अध्याय 1 सौरमंडल में पृथ्वी/NCERT CLASS 6 Geography Solutions (हिंदी माध्यम)

NCERT CLASS 6 Geography Solutions
(हिंदी माध्यम)

अध्याय 1 सौरमंडल में पृथ्वी

एनसीईआरटी के 6वीं कक्षा का भूगोल विषय का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

सरल एवं आसान शब्दों में उत्तर देना सीखें



सौरमंडल

1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में दीजिए।

(i) ग्रह और तारे में क्या अंतर है?
उत्तर- ग्रह – वह खगोलीय पिंड जिसका अपना ऊष्मा तथा प्रकाश नहीं होता है और वे तारों के प्रकाश से प्रकाशित होते हैं, ऐसे खगोलीय पिंड ग्रह कहलाते हैं। जैसे- बुध,शुक्र, पृथ्वी इत्यादि।
तारा– वह खगोलीय पिंड जिसके पास अपनी ऊष्मा तथा प्रकाश होता है और वे बड़ी मात्रा में ऊर्जा उत्सर्जित करते हैं, वैसे खगोलीय पिंड को तारा कहा जाता है। जैसे सूर्य एक तारा है।

(ii) सौर मंडल से आप क्या समझते हैं?
उत्तर- सूर्य, आठ ग्रह, उपग्रह तथा कुछ अन्य खगोलीय पिंड जैसे क्षुद्र ग्रह एवं उल्का पिंड मिलकर सौरमंडल का निर्माण करते हैं। उसे हम सौर परिवार का नाम देते हैं जिसका मुखिया सूर्य है। सूर्य सौरमंडल के केंद्र में स्थित है।
(iii) सूर्य से उनकी दूरी के अनुसार सभी ग्रहों के नाम लिखें।
उत्तर- हमारे सौरमंडल में कुल 8 ग्रह है। सूर्य से दूरी के अनुसार वे हैं- बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, यूरेनस तथा नेपच्यून।
(iv) पृथ्वी को अद्भुत ग्रह क्यों कहा जाता है?
उत्तर- जीवन के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ संभवत केवल पृथ्वी पर ही पाई जाती है। पृथ्वी ना तो अधिक गर्म है और ना ही अधिक ठंडे ययाँ पानी एवं वायु उपस्थित है जो हमारे जीवन के लिए आवश्यक है। वायु में जीवन के लिए आवश्यक गैसें, जैसे- ऑक्सीजन मौजूद है। इन्हीं कारणों से पृथ्वी सौरमंडल का सबसे अद्भुत है।
(v) हम हमेशा चंद्रमा के एक ही भाग को क्यों देख पाते हैं?
उत्तर- चंद्रमा पृथ्वी का एक चक्कर लगभग 27 दिन में पूरा करता है। लगभग इतने ही समय में अपने अक्ष पर एक चक्कर भी पूरा करता है।  इसके परिणाम स्वरूप पृथ्वी से हमें चंद्रमा का केवल एक ही भाग दिखाई पड़ता है। 
(vi) ब्रह्मांड क्या है?
उत्तर- ब्रह्मांड की विशालता की कल्पना करना अत्यधिक कठिन है। वैज्ञानिक अभी भी उसके बारे में अधिक से अधिक जानकारी एकत्रित करने में जुटे हैं। इसके आकार के संबंध में हमें कोई जानकारी नहीं है लेकिन फिर भी हम जानते हैं कि हम सभी इसी ब्रह्मांड का हिस्सा है  हमारा सौरमंडल अकाश गंगा मिल्की वे का एक भाग है जो प्रमाण का हिस्सा है।
         
      अर्थात आकाशगंगा करोडों तारो, बादलों तथा गैसों की एक प्रणाली है।  इस प्रकार की लाखों अकाशगंगाएँ मिलकर ब्रह्मांड का निर्माण करती है। 
2. सही उत्तर चिन्हित (√) कीजिए।
(i) किस ग्रह को पृथ्वी के जुड़वाँ ग्रह के नाम से जाना जाता है?
क. बृहस्पति
ख. शनि
ग. शुक्र
उत्तर – ग. शुक्र
(ii) सूर्य से तीसरा सबसे नजदीक ग्रह कौन-सा है?
क. शुक्र
ख. पृथ्वी
ग. बुध
उत्तर – ख. पृथ्वी
(iii) सभी ग्रह सूर्य के चारों ओर किस प्रकार के पथ पर चक्कर लगाते हैं-
क. वृत्तीय पथ पर
ख. आयताकार पथ पर
ग. दीर्घवृताकार
उत्तर – ग. दीर्घवृताकार
(iv) ध्रुव तारे से किस दिशा का ज्ञान होता है-
क. दक्षिण
ख. उत्तर
ग. पूर्व
उत्तर – ख.  उत्तर
(v) क्षुद्र ग्रह किन कक्षाओं के बीच पाए जाते हैं-
क. सनी एवं बृहस्पति
ख. मंगल एवं बृहस्पति
ग. पृथ्वी एवं मंगल
उत्तर –  ख. मंगल एवं बृहस्पति
3. खाली स्थान को भरें।
(i) तारों का एक समूह जो विभिन्न प्रति रूपों का निर्माण करता है, उसे नक्षत्रमंडल कहते हैं।
(ii) तारों की एक बहुत बड़ी प्रणाली को आकाशगंगा कहा जाता है।
(iii) बुध पृथ्वी के सबसे करीब है।
(iv) पृथ्वी सूर्य से तीसरा सबसे नजदीक ग्रह है।
(v) ग्रहों के पास अपनी प्रकाश तथा ऊष्मा नहीं होती है।

 

1. थार्नथ्वेट का जलवायु वर्गीकरण / Climatic Classification Of Thornthwaite

 1. थार्नथ्वेट का जलवायु वर्गीकरण

(Climatic Classification Of Thornthwaite)


थार्नथ्वेट का जलवायु वर्गीकरण ⇒

थार्नथ्वेट का जलवायु वर्

         थार्नथ्वेट एक अमेरिकी मौसम वैज्ञानिक थे जिन्होंने कोपेन के जलवायु वर्गीकरण की आलोचना करते हुए एक वैकल्पिक जलवायु वर्गीकरण की योजना प्रस्तुत की। वर्तमान समय में कोपेन के जलवायु वर्गीकरण की तुलना में थार्नथ्वेट के वर्गीकरण को अधिक मान्यता प्राप्त है। थार्नथ्वेट ने अपना जलवायु वर्गीकरण अनुसंधान प्रपत्रों के माध्यम से (1931, 1948) प्रस्तुत किया। लेकिन सर्वाधिक मान्यता 1948 में प्रस्तुत जलवायु वर्गीकरण की योजना महत्त्व रखता है। 1948 ई० में प्रस्तुत योजना “ज्योग्राफिकल रिव्यू” नामक पत्रिका में “An approach towards a rational classification of climate” नामक शीर्षक से प्रस्तुत किया।

