18. The Industrial regions of the world (विश्व के औद्योगिक प्रदेश)

18. The Industrial regions of the world

(विश्व के औद्योगिक प्रदेश)



प्रश्न प्रारूप

Q. What are the industrial regions of the world? Discuss the characteristics of each region.

(विश्व के औद्योगिक प्रदेश कौन-कौन हैं? प्रत्येक की विशेषताओं का वर्णन करें।)

उतर- औद्योगिक प्रदेश एक महत्त्वपूर्ण प्रदेश होता है। उसका समूचा स्वरूप ही उद्योगों पर निर्भर होता है। इस प्रकार औद्योगिक प्रदेश वह है जहाँ अधिकतर लोगों की जीविका का साधन उद्योग है। उस प्रदेश में मानव का मुख्य क्रियाकलाप उद्योगों से सम्बंधित होता है। ऐसे प्रदेश में औद्योगिक इकाइयों में सम्बद्धता होती है। वह सम्पूर्ण प्रदेश उद्योगों से परिपूर्ण होता है। इन गुणों के विद्यमान रहने पर हम उसे औद्योगिक प्रदेश कह सकते हैं। इसी संदर्भ में किसी अर्थशास्त्री ने उद्योग के लिए 9 ‘M’ को महत्त्वपूर्ण माना है जो इस प्रकार है-
1. Money (मुद्रा)

2. Material (माल/सामग्री)

3. Man (मानव)

4. Market (बाजार)

5. Machinery (मशीनें)

6. Motive (शक्ति)

7. Management) (प्रबंधन)

8. Means of transport (यातायात के साधन)

9. Momentum of early start (पहले कारखाना खोलने से विकास की गति)।

      विश्व को उनकी औद्योगिक सम्बद्धता के आधार पर निम्नलिखित औद्योगिक प्रदेशों में बाँट सकते हैं-

(1) संयुक्त राज्य अमेरिका का औद्योगिक प्रदेश

(2) कनाडा औद्योगिक प्रदेश

(3) ग्रेट ब्रिटेन का औद्योगिक प्रदेश

(4) जर्मनी औद्योगिक प्रदेश

(5) सोवियत रूस औद्योगिक प्रदेश

(6) जापान का औद्योगिक प्रदेश

(7) चीन का औद्योगिक प्रदेश

(8) भारत का औद्योगिक प्रदेश

(9) आस्ट्रेलिया का औद्योगिक प्रदेश

(10) दक्षिणी अफ्रिकी गणराज्य।

(1) संयुक्त राज्य अमेरिका:-

     U.S.A. विश्व का सबसे विकसित औद्योगिक देश है। यहाँ अनेक वस्तुओं का उत्पादन होता है। अलग-अलग प्रदेशों में विभिन्न प्रकार की वस्तुएँ बनती हैं। अतः यहाँ कई क्षेत्रों में औद्योगिक विकास हुआ है, जो इस प्रकार हैं-

(i) दक्षिणी न्यू इंग्लैंड प्रदेश

(ii) मध्य-अटलांटिक तटीय प्रदेश

(iii) पिट्सबर्ग-लेक एरी प्रदेश

(iv) डेट्रॉइट औद्योगिक प्रदेश

(v) महान झील औद्योगिक प्रदेश

(vi) दक्षिणी अप्लेशियन प्रदेश

(vii) पूर्वी टेक्सास प्रदेश

(viii) प्रशांत तटीय प्रदेश

(ix) राकी पर्वतीय प्रदेश

(x) मध्य न्यूयार्क क्षेत्र।

    लोहा-इस्पात उद्योग सबसे अधिक यहीं केन्द्रित है। दक्षिण-पूर्वी U.S.A में देश का 85% लोहा-इस्पात के कारखाने स्थित हैं। इसके कारण अन्य उद्योग भी यहाँ स्थापित हैं।

(2) कनाडा औद्योगिक प्रदेश:-

     उत्तरी अमेरिका में U.S.A. के बाद दूसरा सबसे विकसित औद्योगिक देश कनाडा है। यहाँ कच्चे माल की सुविधा तथा यातायात की सुगमता के कारण उद्योगों का विकास हुआ है। यहाँ के औद्योगिक प्रदेश इस प्रकार है-

(i) ओण्टोरियो औद्योगिक प्रदेश

(ii) क्यूवेक,

(iii) समुद्री प्रान्तों का प्रदेश

(iv) ब्रिटिश कोलम्बिया,

(v) प्रेयरी प्रदेश का औद्योगिक प्रदेश।

    कनाडा में भी अलग-अलग प्रदेशों में औद्योगिक पट्टियों का विकास हुआ है। ओण्टोरियो प्रदेश में भारी उद्योगों के संयंत्र स्थापित हैं। समुद्री भाग में मत्स्य उद्योग औद्योगिक प्रदेश है।

(3) ग्रेट ब्रिटेन का औद्योगिक प्रदेश:-

     ग्रेट ब्रिटेन से ही विश्व में औद्योगिक क्रान्ति शुरू हुई। कुछ ही समय में वह एक महत्त्वपूर्ण औद्योगिक राष्ट्र बन गया। यहाँ के प्रमुख औद्योगिक प्रदेश इस प्रकार हैं-

(i) नार्थम्बरलैंड डरहम क्षेत्र

(ii) यार्क-डर्बी- नार्टिघमशायर प्रदेश

(iii) मिडलैंड औद्योगिक प्रदेश

(iv) साउथ वेल्स

(v) लंकाशायर

(vi) स्काटलैंड मध्यघाटी औद्योगिक प्रदेश।

       इस समय ग्रेट ब्रिटेन विभिन्न प्रकार के उद्योगों में पीछे हो गया है।

(4) जर्मनी के औद्योगिक प्रदेश:-

     जर्मनी विश्व के बड़े औद्योगिक देशों में से एक है। यहाँ भारी उद्योगों की स्थापना हुई है। यहाँ के औद्योगिक प्रदेश इस प्रकार हैं-

