35. World Agriculture (विश्व की कृषि)

35. World Agriculture

(विश्व की कृषि)



World Agriculture

1. कृषि किस प्रकार की मानवीय आर्थिक क्रिया है?

(a) प्राथमिक

(b) द्वितीयक

(c) तृतीयक

(d) चतुर्थक

2. निम्नलिखित में से कौन-सी एक नकदी फसल है?

(a) गेहूँ

(b) बाजरा

(c) धान

(d) रबड़

3. निम्नलिखित में से कौन खरीफ की फसल है?

(a) चावल

(b) मक्का

(c) कपास

(d) इनमें से सभी

4. निम्नलिखित में से किसकी गणना नकदी फसल के रूप में होती है?

(a) कपास

(b) जूट

(c) चाय

(d) इनमें से सभी

5. निम्नलिखित में से कौन खरीफ की फसल है?

(a) धान

(b) मक्का

(c) ज्वार

(d) चना

6. निम्नलिखित में से कौन मुद्रादायिनी फसलों का समूह है?

(a) कपास, चाय, आलू एवं जूट

(b) चावल, मक्का, एवं चना

(c) कपास, गेहूँ एवं मक्का

(d) चावल, मक्का एवं चना

7. सर्वप्रथम कृषि प्रदेशों का विश्व वर्गीकरण किसने प्रस्तुत किया था?

(a) डडले स्टाम्प

(b) डी० ह्विटलसी

(c) कुमारी सेम्पुल

(d) वॉन थ्यूनेन

8. विश्व के कृषि प्रदेशों का सर्वाधिक मान्य सीमांकन है-

(a) डी० ह्विटलसी

(b) आई खोखर

(c) एल० डी० स्टाम्प

(d) ओ० जानसन

9. विश्व के सम्पूर्ण धरातलीय क्षेत्र का कितना प्रतिशत भाग कृषि योग्य है?

(a) 1%

(b) 5%

(c) 11%

(d) 51%

10. वॉन ध्यूनेन ने अपना कृषि अवस्थिति सिद्धान्त किस वर्ष दिया?

(a) 1706 ई०

(b) 1726 ई०

(c) 1826 ई०

(d) 1926 ई०

11. वान थ्यूनेन ने अपने कृषि अवस्थिति सिद्धान्त में केन्द्र के चारों ओर कितनी पेटियों की संख्या बतायी है?

(a) 6

(b) 7

(c) 9

(d) 10

12. वान थ्यूनेन का कृषि अवस्थिति सिद्धान्त किस पर आधारित है?

(a) फसल सघनता पर

(b) परिवहन लागत पर

(c) फसल प्रतिस्थापन पर

(d) तुलनात्मक लाभ पर

13. विश्व का सबसे बड़ा गेहूँ उत्पादक देश है-

(a) चीन

(b) भारत

(c) सं०रा०अ०

(d) फ्रांस

14. निम्नलिखित में से किस देश में गेहूँ की प्रति हेक्टेयर उपज सबसे अधिक है?

(a) यूनाइटेड किंगडम

(b) दक्षिण अफ्रीका

(c) जर्मनी

(d) फ्रांस

15. यूक्रेन का मुख्य कृषि उत्पाद है-

(a) चावल

(b) गेहूँ

(c) मक्का

(d) कपास

16. आस्ट्रेलिया में गेहूँ के फार्म संकेन्द्रित हैं-

(a) क्वीन्सलैण्ड में

(b) नॉदर्न टेरीटरीज में

(c) पश्चिमी आस्ट्रेलिया में

(d) न्यूसाउथवेल्स में

17. विश्व में गेहूँ का सबसे बड़ा निर्यातक देश है-

(a) यूक्रेन

(b) चीन

(c) भारत

(d) अर्जेण्टीना

18. संयुक्त राज्य अमेरिका की गेहूँ पेटी (Wheat belt) पायी जाती है-

(a) बड़े मैदान में

(b) इम्पीरियल घाटी में

(c) अटलांटिक तटीय क्षेत्र में

(d) टेनीसी घाटी में

19. कनाडा एक बसन्तकालीन गेहूँ पैदा करने वाला देश है क्योंकि-

I. यहाँ मिट्टी रेगुर किस्म की है।

II. नमी बर्फ के पिघलने से प्राप्त होती है।

III. यह गर्म धूप से ग्रीष्म में पैदा होता है।

IV. भूमि बहुत उबड़-खाबड़ है।

कूट :

(a) I और II

(b) II और III

(c) III और IV

(d) I और IV

20. गेहूँ की कृषि का आदर्श तापमान है-

(a) 10°-15°C

(b) 15°-20°C

(c) 20°-25°C

(d) 25°-30°C

21. नील नदी के डेल्टा क्षेत्र में सर्दी के मौसम में कौन-सी फसल उगायी जाती है?

(a) चावल

(b) तम्बाकू

(c) कपास

(d) गेहूँ

22. गेहूँ की कृषि निम्न में से किससे सम्बन्धित है?

(a) सेल्वास

(b) लानोज

(c) केम्पास

(d) स्टेपी

23. गेहूँ की खेती निम्न में से किस मृदा से सम्बन्धित है?

(a) चेरनोजम

(b) पॉडजोल

(c) लाल

(d) जलोढ़

24. कथन (A): चीन विश्व का सबसे बड़ा गेहूँ उत्पादक देश है।

कारण (R): विश्व में गेहूँ के अन्तर्गत सर्वाधिक क्षेत्रकल चीन में पाया जाता है।

(a) A और R दोनों सही है और R, A की सही व्याख्या है।

(b) A और R दोनों सही है, परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।

(c) A सही है, परन्तु R गलत है।

(d) A गलत है, परन्तु R सही है।

25. विश्व में गेहूँ के अन्तर्गत सर्वाधिक क्षेत्रफल किस देश में है?

(a) भारत

(b) चीन

(c) यू०एस०ए०

(d) आस्ट्रेलिया

26. बसन्तकालीन गेहूँ की खेती कहाँ की जाती है?

(a) रूस और कनाडा में

(b) भारत और पाकिस्तान में

(c) आस्ट्रेलिया और अर्जेण्टीना में

(d) इण्डोनेशिया और मलेशिया में

27. यूक्रेन और रूस की किस मिट्टी में सबसे अधिक गेहूँ उपजता है?

(a) पहाड़ी मिट्टी में

(b) चेरनोजम मिट्टी में

(c) पॉडजोल मिट्टी में

(d) इनमें किसी में नहीं

28. उत्तरी गोलार्द्ध संसार का कितना प्रतिशत गेहूँ उपजाता है?

(a) 50%

(b) 70%

(c) 90%

(d) 25%

29. गेहूँ का निर्यातक देश नहीं है-

(a) ब्रिटेन

(b) अर्जेण्टीना

(c) कनाडा

(d) आस्ट्रेलिया

30. संसार में सिंचाई का सर्वाधिक उपयोग किस फसल की कृषि में होता है?

(a) धान

(b) गेहूँ

(c) कपास

(d) जूट

31. गेहूँ की खेती के लिए कौन-सी जलवायु सबसे उपयुक्त है?

(a) विषुवतीय

(b) उष्ण कटिबंधीय

(c) समशीतोष्ण

(d) टुण्ड्रा

32. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?

(a) विश्व का 90% से भी अधिक चावल मानसूनी जलवायु वाले क्षेत्रों से प्राप्त होता है।

(b) इण्डोनेशिया के जावा द्वीप में सालोंभर चावल की खेती की जाती है।

(c) चीन चावल का एक प्रमुख निर्यातक देश हैं।

(d) यूरोप में इटली चावल का प्रमुख उत्पादक है। 

33. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?

1. थाईलैंड चावल का सबसे बड़ा निर्यातक है।

2. चावल का विश्व व्यापार काफी कम है।

3. दक्षिण कोरिया में चावल की प्रति हेक्टेयर ऊपज काफी अधिक है।

4. विश्व में चावल के अन्तर्गत सर्वाधिक क्षेत्रफल चीन में है।

कूट:

(a) 1, 2 एवं 3

(b) 1, 2 एवं 4

(c) 2, 3 एवं 4

(d) 1, 2, 3 एवं 4

34. विश्व में चावल के अन्तर्गत सर्वाधिक क्षेत्रफल किस देश में हैं?

(a) चीन

(b) भारत

(c) इण्डोनेशिया

(d) थाईलैंड

35. विश्व में चावल उत्पादक देशों का सही अवरोही क्रम है-

(a) भारत, चीन, थाईलैंड, इण्डोनेशिया”

(b) चीन, भारत, थाईलैंड, इण्डोनेशिया

(c) भारत, चीन, इण्डोनेशिया, थाईलैंड

(d) चीन, भारत, इण्डोनेशिया, थाईलैंड

36. कथन (A): विश्व में उत्पादित चावल का लगभग 5% ही अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के लिए उपलब्ध होता है।

कारण (R): विश्व में सामान्यतः चावल की गहन जीवन निर्वाह कृषि की जाती है।

(a) A और R दोनों सही और R, A की सही व्याख्या है।

(b) A और R दोनों सही है, परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।

(c) A सही है, परन्तु R गलत है।

(d) A गलत है, परन्तु R सही है।

37. इटली में चावल की कृषि के लिए कौन-सी नदी घाटी प्रसिद्ध है?

(a) एल्ब नदी घाटी

(b) पो नदी घाटी

(c) रोन नदी घाटी

(d) एब्रो नदी घाटी

38. निम्नलिखित में से किस फसल को जल भराव की आवश्यकता होती है?

(a) चाय

(b) कॉफी

(c) चावल

(d) गन्ना

39. चावल की कृषि की जाती है-

(a) प्रेयरी घासभूमियों में

(b) सवाना जलवायु प्रदेश में

(c) लैटराइट मृदा प्रदेश में

(d) जलपूरित निम्नवर्ती भागों में

40. निम्नलिखित में कौन-सा देश विश्व में चावल का सबसे अधिक उत्पादन करता है?

(a) इण्डोनेशिया

(b) चीन

(c) भारत

(d) थाईलैण्ड

41. धान की खेती के लिए कौन-सी मिट्टी सबसे अधिक उपयुक्त है?

(a) उपजाऊ दोमट मिट्टी

(b) उपजाऊ चिकनी मिट्टी

(c) लैटेराइट मिट्टी

(d) काली मिट्टी

42. इनमें से कौन चावल का निर्यातक देश नहीं है?

(a) म्यान्मार

(b) थाईलैंड

(c) कम्बोडिया

(d) श्रीलंका

43. दून घाटी (Doon Valley) चावल पैदा करने में सक्षम है क्योंकि-

(a) यहाँ उष्ण ग्रीष्म ऋतु तथा सिंचाई के लिए हिम से पिघला हुआ जल उपलब्ध है।

(b) घाटी के लोग चावल खाने के शौकीन हैं।

(c) अन्य फसलें नहीं उगायी जा सकती है।

(d) यहाँ निर्यात की भारी मांग है।

44. मक्का उत्पादक देशों का अवरोही क्रम है-

(a) यू० एस० ए०, चीन, ब्राजील, मैक्सिको

(b) चीन, यू० एस० ए०, ब्राजील, फ्रांस

(c) यू० एस० ए०, अर्जेण्टीना, चीन, रोमानिया

(d) चीन, ब्राजील, यू० एस० ए०, अर्जेण्टीना

45. विश्व में मक्का की पेटी (Corn belt) किस देश में पायी जाती है?

(a) भारत

(b) चीन

(c) यू०एस०ए०

(d) कनाडा

46. व्यापारिक पशुपालन एवं मक्का उत्पादन भली भाँति समायोजित है-

(a) आस्ट्रेलिया

(b) पोलैण्ड

(c) चीन

(d) यू० एस० ए०

47. यू० एस० ए० की ‘मक्का पेटी’ में किसानों को अधिकांश आमदनी प्राप्त होती है-

(a) मक्का से

(b) गेहूँ एवं मक्का से

(c) गोमांस हेतु पशुपालन से

(d) ताजे फल व सब्जियों से

48. यू० एस० ए० की मक्का पेटी की पश्चिमी सीमा निर्धारित होती है-

(a) 21°C समताप रेखा से

(b) ओजार्क मैसिफ तथा आन्तरिक निम्न पठार से

(c) पीडमाण्ट प्रदेश से

(d) 50 सेमी० की औसत वार्षिक वर्षा रेखा अथवा गर्मी के 3 महीनों में 20 सेमी० की वर्षा रेखा

49. निम्न में से किस फसल की कृषि विश्व के विस्तृत फार्मों पर ऊर्वर मिट्टी में की जाती है जो जानवरों को खिलाने के काम में आती है?

(a) जौ

(b) जई

(c) राई

(d) मक्का

50. निम्न में से किसे मक्का का जन्म स्थान माना जाता है?

(a) ब्राजील

(b) यूक्रेन

(c) मध्य अमेरिका

(d) भारत

51. अमेरिकी कृषि का हृदय तथा विश्व में सर्वाधिक महत्वपूर्ण कृषि प्रदेश है-

(a) मक्के की पेटी

(b) कपास की पेटी

(c) डेयरी मेखला

(d) शाक कृषि मेखला

52. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?

