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12. Sugar Industry of India and Bihar / भारत एवं बिहार का चीनी उद्योग

Sugar Industry of India and Bihar

 भारत एवं बिहार का चीनी उद्योग




Sugar Industry of India and Bihar

परिचय

     भारत का चीनी उद्योग एक प्रमुख कृषि आधारित उद्योग है, जो मुख्यतः गन्ने पर निर्भर करता है। भारत विश्व के प्रमुख चीनी उत्पादक देशों में शामिल है और यह उद्योग ग्रामीण अर्थव्यवस्था, रोजगार सृजन तथा सहायक उद्योगों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। देश में चीनी उद्योग के दो प्रमुख क्षेत्र उत्तर भारत और दक्षिण भारत पाए जाते हैं।

     बिहार में चीनी उद्योग मुख्यतः गंगा के मैदानी क्षेत्र, विशेषकर उत्तर बिहार में विकसित हुआ है। यहाँ की उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी, पर्याप्त जल संसाधन और गन्ने की उपलब्धता इसके विकास के प्रमुख कारण हैं। उचित आधुनिकीकरण से यह उद्योग राज्य की अर्थव्यवस्था को और सशक्त बना सकता है।

भारत में चीनी उद्योग

स्थिति

✍️ भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है।

✍️ पहला स्थान: ब्राज़ील

✍️ भारत में चीनी उद्योग मुख्यतः उत्तर भारत और दक्षिण भारत में विकसित है।

कच्चा माल

✍️ गन्ना

✍️ गन्ना भारी एवं शीघ्र नष्ट होने वाला होता है, इसलिए चीनी मिलें गन्ना उत्पादक क्षेत्रों के पास स्थापित की जाती हैं।

चीनी उद्योग के प्रमुख क्षेत्र

(i) उत्तर भारतीय चीनी क्षेत्र- 

      उत्तर भारत का चीनी क्षेत्र भारत का प्रमुख गन्ना-उत्पादक एवं चीनी-निर्माण क्षेत्र है। इसमें मुख्यतः उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड शामिल हैं। यहाँ की जलोढ़ मिट्टी, उपजाऊ मैदान, पर्याप्त वर्षा तथा नहरों व नलकूपों से सिंचाई की सुविधा गन्ने की खेती के लिए अनुकूल है। रेल-सड़क परिवहन, सस्ती श्रमशक्ति और बड़े उपभोक्ता बाजार के कारण इस क्षेत्र में चीनी उद्योग का तीव्र विकास हुआ है।

विशेषताएँ:

✍️ पुरानी मिलें

✍️ छोटे आकार की मिलें

✍️ कम तापमान के कारण गन्ने में शर्करा कम

(ii) दक्षिण भारतीय चीनी क्षेत्र– 

      दक्षिण भारतीय चीनी क्षेत्र भारत का एक प्रमुख चीनी उत्पादन क्षेत्र है। इसमें मुख्यतः महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना शामिल हैं। यहाँ उष्णकटिबंधीय जलवायु, पर्याप्त तापमान, लंबी फसल अवधि और सिंचाई सुविधाएँ उपलब्ध हैं, जो गन्ने की खेती के लिए अनुकूल हैं। कृष्णा, गोदावरी और कावेरी नदियों से सिंचाई होती है। आधुनिक तकनीक, सहकारी मिलें और अधिक उत्पादक किस्में इस क्षेत्र को चीनी उद्योग में अग्रणी बनाती हैं।

विशेषताएँ:

✍️ नई और आधुनिक मिलें

✍️ बड़े आकार की मिलें

✍️ अधिक तापमान → गन्ने में शर्करा अधिक

✍️ उत्पादकता अधिक

भारत में चीनी उद्योग के प्रमुख राज्य

1. उत्तर प्रदेश (प्रथम स्थान)

2. महाराष्ट्र

3. कर्नाटक

4. तमिलनाडु

5. बिहार

भारत में चीनी उद्योग की समस्याएँ

✍️ गन्ने की अनियमित आपूर्ति

✍️ पुरानी तकनीक

✍️ उच्च उत्पादन लागत

✍️ किसानों को भुगतान में देरी

✍️ जल संकट (विशेषकर महाराष्ट्र)

भारत में चीनी उद्योग का महत्व:

      भारत में चीनी उद्योग का विशेष महत्व है। यह कृषि-आधारित उद्योग गन्ना किसानों को नियमित आय और रोजगार प्रदान करता है। ग्रामीण क्षेत्रों में औद्योगीकरण को बढ़ावा देकर यह आर्थिक विकास में सहायक है। इस उद्योग से चीनी के साथ-साथ गुड़, शीरा, एथेनॉल और विद्युत उत्पादन भी होता है। यह खाद्य सुरक्षा, निर्यात आय तथा परिवहन, व्यापार और सहायक उद्योगों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

