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14. कार्ल रिटर

14. कार्ल रिटर




कार्ल रिटर⇒

कार्ल रिटर

प्रश्न प्रारूप

Q. भूगोल के विकास में रिटर के योगदानों का मूल्यांकन कीजिए।

अथवा, “रिटर उन्नीसवीं शताब्दी का महत्वपूर्ण भूगोलवेत्ता था”। विवेचना कीजिये।

परिचय

      आनुभाविक अनुसंधान में विश्वास रखने वाले, उद्देश्यवादी और सशक्त प्रकृतिवादी रिटर ने भूगोल को अपने अथक प्रयास से एक नया स्वरूप प्रदान किया है, इसलिए इन्हें आधुनिक भूगोल के भवन का आधार कहा जाता है। कार्ल रिटर एवं अलेक्जेंडर वॉन हम्बोल्ट दोनों ही समकालीन, आधुनिक वैज्ञानिक भूगोल के संस्थापक एवं भूगोल के चिरसम्मत काल के पर्याय थे।

    कार्ल रिटर भौगोलिक प्रतिरूपों में ईश्वर की झलक देखता था जबकि हम्बोल्ट धर्मनिरपेक्ष एवं तत्कालीन जर्मन आदर्शवाद का पैरोकार था। 

जीवनी- जन्म- 1789 ई० में जर्मनी के क्लेडिलन बर्ग में एक साधारण  चिकित्सक परिवार में हुआ। 

शिक्षा- प्रारंभिक शिक्षा रूसो तथा पेस्टोलॉजी के सिद्धांतों पर आधारित स्नेप पेंथल नामक स्कूल में 1785 ई० से प्रारंभ हुई। इसके बाद, 

◆ 17 वर्ष की आयु में हाले विश्वविद्यालय में प्रवेश।

◆ 19 वर्ष की आयु में फ्रैंकफर्ट नगर में प्राइवेट शिक्षक।

◆ 1814 ई० में गोटेंजन विश्वविद्यालय में शोध कार्य किया।

◆ 1819 ई० में जिम्नेशियम ऑफ फ्रैंकफर्ट विश्वविद्यालय में इतिहास भूगोल के प्रोफेसर बने।

◆ 1820-59 ई० तक बर्लिन विश्विद्यालय में प्राध्यापक।

नोट: 1807 में रिटर की मुलाकात हम्बोल्ट से हुई तथा इसके बाद दोनों ने मिलकर भूगोल का विकास किया।

मृत्यु- 1859 ई० को बर्लिन में

भूगोल रिटर का योगदान 

         रिटर के योगदान की चर्चा निम्न शीर्षकों के अंतर्गत की जा सकती है-

(1) भौगोलिक समिति के संस्थापक के रूप में:-

            भौगोलिक ज्ञान के प्रसार तथा भौगोलिक पत्रिका के प्रकाशन हेतु 1828 में ‘बर्लिन भौगोलिक संस्था’ (Berlin Geographical Society) की स्थापना की।

 

(2) एक भौगोलिक लेखक के रूप में:-

कार्ल रिटर

(3) भौगोलिक विधितंत्र के विश्लेषक के रूप में:-

(i) आनुभविक विधि (Emperical Method)

(ii) तुलनात्मक विधि (Comperative Method)

(iii) प्रादेशिक विधि (Regional Method)

(iv) विश्लेषण तथा संश्लेषण विधि (Analysis and Synthesis Method) 

(v) मानचित्र विधि (Cartographic Method)

(vi) निगमनात्मक विधि (Deductive Method)

          इसके अलावे विभिन्न दर्शनग्राही विधि, क्षेत्र वर्णनी विधि, परिस्थितिकी विधि को भूगोल में रिटर की देन है।

नोट: भौगोलिक अध्ययन विधि के क्षेत्र में रिटर ने फॉरस्टर को महान माना।

(4) प्रदेशों के पदानुक्रम को स्पष्ट करने में:-

          प्रदेशों के पदानुक्रम को स्पष्ट करना रिटर का भूगोल में एक प्रमुख योगदान है। इसने भू-आकृतियों का द्वि-स्तरीय वर्गीकरण प्रस्तुत किया है:-

कार्ल रिटर

नोट: महाद्वीप को रिटर ने जर्मन भाषा में ‘आर्डटिल’ (Erdteule) कहा है।

कार्ल रिटर

चित्र: रिटर के तृतीय कोटि प्रदेश का उच्चावच

(5) भौगोलिक संकल्पनाओं के क्षेत्र में:-

कार्ल रिटर

नोट: रिटर को ‘आर्म चेयर ज्योग्रफर’ कहा जाता है।           

(6) भौगोलिक विचारधाराओं के प्रतिपादक के रूप में:-

(A) भूगोल के क्षेत्र (The Field of Geography)- रिटर के अनुसार भूगोल में तीन चीजों का होना आवश्यक है-

कार्ल रिटर

(B) नियतिवाद (Determinism)- रिटर के अनुसार भौगोलिक विविधता के द्वारा ऐतिहासिक विविधता उत्पन्न   होती है। अत: मानव स्वतंत्र नहीं है बल्कि प्रकृति के नियत्रण में उसके अधीन है। 

कार्ल रिटर

(C) सम्पूर्णता की संकल्पना (Concept of Wholeness)- रिटर के अनुसार केवल प्राकृतिक तथा मानवीय पक्ष से भूगोल का निर्माण नहीं होता। अत: सम्पूर्णता के लिए विभिन्न शक्तियों का संयोजन आवश्यक है।

कार्ल रिटर

(D) मानव केन्द्रित भूगोल (Anthropocentric)- केवल पृथ्वी तल का अध्ययन ही भूगोल का उद्देश्य नहीं है बल्कि मानवीय क्रियाओं का वर्णन विशेष महत्व रखता है।