(a) गन्ना उष्ण कटिबंध की फसल है।

(b) क्यूबा के कुल कृषि क्षेत्र के 50 प्रतिशत से भी अधिक भाग पर गन्ना की कृषि की जाती है।

(c) हवाई द्वीप में गन्ने की प्रति हेक्टेयर उपज विश्व में सर्वाधिक है।

(d) उपर्युक्त सभी

53. विश्व में गन्ना का उत्पादन करने वाले प्रमुख देशों का उत्पादन के आधार पर सही अवरोही कम है-

(a) ब्राजील, क्यूबा, भारत, हवाई द्वीप

(b) ब्राजील, भारत, क्यूबा, हवाई द्वीप

(c) भारत, ब्राजील, क्यूबा, हवाई द्वीप

(d) भारत, क्यूबा, ब्राजील, हवाई द्वीप

54. निम्नलिखित में से किस देश में गन्ने की प्रति हेक्टेयर ऊपज विश्व में सर्वाधिक है?

(a) भारत

(b) ब्राजील

(c) क्यूबा

(d) हवाई द्वीप

55. हवाई द्वीप प्रमुख उत्पादक है-

(a) चाय का

(b) चुकन्दर का

(c) गन्ना का

(d) गेहूँ का

56. इनमें से कौन-सा द्वीप गन्ने की उन्नत खेती करता है?

(a) मालागासी

(b) हवाई द्वीप

(c) तस्मानिया

(d) न्यूजीलैंड

57. निम्नलिखित में किस फसल का अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार नहीं होता है?

(a) चावल

(b) कपास

(c) गन्ना

(d) चाय

58. निम्नलिखित में से किस फसल की कृषि मात्र उत्तरी गोलार्द्ध में ही सीमित है?

(a) गन्ना

(b) चुकन्दर

(c) चाय

(d) कपास

59. विश्व का सबसे बड़ा मुंगफली उत्पादक देश है-

(a) भारत

(b) सं०रा०अ०

(c) चीन

(d) इण्डोनेशिया

60. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?

(a) मुंगफली उष्ण एवं आर्द्र कटिबंध की फसल है।

(b) भारत विश्व का सबसे बड़ा मुंगफली उत्पादक देश है।

(c) चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका, इण्डोनेशिया, नाइजीरिया मुंगफली के अन्य प्रमुख उत्पादक हैं।

(d) मुंगफली के अन्तर्गत विश्व में सर्वाधिक क्षेत्रफल भारत में है।

61. विश्व में सोयाबीन के सर्वाधिक महत्वपूर्ण उत्पादक देश हैं-

(a) चीन, अर्जेण्टीना, ब्राजील, संयुक्त राज्य अमेरिका

(b) संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्राजील, चीन एवं अर्जेण्टीना

(c) संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्राजील, अर्जेण्टीना एवं चीन

(d) संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन, ब्राजील एवं अर्जेण्टीना

62. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?

(a) नारियल उष्ण एवं आर्द्र कटिबंध की फसल है।

(b) इसकी कृषि के लिए 25°C से अधिक तापमान की आवश्यकता होती है।

(c) नारियल की कृषि के लिए 150 सेमी० से अधिक वर्षा की आवश्यकता होती है।

(d) भारत विश्व का सबसे बड़ा नारियल उत्पादक देश है।

63. विश्व में नारियल का सबसे अधिक उत्पादन करता है-

(a) भारत

(b) फिलीपीन्स

(c) इण्डोनेशिया

(d) वियतनाम

64. विश्व का सबसे बड़ा चाय उत्पादक देश कौन है?

(a) चीन

(b) भारत

(c) श्रीलंका

(d) कीनिया

65. भूतपूर्व सोवियत संघ का कौन-सा देश चाय का महत्वपूर्ण उत्पादक है?

(a) रूस

(b) यूक्रेन

(c) आर्मीनिया

(d) जार्जिया

66. चाय उत्पादक देशों का उत्पादन की दृष्टि से सही अवरोही क्रम है-

(a) चीन, भारत, कीनिया एवं श्रीलंका

(b) भारत, चीन, कीनिया एवं श्रीलंका

(c) चीन, भारत, श्रीलंका एवं कीनिया

(d) भारत, चीन, श्रीलंका एवं कीनिया

67. चाय के निर्यात में भारत को किस देश से कड़ी प्रतिस्पर्द्धा का सामना करना पड़ रहा है?

(a) चीन

(b) श्रीलंका

(c) कीनिया

(d) इण्डोनेशिया

68. चाय निर्यात के क्षेत्र में विश्व का अग्रणी देश है-

(a) भारत

(b) चीन

(c) श्रीलंका

(d) कीनिया

69. विश्व प्रसिद्ध ‘उलंग’ (Ullang) किस्म की चाय किस देश में पैदा होती है?

(a) भारत

(b) वियतनाम

(c) ताइवान

(d) कीनिया

70. यारबा माटे है-

(a) मैक्सिको में एक खाद्य वस्तु

(b) ब्राजील में एक मवेशी प्रजाति

(c) पराग्वे में एक चाय सदृश झाड़ी

(d) अर्जेण्टीना में चर्म शोधन हेतु प्रयुक्त एक पेड़

71. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?

(a) चाय उष्ण एवं उपोष्ण कटिबंध की फसल है।

(b) मानसूनी एशिया चाय का प्रमुख उत्पादक क्षेत्र है।

(c) जॉर्जिया और ताइवान की चाय उत्तम कोटि की होती है।

(d) उपर्युक्त सभी

72. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?

(a) भारत विश्व में चाय का सबसे बड़ा उत्पादक एवं उपभोक्ता है।

(b) चाय के निर्यात में चीन और श्रीलंका के बाद भारत का तीसरा स्थान है।

(c) श्रीलंका में चाय की कृषि मध्य एवं दक्षिणी पहाड़ी भाग में की जाती है।

(d) संयुक्त राज्य अमरीका विश्व में चाय का सबसे बड़ा आयातक देश है।

73. चाय के अन्तर्गत विश्व में सर्वाधिक क्षेत्रफल किस देश में पाया जाता है?

(a) भारत

(b) चीन

(c) श्रीलंका

(d) जॉर्जिया

74. चाय की खेती के लिए ढालू जमीन की आवश्यकता क्यों पड़ती है?

(a) ताकि पानी जड़ में जमा न होने पाए

(b) ताकि जड़ों को नीचे फैलने में सुविधा हो

(c) ताकि चाय बागान की दृश्य भूमि नयनाभिराम हो सके

(d) ताकि ढालू जमीन की उर्वरा शक्ति कायम रहे

75. चाय की खेती के लिए सबसे उपयुक्त जलवायु कौन-सी है?

(a) विषुवतीय

(b) समशीतोष्ण

(c) मानसूनी

(d) भूमध्यसागरीय

76. निम्नलिखित में से कौन-सा कारक चाय की खेती के लिए आवश्यक है?

(a) पर्वतीय ढाल

(b) जलोढ़ मैदान

(c) 50 सेमी० वर्षा

(d) सिंचाई की सुविधा

77. निम्नलिखित में से कौन-सी भौगोलिक दशा चाय उत्पादन के लिए उपयुक्त नहीं है?

(a) उष्ण आई जलवायु

(b) 24°C से 30°C तापमान

(c) समतल मैदान

(d) 125 – 250 सेमी० वर्षा

78. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?

(a) कहवा उष्ण जलवायु की फसल है।

(b) कहवा की कृषि पहाड़ी ढालों पर की जाती है।

(c) जमैका का ब्लू माउण्टेन कहवा विश्व में सर्वोच्च कोटि का कहवा माना जाता है।

(d) ग्रेट ब्रिटेन कहवा का सबसे बड़ा आयातक है।

79. कहवा के उत्पादन के आधार पर देशों का सही अवरोही क्रम है-

(a) ब्राजील, कोलम्बिया, इण्डोनेशिया एवं आइवरी कोस्ट

(b) ब्राजील, आइवरी कोस्ट, कोलम्बिया एवं इण्डोनेशिया

(c) ब्राजील, आइवरी कोस्ट, इण्डोनेशिया एवं कोलम्बिया

(d) ब्राजील, कोलम्बिया, आइवरी कोस्ट एवं इण्डोनेशिया

80. फजेण्डा है

(a) मलेशिया में रबड़ के बागान

(b) ग्वाटेमाला में केले के बागान

(c) ब्राजील में कहवा के बागान

(d) श्रीलंका में चाय के बागान

81. कहवे के कुछ उत्पादन का 60 प्रतिशत से भी अधिक भाग प्राप्त होता है-

(a) लैटिन अमेरिका से

(b) अफ्रीका से

(c) एशिया से

(d) उत्तर अमेरिका से

82. पश्चिम एशिया का कौन-सा देश उच्च कोटि के ‘मोचा कहवा’ के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है?

(a) ओमान

(b) यमन

(c) जॉर्डन

(d) संयुक्त अरब अमीरात

83. ब्राजील किसका प्रमुख उत्पादक है?

(a) कोको का

(b) कपास का

(c) कॉफी का

(d) तम्बाकू का

84. ब्राजील में कहवा उत्पादन सम्बन्धी निम्न कथनों का अध्ययन कीजिए तथा नीचे दिए कूट से सही उत्तर चुनिए।

I. कहवा दक्षिण-पूर्वी ब्राजील में उगाया जाता है।

II. विश्व का 80 प्रतिशत कहवा यही उत्पन्न करता है।

III. यह टेरारोसा मिट्टी पर उगाया जाता है।

IV. कहवा का अधिकांश भाग लैटिन अमेरिकी देश को निर्यात किया जाता है।

कूट :

(a) I एवं II सही हैं।

(b) I एवं III सही हैं।

(c) I तथा IV सही है।

(d) II एवं III सही है।

85. विश्व की कहवा मण्डी के नाम से कौन प्रसिद्ध है?

(a) रियो-डि-जेनेरो

(b) मनाओस

(c) साओपालो

(d) सेण्टोस

86. फेजेण्डा का सम्बन्ध है-

(a) पशुचारण से

(b) दुग्ध उत्पादन से

(c) कहवा के बागान से

(d) व्यापारिक अन्न उत्पादन से

87. पेट्रोन-कोलोन (Patron Colon) प्रथा जिसमें कहवा के पुराने बगानों को काटकर नये बागान लगाने में खर्च कम पड़ता है, निम्न में से किस देश में प्रचलित है?

(a) कोलम्बिया

(b) ब्राजील

(c) इण्डोनेशिया

(d) भारत

88. ब्राजील में कहवा का अधिक उत्पादन होने का प्रमुख कारण क्या है?

(b) असमान धरातल

(a) भूमध्यरेखीय स्थिति

(c) तकनीकी उन्नति

(d) टेरारोसा मृदा

89. अफ्रीका महाद्वीप में कहवा का सबसे बड़ा उत्पादक कौन है?

(a) घाना

(b) आइवरी कोस्ट

(c) कांगो

(d) इथोपिया

90. ब्राजील की अर्थव्यवस्था मुख्यतः निम्नलिखित में से किसके उत्पादन पर निर्भर करती है?

(a) चाय

(b) कॉफी

(c) तम्बाकू

(d) नारियल

91. निम्नलिखित में से कौन-सा बंदरगाह ‘कॉफी पत्तन’ के नाम से जाना जाता है?

(a) साओपालो

(b) सैंटोस

(c) रियो-डि-जेनेरो

(d) ब्यूनस आयर्स

92. कहवा किस जलवायु की उपज है?

(a) उष्ण कटिबन्धीय

(b) शीत कटिबन्धीय

(c) शीतोष्ण कटिबन्धीय

(d) मध्य अक्षांशीय

93. कहवा से सम्बन्धित निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?

(a) कहवा के लिए उष्णतर जलवायु की आवश्यकता होती है।

(b) अच्छी उत्पादन के लिए 15°C से 28°C तापमान आवश्यक होता है

(c) कहवा के लिए धनी वर्षा (150 सेमी० से 250 सेमी०) की आवश्यकता होती है।

(d) उपर्युक्त सभी कथन सही हैं।

94. व्यापारिक दृष्टिकोण से कहवा की किस्म नहीं है-

(a) कॉफिया डाइबीरिका

(b) कॉफिया रोबास्टा

(c) कॉफिया साइबीरिका

(d) कॉफिया अरेबिका

95. विश्व में सबसे उत्तम स्वाद वाला कहवा किसे माना जाता है?

(a) उलंग कहवा

(b) मोचा कहवा

(c) काली पत्ती बाती कहवा

(d) हरी पत्ती वाला कहवा

96. कोको की कृषि के लिए निम्नलिखित में से कौन-सी भौगोलिक परिस्थितियाँ आवश्यक है?

1. लगभग 25°C से 27°C तापमान

2. 200 सेमी० से अधिक वर्षा

3. लोहा एवं पोटाश युक्त गहरी मिट्टी

4. ढालुआ भूमि

5. तेज एवं चमकदार धूप

कूट:

(a) 1, 2 एवं 3

(b) 1, 2 एवं 4

(c) 2, 3 एवं 4

(d) 1, 2, 3 एवं 5

97. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?

