मरुस्थलीकरण एक ऐसी भौगोलिक प्रक्रिया है, जिसमें समतल मैदानी उपजाऊ क्षेत्रों में भी मरुस्थल जैसी विशिष्टताएँ विकसित होने लगती हैं। जिसका मुख्य कारण जलवायु परिवर्तन तथा मानवीय गतिविधियाँ है। इससे शुष्क, अर्द्ध-शुष्क, निर्जल इलाकों की मिट्टी रेगिस्तान में बदल जाती है तथा मिट्टी की उत्पादन क्षमता ह्रास होने लगता है। मरुस्थलीकरण से प्राकृतिक वनस्पतियों का ह्रास तो होता ही है, साथ ही कृषि उत्पादकता, पशुधन एवं जलवायवीय घटनाएँ भी प्रभावित होती हैं।
अक्षांशीय स्थिति:-
यह प्रदेश भूमध्य रेखा के दोनों ओर 20° से 30° अक्षांशों के बीच अर्थात् उष्ण कटिबन्ध में महाद्वीपों के पश्चिमी भागों में फैला हुआ है।
सम्मिलित क्षेत्र:-
अफ्रीका में सहारा तथा कालाहारी मरुस्थल हैं। एशिया में भारत एवं पाकिस्तान का थार मरुस्थल तथा अरब मरुस्थल आस्ट्रेलिया में पश्चिमी आस्ट्रेलिया का मरुस्थल। उत्तरी अमेरिका में कोलोरेडी ऐरीजीना तथा दक्षिणी कैलीफोर्निया के मरुस्थल। दक्षिणी अमेरिका में चिली तथा दक्षिणी पेरू का एटाकामा मरुस्थल।
तापमान एवं वर्षा:-
ग्रीष्म ऋतु अत्यधिक गर्म और शीत ऋतु कम गर्म होती है। इस प्रदेश में संसार के उच्चतम तापमान वाले स्थान स्थित हैं। इस प्रदेश में वर्षा बहुत कम होती है। वर्ष भर में 25 सेन्टीमीटर से भी कम वर्षा होती है।
वनस्पति:-
अति गर्म एवं शुष्क जलवायु के कारण यहाँ वनस्पति बहुत ही कम होती है। इस प्रदेश में वह वनस्पति है जो गर्मी तथा शुष्कता सहन कर सके, जिनकी जड़ें लम्बी हो ताकि भूमि के भीतर दूर गहराई से जल ले सकें, जिनकी पत्तियाँ मोटी हों ताकि वाष्पीकरण द्वारा उनमें जल की कमी न हो।
आर्थिक विकास:-
आर्थिक विकास की दृष्टि से यह प्रदेश बहुत पिछड़ा हुआ है। इसके पिछड़ेपन के कारण निम्नलिखित हैं-
(1) भूमि के अधिकतर भाग में रेत फैली हुई हैं।
(2) वर्षा नहीं होती।
(3) गर्मी बहुत पड़ती है।
(4) अति शुष्क पवनें चलती हैं।
(5) आंधियाँ आती हैं।
(6) जल की कमी है।
(7) यातायात के साधनों की कमी है।
(8) जनसंख्या बहुत कम है।
कृषि:-
इस प्रदेश के अधिकतर भाग में रेत फैली हुई है जिसके कारक कृषि योग्य भूमि बहुत कम है। अत्यधिक गर्मी, शुष्क पवनों तथा जल की कमी के कारण कृषि का विकास अधिक नहीं हो सकता है। नदी घाटियों में सिंचाई द्वारा कृषि की जाती है। मिस्र तथा सूडान की नील घाटी में इस प्रकार की कृषि की जाती है। गेहूँ, ज्वार, बाजरा, कपास तथा तम्बाकू यहाँ की मुख्य फसलें हैं।
उद्योग:-
अरब तथा कैलिफोर्निया में तेल साफ करने के कारखाने हैं। थार तथा कैलिफोर्निया में झीलों से नमक प्राप्त करने का उद्योग है। लोग भेड़ एवं बकरियाँ पालकर ऊन प्राप्त करते हैं जिससे ऊन उद्योग चलता है। चारों ओर रेत फैले होने के कारण यातायात के साधनों की कमी तथा जनसंख्या कम होने के कारण उद्योग का विकास नहीं हो सका है।
यहाँ दो प्रकार के लोग निवास करते हैं। एक तो वे जो कि यूरोप के उन्नतशील लोगों के सम्पर्क में आने से पर्याप्त प्रगति कर गये हैं। उदाहरणार्थ अरब के लोग कैलिफोर्निया तथा पश्चिमी आस्ट्रेलिया में भी यूरोप के उन्नतशील लोग बसे हैं। अतः यहाँ पर लोगों का रहन-सहन आधुनिक ढंग का है।
प्रश्न प्रारूप
1. मरुस्थलों में मानव जीवन तथा कार्यकलापों पर वातावरण के प्रभाव की विवेचना कीजिये।
अथवा, मरूस्थलीय पर्यावरण की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
अथवा, मरूस्थलीय वातावरण में मानवीय क्रियाओं का वर्णन कीजिए।
अथवा, मरूस्थलीय क्षेत्र की विशेषताओं और मानवीय कार्यकलाप का विवरण दीजिए।
भूपृष्ठ की बनावट मानव जीवन को अत्यन्त प्रभावित करती है। भूपृष्ठीय रचना के अनुरूप स्थलरूपों को मोटे तौर पर तीन भागों में बाँटा गया है- पर्वत, पठार और मैदान। मानव पर प्रभाव डालने में प्रत्येक की अपनी अलग-अलग विशेषताएँ हैं।
(1) पर्वत और मानव जीवन:-
पर्वतों पर मानव जीवन के सामने अनेक तरह की कठिनाइयाँ आती हैं जिनका आभास समतल मैदानी भागों में नहीं होता। पर्वतीय क्षेत्रों में समतल भूमि अत्यन्त सीमित होती है। तीव्र ढाल की अपेक्षा साधारण ढाल वाले क्षेत्र मानव के लिए अधिक उपयोगी होते हैं। साधारण ढाल भूमि पर सीढ़ीनुमा खेत बनाकर कृषि की जाती है किन्तु ऊपरी डालों पर सिंचाई की सुविधा प्रदान नहीं की जाती, वहाँ केवल शुष्क कृषि की जाती है।
अधिक ऊँचाई पर तापमान गिर जाता है या बर्फ गिरने की वजह से मानव का रहना सम्भव नहीं होता। इसके अलावा ऊँचाई बढ़ने के साथ-साथ वायुदाब घटता जाता है। 6000 मीटर से अधिक ऊँचाई पर मनुष्य को साँस लेने में कठिनाई होती है। अतः ऐसे स्थानों पर मानवीय कार्य-कलाप नगण्य मिलता है।
पर्वतों की ऊँची नीची भूमि पर परिवहन के साधनों को बनाया जाना भी काफी कठिन होता है।
(2) पर्वत एवं जलवायु:-
एक देश की जलवायु पर पर्वतों का भी प्रभाव पड़ता है। ऊँचाई पर जाते हुए तापमान कम होता जाता है। लगभग 160 मीटर की ऊँचाई पर 90 से०ग्रे० ताप कम हो जाता है। उष्ण देशों में जहाँ पर्वत स्थित है वहाँ, पर्वतों पर स्वास्थ्यवर्धक जलवायु मिल जाती है। पर्वत-शिखरों पर पर्यटक केन्द्र बन जाते हैं। भारत में शिमला, मंसूरी, दार्जिलिंग, उटकमण्ड आदि इस सम्बन्ध में उल्लेखनीय नगर हैं।
पर्वतीय प्रदेश आर्द्रतापूर्ण पवनों को रोकने में पूर्ण सक्षम होते हैं इसलिए वर्षा भी मैदानों की अपेक्षा अधिक होती है। साथ ही पर्वत श्रेणियाँ एक देश को ठंडी पवनों से सुरक्षा भी प्रदान करती है। भारत के उत्तर में हिमालय स्थित होने के कारण मध्य एशिया की ठंडी पवनें भारत में प्रवेश नहीं कर पाती जबकि यही ठंडी पवनें चीन के आधे से अधिक भाग को प्रभावित करती हैं। इसी प्रकार उत्तरी अमेरीकी में कनाडा की ठंडी पवनें संयुक्त राज्य अमेरीका के दक्षिण तक पहुँच जाती है और तापमान को पर्याप्त गिरा देती है।
(3) पर्वत एवं वनस्पति:-
पर्वतों पर ऊँचाई के अनुसार वनस्पति के प्रकार में काफी भिन्नता पाई जाती है। अत: भूमि उपयोग भी प्रभावित होता है। पर्वतों पर एक विशिष्ट ऊँचाई से ऊपर वृक्ष नहीं उगते, केवल घास के मैदान पाये जाते हैं। यहाँ पशुओं के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ मिलती हैं।
ग्रीष्मकाल में यह क्षेत्र चरागाहों के रूप में बहुत उपयोगी होते हैं। पशुओं में भेड़, बकरियाँ ही ज्यादा पाई जाती हैं क्योंकि इनमें ठंड सहने की शक्ति ज्यादा होती है। चरागाहों के नीचे शंकुधारी वनों का कटिबन्ध मिलता है जहाँ मुलायम लकड़ी के अधिक उपयोगी वृक्ष उगे हुए पाये जाते हैं। शंकुधारी वनों से नीचे पर्णपाती वनों का कटिबन्ध मिलता है, इन दोनों के बीच मिश्रित वनों का कटिबन्ध मिलता है।
पर्वतीय क्षेत्रों में वनों की अधिकता की वजह से लकड़ी काटने का धन्या अत्यन्त लोकप्रिय होता है किन्तु यहाँ की ढालू भूमि पर लकड़ी काटना, छाँटना तथा लट्ठों को लकड़ी के चीरने वाले कारखानों तक पहुँचाना अत्यन्त कठिन काम होता है। इन कामों के लिये सरल उपाय खोज निकाले गये हैं। नार्वे और स्वीडन में लकड़ी के लट्ठों को बर्फ पर फिसलाकर जमी हुई नदियों तक पहुँचाया जाता है। हिमालय क्षेत्र के वृक्ष को काटकर तनों को नदियों में बहा दिया जाता है। संयुक्त राज्य अमेरिका में पक्की सड़कें बना दी गई हैं। लट्ठों को ढोने का काम मोटर ठेलों से लिया जाता है। कहीं-कहीं पर बाँधकर लट्ठों को खिसकाकर ले जाया जाता है।
लकड़ी का उपयोग अनेक उद्योगों में कच्चे माल के रूप में किया जाता है। अतः लकड़ी की माँग दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, इसलिए वनों को निर्दयतापूर्वक काटा जा रहा है। वन केवल उच्च क्षेत्रों में ही शेष रह गये हैं।
(4) पर्वत एवं कृषि:-
पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि कार्य केवल सीमित मात्रा में सम्भव है। यहाँ किसानों को अनेक समस्याओं से जूझना पड़ता है, जैसे-
(क) समतल भूमि की कमी,
(ख) मिट्टी का अधिक क्षरण,
(ग) मिट्टी का कम गहरा होना, तथा
(घ) जलवायु की बाधाएँ।
कृषि के काम के लिए समतल भूमि की जरूरत होती है। समतल भूमि पर ही पूर्ण सिंचाई का लाभ प्रदान किया जा सकता है तथा कृषि यंत्रों का भी उपयोग सम्भव होता है। इसलिए पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि मानव के कठिन परिश्रम पर ही टिकी है। यहाँ खेत जोतने से लेकर फसल काटने तक समस्त कार्य हाथों से ही करने होते हैं कहीं-कहीं तो मनुष्य को हल भी स्वयं ही चलाना पड़ता है, इसीलिए पहाड़ी भागों में हल्के किस्म के हलों का प्रचलन है।
कृषि योग्य समतल खण्ड बनाने के लिए पर्वतीय ढालों पर सीढ़ियाँ काटकर सोपानी कृषि की जाती है। ऐसा करने से खेतों में वर्षा या सिंचाई का जल कुछ समय तक रूकने में समर्थ होता है। स्पष्ट है कि पर्वतीय क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर कृषि नहीं की जा सकती।