बिहार में चीनी उद्योग

परिचय

      बिहार में चीनी उद्योग कृषि-आधारित उद्योगों में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यहाँ की उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी, पर्याप्त वर्षा और गंगा व उसकी सहायक नदियों के मैदान गन्ने की खेती के लिए अनुकूल हैं। प्रमुख चीनी मिलें पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सीवान, सारण और मुजफ्फरपुर जिलों में स्थित हैं। स्वतंत्रता के बाद कई सरकारी और सहकारी चीनी मिलों की स्थापना हुई, जिससे ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा मिला। हालाँकि, कच्चे माल की कमी, पुरानी तकनीक, प्रबंधन की समस्याएँ और वित्तीय संकट के कारण कई मिलें बंद हो गईं। वर्तमान में आधुनिकीकरण और निजी निवेश से उद्योग को पुनर्जीवित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

✍️ बिहार में किसी समय पर करीब 130 चीनी मिलें थीं, लेकिन उनमें से अब लगभग 9 से कम ही सक्रिय मिलें हैं जो गन्ना क्रशिंग/उत्पादन कर रही हैं।

✍️ वर्तमान सरकार ने बंद मिलों को पुनर्जीवित करने और 25 मिलों की कुल गतिविधि बढ़ाने की योजना बनाई है; इस योजना के अंतर्गत कई मिलों को चालू किया जाना है, पर वे अभी तक पूर्ण रूप से चालू नहीं हुईं।

स्थिति

✍️ बिहार उत्तर भारत का प्रमुख चीनी उत्पादक राज्य है।

✍️ गंगा के मैदानी क्षेत्र में गन्ने की अच्छी खेती होती है।

✍️ स्वतंत्रता के बाद बिहार में चीनी उद्योग का अच्छा विकास हुआ।

✍️ गन्ना उत्पादक क्षेत्र: पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, गोपालगंज, सारण, मुज़फ्फरपुर

बिहार की प्रमुख चीनी मिलें

✍️ बगहा, लौरिया, मझौलिया, नरकटियागंज और रामनगर चीनी मिल- प. चंपारण

✍️ हसनपुर चीनी मिल- समस्तीपुर

✍️ हरिनगर, सिधवलिया चीनी मिल- गोपालगंज

बिहार में चीनी उद्योग के विकास के कारण:

✍️ उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी

✍️ पर्याप्त जल संसाधन

✍️ सस्ती श्रम शक्ति

✍️ गन्ने की स्थानीय उपलब्धता

✍️ बाजार की नजदीकी

बिहार में चीनी उद्योग की समस्याएँ

✍️ कई मिलों का बंद होना

✍️ पूँजी की कमी

✍️ पुरानी मशीनें

✍️ प्रबंधन की कमजोरी

✍️ किसानों को समय पर भुगतान नहीं

बिहार में चीनी उद्योग का महत्व:

✍️ ग्रामीण रोजगार का साधन

✍️ किसानों की आय में वृद्धि

✍️ सहायक उद्योगों का विकास

✍️ राज्य की अर्थव्यवस्था में योगदान

भारत एवं बिहार के चीनी उद्योग की तुलना:

बिंदु भारत बिहार
स्तर राष्ट्रीय राज्यीय
प्रमुख राज्य यूपी, महाराष्ट्र पश्चिम चंपारण आदि
तकनीक मिश्रित (नई+पुरानी) अधिकांशतः पुरानी
उत्पादन बहुत अधिक मध्यम
समस्याएँ लागत, जल बंद मिलें, पूँजी

निष्कर्ष:

       भारत का चीनी उद्योग देश का एक प्रमुख कृषि-आधारित उद्योग है, जो गन्ना उत्पादन पर आधारित होने के कारण ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाता है। यह उद्योग रोजगार सृजन, किसानों की आय वृद्धि तथा सह-उत्पादों जैसे शीरा, बगास और इथेनॉल के माध्यम से औद्योगिक विकास में योगदान देता है। बिहार में अनुकूल जलवायु, उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी और गंगा के मैदानी क्षेत्र के कारण चीनी उद्योग के विकास की पर्याप्त संभावनाएँ हैं। हालाँकि, पूँजी की कमी, पुरानी तकनीक और बंद पड़ी मिलें प्रमुख बाधाएँ हैं। यदि आधुनिकीकरण, बेहतर प्रबंधन और सरकारी सहयोग मिले, तो बिहार का चीनी उद्योग पुनः विकास की नई ऊँचाइयों को प्राप्त कर सकता है।

2. Pie Diagram (वृत्तारेख)

Pie Diagram

(वृत्तारेख)