1. क्रिओलो एवं फोरास्टेरो उच्च कोटि के कोको है।

2. किओलो निम्न कोटि का कोको है जबकि फोरास्टेरो उच्च कोटि का कोको है।

3. क्रिओलो कोको मुख्यतः दक्षिण अमेरिका में उपजाया जाता है।

4. फोरेस्टेरो कोको मुख्यतः पश्चिम अफ्रीका में उपजाया जाता है।

कूट:

(a) 1 एवं 2

(b) 3 एवं 4

(c) 1, 3 एवं 4

(d) 2, 3 एवं 4

98. विश्व में कोको उत्पादक देशों का सही अवरोही क्रम है-

(a) घाना, ब्राजील, आइवरी कोस्ट एवं नाइजीरिया

(b) घाना, आइवरी कोस्ट, ब्राजील एवं नाइजीरिया

(c) आइवरी कोस्ट, घाना, ब्राजील एवं नाइजीरिया

(d) आइवरी कोस्ट, ब्राजील, घाना एवं नाइजीरिया

99. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?

(a) कपास की कृषि मुख्यतः उपोष्ण कटिबंध में की जाती है।

(b) यू० एस० ए० कपास का सबसे बड़ा निर्यातक है।

(c) कपास का सबसे बड़ा उत्पादक होने के बावजूद चीन कपास का निर्यातक नहीं है।

(d) विषुवतीय क्षेत्र की जलवायु कपास की कृषि के लिए उपयुक्त है।

100. विश्व में कपास का उत्पादन करने वाले प्रमुख देशों का उत्पादन के आधार पर सही अवरोही क्रम है-

(a) संयुक्त राज्य अमेरिका, सी० आई एस०, चीन एवं भारत

(b) संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन, सी० आई० एस०, एवं भारत

(c) चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका, सी० आई० एस० एवं भारत

(d) चीन, सी० आई० एस०, संयुक्त राज्य अमेरिका एवं भारत

101. विश्व में कपास की कृषि के अन्तर्गत सर्वधिक क्षेत्रफल किस देश में पाया जाता है?

(a) सी०आई०एस०

(b) चीन

(c) संयुक्त राज्य अमेरिका

(d) भारत

102. विश्व में लम्बी रेशे की कपास के प्रमुख उत्पादक देश हैं-

(a) भारत एवं ब्राजील

(b) पेरू एवं मैक्सिको

(c) चीन एवं पाकिस्तान

(d) यू० एस० ए० एवं मिस्र

103. निम्नलिखित में से कौन-सी भौगोलिक परिस्थिति कपास की कृषि के लिए आवश्यक होती है?

1. 21°C से 27°C तापमान

2. 100-150 सेमी० वर्षा

3. 200 दिन पालारहित 

4. चूने की पर्याप्त मात्रा वाली हल्की मृदा

कूट :

(a) 1, 2 एवं 3

(b) 1, 3 एवं 4

(c) 1, 2 एवं 4

(d) 1, 2, 3 एवं 4

104. विश्व में कपास का वृहत्तम उत्पादक है-

(a) यू०एस०ए०

(b) चीन

(c) मिस्र

(d) भारत

105. विश्व में लम्बे रेशे के कपास का सबसे बड़ा उत्पादक एवं निर्यातक देश है-

(a) मिस्र

(b) भारत

(c) चीन

(d) सं०रा०अ०

106. विश्व में कपास का सबसे बड़ा निर्यातक देश निम्न में से कौन है?

(a) चीन

(b) मिस्र

(c) सं०रा०अ०

(d) भारत

107. निम्नलिखित देशों में से किसमें एक सुस्पष्ट कपास मेखला द्रष्टव्य है?

(a) मिस्र

(b) मैक्सिको

(c) सूडान

(d) सं०रा०अ०

108. एशमाउनी (Ashrnouni) निम्न में से किसकी प्रजाति है?

(a) भेड़

(b) भैंस

(c) कपास

(d) तम्बाकू

109. विश्व के लावा निर्मित मैदानों में निम्न में से किस फसल की सर्वाधिक कृषि की जाती है?

(a) जूट

(b) कपास

(c) चावल

(d) चाय

110. संयुक्त राज्य अमेरिका में कपास की उत्तरी सीमा निर्धारित होती है-

(a) 200 पालारहित दिनों से

(b) 30°C ग्रीष्म तापमान से

(c) 50 सेमी० वर्षा रेखा से

(d) पॉडजॉलिक मृदा की दक्षिणी सीमा से

111. निम्नलिखित में से कौन-सा शस्य उन क्षेत्रों में होता है जहाँ 200 दिन पाला रहित, 500 से 1000 मिमी० वर्षा तथा 20°C तापमान होता है?

(a) जूट

(b) गेहूँ

(c) कपास

(d) धान

112. विश्व में कपास के तीन अग्रणी उत्पादक देशों का अवरोही क्रम है-

(a) चीन, यू० एस० ए०, भारत

(b) चीन, यू० एस० ए०, पाकिस्तान

(c) यू० एस० ए०, भारत, चीन

(d) भारत, यू० एस० ए०, चीन

113. विषुवतीय प्रदेश में कपास की खेती क्यों नहीं की जाती है?

(a) वहाँ श्रमिकों का अभाव है।

(b) वहाँ उपजाऊ मिट्टी नहीं मिलती है।

(c) वहाँ की अधिक वर्षा इसके लिए घातक है।

(d) वहाँ यातायात की सुविधाएँ नहीं है।

114. भारतीय कपास किस किस्म की होती है?

(a) लम्बे रेशे की

(b) मध्यम रेशे की

(c) छोटे रेशे की

(d) सभी किस्म की

115. अफ्रीका के किस देश की कपास लम्बे रेशे की होती है और अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में उसकी बड़ी मांग रहती है?

(a) अल्जीरिया

(b) मिस्र

(c) यूगाण्डा

(d) द० अफ्रीका

116. सबसे उत्तम किस्म की ‘सागर द्वीपीय कपास’ किस देश में पैदा होती है?

(a) मिस्र

(b) बारबाडोस

(c) चीन

(d) सं०रा०अ०

117. निम्नलिखित में से कौन-सी भौगोलिक परिस्थिति जूट की कृषि के लिए आवश्यक है-

1. 25°C से अधिक तापमान

2. 175 सेमी० से अधिक वर्षा

3. नवीन जलोढ़ मिट्टी 

4. 80% से अधिक सापेक्षिक आर्द्रता

कूट :

(a) 1 एवं 2

(b) 1, 2 एवं 3

(c) 1, 2 एवं 4

(d) 1, 2, 3 एवं 4

118. कथन (A): भारत विश्व में जूट का सबसे बड़ा उत्पादक है।

कारण (R): जूट की कृषि के अन्तर्गत सर्वाधिक क्षेत्रफल भारत में पाया जाता है।

(a) A और R दोनों सही है और R, A की सही व्याख्या है।

(b) A और R दोनों सही है, परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।

(c) A सही है, परन्तु R गलत है।

(d) A गलत है, परन्तु R सही है।

119. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?

(a) जूट उष्ण एवं आर्द्र कटिबंध की फसल है।

(b) जूट की कृषि मुख्यतः भारत एवं बांग्लादेश में गंगा-ब्रह्मपुत्र की डेल्टा में की जाती है।

(c) बांग्लादेश विश्व का सबसे बड़ा जूट उत्पादक देश है।

(d) जूट उत्पादन की दृष्टि से भारत का विश्व में तीसरा स्थान है।

120. जूट उत्पादक देशों का सही अवरोही क्रम है-

(a) भारत, बांग्लादेश एवं चीन

(b) भारत, चीन एवं बांग्लादेश

(c) बांग्लादेश, भारत एवं चीन

(d) बांग्लादेश, चीन एवं भारत

121. जूट उत्पादन देशों में से सबसे अधिक प्रति हेक्टेयर जूट का उत्पादन किस देश में होता है?

(a) ब्राजील

(b) मलेशिया

(c) बांग्लादेश

(d) संयुक्त राज्य अमेरिका

122. विश्व का सर्वाधिक जूट उत्पादक क्षेत्र है

(a) गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टाई मैदान

(b) गंगा ब्रह्मपुत्र का मैदान

(c) कांगो बेसिन

(d) इरावदी बेसिन

123. रेशम के उत्पादन हेतु व्यापारिक स्तर पर रेशम के कीड़ों का पाला जाना कहलाता है-

(a) सिल्वीकल्चर

(b) सेरीकल्चर

(c) एपीकल्चर

(d) विटीकल्चर

124. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?

(a) विश्व का तीन चौथाई से अधिक रेशम एशिया महाद्वीप से प्राप्त होता है।

(b) रेशम के उत्पादन में चीन का विश्व में प्रथम स्थान है।

(c) इटली विश्व में रेशम का सबसे बड़ा आयातक है।

(d) इनमें से कोई नहीं

125. कथन (A): विश्व में रेशम की कृषि मुख्यतः उष्ण एवं उपोष्ण जलवायु वाले क्षेत्रों में ही की जाती है।

कारण (R): रेशम की कृषि के लिए 16°C का न्यूनतम तापमान आवश्यक होता है।

(a) A और R दोनों सही है और R, A की सही व्याख्या है।

(b) A और R दोनों सही है, परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।

(c) A सही है, परन्तु R गलत है।

(d) A गलत है, परन्तु R सही है।

126. कथन (A): भारत कच्चे रेशम का एक प्रमुख निर्यातक देश है।

कारण (R): भारत विश्व में कच्चे रेशम का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है।

(a) A और R दोनों सही है और R, A की सही व्याख्या है।

(b) A और R दोनों सही है, परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।

(c) A सही है, परन्तु R गलत है।

(d) A गलत है, परन्तु R सही है।

127. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?

(a) रेशम एक प्रकार के कीड़े से प्राप्त किया जाता है जिसे शहतूत के वृक्षों पर पाला जाता है।

(b) रेशम का उत्पादन उष्ण एवं उपोष्ण कटिबंध में होता है।

(c) चीन, जापान एवं भारत रेशम के क्रमशः सबसे बड़े उत्पादक है।

(d) उपर्युक्त सभी

128. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?

(a) रबड़ की कृषि के अन्तर्गत विश्व में सबसे अधिक क्षेत्रफल थाईलैंड में पाया जाता है।

(b) विश्व में प्राकृतिक रबड़ की तुलना में कृत्रिम रबड़ का अधिक उत्पादन होता है।

(c) विश्व के कुल रबड़ उत्पादन का लगभग 90 प्रतिशत दक्षिण- पूर्वी एशिया से प्राप्त होता है।

(d) संयुक्त राज्य अमेरिका कृत्रिम रबड़ का सबसे बड़ा उत्पादक देश है।

129. रबड़ की कृषि के अन्तर्गत सर्वाधिक क्षेत्रफल किस देश में है?

(a) थाईलैंड

(b) मलेशिया

(c) इण्डोनेशिया

(d) भारत

130. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?

(a) रबड़ उष्ण एवं आर्द्र कटिबंध का पौधा है।

(b) इण्डोनेशिया का अधिकांश रबड़ सुमात्रा से प्राप्त होता है।

(c) रबड़ श्रीलंका की दूसरी महत्वपूर्ण व्यापारिक फसल हैं

(d) इनमें से कोई नहीं

131. प्राकृतिक रबड़ का उत्पादन करने वाले देशों का सही अवरोही क्रम है-

(a) थाईलैंड, मलेशिया, इण्डोनेशिया एवं भारत

(b) थाईलैंड, इण्डोनेशिया, मलेशिया एवं भारत

(c) मलेशिया, थाईलैंड, इण्डोनेशिया एवं भारत

(d) मलेशिया, थाईलैंड, भारत एवं इण्डोनेशिया

132. विश्व में प्राकृतिक रबड़ का सबसे बड़ा उत्पादक है-

(a) थाईलैंड

(b) इण्डोनेशिया

(c) मलेशिया

(d) भारत

133. विश्व में संश्लेषित या सिन्थेटिक रबड़ का सबसे बड़ा उत्त्पादक है-

(a) थाईलैंड

(b) मलेशिया

(c) इण्डोनेशिया

(d) संयुक्त राज्य अमेरिका

134. विश्व के कुल रबड़ उत्पादन का लगभग 80 प्रतिशत उत्पादित करता है-

(a) जापान व इण्डोनेशिया

(b) चीन व ब्राजील

(c) मलेशिया व इण्डोनेशिया

(d) थाईलैंड व मलेशिया

135. रबड़ की कृषि के लिए कितनी वर्षा होना आवश्यक है?

(a) 100-200 सेमी०

(b) 200-250 सेमी०

(c) 250-300 सेमी०

(d) 300-350 सेमी०

136. रबड़ के बागान मुख्यतः पाये जाते हैं-

(a) शीतोष्ण वनीय क्षेत्र में

(b) स्टेपी वनीय क्षेत्र में

(c) पम्पास वनीय क्षेत्र में

(d) भूमध्यरेखीय वनीय क्षेत्र में

137. रबड़ किस जलवायु का पौधा है?

