11. वायुमंडलीय तापमान / Environmental or Atmospheric Temperature

11. वायुमंडलीय तापमान

(Environmental or Atmospheric Temperature)


वायुमंडलीय तापमान

           वायुमण्डलीय कणों में मौजूद ताप की मात्रा को ही वायुमण्डलीय तापमान कहते हैं। पृथ्वी की औसत वायुमण्डलीय तापमान 15.2°C है। वायुमण्डलीय तापमान के दो प्रमुख स्रोत हैं।

(1) सैर विकिरण / सौर्यिक विकिरण (Solar Radiation)

(2) पार्थिव विकिरण (Terrestrial Radiation)

            हमारा वायुमण्डल मुख्यतः पार्थिव विकिरण द्वारा गर्म होता है क्योंकि सौर विकिरण से प्राप्त होने वाली ऊष्मा लघु तरंग के रूप में वायुमण्डल में प्रवेश करती है। जिसके कारण हमारा वायुमण्डल सौर विकिरण लिए पारदर्शक होता है। जबकि पार्थिव विकिरण दीर्घ तरंग के रूप में अंतरिक्ष में फैलता है। वायुमण्डल इन्हीं दीर्घ पार्थिव तरंगो को अवशोषित कर वायुमण्डल को गर्म करती है।
वायुमंडलीय तापमानवायुमण्डलीय तापमान का वितरण

       वायुमण्डलीय तापमान के वितरण में भारी विषमता पायी जाती है। यह विषमता लम्बत, क्षैतिज के अतिरिक्त दैनिक, मासिक एवं वार्षिक भी होते हैं। लम्बवत वायुमण्डलीय तापमान के वितरण को नीचे के मानचित्र में देखा जा सकता है:- 
वायुमंडलीय तापमान

         वायुमण्डल की दैनिक, मासिक और वार्षिक तापीय विषमता तापान्तर के रूप में मापी जाती है। जब वायुमण्डल का दैनिक तापमान सर्वाधिक दोपहर (3PM) और न्यूनतम तापमान सुबह (5AM) मापी जाती है। एक दिन के अधिकतम एवं न्यूनतम तापमान के अंतर को दैनिक तापान्तर कहते है। सबसे कम दैनिक तापान्तर विषुवतीय क्षेत्रों में होता है जबकि अधिकतम तापान्तर मरुस्थलीय या महाद्वीपीय जलवायु क्षेत्रों में मापी जाती है।

         मासिक एवं वार्षिक तापान्तर का आकलन दैनिक तापान्तर के आधार पर करते हैं। सम्पूर्ण पृथ्वी का वार्षिक तापान्तर 145°C है। विषुवतीय प्रदेशों में न्यूनतम मासिक एवं वार्षिक तापान्तर मापी जाती है। जबकि मरुस्थलीय तथा उच्च अक्षांशीय महाद्वीपीय क्षेत्रों में सर्वाधिक मासिक एवं वार्षिक तापान्तर Record किया जाता है। लीबिया का अल्जीरिया नामक स्थान विश्व का सबसे गर्म स्थान माना जाता है। यहाँ पिछले 130 वर्षों से लगातार 58℃-60℃ तापमान Record किया जा रहा है। जबकि विश्व का सबसे ठण्डा स्थान बर्खोयांस्क (रूस) माना जाता है। किसी एक दिन का सर्वाधिक तापमान इथियोपिया के दलाल में Record किया गया है। जबकि सबसे कम तापमान अण्टार्कटिका के बोस्टक नामक स्थान पर Record किया गया है।

        वायुमण्डलीय तापमान के क्षैतिज वितरण में काफी विषमता पायी जाती है। जिसके कई कारण है:-

(i) अक्षीय प्रभाव –

        5°N-5°S के बीच सूर्य की किरणों का सालों भर लम्बवत प्रभाव होता है। जिसके कारण यह उच्च तापमान का प्रदेश होता है। ज्यों-2 निम्न अक्षांश से उच्च अक्षांश की ओर जाते हैं त्यों-2 सूर्य की किरणें तिरछी होते जाती हैं, और अंततः ध्रुवीय क्षेत्रों में सालों भर तिरछी किरणों के कारण तापीय प्रभाव कम हो जाता है जिसके फलस्वरूप ध्रुव हिमाच्छादित रहते हैं।वायुमंडलीय तापमान

(2) ऊँचाई का प्रभाव-

         ज्ञात है कि क्षोभमंडल में प्रति 165मी0 की ऊँचाई पर 1°C तापमान में कमी आती है। यही कारण है कि अफ्रीका का किलीमंजारो पर्वत और इक्वेडोर का कोटोपैक्सी तथा चिम्बराजो की चोटी पर विषुवत रेखा के नजदीक होने के बावजूद तापमान बहुत कम होता है।