Pie Diagram (वृत्तारेख):

         पाई आरेख एक वृत्ताकार सांख्यिकीय आरेख है, जिसमें किसी कुल मान (100%) को विभिन्न भागों/वर्गों में बाँटकर प्रदर्शित किया जाता है। प्रत्येक भाग को सेक्टर (Sector) कहा जाता है और उसका आकार संबंधित आँकड़े के प्रतिशत अनुपात के अनुसार होता है।

     जिस प्रकार वर्ग या आयत जैसे आरेखों में कुल क्षेत्रफल को दिए गए आँकड़ों के अनुपात में भागों में बाँटा जाता है, उसी तरह चक्र या वृत्तारेख में कुल संख्या को वृत्त के क्षेत्रफल द्वारा दर्शाया जाता है। इसमें विभिन्न श्रेणियों या घटकों को उनके मान के अनुपात में वृत्त के अलग-अलग भागों में विभाजित किया जाता है। इसी कारण इसे कभी-कभी विभाजित वृत्त आरेख भी कहा जाता है।

    वृत्तारेख की विशेषता यह है कि इसमें पूरे वृत्त का क्षेत्रफल कुल संख्या को दर्शाता है, जबकि उसके विभिन्न खंड अलग-अलग घटकों के मान को प्रकट करते हैं। इस प्रकार एक ही वृत्त में आँकड़ों का तुलनात्मक और स्पष्ट प्रदर्शन किया जा सकता है।

Pie Diagram

🔹 पाई आरेख की विशेषताएँ

✍️ सम्पूर्ण वृत्त = 360° = 100%

✍️ प्रत्येक सेक्टर का कोण =

(संबंधित मान / कुल मान) × 360°

✍️ तुलनात्मक अध्ययन के लिए अत्यंत उपयोगी

✍️ सरल, आकर्षक और दृश्यात्मक प्रस्तुति

🔹 पाई आरेख बनाने की विधि

✍️ सभी वर्गों के मान जोड़कर कुल मान ज्ञात करें।

✍️ प्रत्येक वर्ग का प्रतिशत निकालें।

✍️ प्रतिशत को 360° से गुणा कर कोण निर्धारित करें।

✍️ वृत्त बनाकर केंद्र से विभिन्न सेक्टर बनाएँ।

✍️ प्रत्येक सेक्टर को नाम / प्रतिशत के साथ दर्शाएँ।

🔹 उपयोग

✍️ भूगोल (जनसंख्या, भूमि उपयोग)

✍️ अर्थशास्त्र (आय–व्यय संरचना)

✍️ समाजशास्त्र, शिक्षा, शोध रिपोर्ट

🔹 सीमाएँ

✍️ बहुत अधिक वर्ग होने पर आरेख जटिल हो जाता है

✍️ सूक्ष्म अंतर स्पष्ट नहीं दिखते

उदाहरण 1. निम्नलिखित आँकड़ों को वृत्तारेख द्वारा प्रदर्शित कीजिए। भारत के प्रमुख निर्यात, 2001-02 (करोड़ रुपये में)/ Represent the following data using a Pie Diagram. Major Exports of India, 2001-02 (in Crore Rupees)

श्रेणी 

Category

निर्यात (करोड रुपये में)

Exports (in Crore Rupees)

कृषि/ Agriculture 29312
अयस्क और खनिज/Ores and Minerals 4736
विनिर्मित वस्तुएँ/ Manufactured Goods 161161
ईंधन और स्नेहक/Fuels and Lubricants 10411
अन्य/Others 23398
योग/Total 209018

हल: 

श्रेणी निर्यात (करोड रुपये में) कोण (अंश)
कृषि 29312  29312 x 360/209018 = 50.50०
अयस्क और खनिज 4736 4736 x 360/209018 = 8.15०
विनिर्मित वस्तुएँ 161161 161161 x 360/209018 = 277.57०
ईंधन और स्नेहक 10411 10411 x 360/209018 = 17.94०
अन्य 23398 3398 x 360/209018 = 5.85०
योग 209018 209018 x 360/209018 = 360०

रचना विधि-

        दिए गए आँकड़ों का कुल योग ज्ञात करें।

✍️ प्रत्येक वर्ग/शीर्ष के लिए केंद्रीय कोण निकालें-

✍️ केंद्रीय कोण =

प्रत्येक सेक्टर का कोण =

(संबंधित मान / कुल मान) × 360°

✍️ अब कागज पर कम्पास की सहायता से एक वृत्त खींचें।

✍️ वृत्त के केंद्र से प्रोट्रैक्टर की मदद से गणना किए गए कोणों के अनुसार क्रमशः रेखाएँ खींचें।