(a) भूमध्यरेखीय

(b) मानसूनी

(c) भूमध्यसागरीय

(d) प० यूरोपीय तुल्य

138. दक्षिण-पूर्व एशिया में रबड़ किस स्थान से लाया गया?

(a) अमेजन बेसिन से

(b) कांगो बेसिन से

(c) नील नदी डेल्टा क्षेत्र से

(d) गंगा नदी डेल्टा क्षेत्र से

139. प्राकृतिक रबड़ किस क्षेत्र की मुख्य उपज है?

(a) दक्षिण अमेरिका

(b) दक्षिण-पूर्वी एशिया

(c) मध्य अफीका

(d) भूमध्यसागरीय क्षेत्र

140. तम्बाकू की कृषि के लिए निम्नलिखित में से कौन-सी भौगोलिक परिस्थिति आवश्यक नहीं है?

(a) 18-27°C तापमान

(b) 100-150 सेमी० वर्षा

(c) खनिज एवं जीवांश युक्त दोमट मिट्टी

(d) सस्ते श्रमिक

141. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?

(a) तम्बाकू उष्ण एवं उपोष्ण कटिबन्ध की फसल है।

(b) चीन विश्व का सबसे बड़ा तम्बाकू उत्पादक देश है जहाँ इसकी कृषि मुख्यतः हुनान तथा क्वेचाऊ क्षेत्र में होती है।

(c) अमेरिका में तम्बाकू की कृषि मुख्यतः पूर्वी क्षेत्र में की जाती है। वर्जिनिया, केंटुकी, टेनेसी, जार्जिया एवं उत्तरी केरोलिना यहाँ के प्रमुख तम्बाकू उत्पादक प्रान्त हैं।

(d) उपर्युक्त सभी

142. विश्व में तम्बाकू का सबसे बड़ा उत्पादक देश है-

(a) भारत

(b) चीन

(c) संयुक्त राज्य अमेरिका

(d) सी० आई० एस०

143. विश्व में तम्बाकू का उत्पादन करने वाले प्रमुख देशों का उत्पादन के आधार पर सही अवरोही क्रम है-

(a) यू० एस० ए०, चीन, ब्राजील एवं भारत

(b) यू० एस० ए०, चीन, भारत, एवं ब्राजील

(c) चीन, यू० एस० ए०, ब्राजील एवं भारत

(d) चीन, यू० एस० ए०, भारत एवं ब्राजील

144. उच्च कोटि की मादकता वाली सुगन्ध (Aroma) से परिपूर्ण ओरिएण्टल किस्म की तम्बाकू का विश्व में सर्वाधिक उत्पादन कहाँ होता है?

(a) संयुक्त राज्य अमेरिका

(b) चीन

(c) भारत

(d) तुर्की

145. विश्व में इलायचीं का सबसे प्रमुख उत्पादक देश कौन है?

(a) भारत

(b) ग्वाटेमाला

(c) मैक्सिको

(d) मालागासी

146. विश्व में अफीम का सर्वाधिक उत्पादन किस देश में होता है?

(a) चीन

(b) पाकिस्तान

(c) अफगानिस्तान

(d) भारत

147. इजमिर की घाटी जो अफीम की कृषि के लिए प्रसिद्ध है, किस देश में स्थित है?

(a) अफगानिस्तान

(b) ईरान

(c) इराक

(d) टर्की

148. ट्रान्सजीनिक फसलों का सबसे बड़ा उत्पादक देश कौन है?

(a) संयुक्त राज्य अमेरिका

(b) कनाडा

(c) चीन

(d) अर्जेण्टीना

149. विश्व में सर्वाधिक आलू कहाँ पैदा होते हैं?

(a) रूस

(b) संयुक्त राज्य अमेरिका

(c) पोलैंड

(d) नीदरलैंड

150. विश्व में अंगूर का सर्वाधिक उत्पादन करने वाला देश है?

(a) इटली

(b) फ्रांस

(c) स्पेन

(d) टर्की

151. जैतून विस्तृत क्षेत्र में उगाया जाता है-

(a) फ्रांस में

(b) चीन में

(c) घाना में

(d) पोलैंड में

152. फल एवं सब्जियों के निर्यात हेतु उनकी खेती होती है-

(a) इजरायल में

(b) मिस्र में

(c) नीदरलैंड में

(d) मॉरीशस में

153. न्यूजीलैंड की राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था निर्भर है-

(a) निर्यातोन्मुख कृषि पर

(b) भारी उद्योगों पर

(c) पर्यटन पर

(d) इलेक्ट्रानिक उद्योग पर

154. विश्व में केले का सबसे बड़ा उत्पादक है-

(a) कोलम्बिया

(b) जिम्बाब्वे

(c) मलेशिया

(d) भारत

155. दुग्ध उत्पादन में किस देश का प्रथम स्थान है?

(a) संयुक्त राज्य अमेरिका

(b) भारत

(c) नीदरलैंड

(d) डेनमार्क

156. विश्व में ऊन (Wool) का सर्वाधिक उत्पादन करने वाला देश है-

(a) रूस

(b) आस्ट्रेलिया

(c) न्यूजीलैंड

(d) अर्जेण्टीना

157. विश्व का सबसे बड़ा लौंग उत्पादक देश है-

(a) मैक्सिको

(b) ग्वाटेमाला

(c) जंजीबार

(d) भारत

158. विश्व में मोटे अनाज का सबसे बड़ा उत्पादक देश है-

(a) भारत

(b) चीन

(c) ब्राजील

(d) सी०आई०एस०

159. सुमेलित कीजिए-

सूची-I (फसल)  सूची-II (उत्पादक)

A. रबड़     1. मॉरीशस 

B. कहवा   2. कैलीफोर्निया

C. जैतून    3. कोलम्बिया

D. गंन्ना      4. मलेशिया

कूट:

      A B C D

(a) 1 2 3 4

(b) 4 3 2 1

(c) 4 3 1 2

(d) 3 4 2 1

160. बागानी कृषि व्यापक है-

(a) नील नदी घाटी में

(b) मिसीसिपी घाटी में

(c) कैलीफोर्निया में

(d) केरिबियन क्षेत्र में

161. निम्न में से कौन मानव निर्मित धान्य है?

(a) बौना गेहूँ

(b) संकर मक्का

(c) ट्रिटीकेल

(d) सोयाबीन

162. निम्न में से किसको कृषि क्षेत्र में ‘हरित क्रान्ति’ का जन्मदाता कहा जाता है?

(a) नॉर्मन ई० बोरलोग

(b) एम० एस० स्वामीनाथन

(c) ए० वाक्समैन

(d) एस० एन० विनोग्रेडस्कोई

163. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिये गये कूट से सही उत्तर चुनिए-

सूची-I (फसल)  सूची-II (अग्रणी उत्पादक)

A. चावल     1. भारत

B. मक्का     2. यू० एस० ए०

C. कहवा     3. चीन

D. चाय        4. ब्राजील

कूट :

      A B C D

(a) 1 2 3 4

(b) 2 3 4 1

(c) 2 4 3 1

(d) 3 2 4 1

164. निम्नलिखित में से कौन-सा देश गेहूँ और चावल दोनों का विश्व में सबसे बड़ा उत्पादक है?

(a) यू०एस०ए०

(b) चीन

(c) भारत

(d) रूस

165. कुल खाद्यान्न उत्पादन के आधार पर निम्नलिखित देशों का सही अवरोही क्रम है?

1. चीन 2. U.S.A. 3. रूस 4. भारत

कूट :

(a) 1, 2, 3 एवं 4

(b) 1, 2, 4, एवं 3

(c) 2, 1, 3 एवं 4

(d) 2, 1, 4 एवं 3

166. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

(a) इंग्लैंड में कपास की खेती उसकी अपनी आवश्यकताओं के लिए की जाती है।

(b) भारत में जूट का सर्वाधिक उत्पादन पश्चिम बंगाल राज्य द्वारा किया जाता है।

(c) भारत तिलहनों का निर्यातक देश है।

(d) आस्ट्रेलिया भारत से बड़ी मात्रा में ऊन का आयात करता है।

167. सुमेलित कीजिए- 

सूची-I (फसल)  सूची-II (अग्रणी उत्पादक)

A. जैतून       1. सं०रा०अमेरिका

B. कपास     2. इटली

C. सोयाबीन 3. ब्राजील

D. कॉफी      4. चीन

कूट:

     A B C D

(a) 1 4 3 2

(b) 2 1 3 4

(c) 4 1 2 3

(d) 2 4 1 3

168. भारत सर्वश्रेष्ठ उत्पादक एवं उपभोक्ता है- 

(a) चावल का

(b) चाय का

(c) तिलहन का

(d) दाल का

169. नकदी फसल में सम्मिलित नहीं है-

(a) गन्ना

(b) कपास

(c) जूट

(d) गेहूँ

170. उत्पाद व उनके प्रमुख उत्पादक देशों के युग्मों में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित है?

1. अंगूर- इटली

2. तिलहन- भारत

3. मोटा अनाज- भारत

4. कहवा- इथोपिया

कूट :

(a) 1, 3 एवं 4

(b) 2, 3 एवं 4

(c) 1, 2 एवं 3

(d) 1, 2, 3 एवं 4

35. Zealandia / जीलैंडिया विश्व का आठवां संभावित महाद्वीप

35. Zealandia

जीलैंडिया विश्व का आठवां संभावित महाद्वीप



     हम सभी विश्व में सात महाद्वीपों के अस्तित्व से परिचित हैं, परंतु अब संभव है कि लोगों को आठवें महाद्वीप के बारे में पढ़ने और जानने का मौका मिले। भूगर्भशास्त्रियों ने यह दावा किया है कि 49 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल का यह जीलैंडिया महाद्वीप दक्षिण पश्चिम प्रशांत महासागर में ऑस्ट्रेलिया के पूर्व स्थित है। इसका आकार ऑस्ट्रेलिया का दो तिहाई है और 93% भाग जल में डूबा हुआ है। अर्थात इसका मात्र 7% भाग ही जलीय सतह से ऊपर है और शेष भाग लगभग पूरी तरह से 1 से 2 किमी० जल के नीचे डूबा हुआ है। 

Zealandia

       जीलैंडिया के उच्चतम बिंदु न्यूजीलैंड तथा न्यू कैलीडोनिया ही जलीय सतह के ऊपर हैं। इससे संबंधित लेख ‘जीलैंडियाः पृथ्वी का छुपा हुआ महाद्वीप’ (Zealandia: Earth’s Hidden Continent) अमेरिकी जर्नल जीएसए टुडे (जीएसए-जियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ अमेरिका) में मार्च/अप्रैल 2017 के अंक में प्रकाशित हुआ। भू-गर्भशास्त्री निक मॉर्टिमर इस अध्ययन लेख के मुख्य लेखक थे। भू-गर्भशास्त्रियों के अनुसार एक विशिष्ट भूगर्भिक संरचना, एक निश्चित क्षेत्रफल, समुद्र तल से मोटी भूपर्पटी व इसके भू-क्षेत्र का ऊंचा होना आदि ऐसे पर्याप्त आधार हैं जिनके आधार पर जीलैंडिया को आठवें महाद्वीप के रूप में आधिकारिक स्वीकृति प्रदान की जानी चाहिए।

      उल्लेखनीय है कि दो दशकों से भू-गर्भ विज्ञानी जीलैंडिया को महाद्वीपों की श्रेणी में रखने हेतु प्रमाण जुटाने में प्रयासरत हैं और उनका मानना है कि इसे आठवें महाद्वीप के रूप में मान्यता मिल जाने से महाद्वीपीय सतह की संरचना को समझने में सहायता होगी। चूंकि शोधकर्ताओं का यह मानना है कि न्यूजीलैंड इसी महाद्वीप का एक भाग है इसलिए इसकी भौगोलिक तथा भू-आकृतिक संरचना भी न्यूजीलैंड के समान ही है।

    यह ज्ञात हो कि 80 मिलियन वर्ष पहले जीलैंडिया विशाल महाद्वीप गोंडवानालैंड के विभाजन के पश्चात ऑस्ट्रेलिया से टूटकर अलग हुआ था जिसके बाद यह सागरीय जल सतह के नीचे जलमग्न हो गया। जीलैंडिया शब्दावली 1995 में भू-भौतिकीविद ब्रुस लुएन्डिक द्वारा दी गई थी। उस समय यह माना गया था कि महाद्वीप होने के लिए आवश्यक 4 गुणों में से 3 गुण इस महाद्वीप में विद्यमान थे।

    अब उपग्रह प्रौद्योगिकी तथा समुद्री सतह के गुरुत्वीय मैप के उपयोग द्वारा की गई नई खोज ने यह स्पष्ट किया है कि जीलैंडिया जिसके पास एक व्यापक व निश्चित क्षेत्रफल है, महाद्वीप होने की सभी 4 विशेषताओं को धारित करता है। जीलैंडिया के अपतटीय क्षेत्रों में खरबों डॉलर कीमत के जीवाश्म ईंधन भी भंडारित होने के अनुमान हैं।