(3) स्थलखण्ड एवं समुद्र का विषम वितरण-

          वायुमण्डलीय तापमान के वितरण पर स्थल एवं समुद्र के वितरण का व्यापक प्रभाव पड़ता है। स्थलीप क्षेत्र ग्रीष्म ऋतु में तेजी से गर्म और शीत ऋतु में तेजी से ठण्डी होने की प्रवृत्ति रखती है। जबकि महासागरीप प्रदेश तुलनात्मक रूप से ग्रीष्म ऋतु में धीरे-2 गर्म और‌ शीत ऋतु में धीरे-2 ठण्डी होते है। इसी स्थल एवं जल के ठंडा एवं गर्म होने के समयान्तराल के कारण तापमान के वितरण में विषमता पाई जाती है। इसका सबसे अच्छा उदाहरण भारतीय उपमहाद्वीप है। जैसे – सूर्य के उतरायण होते ही भारतीय उपमहाद्वीप गर्म हो जाता है और गर्म होकर निम्न वायुदाब का निर्माण है जबकि सूर्य के दक्षिणायन होते ही भारतीय उपमहाद्वीप तेजी से ठण्डा होकर उच्च वायुदाब के इस में तब्दील हो जाता है।

        इसे एक दूसरा उदाहरण से समझा जा सकता है। जैसे:- यूरेशिया महाद्वीप के ऊपर ग्रीष्म ऋतु में 50°F. समताप रेखा 60° उतरी अक्षांश के पास से गुजरती है लेकिन जाड़े की ऋतु में यह समताप रेखा 30° उत्तरी अक्षांश के पास से गुजरती है। इसी तरह महासागरीय क्षेत्रों में ग्रीष्म ऋतु में 50°F समताप रेखा 52° उत्तरी अक्षांश के पास से गुजरती है। जबकि स्पष्ट है कि ये तापीय वितरण में विषमता स्थल एवं जल के असमान वितरण के कारण उत्पन्न होता है।

(4) समुद्री जलधाराओं का प्रभाव:-

          समुद्री जलधाराएँ दो प्रकार की होती है:-

(1) गर्म समुद्री जलधारा और

(2) ठण्डी समुद्री जलधारा।

              समुद्री जलधारा का प्रभाव तटीय क्षेत्रों में अधिक पड़ता है। जैसे:- उत्तरी अटलांटिक प्रवाह के कारण प० यूरोप की जलवायु सालोभर समशीतोष्ण बना रहता है। इसके विपरीत महाद्वीपों के किनारे जहाँ-2 ठण्डी समुद्री जलधारा प्रवाहित होती है वहाँ पर वर्षा के कम होने से शुष्क या मरुस्थलीय जलवायु का विकास हुआ है। प्रशान्त महासागर में अवस्थित ग्लैपोगस द्वीप विषुवत रेखा पर अवस्थित है। हम्बोल्ट ठण्डी जलधारा के कारण यहाँ का तापमान सतत् कम रहता है।

(5) प्रचलित वायु-

       यदि कोई गर्म वायु किसी प्रदेश से होकर गुजरती है तो उसके आस-पास मौसमी परिस्थितियों को गर्म कर देती है जबकि ठण्डी वायु वायुमण्डलीय तापमान को गिरा देती है। पछुआ हवा निम्न असांश से उच्च अक्षांश की ओर ऊष्मा (तापमान) को ले जाती है। जबकि ध्रुवीय हवा उच्च अक्षांश से निम्न अक्षांश की ओर तापमान को घटाती है।

      वायुमण्डलीय तापमान के कई अन्य निर्धारक हैं। जैसे:- बादल का प्रभाव, स्थलाकृतिक विशेषता, बढ़ते महानगर & औद्योगिकीकरण, वनीय ह्रास और वायुमण्डल में CO2 की बढ़ती हुई मात्रा।

निष्कर्ष:-

          इस तरह उपर्युक्त तथ्यों से स्पष्ट होता है कि वायुमण्डलीम तापमान में कई प्रकार की विषमताएँ पायी जाती हैं। इन विषमताओं के लिए उपरोक्त कई कारक जिम्मेदार हैं।


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भारत का भूगोल



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एक नजर में इन्हें जरुर देखें

1. कोपेन के जलवायु विभाजन के अनुसार भारत के किस भाग में लघु गर्म मानसून जलवायु (Amw) पाई जाती है-
उत्तर- दक्षिणी-पश्चिमी तट

