जलवायु परिवर्तन के विश्वव्यापी परिणामों को निम्नलिखित शीर्षकों के अंतर्गत वर्णन किया जा सकता है-
1. विश्व में फसल प्रारूप और उत्पादन में परिवर्तन होना:-
मौसम वैज्ञानिकों ने हाल ही में एक शोध में पाया कि पर्यावरण में हो रहे तापमान में परिवर्तन का प्रभाव फसलों की पैदावार पर भी पड़ सकता है। यह प्रभाव विभिन्न स्थानों के लिये अलग-अलग होंगे। इस अध्ययन में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि “ग्लोबल वार्मिंग”के कारण विश्व के गरीब और विकासशील देशों की फसलों की पैदावार के ऊपर इसके नकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेंगे, वहीं कुछ विकसित देशों की फसलों के पैदावार में इससे वृद्धि की सम्भावना है।
मौसम वैज्ञानिक महेन्द्र शाह की रिपोर्ट के अनुसार वायुमण्डल में कार्बन डाइ-ऑक्साइड की मात्रा बढ़ने के कारण आने वाले 70 वर्षों में विश्व की कुल फसलों की पैदावार में वृद्धि होगी। साथ ही भूमध्य रेखा के पास के देशों की फसलों की पैदावार पर इसका बुरा प्रभाव पड़ेगा। भूमध्य रेखा के पास ज्यादातर गरीब या विकासशील देश हैं, जिसके कारण करीब-करीब करोड़ों लोगों की इससे प्रभावित होने की आशंका है।
ब्राजील, भारत और दूसरे अफ्रीकी देशों की फसलों की पैदावार कम होने की आशंका है जबकि रूस, चीन, कनाडा तथा अर्जेन्टाइना की फसलों की पैदावार में वृद्धि होने की सम्भावना व्यक्त की गयी है। इन मौसम वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन के लिये पृथ्वी को लगभग 2.2 मिलियन छोटे हिस्सों में बाँट लिया। फिर उनमें से प्रत्येक हिस्से से सम्बन्धित आंकडों, जिनमें मौसम, मिट्टी के प्रकार, भू-प्रदेश, फसलों के प्रकार आदि का अध्ययन किया, फिर इसकी तुलना उन्होंने मौसम परिवर्तन के प्रचलित तीन मॉडलों से की। इसके बाद उन्होंने यह निष्कर्ष दिया कि भूमध्य रेखा के पास का क्षेत्र भविष्य में और गर्म होता जायेगा, जिससे कि वर्तमान में जो फसल उगाई जा रही है, उनकी पैदावार मुश्किल हो जायेगी।
वहीं उत्तरी अमेरिका, रूस तथा चीन के तापमान में भी बढ़ोत्तरी होगी, पर फिर भी वे ठंडे प्रदेश बने रहेंगे, जिससे कृषि का इन उत्तरी हिस्सों में विकास सम्भव हो पायेगा। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह अध्ययन उन देशों को अपनी फसलों के विकल्प खोजने में सहायक सिद्ध होगा, जिन देशों की फसलों को पैदावार के लिये फसलों का चयन कर पायेंगे। सन् 2003 को सदी का सबसे गर्म वर्ष माना गया है।
2. मरुभूमि में वृद्धि होगी:-
एक अध्ययन के बाद यह पता चला है कि 19वीं शताब्दी की तुलना में 20वीं सदी में पृथ्वी का औसत तापमान 0.6 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा है। सन् 1860 जब से वैश्विक तापमान का रिकार्ड रखा जा रहा है, के बाद से पाया गया कि बीती सदी में 90 का दशक सर्वाधिक गर्म वर्ष रहा है जिसमें 1998 में गर्मी के सभी रिकार्ड टूट गये। पिछले 200 वर्षों में वातावरण में कार्बन डाइ ऑक्साइड की मात्रा 30 प्रतिशत बढ़ गयी। वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड के इस बढ़ते स्तर को देखते हुए वैज्ञानिकों ने यह चेतावनी दी है कि सन् 2100 सदी के उत्तरार्द्ध तक पृथ्वी का औसत तापमान आज की अपेक्षा 1.00 से 3.5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जायेगा।
वैज्ञानिक ग्लोबल वार्मिंग के नए खतरों में धरती पर बढ़ते रेगिस्तान को भी जोड़ रहे हैं। मस्थलीकरण का विस्तार इतनी तीव्र गति से बढ़ रहा है कि दुनिया के 110 देशों में रेगिस्तान पांव फैला चुका है। इनमें अल्पविकसित, विकासशील और विकसित सभी तरह के देश शामिल हैं। हर वर्ष मानवीय गतिविधियों के कारण लगभग पांच लाख हेक्टेयर भूमि रेगिस्तान में बदल जाती है। इसके कारण वायुमण्डल के तापमान में अस्थिरता आ जाती है और ग्लोबल वार्मिंग का खतरा बहुत बढ़ जाता है।
अगर हमारे वातावरण का तापमान इसी तरह चढ़ता रहा तो आने वाली सदी में एक ओर विश्व के अधिकांश हिस्से ग्लेसियरों की बर्फ पिघलने के कारण जलमग्न हो जायेंगे तो साथ ही दूसरी ओर शेष बची दुनिया मरुस्थल से आच्छादित हो जायेगी और दोनों ही परिस्थितियाँ मनुष्य के जीवन के लिए बिल्कुल उपयुक्त नहीं हैं।
3. जैव विविधता में परिवर्तन:-
जलवायु परिवर्तन का जैव विविधता प्रभाव दो रूपों में दिखलाई देता है-
(1) धनात्मक प्रभाव,
(2) ऋणात्मक प्रभाव।
(1) धनात्मक प्रभाव-
तापमान वर्षा परिवर्तन से कुछ जातियों को लाभ हुआ है। जैसे वे जातियाँ जो अनुकूलन करने में सक्षम हैं या विश्व के अन्य स्थानों में फैलकर आवास बना लिये हैं अथवा जिन जातियों में मनुष्य लाभ के प्रति प्रभावी हुआ है अथवा मनुष्य का संग-साथ प्रभावी हो गया है। जैसे- चूहा (Mice), कबूतर, घरेलू चिड़ियाँ आदि। इसी प्रकार CO2 की वृद्धि पर वनस्पति जगत में वृद्धि हुई है।
(2) ऋणात्मक प्रभाव-
जलवायु परिवर्तन से विश्व में ऊष्मीकरण हुआ है। ताप वृद्धि को बहुत से जीव सह नहीं पाते हैं। प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के कारण उन जातियों की क्षति हुई जो प्राचीन अवशेष मात्र रह गयी हैं अथवा स्थान विशेष पर ही थोड़ी मात्रा में पायी जाती हैं अथवा आनुवांशिक जैव विविधता कम है अथवा जिनकी वृद्धि दर न्यून है अथवा स्थानान्तरित करने वाले जीवों को जलवायु परिवर्तन से क्षति हुई है। जैसे- भारत में शीत ऋतु में साइबेरिया से कुछ पक्षी आते हैं। यदि कहीं भी जलवायु परिवर्तन होता है तो इनका क्षतिग्रस्त होना स्वाभाविक है।
4. ध्रुवीय हिमखण्ड पिघलेंगे:-
पृथ्वी के तापमान में बढ़ोत्तरी होने के कारण ध्रुवों पर जमे हिम खण्डों और हिमाचल के हिमनदों के पिघलने की प्रक्रिया में तेजी आयी है। इन हिमखण्डों के पिघलने से समुद्रों के जल स्तर में लगातार वृद्धि हो रही है। एक ओर अंटार्कटिका की बर्फ की सतह में दरारें उभर आयी हैं, तो दूसरी ओर आर्कटिक महासागर की चालीस प्रतिशत बर्फ पिछले पचास वर्षों में पिघल चुकी है। अंटार्कटिका की तीन बर्फीली परतें- दक्षिणवर्ती, दक्षिण लार्सन और प्रिंस गुस्तव तो पूरी तरह पिघल कर गायब हो चुकी हैं।
ओस्लो में चल रहे एक अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन में वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि वैश्विक तापमान वृद्धि के कारण दुनिया भर के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। इससे बांग्लादेश और नीदरलैंड सहित विश्व के अनेक देशों के तटीय इलाकों के डूबने का खतरा पैदा हो गया है। विशेषज्ञों ने बताया है कि बर्फ पिघलने के कारण आल्प्स पर्वतमाला के ग्लेशियर पिछले दो दशकों में 20 प्रतिशत से ज्यादा सिकुड़ गये हैं।
दुनिया के सबसे सघन हिमालयी ग्लेशियर श्रृंखला की ऐन तलहटी में अवस्थित भारत के अनेक राज्यों में इस परिघटना ने खतरे की घंटी बजा दी है।
वैज्ञानिकों ने चेताया है कि इस प्राकृतिक आपदा से बचाव के लिये समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गये तो जान-माल की भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है। संयुक्त राष्ट्र संघ की एक परियोजना में किये गये अध्ययन के अनुसार, वाहनों, फैक्ट्रियों और बिजलीघरों से निकलने वाली ग्रीनहाउस गैसों के कारण दुनिया का तापमान सन् 2100 तक 1.4 से 5.8 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है। ऐसा विद्वानों के दूसरे वर्ग का अनुमान है।
उल्लेखनीय है कि दो वर्ष पहले संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम और काठमांडू स्थित ईसीमॉड संस्थान के एक संयुक्त परियोजना में हिमालय के तेजी से पिघल रहे ग्लेशियरों पर गहरी चिन्ता व्यक्त की गयी थी। परियोजना में नेपाल और भूटान हिमालय के 4000 ग्लेशियरों तथा 5000 बर्फानी झीलों का व्यापक जमीनी और उपग्रहीय अध्ययन किया गया। इसके निष्कर्षो में बताया गया था कि नेपाल और भूटान की दर्जनों बर्फीली झीलें ग्लेशियरों के पिघलने के कारण खतरनाक हद तक फूल गयी हैं और आगामी पाँच वर्षों के भीतर कभी भी फट सकती हैं। अध्ययन में सम्भावना जतायी गयी है कि झीलों में लगातार बढ़ रहें जलस्तर के कारण हिमालय और इसकी तलहटी के क्षेत्र भीषण बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं।
संयुक्त राष्ट्र अध्ययन में कहा गया था कि हिमालय का सबसे बड़ा हिस्सा भारत में पड़ता है लेकिन भारतीय क्षेत्र में पड़ने वाले ग्लेशियरों की स्थिति का आंकलन अभी तक नहीं किया गया है। हालांकि भारत भूगर्भीय सर्वेक्षण विभाग के अध्ययनों से पता चला है कि भारतीय हिमालय में पड़ने वाले ग्लेशियर पिघलने के कारण 15 मीटर प्रतिवर्ष की गति से सिकुड़ रहे हैं। पिछले दिनों तिब्बत की पारि छू नदी में बन गयी कृत्रिम झील के कारण हिमाचल प्रदेश में अब तक खतरा बना हुआ है।
अनेक विशेषज्ञ कृत्रिम झील बनने की परिघटनाओं को ग्लेशियरों के पिघलने से जोड़कर देखते हैं। उन्होंने हिमालयी क्षेत्र में बड़ी जल विद्युत परियोजनाओं की सम्भावनाएँ तलाशे जाने के मद्देनजर ग्लेशियरों के पिघलने और इसके परिणामस्वरूप बर्फानी झीलों के फटने की प्रवृत्ति को गम्भीरता से लिये जाने की जरूरत बतायी है।
5. निचले द्वीप व देशों का अस्तित्व संकटमय होगा:-
विश्व के दो सबसे छोटे असइलैंड देशों कीरीबती एवं तुवेलू का अस्तित्व संकट में है। समुद्र का जल स्तर बढ़ने के कारण वे डूबने ही वाले हैं। इन देशों का अस्तित्व संकट में हैं, वैज्ञानिकों की चेतावनी के बाद भी न सँभलने का मालद्वीप एवं बंगाल की खाड़ी के ‘सागर-द्वीपसमूह’ में पाँच में से तीन द्वीपों का अस्तित्व संकट में है।
आइसलैंड फोरम की नौरा में हाल ही सम्पन्न बैठक में तुवेलू के मामले में चर्चा हुई, जो कि समुद्र तल से सिर्फ पाँच मीटर ऊँचा है। यह देश कब डूब जाए, कहा नहीं जा सकता। इससे 12 हजार लोगों की जान खतरे में है।
6. जलवायु परिवर्तन से स्वास्थ्य संकट होगा-
पर्यावरणविद् या मौसम वैज्ञानिक वार्मिंग के अनुसार कई तरह की बीमारियों के पैदा होने का खतरा बढ़ गया है। साथ ही इसका हमारे पर्यावरण पर भी बहुत बुरा असर देखने को मिल रहा है। ब्रिटेन जैसे विकसित देश में भी जलवायु के कारण बदलते मौसम ने कई समस्याएँ खड़ी कर दी हैं। यह ध्यान देने योग्य बात है कि अमेरीका व अन्य चुनिंदा देशों की तरह ब्रिटेन की भी ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन से अग्रणी भूमिका रही है। ब्रिटेन के नागरिक भी अब गरीब देशों की समझी जाने वाली उष्ण कटिबन्धीय बीमारियों की चपेट में आने लगे हैं।
ब्रिटेन के स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस तरह के आकलन में पाया कि हर वर्ष गर्मी के मौसम के तापमान में बढ़ोत्तरी हो रही है, जो यहाँ नागरिकों को मलेरिया और डेंगू के अलावा जोड़ों की बीमारियाँ दे रहा है। ब्रिटिश स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह चेतावनी दी है कि अगले 20 वर्षों में यहाँ के वायुमण्डल के तापमान में जो बढ़ोत्तरी होगी, उससे ग्रीष्मकाल के दौरान अनुमानतः आधे इंग्लैण्ड में महामारियों का संकट उठ खड़ा होगा। इसके अलावा विषाक्त भोजन के मामले में भी बढ़ोत्तरी हो रही है।
एक अनुमान के अनुसार ग्रीष्माकाल में ब्रिटेन में भोजन विषाक्त के दस हजार, लू के दो हजार और त्वचा कैंसर के पांच हजार नये रोगियों की संख्या हर वर्ष बढ़ जायेगी। ग्लोबल वार्मिंग का ऐसा प्रभाव इस रूप में देखने को मिलेगा कि गर्मियों के बाद भीषण शीत, हृदयघात से मरने वालों की संख्या बढ़कर 80 हजार तक पहुँच जायेगी। इसके बाद सन् 2020 तक इस संख्या में 15 हजार और सन् 2050 तक पाँच हजार नये रोगियों के बढ़ने की आशंका वैज्ञानिक जता चुके हैं।
ब्रिटिश स्वास्थ्य मंत्रालय के वैज्ञानिक प्रो. डोनाल्डसन तो और भी भयावह तस्वीर पेश करते हैं। उनके अनुसार ग्लोबल वार्मिंग के कारण देश में जटिल किस्म की उष्ण कटिबन्धीय बीमारी “नील फीवर” का प्रसार हो सकता है।
निष्कर्ष
संक्षेप में, जलवायु परिवर्तन के पृथ्वी पर प्रभाव के बारे में हो सकता है कि हम अधिक आँक रहे हों, लेकिन यह भी हो सकता है कि हम वास्तविकता से कम आँक रहे हैं, इसलिये जरूरी है कि ग्रीन हाउस गैस सान्द्रता को घटाने के लिये हम प्रभावशाली कदम बढ़ायें।
हरितगृह प्रभाव, प्रदूषण एवं अन्य भौतिक परिवर्तनों से पृथ्वी की जलवायु में परिवर्तन उल्लेखनीय मात्रा में हो रहे हैं। पृथ्वी की जलवायु में परिवर्तन का बहुत बड़ा कारण ग्रीन हाउस गैस (कार्बन डाइ ऑक्साइड, जलवाष्प, मीथेन, नाइट्रस ऑक्साइड) की सतत् वृद्धि से बीसवीं सदी के उत्तरार्द्ध में भारतीय उपमहाद्वीप की लाखों एकड़ उपजाऊ जमीन पानी में समा जायेगी।
अकेले बांग्लादेश की ही 13 मिलियन आबादी प्रभावित होगी। चावल उत्पादन में 16 प्रतिशत की कमी आ जायेगी, क्योंकि बाग्लादेश में चावल उत्पादन के लिए उपाजाऊ जमीन का 17.5 प्रतिशत हिस्सा सागरों में समा जायेगा। बढ़े हुए तापमान के कारण पेड़ों तथा जमीन की ऊपरी सतह नमी के वाष्पीकरण में तेजी से वृद्धि होगी। अमेरीका की सम्मानित संस्था ईपीए के अनुसार तापमान में 4ºC वृद्धि से वाष्पीकरण में 30 से 40 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है, जिससे एशिया तथा अफ्रीका के अर्द्धशुष्क प्रदेश पूर्ण शुष्क प्रदेशों में बदल जायेंगे। घास के बड़े-बड़े मैदानों में तेजी से कमी आयेगी, जिससे पशुओं के चारे, पानी की समस्या विकराल रूप लेगी।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार अफ्रीका, मध्य पूर्व तथा दक्षिण यूरोप में पीने के पानी की समस्या और बढ़ेगी। विश्व की औसत वर्षा में वृद्धि होगी पर इसके वितरण में असमानता बढ़ती जायेगी। तापमान में वृद्धि के कारण वातावरण के निचले स्तर में शक्तिशाली प्रदूषक “ओजोन”की मात्रा में वृद्धि हो रही है। तापमान के साथ-साथ मच्छरों से फैलने वाले रोग जैसे- मलेरिया, पीला बुखार, डेंगू आदि में वृद्धि होगी। सन् 2001 तक अमरीका में उद्योगों से उत्सर्जित होने वाली कार्बन डाइ ऑक्साइड की मात्रा सन् 1990 के स्तर से 8.3 प्रतिशत बढ़ चुकी थी।