जलवायु वर्गीकरण का आधार

        थार्नथ्वेट ने अपना जलवायु वर्गीकरण हेतु वनस्पति, तापमान और वर्षा को आधार बनाया। थार्नथ्वेट के अनुसार वनस्पति जलवायु का वायुदाब (बैरोमीटर) मापक यंत्र होता है। अर्थात वनस्पति की विशेषता को जानने के लिए तापमान एवं वर्षा के उन गुणों को जानना आवश्यक है जो वनस्पति के विकास, उनके प्रकार एवं विशेषताओं को निर्धारित करता है।

          थॉर्नथ्वेट ने कहा है कि जलवायु वर्गीकरण हेतु जलवायु के कार्यिक (Functional) अध्ययन आवश्यक है। क्योंकि वर्षा और तापमान की संपूर्ण मात्रा वनस्पतियों के विशेषताओं के निर्धारक नहीं होते है। अतः जलवायु के कार्यिक अध्ययन तापमान एवं वर्षा के प्रभावोत्पादकता के आधार पर किया जाना चाहिए। वर्षा एवं तापमान की प्रभावोत्पादकता को जानने के लिए वाष्पोत्सर्जन का अध्ययन आवश्यक है। अतः यह कहा जा सकता है कि थॉर्नथ्वेट के अनुसार जलवायु का मुख्य आधार वाष्पोत्सर्जन की क्रिया है न कि प्रत्यक्षता वनस्पति, वर्षा और तापमान है।

         वाष्पोत्सर्जन एक जटिल प्रक्रिया है। यह मृदा के नमी और भूमिगत जल स्तर के द्वारा निर्धारित होता है। दूसरी ओर वाष्पोत्सर्जन क्रिया भी मृदा के नमी, भूमिगत जल स्तर, वनस्पति और कृषि को भी निर्धारित करता है। थॉर्नथ्वेट महोदय ने वाष्पोत्सर्जन से सम्बंधित ऐसे चार कसौटियों का पहचान किया है जो जलवायु के निर्धारण में सहायक है। ये चारों कसौटियाँ निम्न प्रकार से है-

(i) नमी /आर्द्रता पर्याप्तता

(ii) तापीय दक्षता

(iii) नमी पर्याप्तता में मौसमी विषमता

(iv) तापीय दक्षता का ग्रीष्म ऋतु में केंद्रीयकरण

         ऊपर के चारों कसौटियों के अध्ययन से स्पष्ट होता है कि तीसरा कसौटी पहला से और चौथा कसौटी दूसरा से संबंधित है। थॉर्नथ्वेट ने यह भी बताया कि प्रथम दो कसौटी वार्षिक परिस्थितियों को बताता है जबकि अंतिम दो कसौटी मौसमी एवं मासिक परिस्थितियों को बताता है।

जलवायु वर्गीकरण की प्रणाली एवं योजना

        थॉर्नथ्वेट महोदय उपरोक्त चारों कसौटियों को आधार मानकर अपना जलवायु वर्गीकरण प्रस्तुत किया। इन्होंने अपने वर्गीकरण में सांख्यिकी विधियों का प्रयोग कर इसे अधिक वैज्ञानिक स्वरूप देने का प्रयास किया। इन्होंने ने भी जलवायु वर्गीकरण में कोपेन की भाँति सांकेतिक अक्षरों का प्रयोग किया लेकिन कोपेन के सांकेतिक अक्षर जलवायु के प्रत्यक्ष विशेषता को प्रकट करता है जबकि थॉर्नथ्वेट के संकेतिक अक्षर जलवायु के अप्रत्यक्ष गुणों को स्पष्ट करता है।

         थॉर्नथ्वेट ने जलवायु वर्गीकरण हेतु “संभावित वाष्पोत्सर्जन सूचक” को विकसित किया। इसका परिष्कृत मान cm से होगा। थॉर्नथ्वेट ने संभावित वाष्पोत्सर्जन इसलिए ज्ञात करने का प्रयास किया  क्योंकि वाष्पोत्सर्जन का वास्तविक मान कभी भी ज्ञात नहीं किया जा सकता। उन्होंने संभावित वाष्पोतर्जन निकालने के लिए निम्नलिखित सूत्र का प्रयोग किया है। जैसे-

PE=1.6 (10 t/i)a cm.

जहाँ

PE = संभावित वाष्पोत्सर्जन

t = डिग्री सेंटीग्रेड में वार्षिक औसत तापमान

i = प्रत्येक महीने के तापमान के योग का 1/5वाँ भाग

a = यह नियतांक है जिसका मान 1.514 होगा।

        संभावित वाष्पोत्सर्जन सूचकांक की मदद से उन्होंने नमी पर्याप्तता सूचक विकसित किया ताकि पूरे पृथ्वी पर “आर्द्रता प्रदेश” का निर्धारण किया जा सके। थॉर्नथ्वेट के अनुसार प्रत्येक आर्द्रता प्रदेश से एक विशिष्ट जलवायु का सूचक होगा। आर्द्रता प्रदेश के निर्धारण हेतु उन्होंने नमी पर्याप्तता सूचक निम्नलिखित सूत्र के माध्यम से ज्ञात किया है:-

Im= 100 P/PE-1

जहाँ :-

Im = नमी पर्याप्तता सूचक

P = वार्षिक वर्षा cm में

PE = संभावित वाष्पोत्सर्जन

      नमी पर्याप्तता सूचकांक के मदद से विश्व को उन्होंने 9 आर्द्रता प्रदेश या उपजलवायु क्षेत्र  में बाँटा:-

क्रम संकेत आर्द्रता प्रदेश या

उपजलवायु क्षेत्र

Im का मान (आर्द्रता सूचकांक)
1. A अति आर्द्र जलवायु 100 तथा उससे अधिक
2. B4 आर्द्र जलवायु आर्द्र जलवायु 80-100
3. B3 आर्द्र जलवायु 60-80
4. B2 आर्द्र जलवायु 40-60
5. B1 आर्द्र जलवायु 20-40
6. C2 नमी युक्त उपार्द्र जलवायु 0-20
7. C1 शुष्क उपार्द्र जलवायु -33.3 से 0
8. D अर्द्ध मरुस्थलीय जलवायु -66.7 से -33.3
9. E मरुस्थलीय जलवायु -100 से -66.7
              