2. भारत में शरदकालीन वर्षा के क्षेत्र है-
उत्तर- तमिलनाडु, कर्नाटक

3. गंगा मैदान में पूर्व से पश्चिम वर्षा की वार्षिक मात्रा घटती है क्योंकि-
उत्तर- वायु में नमी की मात्रा क्रमशः घटती जाती है

4. कोपेन के जलवायु वर्गीकरण में ‘As’ भारत के किस क्षेत्र के लिये उपयोग किया जाता है-
उत्तर- तमिलनाडु तट

5. शीत ऋतु में तमिलनाडु में होने वाली वर्षा का प्रकार है-
उत्तर- चक्रवातीय वर्षा

6. भारत का ऋतु मानचित्र बनाया जाता है-
उत्तर- मर्केटर प्रक्षेप पर

7. कोपेन ने भारत को कितने जलवायु प्रदेशों में विभक्त किया है-
उत्तर- 8

8. स्टाम्प ने भारत को कितने जलवायु प्रदेशों में बांटा है-
उत्तर- 11

9. लैटेराइट मिट्टी के निर्माण हेतु उत्तरदायी है-
उत्तर- अपक्षालन और केशिका क्रिया

10. भारत मे किस मिट्टी का विस्तार सर्वाधिक क्षेत्रफल पर है-
उत्तर- जलोढ़ मिट्टी

11. पिट मिट्टी मुख्यतः पायी जाती है-
उत्तर- केरल में

12. गुजरात प्रदेश अधिकांशतः आच्छादित है-
उतर- काली मिट्टी से

13. अत्यंत सूक्ष्म कणों वाली मिट्टी है-
उत्तर- चिका मिट्टी

14. पश्चिमी घाट पर पायी जाने वाली वनस्पति है-
उत्तर- सदाहरित

15. हिमालय क्षेत्र में शंकु वन मिलते है-
उत्तर- 1500 से 3500 मीटर ऊँचाई के बीच

16. भारत मे मैंग्रोव वनस्पति का सर्वाधिक विस्तार किस राज्य में है-
उत्तर- पश्चिम बंगाल

17. भारत मे चन्दन के वृक्ष सर्वाधिक किस राज्य में है-
उत्तर- कर्नाटक में

18. सागौन वनस्पति महत्वपूर्ण है-
उत्तर- पश्चिमी घाट की

19. कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का सर्वाधिक प्रतिशत वनाच्छादित है-
उत्तर- अरुणाचल प्रदेश

20. भारत के सर्वाधिक महत्वपूर्ण व्यावसायिक वन है-
उत्तर- उष्णकटिबंधीय अर्द्ध सदाबहार वन

21. गंगा-महानदी डेल्टाई क्षेत्रों में वनस्पति पाए जाए है-
उत्तर- ज्वारीय वन

22. भारत मे चन्दन की लकड़ी के वन सर्वाधिक कहाँ पाए जाते है-
उत्तर- नीलगिरि की पहाड़ियों में

23. देश में सिंचित भूमि के सर्वाधिक भाग पर किस साधन द्वारा सिंचाई होती है-
उत्तर- नहर द्वारा

24. राजस्थान गुजरात की संयुक्त बहुउद्देश्यीय परियोजना है-
उत्तर- माही बजाज

25. सरदार सरोवर बाँध किस नदी पर बनाया गया है-
उत्तर- नर्मदा

26. 1902 ई० में भारत की सबसे पहली जल विद्युत परियोजना स्थापित की गई थी-
उत्तर- शिवसमुद्रम

27. जवाहर सागर, राणा प्रताप सागर तथा गाँधी सागर जलाशयों का निर्माण किस नदी पर किया गया है-
उत्तर- चम्बल

28. रिहन्द बांध किस राज्य में स्थित है-
उत्तर- उत्तर प्रदेश

29. कर्नाटक, आंध्रप्रदेश और तमिलनाडु में सिंचाई के मुख्य साधन है-
उत्तर- तालाब

30. महानदी पर हीराकुंड परियोजना किस प्रदेश में बनाई गई है-
उत्तर- उड़ीसा

31. पोंग बाँध किस नदी पर बनाया गया है-
उत्तर- व्यास नदी

32. भारत के किस राज्य में इडुक्की जल-विद्युत परियोजना स्थित है-
उत्तर- केरल

33. तुलबुल परियोजना सम्बन्धित है-
उतर- झेलम नदी से

34. राजस्थान और मध्यप्रदेश की संयुक्त परियोजना है-
उत्तर- चम्बल परियोजना

35. इन्दिरा गाँधी नहर निकलती है-
उत्तर- हरिके बाँध से

36. जम्मू कश्मीर में चिनाब नदी पर बनी जल विद्युत परियोजना है-
उत्तर- सलाल

37. टिहरी बांध परियोजना से निर्मित जलाशय का नाम है-
उत्तर- स्वामी रामतीर्थ सागर

38. देश मे नलकूपों द्वारा सर्वाधिक सिंचाई होती है-
उत्तर- उत्तर प्रदेश में

39. भारत मे प्रथम बहुउद्देश्यीय परियोजना का प्रारंभ किया गया था-
उत्तर- दामोदर नदी पर

