Chapter 12 World Climate and Climate Change (विश्व की जलवायु एवं जलवायु परिवर्तन)

Chapter 12 World Climate and Climate Change

(विश्व की जलवायु एवं जलवायु परिवर्तन)

(भाग – 1 : भौतिक भूगोल के मूल सिद्धांत)

बिहार बोर्ड तथा NCERT कक्षा 11वीं के भूगोल का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर



Chapter 12 World Climate

1. बहुवैकल्पिक प्रश्न एवं उनके उत्तर

(i) निम्नलिखित में से कौन-सा साल विश्व का सबसे गर्म साल माना गया है।

(क) 1990

(ख) 1998

(ग) 1885

(घ) 1950

उत्तर- (ख) 1998

व्याख्या:

    1998 में बहुत मजबूत एल नीनो घटना हुई थी, और उस समय इसे अब तक का सबसे गर्म वर्ष माना जाता था।

(ii) नीचे लिखे गए चार जलवायु के समूहों में से कौन-सा समूह आर्द्र दशाओं को प्रदर्शित करता है।

(क) A-B-C-D

(ख) A-C-D-E

(ग) B-C-D-E

(घ) A-C-D-F

उत्तर- (ख) A-C-D-E

व्याख्या:

   कोपेन (Köppen) जलवायु वर्गीकरण में-

⇒ A = उष्ण आर्द्र जलवायु (Humid Tropical)

⇒ C = समशीतोष्ण आर्द्र जलवायु (Humid Temperate)

⇒ D = शीतोष्ण आर्द्र जलवायु (Humid Continental)

⇒ E = ध्रुवीय जलवायु (Polar) – यह शुष्क नहीं मानी जाती, बल्कि ठंडी एवं सामान्यतः आर्द्र श्रेणी में रखी जाती है।

   इसलिए A, C, D, E जलवायु समूह आर्द्र दशाओं को प्रदर्शित करते हैं।

अतः सही विकल्प है (ख) A–C–D–E।

(iii) निम्नलिखित में किस प्रकार के क्षेत्र में कोपेन की H जलवायु पायी जाती है?

(क) उच्च अक्षांश

(ख) उच्च पर्वतीय क्षेत्र

(ग) उच्च तापमान

(घ) अधिक वर्षा

उत्तर- (ख) उच्च पर्वतीय क्षेत्र

व्याख्या:

     कोपेन की H जलवायु Highland Climate (उच्च पर्वतीय जलवायु) को दर्शाती है। यह उन क्षेत्रों में पाई जाती है जहाँ ऊँचाई अधिक होती है और तापमान ऊँचाई के साथ कम हो जाता है। इसलिए इसका संबंध अक्षांश या सामान्य तापमान से नहीं, बल्कि ऊँचाई (Altitude) से होता है।

इसलिए सही विकल्प है → (ख) उच्च पर्वतीय क्षेत्र

(iv) कोपेन द्वारा जलवायु वर्गीकरण के क्या आधार हैं?

(क) तापमान एवं वृष्टि के मासिक मान

(ख) वृष्टि एवं वाष्पीकरण के मासिक मान

(ग) निरपेक्ष एवं सापेक्ष आर्द्रता के मासिक मान

(घ) वाष्पोत्सर्जन के मासिक मान

उत्तर- (क) तापमान एवं वृष्टि के मासिक मान

व्याख्या:

   कोपेन (Köppen) का जलवायु वर्गीकरण मुख्यतः दो प्रमुख तत्वों पर आधारित है-

1. तापमान के मासिक औसत

2. वृष्टि (Rainfall) के मासिक औसत

   इन्हीं दोनों के आधार पर विश्व की जलवायु को विभिन्न प्रमुख व उप-प्रकारों में बाँटा गया है। इसलिए विकल्प (क) सही है।

(v) कोपेन के A प्रकार की जलवायु के लिए निम्न में से कौन-सी दशा अर्हक हैं?

(क) सभी महीनों में उच्च वर्षा

(ख) सबसे ठंडे महीने का औसत मासिक तापमान हिमांक बिंदु से अधिक

(ग) सभी महीनों का औसत मासिक तापमान 18° सेल्सियस से अधिक

(घ) सभी महीनों का औसत तापमान 10° सेल्सियस से नीचे

उत्तर- (क) सभी महीनों में उच्च वर्षा

कारण (Köppen A-type Climate – Tropical Climate):

Köppen की जलवायु वर्गीकरण में A प्रकार (Tropical Climate) की मुख्य अर्हक (criterion) है- सबसे ठंडे महीने का औसत तापमान भी 18°C से अधिक होना चाहिए।

यही कथन विकल्प (ग) में दिया गया है (सभी महीनों का तापमान 18°C से अधिक)।

(vi) जलवायु के वर्गीकरण से संबंधित कोपेन की पद्धति को व्यक्त किया जा सकता है-

(क) अनुप्रयुक्त

(ख) व्यवस्थित

(ग) जननिक

(घ) आनुभविक

उत्तर- (घ) आनुभविक

व्याख्या:

     कोपेन की जलवायु वर्गीकरण पद्धति आनुभविक (Empirical) है, क्योंकि यह तापमान और वर्षा के वास्तविक (observed) मासिक आँकड़ों पर आधारित होती है।

(vii) भारतीय प्रायद्वीप के अधिकतर भागों को कोपेन की पद्धति के अनुसार वर्गीकृत किया जायेगा-

(क) “Af”

(ख) “BSh”

(ग) “Cfb”

(घ) “Am”

उत्तर- (ख) “BSh”

व्याख्या:

   भारतीय प्रायद्वीप का अधिकांश भाग (विशेषकर दक्कन पठार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना आदि) अर्ध-शुष्क और उष्णकटिबंधीय स्टेपीय (Semi-arid) स्थितियों वाला है, जिसे कोपेन के “BSh” जलवायु प्रकार में रखा जाता है।

अन्य विकल्प क्यों नहीं:

  • Af – भूमध्यरेखीय सदाबहार वर्षावन जलवायु → भारत में केवल अंडमान-निकोबार व पश्चिमी घाट के कुछ भाग।
  • Cfb – सागरीय/नम-समशीतोष्ण जलवायु → भारत में शिलांग तथा ऊँचे पहाड़ी भागों में सीमित।
  • Am – मानसूनी जलवायु → केवल पश्चिमी घाट और तटीय क्षेत्रों में प्रमुख, प्रायद्वीप के “अधिकांश” भाग में नहीं।

   इसलिए सही विकल्प BSh है।

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए

(i) जलवायु के वर्गीकरण के लिए कोपेन के द्वारा किन दो जलवायविक चरों का प्रयोग किया गया है?

उत्तर- कोपेन ने जलवायु के वर्गीकरण के लिए मुख्यतः दो जलवायविक चरों का प्रयोग किया है-

1. तापमान (Temperature)

2. वर्षा/वृष्टि (Precipitation) 

    इन्हीं दोनों के मासिक मानों के आधार पर विश्व की विभिन्न जलवायु प्रकार निर्धारित किए गए हैं।

(ii) वर्गीकरण की जननिक प्रणाली आनुभाविक प्रणाली से किस प्रकार भिन्न है?

उत्तर- जननिक प्रणाली (Genetic classification) जलवायु को नियंत्रित करने वाले कारणों जैसे वायुमंडलीय परिसंचरण, दाब पद्धतियाँ और ऊष्मा कारक के आधार पर वर्गीकृत करती है। जबकि आनुभाविक (Empirical) प्रणाली वास्तविक अवलोकित आँकड़ों- तापमान, वर्षा, आर्द्रता आदि पर आधारित होती है। इसलिए एक कारण आधारित है, दूसरी आँकड़ा आधारित।

(iii) किस प्रकार की जलवायुओं में तापांतर बहुत कम होता है?