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35. Geological History of Earth (पृथ्वी का भूगर्भिक इतिहास)

35. Geological History of Earth

(पृथ्वी का भूगर्भिक इतिहास)



पृथ्वी का भूगर्भिक इतिहास

      यदि पृथ्वी की विभिन्न परतों, उनमें पायी जाने वाली चट्टानों, जीव-विकास आदि का अध्ययन किया जाय तो यह निष्कर्ष निकलता है कि पृथ्वी की उत्पत्ति के बाद विशेष प्रकार के कई युग हुये हैं जिनमें विशेष प्रकार की शैलों का जमाव तथा जीवों का विकास हुआ है। इस क्षेत्र में सर्वप्रथम प्रयास फ्रान्सीसी वैज्ञानिक कास्ते-द-बफन का माना जाता है। बफन ने पृथ्वी के इतिहास को सात विभिन्न युगों में प्रस्तुत किया, परन्तु प्रथम युग आज से कितने वर्ष पूर्व प्रारम्भ हुआ, इसके विषय में बफन ने प्रयास नहीं किया। उन्होंने केवल प्रत्येक युग का कार्य-काल ही बताया है।

     वर्तमान समय में पृथ्वी के इतिहास को निम्न रूप में व्यक्त किया जाता है। सर्वप्रथम पृथ्वी के इतिहास को बड़े भागों में विभाजित किया गया है। इस बड़े विभाग को महाकल्प (Era) कहते हैं।

     प्रत्येक महाकल्प को पुनः क्रमिक रूप में व्यवस्थित किया गया है तथा इस प्रकार के भाग को कल्प (Period) कहते हैं।

      प्रत्येक कल्प को पुनः छोटे-छोटे उपविभागों में रखा गया है, जिन्हें युग (Epoch) कहा गया है। प्रत्येक युग का कुल समय भी निर्धारित किया गया है तथा यह भी बताया जाता है कि अमुक युग कब प्रारम्भ हुआ तथा कब तक चलता रहा। इन विभिन्न युगों के जीव तथा वनस्पतियों के विकास पर भी प्रकाश डाला गया है। नीचे की तालिका में पृथ्वी का भूगर्भिक इतिहास स्पष्ट रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।


पृथ्वी का भूगर्भिक इतिहास

(Geological History of Earth)

महाकल्प (Era) कल्प (Period) युग (Epoch) प्रारंभ होने का समय

(मिलियन वर्ष पूर्व)

1. पूर्व-पैल्योजोइक (Pre-Palaeozoic)

या, आद्यकल्प (Azoic)

–

1.आर्कियन

2.पूर्व-कैम्ब्रियन

3500
2. पैल्योजोइक (Palaeozoic) प्रथम कल्प (Primary) 1. कैम्ब्रियन

2.आर्डोविसियन

3.सिल्यूरियन

4.डिवोनियन

5.कार्बोनिफेरस

6.पर्मियन

600
3. मेसोजोइक (Mesozoic) द्वितीय कल्प (Secondary) 1.ट्रियासिक

2.जुरैसिक

3.क्रीटैसियस

225
4. सेनोजोइक (Cenozoic) तृतीय कल्प (Tertiary) 1.इओसीन

2.ओलिगोसीन

3.मायोसीन

4.प्लायोसीन

70
5. नियोजोइक (Neozoic) चतुर्थ कल्प (Quaternary) 1.प्लीस्टोसीन

2.होलोसीन (आधुनिक युग)

1


1. पूर्व-पैल्योजोइक (Pre-Palaeozoic)

1. आर्कियन- संभवतः इसी कल्प में जीवन की उत्पत्ति महासागरों में हुई थी। इस समय नील- हरित शैवाल, छोटे समुद्री घास आदि का उद्भव महासागरों में हुआ।

2. पूर्व-कैम्ब्रियन- प्री-कैम्ब्रियन चट्टानें धात्विक खनिजों की दृष्टि से धनी हैं। अधिकतर लौह-अयस्क, ताँबा, मैंगनीज, यूरेनियम, जिंक, सोना, चाँदी आदि धात्विक खनिज इन्हीं चट्टानों से प्राप्त किए जाते हैं।



2. पैल्योजोइक (Palaeozoic)

1. कैम्ब्रियन- कैम्ब्रियन युग में सागरों में पादप (Plants) के अलावा लगभग सभी महत्वपूर्ण बिना रीढ़ वाले जन्तुओं (invertebrates) की उत्पत्ति होती है। इस काल में स्थल-खंड पर जीवन का कोई चिह्न नहीं मिला है।   

2. आर्डोविसियन- आर्डोविसियन काल में भी स्थल-खंड पर जीवन के प्रमाण नहीं मिले हैं। जलीय क्षेत्र में प्रथम रीढ़ वाले जंतु (vertebrates) की उपस्थिति दर्ज की गई। पहली रीढ़ वाली मछली की उत्पत्ति इसी काल में मानी जाती है। कैम्ब्रियन काल में बिना रीढ़ वाली मछली की उत्पत्ति हुई थी, जिसे अगनाथा (Agnatha) कहा गया है।

3. सिल्यूरियन- सिल्यूरियन काल में पत्तारहित पौधे के रूप में जीवन के प्रथम चिह्न स्थल-खण्ड पर मिलते हैं। समुद्री क्षेत्र में बड़े पैमाने पर प्रवालों (Corals) का विकास हुआ। कैलिडोनियन पर्वतों (स्कैण्डिनेविया एवं स्कॉटलैण्ड के पर्वत) का निर्माण इस काल में हुआ।

4. डिवोनियन- डिवोनियन काल को ‘मछलियों का काल’ के रूप में जाना जाता है। आज उपलब्ध लगभग सभी प्रकार की मछलियों की उत्पत्ति इस काल में हो चुकी थी। स्थलखण्ड पर जड़, तना एवं पत्तीयुक्त पौधों का विकास हुआ। इस काल के अंत में प्रथम उभयचर प्राणी (amphibians) की उत्पत्ति होती है।

5. कार्बोनिफेरस- कार्बोनिफेरस काल में पेंजिया का विखण्डन अंगारा एवं गोंडवाना भूखंड में होता है, जिसका प्रभाव स्थलखण्ड के कई हिस्सों पर पड़ता है। असंख्य वनस्पतियाँ चट्टानों के नीचे दब जाती हैं तथा बाद में कोयले का निर्माण करती हैं। इस काल को ‘कोयला युग’ (coal age) कहा जाता है।

6. पर्मियन- पर्मियन काल में हर्सीनियन पर्वतों (अप्लेशियन पर्वत, USA) का निर्माण होता है तथा कोयले की निर्माण-प्रक्रिया घटती दर से जारी रहती है।



3. मेसोजोइक (Mesozoic)

1. ट्रियासिक- ट्रियासिक काल में डाइनासोर की उत्पत्ति होती है, लेकिन उनकी संख्या सीमित थी।

2. जुरैसिक- जुरैसिक काल में गोंडवाना लैण्ड का विखण्डन कई भागों में होता है। अत्यधिक डाइनासोर की उपस्थिति के कारण इस काल को ‘डाइनासोर युग’ भी कहा जाता है। मेसोजोइक महाकल्प को ‘सरीसृप युग’ (Age) of Reptiles) कहा जाता है। यह महाकल्प पक्षियों की उत्पत्ति का भी काल है।

3. क्रीटैसियस- क्रीटैसियस युग में भारत के दक्षिणी प्रायद्वीप के ऊपर दरारी उद्भेदन द्वारा बेसाल्टिक लावा प्रवाह से दक्कन लावा पठार का निर्माण होता है। डाइनासोर इस काल में विलुप्त हो जाते हैं।



4. सेनोजोइक (Cenozoic)

1. इओसीन- आधुनिक स्तनधारियों की प्रचुरता रही।

2. ओलिगोसीन- पर्वत निर्माणकारी प्रक्रिया तीव्र रही।

3. मायोसीन- पर्वत निर्माण की क्रिया बड़े पैमाने पर हुई। मानव एवं कपि के पूर्वजों अर्थात ड्रायोपिथिकस एवं शिवापिथिकस का उद्द्विकास हुआ।

4. प्लायोसीन- इस काल में पर्वत प्रक्रिया में कमी आई। आस्ट्रेलोपिथिकस का उद्द्विकास हुआ।



5. नियोजोइक (Neozoic)

1. प्लीस्टोसीन- प्लीस्टोसीन युग को ‘हिम युग’ भी कहा जाता है। इस काल में जलवायु परिवर्तन हुआ तथा बड़े पैमाने पर हिमावरण की घटना घटी। प्राचीन मानव (Primitive Man) की उत्पत्ति इसी काल में हुई।

2. होलोसीन (आधुनिक युग)- 10 हजार वर्ष पूर्व होलोसीन युग की शुरुआत होती है तथा आधुनिक मेधावी मानव (Homosapians) का उदय होता है। वर्तमान काल होमोसेपियन्स के उत्कर्ष का काल है। नियोजोइक महाकल्प को ‘मानव युग’ (Age of Man) कहा जाता है।



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23. Intensive Subsistence Farming (गहन निर्वाहन कृषि)

23. Intensive Subsistence Farming

(गहन निर्वाहन कृषि)



         यह कृषि व्यवस्था विशेषकर मानसून एशिया के उन भागों में मिलती है जहाँ भौगोलिक दशाएँ कृषि के लिए विशेष अनुकूल है। स्थानीय उपयोग के के लिए खाद्यान्न फसलों का उत्पादन किया जाता है। विश्व की एक-तिहाई जनसंख्या इस प्रकार की कृषि में लगी हुई है। अधिक जनसंख्या के भरण-पोषण के लिए गहन कृषि को अपनाना अति आवश्यक हो जाता है। इस व्यवस्था की निम्न विशेषताएँ हैं-

(i) खाद्यान्न फसलों में ‘विशेषकर चावल’ की प्रधानता होती है।

(ii) फसलोत्पादन प्रमुख तथा पशुपालन का गौण स्थान है।

(iii) जनसंख्या की अधिकता से सभी प्रकार के कृषि कार्यों में मानवीय श्रम का उपयोग मिलता है।

(iv) कृषि क्षेत्र बिखरे एवं छोटे-छोटे होते हैं तथा कृषक गाँवों में निवास करते हैं।

(v) इस कृषि में आधुनिक कृषि उपकरणों का प्रयोग कम होता है। साथ ही रासायनिक उर्वरकों, दवाइयों आदि का भी प्रयोग कम होता है।

(vi) इस कृषि व्यवस्था में प्रति व्यक्ति उत्पादन कम होने से कृषकों की आर्थिक स्थिति बहुत ही दयनीय होती है। बहुत ही मुश्किल से आवश्यकता की आपूर्ति उत्पादन से हो पाती है। जो पैदा करते हैं, वही खाते भी हैं। भोजन में सब्जी आदि का प्रयोग बहुत ही कम होता है।

(vii) जनसंख्या की अधिकता के कारण उत्पादन की खपत स्थानीय स्तर पर ही हो जाती है। बाजार के लिए अतिरिक्त उत्पादन नहीं हो पाता। बाजार या बड़ी-बड़ी मण्डियों का भी अभाव मिलता है।

     गहन निर्वाहन कृषि व्यवस्था को फसलों की प्रधानता के आधार पर दो भागों में विभाजित किया जा सकता है-

1. चावल प्रधान गहन जीविकोपार्जन कृषि व्यवस्था,

2. चावल विहीन गहन जीविकोपार्जन कृषि व्यवस्था।

1. चावल प्रधान गहन जीविकोपार्जन कृषि व्यवस्था

     विश्व के गहन चावल उत्पादक भागों में वर्ष पर्यन्त ऊँचा तापमान तथा वार्षिक वर्षा 200 सेमी. से अधिक मिलती है। भौगोलिक दशाओं की उपयुक्तता के कारण ही वर्ष में तीन बार तक चावल की कृषि होती है। चावल की इस कृषि व्यवस्था को ‘सावाह’ (Sawah) कृषि के नाम से जाना जाता है।

     मानसून एशियाई देश विश्व का लगभग 90% चावल उत्पन्न करते हैं। मुख्य चावल उत्पादक देश चीन (30%), भारत (21%), इण्डोनेशिया (8.5%), बांग्लादेश (5.6%), थाईलैण्ड (3.8%), वियतनाम (3.7%), म्यामांर (2.5%) एवं जापान (2.3%) हैं।

     इन उपर्युक्त सभी देशों में चावल की कृषि डेल्टाई भागों, बाढ़ के मैदानों, सीढ़ीदार तथा निम्नवर्ती भागों में की जाती है। मुख्य चावल उत्पादित भागों में- गंगा, ब्रह्मपुत्र, इरावदी, मीनांग, सीक्यांग, यांगटिसिक्यॉग के निचले मैदानी एवं डेल्टाई भाग है। कृषि भूमि उपयोग की दृष्टि से भी दक्षिणी पूर्वी एशियाई देशों में चावल के अन्तर्गत अधिकाधिक क्षेत्र मिलता है जिसमें लाओस (95%), थाईलैंड (65%), म्यामांर (60%), जापान (42%), भारत एवं चीन (25%) आदि प्रमुख हैं।