40. बकिंघम नहर का मुख्य कार्य है-
उत्तर- नौकागमन

41. त्रिवेणी नहर किस नदी से सम्बंधित है-
उत्तर- गण्डक नदी से

42. समोच्च रेखा कृषि, वेदिका कृषि और पट्टिका कृषि की जाती है-
उत्तर- मृदा अपरदन को रोकने हेतु

43. भारत को कितने कृषि जलवायु प्रदेशों में विभाजित किया गया है-
उत्तर- 15

44. भारत मे दलहनों का सबसे महत्वपूर्ण स्थान है-
उत्तर- मध्यप्रदेश

45. देश में कुल खाद्यान्न के उत्पादन में प्रथम स्थान वाला राज्य है-
उत्तर- उत्तर प्रदेश

46. देश में किस फसल का क्षेत्र सबसे अधिक सिंचित है-
उत्तर- गेंहूँ

47. देश मे प्रति हेक्टेयर सबसे अधिक उपज किस फसल की होती है-
उत्तर- गेहूँ

48. देश मे मात्रा की दृष्टि से सबसे अधिक उत्पादन किस फसल का होता है-
उत्तर- चावल

49. देश मे सर्वाधिक सकल बोया गया क्षेत्र किस फसल के अंतर्गत है-
उत्तर- चावल

50. विश्व में प्राकृतिक रबड़ के उत्पादन में भारत का स्थान है-
उत्तर- दूसरा

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प्राकृतिक रबड़



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नोट :  मैं आशा करता हूँ कि भारत का भूगोल से सम्बंधित सभी Capsule आपके परीक्षा के लिए नींव का पत्थर साबित होंगे। अगर किसी भी प्रश्न के उत्तर को लेकर आपके मन में कोई संदेह हो तो हमसे Contact With us के माध्यम से, Comment या Email से Contact कर सकते है। मैं हमेशा आपके मंगल भविष्य की कामना करता हूँ।

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भारत का भूगोल


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एक नजर में इन्हें जरुर देखें

1. जोग जल प्रपात किस नदी से सम्बंधित है-

उत्तर- शरावती

2. डीडवाना झील उदाहरण है-

उत्तर- प्लाया झील का

3. दामोदर कोयला क्षेत्र में किस प्रकार की जल प्रवाह प्रणाली पाई जाती है-

उत्तर-जालीनुमा

4. अरीय प्रवाह क्रम किन क्षेत्रों में देखने को मिलता है-

उत्तर- गुम्बदाकार पर्वतीय क्षेत्रों में

5. लघु हिमालय से निकलने वाली नदियों की जल प्रवाह प्रणाली किस प्रकार की है-

उत्तर- समांतर

6. लोनार झील है-

उत्तर- क्रेटर निर्मित झील

7. क्षिप्रा नदी किसकी सहायक नदी है-

उत्तर- चम्बल नदी की

8. रुद्रप्रयाग किन दो नदियों के संगम पर स्थित है-

उत्तर- अलकनन्दा-भगीरथी

9. नर्मदा किस प्रकार की घाटी से होकर बहती है-

उत्तर- भ्रंश घाटी

10. भारत नेपाल के बीच सिमा बनाने वाली नदी है-

उत्तर- काली नदी

11. करेवा हिमानीकृत वेदिकाएँ पाई जाती है-

उत्तर- झेलम घाटी में

12. हिमालय पार से निकलने वाली नदी है-

उतर- ब्रह्मपुत्र, सतलज, सिन्धु

13. काली तथा तीस्ता नदियों के बीच कौन सा हिमालयी भाग है-

उत्तर- नेपाल हिमालय

14. हिमालय पर्वत निर्माण के संदर्भ में गोमती नदी एक 

उत्तर- अनुवर्ती नदी है-

15. हिमालय में सिंधु नदी उदाहरण है-

उत्तर- पूर्ववर्ती अपवाह का

16. प्रारम्भ में अरुण नदी के नाम से जानी जाती है-

उत्तर- कोसी नदी

17. ताप्ती नदी किस प्रकार की घाटी से होकर बहती है-

उत्तर- भ्रंश घाटी

18. सिन्धु की सहायक झेलम नदी का उद्गगम स्थान है-

उत्तर- पीरपंजाल

19. लूनी नदी किस राज्य में बहती है-

उत्तर- राजस्थान

20. चिल्का झील स्थित है-

उत्तर- उत्तरी सरकार तट पर

21. हिमालय क्षेत्र में प्रवाहित होने वाली नदियाँ किस प्रकार की प्रवाह प्रणाली प्रस्तुत करती है-