        थॉर्नथ्वेट ने दूसरी कसौटी अर्थात तापीय दक्षता के आधार पर जलवायु प्रदेशों को उप जलवायु प्रदेशों में बाँटा। तापीय दक्षता का भी निर्धारण संभावित वाष्पोत्सर्जन सूचकांक के आधार पर उन्होंने किया था। उन्होंने तापीय दक्षता के आधार पर विश्व जलवायु को 9 प्रदेश या उप जलवायु प्रदेश में बाँटा:-
क्रम संकेत

तापीय दक्षता प्रदेश

या उप जलवायु क्षेत्र

PE का मान
1. A’ अति गर्म / उष्ण जलवायु 114 तथा उससे अधिक
2. B’4 गर्म जलवायु 99.7 से 114
3. B’3 गर्म जलवायु 85.5 से 99.7
4. B’2 गर्म जलवायु 71.2 से 85.5
5. B’1 गर्म जलवायु 57.0 से 71.2
6. C’2 न्यून उष्ण जलवायु 42.7 से 57.0
7. C’1 न्यून उष्ण जलवायु 28.5 से 42.7
8. D’ टुन्ड्रा जलवायु 14.2 से 28.5
9. E’ हिमाच्छादित जलवायु 14.2 से कम

          थॉर्नथ्वेट महोदय ने यह भी बताया है कि वार्षिक वर्षा और वार्षिक तापमान किसी भी जलवायु प्रदेश के अंदर पाई जाने वाली मौसमी विशेषता को स्पष्ट नहीं करता है। इसलिए थॉर्नथ्वेट महोदय ने आर्द्रता प्रधान वाले जलवायु क्षेत्र के लिए शुष्कता सूचक और शुष्क जलवायु प्रदेश के लिए आर्द्रता सूचक विकसित किया है।

       शुष्कता सूचक A से लेकर C2 तक के लिए और आर्द्रत सूचक C1 से लेकर E तक लागू होता है। थॉर्नथ्वेट ने ऐसा करने के पीछे तर्क यह दिया कि A से लेकर C2 तक वाले जलवायु क्षेत्र में नमी की कमी नहीं होती है। लेकिन कुछ ऐसे महीने हो सकते हैं जो शुष्क हो। इसी तरह C1 से लेकर E तक वाले जलवायु क्षेत्र में कुछ महीने ऐसे हो सकते हैं। जहाँ हल्की वर्षा या आकस्मिक वर्षा के कारण ही उपलब्ध हो जाती हो।  इन्हीं तथ्यों को ध्यान में रखकर उन्होंने मौसमी विभिन्नता को स्पष्ट करने हेतु तीसरे चरण का उपयोग किया। जैसे:-

A से C2 के लिए शुष्कता सूचक तालिका

क्रम सांकेतिक अक्षर  आर्द्रता का स्तर  शुष्कता सूचक 
1. r आर्द्रता की कमी कभी नहीं  0-10
2. s ग्रीष्म ऋतु में आर्द्रता की सामान्य कमी  10-20
3. w जाड़े की ऋतु में आर्द्रता में सामान्य कमी  10-20
4. s2 ग्रीष्म ऋतु में आर्द्रता में भारी कमी  20 से अधिक 
5. w2 जाड़े की ऋतु में आर्द्रता की भारी कमी  20 से अधिक 
C1 से लेकर E तक के लिए आर्द्रता सूचक तालिका 
क्रम  सांकेतिक अक्षर  शुष्कता का स्तर  आर्द्रता सूचक 
6. d किसी भी महीने में आर्द्रता की कमी नहीं  0-16.7
7. s जाड़े की ऋतु में अतिरिक्त  16.7-33.3
8. w ग्रीष्म ऋतु में अतिरिक्त आर्द्रता  16.7-33.3
9. s2 जाड़े की ऋतु में बहुत अधिक आर्द्रता  33.3 से अधिक 
10. w2 ग्रीष्म ऋतु में बहुत अधिक आर्द्रता  33.3 से अधिक 
                 
        थॉर्नथ्वेट महोदय ने यह भी बताया है कि औसत तापीय दक्षता का सर्वाधिक प्रभाव ग्रीष्म ऋतु में होता है अर्थात चौथे कसौटी के आधार पर थॉर्नथ्वेट ने कहा है कि तापीय दक्षता को केंद्रीयकरण ग्रीष्म ऋतु में होता है। अतः तापीय दक्षता का मापन थॉर्नथ्वेट ने प्रतिशतता के रूप में व्यक्त करते हुए एक और तालिका का विकास किया है जो ग्रीष्म ऋतु में तापीय दक्षता के केंद्रीयकरण को स्पष्ट करता है। 
क्रम  सांकेतिक अक्षर  गर्मी ऋतू में कुल तापीय दक्षता का प्रतिशत 
1. a’ 48% से कम 
2. b’4 48 – 51.9
3. b’3 51.9 – 56.3
4. b’2 56.6 – 61.6
5. b’1 61.6 – 68 
6. C’2 68 – 76.3
7. C’1 76.3 – 88
8. d’ 88 से अधिक 
               
     थॉर्नथ्वेट ने उपरोक्त चारों को कसौटियों के आधार पर विश्व की जलवायु को वर्गीकृत किया है। प्रथम दो कसौटियों के आधार पर उन्होंने आर्द्रता प्रदेश और तापीय दक्षता प्रदेश का निर्धारण किया। प्रथम और द्वितीय तालिका से स्पष्ट है कि पूरे विश्व को 9 आर्द्रता प्रदेश और 9 तापीय दक्षता प्रदेश में वर्गीकृत है। पुनः अंतिम दो कसौटियों के आधार पर सूक्ष्म स्तर पर जलवायु क्षेत्रों का विश्लेषण करने का प्रयास किया है। थॉर्नथ्वेट ने बताया है कि उपरोक्त चारों कसौटियों के आधार पर पूरे विश्व को 120 जलवायु क्षेत्रों में बाँटा जा सकता है। लेकिन सभी का वर्णन करना संभव नहीं है। इसे कुछ उदाहरण से ही स्पष्ट किया जा सकता है। जैसे :-