कार्ल रिटर

(E) क्षेत्रीय अध्ययन (Chorological Study)- रिटर के अनुसार, जिस तरह कालक्रम इतिहास का आधार होता है, उसी तरह कोई क्षेत्र भौगोलिक अध्ययन का आधार होता है।

(F) भूगोल आनुभाविक विज्ञान है- रिटर के अनुसार भूगोल एक आनुभाविक विज्ञान है जो प्रेक्षण, परिणाम और सूचना पर आधारित है। 

(G) प्रादेशिक अध्ययन- रिटर ने प्रादेशिक अध्ययन की व्याख्या के लिए ‘Landerkunde’ और ‘Augemeine Erdkunde’ नामक शब्द का प्रयोग किया।

धरातल विभाजन का आधार⇒ प्राकृतिक 

  • Landerkunde (प्राकृतिक प्रदेश)⇒ विशिष्ट अध्ययन से सम्बंधित
  • Augemeine Erdkunde (सामान्य भूगोल)⇒ प्राकृतिक +मानवीय

नोट: रिटर को प्रादेशिक भूगोल का जनक कहा जाता है।

कार्ल रिटर

(H) ईश्वरवादी विचारधारा (Teleological Approach)- रिटर का मानना था कि पृथ्वी की रचना ईश्वर ने उद्देश्यपूर्वक की है। इनके अनुसार पृथ्वी मानव की शिक्षण और पोषण भूमि है। 

(I) विविधता में एकता (Unity in Diversity)- प्रकृति में विविधता में एकता इनके प्रादेशिक भूगोल का मूल मंत्र था।

(J) मानचित्र विधि (Cartographic Process)- भौगोलिक वर्णन के लिए रिटर ने मानचित्र विधि को एक प्रमुख अस्त्र बनाया।

आलोचना

(i) रिटर अपनी प्रादेशिक अध्ययन में तुलनात्मक विधि का व्यवहार करने में असफल रहे।

(ii) रिटर भूगोल का स्पष्ट तथा युक्तिपूर्ण ढाँचा गढ़ने में लगभग असफल रहे।

(iii) बाद के वर्षों में उन पर द्वैधता का पोषक होने का भी आरोप लगा। 

निष्कर्ष 

       उपर्युक्त आलोचनाओं के बावजूद रिटर का योगदान भौगोलिक ज्ञान के प्रसारण में महत्वपूर्ण रहा है। अंततः हम कह सकते हैं कि कार्ल रिटर ही भूगोल में वस्तुत: द्वैतवाद का जनक था। उसी ने इस अवधारणा का सृजन किया कि पृथ्वी का अध्ययन मनुष्य के लिए किया जाता है। उसने यह भी कहा कि मनुष्य का अध्ययन पृथ्वी का अंग मानकर किया जाता है। इस तरह भौतिक भूगोल एवं मानव भूगोल दोनों की नींव पड़ी।

उत्तर लिखने का दूसरा तरीका

           यदि उन्नीसवीं शताब्दी के अंतिम चरण में भूगोलवेत्ताओं ने अपने नवीन विज्ञान की अधिकांश संकल्पनाओं को विकसित किया तो उनके “विचारों, मांगों तथा इच्छाओं को तथ्यों में परिणत करने” का श्रेय बहुत कुछ अलेक्जेन्डर वॉन हम्बोल्ट तथा कार्ल रिटर को जाता है। रिटर का जन्म जर्मनी की हार्ल्स पहाड़ियों में स्थित क्वेडली बुर्ग गांव में एक साधारण परिवार में हुआ था। प्राथमिक शिक्षा, पिता की मृत्यु व आर्थिक कठिनाई के कारण घर पर ही हुई थी। घरेलू अध्यापक गुटस मुथ्स थे। 1776 में इन्होंने हाल विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया।

      1825 में फ्रिडरीश विश्वविद्यालय, बर्लिन में प्रोफेसर बने। 1828 में जब बर्लिन में भूगोल परिषद की स्थापना हुई तो वे इसके प्रथम अध्यक्ष बने और जीवन पर्यन्त इसके अध्यक्ष रहे।

रिटर की रचनायें (Works of Ritter):-

      रिटर ने भूगोल के प्रचार-प्रसार के लिये अनेक ग्रन्थ लिखे, मानचित्र बनाये व शोध पत्र प्रकाशित किये। 1804 में रिटर का प्रथम ग्रन्थ- Europe: A Geographical, Historical and Statistical Painting प्रकाशित हुआ। इस पुस्तक का दूसरा खण्ड 1806 में प्रकाशित हुआ। 1817 में रिटर की सर्वाधिक महत्वपूर्ण रचना अर्डकुण्डे (Erdkunde) का प्रथम खण्ड (अफ्रीका महाद्वीप) प्रकाशित हुआ। 1818 में अर्डकुण्डे का दूसरा खण्ड (एशिया महाद्वीप) प्रकाशित हुआ। इस प्रकार 1859 तक अर्डकुण्डे के 19 खण्डों का प्रकाशन हुआ। अन्तिम खण्ड रिटर की मृत्यु के मात्र दो दिन पूर्व प्रकाशित हुआ था। रिटर ने यूरोप की मानचित्रावली भी 1806 में प्रकाशित की थी। इसमें छः मानचित्र थे।

रिटर का विधि-तंत्र (Methodology of Ritter):-

      रिटर की अध्ययन प्रणाली भी हम्बोल्ट की अध्ययन प्रणाली के समान ही थी। उसने अपने अध्ययन के लिये निम्नलिखित विधियाँ अपनायीं-