उत्तर- पूर्ववर्ती नदी

22. कावेरी नदी किन राज्यों से होकर गुजरती है-

उत्तर- कर्नाटक और महाराष्ट्र

23. लूनी नदी किस पर्वतमाला से निकलती है-

उत्तर- अरावली

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लूनी नदी

24. भारत मे प्रतिचक्रवातीय दशाएं विद्यमान होती है-

उत्तर- दिसम्बर से मध्य फरवरी तक

25. शिलांग, तिरुवनंतपुरम, दिल्ली और जोधपुर में सबसे कम वार्षिक तापान्तर होगा-

उत्तर- तिरुवनंतपुरम का

26. कोलकाता, मुंबई, दिल्ली और चेन्नई में से सबसे अधिक वार्षिक तापान्तर किस महानगर का है-

उत्तर- दिल्ली का

27. भारत के अकाल ग्रस्त क्षेत्रों में वर्षा की परिवर्तनशीलता पाई जाती है-

उत्तर- 30 प्रतिशत से अधिक

28. भारत मे दक्षिणी-पश्चिमी मानसून का समय सामान्यत: कब से कब तक होता है-

उत्तर- जून से सितंबर

29. वर्तमान में विश्व की सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान मॉसिनराम किस राज्य में स्थित है-

उत्तर- मेघालय

30. अरब सागर शाखा के मानसूनों की दिशा होती है-

उत्तर- दक्षिण छोर से पश्चिम की ओर

31. भारत मे दक्षिण-पश्चिम मॉनसून कब समाप्त होते है-

उत्तर- नवम्बर में

32. स्थानीय आयोजना के लिए कृषि जलवायु क्षेत्रों की प्रस्तावना किसने दी-

उत्तर- भरतीय योजना आयोग

33. Cs जलवायु की विशेषता है-

उतर- ग्रीष्म ऋतु शुष्क

34. राजस्थान, तमिलनाडु, कर्नाटक तथा पंजाब में से किस राज्य में मॉनसून द्वारा वर्षा नहीं होती है-

उत्तर- तमिलनाडु

35. दिल्ली का वार्षिक तापान्तर अधिक है, क्योंकि-

उत्तर- यह समुद्र से दूर स्थित है

36. थार्नथ्वेट ने उड़ीसा, पश्चिम बंगाल एवं पूर्वी बिहार को एक जलवायु प्रदेश में शामिल किया है जिसे कहते है-

उत्तर- नम उपार्द्र

37. भारत के कोरोमंडल तट पर सर्वाधिक वर्षा होती है-

उत्तर- अक्टूबर-नवम्बर में

38. एलनिनो सम्बंधित है-

उत्तर- भारतीय मानसून से

39. भारतीय मानसून का सर्वप्रथम वर्णन किसके द्वारा किया गया था-

उत्तर- अलमसूदी

40. जम्मू-कश्मीर में होने वाली शीतकालीन वर्षा का कारण है-

उत्तर- पश्चिमी विक्षोभ

41. भारत की जलवायु में स्थानिक विभिन्नता मिलने का प्रमुख कारण है-

उत्तर- देश में प्राकृतिक विषमता का होना

42. भारत में वर्षा की सर्वाधिक विरलता पायी जाती है-

उत्तर- लेह

43. लेह किस राज्य में स्थित है-

उत्तर- लद्धाख (केंद्र शासित प्रदेश) में

44. कोपन ने अपने जलवायु वर्गीकरण में मानसूनी जलवायु को किस संकेत के माध्यम से प्रस्तुत किया है-

उत्तर- Am

45. भारतीय मौसम मानचित्र नहीं दर्शाता है-

उत्तर- समताप रेखा

46. उत्तरी-पश्चिमी भारत में शीतकालीन वर्षा का कारण है-

उत्तर- पश्चिमी विक्षोभ

47. तमिलनाडु में वर्षा होने का कारण है-

उत्तर- उत्तरी-पूर्वी मॉनसून

48. भारत में शीतकालीन पवनों की दिशा क्या होती है-

उत्तर- उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम

49. भारत मे प्रवेश करने वाले शीतोष्ण कटिबन्धीय चक्रवातों की उत्पत्ति कहाँ होती है-