जलवायु परिवर्तन के निम्नलिखित कारक जिम्मेदार है-
1. प्रदूषण:-
प्रदूषण आज की अन्तर्राष्ट्रीय समस्या बन चुका है। जलवायु परिवर्तन में प्रदूषण महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बढ़ती आबादी के कारण विभिन्न क्षेत्रों में पर्यावरण असन्तुलित हो रहा है। महानगरीय क्षेत्रों में औद्योगीकरण एवं जनसंख्या विस्फोट के कारण तापमान द्वीप, प्रदूषण, गुम्बद तथा ‘ओजोन परत में छेद’ आदि के कारण पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है जिससे प्रदूषण क्षेत्र न्यून वर्षा के गर्म क्षेत्र बन जाते हैं। वायुमण्डल में ओजोन परत में छेद होने के कारण आगत वर्षों में पराबैंगनी किरणों का प्रभाव 8 से 15 प्रतिशत और बढ़ जायेगा। महानगरीय सीमेंट के जंगलों में एक विशेष जलवायु परिवर्तन हो जाया करता है जिससे उच्च तापमान द्वीप बनते हैं।
2. भौतिक परिवर्तन-
अलनिनो प्रभाव इस भौतिक परिवर्तन में उल्लेखनीय है। दक्षिणी अमेरीकी महाद्वीप के तटवर्ती प्रशांत महासागर में तापमान असमान रूप से बढ़ जाने से मौसम में बदलाव आता है। इसका सीधा असर भारत के दक्षिणी-पश्चिमी मानसून पर पड़ता है जो भारत में 80 प्रतिशत वर्षा से अधिक के लिये जिम्मेदार है। यह मानसून मई से सितम्बर तक सक्रिय रहता है।
भारत, बांग्लादेश एवं पाकिस्तान में अलनिनो का प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है। अर्थात् भारतीय महाद्वीप में अलनिनो ने भारतीय मानसून को अत्यधिक प्रभावित किया ही है। साथ ही आस्ट्रेलिया और दक्षिणी चीन में अनावृष्टि की है।
अलनिनो का प्रभाव-
अलनिनो प्रशांत महासागर में पैदा होने वाली गर्म जलधाराओं का प्रभाव है जो पूरी दुनिया में उथल-पुथल मचा सकता है। यह गर्म जलधारा मात्रा प्रशांत महासागर में इसलिए पैदा होती है क्योंकि इस क्षेत्र पर सूर्य की सीधी किरणों के कारण समुद्र का तापमान बहुत अधिक बढ़ जाता है। जलवायविक वैज्ञानिकों का मानना है कि अलनिनो के कारण पैदा होने वाली हवाएँ पूरब से पश्चिम की ओर जिस भी क्षेत्र से गुजरती है वहाँ पर जलवायु के विपरीत प्रभाव डालती हैं। अलनिनो के कारण इंडोनेशिया में सूखा पड़ा। भारत में भी अलनिनो के प्रभाव से मानसून अस्थिरता की पराकाष्ठा पर पहुँच गया है।
3. वनों का ह्रास-
वनों की आग का प्रभाव आस्ट्रेलिया और इण्डोनेशिया के जंगलों में प्रत्यक्ष देखा जा सकता है। वन भूमि पर कृषि भूमि का दबाव भारत में सबसे अधिक वन विनाश का प्रभाव जलवायु पर और जलवायु का प्रभाव वन विनाश पर स्पष्ट है। विश्व सन्दर्भ में तापमान की बढ़ोत्तरी जलवायु परिवर्तन का मुख्य बिन्दु है।
विगत अनुमान से जलवायु परिवर्तन विशेषतः दुगना बढ़ रहा है। निरंतर जलवायु का पृथ्वी पर खतरनाक प्रभाव पड़ रहा है। यह जैसा सोचा गया था, उससे कहीं अधिक घातक है। पृथ्वी को इस भयावह प्रभाव से बचाने की सख्त जरूरत है। ये चेतावनी संयुक्त राष्ट्र द्वारा गत माह “मौसम परिवर्तन” पर तीसरी अध्ययन रिपोर्ट जारी करते हुए “Inter Governmental Panel on Climate Change” डॉ. राबर्ट वाटसन ने दी है। इस रिपोर्ट के अनुसार, पृथ्वी का तापमान पूर्वानुमानों की तुलना में दुगुनी गति से बढ़ रहा है। मौसम परिवर्तन पर्यावरण से जुड़ा यह गम्भीर मुद्दा है।
अध्ययन दल से जुड़े एक अन्य सदस्य ने भूमण्डल का तापमान बढ़ने का पर्यावरण के लिये महासंकट की भविष्यवाणी की है। संयुक राष्ट्र की ताजी रिपोर्ट तीन हजार वैज्ञानिकों के कठिन परिश्रम के बाद तैयार की गयी है। कम्प्यूटर आधारित गणना के आधार पर दावा है कि शताब्दी के अन्त तक तापमान में 5.8 डिग्री सेल्सियस बढ़ोत्तरी हो सकती है। इस स्थिति के लिये वे प्रकृति को नहीं, बल्कि इंसानी गतिविधियों को जिम्मेदार मानते हैं। उनका कहना है कि औद्योगिक प्रदूषण और गैसों का निस्तारण हालात बिगाड़ने में सर्वाधिक दोषी हैं। पृथ्वी के पर्यावरण पर मँडरा रहे खतरे के लिए संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार औद्योगिकी रूप से समृद्ध देश जिम्मेदार हैं।
औद्योगिक प्रदूषण एवं उद्योगों से निकली गैसों के वायुमण्डल में मिलने से पृथ्वी क तापमान बढ़ रहा है। मौसम विज्ञान अध्येता डॉ. आर. वाटसन का कहना है कि “मौसम के पृथ्वी पर प्रभाव के बारे में हो सकता है कि हम अधिक आंक रहे हों, लेकिन यह भी हो सकता है कि हम वास्तविकता से कम आंक रहे हैं। इसलिये जरूरी है कि ग्रीन हाउ गैस सान्द्रता को घटाने के लिये हम प्रभावशाली कदम बढ़ाएँ।” उनका विश्वास है कि यह गैस औद्योगिक रूप से समृद्ध देश ही सर्वाधिक बढ़ रहे हैं।
विश्व सन्दर्भ में जलवायु परिवर्तन को संक्षेप में लिखा जा सकता है कि जलवायु परिवर्तन से मुख्य आशय तापमान की बढ़ोत्तरी है जिसे डॉ. दिनेश मणि ने अपने शोध लेख ‘पृथ्वी की गरमाहट’ में बतलाया कि भारत और अन्य देशों में 2010 से 2070 ई० तक की अवधि में हरित ग्रह प्रभाव के कारण मानसून में भारी वृद्धि होगी तथा नीचे के इलाके जलमग्न एवं बाढ़ग्रस्त हो जायेंगे। छोटे द्वीप डूब जायेंगे और समुद्र के तट नष्ट हो जायेंगें और कृषि भूमि एवं मछलियाँ कम हो जायेंगी। विश्व का तापमान बढ़ने से मलेरिया, कालाजार, मस्तिष्क शोध, नेत्र रोग, आदि बढ़ सकते हैं।
अन्तर्राष्ट्रीय पर्यावरण संगठन की रिपोर्ट से भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान, इथोपिया आदि देशों में मलेरिया, कालाजार की वापसी इसका प्रमाण है। जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र संघ के अनुसार आगामी वर्षों में विश्व के औसत तापमान में प्रति दशक 0.3 प्रतिशत की वृद्धि होगी और इस प्रकार विद्वानों का एक वर्ग मानता है कि सन् 2100 के अन्त तक 3.6 सेल्सियस तापमान बढ़ जायेगा।
वाशिंगटन स्थिति प्रसिद्ध अनुसंधान केन्द्र ‘Climate Institute’ ने एशिया में जलवायु परिवर्तन नामक नवीन प्रतिवेदन में बतलाया कि हरित ग्रह गैसों की अधिकता के कारण भारत, लक्षद्वीप, पाकिस्तान, श्रीलंका, इंडोनेशिया, मलेशिया, वियतनाम, फिलीपीन्स, ब्रिटेन (आइसलैण्ड) आदि देशों में तापमान और समुद्र सतह में उठाव का संकट निकट भविष्य में है।
प्रतिवेदन के अनुसार यदि ग्रीन हाउस गैसों में ज्यादा वृद्धि होती है तो इन देशों के समुद्री क्षेत्रों के तापमान में 0.5 डिग्री से 3 डिग्री और मैदानी क्षेत्रों के तापमान में 0.7 डिग्री सेल्सियस से 4.5 डिग्री सेल्सियस तक वृद्धि हो सकती है। ऐसी स्थिति में समुद्र का जलस्तर 15 सेमी. से 90 सेमी. तक बढ़ सकता है। यदि ग्रीन हाउस गैसों में मध्यम स्तर की वृद्धि होती है तब समुद्री क्षेत्रों के तापमान में 0.3 डिग्री और मैदानी क्षेत्रों के तापमान में 0.5 डिग्री से 2.5 डिग्री सेल्सियस तक वृद्धि हो सकती है।
जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से फलोत्पादन एवं कृषि उत्पादन में अंतर आना स्वाभाविक है। कार्बन डाई ऑक्साइड की सान्द्रता के कारण वायुमण्डल में नमी बढ़ती है और वर्षा की सम्भावना बढ़ जाती है। कीटजनित रोगों के लिए अनुकूल होते हैं तो खाद्य समस्या को प्रत्यक्ष प्रभावित करते हैं
सर्वात्रिक परिसंचरण मॉडल सन् 2030 तक विश्व तापमान में 1.5 से 5.2 डिग्री सेल्सियस तक वृद्धि होने का संकेत देते हैं। ये मॉडल ऊपरी वायुमण्डल के ठण्डा होने के साथ-साथ सतह के गर्म होने का संकेत भी देते हैं। खासकर ऊपरी तथा मध्य अक्षांशों में तापमान में सर्वाधिक परिवर्तन होने की सम्भावना है।
शरदकाल में तापमान की वृद्धि औसत परिवर्तन में दुगुनी या उससे भी ज्यादा हो सकती और यह वृद्धि बड़ी तेजी से होगी। दुगनी कार्बन डाइ ऑक्साइड सान्द्रता के साथ जलचक्र 10 प्रतिशत अधिक तीव्रता से काम करेगा, वायुमण्डल के तापमान में 5.8 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि औसत उसकी जलवहन क्षमता की लगभग 40 प्रतिशत तक बढ़ा देगी जो कि जलवायु में भारी परिवर्तन का संकेत है।
4. Latitude, Longitude, International Date Line and Time
(अक्षांश, देशांतर, अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा व समय)
अक्षांश (Latitude) या Parallel
पृथ्वी के केन्द्र पर बनाये गये उदग्र (Vertical) कोणीय मान को अक्षांश कहते हैं। दूसरे शब्दों में ग्लोब पर किसी स्थान तथा विषुवतरेखा के मध्य कोणीय दूरी को उस स्थान का आक्षांश कहते हैं। यह कोणीय दूरी ग्लोब के केन्द्र से मापी जाती है।
➤ सामान्य परिभाषा के अनुसार ग्लोब पर पूरब से पश्चिम दिशा की ओर खींची गयी काल्पनिक रेखा को अक्षांश रेखाकहते हैं।
➤ ग्लोब पर समान आक्षांश वाले बिन्दुओं को मिलाने वाले काल्पनिक वृत्तों को आक्षांश वृत्त कहा जाता है। विषुवत रेखा पूर्ण वृहत् वृत्त (Great Circle) होती है तथा शेष समस्त आक्षांश वृत्त लघु वृत्त होते हैं।
वृहत वृत्त:-
वृहत वृत्त वह रेखा होती है जो गोलाकार पृथ्वी को दो समान परिधियों वाले गोलाद्धों में विभाजित करती है। पृथ्वी पर सभी देशान्तरों (Meridians) के अतिरिक्त भूमध्य रेखा/विषुवत रेखा एक वृहत वृत्त भी है।
➤ भूमध्यरेखा पृथ्वी के मध्य से होकर गुजरने वाली अक्षांश रेखा है। इसे विषुवत रेखा या 0° अक्षांश भी कहते हैं। इस पर वर्ष भर दिन-रात बराबर होते हैं। इसलिए इसे विषुवत रेखा कहते हैं।
➤ विषुवत रेखा वृहत् वृत का उदाहरण है क्योंकि यह पृथ्वी को दो बराबर भागों में बाँटती है।
➤ भूमध्यरेखा पृथ्वी को दो गोलार्द्धों (उत्तरी और दक्षिणी) में विभक्त करती है।
➤ अक्षांश रेखाओं का मान न्यूनतम 0º और अधिकतम 90º होता है।
➤ उत्तरी गोलार्द्ध में खीची गई अक्षांश रेखा को N के द्वारा और दक्षिणी गोलार्द्ध में खींची गई रेखा को S के द्वारा निरुपित करते है।
अश्व अक्षांश (Horse Latitude):-
30° से 35° उत्तरी एवं दक्षिणी अक्षांश के मध्य स्थित पेटी को अश्व अक्षांश कहा जाता है। इसे उपोष्ण उच्च वायुदाब पेटी (Subtropical High Pressure Belt) भी कहते हैं। इसके बनने का कारण इन अक्षांशो के मध्य प्रतिचक्रवातों का उत्पन्न होना है।
0º अक्षांश⇒ भूमध्यरेखा या विषुवत रेखा (Equator)
23½º N अक्षांश⇒ कर्क रेखा (Tropic of Cancer)
23½º S अक्षांश⇒ मकर रेखा (Tropic of Capricorn)
66½º N अक्षांश⇒ आर्कटिक वृत्त
66½º S अक्षांश⇒ अण्टार्कटिक वृत
90º N⇒ उतरी ध्रुव
90º S⇒ दक्षिणी ध्रुव
➤ 23½° से 66½° उत्तरी एवं दक्षिणी अक्षांशों के मध्य स्थित क्षेत्र को शीतोष्ण कटिबंधीय क्षेत्र कहते हैं। यहाँ पर वर्ष भर सूर्य की किरणें तिरछी पड़ती हैं।
➤ प्रति 1° पर एक अक्षांश निर्मित होता है। विषुवत रेखा से ध्रुवीय क्षेत्रों की ओर जाने पर अक्षांशीय वृत्त का आकार छोटा होता जाता है, जो ध्रुवों पर अंततः एक बिन्दु में परिवर्तित हो जाता है।
➤ 90° अक्षांश एक बिंदु के रूप में पाया जाता है, जिसे ध्रुव (Pole) कहते हैं। 90° उत्तरी अक्षांश को उत्तरी ध्रुव (North Pole) तथा 90° दक्षिण अक्षांश को दक्षिणी ध्रुव (South Pole) के नाम से जाना जाता है।
➤ 66½° से 90° उत्तरी अक्षांशों के मध्य स्थित क्षेत्र को ध्रुवीय क्षेत्र (Polar Region) कहते हैं। यहाँ 6 महीने का दिन तथा 6 महीने की रात होती है।
➤ भूमध्य रेखा की परिधि की आधी लम्बाई 60° अक्षांश रेखा पर प्राप्त होती है।
➤ 90° अक्षांश रेखा एक बिन्दु के समान होती है।
➤ सभी अक्षांश रेखा (90º को छोड़कर) देशान्तर रेखा को समकोण पर काटती है।
➤ सभी अक्षांश रेखाएँ एक-दूसरे के समान्तर और समान दूरी पर अवस्थित होते हैं।
➤ किसी भी स्थान का अक्षांश रेखा का निर्धारण Pole Star से आने वाली किरण और चक्षु अक्ष के बीच बने कोणीय माप के द्वारा निर्धारित करते हैं।
➤ ग्लोब पर अक्षांश रेखाओं की कुल संख्या 179 है।
नोट: यदि अक्षांश रेखाओं को 1° के अंतराल पर खींचते हैं, तो उत्तरी एवं दक्षिणी दोनों गोलार्द्धों में 89-89 अक्षांश रेखाएँ होंगे। इस प्रकार विषुवत रेखा को लेकर अक्षांश रेखाओं की कुल संख्या 179 होगी क्योंकि दोनों ध्रुव एक बिंदु के रूप में है न कि रेखा या वृत्त के रूप में।
➤ मानचित्र पर अक्षांश रेखाओं की कुल संख्या 181 है।
नोट: यदि अक्षांश रेखाओं को 1° के अंतराल पर खींचते हैं, तो उत्तरी एवं दक्षिणी दोनों गोलार्द्धों में 90-90 अक्षांश रेखाएँ होंगे। इस प्रकार विषुवत रेखा को लेकर अक्षांश रेखाओं की कुल संख्या 181 होगी क्योंकि दोनों ध्रुव मानचित्रों पर एक रेखा के रूप में होती है न कि बिंदु के रूप में।
➤ अक्षांशों की कुल संख्या 180 है।
नोट: यदि अक्षांशों को 1° के अंतराल पर खींचते हैं, तो उत्तरी एवं दक्षिणी दोनों गोलार्द्धों में 90-90 अक्षांश होंगे। यहाँ विषुवत रेखा का मान 0 अक्षांश होगा, इस प्रकार कुल अक्षांशों की संख्या 180 होगी क्योंकि दोनों ध्रुवों का अंश 90º मानचित्र या ग्लोब पर होगा, यहाँ पर एक रेखा या बिंदु के रूप में नहीं होगा।
➤ प्रति 1º की अक्षांशीय दूरी लगभग 111 Km के बराबर होती है जो पृथ्वी के गोलाकार होने के कारण भूमध्यरेखा से ध्रुवों तक भिन्न-भिन्न मिलती है। अर्थात् दो अक्षांशों के बीच की दूरी 111 किमी० होती है।
देशान्तर या याम्योत्तर (Longitude):
ग्लोब पर प्रमुख याम्योत्तर (Prime meridian) तथा किसी दिये गये स्थान के मध्य की कोणीय दूरी को उस स्थान का देशान्तर कहते हैं। यह दूरी ग्लोब के ध्रुवीय अक्ष से मापी जाती है।
➤ देशान्तर ग्लोब पर निर्मित होने वाले ऐसे काल्पनिक अर्द्धवृत्त हैं, जो उत्तर से दक्षिण दिशा की ओर उत्तरी ध्रुव एवं दक्षिणी ध्रुव को जोड़ते हैं। ये देशांतर सदैव अक्षांशों के लम्बवत् निर्मित होते हैं, जो 0° देशान्तर अर्थात् ग्रीनवीच रेखा से किसी स्थान की कोणीय दूरी होती है।
➤ 180° देशान्तर, प्रधान याम्योत्तर के साथ मिलकर ग्लोब पर बृहत-वृत्त का निर्माण करती है।