(i) बेस्टपफैलिया औद्योगिक प्रदेश

(ii) बवेरिया क्षेत्र

(iii) सार बेसिन क्षेत्र

(iv) सेक्सोनी क्षेत्र।

(5) सोवियत रूस के औद्योगिक प्रदेश:-

      यहाँ के बड़े भाग में उद्योगों का विकास हुआ है। इसके औद्योगिक प्रदेश निम्नलिखित हैं-

(i) यूक्रेन क्षेत्र

(ii) केन्द्रीय प्रदेश

(iii) यूराल प्रदेश

(iv) लेनिनग्राड

(v) मध्य वोल्गा

(vi) कृजवास प्रदेश

(vii) ट्रांस काकेशिया

(viii) एशियाई क्षेत्र

(ix) वैकाल झील क्षेत्र

(x) सुदूर पूर्वी क्षेत्र

(xi) क्रोशिया प्रदेश।

(6) जापान का औद्योगिक प्रदेश:-

        यहाँ के औद्योगिक प्रदेश निम्नलिखित हैं-

(i) टोकियो-योकोहामा क्षेत्र

(ii) नागोया क्षेत्र

(iii) कोवे ओसाका क्षेत्र

(iv) नागासाकी क्षेत्र

(v) कमैसी प्रदेश

(vi) द० होकैडो क्षेत्र।

(7) चीन का औद्योगिक प्रदेश-

      यहाँ के औद्योगिक प्रदेश निम्नलिखित हैं-

(i) उत्तरी-पूर्वी चीन क्षेत्र

(ii) पेकिंग प्रदेश

(iii) शंघाई-वुहान क्षेत्र

(iv) कैण्टन।

(8) भारत के औद्योगिक प्रदेश:-

      भारत के औद्योगिक प्रदेश निम्नलिखित हैं-

(i) हुगलीघाटी औद्योगिक प्रदेश

(ii) दामोदर घाटी एवं स्वर्णरेखा घाटी औद्योगिक प्रदेश

(iii) मुम्बई-अहमदाबाद क्षेत्र

(iv) दक्षिण-भारत के औद्योगिक प्रदेश

(v) गंगा-यमुना की घाटी का औद्योगिक प्रदेश।

(9) आस्ट्रेलिया का औद्योगिक प्रदेश:-

      आस्ट्रेलिया में उद्योग का विकास हो रहा है। यहाँ के औद्योगिक प्रदेश ये हैं-

(i) न्यूसाउथ वेल्स का औद्योगिक प्रदेश

(ii) न्यूजीलैंड का औद्योगिक प्रदेश।

(10) दक्षिण अफ्रिका के औद्योगिक प्रदेश:-

        दक्षिण अफ्रिका गणराज्य में कच्चे माल की प्राप्ति के कारण उद्योगों का विकास हुआ है।

17. The Commercial Grain Farming in the world (विश्व में व्यापारिक अन्न कृषि)

17. The Commercial Grain Farming in the world

(विश्व में व्यापारिक अन्न कृषि)



प्रश्न प्रारूप

Q. Discuss the Commercial Grain Farming in the world.

(विश्व में व्यापारिक अन्न कृषि का वर्णन करें।)

उत्तर- जिस कृषि की उपजों को स्थानीय उपभोग के लिए नहीं बल्कि बाजारों में व्यापार के लिए प्रयोग किया जाता है, उसे व्यापारिक कृषि कहते हैं। इस प्रकार की कृषि से मुद्रा की प्राप्ति होती है। अतः इसे मुद्रादायिनी फसल भी कहते हैं। बाजारों में बेचकर इससे तुरन्त धन कमाया जाता है, इसी से इसे (Cash crop) या नकदी फसल भी कहा जाता है। इस प्रकार की फसल विश्व के अनेक क्षेत्र में उपजाई जाती है।

      वास्तव में इस प्रकार की कृषि अधिक आबादी के देशों में स्थानीय उपभोग के लिए की जाती है। दक्षिणी पूर्वी एशिया के देशों में व्यापारिक खाद्यान्न कृषि व्यापार के लिए नहीं बल्कि स्थानीय उपभोग के लिए की जाती है। अतः इस क्षेत्र में गेहूँ जीवन निर्वाहण कृषि है। परन्तु U.S.A., कनाडा आदि देशों में गेहूँ का उत्पादन व्यापार के लिए होता है, अतः यहाँ यह व्यापारिक कृषि के अन्तर्गत आता है।

विस्तीर्ण व्यापारिक खाद्यान्न कृषि की विशेषताएँ:

     इस प्रकार कृषि की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं:

1. आधुनिक युग की कृषि:-

    व्यापारिक खाद्यान्न कृषि वास्तव में आधुनिक युग की देन है। यह मध्य आक्षांशों के आर्द्र एवं शुष्क प्रदेशों के बीच में की जाती है। ये क्षेत्र अत्यन्त ही विरल जनसंख्या वाले हैं। इनके अधिकांश जनसंख्या यूरोपीय किस्म की है।

