अध्याय 7 खनिज तथा ऊर्जा संसाधन (Mineral and Energy Resources)

इकाई -3 अध्याय 7 खनिज तथा ऊर्जा संसाधन

(Mineral and Energy Resources)

बिहार बोर्ड कक्षा 12वीं के भूगोल का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर
(खण्ड 2: भारत- लोग और अर्थव्यवस्था)

अध्याय 7 खनिज तथा ऊर्जा संसाधन

खनिज तथा ऊर्जा संसाधन

(क) नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए

प्रश्न 1. निम्नलिखित में से किस राज्य में प्रमुख तेल क्षेत्र स्थित हैं?
(क) असम
(ख) बिहार
(ग) राजस्थान
(घ) तमिलनाडु
उत्तर – (क) असम

प्रश्न 2. निम्नलिखित में से किस स्थान पर पहला परमाणु ऊर्जा स्टेशन स्थापित किया गया था?
(क) कलपक्कम
(ख) नरोरा
(ग) राणाप्रताप सागर
(घ) तारापुर
उत्तर – (घ) तारापुर

प्रश्न 3. निम्नलिखित में कौन-सा खनिज ‘भूरा हीरा’ के नाम से जाना जाता है।
(क) लौह
(ख) मैंगनीज
(ग) लिगनाइट
(घ) अभ्रका
उत्तर – (ख) मैंगनीज

प्रश्न 4. निम्नलिखित में कौन-सा ऊर्जा का अनवीकरणीय स्रोत है?
(क) जल
(ख) सौर
(ग) ताप
(घ) पवन
उत्तर – (ग) ताप

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर लगभग 30 शब्दों में दें

प्रश्न 1. भारत में अभ्रक के वितरण का विवरण दें।

उत्तर- भारत में अभ्रक मुख्यतः झारखंड, आंध्र प्रदेश व राजस्थान में पाया जाता है। इसके पश्चात् तमिलनाडु, प. बंगाल और मध्य प्रदेश आते हैं। झारखंड में उच्च गुणवत्ता वाला अभ्रक निचले हजारी बाग पठार की 150 कि.मी. लंबी व 22 कि.मी. चौड़ी पट्टी में पाया जाता है। आंध्र प्रदेश के नेल्लोर जिले में सर्वोत्तम प्रकार के अभ्रक का उत्पादन किया जाता है। राजस्थान में अभ्रक की पट्टी लगभग 320 कि.मी. लंबाई में जयपुर से भीलवाड़ा और उदयपुर के आस-पास विस्तृत है।

            कर्नाटक के मैसूर व हासन जिले, तमिलनाडु के कोयम्बटूर, तिरुचिरापल्ली, मदुरई तथा कन्याकुमारी जिले महाराष्ट्र के रत्नागिरी तथा पश्चिम बंगाल के पुरुलियाँ एवं बाँकुरा जिलों में भी अभ्रक के निक्षेप पाए जाते हैं।

प्रश्न 2. नाभिकीय ऊर्जा क्या है? भारत के प्रमुख नाभिकीय ऊर्जा केंद्रों के नाम लिखें।
उत्तर – ऐसी अभिक्रियाएँ हैं जिसमें परमाणु के नाभिक की संरचना में परिवर्तन हो जाता है। ऐसे परिवर्तनों को नाभिकीय अभिक्रियाएँ कहते हैं और इन अभिक्रियाओं में मुक्त ऊर्जा नाभिकीय ऊर्जा कहलाती है। भारत के प्रमुख नाभिकीय ऊर्जा केंद्रों के नाम इस प्रकार हैं- तारापुर (महाराष्ट्र), रावत भाटा (राजस्थान), कलपक्कम (तमिलनाडु), नरौरा (उत्तर प्रदेश), कैगा (कर्नाटक) तथा काकरापाड़ा (गुजरात)।
प्रश्न 3. अलौह धातुओं के नाम बताएँ उनके स्थानिक वितरण की विवेचना करें।
उत्तर- अलौह धातुएँ के नाम- बॉक्साइट और ताँबा हैं। उड़ीसा बॉक्साइट का सबसे बड़ा उत्पादक है। कालाहांडी तथा संभलपुर अग्रणी उत्पादक हैं। बोलनगीर तथा कोरापुट में भी बॉक्साइट पाया जाता है। झारखंड में लोहारडागा जिले की पैटलैंडस में इसके समृद्ध निक्षेप हैं। गुजरात, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश एवं महाराष्ट्र अन्य प्रमुख उत्पादक राज्य हैं। कर्नाटक, तमिलनाडु तथा गोआ बॉक्साइट के गौण उत्पादक हैं।
               ताँबा निक्षेप मुख्यतः झारखंड के सिंहभूमि में, मध्य प्रदेश के बालाघाट तथा राजस्थान के झुंझुनु एवं अलवर जिलों में पाए जाते हैं। ताँबा के गौण उत्पादक आंध्र प्रदेश गुंटूरे जिले का अग्निगुंडाला, कर्नाटक के चित्रदुर्ग तथा हासन जिले और तमिलनाडु का दक्षिण आरकाट जिला है।
प्रश्न 4. ऊर्जा के अपारंपरिक स्रोत कौन-से हैं?
उत्तर- सौर, पवन, जल, भूतापीय ऊर्जा तथा जैवभार (बायोमास) ऊर्जा के अपारंपरिक स्रोत कहलाते हैं। ये स्रोत कम लागत के बावजूद अधिक टिकाऊ, पारिस्थितिक-अनुकूल तथा सस्ती ऊर्जा उपलब्ध कराते हैं।
(ग) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दें।
प्रश्न 1. भारत के पेट्रोलियम संसाधनों पर विस्तृत टिप्पणी लिखें।
उत्तर- अपनी दुर्लभता और विविध उपयोगों के लिए पेट्रोलियम को तरल सोना कहा जाता है। कच्चा पेट्रोलियम द्रव गैसीय अवस्था के हाइड्रोकार्बन से युक्त होता है तथा इसकी रासायनिक संरचना, रंगों और विशिष्ट धनत्व में भिन्नता पाई जाती है। यह मोटर-वाहनों, रेलवे तथा वायुयानों के अंतर-दहन ईंधन के लिए ऊर्जा का एक अनिवार्य स्रोत है। 
             