➤ 0° देशांतर इंग्लैण्ड की राजधानी लन्दन के समीप स्थित ग्रीनविच नामक स्थान से होकर जाता है, जिसे मानक देशांतर अथवा प्रधान याम्योत्तर (मध्याह्न रेखा) कहा जाता है।
➤ दोनों ध्रुवों को मिलाने वाली काल्पनिक रेखा को देशान्तर रेखा कहते हैं।
➤ देशान्तर रेखा हमेशा उत्तर से दक्षिण दिशा में खींची जाती है।
➤ दो देशान्तर रेखाओं के बीच में विषुवत रेखा पर अधिकतम दूरी (111.3 किमी०) होती है जबकि ध्रुवों की ओर जाने पर दोनों देशान्तर रेखाओं के बीच दूरी घटते जाती है।
➤ देशान्तर रेखाएँ पृथ्वी के केन्द्र पर क्षैतिज तल में बनाया गया कोण को व्यक्त करता है।
➤ देशान्तर रेखाओं का न्यूनतम मान 0º और अधिकतम मान 180° होता है।
➤ इस तरह कुल देशांतर रेखाओं की संख्या ग्लोब पर 360 (180+1+179) और मानचित्र पर 361 (180+1+180) होती है।
➤ 0º देशान्तर रेखा को प्रधान मध्यान्ह / प्रधान याम्योत्तर रेखा (Prime Meridian) कहा जाता है। जबकि 180° देशांतर रेखा को अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा कहते हैं।
➤ 0° देशान्तर रेखा पृथ्वी को दो भागों में बाँटती है-
(i) पूर्वी गोलार्द्ध और
(ii) पश्चिमी गोलार्द्ध।
➤ पूर्वी गोलार्द्ध के देशान्तर रेखा को E के द्वारा और पश्चिमी गोलार्द्ध के देशान्तर रेखा को W के द्वारा विरूपित करते हैं।
➤ 1884 ई0 में वाशिंगटन बैठक के दौरान यह निर्णय लिया गया कि 0° देशान्तर रेखा लंदन के एक ग्रीनवीच शहर में स्थित “रॉयल वेधशाला” के कैम्पस में स्थित एक Pointer से होकर गुजरती है। शेष सभी देशान्तर रेखाओं को पूरब एवं पश्चिम में इसके अनुरूप ही खींचते हैं। इस समय ग्रीनविच मध्याह्न को शून्य मानकर अन्य देशान्तरों की गणना की जाती है। समय का निर्धारण भी इसी को आधार मानकर किया जाता है।
भूग्रिड (The Earth Grid):-
किसी प्रक्षेप रचना में एक निश्चित मापनी पर अक्षांश और देशान्तर रेखाओं के रेखा जाल को भूग्रिड कहते हैं।
गोरे (Gore)
दो देशान्तर रेखाओं के बीच की दूरी गोरे (Gore) नाम से जानी जाती है।
समय का निर्धारण
पृथ्वी एक घूर्णन पूरा करने में लगभग 24 घंटे का समय लेती है। घूर्णन की यह अवधि पृथ्वी दिवस (Earth Day) कहलाती है। इसका अर्थ है कि पृथ्वी गोलाकार होने के कारण 24 घंटे में 360° पूरा कर लेती है। इसलिए प्रत्येक 15° देशान्तर की दूरी को पूरा करने के लिए यह एक घंटा तथा 1° देशान्तर की दूरी को पूरा करने के लिए 4 मिनट का समय लेती है।
➤ 0° से 180° पूर्व की ओर जाने पर 12 घंटे का समय लगता है और इस प्रकार यह ग्रीनविच समय से 12 घंटे आगे होता है। ठीक इसी प्रकार 0° से 180° पश्चिम की ओर जाने पर ग्रीनविच समय से 12 घंटे का समय लगता है। यही कारण है कि 180° पूर्व व पश्चिम देशान्तर में कुल 24 घंटे अर्थात् एक दिन और एक रात का अंतर पाया जाता है।
➤ पृथ्वी को एक-एक घंटे के 24 समय क्षेत्रों में बाँटा गया है। इन समय क्षेत्रों को ग्रीनविच मीन टाइम व मानक समय में एक घंटे के अन्तराल के आधार पर विभाजित किया गया है अर्थात प्रत्येक जोन 15° के बराबर होता है।
➤ पृथ्वी पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है। अतः अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग समय पर दिन की शुरुआत होती है।
➤ ग्रीनविच मीन टाइम से पूर्व स्थित स्थानों पर ग्रीनविच मीन टाइम से पश्चिम दिशा में स्थित स्थानों की तुलना में सूर्योदय पहले होता है।
➤ चूँकि सूर्य पूर्व में उदित होता है तथा पृथ्वी पश्चिम से पूर्व की ओर घूम रही है। अत: 0° देशान्तर से पूर्व का समय आगे तथा पश्चिम का समय पीछे रहता है। इसी कारण पृथ्वी के सभी स्थानों पर समय की भिन्नता देखने को मिलती है।
मानक समय (Standard Time)
मानक समय किसी देश के मध्य से गुजरने वाली याम्योत्तर का माध्य होता है, जो स्थानीय समय की असुविधा को दूर करने के लिए संपूर्ण देश के लिए लागू माना जाता है। प्रत्येक देश का मानक समय ग्रीनविच मीन टाइम से आधे घंटे (अथवा 0° देशान्तर के 7½º) के गुणक के अन्तर पर निर्धारित किया जाता है।
➤ मानक समय स्वेच्छा से चयनित याम्योत्तर का स्थानीय समय होता है जो एक विशिष्ट क्षेत्र या देश के लिए मानक समय निर्धारित करता है। उदाहरण के लिए 82½° पूर्वी देशान्तर (याम्योत्तर) जो कि प्रयागराज के निकट मिर्जापुर से होकर गुजरती है, संपूर्ण भारत के लिए मानक समय (IST) का निर्धारण करती है।
➤ भारत का स्थानीय समय ग्रीनविच मानक समय से 5½ घंटा आगे है। अतः जब ग्रीनविच में दोपहर के 12 बजे हों तो उस समय भारत में शाम के 5½ (5:30PM) बजेंगे। इससे भारत के विभिन्न प्रदेशों में देशान्तरीय अंतर के कारण समय की भिन्नता को समायोजित करने की समस्या से मुक्ति मिल जाती है।
➤ किसी देश का मानक समय उस देश के माध्य देशांतर पर निर्भर करता है, अर्थात् प्रत्येक देश का एक मानक समय होता है, परंतु कुछ देश इसके अपवाद हैं। जैसे- अविभाजित रूस में 11 समय क्षेत्र (Time Zone) थे जो विभाजन के बाद केवल चार रह गए हैं, इसी प्रकार कनाडा में 6, संयुक्त राज्य अमेरिका में 6 तथा चीन में 1 समय क्षेत्र हैं, वर्तमान समय में भारत में भी दो समय क्षेत्र बनाने की माँग बढ़ रही है।
स्थानीय समय (Local Time)
स्थानीय मध्याह्न समय वह समय है जब सूर्य उस स्थान विशेष पर लम्बवत् चमकता है। इस प्रकार यह पृथ्वी पर स्थान विशेष का सूर्य की स्थिति से परिकलित समय है। भारत के सर्वाधिक पूर्व (अरुणाचल प्रदेश) एवं सर्वाधिक पश्चिम (गुजरात के द्वारका) में स्थित स्थानों के स्थानीय समय में लगभग दो घंटे का अंतर पाया जाता है।
स्थानीय समय की गणना में सहायक कुछ प्रमुख कारक
➤ 0° देशांतर (ग्रीनविच रेखा) के बायीं ओर पश्चिमी देशांतर व दायीं ओर पूर्वी देशांतर होता है जबकि 180° देशांतर (अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा) के बायीं ओर पूर्वी देशांतर व दायीं ओर पश्चिमी देशांतर होता है।
➤ किसी भी देशांतर से जब बायीं ओर जाते हैं तो प्रत्येक 1° देशांतर पर समय में 4 मिनट की कमी आती है, जबकि दायीं ओर 4 मिनट की वृद्धि होती है।
➤ 180° देशांतर (अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा) के बायीं ओर जाने पर एक दिन जोड़ना पड़ता है, जबकि दायीं ओर जाने पर एक दिन घटाना पड़ता है।
➤ किसी जलपोत या विमान द्वारा यात्रा करने पर स्थानीय समय निकालने के पश्चात् उसमें आवश्यकतानुसार यात्रा अवधि को जोड़ा या घटाया जाता है। वह विमान या जलपोत कब पहुँचेगा यह ज्ञात करने के लिए यात्रा अवधि को स्थानीय समय में जोड़ा जाता है, जबकि वह कब चला था यह जानने के लिए स्थानीय समय निकालने के पश्चात् यात्रा अवधि घटाई जाती है।
अन्तर्राष्ट्रीय तिथि रेखा (International Date Line)
ग्लोब पर 180° याम्योत्तर के लगभग समानांतर स्थलखंडों को छोड़ते हुए निर्धारित की गई काल्पनिक रेखा, जिसे अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा कहा जाता है।
➤ अन्तर्राष्ट्रीय तिथि रेखा 180° देशान्तर के सहारे निर्मित हुई है जो 180° देशान्तर के दायें या बायें मुड़ जाती है ताकि स्थलीय भागों का विभाजन न हो और लोगों को तिथियों के बारे में भ्रम न हो।
➤ रूस, एल्यूशियन द्वीप, फिजी, टोंगा तथा चैथम द्वीपों के कारण तीन स्थानों से हट गई है, ये रेखा 8 स्थानों पर विचलित भी हुई है।
➤ साइबेरिया को विभाजित होने से बचाने एवं साइबेरिया को अलास्का से अलग रखने के लिए 75° उत्तरी अक्षांश पर यह पूर्व की ओर मोड़ी गई है।
➤ यह रेखा आर्कटिक सागर, चुक्ची सागर, बेरिंग जल सन्धि व प्रशान्त महासागर से होकर गुजरती है।
➤ बेरिंग जलसन्धि अन्तर्राष्ट्रीय तिथि रेखा के समानान्तर स्थित है।
➤ बेरिंग सागर में यह रेखा पश्चिम की ओर मोड़ी गई है।
➤ फिजी द्वीप समूह एवं न्यूजीलैंड के विभिन्न भागों को एक साथ रखने के लिए यह रेखा दक्षिणी प्रशांत महासागर में पूर्व दिशा की ओर मोड़ी गई है।
➤ अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा के पूर्व व पश्चिम में एक दिन का अंतर पाया जाता है। अतः इसे पार करते समय एक दिन बढ़ाया या घटाया जाता है।
➤ जब कोई जलयान अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा को पार कर पश्चिम दिशा में यात्रा करता है तो एक दिन जोड़ दिया जाता है तथा जब पूर्व दिशा में यात्रा करता है तो एक दिन घटा दिया जाता है।
➤ अन्तर्राष्ट्रीय तिथि रेखा के अनुसार कोई भी समय (मध्य रात्रि, सूर्योदय, सूर्यास्त आदि) सबसे पहले किरिबाति देश के कॅरोलीन द्वीप समूह के लाँग आइलेट में होता है। यह देश प्रशांत महासागर में स्थित है।
➤ नार्वे देश को अर्द्धरात्रि सूर्य का देश कहा जाता है क्योंकि उत्तरी नॉर्वे के हेमरफेस्ट शहर में एक वर्ष में 76 दिन-रात सिर्फ 40 मिनट की होती हैं।
➤ ये आर्कटिक वृत्त (66½º अक्षांश) के ऊपर स्थित है जहाँ सूर्य का प्रकाश 6 महीने के लिए रहता है।
अक्षांश, देशांतर, अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा व समय से सम्बंधित पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ट प्रश्नोत्तर
1. भूमध्य रेखा से उत्तर या दक्षिण किसी दिये गये स्थान की कोणीय दूरी क्या कहलाती है?
[A] प्रधान देशान्तर [B] देशान्तर [C] अक्षांश [D] इनमें से कोई नहीं
[C] अक्षांश
2. निम्नलिखित में से कौन-सा वृहत वृत्त (Great Circle) का उदाहरण है?
[A] कर्क रेखा – 23½º N [B] मकर रेखा – 23½º S [C] आर्कटिक वृत्त – 66½º N [D] प्रधान याम्योत्तर-180°
[D] प्रधान याम्योत्तर-180°
16. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?
[A] देशान्तर रेखाओं की कुछ संख्या 180 है। [B] किसी भी स्थान की ग्रीनविच रेखा से कोणीय दूरी को उस स्थान का देशान्तर कहा जाता है। [C] देशान्तर रेखाओं के बीच की दूरी विषुवत रेखा पर अधिकतम एवं ध्रुवों पर शून्य होती है। [D] विषुवत रेखा पर देशान्तर रेखाओं के बीच की दूरी 111.3 किमी० होती है।
[A] देशान्तर रेखाओं की कुछ संख्या 180 है।
17. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?
[A] विषुवत रेखा से ध्रुवों की ओर जाने पर अक्षांश रेखाओं के बीच की दूरी स्थिर रहती है। [B] किसी भी स्थान की प्रधान याम्योत्तर से कोणीय दूरी को उस स्थान का अक्षांश कहा जाता है। [C] विषुवत रेखा एक बृहत् वृत्त है। [D] सभी देशान्तर रेखाएँ वृहत् वृत्त है।
[B] किसी भी स्थान की प्रधान याम्योत्तर से कोणीय दूरी को उस स्थान का अक्षांश कहा जाता है।
18. दो अक्षांश रेखाओं के बीच की दूरी लगभग होती है-
37. अन्तर्राष्ट्रीय तिथि रेखा की स्थिति निम्न में से किसके निकटतम है?
[A] 0° अक्षांश [B] 90° पूर्वी एवं पश्चिमी देशान्तर [C] 0° देशान्तर [D] 180° पूर्वी एवं पश्चिमी देशान्तर
[D] 180° पूर्वी एवं पश्चिमी देशान्तर
38. अन्तर्राष्ट्रीय तिथि रेखा टेढ़ी-मेढ़ी है। ऐसा होने का कारण है
[A] समय एवं तिथि के अन्तर को समाप्त करना [B] हवाई जहाजों के लिए सही तिथि रखना [C] 180° देशान्तर की विशिष्टता स्थापित करना [D] मार्ग में पड़ने वाले द्वीपों को छोड़ने हेतु
[A] समय एवं तिथि के अन्तर को समाप्त करना
39. अन्तर्राष्ट्रीय तिथि रेखा बिलकुल सीधी नहीं है, क्योंकि इसका कारण है-
[A] अन्तर्राष्ट्रीय समझौता [B] कोरियोलिस बल [C] कुछ देशों के विभिन्न भागों के दिन एवं समय को एकसमान रखना [D] उपर्युक्त में सभी
[C] कुछ देशों के विभिन्न भागों के दिन एवं समय को एकसमान रखना
40. उत्तरी प्रशान्त महासागर में अन्तर्राष्ट्रीय तिथि रेखा के विचलन का कारण है-
[A] हवाई द्वीप समूह [B] क्यूराइल द्वीप समूह [C] एल्यूशियन द्वीप समूह [D] उपर्युक्त सभी
[C] एल्यूशियन द्वीप समूह
41. यदि अन्तर्राष्ट्रीय तिथि रेखा पर दिन के 12 बजे हो तो उस समय भारत का मानक समय क्या होगा?
46. अन्तर्राष्ट्रीय तिथि रेखा 180° देशान्तर से कितनी बार विचलित होती है?
[A] 8 [B] 60 [C] 10 [D] 4
[A] 8
47. अन्तर्राष्ट्रीय तिथि रेखा 180° याम्योत्तर से अन्तर करती है जिससे कि वह-
[A] एक ही प्रशासन के अन्तर्गत द्वीप समूह को विभाजित न करे। [B] बेरिंग जलडमरूमध्य को विभाजित न करे। [C] एक ही प्रशासन के अन्तर्गत भू-भागों को विभाजित करें। [D] प्रशान्त महासागर को दो बराबर भागों में विभाजित करें।
[A] एक ही प्रशासन के अन्तर्गत द्वीप समूह को विभाजित न करे।
48. यदि किसी स्थान का स्थानीय मानक समय ग्रीनविच समय से 12 घण्टे आगे है तो वह स्थान कहाँ स्थित होगा?
[A] 90° E [B] 90° W [C] 180° E [D] 180° W
[D] 180° E
49. ग्रीनविच पर समय मध्याह्न 12 बजे हैं, 50º पूर्वी देशान्तर पर स्थित एक स्थान पर समय क्या होगा?
50. यदि ग्रीनविच (0° देशान्तर) पर रात्रि के 12.00 बजे है तो 30° पूर्वी देशान्तर पर स्थित काहिरा में क्या समय होगा?
[A] 2:00 बजे रात्रि [B] 8:00 बजे रात्रि [C] 10 बजे रात्रि [D] 12 बजे रात्रि
[A] 2:00 बजे रात्रि
51. पृथ्वी पर दो स्थानों की स्थिति के अनुदैर्ध्य का अंतर 15° है। स्थानीय समय में कितना का अंतर होगा?
[A] 2 घण्टे [B] 1 घण्टा [C] 5 घण्टे [D] 15 घण्टे
[B] 1 घण्टा
52. यदि दो स्थानों के बीच समय में अन्तर 2 घण्टे 20 मिनट है तो देशान्तर में अन्तर होगा?
[A] 35° [B] 45° [C] 40° [D] 30°
[A] 35°
53. अन्तर्राष्ट्रीय दिनांक रेखा कहाँ से होकर गुजरती है?
[A] 0° [B] 180° [C] 90° [D] 270°
[B] 180°
54. ग्रीनविच किस देश में है?
[A] यू०एस०ए० [B] यू० के० [C] भारत [D] हॉलैंड
[B] यू० के०
55. अन्तर्राष्ट्रीय तिथि रेखा के सम्बन्ध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?
[A] यह एक काल्पनिक रेखा है। [B] बेरिंग सागर में यह रेखा पश्चिम की ओर मोड़ी गई है। [C] 75° उत्तरी अक्षांश पर यह रेखा पश्चिम की ओर मोड़ी गई है। [D] न्यूजीलैंड एवं फिजी द्वीप समूह को एक साथ रखने के लिए दक्षिणी प्रशान्त महासागर में यह रेखा पूर्व की ओर मोड़ी गई है।
[C] 75° उत्तरी अक्षांश पर यह रेखा पश्चिम की ओर मोड़ी गई है।
56. भारत और ग्रीनविच के मानक समय में कितने का अन्तर है?