2. एक ही फसल के उत्पादन पर बल:-

    प्रत्येक देश में या उसके उप प्रदेश में, केवल एक ही मुख्य फसल के उत्पादन पर बल दिया जाता है। वह फसल बाजार में बिक्री के लिए उत्पन्न की जाती है। जैसे- गेहूँ। इन प्रदेशों की सर्वप्रमुख फसल गेहूँ ही है। संयुक्त राज्य अमेरिका में एक पेटी में मक्का भी बोई जाती है। गेहूँ के अलावा जौ, जई और राई का थोड़ा-थोड़ा उत्पादन देशी या स्थानीय माँग पूर्ति के लिए किया जाता है। लगभग 70% से 80% कृषि भूमि पर गेहूँ का उत्पादन होता है।

3. मानव एवं पशुओं का कम प्रयोग:-

     मानव एवं कृषि पशुओं का प्रयोग कृषि में कम होता है। अधिकतम कार्य मशीनों से होता है।

4. बड़े-बड़े कृषि फार्म:-

     कृषि फार्म बड़े-बड़े होते हैं। U.S.A. एवं अर्जेन्टाइना में 300 एकड़ से 1000 एकड़ तक कृषि फार्म होते हैं। कृषि फार्म पर ही कृषक का निवास तथा मशीनों के रखने आदि की जगह होती है।

5. फसलों में विशेषीकरण:-

     यह केबल एक फसल का विशेषीकरण होता है। इस कृषि की मुख्य फसल गेहूँ है। बड़े पैमाने पर गेहूँ का उत्पादन होता है तथा विश्व के गेहूँ का कुल निर्यात इन्हीं देशों से होता है।

6. कृषि कार्य वैज्ञानिक ढंग से:-

     कृषि का प्रत्येक कार्य वैज्ञानिक ढंग से किया जाता है। उर्वरकों का पूर्ण प्रयोग होता है।

7. मैदानी भागों में कृषि:-

      यह कृषि विशाल समतल मैदानी प्रदेशों में की जाती है।

उत्पादन-

     FAO Production year book, 2011 के अनुसार विश्व में गेहूँ का कुल उत्पादन 5190 लाख मेट्रिक टन हुआ। नीचे के तालिका में कुछ प्रमुख देशों का उत्पादन इस प्रकार रहा-

विश्व में गेहूँ का उत्पादन, 2011

देश कुल उत्पादन लाख मेट्रिक टन में विश्व के कुल उत्पादन का %
चीन 951 18.32
U.S.S.R. 835 16.9
भारत 565 10.88
U.S.A. 605 11.66
फ्रांस 401 7.23
कनाडा 364 7.01
टर्की 275 5.30
पाकिस्तान 205 3.95
ब्रिटेन 195 3.76
जर्मनी 154 2.97
ऑस्ट्रेलिया 115 2.21
अन्य देश 525 10.11
कुल विश्व 5190 100%

विश्व वितरण-

    इस प्रकार की कृषि मध्य अक्षांशों में स्थित समशीतोष्ण कटिबंधीय घास के मैदानों में की जाती है। इसके क्षेत्र निम्नलिखित हैं-

1. सोवियत संघ में स्टेपी घास के मैदान:-

     गेहूँ के उत्पादन में U.S.S.R. का स्थान दूसरा है। यह विश्व का 14.5% गेहूँ उत्पन्न करता है। यहाँ गेहूँ के दो क्षेत्र हैं-

(i) शीतकालीन पट्टी- उत्तरी यूक्रेन प्रदेश में

(ii) बसन्त कालीन गेहूँ पट्टी- कैस्पियन सागर एवं कालासागर के आस-पास। यहाँ उपजाऊ मिट्टी, गर्मी में वर्षा तथा मशीनों का पूर्ण प्रयोग से यहाँ कृषि की जाती है।

2. उत्तरी अमेरिका में तथा कनाडा के प्रेयरी मैदान:-

    यहाँ विश्व का लगभग 10% गेहूँ उत्पादन होता है। यहाँ बड़े पैमाने पर मशीनों द्वारा गेहूँ की व्यापारिक कृषि होती है। यहाँ गेहूँ के 4 प्रमुख उत्पादक क्षेत्र हैं।

(i) बसन्तकालीन गेहूँ क्षेत्र- प्रेयरीज के उत्तरी भाग में डेकोटा, मोण्टाना और मिन्नेसोटा में।

(ii) शीतकालीन गेहूँ क्षेत्र- कन्सास ओकलाहोमा, नेबास्का, टेस्सास।

(iii) कोलम्बिया पठार गेहूँ क्षेत्र

(iv) कैलिफोर्निया गेहूँ क्षेत्र

3. दक्षिणी अमेरिका अर्जेटिना का पम्पा प्रदेश:-

    इस प्रदेश में यूरुग्वे एवं पराग्वे नदी के डेल्टा प्रदेश में पम्पा नामक घास का विस्तृत मैदान है। इसमें गेहूँ की विस्तृत खेती की है। यहाँ से गेहूँ विदेशों को निर्यात होता है।

4. दक्षिणी पूर्वी अफ्रीका में वेल्ड नामक घास के मैदान:-

     यह क्षेत्र दक्षिण अफ्रिका गणराज्य के द० पूर्वी भाग में स्थित है। यहाँ भी गेहूँ के उत्पादन के लिए लगभग सारी भौगोलिक परिस्थितियाँ उपलब्ध है। अतः यहाँ भी बड़े पैमाने पर व्यापार के लिए गेहूँ की खेती की जाती है।

5. आस्ट्रेलिया में डार्लिंग डाउन्स का मैदान:-

       आस्ट्रेलिया के डाउन्स क्षेत्र में गेहूँ की काफी उपज होती है। यहाँ गेहूँ के उत्पादन के लिए समतल मैदानी भाग, उत्तम मिट्टी तथा वैज्ञानिक ढंग से कृषि की सुविधा प्राप्त है। यहाँ गेहूँ के दो क्षेत्र हैं:

(i) दक्षिणी पूर्वी भाग जो विक्टोरिया तथा न्यूसाउथ वेल्स में है,

(ii) भूमध्य सागरीय जलवायु के प्रदेश में, जो पश्चिमी आस्ट्रेलिया में स्थित है।

16. The Reserve, Production and Distribution of Petroleum in the world (विश्व में पेट्रोलियम के भंडार, उत्पादन एवं वितरण)

16. The Reserve, Production and Distribution of Petroleum in the world

(विश्व में पेट्रोलियम के भंडार, उत्पादन एवं वितरण)



प्रश्न प्रारूप

Q. Describe the reserve, production and distribution of Petroleum in the world.

(विश्व में पेट्रोलियम के भंडार, उत्पादन एवं वितरण का वर्णन करें।)

उत्तर- पेट्रोलियम एक महत्त्वपूर्ण शक्ति का साधन है। इसका स्थान शक्ति के साधनों में कोयला के बाद है। यह केवल शक्ति का साधन ही नहीं अपितु कई उद्योगों का कच्चा माल भी है। वर्तमान युग में इसका महत्त्व और भी बढ़ गया है। अतः इसकी कीमत हमेशा बढ़ रही है।

   अन्तर्राष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार विश्व में पेट्रोलियम का कुल भण्डार 110 अरब मैट्रिक टन तेल की संचित राशि बताई गई है। इस राशि का तीन-चौथाई अर्थात् 76% भाग केवल एशिया महादेश में संचित है। इसमें दक्षिण-पश्चिम एशिया में विश्व के कुल भंडार का 66% भाग है। संयुक्त राज्य अमेरिका में 10%, लैटिन अमेरिका में 8%, अफ्रिका में 3%, पूर्वी एशिया में 4% तथा शेष 9% अन्य देशों में पाया जाता है। संसार के कुछ महत्त्वपूर्ण उत्पादक देश इस प्रकार हैं-

क्रम उत्पादक देश उत्पादन प्रतिशत
1. मध्य पूर्व 54.4 %
2. संयुक्त राज्य अमेरिका 15.5 %
3. पूर्वी यूरोपीय देश 14.6 %
4. लैटिन अमेरिका 14.5 %
5. अन्य देश 10.0 %
6. कुल विश्व 100.00 %

      Statistical year book-1991, संयुक्त राष्ट्र संघ, के अनुसार विश्व के प्रमुख देशों के उत्पादन तथा भंडार दिखाए गए हैं। इन देशों का महत्त्वपूर्ण स्थान है। इस प्रकार यह तालिका स्पष्ट करता है कि किस देश में तेल का उत्पादन तथा भंडार क्या है-

देश संचित भंडार (करोड़ टन में) विश्व के कुल भंडार का % कुल उत्पान करोड़ टन में) विश्व में कुल उत्पादन का %
सोवियत रूस 3080 2.8 61.5 23.2
संयुक्त राज्य अमेरिका 397 3.6 46.2 16.2
सऊदी अरब 2280 20.4 36.4 12.3
मेक्सिको 690 6.3 15.6 5.4
चीन 275 2.5 13.1 4.7
ईरान 780 7.1 9.8 3.7
वेनेज्वेला 105 1.00 10.6 3.4
इराक 410 3.7 8.3 3.0
कुवैत 880 8.0 7.6 2.6
इंडोनेशिया 675 6.1 7.2 2.5
संयुक्त अरब अमिरात 440 4.0 6.8 2.4
लीबिया 3.8 2.8 5.2 2.0
अन्य देश शेष  शेष  शेष  शेष
कुल विश्व 11000 100% 290.00 100%

     उपरोक्त तालिका से यह स्पष्ट होता है कि सोवियत रूप विश्व में पेट्रोलियम के उत्पादन में सबसे आगे है। केवल उत्पादन में ही नहीं अपितु संचित राशि में भी अग्रगण्य है। ऊपर से महत्त्वपूर्ण पाँच देश विश्व के पेट्रोलियम के उत्पादन के 85% भाग सोवियत रूस, U.S.A. सउदी अरब, मेक्सिको, ईरान, इराक आदि देशों से होता है। इस प्रकार ये देश तेल के उत्पादन में सर्वोपरि हैं।

1. सोवियत संघ-

     सोवियत संघ विश्व का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। उत्पादन तथा संचित भंडार दोनों दृष्टिकोणों से इसका स्थान विश्व में प्रथम है। सोवियत रूस के तीन क्षेत्रों में इसका विशेष उत्पादन होता है, जो निम्नलिखित हैं-

(i) वोल्गा-यूराल क्षेत्र- सोवियत रूस के कुल उत्पादन का 75% यहीं से होता है। इसके प्रमुख केन्द्र पर्म, उफा, कुडसेव आदि प्रमुख हैं।

(ii) बाकू क्षेत्र- इस प्रदेश को काकेशश क्षेत्र भी कहते हैं। इसके मुख्य प्रदेश बाकू, माखघकला, प्रोजनी, माइकोप, रशुका, कोसाहागिल आदि है।

(iii) अन्य क्षेत्र- इस प्रदेश में कई छोटे-छोटे तेल क्षेत्र आते हैं। इनमें एम्बा, तुर्कमेनिस्तान, कुंभदाग, चेलेकिन, पेचोरा, फरगन, साईबेरिया, सखालिन आदि सम्मिलित हैं।

2. संयुक्त राज्य अमेरिका-

    यह विश्व का दूसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है। यहाँ 4 लाख से अधिक तेल के कुएँ हैं। यह विश्व का सबसे अधिक तेल की खपत करता है। यहाँ के प्रमुख तेल क्षेत्र निम्न हैं-

(i) अप्लेशियन क्षेत्र।

(ii) लीमा-इडियाना क्षेत्र।

(iii) मध्यवर्ती क्षेत्र।

(iv) खाड़ी क्षेत्र।

(v) कैलिफोर्निया क्षेत्र।

3. सऊदी अरब-

    यह देश संचित राशि की दृष्टि से दूसरा तथा उत्पादन की दृष्टि से विश्व का तीसरा बड़ा देश है। यहाँ का तेल भंडार विश्व का 20% तथा उत्पादन 12-3% है। यहाँ तेल का क्षेत्र 3 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला है। यहाँ का प्रमुख तेल क्षेत्र धावर, अवकेक, ऐनदार, शेदगम, हरद, दम्मान, सफानियाँ कार्डिक, अबूसफा, फथीली आदि हैं। यहाँ से तेल रास तनुरा तेलशोधक कारखाने में भेजा जाता है। यहाँ से कच्चा तेल साफ होने के लिए भूमध्यसागर के तट पर हैको को भी भेजा जाता है। यह विश्व का बड़ा तेल उत्पादक देश बन सकता है।

4. ईरान-

    ईरान में कुल तेल का भंडार 65 अरब टन है। यह पूरे विश्व के भंडार का 7.8 प्रतिशत है। ईरान का वार्षिक तेल उत्पादन 30 अरब टन है। इसके मुख्य तेल कूप अजागरी, मस्जिदे सुलेमान, हफ्तेकेल, खानक्वीन, नफ्त खनाह, लाली, गुलखरी, बीबी हाकीमेह, करंज आदि हैं।

5. इराक-

    इसका भंडार 4.7 अरब टन तथा उत्पादन 10 करोड़ टन है। किरकुक तथा बसरा दो बड़े तेल क्षेत्र हैं। इसके अन्य तेल कूप नफ्तखनाह, वुटमाह तथा मइला है। यहाँ से तेल तेल पाइप द्वारा त्रिपोली तथा बनियास को भेजा जाता है।

6. कुवैत-

    इस छोटे देश के पास विश्व का 10% तेल का भंडार है। यहाँ का सबसे बड़ा तेल प्रदेश बुरधान का पहाड़ी-प्रदेश है। इसका वार्षिक उत्पादन 9 करोड़ टन है। यहाँ लगभग 105 तेल कूप हैं।

7. मध्यपूर्व के अन्य क्षेत्र-

    यहाँ के अन्य तेल उत्पादक देश संयुक्त अब अमिरात, ओमान, कतार आदि हैं। इन सभी देशों में प्रत्येक का उत्पादन एक करोड़ टन वार्षिक से अधिक है।

8. वेनेज्वेला-

     दक्षिणी अमेरिका में यह देश काफी महत्त्वपूर्ण है। कैरेबियन सागर के दक्षिण में यह क्षेत्र में स्थित है। यहाँ के तीन क्षेत्रों के उत्पादन होता है। यह इस प्रकार हैं-

(i) माराकैवो बेसिन

(ii) ओरिनिको बेसिन

(iii) आपुरो बेसिन।

      इस देश का वार्षिक उत्पादन 10 करोड़ टन है। यहाँ के कुल उत्पादन का 90% भाग निर्यात कर दिया जाता है।

9. भारत- भारत का अभी कुल उत्पादन 5 करोड़ टन हो गया है। यहाँ भी तीन क्षेत्रों में उत्पादन होता है-

(i) असम क्षेत्र में डिगबोई।

(ii) गुजरात-अंकलेश्वर क्षेत्र।

(iii) मुम्बई उच्च प्रदेश।

10. अन्य क्षेत्र- इनके अलावे एशिया में बर्मा, चीन, दक्षिणी अफ्रिका, अल्जिरिया, इन्डोनेशिया आदि से तेल का उत्पाद होता है।

19. The Chief characteristics and distribution of Plantation agriculture in the world (विश्व में बागानी या रोपण कृषि की मुख्य विशेषताएँ तथा वितरण)

19. The Chief characteristics and distribution of Plantation agriculture in the world

(विश्व में बागानी या रोपण कृषि की मुख्य विशेषताएँ तथा वितरण)



प्रश्न प्ररूप

Q. Discuss the chief characteristics and distribution of Plantation agriculture in the world.

(विश्व में बागानी या रोपण कृषि की मुख्य विशेषताओं तथा वितरण का वर्णन करें।)

उत्तर- बगानी या बगाती या रोपण कृषि, कृषि का एक विशिष्टीकृत रूप है जो मुख्य रूप से उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में ही की जाती है। इस प्रकार की कृषि में कोई एक ही फसल उत्पन्न की जाती है। यह फसल भी मुख्य रूप से बाजारों में बिक्री के लिए की जाती है। इन फसलों में रबड़, चाय, कहवा, गन्ना, केला, नारियल आदि प्रमुख हैं। इस प्रकार की कृषि को एक फसली (One-crop Mono-Culture) की खेती कहते हैं। कुछ विद्वान गन्ने को भी बगानी फसल मानते हैं किन्तु वास्तव में गन्ना बगानी फसल नहीं है।

बगानी कृषि के क्षेत्र-

(i) पश्चिमी द्वीप समूह में क्यूबा, जमाइका, पोर्टिरिको, आदि

(ii) मध्य अमेरिका में होण्डुरस, ग्वाटेमाला त्तथा कोस्टारिका

(iii) पश्चिमी अफ्रिका के गिनीतट, घाना आदि।

(iv) दक्षिण अफ्रिका में नेटाल आदि

(व) दक्षिणी एशिया में द० भारत, श्रीलंका, मलेशिया, इन्डोनेशिया आदि।

(vi) आस्ट्रेलिया में क्वींसलैंड क्षेत्र।

       इस प्रकार की रोपण (Plantation) कृषि में मुख्य रूप से यूरोपीय लोगों की पूँजी तथा प्रबंध क्षमता लगी हुई है। इस प्रकार की कृषि में मूल निवासी लोग श्रमिकों का काम करते हैं। इस प्रकार की कृषि प्रणाली में फसलों के उत्पादन में बहुत से प्रक्रम (Processes) ऐसे होते हैं जिनके लिए बड़ी सावधानी की आवश्यकता होती है। इस कृषि की विधियाँ बहुत ही दक्षतापूर्ण और वैज्ञानिक होती हैं। इसकी फसलों के लिए वैज्ञानिक प्रणाली तथा सावधानी बरती जाती है। इसके पौधे काफी नाजुक होते हैं।

     रोपण (Plantation) कृषि में उन फसलों का उत्पादन होता है जिसके पदार्थों के माँग पिछले दो शताब्दियों में नगरीय संस्कृति के विकास के साथ-साथ बढ़ती गई है। आज की वर्तमान आधुनिक दुनिया में पेय पदार्थों का महत्व बहुत बढ़ गया है। इनमें चाय, कॉफी, कोको काफी लोकप्रिय हो गए हैं। विश्व के उन्नत देशों में इन पदार्थों की काफी माँग है।

रोपण कृषि की विशेषताएँ-

     रोपण कृषि की कुछ मूलभूत विशेषताएँ इस प्रकार हैं-

(i) यह एक फसली (Mono culture) कृषि है। इसमें एक ही फसल के उत्पादन पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

(ii) इसमें अधिक पूँजी, उच्च प्रबंध और वैज्ञानिक विधियों का प्रयोग किया जाता है।

(iii) इसकी फसलें केवल बिक्री द्वारा मुद्रा प्राप्त करने के लिए उत्पन्न की जाती है।

(iv) अधिकतर उत्पादन व्यापार के लिए होता है। स्थानीय क्षेत्रों में इसका उपभोग बहुत ही, कम होता है।

(v) इसके अन्तर्गत खेत (Holdings) बहुत विस्तृत तथा खेती बड़े पैमाने पर की जाती है।

(vi) इसमें मानव श्रम की अधिक आवश्यकता पड़ती है।

(vii) इस कृषि पर बाजार-माँग की घट-बढ़ का और मूल्य में उतार-चढ़ाव का गहरा प्रभाव पड़ता है।

(viii) इस प्रकार की कृषि के लिए भारी पूँजी की आवश्यकता होती है क्योंकि रख-रखावों,, प्रक्रिया तथा यातायात में काफी खर्च पड़ता है।

(ix) इस कृषि की फसलों में बीमारी लगने का काफी भय रहता है। अतः फसल के खराब होने से बहुत हानि होती है।

(x) इस कृषि का बाजार सम्पूर्ण विश्व के नगरों में फैला हुआ है। अतः ग्रह फसल नगरीय सभ्यता तथा संस्कृति का द्योतक है।

(xi) यह एक महत्त्वपूर्ण मुद्रादायिणी फसल है।

     इस प्रकार की फसलों का उत्पादन प्रायः विकासशील या अविकसित क्षेत्रों में होता है। जैसे दक्षिणी अमेरिका, मध्य अफ्रिका, तथा दक्षिणी एशिया के अधिकतर देश या तो विकासशील हैं या अविकसित हैं, परन्तु इसका बाजार अधिकतर विकसित देशों के महानगरों में से है।

      इसका मुख्य खरीददार U.S.A., कनाडा तथा यूरोपीय महादेश के देश हैं। आस्ट्रेलिया भी इसका अच्छा बाजार है। इस प्रकार इसका उत्पादन उष्ण कटिबंधीय देशों में तथा इनकी बिक्री समशीतोष्ण तथा शीत प्रदेशों में है। उदाहरणस्वरूप विश्व में चाय का सबसे बड़ा निर्यातक भारत, श्रीलंका है। कॉफी का सबसे बड़ा निर्यातक ब्राजील है। परन्तु सबसे बड़ा आयातक U.S.A. तथा यूरोप के देश हैं।

विश्व में बगानी कृषि की फसलें तथा उनके क्षेत्र-

(1) रबड़- मौनसून एशिया में मलेशिया, इन्डोनेशिया, थाइलैंड, श्रीलंका, भारत, हिन्दचीन के देश- सिंगापुर, फिलीपीन, अफ्रिका- गिनी तट के देश घाना, नाइजीरिया, आइवरी कोस्ट आदि तया दक्षिणी अमेरिका में ब्राजील। 

(2) चाय- मौनसून एशिया में चीन, भारत, श्रीलंका, जापान, बंगलादेश, इन्डोनेशिया, मलेशिया आदि पश्चिमी एशिया में ईरान, दक्षिणी रूस आदि, अफ्रिका में केन्या, जायरे, जाम्बिया, तंजानियाँ आदि दक्षिणी अमेरिका में अर्जेन्टिना तथा ब्राजील।

(3) नारियल- दक्षिणी-पूर्वी एशिया के देश- इन देशों के समुद्र तटीय प्रदेश, भूमध्यरेखीय अफ्रिका तथा दक्षिणी अमेरिका के तटीय प्रदेश।

(4) कहवा- दक्षिणी अमेरिका में ब्राजील, कोलम्बिया, इक्वेडोर, वेनेज्वेला तथा पेरू, अफ्रिका में गिनी तट के देश-आइवरी कोस्ट, घाना, अंगोला, उगाण्डा, एथियोपिया, जैसे आदि तथा मौनसून एशिया में भारत, हिन्दचीन आदि।