उत्तर- भूमध्य सागर में

50. वर्षाकाल में  वायुमण्डल में सर्वाधिक आर्द्रता विद्यमान रहती है-

उत्तर- प्रातःकाल



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राजनीतिशास्त्र

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1. माल्थस का जनसंख्या सिद्धांत (Malthusian Population Theory) 

1. माल्थस का जनसंख्या सिद्धांत

(Malthusian Population Theory)



माल्थस का जनसंख्याप्रश्न प्रारूप 

1. जनसंख्या वृद्धि से संबंधित सिद्धांतों का आलोचनात्मक व्याख्या करें। वर्तमान समय में उनकी उपयोगिता को भी स्पष्ट करें।

         जनसंख्या वृद्धि एक जैविक प्रक्रिया है, जो समय और स्थान के संदर्भ में अलग-2 प्रवृत्ति रखता है। बदलते हुए इन प्रवृतियों को ध्यान  में रखकर कई भूगोलवेत्ताओं एवं अर्थशास्त्रियों ने जनसंख्या वृद्धि से संबंधित सिद्धांत प्रस्तुत किया।  इनमें से चार सिद्धांत प्रमुख है।:-

(i) माल्थस का जनसँख्या सिद्धांत 

(ii) मार्क्स का जनसंख्या सिद्धांत 

(iii) जननांकी संक्रमण का सिद्धांत

(iv) अनुकूलतम जनसंख्या का सिद्धांत

माल्थस का जनसंख्या सिद्धांत   

      माल्थस एक ब्रिटिश अर्थशास्त्री और जननांकी विशेषज्ञ थे। उन्होंने 1798 ई० में लिखित पुस्तक “An Esay On Priciple of Population” नामक पुस्तक में जनसंख्या का सिद्धांत प्रस्तुत किया।

मन्यताएँ

       माल्थस का सिद्धांत दो आधारभूत मान्यताओं पर आधारित है।

(i) जनसंख्या वृद्धि सदैव ज्यामितीय रीति से होती है। जैसे- 1, 2, 4, 8, 16, 32, . . . . . . . . . . . . . .।

(ii) खाद्यान्न पदार्थों की वृद्धि अंक गणितीय विधि से होती है। जैसे:- 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, . . . . .।

      माल्थस के अनुसार जनसंख्या वृद्धि और खाद्यान्न उत्पादन की वृद्धि की अलग-अलग प्रवृत्ति होती है। अर्थात् जनसंख्या की बढ़ोतरी तेजी से होती है, उसके अनुपात में खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि मंद गति से होती है।

       अगर किसी देश की जनसंख्या वृद्धि अधिक हो और खाद्यान्न का उत्पादन दर निम्न हो तो वह देश खाद्यान्न की समस्या से ग्रसित होगा।

      माल्थस के अनुसार जनसंख्या वृद्धि की दर अगर उच्च हो तो किसी भी जनसंख्या आकार को दोगुना बना देती है। 

विश्लेषण:

      माल्थस के अनुसार जनसंख्या का आकार 25 वर्ष में दुगुना हो जाता है। माल्थस का सिद्धांत उस समय आया जब औद्योगिक क्रांति के प्रभाव से अनेक बीमारियों तथा महामारियों पर नियंत्रण स्थापित किया जा रहा था। इसके कारण मृत्युदर में तो कमी आ रही थी लेकिन जनसंख्या वृद्धि में किसी भी प्रकार की कमी नहीं आ रही थी जिसके परिणामस्वरूप लगभग सम्पूर्ण यूरोप में जनसंख्या वृद्धि तीव्र गति से हो रही थी।

      अत: उन्होंने बताया कि आनेवाले समय में पूरे विश्व को खाद्य संकट और जनसंख्या दबाव जैसी गंभीर समस्या का सामना करना होगा। माल्थस ने खाद्यान्न संकट से निपटने हेतु जनसंख्या नियंत्रण अनिवार्य बताया। इसके लिए उन्होंने दो उपाय बताये। जैसे:-

(i) साकारात्मक उपाय

(ii) नाकारात्मक उपाय

       साकारात्मक उपाय के अन्तर्गत उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी समाज के ऊपर डाला। उन्होंने कहा कि युद्ध, गरीबी, महामारी, खाद्यान्न पदार्थों की कमी जैसे कारक स्वतः प्राकृतिक रूप से जनसंख्या पर नियंत्रण स्थापित करते हैं।

        दूसरे शब्दों में प्रकृति और समाज जनसंख्या का स्वयं नियंत्रक होता है। लेकिन यह विधि काफी कष्टकर होता है। अत: उन्होंने ये सलाह दिया कि आप जनसंख्या का नियंत्रण निषेधात्मक विधि से करे।