(1) C1B’1da’ – भूमध्यसागरीय जलवायु या सन फ्रांसिस्को प्रकार की जलवायु

(2) C2C’2rb’1 – महाद्वीपीय या मास्को प्रकार की जलवायु

(3) EA’da’ – आंतरिक उष्ण मरुस्थलीय जलवायु या एलिस स्प्रिंग प्रकार की जलवायु

आलोचना

◆ वर्षा और तापमान के द्वारा उत्पन्न प्रभावो-उत्पादकता का सही मूल्यांकन संभव नहीं हैं। थॉर्नथ्वेट महोदय ने इस तथ्य को स्वीकार करते हुए संभावित वाष्पोत्सर्जन शब्द का उपयोग किया है जिससे स्पष्ट होता है कि इनका भी वर्गीकरण अनुमानों पर आधारित है।

◆ यह एक जटिल वर्गीकरण की योजना है जिसमें कई सांख्यिकीय विधियों तथा तालिकाओं का प्रयोग किया गया है।

◆ ट्रीवार्था महोदय ने इनका आलोचना करते हुए कहा है कि थॉर्नथ्वेट ने अपने वर्गीकरण में उच्चावच का कोई महत्व नहीं दिया है।

◆ थॉर्नथ्वेट द्वारा प्रस्तावित जलवायु वर्गीकरण की योजना के आधार पर जलवायु क्षेत्र का निर्धारण तभी संभव है जब अति लघु सर पर आँकड़े उपलब्ध हो।

◆ थॉर्नथ्वेट में तापमान एवं वर्षा को अधिक महत्व नहीं दिया है। लेकिन वास्तविकता यह है कि अधिकतर फसलों के चयन में वर्षा एवं तापमान को अधिक महत्व दिया जाता है।

निष्कर्ष

       ऊपर वर्णित खामियों के बावजूद थॉर्नथ्वेट की योजना सर्वाधिक विश्वसनीय योजना मानी जाती है क्योंकि इस योजना के मदद से भूमिगत जल स्तर का निर्धारण, जल प्रबंधन और वानिकी जैसे कार्यों को नई दिशा प्रदान की जा सकती है। 1949 ई० में यूएसए के नवीन कृषि नीति में थॉर्नथ्वेट के जलवायु वर्गीकरण को विशेष महत्त्व दिया गया था। अतः इससे स्पष्ट होता है कि इनका जलवायु वर्गीकरण की विश्वसनीयता बरकरार है।

♦उत्तर लिखने का दूसरा सरल तरीका♦….

       सी. डब्ल्यू. थार्नथ्वेट नामक अमेरिकन जलवायु विज्ञानी ने अपने जलवायु वर्गीकरण की रूपरेखा को 1931 में प्रस्तुत किया। यह वर्गीकरण उत्तरी अमेरिका को आधार बनाकर प्रस्तुत किया गया था। 1933 में इन्होंने इसी वर्गीकरण को आधार बनाकर सम्पूर्ण विश्व को विभिन्न प्रकार के जलवायु प्रदेशों में विभक्त किया। थार्नथ्वेट का वर्गीकरण भी कोपेन के वर्गीकरण से साम्यता रखता है, क्योंकि

(i) कोपेन की भांति थार्नथ्वेट ने भी जलवायु प्रदेशों का सीमांकन मात्रात्मक विधि से किया।

(ii) यह वर्गीकरण भी वनस्पति पर आधारित है।

(iii) विभिन्न जलवायु प्रकारों को कोपेन की भांति ही अक्षरों के संयोगों द्वारा प्रदर्शित किया गया है।

1931 में प्रस्तुत जलवायु वर्गीकरण

        कोपेन की भांति थार्नथ्वेट का भी यह मानना था कि वनस्पति जलवायु की सूचक होती है तथा वनस्पति वर्षा की मात्रा, तापमान एवं वाष्पीकरण से प्रभावित होती है। थार्नध्वेट ने आंकड़ों की सहायता से वर्षण-वाष्पीकरण सूचक तैयार कर आर्द्रता प्रदेशों (Humidity Provinces) का निर्धारण किया। ये ही आर्द्रता प्रदेश उसके जलवायु वर्गीकरण में प्रथम क्रम के जलवायु प्रदेश बने।

       1931 में थार्नथ्वेट द्वारा प्रस्तुत जलवायु वर्गीकरण वर्षण प्रभाविता (Rainfall Effectiveness) और तापीय दक्षता (Temperature Efficiency) पर आधारित था । वर्षण प्रभावित अनुपात (Ratio) या P/E Ratio ज्ञात करने के लिए कुल मासिक वर्षा को कुल मासिक वाष्पीकरण से विभाजित कर देते हैं तथा 12 महीनों के वर्षण प्रभाविता अनुपात (P/E Ratio) का योग करके वर्षण प्रभाविता सूचक (P/E Index) प्राप्त किया जाता है।

P/E Ratio वर्षण प्रभाविता अनुपात = 11.5 (P/T- 10) 10/9

P = औसत मासिक वर्षण (इंचों में)

T = औसत मासिक तापमान (डिग्री फारेनहाइट में)

        इस सूत्र की सहायता से थार्नथ्वेट ने विश्व को 5 आर्द्रता प्रदेशों में बांटा जिनके बीच की सीमाएं संख्यात्मक रूप से ज्ञात की गईं। ये पांच आर्द्रता प्रदेश विश्व के पांच बड़े वानस्पतिक प्रदेशों यथा वर्षा प्रचुर वन (Rain Forest), वन (Forest), घास के मैदान (Grass land), स्टेपी (Steppe) और मरुस्थल (Desert) से सम्बन्धित है।

        P/E सूचक की भांति ही थार्नथ्वेट ने तापमान दक्षता सूचक (T/ E Ratio) का परिकलन (T – 32) / 4 सूत्र की सहायता से किया। इस सूत्र में T = औसत मासिक तापमान डिग्री फारेनहाइट में है।

        P/E सूचक और T/E सूचक तथा वर्षण के मौसमी वितरण के आधार पर थार्नथ्वेट ने विश्व को 32 जलवायु प्रकारों में विभाजित किया।