✍️ प्रत्येक खंड को अलग-अलग रंग/छायांकन देकर स्पष्ट करें।

✍️ हर खंड पर शीर्षक/मान लिखें और एक संकेतक (Legend) बनाएं।

✍️ अंत में उपयुक्त शीर्षक दें, जैसे- भारत का निर्यात (2001-02)।

PIE DIAGRAM

SHOWING

MAJOR EXPORTS OF INDIA

2001-02 (₹ Crore)

8. Physical Geography vs Human Geography/भौतिक भूगोल बनाम मानव भूगोल

Physical Geography vs Human Geography

भौतिक भूगोल बनाम मानव भूगोल



भौतिक भूगोल एवं मानव भूगोल

(Physical Geography vs Human Geography)

      20वीं सदी से पूर्व भूगोल का समस्त अध्ययन मुख्यतः भौतिक भूगोल तक ही सीमित था। इसे सामान्य या क्रमबद्ध भूगोल भी कहा जाता था। उस समय मानव से संबंधित विषयों का अध्ययन भी भौतिक भूगोल के अंतर्गत ही किया जाता था। 19वीं शताब्दी के मध्य में अलेक्जेंडर वॉन हम्बोल्ट ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक Cosmos (1845) में प्रकृति की एकता पर बल दिया और यह स्पष्ट किया कि प्राकृतिक तत्व परस्पर जुड़े हुए हैं। इसके बाद कार्ल रिटर ने Erdkunde (1859) में मानव को भौगोलिक अध्ययन के केंद्र में रखते हुए मानव-केंद्रित दृष्टिकोण को विकसित किया।

        हम्बोल्ट और रिटर के विचारों के प्रभाव से भूगोल में सौंदर्यवादी एवं समन्वयात्मक दृष्टिकोण का विकास हुआ। वे प्रकृति को जड़ तत्व न मानकर सजीव और सृजनशील शक्ति के रूप में देखते थे। 1887 में मैकिंडर ने अपने व्याख्यान Scope and Methods of Geography में यह स्पष्ट किया कि भूगोल में प्राकृतिक और सामाजिक तथ्यों को अलग-अलग नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद 20वीं सदी के प्रारंभ में भूगोल स्पष्ट रूप से दो शाखाओं- भौतिक भूगोल और मानव भूगोल में विभाजित हो गया। विश्वविद्यालयों में दोनों के अलग-अलग विभाग स्थापित होने लगे, जिससे यह द्वंद्व और गहरा हो गया।

      इस काल में कुछ भूगोलवेत्ताओं जैसे पेंक, डेविस आदि ने भौतिक भूगोल को ही वास्तविक भूगोल माना और मानव तत्वों की उपेक्षा की। इसके विपरीत फ्रेडरिक रैट्जेल ने मानव को भौगोलिक अध्ययन का केंद्र मानते हुए Anthropogeographie में यह सिद्ध किया कि मानव की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि को प्राकृतिक वातावरण से अलग नहीं किया जा सकता। रैट्जेल के अमेरिकी शिष्य एलन चर्चिल सेम्पल ने History and Its Geographical Conditions (1903) के माध्यम से मानव-केंद्रित भूगोल को और मजबूत किया।

   फ्रांस में विडाल-डी-ला-ब्लांश ने मानव भूगोल के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने यह माना कि प्राकृतिक पर्यावरण मानव जीवन की संभावनाएँ प्रदान करता है, परंतु मानव अपनी संस्कृति और तकनीक के माध्यम से उनका चयन करता है। उनके शिष्य जीन ब्रून्स और अन्य विद्वानों ने भी मानव और प्रकृति के पारस्परिक संबंधों को भूगोल का मूल विषय माना। इसी क्रम में हार्टशोर्न (1959) ने कहा कि यदि भूगोल को भौतिक और मानव तथ्यों में विभाजित कर दिया गया, तो भूगोल एक समग्र विज्ञान नहीं रह पाएगा।

निष्कर्ष:

     अंततः 20वीं सदी के मध्य और उत्तरार्द्ध में यह विचार प्रबल हुआ कि भौतिक भूगोल और मानव भूगोल एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि परस्पर पूरक हैं। दोनों मिलकर ही भूगोल को एक संपूर्ण और एकीकृत विज्ञान बनाते हैं। आधुनिक भूगोल में मानव-पर्यावरण अंतःक्रिया, क्षेत्रीय अध्ययन और समन्वयात्मक दृष्टिकोण को विशेष महत्व दिया गया है। इस प्रकार भौतिक बनाम मानव भूगोल का विवाद धीरे-धीरे समाप्त होकर भौगोलिक एकता और समन्वय की दिशा में विकसित हुआ।




