Archives July 2022

1. Change in Sea Level / समुद्र तल में परिवर्तन

1. Change in Sea Level 

(समुद्र तल में परिवर्तन)


Change in Sea Level / समुद्र तल में परिवर्तन⇒Change in Sea Level

        समुद्री जल का तल (S.L.) समुद्री वातावरण का एक गत्यात्मक पहलू है। यद्यपि पृथ्वी तंत्र के कुल जल की मात्रा निश्चित है। लेकिन समय-समय पर जल के अवस्था में परिवर्तन के कारण समुद्र तल में भी परिवर्तन होता है। समुद्र तल का परिवर्तन कई कारकों का परिणाम है। जैसे-

◆ हिमयुग के आगमन से समुद्र तल में गिरावट आती है और जब हिमयुग की समाप्ति होती है तथा वातावरण का तापमान अधिक हो जाता है तो स्थलीय हिम पिघलकर समुद्र में आ जाते हैं और जल स्तर ऊँचा हो जाता है।

◆ भूगर्भिक प्रक्रियाएँ भी समुद्र के जलस्तर में परिवर्तन लाते हैं। जैसे अगर भूगर्भिक हलचल के कारण समुद्री नितल का धँसान होता है तो जल स्तर गिरती है और जब उत्थान होता है तो जलस्तर बढ़ती है। जैसे- कई स्थलीय भूभागों पर समुद्री जीवाश्म के प्रमाण मिलते हैं जो यह बताता है कि कभी वहाँ पर समुद्री जल रहा होगा और जब वहाँ समुद्र रहा होगा तो निश्चित रूप से एक समुद्री जलस्तर भी रहा होगा। जब उस भू-भाग का उत्थान हो जाता है तो समुद्र का जलस्तर ऊपर की ओर खिसक जाता है लेकिन यह एक सापेक्षिक घटना है।

नोट : अगर समुद्र नितल का धँसान होता है तो जलस्तर नीचे चली जाती है और जब समुद्र नितल का उत्थान होता है तो समुद्र जलस्तर बढ़ जाता है।

◆ विभिन्न जलवायु विज्ञान एवं समुद्री विज्ञान के वैज्ञानिकों ने समुद्र तल में होने वाले परिवर्तन को गत्यात्मक मानते हुए यह माना है कि समुद्र तल में परिवर्तन जल के आयतन में बढ़ोतरी या कमी से होती है।

         उपरोक्त तीनों कारकों में से प्रथम कारक है समुद्र तल परिवर्तन के लिए सबसे उत्तरदायी कारक है।

         विभिन्न अध्ययनों से यह स्पष्ट हो चुका है कि समुद्र तल में 110 से 140 मीटर तक परिवर्तन हुआ है। प्रायः सभी हिम युग में समुद्र का तल 100 से 150 मीटर के बीच नीचे चले गए थे। प्लीस्टोसीन के अंतिम हिमानी युग के अंत में समुद्र का तल वर्तमान तल से 110 मीटर नीचे पहुँच गया था। फेयरब्रिज के अनुसार “समुद्रतल में सतत सूक्ष्म परिवर्तन होते रहते हैं।” लेकिन 1800 ई० के बाद में इसमें काफी स्थिरता आई है। हालाकि औद्योगिक क्रांति के बढ़ते प्रभाव के कारण 1970 के दशक से वातावरण में तापमान के बढ़ोतरी से समुद्र तल में भी बढ़ोतरी होने लगी है। सामान्य नियम के अनुसार 1℃ वायुमंडलीय तापमान के बढ़ने से 0.55 mm समुद्री तल में वृद्धि होती है। “विश्व जलवायु विज्ञान संस्था” के अनुसार 1985 से 1997 के बीच औसत तापमान में बढ़ोतरी 0.37℃ हुआ है।

परिणाम
        अनेक पारिस्थैतिक वैज्ञानिकों के अनुसार 2030 ई० तक समुद्रतल में 3 मीटर तक वृद्धि हो सकती है। ऐसी स्थिति में विश्व के कई द्वीपीय देश पूर्णत: जलमग्न हो सकते हैं। मालदीप तथा दक्षिणी प्रशांत महासागर के कई द्वीप समुद्र में डूब जाएँगे। कई तटीय महासागर जैसे मुंबई, न्यूयार्क, टोकियों, मैक्सिको सिटी, रियो डे जेनेरियो पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। कई प्रवाल भित्ति जलमग्न हो जाएंगे। अधिक समुद्री तल के परिवर्तन से जलवायु पर भी विनाशकारी प्रभाव पड़ सकता है। नदियों के मुहाने पर समुद्री ज्वार के कारण बाढ़ का प्रभाव बढ़ जाएगा। कई तटीय मैंग्रोव या ज्वारीय वनस्पति विलुप्त हो जाएंगे। केवल बांग्लादेश में ही 1.5 करोड़ जनसंख्या को विस्थापित होना पड़ेगा। अर्थात समुद्रतल में हो रहे परिवर्तन का विनाशकारी प्रभाव अवश्य संभावी है। 

उपाय

         भारत के पर्यावरण मंत्रालय ने ग्लोबल वार्मिंग और समुद्र तल में हो रहे बढ़ोतरी का अध्ययन करवाया है। इन दोनों के बीच पाए जाने वाले सह संबंध को देखते हुए एक आपातकालीन योजना बनाने का निर्णय लिया है। इस योजना के तहत लगभग एक करोड़ आबादी को तटीय क्षेत्र से विस्थापित कर सुरक्षित स्थान पर बसाने का कार्य किया जा रहा है। इसी तरह विश्व के कई देश ग्लोबल वार्मिंग, जलवायु परिवर्तन, समुद्र तल में हो रहे परिवर्तन पर नजर टिकाए हुए हैं। समुद्र तल में परिवर्तन न  हो इसके लिए कई देशों ने शिखर बैठक कर पृथ्वी सम्मेलन के दस्तावेज पर, क्योटो प्रोटोकॉल पर, मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल पर अपना सहमति व्यक्त किया है ताकि एक ओर वायुमंडल को गर्म होने से बचाया जाय वहीं दूसरी ओर समुद्री तल में हो रहे परिवर्तन को भी रोक जाय।


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अध्याय 11 मानवीय गलतियों के कारण घटित आपदाएँ : नाभिकीय, जैविक और रासायनिक

 खण्ड (ब) अध्याय 11 मानवीय गलतियों के कारण घटित आपदाएँ : नाभिकीय, जैविक और रासायनिक

बिहार बोर्ड के 9वीं कक्षा का भूगोल विषय का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

सरल एवं आसान शब्दों में उत्तर देना सीखें


अध्याय 11 मानवीय गलतियों के कारण घटित आपदाएँ : नाभिकीय, जैविक और रासायनिक

अध्याय 11 मानवीय
11.3 नाभिकीय
वस्तुननिष्ठ प्रश्नोत्तर
1. इनमें से कौन परमाणु ऊर्जा केन्द्र है?
(क) कैगा
(ख) वाराणसी
(ग) दिल्ली
(घ) मेरठ
उत्तर – (क) कैगा
 