(i) आनुभविक विधि (Empirical Method):-

      रिटर आनुभविक विधि द्वारा क्षेत्र सर्वेक्षण (Field Survey) करने में विश्वास करता था। उसका मत था कि सावधानीपूर्वक शुद्ध प्रेक्षण करना व सत्य का पता लगाना अध्ययन का उद्देश्य होना चाहिये। रिटर भूगोल को आनुभविक विज्ञान (Empirical Science) मानता था।

(ii) विश्लेषण एवं संश्लेषण विधि (Analysis and Synthesis Method):-

      भौगोलिक तथ्यों को प्रेक्षणों (Observations) द्वारा एकत्र करना व उनका संश्लेषण एवं विश्लेषण करना तथा अन्त में सामान्यीकरण करना-रिटर की इस पद्धति ने भूगोल को वैज्ञानिकता प्रदान की।

(iii) तुलनात्मक विधि (Comparative Method):-

      रिटर ने विभिन्न तथ्यों में कार्य कारण सम्बन्ध (Causal relationship) व अन्तर समझाने के लिये तुलनात्मक विधि अपनाई।

(iv) मानचित्र विधि (Cartographic Method):–

       मानचित्रण को रिटर ने भूगोल का अभिन्न अंग माना था। उसने स्वयं अपने ग्रन्थों आदि में मानचित्रों का उपयोग किया। यूरोप के मानचित्रों की एक मानचित्रावली प्रकाशित की।

रिटर की विचारधारा (Ritter’s Ideology)-

     रिटर व हम्बोल्ट समकालीन विद्वान थे। आयु में हम्बोल्ट रिटर से 10 वर्ष बड़ा था। रिटर पर हम्बोल्ट का काफी प्रभाव पड़ा था। रिटर ने स्वयं भी इस तथ्य को स्वीकार किया था। परन्तु फिर भी इन दोनों महान विद्वानों की विचारधाराओं में पर्याप्त अंतर था। रिटर की विचारधारा के मुख्य तथ्य इस प्रकार हैं:-

(i) रिटर के विभिन्न ग्रन्थों व लेखों को पढ़ने पर ज्ञात होता है कि रिटर की विचारधारा विकासशील थी।

(ii) रिटर वातावरण निश्चयवाद (Environmental Determinism) का पोषक था। उसने मानव व वातावरण के सम्बन्धों के अध्ययन को भूगोल का अभिन्न अंग बताया था तथा स्वयं ने इन सम्बन्धों का अध्ययन करके वातावरण को अधिक शक्तिशाली बताया था।

(iii) रिटर ने होम्मेयर व गट्टेरेर की शुद्ध भूगोल (Reine/Pure Geography) की विचारधारा की न केवल आलोचना की, वरन् उसे अवैज्ञानिक बताते हुए अस्वीकार भी कर दिया था। उसके अनुसार- “Pure Geography is nothing more than a general description of terrain.”

(iv) रिटर ने प्रादेशिक अध्ययन पद्धति को अपनाया था तथा प्रादेशिक व्यक्तित्व में सम्पूर्ण की कल्पना की थी। रिटर का सर्वाधिक प्रसिद्ध ग्रन्थ अर्डकुण्डे (Erdkunde) इसी विचारधारा पर आधारित था। उसने अर्डकुण्डे के प्रथम खण्ड में ही अफ्रीका महाद्वीप को विभिन्न प्रदेशों में बांट कर प्रत्येक का सम्पूर्ण वर्णन किया है।

(v) रिटर की विचारधारा ईश्वरवादी (Teleological) विचारधारा थी । उसका मत था कि ईश्वर ने पृथ्वी पर प्रत्येक वस्तु किसी न किसी उद्देश्य से बनाई है।

(vi) रिटर के अनुसार उसका उद्देश्य- ‘समस्त थल’ (Whole Land) का सजीव चित्रण प्रस्तुत करना है, जिसमें उसके प्राकृतिक और कृषि के (Cultivated) उत्पादनों को, उसके प्राकृतिक और मानवीय लक्षणों (Features) को तथा इन सबको एक सम्बद्धपूर्ण (Coherent whole) के रूप में इस प्रकार प्रस्तुत किया जाना है कि मानव और प्रकृति (Nature) के विषय में सबसे अधिक महत्वपूर्ण अनुमान स्वयं प्रत्यक्ष हो जायें, विशेषकर जब उनकी साथ-साथ तुलना की जाय।

(vii) रिटर के अनुसार भूगोल का उद्देश्य पृथ्वी तल का वर्णन करना मात्र नहीं वरन् उसकी घटनाओं का सकारण (Causal) वर्णन करना है।

अध्याय-7 मानचित्र अध्ययन

बिहार बोर्ड वर्ग-6 Geography Solution

अध्याय-7 मानचित्र अध्ययन


अध्याय-7 मानचित्र अध्ययन

अभ्यास

1. सही विकल्प को चुनें।

(i) जमीन के बड़े भाग को कागज पर दिखाने के लिए प्रयोग करते हैं:

(क) छोटे मापक का

(ख) बड़े मापक का

(ग) दोनों मापक का

(ङ) उपर्युक्त सभी

उत्तर- (क) छोटे मापक का

(ii) जिस मानचित्र में पर्वत पठार, मैदान इत्यादि को दर्शाते हैं उसे कहते हैं-

(क) थिमेटिक मानचित्र

(ख) भौतिक मानचित्र

(ग) राजनैतिक मानचित्र

(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं।

उत्तर- (ख) भौतिक मानचित्र

(iii) मानचित्र में मैदान को दिखाते हैं-

(क) काले रंग से

(ख) नीले रंग से

(ग) हरे रंग से

(घ) लाल रंग से

उत्तर- (ग) हरे रंग से

(iv) मानचित्र में दक्षिण दिशा होती है-

(क) दायीं ओर

(ख) बायीं ओर

(ग) ऊपर की ओर

(घ) नीचे की ओर

उत्तर- (घ) नीचे की ओर

(v) मानचित्र निर्माण में ध्यान रखना चाहिए-

(क) संकेतों का

(ख) दिशाओं का

(ग) मापक का

(घ) उपर्युक्त सभी का

उत्तर- (घ) उपर्युक्त सभी का

2. खाली जगहों को भरिए।

(i) मानचित्र में जलीय भाग को नीला रंग से दिखाया जाता है।

(ii) मानचित्र में उत्तर दिशा हमेशा ऊपर की तरफ होती है।

(iii) जनसंख्या मानचित्र थिमेटिक मानचित्र का उदाहरण है।

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें।

(i) चित्र एवं मानचित्र में क्या अंतर है?