पृथ्वी सदैव अपने अक्ष पर पश्चिम से पूर्व दिशा में लट्टू के समान घूमती रहती है, जिसे पृथ्वी का घूर्णन (Rotation) या परिभ्रमण कहते हैं। इस गति के कारण ही पृथ्वी पर दिन व रात होते हैं। इसीलिए इस गति को दैनिक गति भी कहा हैं।
➤ पृथ्वी का अक्ष भूमध्यरेखीय तल के लम्बवत् रहता है तथा पृथ्वी के केन्द्र से होकर गुजरता है।
➤ इसके एक पूर्ण घूर्णन की अवधि लगभग 24 घंटे (23 घंटा, 56 मिनट 4.09 सेकेण्ड) है। यह अवधि एक दिन का निर्माण करती है।
➤ यदि पृथ्वी अपनी धुरी पर झुकी हुई न होती तो सर्वत्र दिन-रात की अवधि एक समान होती।
➤ यदि पृथ्वी अपनी अक्ष पर न घूमती और सूर्य की परिक्रमा न करती तो पृथ्वी के एक गोलार्द्ध में सदैव दिन बड़े और रातें छोटी होतीं तथा दूसरे गोलार्द्ध में सदैव रातें बड़ी और दिन छोटे होते।
➤ पृथ्वी के घूर्णन की यह गति भूमध्यरेखा पर 0.5 किमी. प्रति सेकेण्ड होती है, 60° अक्षांश पर इसकी आधी 0.23km/h तथा ध्रुवों पर शून्य हो जाती है। अर्थात् ध्रुवों की ओर यह गति क्रमशः कम (धीमी) होती जाती है।
➤ ज्वारीय घर्षण पृथ्वी की घूर्णन गति को कम कर देता है। इस क्रिया के फलस्वरूप दिन की अवधि 0.002 सेकेण्ड प्रति शताब्दी की दर से बढ़ जाती है।
➤ पवनों व समुद्री धाराओं में विक्षेपण, दैनिक ज्वार-भाटा की स्थिति में परिवर्तन, ध्रुवों का चपटाकार स्वरूप, भूमध्य रेखा का उभार (Bulge) तथा उत्तरी चुम्बकीय ध्रुव का गतिमान होना पृथ्वी के घूर्णन गति के कारण ही सम्भव होते हैं।
(2) परिक्रमण अथवा वार्षिक गति:-
पृथ्वी अपने अक्ष पर घूमने के साथ-साथ सूर्य के चारों ओर एक अंडाकार मार्ग पर 365 दिन तथा 6 घंटे में एक परिक्रमा पूर्ण करती है। पृथ्वी की इस गति को परिक्रमण या वार्षिक गति कहते हैं।
➤ पृथ्वी के परिक्रमण पथ अर्थात् अंडाकार मार्ग को भू-कक्षा (Earth Orbit) कहते हैं।
➤ चूँकि पृथ्वी सूर्य के चारों ओर अण्डाकार कक्ष में घूमती है, इसीलिए पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी परिवर्तित होती रहती है। पृथ्वी और सूर्य के बीच की औसत दूरी 14.96 करोड़ किमी. है।
➤ एक वर्ष में एक बार पृथ्वी सूर्य से सबसे दूरस्थ बिन्दु पर तथा दूसरी बार सबसे निकटस्थ बिन्दु पर स्थित होती है।
नक्षत्र दिवस (Sidereal Day):-
एक मध्याह्न रेखा के ऊपर किसी निश्चित नक्षत्र के लगातार दो बार गुजरने के बीच की अवधि को नक्षत्र दिवस कहते हैं। यह 23 घंटे, 56 मिनट व 4 सेकण्ड अवधि की होती है।
सौर दिवस (Solar Day):-
किसी निश्चित मध्याह्न रेखा के ऊपर से सूर्य के दो बार गुजरने की अवधि को सौर दिवस के नाम से जाना जाता है।
➤ जब सूर्य को गतिहीन मानकर पृथ्वी द्वारा उसके परिक्रमण की गणना दिवसों के रूप में की जाती है तब सौर दिवस प्राप्त होता है। इसकी अवधि पूरे 24 घंटे की होती है।
➤ औसत सौर दिवस, नक्षत्र दिवस से 3 मिनट 56 सेकेण्ड बड़ा होता है। इसका कारण यह है कि पृथ्वी अपने अक्ष पर जब एक चक्कर पूरा करती है तो वह अपने कक्ष पर पूर्व की स्थिति से एक अंश आगे निकल जाती है। पृथ्वी की किसी निश्चित मध्याह्न रेखा को सूर्य के सम्मुख पुनः आने में कुछ अतिरिक्त समय लग जाता है।
लीप वर्ष:-
पृथ्वी एक वर्ष या 365 दिन 6 घण्टे में सूर्य का एक चक्कर लगाती है। हम लोग एक वर्ष 365 दिन का मानते हैं तथा सुविधा के लिए 6 घंटे को इसमें नहीं जोड़ते हैं। चार वर्षों में प्रत्येक वर्ष के बचे हुए 6 घंटे मिलकर एक दिन यानी 24 घंटे के बराबर हो जाते हैं। इसके एक अतिरिक्त दिन को फरवरी के महीने में जोड़ा जाता है। इस प्रकार प्रत्येक चौथे वर्ष फरवरी माह 28 के बदले 29 दिन का होता है। इस प्रकार ऐसा वर्ष जिसमें 366 दिन होते हैं उसे लीप वर्ष कहा जाता है।
उपसौर (Perihelion):-
पृथ्वी जब सूर्य के अत्यधिक पास होती है तो इसे उपसौर कहते हैं। ऐसी स्थिति प्रत्येक वर्ष 3 जनवरी को होती है।
➤ उपसौर के समय पृथ्वी और सूर्य के बीच की औसत दूरी 14.70 करोड़ किमी. होती है।
➤ उपसौर की दशा में पृथ्वी सूर्य से सामान्य दिनों की अपेक्षा 7 प्रतिशत अधिक सूर्यताप (Insolation) प्राप्त करता है।
➤ उपसौर की दशा में पृथ्वी का दक्षिणी गोलार्द्ध सूर्य की ओर होता है। इसीलिए यहाँ गर्मी थोड़ी बढ़ जाती है
➤ इस दशा में चूँकि उत्तरी गोलार्द्ध की दूरी अधिक होती है इसलिए उत्तरी गोलार्द्ध में पड़ने वाली गर्मी थोड़ी कम हो जाती है।
अपसौर (Aphelion):-
पृथ्वी जब सूर्य से अधिकतम दूरी पर होती है तो इसे अपसौर कहते हैं। ऐसी स्थिति प्रत्येक वर्ष 4 जुलाई को होती है।
➤ अपसौर के समय पृथ्वी और सूर्य के बीच की औसत दूरी 15.20 करोड़ किमी. होती है।
➤ अपसौर की दशा में पृथ्वी सूर्य से सामान्य दिनों की अपेक्षा 7 प्रतिशत कम सूर्यताप (Insolation) प्राप्त करता है।
➤ अपसौर की दशा में पृथ्वी का उत्तरी गोलार्द्ध सूर्य की ओर होता है। इसलिए दक्षिणी गोलार्द्ध में पड़ने वाली गर्मी थोड़ी कम हो जाती है।
➤ इस दशा में चूँकि उत्तरी गोलार्द्ध की दूरी कम होती है इसलिए उत्तरी गोलार्द्ध में पड़ने वाली गर्मी थोड़ी अधिक हो जाती है।
एपसाइड रेखा:-
उपसौरिक एवं अपसौरिक को मिलाने वाली काल्पनिक रेखा सूर्य के केन्द्र से गुजरती है, इसे ही एपसाइड रेखा कहते हैं।
दिन और रात का छोटा व बड़ा होना
विषुवतरेखीय भाग को छोड़कर विश्व के शेष सभी भागों में विभिन्न ऋतुओं में दिन और रात की अवधि में अंतर पाया जाता है। विषुवत रेखा पर सदैव दिन और रात की अवधि बराबर होती है, क्योंकि इसे प्रकाश वृत्त सदैव दो बराबर भागों में बाँटता है। अतः विषुवत रेखा का आधा भाग प्रत्येक स्थिति में सूर्य का प्रकाश प्राप्त करता है।
➤ ग्लोब पर वह वृत्त जो दिन तथा रात को विभाजित करता है उसे प्रदीप्ति वृत्त कहते हैं।
पृथ्वी पर दिन और रात की स्थिति
उत्तरी गोलार्द्ध 21 मार्च से 23 सितम्बर की अवधि के दौरान सूर्य का प्रकाश 12 घंटे या अधिक समय तक प्राप्त करता है। अतः यहाँ दिन बड़े एवं रातें छोटी होती हैं। हम जैसे-जैसे उत्तरी ध्रुव की ओर बढ़ते जाते हैं, दिन की अवधि भी बढ़ती जाती है। इस समय उत्तरी ध्रुव पर दिन की अवधि छः महीने की होती है और दक्षिणी ध्रुव पर छः महीने की रात होती है।
दक्षिणी गोलार्द्ध 23 सितम्बर से 21 मार्च की अवधि के दौरान सूर्य का प्रकाश 12 घंटे या अधिक समय तक प्राप्त करता है। हम जैसे-जैसे दक्षिणी ध्रुव की ओर बढ़ते हैं, दिन की अवधि भी बढ़ती जाती है। दक्षिणी ध्रुव पर इसी कारण छः महीने तक दिन रहता है जबकि उत्तरी ध्रुव पर इस समय छः महीने की रात रहती है।
सूर्य के सापेक्ष पृथ्वी कि स्थिति
उत्तर अयनांत (Summer Solstice):–
21 जून को विषुवत वृत के उत्तरी भाग में सबसे लंबा दिन तथा सबसे छोटी रात होती है। ठीक इसके विपरीत इसी दिन दक्षिणी गोलार्ध में सबसे लंबी रात एवं छोटी दिन होती है। पृथ्वी की इस अवस्था को उत्तर अयनांत कहते है।
दक्षिण अयनांत (Winter Solstice) :-
22 दिसंबर को विषुवत वृत के दक्षिणी भाग में सबसे लंबा दिन तथा सबसे छोटी रात होती है।ठीक इसके विपरीत इसी दिन उत्तरी गोलार्ध में सबसे लंबी रात एवं छोटी दिन होती है। पृथ्वी की इस अवस्था को दक्षिण अयनांत कहते है।
विषुव-
21 मार्च एवं 23 सितंबर को सूर्य की किरणें विषुवत वृत्त पर सीधी पड़ती है। इस अवस्था में कोई भी ध्रुव सूर्य की ओर नहीं झुका रहता है, इसलिए पूरी पृथ्वी पर रात एवं दिन बराबर होते हैं। इसे विषुव कहा जाता है।
23 सितंबर को उत्तरी गोलार्ध में शरद ऋतु होती है जबकि दक्षिणी गोलार्ध में बसंत ऋतु होती है। 21 मार्च को स्थिति ठीक इसके विपरीत होती है क्योंकि इस दिन उत्तरी गोलार्ध में बसंत ऋतु तथा दक्षिणी गोलार्ध में शरद ऋतु होती है।
21 जून की स्थिति
➤ 21 मार्च व 23 सितम्बर को सूर्य की किरणें विषुवत रेखा पर लम्बवत होती हैं। 21 मार्च के बाद सूर्य के उत्तरायण होने के साथ-साथ उत्तरी गोलार्द्ध में दिन की अवधि में भी वृद्धि होने लगती है व ग्रीष्म ऋतु का आगमन होता है।
➤ 21/22 जून तक सूर्य कर्क रेखा के लम्बवत स्थिति में आ जाता है। इस स्थिति को कर्क संक्रान्ति या ग्रीष्म अयनांत कहते हैं।
➤ 21 जून को उत्तरी गोलार्द्ध में दिन बड़ा (सर्वाधिक अवधि वाला) तथा रात्रि छोटी (न्यूनतम अवधि वाली) होती है। दक्षिणी गोलार्द्ध में इस समय शीत ऋतु होती है। 21 जून के पश्चात् 23 सितम्बर तक सूर्य पुनः विषुवत रेखा की ओर उन्मुख होता है। परिणामस्वरूप धीरे-धीरे उत्तरी गोलार्द्ध में गर्मी कम होने लगती है।
22 दिसम्बर की स्थिति
➤ 22 दिसम्बर को दक्षिणी गोलार्द्ध सूर्य की ओर तथा उत्तरी गोलार्द्ध विपरीत दिशा में स्थित होता है। इस तिथि को सूर्य मकर रेखा (Tropic of Capricorn) पर लम्बवत् चमकता है। इस स्थिति को मकर संक्राति या शीत अयनांत (Winter Solstice)कहते हैं। इस तिथि को दक्षिणी गोलार्द्ध में दिन बड़ा (सर्वाधिक अवधि वाला) तथा रातें छोटी (न्यूनतम अवधि वाली) होती हैं।
➤ इस दौरान दक्षिणी गोलार्द्ध में निम्न वायुदाब अर्थात् ग्रीष्म ऋतु होती है। इसके विपरीत उत्तरी गोलार्द्ध में इस समय उच्च वायुदाब अर्थात् शीत ऋतु होती है, क्योंकि कर्क रेखा पर सूर्य की किरणें तिरछी पड़ती हैं। कर्क रेखा भारत के लगभग मध्य भाग से होकर गुजरती है। इसीलिए इस समय उत्तर-पश्चिम भारत में उच्च वायुदाब का केन्द्र विकसित होता है।
➤ वस्तुतः सूर्य के दक्षिणायन होने अर्थात् दक्षिणी गोलार्द्ध की ओर उन्मुख होने की प्रक्रिया 23 सितम्बर के पश्चात् प्रारंभ हो जाती है, जिससे दक्षिणी गोलार्द्ध में दिन बड़े व रातें छोटी होने लगती हैं। इस समय उत्तरी गोलार्द्ध में इसके विपरीत स्थिति देखी जाती है। 22 दिसम्बर के उपरान्त 21 मार्च तक सूर्य पुनः विषुवत रेखा की ओर उन्मुख होता है तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में धीरे-धीरे ग्रीष्म ऋतु की समाप्ति हो जाती है।
21 मार्च व 23 सितम्बर की स्थितियाँ
➤ इन दोनों स्थितियों में सूर्य की किरणें विषुवत रेखा पर लम्बवत् पड़ती हैं। इसलिए इस समय सभी अक्षांश रेखाओं का आधा भाग सूर्य का प्रकाश प्राप्त करता है। और सर्वत्र दिन व रात की अवधि समान होती है।
➤ इन तिथियों में दिन व रात की अवधि के समान रहने एवं ऋतु की समानता के कारण इन दोनों स्थितियों को विषुव अथवा सम रात-दिन (Equinox) कहा जाता है।
➤ 21 मार्च की स्थिति को बसंत विषुव (Vernal/Spring Equinox) एवं 23 सितम्बर वाली स्थिति को शरद विषुव (Autumnal Equinox) कहा जाता है।
➤ जब सूर्य अण्डाकार (Ecliptic) कक्ष के सहारे वसन्त विषुव (Vernal Equinox) या शरद विषुव (Autumnal Equinox) की दिशा में होता है तो इसका दिक्पात (Declination) शून्य होता है। उस समय पृथ्वी के सभी स्थानों पर दिन व रात 12 घण्टे के होते हैं।
➤ यदि पृथ्वी का अक्ष, कक्ष तल (Orbital Plane) के समकोण पर होता तो पृथ्वी पर ऋतुओं का परिवर्तन नहीं होता। प्रत्येक अक्षांश पर रहने वाले मनुष्य वर्ष भर एक ही प्रकार की ऋतु की अनुभव करते। भूमध्यरेखा के आस-पास के प्रदेश में सदैव ग्रीष्म ऋतु तथा ध्रुवों के पास सदैव शीत ऋतु का अनुभव होता।
➤ उत्तरी ध्रुव पर 6 महीने का दिन वसन्त विषुव (Vernal Equinox) से प्रारम्भ होता है तथा 6 महीने की रात शरद विषुव (Autumnal Equniox) के साथ प्रारम्भ होती है। ऐसी दशा दक्षिणी गोलार्द्ध में भी पायी जाती है।
पृथ्वी की गतियाँ से सम्बंधित पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ट प्रश्नोत्तर
1. पृथ्वी पर दिन तथा रात्रि चक्र किसके कारण होता है?
[A] पृथ्वी का घूर्णन [B] पृथ्वी का परिक्रमण [C] पृथ्वी का घूर्णन तथा परिक्रमण दोनों [D] इनमें से कोई नहीं
[A] पृथ्वी का घूर्णन
2. पृथ्वी अपनी धुरी के चारों तरफ किस दिशा में घूमती है?
[A] पूर्व से पश्चिम [B] पश्चिम से पूर्व [C] उत्तर से दक्षिण [D] दक्षिण से पूर्व
[B] पश्चिम से पूर्व
3. अपने अक्ष पर पृथ्वी एक चक्कर कितने समय में पूरा करती है?
16. पृथ्वी के चारों ओर परिक्रमा कर रहा कृत्रिम उपग्रह इसलिए पृथ्वी पर नीचे नहीं गिरता क्योंकि पृथ्वी का आकर्षण-
[A] चंद्रमा के आकर्षण से निष्क्रिय हो जाता है [B] उतनी दूरी पर अस्तित्वहीन होता है [C] उसकी नियमित चाल के लिए आवश्यक गति प्रदान करता है [D] उसकी गति के लिए आवश्यक त्वरण प्रदान करता है
[D] उसकी गति के लिए आवश्यक त्वरण प्रदान करता है
17. प्रदीप्ति का वृत्त पृथ्वी को कौन से दो गोलर्द्धों में विभाजित करता है?
[A] उत्तरी और दक्षिणी [B] पूर्वी और पश्चिमी [C] दिन और रात [D] ग्रीष्म और शीत
[C] दिन और रात
18. इक्विनोक्स (Equinox)/विषुव होता है जब-
[A] दिन और रात बराबर होते हैं [B] एक वर्ष के दौरान सबसे छोटा दिन होता है [C] एक वर्ष के दौरान सबसे बड़ा दिन होता है [D] एक वर्ष के दौरान जब सबसे अधिक वर्षा होती है
[A] दिन और रात बराबर होते हैं
19. विश्व के सभी अंगों में 23 सितंबर को दिन और रात की समान लंबाई को क्या कहते हैं?
[A] भू-परिभ्रमण [B] भू-परिक्रमण [C] पृथ्वी के अक्ष का झुकाव [D] 91 डिग्री पश्चिम
[A] भू-परिभ्रमण
21. वह कौन-सी तिथि/तिथियों है, जब दोनों गोलर्द्धों (Hemispheres) में दिन और रात बराबर होते हैं?
[A] 22 दिसंबर [B] 21 जून [C] 21 मार्च एवं 23 सितंबर [D] 21 जून एवं 22 दिसंबर
[C] 21 मार्च एवं 23 सितंबर
22. जब दिन और रात की अवधि बराबर होती है तो सूर्य की किरणें सीधी पड़ती है-
[A] भूमध्य रेखा पर [B] उत्तरी ध्रुव पर [C] दक्षिणी ध्रुव पर [D] कर्क रेखा पर
[A] भूमध्य रेखा पर
23. अलग-अलग ऋतुओं में दिन-समय और रात्रि-समय के विस्तार में विभिन्नता किस कारण से होती है?
[A] पृथ्वी का, सूर्य के चारों ओर दीर्घवृत्तीय रीति से परिक्रमण [B] पृथ्वी का अपने अक्ष पर घूर्णन [C] स्थान की अक्षांशीय स्थिति [D] पृथ्वी का नत अक्ष पर परिक्रमण
[D] पृथ्वी का नत अक्ष पर परिक्रमण
24. निम्नलिखित तिथियों में से किसमें दोपहर को आपकी छाया (Shadow) सबसे छोटी होती है?
[A] मार्च 21 [B] दिसम्बर 25 [C] जून 22 [D] फरवरी 14
[C] जून 22
25. निम्नलिखित में से किस तिथि पर उत्तरी गोलार्द्ध में ग्रीष्मकाल अयनांत को देखा जाता है?
[A] 21 जून [B] 5 अगस्त [C] 18 जुलाई [D] 19 दिसंबर
[A] 21 जून
26. निम्नलिखित में से किस-किस तिथियों पर उत्तरी गोलार्द्ध में शीतकाल अयनांत को देखा जाता है?
I. 22 दिसंबर
II. 5 अगस्त
III. 10 जनवरी
[A] केवल I [B] I तथा II दोनो [C] केवल III [D] केवल II
[A] केवल I
27. निम्नलिखित में से किस तिथि पर दक्षिणी गोलार्द्ध में ग्रीष्मकालीन अयनांत (Summer solstice) को देखा जाता है?
[A] 22 दिसंबर [B] 5 अगस्त [C] 18 जुलाई [D] 23 सितंबर
[A] 22 दिसंबर
28. निम्नलिखित में से किस तिथि पर दक्षिणी गोलार्द्ध में शीतकाल अयनांत को देखा जाता है?
[A] 5 अगस्त [B] 10 अगस्त [C] 15 फरवरी [D] 21 जून
[D] 21 जून
29. 21 जून को शीतकालीन सोलस्टिस (अयनांत)…… गोलार्द्ध में होता है।
[A] उत्तरी [B] पूर्वी [C] पश्चिमी [D] दक्षिणी
[D] दक्षिणी
30. दक्षिणी गोलार्द्ध में सबसे बड़ा दिन है-
[A] 22 दिसम्बर [B] 22 जून [C] 21 मार्च [D] 22 सितम्बर
[A] 22 दिसम्बर
31. दक्षिणी गोलार्द्ध में सबसे छोटा दिन होता है।
[A] 22 नवंबर [B] 22 दिसंबर [C] 22 मार्च [D] 21 जून
[D] 21 जून
32. उत्तरी गोलार्द्ध का सबसे लंबा दिन कौन-सा है?
[A] 21 मार्च [B] 21 सितंबर [C] 21 जून [D] 21 अप्रैल
[C] 21 जून
33. उत्तरी गोलार्द्ध में सबसे छोटा दिन होता है।
[A] 22 नवंबर [B] 22 दिसंबर [C] 22 मार्च [D] 22 जून
[B] 22 दिसंबर
34. वर्ष का सबसे बड़ा दिन कौन-सा होता है?
[A] 21 जून [B] 21 मई [C] 22 दिसंबर [D] 25 दिसंबर
[A] 21 जून [C] 22 दिसंबर
35. कौन सी तिथि को सबसे छोटे दिन और सबसे लम्बी रात के रुप में जाना जाता है?
44. सूर्य ग्रहण के समय, निम्नलिखित में से कौन मध्य में रहता है?
[A] पृथ्वी [B] चंद्रमा [C] सूर्य [D] कोई अन्य ग्रह
[B] चंद्रमा
45. सूर्य ग्रहण कब होता है?
[A] जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी के बीच होता है [B] जब पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य के बीच होता है [C] जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच में होता है [D] जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी को जोड़ने वाली रेखा पर नहीं होता है
[C] जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच में होता है
46. प्रत्येक सूर्यग्रहण होता है-
[A] केवल अमावस्या के दिन [B] केवल पूर्णिमा के दिन [C] दोनों (A) तथा (B) [D] न (A) न ही (B)
[A] केवल अमावस्या के दिन
47. खग्रास (पूर्ण) सूर्यग्रहण केवल सीमित भू-क्षेत्र में ही दिखाई पड़ता है क्योंकि
[A] पृथ्वी की सतह सपाट नहीं है बल्कि उसमे उभार और अवनमन हे [B] पृथ्वी के अनुप्रस्थ परिच्छेद की तुलना में पृथ्वी पर पड़ने वाली चंद्र की छाया का आकार छोटा होता है [C] सूर्य के चारों ओर पृथ्वी का तथा पृथ्वी के चारों ओर चंद्र का प्रक्षेप पथ पूर्णतः वृत्ताकार नहीं है [D] वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण सूर्य की किरणे चंद्रछाया के अधिकांश परिधीय क्षेत्र तक पहुँच सकती है
[B] पृथ्वी के अनुप्रस्थ परिच्छेद की तुलना में पृथ्वी पर पड़ने वाली चंद्र की छाया का आकार छोटा होता है
48. सूर्य या चंद्र ग्रहण में पृथ्वी की छाया कितने भाग में विभाजित हो जाती है?
[A] पांच भाग [B] दो भाग [C] चार भाग [D] तीन भाग
[B] दो भाग
49. हीरक बलप, ईश्वर की आँख और बेती के मनके, निम्नलिखित प्राकृतिक घटनाओं में से किस एक के हिस्से है?
[A] पूर्ण सूर्यग्रहण के अंत में [B] पूर्ण सूर्यग्रहण के आरम्भ में [C] केवल पूर्णता पथचिन्ह के परिधीय क्षेत्रों पर [D] केवल पूर्णता पथचिन्ह के केंद्रीय क्षेत्रों पर
[C] केवल पूर्णता पथचिन्ह के परिधीय क्षेत्रों पर
51. चन्द्रग्रहण तब होता है जबकि-
[A] सूर्य व चन्द्रमा के बीच पृथ्वी हो [B] पृथ्वी व चन्द्रमा के बीच सूर्य हो [C] सूर्य व पृथ्वी के बीच चन्द्रमा हो [D] उक्त में से कोई भी अवस्था हो
[A] सूर्य व चन्द्रमा के बीच पृथ्वी हो
52. चंद्र ग्रहण के समय, निम्नलिखित में से कौन मध्य में रहता है?
[A] पृथ्वी [B] चंद्रमा [C] सूर्य [D] कोई अन्य ग्रह
[A] पृथ्वी
53. कौन-सी परिस्थिति में चन्द्रग्रहण होता है-
[A] नव चन्द्र [B] अर्द्ध चन्द्र [C] पूर्ण चन्द्र [D] उपर्युक्त में कोई नहीं
[C] पूर्ण चन्द्र
54. सूर्य और पृथ्वी के बीच चन्द्रमा कब आता है?