2. हीरोशिमा किस देश में है?
(क) भारत
(ख) जापान
(ग) चीन
(घ) ताईवान
उत्तर – (ख) जापान
 
3. परमाणु विस्फोट से बचने के लिए सर्वप्रथम प्रतीक चिन्ह का विकास किसने किया है?
(क) टोकियो विश्विद्यालय
(ख) कैम्ब्रिज विश्वद्यालय
(ग) कैलिफोर्निया विश्विद्यालय
(घ) इनमें से कोई नहीं ।
उत्तर – (ग) कैलिफोर्निया विश्विद्यालय (1946)
 
लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर 
 
1. परमाणु ऊर्जा क्या है?
उत्तर – परमाणु के नाभिक के संलयन तथा विखंडन की प्रक्रियाओं द्वारा काफी अधिक मात्रा में ऊर्जा निकलती है जिसे परमाणु ऊर्जा कहा जाता है। इसके अंतर्गत यूरेनियम और प्लूटोनियम जैसे खनिजों का उपयोग किया जाता है।
 
2. विश्व में सर्वप्रथम परमाणु बम किस देश पर गिराया गया था?
उत्तर – परमाणु बम का सर्वप्रथम विस्फोट 1945 ई० में संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा द्वितीय विश्व युद्ध के अंतिम चरण में जापान के दो नगरों पर परमाणु बम गिराया गया था। सर्वप्रथम 6 अगस्त, 1945 में हवाई हमले के द्वारा हिरोशिमा पर तथा पुनः 9 अगस्त, 1945 को नागासाकी पर परमाणु बम गिराये गए। इससे लाखों लोगों की मौत हुई।
 
3. भारत के किस राज्य में परमाणु परीक्षण किया गया?
उत्तर – भारत के राजस्थान के मरुस्थल(पोखरण) में परमाणु परीक्षण किया गया था।
 
दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर 
 
1. रेडियेशन से क्या क्या हानि होती है ? मनुष्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों की जानकारी दें।
उत्तर – रेडियेशन से निम्नलिखित हानि होती है- 
(i) रेडियेशन के प्रभाव से जीवों में अनुवांशिक पदार्थ (Genetic Materials) में उत्परिवर्तन की दर में वृद्धि होती है जिसके परिणामस्वरुप हड्डी का टी० वी०, कैंसर, शारीरिक विकृतियां तथा अंगों के समुचित विकास में असमानताएँ उत्पन्न हो सकती है। 
(ii) पराबैगनी किरणों के प्रभाव से त्वचा संबंधी रोग  हो सकते हैं। 
(iii) नाभिकीय विस्फोटों  होने से ओजोन की सुरक्षा परत का क्षय होता है।
(iv) रेडियोधर्मी पदार्थों के रेडियेशन से ब्लड कैंसर, बांझपन, दृष्टिदोष आदि रोग हो सकते हैं।
 
2. परमाणु ऊर्जा से क्या लाभ है।  वर्णन करें।
उत्तर – परमाणु ऊर्जा से निम्नलिखित लाभ होते हैं-
◆ बिजली के उत्पादन में,
◆ परमाणु बम्ब बनाने में,
◆ इससे गाड़ियाँ चलाई जा सकती है,
11.2 रासायनिक आपदा (Chemical Disaster)
वस्तुननिष्ठ प्रश्नोत्तर
 
1. भोपाल में रसायनिक गैस रिसाव कब हुआ था?
(क) 1984
(ख) 1990
(ग) 1930
(घ) 2004
उत्तर – (क) 1984
 
2. तूतीकोरिन में 1997 ई० में गैस रिसाव से कौन-सी बीमारी उतपन्न हुई थी?
(क) उल्टी होना
(ख) सर्दी एवं खाँसी
(ग) उल्टी होना एवं छाती में जलन
(घ) मस्तिष्क ज्वर
उत्तर – (ग) उल्टी होना एवं छाती में जलन
 
3. अम्लीय वर्षा का सर्वाधिक प्रभाव कहाँ पड़ा
(क) पटना महानगर
(ख) दामोदर घाटी क्षेत्र
(ग) उत्तरी बिहार
(घ) असम घाटी क्षेत्र
उत्तर – (ख) दामोदर घाटी क्षेत्र
 
लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर 
 
1. किस देश द्वारा गैस के प्रयोग से यहूदियों को मारा गया था।
उत्तर – जर्मनी द्वारा गैस के प्रयोग से यहूदियों को मारा गया था।
 
2. कीटनाशक में किस रासायनिक पदार्थ का प्रयोग होता है?
उत्तर – कीटनाशक में मिथाइल आइसोसाइनेट तथा हाइड्रोजन साइनाइड रसायन का प्रयोग किया जाता है। 
 
दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर
 
1. गैस रिसाव होने पर किस प्रकार की सावधानी रखनी चाहिए?
उत्तर – गैस रिसाव की स्थिति में वहाँ मौजूद सभी लोगों को स्पष्ट दिशा-निर्देश देने की जरूरत है ताकि वे सभी लोग वायु की उल्टी दिशा में जायें। गैस रिसाव पर लोगों को यथाशीघ्र मास्क लगा लेना चाहिए। सभी कर्मचारियों की एक निश्चित अंतरात पर चिकित्सों द्वारा जाँच होनी चाहिए। कारखानों में सायरन की व्यवस्था होनी चाहिए ताकि तत्काल सभी को सूचित किया जा सके।
 
2. रासायनिक आपदा के अंतर्गत आने वाली समस्याओं का वर्णन करें।
उतर – रासायनिक आपदा के अंतर्गत निम्नलिखित तीन समस्याएँ आती है-
 
(i) विषेले रासायनिक उत्पाद से उत्पन्न छिपी हुई आपदाएँ
 
(ii) रासायनिक युद्ध सामग्री के उपयोग से उत्पन्न आपदाएँ 
 
(iii) रासायनिक औद्योगिक इकाइयों में रिसाव और कचरे से उत्पन्न आपदाएँ
 
(i) विषैले रासायनिक उत्पाद से उत्पन्न छिपी हुई आपदाएँ – इसआपदा का सर्वाधिक प्रभाव कृषि उत्पाद पर देखने को मिलता है। रासायनिक खाद और कीटनाशक के प्रयोग से न सिर्फ मृदा के सूक्षम जीवों का विनाश होता है बल्कि उत्पाद भी विषैली हो जाता है। इसके अलावा कई प्रकार की बीमारियाँ उत्पन्न हो जाती है जो जानलेवा साबित होती हैं। इससे हमेशा अम्लीय वर्षा का डर बना रहता है विशेषकर महानगरों में।
 
(ii) रासायनिक युद्ध सामग्री के उपयोग से उत्पन्न आपदाएँ – रासायनिक आयुध के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के जहरीले गैसों के प्रयोग के साथ-साथ विस्फोटक पदार्थों में भी ऐसे गैस सन्निहित होते हैं जिनके प्रभाव से त्वचा में जलन और गलने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है यहाँ तक कि मृत्यु भी हो जाती है।
 
(ii) रासायनिक औद्योगिक इकाइयों में रिसाव और कचरे से उत्पन्न आपदा – गैस रिसाव बड़ी आपदा का रूप ले सकता है। भोपाल गैस रिसाव (1984) इसका प्रमाण है। पुनः 1999 में तमिलनाडु के तूतीकोरिन गैस रिसाव के उदाहरण है। 
 
11.3  जैविक आपदा (Biological Disaster)
 
वस्तुननिष्ठ प्रश्नोत्तर
 
1. डेंगू बीमारी का क्या कारण है?
(क) आग लगने से
(ख) एक बर्तन में अधिक समय तक पानी रहने से
(ग) बाढ़ आने से
(घ) गंदे भोजन से
उत्तर – (ख) एक वर्तन में अधिक समय तक पानी रखने से
 
2. एंथ्रेक्स क्या है?
(क) अति सूक्ष्म जीव
(ख) युद्धपोत
(ग) जंगली जानवर
(घ) युद्ध का एक अस्त्र
उत्तर – (क) अति सूक्ष्म जीव
 
3. भारत में एड्स से लगभग कितने लोग प्रभावित है?
(क) 25 लाख
(ख) 30 लाख
(ग) एक करोड़
(घ) 50 लाख
उत्तर – (क) 25 लाख
लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर:
 
1. प्लेग और हैजे का क्या कारण है?

उत्तर – प्लेग – पास्चुरेला पेस्टिस नामक जीवाणु से होता है। 

हैजे – विब्रियो कॉमा नामक जीवाणु से होता है।
2.एड्स की बीमारी के कारणों को बतायें।
उत्तर – एड्स वायरस जनित बीमारी है। इसका फैलाव वंशानुगत या दूषित रक्त चढ़ाने से होता है। बड़ों में यह असुरक्षित यौन संबंध के कारण होता है।
 
3. हेपाटाइटिस बीमारी के कारणों को बतायें।
उत्तर – यह हेपेटाईटिस बी (HBV) नामक वायरस के कारण होता है। इससे लीवर व यकृत को क्षति होती है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर:
 
1. जैविक आपदा कितने प्रकार के हैं ? उनका संक्षिप्त विवरण दें।
उत्तर – जैविक आपदा को चार वर्गों में विभाजित किया गया है-
(i) कम विनाशकारी बीमारियाँ
(ii) घातक बीमारियाँ
(iii) भरे क्षेत्र को प्रभावित करने वाले अति घातक बीमारियाँ
(iv) दीर्घकाल तक प्रभावित करने वाली बीमारियाँ
 
(i) कम विनाशकारी बीमारियाँ- प्रथम वर्ग में उन बीमारियों को रखा गया है जिसका कारण सूक्ष्म जीवाणु और वायरस होता है। ये वो जीवाणु और वायरस होते हैं जो चिकन पॉक्स, केनिन, हेपेटाइटिस जैसी बीमारियाँ उत्पन्न करते हैं। ये वो बीमारी है जो अति विनाशकारी नहीं होते हैं। इसे तात्कालिक बचाव के लिए कुछ सामान्य नियमों का पालन करना आवश्यक है। जैसे- ग्लब्स, मास्क जैसे सामानों का सतत प्रयोग करना चाहिए। दूषित पदार्थों के उपयोग से भी जैविक आपदा उत्पन्न होती है।
 
(ii) घातक बीमारियाँ- इस जैविक आपदा के अंतर्गत ऐसी बीमारियों को रखा गया है जिनकी उत्पत्ति का कारण सूक्ष्म जीवाणु और वायरस है। इस वर्ग से उत्पन्न बीमारियों में हेपेटाइटिस ए, बी और सी, इनफ्लुएंजा, लाइम डिजीज मिजिल्स, चिकेन-पॉक्स और एड्स जैसी बीमारियाँ संभव है। ऐसी बीमारियों से बचने के लिए समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण आवश्यक है।
 
(iii) भरे क्षेत्र को प्रभावित करने वाले अति घातक बीमारियाँ- जैविक आपदा के तीसरे भाग में ऐसे सूक्ष्म जीवाणु और वायरस को रखा गया है जो मानव समूह के लिए विनाशकारी आपदा ला सकता है। इसके अंतर्गत एंथ्रेक्स, पश्चिमी नील वायरस, वेनेजुएलियन एन्सेफेलाइटिस, स्मॉल पॉक्स, ट्यूबरक्लोसिस वायरस, रिफ्ट वैली बुखार, येलो बुखार तथा मलेरिया, हैजा, डायरिया प्रमुख है।
 
(iv) दीर्घकाल तक प्रभावित करने वाली बीमारियाँ- चौथे स्तर के जैविक आपदा के अंतर्गत अति विनाशकारी वायरस को रखा गया है। इसमें आने वाले वायरस वोलीवियन तथा अर्जेंटियन बुखार तथा वर्ल्ड फ्लू, एड्स, डेंगू बुखार, मारवर्ग बुखार, एबोला बुखार इत्यादि प्रमुख है।
 
2. जैविक अस्त्र क्या है ? इससे उत्पन्न समस्याओं का वर्णन करें।
उत्तर – युद्ध के मारक अस्त्रों में अब नई तकनीक के अस्त्र बनाए गए हैं जिन्हें जैविक अस्त्र कहते हैं। इसे भारी विनाश का अस्त्र भी कहा गया है। जैविक अस्त्रों की तकनीक का विकास जापानियों द्वारा किया गया। किंतु जैविक अस्त्रों का वास्तविक प्रयोग 2001 में संयुक्त राज्य अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर आतंकी हमले के बाद प्रारंभ हुआ। एंथ्रेक्स नाम के जवानों को अमेरिका के महत्वपूर्ण सामरिक क्षेत्रों में डाक सेवा के द्वारा अथवा अज्ञात व्यक्तियों द्वारा पहुँचाया जाने लगा।                       
 
3. जैविक आपदा से बचाव के उपाय बतायें।
उत्तर – जैविक आपदा से बचाव के लिए आपदा जोखिम प्रबंधन की आवश्यकता होती है। इसके अंतर्गत निम्नलिखित बातें हैं-
(i) गर्म पानी पीना एवं ताजा भोजन ग्रहण करना चाहिए।
(ii) आवश्यक कीटनाशक दवाओं का छिड़काव तथा प्रशासनिक प्रतिबद्धता आवश्यक है। 
(iii) अनजान व्यक्ति द्वारा दिये गये किसी भी प्रकार के डिब्बे या सामान को हाथ लगाने या छूने की जरूरत नहीं क्योंकि इसमें एंथ्रेक्स की संभावना हो सकती है। 
(iv) किसी अनजान वस्तु को छूने के लिए ग्लब्स का प्रयोग किया जाना चाहिए।
(v) कुत्ते के दलों की मदद से जैविक अस्त्रों की जगह की पहचान की जानी चाहिए है।

(vi) जैविक अस्त्रों के विरुद्ध अत्यन्त कठोर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंध लगाना चाहिए।


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अध्याय 12 सामान्य आपदायें : निवारण एवं नियंत्रण

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अध्याय 12 सामान्य आपदायें : निवारण एवं नियंत्रण

अध्याय 12 सामान्य

वस्तुननिष्ठ प्रश्नोत्तर 

1. सामान्य आपदाओं को कितने वर्गो में रखा गया है?
(क) 1
(ख) 2
(ग) 3
(घ) 4
उत्तर – (ख) 2
 
2. तीव्र ज्वार का कारण है?
(क) जीवाणु
(ख) विषाणु
(ग) फंगस
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर – (क) जीवाणु
 
3. नगरों में सड़क कहाँ से पार करनी चाहिए?
(क) जहाँ जेब्रा का चिन्ह नहीं बना हो
(ख) जहाँ जेब्रा का चिन्ह बना हो
(ग) अपनी स्वेच्छा के अनुसार
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर – (ख) जहाँ जेब्रा चिन्ह बना हो
 
4.पैदल चलते समय सड़क पर चलना आदर्श है?
(क) दायीं तरफ
(ख) बीच से
(ग) बायीं तरफ
(घ) स्वेच्छा से
उत्तर – (ग) बायीं तरफ 
 
5. रेल यात्रा करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
(क) रेल फाटकों को पार करते समय दायीं बायीं नहीं देखना चाहिए।
(ख) रेल यात्रा के दौरान ज्वलनशील पदार्थ नहीं ले जाना चाहिए।
(ग) बच्चों को रेलवे लाइन पर करने के नियमों की जानकारी नहीं होनी चाहिए।
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर – (क) रेल यात्रा के दौरान ज्वलनशील पदार्थ नहीं ले जाना चाहिए।
 
लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर 
 
1. हवाई यात्रा करते समय सुरक्षा के कौन से नियम ध्यान में रखना चाहिए?
उत्तर – हवाई यात्रा करते समय सुरक्षा के निम्नलिखित नियम ध्यान में रखना चाहिए-
◆ यात्री सुरक्षा संबंधी नियमों को ध्यानपूर्वक पढ़ें और उसका पालन करें।
◆ जब आप सीट पर बैठें तो सीट बेल्ट बांधे रखें और संकेतों का पालन करें।
◆ आपातकालीन द्वार के बारे में पहले से जानकारी प्राप्त कर लें।
◆ यात्रियों की शिनाख्त कड़ाई के साथ किया जाना चाहिए।
◆ विमान में चढ़ने के पूर्व यात्रियों के सामानों का अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक यंत्रों की मदद से जांच की जानी चाहिए।
 
2. रेलवे फाटक पार करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
उत्तर – रेलवे फाटक पार करते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए –
◆ रेलवे लाइन पार करते समय सिग्नल तथा दोनों तरफ रेल पथ  को देख लेना चाहिए।
◆ रेल फाटक पर बतियाँ लगी होती है, जो गाड़ी आने की सूचना देती है। लाल बत्ती दिखाई दे तो यह समझना चाहिए कि फाटक बंद है और गाड़ी आने वाली है। सफेद या हरी बत्ती फाटक के खुला रहने का संकेत है। इसी समय रेल लाइन पार करना चाहिए। बंद फाटक पार करने पर 3 साल की जेल की सजा हो सकती है।
 
3. सड़क यात्रा के दौरान किन महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए?
उत्तर – सड़क यात्रा के दौरान निम्नलिखित महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए-
◆ सड़क पर चलते समय हमेशा बाईं ओर से चले।
◆ गाड़ी चलाते समय सड़क पर बने गति अवरोधक पर गाड़ी धीरे चलानी चाहिए।
◆ सड़क के किनारे लगे पुल मोड़ इत्यादि के संकेतों का पालन करना चाहिए।
◆ सड़क पार करते समय दाहिने-बाएँ देखकर तथा जेब्रा क्रॉसिंग के सहारे सड़क पार करें। क्रॉसिंग पर हरी बत्ती की प्रतीक्षा करें। जेब्रा पार करने के लिए भी एक प्रकार की बत्ती लगी होती है।
◆ गाड़ी में बैठने के बाद शरीर का कोई अंग गाड़ी की खिड़की के बाहर नहीं रहना चाहिए।
◆ विद्यालय की बसों के ड्राइवर का प्रशिक्षित होना अनिवार्य है। गाड़ी खड़ी होने पर ही उतरना या चढ़ना चाहिए।
 
4. आग से उत्पन्न आपदा क्या है?
उत्तर – आग से उत्पन्न आपदा मानव जनित आपदाओं में प्रमुख है। यह खाना बनाने, कपड़ा प्रेस करने या अन्य कारण से लग सकती है। मानवीय भूल से आग लगने पर जान-माल की भारी क्षति होती है। ऐसा भी देखने में आता है कि चक्रवात, भूकंप और बाढ़ जैसी आपदाओं में प्रतिवर्ष जितने लोग मरते हैं उससे कहीं ज्यादा लोगों की मृत्यु आग से उत्पन्न आपदा से होती है।
 
5. सांप्रदायिक दंगों से बचाव के किन्हीं तीन उपायों का वर्णन करें।
उत्तर – सांप्रदायिक दंगों से बचाव के तीन उपायों निम्नलिखित है-
(i) सांप्रदायिक दंगों से बचाव के लिए आवश्यक है कि हम ना तो अफवाह फैलाएँ और ना ही उसमें विश्वास करें।
(ii) अपवाह की सूचना निकटतम पुलिस स्टेशन में दे।
(iii) सांप्रदायिक दंगों में लगे हुए लोगों को पनाह नहीं दें।
 
6. आतंकवादी आपदा से बचाव के किन्हीं तीन उपायों का वर्णन करें।
उत्तर – आतंकवादी आपदा से बचाव के तीन उपायों निम्नलिखित है-
(i) यदि अचानक कोई गठरी, सूटकेस, संदूक या थैला रखा हुआ मिल जाए तो उसे छूना नहीं चाहिए बल्कि पुलिस को तत्काल सूचित करना चाहिए।
(ii) विद्यालय में बच्चों को आतंकवाद से उत्पन्न समस्याओं की जानकारी देनी चाहिए।
(iii) यदि आपको किसी व्यक्ति की गतिविधियों पर शक हो तो उसकी सूचना तुरंत पुलिस को दें। यदि आप पुलिस तक नहीं जा सकते तो अपने शिक्षक या अभिभावक को दें।
 
दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर 
 
1. आग से उत्पन्न आपदा के अंतर्गत आग लगने के कारणों तथा रोकथाम के उपायों का विस्तृत वर्णन करें।
उत्तर- आग लगने के कारण
◆ ज्वलनशील पदार्थों का भंडारण सुरक्षित स्थानों पर ना होना।
◆ बीड़ी और सिगरेट पीने के बाद यत्र-तत्र फेंक देना।
◆ भोजन बनाते समय स्टोव, गैस चूल्हा या लकड़ी के चूल्हे से भी असावधानीवश आग लग सकती है। आजकल गैस सिलेंडर से लगने वाली आग प्रायः आम घटना हो गई।
◆ बिजली वायरिंग के गड़बड़ी से शॉर्ट सर्किट द्वारा आग लगने की संभावना बनी रहती है।
◆ कूड़ा-करकट और बेकार वस्तुओं में आग लगाने से आस-पास के मकान में क्षति की संभावना होती है।
 
 आग की रोकथाम के उपाय
◆ घर के भीतर अत्यधिक ज्वलनशील पदार्थ न रखें।
◆ प्रत्येक घर में अग्निशमन यंत्र रखें और इसे इस्तेमाल करने के लिए घर के प्रत्येक व्यक्ति को प्रशिक्षित करें।
◆ घर से बाहर जाते समय बिजली के सभी उपकरणों को बंद करें।
◆ खाना बनाने के पश्चात गैस के नॉब को बंद करना ना भूलें।
◆ आग लगने की स्थिति में घर से बाहर निकलने का रास्ता सदैव याद रखें।
◆ एक ही सॉकेट में बहुत सारे उपकरण ना लगाएं।
◆ आलमारी लगाकर प्रवेश मार्ग को बंद नहीं करें।
◆ जिस घर में धुआँ हो वहाँ हाथ पैर या पेट के बल रेंग कर चलने का प्रयास करें।
◆ आग लगने पर दमकल विभाग को बुलाएं, दमकल विभाग को अपने घर का पता स्पष्ट रूप से बताएं।
◆ बिजली के कारण आग लगने पर पानी का प्रयोग नहीं करें क्योंकि पानी डालने पर करंट लग सकता है।
◆ बच्चों के हाथ में माचिस कभी ना दें तथा घर के भीतर बीड़ी-सिगरेट किसी को पीने ना दे।
2. आतंकवाद क्या है? आतंकवादी आपदा से बचाव के उपायों का विस्तृत वर्णन करें।
उत्तर – आतंकवाद मानव जनित आपदा है जो हिंसात्मक मार्ग से राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति चाहता है। यह राजनीति से प्रेरित हिंसा होती है। इसका एकमात्र उद्देश्य वर्तमान शासन व्यवस्था को उखाड़ फेंकना है। विश्व के अधिकतर बड़े आतंकवादी संगठन एक ही राजनीतिक सीमा के अंतर्गत कार्य नहीं करते हैं बल्कि एक से अधिक क्षेत्रों में कार्य करते हैं। अलकायदा विश्वव्यापी आतंकवादी संगठन का रूप ले चुका है। संयुक्त राज्य अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर एक 11 सितंबर 2001 को हवाई वाहन की मदद से किया गया आतंकवादी हमला उनकी क्रूरता और कठोरता का चरम स्वरूप है। इसमें सैकड़ों लोग अपने जीवन गवा बैठे थे।
                 
          आतंकवादियों द्वारा बम का विस्फोट तथा गोली चलाने की घटना अधिकांशत सड़कों, मुख्य बाजार, सार्वजनिक तथा सामुदायिक स्थल, रेलवे स्टेशन तथा बस स्टैंड पर किया जाता है। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी और पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की हत्या आतंकवादियों द्वारा ही की गई। हाल ही में 15 अगस्त 2021 को तालिबानी आतंकवादी संगठनों ने अफगानिस्तान के शासन को उखाड़ कर अपना शासन तंत्र स्थापित कर लिया। तालिबानी आतंकवादी संगठनों के डर से हजारों-लाखों अफगानी नागरिक देश छोड़कर भाग गए और हजारों लोगों को मौत के घाट भी उतार दिए गए।
 
आतंकवादी आपदा से बचाव के निम्नलिखित उपाय है-
◆ यदि अचानक कोई गठरी, सूटकेस, संदूक या थैला रखा हुआ मिल जाए तो उसे छूना नहीं चाहिए बल्कि पुलिस को तत्काल सूचित करना चाहिए।
◆ विद्यालय में बच्चों को आतंकवाद से उत्पन्न समस्याओं की जानकारी देनी चाहिए।
◆ यदि आपको किसी व्यक्ति की गतिविधियों पर शक हो तो उसकी सूचना तुरंत पुलिस को दें। यदि आप पुलिस तक नहीं जा सकते तो अपने शिक्षक या अभिभावक को दें।
◆ अपने मकान में किराएदार रखने के वक्त उसका सही शिनाख्त करें और फोटोग्राफ सहित उसकी जानकारी पुलिस को दें।
◆ प्रत्येक गाँव और शहर मोहल्ले में आतंकवाद के विरुद्ध सामाजिक वातावरण बनाने के लिए समिति का गठन किया जाना चाहिए।
 
3. विद्यालय स्तरीय आपदा प्रबंधन की जानकारी का वर्णन करें।
उत्तर – शिक्षकों द्वारा विद्यालय स्तरीय आपदा प्रबंधन की निम्नलिखित जानकारी दी जानी चाहिए –
◆ सड़क मार्ग पर सदैव सदैव बायें चले।
◆ यदि सड़क पार करना हो तो हरी बत्ती जलने पर जब्रा क्रॉसिंग के पास ही सड़क पार करें।
◆गाड़ी चलाते समय सड़क पर बने गति अवरोधक पर गाड़ी धीरे चलानी चाहिए।
◆ सड़क के किनारे लगे पुल मोड़ इत्यादि के संकेतों का पालन करना चाहिए।
◆ सड़क पार करते समय दाहिने-बाएँ देखकर तथा जेब्रा क्रॉसिंग के सहारे सड़क पार करें। क्रॉसिंग पर हरी बत्ती की प्रतीक्षा करें। जेब्रा पार करने के लिए भी एक प्रकार की बत्ती लगी होती है।
◆ गाड़ी में बैठने के बाद शरीर का कोई अंग गाड़ी की खिड़की के बाहर नहीं रहना चाहिए।
◆ विद्यालय की बसों के ड्राइवर का प्रशिक्षित होना अनिवार्य है। गाड़ी खड़ी होने पर ही उतरना या चढ़ना चाहिए।
◆ विद्यालय में प्राथमिक उपचार की सुविधा होनी चाहिए। जैसे- खेलकूद के समय कट-फट जाने पर उसे दवा लगाकर डॉक्टर के पास भेजा जाए।
◆ विद्यालय में बच्चों को यह बताना चाहिए कि जलने की स्थिति में तुरंत उस पर ठंडा जल डाला जाए। यदि उपलब्ध हो तो वर्क के टुकड़े को भी जले हुए अंग पर रखना चाहिए।
◆ बच्चों की यह जानकारी भी देनी चाहिए कि जलने की स्थिति में कंबल से भी ढक देना चाहिए।
4. लघु स्त्तरीय आपदाओं के कारणों एवं उनसे बचाव के तरीकों का विस्तृत वर्णन करें।
उत्तर – लघु स्तरीय आपदाएँ मुखयतः खान-पान और जीवनशैली को स्वस्थ रुप से संचालित न करने पर उत्पन्न होते हैं। यह व्यक्तिगत, परिवारिक और कभी-कभी सामूहिक स्तर पर भी उत्पन्न होता है। 
 
लघु स्तरीय आपदाओं के कारण-
◆ गरीब परिवारों में भोजन की समस्या रहती है। कभी-कभी ऐसे पदार्थ खाने के लिए विवश होते हैं जो या तो अपाच्य होता है या अखाद्य। इससे पेट की बीमारियाँ हो जाती है।
◆ गंदी बस्तियों में जल के दूषित होने या हवा की गंदगी से है जहाँ प्लेग, मलेरिया तथा कालाजार होता रहता है। यह परिवार से फैलकर सामूहिक रूप ले लेता है।
 लघु स्तरीय आपदाओं से बचने के तरीकें-
◆ पेट की गड़बड़ी में नमक और चीनी का घोल अथवा इलेक्ट्रोल पाउडर का घोल एक 1 घंटे के अंतराल पर देते रहना चाहिए।
◆ यदि समस्या गंभीर हो तो फोन या अन्य साधन से निकटवर्ती स्वास्थ्य केंद्र को सूचित करना चाहिए। हो सके तो संबंधित व्यक्ति को स्वास्थ्य केंद्र पहुंच जाना चाहिए।
◆ स्वयंसेवी संस्थाएँ या ग्राम पंचायतें नुक्कड़ नाटकों या परिचर्चाओं द्वारा लोगों को इस संबंध में सावधानी रखने के लिए जागरूक कर सकती है। 
◆ हैजा, प्लेग इत्यादि शीघ्र ही महामारी का रूप ले लेते हैं। अतः स्वास्थ्य केंद्रों को सूचित करने के साथ ही इन बीमारियों के कारण अर्थात गंदगी की सफाई भी आवश्यक है।

◆ कुछ ऐसी सामान्य बीमारियों के लक्षण जानना आवश्यक है जिससे उनकी पहचान शीघ्र हो सके। जैसे मलेरिया या कालाजार गंदे जल या हवा से फैलते हैं। दोनों में तेज बुखार के साथ कँपकँपी होती है। इनसे मस्तिक पर भी प्रभाव पड़ता है। इनके इलाज की सुविधा बड़े अस्पतालों में ही होती है। परिवार को घबराने से रोकने के लिए उसे साहस देना भी आवश्यक है।


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खण्ड (ब)अध्याय 10 आपदा प्रबंधन : एक परिचय

 खण्ड (ब) अध्याय 10 आपदा प्रबंधन : एक परिचय

बिहार बोर्ड के 9वीं कक्षा का भूगोल विषय का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

सरल एवं आसान शब्दों में उत्तर देना सीखें



 

अध्याय 10 आपदा
वस्तुननिष्ठ प्रश्नोत्तर
 
1. आपदा प्रबंधन के प्रमुख घटक है- 
(i) आपदा के पूर्व वैयक्तिक स्तर पर तैयारी करना।
(ii) आपदा के पूर्व सामुदायिक स्तर पर तैयारी करना।
(iii) रोकथाम के लिए दूसरों पर निर्भर रहना।
(iv) आपदा के संबंध में जानकारी नहीं रखना।
उत्तर- (ii) आपदा के पूर्व सामुदायिक स्तर पर तैयारी करना।
 
2. मानव जनित आपदा के प्रभाव को कम करने के कौन-से उपाय हैं?
(i) भूमि उपयोग की जानकारी नहीं रखना।
(ii) आपदारोधी भवन का निर्माण करना।
(iii) सामुदायिक जागरूकता पर ध्यान देना।
(iv)  जोखिम क्षेत्रों में बसाव को बढ़ाना।
उत्तर- (iii) सामुदायिक जागरूकता पर ध्यान देना।
 
लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
 
1. आपदा प्रबंधन क्या है?
उत्तर – आपदा मानव जनित अथवा प्राकृतिक घटना है जिसका प्रभाव मानव जीवन के लिए त्रासदी लाता है। आपदा मानव जनित हो अथवा प्राकृतिक उनका प्रबंधन आवश्यक है। आपदा को पूर्णत: समाप्त कर देना लगभग असंभव है, लेकिन इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है। इसके प्रभाव को कम करने से त्रासदी का प्रभाव कम होता है और मरने वालों की संख्या कम होती है।
 
2. आपदा को कम करने के लिए कौन-कौन से उपाय किए जाने चाहिए?
उत्तर – आपदा को कम करने के लिए निम्नलिखित उपाय किये जाने चाहिए –
(i) जोखिम क्षेत्रों में मानव  बसाव को रोकना।
(ii) भूमि उपयोग की योजना तैयार करना। 
(iii) आपदा-रोधी भवनों का निर्माण करना।
(iv) आपदा आने से पहले जोखिम को कम करने के लिए लोगों को जागरूक करना।
 
3. तुम आपदा प्रभावित क्षेत्र में लोगों की किस प्रकार मदद करोगे?
उत्तर – हम आपदा प्रभावित क्षेत्र में लोगों को आनेवाले विभिन्न प्रकार के आपदा के विषय में समझा सकते है, आपदा से घबराने से मना करेंगें। सभी लोगों को मिलजुल कर उससे बचाव का प्रयास करना चाहेंगें। हम अपने मित्रों एवं शिक्षकों की सहायता से इस काम में लग जायेंगें। अगर भवन की आवश्यकता हो तो विद्यालय भवन को राहत कार्य हेतु अपने शिक्षकों से अनुमति लेकर वहाँ लोगों को रहने की  व्यवस्था करेंगें  और  गाँव से सहयोग लेकर भोजन एवं चिकित्सा की भी व्यवस्था करेंगें।
 
4. विद्यालय द्वारा किस प्रकार आपदा प्रभावित लोगों को मदद पहुँचाया जा सकता है?
उत्तर –  आपदा के समय अगर भवन की आवश्यकता हो तो विद्यालय भवन को राहत कार्य हेतु उपयोग में लाया जा सकता है ताकि लोगों को रहने की  व्यवस्था हो सके और आपदा में फसें लोगों को बचाव व राहत सामाग्रियों  के वितरण  लिए छात्र दलों का भी सहयोग लिया जा सकता है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर
 
1. आपदा प्रबंधन में ग्राम पंचायत की भूमिका का वर्णन करें।
उत्तर – आपदा प्रबंधन में ग्राम पंचायत की भूमिका निम्नलिखित है-  
(i) पूर्वानुमान के आधार ग्राम पंचायत से प्राप्त सूचनाओं को तत्काल लोगों तक पहुँचना।  
(ii) राहत शिविर का चयन और प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने का कार्य करना 
(iii) जिलास्तार पर सूचना भेजना।
(iv) अगर आगजनी है तो दमकल आदि की मांग प्रशानिक/थाना स्तर से करबाना।
(v) राहत कार्य प्रभावित लोगों को शिविरों में रखना एवं उनके भोजन की व्यवस्था करना। 
(vi) पेयजल तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति करना। 
(vii) प्राथमिक उपचार की व्यवस्था करना।
(viii) सभी को सुरक्षा प्रदान करना खासकर छोटे बच्चों बूढों पर विशेष ध्यान।  
(ix) स्वच्छता का ख्याल रखना ताकि  कोई महामारी पंचायत में न फैल जाए।
 
2. आपदा प्रबंधन में राष्ट्रीय स्तर पर किए जा रहे कार्यों की समीक्षा करें।
उत्तर- भारत के प्रायः सभी क्षेत्रों में लगभग सालों भर प्राकृतिक अथवा मानवजनित आपदाओं का सैलाब देखने को मिलता है। हलाकि राष्ट्रीय स्तर पर आपदा प्रबंधन की कई योजनाएँ बनाई गई है। आपदा प्रबंधन में राष्ट्रीय स्तर पर किए जा रहे कार्यों की समीक्षा निम्नलिखित है-
◆ आपदा प्रबंधन के लिए प्रति वर्ष बजट में आकस्मिक निधि का प्रबंधन किया गया है। जिससे संकट के समय धनराशि की समस्या नहीं होती है।
◆ आपदा प्रबंधन हेतु प्रधानमंत्री राहत कोष का भी गठन किया गया है।
◆ आपदाओं की बारंबारता के क्षेत्र का मानचित्रीकरण किया जा रहा है। जिससे उसके क्षेत्र के बारे में जानकारी प्राप्त किया जा सके।
◆ आपदा प्रबंधन में लगे हुए लोगों के लिए प्रशिक्षण का कार्य भी आवश्यक है। अतः उसके लिए अनेक प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। विश्वविद्यालय में आपदा प्रबंधन की पढ़ाई भी प्रारंभ की गई है।

◆ आपदा प्रबंधन में स्वयंसेवी संस्थाओं का योगदान भी महत्वपूर्ण है। यह परामर्श दात्री के रूप में महत्वपूर्ण कार्य करता है।


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खण्ड (अ) अध्याय 9 क्षेत्रीय अध्ययन

 खण्ड (अ) अध्याय 9 क्षेत्रीय अध्ययन

बिहार बोर्ड के 9वीं कक्षा का भूगोल विषय का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

सरल एवं आसान शब्दों में उत्तर देना सीखें



अध्याय 9 क्षेत्रीय
I. वस्तुननिष्ठ प्रश्नोत्तर-
1. क्षेत्र में जाकर इकट्ठे किये गए आँकड़ों को क्या कहा जाता है?
(क) द्वितीयक आँकड़ा
(ख) प्राथमिक आँकड़ा
(ग) तृतीयक आँकड़ा
(घ) चतुर्थक आँकड़ा
उत्तर – (क) प्राथमिक आँकड़ा 
2. भूगोल में क्षेत्रीय अध्ययन है-
(क) एक उपागम
(ख) एक विधितन्त्र
(ग) एक सिद्धांत
(घ) एक मॉडल
उत्तर -(क) एक उपागम
II. लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर-
1. भौगोलिक अध्ययन में क्षेत्रीय अध्ययन के महत्व को स्पष्ट करें।
उत्तर- क्षेत्रीय अध्ययन भूगोल का एक महत्वपूर्ण अंग है। यह मूलतः एक अध्ययन उपागम है जिसके द्वारा क्षेत्र विशेष के मानव और इसके परिवेश के बारे में जानकारी प्राप्त की जाती है। यह जानकारी मानव वातावरण संबंध को समझने में संजीवनी का काम करता है। अलग-अलग क्षेत्रों की सामाजिक, सांस्कृतिक तथा आर्थिक परिस्थितियों में अंतर पाया जाता है। किसी विशेष क्षेत्र में निवास करने वाले लोगों के जीवन पर स्थलाकृति, जलवायु, अपवाह, कृषि उत्पादकता, औद्योगिक विकास, नगरीकरण इत्यादि का स्पष्टत: प्रभाव पड़ता है। लोगों के रहन-सहन का तरीका इन सभी तत्वों से जुड़ा है। मानवीय गतिविधियाँ भी अपने परिवेश पर प्रभाव डालती है। इन बातों को समझने के लिए क्षेत्रीय अध्ययन अति आवश्यक है।
2. भूमि का कृषि के लिए उपयोग किस क्षेत्र में अधिक होता है?
उत्तर – समतल, उपजाऊ तथा सिंचित भूमि का उपयोग कृषि क्षेत्र में अधिक होता है।
3. वायु प्रदूषण से किस प्रकार की हानि होती है?
उत्तर – वायु प्रदूषण एक गंभीर समस्या है। वायु प्रदूषण से सबसे ज्यादा प्रभाव श्वास पर पड़ता है। साँस लेने के लिए ऑक्सीजन का प्रयोग करते हैं परन्तु वायु प्रदूषित होने की वजह से ऑक्सीजन की मात्रा घटती जा रही है और कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ रही है। यही प्रदूषित वायु हम साँस लेते हैं जिससे श्वास  संबंधी बीमारियाँ होती है। वायु के प्रदूषित होने से उसमें सी०एफ० सी० गैसों की मात्रा की अहम भूमिका होती है, इस गैस के बढ़ने से ओजोन परत का क्षय होने लगता है जिससे पाराबैगनी किरणें  की वायुमण्डल में वृद्धि होने लगती है जिससे जीव जन्तु में चर्म कैंसर की संभावना बढ़ जाती है। SO2 की सान्द्रता बढ़ने से अम्लीय वर्षा होती है। इस प्रकार वायु प्रदूषण से पर्यावरण का संतुलन बिगड़ जाता है।
4. जल-प्रदूषण से होने वाली हानि की चर्चा करें।
उत्तर – जल-प्रदूषण से होने वाली हानि निम्नलिखित है-
(i) प्रदूषित जल से पारिस्थितिकी तंत्र असंतुलित हो जाता है। जलीय वनस्पति, मछलियाँ, अन्य जलीय जीव  तथा उस जल को पीने वाले अन्य जीव के अस्तित्व खतरे में आ जाते हैं। 
(ii) खेतों में सिंचाई के रूप में प्रदूषित जल प्रयोग करने से उत्पादन की मात्रा घट जाती है।
(iii) प्रदूषित जल में उपस्थित विषैले पदार्थ प्राकृतिक खाद्य श्रृंखला (Natural Food Chain) में प्रवेश कर जाते हैं तथा अप्रत्यक्ष रूप से अन्य जीवों तथा मनुष्यों को भी प्रभावित करते हैं। 
(iv) प्रदूषित जल, जल से फैलने वाली बीमारियों को फैलाते है। जैसे- हैजा, तपेदिक, पीलिया, पेचिस, डायरिया आदि रोग महामारी के रूप में तेजी से फैलते हैं।
5. वर्षा जल संग्रहण किस प्रकार किया जाता है ?
उत्तर – वर्षा जल का संग्रहण विभिन्न विधियों से किया जाता है।
(i) वर्षा जल को विभिन्न प्रकार के भवनों की छतों पर संग्रह करना चाहिए। 
(ii) सीधे जमीन पर पड़ने वाले वर्षा जल को तालाबों आदि में संग्रह करना चाहिए। 
(iii) वर्षा के मौसम में जब नदियों में बाढ़ आई हुई हो तो उस जल को गड्ढों में जमा करना चाहिए।
6. एक आलेख की सहायता से वर्षा जल संग्रहण को दिखायें।
उत्तर – 