आर्द्रता और तापमान पर आधारित जलवायु प्रदेश तथा वर्षण का मौसमी वितरण

आर्द्रता पर आधारित जलवायु प्रदेश

अक्षर/संकेत आर्द्रता प्रदेश वनस्पति का प्रकार वर्षण प्रभाविता सूचकांक
A अत्यधिक आर्द्र वर्षा प्रचुर वन  128 से अधिक 
B आर्द्र वन 64-127
C उपआर्द्र  घास का मैदान 32-63
D अर्द्ध शुष्क  स्टेपी 16-31
E शुष्क मरुस्थल  16 से कम

तापमान पर आधारित जलवायु प्रदेश

अक्षर/संकेत तापमान प्रदेश तापीय दक्षता सूचकांक
A’ उष्णकटिबन्धीय 128 एवं अधिक
B’ समशीतोष्ण कटिबन्ध 64-127
C’ शीतोष्ण कटिबन्ध 32-63
D’ टैगा 16-31
E’ टुन्ड्रा 1-15
F’ हिमाच्छादित 0

वर्षण का मौसमी वितरण

r = सभी ऋतुओं में प्रचुर वर्षा

s = ग्रीष्म में वर्षा की कमी

w = ऋतु शीत ऋतु में वर्षा की कमी

d = सभी ऋतुओं में वर्षा की कमी

थार्नथ्वेट का विश्व का 32 जलवायु प्रकार

AA’r BA’r. CA’r DA’w EA’d D’   E’  F’
AB’r BA’w CA’w DA’d EB’d
AC’r BB’r CA’d DB’w EC’d
BB’w CB’r DB’s
BB’s CB’w DB’d
BC’s CC’r
BC’r CB’d
CB’s  DC’d
CC’s
CC’d

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NCERT CLASS 12 Geography Solutions हिंदी माध्यम इकाई 4 अध्याय10 मानव बस्ती

 NCERT CLASS -12 Geography Solutions

(हिंदी माध्यम)
इकाई -4
अध्याय-10. मानव बस्ती 
1. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए :
(i) निम्न में से किस प्रकार की बस्तियाँ सड़क, नदी या नहर के किनारे होती है?
(क) वृत्ताकार 
(ख) चौक पट्टी
(ग) रेखीय
(घ) वर्गाकार
उत्तर – (ग) रेखीय 
(ii) निम्न में से कौन-सा एक आर्थिक क्रिया ग्रामीण बस्तियों की मुख्य आर्थिक क्रिया है?
(क) प्राथमिक
(ख) तृतीयक
(ग) द्वितीयक
(घ) चतुर्थ
उत्तर – (क) प्राथमिक
(iii) निम्न में से किस प्रदेश में प्रलेखित प्राचीनतम नगरीय बस्ती रही है?
(क) ह्वांगहो की घाटी
(ख) सिंधु घाटी
(ग) नील घाटी
(घ) मेसोपोटामिया
उत्तर – (ख) सिंधु घाटी
(iv) 2006 के प्रारम्भ में भारत मे कितने मिलियन सिटी थे।
(क) 40
(ख) 41
(ग) 42
(घ) 43
उत्तर – (क) 40
(v) विकासशील देशों की जनसँख्या के सामाजिक ढाँचे के विकास एवं विकास आवश्यकताओं  की पूर्ति में कौन से प्रकार के संसाधन सहायक है?
(क) वित्तिय
(ख) मानवीय
(ग) प्राकृतिक
(घ) सामाजिक
उत्तर – (घ) सामाजिक 
2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए: 
(i) आप बस्ती को कैसे परिभाषित करेंगे?
उत्तर – वैसे भौगोलिक क्षेत्र जहाँ मानव साधारणतया सामूहिक  रूप से निवास करता हो उसे मानव बस्ती कहते हैं। मकानों का स्वरूप बदला जा सकता है, उनके कार्य बदल सकते हैं परंतु बस्तियाँ समय एवं स्थान के साथ निरंतर बसती रहेगी।  
(ii) स्थान ( साइट) एवं स्थिति (सिचुएसन) के मध्य अंतर बताएँ।
उत्तर – स्थान ( साइट) से तात्पर्य वैसे भौगोलिक क्षेत्र से है जहाँ मानव बस्ती बनाकर निवास करते है, उसे स्थान (साईट) कहा जाता है  जबकि  स्थिति (सिचुएसन) से तात्पर्य बस्ती के आस-पास मौजूद उन सभी भौगोलिक अर्थात पर्यावरणीय दशाओं से है जो एक बस्ती को प्रभावित करता है। 
(iii) बस्तियों के वर्गीकरण के क्या आधार हैं?
उत्तर – बस्तियों के वर्गीकरण कार्यों के आधार पर मुख्यतः दो भागों में विभाजित किया गया है –
(क) ग्रामीण बस्ती
(ख) नगरिय बस्ती
                कार्यों के आधार पर ग्रामीण एवं नगरीय बस्ती को ही भूगोल में सर्वाधिक मानता प्राप्त है। 
(iv) मानव भूगोल में बस्तियों के अध्ययन का औचित्य बताएँ।
उत्तर – बस्ती भूगोल मानव भूगोल की एक नई शाखा है। बस्ती भूगोल मानव द्वारा निर्मित आवासों पर भौतिक तथा सांस्कृतिक तत्वों के प्रभाव का अध्ययन करता है, ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार मानव भूगोल मानव एवं वातावरण के पारस्परिक संबंधों का विश्लेषण करता है। इस प्रकार मानव बस्ती का अध्ययन मानव भूगोल का मूल तत्व है क्योंकि किसी भी क्षेत्र में बस्तियों का रूप उस क्षेत्र के वातावरण से मानव का सीधा संबंध रहता है।
3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए।
(i) ग्रामीण एवं नगरीय बस्ती किसे कहते है? उनकी विशेषताएँ बताएँ।
उत्तर – ग्रामीण बस्ती – वैसे बस्ती जहाँ की आबादी 5000 व्यक्ति से कम हो, 75% पुरुष कृषि कार्यों में संलग्न हो तथा जनसंख्या घनत्व 400 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर से कम हो, ऐसे स्थानीय क्षेत्र को ग्रामीण बस्ती कहा जाता है।
               दूसरे शब्दों में जहाँ की 75% पुरुष प्राथमिक कार्यों में संलग्न हो उसे ग्रामीण बस्ती कहा जाता है। 
नगरीय बस्ती – वैसे बस्ती जहाँ की आबादी कम से कम 5000 व्यक्ति से अधिक हो, 75% पुरुष गैर कृषि कार्यों में संलग्न हो तथा जनसंख्या घनत्व 400 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर से अधिक हो, ऐसे स्थानीय क्षेत्र को नगरीय बस्ती कहा जाता है। यहाँ नगरपालिका, निगम, छावनी बोर्ड या अधिसूचित नगरीय क्षेत्र समिति होती है।            
              दूसरे शब्दों में संक्षेप में  जहाँ की 75% पुरुष द्वितीयक एवं तृतीयक कार्यों में संलग्न हो उसे नगरीय बस्ती कहा जाता है।
ग्रामीण बस्तियों की विशेषताएँ 
◆ ग्रामीण बस्ती प्रत्यक्ष रूप से भूमि से नजदीकी सम्बन्ध रखती है।
◆ यहाँ कि अधिकांश जनसंख्या प्राथमिक कार्यों (कृषि, मछली पकड़ना, आखेट, पशुपालन आदि)  से जुड़े होते है। 
◆ बस्तियों का आकार प्राय: छोटा होता है।
◆ जनसंख्या 5000 से कम होता है।
◆ यहाँ के लोग सामाजिक, सांकृतिक, धार्मिक एवं राजनितिक रूप से आपस में जुड़े होते है। 
नगरीय बस्तियों की विशेषताएँ 
◆ यहाँ नगर निगम, निगम, छावनी बोर्ड या अधिसूचित नगरीय क्षेत्र समिति होती है। 
◆ यहाँ की जनसंख्या 5000 से अधिक होती है।
◆ यहाँ कि अधिकांश जनसंख्या द्वितीयक एवं तृतीयक कार्यों में संलग्न रहती है।
◆ ग्रामीण बस्तियों के अपेक्षा नगरों कि स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण होता है।
◆ नगरों का विकास और विस्तार काफी तेजी से होता है।  
(ii) विकासशील देशों के नगरीय बस्तियों की समस्याओं का विवेचना किजिए।
उत्तर – नगरीकरण विकास का सूचक माना जाता है। परिणामस्वरुप विश्व के सभी देशों तथा विकसित एवं विकासशील देशों में नगरों का वितरण भिन्न रूपों में पाया जाता है। विकसित देशों में नगरीय सुविधाएँ बढ़ी है जबकि विकासशील देशों में समस्याएँ बढ़ी है। छोटे-छोटे कस्बों एवं क्षेत्रों से कार्यकारी जनसंख्या का पलायन हो रहा है। रोजगार के ज्यादा अवसर बड़े-बड़े शहरों तक सीमित है। वृहत आकार की जनसंख्या में अकुशल, अर्धकुशल एवं अनुत्पादकों की संख्या बढ़ती जा रही है। अकुशल, अर्धकुशल श्रमिकों को छोटे स्तर पर काम मिलने से उनका जीवन स्तर निम्न स्तर का होता है। यहाँ कई सामाजिक एवं सांस्कृतिक बुराइयाँ जन्म ले रही है। यहाँ का लिंगानुपात बिगड़ रहा है। अपराधों की संख्या बढ़ती जा रही है। पर्यावरणीय समस्याएँ तथा यातायात संबंधी समस्याएँ लगातार बढ़ती जा रही है। 
                                               दूसरे शब्दों में संक्षेप में विकासशील देशों के नगरीय बस्तियों की समस्याएँ निम्नलिखित है :-
◆ अधिकांश शहरों का अनियोजित होना।
◆ अधिकांश शहरों में भीड़ की स्थिति होना।
◆ सभी निवासियों को आधारभूत नागरिक सुविधाओं का अभाव होना ।
◆ बहुमंजिला मकान तथा गंदी बस्तियों की बढ़ोतरी होना।
◆जनसंख्या का काफी अधिक भाग निम्न स्तरीय आवासों जैसे- गंदी बस्तियों एवं अवैध बस्तियों में रहना।
◆ स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण का अभाव होना।
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NCERT CLASS 12 Geography Solutions हिंदी माध्यम इकाई 3 अध्याय 9 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार

 NCERT CLASS -12 Geography Solutions

(हिंदी माध्यम)
इकाई -3
अध्याय-9. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार 
1. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए :
(i) संसार के अधिकांश महान पत्तन इस प्रकार वर्गीकृत किए गए हैं –
(क) नौसेना पत्तन
(ख) विस्तृत पत्तन
(ग) तैल पत्तन
(घ) औद्योगिक पत्तन
उत्तर – (क) नौसेना पत्तन
(ii) निम्नलिखित महाद्वीपों में से किस एक से विश्व व्यापार का सर्वाधिक प्रवाह होता है?
(क) एशिया
(ख) यूरोप
(ग) उत्तरी अमेरिका
(घ) अफ्रीका
उत्तर – (ख) यूरोप
(iii) दक्षिण अमेरिकी राष्ट्रों में से कौन-सा एक ओपेक का सदस्य है?
(क) ब्राजील
(ख) वेनेजुएला
(ग) चिली
(घ) पेरू
उत्तर – (ग) चिली
(iv) निम्न व्यापार समूहों में से भारत किसका एक सह-सदस्य है ?
(क) साफ्टा(SAFTA)
(ख) आसियान(ASEAN)
(ग) ओइसीडी(OECD)
(घ) ओपेक(OPEC)
उत्तर – (क) साफ्टा(SAFTA)
2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए: 
(i) विश्व व्यापार संगठन के आधारभूत कार्य कौन-से है?
उत्तर – विश्व व्यापार संगठन के आधारभूत कार्य निम्नलिखित है –
◆ यह विश्व स्तर पर व्यापार के नियमों का निर्धारण करता है। 
◆विश्व व्यापार संगठन के सदस्य देशों के बीच होने वाले विवादों का निपटारा करता है।
◆ यह विश्व स्तर पर व्यापार के लिए आवश्यक दूरसंचार व बैंकिंग सेवाओं के साथ-साथ बौद्धिक संपदा अधिकार के व्यापार को भी अपने कार्यों में सम्मिलित करता है। 
(ii) ऋणात्मक भुगतान सन्तुलन का होना किसी देश के लिए क्यों हानिकारक होता है?
उत्तर – जब किसी देश का आयात मूल्य, उसके निर्यात मूल्य से अधिक होता है तब देश का व्यापार संतुलन ऋणात्मक अथवा प्रतिकूल कहा जाता है। इससे देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ता है और यह वित्तीय संचय की समाप्ति को अभिप्रेरित करता है। यही कारण है कि ऋणात्मक भुगतान सन्तुलन का होना किसी देश के लिए हानिकारक होता है। 
(iii) व्यापारिक समूहों के निर्माण द्वारा राष्ट्रों को क्या लाभ प्राप्त होते है?
उत्तर – व्यपारिक समूहों का निर्माण राष्ट्रों के लिए पारस्परिक लाभदायक होता है, यदि यह प्रादेशिक  विशिष्टीकरण, उत्पादन के उच्च स्तर, रहन-सहन के स्तर, वस्तुओं एवं सेवाओं की विश्वव्यापी उपलब्धता, कीमतों और वेतन का समानीकरण, ज्ञान एवं संस्कृति के प्रस्फुरण को प्रेरित करता है।   
3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए।
(i) पतन किस प्रकार व्यापार के लिए सहायक होते है? पत्तनों का वर्गीकरण उनकी अवस्थिति के आधार पर कीजिए।
उत्तर – अंतरराष्ट्रीय व्यापार के दुनिया के मुख्य प्रवेश द्वार पोताश्रय तथा पत्तन होते हैं। इन पत्रों के द्वारा जहाजी माल तथा यात्री विश्व के एक भाग से दूसरे भाग को जाते हैं। 
       पत्तन जहाज के लिए गोदी, लादने, उतारने तथा भंडारण हेतु सुविधाएँ प्रदान करते हैं। इन सुविधाओं को प्रदान करने के उद्देश्य से पत्तन के प्राधिकारी नौगम्य द्वारों का रख-रखाव, रस्सों व बजरों की व्यवस्था करने और श्रम एवं प्रबंधकीय सेवाओं को उपलब्ध कराने की व्यवस्था करते हैं। एक पत्तन  के महत्व को नौगम्य के आकार और निपटाए किए गए जहाजों की संख्या द्वारा निश्चित किया जाता है।
                         अवस्थिति के आधार पर पत्तन दो प्रकार होते हैं – 
(a) अंतर्देशीय पत्तन  – ये पत्तन समुद्री तट से दूर अवस्थित होते हैं। ये समुद्र से एक नदी अथवा नहर द्वारा जुड़े होते हैं। ऐसे पतन चौरस तल वाले जहाज या बजरी द्वारा ही गम्य होते हैं। उदाहरणस्वरूप – कोलकत्ता हुगली नदी जो गंगा नदी की एक शाखा है पर स्थित है। 
(b) बाह्य पत्तन – ये गहरे जल के पत्तन है जो वास्तविक पत्तन से दूर बने होते हैं। ये उन जहाजों, जो अपने बड़े आकार के कारण उन तक पहुँचने में अक्षम है, को ग्रहण करके पैतृक पत्तनों को सेवाएँ प्रदान करते हैं। उदाहरणस्वरूप एथेंस तथा यूनान में इसके बाह्य पत्तन पिरेइअस एक उच्च कोटि का संयोजन है। 
(ii) अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से देश कैसे लाभ प्राप्त करते है?
उत्तर – दो या दो से अधिक देशों के बीच होने वाले व्यापार को अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कहा जाता है। इससे व्यापारिक सदस्य देशों को निम्नलिखित प्रकार से लाभ  होते है –
◆ अंतर्राष्ट्रीय व्यापार वस्तुओं के स्थानान्तरण के सिद्धांत पर निर्भर करता है जिससे व्यापारिक सदस्य देशों को लाभ पहुँचता है।
◆कीमतों और वेतन का समानीकरण से व्यापारिक सदस्य देशों को लाभ पहुँचता है।
◆ व्यापारिक सदस्य देशों में आपसी सहयोग एवं भाईचारा बढ़ता है, इससे इनके बीच मैत्रिक संबंध अच्छे बनते है।
◆ व्यापारिक सदस्य देशों में हर देश अपनी सर्वश्रेष्ठ सामान को बाजार में उतारता है जिससे अन्य आर्थिक क्रियाओं का विकास होता है।
◆ इसके अंतर्गत तकनीकी ज्ञान, संकृति एवं अन्य बौद्धिक ज्ञानों का आदान-प्रदान किया जाता है, इससे दोनों देशों को लाभ पहुँचता है।
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NCERT CLASS 12 Geography Solutions हिंदी माध्यम इकाई 3 अध्याय 8 परिवहन एवं संचार