     इस भाग में जनसंख्या घनत्व अधिक है। अतः चावल उत्पादन का अधिकांश भाग स्थानीय उपयोग में ही खपत हो जाता है। इसके बावजूद दक्षिणी-पूर्वी एशिया के ही देश जिसमें म्यामांर, थाईलैंड, कम्बोडिया, ताइवान एवं दक्षिणी वियतनाम मुख्य हैं जो चावल का निर्यात करते हैं। दक्षिणी-पूर्वी एशिया के वही देश जहाँ जनसंख्या का घनत्व अधिक है, चावल उत्पादक हैं। इस प्रकार चावल उत्पादक क्षेत्र एवं सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व का घनिष्ठ सम्बन्ध पाया जाता हैं।

2. चावल विहीन गहन जीविकोपार्जन कृषि व्यवस्था

        मानसून एशिया के ऐसे भाग जहाँ 100 सेमी. से कम वर्षा एवं निम्न तापमान होता है, वहाँ चावल के अतिरिक्त अन्य फसलें भी उत्पन्न की जाती हैं। ऐसे भागों में शुष्क कृषि की प्रधानता होती है जिसमें ज्वार, बाजरा, मक्का, अरहर आदि फसलें उगायी जाती हैं। जहाँ सिंचाई की सुविधा है, वहाँ गेहूँ एवं कपास का भी उत्पादन होता है। इस प्रकार तापमान एवं वर्षा की मात्रा के अनुसार गेहूँ, ज्वार, बाजरा आदि फसलों में से किसी एक ही फसल की प्रधानता रहती है। दक्षिणी पूर्वी एशिया विश्व का लगभग 60% मूंगफली, 57% ज्वार-बाजरा, 40% सोयाबीन, 20% गेंहूँ तथा 16% जौ उत्पन्न करता है।

     मौसमी परिवर्तन के फलस्वरूप जीविकोपार्जन कृषि को तीन वर्गों में विभाजित किया जा सकता है-

(i) ग्रीष्म कालीन मौसम की फसलें

(ii) वर्षा कालीन मौसम की फसलें, एवं

(iii) शीत या शुष्क मौसम की फसलें।

      इस कृषि व्यवस्था वाले भाग में जनसंख्या का घनत्व अधिक है। कृषक वर्ष में दो या तीन फसलें उत्पन्न करते हैं। वर्षाकाल में ज्वार-बाजारा, मक्का, गन्ना, चावल; शीतकाल में गेहूँ, जौ, चना, मटर; तथा ग्रीष्मकाल में सब्जियाँ मूँग, हरे चारे आदि की खेती उन भागों में की जाती है, जहाँ सिंचाई की विशेष सुविधा होती है।

     इस व्यवस्था में मांस-पशु, दुग्ध पशु आदि का पालन कार्य कम है। जनसंख्या की अधिकता के कारण कृषक खाद्यान्न फसलों को ही उत्पन्न करना आवश्यक समझता है। चारागाहों के अन्तर्गत क्षेत्रफल नगण्य है। निम्नवर्गीय परिवारों के लोग भेड़, बकरी, सूअर, मुर्गी आदि पालते हैं। इस भाग के लोग शाकाहारी हैं। कृषक हल जोतने के लिए पशुओं (बैल) को पालते हैं। दुग्ध के लिए कृषक गाय, भैंस पालते हैं। हाल के वर्षों में भारत सरकार द्वारा दुग्ध पशुपालन, सूअर पालन, भेड़ पालन, मुर्गीपालन, मत्स्यपालन, रेशम के कीड़ों आदि के पालन के लिए विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है।

Intensive Subsistence Farming

9. Green Revolution (हरित क्रांति)

9. Green Revolution

(हरित क्रांति)



प्रश्न प्रारूप

Q.1 हरित क्रांति से आप क्या समझते है? यह भारत के किस भाग में अधिक विकसित हुआ और क्यों?

Q.2 हरित क्रांति तथा भारतीय समाज पर उसके सामाजिक, आर्थिक प्रभावों के आलोचनात्मक व्याख्या करें।

Q.3 हरित क्रांति तकनीकी तथा भारतीय समाज पर इसके प्रभावों की आलोचनात्मक व्याख्या करे।

Q.4 आधुनिक कृषि तकनीकी से संबंधित पारिस्थैतिकीय समस्याओं की चर्चा करें। उनकी तीव्रता कम करने के लिए आप कौन से उपाय सुझायेंगे।

Q.5 हरित कांति एक आंशिक क्रांति रही है। इसका प्रभाव कुछ फसलों तथा कुछ क्षेत्रों तक सीमित रहा है?

Green Revolution

(1) हरित क्रांति क्या है?

        कृषि के क्षेत्र में त्वरित परिर्वतन लाने के लिए जो वैज्ञानिक प्रयास किये गये हैं, उसे ही हरित क्रांति की संज्ञा देते हैं। हरित क्रांति का तात्पर्य कृषि क्षेत्र में उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ाकर आत्मनिर्भरता प्राप्त करने से है। विश्व में पहली बार हरित क्रांति की शुरुआत अमेरिकी कृषि वैज्ञानिक और नोबेल पुरस्कार विजेता नॉर्मन बोरलॉग के द्वारा मैक्सिको में किया गया जबकि ‘हरित क्रांति’ शब्द का प्रथम प्रयोग विलियम एस. गौड महोदय के द्वारा किया गया था।

     मैक्सिको में हरित क्रांति को जन्म देकर कृषि उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि लायी गई और वहाँ भूखमरी की समस्या पर नियंत्रण स्थापित किया गया। ठीक उसी वक्त भारतीय वैज्ञानिक एम० एस० स्वामी नाथन ने नॉर्मन बोरलॉग के सम्पर्क में रहकर शोध कार्य कर रहे थे तथा इधर 60 के दशक में भारत खाद्यान्न की समस्या से झूझ रहा था। भारत में भी कृषि उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाने की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।

      तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्रीमती इंदिरा गाँधी तथा तात्कालिक कृषि मंत्री डॉ. सुब्रह्यणयम स्वामी की प्रेरणा से भारत में भी हरित क्रान्ति की शुरुआत करने का निर्णय लिया गया। भारत में हरित क्रांति की शुरुआत 1966-67 ई० में उ०-प० भारत से किया गया। भारतीय संदर्भ में हरित क्रांति एक ऐसा पैकेज प्रोग्राम था जिसमें सिंचाई, उन्नत बीज, रासायनिक उर्वरक एवं कीटनाशक तथा उन्नत तकनीक का प्रयोग कर उत्पादन तथा उत्पादकता बढ़ाने का प्रयास किया गया।

(2) भारत के किस भाग में हरित क्रांति विकसित हुआ और क्यों?

        भारत में हरित क्रांति की शुरुआत उ०-प० भारत के मैदानी क्षेत्र से हुआ। इसके निम्नलिखित कारण थे-

(i) 1966-67 के आकाल से पूर्व इस प्रदेश में “संघन जिला कृषि विकास कार्यक्रम” चलाया जा रहा था जिसके कारण इस प्रदेश में पहले से ही संस्थागत और संरचनात्मक सुविधाएं मौजूद थी। इसलिए इनका लाभ उठाकर हरित क्रांति कार्यक्रम को लागू करने का प्रयास किया गया।

(ii) यह प्रदेश सूखा प्रधान क्षेत्र था किन्तु यहाँ विस्तृत जलोढ़ मैदान, उर्वर मिट्टी और सालोंभर बहने बाली नदियाँ मौजूद थी जिसके आधार पर सिंचाई सुविधाओं का विस्तार तेजी से किया जा सकता था।

(iii) उ०-प० भारत में रासायनिक खाद के प्रयोग से अधिक लाभ मिलता है क्योंकि बाढ़ यहाँ कम आती है। इस कारण से उर्वरक खेतों में अपने प्रभाव को स्पष्ट रूप से दिखाते हैं।

(iv) इस प्रदेश में रहने वाले किसानों के खेत विखरे हुए नहीं थे। सफलतापूर्वक चकबंदी का कार्यक्रम चलाकर भूमि को बड़े-2 जोत में तब्दील कर दिया गया था।

(v) बड़े-2 खेत बन जाने के कारण उसमें ट्रैक्टर का प्रयोग आसान हो गया।

(vi) इस प्रदेश में सिख एवं जाट जैसे जुझारू किसान पहले से मौजूद थे। कृषि के अलावे इसके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं था। इसलिए संस्थागत सुविधाओं का इन लोगों ने भरपूर लाभ उठाया।

(vii) हरित क्रांति के शुरुआत के वक्त पंजाब मुखमंत्री प्रताप सिंह कैरो थे जिन्होंने राजनैतिक एवं प्रशासनिक प्रतिबद्धता दिखाते हुए परिवहन, बिजली, बाजार एवं उचित कीमत का व्यवस्था किया।

    इन्हीं सब कारणों से इस प्रदेश में हरित क्रांति की शुरुआत हुई।

(3) उत्तर-प० भारत के मैदानी क्षेत्र को छोड़कर भारत के अन्य भागों में 1960 के दशक में हरित क्रांति की शुरूआत क्यों नहीं की गयी थी?

     सही अर्थों में ऊपर के सभी कारक देश के अन्य भागों में काम नहीं कर रहे थे। इसीलिए देश के अन्य भागों में हरित क्रांति की शुरुआत नहीं की गई। देश के दूसरे भागों में “गहन जिला कृषि विकास कार्यक्रम” शुरूआत नहीं किये जाने के कारण वहाँ संरचनात्मक संस्थागत सुविधाओं का विकास नहीं हुआ था।

         खासकर उ०-पू० भारत में सदैव बाढ़ की स्थिति बनी रहती थी, इसलिए वहाँ रासायनिक खाद के प्रयोग पर विशेष जोर नहीं दिया गया। पर्याप्त वर्षी हो जाने के कारण यहाँ सिंचाई सुविधाओं के विकास पर जोर नहीं दिया गया। इस क्षेत्र में चकबंदी जैसा कार्यक्रम असफल हो चुका था। भूमिहीन किसानों की संख्या ज्यादा थी। राजनीतिक एवं प्रशासनिक प्रतिबद्धता की कमी थी। नवीन तकनीक इतने मँहगे थे कि किसान उसे खरीद नहीं सकते थे।

           उपरोक्त कारणों के चलते ही देश के अन्य भागों में हरित क्रान्ति की शुरुआत 1960 के दशक में नहीं हो सकी।

         5वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान देश के अन्य भागों में भी हरित क्रांति के संदेश को पहुँचाने का प्रयास किया गया। इसके लिए ऐसे क्षेत्रों को चुना गया जहाँ कमाण्ड एरिया प्रोजेक्ट कार्यक्रम पहले से चल रहे थे। कमाण्ड एरिया प्रोजेक्ट के तहत पूर्वी भारत, पूर्वी तटवर्ती मैदान के अनेक नदी घाटी क्षेत्र में नहरों का विकास कर प्रदेशों का सीमांकित किया गया था ऐसे ही सीमांकित क्षेत्र को कमाण्ड एरिया कहा गया था।

         इसमें कावेरी कमाण्ड एरिया, गण्डक कमाण्ड एरिया, मयूराक्षी कमाण्ड एरिया, कृष्णा तथा गोदावरी कमाण्ड एरिया इत्यादि में हरित क्रांति की शुरुआत की गई। इन कमाण्ड एरिया क्षेत्र में शुरुआत होते ही हरित क्रांति योजना एक विकेन्द्रीकत योजना बन गयी। लेकिन, कमाण्ड एरिया प्रोजेक्ट वाले किसान हरित क्रांति के मर्म को स्पष्ट रूप से समझ नहीं पाये थे, इसलिए उसका पूरा लाभ भी नहीं उठा पाये। परिणामतः प्रथम हरित क्रांति पंजाब, हरियाणा, प० उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कुछ जिलों में ही यह कार्यक्रम सीमित रहा।

      हरित क्रांति का दूसरा चरण 1980 के दशक में प्रारंभ की गई। इसकी शुरुआत 1981 ई० में किया जा चुका था। लेकिन, 1987 ई० में पुन: अकाल की स्थिति उत्पन्न हुई तो देश के अन्य भागों में पुन. हरित क्रांति की संदेश को पहचानने का प्रयास किया गया। इसका लाभ तमिलनाडु से असम तक के किसानों को मिला।

     हरित क्रांति के दूसरे चरण की शुरुआत भारत है। 169 जिलों में किया गया। इनमें से 101 जिलों में चावल का और 68 जिलों में गेहूँ की प्राथमिकता दी गई। 169 जिलों में 38 जिला पूर्वी UP के, 30 जिले MP के, 18 जिला बिहार के, 14 जिले राजस्थान के, 12 जिले महाराष्ट्र के, 9 जिले कर्नाटक के, तमिलनाडु तथा आन्ध्र प्रदेश के 8-8 जिले, प० बंगाल, गुजरात तथा हरियाणा के 7-7 जिले, उड़ीसा के 5 जिले और असम के 3 जिले इसमें शामिल थे। इन क्षेत्रों में हरित क्रांति की दूसरी चरण प्रारंभ करने के पीछे दो कारण थे-