(5) केला- मौनसून एशिया में भारत, फिलीपिन, हिन्देशिया, मलेशिया, सिंगापुर और अफ्रिका तथा दक्षिणी अमेरिका के भूमध्यरेखीय प्रदेश शामिल है।

(6) मसालें- मौनसून एशिया में भारत, श्रीलंका, मलेशिया तथा तंजानियाँ आदि। तंजानियाँ में जंजीवार द्वीप लौंग के उत्पादन के लिए विश्व प्रसिद्ध है।

(7) कोको- इसका सबसे बड़ा उत्पादक अफ्रिका महादेश है। इसमें अपर वोल्टा, घाना, नाइजीरिया आदि हैं। कोको का कुछ उत्पादन दक्षिणी अमेरिका के ब्राजील में भी होता है।

15. The Dairy farming in the world (विश्व में दुग्ध व्यवसाय)

15. The Dairy farming in the world

(विश्व में दुग्ध व्यवसाय)



प्रश्न प्रारूप

Q. Discuss the dairy farming in the world.

(विश्व में दुग्ध व्यवसाय का वर्णन करें।)

उत्तर- दूध पशुपालन विश्व के प्रत्येक देश में कुछ-न-कुछ होता है परन्तु कुछ भागों में यह व्यवसाय व्यापारिक स्तर पर किया जाता है। इन प्रदेशों में बड़े पैमाने पर पशुचारा तथा उनको खिलाने लायक अनाजों का उत्पादन होता है। आधुनिक समय में तीव्रगामी परिवहन तथा प्रशीतलन विधि से यह उद्योग और भी महत्त्वपूर्ण हो गया है। दुग्ध पशुपालन की कुछ विशेषताएँ इस प्रकार हैं-

(i) इस प्रकार की कृषि में दुधारु पशुओं का विशेष महत्त्व होता है।

(ii) इसमें अधिक पूँजी, प्रचुर श्रम तथा मवेशियों के रखने की वैज्ञानिक तरीकों का प्रयोग होता है।

(iii) कार्य के आकार एवं उपयोग में भिन्नता होती है।

(iv) दूध एवं दूध सामग्रियों का वितरण सापेक्ष दूरी के अनुसार होता है। ताजा दूध निकट के नगरों में तथा मक्खन एवं पनीर दूर के नगरों से प्राप्त किया जाता है।

(v) इस उद्योग में कुछ देशों ने विशेषीकरण प्राप्त कर लिया है।

(vi) इस उद्योग का विकास कम जनसंख्या वाले देशों में हुआ है।

(vii) यह व्यवसाय विश्व के समशीतोष्ण क्षेत्र में ही अधिक विकसित है।

विश्व में दुग्ध उत्पादन

       दूध की प्राप्ति गाय, भैंस, भेड़ तथा बकरी से होती है। खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) की 2021 की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 1988 में विश्व भर में कुल 53 करोड़ टन दूध का उत्पादन था। विश्व भर में कुल दूध उत्पादन में पिछले तीन दशकों में आश्चर्यजनक रूप से लगभग दोगुना से अधिक की बढ़ोत्तरी हुई है। 30 साल बाद अर्थात 2018 में कुल दुग्ध उत्पादन 84.3 करोड़ टन हो गया है। साधारण शब्दों में कहें तो तीन दशक के भीतर कुल दूध उत्पादन में लगभग 60 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है।

    दूध का उत्पादन विश्व में निम्नलिखित क्षेत्रों से होता है।

विश्व में शीर्ष 10 दुग्ध उत्पादक देश (2019)

क्रम  देश उत्पादन (प्रतिशत में)
1. भारत 21
2. अमेरिका 11
3. पाकिस्तान  06
4. ब्राजील 04
5. चीन  04
6. रूस  04
7. जर्मनी 04
8. तुर्की 03
9. फ्रांस 03
10. न्यूजीलैंड 02

प्रमुख क्षेत्र

    विश्व में पशुपालन के प्रमुख क्षेत्र इस प्रकार हैं-

(1) उत्तरी अमेरिका का U.S.A. तथा कनाडा का मध्य पूर्वी भाग।

(2) पश्चिमी यूरोप का उत्तरी भाग, फ्रांस, जर्मनी, हॉलैंड, डेनमार्क, ग्रेट ब्रिटेन तथा U.S.S.R का पश्चिमी भाग।

(3) दक्षिणी अमेरिका के अर्जेन्टाइना

(4) आस्ट्रेलिया एवं न्यूजीलैंड

(5) गौण क्षेत्र पश्चिमी U.S.A., मध्य चिली, द० अफ्रीका तथा पूर्वी जापान।

(1) उत्तरी अमेरिका:

     दूध कृषि व्यवसाय U.S.A. तथा कनाडा में विकसित हैं। यहाँ के सभी बड़े नगरों के पास ताजे दूध के लिए यह किया जाता है। इसका सबसे अधिक केन्द्रीकरण U.S.A. के मक्का पट्टी के उत्तर ग्रेट लेक्स तथा सेंट लारेंस प्रदेश में हुआ है। यह घनी शहरी आबादी के पास स्थित है, जहाँ दूध, मक्खन एवं पनीर की बड़ी माँग है। यहाँ भी अनुकूल जलवायु तथा पहाड़ी प्रदेश अन्य कृषि के लिए अनुपयुक्त हैं। यहाँ क्यूवेक एवं ओण्टोरियो में लगभग 4000 से अधिक पनीर बनाने के कारखाने हैं। कनाडा से पनीर ब्रिटेन भेजा जाता है।

