24. Fisheries of Japan (जापान का मत्स्योत्पादन)

24. Fisheries of Japan

(जापान का मत्स्योत्पादन)



परिचय

    जापान एशिया के पूरब में स्थित प्रशांत महासागर में एक द्वीपीय देश है। जापान में प्राचीनकाल से ही कृषि, वानिकी, मत्स्य उत्पादन और कुटीर उद्योग अर्थव्यवस्था के प्रमुख आधार रहे हैं। हलांकि अपनी सीमित कृष्य भूमि के कारण जापानी किसान गहन कृषि के पक्षधर रहे हैं। फिर भी खाद्यान्नों की कमी को मछली की आपूर्ति से पूरा करते आ रहे हैं। आज भी भोजन के लिए जापान अपनी भूमि से पर्याप्त खाद्यान्न उत्पादित नहीं कर पाता है, फलतः मछली भोजन में अपना प्राधान्य बनाये हुए है।

मत्स्य उत्पादन:-

    जापान में मत्स्य उत्पादन के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ हैं जिसका प्रमुख कारण जापान के चुर्दिक विशाल जलराशि की उपस्थिति है। यही कारण कारण है कि जापान विश्व के तीन बड़े मछली पकड़ने वाले देशों में से एक हैं। 1959 से जापान विश्व का अग्रणी मछली पकड़ने वाला देश बन गया और 1993 के पश्चात् इसका स्थान प्रथम हो गया है। जापान में विश्व की 12.3 प्रतिशत मछलियाँ पकड़ी जाती हैं। मछलियों में सालमन, हेरिंग, कांड, ट्यूना, सिल्फश और हेल मुख्य हैं। इन विभिन्न प्रकार की मछलियों का उत्पादन 2005 में 115 लाख मीट्रिक टन से अधिक था।

     जापान में मत्स्य उत्पादन के विकास का मुख्य कारण यहाँ पाई जाने वाली अनुकूल परिस्थितियाँ और खाद्यान्न उत्पादन की कमी है। आर्कटिक सागर से आने वाली क्यूराइल की ठण्डी धारा और दक्षिण से ऊष्ण कटिबन्धीय क्यूरोशियो की गर्म धारा जहाँ एक-दूसरे से मिलती हैं वहाँ पर मछलियों के लिए अनुकूल खाद्य पदार्थ पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होते हैं। ये स्थान 45° उत्तरी अक्षांश के निकट पाये जाते हैं। इन स्थानों पर खूब प्लैंकटन घास उगती है जो मछलियों का प्रमुख खाद्य पदार्थ है।

       उत्तर में पाई जाने वाली मछलियों में सालमन, हेरिंग, कांड, केकड़े और हेल (ठण्डे जल की) तथा दक्षिण में टयूना, स्किपजैक, बोनिटो, मैकरे, सारडीन और सेल्फिश (गर्म जल की) प्रमुख मछलियाँ हैं।

मछली पकड़ने के प्रमुख क्षेत्र:-

       जापान में मछली पकड़ने के प्रमुख चार क्षेत्र हैं-

(i) होकैडो

(ii) उत्तर–पूर्वी होंशू क्षेत्र

(iii) क्यूशू, शिकोकू तथा दक्षिणी होंशू क्षेत्र

(iv) अन्य क्षेत्र

Fisheries of Japan

     होकैडो मछली पकड़ने में अग्रणी हैं, जहाँ समस्त जापान की 40 प्रतिशत मछलियाँ पकड़ी जाती हैं। पूर्वी टोहोके के चार बन्दरगाहों पर उत्तरी प्रशान्त महासागर और ओखोटस्क सागर में सालमन, हेरिंग, क्रैग, काड, हेल, मैकरेल इत्यादि मछलियाँ पकड़ी जाती हैं। तृतीय मछली पकड़ने का क्षेत्र उत्तरी क्यूशू में नागाशाकी और पश्चिमी होंशू में शिमोनोशेकी हैं, जहाँ पर जापान की 25 प्रतिशत मछलियाँ पकड़ी जाती हैं। टूना, नोनिटो, स्किप जैक, मैकरेल तथा हेल प्रमुख मछलियाँ हैं। मध्य होंशू के प्रशान्त महासागरीय तट पर टोकाई-काण्टो क्षेत्र में मछली पकड़ने के चार प्रमुख क्षेत्र हैं। 2005 में गहरे सागर से 30 प्रतिशत, उथले तटवर्ती सागर से 30 प्रतिशत एवं आन्तरिक सागर से 6 प्रतिशत मछलियाँ पकड़ी गईं।

     जापान में छोटे-छोटे मछुआरे छोटी-छोटी नौकाओं द्वारा तटीय भागों में मछलियाँ पकड़ते हैं, परन्तु बड़ी-बड़ी कम्पनियाँ सागर के सभी क्षेत्रों में मछलियाँ पकड़ती हैं। जापानियों द्वारा उत्तरी एवं दक्षिणी प्रशान्त महासागर, आस्ट्रेलिया के उत्तर-पूर्व में भूमध्य रेखीय क्षेत्र, पश्चिमी अफ्रीका और ब्राजील के अटलांटिक भूमध्य रेखीय क्षेत्र, हिन्द महासागर और अण्टार्कटिक क्षेत्रों में मछलियाँ पकड़ी जाती हैं।

     2005 में अण्टार्कटिक में हेल पकड़ने के लिए जापान के सात बड़े-बड़े जहाजी बेडे भेजे गये थे, जिनमें प्रत्येक के पास मछली पकड़ने वाली दस नौकाएं थीं। जापान में नये मछली पकड़ने के क्षेत्र भूमध्य रेखीय जल क्षेत्र हैं, जहाँ टूना और बोनिटो मछलियाँ पकड़ी जाती हैं। जापान में मत्स्य संस्कृति का विकास तेजी से हो रहा है। कैब, आक्टोपस, प्रान एवं एलोटेल का तेजी से उत्पादन हो रहा है। छोटे-छोटे तालाबों और सिंचित क्षेत्रों में भी मछली पालन का कार्य तीव्र गति से हो रहा है। टोकाई, इबारगी, नारा, एरिता तथा आन्तरिक सागर प्रमुख क्षेत्र है, जहाँ ट्राउट और सालमन पकड़ी जाती हैं।

       विश्व युद्ध के बाद जापान में मछली पकड़ने के प्रारूप में अन्तर आया है। जापान में मछली पकड़ने के लिए प्रयोग में आने वाली छोटी-छोटी नौकाओं की संख्या में कमी हो रही है, जबकि बड़ी-बड़ी नौकाओं की संख्या में उत्तरोत्तर वृद्धि हो रही है। यही कारण है कि वर्तमान समय में युद्ध के पूर्व की तुलना में दोगुनी मछलियाँ पकड़ी जा रही हैं। बड़ी-बड़ी नौकोओं में मछलियों का पता लगाने के लिए राडार तक लगे हुए हैं। मछुआरों को सहकारी समितियाँ वित्तीय सहायता प्रदान करती हैं। इसके अतिरिक्त जापान सरकार सस्ते ब्याज दर पर धन उपलब्ध कराकर इस उद्योग को प्रोत्साहित कर रही है। बड़ी नौकाओं की क्षमता इतनी अधिक है कि उनसे विश्व के किसी भी समुद्री क्षेत्र में मछली पकड़ी जा सकती है।