 उत्तर लिखने का दूसरा तरीका




परिचय

         20वीं सदी के प्रारंभ में ही भूगोल स्पष्टतया दो-भौतिक एवं मानव-भागों में विभक्त हो गया। भूगोल की इन दोनों ही शाखाओं के मध्य दूरी इतनी बढ़ गयी कि विश्व भर के विश्वविद्यालयों में भौतिक एवं मानव भूगोल के अलग-अलग विभागाध्यक्षों की भी नियुक्तियाँ होने लगी। अर्थात् भौतिक बनाम मानव भूगोल के द्वन्द चरम पर पहुंच गये।

     इस दौर में एक ओर पेंशल, डेविस तथा पेंक सदृश भूगोलवेत्ताओं ने वैज्ञानिक या व्यवस्थित या भौतिक भूगोल को ही भूगोल माना वहीं रेटजेल, हैकल, बकल एवं कुमारी सैंपुल सदृश विद्वानों ने मानव भूगोल को भौगोलिक अध्ययन का आधार घोषित कर दिया।

      इसी समय ब्लॉश, ब्रून्स तथा हेटनर जैसे विद्वानों ने भौगोलिक अध्ययन में प्रकृति एवं मानव दोनों ही तथ्यों को अविभाज्य करार कर दिया।

     इन्हीं द्वंदों के मध्य मेकिन्डर, कार्ल शॉवर एवं रिचथीफेन जैसे विद्वानों ने भौगोलिक एकता को अक्षुण्ण रखने में योगदान किया।

      संक्षेप में भूगोल को सामान्यतः दो भागों में बाँटा जाता है-

1. भौतिक भूगोल

2. मानव भूगोल

     इन दोनों के बीच लंबे समय से द्वैत (Dualism) का विवाद चला आ रहा है, लेकिन व्यवहार में इन्हें पूरी तरह अलग नहीं किया जा सकता।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

✍️यूनानी विद्वानों ने सबसे पहले भूगोल को दो भागों में बाँटा।

✍️हेकाटियस ने भौतिक भूगोल को अधिक महत्व।

✍️हेरोडोटस और स्ट्रैबो ने मानव दृष्टिकोण पर जोर।

     इसी कारण भूगोल में भौतिक और मानव पक्षों के बीच अंतर की बहस शुरू हुई।

भौतिक भूगोल (Physical Geography)

अध्ययन के विषय:

⇒ जलवायु

⇒ मौसम

⇒ जलराशियाँ एवं प्रवाह

⇒ समुद्र विज्ञान

⇒ भू-आकृतियाँ

⇒ भूगर्भ विज्ञान

प्रमुख विशेषताएँ :

✍️यह प्राकृतिक विज्ञान (Natural Sciences) से जुड़ा होता है।

✍️अध्ययन मापन योग्य होता है।

✍️परिणाम अधिक सटीक, निश्चित और वैज्ञानिक होते हैं।

✍️प्रयोग और गणना संभव होती है।

मानव भूगोल (Human Geography)

अध्ययन के विषय:

⇒ सामाजिक घटनाएँ

⇒ सांस्कृतिक गतिविधियाँ

⇒ मानव क्रियाएँ और उनका पर्यावरण से संबंध

प्रमुख विशेषताएँ:

✍️ये घटनाएँ समय और स्थान के अनुसार बदलती रहती हैं

✍️इन्हें पूरी तरह मापा नहीं जा सकता

✍️परिणाम अनिश्चित और संभावनात्मक होते हैं

✍️प्राकृतिक विज्ञान की विधियाँ पूरी तरह लागू नहीं होतीं

अध्ययन की पद्धति में अंतर

भौतिक भूगोल मानव भूगोल 
प्राकृतिक विज्ञान आधारित सामाजिक विज्ञान आधारित
मापन योग्य मापन कठिन
अधिक निश्चित परिणाम अनिश्चित परिणाम
स्थिर नियम परिवर्तनशील नियम

द्वैतता (Dualism) का कारण

✍️कुछ विद्वान दोनों भूगोलों को अलग-अलग विषय मानते हैं।

✍️यहाँ तक कि उनकी अध्ययन पद्धतियों को भी अलग माना जाता है।

✍️इसी सोच से भौतिक–मानव द्वैत की धारणा बनी।

निष्कर्ष

✍️भौतिक और मानव भूगोल को पूरी तरह अलग करना व्यावहारिक नहीं है।

✍️दोनों एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

✍️आधुनिक भूगोल में समन्वय दृष्टिकोण (Integrated Approach) को अधिक महत्व दिया जाता है।



YOU TUBE LINK- https://youtu.be/2wHXXc-nQoQ

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2. Quartile Deviation (चतुर्थक विचलन)

Quartile Deviation

(चतुर्थक विचलन)



परिचय

     चतुर्थक विचलन (Quartile Deviation) अपसरण का एक महत्वपूर्ण माप है, जो किसी वितरण के मध्य 50% आँकड़ों के फैलाव को दर्शाता है।

     Quartile Deviation is an important measure of dispersion that shows the spread of the middle 50% of observations in a distribution.

✍️ इसे Semi-Interquartile Range भी कहा जाता है।

✍️ It is also known as the semi-interquartile range.

Definition

   Quartile Deviation is half of the difference between the third quartile (Q₃) and the first quartile (Q₁). अर्थात चतुर्थक विचलन, तृतीय चतुर्थक (Q₃) और प्रथम चतुर्थक (Q₁) के अंतर का आधा होता है।

नोट: 

✍️ जिस प्रकार माध्यिका समूह को दो भागों में विभाजित करती है। ठीक उसी प्रकार Quartile Deviation समूह को चार भागों में विभाजित करता है।

✍️ माध्यिका द्वारा बाँटे गये भागों को Quartile दो-दो बराबर भागों में विभाजित करता है।

✍️ प्रथम चतुर्थक माध्यिका से छोटा होता है, यह लघु चतुर्थक कहलाता है।

✍️ दूसरा चतुर्थक माध्यिका होता है।

✍️ तृतीय चतुर्थक माध्यिका से बड़ा होता है, यह दीर्घ चतुर्थक कहलाता है। 

✍️ लघु चतुर्थक को Q1 से तथा दीर्घ चतुर्थक को  Q3 से प्रदर्शित किया जाता है।

✍️ For individual and Discreate series-

Q₁ = (n+1/4)th term

Q3 = 3(n+1/4)th term

Quartile Deviation

where, 

Q1 = First Quartile (Lower Quartile)

Q2 = Second Quartile (Median)

Q3 = Third Quartile (Upper Quartile)

Example: 2, 7, 9, 14, 1 का मध्यिका निकालें।

1, 2, 7, 9, 14

नोट:  Median किसी भी सीरीज को दो बराबर भागों में बांटता है जबकि QD. किसी भी सीरीज को चार बराबर भागों में बांटता है।

✍️ यहाँ ध्यान देना है कि दो भागों में सीरीज को बांटने के लिए मात्र एक Value अर्थात Median की जरुरत होती है, जबकि इसी सीरीज को चार भागों में बाँटने के लिए हमें तीन Value अर्थात Q1, Q2, Q3 की जरुरत होती है।

✍️ Q1 की बात की जाये तो 25% Observation Q1 के पहले जबकि 75% Observation Q1 के बाद आते है।

✍️ Q2 की बात की जाये तो 50% Observation Q2 के पहले जबकि 50% Observation Q2 के बाद अर्थात बराबर बराबर Observation आता है। इस प्रकार Q2 ही Median है।

✍️ Q3 की बात की जाये तो 75% Observation Q3 के पहले जबकि 25% Observation Q3 के बाद आता है।

Quartile Deviation

विशेषताएँ / Merits

✍️ अत्यधिक मानों से कम प्रभावित / Less affected by extreme values

✍️ सरल एवं व्यावहारिक / Simple and easy to understand

✍️ असमान वितरण के लिए उपयुक्त / Suitable for skewed distributions

सीमाएँ / Demerits

✍️ केवल मध्य 50% आँकड़ों पर आधारित /Based only on middle 50% observations

✍️ बीजीय विश्लेषण में अनुपयुक्त / Not suitable for algebraic treatment

महत्व / Importance

✍️ आय एवं वेतन अध्ययन / Income and wage analysis

✍️ सामाजिक-आर्थिक अनुसंधान / Socio-economic research

✍️ जनसंख्या एवं भूगोल अध्ययन / Population & Geography studies

निष्कर्ष:

      इस प्रकार चतुर्थक विचलन एक सरल, विश्वसनीय एवं व्यावहारिक अपसरण माप है, जो असमान वितरण में अत्यंत उपयोगी है। / Quartile Deviation is a simple, reliable, and practical measure of dispersion, especially useful in skewed distributions.

Minor Course or MIC-3 (Economic Geography) / Questions Paper 2025, PPU Patna

Minor Course or MIC-3

Economic Geography (Theory)

Questions Paper 2025, PPU, Patna




Minor Course or MIC-3

UG (Regular) (Sem.-III)

Examination, 2025

(Session: 2024-28)

(MIC-3: MINOR CORE COURSE)

GEOGRAPHY

Paper Code: 420805

(Economic Geography)

Time: Three Hours]  [Maximum Marks: 70

Note: Candidates are required to give their answers in their own words as far as practicable. The figures in the margin indicate full marks. Answer from all sections as directed.

परीक्षार्थी यथासंभव अपने शब्दों में ही उत्तर दें। उपांत के अंक पूर्णांक के द्योतक हैं। निर्देशानुसार सभी खण्डों से उत्तर दीजिए।

Section-A / खण्ड-अ

(Objective Type Questions)

(वस्तुनिष्ठ प्रश्न)

Note: Choose the correct option from each question. [10×2=20]

प्रत्येक प्रश्न से सही विकल्प का चयन कीजिए।

(i) Which one of the following branches of Geography is not part of Economic Geography?

(a) Agriculture Geography

(b) Industrial Geography

(c) Transport Geography

(d) Physical Geography

भूगोल की निम्नलिखित शाखाओं में से कौन-सी एक, आर्थिक भूगोल का हिस्सा नहीं है?

(a) कृषि भूगोल

(b) औद्योगिक भूगोल

(c) परिवहन भूगोल

(d) भौतिक भूगोल

उत्तर- (d) भौतिक भूगोल

स्पष्टीकरण: कृषि, औद्योगिक और परिवहन भूगोल आर्थिक गतिविधियों से संबंधित हैं, जबकि भौतिक भूगोल पृथ्वी की प्राकृतिक विशेषताओं का अध्ययन है।

(ii) Which one of the following region is famous for the cotton textile industry in the world?

(a) Osaka Region

(b) Shansi Region

(c) Ural Region

(d) South Yorkshire Region

निम्नलिखित में से कौन-सा क्षेत्र दुनिया में सूती वस्त्र उद्योग के लिए प्रसिद्ध है?

(a) ओसाका प्रदेश

(b) शान्सी प्रदेश

(c) यूराल प्रदेश

(d) दक्षिण यार्कशायर प्रदेश

उत्तर- (a) ओसाका प्रदेश

स्पष्टीकरण: जापान के ओसाका को इसकी सूती वस्त्र संपन्नता के कारण ‘जापान का मैनचेस्टर’ भी कहा जाता है।

(iii) Which one of the following occupations is included in the tertiary activities?

(a) Transport

(b) Agriculture

(c) Fisheries

(d) Manufacturing

निम्नलिखित में से कौन-सा व्यवसाय तृतीयक गतिविधियों के अंतर्गत शामिल है?

(a) परिवहन

(b) कृषि

(c) मत्स्यपालन

(d) विनिर्माण

उत्तर- (a) परिवहन

स्पष्टीकरण: कृषि और मत्स्यपालन प्राथमिक हैं, विनिर्माण द्वितीयक है, जबकि परिवहन एक सेवा क्षेत्र (Service Sector) है जो तृतीयक गतिविधि में आता है।

(iv) Where is the headquarters of the World Trade Organization (WTO) located?

(a) Paris

(b) London

(c) Geneva

(d) Rome

विश्व व्यापार संगठन का मुख्यालय कहाँ स्थित है?

(a) पेरिस

(b) लंदन

(c) जिनेवा

(d) रोम

उत्तर- (c) जिनेवा

स्पष्टीकरण: WTO का मुख्यालय स्विट्जरलैंड के जिनेवा शहर में स्थित है।

(v) Which is the organization of oil exporting countries?

(a) SAARC

(b) ASEAN

(c) OPEC

(d) European union

तेल निर्यातक देशों का संगठन कौन-सा है?

(a) सार्क

(b) आसियान

(c) ओपेक

(d) यूरोपीय संघ

उत्तर- (c) ओपेक

स्पष्टीकरण: OPEC का पूरा नाम ‘Organization of the Petroleum Exporting Countries’ है।

(vi) Which activity is the iron and steel industry?

(a) Primary Activity

(b) Secondary Activity

(c) Tertiary Activity

(d) Quaternary Activity

लोहा और इस्पात उद्योग कौन-सी गतिविधि है?

(a) प्राथमिक गतिविधि

(b) द्वितीयक गतिविधि

(c) तृतीयक गतिविधि

(d) चतुर्थक गतिविधि

उत्तर- (b) द्वितीयक गतिविधि

स्पष्टीकरण: कच्चे माल को मूल्यवान उत्पादों में बदलना (विनिर्माण) द्वितीयक गतिविधि कहलाती है।

(vii) An area with different laws for trade and business from the rest of the country is called:

(a) Exclusive Economic Zone

(b) Special Economic Zone

(c) Major Trade Zone

(d) Internal Trade Zone

देश के बाकी हिस्सों से व्यापार और व्यवसाय के लिए अलग कानून वाले क्षेत्र को कहा जाता हैः

(a) अनन्य आर्थिक क्षेत्र

(b) विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र

(c) प्रमुख व्यापार क्षेत्र

(d) आंतरिक व्यापार क्षेत्र

उत्तर- (b) विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र

स्पष्टीकरण: SEZ का मुख्य उद्देश्य निर्यात को बढ़ावा देने के लिए व्यापारिक नियमों को उदार बनाना है।

(viii) In which region of the world intensive subsistence farming is practiced?

(a) Monsoon Asian Region

(b) Central Asian Region

(c) South Africa Region

(d) Mediterranean Sea Region

विश्व के किस भाग में गहन निर्वाह खेती की जाती है?

(a) मानसून एशियाई क्षेत्र

(b) मध्य एशियाई क्षेत्र

(c) दक्षिण अफ्रीका क्षेत्र

(d) भूमध्य सागर क्षेत्र

उत्तर- (a) मानसून एशियाई क्षेत्र

स्पष्टीकरण: घनी आबादी वाले मानसून एशियाई क्षेत्रों (जैसे भारत, चीन) में कम भूमि पर अधिक उत्पादन के लिए यह खेती की जाती है।

(ix) Which one of the following is not a characteristic of commercial grain farming?

(a) Excessive use of machines in agriculture

(b) Wheat is the major crop

(c) Semi-Arid climatic region’s agriculture

(d) Labour Intensive agriculture

निम्नलिखित में से कौन-सी वाणिज्यिक अनाज खेती की विशेषता नहीं है?

(a) कृषि में मशीनों का अत्यधिक उपयोग

(b) गेहूँ प्रमुख फसल है

(c) अर्थ-शुष्क जलवायु क्षेत्र की कृषि

(d) श्रम प्रधान कृषि

उत्तर- (d) श्रम प्रधान कृषि

स्पष्टीकरण: वाणिज्यिक अनाज खेती मशीनों पर आधारित होती है, न कि भारी शारीरिक श्रम (Labour Intensive) पर।

(x) Which one of the following is a major iron and steel industry region of the USA?

(a) Ruhr Region

(b) South Wales Region

(c) Pittsburgh Region

(d) Saar Region

निम्नलिखित में से कौन-सा एक संयुक्त राज्य अमेरिका का प्रमुख लोहा और इस्पात उद्योग क्षेत्र है?

(a) रूर प्रदेश

(b) दक्षिण वेल्स प्रदेश

(c) पिट्सबर्ग प्रदेश

(d) सार प्रदेश

उत्तर- (c) पिट्सबर्ग प्रदेश

स्पष्टीकरण: पिट्सबर्ग को दुनिया की ‘लौह नगरी’ के रूप में जाना जाता है, जबकि रूर और सार जर्मनी में स्थित हैं।

Section-B / खण्ड-ब

(Short Answer Type Questions)

(लघु उत्तरीय प्रश्न)

Note: Answer any four questions from the following. [4×5=20]

निम्नलिखित में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

2. Define the Economic Geography.

आर्थिक भूगोल को परिभाषित कीजिए।

3. What do you understand by Primary Activities? Provide examples.

प्राथमिक गतिविधियों से आप क्या समझते हैं? उदाहरण दीजिए।

4. Write down about the major characteristics of commercial grain farming.

वाणिज्यिक अन्न कृषि की प्रमुख विशेषताओं को लिखिए।

5. Briefly discuss the major centres of the cotton textile industry of India.

भारत के सूती वस्त्र उद्योग के प्रमुख केन्द्रों पर संक्षेप में चर्चा कीजिए।

6. Which are the major factors affecting the Iron and steel industry?

लौह एवं इस्पात उद्योग को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक कौन-से हैं?

7. What do you understand by the Special Economic Zone? Name any four SEZ.

विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) से आप क्या समझते हैं? किन्हीं चार विशेष आर्थिक क्षेत्रों के नाम बताइए।

Section-C / खण्ड-स

(दीर्घ उत्तरीय प्रश्न)

(Long Answer Type Questions)

Note: Answer any three questions of the following. [3×10=30]

निम्नलिखित में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

8. Discuss the secondary activities in detail with examples.

द्वितीयक गतिविधियों पर उदाहरण सहित विस्तार से चर्चा कीजिए।

9. Explain the world distribution of the Iron and steel industry.

लौह एवं इस्पात उद्योग के विश्व वितरण की व्याख्या कीजिए।

10. Explain the role of the World Trade Organization (WTO) in international trade.

अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में विश्व व्यापार संगठन (WTO) की भूमिका की व्याख्या कीजिए।

11. Discuss in detail about the major features and regions of intensive subsistence agriculture system in the world.

विश्व में गहन निर्वाह कृषि प्रणाली की प्रमुख विशेषताओं और क्षेत्रों के बारे में विस्तार से चर्चा कीजिए।

12. Explain the factors affecting the localization of the cotton textile industry.

सूती वस्त्र उद्योग के स्थानीयकरण को प्रभावित करने वाले कारकों की व्याख्या कीजिए।

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