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(हिंदी माध्यम)
इकाई -3
अध्याय-8. परिवहन एवं संचार 
1. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए : 
(i) पारमहाद्वीपीय स्टुवर्ट महामार्ग किनके मध्य से गुजरता है?
(क) डार्विन और मेलबॉर्न
(ख) एडमंटन और एंकॉरेज
(ग) बैंकूवर और सेंट जॉन नगर
(घ) चेगडू और ल्हासा
उत्तर – (क) डार्विन और मेलबॉर्न
(ii) किस देश में रेल मार्गों के जाल का सघनतम घनत्व पाया जाता है?
(क) ब्राजील
(ख) कनाडा
(ग) संयुक्त राज्य अमेरिका
(घ) रूस
उत्तर – (ख) कनाडा 
(iii) बृहद ट्रक मार्ग होकर जाता है –
(क) भूमध्य सागर हिंद महासागर से होकर
(ख) उत्तर अटलांटिक महासागर से होकर
(ग) दक्षिण अटलांटिक महासागर से होकर
(घ) उत्तर प्रशांत महासागर से होकर 
उत्तर – (क) भूमध्य सागर हिंद महासागर से होकर 
(iv) ‘बिग इंच’ पाइप लाइन के द्वारा परिभाषित किया जाता है।
(क) दूध
(ख) जल
(ग) तरल पेट्रोलियम गैस (एलपीजी)
(घ) पेट्रोलियम
उत्तर – (ग) तरल पेट्रोलियम गैस (एलपीजी)
(v) चैनल टनल जोड़ता है 
(क) लंदन-बर्लिन
(ख) बर्लिन-पेरिस
(ग) पेरिस-लंदन
(घ) बार्सिलोना-बर्लिन
उत्तर – (ख) बर्लिन-पेरिस
2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए:
(i) पर्वतों, मरुस्थलों तथा बाढ़ संभावित प्रदेशों में स्थल परिवहन की क्या-क्या समस्याएँ हैं?
उत्तर – पर्वतों, मरुस्थलों तथा बाढ़ संभावित प्रदेशों में स्थल परिवहन की निम्लिखित समस्याएँ हैं –
◆ विषम भौगोलिक कारकों का होना,
◆ सड़क एवं रेलमार्ग निर्माण के लिए आसानी से सामाग्री प्राप्त न होना,
◆ जनसंख्या घनत्व कम होना। 
(ii) पारमहाद्वीपीय रेलमार्ग क्या होता है?
उत्तर – वैसे रेलमार्ग जो पुरे महाद्वीप से होकर गुजरते हुए इसके दोनों छोरों को जोड़ते हैं उसे पारमहाद्वीपीय रेलमार्ग कहते है। इसका निर्माण आर्थिक और राजनितिक कारणों से विभिन्न दिशाओं में लम्बी यात्राओं कि सुविधा प्रदान करने के लिए किया गया था।
(iii) जल परिवहन के क्या लाभ है?
उत्तर – जल परिवहन के निम्लिखित लाभ है –
◆ इसमें मार्गों का निर्माण नहीं करना पड़ता है।
◆ यह परिवहन काफी सस्ता पड़ता है।
◆जल परिवहन की उर्जा लागत की अपेक्षाकृत कम होती है।
3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए।
(i) “एक सुप्रबंधित परिवहन प्रणाली में विभिन्न एक-दूसरे की संपूरक होती है,” इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर -परिवहन योजक और वाहक उपलब्ध कराता है जिनके माध्यम से व्यापर संभव होता है। परिवहन, संचार एवं व्यापार, उत्पादन केंद्रों और उपभोग केंद्रों को जोड़ते हैं। परिवहन समाज की आधारभूत आवश्यकताओं की संतुष्टि के लिए रचा गया एक संगठित सेवा उद्योग है। परिवहन व्यक्तियों और वस्तुओं को एक स्थान से दुसरे स्थान तक वहां करने की सेवा या सुविधा को कहते है। जिसमें मनुष्यों, पशुओं तथा विभिन्न प्रकार की गाड़ियों का प्रयोग किया जाता है। इसके अंतर्गत परिवहन मार्गों, लोगों और वस्तुओं के वहन के लिए गाडियों, मार्गों के रख-रखाव और लदान, उतराव तथा वितरण का निपटान करने के लिए संस्थाओं का समावेश किया जाता है। विश्व परिवहन की प्रमुख विधाएँ हैं – स्थल, जल, वायु और पाइपलाइन आदि। इनका प्रयोग अन्तर्प्रादेशिक  तथा अंतरा-प्रादेशिक परिवहन के लिए किया जाता है और पाइपलाइन को छोड़कर प्रत्येक यात्रियों और माल दोनों का वहन करता है।
                                  किसी विधा की सार्थकता परिवहित की जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं के प्रकार, परिवहन की लागतों और उपलब्ध विधा पर निर्भर करता है। वस्तुओं के अंतर्राष्ट्रीय संचलन का निपटान भारी वाहन जलयानों द्वारा किया जाता है। कम दूरी एवं एक घर से दूसरे घर की सेवाएं प्रदान करने में सड़क परिवहन सस्ता एवं तीव्रगामी है। किसी देश के भीतर स्थूल पदार्थों के विशाल परिणाम को लंबी दूरियों तक परिवहन करने के लिए रेल सर्वाधिक अनुकूल साधन है। उच्च मूल्य वाली; हल्की तथा नाशवान वस्तुओं का वायुमार्गों द्वारा परिवहन सर्वश्रेष्ठ होता है। परिवहन के लिए वायु यातायात अच्छी विधि है। एक सुप्रबंधित परिवहन तंत्र में ये विभिन्न विधाएँ एक-दूसरे की पूरक होती है।
 (ii) विश्व की वे  कौन-से प्रमुख प्रदेश हैं जहाँ वायुमार्ग का सघनतंत्र पाया जाता है?
उत्तर – उत्तरी गोलार्द्ध में अंतर-महाद्वीपीय वायुमार्गों की एक सुस्पष्ट पूर्व-पश्चिम पट्टी है। पूर्वी संयुक्त राज्य अमेरिका, पश्चिमी यूरोप और दक्षिण-पूर्वी एशिया में वायुमार्गों का सघन जाल पाया जाता है। विश्व के कुल वायुमार्गों के 60 प्रतिशत भाग का प्रयोग अकेला संयुक्त राज्य अमेरिका करता है। न्यूयार्क, लंदन, पेरिस, एमस्टर्डम और शिकागो नोडीय बिंदु हैं। जहाँ  अभिसरित होते हैं अथवा सभी महाद्वीपों की ओर विकरित होते हैं। 
                             अफ्रीका, रूस के एशियाई भाग और दक्षिण अमेरिका में वायु सेवाओं का अभाव है। दक्षिण गोलार्द्ध में 10-35 अक्षांशों के मध्य अपेक्षाकृत विरल जनसंख्या, सीमित स्थलखंड और आर्थिक विकास के कारण सीमित वयुसेवाएँ उपलब्ध है।
(iii) वे कौन सी विधाएँ हैं जिनके द्वारा साइबर स्पेस मनुष्यों के समकालीन आर्थिकी और सामाजिक स्पेस की वृद्धि करेगा?
उत्तर – साइबर स्पेस विधुत द्वारा कम्पयूटरीकृत  स्पेस का संसार है। यह वर्ल्ड वाइड वेबसाइट जैसे इन्टरनेट द्वारा आवृत है। सरल शब्दों में यह भेजने वाले और प्राप्त करने वाले के शारीरिक संचलन के बिना कंप्यूटर पर सूचनाओं के प्रेषण और प्राप्ति कि विधुतीय अंकीय दूनियाँ है। इसे इन्टरनेट के नाम से भी जाना जाता है। साइबर स्पेस हर जगह विद्यमान है। यह किसी कार्यालय में जल में चलती नौका में, उड़ते जहाजों में और वास्तव में कहीं भी हो सकता है।  
                                प्रतिवर्ष करोड़ों लोग प्रतिवर्ष इंटरनेट का प्रयोग करते है। साइबर स्पेस लोगों के समकालीन आर्थिक और सामाजिक स्पेस को ई. मेल, ई. वाणिज्य, ई. शिक्षा और ई. प्रशासन के माध्यम से विस्तृत करेगा। फैक्स, टेलिविजन और रेडियो के साथ इंटरनेट समय और स्थान की सीमाओं को लांघते हुए अधिक लोगों तक पहुंचेगा। ये आधुनिक संचार प्रणालियाँ  हैं जिन्होंने परिवहन से कहीं ज्यादा वैश्विक ग्राम की संकल्पना को साकार किया है।
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