Archives May 2024

4. Multidisciplinary Course or MDC-2 / Solved Questions Paper 2024

Multidisciplinary Course or MDC-2 For Science and Commerce

Climatology and Oceanography (Theory)

Solved Questions Paper 2024



(Patliputra University Patna)

Multidisciplinary Course or MDC

UG (Regular) (Sem.-II) Examination, 2024

(Session: 2023-27)

(MDC-2: Multidisciplinary Course)

GEOGRAPHY

(Climatology and Oceanography)

Time: Three Hours]

[Maximum Marks: 70

Note: Candidates are required to give their answers in their own words as far as practicable. The figure in the marginindicate full marks. Answer from all sections as directed.

परीक्षार्थी यथासम्भव अपने शब्दों में ही उत्तर दें। उपांत के अंक पूर्णांक के द्योतक हैं। निर्देशानुसार सभी खण्डों से उत्तर दीजिए।

Section-A / खण्ड-अ

(Multiple Choice Questions)

(बहुविकल्पीय प्रश्न)

Note: Choose the correct option from each question. [10×2=20]

प्रत्येक प्रश्न से सही विकल्प का चयन कीजिए।

1. (i) The uppermost layer of atmosphare is:

(a) Troposphere

(b) Stratosphere

(c) Ionosphere

(d) Exosphere

वायुमण्डल की सबसे ऊपरी परत है-:

(a) क्षोभमण्डल

(b) समतापमण्डल

(c) आयनमण्डल

(d) बाह्ममण्डल

उत्तर- (d) बाह्ममण्डल

(ii) Which one of the following gases constitute the major portion of the atmosphare.

(a). Oxygen

(b) Argon

(c) Nitrogen

(d) Carbon dioxide

निम्नलिखित में से कौन-सी गैस वायुमण्डल में सबसे अधिक मात्रा में मौजूद है?

(a) ऑक्सीजन

(b) आर्गन

(c) नाइट्रोजन

(d) कार्बन डाइऑक्साइड

उत्तर- (c) नाइट्रोजन

(iii) Ozone layer is found in which layer of atmosphare?

(a) Troposphere

(b) Stratosphere

(Ionosphere

(d) Exosphere

ओजोन परत, वायुमण्डल की किस परत में पायी जाती है?

(a) क्षोभमण्डल

(b) समतापमण्डल

(c) आयनमण्डल

(d) बाह्ममण्डल

उत्तर- (b) समतापमण्डल

(iv) Which gas from the following gases protect us from Sun’s harmful ultraviolet rays?

(a) Nitrogen

(b) Ozone

(c) Oxygen

(d) Carbon dioxide

निम्नलिखित में से कौन-सी गैस हमें सूर्य की पराबैंगनी विकिरण से बचाती है?

(a) नाइट्रोजन

(b) ओजोन

(c) ऑक्सीजन

(d) कार्बन डाइऑक्साइड

उत्तर- (b) ओजोन

(v) The monsoon rainfall in India in which type of rainfall?

(a) Convectional rainfall

(b) Orographic rainfall

(c) Cyclonic rainfall

(d) None of the above

भारत की मानसून वर्षा, इनमें से किस तरह की वर्षा है?

(a) संवहनीय वर्षा

(b) पर्वतीय वर्षा

(c) चक्रवातीय वर्षा

(d) उपरोक्त में से कोई नहीं

उत्तर- (b) पर्वतीय वर्षा

(vi) What happens when on move towards height from the surface on Earth?

(a) Air pressure increases

(b) Air pressure decreases

(c) Air pressure remain same

(d) None of the above

पृथ्वी पर धरातल से ऊँचाई की तरफ बढ़ने से क्या होता है?

(a) वायुदाब बढ़ता है

(b) वायुदाब घटता है

(c) वायुदाब सामान्य रहता है

(d) उपरोक्त में से कोई नहीं

उत्तर- (b) वायुदाब घटता है

(vii) An imaginary line joining places of equal air pressure at sea level is called:

(a) Isobar

(b) Isohyet

(c) Isohaline

(d) None of the above

सागर तल पर समान वायुदाब वाले स्थानों को दर्शाने वाली काल्पनिक रेखा को कहते हैः

(a) समदाब रेखा

(b) समवृष्टि रेखा

(c) समलवण रेखा

(d) उपरोक्त में से कोई नहीं

उत्तर- (a) समदाब रेखा

(viii) The part continent which submerged into water is called:

(a) Continental slope

(b) Continental shelf

(c) Deep sea plain

(d) Ocean deep

महाद्वीप का वह भाग जो महासागरीय जल में डूबा रहता है, कहलाता है

(a) महाद्वीपीय मग्नढ़ाल

(b) महाद्वीपीय मग्नतट

(c) गहरा सागरीय मैदान

(d) महासागरीय गर्त

उत्तर- (b) महाद्वीपीय मग्नतट

(ix) Average depth of Pacific Ocean is:

(a) 1280 meters

(b) 4000 meters

(c) 3920 meters

(d) 5000 meters

प्रशान्त महासागर की औसत गहराई हैः

(a) 1280 मीटर

(b) 4000 मीटर

(c) 3920 मीटर

(d) 5000 मीटर

उत्तर- (b) 4000 मीटर

(x) Highest saline sea in the world is:

(a) Salt lake

(b) Red Sea

(c) Dead Sea

(d) Sambher lake

विश्व में सबसे अधिक खारा सागर हैः

(a) साल्ट लेक

(b) लाल सागर

(c) मृत सागर

(d) सांभर झील

उत्तर- (c) मृत सागर

Section-B / खण्ड-ब

(Short Answer Type Questions)

(लघु उत्तरीय प्रश्न)

Note: Answer any four questions of the following. [4×5=20]

निम्नलिखित में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

2. What is Troposphere? What is its importance?

क्षोभमण्डल क्या है? इसका क्या महत्व है?

3. Explain precipitation and its different types.

वर्षण एवं इसके विभिन्न प्रकारों को समझाइए।

4. Show different air pressure belts on Earth.

पृथ्वी पर वायुदाब की विभिन्न पेटियों को दर्शाइए।

5. Describe local winds around the world.

विश्व में पाये जाने वाले स्थानीय पवनों का वर्णन कीजिए।

6. What are the sources of salinity in ocean water?

महासागरीय जल में खारेपन के क्या स्रोत हैं?

7. Describe general characteristics of ocean bottom.

महासागरीय तल की सामान्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए।

Section-C / खण्ड-स

(Long Answer Type Questions)

(दीर्घ उत्तरीय प्रश्न)

Note: Answer any three questions of the following. [3×10-30]

निम्नलिखित में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

8. Describe structure and characteristics of different layers of atmosphare.

वायुमण्डल की विभिन्न परतों की बनावट और विशेषताओं का वर्णन कीजिए।

9. Explain different types of rainfall.

वर्षा के विभिन्न प्रकारों की व्याख्या कीजिए।

10. What is Cyclone? Differentiate tropical and temperate cyclones.

चक्रवात किसे कहते हैं? उष्णकीटबन्धीय एवं समशीतोष्ण चक्रवातों में अंतर स्पष्ट कीजिए।

11. Describe bottom surface of either Pacific or Indian Ocean.

प्रशान्त महासागर अथवा हिन्द महासागर के धरातलीय स्वरूप का वर्णन कीजिए।

12. What do you understand by oceanic salinity? Describe its world distribution pattern.

महासागरीय लवणता से आप क्या समझते हैं? इसके विश्व वितरण प्रतिरूप का वर्णन कीजिए।

2. Minor Course or MIC-2 (Climatology and Oceanography) / Questions Paper 2024, PPU Patna

Minor Course or MIC-2

Climatology and Oceanography (Theory)

Solved Questions Paper 2024



(Patliputra University Patna)

Minor Course or MIC

UG (Regular) (Sem.-II) Examination, 2024

(Session: 2023-27)

(MIC-2: MINOR COURSE)

GEOGRAPHY

(Climatology and Oceanography)

Time: Three Hours]

[Maximum Marks: 70

Note: Candidates are required to give their answers in their own words as far as practicable. The figure in the margin indicate full marks. Answer from all parts as directed.