       इसके अनेक सह-उत्पाद पेट्रो-रसायन उद्योगों, जैसे कि उर्वरक, कृत्रिम रबर, रेशे, दवाईयाँ, वैसलीन, स्नेहकों, मोम, साबुन तथा अन्य सौंदर्य सामग्री में प्रक्रमित किए जाते हैं।
अपरिष्कृत पेट्रोलियम टरश्यरी युग की अवसादी शैलों में पाया जाता है। व्यवस्थित ढंग से तेल अन्वेषण और उत्पादन 1956 में तेल एवं प्राकृतिक गैस आयोग की स्थापना के बाद प्रारंभ हुआ। तब तक असम में डिगबोई एक मात्र तेल उत्पादक क्षेत्र था। हाल ही के वर्षों में देश के दूरतम पश्चिमी एवं पूर्वी तटों पर नए तेल निक्षेप पाए गए हैं। 
       
         असम में डिगबोई, नहारकटिया तथा मोरान महत्त्वपूर्ण तेल उत्पादन क्षेत्र हैं। गुजरात में प्रमुख तेल क्षेत्र अंकलेश्वर कालोल, मेहसाणा, नवागाम, कोसांबा तथा लुनेज हैं मुंबई हाई, जो मुंबई नगर से 160 कि.मी. दूर अपतटीय क्षेत्र में पड़ता है, को 1973 में खोजा गया था और वहाँ 1976 में उत्पादन प्रारंभ हो गया। तेल एवं प्राकृतिक गैस को पूर्वी तट पर कृष्णा-गोदावरी तथा कावेरी के बेसिनों में अन्वेषणात्मक कूपों में पाया गया है।
प्रश्न 2. भारत में जल विद्युत पर एक निबंध लिखें।
उत्तर- भारत में कुल विद्युत ऊर्जा का एक बहुत बड़ा भाग जल विद्युत से प्राप्त किया जाता है। भारत में कुछ प्रमुख जल विद्युत उत्पादन संयंत्रों के नाम इस प्रकार हैं-
(i) भाखड़ा नांगल जल विद्युत परियोजना, पंजाब
(ii) रिहंद जल विद्युत शक्ति गृह, उत्तर प्रदेश 
(iii) पेरियार जल विद्युत केंद्र तमिलनाडु
(iv) टिहरी जल विद्युत परियोजना, उत्तरांचल, 
(v) नर्मदा सरदार सरोवर जल विद्युत परियोजना, गुजरात, 
(vi) नाथवा झापड़ी जल विद्युत परियोजना, डलहौजी, हिमाचल प्रदेश आदि।
                 
               जल विद्युत एक सबसे सस्ता और प्रदूषण मुक्त ऊर्जा का स्रोत है। भारत में हमारी ऊर्जा की माँग के चौथाई भाग की पूर्ति जल विद्युत संयंत्रों द्वारा होती है। जल विद्युत उत्पन्न करने के लिए नदियों को रोक कर बड़े जलाशयों में जल एकत्र करने के लिए ऊँचे-ऊँचे बाँध बनाए जाते हैं। इन जलाशयों में जल संचित होता रहता है जिसके फलस्वरूप इनमें भरे जल का तल ऊँचा हो जाता हैं बाँध के ऊपरी भाग से पाइपों द्वारा जल, बाँध के आधार के पास स्थापित टरबाइन के ब्लेडों पर मुक्त रूप से गिरता है फलस्वरूप टरबाइन के ब्लेड घूर्णन गति करते हैं और जनित्र द्वारा विद्युत उत्पादन होता है। जल विद्युत ऊर्जा एक नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत हैं, लेकिन बाँधों का केवल कुछ सीमित क्षेत्रों में ही निर्माण किया जा सकता है। इनके लिए पर्वतीय क्षेत्र अच्छे माने जाते हैं।

               बाँधों के निर्माण से बहुत सी कृषि योग्य भूमि तथा मानव आवास डूबने के कारण, नष्ट हो जाते हैं, बाँध के जल में डूबने के कारण बड़े-बड़े पारिस्थितिक तंत्र नष्ट हो जाते हैं। गंगा नदी पर टिहरी बाँध के निर्माण तथा नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर बाँध के निर्माण की परियोजनाओं का विरोध इसी प्रकार की समस्याओं के कारण ही हुआ था।


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अध्याय 6 जल संसाधन (Water Resources)

इकाई -3 अध्याय 6 जल संसाधन (Water Resources)

बिहार बोर्ड कक्षा 12वीं के भूगोल का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर
(खण्ड 2: भारत- लोग और अर्थव्यवस्था)

अध्याय 6 जल संसाधन

अध्याय 6 जल संसाधन

(क) नीचे दिए गए चार विकल्प में से सही उत्तर को चुनिए

प्रश्न 1. निम्नलिखित में से जल किस प्रकार का संसाधन है?
(क) अजैव संसाधन
(ख) जैव संसाधन
(ग) अनवीकरणीय संसाधन
(घ) चक्रीय संसाधन
उत्तर – (घ) चक्रीय संसाधन

प्रश्न 2. निम्नलिखित नदियों में से देश में किस नदी में सबसे ज्यादा पुनः पूर्तियोग्य भौम जल संसाधान हैं?
(क) सिंधु
(ख) गंगा
(ग) ब्रह्मपुत्र
(घ) गोदावरी
उत्तर – (ग) ब्रह्मपुत्र

प्रश्न 3. घन कि.मी. में दी गई निम्नलिखित संख्याओं में से कौन-सी संख्या भारत में कल वार्षिक वर्षा दर्शाती है?
(क) 2,000
(ख) 4,000
(ग) 3,000
(घ) 5,000
उत्तर – (ग) 3,000

प्रश्न 4. निम्नलिखित दक्षिण भारतीय राज्यों में से किस राज्य में भौम जल उपयोग (% में) इसके कुल भैम जल संभाव्य से ज्यादा है?
(क) तमिलनाडु
(ख) आंध्र प्रदेश
(ग) कर्नाटक
(घ) केरल
उत्तर – (क) तमिलनाडु

प्रश्न 5. देश में प्रयुक्त कुल जल का सबसे अधिक समानुपात निम्नलिखित सेक्टरों में से किस सेक्टर में है?
(क) सिंचाई
(ख) घरेलू उपयोग
(ग) उद्योग
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर – (क) सिंचाई

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दें

प्रश्न 1. यह कहा जाता है कि भारत में जल संसाधनों में तेजी से कमी आ रही है। जल संसाधनों की कमी के लिए उत्तरदायी कारकों की विवेचना कीजिए।
उत्तर – जल एक चक्रीय संसाधन है जो पृथ्वी पर प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। देश में एक वर्ष में वर्षण से प्राप्त कुल जल की मात्रा लगभग 4,000 घन किमी. है। धरातलीय जल के चार मुख्य स्रोत हैं- नदियाँ, झीलें, तलैया और तालाब। लेकिन जल के अति उपयोग तथा संरक्षण में कमी (प्रदूषण) के कारण इसका संतुलन बिगड़ गया है। जल की प्रति व्यक्ति उपलब्धता जनसंख्या बढ़ने से दिन-प्रतिदिन कम होती जा रही है।

        उपलब्ध जल संसाधन औद्योगिक, कृषि और घरेलू निस्सरणों से प्रदूषित होता जा रहा है और इस कारण उपयोगी जल संसाधनों की उपलब्धता और सीमित होती जा रही है। विस्तृत क्षेत्र बाढ़ तथा सूखे से प्रभावित है। लाखों क्यूसेक जल बिना उपयोग के समुद्र में बहकर चला जाता है। अन्तर्राज्यीय तथा अन्तरदेशीय विवादों ने जल के बँटवारे की समस्या खड़ी कर दी है।

प्रश्न 2. पंजाब, हरियाणा और तमिलनाडु राज्यों में सबसे अधिक भौम जल विकास के लिए कौन-से कारक उत्तरदायी हैं?
उत्तर – पंजाब, हरियाणा और तमिलनाडु राज्यों में भौम जल का उपयोग सबसे अधिक है। यह इसलिए सम्भव हुआ हैं क्योंकि कृषि के अंतर्गत यहाँ उगाए जाने वाली फसलों में सिंचाई की अधिक आवश्यकता पड़ती हैं, जिससे ये राज्य अपने संभावित भौम जल के एक बड़े भाग का उपयोग करते हैं जिससे कि इन राज्यों में भौम जल में कमी आ गयी है।

प्रश्न 3. देश में कुल उपयोग किए गए जल में कृषि क्षेत्र का हिस्सा कम होने की संभावना क्यों है?
उत्तर – कुल जल उपयोग में कृषि सेक्टर का भाग दूसरे सेक्टरों से अधिक है। भविष्य में विकास के साथ-साथ देश में औद्योगिक और घरेलू सेक्टरों में जल का उपयोग बढ़ने की संभावना है। इस कारण देश में कुल उपयोग किए गए जल में कृषि का हिस्सा कम होने की संभावना है।

प्रश्न 4. लोगों पर संदूषित जल/गंदे पानी के उपभोग के क्या संभव प्रभाव हो सकते हैं?
उत्तर – जब संदूषित जल संसाधनों तक पहुँचने लगता है, उस समय सुपोषण जैसी घटनाएँ घटती है। सुपोषण के कारण पानी में O2 की मात्रा कम या समाप्त हो जाती है जिसके कारण पानी पर निर्भर करने वाले जीवों का जीवन प्रभावित होता है। खाद्य श्रृंखलाएँ दूषित हो जाती है। कई प्रकार के महामारी रोग जैसे-आंत्रशोथ, पीलिया, हैजा, टाइफॉइड आदि फैलते हैं।

(ग) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दें।

प्रश्न 1. देश में जल संसाधनों की उपलब्धता की विवेचना कीजिए और इसके स्थानिक वितरण के लिए उत्तरदायी निर्धारित करने वाले कारक बताइए।
उत्तर- भारत में विश्व के धरातलीय क्षेत्र का लगभग 2.45 प्रतिशत जल संसाधनों का 4 प्रतिशत, जनसंख्या का लगभग 16 प्रतिशत भाग पाया जाता है। देश में एक वर्ष में वर्षण से प्राप्त कुल जल की मात्रा लगभग 4,000 घन कि.मी. है। धरातलीय जल और पुनः पूर्तियोग भौम जल से 1.869 घन कि.मी. जल उपलब्ध है। इसमें से केवल 60 प्रतिशत जल का लाभदायक उपयोग किया जा सकता है। इस प्रकार देश में कुल उपयोगी जल संसाधन 1.122 घन किमी है।
          घरातलीय जल के चार मुख्य स्रोत है- नदियों, झीलें, तलैया और तालाब।

       देश में कुल नदियों और उनकी सहायक नदियों की संख्या 10360 हैं। भारत में सभी नदी बेसिनों में औसत वार्षिक प्रवाह 1.869 घन कि.मी. होने का अनुमान लगाया गया है। फिर भी स्थलाकृतिक, जलीय और अन्य दबावों के कारण धरातलीय जल का केवल लगभग 690 घन कि.मी. (32%) जल का ही उपयोग किया जा सकता है। नदी में जल प्रवाह इसके जल ग्रहण क्षेत्र के आकार अथवा नदी बेसिन और इस जल ग्रहण क्षेत्र में हुई वर्षा पर निर्भर करता है।

         भारत में वर्षा में अत्यधिक स्थानिक विभिन्नता पाई जाती है और वर्षा मुख्य रूप से मानसूनी मौसम सकेंद्रित है। भारत में कुछ नदियों जैसे-गंगा, ब्रह्मपुत्र और सिंधु के जलग्रहण क्षेत्र बहुत बड़े हैं। गंगा, ब्रह्मपुत्र और बराक नदियों के जलग्रहण क्षेत्र में वर्षा अपेक्षाकृत अधिक होती है। ये नदियाँ देश के कुल क्षेत्र के लगभग एक-तिहाई भाग पर पाई जाती है जिनमें कुल धरातलीय जल संसाधनों का 60 प्रतिशत जल पाया जाता है। दक्षिणी भारतीय नदियों, जैसे-गोदावरी, कृष्णा और कावेरी में वार्षिक में वार्षिक जल प्रवाह का अधिकतर भाग काम में लाया जाता है लेकिन ऐसा ब्रह्मपुत्र और गंगा बेसिनों में अभी भी संभव नहीं हो सका है।

भारत के नदी तंत्र को चार भागों में बाँटा गया है-
(i) हिमालयी नदियाँ
(ii) दक्षिणी नदियाँ
(iii) तटीय नदियाँ
(iv) अन्तःस्थलीय जल प्रवाह वाली नदियाँ

प्रश्न 2. जल संसाधनों का ह्रास सामाजिक द्वंद्वों और विवादों को जन्म देते हैं। इसे उपयुक्त उदाहरणों सहित समझाइए।
उत्तर- जल संसाधनों का ह्रास द्वंद्वों और विवादों को जन्म देता है। अन्तर्राज्यीय विवादों के कारण बड़े पैमाने पर जल के उपयोग में समस्याएँ पैदा हुई हैं। नर्मदा, चंबल, दामोदर, कृष्णा, गोदावरी, कावेरी, महानदी आदि नदियाँ दो या दो से अधिक राज्यों में से होकर बहती है। अन्य नदियाँ जैसे – गंगा, ब्रह्मपुत्र, कोसी, गंडक, सिंधु, सतलुज आदि नदियाँ पड़ोसी देशों से होकर बहती हैं ओर वे अंतर्राष्ट्रीय नदियाँ हैं। ऐसी परिस्थितियों में से सभी राज्य या देश, जिनसे होकर नदी बहती है, नदी जल के भागीदार बन जाते हैं।         

              ऐसे भी उदाहरण हैं कि राजनीतिक मतभेदों के कारण नदियों के जल का उपयोग नहीं हो पाता है। भारत में ऐसी अनेक समस्याएँ हैं। भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल विवाद एक ऐसा ही उदाहरण है। कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच कावेरी जल विवाद तथा राजस्थान, पंजाब और हरियाणा के बीच नदी जल का बँटवारा, कुछ ऐसे ही विवाद है। इन विवादों ने निम्नलिखित समस्याएँ पैदा कर दी है-
(i) लाखों क्यूसेक जल बिना उपयोग के ही बहकर समुद्र में चला जाता है।
(ii) विस्तृत क्षेत्र बाढ़ तथा सूखे से प्रभावित होते हैं।
(iii) लोगों के लिए पीने योग्य जल की आपूर्ति का संकट पैदा हो गया है।
(iv) सिंचाई की खराब व्यवस्था से जलाक्रान्ति तथा लवणता की समस्या गंभीर हो गई है।

(v) अंतर्राज्यीय तथा अंतरदेशीय विवादों ने जल के बँटवारे की समस्या खड़ी कर दी है।

प्रश्न 3. जल-संभर प्रबंधन क्या है? क्या आप सोचते हैं कि यह सतत पोषणीय विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है?
उत्तर – जल-संभर प्रबंधन से अभिप्राय, मुख्य रूप से, धरातलीय और भौम जल संसाधनों के दक्ष प्रबंधन से है। इसके अंतर्गत बहते जल को रोकना और विभिन्न विधियों, जैसे- अंत:स्रवण तालाब, पुनर्भरण, कुओं आदि के द्वारा भौम जल का संचयन और पुनर्भरण शामिल है। हाँ, जल-संभर प्रबंधन पोषणीय विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है।

         जल संभर प्रबंधन का उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों और समाज के बीच संतुलन लाना है। जल-संभर व्यवस्था की सफलता मुख्य रूप से संप्रदाय के सहयोग पर निर्भर करती है। ‘हरियाली’ केंद्र सरकार द्वारा प्रवर्तित जल-संभर विकास परियोजना है जिसका उद्देश्य ग्रामीण जनसंख्या को पीने, सिंचाई, मत्स्य पालन और वन रोपण के लिए जल संरक्षण के लिए योग्य बनाना है।

           नीरू-मीरू (जल और आप) कार्यक्रम (आंध्र प्रदेश में) और अखारी पानी संसद (अलवर राजस्थान में) के अंतर्गत लोगों के सहयोग से विभिन्न जल संग्रहण संरचनाएँ जैसे-अंत:स्रवण तालाब ताल की खुदाई की गई और रोक बाँध बनाए गए हैं। तमिलनाडु में किसी भी इमारत का निर्माण बिना जल संग्रहण संरचना के नहीं किया जा सकता है। कुछ क्षेत्रों में जल-संभर विकास परियोजनाएँ पर्यावरण और अर्थव्यवस्था का करने में सफल हुई है। इस एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन उपागम द्वारा जल उपलब्धता सतत पोषणीय आधार पर निश्चित रूप से की जा सकती है।


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PREVIOUS YEAR QUESTION PAPER सम्पूर्ण हल सहित (बिहार बोर्ड भूगोल 12वीं कक्षा)

अध्याय 5 भू-संसाधन तथा कृषि (Land Resources and Agriculture)

इकाई-3 अध्याय 5 भू-संसाधन तथा कृषि (Land Resources and Agriculture)

बिहार बोर्ड कक्षा 12वीं के भूगोल का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर
(खण्ड 2: भारत- लोग और अर्थव्यवस्था)

अध्याय 5 भू-संसाधन तथा कृषि

भू-संसाधन तथा कृषि

(क) नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए
प्रश्न 1. निम्न में से कौन-सा भू-उपयोग संवर्ग नहीं है?
(क) परती भूमि
(ख) निवल बोया क्षेत्र
(ग) सीमांत भूमि
(घ) कृषि योग्य व्यर्थ भूमि
उत्तर – (ग) सीमांत भूमि
प्रश्न 2. पिछले 40 वर्षों से वनों का अनुपात बढ़ने का निम्न में से कौन-सा कारण है।
(क) वनीकरण के विस्तृत व सक्षम प्रयास
(ख) सामुदायिक वनों के अधीन क्षेत्र में वृद्धि
(ग) वन बढ़ोतरी हेतु निर्धारित अधिसूचित क्षेत्र में वृद्धि
(घ) वन क्षेत्र प्रबधन में लोगों की बेहतर भागीदारी
उत्तर – (ख) सामुदायिक वनों के अधीन क्षेत्र में वृद्धि
प्रश्न 3. निम्न में से कौन-सा सिंचित क्षेत्रों में भू-निम्नीकरण का मुख्य प्रकार है?
(क) अवनालिका अपरदन
(ख) मृदा लवणता
(ग) वायु अपरदन
(घ) भूमि पर सिल्ट का जमाव
उत्तर – (ख) मृदा लवणता
प्रश्न 4. शुष्क कृषि में निम्न में से कौन-सी फसल नहीं बोई जाती?
(क) रागी
(ख) मूंगफली
(ग) ज्वार
(घ) भूमि पर सिल्ट का जमाव
उत्तर – (ग) ज्वार
प्रश्न 5. निम्न में से कौन-से देशों में गेहूँ व चावल की अधिक उत्पादकता की किस्में विकसित की गई थी?
(क) जापान तथा आस्ट्रेलिया
(ख) संयुक्त राज्य अमेरिका तथा जापान
(ग) मैक्सिको तथा फिलीपीस
(घ) मैक्सिको तथा सिंगापुर
उत्तर – (ग) मैक्सिको तथा फिलीपीस
(ख) निम्नलिखित प्रश्नों उत्तर लगभग 30 शब्दों में दें
प्रश्न 1. बंजर भूमि तथा कृषि योग्य व्यर्थ भूमि में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर – बंजर भूमि- वह भूमि जो वर्तमान में प्रचलित प्रौद्योगिकी की मदद से कृषि योग्य नहीं बनाई सकती जैसे – बंजर पहाड़ी भूभाग, मरुस्थल आदि, बंजर भूमि कहलाती है।
कृषि योग्य व्यर्थ भूमि- वह भूमि जो पिछले पाँच वर्षों तक या अधिक समय तक परती या कृषिरहित है तथा भूमि को वर्तमान में प्रचलित प्रौद्योगिकी की मदद से इसे सुधार कर कृषि योग्य बनाया जा सकता है, कृषि योग्य व्यर्थ भूमि कहलाती है।
प्रश्न 2. निवल बोया गया क्षेत्र तथा सकल बोया गया क्षेत्र में अंतर बताइए।
उत्तर- निवल बोया गया क्षेत्र – वह भूमि है जिस पर एक कृषि वर्ष में कम से कम एक फसल बोई और काटी जाती है, उसे निवल बोया गया क्षेत्र कहते हैं।
सकल बोया गया क्षेत्र – वह भूमि है जिस पर एक कृषि वर्ष में बोये गए क्षेत्र को उतनी बार जोड़ते है जितनी बार फसले बोई जाती हैं।
प्रश्न 3. भारत जैसे देश में गहन कृषि नीति अपनाने की आवश्यकता क्यों है?
उत्तर- 1950 के दशक के अंत तक कृषि उत्पादन स्थिर हो गया। इस समस्या से उभरने के लिए गहन कृषि जिला कार्यक्रम (IADP) तथा गहन कृषि क्षेत्र कार्यक्रम (IAPP) प्रारंभ किए गए।
प्रश्न 4. शुष्क कृषि तथा आर्द्र कृषि में क्या अंतर है?
उत्तर – शुष्क कृषि – भारत में शुष्क भूमि खेती मुख्यतः उन प्रदेशों तक सीमित है जहाँ वार्षिक वर्षा 75 सेंटीमीटर से कम है।
आर्द्र कृषि – आर्द्र कृषि क्षेत्रों में वर्षा ऋतु के अंतर्गत वर्षा जल पौधों की जरूरत से अधिक होता है।
 
(ग) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दें
प्रश्न 1. भारत में भूसंसाधनों की विभिन्न प्रकार की पर्यावरणीय समस्याएँ कौन-सी हैं? उनका निदान कैसे किया जाए?
उत्तर – कृषि पारिस्थितिकी तथा विभिन्न प्रदेशों के ऐतिहासिक अनुभवों के अनुसार भारतीय कृषि की समस्याएँ भी विभिन्न प्रकार की हैं। अतः देश की अधिकतर कृषि समस्याएँ प्रादेशिक हैं तथापि कुछ समस्याएँ सर्वव्यापी हैं जिसमें भौतिक बाधाओं से लेकर संस्थागत अवरोध शामिल है। भारत में कृषि क्षेत्र का केवल एक-तिहाई भाग ही सिंचित है। शेष कृषि क्षेत्र में फसलों का उत्पादन प्रत्यक्ष रूप से वर्षा पर निर्भर है। दक्षिण-पश्चिम मानसून की अनिश्चितता व अनियमितता से सिंचाई हेतु नहर की जल आपूर्ति भी प्रभावित होती है।
             दूसरी तरफ राजस्थान तथा अन्य क्षेत्रों में वर्षा बहुत कम तथा अत्यधिक अविश्वसनीय है। अधिक वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्रों में भी काफी उत्तार-चढ़ाव पाया जाता है। फलस्वरूप यह क्षेत्र सूखा व बाढ़ दोनों सुभेद्य है। कम वर्षा वाले क्षेत्रों में सूखा एक सामान्य परिघटना है लेकिन यहाँ कभी-कभी बाढ़ भी आ जाती है। सूखा तथा बाढ़ भारतीय कृषि के जुड़वाँ संकट बने हुए हैं। भूमि संसाधनों का निम्नीकरण सिंचाई और कृषि विकास की दोषपूर्ण नीतियों से उत्पन्न हुई समस्याओं में से एक गंभीर समस्या है। इससे मृदा उर्वरता क्षीण हो सकती हैं। सिंचित क्षेत्रों में कृषि भूमि का एक बड़ा भाग जलाक्रांतता लवणता तथा मृदा क्षारीयता के कारण बंजर हो चुका है।
प्रश्न 2. भारत में स्वतंत्रता प्राप्ति तो पश्चात् कृषि विकास की महत्त्वपूर्ण नीतियों का वर्णन करें।
उत्तर – स्वतंत्रता प्राप्ति से पहले भारतीय कृषि एक जीविकोपार्जी अर्व्यथवस्था जैसी थी। बीसवीं शताब्दी के मध्य तक इसका प्रदर्शन बड़ा दयनीय था। यह समय भयंकर अकाल व सूखे का साक्षी है। देश-विभाजन के दौरान लगभग एक-तिहाई सिंचित भूमि पाकिस्तान में चली गई। परिणामस्वरूप स्वतंत्र भारत में सिंचित क्षेत्र का अनुपात कम रह गया। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद सरकार का तात्कालिक उद्देश्य खाद्यानों का उत्पादन बढ़ाना था जिसमें निम्न उपाय अपनाए गए –
⇒ व्यापारिक फसलों की जगह खाद्यान्नों का उगाया जाना
⇒ कृषि गहनता को बढ़ाना तथा
⇒ कृषि योग्य बंजर तथा परती भूमि को कृषि को कृषि भूमि में परिवर्तित करना।
                1950 के दशक के अंत तक कृषि उत्पादन स्थिर हो गया। इस समस्या से उभरने के लिए गहन कृषि जिला कार्यक्रम (IADP) तथा गहन कृषि क्षेत्र कार्यक्रम (IAAP) प्रारंभ किए गए। लेकिन 1960 के दशक के मध्य में लगातार दो अकालों से देश मे अन्न संकट उत्पन्न हो गया। परिणामस्वरूप दूसरे देशों से खाद्यानों का आयात करना पड़ा। 1960 के दशक के मध्य में गेहूँ (मैक्सिको) तथा चावल (फिलिपीस) की किस्में जो अधिक उत्पादन देने वाली नई किस्में थी, कृषि के लिए उपलब्ध हुईं।
            भारत ने इसका लाभ उठाया तथा पैकेज प्रोद्योगिकी के रूप में में पंजाब, हरियाण, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश तथा गुजरात के सिंचाई सुविधा वाले क्षेत्रों में, रासायनिक खाद के साथ उच्च उत्पादकता की किस्मों (HYV) को अपनाया। नई कृषि प्रौद्योगिकी की सफलता हेतु सिंचाई से निश्चित जल आपूर्ति पूर्व आपेक्षित थी। कृषि विकास की इस नीति से खाद्यान्नों के उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि हरित क्रांति के नाम से भी जाना जाता है। हरित क्रांति ने कृषि में प्रयुक्त कृषि निवेश, जैसे- उर्वरक, कीटनाशक, कृषि यंत्र आदि कृषि आधारित उद्योगों तथा छोटे पैमाने के उद्योगों के विकास को प्रोत्साहन दिया। कृषि विकास की इस नीति से देश खाद्यान्नों के उत्पादन में आत्मनिर्भर हुआ।

                1950 के दशक में भारतीय योजना आयोग ने वर्षा आधारित क्षेत्रों की कृषि समस्याओं पर ध्यान दिया। योजना आयोग ने 1988 में कृषि विकास में प्रादेशिक संतुलन को प्रोत्साहित करने हेतु कृषि जलवायु नियोजन प्रारंभ किया। इसने कृषि, पशुपालन तथा जलकृषि के विकास हेतु संसाधनों के विकास पर भी बल दिया।


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अध्याय 4 मानव बस्तियाँ (Human Settlements)

इकाई-2 अध्याय 4 मानव बस्तियाँ (Human Settlements)

बिहार बोर्ड कक्षा 12वीं के भूगोल का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर
(खण्ड 2: भारत- लोग और अर्थव्यवस्था)

अध्याय 4 मानव बस्तियाँ

मानव बस्तियाँ

(क) नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए 

प्रश्न 1. निम्नलिखित में से कौन-सा नगर नदी तट पर अवस्थित नहीं है?

(क) आगरा

(ख) पटना

(ग) भोपाल

(घ) कोलकाता

उत्तर- (ग) भोपाल

2. भारत की जनगणना के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-सी एक विशेषता नगर की परिभाषा का अंग नहीं है?

(क) जनसंख्या घनत्व 400 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी

(ख) नगरपालिका, निगम का होना

(ग) 75 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या का प्राथमिक खंड में संलग्न होना

(घ) जनसंख्या आकार 5000 व्यक्तियों से अधिक

उत्तर – (ग) 75 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या का प्राथमिक खंड में संलग्न होना

3. निम्नलिखित में से किस पर्यावरण में परिक्षिप्त ग्रामीण बस्तियों की अपेक्षा नहीं की जा सकती?

(क) गंगा का जलोढ़ मैदान

(ख) राजस्थान के शुष्क

(ग) हिमालय की निचली घाटियाँ

(घ) उत्तर-पूर्व के वन और पहाड़ियाँ

उत्तर – (ख) राजस्थान के शुष्क

4. निम्नलिखित में से नगरों का कौन-सा वर्ग अपने पदानुक्रम के अनुसार क्रमबद्ध है?

(क) बृहद मुंबई, बंगलौर, कोलकाता, चेन्नई

(ख) दिल्ली, बृहन मुंबई, चेन्नई, कोलकाता

(ग) कोलकाता, बृहन मुंबई, चेन्नई, कोलकाता

(घ) बृहन मुंबई, कोलकाता, दिल्ली, चेन्नई

उत्तर – (घ) बृहन मुंबई, कोलकाता, दिल्ली, चेन्नई

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर लगभग 30 शब्दों में दें

प्रश्न 1. गैरिसन नगर क्या होते हैं? उनका क्या प्रकार्य होता है?

उत्तर – गैरिसन नगर छावनी नगर को कहा जाता हैं। अंबाला, जालंधर, महू, बबीना, उधमपुर इत्यादि नगरों का उदय गैरिसन नगरों के रूप में हुआ है। गैरीसन नगर की उत्पत्ति ब्रिटिश काल के दौरान हुआ है। यह नौसेना या वायु सेना या सेना या सभी के रक्षा कर्मियों की किलेबंदी के साथ-साथ उनके रक्षा उपकरणों की बस्ती है। 

प्रश्न 2 किसी नगरीय संकुल की पहचान किस प्रकार की जा सकती है?

उत्तर – बहुसंख्यक महानगर और मेगा नगर नगरीय संकुल हैं। एक नगरीय संकुल में निम्नलिखित तीन संयोजकों में से किसी एक का समावेश होता है –

(क) एक नगर व उसका संलग्न नगरीय बहिर्बद्ध

(ख) बहिर्बद्ध (outgrowth) के सहित अथवा रहित दो अथवा संस्पर्शी नगर, और

(ग) एक अथवा अधिक संलग्न नगरों के बहिर्बद्ध से युक्त एक संस्पर्शी प्रसार नगर का निर्माण।

प्रश्न 3. मरुस्थली प्रदेशों में गाँवों की अवस्थिति के कौन-से मुख्य कारक होते हैं?

उत्तर – जल का अभाव और पर्यावरणीय समस्याएँ मरुस्थली प्रदेशों में गाँवों की अवस्थिति का मुख्य कारक है।

प्रश्न 4. महानगर क्या होते हैं? ये नगरीय संकुलों से किस प्रकार भिन्न होते हैं?

उत्तर- 10 लाख से 50 लाख की जनसंख्या वाले नगरों को महानगर कहा जाता है। बहुसंख्यक महानगर नगरीय संकुल हैं। बृहत मुंबई सबसे बड़ा नगरीय संकुल है।

(ग) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दें।

प्रश्न 1. विभिन्न प्रकार की ग्रामीण बस्तियों के लक्षणों की विवेचना कीजिए। विभिन्न भौतिक पर्यावरण में बस्तियों के प्रारूपों के लिए उत्तरदायी कारक कौन-से हैं?

उत्तर – ग्रामीण बस्तियों के प्रकार निर्मित क्षेत्र के विस्तार और अंतर्वास दूरी द्वारा निर्धारित होते हैं। भारत में कुछ सौ घरों से युक्त संहत अथवा गुच्छित गाँव विशेष रूप से उत्तरी मैदानों में एक सार्वत्रिक लक्षण है। फिर भी अनेक क्षेत्र ऐसे हैं जहाँ अन्य प्रकार की ग्रामीण बस्तियाँ पाई जाती हैं। ग्रामीण बस्तियों के विभिन्न प्रकारों के लिए अनेक कारक और दशाएँ उत्तरदायी हैं। इनके अंतर्गत-भौतिक लक्षण-भू-भाग की प्रकृति, ऊँचाई, जलवायु और जल की उपलब्धता आदि।

बृहत् तौर पर भारत की ग्रामीण बस्तियों को चार प्रकारों में रखा जा सकता है-

(i) गुच्छित, संकुलित अथवा आकेंद्रित

(ii) अर्ध-गुच्छित अथवा विखंडित

(iii) पल्लीकृत, और

(iv) परिक्षिप्त अथवा एकाकी

(i) गुच्छित बस्तियाँ (Clustered Settlements)-इस प्रकार के गाँव में रहन-सहन का सामान्य क्षेत्र स्पष्ट और चारों और फैले खेतों, खलिहानों और चरागाहों से पृथक् होता है। संकुचित निर्मित क्षेत्र और इसकी मध्यवर्ती गलियाँ कुछ जाने-पहचाने प्रारूप अथवा ज्यामितीय आकृतियाँ प्रस्तुत करते हैं जैसे कि आयताकार, अरीय, रैखिक इत्यादि।

(ii)अर्ध-गुच्छित बस्तियाँ (Semi-clustered Settlements)- अधिकतर ऐसा प्रारूप किसी बड़े संहत गाँव के संपृथक्न अथवा विखंडन के परिणामस्वरूप भी उत्पन्न हो सकता है। ऐसी स्थिति में ग्रामीण समाज के एक अथवा अधिक वर्ग स्वेच्छा से अथवा बलपूर्वक मुख्य गुच्छ अथवा गाँव से थोड़ी दूरी पर रहने लगते हैं। ऐसी स्थितियों में, आमतौर पर जमींदार और अन्य प्रमुख समुदाय मुख्य गाँव के केंद्रीय भाग पर आधिपत्य कर लेते हैं जबकि समाज के निचले तबके के लोग निम्न कार्यों में संलग्न लोग गाँव के बाहरी हिस्सों में बसते हैं।

(iii) पल्ली बस्तियाँ (Hamleted Settlements)- कई बार बस्ती भौतिक रूप से एक-दूसरे से पृथक् अनेक इकाइयों में बंट जाती है लेकिन उन सबका नाम एक रहता है। इन इकाइयों को देश के विभिन्न भागों में स्थानीय स्तर पर पान्ना, पाड़ा, पाली, नगला, ढाँणी इत्यादि कहा जाता है।

(iv) परिक्षिप्त बस्तियाँ (Dispersed Settlements)- भारत में परिक्षिप्त अथवा एकाकी बस्ती प्रारूप सुदूर जंगलों में एकाकी झोपड़ियों अथवा कुछ झोंपड़ियों की पल्ली अथवा छोटी पहाड़ियों की ढालों पर खेतों अथवा चरागाहों के रूप में दिखाई पड़ता है।

प्रश्न 2. क्या एक प्रकार्य वाले नगर की कल्पना की जा सकती है? नगर बहुप्रकार्यात्मक क्यों हो जाते हैं?

उत्तर – नहीं, हम एक प्रकार्य वाले नगर की कल्पना नहीं कर सकते क्योंकि अपनी केंद्रीय अथवा नोडीय स्थान की भूमिका के अतिरिक्त अनेक शहर और नगर विशेषीकृत सेवाओं का निष्पादन करते हैं। कुछ शहरों और नगरों को कुछ निश्चित प्रकार्यों से विशिष्टता प्राप्त होती है और उन्हें कुछ विशिट क्रियाओं, उत्पादनों अथवा सेवाओं के लिए जाना जाता है। फिर भी प्रत्येक शहर अनेक प्रकार्य करता है।

     नगर अपने प्रकार्यों में स्थिर नहीं है उनके गतिशील स्वभाव के कारण प्रकार्यों में परिवर्तन हो जाता है। विशेषीकृत नगर भी महानगर बनने पर बहुप्रकार्यात्मक बन जाते हैं जिनमें उद्योग व्यवसाय, प्रशासन, परिवहन इत्यादि महत्त्वपूर्ण हो जाते हैं। प्रकार्य इतने अंतग्रंथित हो जाते हैं कि नगर को किसी विशेष प्रकार्य वर्ग में वर्गीकृत नहीं किया जा सकता।



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अध्याय 3 मानव विकास (Human Development)

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अध्याय 3 मानव विकास

अध्याय 3 मानव विकास

(क) नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए
1. मानव विकास सूचकांक (2005) के संदर्भ में विश्व के देशों में भारत की निम्नलिखित में से कौन-सी कोटि थी?
(क) 126
(ख) 128
(ग) 127
(घ) 129
उत्तर – (ख) 128
2. मानव विकास सूचकांक में भारत के निम्नलिखित राज्यों में से किस एक की कोटि उच्चतम है?
(क) तमिलनाडु
(ख) केरल
(ग) पंजाब
(घ) हरियाणा
उत्तर – (ग) पंजाब
3. भारत के निम्नलिखित राज्यों में से किस एक में स्त्री साक्षरता निम्नतम है?
(क) जन्मू और कश्मीर
(ख) झारखंड
(ग) अरुणाचल प्रदेश
(घ) बिहार
उत्तर – (घ) बिहार
4. भारत के निम्नलिखित राज्यों में से किस एक में 0-6 आयु वर्ग के बच्चों में लिंग अनुपात निम्नतम है?
(क) गुजरात
(ख) पंजाब
(ग) हरियाणा
(घ) हिमाचल प्रदेश
उत्तर – (ग) हरियाणा
5. भारत के निम्नलिखित केंद्र-शासित प्रदेशों में से किस एक की साक्षरता दर उच्चतम है?
(क) लक्षद्वीप
(ख) दमन और दीव
(ग) चंडीगढ़
(घ) अंडमान और निकोबार द्वीप
उत्तर – (क) लक्षद्वीप
(ख) निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर लगभग 30 शब्दों में दें
प्रश्न 1. मानव विकास को परिभाषित कीजिए।
उत्तर – मानव में होने वाले गुणात्मक व धनात्मक बढ़ोतरी को ही मानव विकास कहा जाता है। मानव विकास स्वास्थ्य, भौतिक पर्यावरण से लेकर आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक स्वतंत्रता तक सभी प्रकार के मानव विकल्पों को सम्मिलित करते हुए लोगों के विकल्पों में विस्तार और उनके शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं तथा सशक्तिकरण के अवसरों में वृद्धि की प्रक्रिया है।
प्रश्न 2. उत्तरी भारत के अधिकांश राज्यों में मानव विकास के निम्न स्तरों के दो कारण बताइए।
उत्तर – उत्तरी भारत के अधिकांश राज्यों में मानव विकास के निम्न स्तरों के दो प्रमुख कारण – (i) साक्षरता और (ii) गरीबी
प्रश्न 3. भारत के बच्चों में घटते लिंगानुपात के दो कारण बताइए।
उत्तर – भारत के बच्चों में घटते लिंगानुपात के दो प्रमुख कारण –
(i) सामाजिक दृष्टिकोण
(ii) लिंग-निर्धारण की वैज्ञानिक विधियाँ
(ग) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दें।
प्रश्न 1. भारत में 2001 के स्त्री साक्षरता के स्थानिक प्रारूपों की विवेचना कीजिए और इसके लिए उत्तरदायी कारणों को समझाइए।
उत्तर – भारत में स्त्री साक्षरों का महत्वपूर्ण बिंदु निम्नलिखित है-
(i) भारत में कुल साक्षरता लगभग 65.4 प्रतिशत है जबकि स्त्री साक्षरता 54.16 प्रतिशत है।
(ii) दक्षिण भारत के अधिकांश राज्यों में कुल साक्षरता और महिला साक्षरता राष्ट्रीय औसत से ऊँची है।
(iii) भारत के राज्यों में साक्षरता दर में व्यापक प्रादेशिक असमानता पाई जाती है। यहाँ बिहार जैसे राज्य भी हैं जहाँ बहुत कम (47.53 प्रतिशत) साक्षरता है और केरल और मिजोरम जैसे राज्य भी हैं जिनमें साक्षरता दर क्रमश: 90.92 प्रतिशत और 88.49 प्रतिशत है।
(iv) स्थानिक भिन्नताओं के अतिरिक्त ग्रामीण क्षेत्रों और स्त्रियों, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, कृषि मजदूरों इत्यादि जैसे हमारे समाज में सीमांत वर्गों में साक्षरता का प्रतिशत बहुत कम है।
(v) यद्यपि सीमांत वर्गों में साक्षरों का प्रतिशत सुधरा है तथापि धनी और सीमांत वर्गों की जनसंख्या के बीच अंतर समय के साथ बढ़ा है।
प्रश्न 2. भारत के 15 प्रमुख राज्यों में मानव विकास के स्तरों में किन कारकों ने स्थानिक भिन्नता उत्पन्न की है?
उत्तर – भारत के 15 प्रमुख राज्यों में मानव विकास के स्तरों में स्थानिक भिन्नता उत्पन्न करने वाले अनेक कारण जैसे-सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक और ऐतिहासिक कारण उत्तरदायी हैं। केरल के मानव विकास सूचकांक का उच्चतम मूल्य इसके द्वारा 2001 में शत-प्रतिशत के आस-पास (90.92 प्रतिशत) साक्षरता दर को प्राप्त करने के लिए किए गए प्रभावी कार्यशीलता के कारण है।
          एक अलग दृश्य में बिहार, मध्य प्रदेश, उड़ीसा, असम और उत्तर प्रदेश जैसे निम्न साक्षरता वाले राज्य हैं। उदाहरणत: बिहार में इसी वर्ष (2001) में कुल साक्षरता दर बहुत निम्न (60.32 प्रतिशत) थी। उच्चतर कुल साक्षरता दर्शाने वाले राज्यों में पुरुष और स्त्री साक्षरता के बीच कम अंतर पाया गया है। केरल में यह अंतर 6.34 प्रतिशत है जबकि बिहार में यह 26.75 प्रतिशत और मध्य प्रदेश में 25.95 प्रतिशत है। शैक्षिक उपलब्धियों के अतिरिक्त आर्थिक विकास भी मानव विकास सूचकांक पर सार्थक प्रभाव डालता है।
           

            आर्थिक दृष्टि से विकसित महाराष्ट्र, तमिलनाडु और पंजाब एवं हरियाणा जैसे राज्यों के मानव विकास सूचकांक का मूल्य असम, बिहार, मध्य प्रदेश इत्यादि राज्यों की तुलना में ऊँचा है।


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