निषेधात्मक उपाय के अन्तर्गत उन्होंने नैतिक आचरण की चर्चा की है। उनके अनुसार:-

(i) मनुष्य को विवाह स्वयं देरी से करनी चाहिए।

(ii) प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में कार्यों का महात्व देना चाहिए।

(ii) युवावस्था में ब्रह्मचर्य जीवन का पालन करना चाहिए। इससे उनकी आर्थिक आय सुनिश्चित होगी।

      माल्थस का यह विचार प० यूरोप के लिए एक नवीन चिंतन था जिस चिन्तन को अधिकतर देश के सरकारों ने पसन्द किया। यहाँ तक कि ब्रिटिश सरकार ने उनके पुस्तकों का सस्ते दर में प्रकाशित कर वितरण किया तथा राजनीतिक क्षेत्रों में उनके पुस्तकों एवं सिद्धांतों का हवाला दिया गया।

आलोचना

      माल्थस का सिद्धांत जनसंख्या नियंत्रण की दिशा में एक चिरसम्मतकालीन सिद्धांत हैं। इसके बावजूद भी इनकी आलोचना कई आधारों पर की गई है। जैसे:-

(i) किसी भी परिवार में एक शिशु का आगमन होना एक जैविक प्रक्रिया मात्र है (माल्थस के अनुसार), लेकिन आलोचकों का कहना है कि यह जैविक प्रक्रिया के साथ-2 सामाजिक प्रक्रिया भी है।

(ii) जनसंख्या और खाद्य वृद्धि के संबंध में माल्थस जो मत प्रतिपादित किया है, वह भी गलत है क्योंकि जहाँ एक ओर राजनीतिक एवं प्रशासनिक प्रतिबद्धता के आधार पर जनसंख्या वृद्धि दर को नियंत्रित किया जा रहा वहीं जैव तकनीक एवं विभिन्न प्रकार के कृषि क्रांतियों के द्वारा खाद्यान्न का उत्पादन बढ़ाया जा रहा है।

(iii) माल्थस के अनुसार कोई भी जनसंख्या का आकार 25 वर्षों में दुगुना हो जाता है, लेकिन यूनाइटेड किंगडम में 280 वर्ष में, जापान 270 वर्ष में, USA में 99 वर्ष में, रूस, जर्मनी, स्वीडन में 300 वर्ष में, इसी तरह भारत में स्वतंत्रता के बाद 35 वर्ष में जनसंख्या का आकार दुगुना हुआ जो स्पष्ट है कि माल्थस के विचार के प्रतिकूल है।

(iv) माल्थस के द्वारा जनसंख्या नियंत्रण के उपायों में नकारात्मक उपाय को अधिक बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया गया और निषेधात्मक उपाय व्यावहारिक कम काल्पनिक अधिक लगती है। वस्तुतः कोई भी समाज जनसँख्या नियंत्रण के लिए नियोजित तरीके से निषेधात्मक उपाय का पालन नहीं कर सकती है।

(v) क्लार्क महोदय माल्थस  का आलोचना करते हुए कहा है कि उन्होंने जनसंख्या के नियंत्रण में गर्भ निरोधकों की भूमिका को नजर अंदाज किया है।

(vi) माल्थस का सिद्धांत मूलतः प० यूरोप के संदर्भ में दिया गया था न कि पूरे विश्व के संदर्भ में।

       यद्यपि माल्थस के विचारों की आलोचाना कई आधारों पर की जाती है, फिर भी इनके दो विचारों की अवहेलना नहीं की जा सकती हैं-

(i) यद्यपि अधिकतर विकासशील देशों मे जनसंख्या वृद्धि ज्यामितीय तरीके से नहीं हो रहा है लेकिन यह भी स्पष्ट हो रहा है कि अंकगणितीय विधि से नहीं हो रहा है लेकिन विकासशील देशों के जनसंख्या वृद्धि की प्रवृति देखते हुए ज्यामीतीय प्रकृति का आभाव होता है।

(ii) नवीन आलोचना में कहा गया है कि जनसंख्या नियंत्रण के साकारात्मक उपाय कम महत्वपूर्ण है। लेकिन विकासशील देशों में जनसंख्या वृद्धि वाले क्षेत्रों में अधिकतर आकाल, महामारी, जातीय एवं प्रजातीय दंगे एवं प्राकृतिक विपदाएँ आती हैं। इससे जनसंख्या नियंत्रण के कार्यों की पुष्टि होती है।

निष्कर्ष:

     अतः स्पष्ट है कि माल्थस का विचार एक ऐतिहासिक अवधारणा है। वर्तमान समय में यह सिद्धांत विकसित एवं साक्षर देशों पर भले ही लागू नहीं होता हो परन्तु विकासशील देशों पर स्पष्ट रूप से लागू होता है।