    U.S.A. में दूध उत्पादक क्षेत्र अटलांटिक तट से लेकर प० में मिसौरी नदी तक फैला है। न्यू इंगलैंड स्टेट, पेन्सिलवानिया, न्यूयार्क एवं विस्कौन्सिन राज्यों में दूध उत्पादन अधिक होता है। यहाँ दूध उत्पादन के लिए निम्नलिखित सुविधाएँ प्राप्त हैं-

(i) ऊँची-नीची पहाड़ी भूमि पर पशु-चरण होता है।

(ii) ग्रीष्मकालीन वर्षा तथा कम गर्मी से घासें उगती है।

(iii) निकट की मक्का पट्टी से मकई से साइलेज बनाने की सुविधा।

(iv) निकट के बंदगाह से दूध पदार्थों के निर्यात की सुविधा

(v) समशीतोष्ण जलवायु के कारण दूध खराब नहीं होता है।

(vi) मशीनों का विभिन्न कार्यों में प्रयोग।

(vii) अच्छी नस्लों की जर्सी, गार्न से, आयर शायर आदि से अधिक दूध की प्राप्ति।

(viii) यातायात तथा शीतलन विधि की सुविधा।

     दूध तथा मक्खन के उत्पादन में U.S.A. का स्थान विश्व में रूस के बाद दूसरा तथा पनीर के उत्पादन में प्रथम है। इसने 1981 में विश्व का 15-6% दूध तथा मक्खन एवं 21-3% पनीर का उत्पादन किया।

(2) पश्चिम यूरोपीय प्रदेश:

    यह प्रदेश अच्छी मिट्टी एवं नम जलवायु के मुलायम घासों के लिये प्रसिद्ध है। यह दूध उत्पादन के लिए आदर्श है। यहाँ के दूध क्षेत्र प० फ्रांस, हॉलैंड, डेनमार्क, स्वेडन, ब्रिटेन तथा रूस तक फैला है।

    हॉलैंड में विशाल मैदान, नम जलवायु, उपजाऊ घास तथा उच्च गायों से अधिक दूध मिलता है। हॉलैंड का एडाम पनीर विश्व विख्यात है। डेनमार्क विश्व में सर्वश्रेष्ठ है। समस्त डेनमार्क एक गऊशाला है। यहाँ दूध की नदी बहती है। यहाँ के लोगों की यह मुख्य पेशा है। यहाँ के दूध विकास के निम्न कारण हैं-

(i) यहाँ खनिजों का अभाव है।

(ii) जलवायु नम एवं अनुकूल।

(iii) छोटे-छोटे खेतों में घास

(iv) खेती के स्थान पर घासों का उत्पादन

(v) यहाँ दुग्ध शालाएँ लगभग 8000 से अधिक सहकारी समितियाँ द्वारा संचालित।

(vi) यहाँ 80% मक्खन तथा 10% पनीर

(viii) गाएँ उत्तम नस्ल की है।

        आधुनिक युग में पशुपालन वैज्ञानिक तरीकों से व्यावसायिक आधार पर हो रहा है। उत्तरी अमेरिका का प्रेयरी क्षेत्र, ब्राजील का पठारी भाग और अर्जेण्टीना में विस्तृत पम्पास घास स्थल, वेनेजुएला का लानोस घास स्थल, दक्षिणी अफ्रीका का वेल्ड क्षेत्र, आस्ट्रेलिया तथा न्यूजीलैण्ड की शीतोष्ण घास भूमि, कैस्पियन सागर के पूर्व तथा अरल सागर के उत्तर के विस्तृत भाग व्यापारिक पशुपालन के उल्लेखनीय क्षेत्र हैं।

     व्यापारिक पशुपालन उद्योग पूर्णतया प्राकृतिक चरागाहों पर आश्रित नहीं है। विस्तृत क्षेत्रों में चारे की फसलों और पौष्टिक घासों की खेती की जाती है। पशुओं को सुख-सुविधा सम्पन्न बाड़ों में रखकर खिलाया-पिलाया जाता है। विशेष नस्ल के पशु पाले जाते हैं, जिनकी दूध या मांस उत्पादन क्षमता अत्यधिक होती है। पशुओं के प्रजनन, नस्ल सुधार, रोगों की रोकथाम तथा बीमार पशुओं के इलाज, आदि की ओर विशेष ध्यान दिया जाता है। पशुओं को बड़े-बड़े बाड़ों में रखा जाता है।

      डेनमार्क तथा न्यूजीलैण्ड में बड़े पैमाने पर दुग्ध व्यवसाय होता है। आस्ट्रेलिया तथा न्यूजीलैण्ड में भेड़ ऊन तथा मांस के लिए व्यापारिक स्तर पर पाली जाती हैं। व्यापारिक पशुचारण में लोगों को प्रवास नहीं करना पड़ता है। वे एक ही स्थान पर रहते हैं। चारे की फसलों की खेती तथा दूध और मांस से संसाधित पदार्थ बनाने के लिए मशीनों का अत्यधिक प्रयोग होता है। इन संसाधित पदार्थों का बाजार अन्तर्राष्ट्रीय है।

       भारत में डेरी कृषि का विकास सहकारी समितियों द्वारा किया जाता है। गुजरात की अमूल डेयरी इसका सबसे अच्छा उदाहरण है। अधिकांश राज्यों में डेयरी विकास बोर्ड बनाए गए हैं। झांसी में चारा शोध संस्थान तथा करनाल में डेरी शोध संस्थान का भी गठन किया गया है। भारत में अधिकांश दूध गायों से नहीं बल्कि भैंसों से प्राप्त किया जाता है।

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