       इन सब प्रोत्साहन एवं सहायता के बावजूद मछुआरों की आय कृषकों की तुलना में बहुत कम है, परन्तु बड़ी-बड़ी नौकाओं के मछुआरों की आय अपेक्षाकृत अधिक है।

इन बड़ी नौकाओं के समक्ष सबसे बड़ी समस्या पड़ोसी देशों द्वारा अधिकृत जलीय क्षेत्र है। युद्ध से पूर्व जापानी नौकाएं ओखोटस्क सागर में मछली पकड़ती थीं परन्तु इस भाग पर रूस का अधिकार होने के कारण जापानी नौकाएं अब ओखोटस्क सागर में मछली नहीं पकड़ सकतीं हैं। इसी तरह कनाडा ने जापान के लिए 175° पूर्व देशान्तर, कोरिया के तट से 50 मील की दूरी तथा आस्ट्रेलिया का सम्पूर्ण महाद्वीपीय निमग्न तट के अन्दर जापानी नौकाओं का प्रवेश वर्जित कर रखा है।

        जापान द्वारा 90 प्रतिशत मछलियाँ प्रशान्त महासागर से 5 प्रतिशत आन्तरिक क्षेत्र से 4 प्रतिशत अटलांटिक सागर से और मात्र एक प्रतिशत हिन्द महासागर से प्राप्त की जाती हैं। स्पष्ट है कि गहरे समुद्र में मछली मारना जापानी मछुआरों के साहस और कौशल का प्रतीक है।

     मछली पकड़ने के प्रमुख बन्दरगाह जापान में यद्यपि मछली पकड़ने के छोटे-बड़े बन्दरगाहों की संख्या दो हजार है परन्तु इनमें चार बन्रगाहों का महत्त्वपूर्ण स्थान है। शिकोकू में सुडा, ओकायामा के तट पर स्थित टोमो, उत्तरी-पूर्वी टोहोकू में हाचीनोहे और होकैडो का कुशिरो बन्दरगाह अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है।

       सुडा बन्दरगाह में छोटी-छोटी नौकाओं द्वारा मछलियाँ पकड़ी जाती हैं। प्रातः काल से शाम तक पकड़ी गई मछलियाँ शाम तक समुद्री किनारे पर लाई जाती हैं। सारडीन, प्रान, आक्टोपस और सेल्फिस महत्त्वपूर्ण हैं। ओकायामा का तटीय बन्दरगाह जापान के अन्य छोटे-छोटे बन्दरगाहों की भाँति है। इस बन्दरगाह पर भी छोटी-छोटी नौकाओं का प्रयोग होता है। इन नौकाओं की संख्या लगभग 200 तथा स्वचालित नौकाओं की संख्या 100 से अधिक है।

       समूह में यहाँ के मछुआरे आन्तरिक सागर में मछली मारने जाते हैं और शाम तक वापस लौटते हैं। मकरेल, आक्टोपस, सेल्फिश आदि मुख्य मछलियाँ हैं। यहाँ की महिलाएं निर्यात के लिए मछलियों को डिब्बों, टोकरियों तथा जालों में बन्द करने का कार्य करती हैं। यह कार्य अंशकालिक होता है, क्योंकि कृषि कार्य के अवकाश में ही यह कार्य सम्भव होता है।

       हाचीनोहे, जो उत्तरी-पर्वी टोहोक में स्थित है मछली पकड़ने के लिए विख्यात हैं। यहाँ पर मछलियों का वार्षिक उत्पादन एक लाख टन से अधिक हैं। यहाँ पर मछली पकड़ने वाली नौकाओं की संख्या लगभग 2000 है, जिनका वजन 15 से 60 टन के मध्य है। इन पर 10 मछुआरे कार्य करते हैं। विभिन्न प्रकार के प्रकाश के माध्यम से मैकरेल आदि मछलियाँ पकड़ी जाती हैं जो विभिन्न प्रतिष्ठानों को भेजी जाती हैं, यहाँ से मछलियों का निर्यात चीन और दक्षिणी-पूर्वी एशियाई देशों को होता है।

     होकैडो का कुशिरो बन्दरगाह सबसे बड़ा मछली पकड़ने का केन्द्र है। यहाँ मैकरेल, सालमन, काड, हेरिंग आदि पकड़ी जाने वाले मुख्य मछलियाँ हैं। यहाँ पर नौकाओं की संख्या 20,000 है। प्रत्येक बेड़ों के पास मछली पकड़ने की 10 से 30 नौकाएं हैं। ये बेड़े उत्तरी प्रशान्त महासागर में मछली पकड़ने के लिए 3 महीने तक के लिए बाहर निकल जाते हैं और यहाँ पकड़ी गई मछलियाँ सम्बन्धित नौकाओं द्वारा बन्दरगाह को भेज दी जाती हैं।

जापान में मत्स्य उद्योग के विकास के कारण

        जापान में मत्स्य उद्योग के विकास के निम्न कारण हैं-

1. जापान उत्तर-पश्चिमी प्रशान्त महासागर के महाद्वीपीय निमग्न तट पर स्थित है, अतः यहाँ का उथला जलीय क्षेत्र प्लैक्टन से युक्त होने के कारण मछलियों की पकड़ने के लिए अनुकूल है।

2. जापान की अधिकांश जनसंख्या तटीय भागों में केन्द्रित है। यही कारण है कि तटीय भाग में लोग मछली पकड़ने के लिए प्रेरित होते हैं और भोजन में प्रयोग भी करते हैं।

3. जापान तट रेखा लम्बी एवं कटी-फटी है इसलिए इसे खाड़ियों का देश (Country of Bays) कहते हैं। अच्छे बन्दरगाहों से युक्त होने के कारण मछली पकड़ने के लिए प्राकृतिक सुविधाएं उपलब्ध हैं।

4. जापान की स्थिति खनिजों की कमी तथा कृषि योग्य भूमि की कमी आदि ने जापानियों को समुद्र का सहारा लेने के लिए बाध्य कर दिया है। यही कारण है कि यहाँ मछली उद्योग विकसित है।

5. जापान में पशुपालन के लिये चरागाह की कमी है, क्योंकि जापान का 85 प्रतिशत भाग पर्वतीय एवं पठारी है, जो निवास एवं कृषि के लिए अनुपयुक्त है। जापान के अधिकांश लोग बौद्ध धर्मावलम्बी हैं, जो माँस नहीं खाते हैं। इसलिए प्रोटीन के लिए मछलियाँ ही मुख्य आहार हैं।

6. आधुनिक तकनीक के विकास से गहरे समुद्र से मछली पकड़ने में सुविधा हुई है। इस कार्य को सफल बनाने में जापानी वैज्ञानिकों और तकनीक विशेषज्ञों ने सराहनीय कार्य किया है।

7. सरकारी प्रोत्साहन, बैंक सुविधा और सहकारी समितियों के कारण जापान में मत्स्य उत्पादन लगातार बढ़ता रहा है।

8. बढ़ती जनसंख्या के लिये भोजन जुटाना जापान की राष्ट्रीय समस्या है। इस समस्या के समाधान के लिये समुद्र की ओर मुड़ना स्वाभाविक है। जापान देश को खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बनाने की चेष्टा में मछली उत्पादन पर बल देता रहा है।



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25. The Distribution and Production of Coal in World (विश्व में कोयला के वितरण पवं उत्पादन)

25. The Distribution and Production of Coal in World

(विश्व में कोयला के वितरण पवं उत्पादन)



प्रश्न प्रारूप

Q. विश्व में कोयला के वितरण पवं उत्पादन पर प्रकाश डालें।

(Throw light on the distribution and production of coal in world.)

उत्तर- विश्व में कोयले का वितरण-

      आधुनिक अनुमानों के अनुसार विश्व में लगभग 10,009 करोड़ मीट्रिक टन कोयला संचित है, फिर भी इसका भण्डार प्रति वर्ष घटता-बढ़ता रहा है, क्योंकि बहुत सारे देशों में अभी सर्वेक्षण अपूर्ण है। यूरोप, उत्तरी अमेरिका और एशिया में ज्ञात भण्डार का 90 प्रतिशत कोयला सुरक्षित है, जबकि आस्ट्रेलिया, दक्षिणी अमेरिका और अफ्रीका का अंश मात्र 10 प्रतिशत है। सुरक्षित भण्डार के दृष्टिकोण से संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, चीन, भारत, आस्ट्रेलिया, अफ्रीका, ब्राजील और कनाडा अग्रणी देश हैं।

कोयला का उत्पादन:-

     विश्व में 1860 के बाद वृहद पैमाने पर कोयले का उत्पादन होने लगा। 1860 में विश्व का कुल उत्पादन मात्र बीस करोड़ मीट्रिक टन 1930 में 141 करोड़ मीट्रिक टन, 1960 में 262 करोड़ मीट्रिक टन और 1986 में 430 करोड़ मीट्रिक टन रह गया, लेकिन 2007 में पुनः बढ़कर 639.6 करोड़ मीट्रिक टन पहुँच गया।

     वर्तमान समय में अग्रणी उत्पादकों में चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका, भारत, आस्ट्रेलिया एवं रूस हैं, जो विश्व उत्पादन का 74.5 प्रतिशत से अधिक कोयला उत्पादित करते हैं। सर्वाधिक उच्च कोटि का कोयला भी इन्हीं देशों में उत्पादित होता है। अन्य प्रमुख उत्पादकों में दक्षिणी अफ्रीका, जर्मनी, पोलैण्ड, इण्डोनेशिया और कजाकिस्तान का सामूहिक उत्पादन 15 प्रतिशत है। इस प्रकार केवल 10 देश विश्व का 88.4 प्रतिशत कोयला उत्पादित करते हैं। गौण उत्पादकों में ब्राजील, कोलम्बिया, हंगरी और पूर्व यूगोस्लाविया है जहाँ का उत्पादन पचास लाख मीटरी टन से कम है।

उत्तरी अमेरिका:-

      उत्तरी अमेरिका में संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको विश्व का लगभग 18 प्रतिशत से अधिक कोयला उत्पादित करते हैं। यहाँ विश्व का 28 प्रतिशत से अधिक कोयला भण्डार सुरक्षित है।

संयुक्त राज्य अमेरिका:-

     संयुक्त राज्य अमेरिका में विश्व का 27.9 प्रतिशत कोयला भण्डार है। फलतः यह विश्व का अग्रणी देश है। 1970 तक इसका उत्पादन भी विश्व में सर्वाधिक 25.7 प्रतिशत था लेकिन संरक्षण नीति, अन्य ऊर्जा स्रोतों के अधिक उपयोग और चीन में कोयला उत्खनन में तीव्रता के कारण 2007 में इसका योगदान घटकर 16.2 प्रतिशत होने के फलस्वरूप विश्व में इसका स्थान दूसरा हो गया है।

        संयुक्त राज्य अमेरिका में तीन वृहद् कोयला उत्पादक क्षेत्र हैं जहाँ अधिकांश उच्च कोटि का कोयला उत्पादित होता है-

(1) अप्लेशियन क्षेत्र, जो देश के पूर्वी भाग में उत्तर-पूरब से दक्षिण-पश्चिम की लम्बाई में फैला है।

(2) आन्तरिक क्षेत्र, जो महान झीलों से खाड़ी तक कई टुकड़ों में वितरित है और

(3) वृहद् मैदानी क्षेत्र, जो रॉकी पर्वत के समानान्तर उत्तर से दक्षिण तक फैला है इन क्षेत्रों में अनेक लघु क्षेत्र भी हैं। साथ ही प्रशान्त तटीय क्षेत्र में भी कोयला उत्खनन होने लगा है।

प्रशान्त तटीय क्षेत्र:-

      इस क्षेत्र का विस्तार वाशिंगटन, ओरेगन और कैलीफोर्निया राज्यों में छिट-पुट रूप में है। जल विद्युत और पेट्रोलियम की स्पर्द्धा के कारण यहाँ बहुत कम उत्पादन होता है।

कनाडा:-

     उत्तरी अमेरिका का दूसरा प्रमुख कोयला उत्पादक देश कनाडा है। यहाँ 2007 में विश्व का 1.1 प्रतिशत कोयला उत्पादित हुआ था। यहाँ कोयले का उत्खनन मुख्यतः अलबर्टा, सस्केचवान एवं ब्रिटिश कोलम्बिया राज्यों में होता है। कठोर शीत ऋतु के कारण उत्खनन और परिवहन बाधित होते हैं। फिर भी यह अपनी आवश्यकता पूरा कर लेता है।

रूस:-

    रूस अधिक समय तक विश्व का तीसरा बड़ा कोयला उत्पादक देश था लेकिन 2007 में इसका अंशदान केवल 4.9 प्रतिशत था। उल्लेखनीय है कि सोवियत संघ के

विघटन के बाद इसका दक्षिणी क्षेत्र-यूक्रेन और मध्य एशिया विलग हो गये हैं, जिससे इसका योगदान 1970 में 20.2 प्रतिशत से घटकर 5.1 प्रतिशत हो गया है। वर्तमान समय में यूक्रेन 1.2 प्रतिशत, कजाकिस्तान 1.5 प्रतिशत और उजबेकिस्तान 0.2 प्रतिशत कोयला उत्पादित करते हैं। 1948 में विश्व कोयला उत्पादन में रूस का भाग मात्र बारह प्रतिशत था, जो 1960 में बढ़कर उन्नीस प्रतिशत हो गया। इस समय से इसके उत्पादन में धीरे-धीरे कमी आई है, क्योंकि तेल और गैस का प्रयोग बढ़ गया है। रूस का संचित भण्डार विशाल है।

     अनुमानतः विश्व का लगभग एक चौथाई सुरक्षित भंडार रूस और अलग हए देशों में हैं। अभी उत्पादन कुछ ही देशों में हो रहा है। फिर भी छोटे-बड़े 81 क्षेत्रों में उत्खनन होता है। यहाँ के प्रमुख उत्पादकों में 11 क्षेत्र विशेष उल्लेखनीय हैं।

(1) डोनवास क्षेत्र,

(2) कुजवास क्षेत्र,

(3) करागम बेसिन,

(4) मास्को क्षेत्र,

(5) यूराल क्षेत्र,

(6) काकेशस क्षेत्र,

(7) लीना बेसिन,

(8) येनीसी बेसिन,

(9) बैकाल झील क्षेत्र,

(10) अरटम सूचन क्षेत्र और

(11) सखालीन क्षेत्र

एशिया:-

     एशिया महाद्वीप के देशों में विश्व का लगभग 32 प्रतिशत कोयला भंडार है, जिसमें चीन, भारत, इण्डोनेशिया और जापान अग्रणी देश हैं। उत्पादन की तीव्रगति के कारण चीन विश्व का अग्रणी कोयला उत्पादक देश बन गया है।

चीन:-

     हाल के दशकों में चीन कोयला के उत्पादन में जिस तीव्रगति से आगे बढ़ा है, वह एक उदाहरण बन गया है। 1970 तक यह कोयला उत्पादन में तीसरे स्थान पर था, लेकिन 1990 में यह विश्व का प्रथम देश बन गया। वर्तमान अनुमानों के अनुसार इसका संचित भंडार विश्व का 13 प्रतिशत है। 2007 में यहाँ का उत्पादन 253.7 करोड़ मीटरी टन हो गया, जो विश्व का 39.7 प्रतिशत है। यहाँ का अधिकांश कोयला बिटुमिनस एवं एन्थ्रासाइट किस्म का है।

भारत:-

    यह विश्व का तीसरा बड़ा कोयला उत्पादक देश बन गया है। 2007 में यहाँ का उत्पादन 47.8 करोड़ मीट्रिक टन से अधिक था जो विश्व उत्पादन का 7.5 प्रतिशत होता है। 1900 में भारत का उत्पादन मात्र 60 लाख मीट्रिक टन था, जो बढ़कर 1957 में 349, 1971 में 743 और 1986 में 1574 लाख मीट्रिक टन हो गया। 2000- 2001 में तो इसका उत्पादन 3096 लाख टन तक पहुँच गया। स्पष्ट है कि भारत में कोयले का उत्पादन बहुत तेजी से बढ़ा है। यहाँ अधिकांश कोयला गोण्डवाना युग का है। तृतीय युग का कोयला भूरा या लिग्नाइट वर्ग का है।

     भारत में कोयला भण्डार का सर्वेक्षण अपूर्ण है फिर भी अनुमानों के अनुसार यहाँ लगभग 21.390 मीट्रिक टन कोयले का संचित भंडार है, जो विश्व के संचित भंडार का 10 प्रतिशत से अधिक है।

एशिया के अन्य कोयला उत्पादक देश-

    चीन और भारत के बाद इण्डोनेशिया, उत्तरी कोरिया, जापान, दक्षिण कोरिया, वियतनाम और तुर्की एशिया में अन्य प्रमुख कोयला उत्पादक देश हैं। उत्तरी कोरिया प्रतिवर्ष 620 लाख मीट्रिक टन एवं तुर्की 391 लाख मीट्रिक टन कोयले का उत्पादन करते हैं। जापान अपनी खपत का एक लघु अंश ही उत्पादित करता है। फलस्वरूप इसे कोयले का आयात करना पड़ता है।

यूरोप:-

    प्रारंभ से ही यूरोप कोयला उत्पादन में अग्रणी रहा है। आज यहाँ विश्व भंडार का केवल 16 प्रतिशत कोयला सुरक्षित रह गया है। विश्व उत्पादन का लगभग एक-चौथाई कोयला यूरोपीय देशों में निकाला जा रहा है। यहाँ कुछ न कुछ कोयला सभी देशों में पाया जाता है लेकिन महाद्वीप के कुल उत्पादन का 80 प्रतिशत केवल जर्मनी, यूनान, पोलैण्ड, ब्रिटेन, पूर्व यूगोस्लाविया, रोमानिया, बुल्गारिया, चेकोस्लोवाकिया, बेल्जियम और फ्रांस में उत्पादित होता है।

जर्मनी:-

     यूरोप के कोयला उत्पादकों में जर्मनी का योगदान महत्त्वपूर्ण हो गया है। 2007 में जर्मनी का उत्तम कोटि का उत्पादन 2019 लाख मीट्रिक टन था, जो विश्व उत्पादन का 3.2 प्रतिशत है, जबकि 1970 में इसका योगदान विश्व उत्पादन में 6.5 प्रतिशत था। स्पष्ट है कि इसका उत्पादन संरक्षण नीति के कारण संतुलित है। यहाँ अब कुल ऊर्जा का 55 प्रतिशत तेल से पूरा किया जा रहा है। संचित भंडार की दृष्टि से यह यूरोप का प्रथम देश है। यहाँ उत्तम कोटि और सामान्य वर्ग दोनों तरह के कोयले का विशाल भंडार है। अधिकांश प्रयोग ताप-विद्युत, कृत्रिम पेट्रोल, कृत्रिम रबर और विविध रसायन उद्योगों में किया जाता है।

पोलैण्ड:-

    कोयले के उत्पादन के पोलैण्ड विश्व का सबसे बड़ा देश है। यहाँ 2007 में 1458 लाख मीटरी टन उच्च कोटि के कोयले का उत्पादन हुआ था, जो विश्व उत्पादन का 23 प्रतिशत है। वर्तमान समय में जर्मनी के बाद पोलैण्ड यूरोप का सबसे बड़ा कोयला उत्पादक देश है। कुछ समय पूर्व ब्रिटेन प्रमुख उत्पादक था, लेकिन अब वहाँ भंडार कम जाने के कारण संरक्षण नीति अपनाई गई है। पोलैण्ड का प्रधान कोयला क्षेत्र साइलेसिया है जहाँ उत्तम किस्म का बिटुमिनस कोयला निकाला जाता है। इस क्षेत्र के अतिरिक्त जापान क्षेत्र दूसरा प्रमुख, उत्पादक है। जर्मनी की सीमा के निकट लिग्नाइट की खानें हैं।

ब्रिटेन:-

     कोयले के उत्पादन में पहले ब्रिटेन एक अग्रणी देश था लेकिन अन्य देशों में उत्पादन बढ़ जाने से इसकी सापेक्षिक स्थिति बदलती गई। 1970 में यहाँ 1470 लाख मीट्रिक टन उत्तम कोटि का कोयला उत्पादित हुआ था लेकिन घटता भंडार, बढ़ता उत्पादन व्यय, खनिज तेल का अधिक प्रयोग आदि के कारण 2007 में इसका उत्पादन केवल 257 लाख मीट्रिक टन रह गया। ग्रेट ब्रिटेन में पाँच प्रधान कोयला उत्पादक क्षेत्र हैं जहाँ से देश का तीन-चौथाई से अधिक कोयला प्राप्त होता है, यथा-यार्कशायर-नाटिंघम-डर्बी क्षेत्र, नार्थम्बरलैण्ड-डरहम क्षेत्र, लंकाशायर क्षेत्र, दक्षिणी वेल्स और क्लाइड घाटी क्षेत्र। इनके अतिरिक्त पन्द्रह छोटे-छोटे क्षेत्र भी कोयले का उत्पादन करते हैं।

यार्कशायर-नाटिंगघम-डर्बी क्षेत्र-

     यह ब्रिटेन का सर्वश्रेष्ठ कोयला उत्पादक क्षेत्र है, जो लगभग पाँच हजार वर्ग कि०मी० क्षेत्र में फैला है। यहाँ का उत्पादन कपड़ा, इस्पात और इंजीनियरिंग उद्योगों में प्रयुक्त होता है।

नार्थम्बर लैण्ड-डरहम क्षेत्र-

  यह ब्रिटेन का दूसरा प्रमुख कोयला उत्पादक क्षेत्र है। इंगलैण्ड के पूर्वी छोर पर स्थित इस क्षेत्र से उत्तम कोटि का बिटुमिनस कोयला प्राप्त किया जाता है, अधिकांश उत्पादन समीपवर्ती औद्योगिक क्षेत्रों में खप जाता है। यहाँ के कोयले से उत्तम कोटि का कोक बनाया जाता है।

यूनान-

   हाल के वर्षों में यूनान का कोयला उत्पादन तेजी से बढ़ा है। 2007 में यहाँ 625 लाख टन कोयला उत्पादित हुआ था। जो विश्व उत्पादन का 1.0 प्रतिशत है। यहाँ मध्यम किस्म का कोयला उत्पादित होता है।

चेक गणराज्य-

   यह यूरोप का चौथा बड़ा और विश्व का पन्द्रहवाँ बड़ा कोयला उत्पादक देश है। 2007 में यहाँ 626 लाख मीट्रिक टन कोयले का उत्पादन हुआ था, जो विश्व का एक प्रतिशत से कम है।

रोमानिया-

       यूरोपीय देशों में रोमानिया का कोयला उत्पादन तेजी से बढ़ा है जिसके कारण यह यूरोप का पाँचवां बड़ा कोयला उत्पादक देश बन गया है। 2007 में यहाँ विश्व का 0.5 प्रतिशत कोयला उत्पादित हुआ था। 1970 से ही इसका उत्पादन अपनी आवश्यकता के अनुकूल होता रहा है।

बुल्गेरिया-

     यूरोप का छठवां और विश्व का अठारहवाँ बड़ा कोयला उत्पादक देश है, जहाँ विश्व का मात्र 0.2 प्रतिशत कोयला उत्पादित होता है।

पूर्व युगोस्लाविया-

      यह यूरोप का सातवां और विश्व का उन्नीसवां बड़ा उत्पादक देश है। 2007 में यहाँ 60 लाख मीट्रिक टन उत्तम किस्म का तथा 932 लाख मीट्रिक टन लिग्नाइट का उत्पादन हुआ था, जो विश्व उत्पादन का 0.2 प्रतिशत था। यहाँ के प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में पिलजेन और साइलेशिया है जहाँ से देश का अधिकांश उत्पादन प्राप्त किया जाता है।

अन्य यूरोपीय उत्पादक देश-

      यूरोप के अन्य प्रमुख उत्पादकों में फ्रान्स, बेल्जियम, नीदरलैण्ड, हंगरी और स्पेन विशेष उल्लेखनीय है। 2007 में फ्रांस का उत्पादन केवल 70 लाख मीट्रिक टन था। इसका अधिकांश उत्पादन केवल 70 लाख मीट्रिक टन था। इसका अधिकांश उत्पादन फ्रेंको बेल्जियम क्षेत्र, लारेन पठारी क्षेत्र, लीकूसोट तथा अटिपे कोयला क्षेत्र से प्राप्त किया जाता है।

    बेल्जियम का उत्पादन 2007 में 10 लाख मीट्रिक टन उत्तम कोटि का और 249 लाख मीट्रिक टन लिग्नाइट था। इसका अधिकांश उत्पादन फ्रैंको बेल्जियम एवं कैम्पाइन क्षेत्रों से प्राप्त किया जाता है। नीदरलैण्ड में लिम्बर्ग बेसिन और जील बेसिन प्रमुख कोयला उत्पादक क्षेत्र हैं।

दक्षिणी अफ्रीका संघ

   यह विश्व का छठवां बड़ा कोयला उत्पादक देश है। 2007 में इसका उत्पादन 2694 लाख मीट्रिक टन था, जो विश्व का 4.2 प्रतिशत होता है। इसका संचित भंडार भी पर्याप्त है। यहाँ के प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में ट्रांसवाल और नेटाल राज्य अग्रणी हैं, जहाँ से देश का 85 प्रतिशत कोयला प्राप्त किया जाता है। यहाँ अधिकांशतः

उच्च कोटि का बिटुमिनस कोयला निकाला जाता है, जो निर्यात किया जाता है।

आस्ट्रेलिया-

     यह विश्व का चौथा बड़ा कोयला उत्पादक देश बन गया है। 1970 में 420 लाख मीट्रिक टन कोयले का उत्पादन हुआ था, जो बढ़कर 2007 में 3939 लाख मीट्रिक टन हो गया। यह प्रतिवर्ष 293 लाख मीट्रिक टन लिग्नाइट का उत्पादन भी करता है। साथ ही यहाँ विश्व का 1.4 प्रतिशत कोयला भंडार संचित है, जिसमें अधिकांश उच्च कोटि का है। यहाँ के उत्पादन का अस्सी प्रतिशत कोयला न्यूसाउथ वेल्स की खानों से प्राप्त होता है। प्रसिद्ध खदानों में न्यूकौंसिल की उत्तरी खदान, लिथस की पश्चिमी खदान तथा कैम्बला बंदरगाह के समीप की पश्चिमी खदान विशेष उल्लेखनीय है।



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18. Cyclone and Anti cyclone (चक्रवात एवं प्रति चक्रवात)

18. Cyclone and Anti cyclone

(चक्रवात एवं प्रति चक्रवात)



1. चक्रवात की उत्पत्ति किस प्रकार होती है?

(a) दो विभिन्न वायुराशियों के मिलने से

(b) दो भिन्न तापमान वाली वायुराशियों के मिलने से

(c) वायुमण्डलीय दशाओं में असाधारण परिवर्तन से

(d) उपर्युक्त सभी

2. चक्रवात की दिशा क्या होती है?

(a) उत्तरी गोलार्द्ध में घड़ी की सूई के विपरीत और दक्षिणी गोलार्द्ध में घड़ी की सूई के अनुकूल

(b) उत्तरी गोलार्द्ध में घड़ी की सूई के अनुकूल और दक्षिणी गोलार्द्ध में घड़ी की सूई के विपरीत

(c) उत्तरी गोलार्द्ध में घड़ी की सूई के विपरीत और दक्षिणी गोलार्द्ध में भी घड़ी की सूई के विपरीत

(d) उत्तरी गोलार्द्ध तथा दक्षिणी गोलार्द्ध दोनों में घड़ी की सूई के अनुकूल

3. चक्रवात की आकृति इनमें से किस प्रकार की होती है?

(a) अण्डाकार

(b) त्रिभुजाकार

(c) गोलाकार

(d) उपर्युक्त सभी

4. चक्रवात का शान्त क्षेत्र क्या कहलाता है?

(a) चक्षु

(b) गर्त

(c) परिक्षेत्र

(d) केन्द्र

5. चक्रवात की ‘आँख’ एक विशेषता है-

(a) उष्ण कटिबंधीय चक्रवात की

(b) प्रतिचक्रवात की

(c) उष्णार्द्र चक्रवात की

(d) आक्लूडेड वाताग्र की

6. उत्तरी गोलार्द्ध में चक्रवात की वायु की दिशा होती है-

(a) दक्षिणावर्त

(b) वामावर्त

(c) पश्चिम से पूर्व

(d) पूर्व से पश्चिम

7. दक्षिणी गोलार्द्ध में चक्रवात की वायु की दिशा होती है-

(a) घड़ी की सूई के अनुकूल

(b) घड़ी की सूई के विपरीत

(c) कोई निश्चित दिशा नहीं

(d) इनमें से कोई नहीं

8. टी-मापक (T-Scale) पर निम्न में से किसका मापन किया जाता है?

(a) भूकम्पीय तरंग

(b) पवनों की गति

(c) चक्रवातों की शक्ति

(d) वर्षा की मात्रा

9. फिलीपीन्स, जापान तथा चीन सागर में जो उष्ण कटिबन्धीय चक्रवातीय तूफान आते हैं उन्हें क्या कहा जाता है?

(a) हरिकेन

(b) टारनेडो

(c) टायफून

(d) विलीविली

10. हरिकेन चलते हैं-

(a) यूरोप में

(b) चीन सागर में

(c) सहारा मरुस्थल में

(d) मिसीसिपी घाटी में

11. निम्नलिखित में से कौन-सा देश टायफून से प्रभावित रहता है?

(a) होंडरास एवं ग्वाटेमाला

(b) फिलीपींस एवं जापान

(c) बांग्लादेश

(d) मिसीसिपी घाटी

12. उष्ण कटिबन्धीय चक्रवातों को आस्ट्रेलिया में किस नाम से जाना जाता है?

(a) टायफून

(b) हरिकेन

(c) टोरनेडो

(d) विलीविली

13. निम्न में से किस हवा में चक्रवातीय गति का अभाव पाया जाता है?

(a) हरिकेन

(b) टारनेडो

(c) पापागयो

(d) टाइफून

14. चक्रवातों की उत्पत्ति से सम्बन्धित भंवर सिद्धान्त (Eddy theory) के प्रतिपादक कौन हैं?

(a) बर्कनीज

(b) लैम्फर्ट

(c) नेपियर शॉ

(d) उपर्युक्त में कोई नहीं

15. टारनेडो का मुख्य सम्बन्ध है-

(a) उत्तरी अमरीका से

(b) उत्तरी यूरोप से

(c) चीन से

(d) दक्षिण अफ्रीका से

16. चक्रवातों की उत्पत्ति से सम्बन्धित ध्रुवीय वाताग्र सिद्धान्त का प्रतिपादन निम्नलिखित में से किसके द्वारा किया गया है?

(a) नेपियर शॉ तथा लैम्फर्ट

(b) जे० बर्कनीज

(c) फिट्जेराय

(d) टॉर बरांरान

17. निम्नलिखित में से कौन-सा सिद्धान्त चक्रवातों की उत्पत्ति की व्याख्या नहीं करता है?

(a) प्रगामी तरंग सिद्धान्त

(b) ध्रुवीय वाताग्र सिद्धान्त

(c) भंवर सिद्धान्त

(d) गतिक सिद्धान्त

18. टाइफून नामक चक्रवात से कौन-सा क्षेत्र प्रभावित होता है?

(a) आस्ट्रेलिया

(b) चीन सागर

(c) पश्चिमी द्वीप समूह क्षेत्र

(d) उपर्युक्त सभी

19. सुमेलित कीजिए-

सूची-I             सूची-II

A. टायफून    1. चीन

B. विलीविली 2. आस्ट्रेलिया

C. हरिकेन     3. यू० एस० ए०

D. टॉरनेडो     4. कैरीबियन सागर

कूट: A B C D

(a)  1 2 3 4

(b)  1 2 4 3

(c)  3 2 4 1

(d)  1 3 4 2

20. प्रतिचक्रवात की विशेषता है-

(a) तापमान में वृद्धि

(b) स्वच्छ आसमान

(c) तेज पवन

(d) तीव्र दृष्टि

21. उच्च दबाब वाली हवाएँ जो केन्द्र से बाहर की ओर चलती है, क्या कहलाती है?

(a) चक्रवात

(b) तूफान

(c) प्रतिचक्रवात

(d) इनमें से कोई नहीं

22. प्रतिचक्रवात में वायुदाब कहाँ अधिक होता है?

(a) केन्द्र में

(b) मध्य में

(c) बाहर की ओर

(d) कहीं नहीं

23. प्रतिचक्रवात किस क्षेत्र में कम उत्पन्न होते हैं?

(a) भूमध्य रेखीय क्षेत्र

(b) मरुस्थलीय क्षेत्र

(c) आर्कटिक क्षेत्र

(d) शीतोष्ण कटिबंधीय क्षेत्र

24. प्रतिचक्रवात किस क्षेत्र में अधिक उत्पन्न होते हैं?

(a) भूमध्य रेखीय क्षेत्र

(b) मरुस्थलीय क्षेत्र

(c) आर्कटिक क्षेत्र

(d) उपोष्ण कटिबंधीय उच्च दाब क्षेत्र

25. प्रतिचक्रवात चक्रवात की तुलना में होते हैं-

(a) छोटे

(b) बड़े

(c) बराबर

(d) बहुत छोटे

26. प्रतिचक्रवात की आकृति सामान्यतः होती है-

(a) गोलाकार

(c) त्रिभुजाकार

(b) अंडाकार

(d) उपर्युक्त सभी

27. प्रतिचक्रवात में वायु की दिशा होती है-

(a) उत्तरी गोलार्द्ध में घड़ी की सूइयों के अनुकूल तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में घड़ी की सूईयों के विपरीत

(b) उत्तरी गोलार्द्ध में घड़ी की सूईयों के विपरीत तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में घड़ी की सूईयों के अनुकूल

(c) दोनों गोलाद्धों में घड़ी की सूईयों के अनुकूल

(d) दोनों गोलाद्धों में घड़ी की सूईयों के विपरीत

28. प्रतिचक्रवात के सम्बन्ध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?

(a) प्रतिचक्रवात में केन्द्र में उच्च दाब पाया जाता है।

(b) चक्रवात की तुलना में इसका आकार छोटा होता है।

(c) प्रतिचक्रवात में सामान्यतः वर्षा अधिक होता है।

(d) प्रतिचक्रवात में सामान्यतः वर्षा का अभाव होता है।

29. निम्नलिखित में कौन सर्वाधिक विनाशकारी होता है?

(a) तड़ित झंझा

(b) हरिकेन

(c) टायफून

(d) टॉरनेडो

30. टॉरनेडो है

(a) एक अति उच्च दाब केन्द्र

(b) एक अति निम्न दाब केन्द्र

(c) एक अति उच्च समुद्री लहर

(d) एक भूमण्डलीय पवन

31. डोलड्रम क्या है?

(a) व्यापारिक हवाएँ

(b) भूमध्य रेखा के आसपास अल्प दाब का क्षेत्र

(c) बहुत अधिक आर्द्रता वाला क्षेत्र

(d) शान्त समुद्रों वाला क्षेत्र

24. Ocean Floor (महासागरीय नितल)

24. Ocean Floor

(महासागरीय नितल)



1. समस्त पृथ्वी के क्षेत्रफल का कितना प्रतिशत भाग जल से आच्छादित है?

(a) 29% 

(b) 71%

(c) 75%

(d) 79%

2. उत्तरी गोलार्द्ध में जलमण्डल का विस्तार का प्रतिशत कितना है?

(a) 60%

(b) 63%

(c) 60.7%

(d) 80.9%

3. दक्षिणी गोलार्द्ध में जलमण्डल का विस्तार का प्रतिशत कितना है?

(a) 60%

(b) 63%

(c) 80.9%

(d) 82.8%

4. महाद्वीपों से महासागरों की ओर जाने पर महासागरीय नितलों का कौन- सा क्रम सही है?

(a) महाद्वीपीय मग्न तट, गहरे सागरीय मैदान, महाद्वीपीय मग्न ढाल, महासागरीय गर्त

(b) गहरे सागरीय मैदान, महासागरीय गर्त, महाद्वीपीय मग्न तट, महाद्वीपीय मग्न ढाल

(c) महाद्वीपीय मग्न ढाल, महाद्वीपीय मग्न तट, गहरे सागरीय मैदान, महासागरीय गर्त

(d) महाद्वीपीय मग्न तट, महाद्वीपीय मग्न ढाल, गहरे सागरीय मैदान, महासागरीय गर्त

5. सागर की ओर तीव्र ढाल वाला भाग क्या कहलाता है-

(a) महासागरीय गर्त

(b) गहन सागरीय ढाल

(c) महाद्वीपीय मग्न तट

(d) महाद्वीपीय मग्न ढाल

6. महाद्वीपीय मग्न तट तथा गहरे सागरीय मैदान के मध्य स्थित होता है-

(a) महाद्वीपीय मग्न ढाल

(b) महासागरीय गर्त

(c) महाद्वीपीय मग्न तट

(d) इनमें से कोई नहीं

7. घटते क्षेत्रफल के आधार पर निम्नलिखित का सही अवरोही क्रम क्या होगा?

I. गहन सागरीय मैदान

II. महाद्वीपीय मग्न ढाल

III. महासागरीय गर्त

IV. महाद्वीपीय मग्न तट

कूट :

(a) I, II, III, IV

(b) 1, IV, II, III

(c) I, II, IV, III

(d) I, IV, III, II

8. सम्पूर्ण महासागरीय क्षेत्रफल के कितने प्रतिशत भाग पर महाद्वीपीय मग्न तट का विस्तार है?

(a) 6.5%

(b) 7.5%

(c) 8.5%

(d) 9.5%

9. महाद्वीपीय मग्न तट के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?

(a) यह संरचना की दृष्टि से महाद्वीप का अंग है।

(b) इसकी औसत गहराई लगभग 200 मीटर है।

(c) इसका सर्वाधिक विस्तार प्रशान्त महासागर में है।

(d) इसकी औसत ढाल लगभग 1° है।

10. महाद्वीपीय मग्न तट का सर्वाधिक विस्तार किस महासागर में पाया जाता है?

(a) प्रशान्त महासागर

(b) हिन्द महासागर

(c) अटलांटिक महासागर

(d) आर्कटिक महासागर

11. अधिकांश मछलियों एवं अन्य समुद्री आहार मुख्यतः प्राप्त किये जाते हैं-

(a) महाद्वीपीय मग्न तट से

(b) महाद्वीपीय उभार से

(c) महाद्वीपीय मग्न ढाल से

(d) गहन सागरीय मैदान से

12. विश्व का सर्वाधिक चौड़ा महाद्वीपीय मग्न तट किस महासागर में स्थित है?

(a) प्रशान्त महासागर

(b) अटलांटिक महासागर

(c) आर्कटिक महासागर

(d) हिन्द महासागर

13. भूमि का वह डूबा हुआ भाग जो महाद्वीप में जुड़ा होता है और 600 फीट से अधिक गहरा नहीं होता है, उसे कहते हैं

(a) महाद्वीपीय मग्न तट

(b) महाद्वीपीय द्वीप

(c) महाद्वीपीय मग्न ढाल

(d) मूंगा द्वीप

14. तट के किनारे जिन क्षेत्रों में पर्वत पाये जाते हैं, वहाँ महाद्वीपीय मग्न तट है-

(a) काफी चौड़ा

(b) संकरा

(c) कटा-छटा

(d) उथला

15. विश्व के कुल खनिज तेल तथा प्राकृतिक गैस के उत्पादन का कितना प्रतिशत भाग महाद्वीपीय मग्न तट से प्राप्त होता है?

(a) 10%

(b) 20%

(c) 25%

(d) 40%

16. महाद्वीपीय मग्न ढाल के सम्बन्ध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?

(a) यह महाद्वीपीय मग्न तट तथा महासागरीय गम्भीर मैदान के बीच स्थित होता है।

(b) इसकी गहराई 200 मीटर से 2000 मीटर तथा औसत ढाल 2° से 5° होती है।

(c) इसे महाद्वीपों की अन्तिम सीमा कहा जाता है।

(d) इनमें से कोई नहीं

17. सम्पूर्ण महासागरीय क्षेत्रफल के कितने प्रतिशत भाग पर महाद्वीपीय मग्न ढाल का विस्तार पाया जाता है?

(a) 5.5%

(b) 6.5%

(c) 7.5%

(d) 8.5%

18. सम्पूर्ण महासागरीय क्षेत्रफल के कितने प्रतिशत भाग पर गम्भीर सागरीय मैदान का विस्तार पाया जाता है?

(a) 71%

(b) 76%

(c) 80%

(d) 82%

19. गम्भीर सागरीय मैदान का सर्वाधिक विस्तार किस महासागर में पाया जाता है ?

(a) प्रशान्त महासागर

(b) हिन्द महासागर

(c) अटलांटिक महासागर

(d) आर्कटिक महासागर

20. गम्भीर सागरीय मैदान के सम्बन्ध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

(a) इसके अन्तर्गत सम्पूर्ण महासागरीय क्षेत्रफल का लगभग तीन चौथाई भाग आता है।

(b) इसकी गहराई 3000 से 6000 मीटर होती है।

(c) इसका सर्वाधिक विस्तार 20° उत्तरी अक्षांश से 60° दक्षिणी अक्षांश के बीच पाया जाता है।

(d) उपर्युक्त सभी

21. महासागरीय गर्तों की सर्वाधिक संख्या किस महासागर में है?

(a) प्रशान्त महासागर

(b) हिन्द महासागर

(c) अटलांटिक महासागर

(d) आर्कटिक महासागर

22. संसार के समस्त महासागरों में अब तक कितने महासागरीय गर्तों का पता चला है?

(a) 19

(b) 32

(c) 51

(d) 57

23. महासागरीय गर्तों की सामान्यतः गहराई कितने मीटर होती है?

(a) 5,000 मीटर

(b) 7,000 मीटर

(c) 5,500 मीटर

(d) 10,000 मीटर

24. विश्व का सबसे गहरा महासागरीय गर्त है-

(a) प्यूर्टोरिको

(b) सुण्डा

(c) मेरियाना

(d) मिंडनाओ

25. महासागर में सबसे अधिक गहराई प्रशान्त महासागर के मेरियाना गर्त की है जो है-

(a) समुद्रतल से 9,200 मी० नीचे

(b) समुद्रतल से 10,500 मी० नीचे

(c) समुद्रतल से 11,033 मी० नीचे

(d) समुद्रतल से 11,500 मी० नीचे

26. निम्नलिखित में से कौन-सा महासागरीय गर्त प्रशान्त महासागर में स्थित नहीं है?

(a) मेरियाना

(b) मिण्डनाओ

(c) टोंगा

(d) प्यूर्टोरिको

27. विश्व का सबसे गहरा गर्त चैलेन्जर गर्त स्थित है-

(a) फिजी के निकट

(b) गुआम द्वीपमाला के निकट

(c) जापान के पूर्वी तट पर

(d) फिलीपींस के पूर्वी तट पर

28. सपाट शीर्ष वाले समुद्री पर्वतों को किस नाम से जाना जाता है?

(a) मोनेडनॉक

(b) गुयॉट

(c) इन्सेलबर्ग

(d) ज्यूगेन

29. अटलांटिक महासागर में स्थित मध्य अटलांटिक कटक की लम्बाई लगभग है-

(a) 11,000 किमी०

(b) 14,000 किमी०

(c) 18,000 किमी०

(d) 20,000 किमी ०

30. समुद्री पहाड़ियों की नितल से न्यूनतम ऊँचाई कितनी होती है?

(a) 500 मी०

(b) 1,000 मी०

(c) 1,500 मी०

(d) 2,000 मी०

31. सबसे अधिक नितल पहाड़ियाँ (Abyssal Hills) किस महासागर में है?

(a) प्रशान्त महासागर

(b) हिन्द महासागर

(c) अटलांटिक महासागर

(d) आर्कटिक महासागर

32. प्रशान्त महासागर में नितल पहाड़ियों की संख्या लगभग कितनी है?

(a) 5,000

(b) 7,000

(c) 10,000

(d) 15,000

33. विश्व में जलमग्न केनियन की संख्या कितनी है?

(a) 57

(b) 75

(c) 102

(d) 120

34. जलमग्न केनियन सर्वाधिक संख्या में किस महासागर में हैं?

(a) प्रशान्त महासागर

(b) हिन्द महासागर

(c) अटलांटिक महासागर

(d) आर्कटिक महासागर

35. विश्व के सबसे लम्बे जलमग्न केनियन पाये जाते हैं-

(a) भूमध्य सागर में

(b) बेरिंग सागर में

(c) दक्षिण चीन सागर में

(d) जापान सागर में

36. डॉल्फिन चैलेन्जर कटक स्थित है-

(a) अटलांटिक महासागर में

(b) प्रशान्त महासागर में

(c) हिन्द महासागर में

(d) आर्कटिक महासागर में

37. सुण्डा गर्त स्थित है-

(a) सुमात्रा के दक्षिण

(b) सुमात्रा के उत्तर

(c) चागोस द्वीप के उत्तर

(d) चागोस द्वीप के दक्षिण

25. Major deltas of the world (विश्व के प्रमुख डेल्टा)

25. Major deltas of the world

(विश्व के प्रमुख डेल्टा)



Major deltas of the world

1. नदी की विभिन्न शाखाओं के बीच स्थित त्रिभुजाकार निक्षेपात्मक आकृति को क्या कहा जाता है?

(a) जलोढ़ पंख

(b) प्राकृतिक तटबंध

(c) नदी विसर्प

(d) डेल्टा

2. डेल्टा का नामकरणकर्ता किसे माना जाता है?

(a) पोलीडोनियस

(b) हिकेटियस

(c) इरेटॉस्थनीज

(d) हेरोडोटस

3. सामान्यतया डेल्टा की आकृति किस प्रकार की होती है?

(a) आयताकार

(b) अनिश्चित आकृति

(c) वर्गाकार

(d) त्रिभुजाकार

4. निम्नलिखित में कौन-सी परिस्थितियाँ डेल्टा के निर्माण के लिए आवश्यक है?

(a) नदी में बोझ की अधिक मात्रा

(b) मुहाने का ज्वार-भाटे से मुक्त होना

(c) मुहाने के निकट नदी का वेग कम होना

(d) उपर्युक्त सभी

5. क्षेत्रफल की दृष्टि से विश्व का सबसे बड़ा नदी डेल्टा कौन-सा है?

(a) नील नदी का डेल्टा

(b) सुन्दर वन डेल्टा

(c) अमेजन नदी का डेल्टा

(d) मिसीसिपी नदी का डेल्टा

6. गंगा तथा मिसीसिपी नदियों का डेल्टा किस प्रकार का डेल्टा माना जाता है?

(a) ज्वारनदमुखी डेल्टा

(b) प्रगतिशील डेल्टा

(c) चापाकार डेल्टा

(d) पक्षीपाद डेल्टा

7. परित्यक्त (Abandoned) डेल्टा का उदाहरण निम्न में से किस नदी द्वारा प्रस्तुत किया जाता है?

(a) ह्वांगहो

(b) नील

(c) गंगा

(d) अमेजन

8. नर्मदा और तापी किस प्रकार के डेल्टा का निर्माण करती है?

(a) चापाकार डेल्टा

(b) ज्वारनदमुखी डेल्टा

(c) पक्षीपाद डेल्टा

(d) परित्यक्त डेल्टा

9. कौन-सी नदी पंजाकार डेल्टा का सुन्दर उदाहरण प्रस्तुत करता है?

(a) नील

(b) गंगा

(c) मिसीसिपी

(d) हांगहो

10. निम्नलिखित में से किस नदी का डेल्टा चिड़िया के पैर (पंजे) जैसा है?

(a) नील

(b) ब्रह्मपुत्र

(c) अमेजन

(d) मिसीसिपी

11. गंगा नदी का डेल्टा किस प्रकार का है?

(a) चापाकार

(b) पंजाकार

(c) क्षीणाकार

(d) नौकाकार

12. गंगा नदी अपने मुहाने पर डेल्टा का निर्माण करती है। यह डेल्टा कहाँ से प्रारम्भ होता है?

(a) कोलकाता से

(b) गौर से

(c) बजबज से

(d) सुन्दर वन से

13. निम्नलिखित में से कौन-सी नदी ज्वारनदमुख का निर्माण करती है?

(a) मेनाम

(b) नील

(c) यांग्टिसीक्यांग

(d) नर्मदा

14. नदी द्वारा वृद्धावस्था में किस महत्वपूर्ण स्थलाकृति की रचना होती है?

(a) जलप्रपात

(b) छाड़न झील

(c) जलोढ़ शंकु

(d) डेल्टा

15. शुष्क डेल्टा का निर्माण किन क्षेत्रों में कैसे होता है?

(a) समुद्रतटीय क्षेत्रों में नदियों द्वारा पुराने डेल्टा को छोड़ देने से

(b) पर्वतपाद प्रदेश में जहाँ नदियाँ पर्वतीय भाग को छोड़कर मैदानी भाग में प्रवेश करती है।

(c) नदियों के संगम क्षेत्र में उनके सम्मिलन से

(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं

16. रेड रिवर (लाल नदी) के डेल्टा क्षेत्र में कौन-सा नगर स्थित है?

(a) वियन्तियान

(b) सिओल

(c) हनोई

(d) हैंकाऊ

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