उत्तर- उष्ण कटिबंधीय आर्द्र जलवायु में वार्षिक तापांतर बहुत कम तथा वर्षा अधिक होती है। इस प्रकार की जलवायु मकर रेखा और कर्क रेखा के बीच पाई जाती है।

(iv) सौर कलंकों में वृद्धि होने पर किस प्रकार की जलवायविक दशाएँ प्रभावित होंगी?
उत्तर- सौर कलंकों में वृद्धि होने पर सूर्य से आने वाला विकिरण थोड़ा बढ़ जाता है, जिससे पृथ्वी पर तापमान में हल्की वृद्धि हो सकती है। इससे मौसमी पैटर्न, मानसूनी वर्षा, समुद्री धाराएँ और वायुमंडलीय परिसंचरण जैसे जलवायविक तत्व प्रभावित होते हैं, जिससे जलवायु में अल्पकालिक परिवर्तन दिखाई देते हैं।

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए

(i) A एवं B प्रकार की जलवायुओं की जलवायविक दशाओं की तुलना करें।

उत्तर- A तथा B प्रकार की जलवायुओं की तुलना

       कोपेन के जलवायु वर्गीकरण में A-प्रकार (उष्णकटिबंधीय जलवायु) तथा B-प्रकार (शुष्क जलवायु) दो अत्यंत भिन्न जलवायविक क्षेत्र हैं।
A-प्रकार जलवायु में पूरे वर्ष उच्च तापमान पाया जाता है तथा सभी महीनों में औसत तापमान 18°C से अधिक रहता है। यहाँ वर्षा प्रचुर मात्रा में होती है, विशेषकर भूमध्य रेखा के निकट इन क्षेत्रों में 150–300 सेमी तक वार्षिक वर्षा मिलती है। नमी अधिक होने के कारण वनस्पति सघन होती है और वर्षा व तापमान दोनों का मौसमी अंतर कम होता है।

    इसके विपरीत B-प्रकार जलवायु को शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों की जलवायु कहा जाता है। यहाँ वर्षा बहुत कम (25–50 सेमी या उससे भी कम) होती है और वाष्पीकरण की दर वर्षा से बहुत अधिक रहती है। तापमान का दैनिक तथा वार्षिक अंतर काफी बड़ा पाया जाता है। वनस्पति विरल होती है और मरुस्थलीय परिस्थितियाँ प्रमुख रहती हैं।

     इस प्रकार, A-प्रकार गर्म-नम और B-प्रकार गर्म-शुष्क जलवायु का प्रतिनिधित्व करते हैं।

(ii) C एवं A प्रकार की जलवायु में आप किस प्रकार की वनस्पति पाएंगे?

उत्तर- कोपेन के A (उष्णकटिबंधीय) तथा C (समशीतोष्ण) प्रकार की जलवायु में पाई जाने वाली वनस्पति उनके तापमान और वर्षा के अनुसार भिन्न-भिन्न होती है।

     A प्रकार (उष्णकटिबंधीय जलवायु) में वर्ष भर उच्च तापमान (18°C से अधिक) तथा प्रचुर वर्षा होती है। यहाँ घने उष्णकटिबंधीय वर्षावन, सदाबहार वृक्ष, महोगनी, आबनूस, रबर, नारियल, बांस, पाम आदि प्रमुख हैं। कुछ क्षेत्रों में मानसूनी प्रभाव के कारण उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन भी मिलते हैं, जिनमें साल, सागौन, बबूल, जामुन आदि पाए जाते हैं।

    C प्रकार (समशीतोष्ण मृदु जलवायु) में तापमान मध्यम होता है और वर्षा पूरे वर्ष या मुख्यतः सर्दियों में होती है। यहाँ समशीतोष्ण मिश्रित वन, पर्णपाती वृक्ष, ओक, बीच, मेपल, पॉपलर जैसे वृक्ष प्रमुख होते हैं। भूमध्यसागरीय क्षेत्रों (Csa/Csb) में कठोर पत्तों वाले सख्त-पर्णी झाड़ीदार वन (स्क्लेरोफिलस वन) और ऑलिव, पाइंस जैसी प्रजातियाँ मिलती हैं।

    इस प्रकार, A जलवायु में घने उष्णकटिबंधीय वन जबकि C जलवायु में मिश्रित और पर्णपाती समशीतोष्ण वनस्पति पाई जाती है।

(iii) ग्रीन हाउस गैसों से आप क्या समझते हैं? ग्रीन हाउस गैसों की एक सूची तैयार करें।

उत्तर- ग्रीन हाउस गैसें (Greenhouse Gases) वे गैसें हैं जो पृथ्वी के वायुमंडल में उपस्थित होकर सूर्य से आने वाली ऊष्मा को अवशोषित करती हैं और पुनः विकिरित करती हैं। इससे पृथ्वी का तापमान बढ़ा रहता है, जिसे ग्रीनहाउस प्रभाव कहा जाता है।

    ये गैसें प्राकृतिक रूप से भी बनती हैं और मानव गतिविधियों जैसे जीवाश्म ईंधन का दहन, कृषि, उद्योग और वनों की कटाई से अत्यधिक मात्रा में बढ़ जाती हैं। ग्रीनहाउस गैसों में वृद्धि वैश्विक तापन (Global Warming) और जलवायु परिवर्तन का प्रमुख कारण है, जिसके परिणामस्वरूप समुद्र स्तर में वृद्धि, सूखा, बाढ़ और मौसम की चरम घटनाएँ बढ़ रही हैं।

ग्रीन हाउस गैसों की सूची:

1. कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂)

2. मीथेन (CH₄)

3. नाइट्रस ऑक्साइड (N₂O)

4. ओजोन (O₃)

5. क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs)

6. जलवाष्प (H₂O)   

    ये सभी गैसें पृथ्वी के ऊष्मा संतुलन को प्रभावित करती हैं।

Chapter 13 Oceanic Water (महासागरीय जल)

Chapter 13 Oceanic Water

(महासागरीय जल)

(भाग – 1 : भौतिक भूगोल के मूल सिद्धांत)

बिहार बोर्ड तथा NCERT कक्षा 11वीं के भूगोल का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर



Chapter 13 Oceanic Water

 

1. बहुवैकल्पिक प्रश्न एवं उनके उत्तर

(i) उस तत्त्व की पहचान करें जो जलीय चक्र का भाग नहीं है

(क) वाष्पीकरण

(ख) वर्षण

(ग) जलयोजन

(घ) संघनन

उत्तर- (ग) जलयोजन

व्याख्या-

जलीय चक्र (Water Cycle) के मुख्य तत्व हैं-

⇒ वाष्पीकरण (Evaporation)

⇒ संघनन (Condensation)

⇒ वर्षन (Precipitation)

  लेकिन जलयोजन (Hydration) जल चक्र की प्रक्रिया का भाग नहीं है। यह एक रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें कोई पदार्थ पानी के साथ मिलकर हाइड्रेट बनाता है। इसलिए (ग) सही विकल्प है।

(ii) महाद्वीपीय ढाल की औसत गहराई निम्नलिखित के बीच होती है-

(क) 2-20 मीटर

(ख) 20-200 मीटर

(ग) 200-2,000 मीटर

(घ) 2,000-20,000 मीटर

उत्तर- (ख) 20-200 मीटर

व्याख्या:

   महाद्वीपीय ढाल (Continental Shelf) समुद्री तल का वह भाग है जो महाद्वीप के किनारे से धीरे-धीरे ढलान बनाते हुए समुद्र की ओर बढ़ता है। इसकी औसत गहराई सामान्यतः 20 से 200 मीटर के बीच होती है। इसके बाद ढाल अचानक अधिक ढलान वाली बनकर महाद्वीपीय ढालान (Continental Slope) में परिवर्तित हो जाती है।

(iii) निम्नलिखित में से कौन की लघु उच्चावच आकृति महासागरों में नहीं पाई जाती है?

(क) समुद्री टीला

(ख) महासागरीय गंभीर

(ग) प्रवाल द्वीप

(घ) निमग्न द्वीप

उत्तर- (ग) प्रवाल द्वीप

व्याख्या:

   प्रश्न में पूछा गया है कि कौन-सी “लघु उच्चावच आकृति” महासागरों में नहीं पाई जाती है?

⇒ महासागरीय गंभीर (Ocean Trench) बहुत बड़ी एवं विशाल आकृति होती है, न कि लघु उच्चावच।

⇒ शेष तीन (समुद्री टीला, प्रवाल द्वीप, निमग्न द्वीप) अपेक्षाकृत छोटे समुद्री भू-आकृतियों में गिने जाते हैं।

    इसलिए महासागरीय गंभीर यहाँ उपयुक्त उत्तर है।

(iv) निम्न में से कौन-सा सबसे छोटा महासागर है?