परीक्षार्थी यथासम्भव अपने शब्दों में ही उत्तर दें। उपांत के अंक पूर्णांक के द्योतक हैं। निर्देशानुसार सभी भागों से उत्तर दीजिए।

Part-A / भाग-अ

(Objective Type Questions)

(वस्तुनिष्ठ प्रश्न)

Note: Choose the correct option from each question. [10×2=20]

प्रत्येक प्रश्न से सही विकल्प का चयन कीजिए।

1. (i) The main constituents of atmosphere are:

(a) Nitrogen and Oxygen

(b) Carbon dioxide and Nitrogen

(c) Carbon Monoxide and Carbon dioxide

(d) Ozone and Sulfur dioxide

वायुमंडल के प्रमुख घटक हैं:

(a) नाइट्रोजन और ऑक्सीजन

(b) कार्बन डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन

(c) कार्बन मोनोक्साइड और कार्बन डाइऑक्साइड

(d) ओजोन और सल्फर डाइऑक्साइड

उत्तर- (a) नाइट्रोजन और ऑक्सीजन

(ii) The lies above the mesopause and is a region in which temperatures increase with height.

(a) Stratosphere

(b) Troposphere

(c) Thermosphere

(d) Exosphere

——मेसोपॉज के ऊपर स्थित होता है और यह एक ऐसा क्षेत्र है, जहाँ ऊँचाई के साथ तापमान बढ़ता जाता है।

(a) समतापमण्डल

(b) क्षोभमण्डल

(c) तापमण्डल

(d) बर्हिमण्डल

उत्तर- (c) तापमण्डल

(iii) Imaginary lines joining equal as isohyets is known

(a) Height

(b) Humidity

(c) Rainfall

(d) Pressure

समान—–को जोड़ने वाली काल्पनिक रेखाओं को समवर्षा रेखा कहा जाता है।

(a) ऊँचाई

(b) आर्द्रता

(c) वर्षा

(d) दाब

उत्तर- (c) वर्षा

(iv) Which of the following is an equatorial belt of low atmospheric pressure where the trade winds converge?

(a) Horse latitude

(b) Doldrums

(c) Roaring Forties

(d) Furious sixties

निम्नलिखित में से कौन एक कम वायुमंडलीय दबाव की भूमध्यरेखीय पेटी है, जहाँ व्यापारिक पवनें मिलती हैं?

(a) अश्व अक्षांश

(b) डोलड्रम्स

(c) गरजती चालीसा

(d) चीखता साठा

उत्तर- (b) डोलड्रम्स 

(v) The planetary winds that flows between the sub- tropical highs and equatorial low is known as:

(a) Trade winds

(b) Westerlies

(c) Polar Easterlies

(d) None of the above

ग्रहीय पवनें जो उपोष्ण कटिबन्धीय उच्च और भूमध्यरेखीय निम्न के बीच बहती हैं, को जाना जाता हैः

(a) व्यापारिक पवनें

(b) पछुआ पवनें

(c) ध्रुवीय पवनें

(d) उपरोक्त में से कोई नहीं

उत्तर- (a) व्यापारिक पवनें

(vi) Tropical storm in China Sea is known as:

(a) Wave

(b) Tornado

(c) Cyclone

(d) Typhoon

चीन सागर में उष्ण कटिबन्धीय तूफान को कहा जाता है:

(a) लहर

(b) टॉरनैडो

(c) चक्रवात

(d) टाइफून

उत्तर- (d) टाइफून

(vii) Which of the following connects the continental shelf and the ocean basins?

(a) Continental slope

(b) Deep sea plains

(c) Ocean deeps

(d) Submarine ridges

निम्नलिखित में से कौन महाद्वीपीय मग्नतट और महासागरीय बेसिन को जोड़ता है?

(a) महाद्वीपीय मग्न ढ़ाल

(b) अगाध सागरीय मैदान

(c) महासागरीय गर्त

(d) महासागरीय कटक (श्रेणी)

उत्तर- (a) महाद्वीपीय मग्न ढ़ाल

(viii) ‘Mariana Trench’ is located in the:

(a) Indian Ocean

(b) Arctic Ocean

(c) Atlantic Ocean

(d) Pacific Ocean

‘मेरियाना गर्त’ स्थित है:

(a) हिन्द महासागर में

(b) आर्कटिक महासागर में

(c) अटलांटिक महासागर में

(d) प्रशांत महासागर में

उत्तर- प्रशांत महासागर में

(ix) Major source of oceanic salinity is:

(a) Rivers

(b) Wind

(c) Land

(d) None of the above

महासागरीय लवणता का प्रमुख स्रोत हैः

(a) नदियाँ

(b) पवन

(c) भूमि

(d) उपरोक्त में से कोई नहीं

उत्तर- (a) नदियाँ

(x) Which of the following sea has highest salinity in the world?

(a) Red Sea

(b) Black Sea

(c) White Sea

(d) Dead Sea

निम्नलिखित में से किस सागर में विश्व में सबसे अधिक लवणता है?

(a) लाल सागर

(b) काला सागर

(c) श्वेत सागर

(d) मृत सागर

उत्तर- (d) मृत सागर

Part-B / भाग-ब

(Short Answer Type Questions)

(लघु उत्तरीय प्रश्न)

Note: Answer any four questions of the following. [4×5=20]

निम्नलिखित में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

2. What is the composition of Earth’s atmosphere? What is the ratio of two most dominant gases in the atmosphere?

पृथ्वी के वायुमण्डल का संघटन क्या है? वायुमण्डल में सबसे प्रभावशाली गैसों का अनुपात क्या है?

3. Mention the different forms of precipitation.

वर्षण के विभिन्न प्रकारों के बारे में बताइए।

4. What are Local Winds? Write the name of any two local winds.

स्थानीय पवने क्या हैं? किन्हीं दो स्थानीय पवनों के नाम लिखिए।

5. What is the difference between Hurricane and Typhoon?

हरिफेन और टाइफून के मध्य क्या अंतर है?

6. What are the major types of Ocean relief features?

महासागरीय उच्चावच विशेषताओं के प्रमुख प्रकार क्या हैं?

7. What is the main cause of salinity of ocean water?

महासागरीय जल की लवणता का प्रमुख कारण क्या है?

Part-C / भाग-स

(Long Answer Type Questions)

(दीर्घ उत्तरीय प्रश्न)

Note: Answer any three questions of the following. [3×10-30]

निम्नलिखित में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

8. What is atmosphere? Explain the different layers of Earth’s atmosphere.

वायुमण्डल क्या है? पृथ्वी के वायुमण्डल की विभिन्न परतों को समझाइए।

9. What Precipitation means? What are the four types of precipitation?

वर्षण का क्या अर्थ है? वर्षण के चार प्रकार क्या हैं?

10. What is Cyclone? How is it originated? Describe its salient features in the context of tropical cyclone.

चक्रवात किसे कहते हैं? इसकी उत्पत्ति किस प्रकार होती है? उष्ण कटिबन्धीय चक्रवात के संदर्भ में इसकी मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए।

11. Give an account of principal local winds in the world.

विश्व में पायी जाने वाली सभी प्रमुख स्थानीय पवनों का विवरण दीजिए।
12. Discuss the factors which cause variation in salinity of oceans.