[A] चन्द्र ग्रहण [B] सूर्य ग्रहण [C] नक्षत्र दिन [D] पूर्णिमा के दिन
[B] सूर्य ग्रहण
55. ग्रहण के दौरान पड़ने वाली छाया का सबसे काला भाग-
[A] सूर्य, पृथ्वी तथा चंद्रमा की एक ही सीधी रेखा में स्थिति [B] सूर्य तथा चंद्रमा के बीच पृथ्वी की स्थिति [C] पृथ्वी के एक ही ओर सूर्य तथा चंद्रमा की स्थिति [D] सूर्य और पृथ्वी से चंद्रमा की समकोणीय स्थिति
[A] सूर्य, पृथ्वी तथा चंद्रमा की एक ही सीधी रेखा में स्थिति
57. निम्नलिखित में से कौन-सा एक कथन सही नहीं है?
[A] युति-वियुति बिन्दु (सिजिगी) संयोजन सूर्यग्रहण का कारण है। [B] सूर्य, पृथ्वी और चन्द्रमा की 180° कोण की एक सीधी रेखा की स्थिति युति-वियुति बिन्दु (सिजिगी) कहलाती है। [C] युति-वियुति बिन्दु प्रतिकूलता चन्द्र ग्रहण का कारण है। [D] युति-वियुति बिन्दु संयोजन केवल उपसौर के समय होता है।
[D] युति-वियुति बिन्दु संयोजन केवल उपसौर के समय होता है।
58. वसंत ज्वार तब आते हैं, जब
[A] चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी एक रेखा में होते हैं [B] सूर्य पृथ्वी के सबसे निकट होता है [C] चंद्रमा पृथ्वी से सबसे दूर होता है [D] पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के साथ समकोण पर होता है
[A] चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी एक रेखा में होते हैं
59. लघु ज्वार-भाटा होते हैं-
[A] प्रबल [B] दुर्बल [C] मध्यम [D] अत्यंत प्रबल
[B] दुर्बल
60. बृहत ज्वार भाटा आता है-
[A] जब सूर्य तथा चन्द्रमा पृथ्वी से समकोण बनाते हैं। [B] जब सूर्य, पृथ्वी तथा चन्द्रमा एक सीधी रेखा में होते है [C] जब तेज हवा चलती है [D] जब रात बहुत ठंडी होती है
[B] जब सूर्य, पृथ्वी तथा चन्द्रमा एक सीधी रेखा में होते है
61. सभी वृहत् ज्वारों में सबसे ऊँचा ज्वार किस समय घटित होता है?
[A] विषुव के साथ पूर्णिमा या अमावस्या [B] दक्षिण अयनान्त के साथ पूर्णिमा या अमावस्या [C] उत्तर अयनान्त के साथ पूर्णिमा या अमावस्या [D] दक्षिण अयनान्त और वैसे ही उत्तर अयनान्त
[A] विषुव के साथ पूर्णिमा या अमावस्या
62. अप्रत्यक्ष उच्च ज्वार उत्पन्न होने का कारण है-
[A] सूर्य का गुरुत्वाकर्षण बल [B] चन्द्रमा का गुरुत्वाकर्षण बल [C] पृथ्वी का अपकेन्द्रीय बल [D] पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल
[C] पृथ्वी का अपकेन्द्रीय बल
63. कथन I : ज्वार-भाटा, चंद्रमा और सूर्य के द्वारा लगने वाले गुरुत्वीय बल तथा पृथ्वी के घूर्णन के सम्मिलित प्रभावों के कारण समुद्री स्तरों में होने वाले उतार-चढ़ाव है।
कथन II : पृथ्वी, सूर्य के सापेक्ष 24 घंटे में एक बार पश्चिम से पूर्व की ओर घूर्णन करती है।
कूट:
[A] दोनों कथन व्यष्टितः सत्य है किन्तु कथन II, कपन I का सही स्पष्टीकरण नहीं है। [B] दोनों कथन व्यष्टितः सत्य है और कथन II, कथन I का सही स्पष्टीकरण है। [C] कथन I सत्य है, किन्तु कथन II असत्य है। [D] कथन I असत्य है, किन्तु कथन II सत्य है।
[A] दोनों कथन व्यष्टितः सत्य है किन्तु कथन II, कपन I का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
64. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लघु ज्वार भाटा तब आती है जब चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य एक पंक्ति में होते हैं।
2. बृहत् ज्वार भाटा के दौरान तट के निकट जब तीव्र झंझा गुजरता है तो उच्च ज्वार पर, तरंगे ज्वारीय तरंगों का कारण बन सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/है?
[A] केवल 2 [B] केवल 1 [C] 1 और 2 दोनों [D] न तो 1 और ही 2
[A] केवल 2
65. निम्न प्रश्न में दो वक्तव्य है, एक को कथन (A) तथा दूसरे को कारण (R) कहा गया है, इन वक्तव्यों का सावधानीपूर्वक परीक्षण कर इन प्रश्नों का उत्तर नीचे दिए कूट की सहायता से चुनिए-
कूट:
कथन (A): लघु ज्वार-भाटाओं के समय उच्च ज्वार सामान्य से निश्तर तथा निम्न ज्वार सामान्य से उच्चतर होता है।
कारण (R): लघु ज्वार भाटा बृहत ज्वार-भाटा के विपरीत पूर्ण चन्द्र के स्थान पर नव चन्द्र के समय होता है।
[A] A और R दोनों सही है और R, A का सही स्पष्टीकरण है [B] A तथा R. दोनों सही है परन्तु R, A का सही स्पष्टीकरण नहीं है [C] A सही है, परन्तु R गलत है [D] A गलत है, परन्तु (R) सही है
[C] A सही है, परन्तु R गलत है
66. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चंद्र समकोण स्थिति में लघु भाटा आता है।
2. चंद्र समकोण स्थिति के दौरान ज्वार भाटा उत्पन्न करने वाले बल एक-दूसरे के पूरक होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/है?
[A] केवल 2 [B] केवल 1 [C] 1 और 2 दोनों [D] न तो 1 और न ही 2
[B] केवल 1
67. महासागरों और समुद्रों में ज्वार-भाटाएँ किसके/किनके कारण होता/होते हैं?
1. सूर्य का गुरुत्वीय बल
2. चन्द्रमा का गुरुत्वीय बल
3. पृथ्वी का अपकेन्द्रीय बल
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
[A] केवल 2 और 3 [B] केवल 1 [C] केवल 1 और 3 [D] 1, 2 और 3
[D] 1, 2 और 3
68. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए और सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
[A] एक ही कैलेण्डर वर्ष में दो लगातार माहों में चार पूर्णिमाएँ हो [B] एक ही माह में दो पूर्णिमा हो [C] एक ही केलंण्डर वर्ष में तीन बार एक ही माह में दो पूर्णिमाएँ हो [D] उपरोक्त कोई नहीं
[B] एक ही माह में दो पूर्णिमा हो
70. उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों की जलवायु सामान्यतः गर्म होती है, क्योंकि ये …… क्षेत्र के आसपास स्थित होते हैं।
[A] ध्रुव [B] दक्षिणी गोलार्द्ध [C] अधिक ऊंचाई [D] भूमध्य रेखा
[D] भूमध्य रेखा
71. ग्रह गति का केप्लर नियम बताता है कि कालावधि का वर्ग….. के बराबर है।
[A] अर्ध दीर्घ अक्ष [B] अर्ध दीर्घ अक्ष के वर्ग [C] अर्ध दीर्घ अक्ष के घन [D] अर्ध दीर्घ अक्ष की चौथी के समानुपाती
[C] अर्ध दीर्घ अक्ष के घन
72. मौसम बदलने का क्या कारण है?
[A] पृथ्वी का सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाना [B] पृथ्वी का अपनी धुरी पर घूमना (चक्कर लगाना) एवं सूर्य के चारों ओर घूमना (चक्कर लगाना) [C] पृथ्वी का सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाना व अपने अक्ष पर झुका होना [D] पृथ्वी का अपनी धूरी पर चक्कर लगाना व अपने अक्ष पर झुका होना
[C] पृथ्वी का सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाना व अपने अक्ष पर झुका होना
73. मौसम-परिवर्तन पृथ्वी की गति की किस विशिष्टता से होता है-
[A] पुरी पर 23½ अंश का झुकाव [B] सूर्य के चारों ओर परिक्रमा [C] ऊपर बताये गये (A) व (B) का सम्मिलित प्रभाव [D] अपनी धुरी पर घूमना
[C] ऊपर बताये गये (A) व (B) का सम्मिलित प्रभाव
74. निम्नलिखित में से किसने सबसे पहले यह कहा था कि पृथ्वी गोलाकार है?
[A] कोपरनिकस [B] अरस्तु [C] टॉलमी [D] स्ट्रेबो
[B] अरस्तु
75. निम्नलिखित में से किसने सुझाया था कि पृथ्वी का धुरी पर अवस्था बदलना जलवायु परिवर्तन के लिए एक कारक है?
[A] मिलुटिन मिलन कोलिच [B] रॉबर्ट एक [C] जॉर्ज सिम्पसन [D] टी. सी. चैम्बरलिन
[A] मिलुटिन मिलन कोलिच
76. निकोलस कोपरनिकस प्रसिद्ध है?
[A] यह बताने के लिए कि ग्रह सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाते हैं न कि पृथ्वी के [B] दूरबीन के आविष्कार के लिए [C] केलकुलस (Calculus) की खोज के लिए [D] मानव शरीर को शल्प क्रिया का अध्ययन करने के लिए
[A] यह बताने के लिए कि ग्रह सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाते हैं न कि पृथ्वी के
77. निम्न में से कौन जलवायु परिवर्तन के खगोलीय सिद्धान्तों से सम्बन्धित नहीं है?
[A] पृथ्वी की पूर्णन अक्ष की तिर्यकता (झुकाव) [B] पृथ्वी की कक्षा की उत्केन्द्रता (अण्डाकार कक्षीय मार्ग) [C] विषुव अयन (पृथ्वी की सूर्य से अपसौर या उपसौर की स्थिति) [D] सौर किरणित ऊर्जा (सौर विकिरण)
[D] सौर किरणित ऊर्जा (सौर विकिरण)
78. पृथ्वी अपने कक्ष में लगभग 4400 किमी. प्रति घंटा की गति से घूमती है। इस तेज गति को हम अनुभव क्यों नहीं करते हैं?
[A] अपने कक्ष में पृथ्वी की गति की अपेक्षा में हमारी गति शून्य है। [B] पृथ्वी के आकार की अपेक्षा में हम बहुत छोटे है। [C] सम्पूर्ण सूर्य मंडल भी चलायमान है। [D] पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण निरन्तर हमें पृथ्वी के केन्द्र की ओर खींचता है।
[D] पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण निरन्तर हमें पृथ्वी के केन्द्र की ओर खींचता है।
सूर्य तथा सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाने वाले विभिन्न ग्रहों, उपग्रहों, क्षुद्रग्रहों या लघुग्रहों, धूमकेतुओं या पुच्छलताराओं, उल्काओं तथा अन्य आकाशीय पिंडों के समूह को सौरमंडल (Solar system) कहते हैं।
➤ सौरमंडल में सूर्य का प्रभुत्व है, सौरमंडल के समस्त ऊर्जा का स्रोत भी सूर्य ही है।
सौरमंडल की उत्पत्ति से सम्बंधित प्रमुख सिद्धांत
1. अद्वैतवादी संकल्पना (Monistic Concept):-
(i) वायव्य राशि परिकल्पना (1755)- इमैनुएल कांट
(ii) निहारिका परिकल्पना (1796)- लाप्लास
2. द्वैतवादी संकल्पना (Dualistic Concept):-
(i) ग्रहाणु परिकल्पना (1905)- टी०सी० चैम्बरलिन
(ii) ज्वारीय परिकल्पना (1919)– जेम्स जीन्स एवं जेफरीज
4. बिग बैंग तथा स्फीति सिद्धान्त/ महाविस्फोट सिद्धांत-जॉर्ज लैमेण्टर
सूर्य (Sun)
सूर्य हमारी आकाशगंगा के 1011 अरब तारों में से एक है, जिसे सौरमण्डल का जनक, प्रधान या मुखिया कहा जाता है। इस प्रकार सूर्य सौरमण्डल का सबसे बड़ा सदस्य है।
➤ यह हमारी आकाशगंगा दुग्धमेखला “(Milkyway) के केन्द्र से लगभग 30,000 प्रकाश वर्ष की दूरी (पृथ्वी से 14.96 करोड़ किमी. दूरी) पर स्थित है।
➤ सूर्य दुग्धमेखला आकाशगंगा के केन्द्र की 250 किमी. प्रति सेकेण्ड की गति से परिक्रमा कर रहा है।
➤ निरन्तर प्रवाहित सौर पवन (Solar Wind) सूर्य से निकलती रहती है। यह प्रवाहित पवन बराबर संख्या में इलेक्ट्रॉन एवं प्रोटॉन रखती है, जिसको प्लाज्मा (Plasma) कहा जाता है।
➤ सूर्य के प्रकाश को पृथ्वी तक पहुँचने में 8 मिनट 16.6 सेकेण्ड का समय लगता है।
➤ सौर ज्वाला को उत्तरी ध्रुव पर औरोरा बोरियालिस और दक्षिणी ध्रुव पर औरोरा औस्ट्रेलिस कहते हैं।
➤ सूर्य का व्यास 13 लाख 92 हजार किमी है, जो पृथ्वी के व्यास का लगभग 110 गुना है।
➤ सूर्य हमारी पृथ्वी से 13 लाख गुना बड़ा है, और पृथ्वी को सूर्यताप का 2 अरबवां भाग मिलता है।
ब्रह्माण्ड वर्ष (Cosmos Year):-
सूर्य का परिक्रमण काल (दुग्धमेखला के केन्द्र के चारों ओर एक चक्कर लगाने में लगा समय) लगभग 25 करोड़ वर्ष है, जिसे ब्रह्माण्ड वर्ष (Cosmos Year) कहते हैं।
➤ सूर्य अपने अक्ष पर पूर्व से पश्चिम की ओर घूमता है। इसका मध्य भाग 25 दिनों में व ध्रुवीय भाग 35 दिनों में एक घूर्णन पूरा करता है।
➤ सूर्य एक गैसीय गोला है, जिसमें हाइड्रोजन 71%, हीलियम 26.5% एवं अन्य तत्व 2.5% होता है।
➤ सूर्य का केन्द्रीय भाग क्रोड (Core) कहलाता है, जिसका ताप 1.5 करोड़ °C होता है तथा सूर्य के बाहरी सतह का तापमान 6000°C है।
➤ हैंस बेथ (Hans Bethe) ने बताया कि 1 करोड़ °C ताप पर सूर्य के केन्द्र पर चार हाइड्रोजन नाभिक मिलकर एक हीलियम नाभिक का निर्माण करता है। अर्थात् सूर्य के केन्द्र पर नाभिकीय संलयन होता है जो सूर्य की ऊर्जा का स्रोत है।
प्रकाशमंडल तथा वर्णमंडल:-
सूर्य की दीप्तिमान सतह को प्रकाशमंडल (Photosphere) कहते हैं। प्रकाशमंडल के किनारे प्रकाशमान नहीं होते, क्योंकि सूर्य का वायुमंडल प्रकाश का अवशोषण कर लेता है। इसे वर्णमंडल (Chromosphere) कहते हैं। यह लाल रंग का होता है।
प्रकाशमंडल
वर्णमंडल
सूर्य-किरीट:-
सूर्य ग्रहण के समय सूर्य के दिखाई देनेवाले बाह्यतम भाग को सूर्य-किरीट (Corona) कहते हैं। सूर्य-किरीट X-ray उत्सर्जित करता है। इसे सूर्य का मुकुट कहा जाता है। पूर्ण सूर्य ग्रहण के समय सूर्य-किरीट से प्रकाश की प्राप्ति होती है। सूर्य-किरीट का ताप इतना उच्च होता है कि, यह सूर्य से अलग होता दिखाई पड़ता है। सूर्य का गुरुत्वाकर्षण बल भी इनको सूर्य के साथ बाँधे रखने में अपर्याप्त होता है।
➤ सूर्य की कुल उम्र 10 बिलियन वर्ष है जिसमें शेष उम्र 5 बिलियन वर्ष और है।
➤ भविष्य में सूर्य द्वारा ऊर्जा देते रहने का समय 1011 वर्ष है।
सौर कलंक (Sun Spots):-
यह प्रकाशमंडल में उत्पन्न होते हैं। गैलिलियो (Galileo) ने इन कलंको की खोज की थी। सौर कलंक के सर्वाधिक काले केन्द्रीय भाग को अम्ब्रा (Umbra) कहा जाता है। यह हल्के काले भाग पेनम्ब्रा (Penumbra) से घिरा होता है।
➤ समय के साथ सौर कलंकों की संख्या बदलती रहती है। इनकी संख्या 11 वर्ष की चक्रीय घटना के रूप में बढ़ती और घटती रहती है। इनका जीवन काल कुछ दिनों से कुछ महीनों का होता है।
➤ सूर्य के कलंकों का तापमान सूर्य के सतह के तापमान से 1500°C कम अर्थात् 4500°C होता है।
➤ सूर्य के धब्बों का एक पूरा चक्र 22 वर्षों का होता है; पहले 11 वर्षों तक यह धब्बा बढ़ता है और बाद के 11 वर्षों तक यह धब्बा घटता है। जब सूर्य की सतह पर कलंक दिखायी पड़ता है, उस समय पृथ्वी पर चुम्बकीय झंझावात (Magnetic Storm) उत्पन्न होते हैं। इससे चुम्बकीय सुई की दिशा बदल जाती है एवं रेडियो, टेलीविजन, विद्युत चालित यंत्र आदि में समस्या उत्पन्न हो जाती है।
ग्रह (Planets)
सूर्य या किसी अन्य तारे के चारों ओर परिक्रमा करने वाले खगोलीय पिण्ड को ग्रह कहते हैं। ये प्रकाशहीन होते हैं, जो सूर्य से प्राप्त परावर्तित प्रकाश से चमकते हैं। अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ के अनुसार, हमारे सौरमंडल में (सूर्य से दूरी के अनुसार व्यवस्थित) 8 ग्रह हैं- बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण एवं वरुण।
➤ सामान्यतः सभी ग्रह सूर्य के चारों ओर घड़ी की विपरीत दिशा (Anticlockwise) अर्थात् पश्चिम से पूर्व की ओर परिक्रमण करते हैं, परन्तु शुक्र और अरुण घड़ी की दिशा अर्थात् पूर्व से पश्चिम की ओर भ्रमण करते हुए सूर्य की परिक्रमा करते हैं।
➤ सूर्य की परिक्रमा की समयावधि सूर्य से ग्रहों की दूरी पर निर्भर करती है। अर्थात् जो ग्रह सूर्य से जितनी दूरी स्थित है उसकी परिक्रमा अवधि भी उतनी ही अधिक होगी। कोई ग्रह सूर्य के जितना समीप आता है, उसकी वेग और गति उतनी ही बढ़ जाती है।
➤ बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल एवं बृहस्पति ग्रहों पर हाइड्रोजन, हीलियम तथा मेथेन गैसें बड़ी मात्रा में विद्यमान हैं। इन पाँचों ग्रहों को नग्न आँख से देखा जा सकता है। परन्तु अन्य ग्रहों को खुली आँखों से नहीं देखा जा सकता।
ग्रहों के प्रकार
ग्रहों को दो भागों में विभाजित किया गया है-
1. पार्थिव या आन्तरिक ग्रह (Terrestrial or Inner planet):
पार्थिव ग्रह छोटे एवं ठोस होते हैं, जिसके अंतर्गत बुध, शुक्र, पृथ्वी और मंगल को सम्मिलित किया जाता है। अर्थात् बुध, शुक्र, पृथ्वी एवं मंगल को पार्थिव ग्रह कहा जाता है क्योंकि ये पृथ्वी के सदृश होते हैं।
2. बृहस्पतीय/जोवियन या बाह्य ग्रह (Jovean or outer planet):
जोवियन ग्रह बड़े एवं तरल अवस्था में होते हैं, जिनके अंतर्गत बृहस्पति, शनि, अरुण एवं वरुण को सम्मिलित किया जाता है।
➤ सूर्य से दूरी के अनुसार ग्रहों का क्रम : बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण (यूरेनस) एवं वरुण (नेप्च्यून) यानी सूर्य के सबसे निकट का ग्रह बुध एवं सबसे दूर स्थित ग्रह वरुण है।
➤ आकार के अनुसार ग्रहों का क्रम (घटते क्रम में) है : बृहस्पति, शनि, अरुण, वरुण, पृथ्वी, शुक्र, मंगल एवं बुध अर्थात सबसे बड़ा ग्रह बृहस्पति एवं सबसे छोटा ग्रह बुध है।
बुध (Mercury):
➤ यह सूर्य का सबसे नजदीकी ग्रह है, जो सायंकालीन एवं ऊषाकालीन तारे के रूप में एक वर्ष में 3 बार दिखाई पड़ता है। यह सूर्य के निकलने के दो घंटे पहले दिखाई देता है।
➤ यह सबसे छोटा ग्रह है, जिसके पास कोई उपग्रह नहीं है।
➤ इसका सबसे विशिष्ट गुण है- इसमें चुम्बकीय क्षेत्र का होना।
➤ यह सूर्य की परिक्रमा सबसे कम समय में पूरी करता है। अर्थात यह सौरमंडल का सर्वाधिक कक्षीय गति वाला ग्रह है।