(क) हिंद महासागर

(ख) अटलांटिक महासागर

(ग) आर्कटिक महासागर

(घ) प्रशांत महासागर

उत्तर- (ग) आर्कटिक महासागर

व्याख्या:

    आर्कटिक महासागर पृथ्वी का सबसे छोटा और सबसे उथला महासागर है। यह उत्तरी ध्रुवीय क्षेत्र में स्थित है और अन्य सभी महासागरों की तुलना में आकार में सबसे छोटा होता है।

(v) लवणता को प्रति समुद्री जल में घुले हुए नमक (ग्राम) की मात्रा से व्यक्त किया जाता है-

(क) 10 ग्राम

(ख) 100 ग्राम

(ग) 1,000 ग्राम

(घ) 10,000 ग्राम

उत्तर- (ग) 1,000 ग्राम

व्याख्या:

    लवणता (Salinity) को प्रति 1,000 ग्राम (अर्थात् 1 किलोग्राम) समुद्री जल में घुले हुए कुल नमक की मात्रा के रूप में व्यक्त किया जाता है।

   इसे “Parts per thousand (‰)” में भी मापा जाता है। सामान्य समुद्री जल की लवणता लगभग 35‰ होती है, जिसका अर्थ है — 1,000 ग्राम समुद्री जल में लगभग 35 ग्राम नमक।

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए

(i) हम पृथ्वी को नीला ग्रह क्यों कहते हैं?

उत्तर- पृथ्वी को नीला ग्रह इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसकी सतह का लगभग 71% भाग जल से ढका है। अंतरिक्ष से देखने पर महासागरों का नीला रंग स्पष्ट दिखाई देता है, जिससे पृथ्वी अन्य ग्रहों की तुलना में नीली चमकती हुई दिखती है।

(ii) महाद्वीपीय सीमांत क्या होता है?

उत्तर- महाद्वीपीय सीमांत वह भाग है जहाँ महाद्वीप समुद्र में धीरे-धीरे ढलान के रूप में समाप्त होता है। इसमें महाद्वीपीय शेल्फ, महाद्वीपीय ढाल और महाद्वीपीय उठान शामिल होते हैं। यह क्षेत्र जैव विविधता, खनिज संसाधनों और समुद्री जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

(iii) विभिन्न महासागरों के सबसे गहरे गर्तों की सूची बनाइए।

उत्तर- ये महासागरों के सबसे गहरे भाग होते हैं। अभी तक लगभग 57 गर्तों को खोजा गया है, जिसमें से 32 प्रशांत महासागर में, 19 अटलांटिक महासागर में एवं 6 हिंद महासागर में हैं।

     विभिन्न महासागरों के सबसे गहरे गर्त इस प्रकार हैं-

⇒ प्रशांत महासागर: मैरियाना गर्त (चैलेंजर डीप) – लगभग 11,000 मीटर

⇒ अटलांटिक महासागर: प्यूर्टो रिको गर्त – लगभग 8,376 मीटर

⇒ हिंद महासागर: जावा या सुंडा गर्त  – लगभग 7,725 मीटर

⇒ आर्कटिक महासागर: मोलॉय डीप – लगभग 5,550 मीटर

(iv) ताप प्रवणता क्या है?

उत्तर- समुद्र में ताप प्रवणता (Thermocline) वह परत होती है जिसमें गहराई बढ़ने के साथ तापमान तेजी से घटता है। यह सतह के गर्म जल और नीचे के ठंडे जल के बीच स्थित संक्रमण क्षेत्र है। यहाँ तापमान में तेज गिरावट समुद्री जल के घनत्व और धाराओं को प्रभावित करती है।

(v) समुद्र में नीचे जाने पर आप ताप की किन परतों का सामना करेंगे? गहराई के साथ तापमान में भिन्नता क्यों आती है?

उत्तर- समुद्र में नीचे जाने पर तीन ताप-परतें मिलती हैं- ऊपरी ऊष्मीय परत, थर्मोक्लाइन, और गहरी शीतल परत। गहराई बढ़ने पर सूर्य का प्रकाश कम पहुँचता है, ऊष्मा अवशोषण घटता है तथा दाब बढ़ता है, इसलिए तापमान क्रमशः घटता जाता है और गहरे जल में स्थायी ठंडक रहती है।

(vi) समुद्री जल की लवणता क्या है?

उत्तर- समुद्री जल की लवणता से तात्पर्य प्रति किलोग्राम समुद्री जल में घुले हुए नमक की मात्रा से है। सामान्यतः समुद्री जल की औसत लवणता लगभग 35‰ (35 ग्राम प्रति किलोग्राम) होती है। यह वाष्पीकरण, वर्षा, नदी-जल प्रवाह तथा तापमान के अनुसार स्थान-स्थान पर बदलती रहती है।

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए

(i) जलीय चक्र के विभिन्न तत्त्व किस प्रकार अंतर-संबंधित हैं?

उत्तर- जलीय चक्र, जिसे जल चक्र भी कहा जाता है, पृथ्वी पर जल के निरंतर संचरण की प्राकृतिक प्रक्रिया है। इसके विभिन्न तत्त्व- वाष्पीकरण, संघनन, वर्षण, अवक्षण, प्रवाह, भू-जल पुनर्भरण तथा वाष्पोत्सर्जन आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं और एक-दूसरे पर निर्भर रहते हैं।

    सबसे पहले सूर्य की ऊर्जा महासागरों, नदियों और झीलों के जल को गरम करती है, जिससे वाष्पीकरण होता है। पौधों द्वारा पत्तियों से जल का उत्सर्जन वाष्पोत्सर्जन कहलाता है। वायुमंडल में उठी जल-वाष्प ठंडी होकर संघनन के रूप में बादलों का निर्माण करती है। बादलों में नमी की अधिकता होने पर वर्षण (बारिश, हिमपात या ओलावृष्टि) पृथ्वी की सतह पर गिरता है।

     वर्षा का जल दो मार्गों से आगे बढ़ता है-  कुछ भाग सतह से बहते हुए नदियों, झीलों और समुद्रों में पहुँच जाता है, जिसे सतही प्रवाह कहा जाता है। शेष जल भूमि में समा कर भू-जल पुनर्भरण करता है, जो बाद में सोतों, कुओं और नदियों के माध्यम से सतह पर वापस आता है।

      ये सभी तत्त्व एक निरंतर चक्र बनाते हैं जिसमें किसी एक प्रक्रिया में परिवर्तन अन्य प्रक्रियाओं को प्रभावित करता है। इस प्रकार जलीय चक्र पृथ्वी के जल-संतुलन, जल उपलब्धता, जलवायु नियंत्रण और जीवन के संरक्षण में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

(ii) महासागरों के तापमान वितरण को प्रभावित करने वाले कारकों का निरीक्षण कीजिए।

उत्तर- महासागरों के तापमान वितरण को प्रभावित करने वाले कारक

1. अक्षांश (Latitude):-

    भूमध्य रेखा के निकट सूर्य की किरणें सीधी पड़ती हैं, जिससे तापमान अधिक होता है, जबकि ध्रुवों की ओर तापमान घटता जाता है। इसलिए तापमान का सबसे प्रमुख नियंत्रक अक्षांश है।

2. समुद्री धाराएँ (Ocean Currents):-

    गर्म धाराएँ (जैसे गल्फ स्ट्रीम) तटीय क्षेत्रों का तापमान बढ़ाती हैं, जबकि ठंडी धाराएँ (जैसे लैब्रेडोर करंट) तापमान कम कर देती हैं। इससे महासागर का क्षैतिज तापमान वितरण बदल जाता है।

3. वायु की दिशा एवं पवन प्रणाली (Wind System):-

    पवनें गर्म या ठंडी सतही जलराशि को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाती हैं, जिससे सतही तापमान में परिवर्तन होता है।