(1) इन जिलों में आकाल की समस्या काफी तीव्र थी। अतः यहाँ खाद्यान्न उत्पादन में शीघ्र बढ़ोतरी की आवश्यकता थी।

(2) इन जिलों में चावल कृषि के लिए पर्यावरण के अनुकूल थी।

     इस तरह उपर्युक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि भारत में हरित क्रांति की शुरुआत भले ही केन्द्रीकृत योजना के रूप में शुरुआत हुई थी। लेकिन, आज हरित क्रांति की संदेश पूरे भारत में पहुंच रहा है। इस तरह यह ए‌क विकेन्द्रीकृत योजना बन चुका है।

सामाजिक-आर्थिक प्रभाव

     हरित क्रांति के कारण भारतीय समाज पर कई प्रकार के प्रभाव पड़े हैं। इनमे से कुछ प्रभाव सकारात्मक हैं लेकिन कुछ प्रभाव नाकारात्मक भी रहे हैं। इन प्रभावों को दो शीर्षकों में बाँटकर अध्ययन किया जा सकता है:-

(A) सामाजिक प्रभाव:

(1) प्रादेशिक विषमता का अभ्युदय:-

      हरित क्रांति के तहत दो तरह की विषमताएँ उत्पन्न हुई-

(ⅰ) अन्तः प्रादेशिक विषमता और

(ⅱ) अन्तर प्रादेशिक विषमता।

      अन्तः प्रादेशिक विषमता के तहत एक ही राज्य के दो क्षेत्र में विषमताएँ उत्पन्न हुई। जैसे- राजस्थान के गंगानगर तथा हनुमानगढ़ जिला खाद्यान्न उत्पादन का भण्डार बन गया, जबकि राजस्थान का शेष भाग पिछड़ा ही रह गया।

     अन्तर प्रादेशिक विषमता के तहत पंजाब, हरियाणा, प० UP और उ० राजस्थान के क्षेत्र हरित क्रांति के कारण अन्न भण्डार के क्षेत्र में तब्दील हो गये।

     जबकि उ०-पूर्वी भारत के क्षेत्र में अभी हरित क्रांति का संदेश नहीं पहुंच पाया है। पंजाब में हरित क्रांति के चलते जो समृद्धि आयी, उसके कारण वहाँ अलगाववाद की समस्या उत्पन्न हुई। पुनः उ०-पूर्वी एवं पूर्वी भारत में हरित क्रांति की शुरुआत नहीं होने के कारण नक्सलवाद की समस्या उत्पन्न हुई है।

(2) सामाजिक विषमता का अभ्युदय:-

     हरित क्रांति में प्रयोग किये जाने वाले बीज, उर्वरक, कीटनाशक, तकनीक, सिंचाई के साधन काफी मँहगे थे। इसका प्रयोग अमीर किसानों ने बखूबी किया। लेकिन भूमिहीन किसान और छोटा जोत रखने वाला किसान के लिए यह संभव नहीं हो पाया। फलतः अमीरी और गरीबी के बीच की खाई और बढ़ गई।

(3) रोजगार पर प्रभाव:-

     हरित क्रांति के कारण रोजगार पर निश्चित रूप से प्रभाव पड़ा है क्योंकि जिन-2 क्षेत्रों में हरित क्रांति की शुरुआत हुई वहाँ दूर-2 से मजदूर आकर खेतों में रोजगार प्राप्त करने लगे। इसके कारण अन्तर राज्यीय प्रवजन को बढ़ावा मिला। लेकिन हरित क्रांति के क्षेत्र वाले किसान मजदूरों का जबड़‌दस्त शोषण का कार्य किया जिससे उनके स्वास्थ्य पर बूरा प्रभाव पड़ा। लेकिन, भूमिहीन मजदूर किसान रोजी-रोटी पाकर न केवल अपने परिवार का भरण-पोषण किया बल्कि अपने स्रोत क्षेत्र में भी आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया। उन मजदूरों से सिख एवं जाट किसानों ने इस तरह से मजदूरी करवाया कि उनके स्वरस्थ्य पर बहुत ही नाकारात्मक प्रभाव पड़ा। स्रोत क्षेत्र में मजदूरों की कमी हुई।

(B) आर्थिक प्रभाव 

    हरित क्रांति के कारण भारत के आर्थिक गतिविधियों पर जबड़दस्त प्रभाव पड़ा है जैसे-

(1) सिंचाई सुविधाओं में विस्तार:-

     हरित क्रांति के कारण सिंचाई सुविधाओं का जबड़दस्त विस्तार हुआ है। विश्व की सब‌से बड़ी नहर प्रणाली इंदिरा गांधी नहर तथा शारदा नहर हमारे देश में है। इसी तरह ट्यूबेल, कूँआ, तालाब जैसे सिंचाई साधनों का विकास हुआ लेकिन परम्परागत सिंचाई साधनों पर इसका नाकारात्मक प्रभाव पड़ा। जैसे- रेहड़, लाठा-कूड़ी, करिंग जैसे सिंचाई साधन विलुप्त हो रहे है।

(2) फसलों के उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि:-

       हरित क्रांति के कारण फसलों के उत्पादन एवं उत्पादकता में भी वृद्धि हुई है। जैसे 1991 में खाद्यान्न का कुल उत्पादन 51 मिलियन टन हुआ करता था जो आज बढ़कर 285 (2017-18) मिलियन टन को पार कर चुका है।

     हरित क्रांति के कारण उत्पादकता में भी बढ़ोतरी हुई है। जैसे- 1981-82 में चावल का प्रति हेक्टेयर उत्पादन 1300 kg था जो बढ़‌कर 2200 kg/हेक्ट० हो चुका है। इसी बीच 1981-82 में गेहूं का प्रति हेक्टेयर उत्पादन 1696 kg हुआ करता था जो अब बढ़‌कर 2900 kg/हेक्ट० हो चुका है।

(3) दलहन एवं तेलहन के भूमि तथा उत्पादन में कमी:-

        हरित क्रांति के कारण तेलहन और दलहन पर नाकारात्मक प्रभाव पड़ा है। जैसे- तेलहन और दलहन वाले भूमि पर किसान खाद्यान्न फसल का उत्पादन करने लगे है जिसके कारण इसके सापेक्षिक उत्पादन में कमी आती है। तेलहन और दलहन का बढ़‌ता हुआ कीमत इसका सबसे बड़ा प्रमाण है।

(4) हरित क्रांति के प्रथम चरण में गेहूँ और आलू के उत्पादन पर साकारात्मक प्रभाव पड़ा था लेकिन चावल पर इसका नाकारात्मक प्रभाव देखा गया। इसी के मद्देनजर दूसरे चरण में चावल के कृषि को अधिक महत्व दिया गया।

(5) कृषि भूमि में  तेजी से विस्तार:-

      हरित क्रांति के कारण कृषि भूमि का तेजी से विस्तार हुआ है।

(6) गन्ना के क्षेत्र एवं उत्पादन में कमी:-

     हरित क्रांति ने नकदी फसल को भी प्रवाभित किया है। जैसे- उ० भारत के प्रसिद्ध गन्ना पेटी वाले क्षेत्र में खाद्यान्न फसलों का घुसपैठ हो जाने के कारण उ० भारत में गन्ना है उत्पादन में कमी आयी है और यह पेटी धीरे-2 द० भारत की ओर विस्थापित होते जा रही है।

(7) कृषि और पशुपालन के बीच सह-संबंध में कमी:-

      हरित क्रांति में उन्नत बीज का प्रयोग किया जाता है जिसका डण्ठल छोटा होता है जिसके कारण पशुओं के लिए पर्याप्त चारा प्राप्त नहीं हो पाती है। किसान खेती का कार्य ट्रैक्टर से करते हैं। इसलिए किसान श्रम करने वाले पशुओं का उपयोग नहीं कर पाते हैं जिनके कारण कृषि और पशुपालन के बीच सह-संबंध कमजोर हुआ है।

(8) कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा:-

     हरित क्रांति के कारण कृषि और विभिन्न प्रकार के उद्योगों के बीच में सह-संबंध और मजबूत हुआ है। जैसे- किसान बड़े पैमाने पर ट्रेक्टर, उर्वरक, तकनीक, ऊर्जा इत्यादि का प्रयोग करते हैं जिसके कारण यहाँ कृषि उपकरण निर्माण करने वाले कई कल कारखानों का विकास हुआ। पेट्रो रसायन पर आधारित कई बड़े-2 तेल शोधन कारखाने, उर्वरक संयंत्र का विकास हुआ। कई कुटीर एवं लघु उद्योगों को खासकर चावल मील, गेहूँ मील, बेकरी उद्योग को कच्चा माल मिलने लगा।

(9) परिवहन एवं व्यापार में वृद्धि:-

      हरित क्रांति के कारण परिवहन एवं व्यापार में भी वृद्धि हुई। जैसे- पंजाब और हरियाणा में सड़‌कों का जाल बिछ चुका है। भारत हरित क्रांति के पहले खाद्यान्न आयातक देश था। अब खाद्यान्न निर्यातक देश के रूप में बदल चुका है। भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा चावल निर्यातक देश है।

(10) सेवा क्षेत्र का तेजी से विस्तार:-

      हरित क्रांति के आगमन से किसानों के बीच में जो समृ‌द्धि आई जिसके कारण भारत में तेजी से शिक्षा, बैंकिंग, प्रबंधन, वित, वाणिज्य, इंजीनियरिंग, चिकित्सा जैसे सेवा क्षेत्र का तेजी से विस्तार हो रहा है।

निष्कर्ष:

       इस तरह उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि हरित क्रांति वास्तव में एक क्रांतिकारी योजना है तभी तो इसने सामाजिक एवं आर्थिक सभी पहलुओं को प्रभावित किया है। हरित क्रांति के कारण जो नाकारात्मक प्रभाव दिखाई दे रहे हैं, उसे अल्पकालिक माना जाना चाहिए और उससे भारतीय संविधान तथा भारत के सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के दायरे में रहकर उससे निपटने का प्रयास किया जाना चाहिए।

हरित क्रांति के स्थायित्व के लिए सुझाव

(1) व्यापक क्षेत्र में विस्तार- हरित क्रांति को देश के सभी भागों में फैलाया जाय।

(2) सभी फसलों पर लागू- हरित क्रांति को गेहूँ के अतिरिक्त चावल एवं अन्य खाद्यान्नों एवं व्यापारिक फसलों की कृषि पर लागू किया जाना चाहिए।

(3) सिंचाई का उत्तम प्रबंध

(4) जैविक उर्वरक का प्रयोग

(5) जैव कीटनाशक दवाओं का प्रयोग

(6) बहुफसली कृषि प्रणाली पर जोर

(7) नई कृषि नीति में सुधार

(8) कृषि के संस्थागत एवं अवसंरचनात्मक सुविधाओं में सुधार



उत्तर लिखने का दूसरा तरीका



       फसल उत्पादन तथा उत्पादकता में त्वरित परिवर्तन लाने के लिए जो प्रयास किया गया, उसे हरित क्रांति कहते हैं।

उद्देश्य- फसलों की उत्पादन तथा उत्पादकता बढ़ाकर देश को कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना।

शुरुआत- 1966-67 ई०

शुरुआतकर्ता/ जन्मदाता (भारत में)- M.S. स्वामी नाथन

प्रधानमंत्री (उस समय)- श्रीमती इंदिरा गाँधी

कृषि मंत्री (उस समय)- M. सुब्रह्मणयम

“हरित क्रांति” शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग टरनर महोदय ने किया। लेकिन अतर्राष्ट्रीय मंच / स्तर पर विलियम गॉड महोदय ने इसे प्रचारित किया।

हरित क्रांति का जन्मदाता- नॉर्मन बोरलॉग (USA)।

⇒ हरित क्रांति का सर्वप्रथम प्रयोग मैक्सिको में हुई, क्योंकि वहाँ सूखे पड़े हुए थे।

⇒ हरित क्रांति एक पैकेज प्रोगाम था जिसमें अधिकाधिक उन्नत बीज, उर्वरक, सिंचाई, कीटनाशक, आधु‌निक कृषि यंत्र इत्यादि के अधिकाधिक प्रयोग पर निर्णय लिया गया।

कमाण्ड एरिया:- कमाण्ड एरिया प्रोजेक्ट के तहत पूर्वी भारत, पूर्वी तटवर्ती मैदान के अनेक नदी घाटी क्षेत्रों में नहरों का विकास कर प्रदेशों का सीमांकन किया गया था। ऐसे सीमांकित क्षेत्र को कमाण्ड एरिया कहा गया। इसमे कावेरी कमाण्ड एरिया, गण्डक कमाण्ड एरिया, मयुराक्षी कमाण्ड एरिया, कृष्णा तथा गोदावरी कमाण्ड एरिया आदि शमिल है।

हरित क्रांति लाने वाले प्रमुख करक/घटक

(1) अधिक उपज देने वाले बीजों का प्रयोग।

नोट: फिलीपीन्स में अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान केन्द्र है।

(2) उर्वरकों का प्रयोग।

(3) सिंचाई में विस्तार।

(4) कीटनाशकों का प्रयोग।

(5) आधुनिक कृषि यंत्रों का प्रयोग।

(6) ग्रामीण विद्युतीकरण को बढ़ावा।

(7) ऋण की सुविधा।

(8) मृदा परीक्षण एवं भूमि संरक्षण।

(9) बहुफसल को बढ़ावा देना।

(10) फसलों के किस्मों का निर्धारण।

(11) कृषि उत्पादों के बिक्री हेतु या विपणन की व्यवस्था।

हरित क्रांति किस भाग में विकसित हुआ और क्यों?

            हरित क्रांति का शुभारंभ उतर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्र से किया गया था क्योंकि-

(1) यहाँ पहले से सघन जिला कृषि विकास कार्यक्रम चलाये जा रहे थे।

(2) ये क्षेत्र सूखा प्रधान क्षेत्र थे।

(3) जलोढ़ का विस्तृत मैदान और सालोभर बहने वाली नदियाँ मौजूद थी।

(4) यह बाढ़ मुक्त क्षेत्र था जिसके करण उर्वरकों के बहने की संभावना नहीं थी।

(5) इस क्षेत्र में सदियों से सिख, जाट तथा राजपूत किसान रहते आ रहे थे।

(6) प्रताप सिंह कैरो जैसा व्यकि पंजाब का मुख्यमंत्री था जिसके पास राजनैतिक- प्रशासनिक सुझ-बूझ मौजूद थी।

(7) भाखड़ा-नांगल परियोजना के कारण अबाध्य रूप से विद्युत की आपूर्ति हो रही थी।

(8) दिल्ली जैसे महानगर को प्रभाव।

उत्तर-पूर्वी भारत में हरित क्रांति की शुरुआत नहीं की गई क्योंकि यहाँ-

(1) संस्थागत एवं संरचनात्मक कारकों का अभाव था।

(2) सघन जिला कृषि विकास कार्यक्रम नहीं चलाया जा रहा था।

(3) बाढ़ प्रभावित क्षेत्र था।

(4) चकबंदी के अभाव में भूमि टुकड़ों में बंटे थे।

(5) छोटे किसानों की संख्या अधिक थी।

(6) यहाँ के अधिकांश किसान गरीब थे।

        पाँचवी पंचवर्षीय योजना में हरित क्रांति का संदेश कमांड एरिया प्रोजेक्ट वाले क्षेत्र में पहुंचाया गया। जैसे- कावेरी कमाण्ड एरिया, मयूराक्षी कमाण्ड एरिया, कृष्णा एवं गोदावरी कमाण्ड एरिया। क्योंकि-

(1) कमांड एरिया प्रोजेक्ट शुरुआत किये जाने के कारण उस क्षेत्र में बाढ़ पर नियंत्रण स्थापित किया जा चुका था और सिंचाई एवं विद्युत सुविधाओं का विकास किया जा चुका था।

(2) हरित क्रांति के दूसरे चरण की शुरूआत 1981 से मानी जाती है क्योंकि फिलीपीन्स स्थित अन्तरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान केन्द्र से उन्नत धान के बीज (IR-8) का प्र‌योग किया गया। प्रारंभ में इसका प्रयोग प्रायोगिक तौर पर हुआ था। लेकिन 1887 ई० में 169 जिलों में इसका प्रयोग किया गया क्योंकि-

(1) इन जिलों में अकाल की समस्या मौजूद थी।

(2) यहाँ चावल कृषि हेतु अनुकूल पर्यावरण मौजूद थी।

हरित क्रांति का प्रभाव

        हरित क्रांति के कारण भारतीय समाज पर कई प्रकार के प्रभाव पड़े हैं। इनमे से कुछ प्रभाव सकारात्मक हैं लेकिन कुछ प्रभाव नाकारात्मक भी रहे हैं। इन प्रभावों को दो शीर्षकों में बाँटकर अध्ययन किया जा सकता है:-

(A) सामाजिक प्रभाव:

(1) प्रादेशिक विषमता का अभ्युदय:-

      हरित क्रांति के तहत दो तरह की विषमताएँ उत्पन्न हुई-

(ⅰ) अन्तः प्रादेशिक विषमता और

(ⅱ) अन्तर प्रादेशिक विषमता।

      अन्तः प्रादेशिक विषमता के तहत एक ही राज्य के दो क्षेत्र में विषमताएँ उत्पन्न हुई। जैसे- राजस्थान के गंगानगर तथा हनुमानगढ़ जिला खाद्यान्न उत्पादन का भण्डार बन गया, जबकि राजस्थान का शेष भाग पिछड़ा ही रह गया।

     अन्तर प्रादेशिक विषमता के तहत पंजाब, हरियाणा, प० UP और उ० राजस्थान के क्षेत्र हरित क्रांति के कारण अन्न भण्डार के क्षेत्र में तब्दील हो गये।

     जबकि उ०-पूर्वी भारत के क्षेत्र में अभी हरित क्रांति का संदेश नहीं पहुंच पाया है। पंजाब में हरित क्रांति के चलते जो समृद्धि आयी, उसके कारण वहाँ अलगाववाद की समस्या उत्पन्न हुई। पुनः उ०-पूर्वी एवं पूर्वी भारत में हरित क्रांति की शुरुआत नहीं होने के कारण नक्सलवाद की समस्या उत्पन्न हुई है।

(2) सामाजिक विषमता का अभ्युदय:-

     हरित क्रांति में प्रयोग किये जाने वाले बीज, उर्वरक, कीटनाशक, तकनीक, सिंचाई के साधन काफी मँहगे थे। इसका प्रयोग अमीर किसानों ने बखूबी किया। लेकिन भूमिहीन किसान और छोटा जोत रखने वाला किसान के लिए यह संभव नहीं हो पाया। फलतः अमीरी और गरीबी के बीच की खाई और बढ़ गई।

(3) रोजगार पर प्रभाव:-

     हरित क्रांति के कारण रोजगार पर निश्चित रूप से प्रभाव पड़ा है क्योंकि जिन-2 क्षेत्रों में हरित क्रांति की शुरुआत हुई वहाँ दूर-2 से मजदूर आकर खेतों में रोजगार प्राप्त करने लगे। इसके कारण अन्तर राज्यीय प्रवजन को बढ़ावा मिला। लेकिन हरित क्रांति के क्षेत्र वाले किसान मजदूरों का जबड़‌दस्त शोषण का कार्य किया जिससे उनके स्वास्थ्य पर बूरा प्रभाव पड़ा। लेकिन, भूमिहीन मजदूर किसान रोजी-रोटी पाकर न केवल अपने परिवार का भरण-पोषण किया बल्कि अपने स्रोत क्षेत्र में भी आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया। उन मजदूरों से सिख एवं जाट किसानों ने इस तरह से मजदूरी करवाया कि उनके स्वरस्थ्य पर बहुत ही नाकारात्मक प्रभाव पड़ा। स्रोत क्षेत्र में मजदूरों की कमी हुई।

(B) आर्थिक प्रभाव 

    हरित क्रांति के कारण भारत के आर्थिक गतिविधियों पर जबड़दस्त प्रभाव पड़ा है जैसे-

(1) सिंचाई सुविधाओं में विस्तार:-

     हरित क्रांति के कारण सिंचाई सुविधाओं का जबड़दस्त विस्तार हुआ है। विश्व की सब‌से बड़ी नहर प्रणाली इंदिरा गांधी नहर तथा शारदा नहर हमारे देश में है। इसी तरह ट्यूबेल, कूँआ, तालाब जैसे सिंचाई साधनों का विकास हुआ लेकिन परम्परागत सिंचाई साधनों पर इसका नाकारात्मक प्रभाव पड़ा। जैसे- रेहड़, लाठा-कूड़ी, करिंग जैसे सिंचाई साधन विलुप्त हो रहे है।

(2) फसलों के उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि:-

       हरित क्रांति के कारण फसलों के उत्पादन एवं उत्पादकता में भी वृद्धि हुई है। जैसे 1991 में खाद्यान्न का कुल उत्पादन 51 मिलियन टन हुआ करता था जो आज बढ़कर 285 (2017-18) मिलियन टन को पार कर चुका है।

     हरित क्रांति के कारण उत्पादकता में भी बढ़ोतरी हुई है। जैसे- 1981-82 में चावल का प्रति हेक्टेयर उत्पादन 1300 kg था जो बढ़‌कर 2200 kg/हेक्ट० हो चुका है। इसी बीच 1981-82 में गेहूं का प्रति हेक्टेयर उत्पादन 1696 kg हुआ करता था जो अब बढ़‌कर 2900 kg/हेक्ट० हो चुका है।

(3) दलहन एवं तेलहन के भूमि तथा उत्पादन में कमी:-

        हरित क्रांति के कारण तेलहन और दलहन पर नाकारात्मक प्रभाव पड़ा है। जैसे- तेलहन और दलहन वाले भूमि पर किसान खाद्यान्न फसल का उत्पादन करने लगे है जिसके कारण इसके सापेक्षिक उत्पादन में कमी आती है। तेलहन और दलहन का बढ़‌ता हुआ कीमत इसका सबसे बड़ा प्रमाण है।

(4) हरित क्रांति के प्रथम चरण में गेहूँ और आलू के उत्पादन पर साकारात्मक प्रभाव पड़ा था लेकिन चावल पर इसका नाकारात्मक प्रभाव देखा गया। इसी के मद्देनजर दूसरे चरण में चावल के कृषि को अधिक महत्व दिया गया।

(5) कृषि भूमि में  तेजी से विस्तार:-

      हरित क्रांति के कारण कृषि भूमि का तेजी से विस्तार हुआ है।

(6) गन्ना के क्षेत्र एवं उत्पादन में कमी:-

     हरित क्रांति ने नकदी फसल को भी प्रवाभित किया है। जैसे- उ० भारत के प्रसिद्ध गन्ना पेटी वाले क्षेत्र में खाद्यान्न फसलों का घुसपैठ हो जाने के कारण उ० भारत में गन्ना है उत्पादन में कमी आयी है और यह पेटी धीरे-2 द० भारत की ओर विस्थापित होते जा रही है।

(7) कृषि और पशुपालन के बीच सह-संबंध में कमी:-

      हरित क्रांति में उन्नत बीज का प्रयोग किया जाता है जिसका डण्ठल छोटा होता है जिसके कारण पशुओं के लिए पर्याप्त चारा प्राप्त नहीं हो पाती है। किसान खेती का कार्य ट्रैक्टर से करते हैं। इसलिए किसान श्रम करने वाले पशुओं का उपयोग नहीं कर पाते हैं जिनके कारण कृषि और पशुपालन के बीच सह-संबंध कमजोर हुआ है।

(8) कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा:-

     हरित क्रांति के कारण कृषि और विभिन्न प्रकार के उद्योगों के बीच में सह-संबंध और मजबूत हुआ है। जैसे- किसान बड़े पैमाने पर ट्रेक्टर, उर्वरक, तकनीक, ऊर्जा इत्यादि का प्रयोग करते हैं जिसके कारण यहाँ कृषि उपकरण निर्माण करने वाले कई कल कारखानों का विकास हुआ। पेट्रो रसायन पर आधारित कई बड़े-2 तेल शोधन कारखाने, उर्वरक संयंत्र का विकास हुआ। कई कुटीर एवं लघु उद्योगों को खासकर चावल मील, गेहूँ मील, बेकरी उद्योग को कच्चा माल मिलने लगा।

(9) परिवहन एवं व्यापार में वृद्धि:-

      हरित क्रांति के कारण परिवहन एवं व्यापार में भी वृद्धि हुई। जैसे- पंजाब और हरियाणा में सड़‌कों का जाल बिछ चुका है। भारत हरित क्रांति के पहले खाद्यान्न आयातक देश था। अब खाद्यान्न निर्यातक देश के रूप में बदल चुका है। भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा चावल निर्यातक देश है।

(10) सेवा क्षेत्र का तेजी से विस्तार:-

      हरित क्रांति के आगमन से किसानों के बीच में जो समृ‌द्धि आई जिसके कारण भारत में तेजी से शिक्षा, बैंकिंग, प्रबंधन, वित, वाणिज्य, इंजीनियरिंग, चिकित्सा जैसे सेवा क्षेत्र का तेजी से विस्तार हो रहा है।

निष्कर्ष:

       इस तरह उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि हरित क्रांति वास्तव में एक क्रांतिकारी योजना है तभी तो इसने सामाजिक एवं आर्थिक सभी पहलुओं को प्रभावित किया है। हरित क्रांति के कारण जो नाकारात्मक प्रभाव दिखाई दे रहे हैं, उसे अल्पकालिक माना जाना चाहिए और उससे भारतीय संविधान तथा भारत के सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के दायरे में रहकर उससे निपटने का प्रयास किया जाना चाहिए।

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