➤ बुध के सबसे पास से गुजरने वाले अंतरिक्ष यान (Space Probe) के द्वारा लिए गए चित्रों से पता चलता है कि, चन्द्रमा के समान इसकी सतह पर कई पर्वत, क्रेटर और मैदान हैं।
➤ यहाँ दिन अति गर्म व रातें बर्फीली होती हैं। इसका तापान्तर सभी ग्रहों में सबसे अधिक (600°C) है। इसका तापमान रात में -173°C व दिन में 427°C हो जाता है।
शुक्र (Venus):
➤ यह पृथ्वी का निकटतम, सबसे चमकीला एवं सबसे गर्म ग्रह है।
➤ भ्रंशघाटी, पर्वत, पठार एवं क्रेटर युक्त धरातल से यह निष्कर्ष निकलता है कि इसके, पृष्ठ पर भी प्लेट संचलन क्रिया का प्रभाव पड़ा है। परन्तु यह प्रभाव पृथ्वी से कम-गहन प्रतीत होता है। शुक्र ग्रह की उत्पत्ति 4.6 बिलियन वर्ष पूर्व हुई है।
➤ शुक्र का वायुमण्डल अत्यधिक मोटा है। इसके वायुमंडल का 90 प्रतिशत भाग 1 किमी. की ऊँचाई तक ही विस्तृत है। शुक्र की सतह का तापमान 462°C रहता है। इसके वायुमण्डल में 96 प्रतिशत कार्बन डाइऑक्साइड का संकेन्द्रण है।
➤ तापमान एवं कार्बन-डाईऑक्साइड की अधिकता के कारण इस ग्रह पर जीवन की संभावना अत्यधिक कम हो जाती है तथा यहाँ प्रेशर कुकर जैसी स्थिति पायी जाती है।
➤ इसे साँझ का तारा या भोर का तारा कहा जाता है, क्योंकि यह शाम में पश्चिम दिशा में तथा सुबह में पूरब की दिशा में आकाश में दिखाई पड़ता है।
➤ यह अन्य ग्रहों के विपरीत दक्षिणावर्त (clockwise) चक्रण करता है।
➤ इसे पृथ्वी का भगिनी ग्रह कहते हैं। यह घनत्व, आकार एवं व्यास में पृथ्वी के समान है।
➤ इसके पास कोई उपग्रह नहीं है।
मंगल (Mars):
➤ इसे लाल ग्रह (Red Planet) कहा जाता है।
➤ इसका रंग लाल, आयरन ऑक्साइड के कारण है।
➤ मंगल के वायुमण्डल में 95% कार्बन डाई ऑक्साइड, 1-3% नाइट्रोजन, 1-2% ऑर्गन तथा 0.1-0.4% ऑक्सीजन पायी जाती है। इसके वायुमंडल में ओजोन स्तर का अभाव पाया जाता है।
➤ यहाँ पृथ्वी के समान दो ध्रुव हैं तथा इसका कक्षातली 25° के कोण पर झुका हुआ है; जिसके कारण यहाँ पृथ्वी के समान ऋतु परिवर्तन होता है।
➤ इसके दिन का मान एवं अक्ष का झुकाव पृथ्वी के समान है।
➤ यह अपनी धुरी पर 24 घंटे में एक बार पूरा चक्कर लगाता है।
➤ इसके दो उपग्रह हैं- फोबोस (Phobos) और डीमोस (Deimos)।
➤ सूर्य की परिक्रमा करने में इसे 687 दिन लगते हैं।
➤ सौरमंडल का सबसे बड़ा ज्वालामुखी ओलिपस मेसी एवं सौरमंडल का सबसे ऊँचा पर्वत निक्स ओलम्पिया (Nix Olympia) जो माउंट एवरेस्ट से तीन गुना अधिक ऊँचा है, इसी ग्रह पर स्थित है।
बृहस्पति (Jupiter):
➤ यह सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है। इसे अपनी धुरी पर चक्कर लगाने में 10 घंटा (सबसे कम) और सूर्य की परिक्रमा करने में 12 वर्ष लगते हैं।
➤ इसके उपग्रह गैनिमेड सभी उपग्रहों में सबसे बड़ा है।
➤ इसका रंग पीला है।
➤ बृहस्पति के 95 उपग्रह हैं।
➤ गैनिमीड इसके सभी उपग्रहों में से सबसे बड़ा (व्यास 5,260 किमी.) है।
➤ इसमें 75% हाइड्रोजन, 24% हीलियम तथा 1% में भारी तत्वों की प्रधानता है।
➤ इसके ऊपर सफेद, नीले, लाल एवं पीले रंग के बादल के स्तर दिखायी देते हैं। इसके वायुमंडल की मोटाई 9656 किमी. है। बृहस्पति पर अनुमानित ऋणात्मक तापमान यह दर्शाता है कि इसका धरातल बर्फ से आच्छादित होगा।
शनि (Saturn)
➤ यह आकार में दूसरा सबसे बड़ा ग्रह है।
➤ इसकी विशेषता है- इसके तल के चारों ओर वलय का होना (मोटी प्रकाश वाली कुंडली)।
➤ वलय की संख्या- 7 है। यह आकाश में पीले तारे के समान दिखाई पड़ता है।
➤ बड़े आकार और उच्च उजलापन के कारण शनि ग्रह रात्रि में दिखाई देता है।
➤ इसके वायुमंडल में भी बृहस्पति के समान हाइड्रोजन, हीलियम, मीथेन और अमोनिया आदि गैसें उपस्थित हैं। बृहस्पति के समान यह भी विस्तृत बादलों को समाहित किए हुए है।
➤ इसकी संरचना सूर्य के समान है, जिसका आन्तरिक भाग 74 प्रतिशत हाइड्रोजन, 24 प्रतिशत हीलियम तथा 2 प्रतिशत भारी तत्वों से बना है।
➤ शनि को गैसों का गोला (Sphere of Gases) एवं गैलेक्सी के समान ग्रह (Galaxy Like Planet) भी कहा जाता है। यह आकाश में पीले तारे के समान दिखाई देता है।
➤ शनि के कुल 146 उपग्रह हैं।
➤ सबसे अधिक उपग्रह शनि (146) के हैं।
➤ शनि का सबसे बड़ा उपग्रह टाइटन है जो सौरमंडल का दूसरा सबसे बड़ा उपग्रह है। यह आकार में बुध के बराबर है।
➤ टाइटन की खोज 1665 में डेनमार्क के खगोलशास्त्री क्रिश्चियन हाइजोन ने की। यह एकमात्र ऐसा उपग्रह है जिसका पृथ्वी जैसा स्वयं का सघन वायुमंडल है।
➤ फोबे नामक शनि का उपग्रह इसकी कक्षा में घूमने की विपरीत दिशा में परिक्रमा करता है।
➤ इसका घनत्व सभी ग्रहों एवं जल से भी कम है। यानी इसे जल में रखने पर तैरने लगेगा।
अरुण (Uranus):
➤ यह आकार में तीसरा सबसे बड़ा ग्रह है। इसका तापमान लगभग-215°C है।
➤ इसकी खोज 1781 ई. में विलियम हर्शेल द्वारा की गयी है।
➤ शनि की भाँति अरुण के चारों ओर दस वलयों में पाँच वलयों का नाम- अल्फा (α), बीटा (β), गामा (γ), डेल्टा (δ) एवं इप्सिलॉन है।
➤ यह अपने अक्ष पर पूर्व से पश्चिम की ओर (दक्षिणावर्त) घूमता है, जबकि अन्य ग्रह पश्चिम से पूर्व की ओर (वामावर्त) घूमते हैं। यहाँ सूर्योदय पश्चिम की ओर एवं सूर्यास्त पूरब की ओर होता है। इसके सभी उपग्रह भी पृथ्वी की विपरीत दिशा में परिभ्रमण करते हैं।
➤ इस ग्रह पर वायुमंडल बृहस्पति और शनि की ही भाँति अधिक सघन है, जिसमें हाइड्रोजन, हीलियम, मीथेन एवं अमोनिया की प्रमुखता है।
➤ दूरदर्शी (Telescope) से देखने पर यह हरा दिखायी देता है। सूर्य से दूर होने के कारण यह अत्यधिक ठंडा है।
➤ यहाँ 300 से 400 मीटर प्रति सेकेण्ड की गति से प्रवाहित होने वाली हवाएँ भी पायी जाती हैं।
➤ यह अपनी धुरी पर सूर्य की ओर इतना झुका हुआ है कि लेटा हुआ सा दिखलाई पड़ता है, इसलिए इसे लेटा हुआ ग्रह कहा जाता है।
➤ इसके कुल उपग्रहों की संख्या 27 है। इसका सबसे बड़ा उपग्रह टाइटेनिया (Titania) है।
वरुण (Neptune):
➤ इसकी खोज 1846 ई. में जर्मन खगोलज्ञ जहाँन गाले ने की है।
➤ नई खगोलीय व्यवस्था में यह सूर्य से सबसे दूर स्थित ग्रह है।
➤ यह हरे रंग का ग्रह है। इसके चारों ओर अति शीतल मिथेन का बादल छाया हुआ है।
➤ इसके कुल उपग्रहों की संख्या 14 है। उपग्रहों में ट्रिटॉन (Triton) और मेरिड प्रमुख है।
➤ इस ग्रह का वायुमंडल अति सघन है, जिसके चारों ओर अतिशीतल मीथेन के बादल हैं। साथ ही, इसके वायुमंडल में अमोनिया हाइड्रोजन, हीलियम, एथेन आदि गैसें भी पायी जाती हैं।
➤ इसकी सतह का तापमान 218°C आँका गया है तथा इसका घनत्व एवं द्रव्यमान अरुण के समान है। इस प्रकार सम्भव है कि इसकी आन्तरिक संरचना भी अरुण के समान ही होगी। इसलिए अरुण और वरुण को जुड़वा ग्रह कहा जाता है।
पृथ्वी (Earth):
➤ पृथ्वी आकार में 5वाँ सबसे बड़ा ग्रह है। यह अपने अक्ष पर 23½º झुकी हुई है।
➤ यह सौरमंडल का एकमात्र ग्रह है, जिस पर जीवन है।
➤ इसका एकमात्र उपग्रह चन्द्रमा है।
➤ इसका विषुवतीय व्यास 12,756 किमी. और ध्रुवीय व्यास 12,714 किमी. है।
➤ यह अपने अक्ष पर पश्चिम से पूर्व 1,610 किमी० प्रति घंटा की चाल से 23 घंटे 56 मिनट और 4 सेकेण्ड में एक पूरा चक्कर लगाती है। पृथ्वी की इस गति को घूर्णन या दैनिक गति कहते हैं। इस गति से दिन-रात होते हैं।
➤ पृथ्वी को सूर्य की एक परिक्रमा पूरी करने में 365 दिन 5 घंटे 48 मिनट 46 सेकेण्ड (लगभग 365 दिन 6 घंटे) का समय लगता है। सूर्य के चतुर्दिक पृथ्वी के इस परिक्रमा को पृथ्वी की वार्षिक गति अथवा परिक्रमण गति कहते हैं। पृथ्वी को सूर्य की एक परिक्रमा करने में लगे समय को सौर वर्ष कहा जाता है। प्रत्येक सौर वर्ष, कैलेण्डर वर्ष से लगभग 6 घंटा बढ़ जाता है, जिसे हर चौथे वर्ष में लीप वर्ष बनाकर समायोजित किया जाता है। लीप वर्ष 366 दिन का होता है, जिसके कारण फरवरी माह में 28 के स्थान पर 29 दिन होते हैं।
➤ पृथ्वी पर ऋतु परिवर्तन, इसकी अक्ष पर झुके होने के कारण तथा सूर्य के सापेक्ष इसकी स्थिति में परिवर्तन यानी वार्षिक गति के कारण होती है। वार्षिक गति के कारण ही पृथ्वी पर दिन-रात छोटा-बड़ा होता है।
➤ आकार एवं बनावट की दृष्टि से पृथ्वी शुक्र के समान है।
➤ जल की उपस्थिति के कारण इसे नीला ग्रह भी कहा जाता है।
➤ इसका अक्ष इसकी कक्षा के सापेक्ष 66.5° का कोण बनाता है।
➤ सूर्य के बाद पृथ्वी के सबसे निकट का तारा प्रॉक्सिमा सेन्चुरी है, जो अल्फा सेन्चुरी समूह का एक तारा है। यह पृथ्वी से 4.22 प्रकाश वर्ष दूर है।
क्षुद्र ग्रह (Asteroids):-
मंगल एवं बृहस्पति ग्रह की कक्षाओं के बीच कुछ छोटे-छोटे आकाशीय पिंड है जो सूर्य की परिक्रमा कर रहे हैं, उसे क्षुद्र ग्रह कहते हैं।
➤ खगोलशास्त्रियों के अनुसार ग्रहों के विस्फोट के फलस्वरूप टूटे टुकड़ों से क्षुद्र ग्रह का निर्माण हुआ है।
➤ क्षुद्र ग्रह जब पृथ्वी से टकराता है, तो पृथ्वी के पृष्ठ पर विशाल गर्त (लोनार झील-महाराष्ट्र) बनता है।
➤ फोर वेस्टा एकमात्र क्षुद्र ग्रह है जिसे नंगी आँखों से देखा जा सकता है।
उपग्रह (Satellite):-
उपग्रह वे आकाशीय पिंड हैं, जो अपने ग्रहों के साथ-साथ सूर्य की भी परिक्रमा करते हैं। ग्रहों की भाँति इनकी भी अपनी चमक नहीं होती, अतः ये भी सूर्य के प्रकाश से ही प्रकाशित होते हैं।
➤ ग्रहों के समान उपग्रहों का भ्रमण पथ भी परवलयाकार (Parabolic) होता है।
➤ बुध और शुक्र का कोई उपग्रह नहीं है।
➤ सबसे अधिक उपग्रह शनि (146) के हैं।
➤ पृथ्वी का एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह चन्द्रमा है।
सौर मंडल में उपग्रहों की स्थिति
क्रम
ग्रह
उपग्रह की संख्या
1.
बुध
0
2.
शुक्र
0
3.
पृथ्वी
1
4.
मंगल
2
5.
बृहस्पति
95
6.
शनि
146
7.
अरुण
27
8.
वरुण
14
चन्द्रमा (Moon):-
➤ चन्द्रमा की सतह और उसकी आन्तरिक स्थिति का अध्ययन करने वाला विज्ञान सेलेनोलॉजी कहलाता है।
➤ चन्द्रमा एवं पृथ्वी के बीच की औसतन दूरी 3,84,365 किमी० है।
➤ चन्द्रमा पर काले धब्बे वाले क्षेत्र (धूल के मैदान) को शान्ति सागर कहते हैं। यह चन्द्रमा का पिछला भाग है, जो अंधकारमय होता है।
➤ चन्द्रमा पर वायुमंडल नहीं है तथा बादल भी नहीं दिखते हैं। इसका आन्तरिक भाग ठंडा है। इसके ऊपर अनेक ज्वालामुखी और उससे बने क्रेटर पाये गये हैं।
➤ चन्द्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर स्थित लीबनिज पर्वत (10,668 मीटर) चन्द्रमा का उच्चतम पर्वत है। चन्द्रमा को जीवाश्म ग्रह भी कहा जाता है।
➤ चन्द्रमा पृथ्वी की एक परिक्रमा लगभग 27 दिन 8 घंटे में पूरी करता है और इतने ही समय में अपने अक्ष पर एक घूर्णन करता है। यही कारण है कि चन्द्रमा का सदैव एक ही भाग दिखाई पड़ता है।
➤ हम पृथ्वी से चन्द्रमा का लगभग 57% भाग को ही देख सकते हैं।
➤ चन्द्रमा का अक्ष तल पृथ्वी के अक्ष के साथ 58.48° का अक्ष कोण बनाता है। चन्द्रमा पृथ्वी के अक्ष के लगभग समानान्तर है। इसका परिक्रमण पथ भी दीर्घ वृत्ताकार है।
➤ चन्द्रमा का व्यास 3,480 किमी० तथा द्रव्यमान, पृथ्वी के द्रव्यमान का लगभग 1/81 है।
➤ सूर्य के संदर्भ में चन्द्रमा की परिक्रमा की अवधि 29.53 दिन (29 दिन, 12 घंटे, 44 मिनट और 2.8 सेकेण्ड) होती है। इस समय को एक चन्द्रमास या साइनोडिक मास कहते हैं।
➤ नाक्षत्र समय के दृष्टिकोण चन्द्रमा लगभग 27½ दिन में पुनः उसी स्थिति में होता है। 27½ दिन, (27दिन, 7 घंटे, 43 मिनट और 11.6 सेकेण्ड) की यह अवधि एक नाक्षत्र मास कहलाती है।
➤ ज्वार उठने के लिए अपेक्षित सौर एवं चन्द्रमा की शक्तियों का अनुपात 11 : 5 है।
➤ अपोलो के अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा लाये गये चट्टानों से पता चला है कि चन्द्रमा भी उतना ही पुराना है जितना पृथ्वी (460 करोड़ वर्ष)। इन चट्टानों में टाइटेनियम अधिक मात्रा में है।
सुपर मून (Super Moon):-
जब चन्द्रमा पृथ्वी के सबसे निकट होता है, तो उस स्थिति को सुपर मून कहते हैं। इसे पेरिजी फुल मून भी कहते हैं। इसमें चाँद 14% ज्यादा बड़ा तथा 30% अधिक चमकीला दिखाई पड़ता है।
ब्लू मून (Blue Moon):-
जब एक कैलेण्डर माह में दो पूर्णिमाएँ हों, तो दूसरी पूर्णिमा का चाँद ब्लू मून कहलाता है। इसका नीले रंग से कोई संबंध नहीं है। वास्तविक में इसका मुख्य कारण दो पूर्णिमाओं के बीच अंतराल 31 दिनों से कम होना है। ऐसा दो-तीन साल पर एक बार होता है। अगस्त, 2012 ई. में दो पूर्णिमा (2 व 31 अगस्त) देखे गये। इनमें से 31 अगस्त के पूर्णिमा को ब्लू मून कहा गया। जनवरी (2 व 31 जनवरी) 2018 में ब्लू मून की स्थिति देखी गई।
ब्लू मून ईयर (Blue Moon Year):-
जब किसी वर्ष विशेष में दो या अधिक माह ब्लू मून के होते हैं तो उसे ब्लू मून ईयर कहा जाता है। वर्ष 2018 को ब्लू मून ईयर कहा जाता है।
ब्लड मून (Blood Moon):-
जब पृथ्वी, चन्द्रमा पर पूर्ण छाया डालती है तब, पूर्ण चन्द्रग्रहण की स्थिति उत्पन्न होती है। इसमें चन्द्रमा का रंग लाल हो जाता है। इसे ही ब्लड मून (रक्त चन्द्र) कहा जाता है।
धूमकेतु (Comet):-
सौरमंडल के छोर पर बहुत ही छोटे-छोटे अरबों पिंड विद्यमान हैं, जो धूमकेतु या पुच्छल तारे कहलाते हैं।
➤ यह गैस एवं धूल का संग्रह है।
➤ पुच्छल तारे कई वर्षों के पश्चात् जब सूर्य के पास से गुजरते हैं तो इनका तापमान बढ़ने के कारण इनसे गैसों की फुहारें निकलती हैं, जो एक लंबी चमकीली पूँछ के समान प्रतीत होती हैं। कभी-कभी ये पूँछ लाखों किमी. तक लंबी होती है।
➤ जब पुच्छल तारे सूर्य के नजदीक (सबसे कम दूरी पर) पहुँचते हैं, तो सूर्य की तीव्र ऊष्मा और ज्वारीय बल के कारण अपने कुछ पदार्थों को खो देते हैं। परिणामतः या तो ये समाप्त हो जाते हैं या शूमेकर की तरह विखण्डित हो जाते हैं।
➤ धूमकेतु की पूँछ हमेशा सूर्य से दूर होता दिखाई देता है।
➤ सूर्य के चारों ओर लम्बी परंतु अनियमित कक्षा में घूमते है।
➤ खगोलशास्त्रियों के अनुसार, सौरमंडल में लगभग 1 लाख धूमकेतु विचरण कर रहे हैं।
➤ धूमकेतु हमेशा के लिए टिकाऊ नहीं होते, फिर भी इनके लौटने का समय निश्चित होता है।
➤ हैले नामक धूमकेतु का परिक्रमण काल 76 वर्ष है, यह अंतिम बार 1986 ई. में दिखाई दिया था। अगली बार यह 1986 + 76=2062 में दिखाई देगा।
उल्का (Meteors) एवं उल्कापिंड (Meteoroids)
उल्का (Meteors):-
उल्काएँ प्रकाश की चमकीली धारी के रूप में देखते हैं जो आकाश में क्षणभर के लिए चमकती हैं और लुप्त हो जाती हैं।
➤ उल्काएँ क्षुद्र ग्रहों के टुकड़े तथा धूमकेतुओं द्वारा पीछे छोड़े गये धूल के कण होते हैं।
➤ कभी-कभी ये पृथ्वी के वायुमण्डल में प्रवेश कर जाते हैं। धूल व गैस निर्मित ये पिंड जब वायुमंडल में प्रवेश करते हैं तो पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के कारण तेजी से पृथ्वी की ओर आकर्षित होते हैं तथा वायुमंडलीय घर्षण से चमकने लगते हैं। इसलिए इन्हें टूटता हुआ तारा (Shooting Star) कहा जाता है।
➤ पृथ्वी के धरातल से 80 किमी की ऊँचाई तक पहुँचते-पहुँचते लगभग सभी उल्का घर्षित होकर पूर्णतः नष्ट हो जाते हैं।
उल्कापिंड (Meteoroids):-
➤ जब उल्का जलकर नष्ट न होकर एक पिण्ड के रूप में पृथ्वी पर आ गिरता है, तब उसे उल्कापिंड या उल्काश्म कहते हैं। पृथ्वी की सतह पर मिलने वाला सबसे बड़ा उल्कापिंड होबा वेस्ट है, जो नामीबिया के ग्रूटफोन्टीन के पास पाया गया है। पृथ्वी की सतह पर मिलने वाले उल्का का अवशिष्ट गोला ग्लासी पदार्थ टेक्टाइट कहलाता है।
➤ पृथ्वी के धरातल पर भारी उल्कापिंडों के गिरने से उल्कापातीय क्रेटर का निर्माण होता है। संयुक्त राज्य अमेरिका के एरिजोना में विन्सलों के पास बैरिगर क्रेटर विश्व का सर्वाधिक प्रसिद्ध उल्कापाती क्रेटर है।
➤ भारत में महाराष्ट्र के बुल्ढ़ाना जिले की लोनार झील भी एक उल्कापातीय क्रेटर झील का उदाहरण है, जिसका व्यास 1.5 किमी. तथा गहराई 100 मीटर है।
सौर परिवार एक नजर में
ग्रह
घूर्णन काल
परिक्रमण काल
उपग्रहों की संख्या
बुध
58.6 दिन
88.0 दिन
0
शुक्र
243 दिन
224.7 दिन
0
पृथ्वी
23.9 घंटे
365.26 दिन
1
मंगल
24.6 घंटे
687.0 दिन
2
बृहस्पति
9.9 घंटे
11.9 वर्ष
95
शनि
10.3 घंटे
29.5 वर्ष
146
अरुण
17.2 घंटे
84.0 वर्ष
27
वरुण
16.1 घंटे
164.8 वर्ष
14
सौरमंडल से सम्बंधित पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ट प्रश्नोत्तर
1. प्रथमतः सौरमण्डल के बारे में विश्व के समक्ष जानकारी प्रस्तुत करने का श्रेय किस विद्वान को है?