4. गहराई (Depth):-

    गहराई बढ़ने पर सूर्य का प्रकाश कम मिलता है, इसलिए तापमान तेजी से घटता है। सतह पर तापमान सर्वाधिक तथा 1,000 मीटर से नीचे लगभग स्थिर रहता है।

5. भूमि-महासागर वितरण (Distribution of Land & Water):-

    भूमि के असमान वितरण के कारण उत्तरी गोलार्ध में तापमान असंतुलन अधिक पाया जाता है, जबकि दक्षिणी गोलार्ध में महासागरीय विस्तार अधिक होने से तापमान अपेक्षाकृत संतुलित रहता है।

6. लवणता (Salinity):-

     अधिक लवणता वाली जलराशि घनी होती है और ताप को तेजी से अवशोषित करती है, जिससे तापमान में अंतर देखा जाता है।

7. सौर ऊष्मा का मौसमी परिवर्तन (Seasonal Changes):-

    ग्रीष्म में तापमान बढ़ता है और शीत ऋतु में घटता है, जिससे सतही तापमान में क्षेत्रीय भिन्नताएँ उत्पन्न होती हैं।

Chapter 14 Movements of Oceanic Water (महासागरीय जल संचलन)

Chapter 14 Movements of Oceanic Water

(महासागरीय जल संचलन)

(भाग – 1 : भौतिक भूगोल के मूल सिद्धांत)

बिहार बोर्ड तथा NCERT कक्षा 11वीं के भूगोल का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर



Chapter 14 Movements of Oceanic Water

1. बहुवैकल्पिक प्रश्न एवं उनके उत्तर

(i) महासागरीय जल की ऊपर एवं नीचे गति किससे संबंधित है

(क) ज्वार

(ख) तरंग

(ग) धाराएँ

(घ) ऊपर में से कोई नहीं

उत्तर- (ख) तरंग

व्याख्या:

     महासागरीय जल की ऊपर-नीचे (up and down) गति मुख्य रूप से तरंगों (Waves) से संबंधित होती है। तरंगें हवा के प्रभाव से समुद्र की सतह पर बनती हैं और ये जल को ऊपर-नीचे चलाती हैं।

⇒ ज्वार (Tides) – समुद्र जल का नियमित ऊपर-नीचे उठना-गिरना है, लेकिन यह पूरे समुद्र स्तर पर होता है।

⇒ धाराएँ (Currents) – समुद्र जल का क्षैतिज दिशा में बहाव दर्शाती हैं।

    इसलिए, प्रश्न में “ऊपर एवं नीचे गति” विशेष रूप से तरंगों द्वारा होती है।

(ii) वृहत् ज्वार आने का क्या कारण है?

(क) सूर्य और चन्द्रमा का पृथ्वी पर एक ही दिशा में गुरुत्वाकर्षण बल

(ख) सूर्य और चन्द्रमा द्वारा एक-दूसरे की विपरीत दिशा से पृथ्वी पर गुरुत्वाकर्षण बल

(ग) तटरेखा का दंतुरित होना

(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं

उत्तर- (क) सूर्य और चन्द्रमा का पृथ्वी पर एक ही दिशा में गुरुत्वाकर्षण बल

व्याख्या:

     वृहत् ज्वार (Spring Tide) आने का कारण है-

सूर्य और चन्द्रमा का पृथ्वी पर एक ही दिशा में गुरुत्वाकर्षण बल लगाना।

⇒ जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीध में होते हैं (अमावस्या और पूर्णिमा के समय), तब दोनों का गुरुत्वाकर्षण बल मिलकर ज्वार की ऊँचाई को बहुत बढ़ा देता है। इसी को वृहत् ज्वार कहा जाता है।

(iii) पृथ्वी और चन्द्रमा की न्यूनतम दूरी कब होती है?

(क) अपसौर

(ख) उपसौर

(ग) उपभू

(घ) अपभू

उत्तर- (ग) उपभू

व्याख्या:

     जब चन्द्रमा पृथ्वी के सबसे निकट होता है, उस अवस्था को उपभू (Perigee) कहा जाता है।

⇒ उपभू = पृथ्वी और चन्द्रमा की न्यूनतम दूरी

⇒ अपभू (Apogee) = पृथ्वी और चन्द्रमा की अधिकतम दूरी

⇒ उपसौर/अपसौर सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी के लिए उपयोग किए जाते हैं।

(iv) पृथ्वी और चन्द्रमा की न्यूनतम दूरी कब होती है?

(क) अक्टूबर

(ख) जुलाई

(ग) सितम्बर

(घ) जनवरी

उत्तर- (घ) जनवरी

व्याख्या:

    सही उत्तर इनमें से कोई भी विकल्प शत-प्रतिशत सही नहीं है, क्योंकि पृथ्वी और चन्द्रमा की न्यूनतम दूरी “उपभू (Perigee)” पर होती है, और उपभू हर 27.3 दिन (एक चन्द्र मास) में आता है, किसी एक निर्धारित महीने में नहीं।

      लेकिन यदि यह प्रश्न महीने के आधार पर एक उत्तर चुनने के लिए दिया गया है, तो परीक्षा में सामान्यतः माना जाता है कि:

➡ जनवरी (घ)
    क्योंकि जनवरी में पृथ्वी सूर्य के सबसे निकट (उपसौर) होती है, जिससे पृथ्वी-चन्द्रमा दूरी कई वर्षों में औसतन थोड़ी कम पाई जाती है।

अतः परीक्षा-उन्मुख उत्तर: (घ) जनवरी

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए

(i) तरंगें क्या हैं?

उत्तर- तरंगें वास्तव में ऊर्जा हैं। तरंगों में जल का कण छोटे वृत्ताकार रूप में गति करते हैं। वायु जल को ऊर्जा प्रदान करती है जिससे तरंगें उत्पन्न होती हैं। वायु के कारण तरंगें महासागर में गति करती हैं तथा ऊर्जा तटरेखा पर निर्मुक्त होती हैं।

    दूसरे शब्दों में तरंगें जल की वह गति हैं जिसमें जल के कण ऊपर-नीचे दोलन करते हैं, परंतु वे आगे नहीं बढ़ते। केवल तरंग का रूप आगे बढ़ता है। यह मुख्यतः हवा के दबाव और वेग से उत्पन्न होती हैं। समुद्र की सतह पर दिखाई देने वाली ऊँच-नीच यही तरंगें कहलाती हैं।

(ii) महासागरीय तरंगें ऊर्जा कहाँ से प्राप्त करती हैं?

उत्तर- वायु के कारण तरंगें महासागर में गति करती हैं तथा ऊर्जा तटरेखा पर निर्मुक्त होती हैं। बड़ी तरंगें खुले महासागरों में पायी जाती हैं। तरंगें जैसे ही आगे की ओर बढ़ती हैं बड़ी होती जाती हैं तथा वायु से ऊर्जा को अवशोषित करती हैं।

        दूसरे शब्दों में महासागरीय तरंगें मुख्य रूप से वायु (हवा) के प्रवाह से ऊर्जा प्राप्त करती हैं। जब तेज हवा समुद्र की सतह पर बहती है तो वह घर्षण पैदा करती है, जिससे पानी की सतह पर तरंगें बनती हैं। इसके अलावा भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट और चन्द्रमा-सूर्य के गुरुत्वाकर्षण भी कुछ तरंगों को ऊर्जा प्रदान करते हैं।

(iii) ज्वार-भाटा क्या है?

उत्तर- ज्वारभाटा समुद्र के जलस्तर का नियमित रूप से ऊपर उठना और नीचे गिरना है। यह मुख्यतः चन्द्रमा तथा कुछ हद तक सूर्य के गुरुत्वाकर्षण आकर्षण के कारण होता है। जलस्तर का बढ़ना ज्वार तथा घटकर न्यूनतम स्तर पर पहुँच जाना भाटा कहलाता है। यह प्रक्रिया प्रतिदिन दो बार होती है।

(iv) ज्वार-भाटा उत्पन्न होने के क्या कारण हैं?

उत्तर- ज्वार-भाटा उत्पन्न होने के मुख्य कारण निम्नलिखित है-

1. चन्द्रमा का गुरुत्वाकर्षण – ज्वार-भाटा का सबसे बड़ा कारण चन्द्रमा का पृथ्वी के महासागरों पर आकर्षण बल है।

2. सूर्य का गुरुत्वाकर्षण – सूर्य भी ज्वार-भाटा को प्रभावित करता है, हालांकि इसका प्रभाव चन्द्रमा से कम होता है।

3. पृथ्वी का घूर्णन – पृथ्वी अपने अक्ष पर घूमती है, जिससे जलस्तर में नियमित उतार-चढ़ाव होता है।

4. सूर्य-चन्द्रमा-पृथ्वी की स्थिति – जब सूर्य और चन्द्रमा एक सीध में होते हैं, तो वृहत् ज्वार (Spring tide) बनती है; विपरीत स्थिति में क्षीण ज्वार (Neap tide)।

5. समुद्री तटरेखा का आकार – खाड़ी, मुहाना या संकरी तटीय संरचना में ज्वार की ऊँचाई बढ़ जाती है।

(v) ज्वार-भाटा नौका संचालन से कैसे संबंधित हैं?

उत्तर- ज्वार-भाटा नौका संचालन में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऊँचा ज्वार (High Tide) होने पर समुद्र का जल स्तर बढ़ जाता है, जिससे जहाज और नौकाएँ आसानी से तट पर आ-जा सकती हैं तथा उथले स्थानों में भी संचरण सम्भव हो जाता है।

    कम ज्वार (Low Tide) के समय जल स्तर घटने से कई तटीय क्षेत्र उथले हो जाते हैं, जिससे नौकाओं के फँसने या टकराने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए बंदरगाहों में जहाजों की आवाजाही, माल लोडिंग-अनलोडिंग तथा नौकायन का समय प्रायः ज्वार-भाटा तालिकाओं के आधार पर निर्धारित किया जाता है।

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए

(i) जलधाराएँ तापमान को कैसे प्रभावित करती हैं ? उत्तर पश्चिम यूरोप के तटीय क्षेत्रों के तापमान को ये कैसे प्रभावित करते हैं?

उत्तर- जलधाराएँ (Ocean Currents) और तापमान पर उनका प्रभाव:

    जलधाराएँ महासागरों में बहने वाली विशिष्ट दिशा वाली गर्म तथा शीतल धाराएँ होती हैं, जो अपने साथ ताप ऊर्जा (Heat Energy) का स्थानांतरण करती हैं। गर्म जलधाराएँ जिन क्षेत्रों से गुजरती हैं, वहाँ का तापमान बढ़ा देती हैं, क्योंकि वे उष्ण कटिबंध से अधिक गर्म पानी को उच्च अक्षांशों की ओर ले जाती हैं।

    इसके विपरीत, शीत जलधाराएँ ध्रुवीय या शीत क्षेत्रों का ठंडा पानी भूमध्य रेखा की ओर ले जाती हैं और जिन तटों के पास बहती हैं, वहाँ तापमान घटा देती हैं। इस प्रकार जलधाराएँ किसी क्षेत्र के जलवायु नियंत्रण (Climate Regulation) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

उत्तर-पश्चिम यूरोप पर प्रभाव:

     उत्तर-पश्चिम यूरोप के तटीय क्षेत्रों के तापमान को मुख्य रूप से गल्फ स्ट्रीम (Gulf Stream) तथा उसकी शाखा नॉर्थ अटलांटिक ड्रिफ्ट प्रभावित करती है। ये गर्म जलधाराएँ मैक्सिको की खाड़ी से अत्यधिक गर्म पानी को यूरोप की ओर लेकर जाती हैं। परिणामस्वरूप-

⇒ ब्रिटेन, आयरलैंड, नॉर्वे व आस-पास के तटीय क्षेत्रों का सर्दी का तापमान अपेक्षाकृत अधिक रहता है।

⇒ समान अक्षांशों वाले कनाडा या रूस की तुलना में यहाँ ठंड कम पड़ती है।

⇒ बंदरगाह सालभर बर्फमुक्त रहते हैं, जिससे व्यापार व नौपरिवहन सुगम होता है।

    इस प्रकार जलधाराएँ उत्तर-पश्चिम यूरोप को अपेक्षाकृत मृदु तथा संतुलित जलवायु प्रदान करती हैं।

(ii) जलधाराएं कैसे उत्पन्न होती हैं?

उत्तर- जलधाराएँ (Ocean Currents) महासागरों में बहने वाली विशाल जल-धाराएँ हैं, जो पृथ्वी की जलवायु, तापमान और देशों के समुद्री व्यापार को प्रभावित करती हैं। इनका निर्माण कई भौतिक कारणों से होता है। जलधाराओं के उत्पन्न होने के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं-

जलधाराओं के उत्पन्न होने के कारण:

1. पवन (Wind):-

    समुद्री पवनें जैसे ट्रेड विंड्स और वेस्टरलीज सतही जल को धकेलती हैं, जिससे सतही जलधाराएँ बनती हैं।

2. तापमान का अंतर (Temperature Difference):-

       भूमध्य रेखा पर गर्म जल ऊपर उठता है और ध्रुवों की ओर बहता है, जबकि ठंडा जल नीचे की ओर डूबकर भूमध्य रेखा की ओर आता है। इस तापमान अंतर से जलधाराएँ उत्पन्न होती हैं।

3. लवणता (Salinity Difference):-

     अधिक लवणता वाला जल भारी होता है और नीचे की ओर जाता है, जबकि कम लवणता वाला जल ऊपर रहता है। इस घनत्व के अंतर से गहरी जलधाराएँ बनती हैं।

4. पृथ्वी का घूर्णन (Coriolis Force):-

    पृथ्वी के घूमने से जलधाराओं की दिशा मुड़ जाती है—उत्तरी गोलार्ध में दाईं ओर और दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर।

5. समुद्री तल का ढाल और आकार (Ocean Basin Relief):-

     समुद्र के तल पर पहाड़, घाटियाँ, ढलान और तटरेखाओं का आकार जलधाराओं की दिशा और गति को प्रभावित करते हैं।

6. ज्वार-भाटा (Tides):-

    चन्द्रमा और सूर्य के गुरुत्वाकर्षण से ज्वार-भाटा उत्पन्न होते हैं, जो तटीय क्षेत्रों में स्थानीय जलधाराएँ बनाते हैं।

निष्कर्ष:-

    जलधाराएँ कई प्राकृतिक कारकों के संयुक्त प्रभाव से उत्पन्न होती हैं और पृथ्वी की जलवायु प्रणाली का महत्वपूर्ण भाग हैं।

Chapter 15 Life on the Earth (पृथ्वी पर जीवन)

Chapter 15 Life on the Earth

(पृथ्वी पर जीवन)

(भाग – 1 : भौतिक भूगोल के मूल सिद्धांत)

बिहार बोर्ड तथा NCERT कक्षा 11वीं के भूगोल का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर



Chapter 15 Life on the Earth

1. बहुवैकल्पिक प्रश्न एवं उनके उत्तर

(i) निम्नलिखित में से कौन जैवमंडल में सम्मिलित हैं

(क) केवल पौधे

(ख) केवल प्राणी

(ग) सभी जैव व अजैव जीव

(घ) सभी जीवित जीव

उत्तर- (ग) सभी जैव व अजैव जीव

व्याख्या:

     जैवमंडल (Biosphere) में पृथ्वी के वे सभी भाग सम्मिलित होते हैं जहाँ जीवन पाया जाता है, और इसमें जैव घटक (जीवित – पौधे, प्राणी, सूक्ष्मजीव) तथा अजैव घटक (निर्जीव — वायु, जल, मृदा आदि) दोनों शामिल होते हैं।

(ii) उष्णकटिबंधीय घास के मैदान निम्न में से किस नाम से जाने जाते हैं

(क) प्रेयरी

(ख) स्टेपी

(ग) सवाना

(घ) इनमें से कोई नहीं

उत्तर- (ग) सवाना

व्याख्या:

       उष्णकटिबंधीय घास के मैदानों को सवाना (Savanna) कहा जाता है। ये क्षेत्र मुख्यतः अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में पाए जाते हैं, जहाँ वर्षा सीमित और मौसमी होती है।

(iii) चट्टानों में पाए जाने वाले लोहांश के साथ ऑक्सीजन मिलकर निम्नलिखित में से क्या बनाती है

(क) आयरन कार्बोनेट

(ख) आयरन ऑक्सइड

(ग) आयरन नाइट्राइट

(घ) आयरन सल्फेट

उत्तर- (ख) आयरन ऑक्सइड

व्याख्या:

     चट्टानों में मौजूद लोहा (Iron) जब ऑक्सीजन के संपर्क में आता है तो वह ऑक्सीकरण (oxidation) क्रिया द्वारा आयरन ऑक्साइड (Iron Oxide) बनाता है। यह प्रक्रिया “जंग लगना (rusting)” कहलाती है और चट्टानों के लाल या भूरे रंग का कारण भी यही है।

(iv) प्रकाश-संश्लेषण प्रक्रिया के दौरान, प्रकाश की उपस्थिति में कार्बन डाइऑक्साइड जल के साथ मिलकर क्या बनाती है

(क) प्रोटीन

(ख) कार्बोहाइड्रेट्स

(ग) एमिनोएसिड

(घ) विटामिन

उत्तर- (ख) कार्बोहाइड्रेट्स

व्याख्या:

      प्रकाश-संश्लेषण (Photosynthesis) की प्रक्रिया में पौधे सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) और जल (H₂O) को मिलाकर कार्बोहाइड्रेट (ग्लूकोज़ – C₆H₁₂O₆) और ऑक्सीजन (O₂) बनाते हैं।

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए।

(i) पारिस्थितिकी से आप क्या समझते हैं?

उत्तर- पारिस्थितिकी (Ecology) वह विज्ञान है जिसमें जीवों और उनके परिवेश के बीच पारस्परिक संबंधों का अध्ययन किया जाता है। यह बताती है कि जीव अपने वातावरण में कैसे रहते हैं, एक-दूसरे पर कैसे निर्भर करते हैं तथा पर्यावरणीय कारकों जैसे जल, वायु, मिट्टी और प्रकाश से उनका क्या संबंध होता है।

(ii) पारितंत्र (Ecological System) क्या है? संसार के प्रमुख पारितंत्र प्रकारों को बताएँ।

उत्तर- पारितंत्र (Ecological System) जीवित (जैव) और निर्जीव (अजैव) तत्वों का ऐसा तंत्र है जो आपस में परस्पर क्रिया करके जीवन को बनाए रखता है। प्रमुख पारितंत्र प्रकार हैं- स्थलीय पारितंत्र (जैसे वन, मरुस्थल, घासभूमि) और जलीय पारितंत्र (जैसे मीठे जल और समुद्री पारितंत्र)।

(iii) खाद्य श्रृंखला क्या है? चराई खाद्य श्रृंखला का एक उदाहरण देते हुए उसके अनेक स्तर बताएं?

उत्तर- खाद्य श्रृंखला वह क्रम है जिसमें एक जीव दूसरे जीव को भोजन के रूप में खाता है और ऊर्जा एक स्तर से दूसरे स्तर तक प्रवाहित होती है।
उदाहरण (चराई खाद्य श्रृंखला):
घास → हिरण → बाघ।
      इसमें घास उत्पादक, हिरण प्राथमिक उपभोक्ता और बाघ द्वितीयक उपभोक्ता होता है।

अन्य उदाहरण –

♣ घास → हिरण → शेर।

♣ घास → कीट → मेढ़क → पक्षी।

(iv) खाद्य जाल (food wed) से आप क्या समझते हैं? उदाहरण सहित बताएँ।

उत्तर- खाद्य जाल (Food Web) से तात्पर्य उस जटिल तंत्र से है जिसमें एक पारितंत्र (ecosystem) के अनेक खाद्य श्रृंखलाएँ (food chains) आपस में जुड़ी होती हैं। इसमें विभिन्न जीव एक-दूसरे पर भोजन के लिए निर्भर रहते हैं।
उदाहरण: घास → हिरण → बाघ तथा घास → खरगोश → लोमड़ी — ये मिलकर खाद्य जाल बनाते हैं।

(v) बायोम (Biome) क्या है?

उत्तर- बायोम (Biome) पृथ्वी की सतह पर पाया जाने वाला एक बड़ा भौगोलिक क्षेत्र होता है, जहाँ जलवायु, मिट्टी, वनस्पति और प्राणी एक समान प्रकार के होते हैं। उदाहरण के लिए – उष्णकटिबंधीय वर्षावन, मरुस्थल, घास के मैदान और टुंड्रा बायोम कहलाते हैं।

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए।

(i) संसार के विभिन्न वन बायोम (Forest biomes) की महत्त्वपूर्ण विशेषताएँ का वर्णन करें।

उत्तर- संसार के विभिन्न वन बायोम की महत्त्वपूर्ण विशेषताएँ

     वन बायोम पृथ्वी के उन प्रमुख पारिस्थितिक तंत्रों को कहते हैं जहाँ वनस्पतियाँ और प्राणी विशिष्ट जलवायु एवं भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार अनुकूलित होते हैं। इनकी प्रमुख किस्में हैं – उष्णकटिबंधीय वर्षावन, समशीतोष्ण वन, और शीतोष्ण (टैगा) वन।

(1) उष्णकटिबंधीय वर्षावन (Tropical Rain Forests):-

     ये भूमध्य रेखा के समीप स्थित क्षेत्रों में पाए जाते हैं, जैसे अमेज़न बेसिन, कांगो, वेस्टर्न घाट आदि। यहाँ वर्षभर उच्च तापमान (25–30°C) और भारी वर्षा (200–400 से.मी.) होती है। पेड़ घने और ऊँचे होते हैं तथा जैव विविधता अत्यधिक होती है।

(2) समशीतोष्ण वन (Temperate Forests):-

    ये मध्यम अक्षांशों में पाए जाते हैं, जैसे यूरोप, उत्तर अमेरिका, चीन आदि। यहाँ चारों ऋतुएँ स्पष्ट होती हैं और पर्णपाती वृक्ष जैसे ओक, मेपल, बर्च प्रमुख हैं।

(3) शीतोष्ण या टाइगा वन (Taiga Forests):

     ये उच्च अक्षांशों में, जैसे कनाडा, रूस, और स्कैंडिनेविया में पाए जाते हैं। यहाँ सर्दी लंबी और कठोर होती है तथा वृक्षों में अधिकांश शंकुधारी प्रजातियाँ (जैसे पाइन्स, स्प्रूस, फ़र) होती हैं।

निष्कर्षतः, प्रत्येक वन बायोम पृथ्वी के जलवायु संतुलन, ऑक्सीजन उत्पादन और जैव विविधता संरक्षण में अत्यंत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

(ii) जैव भू-रासायनिक चक्र (Biogeochemical cycle) क्या है? वायुमंडल में नाइट्रोजन का यौगिकीकरण (Fixation) कैसे होता है, वर्णन करें?

उत्तर- जैव-भूरासायनिक चक्र (Biogeochemical Cycle) वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से पृथ्वी के विभिन्न घटकों जैवमंडल (जीव), वायुमंडल (हवा), जलमंडल (पानी) और स्थलमंडल (भूमि)  के बीच पोषक तत्वों और रासायनिक तत्वों का निरंतर चक्रण होता है।

    यह चक्र पृथ्वी पर जीवन को बनाए रखने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। प्रमुख जैव-भूरासायनिक चक्रों में कार्बन, नाइट्रोजन, जल, ऑक्सीजन और फॉस्फोरस चक्र शामिल हैं। इन चक्रों से पौधों और प्राणियों को आवश्यक तत्व बार-बार उपलब्ध होते रहते हैं।

नाइट्रोजन का यौगिकीकरण (Nitrogen Fixation) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा वायुमंडल में उपस्थित निष्क्रिय नाइट्रोजन गैस (N₂) को जीवित प्राणी उपयोग के योग्य यौगिकों – जैसे अमोनिया (NH₃) या नाइट्रेट (NO₃⁻) – में बदला जाता है। यह प्रक्रिया तीन मुख्य तरीकों से होती है:

1. जैविक यौगिकीकरण (Biological fixation): Rhizobium, Azotobacter जैसे सूक्ष्मजीव नाइट्रोजन को अमोनिया में परिवर्तित करते हैं।

2. वायुमंडलीय यौगिकीकरण (Atmospheric fixation): बिजली (Lightning) की क्रिया से नाइट्रोजन और ऑक्सीजन मिलकर नाइट्रिक ऑक्साइड बनाते हैं, जो वर्षा के साथ धरती पर आता है।

3. औद्योगिक यौगिकीकरण (Industrial fixation): हैबर-बॉश (Haber-Bosch) विधि द्वारा नाइट्रोजन और हाइड्रोजन से अमोनिया का निर्माण किया जाता है।

    इस प्रकार, नाइट्रोजन यौगिकीकरण प्रक्रिया पृथ्वी पर नाइट्रोजन चक्र को संतुलित रखती है और पौधों को नाइट्रोजन उपलब्ध कराती है।

(iii) पारिस्थितिक संतुलन (Ecological balance) क्या है? इसके असंतुलन को रोकने के महत्त्वपूर्ण उपायों की चर्चा करें।

उत्तर- पारिस्थितिक संतुलन (Ecological Balance) से तात्पर्य उस स्थिर स्थिति से है जिसमें जीव-जंतु, पौधे, सूक्ष्मजीव और उनका भौतिक परिवेश (जैसे जल, वायु, मिट्टी आदि) परस्पर सहयोग और सामंजस्य के साथ कार्य करते हैं। जब प्रत्येक घटक अपनी भूमिका सही प्रकार से निभाता है, तब प्रकृति में ऊर्जा, पोषक तत्वों और गैसों का संतुलित चक्र बना रहता है, जिससे पृथ्वी पर जीवन संभव होता है।

    जब मानव गतिविधियाँ जैसे- वनों की कटाई, प्रदूषण, औद्योगीकरण, शिकार, भूमि क्षरण, तथा जनसंख्या वृद्धि अत्यधिक बढ़ जाती हैं, तब यह संतुलन बिगड़ जाता है। इसके परिणामस्वरूप जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता में कमी, मृदा अपरदन, और प्राकृतिक आपदाओं में वृद्धि जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।

पारिस्थितिक असंतुलन को रोकने के उपाय:

⇒ वनों का संरक्षण एवं वृक्षारोपण को बढ़ावा देना।

⇒ जल, मृदा और वायु प्रदूषण को नियंत्रित करना।

⇒ नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों (जैसे सौर और पवन ऊर्जा) का प्रयोग बढ़ाना।

⇒ वन्यजीवों और जैव विविधता की रक्षा करना।

⇒ पर्यावरण शिक्षा और जन-जागरूकता को प्रोत्साहित करना।

     इस प्रकार, पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखना न केवल मानव अस्तित्व के लिए आवश्यक है, बल्कि पृथ्वी पर समस्त जीव-जगत के सतत् विकास के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

Chapter 16 Biodiversity and Conversation (जैव विविधता एवं संरक्षण)

Chapter 16 Biodiversity and Conversation

(जैव विविधता एवं संरक्षण)

(भाग – 1 : भौतिक भूगोल के मूल सिद्धांत)

बिहार बोर्ड तथा NCERT कक्षा 11वीं के भूगोल का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर



Chapter 16 Biodiversity and Conversation

1. बहुवैकल्पिक प्रश्न एवं उनके उत्तर

(i) जैव-विविधता का संरक्षण निम्न में किसके लिए महत्वपूर्ण है

(क) जन्तु

(ख) पौधे

(ग) पौधे और प्राणी

(घ) सभी जीवधारी

उत्तर- (घ) सभी जीवधारी

व्याख्या:

     जैव-विविधता (Biodiversity) का संरक्षण सभी जीवधारियों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह पृथ्वी पर जीवन के संतुलन, पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता, भोजन, औषधि, जलवायु नियंत्रण और प्राकृतिक संसाधनों की निरंतरता को बनाए रखता है।

(ii) असुरक्षित प्रजातियाँ कौन-सी हैं

(क) जो दूसरों को असुरक्षा दें

(ख) बाघ व शेर

(ग) जिनकी संख्या अत्याधिक हों

(घ) जिन प्रजातियों के लुप्त होने का खतरा है

उत्तर- (घ) जिन प्रजातियों के लुप्त होने का खतरा है

(iii) राष्ट्रीय पार्क (National Parks) और अभ्यारण (Sanctuaries) किस उद्देश्य के लिए बनाये गए हैं

(क) मनोरंजन के लिए

(ख) पालतू जीवों के लिए

(ग) शिकार के लिए

(घ) संरक्षण के लिए

उत्तर- (घ) संरक्षण के लिए

व्याख्या:

     राष्ट्रीय उद्यान (National Parks) और अभ्यारण्य (Sanctuaries) वन्य जीवों, वनस्पतियों तथा उनके प्राकृतिक आवासों के संरक्षण और संवर्धन के उद्देश्य से बनाए जाते हैं, ताकि जैव विविधता बनी रहे और लुप्तप्राय प्रजातियों की रक्षा की जा सके।

(iv) जैव-विविधता समृद्ध क्षेत्र हैं

(क) उष्णकटिबंधीय क्षेत्र

(ख) शीतोष्ण कटिबंधीय क्षेत्र

(ग) ध्रुवीय क्षेत्र

(घ) महासागरीय क्षेत्र

उत्तर- (क) उष्णकटिबंधीय क्षेत्र

व्याख्या:

     उष्णकटिबंधीय क्षेत्र (Tropical regions) में तापमान अधिक, वर्षा प्रचुर मात्रा में तथा अनुकूल जलवायु पाई जाती है, जिसके कारण यहाँ पौधों और जीवों की विविधता सबसे अधिक होती है। इसलिए ये क्षेत्र जैव-विविधता के समृद्ध क्षेत्र कहलाते हैं।

(v) निम्न में से किस देश में अर्थ सम्मेलन (Earth summit) हुआ था

(क) यू. के. (U.K.)

(ख) ब्राजील

(ग) मैक्सिको

(घ) चीन

उत्तर- (ख) ब्राजील

व्याख्या:

     अर्थ सम्मलेन (Earth Summit) 1992 में ब्राजील के रियो डी जेनेरियो (Rio de Janeiro) में आयोजित किया गया था। इसे “रियो सम्मेलन” या “United Nations Conference on Environment and Development (UNCED)” भी कहा जाता है।

(vi) प्रोजेक्ट टाईगर निम्नलिखित में से किस उद्देश्य से शुरू किया गया है।

(क) बाघ मारने के लिये

(ख) बाघ को शिकार से बचाने हेतु

(ग) बाघ को चिड़ियाघर में डालने हेतु

(घ) बाघ पर फिल्म बनाने हेतु

उत्तर- (घ) बाघ पर फिल्म बनाने हेतु

व्याख्या:

    “प्रोजेक्ट टाइगर” (Project Tiger) भारत सरकार द्वारा 1973 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य देश में तेजी से घटती हुई बाघों की संख्या की रक्षा करना और उनके प्राकृतिक आवास का संरक्षण करना है।

(vii) प्रोजेक्ट एलिफेन्ट (Project Elephent) किस वर्ष लागू किया गया?

(क) 1992

(ख) 1993

(ग) 1994

(घ) 1995

उत्तर:- (क) 1992

व्याख्या:

    प्रोजेक्ट एलिफेंट (Project Elephant) भारत सरकार द्वारा 1992 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य जंगली हाथियों का संरक्षण, उनके आवास (habitat) की रक्षा, और मानव-हाथी संघर्ष को कम करना है।

(viii) होमो-सेपियंश (Homo-Speiens) प्रजाति किस से संबंधित है?

(क) पौधे

(ख) शाकाहारी जीव

(ग) मांशहारी जीव

(घ) मानव

उत्तर- (घ) मानव

व्याख्या:

     होमो-सेपियन्स (Homo sapiens) आधुनिक मनुष्य की वैज्ञानिक प्रजाति का नाम है। यह होमो वंश (Genus) की एकमात्र जीवित प्रजाति है, जो लगभग 3 लाख वर्ष पहले अफ्रीका में उत्पन्न हुई थी।

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए।

(i) जैव-विविधता क्या है?

उत्तर- किसी निश्चित भौगोलिक क्षेत्र में पाये जाने वाले जीवों की संख्या और उनकी विविधता को जैव-विविधता कहते हैं। इसका संबंध पौधों के प्रकार, प्राणियों तथा सूक्ष्म जीवाणुओं से है, उनकी आनुवंशिकी और उनके द्वारा निर्मित पारितंत्र से है। जैव-विविधता सजीव सम्पदा है। 

   अर्थात इसमें सूक्ष्मजीवों से लेकर बड़े जीवों तक सभी शामिल होते हैं। यह पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने और जीवन को स्थिरता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

(ii) जैव-विविधता के विभिन्न स्तर क्या हैं?

उत्तर- जैव-विविधता को तीन मुख्य स्तरों पर समझा जा सकता है-

(1) आनुवंशिक विविधता (Genetic diversity): एक ही प्रजाति के जीवों में जीन का अंतर।

(2) प्रजातीय विविधता (Species diversity): किसी क्षेत्र में पाई जाने वाली विभिन्न प्रजातियों की संख्या।

(3) पारिस्थितिकी तंत्र विविधता (Ecosystem diversity): यह विभिन्न प्रकार के पारिस्थितिक तंत्रों की विविधता को दर्शाती है, जैसे – वन, मरुस्थल, पर्वतीय क्षेत्र, नदी, झील, समुद्र आदि।

(iii) हॉट-स्पॉट (Hot spots) से आप क्या समझते हैं?

उत्तर- हॉट-स्पॉट (Hot Spots) वे क्षेत्र होते हैं जहाँ जैव विविधता अत्यधिक होती है, परंतु यह क्षेत्र मनुष्य की गतिविधियों से गंभीर खतरे में हैं। इन क्षेत्रों में बहुत-सी दुर्लभ एवं स्थानिक प्रजातियाँ पाई जाती हैं।  उनमें संसाधनों को उपलब्ध कराने के लिए अंतर्राष्ट्रीय संरक्षण संघ (IUCN) ने जैव-विविधता हॉट-स्पॉट (Hot spots) क्षेत्र के रूप में निर्धारित किया गया है।

    हॉट-स्पॉट उनकी वनस्पति के आधार पर परिभाषित किये गए हैं। भारत में पश्चिमी घाट, पूर्वी हिमालय आदि प्रमुख जैव विविधता हॉट-स्पॉट हैं।

(iv) मानव जाति के लिए जंतुओं के महत्त्व का वर्णन संक्षेप में करें।

उत्तर- जंतुओं का मानव जाति के जीवन में अत्यंत महत्त्व है। वे भोजन (दूध, मांस, अंडे), वस्त्र (ऊन, रेशम, चमड़ा) और श्रम (बैल, घोड़े) प्रदान करते हैं। अनेक जंतु औषधियों के निर्माण में उपयोगी होते हैं तथा पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

(v) विदेशज प्रजातियों (Exotic species) से आप क्या समझते हैं?

उत्तर- वे प्रजातियाँ जो स्थानीय आवास की मूल जैव प्रजाति नहीं हैं, लेकिन उस तंत्र में स्थापित की गई हैं, उन्हें ‘विदेशज प्रजातियाँ’ कहा जाता है।

    अर्थात विदेशज प्रजातियाँ (Exotic species) वे जीव हैं जिन्हें किसी अन्य देश या क्षेत्र से लाकर नए स्थान पर बसाया जाता है। ये वहाँ की प्राकृतिक प्रजातियों के साथ प्रतिस्पर्धा कर पारिस्थितिक संतुलन बिगाड़ सकती हैं। उदाहरण- भारत में जलकुंभी (Water Hyacinth) और नीलगिरी (Eucalyptus) पेड़।

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए

(i) प्रकृति को बनाए रखने में जैव-विविधता की भूमिका का वर्णन करें

उत्तर- प्रकृति के संतुलन और स्थायित्व को बनाए रखने में जैव-विविधता (Biodiversity) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। जैव-विविधता का अर्थ है- पृथ्वी पर पाए जाने वाले सभी प्रकार के जीवों की विविधता, जिसमें पौधे, जन्तु, सूक्ष्मजीव तथा उनके पारस्परिक संबंध शामिल हैं। यह प्रकृति की स्थिरता, पारिस्थितिक संतुलन तथा मानव जीवन के अस्तित्व की आधारशिला है।

     प्रकृति में प्रत्येक जीव का अपना विशिष्ट स्थान और कार्य होता है। उदाहरण के लिए, पौधे प्रकाश संश्लेषण द्वारा ऑक्सीजन प्रदान करते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करते हैं, जिससे वातावरण शुद्ध रहता है। शाकाहारी और मांसाहारी जीव एक-दूसरे पर निर्भर रहते हुए भोजन श्रृंखला और जाल (food chain and web) का निर्माण करते हैं। यदि किसी एक प्रजाति का विनाश हो जाए, तो पूरा पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित होता है।

    जैव-विविधता मिट्टी की उर्वरता, परागण, जल चक्र और अपघटन जैसी प्रक्रियाओं को भी बनाए रखती है। यह जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में मदद करती है और प्राकृतिक आपदाओं से पारिस्थितिक तंत्र की पुनर्बहाली में सहायक होती है। इसके अतिरिक्त, जैव-विविधता मानव को औषधि, भोजन, ईंधन और वस्त्र जैसे अनेक संसाधन उपलब्ध कराती है।

    इस प्रकार, जैव-विविधता न केवल पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में सहायक है, बल्कि यह पृथ्वी पर जीवन की निरंतरता और मानव सभ्यता के विकास की आधारशिला भी है। इसलिए, जैव-विविधता का संरक्षण हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है, ताकि भविष्य की पीढ़ियाँ भी स्वस्थ और संतुलित प्रकृति का आनंद ले सकें।

(ii) जैव-विविधता के विनाश के लिए उत्तरदायी प्रमुख कारकों का वर्णन करें। इसे रोकने के उपाय भी बताएँ।

उत्तर- जैव-विविधता (Biodiversity) का अर्थ है- पृथ्वी पर पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के पौधों, प्राणियों और सूक्ष्मजीवों की विविधता। वर्तमान समय में मानव गतिविधियों के कारण जैव-विविधता में तीव्र गति से कमी आ रही है।

जैव-विविधता के विनाश के प्रमुख कारक:

1. वनों की कटाई:-

     कृषि विस्तार, शहरीकरण और औद्योगिकीकरण के कारण वनों का नाश हो रहा है।

2. प्रदूषण:-

      जल, वायु और भूमि प्रदूषण से अनेक जीव प्रजातियाँ विलुप्त हो रही हैं।

3. जनसंख्या वृद्धि:-

    बढ़ती जनसंख्या संसाधनों पर अत्यधिक दबाव डाल रही है।

4. अवैध शिकार और व्यापार:-

     बाघ, हाथी, गैंडा जैसी प्रजातियाँ शिकार और अवैध व्यापार से प्रभावित हैं।

5. विदेशी (Exotic) प्रजातियाँ:-

     बाहरी प्रजातियों के आगमन से स्थानीय प्रजातियाँ प्रतिस्पर्धा में पिछड़ रही हैं।

6. जलवायु परिवर्तन:-

     तापमान वृद्धि और वर्षा पैटर्न में बदलाव से प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहे हैं।

रोकथाम के उपाय:

⇒ वनों की सुरक्षा और वृक्षारोपण को बढ़ावा देना।

⇒ प्रदूषण नियंत्रण और स्वच्छ तकनीकों का उपयोग।

⇒ वन्यजीव संरक्षण कानूनों का कठोर पालन।

⇒ राष्ट्रीय उद्यान और अभ्यारणों का विस्तार।

⇒ जनजागरूकता और पर्यावरण शिक्षा को प्रोत्साहन देना।

⇒ जैव-विविधता संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करना।

निष्कर्ष:

    जैव-विविधता का संरक्षण पृथ्वी पर जीवन के संतुलन और मानव अस्तित्व के लिए अत्यंत आवश्यक है।

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