उत्तर- चित्र एवं मानचित्र में निम्नलिखित आधारभूत अंतर है-

⇒ चित्रों में आमतौर पर चीजें वैसी ही बनाई जाती हैं, जैसी वह दिखती हैं परन्तु मानचित्र में चीजों को चिह्न या संकेत के रूप में दिखाई जाती है।

⇒ चित्र आमतौर पर ऐसे बनाये जाते हैं जैसे कोई उस जगह किनारे खड़े होकर देखता हो और वह उसी प्रकार दिखाई भी देता है लेकिन मानचित्र हमेशा ऐसा बनाया जाता है जैसे उस जगह को ऊपर या आसमान से देख रहे हैं।

⇒ चित्र में मापक (स्केल) का उपयोग नहीं होता परन्तु मानचित्र में मापक (स्केल) का उपयोग किया जाता है।

(ii) अगर आपको विश्व का मानचित्र बनाना हो तो किन-किन बातों का ध्यान रखना होगा?

उत्तर- अगर विश्व का मानचित्र बनाना हो तो निम्न बातों को ध्यान में रखकर बना सकते-

⇒ नक्शे में अगर कोई दुरी सेमी० में है तो वह वास्तविक रूप में कमरे में 1 मीटर के बराबर होगा।

⇒ 1 सेमी = 1 मीटर, जिससे पता किया जा सकता है कि नक्शे में जो दूरी है वह वास्तव में कितनी दूरी के बराबर है। इस प्रकार हम मानचित्र को छोटा, बड़ा कर सकते हैं। जितना बड़ा मानचित्र बनाना होता है पैमाने का निर्धारण भी उसी प्रकार करते हैं।

⇒ मानचित्र में दिशा सूचक रेखा बनाई जाती है।

जैसे-
अध्याय-7 मानचित्र अध्ययन

⇒ मानचित्र से हमें बहुत अधिक जानकारी प्राप्त होती है। मानचित्रों में दी गई सूचनाओं के आधार पर उनका नामकरण किया जाता है। जैसे- जलवायु मानचित्र, वनस्पति मानचित्र, जनसंख्या मानचित्र, वर्षा मानचित्र, उद्योग मानचित्र आदि।

⇒ नक्शे में रंगों एवं चिह्नों की सहायता से हमें वहाँ की जानकारी प्राप्त करने में सहायता होती है। जैसे- जलाशय-नीला रंग, पर्वत- भूरा रंग, पठार- पीला रंग, मैदान- हरा रंग आदि।

इस प्रकार हम उपर्युक्त इन सभी बातों को ध्यान में रखकर विश्व का मानचित्र बना सकते हैं।

(iii) मानचित्र में इस्तेमाल किए गए रंग किसके प्रतीक हैं?

उत्तर- मानचित्र में जलाशय- नीले रंग का, पर्वत- भूरा रंग का, पठार- पीला रंग का और मैदान- हरा रंग का प्रतीक है।

(iv) मानचित्र के कितने प्रकार है? लिखें।

उत्तर- मानचित्र के निम्नलिखित प्रकार होते हैं:-

⇒ पर्वत, पठारों, मैदानों, नदियों, महासागरों आदि को दर्शाने वाले मानचित्र, प्राकृतिक मानचित्र कहलाते हैं।

⇒ गाँव, शहर, राज्य, देश एवं विश्व के विभिन्न देशों तथा उनकी सीमाओं को दर्शाने वाले मानचित्र, राजनीतिक मानचित्र कहलाते हैं।

⇒ इन मानचित्रों में दी गई सूचनाओं के आधार पर उनका नामकरण किया जाता है। जैसे-जलवायु मानचित्र, वनस्पति मानचित्र, जनसंख्या मानचित्र, वर्षा मानचित्र, उद्योग मानचित्र आदि।

(v) मानचित्र में दिशाओं का निर्धारण कैसे करते हैं?

उत्तर- मानचित्र में दिशाओं का निर्धारण दिशा सूचक रेखा के द्वारा किया जाता है। मानचित्र में उत्तर दिशा जो ऊपर की ओर है उसे उत्तर दिशा सूचक रेखा के माध्यम से दिखाई जाती है। जैसे-उत्तर की ओर चिह्न को दर्शाया जाता है।

जैसे-
अध्याय-7 मानचित्र अध्ययन

(vi) मापक क्या है? उदाहरण देकर समझाएँ।

उत्तर- मानचित्र पर दो किन्हीं स्थानों के बीच की दूरी और धरातल पर उन्हीं दो स्थानों के बीच की वास्तविक दूरी के अनुपात को मापक/पैमाना (Scale) कहते हैं। उदाहरण के लिए यदि किन्हीं दो स्थानों के बीच की वास्तविक दूरी 500 किमी० है, और इसे मानचित्र पर 5 सेमी० द्वारा दिखाया जाता है तो संबंधित मानचित्र का पैमाना 1 सेमी० = 100 किमी० होगा।


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अध्याय-6 पृथ्वी और ग्लोब

बिहार बोर्ड वर्ग-6 Geography Solution

अध्याय-6 पृथ्वी और ग्लोब


अध्याय-6 पृथ्वी और ग्लोबअभ्यास

1. सही विकल्प चुनें-

(i) एक देशांतर से दूसरे देशांतर की दूरी तय करने में समय लगता है-
(क) चार मिनट
(ख) पाँच मिनट
(ग) चालीस मिनट
(घ) चार संकेण्ड
उत्तर- (क) चार मिनट

(ii) सबसे अधिक गर्मी पड़ती है-
(क) शीत कटिबंध में
(ख) शीतोष्ण कटिबंध में
(ग) उष्ण कटिबंध में
(घ) उत्तरी ध्रुव में
उत्तर- (ग) उष्ण कटिबंध में

(iii) कर्क रेखा है-
(क) 90° अक्षांश पर
(ख) 23½° उत्तरी अक्षांश
(ग) 23½° दक्षिणी अक्षांश
(घ) ध्रुव पर
उत्तर- (ख) 23½° उत्तरी अक्षांश

(iv) अन्तर्राष्ट्रीय तिथि रेखा से पूरब जाने पर-
(क) दिन-रात में परिवर्तन होता है
(ख) एक तिथि घटा दी जाती है
(ग) एक तिथि बढ़ा दी जाती है
(घ) तिथि में कोई परिवर्तन नहीं करते हैं
उत्तर- (ग) एक तिथि बढ़ा दी जाती है

अध्याय-6 पृथ्वी और ग्लोब

2. कम शब्दों में उत्तर दें-

(क) पृथ्वी के दिये गये नमूने का क्या नाम है?
उत्तर- पृथ्वी के दिये गये नमूने का नाम ग्लोब है।

(ख) यह नमूना किस आकृति का होगा? जैसे त्रिकोण, गोल, त्रिभुजाकार आदि।
उत्तर- यह नमूना गोल आकृति का होगा।

(ग) इस नमूने की आकृति वाले किन्हीं अन्य दो वस्तुओं के नाम लिखिये।
उत्तर- इस नमूने की आकृति वाले संतरा, खरबूजा हैं।

(घ) पृथ्वी के इस नमूने पर कौन-सी रेखाएँ बनी हैं? उनके नाम लिखिये।
उत्तर- पृथ्वी के इस नमूने पर अक्षांश रेखा,भूमध्य रेखा, कर्क रेखा, मकर रेखा, आर्कटिक रेखा और अन्टार्टिक बनी है।

(ङ) इस नमूने के अलावा, आप और किन माध्यमों से पृथ्वी पर स्थित किसी स्थान का पता लगा सकते हैं?
उत्तर- इस नमूने के अलावा, मैं आसमान में सूरज की स्थिति या रात में ध्रुवतारे को देखकर किसी स्थान की स्थिति का अनुमान लगा सकते हैं, लेकिन इसमें बहुत समस्या होती है।

       पृथ्वी पर स्थित स्थानों को जानने के लिए कम्पास (दिक् सूचक) और नक्शे से ठिकाना खोजना आसान हो गया। इस प्रकार इन माध्यमों के द्वारा भी हम पृथ्वी पर स्थित स्थानों को पता लगा सकते हैं।

3. ग्लोब पर कुछ पड़ी एवं खड़ी रेखाएँ बनी हुई हैं। इन्हें गौर से देखकर निम्न प्रश्नों के उत्तर तालिका में लिखिए-

अध्याय-6 पृथ्वी और ग्लोब

(क) पड़ी/खड़ी रेखाएँ किन दिशाओं के बीच में खींची गयी-
उत्तर- पड़ी रेखायें पूरब-पश्चिम और खड़ी रेखाएँ उत्तर-दक्षिण दिशाओं के बीच में खींची गयी हैं।

(ख) अन्तर्राष्ट्रीय तिथि रेखा क्या है?
उत्तर- पृथ्वी का आकार गोल है जो एक वृत्त के समान है। एक वृत्त में 360° होते हैं। इसी आधार पर पृथ्वी पर 360 देशांतर रेखाएँ खींची जा सकती हैं। इनमें दो देशांतर रेखाएँ महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। ये हैं 0° तथा 180° देशांतर रेखाएँ।

        0° देशांतर को प्रधान देशांतर रेखा या प्रधान मध्याह्न रेखा तथा 180º देशांतर रेखा को अन्तर्राष्ट्रीय तिथि रेखा कहते हैं।

(ग) किन्हीं दो पड़ी अथवा खड़ी रेखाओं के बीच किस प्रकार की दूरी है? (समान/असमान)
उत्तर- किन्हीं दो पड़ी रेखाओं के बीच की दूरी समान और खड़ी रेखाओं के बीच की दूरी असमान होती है।

(घ) पड़ी/खड़ी रेखाओं को क्या कहते हैं?
उत्तर- पड़ी रेखाओं को अक्षांश रेखा और खड़ी  को देशांतर रेखा कहते हैं।

(ङ) पड़ी एवं खड़ी रेखाओं में से कौन-सी आपस में मिलती है?
उत्तर- पड़ी एवं खड़ी रेखाओं में से खड़ी रेखा आपस में मिलती है।

4. बताइये-

(i) अक्षांश वृत्त किसे कहते हैं?
उतर- भूमध्य रेखीय वृत्त एवं किसी स्थान के बीच जो कोण बनता है उसे उस स्थान का अक्षांश वृत्त कहा जाता है।

(ii) दो प्रमुख अक्षांश रेखाओं के नाम बताइये।
उत्तर- दो प्रमुख अक्षांश रेखाओं के नाम-विषुवत एवं कर्क रेखा हैं।

(iii) पृथ्वी पर कितने कटिबंध हैं? इन कटिबंधों की विशेषताएँ बतलाइये।
उत्तर- पृथ्वी पर तीन कटिबंध हैं।

(क) उष्ण कटिबंध- कर्क एवं मकर रेखाओं के बीच अन्य अक्षांशों की तुलना में सबसे अधिक गर्मी पड़ती है जिसके कारण इसे उष्ण कटिबंध कहा जाता है। यहाँ दिन और रात की स्थितियाँ सालों भर होती है तथा सूर्य की  किरणें लम्बवत् पड़ती हैं।

(ख) सम शीतोष्ण कटिबंध- कर्क एवं मकर रेखा के बाद उत्तरी गोलार्द्ध में उत्तरी ध्रुव वृत्त तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में दक्षिणी ध्रुव वृत्त के बीच वाले क्षेत्र में तापमान मध्यम रहता है। यहाँ जाड़े में सर्दी पड़ती है तथा गर्मी में तापमान अधिक रहता है। इसे सम शीतोष्ण कटिबंध कहते हैं। दिन और रात की स्थितियाँ होती हैं परन्तु सूर्य की किरणें कभी लम्बवत् नहीं पड़ती हैं।

(ग) शीत कटिबंध- उत्तरी गोलार्द्ध में उत्तरी ध्रुव तथा दक्षिण गोलार्द्ध में दक्षिणी ध्रुव क्षेत्रों में सालों भर ठंड पड़ती है। इसे शीत कटिबंध कहा जाता है। यहाँ छ: महीने का दिन एवं छः महीने की रात होती है।

(iv) देशान्तर रेखा किसे कहते हैं?
उत्तर- ग्लोब पर उत्तरी ध्रुव एवं दक्षिणी ध्रुव को जोड़ती हुई रेखाएँ खींची गई हैं। ये सभी लम्बवत् रेखाएँ देशांतर रेखाएँ हैं। 0° तथा 180° दो प्रमुख देशांतर रेखाएँ है। एक वृत्त में 360° होते हैं। इसी आधार पर पृथ्वी पर 360 देशांतर रेखाएँ खींची गई हैं। इनकी लम्बाई समान होती है। इसकी संख्या 360 होती है। देशांतर रेखाएँ तिथि निर्धारण में सहयोग देती हैं।

(v) प्रधान मध्याह्न रेखा क्यों महत्वपूर्ण हैं?
उत्तर- 0° देशांतर को प्रधान देशांतर रेखा या प्रधान मध्याह्न रेखा कहते हैं। पृथ्वी पर किसी स्थान की स्थिति दर्शाने तथा समय निश्चित करने के लिए देशांतर रेखाओं का ज्ञान होना आवश्यक है। इससे तिथि निर्धारण में भी सहयोग मिलता है।

(vi) अक्षांश रेखाओं तथा देशांतर रेखाओं की कुल संख्या कितनी है?
उत्तर- ग्लोब पर कुल अक्षांश रेखाओं की संख्या 179 तथा देशांतर रेखाओं की कुल संख्या 360 है।


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अभ्यास

1. सही विकल्पों पर (√) का निशान लगाएँ

(i) रबी फसलों के लिए मशहूर ताल क्षेत्र अवस्थित है-
(क) तराई क्षेत्र
(ख) पटना से पूरब
(ग) पटना से पश्चिम
(घ) शाहाबाद में
उत्तर- (ख) पटना से पूरब

(ii) सोमेश्वर पहाड़ियाँ हैं-
(क) तराई क्षेत्र में
(ख) राजगीर में
(ग) कैमूर में
(घ) मंदार हिल में
उत्तर- (क) तराई क्षेत्र में

(iii) सरैसा क्षेत्र में शामिल जिले हैं-
(क) सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल
(ख) सुपौल, सहरसा, अररिया
(ग) वैशाली, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर
(घ) जहानाबाद, गया, पटना
उत्तर- (ग) वैशाली, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर

(iv) गन्ना उत्पादक जिले हैं-
(क) किशनगंज, अररिया, जोगबनी
(ख) पूर्णिया, कटिहार, भागलपुर
(ग) गया, नवादा, बिहार
(घ) गोपालगंज, बेतिया, मोतिहारी
उत्तर- (घ) गोपालगंज, बेतिया, मोतिहारी

2. प्रश्नों के उत्तर लिखें-

(क) बिहार की चौहद्दी लिखें।
उत्तर- बिहार के उत्तर दिशा में नेपाल देश, पूरब में पश्चिम बंगाल, दक्षिण में झारखंड तथा पश्चिम में उत्तर प्रदेश राज्य स्थित है।

(ख) ताल क्षेत्र की विशेषताओं का वर्णन करें।
उत्तर- ताल क्षेत्र में किसी का भी घर नहीं होता है। ताल क्षेत्र में हम रबी की फसल ही केवल उगाई जाती हैं। खरीफ की फसल तो बोते ही नहीं हैं। बरसात में नदियों का पानी का बड़ा हिस्सा पूरे इलाके में दूर-दूर तक फैल जाता है और एक बड़ा ताल-सा दृश्य दिखाई देता है, इसीलिए इसे ताल क्षेत्र कहते हैं।

          अक्टूबर के महीने में जब सारा पानी धरती सोख लेती है और जमीन दलदली होती है तब हम इनमें दलहन और रबी की फसलों को बो देते हैं। इनमें चना, मसूर, सरसों, तीसी, गेहूँ होता है। मिट्टी दलदली होने के कारण रबी की जबरदस्त फसल होती है।

          टाल या ताल क्षेत्र में दुधारू पशुओं के लिए पर्याप्त भूसा मिलता है। यह पशुओं के लिए अत्यंत ही लाभदायक होता है। रबी की फसल अच्छी होने के कारण ही यहाँ दाल छाँटने वाली कई मिलें भी हैं। ताल क्षेत्र में दलहन की फसल अत्यधिक मात्रा में होती है जिससे यहाँ खेती की पैदावार काफी अच्छी होती है।

(ग) सरैसा क्षेत्र में कौन-कौन से जिले आते हैं और उनका क्या महत्व है?
उत्तर- उत्तर बिहार में समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर और वैशाली जिलों के कुछ-कुछ प्रखंडों में तम्बाकू उपजाया जाता है। इस इलाके को संयुक्त रूप से ‘सरैसा क्षेत्र’ कहा जाता है। यह किसी खास क्षेत्र न होकर पूरे इलाके का ही नाम है। इस इलाके का तम्बाकू देश के अन्य राज्यों में भी भेजा जाता है। वहाँ के किसानों की खेती-बाड़ी का अर्थ खेतों को साफ करके तम्बाकू के पौधों को लगाना उसके पत्तों को सुखाना और उन्हें व्यापारियों के हाथों में बेचना है।

           इस इलाके के किसान बड़ी मेहनत से तम्बाकू के पौधे को उगाते हैं। यहाँ की मिट्टी भी चूनायुक्त होती है। तंबाकू के पौधे धीरे-धीरे बड़े होकर फैलते हैं। बाद में इसे सुखाते हैं। इसको धीरे-धीरे पत्ते को लपेटकर रखते हैं। चूँकि सरैसा इलाके के तम्बाकू काफी कड़कदार होते हैं। इसलिए तम्बाकू बेचने वाले सरैसा के नाम का इस्तेमाल तम्बाकू को प्रभावशाली बनाने के लिए करते हैं।

(घ) बिहार की ज्यादातर चीनी मिलें उत्तर बिहार में हैं। क्यों?
उत्तर- बिहार की ज्यादातर चीनी मिलें उत्तर बिहार में ही हैं। क्योंकि उत्तर बिहार में नेपाल की पहाड़ियों से पानी बहकर आता है और मिट्टी में चूने का अंश चला आता है। यह मिट्टी ईख की खेती के लिए काफी उपयुक्त है।

              यहाँ भारी मात्रा में ईख की खेती की जाती है, और उसकी पैदावार भी अच्छी होती है। एक बड़े किसान अकेले सौ सवा सौ ट्रैक्टर गन्ने बेचते हैं और किसानों के गन्ने खरीदने के लिए मिलें तैयार रहती हैं और उन्हें नकद पैसा भी देती है। इसलिए यहाँ के किसान गन्ना उपजाना पसंद करते हैं। किसान भी गन्ने के फसल एक ही खेत में बार-बार लगातार उपजाते हैं जिससे यहाँ उसकी खरीद-बिक्री भी ज्यादा मात्रा में होती है।

(च) बाढ़ का पानी उतरते ही गाँवों एवं घरों की प्राथमिक जरूरतें क्या होती होगी?
उत्तर- बाढ़ का पानी उतरते ही गाँवों एवं घरों की प्राथमिक जरूरत अपने मवेशियों को ऊँचे स्थानों पर रखकर सुरक्षित करते हैं। ऐसा इसलिए कि बाढ़ का पानी इनकी मवेशियों को बहा न ले जाएँ। बरसात के दिनों में वे लोग बाढ़ से बचने के लिए तटबंधों और स्परों पर रहने चले जाते हैं।

         उसकी प्राथमिक जरूरत अपने और अपने मवेशियों को सुरक्षित जगहों तक पहुँचाना होता है ताकि अपने मवेशियों की जान बचा सकें, इसलिए वे फुस और प्लास्टिक के कामचलाऊ छत और दीवार बनाकर रहते हैं। घरों को छोड़कर तटबंध पर जाने से पहले खेतों में मनीजर के बीज छींट देते हैं। बाद में बाढ़ का पानी उतरने पर मनीजर के पौधे डंठल के रूप में तैयार हो जाते हैं। इस प्रकार वह अपने-आपको तैयार करते हैं जिससे वह अपना बचाव कर सकें।

अध्याय-8 हमारा राज्य बिहार

(छ) बरसात में उत्तर बिहार के लोगों को किस प्रकार की कठिनाइयाँ झेलनी पड़ती हैं?
उत्तर- बरसात में उत्तर बिहार के लोगों को निम्नलिखित प्रकार की कठिनाइयाँ झेलनी पड़ती हैं:-

⇒ बरसात में उत्तर बिहार के लोगों को वर्ष में लगभग 3-4 महीने दोहरी जिंदगी जीते हैं।

⇒ मवेशियों को बचाने के लिए उसे ऊँचे स्थानों पर रखकर सुरक्षित करना पड़ता है जिससे वह बाढ़ के पानी में बहकर कहीं चले न जाएँ।

⇒ गाँव से पानी उतरते ही लोग वापस गाँव में आते हैं और फिर आठ महीनों के लिए फिर से गृहस्थी जमाते हैं। फिर अगले साल पुनः चार महीने बाढ़ की विभीषिका झेलने को तैयार रहना पड़ता है।

⇒ बरसात के मौसम में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में जनजीवन पर बहुत ही गहरा असर पड़ता है।

⇒ बरसात में किसानों, गरीब मजदूरों पर अन्न, जल और आवास की समस्या उत्पन्न हो जाती है।

⇒ बाढ़ का पानी बढ़ने से परेशान लोगों को अपने घरों को छोड़कर तटबंधों या अन्य सुरक्षित जगहों पर रहने के लिए जाना पड़ता है।

(ज) बाढ़ से बचाव का क्या समाधान है?
उत्तर- बाढ़ से बचाव का निम्नलिखित समाधान किया जा सकता है:-

⇒ बाढ़ की समस्या का सामना सभी को एक साथ मिल-जुलकर करना चाहिए।

⇒ बाढ़ से बचने के लिए सभी को भूमि अपरदन की क्रिया को रोकना चाहिए।

⇒ बड़े-बड़े नदियों के जल को मजबूत बाँध बनाकर उसकी दिशाओं को बदलकर उससे बचाव किया जा सकता है।

⇒ बरसात के पानी से बचने के लिए नावों की व्यवस्था भी रखनी चाहिए जिससे पानी बढ़ने पर हम उन नावों के द्वारा दूसरे गाँवों की ओर पलायन कर सके।

⇒ बाढ़ से बचने के लिए हमें अपने घरों को छोड़कर किसी दूसरे स्थान पर सुरक्षित पहुँचना चाहिए।

⇒ अपने मवेशियों को किसी ऊँचे स्थानों पर ले जाकर रखना चाहिए।

⇒ अपनी जरूरत की चीजों को पहले से ही अपने पास उपलब्ध करा लेना चाहिए। जिससे सही समय पर उसका उपयोग कर सकें।


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अभ्यास

1. सही विकल्प को चुनें।

(i) गौतम बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति कहाँ हुई थी?

(क) पावापुरी

(ख) वैशाली

(ग) बोधगया

(घ) सासाराम

उत्तर- (ग) बोधगया

(ii) गया में अवस्थित विष्णुपद मंदिर किसने बनवाया था?

(क) रानी अहिल्या बाई

(ख) अजातशत्रु

(ग) अशोक

(घ) जरासंध

उत्तर- (क) रानी अहिल्या बाई

(ii) बिहार में गर्म जलकुंड कहाँ अवस्थित है?

(क) पावापुरी

(ख) राजगीर

(ग) गया

(घ) चाँदचारा

उत्तर- (ख) राजगीर

(iv) ककोलत प्रसिद्ध है-

(क) ठंडे जल के लिए

(ख) गर्म जल के लिए

(ग) मंदिरों के लिए

(घ) घाटों के लिए

उत्तर- (क) ठंडे जल के लिए

(v) जरासंध का अखाड़ा अवस्थित है-

(क) राजगीर में

(ग) बोधगया में

(ख) नालंदा में

(घ) वैशाली में

उत्तर- (क) राजगीर में

2. खाली जगहों को भरिए।

(i) पितृ पक्ष का मेला कृष्ण पक्ष में लगता है।

(ii) महाबोधि मंदिर के निकट मुचलिंद सरोवर है।

(iii) पावापुरी में जल मंदिर है।

(iv) महावीर ने  शरीर त्यागकर महापरिनिर्वाण प्राप्त किया था।

(v) नालंदा विश्वविद्यालय ज्ञान-विज्ञान का अन्तर्राष्ट्रीय केंद्र था।

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें।

(i) बोधगया क्यों प्रसिद्ध है?

उत्तर- बोधगया में ही महाबोधि मंदिर है। यह मंदिर विश्व के धरोहरों में जाना जाता है। इसी मंदिर में ध्यानरत बुद्ध की प्रतिमा है। यहीं बोधिवृक्ष के नीचे गौतम को ज्ञान प्राप्त हुआ था और वे गौतम बुद्ध कहलाने लगे। इस प्रकार बोधगया मुख्य रूप से गौतम बुद्ध के ज्ञान प्राप्ति स्थान के लिए प्रसिद्ध है।

(ii) अपने स्कूल से आप राजगीर जायेंगे तो रास्ते में आपको क्या-क्या नजर आएगा?

उत्तर- अपने स्कूल से राजगीर जाएँगे तो रास्ते में हमें सर्वप्रथम महाबोधि मंदिर के दर्शन होंगे और रास्ते में बोधिवृक्ष जहाँ गौतम बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था, स्थित है, और वे उसके बाद ही गौतम बुद्ध कहलाने लगे थे। फल्गू नदी के तट पर गया में स्थित ‘विष्णुपद’ मंदिर है। राजगीर के गर्म जलकुंड, मनियारमठ और जरासंध का अखाड़ा, शांति स्तूप नजर आएंगे।

(ii) विष्णुपद मंदिर का निर्माण किसने करवाया था? इसमें किस तरह के पत्थरों का उपयोग किया गया है?

उत्तर-  विष्णुपद मंदिर का निर्माण रानी अहिल्याबाई ने करवाया था। यह काले पत्थरों से बनवाया गया है। यहाँ भगवान विष्णु के पदचिह्न हैं।

(iv) राजगीर में गर्म जल कुंड है। क्यों?

उत्तर- राजगीर चारों ओर पहाड़ियों से घिरा हुआ है और इन पहाड़ियों में गंधक है। इसलिए यहाँ से गर्म पानी का स्राव होता रहता है। इसलिए राजगीर में गर्म जलकुंड हैं। राजगीर के गर्म जलकुंड में हाथ-पाव धोने से सभी की थकावट मिट जाती है।

(v) जलमंदिर कहाँ है और क्यों प्रसिद्ध है?

उत्तर- जलमंदिर पावापुरी में स्थित है। तालाब के बीचों-बीच स्थित जलमंदिर में भगवान महावीर हैं। तालाब में मछलियों और कमल के फूल प्राकृतिक रूप में मंदिर की शोभा बढ़ाते हैं। यही वह जगह है जहाँ भगवान महावीर ने शरीर त्यागकर महापरिनिर्वाण प्राप्त किया था। इसलिए जलोदर अपना खास योगदान के द्वारा ही जलोदर मनमोहक और आकर्षित लगता है। इसी वजह से जलमंदिर दुनिया में सुप्रसिद्ध है।

अध्याय-9 बिहार दर्शन-1

4. सही मिलान करें।

                                  उत्तर-

(i) मुचलिंद सरोवर- (घ) बोध गया

(ii) रानी अहिल्या बाई- (ग) विष्णुपद मंदिर

(iii) शांतिस्तूप- (ख) राजगीर की पहाड़ी

(iv) ककोलत जल प्रपात- (क) नवादा जिला


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