[A] गैलीलियो [B] स्ट्रैबो [C] कॉपरनिकस [D] केप्लर
[C] कॉपरनिकस
2. सूर्य के चारों ओर घूमने वाले खगोलीय पिण्ड क्या कहलाते हैं?
[A] ग्रह [B] उपग्रह [C] क्षुद्रग्रह [D] पुच्छल तारा
[A] ग्रह
3. किसी ग्रह के चारों ओर परिक्रमा करने वाले छोटे आकाशीय पिण्ड को क्या कहते हैं?
[A] ग्रह [B] उपग्रह [C] क्षुद्रग्रह [D] सौर तारा
[B] उपग्रह
4. ग्रहों की गति का नियम किसने प्रतिपादित किया?
[A] न्यूटन [B] केप्लर [C] कॉपरनिकस [D] गैलीलियो
[B] केप्लर
5. सौरमण्डल में कुल कितने ग्रह हैं?
[A] आठ [B] नौ [C] दस [D] ग्यारह
[A] आठ
6. सूर्य से बढ़ती दूरी के अनुसार ग्रहों का निम्न में से कौन-सा क्रम सही है?
[A] पृथ्वी पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है [B] पृथ्वी पूर्व से पश्चिम की ओर घूमती है [C] इनमें से सभी [D] यह पूर्व में स्थित है
[A] पृथ्वी पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है
26. नार्वे में अर्द्धरात्रि के समय सूर्य कब दिखायी देता है?
[A] 21 मार्च [B] 23 सितम्बर [C] 21 जून [D] 22 दिसम्बर
[C] 21 जून
27. एक ग्रह की अपने कक्ष में सूर्य से अधिकतम दूरी को क्या कहा जाता है?
[A] उपसौर [B] अपसौर [C] अपोजी [D] पेरिजी
[B] अपसौर
28. एक ग्रह की अपने कक्ष में सूर्य से न्यूनतम दूरी को क्या कहा जाता है?
[A] उपसौर [B] अपसौर [C] अपोजी [D] पेरिजी
[A] उपसौर
29. प्राचीन भारतीय ज्योतिष शास्त्र में निम्न में से किसे एक ग्रह के रूप में मान्यता प्राप्त थी?
[A] यम [B] बृहस्पति [C] सूर्य [D] मंगल
[C] सूर्य
30. सूर्य के धरातल का तापमान लगभग कितना होता है?
[A] 3,000°C [B] 5,000°C [C] 4,000°C [D] 6,000°C
[D] 6,000°C
31. मध्य रात्रि का सूर्य किस क्षेत्र में दिखायी देता है?
[A] भूमध्यसागरीय क्षेत्र में [B] आर्कटिक क्षेत्र में [C] जापान से पूर्व के क्षेत्र में [D] भूमध्यरेखीय क्षेत्र में
[B] आर्कटिक क्षेत्र में
32. सूर्य में ‘काला धब्बा’ क्या है?
[A] दिन के दौरान धब्बे ऊर्जा के स्रोत होते हैं [B] सूर्य में एक बड़ा काला छेद है [C] धब्बे वे स्थान हैं जो प्रकाश उत्सर्जित करने में असमर्थ हैं [D] इनमें से कोई नहीं
[C] धब्बे वे स्थान हैं जो प्रकाश उत्सर्जित करने में असमर्थ हैं , सूर्य के काले धब्बे (Sunspots) वास्तव में ऐसे क्षेत्र होते हैं जहाँ तापमान आसपास के भागों की तुलना में कम होता है, इसलिए वे कम प्रकाश उत्सर्जित करते हैं और काले दिखाई देते हैं।
33. सूर्य के रासायनिक मिश्रण में हाइड्रोजन का प्रतिशत कितना है?
[A] 71 % [B] 61 % [C] 75 % [D] 54 %
[A] 71 %
34. निम्नलिखित में से कौन एक तारा है?
[A] चन्द्रमा [B] शुक्र [C] पृथ्वी [D] सूर्य
[D] सूर्य
35. सूर्य पृष्ठ पर लगभग कितना तापमान होता है?
[A] 800°C [B] 600°C [C] 6000°C [D] 1000°C
[C] 6000°C
36. सूर्य के सबसे दूर कौन-सा ग्रह है?
[A] प्लूटो [B] बुध [C] बृहस्पति [D] वरुण
[D] वरुण
37. सूर्य प्रकाश धरती तक पहुँचने में कितने मिनट लेता है?
[A] 8.3 [B] 7.3 [C] 9.4 [D] 10
[A] 8.3
38. कौन-सा ग्रह सूर्य के सबसे निकट स्थित है?
[A] मंगल [B] बुध [C] शुक्र [D] पृथ्वी
[B] बुध
39. बुध (Mercury) सूर्य का एक चक्कर लगाने में कितना समय लेता है?
[A] 88 दिन [B] 76 दिन [C] 80 दिन [D] 66 दिन
[A] 88 दिन
40. किस ग्रह में चन्द्रमा की तरह कलाएँ होती है?
[A] बुध [B] मंगल [C] शनि [D] बृहस्पति
[A] बुध [/read
41. दो ग्रह जिनके उपग्रह नहीं हैं, वे हैं
[A] पृथ्वी और बृहस्पति [B] शुक्र और शनि [C] बुध और शुक्र [D] शुक्र और मंगल
[C] बुध और शुक्र
42. निम्नलिखित में से कौन-सा ग्रह सूर्य का चक्कर सबसे कम समय में लगाता है?
[A] बुध [B] पृथ्वी [C] मंगल [D] शुक्र
[A] बुध
43. सबसे तीव्र गति से सूर्य का चक्कर लगाने वाला ग्रह है-
[A] बुध [B] पृथ्वी [C] बृहस्पति [D] शनि
[A] बुध
44. निम्नलिखित में से किस ग्रह की परिभ्रमण गति सबसे अधिक है?
[A] बृहस्पति [B] बुध [C] शुक्र [D] मंगल
[B] बुध
45. निम्नलिखित में से किस ग्रह का अक्षीय झुकाव सबसे अधिक है?
[A] शनि [B] प्लूटो [C] पृथ्वी [D] बुध
[D] बुध
46. चन्द्रमा के सदृश दिखायी देने वाला ग्रह है-
[A] बुध [B] वरुण [C] शुक्र [D] मंगल
[A] बुध
47. सौरमण्डल का अत्यधिक तीव्र घूर्णन वाला ग्रह कौन है?
[A] बृहस्पति [B] शुक्र [C] बुध [D] पृथ्वी
[A] बृहस्पति
48. निम्नलिखित में से किस ग्रह को ‘पृथ्वी की बहन’ कहा जाता है?
[A] बुध [B] शुक्र [C] मंगल [D] बृहस्पति
[B] शुक्र
49. किस ग्रह को शाम का तारा (Evening Star) कहा जाता है
[A] शुक्र [B] पृथ्वी [C] बुध [D] मंगल
[A] शुक्र
50. निम्नलिखित में से कौन सबसे चमकदार ग्रह है?
[A] मरकरी [B] वीनस [C] मार्स [D] नेपच्यून
[B] वीनस
51. सूर्य तथा पृथ्वी के निकटतम ग्रह क्रमशः कौन से हैं?
[A] बुध तथा शुक्र [B] बुध तथा मंगल [C] शुक्र तथा बुध [D] बुध तथा बृहस्पति
[A] बुध तथा शुक्र
52. यूरोपवासी किस ग्रह की पूजा देवी के रूप में करते थे?
[A] शुक्र [B] पृथ्वी [C] बुध [D] मंगल
[A] शुक्र
53. सौरमण्डल का सर्वाधिक गर्म ग्रह कौन है?
[A] मंगल [B] बुध [C] शुक्र [D] पृथ्वी
[C] शुक्र
54. पृथ्वी से निकटतम दूरी पर स्थित ग्रह है-
[A] मंगल [B] बुध [C] शुक्र [D] पृथ्वी
[C] शुक्र
55. निम्नलिखित में से किस ग्रह को ‘सुबह का तारा’ कहा जाता है?
[A] मंगल [B] बृहस्पति [C] शुक्र [D] शनि
[C] शुक्र
56. निम्नलिखित ग्रहों में से किसे ‘सौन्दर्य का देवता’ कहा जाता है?
[A] बुध [B] शुक्र [C] बृहस्पति [D] मंगल
[B] शुक्र
57. बिना उपग्रह वाले ग्रह हैं-
[A] बुध और शनि [B] बुध और मंगल [C] मंगल और शुक्र [D] बुध और शुक्र
[D] बुध और शुक्र
58. निम्नलिखित में से किस ग्रह की कक्षा पृथ्वी के सबसे अधिक नजदीक है?
[A] बुध
[B] शुक्र
[C] बृहस्पति
[D] मंगल
[B] शुक्र
59. वे कौन से ग्रह हैं जिनके चारों ओर परिक्रमा करने वाले उपग्रह नहीं है?
[A] मंगल और शुक्र [B] मंगल और बुध [C] बुध और शुक्र [D] नेप्ट्यून और यूरेनस
[C] बुध और शुक्र
60. सबसे अधिक चमकने वाला ग्रह है?
[A] बुध
[B] शुक्र
[C] बृहस्पति
[D] मंगल
[B] शुक्र
61. पृथ्वी की आकृति सर्वोत्तम ढंग से किस शब्द से स्पष्ट की जा सकती है?
[A] चतुष्फलक से [B] विषुवत रेखा से [C] नारंगी से [D] लध्वक्ष गोलाभ से
[D] लध्वक्ष गोलाभ से , पृथ्वी ध्रुवों पर थोड़ी चपटी और विषुवत रेखा पर उभरी हुई है, इसलिए इसकी आकृति को सर्वोत्तम रूप में लध्वक्ष गोलाभ (Oblate Spheroid) कहा जाता है।
62. पृथ्वी सूर्य के परितः अपनी कक्षा में लगभग किस गति से चक्कर लगाती है?
[A] वर्ष भर एकसमान रहती है। [B] अधिकतम होती है जब पृथ्वी सूर्य के निकटतम होती है। [C] अधिकतम होती है जब पृथ्वी सूर्य से अधिकतम दूरी पर होती है। [D] न्यूनतम होती है जब पृथ्वी सूर्य के निकटतम होती है।
[B] अधिकतम होती है जब पृथ्वी सूर्य के निकटतम होती है।
66. सूर्य की परिक्रमा के दौरान पृथ्वी सूर्य से अधिकतम दूरी पर किस महीने में होती है?
[A] मार्च [B] जुलाई [C] सितम्बर [D] जनवरी
[B] जुलाई
67. पृथ्वी को उपसौर (Perihelion) स्थिति किस महीने में होती है?
[A] जून [B] जनवरी [C] सितम्बर [D] मार्च
[B] जनवरी
68. ऋतुएँ क्यों होती है?
[A] पृथ्वी के अपने अक्ष पर घूर्णन के कारण [B] पृथ्वी के सूर्य के चारों ओर परिभ्रमण के कारण [C] पृथ्वी के अक्ष के झुकाव के कारण [D] पृथ्वी की आकृति के कारण
[B] पृथ्वी के सूर्य के चारों ओर परिभ्रमण के कारण
69. गोलाभ पृथ्वी ध्रुवों पर चपटी होती है यह इस तथ्य से स्पष्ट सिद्ध होता है-
[A] पृथ्वी का भार ध्रुवों पर सर्वाधिक तथा विषुवत रेखा पर न्यूनतम होता है। [B] पदार्थ का भार ध्रुवों पर न्यूनतम तथा विषुवत रेखा पर सर्वाधिक होता है। [C] पदार्थ का भार ध्रुवों तथा विषुवत रेखा पर समान होता है। [D] ध्रुवों पर पदार्थ अपना भार खो देता है।
[A] पृथ्वी का भार ध्रुवों पर सर्वाधिक तथा विषुवत रेखा पर न्यूनतम होता है।
70. पृथ्वी अपने अक्ष पर घूमती है-
[A] पूर्व से पश्चिम [B] उत्तर से दक्षिण [C] पश्चिम से पूर्व [D] दक्षिण से उत्तर
[C] पश्चिम से पूर्व
71. आकार की दृष्टि से सौरमण्डल में पृथ्वी का कौन-सा स्थान है?
[A] तीसरा [B] चौथा [C] पाँचवाँ [D] छठा
[C] पाँचवाँ
72. नीला ग्रह (Blue Planet) के नाम से जाना जाता है-
[A] मंगल [B] शुक्र [C] पृथ्वी [D] यूरेनस
[C] पृथ्वी
73. परिक्रमा पथ में पृथ्वी के दोनों ओर रहने वाले ग्रह हैं-
[A] मंगल और बृहस्पति [B] शुक्र और शनि [C] बुध और शुक्र [D] मंगल और शुक्र
[D] मंगल और शुक्र
74. सूर्य और पृथ्वी के मध्य न्यूनतम दूरी होती है-
[A] 22 दिसम्बर को [B] 21 जून को [C] 4 जुलाई [D] 3 जनवरी को
[D] 3 जनवरी को
75. सूर्य और पृथ्वी के मध्य अधिकतम दूरी होती है-
[A] 4 जुलाई [B] 22 दिसम्बर [C] 30 जनवरी [D] 23 सितम्बर
[A] 4 जुलाई
76. पृथ्वी सूर्य के इर्द-गिर्द परिक्रमा करती है लगभग-
[A] 365.12 दिन में [B] 365.50 दिन में [C] 365.25 दिन में [D] 365.75 दिन में
[C] 365.25 दिन में
77. पृथ्वी का प्राकृतिक उपग्रह है-
[A] मंगल [B] रोहिणी [C] चन्द्रमा [D] आर्यभट्ट
[C] चन्द्रमा
78. दिन व रात होने का कारण है-
[A] पृथ्वी का अपने अक्ष पर घूर्णन [B] पृथ्वी की सापेक्ष सूर्य की गति [C] पृथ्वी के अक्ष का झुकाव [D] सूर्य के चारों ओर पृथ्वी का परिभ्रमण
[A] पृथ्वी का अपने अक्ष पर घूर्णन
79. सूर्य के अतिरिक्त निकटतम सितारे से प्रकाश पृथ्वी तक पहुँचता है?
[A] 4.2 सेकण्ड [B] 42 सेकण्ड [C] 4.2 वर्ष [D] 42 वर्ष
[C] 4.2 वर्ष
80. सूर्य से पृथ्वी की दूरी है
[A] 149 मिलियन किमी० [B] 150 मिलियन किमी० [C] 300 मिलियन किमी० [D] 227 मिलियन किमी०
[A] ध्रुवों पर [B] मकर रेखा पर [C] भूमध्य रेखा पर [D] कर्क रेखा पर
[C] भूमध्य रेखा पर
83. इक्विनॉक्स (Equinox) का तात्पर्य है, वह तिथि जब-
[A] दिन और रात समान अवधि के होते हैं। [B] रात की अपेक्षा दिन लम्बे होते हैं। [C] दिन की अपेक्षा रात लम्बी होती है। [D] वर्ष के सबसे छोटे दिन एवं सबसे छोटी रात होती है।
[A] दिन और रात समान अवधि के होते हैं।
84. दक्षिणी गोलार्द्ध में सबसे लम्बा दिन कब होता है?
[A] 21 जून [B] 21 मार्च [C] 23 सितम्बर [D] 22 दिसम्बर
[D] 22 दिसम्बर
85. भू-कक्ष तल पर भू-अक्ष का झुकाव है-
[A] 90º [B] 23½º [C] 0º [D] 66½º
[D] 66½º
86. पृथ्वी के उपग्रहों की संख्या कितनी है?
[A] आठ [B] शून्य [C] एक [D] दो
[C] एक
87. 21 जून को दिन का प्रकाश उत्तरी ध्रुव पर दिखायी देता है-
104. पृथ्वी को उसके काल्पनिक अक्ष पर घूमने को क्या कहते हैं?