महासागरों की लवणता में अन्तर उत्पन्न करने वाले कारकों की विवेचना कीजिए।

4. Information Technology (सूचना प्रौद्योगिकी)

Information Technology

(सूचना प्रौद्योगिकी)



Q. सूचना प्रौद्योगिकी से आप क्या समझते है? सूचना प्रौद्योगिकी के अर्थव्यवस्था एवं समाज पर पड़ने वाले प्रभाव की संक्षिप्त विवेचना करें।

Information Technology

    मानव संस्कृति के उद्‌विकास में तीन महत्त्वपूर्ण क्रांतियाँ हुई हैं:-

(1) नव पाषाणिक क्रांति (Neolithic Revolution)

(2) औद्योगिकी क्रांति (Industrial Revolution) और 

(3) सूचना प्रौद्योगिकी क्रांति (Information Techonology Revolution)।

      इन तीनों क्रांतियों ने मानव जीवन में त्वरित परिवर्तन लाने का कार्य किया। अगर 20वीं शताब्दी को औद्योगिकी क्रांति की सदी कही जाय तो 21वीं सदी को सूचना प्रौद्योगिकी क्रांति कहा जाएगा।

     मानव जिन युक्तियों के माध्यम से सूचनाओं को एक स्थान से दूसरे स्थान पर सम्प्रेषण करता है, उस युक्ति को सूचना प्रौद्योगिकी कहते हैं। सूचना प्रौद्योगिकी विकास के क्रम में निम्नलिखित तथ्यों पर गौर किया जाता है-

(1) सम्प्रेषण में समय कम-से-कम लग सके।

(2) सूचना को यथावत एक स्थान से दूसरे स्थान भेजा जा सके।

(3) ऐच्छिक मात्रा में सूचनाओं का सम्प्रेषण हो सके।

     कोई भी सूचना तीन रूपों में पायी जाती है जैसे- Digital, Graphics, शब्द एवं अक्षर के रूप में। इन सूचनाओं को सम्प्रेषित करने के लिए कई प्रकार के प्रौद्योगिकी का प्रयोग किया जाता है। जैसे- रेडियो, टीवी, पेजर, मोबाइल, फैक्स, कम्प्यूटर, इंटरनेट, टेलीफोन, ऑप्टीकल फाइबर इत्यादि। इन उपकरणों में प्रयुक्त तकनीक को पुनः दो भागों में वर्गीकृत किया जाता है-

प्रथम- हार्डवेयर तकनीक

द्वितीय- सॉफ्टवेयर तकनीक

      हार्डवेयर तकनीक के अन्तर्गत विभिन्न प्रकार के उपकरणों के निर्माण संयोजन का कार्य किया जाता है जबकि सॉफ्टवेयर तकनीक के अन्तर्गत सूचना प्रौद्योगिकी में प्रयुक्त होने वाले Programme का निर्माण होता है। अत: सूचना प्रौद्योगिकी विभिन्न प्रकार के हार्डवेयर और साफ्टवेयर के संयोजन से निर्मित आधुनिक उपकरण है।

भारत में सूचना प्रौद्योगिकी का विकास

     भारत में सूचना प्रौद्योगिकी का विकास एक नवीन घटना है। भारत में इस प्रौद्योगिकी का विकास भारत सरकार और निजी क्षेत्र के माध्यम से किया जा रहा है। 1992 ई० में केन्द्र सरकार द्वारा देश में दूर संचार सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु दूर संचार क्षेत्र को उदारता नीति के तहत लाकर निजी क्षेत्र की अनुमति प्रदान की। 1993 ई० में दूर संचार तकनीक के विकास हेतु प्रति वर्ष 20.6 मिलियन रुपये निवेश करने का लक्ष्य रखा।

      1994 ई० में भारत के चार प्रमुख महानगर दिल्ली, मुम्बई और कोलकाता में मोबाइल सेवा उपलब्ध करने वाले कंपनी के लिए लाइसेंस जारी किये गये। सूचना प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के लिए 1997 ई० में “भारतीय दूर संचार नियामक प्राधिकरण” (TRAI) की स्थापना की गई। मार्च 1999 ई० में पहली राष्ट्रीय दूरसंचार नीति की घोषणा की गई।

     वर्तमान समय में ट्राई और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कार्यरत कंपनियाँ Call Rate घटाने में तथा ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए प्रयासरत है। वर्तमान समय में 99% भारतीय जनसंख्या के पास सूचनायें मोबाइल, TV तथा रेडियों के माध्यम से पहुँच रहा है। वर्तमान समय में 90 करोड़ से भी अधिक लोगों के पास मोबाइल की सुविधा उपलब्ध है। इस तरह कहा जा सकता है कि भारत में सूचना प्रौद्योगिकी के विकास की गति काफी तीव्र है।

भारतीय अर्थव्यवस्था तथा समाज पर IT का प्रभाव

   सूचना प्रौद्योगिकी (IT) ने भारतीय अर्थव्यवस्था और समाज में क्रांतिकारी परिवर्तन लाया है। इसने रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग और व्यापार के क्षेत्र में दक्षता और पारदर्शिता बढ़ाई है। IT उद्योग ने भारत को वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख सेवा केंद्र बनाया है, जिससे विदेशी मुद्रा अर्जन और आर्थिक वृद्धि को बल मिला है।

    समाज में डिजिटल साक्षरता, ऑनलाइन शिक्षा, ई-गवर्नेंस और संचार के नए अवसर विकसित हुए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी डिजिटल सेवाओं से जीवन स्तर में सुधार हुआ है। इस प्रकार IT भारत के सर्वांगीण विकास का प्रमुख आधार बन गया है, इसे निम्नलिखित बिंदुओं के अंतर्गत विस्तार से समझता जा सकता है- 

(i) समय तथा स्थान के बीच की दूरी घटी:-

       IT के कारण समय तथा स्थान के बीच भी दूरी घट चुकी है। इससे ऐच्छिक मात्रा में और पूर्ण शुद्धता के साथ सूचनाओं का सम्प्रेषण संभव हो गया है।

(ii) यातायात के साधनों में मदद:-

     IT के विस्तार एवं प्रसार से यातायात साधनों पर बढ़ते हुए दबाव को कम करने में मदद मिली है।

(iii) सूचनाओं का आसानी से ग्रहण:-

     कम्प्यूटर, E-mail, www के संकलन से इंटरनेट का विकास किया गया है। इंटरनेट अपना पैर पूरे दुनियाँ में फैलता जा रहा है। लोग विश्व की सभी प्रकर की सूचनाएं इन्टरनेट पर उपलब्ध करवा देते हैं जिसके कारण शिक्षा, वाणिज्य, विज्ञान, मनोरंजन इत्यादि से संबंधित सभी प्रकार की सूचनाएँ इंटरनेट पर मौजूद रहती है। इन्टरनेट Connection लिए हुए व्यक्ति कोई भी सूचना आसानी से ग्रहण कर सकता है।

    दूसरे शब्दों में, इंटरनेट ने पूरे दुनिया को Global village में बदल दिया है।

(iv) E-Commerce:-

    सूचना प्रौद्योगिकी के माध्यम से E. Commerce की शुरुआत की गई है। जिसके माध्यम से व्यापार, बीमा, वित्त से संबंधित कार्यों को आसानी से संपादित किया जाने लगा है।

(v) E-प्रशासन

      सूचना प्रौद्योगिकी का एक घटक E-प्रशासन है। इसके माध्यम से दूर दराज के गांवों को जिला मुख्यालय से और जिला मुख्यालय को राजधानी से जोड़‌कर प्रशासन का कार्य आसानी से किया जा सकता है।

(vi) इंटरनेट के माध्यम से विवाह, तलाक, कानूनी सहायता, आवेदन पत्रों का सम्प्रेषण, प्रतियोगिता परीक्षा, मनचाही जानकारी एवं परामर्श लेना संभव हो चूका है।

(vii) नये रोजगारों का सृजन

     सूचना प्रौद्योगिकी शिक्षित एवं अशिक्षित दोनों प्रकार के लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रहा है। ये रोजगार IT पार्क, सोफ्टवेयर पार्क, Call Centre, साइबर कैफे, B.P.O., आउट सोर्सिंग इत्यादि के माध्यम से उपलब्ध हो रहे हैं।

(viii) रुढ़िवादी परंपराओं तथा अधविश्वासों से मुक्ति:-

    IT के माध्यम से भारतीय समाज अनेक प्रकार के परम्परागत अवधारणा एवं अंधविश्वासों से मुक्त हो रहा है।

(ix) IT के माध्यम से रेलवे एवं विमानन में आरक्षण, बैंकिग, बीमा एवं शेयर बाजार में त्वरित परिवर्तन लाया है। इस क्षेत्रों में IT के कारण गुणात्मक एवं मात्रात्मक परिवर्तन तो हुआ ही है। इसके अलावे इन क्षेत्रों में पारदर्शिता का भी आगमन हुआ है।

(x) कार्यालयों को मोटे-मोटे रजिस्टरों से मुक्ति:-

    आईटी के माध्यम से सरकारी एवं गैर सरकारी office मोटे-2 रजिस्टर एवं दस्तावेजों से मुक्त हो रहे हैं। आज एक लाइब्रेरी की संपूर्ण जानकारी को DVD के एक कैसेट में संग्रहित किया जा सकता है जिसके कारण आज विभिन्न प्रकर के सेवा का सार्वभौमीकरण संभव हो सका है।

(xi) आईटी के माध्यम से दूर-दराज के भूमि, कृषि, सिंचाई से संबंधित विविध  जानकारी को आसानी से पहुँचाया जा रहा है।

(xii) आईटी के माध्यम से नगरीय परिवहन व्यवस्था को नियंत्रित किया जा रहा है।

(xiii) आपदा प्रबंधन में प्रयोग:-

     सूचना प्रौद्योगिकी का प्रयोग आपदा प्रबंधन के दौरान बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।

आईटी का प्रभाव

      इस तरह ऊपर के तथ्यों से स्पष्ट है कि सूचना प्रौद्योगिकी के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था एवं समाज पर कई प्रकार के सकारात्मक प्रभाव पड़े हैं। वहीं दूसरी ओर कई नकारात्मक प्रभाव भी रेखांकित किया जा सकता है। जैसे- साइबर अपराध, पाइरेसी (Piracy- DVD, CD का नकल), पोरनोग्राफी (ब्लू फिल्म), सूचनाओं की चोरी, गोपनीय दस्तावेजों से छेड़छाड़, कंप्यूटर कचड़ा, सूचना प्रदूषण की समस्या इत्यादि समस्याएँ उत्पन्न हो रही है।

निष्कर्ष

   अतः स्पष्ट है कि सूचना प्रौद्योगिकी के कारण कई प्रकार के सकारात्मक तथा नकारात्मक प्रभाव दृष्टिगत होने लगे हैं। कुछ विद्वानों का तर्क है कि नारात्मक प्रभावों को देखते हुए सूचना प्रौद्योगिकी के विकास पर रोक लगा दी जाय। लेकिन मेरे विचार के अनुसार इस पर रोक नहीं लगयी जानी चाहिए बल्कि इससे उत्पन्न होने वाले नाकारात्मक प्रभावों से प्रभावी तरीके से निपटा जाना चाहिए और सूचना प्रौद्योगिकी के दिशा में सतत् विकास जारी रखा जाना चाहिए।




उत्तर लिखने का दूसरा तरीका




परिचय

     सूचना प्रौद्योगिकी (IT) आधुनिक समाज की रीढ़ बन चुकी है। यह सूचना के उत्पादन, संग्रहण, संचार, प्रसंस्करण तथा प्रबंधन से संबंधित तकनीकों और उपकरणों का समुच्चय है। कंप्यूटर, इंटरनेट, संचार नेटवर्क, क्लाउड सेवाएँ, सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन, डेटा एनालिटिक्स, साइबर सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आज की IT संरचना के मूल घटक हैं। 21वीं सदी की अर्थव्यवस्था में आईटी न केवल नवाचार का केंद्र है बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, शासन, उद्योग, व्यापार तथा सामाजिक जीवन को भी गतिशील बनाती है।

सूचना प्रौद्योगिकी का विकास (Evolution of IT)

      सूचना प्रौद्योगिकी का विकास मुख्यतः चार चरणों में देखा जाता है:

1. प्रारम्भिक युग (1940-1960)- वैक्यूम ट्यूब तथा ट्रांजिस्टर आधारित कंप्यूटर; सीमित गणनात्मक क्षमता।

2. मेनफ्रेम युग (1960-1980)- बड़े कंप्यूटर, व्यवसायिक डेटा प्रोसेसिंग में विस्तार।

3. पर्सनल कंप्यूटर युग (1980-2000)- माइक्रोप्रोसेसर का विकास; PC का सामान्य उपयोग; इंटरनेट क्रांति।

4. डिजिटल एवं क्लाउड युग (2000-वर्तमान)- स्मार्टफोन, क्लाउड कंप्यूटिंग, AI, IoT, बिग डेटा, साइबर सुरक्षा उन्नति।

     IT आज ubiquitous computing की ओर बढ़ रहा है जहाँ कम्प्यूटिंग क्षमता हर वस्तु, उपकरण और प्रक्रिया में समाहित हो रही है।

सूचना प्रौद्योगिकी के प्रमुख घटक (Core Components of IT)

(A) हार्डवेयर (Hardware)

⇒ कंप्यूटर, सर्वर, लैपटॉप

⇒ इनपुट डिवाइस: Keyboard, Mouse, Scanner

⇒ आउटपुट डिवाइस: Printer, Monitor, Plotter

⇒ Networking devices: Router, Switch, Hub, Modem

(B) सॉफ्टवेयर (Software)

⇒ System Software- Operating System (Windows, Linux), device drivers

⇒ Application Software- MS Office, ERP, MIS, DBMS

⇒ Utility Software- Antivirus, Backup tools

(C) डाटाबेस प्रबंधन (Database Management)

⇒ DBMS और RDBMS जैसे MySQL, Oracle, SQL Server

⇒ डेटा का संग्रहण, पुनर्प्राप्ति, सुरक्षा और प्रबंधन

(D) कंप्यूटर नेटवर्किंग (Networking)

⇒ LAN, MAN, WAN

⇒ Wired और Wireless technologies

⇒ Network topologies, IP addressing, DNS, VPN

(E) इंटरनेट एवं वेब टेक्नोलॉजी (Internet & Web Technology)

⇒ HTTP/HTTPS, Web servers, Browsers

⇒ Web 2.0, Web 3.0, APIs

(F) साइबर सुरक्षा (Cyber Security)

⇒ Encryption, Firewalls, Intrusion Detection Systems

⇒ Malware, phishing, ransomware से सुरक्षा

सूचना प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग (Applications of IT)

(A) शिक्षा क्षेत्र

⇒ स्मार्ट क्लास, ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म (MOOCs)

⇒ ऑनलाइन परीक्षाएँ और डिजिटल मूल्यांकन

⇒ वर्चुअल लैब और शैक्षिक सॉफ्टवेयर

(B) स्वास्थ्य क्षेत्र

⇒ ई-हॉस्पिटल, टेली-मेडिसिन, ई-प्रिस्क्रिप्शन

⇒ रोगी डेटा प्रबंधन (EHRs)

⇒ मेडिकल इमेज प्रोसेसिंग

(C) व्यापार एवं उद्योग

⇒ ई-कॉमर्स, ऑनलाइन भुगतान

⇒ सप्लाई चेन मैनेजमेंट (SCM)

⇒ Enterprise Resource Planning (ERP)

(D) शासन (E-Governance)

⇒ आधार, डिजिटल इंडिया, UPI, e-Courts, DigiLocker

⇒ नागरिक सेवाओं में पारदर्शिता और त्वरित कार्य

(E) बैंकिंग एवं वित्त

⇒ कोर बैंकिंग, ऑनलाइन लेन-देन, मोबाइल बैंकिंग

⇒ FinTech, Blockchain आधारित समाधान

(F) मनोरंजन एवं मीडिया

⇒ OTT प्लेटफार्म (Netflix, Amazon Prime Video, Disney+ Hotstar, Sony LIV, ZEE5, JioCinema, MX Player), डिजिटल फिल्म निर्माण

⇒ सोशल मीडिया, डिजिटल मार्केटिंग

आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी के उभरते क्षेत्र (Emerging Trends in IT)

(1) क्लाउड कंप्यूटिंग (Cloud Computing)

⇒ IaaS, PaaS, SaaS मॉडल

⇒ ऑन-डिमांड संसाधन और लागत-प्रभावशीलता

(2) बिग डेटा (Big Data)

⇒ विशाल डाटा सेट का विश्लेषण

⇒ निर्णय निर्माण में उपयोग

⇒ Hadoop, Spark जैसी तकनीकें

(3) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं मशीन लर्निंग (AI & ML)

⇒ Predictive analytics, NLP, Chatbots

⇒ स्वचालन और स्मार्ट निर्णय

(4) इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT)

⇒ स्मार्ट होम, स्मार्ट सिटी, स्मार्ट फार्मिंग

⇒ Sensor-based data processing

(5) साइबर सुरक्षा (Advanced Cyber Security)

⇒ Zero Trust architecture

⇒ Digital Forensics, Ethical Hacking

(6) ब्लॉकचेन (Blockchain)

⇒ Decentralized ledgers

⇒ Cryptocurrency, Smart contracts

सूचना प्रौद्योगिकी के लाभ (Advantages of IT)

(i) सूचना का त्वरित प्रसारण- Seconds में data access।

(ii)उत्पादकता में वृद्धि- Automation से efficiency बढ़ती है।

(iii) वैश्वीकरण में मदद- World-wide connectivity।

(iv) सस्ती सेवाएँ- ऑनलाइन सेवाओं से लागत कम होती है।

(v) सुविधा और पारदर्शिता- ई-गवर्नेन्स से नागरिकों को लाभ।

(vi) रोजगार के अवसर- IT sector में विशाल human resource demand।

सूचना प्रौद्योगिकी की चुनौतियाँ (Challenges of IT)

(i) साइबर अपराधों में वृद्धि- डेटा चोरी, हैकिंग, financial fraud।

(ii) गोपनीयता संकट- Personal data misuse का खतरा।

(iii) डिजिटल विभाजन- Rural-Urban gap, internet accessibility की कमी।

(iv) तकनीकी बेरोजगारी- ऑटोमेशन के कारण पारंपरिक नौकरियों में कमी।

(v) इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी- Developing nations में कमजोर IT आधार।

(vi) Dependence on technology- Data failure या cyber-attack होने पर बड़ी समस्या।

भारतीय संदर्भ में सूचना प्रौद्योगिकी (IT in India)

      भारत IT services के क्षेत्र में विश्व का अग्रणी देश है।

⇒ Bangalore – Silicon Valley of India

⇒ TCS, Infosys, Wipro जैसी कंपनियाँ global IT services प्रदान कर रही हैं।

⇒ Digital India Mission ने देश में डिजिटल पहुँच को व्यापक बनाया है।

⇒ UPI, Aadhaar, Rupay ने ICT-based governance को विश्व में एक मॉडल के रूप में स्थापित किया।

⇒ भारत विश्व के सबसे बड़े IT manpower exporters में से एक है।

     IT क्षेत्र का भारत की GDP में योगदान लगभग 7-8% है और यह रोजगार का प्रमुख स्रोत बन चुका है।

भविष्य की दिशा (Future of Information Technology)

     सूचना प्रौद्योगिकी का भविष्य AI-driven systems, data-centric governance, pervasive computing और cybersecurity excellence पर आधारित होगा।

⇒ Quantum Computing जटिल समस्याओं को सेकंडों में हल करेगा।

⇒ Metaverse नया डिजिटल अनुभव प्रस्तुत करेगा।

⇒ 5G/6G ultra-low latency networks को सक्षम करेगा।

     IT का उद्देश्य एक बुद्धिमान, सुरक्षित, समावेशी और स्वचालित समाज की ओर बढ़ना है।

निष्कर्ष (Conclusion)

     इस प्रकार कहा जा सकता कि सूचना प्रौद्योगिकी आज की दुनिया का परिवर्तनकारी तत्व है। यह अर्थव्यवस्था, समाज, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा शासन सभी में दूरगामी प्रभाव डालती है। डिजिटल क्रांति ने नए अवसरों के साथ कई चुनौतियाँ भी प्रस्तुत की हैं, जिनके समाधान के लिए मजबूत नीतियों, साइबर सुरक्षा ढांचे और डिजिटल साक्षरता की आवश्यकता है। इसके बावजूद IT भविष्य की प्रगति, नवाचार और विकास का सबसे महत्वपूर्ण आधार बना रहेगा।

3. Special Economic Zone (विशेष आर्थिक क्षेत्र)

Special Economic Zone

(विशेष आर्थिक क्षेत्र)



परिभाषा

      विशेष आर्थिक क्षेत्र (Special Economic Zone) एक ऐसे भौगोलिक प्रदेश है जहाँ देश का सामान्य आर्थिक कानून पूरी तरह से लागू नहीं होती। दूसरे शब्दों में ‘SEZ’ शुल्क मुक्त आर्थिक क्षेत्र है जहाँ पर विदेशी निवेशकों को आकर्षित कर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाता है और उत्पादकों को निर्यात के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

ऐतिहासिक पक्ष

     रॉबर्ट सी हेवर्ड के अनुसार SEZ की अवधारणा काफी प्राचीन है। प्राचीनतम SEZ का प्रमाण यूनान के टायर नगर से मिलता है। 1960 ई० में चीन ने SEZ का निर्माण कर अपनी अर्थव्यवस्था को विकसित करने के प्रयास किया। जबकि भारत ने अप्रैल 2000 ई० में पहले SEZ नीति की घोषणा की।

प्रकार/वर्गीकरण

      SEZ कई प्रकार के हो सकते हैं। जैसे- मुक्त व्यापार क्षेत्र (Free Trade Zone) निर्यात संवर्धन क्षेत्र (Export Prossising Zone), मुक्त क्षेत्र (Free Zone), औद्योगिक क्षेत्र (Industrial Estate), मुक्त बंदरगाह, नगरीय उद्यम क्षेत्र इत्यादि।

उद्देश्य

     SEZ की स्थापना के पीछे कई उद्देश्य है।

(1) उद्योगों के विकास हेतु विदेशी एवं घरेलू निवेशकों को उपयुक्त वातावरण उपलब्ध कराना।

(2) निर्यात को बढ़ावा देना।

(3) अधिक से अधिक रोजगार उत्पन्न करना।

(4) पिछड़े हुए क्षेत्रों को विकसित करना।

(5) सामाजिक-आर्थिक विषमता को कम करना।

(6) औद्योगीकरण तथा नगरीकरण को बढ़ावा देना।

स्वरूप एवं विशेषता

      किसी भी एक आदर्श SEZ के अंतर्गत एक हजार हेक्टेयर भूमि पर स्थापित किया जा सकता है और उसमें कम से कम 10 हजार करोड़ रूपये का निवेश होना चाहिए। पुनः उसकी निम्नलिखित विशेषताएँ होनी चाहिए:-

(1) SEZ के अंतर्गत कार्य करने वाले इकाइ‌यों के द्वारा वस्तु तथा सेवाओं का मुक्त संचलन होना चाहिए।

(2) विश्व स्तर की आधारभूत संरचना का विकास किया जाना चाहिए।

(3) निर्माण या उत्पादन का कार्य गहन तरीके से होना चाहिए।

(4) निर्यात अभिमुख होना चाहिए।

(5) उन्नत तकनीक होना चाहिए।

(6) उचित प्रबंधन तथा उच्च तकनीक का उपयोग होना चाहिए।

वर्तमान स्थिति एवं महत्त्व

     वर्तमान में 379 SEZs अधिसूचित हैं, जिनमें से 265 चालू हैं। लगभग 64% SEZ पाँच राज्यों- तमिलनाडु, तेलंगाना, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में स्थित हैं। इससे एक लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिल रहा है। SEZ पर बाबा कल्याणी समिति की सिफारिशों के अनुसार, SEZ में MSME योजनाओं को जोड़कर तथा वैकल्पिक क्षेत्रों को क्षेत्र-विशिष्ट SEZ में निवेश करने की अनुमति देकर MSME निवेश को बढ़ावा देना है।

      इसके अतिरिक्त सक्षम और प्रक्रियात्मक छूट के साथ-साथ SEZ को अवसंरचनात्मक स्थिति प्रदान करने हेतु वित्त तक उनकी पहुँच में सुधार करके तथा  दीर्घकालिक ऋण को सक्षम करने के लिये भी अग्रगामी कदम उठाए गए। कुछ SEZ के उदाहरण निम्नलिखित है:-

(1) काण्डला तथा सूरत- गुजरात

(2) कोचीन- केरल

(3) सांताक्रुज- मुम्बई

(4) फाल्टा- पश्चिम बंगाल

(5) चेन्नई- तमिलनाडु

(6) विशाखापतनम- आन्ध्र प्रदेश

(7) नोएडा- उत्तर प्रदेश

(8) इंदौर- मध्य प्रदेश

(9) राजीव गाँधी इंटेफोर्ट पार्क- हिंजेवादी, पूना।

(10) जयपुर- राजस्थान

(11) सिंगुर (टाटा मोटर्स कंपनी)- पश्चिम बंगाल 

नोट: टाटा मोटर्स कंपनी 2008 में सिंगूर परियोजना को छोड़ने के बाद कंपनी ने अपनी विनिर्माण इकाई को साणंद, गुजरात में स्थानांतरित कर दिया।

Special Economic Zone

टाटा मोटर्स कंपनी साणंद, गुजरात

(12) नन्दीग्राम (सलीम अली ग्रुप केमिकल फैक्ट्री)- पश्चिम बंगाल

आलोचना

    भारत की SEZ नीति का काफी विरोध किया जा रहा है क्योंकि किसानों का आरोप है कि सरकार किसानों से जबरन कृषि योग्य भूमि छीन रही है और भूमि का सही मुआवजा नहीं दे रही है। नंदीग्राम तथा सिंगुर विवाद इसके उदाहरण है। पुनः विद्वानों का कहना है कि SEZ देश के अन्दर एक औपनिवेशिक क्षेत्र के रूप में सक्रिय होगा जो धीरे-2 देश की आर्थिक संप्रभुता पर प्रहार करेगी।

निष्कर्ष

       किसानों के द्वारा लगाया गया आरोप काफी गंभीर है। अतः सरकार को चाहिए कि किसानों की शिकायत सुनकर न केवल उनके समस्याओं का समाधान करे बल्कि SEZ की स्थापना वैसे बंजर भूमि एवं पत्थरीली भूमि पर किया जाय जिसका प्रयोग आज नहीं किया जा रहा है।

      पुनः SEZ के अन्तर्गत निवेश करने वाली कंपनियों को पर्यावरण को क्षति नहीं पहुंचाने वाले तकनीकी प्रयोग को प्रोत्साहित किया जाय। पुनः स्थानीय लोगों को तरजीह दी जाय।

     उपरोक्त सुझावों पर अमल करने के बाद ही SEZ आर्थिक विकास के दूत बन सकेंगे।

2. Cotton Textile Industry (सूती वस्त्र उद्योग)

Cotton Textile Industry

(सूती वस्त्र उद्योग)



प्रश्न प्रारूप

Q1. सूती वस्त्र उद्योग की समस्या की चर्चा करे।

Q2. भारत में सूती वस्त्र उद्योग के स्थानीयकरण तथा वर्तमान गतिविधियों की चर्चा करे।

Q3. भारत में सूती वस्त्र के स्थानीयकरण हेतु कारकों का विश्लेषण कीजिए तथा इस उद्योग में अभिनव प्रवृतियों को बताएँ।

Q4. सूती वस्त्र उद्योग के स्थानीयकरण हेतु कारकों की विवेचना कीजिए तथा इसके वितरण प्रतिरूप का विश्लेषण कीजिए।

उत्तर- सूती वस्त्र उद्योग भारत का सबसे पुराना उद्योग है। यह भारत का सबसे बड़ा उद्योग है। यह भारत का सबसे बड़ा रुग्ण उद्योग भी है। भारत में सर्वाधिक कर्मचारी इसी उद्योग में संलग्न है। भारत कभी विश्व का सबसे बड़ा सूती वस्त्र उत्पादक देश हुआ करता था। लेकिन, इंगलैण्ड में हुए औद्योगिक क्रांति के कारण भारतीय सूती वस्त्र उद्योग को प्रायोजित तरीके से पीछे कर दिया गया।

विकास / वृद्धि

    सूती वस्त्र उद्योग यद्यपि भारत का सबसे प्राचीन उद्योग है। फिर इसका आधुनिक कारखाना 1818 ई० में कलकता के ‘फोर्ट ग्लोस्टर’ नामक स्थान पर लगाया गया था। लेकिन कच्चे माल के अभाव में असफल रहा। पुनः सफल सूती वस्त्र का कारखाना 1850 ई० में कलकत्ता में स्थापित किया गया। इस सफल प्रयास के बाद इस उद्योग का विकास सतत् जारी है। 

      1905 ई० तक भारत में 206 सूती वस्त्र के मील स्थापित हो चुके थे। 1958 ई० तक भारत में मीलों की संख्या 1767 पहुंच गयी थी। वर्तमान समय में इसकी संख्या बढ़कर 2000 से भी अधिक हो चुकी है।

स्थानीयकरण

      बेवर ने अपने न्यूनतम परिवहन लागत सिद्धांत में बताया कि सूती वस्त्र उद्योग शुद्ध कच्चा माल पर आधारित एक ऐसा उद्योग है जिसमें हम जितना कच्चा माल लगाते है उतने ही मात्रा में शुद्ध उत्पाद प्राप्त करते है। ऐसे उद्योगों को समभार उद्योग कहा जा सकता है। इस प्रकार के उद्योगों का स्थानीकरण कच्चे माल वाले क्षेत्रों में, बाजार में या दोनों स्थानों पर हो सकता है। जैसे- मुम्बई के आसपास इस उद्योग का विकास बड़े पैमाने पर हुआ है क्योंकि महाराष्ट्र के काली मिट्टी की भूमि पर बड़े पैमाने पर कपास की खेती होती है।

      पुनः इस उद्योग का स्थानीयकरण कोलकाता के आस-पास हुआ है जबकि पूरे पश्चिम बंगाल में कपास की खेती कहीं नहीं की जाती है। अतः कलकत्ता के आस-पास सूती वस्त्र उद्योग विकास बाजार के कारण हुआ है।

विकास के विभिन्न चरण या नवीन प्रवृति या वितरण

    भारत उष्ण एवं उपोष्ण जलवायु वाला देश है। इसलिए सम्पूर्ण भारत में सदैव सूती वस्त्र की माँग होती रही है। प्रारंभ में इसके विकास में केन्द्रीयकरण की प्रवृति थी। कालान्तर में यह विकेन्द्रीकृत उद्योग बना। केन्द्रीयकरण से विकेन्द्रीकृत उद्योग बनने में काफी लम्बा समय लगा है। इस समय को चार चरण में बाँटकर अध्ययन किया जा सकता है:-

प्रथम चरण:-

  भारत में सूती वस्त्र उद्योग का प्रथम चरण 1854–1900 ई. तक माना जाता है। प्रथम चरण में सूती वस्त्र उद्योग का विकास केवल मुम्बई महानगर में हुआ। यहाँ पर इस उद्योग के स्थानीयकरण के चार कारक महत्त्वपूर्ण थे। जैसे-

(1) मुम्बई भारत का सबसे बड़ा बंदरगाह रहा है।

  • कपास निर्यात करने के लिए यहाँ लाये जाते थे।
  • कपास के व्यापारी मुम्बई में ही रहा करते थे। उनके पास पूँजी और तकनीक पहले से मौजूद थी।
  • पुनः मुम्बई की आर्द्र जलवालु सूती वस्त्र उद्योग के लिए उपयुक्त वातावरण उपलब्ध कराती थी।

     यही कारण था कि मुम्बई द्वीप पर सूटी वस्त्र उद्योग का प्रथम विकास हुआ।

(2) चीन में विकसित हो रहे सूती वस्त्र उद्योग में धागा आपूर्ति करने का कार्य ब्रिटिश कंपनियाँ किया करती थी। जब ब्रिटिश कंपनियाँ चीन को पर्याप्त मात्रा में धागा आपूर्ति करने में असफल होने लगी तो उन्होंने भारतीय व्यापारियों के इस क्षेत्र में पूंजी निवेश के लिए प्रोत्साहित किया।

(3) मुम्बई महानगर में वाणिज्यिक ऊर्जा की कमी थी लेकिन द० अफ्रीका से आयातित कोयला पर मुम्बई के पास तापीय विद्युत केन्द्र की स्थापना की गई तो सुचारू रूप से विद्युत की आपूर्ति होने लगी।

(4) सस्ते श्रमिक और आन्तरिक बाजार की उपलब्धता भी यहाँ पर इस उद्योग के विकास में सहायक रहा।

    ऊपर वर्णित कारकों के कारण 19वीं सदी के अन्त तक मुम्बई द्वीप पर करीब 40 कारखाने विकसित हो चुके थे। इसे “भारत का मैनचेस्टर” या “कपास की महानगरी” भी कहा जाने लगा। स्वेज नहर के पूरब में सूती वस्त्र उत्पादन करने वाला यह सबसे बड़ा केन्द्र बन गया।

दूसरा चरण:-

      1900-23 ईo के मध्य लगे सूती वस्त्र उद्योग को इस चरण में शामिल करते हैं। इस चरण में उद्योगों का विकास मुम्बई के बाहरी क्षेत्रों में हुआ क्योंकि मुम्बई महानगर में लगातार जमीन का मूल्य बढ़ता जा रहा था। श्रमिक संगठनों का विकास बड़े पैमाने पर हो चुका था। मलीन बस्तियाँ विकसित होने लगी थी। अतः निवेशकों ने मुम्बई के बाहरी क्षेत्रों में पूँजी निवेश का कार्य प्रारंभ किया। इस चरण में स्थानीयकरण की दो प्रवृति थी- प्रथम मुम्बई के ही बाहरी क्षेत्रों में सूती वस्त्र के कारखाने लगाये गये।

     पुनः सूती वस्त्र कारखाना लगाने हेतु मुम्बई के आप-पास के नगरों का चयन किया जहाँ मुम्बई के समान सभी परिस्थितियाँ अनुकूल थी। जैसे- इस चरण में कल्याण, थाणे, पुणे, नासिक, सूरत, बड़ोदरा तथा अहमदाबाद जैसे नगरों में सूती वस्त्र उद्योग का तेजी से विकास हुआ क्योंकि ये सभी केन्द्र अरब सागर के निकट थे जिसके कारण नम जलवायु उपलब्ध थी। बड़ौदरा, सूरत बंदरगाह थे। “टाटा हाइड्रल प्रोजेक्ट” के द्वारा विद्युत की आपूर्ति सुनिश्चित हो चुकी थी। मुम्बई के ही समान सस्ते श्रमिक तथा बाजार उपलब्ध थे।

तीसार चरण:-

     1923 से 1947 ई० के बीच लगे उद्योगों को इस चरण में शामिल करते हैं। इस चरण में सूती वस्त्र उद्योग का विकास दक्कन के लावा के पठारी क्षेत्र तथा मध्यवर्ती पठार पर हुआ। दक्कन के पठार पर पोरबन्दर, राजकोट, सुरेन्द्रनगर (सूरत), भूसावल, अहमदनगर, नागपुर, कोल्हापुर, सोलापुर, गुलवर्गा प्रमुख केन्द्र के रूप में थे। इन केन्द्रों में इस उद्योग का विकास कपास की खेती, सस्ते श्रमिक तथा बाजार की उपलब्धता के कारण हुआ।

      भारत के उ० मध्यवर्ती पठारी क्षेत्र में इस उद्योग का विकास इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, भोपाल, इटारसी, भिलवाड़ा, अजमेर, जयपुर, जोधपुर तथा बीकानेर में हुआ। इन क्षेत्रों में सूती वस्त्र उद्योग का विकास कई कारणों के चलते हुआ। जैसे-

(1) इन क्षेत्रों में कई बड़े देशी रियासत रहा करते थे। इन रियासतों ने इस उद्योग में रुचि लिया। ब्रिटिश कंपनियों ने भी देशी रजबाड़ों को इस क्षेत्र में आमंत्रित किया। देशी रजबाड़ों ने ब्रिटिश कंपनियों को भूमि दिया तो दूसरी ओर ब्रिटिश कंपनियों ने बड़े पैमाने पर पूंजी तथा तकनीक का निवेश किया। इसके अलावे मैदानी भारत का बाजार, सस्ते श्रमिक उपलब्धता और कपास की खेती ने भी इस उद्योग को आकर्षित किया।

     इसी चरण में कानपुर, आगरा, दिल्ली, हैदराबाद, बंगलोर, विशाखापतन तथा कलकता भी सूती वस्त्र केन्द्र के रूप में उभरे क्योंकि यहाँ की सभी भौगोलिक परिस्थितियाँ अनुकूल थी तथा सस्ते श्रमिक और बाजार उपलब्ध थे।

   आजादी के बाद भारत में सूती वस्त्र उद्योग

चौथा चरण:-

     आजादी के बाद विकसित हुए सूती वस्त्र उद्योगों को इसमें शामिल करते हैं। इस चरण में सूती वस्त्र उद्योग का विकास चार क्षेत्रों में हुआ-

(i) उ०-प० भारत-

   इसमें पंजाब तथा हरियाणा को शामिल करते हैं। सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होने के कारण इन क्षेत्रों में कपास की खेती प्रारंभ की गई। कपास की स्थानीय उपलब्धता के करण जालंधर, लुधियाना, अम्बाला, चंडीगढ़ अमृतसर तथा गंगानगर जिला सूती वस्त्र उद्योग केन्द्र के रूप में उभरे।

(ii) UP तथा बिहार-

   यहाँ पर सस्ते श्रमिक तथा बाजार की उपलब्धता के कारण इस उद्योग का विकास हुआ। UP में मेरठ, गाजियाबाद, सहारनपुर, मोदीनगर, मुरादाबाद, वाराणसी, मिर्जापुर जैसे नगर में और बिहार में गया, डुमराँव, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, पटना इत्यादि में विकसित हुआ। इस क्षेत्रों में सस्ते श्रमिक तथा बाजार उपलब्ध होने के कारण इस उद्योग कर विकास हुआ था।

(iii) पूर्वी भारत-

   बाजार की सुविधा, सस्ते श्रमिक, आयात-निर्यात की सुविधा तथा हुगली औद्योगिक प्रदेश में विकसित संरचनात्मक सुविधाओं के कारण इस उद्योग का यहाँ विकास हुआ। यहाँ इस उद्योग के मुख्य केन्द्र कोलकाता, हावड़ा, मानिकपुर, नैहाटी, चन्दन नगर, सियारामपुर, दीमापुर, इम्फाल, गुवाहाटी तथा कटक थे।

(iv) द० भारत-

    यहाँ सस्ते जल विद्युत की अपलब्धता तथा कपास की खेती किए जाने के कारण इस उद्योग का विकास हुआ। विजयवाड़ा,  बेलगाँव मैसूर, काँचीपुरम्, मदुरई, तिरुचिरापल्ली, पाण्डिचेरी तथा तिरुअनन्तपुरम जैसे नगरों में इस उद्योग का विकास हुआ। कोयम्बटूर को “दक्षिण भारत का मैनचेस्टर” भी कहा जाने लगा। भारत में सर्वाधिक सूती वस्त्र का मील तमिलनाडु राज्य में ही स्थित है।

   उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि भारत में सूती वस्त्र उद्योग का अभूतपूर्व विकेन्द्रीकरण हुआ है। भारत के प्रमुख सूती वस्त्र केन्द्रों को नीचे मानचित्र में देखा जा सकता है।

Cotton Textile Industry

चित्र: भारत के प्रमुख सूत्री वस्त्र उद्योग केंद्र

   भारत में सूती वस्त्र का उत्पादन तीन क्षेत्रों में किया जाता है:-

(1) मील 

(2) पावरलूम (छोटे-छोटे मशीन से)

(3) हथकरघा / चरखा

   इन तीनों क्षेत्रों में होने वाला उत्पादन को नीचे के तालिका में देखा जा सकता है:-

Sector Approx Share (Indicative) Role
Powerloom Majority (सबसे बड़ा) कपड़े का बड़ा उत्पादन भाग Powerloom से आता है
Handloom छोटा हिस्सा पारंपरिक हस्तकल्याणित बुनाई
Mill औद्योगिक उत्पादन बड़े पैमाने पर घेराबंदी
Others न्यून खास/विशिष्ट वस्त्र

           नीचे के तालिका में सूत उत्पादन को प्रदर्शित किया जा रहा है:-     

वर्ष सूत का उत्पादन हजार टन में
1950-51  835
1960-61 1075
1970-71 1050
1980-81 1400
1990-91 1430
2000-01 1600
2010-11 4500
2020–21
5200

विश्लेषण 

  • 1950–51 से 1970–71 तक सूत उत्पादन में धीमी वृद्धि देखी जाती है।

  • 1980–81 के बाद आधुनिकीकरण, पावरलूम और मिल सेक्टर के विस्तार से उत्पादन तेज़ी से बढ़ा।

  • 2000–01 के बाद तकनीकी प्रगति, निर्यात वृद्धि और निजी निवेश के कारण उत्पादन में तीव्र वृद्धि हुई।

  • 2010–11 से 2020–21 के बीच भारत विश्व के प्रमुख सूत उत्पादक देशों में शामिल हो गया।

भारत में सूती वस्त्र उत्पादन करने वाले 5 प्रमुख राज्य

1. महाराष्ट्र 

  • सर्वाधिक सूती वस्त्र उत्पादन
  • प्रमुख केंद्र: मुंबई, नागपुर, शोलापुर, पुणे

2. गुजरात 

  • दूसरा स्थान
  • प्रमुख केंद्र: अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा

3. तमिलनाडु 

  • दक्षिण भारत में सबसे प्रमुख
  • प्रमुख केंद्र: कोयंबटूर, मदुरै, तिरुपुर

4. पश्चिम बंगाल

  • हावड़ा, हुगली क्षेत्र प्रमुख
  • जूट के साथ-साथ सूती वस्त्र उद्योग भी विकसित

5. मध्य प्रदेश

  • इंदौर, उज्जैन क्षेत्र
  • कपास उत्पादन के कारण सूती वस्त्र उद्योग को बढ़ावा

समस्या तथा संभावना

    सूती वस्त्र उद्योग कई समस्याओं का सामना कर रही है। जैसे-

(1) कच्चे माल की समस्या-

    भारत में बढ़ती हुई जनसंख्या के कारण वस्त्र की माँग लगातार बढ़‌ती ही जा रही है। बढ़ती हुई मांग को देश पूरा नहीं कर पा रहा है जिसके कारण कपास का मूल्य लगागर बढ़‌ता ही जा रहा है। फलतः भारत को अन्य देशों से कपास आयात करना पड़ता है।

    भारत के पास कपास उत्पादन हेतु विस्तृत काली मिट्टी का क्षेत्र उपलब्ध है। अतः सिंचाई सुविधाओं का विकास कर कपास का उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। उत्पादन को बढ़ाकर आयात पर से निर्भरता कम की जा सकती है।

(2) पुराने मशीन-

    भारत में अधिकांश वस्त्र का उत्पादन पूराने मशीनों से किया जाता है। जबकि USA, चीन, मिस्र, जैसे आधुनिक तकनीक का प्रयोग कर सूती का उत्पादन करते हैं जिसके कारण भारतीय सूती वस्त्र उद्योग अन्तर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में पिछड़‌ता जा रहा है। लेकिन, नई औद्योगिक नीति की घोषणा से यह उम्मीद जगी है कि भारत में नवीन विदेशी तकनीक आगमन होगा।

(3) अनियमित विद्युत की आपूर्ति-

     देश में लगातार ऊर्जा की मांग बढ़ती जा रही है। माँग के अनुरूप विद्युत की आपूर्ति न होने के कारण कोई भी कारखाना निर्बाध्य रूप से नहीं चल पाता है। लेकिन, आने वाले समय में परमाणु ऊर्जा, जल विद्युत ऊर्जा इत्यादि के विकास से इस समस्या से निजात मिल सकेगा।

(4) हड़ताल तथा तालाबंदी-

    सूती वस्त्र उद्योग से जुड़े हुए श्रमिक संगठन काफी मजबूत है। ये संगठन अपने मांगों को लेकर हड़ताल करते हैं। अगर उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो कंपनी में ताला लटका देते हैं, जिसके कारण उत्पादन में कमी आती है।

     हालांकि न्यापालिका के हस्तक्षेप से और सरकार के बीच-बचाव से इस समस्या में लगातार कमी आ रही है।

(5) कृत्रिम रेशे के साथ प्रतिस्पर्द्धा-

       देश की गरीब जनता कृत्रिम रेसे से बने वस्त्र का उपयोग करते हैं जो अधिक टिकाऊ, सस्ता तथा आकर्षक होता है जबकि सूती वस्त्र कम टिकाऊ तथा महंगा होता है।

(6) घाटे में चल रही मील-

    भारत में सबसे ज्यादा सूती वस्त्र मील तमिलनाडु में है। लेकिन, तमिलनाडू भारत का मात्र 6.4% ही सूती वस्त्र का उत्पादन करता है। उत्तर भारत में खाद्यान्न फसल की खेती कपास उपजाने वाले भूमि पर की जाने लगी, जिसके कार‌ण कच्चे माल की कमी हो गई। फलतः अधिकांश उत्तर भारत के सूती वस्त्र उद्योग बन्द हो गए। पुनः अधिक आयात शुल्क होने के कारण उसका आयात भी संभव नहीं था। लेकिन नवीन औद्योगिक नीति के कारण इसमें सुधार आने की संभावना है।

निष्कर्ष:

       ऊपर के तथ्यों से स्पष्ट है कि भारत के सूती वस्त्र उद्योग कई समस्याओं का सामना कर रही है। फिर भी, यह भारत का सबसे बड़ा उद्योग है, इस उद्योग में सबसे अधिक लोगों को रोजगार मिला हुआ है।

      यह भारत का पूर्ण रूप से विकेन्द्रित उद्योग है। भारत के पास देशी एवं विदेशी बाजार उपलब्ध है। अतः कहा जा सकता है कि भारत में सूती वस्त्र उद्योग का भविष्य काफी उज्ज्वल है।

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