2. Type of Ecosystem (पारिस्थितिकी तंत्र का प्रकार)

2. Type of Ecosystem

(पारिस्थितिकी तंत्र का प्रकार)


पारिस्थितिकी तंत्र का प्रकार⇒

Type of Ecosystem  

प्रश्न प्रारूप 

1. पारिस्थितिकी तंत्र के विभिन्न प्रकारों का विवरण उनकी प्रमुख विशेषताओं के आधार पर दीजिए।

             पारिस्थितिकी तंत्र का अध्ययन समय और स्थान के सन्दर्भ में किया जाता है। प्रत्येक तन्त्र, समय और स्थान के सन्दर्भ में जैविक व अजैविक घटकों के सकल योग को दर्शाता है। पारिस्थितिकी तन्त्र के विकास की विभिन्न अवस्थाओं को उनकी विशेषताओं के आधार पर चार प्रकारों में विभाजित किया जाता है:-

(A) प्रौढ़ पारिस्थितिकी तंत्र-

       यह पारिस्थितिकी तंत्र अनुकूल भौतिक पर्यावरण में लम्बे समय तक विकसित होता है। इस तन्त्र का जैवभार (Biomass) अधिक होता है। खाद्य श्रृंखला जटिल होकर खाद्य जाल का रूप ले लेती है, जिसमें पेड़-पौधों व जीव-जन्तुओं के साथ अपघटक (Decomposers) जीव भी होते हैं। ऐसे तंत्र में जीवों का जीवन-चक्र लम्बा एवं जटिल होता है। वन पारिस्थितिकी तंत्र इसका सबसे अच्छा उदाहरण है। इसमें उत्पादक जीवों के साथ-साथ सभी श्रेणियों में उपभोक्ता जीव पाए जाते हैं। प्रौढ़ पारिस्थितिकी तंत्र में जैविक विविधता (Bio Diversity) अधिक पाई जाती है।

(B) अपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र-

      इस प्रकार के पारिस्थितिकी तंत्र में जैव-विकास की प्रारम्भिक अवस्था ही पायी जाती है। इसमें खाद्य शृंखला (Food Chain) छोटी एवं रैखिक (Linear) होती है। जैवभार कम तथा जीवों का जीवन-चक्र छोटा होता है। इस तंत्र में जैविक विविधता कम पायी जाती है। और उच्च श्रेणी के उपभोक्ताओं की कमी होती है। दलदली और छोटी घास वाली भूमि के पारिस्थितिकी तंत्रों में ये विशेषताएं पाई जाती हैं।

(C) मिश्रित पारिस्थितिकी तंत्र-

         इस प्रकार के पारिस्थितिकी तंत्र में प्रौढ़ और अपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्रों की विशेषताओं का मिश्रित रूप पाया जाता है। ऐसे पारिस्थितिकी तन्त्र में जैवभार सामान्य होता है। यद्यपि खाद्य श्रृंखला व्यवस्थित होती है, परन्तु खाद्य जाल (Food web) के रूप में परिवर्तित नहीं होती है। मिश्रित पारिस्थितिकी तंत्र का विकास पर्यावरण में परिवर्तन होने के कारण होता है। अपरदन चक्र में पुनर्योवन (Rejuvenation) के कारण भी मिश्रित पारिस्थितिकी तंत्र का विकास होता है। मानवीय क्रियाकलापों के फलस्वरूप वन पारिस्थितिकी तंत्र जब घास पारिस्थितिकी तंत्र बदल जाता है तो उसमें प्रौढ़ और अपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र की विशेषताओं का समावेश हो जाता है।

(D) निष्क्रिय पारिस्थितिकी तंत्र-

       भौतिक पर्यावरण की प्रतिकूलता के कारण जब पारिस्थितिकी तंत्र में जीवन नष्ट हो जाता है तब वह निष्क्रिय (Inert) हो जाता है। निष्क्रिय पारिस्थितिकी तंत्र का विकास ज्वालामुखी विस्फोट, भूकम्प, जलवायु परिवर्तन, हिमकाल के आगमन के कारण या तो अपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र या प्रौढ़ पारिस्थितिकी तंत्र में सम्पूर्ण जीवन नष्ट हो जाने के कारण होता है। मानवकृत स्रोतों द्वारा झील में प्रदूषण होने पर जीवों का विनाश हो जाता है, जिससे तंत्र निष्क्रिय हो जाता है। प्रदूषण समाप्त होने पर तंत्र में पुनः जीवन प्रारम्भ हो जाता है।


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