[A] परिक्रमण [B] घूर्णन [C] कक्षा [D] इनमें कोई नहीं
[B] घूर्णन
105. पृथ्वी की अपनी कक्षा में गति है-
[A] पश्चिम से पूर्व [B] पूर्व से पश्चिम [C] दक्षिण से उत्तर [D] उत्तर से दक्षिण
[A] पश्चिम से पूर्व
106. पृथ्वी तथा सूर्य के मध्य सर्वाधिक दूरी किसके दौरान होती है?
[A] उत्तर अयनांत [B] दक्षिण अयनांत [C] अपसौर [D] उपसौर
[C] अपसौर
107. ऋतुएँ निम्नलिखित के कारण होती है-
[A] पृथ्वी घूर्णन करती है [B] सूर्य के चारों ओर पृथ्वी का परिक्रमण [C] पृथ्वी का अक्ष से 66½º आनत है [D] उपर्युक्त (B) और (C) दोनों
[B] सूर्य के चारों ओर पृथ्वी का परिक्रमण
108. पृथ्वी से आकार में छोटे ग्रह हैं-
[A] अरुण और मंगल [B] शुक्र और मंगल [C] वरुण और शुक्र [D] वरुण और मंगल
[B] शुक्र और मंगल
109. निम्न में से किसने पहली बार कहा कि पृथ्वी गोल है?
[A] कॉपरनिकस [B] अरिस्टोटल [C] स्ट्राबो [D] इनमें से कोई नहीं
[B] अरिस्टोटल
110. पृथ्वी की धुरी है-
[A] झुकी हुई [B] क्षैतिज [C] वक्रीय [D] उर्ध्वाधर
[A] झुकी हुई
111. पृथ्वी के अतिरिक्त किस ग्रह पर वायुमण्डल पाया जाता है?
[A] बुध [B] बृहस्पति [C] शुक्र [D] मंगल
[D] मंगल
112. लाल रंग का दिखायी देने वाला ग्रह है-
[A] शुक्र [B] शनि [C] मंगल [D] वरुण
[C] मंगल
113. पृथ्वी के अतिरिक्त किस ग्रह पर ऋतु परिवर्तन संभव है?
[A] अरुण [B] वरुण [C] मंगल [D] बृहस्पति
[C] मंगल
114. पृथ्वी के अतिरिक्त किस ग्रह पर मानव उपस्थिति की सम्भावना है?
[A] मंगल [B] शुक्र [C] बुध [D] शनि
[A] मंगल
115. प्रथम बार मंगल ग्रह पर उतरने वाला अन्तरिक्ष यान है
[A] मीर [B] रोहिणी [C] एडवेन्चर [D] पाथ फाइण्डर
[D] पाथ फाइण्डर
116. किसमें पृथ्वी के अलावा अन्य जीवन की संभावना है, क्योंकि वहाँ का पर्यावरण जीवन के लिए बहुत अनुकूल है?
[A] बृहस्पति [B] यूरोपा [C] मंगल [D] चन्द्रमा
[C] मंगल
117. एक ग्रह के दिन का मान और उसके अक्ष का झुकाव लगभग पृथ्वी के दिन के मान और झुकाव के तुल्य है-
[A] यूनेनस के विषय में [B] शनि के विषय में [C] नेपच्यून के विषय में [D] मंगल के विषय में
[D] मंगल के विषय में
118. सौरमण्डल का सबसे छोटा उपग्रह कौन है?
[A] फोबोस [B] डिमोस [C] लेडा [D] फार्डेलिया
[B] डिमोस
119. रात्रि को आकाश में कौन-सा ग्रह लाल दिखता है?
[A] बुध [B] मंगल [C] बृहस्पति [D] शनि
[B] मंगल
120. सौरमण्डल का सबसे बड़ा ग्रह कौन है?
[A] बुध
[B] मंगल
[C] बृहस्पति
[D] शनि
[C] बृहस्पति
121. बृहस्पति ग्रह पर लाल धब्बे किस संकेत के सूचक हैं?
[A] गैस [B] अशान्त बादल [C] तरल पदार्थ [D] भूमि
[B] अशान्त बादल
122. संयुक्त राज्य अमेरिका ने किस ग्रह की खोज के लिए गैलीलियो नामक अन्तरिक्ष यान भेजा था?
[A] मंगल [B] बृहस्पति [C] नेपच्यून [D] शनि
[B] बृहस्पति
123. मैग्लन अभियान किस ग्रह से सम्बन्धित है?
[A] मंगल [B] शनि [C] बृहस्पति [D] शुक्र
[C] बृहस्पति
124. शुमेकर लेवी-9 धूमकेतु किस ग्रह से टकराया था?
[A] मंगल [B] शनि [C] बृहस्पति [D] शुक्र
[C] बृहस्पति
125. सूर्य के गिर्द एक परिक्रमा के लिए निम्न में से कौन-सा एक ग्रह अधिकतम समय लेता है?
[A] पृथ्वी [B] मंगल [C] बृहस्पति [D] शुक्र
[C] बृहस्पति
126. सौरमण्डल का सबसे बड़ा उपग्रह निम्नलिखित में से कौन है?
[A] टाइटन [B] मिराण्डा [C] गेनीमेड [D] चन्द्रमा
[C] गेनीमेड
127. निम्नलिखित ग्रहों में से किसके चारों ओर वलय है?
[A] वरुण [B] शनि [C] बृहस्पति [D] शुक्र
[B] शनि
128. निम्नलिखित ग्रहों में से किस ग्रह के अधिकतम संख्या में प्राकृतिक उपग्रह है?
[A] नेप्च्यून [B] शनि [C] यूरेनस [D] बृहस्पति
[B] शनि
129. सौरमण्डल के बड़े उपग्रहों में से एक टाइटन निम्न में से किसका उपग्रह है?
[A] नेप्च्यून
[B] शनि
[C] यूरेनस
[D] बृहस्पति
[B] शनि
130. शनि ग्रह के कितने उपग्रह है?
[A] 45 [B] 21 [C] 146 [D] 95
[C] 146
131. शनि ग्रह को सर्वप्रथम किस खगोलशास्त्री ने देखा था?
[A] गैलीलियो [B] केप्लर [C] टॉल्मी [D] कॉपरनिकस
[A] गैलीलियो
132. नंगी आँखों द्वारा दिखने वाला सबसे दूर का ग्रह है-
[A] यूरेनस [B] बृहस्पति [C] शनि [D] प्लूटो
[C] शनि
133. शनि ग्रह के चारों ओर पाये जाने वाले वलयों की संख्या कितनी है?
[A] 7 [B] 8 [C] 10 [D] 12
[A] 7
134. सौरमण्डल का सबसे कम घनत्व वाला ग्रह है-
[A] अरुण [B] वरुण [C] पृथ्वी [D] शनि
[D] शनि
135. सौरमण्डल का दूसरा सबसे बड़ा ग्रह कौन है?
[A] अरुण [B] वरुण [C] शनि [D] पृथ्वी
[C] शनि
136. शनि (Saturn) ग्रह का सबसे बड़ा उपग्रह है-
[A] टाइटन [B] एटलस [C] टेलेस्टो [D] लापेट्स
[A] टाइटन
137. निम्न में से किस ग्रह के चारों ओर स्पष्ट वलय है?
[A] यूरेनस [B] बृहस्पति [C] मंगल [D] शनि
[D] शनि
138. यूरेनस की खोज किसने की थी?
[A] हर्शेल [B] गैलीलियो [C] कॉपरनिकस [D] केप्लर
[D] केप्लर
139. कौन-सा ग्रह सर्वाधिक गैसों से घिरा हुआ है?
[A] बृहस्पति [B] प्लूटो [C] यूरेनस [D] वीनस
[C] यूरेनस
140. यूरेनस के कितने उपग्रह हैं?
[A] 15 [B] 27 [C] 12 [D] 23
[B] 27
141. पश्चिम की ओर भ्रमण करने वाला ग्रह है-
[A] यम [B] अरुण [C] वरुण [D] शनि
[B] अरुण
142. ओवेरान, टाइटेनिया, एरियल, अम्बरियल और मिराण्डा- ये पाँचों किस ग्रह के उपग्रह हैं?
[A] बृहस्पति [B] अरुण [C] वरुण [D] मंगल
[B] अरुण
143. अपनी धुरी पर सूर्य की ओर अधिक झुकाव के कारण निम्न में से कौन-सा ग्रह ‘लेटा हुआ ग्रह’ के उपनाम से जाना जाता है?
[A] अरुण [B] वरुण [C] बृहस्पति [D] शनि
[A] अरुण
144. यूरेनस सूर्य के चारों ओर एक चक्कर कितने वर्षों में लगाता है?
[A] 29 वर्ष [B] 48 वर्ष [C] 84 वर्ष [D] 92 वर्ष
[C] 84 वर्ष
145. अन्य ग्रहों की अपेक्षा विपरीत दिशा में घूमने वाला ग्रह कौन-सा है?
[A] अरुण [B] वरुण [C] बृहस्पति [D] प्लूटो
[A] अरुण
146. कौन-सा ग्रह हरे प्रकाश को उत्सर्जित करता है?
[A] बृहस्पति [B] यूरेनस [C] शुक्र [D] वरुण
[D] वरुण
147. सौर परिवार के निम्न ग्रहों में से कौन-सा ग्रह सबसे अधिक ठंडा ग्रह है?
[A] नेप्ट्यून [B] पृथ्वी [C] मंगल [D] बुध
[A] नेप्ट्यून
148. किस गैस की उपस्थिति के कारण वरूण ग्रह हरे रंग का दिखाई देता है?
[A] अमोनिया [B] नाइट्रोजन [C] हाइड्रोजन [D] मीथेन
[D] मीथेन
149. निम्नलिखित में से कौन से दो ग्रह ‘सहोदर भाई’ के नाम से जाने जाते हैं?
[A] बुध और शुक्र [B] बृहस्पति और शनि [C] पृथ्वी और शुक्र [D] अरुण और वरुण
[D] अरुण और वरुण
150. सौरमण्डल का सबसे छोटा ग्रह कौन है?
[A] बुध [B] शुक्र [C] पृथ्वी [D] मंगल
[A] बुध
151. निम्नलिखित में से कौन-सा ग्रह सूर्य और पृथ्वी दोनों से सर्वाधिक दूरी पर स्थित है?
[A] बुध [B] नेप्ट्यून [C] मंगल [D] शनि
[B] नेप्ट्यून
152. वर्ष दीर्घतम होता है-
[A] बृहस्पति पर [B] नेप्ट्यून पर [C] पृथ्वी पर [D] शनि पर
[B] नेप्ट्यून पर
153. सौरमण्डल का बाह्यतम ग्रह कौन है?
[A] पृथ्वी [B] यूरेनस [C] नेप्ट्यून [D] शनि
[C] नेप्ट्यून
154. यम अथवा कुबेर (Pluto) की खोज सन् 1930 में निम्न में से किस खगोलज्ञ द्वारा की गयी थी?
[A] क्लाइड टाम्बैग [B] विलियम हर्शेल [C] जॉन गैले [D] जेम्स पी० हव्यल
[A] क्लाइड टाम्बैग
155. निम्नलिखित में किस आकाशीय पिण्ड को परिक्रमण और परिभ्रमण दोनों गति में बराबर समय लगता है?
[A] चन्द्रमा [B] बुध [C] शुक्र [D] शनि
[A] चन्द्रमा
156. कौन-सा खगोलीय पिण्ड ‘रात की रानी’ कहलाता है?
[A] चन्द्रमा [B] बृहस्पति [C] मंगल [D] प्लूटो
[A] चन्द्रमा
157. पृथ्वी से दिखने वाली चन्द्रमा की सतह उसकी कुल सतह का कितना प्रतिशत है?
[A] 59% [B] 33% [C] 69% [D] 70%
[A] 59%
158. क्लेवियस (Clavius) निम्नलिखित में से क्या है?
[A] बृहस्पति ग्रह का उपग्रह [B] चन्द्रमा पर स्थित सबसे बड़ा क्रेटर [C] जलमार्ग से सम्पूर्ण ग्लोब का सर्वप्रथम चक्कर लगाने वाला इटली का नाविक [D] उपर्युक्त में से कोई नहीं
[B] चन्द्रमा पर स्थित सबसे बड़ा क्रेटर
159. पृथ्वी एवं चन्द्रमा के बीच स्थित अन्तरिक्ष को किस नाम से जाना जाता है?
[A] अन्तः अन्तरिक्ष [B] सिसलुनर [C] बाह्य अन्तरिक्ष [D] इनमें से कोई नहीं
[B] सिसलुनर
160. निम्नलिखित में से कौन सूर्य का ग्रह नहीं है?
[A] बुध [B] शुक्र [C] चन्द्रमा [D] नेप्ट्यून
[C] चन्द्रमा
161. पृथ्वी का एकमात्र उपग्रह है-
[A] डीमोस [B] टाइटन [C] लापेटस [D] चन्द्रमा
[D] चन्द्रमा
162. शान्त समुद्र और तूफानों का महासागर निम्न में से कहाँ स्थित है?
[A] चन्द्रमा [B] वरुण [C] बृहस्पति [D] शनि
[A] चन्द्रमा
163. सी ऑफ ट्रॅक्विलिटी’ कहाँ पर है?
[A] चन्द्रमा [B] सूर्य [C] बृहस्पति [D] शनि
[A] चन्द्रमा
164. चन्द्रमा पृथ्वी का एक चक्कर कितने दिनों में लगाता है?
[A] लगभग 28.1 दिन [B] लगभग 30.2 दिन [C] लगभग 27.3 दिन [D] लगभग 28.3 दिन
[C] लगभग 27.3 दिन
165. चन्द्रमा से पृथ्वी तक प्रकाश के पहुँचने में लगने वाला समय है-
[A] एक सेकण्ड [B] दो सेकण्ड से अधिक [C] एक सेकण्ड से कम [D] दो सेकण्ड से कम
[D] दो सेकण्ड से कम
166. निम्नलिखित में से किस आकाशीय पिण्ड को ‘पृथ्वी पुत्र’ कहा जाता है?
[A] बुध [B] शुक्र [C] चन्द्रमा [D] मंगल
[C] चन्द्रमा
167. सी ऑफ टुक्विलिटी स्थित है-
[A] दक्षिण-पूर्व अफ्रीका में [B] चन्द्रमा पर [C] रूस के पश्चिमी तट पर [D] भारत के पश्चिमी तट पर
[B] चन्द्रमा पर, सी ऑफ टुक्विलिटी (Sea of Tranquility) चन्द्रमा की सतह पर स्थित एक समतल क्षेत्र (लूनर मारे) है, जहाँ अपोलो-11 मिशन के दौरान मानव ने पहली बार कदम रखा था।
172. क्षुद्रग्रह जिन ग्रहों के बीच पाये जाते हैं, वे हैं
[A] मंगल और शुक्र [B] मंगल और बृहस्पति [C] बृहस्पति और शनि [D] शनि और अरुण
[B] मंगल और बृहस्पति
173. सर्वप्रथम खोजा गया क्षुद्रग्रह है-
[A] वेस्टा [B] सिरस [C] पलास [D] जूनो
[B] सिरस
174. धूमकेतु की पुच्छ सूर्य से परे दिष्ट होती है क्योंकि-
[A] जैसे-जैसे धूमकेतु सूर्य के चारों ओर घूर्णन करता है वैसे-वैसे उसका हल्का द्रव्यमान केवल अपकेन्द्री बल के कारण दूर क्षिप्त हो जाता है। [B] जैसे-जैसे धूमकेतु घूर्णन करता है, उसका हल्का द्रव्यमान उसकी पुच्छ की दिशा में स्थित किसी तारे द्वारा आकर्षित हो जाता है। [C] सूर्य द्वारा उत्सर्जित विकिरण घूमकेतु पर भैज्य दाब डालता है, जिससे उसकी पुच्छ सूर्य से दूर क्षिप्त हो जाती है। [D] घूमकेतु की पुच्छ सदैव एक ही अभिविन्यास में रहती है।
[C] सूर्य द्वारा उत्सर्जित विकिरण घूमकेतु पर भैज्य दाब डालता है, जिससे उसकी पुच्छ सूर्य से दूर क्षिप्त हो जाती है।
175. क्षुद्र ग्रहों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए-
I. क्षुद्र ग्रह सूर्य की परिक्रमा करने वाले विभिन्न आकारों के चट्टानी मलबे हैं। II. अधिकांश क्षुद्र ग्रह छोटे हैं किन्तु कुछ का व्यास 1000 किमी तक बड़ा है। III. क्षुद्र ग्रहों की कक्षा बृहस्पति और शनि की कक्षाओं के मध्य स्थित है।
[A] I, II और III सही है। [B] I और II सही है। [C] II और III सही है। [D] I और III सही है।
[B] I और II सही है।
176. सूर्य ग्रहण होता है जब-
[A] सूर्य चन्द्रमा और पृथ्वी पर त्रिकोण बनाते हैं। [B] पृथ्वी की परछाई चन्द्रमा पर पड़ती है। [C] चन्द्रमा पृथ्वी और सूर्य के मध्य आ जाता है और सूर्य पूरी तरह स्पष्ट दिखायी नहीं देता है। [D] सूर्य चन्द्रमा और पृथ्वी के बीच आ जाता है।
[C] चन्द्रमा पृथ्वी और सूर्य के मध्य आ जाता है और सूर्य पूरी तरह स्पष्ट दिखायी नहीं देता है।
177. पूर्ण सूर्य ग्रहण के समय सूर्य का कौन-सा भाग दिखायी देता है?
[A] किरीट (Corona) [B] वर्ण मण्डल [C] प्रकाश मण्डल [D] इनमें से कोई नहीं
[A] किरीट (Corona)
178. सूर्य ग्रहण निम्नलिखित में से किस स्थिति में पड़ता है?
[A] जब पृथ्वी और सूर्य के बीच चन्द्रमा आ जाता है। [B] जब सूर्य और चन्द्रमा के बीच में पृथ्वी आ जाती हैं। [C] जब सूर्य चन्द्रमा तथा पृथ्वी समकोण पर स्थित होते हैं। [D] इसका कोई निश्चित समय नहीं है।
[A] जब पृथ्वी और सूर्य के बीच चन्द्रमा आ जाता है।
179. सूर्य ग्रहण की स्थिति पायी जाती है-
I. जब पृथ्वी चन्द्रमा और सूर्य के बीच आ जाती है।
11. जब चन्द्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है।
III. जब अमावस्या का दिन होता है।
IV. जब पूर्णिमा का दिन होता है।
कूट:
[A] II, और IV सही है। [B] II और III सही है। [C] I और III सही है। [D] I और IV सही है।
[B] II और III सही है।
180. एक कैलेण्डर वर्ष में अधिक से अधिक कितने ग्रहण हो सकते हैं?
[A] 5 [B] 9 [C] 11 [D] 7
[D] 7
181. डायमण्ड रिंग (Diamond Ring) की घटना होती है-
[A] प्रत्येक पूर्णिमा के दिन [B] प्रत्येक अमावस्या के दिन [C] सूर्य ग्रहण के दिन [D] चन्द्र ग्रहण के दिन
[C] सूर्य ग्रहण के दिन
182. सिजिगी (syzygy) है-
[A] सूर्य, पृथ्वी तथा चन्द्रमा की एक ही सीधी रेखा में स्थिति [B] पृथ्वी के एक ही ओर सूर्य तथा चन्द्रमा की स्थिति [C] सूर्य तथा चन्द्रमा के बीच पृथ्वी की स्थिति [D] सूर्य, चन्द्रमा और पृथ्वी की समकोणिक स्थिति
[A] सूर्य, पृथ्वी तथा चन्द्रमा की एक ही सीधी रेखा में स्थिति
183. चन्द्रग्रहण का कारण है-
[A] पृथ्वी एवं सूर्य के बीच चन्द्रमा का आना [B] पृथ्वी एवं चन्द्रमा के बीच सूर्य का आना [C] सूर्य एवं चन्द्रमा के बीच पृथ्वी का आना [D] उपर्युक्त में सभी
[C] सूर्य एवं चन्द्रमा के बीच पृथ्वी का आना
184. चन्द्रग्रहण घटित होता है-
[A] अमावस्या के दिन [B] अर्धचन्द्र के दिन [C] पूर्णिमा के दिन [D] उपर्युक्त (A) और (B)
[C] पूर्णिमा के दिन
185. सूची-1 को सूची-11 के साथ सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए-