानें आर्द्र व शुष्क जलवायु में भिन्न व्यवहार करती हैं क्यों? चूना प्रदेश में प्रमुख व मुख्य भू-आकृतिक प्रक्रिया कौन-सी हैं और इसके क्या परिणाम हैं।

उत्तर- चूना चट्टानें (Limestone Rocks) आर्द्र एवं शुष्क जलवायु में भिन्न व्यवहार करती हैं, क्योंकि दोनों जलवायुओं में जल की उपलब्धता, तापमान, वर्षा की मात्रा तथा रासायनिक क्रियाओं की तीव्रता अलग-अलग होती है।

   आर्द्र जलवायु में वर्षा अधिक होती है तथा वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा भी अपेक्षाकृत अधिक होती है। वर्षा जल CO₂ के साथ मिलकर कार्बोनिक अम्ल बनाता है, जो चूना पत्थर को घोल देता है। इस कारण यहाँ रासायनिक अपक्षय (Dissolution / Solution) प्रमुख होता है। इसके परिणामस्वरूप कार्स्ट स्थलाकृतियाँ विकसित होती हैं, जैसे-डोलाइन, यूवाला, पोल्जे, गुफाएँ, स्टैलेक्टाइट और स्टैलेग्माइट।

   इसके विपरीत शुष्क जलवायु में वर्षा अत्यंत कम होती है, जिससे रासायनिक क्रियाएँ सीमित रहती हैं। यहाँ यांत्रिक अपक्षय, तापीय विस्तार-संकुचन तथा पवन क्रिया प्रमुख होती है। चूना चट्टानों का घुलन कम होता है और सतह अपेक्षाकृत कठोर बनी रहती है।

    चूना प्रदेश में प्रमुख भू-आकृतिक प्रक्रियाएँ हैं-

(i) रासायनिक अपक्षय (घुलन क्रिया)

(ii) भूमिगत जल क्रिया

(iii) अपरदन एवं निक्षेपण

   परिणामस्वरूप अनियमित स्थलरूप, भूमिगत नदियाँ, जल का तीव्र अपवाह, सतही नदियों का अभाव तथा कृषि के लिए सीमित उपयुक्तता देखने को मिलती है।

(iii) हिमनद ऊँचे पर्वतीय क्षेत्रों को निम्न पहाड़ियों व मैदानों में कैसे परिवर्तित करते हैं या किस प्रक्रिया से यह सम्पन्न होता है बताएँ?

उत्तर- हिमनद (Glaciers) ऊँचे पर्वतीय क्षेत्रों को धीरे-धीरे निम्न पहाड़ियों और विस्तृत मैदानों में परिवर्तित कर देते हैं। यह परिवर्तन मुख्यतः हिमानी अपरदन, परिवहन और निक्षेपण की प्रक्रियाओं के द्वारा सम्पन्न होता है।

    सबसे पहले, पर्वतीय क्षेत्रों में जमा भारी हिमराशि अपने भार के कारण ढलान की ओर खिसकती है। इस गति के दौरान हिमनद अपने साथ चट्टानों, पत्थरों और मलबे को लेकर चलता है। हिमनद की निचली सतह और किनारों में फँसे शैल-खंड भूमि को घिसते रहते हैं, जिसे हिमानी अपरदन कहा जाता है। इससे तीखे पर्वत शिखर घिसकर गोल हो जाते हैं और गहरी V-आकार की घाटियाँ चौड़ी होकर U-आकार की घाटियों में बदल जाती हैं।

    दूसरे चरण में, हिमनद अपरदित पदार्थों को दूर-दूर तक ले जाकर ढलानों से नीचे की ओर परिवहन करता है। जब हिमनद का वेग कम हो जाता है या वह पिघलने लगता है, तब ये शैल-खंड और मलबा वहीं जमा हो जाते हैं। इस प्रक्रिया को हिमानी निक्षेपण कहते हैं। इससे मोरैन, आउटवॉश मैदान तथा समतल भूमि का निर्माण होता है।

   इस प्रकार, लंबे समय तक चलने वाली हिमानी क्रियाएँ ऊँचे और खुरदरे पर्वतीय क्षेत्रों को घिस-घिसकर निम्न पहाड़ियों और समतल मैदानों में परिवर्तित कर देती हैं।

16. Scatter Diagram (स्कैटर आरेख)

Scatter Diagram

(स्कैटर आरेख)



Scatter Diagram

    सांख्यिकी (Statistics) में सहसंबंध (Correlation) का अर्थ दो चरों (Variables) के बीच संबंध की दिशा और मात्रा को समझना होता है। यह बताता है कि एक चर में परिवर्तन होने पर दूसरा चर किस प्रकार प्रभावित होता है।

    सहसंबंध के अध्ययन में स्कैटर आरेख (Scatter Diagram) एक अत्यंत सरल, दृश्यात्मक और प्रभावी विधि है, जिसके माध्यम से दो चरों के बीच संबंध को आसानी से समझा जा सकता है।

    स्कैटर आरेख को बिंदु आरेख भी कहा जाता है। इसमें दो चरों के मानों को ग्राफ पर बिंदुओं के रूप में दर्शाया जाता है। सामान्यतः स्वतंत्र चर (Independent Variable) को X-अक्ष पर और आश्रित चर (Dependent Variable) को Y-अक्ष पर अंकित किया जाता है।

    प्रत्येक युग्म (X, Y) को ग्राफ पर एक बिंदु (•) के रूप में प्रदर्शित किया जाता है। इन बिंदुओं के फैलाव और उनके झुकाव (Trend) से सहसंबंध की प्रकृति का अनुमान लगाया जाता है।

स्कैटर डायग्राम की परिभाषा

     स्कैटर डायग्राम वह आरेख है, जिसमें दो चरों से संबंधित आँकड़ों को ग्राफ पेपर पर बिंदुओं (Dots) के रूप में दर्शाया जाता है। एक चर को X-अक्ष (क्षैतिज अक्ष) पर तथा दूसरे चर को Y-अक्ष (ऊर्ध्वाधर अक्ष) पर रखा जाता है। दोनों चरों के मानों के युग्म (X, Y) को ग्राफ पर बिंदु के रूप में अंकित किया जाता है। इन बिंदुओं के फैलाव (Scatter) से यह ज्ञात होता है कि चरों के बीच किस प्रकार का सहसंबंध है।

स्कैटर डायग्राम की विशेषताएँ

    स्कैटर डायग्राम की कुछ प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

✍️ यह सहसंबंध को समझने की सबसे सरल और प्रारंभिक विधि है।

✍️ इसमें जटिल गणनाओं की आवश्यकता नहीं होती।

✍️ यह केवल सहसंबंध की दिशा और प्रकृति बताता है, उसकी सटीक मात्रा नहीं।

✍️ यह शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी है।

✍️ यह सकारात्मक, नकारात्मक और शून्य सहसंबंध को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

स्कैटर डायग्राम बनाने की विधि

    स्कैटर डायग्राम बनाने की प्रक्रिया को निम्न चरणों में समझा जा सकता है-

(i) आँकड़ों का चयन:-

    सबसे पहले दो चरों से संबंधित आँकड़ों का चयन किया जाता है, जैसे- वर्षा और फसल उत्पादन, तापमान और आर्द्रता, जनसंख्या और संसाधन आदि।

(ii) अक्षों का निर्धारण:-

   एक चर को X-अक्ष पर और दूसरे चर को Y-अक्ष पर रखा जाता है। सामान्यतः स्वतंत्र चर (Independent Variable) को X-अक्ष पर और आश्रित चर (Dependent Variable) को Y-अक्ष पर रखा जाता है।

(iii) पैमाने का चयन:-

    दोनों अक्षों पर उपयुक्त पैमाना (Scale) निर्धारित किया जाता है, जिससे सभी मान ग्राफ पर सही ढंग से दर्शाया जा सकें।

(iv) बिंदुओं का अंकन:-

   प्रत्येक युग्म मान (X, Y) को ग्राफ पर केवल एक बिंदु के रूप में न कि रेखा रूप में अंकित किया जाता है।

(v) बिंदुओं का अवलोकन:-

   अंकित बिंदुओं के फैलाव को देखकर सहसंबंध की दिशा और प्रकार का अनुमान लगाया जाता है।

स्कैटर डायग्राम के प्रकार

     स्कैटर आरेख / डायग्राम में बिंदुओं वितरण की स्थिति के आधार पर सहसंबंध को निम्न प्रकारों में समझा जा सकता है-

(i) सकारात्मक सहसंबंध (Positive Correlation)

    जब एक चर के बढ़ने पर दूसरा चर भी बढ़ता है, या एक चर के घटने पर दूसरा भी घटता है, तो उसे सकारात्मक सहसंबंध कहते हैं। स्कैटर डायग्राम में ऐसे बिंदु बाएँ से दाएँ ऊपर की ओर जाते हुए दिखाई देते हैं।

उदाहरण-

⇒ आय और उपभोग

⇒ वर्षा और कृषि उत्पादन

(ii) नकारात्मक सहसंबंध (Negative Correlation)

    जब एक चर के बढ़ने पर दूसरा चर घटता है, तो उसे नकारात्मक सहसंबंध कहते हैं। स्कैटर डायग्राम में बिंदु बाएँ से दाएँ नीचे की ओर ढलान बनाते हैं।

उदाहरण-

⇒ मूल्य और माँग

⇒ ऊँचाई और तापमान

(iii) शून्य सहसंबंध (Zero Correlation)

    जब दो चरों के बीच कोई निश्चित संबंध नहीं होता, तो उसे शून्य सहसंबंध कहते हैं। स्कैटर डायग्राम में बिंदु अनियमित रूप से बिखरे होते हैं।
उदाहरण-

⇒ जूते का साइज और बुद्धि

⇒ जन्म-तिथि और परीक्षा-अंक

स्कैटर डायग्राम के लाभ

✍️ यह सहसंबंध को सरल और दृश्य रूप में प्रस्तुत करता है।

✍️ यह प्रारंभिक विश्लेषण के लिए अत्यंत उपयोगी है।

✍️ इसे बनाना और समझना आसान है।

✍️ यह आँकड़ों में किसी भी असामान्यता (Outlier) को स्पष्ट दिखा देता है।

✍️ यह आगे की सांख्यिकीय विधियों (जैसे Karl Pearson सहसंबंध) के लिए आधार प्रदान करता है।

सीमाएँ

    स्कैटर डायग्राम की निम्नलिखित सीमाएँ है-

✍️ यह सहसंबंध की सटीक मात्रा नहीं बताता।

✍️ बड़े आँकड़ों में बिंदु आपस में मिल जाते हैं, जिससे स्पष्टता कम हो जाती है।

✍️ यह केवल दो चरों के बीच संबंध दर्शा सकता है।

✍️ व्यक्तिगत व्याख्या (Subjective Interpretation) पर अधिक निर्भर करता है।

भूगोल एवं अन्य विषयों में उपयोग

   स्कैटर डायग्राम का प्रयोग भूगोल, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, जनसंख्या अध्ययन, पर्यावरण अध्ययन आदि में व्यापक रूप से किया जाता है।

भूगोल में उपयोग जैसे-

  वर्षा और नदी प्रवाह, जनसंख्या घनत्व और संसाधन, तापमान और वनस्पति जैसे संबंधों को समझने के लिए स्कैटर डायग्राम अत्यंत उपयोगी है।

निष्कर्ष:

   अतः कहा जा सकता है कि सहसंबंध के अध्ययन में स्कैटर डायग्राम एक सरल, प्रभावी और उपयोगी ग्राफिकल विधि है। यह दो चरों के बीच संबंध की दिशा और प्रकृति को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

    यद्यपि इसकी कुछ सीमाएँ हैं, फिर भी प्रारंभिक विश्लेषण और शोध के लिए इसका महत्व अत्यधिक है। सांख्यिकी और भूगोल के विद्यार्थियों के लिए स्कैटर डायग्राम सहसंबंध को समझने का एक मजबूत आधार प्रदान करता है।

UG Regular Semester-V Examination 2025 QUESTION PAPER, Patliputra University, Patna

UG Regular Semester-V

Examination 2025

QUESTION PAPER



Patliputra University, Patna

UG Regular Semester-V

UG (Regular) (Sem.-V)

Examination, 2025

(Session: 2023-27)

(MJC-8: MAJOR CORE COURSE)

GEOGRAPHY

Paper Code: 410812

(Environmental Geography)

Time: Three Hours] [Maximum Marks: 70

Note: Candidates are required to give their answers in their own words as far as practicable. The figures in the margin indicate full marks. Answer from all sections as directed.

परीक्षार्थी यथासम्भव अपने शब्दों में ही उत्तर दें। उपांत के अंक पूर्णांक के द्योतक है। निर्देशानुसार सभी खण्डों से उत्तर दीजिए।

Section-A / खण्ड-अ

(Objective/Multiple Choice Questions)

(वस्तुनिष्ठ बहुविकल्पीय प्रश्न)

Note : Choose the correct option from each question. Each question carries 2 marks. [10×2=20]

प्रत्येक प्रश्न से सही विकल्प का चयन कीजिए। प्रत्येक प्रश्न 2 अंकों का है।

1. (i) Cartography is the study of:

(a) Stars and planets

(b) Making maps

(c) Rocks and minerals

(d) Earth’s atmosphere

मानचित्रकला एक अध्ययन है:

(a) तारों और ग्रहों का

(b) मानचित्र बनाने का

(c) चट्टानों और खनिजों का

(d) पृथ्वी के वायुमण्डल का

(ii) What is the main objective of Cartography?

(a) Creating artwork

(b) Analysing spatial data

(c) Determining Political Boundaries

(d) Studying Geological Processes

मानचित्रकला का मुख्य उद्देश्य क्या है?

(a) कलाकृति बनाना

(b) स्थानिक आंकड़ों के विश्लेषण करना

(c) राजनीतिक सीमाओं का निर्धारण करना

(d) भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं का अध्ययन करना

(iii) What is a scale in the context of maps and drawings?

(a) The size of the map or drawing

(b) The colours used for different features

(c) The ratio between a distance on a maр and corresponding distance on the ground

(d) A tool used to draw straight lines

मानचित्र या ड्राइंग के संदर्भ में पैमाना क्या है?

(a) मानचित्र या ड्राइंग का आकार

(b) विभिन्न विशेषताओं के लिए उपयोग किए जाने वाले रंग

(c) मानचित्र पर दूरी और जमीन पर उसी के अनुरूप दूरी के बीच का अनुपात

(d) सीधी रेखाएँ खींचने के लिए उपयोग किया जाने वाला एक उपकरण

(iv) What is the maximum number of units that can be shown using a simple scale?

(a) One

(b) Two

(c) Three

(d) Four

एक सरल मापनी का उपयोग करके अधिकतम कितनी इकाइयाँ दर्शायी जा सकती हैं?

(a) एक

(b) दो

(c) तीन

(d) चार

(v) Weather maps are used for what purposes?

(a) Predicting earthquakes

(b) Depicting weather conditions

(c) Showing planetary conditions

(d) Predicting volcanic activity

मौसम मानचित्र का उपयोग किस उद्देश्य लिए किया जाता है?

(a) भूकम्प की भविष्यवाणी के लिए

(b) मौसम की स्थिति दर्शाने के लिए

(c) ग्रहों की स्थिति दर्शाने के लिए

(d) ज्वालामुखी गतिविधि की भविष्यवाणी के लिए

(vi) What is the primary purpose of a weather balloon in modern meteorology?

(a) To measure rainfall

(b) To transit weather data from high altitudes

(c) Tо capture images of cloud formations

(d) To monitor ocean currents

आधुनिक मौसम विज्ञान में मौसम के गुब्बारे का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?

(a) वर्षा को मापना

(b) उच्च ऊँचाई से मौसम आंकड़ों का पारगमन

(c) बादल बनने के चित्र लेना

(d) समुद्र की धाराओं की निगरानी करना

(vii) What is a Map Projection?

(a) A model of the earth on a flat surface

(b) A process of transferring a spherical surface to a flat surface

(c) A depiction of natural features on a Globe

(d) An imaginary line dividing the earth

मानचित्र प्रक्षेप क्या है?

(a) समतल सतह पर पृथ्वी का एक मॉडल

(b) गोलाकार सतह को एक समतल सतह पर स्थानांतरित करने की प्रक्रिया

(c) ग्लोब पर प्राकृतिक विशेषताओं का चित्रण

(d) पृथ्वी को विभाजित करने वाली एक काल्पनिक रेखा

(viii) Which of the following is a key characteristic of the cylindrical equal-area projection?

(a) The scale is true along all parallels

(b) The shape of the areas is preserved

(c) The area is preserved but shapes are distorted especially in higher latitudes

(d) It is primarily used for navigation

निम्नलिखित में से कौन-सी बेलनाकार समक्षेत्र प्रक्षेप की एक मुख्य विशेषता है?

(a) सभी अक्षांशों के साथ पैमाना सही होता है

(b) क्षेत्रों के आकार को संरक्षित किया जाता है

(c) क्षेत्रफल को संरक्षित किया जाता है, लेकिन आकार विकृत होते हैं खासकर उच्च अक्षांशों पर

(d) यह मुख्य रूप से नेविगेशन के लिए उपयोग किया जाता है

(ix) What is the primary purpose of a topographical map?

(a) To show political boundaries

(b) To represent three-dimensional features in the earth’s surface on a twodimensional map

(c) To show population density

(d) To indicate weather patterns

स्थलाकृतिक मानचित्र का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?

(a) राजनीतिक सीमाओं को दर्शाना

(b) पृथ्वी की सतह की त्रि आयामी विशेषताओं को द्वि-आयामी मानचित्र पर दर्शाना

(c) जनसंख्या घनत्व दिखाना

(d) मौसम के प्रतिमान को इंगित करना

(x) What do closely spaced contour lines on a topographical map represent?

(a) gentle slopе

(b) steep slope

(c) ocean

(d) flat plain

स्थलाकृतिक मानचित्र पर पास-पास खींची गई समोच्च रेखाएँ क्या दर्शाती हैं?

(a) मंद ढलान

(b) खड़ी ढलान

(c) महासागर

(d) समतल मैदान

Section-B / खण्ड-ब

(Short Answer Type Questions)

(लघु उत्तरीय प्रश्न)

Note: Answer any four questions of the following. Each question carries 5 marks. [4×5=20]

निम्नलिखित में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए। प्रत्येक प्रश्न 5 अंकों का है।

2. What is the meaning of Cartography?

मानचित्रकला का क्या अर्थ है?

3. What is the application of scale on a map?

मानचित्र पर पैमाने का क्या उपयोग है?

4. What is the difference between climate and weather?

जलवायु एवं मौसम में क्या अन्तर है?

5. Give the classification of map projections according to their construction method.

रचना-विधि के अनुसार मानचित्र प्रक्षेपों का वर्गीकरण बताइए।

6. On which principle conical projections are made?

शंक्वाकार प्रक्षेप किस सिद्धान्त पर बनाए जाते हैं?

7. What is a Topographical Map?

स्थलाकृतिक मानचित्र क्या है?

Section-C / खण्ड-स

(Long Answer Type Questions)

(दीर्घ उत्तरीय प्रश्न)

Note : Answer any three questions of the following. Each question carries 10 marks. [3×10=30]

निम्नलिखित में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए। प्रत्येक प्रश्न 10 अंकों का है।

8. What is the nature and scope of Cartography?

मानचित्रकला की प्रकृति और कार्यक्षेत्र क्या है?

9. Discuss the significance of Weather maps.

मौसम मानचित्रों के महत्व पर चर्चा कीजिए।

10. Discuss the concept and properties of map projection.

मानचित्र प्रक्षेप की अवधारणा और गुणों पर चर्चा कीजिए।

11. Explain the properties, limitations and uses of the cylindrical equal area projection.

बेलनाकार समक्षेत्र प्रक्षेप के गुणों, सीमाओं और उपयोगों की व्याख्या कीजिए।

12. What are the methods to study the Topographical maps?

स्थलाकृतिक मानचित्रों के अध्ययन की विधियाँ क्या है?




UG (Regular) (Sem.-V)

Examination, 2025

(Session: 2023-27)

(MJC-9: MAJOR CORE COURSE)

GEOGRAPHY

Paper Code: 410813

(Cartographic Techniques)

Time: Three Hours) [Maximum Marks: 70

Note: Candidates are required to give their answers in their own words as far as practicable. The figures in the margin indicate full marks. Answer from all sections as directed.

परीक्षार्थी यथासम्भव अपने शब्दों में ही उत्तर दें। उपांत के अंक पूर्णांक के द्योतक है। निर्देशानुसार सभी खण्डों से उत्तर दीजिए।

Section-A / खण्ड-अ

(Multiple Choice Questions)

(बहुविकल्पीय प्रश्न)

Note : Choose the correct option from each question : प्रत्येक प्रश्न से सही विकल्प का चयन कीजिए [10×2=20]

1. (i) Which of the following gases is mainly responsible for acid rain?

(a) Carbon dioxide

(b) Sulphur dioxide

(c) Oxygen

(d) Hydrogen

निम्नलिखित में से कौन-सी गैस अम्लीय वर्षा के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार है?

(a) कार्बन डाइऑक्साइड

(b) सल्फर डाइऑक्साइड

(c) ऑक्सीजन

(d) हाइड्रोजन

(ii) Biodiversity hotspot refers to:

(a) Area with low biodiversity

(b) Area rich in biodiversity and under threat

(c) Area with no human activity

(d) Desert region

जैव विविधता हॉटस्पॉट कहते हैं:

(a) कम जैव विविधता वाले क्षेत्र को

(b) अधिक जैव विविधता वाले और संकटग्रस्त क्षेत्र को

(c) बिना मानव गतिविधि वाले क्षेत्र को

(d) मरुस्थलीय क्षेत्र को

(iii) Which is not a Greenhouse Gas?

(a) Methane

(b) Water Vapour

(c) Nitrogen

(d) Carbon Dioxide

निम्नलिखित में से कौन-सी ग्रीनहाउस गैस नहीं है?

(a) मीथेन

(b) जलवाष्प

(c) नाइट्रोजन

(d) कार्बन डाइऑक्साइड

(iv) Joint Forest Management Programme (JFM) in India started in which year?

(a) 1985

(b) 1990

(c) 1995

(d) 2000

भारत में संयुक्त वन प्रबंधन कार्यक्रम (जे.एफ.एम.) किस वर्ष प्रारम्भ हुआ?

(a) 1985

(b) 1990

(c) 1995

(d) 2000

(v) Which of the following is a primary consumer in a food chain?

(a) Grass

(b) Deer

(c) Tiger

(d) Fungus

खाद्य श्रृंखला में निम्नलिखित में से कौन प्राथमिक उपभोक्ता है?

(a) घास

(b) हिरण

(c) बाघ

(d) फफूंदी

(vi) Whati’s the main cause of Urban Heat Islands?

(a) Tree plantation

(b) Use of Concrete and Asphalt

(c) Agriculture

(d) Water bodies

शहरी ताप द्वीप का मुख्य कारण क्या है?

(a) वृक्षारोपण

(b) कॅक्रीट और डामर का उपयोग

(c) कृषि

(d) जल निकाय

(vii) The term ‘Sustainable Development’ was popularized by which report?

(a) Kyoto Protocol

(b) Stockholm Report

(c) Brundtland Report

(d) Rio Declaration

‘सतत विकास’ शब्द को किस रिपोर्ट ने लोकप्रिय बनाया?

(a) क्योटो प्रोटोकॉल

(b) स्टॉकहोम रिपोर्ट

(c) बुंडलैंड रिपोर्ट

(d) रियो घोषणा

(viii) Which of the following is a Secondary Pollutant?

(a) Sulphur Dioxide

(b) Smog

(c) Lead

(d) Dust

निम्नलिखित में से कौन द्वितीयक प्रदूषक है?

(a) सल्फर डाइऑक्साइड

(b) धुंध

(c) सीसा

(d) धूल

(ix) Which is considered the largest ecosystem on Earth?

(a) Desert

(b) Grassland

(c) Ocean

(d) Forest

पृथ्वी का सबसे बड़ा पारिस्थितिकी-तंत्र कौन-सा है?

(a) मरुस्थल

(b) घास का मैदान

(c) महासागर

(d) वन

(x) Which of the following laws relates to controlling water pollution in India?

(a) Air (Prevention and Control of Pollution) Act

(b) Forest Conservation Act

(c) Water (Prevention and Control of Pollution) Act

(d) Wildlife Protection Act

निम्नलिखित में से कौन-सा कानून भारत में जल प्रदूषण को नियंत्रित करने से सम्बन्धित है?

(a) वायु (प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम

(b) वन संरक्षण अधिनियम

(c) जल (प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम

(d) वन्यजीव संरक्षण अधिनियम

Section-B / खण्ड-ब

(Short Answer Type Questions)

(लघु उत्तरीय प्रश्न)

Note: Answer any four questions of the following. [4×5=20]

निम्नलिखित में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

2. Define ‘Environmental Geography’. Name two components of the environment.

‘पर्यावरण भूगोल’ क्या है? पर्यावरण के दो घटकों के नाम लिखिए।

3. What is Biodiversity Hotspot?

जैवविविधता हॉटस्पॉट क्या है?

4. What is meant by the Ecological Balance?

प्रारिस्थितिक संतुलन से आप क्या समझते हैं?

5. What is the main cause of heat Islands in Cities?

शहरों में ताप द्वीप का मुख्य कारण क्या है?

6. Explain any two types of Environmental Crisis.

पर्यावरणीय संकट के कोई दो प्रकार स्पष्ट कीजिए।

7. Write a short note on the management of Sewage Disposal.

मल-निष्कासन व्यवस्था के प्रबंधन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

Section-C / खण्ड-स

(Long Answer Type Questions)

(दीर्घ उत्तरीय प्रश्न)

Note: Answer any three questions of the following. [3×10=30]

निम्नलिखित में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

8. Examine the concepts and components of the Ecosystem, explaining their interrelationship with suitable examples.

पारिस्थितिकी-तंत्र की संकल्पना एवं घटकों की परस्परता, उपयुक्त उदाहरणों सहित स्पष्ट कीजिए।

9. Critically analyze the causes and impact of environmental degradation, citing recent events in India.

पर्यावरणीय क्षरण के कारण व प्रभावों को आलोचनात्मक विवेचना, भारत की ताज़ा घटनाओं सहित कीजिए।

10. Discuss the various types of Environmental Pollution and their remedial measures in detail.

पर्यावरण प्रदूषण के विभिन्न प्रकार एवं उनके उपचारात्मक उपायों का वर्णन कीजिए।

11. Assess the role of environmental management policies in mitigating disasters such as floods and droughts.

आपदाओं जैसे-बाढ़ एवं सूखे में आपदा प्रबंधन नीतियों की भूमिका

12. Explain natural hazards and environmental laws, with reference to radiation hazards, gas leaks, and acid rain

प्राकृतिक आपदाएँ एवं पर्यावरणीय कानून विकिरण आपदा, गैस रिसाव, अम्लीय वर्षा के संदर्भ में समझाइए।

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