                     इस प्रकार से पक्के पकानों की छतों पर संग्रह किये गये वर्षा जल को पाइप के माध्यम से कुएँ या जलाशयों में जमा किया जाता है।

7. क्षेत्रीय अध्ययन से क्या समझते हैं।
उत्तर- किसी विशिष्ट क्षेत्र में निवास करने वाले लोगों के जीवन पर स्थलाकृति, जलवायु, अपवाह प्रणाली, कृषि उत्पादकता, औद्योगीकरण, नगरीकरण इत्यादि कारकों  स्पष्टत: प्रभाव पड़ता है। इन सभी कारकों का किसी विशिष्ट क्षेत्र का अध्ययन करना ही क्षेत्रीय अध्ययन कहलाता है।
8. क्षेत्रिय अध्ययन से क्या लाभ है?
उत्तर – क्षेत्रीय अध्ययन से निम्नलिखित लाभ है –
(i) इससे क्षेत्र विशेष के मानव और इसके परिवेश की जानकारी मिलती है। 
(ii) इससे किसी क्षेत्र के मानवीय गतिविधियों एवं क्रियाकलापों की जानकारी मिलती है।
(iii) क्षेत्र विशेष में निवास करने वाले लोगों के जीवन पर स्थलाकृति, जलवायु, अपवाह प्रणाली, कृषि उत्पादकता, औद्योगीकरण, नगरीकरण आदि की जानकारी मिलती है। 
9. क्षेत्र का चयन करते समय किन बिंदुओं पर ध्यान देना चाहिए?
उत्तर – किसी भी क्षेत्र  का चयन हेतु इस बात का ध्यान रखना आवश्यक है कि उस क्षेत्र के मुख्य मुद्दों को उसमें शामिल किया जाय। जैसे – किसी क्षेत्र के जलस्तर में गिरावट, भूमि उपयोग, प्रदूषण के विभिन्न प्रकार जैसे- वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण, मृदा प्रदुषण  आदि।
 
III. दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर –
1. नीचे दी गई सारणी का अध्ययन कर उसके नीचे दिए गए प्रश्नों का उत्तर दें –
(क) उस भू-उपयोग वर्ग का नाम लिखें जिसका क्षेत्रफल लगातार घट रहा है?
उत्तर – वन 
(ख) फसल क्षेत्र के लगातार बढ़ने का मुख्य कारण स्पष्ट करें।
उत्तर – जनसंख्या लगातार बढ़ने के कारण खाद्यान्न की समस्या उत्पन्न हो रही है और खाद्यान्न की समस्या को दूर करने के लिए फसलों का अधिक उत्पादन किया जा रहा है जिसके परिणामस्वरूप फसल क्षेत्र लगातार बढ़ रहे हैं।  
(ग) किस भू-उपयोग वर्ग के अंतर्गत सबसे कम भू-क्षेत्र का उपयोग हुआ है?
उत्तर –  तृषा भूमि
2. क्षेत्र अध्ययन के लिए प्रश्नावली के विभिन्न विधियों की चर्चा करें।
उत्तर – किसी क्षेत्र अध्ययन में सर्वेक्षण के लिए अनेक प्रकार के प्रश्न पूछे जा सकते हैं। प्रश्नों की प्रकृति, वांछित आंकड़ों की प्रकृति तथा वहाँ के लोगों की पृष्ठभूमि पर निर्भर करती है। कुछ प्रश्नों के उत्तर ‘हाँ या नहीं में होगा। बहुविकल्प वाले प्रश्नों के उत्तर में कुछ विकल्प दिए जाते हैं उनमें से केवल एक ही सही होता है। प्रश्नावली के द्वारा जानकारी इकट्ठा कर प्राप्त आँकड़ों का अध्ययन करके प्रतिवेदन तैयार किया जाता है। जैसे- बिहार के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का अध्ययन किसी गाँव या नगर की भूमि के उपयोग में क्या परिवर्तन आया है? नगर में वाहनों की संख्या में वृद्धि से प्रदूषण के स्तर में कितनी वृद्धि हुई। इस तरह की प्रश्नावली तैयार की जाती है।
3. वायु प्रदूषण के चार स्रोतों का वर्णन करें।
उत्तर –  वायु प्रदूषण के चार स्रोत निम्नलिखित है-
(i) उद्योगों से निकलने वाली गैस तथा अन्य उपशिष्ट
(ii) वाहनों द्वारा उत्सर्जित गैसीय एवं कणिकीय पदार्थ
(iii) शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में उत्सर्जित गैस तथा 
((iv) नाभिकीय परीक्षण
IV. क्षेत्रीय अध्ययन : प्रश्नावली मॉडल
1. क्षेत्र का नाम-
उत्तर – नवादा 
2. उत्तर दाता का नाम एवं पता।
उत्तर – ग्राम – छातरवार
पोस्ट – कोनंदपुर 
जिला – नवादा 
पिन कोड – 805124
(बिहार)
3. क्या कृषि क्षेत्र में वृद्धि हुई है?
उत्तर – हाँ  
4. क्या आपके गांव में नलकूप है?
उत्तर – हाँ  
5. कुएँ का जलस्तर पिछले पाँच वर्षों में बढ़ा है या घटा है?
उत्तर –  कुएँ का जलस्तर पिछले पाँच वर्षों में घटा है।
6. सिंचाई के कौन-कौन से साधन इस क्षेत्र में उपलब्ध है?
उत्तर – इस क्षेत्र में सिचाई के निम्नलिखित साधन उपलब्ध है-
 नलकूप, तालाब, नहर, पाईन, अहरा, सकरी नदी।
7. एक वर्ष में कौन-कौन सी बीमारियाँ बड़े स्तर पर उस क्षेत्र में हुई है?
उत्तर – हैजा, पीलिया, मलेरिया , डेंगू।
8. अध्ययन क्षेत्र में किस प्रकार का प्रदूषण है ?
उत्तर – जल प्रदुषण, वायु प्रदुषण, मृदा प्रदुषण। 
9. जल स्तर के घटने के क्या कारण है ?
उत्तर – नलकूपों की अधिकता तथा वर्षा में कमी।
10. क्या आप वर्षा जल का संग्रह करते हैं?
उत्तर – नहीं 
11. आप वर्ष में कौन-कौन सी फसलें उत्पन्न करते हैं?

उत्तर – धान, गेहूँ, मक्का, पान, मूंगफली, दलहन, तथा तेलहन।


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