सीढ़ीनुमा, लम्बाकार तथा कम चौड़े खेत पर्वतों के चारों तरफ गोलाई में स्थित मिलते हैं। इस प्रकार के खेत विश्व के अधिकांश पर्वतीय क्षेत्रों में, जहाँ जलवायु अनुकूल होती है, पाये जाते हैं। किन्तु जापान का उदाहरण इस सम्बन्ध में उल्लेखनीय है। यहाँ किसानों ने अत्यधिक मेहनत करके जगह-जगह भूमि को सीढ़ीनुमा खेतों में तब्दील कर दिया है। मिट्टी को उपजाऊ बनाने के लिए अनेक तरह की खादों को प्रयोग में लाया गया है। अतः प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद प्रति हैक्टेयर उत्पादन अत्यधिक है।
पर्वतीय क्षेत्रों में ढालू भूमि होने के कारण मिट्टी का क्षरण भी तीव्र गति से होता है। वर्षा के समय मिट्टी तेजी से कट कटकर जल के साथ बहती रहती है। पहाड़ी भागों में वर्षा भी अधिक होती है। निरन्तर मिट्टी के क्षरण से मिट्टी की गहराई कम रह जाती है और पथरीली भूमि उभर जाती है। कहीं-कहीं पर गहरी नालियाँ बन जाती हैं जहाँ भविष्य में कृषि सदा के लिए असम्भव हो जाती है। वैसे पर्वतीय क्षेत्रों में स्वभावतः मिट्टी की गहराई कम पाई जाती है। मिट्टियाँ अधिकतर कठोर होती हैं जो कृषि के लिए अधिक उपयोगी नहीं होती।
पर्वतों पर कृषि के लिए सभी स्थानों की जलवायु अनुकूल नहीं होती। विषुवत रेखा से 30° अक्षांशों तक 2500 से 3000 मीटर की ऊँचाई तक 30° और 45° अक्षांशों के मध्य 2000 से 3000 मीटर की ऊँचाई तक 45° से 55° अक्षांशों के मध्य 1500 से 2000 मीटर की ऊँचाई तक 55° अक्षांशों के निकट लगभग 200 मीटर की ऊँचाई तक कृषि सम्भव होती है।
ऊँचाई अथवा अक्षांशों के अन्तर का प्रभाव तापमान पर पड़ता है। पर्वतीय क्षेत्रों में वर्षा द्वारा वांछित लाभ नहीं उठाया जा सकता, जबकि वर्षा काफी होती है। ढालू भूमि होने के कारण वर्षा का जल जल्दी बह जाता है।
पर्वतों का सबसे ज्यादा लाभ यह है कि उनकी चट्टानों से बहुमूल्य खनिज सम्पत्ति का भण्डार मिलता है। प्राचीन पर्वतों में खनिज पदार्थ ज्यादा मिलते हैं। इसकी वजह यह है कि प्रकृति की क्षरण करने वाली शक्तियाँ ऊपर की परतों को बहाकर ले जाती हैं और खनिज पदार्थ भूपृष्ठ के ऊपरी भाग में उभर आता है।
इसके अतिरिक्त अन्तर्जात बलों के प्रभाव में जब भूमि की परतें मुड़ती हैं तो खनिज पदार्थ भी मुड़कर ऊपर पहुँच जाते हैं। इन्हीं कारणों के फलस्वरूप यूराल पर्वतों पर सभी खनिज पदार्थों का भण्डार है। अपलेशियन पर्वतों पर कोयला, लोहा और मिट्टी के तेल का भण्डार पाया जाता है। दक्षिणी भारत के प्राचीन पठार पर मैगनीज, लोहा, सोना, कोयला और अभ्रक आदि खनिज बहुतायत से मिलते हैं।
वर्तमान सभ्यता का आधार खनिज पदार्थों पर टिका हुआ है। खनिज पदार्थों का अधिक-से-अधिक उत्पादन और उपयोग किया जा रहा है। मानव खनिजों की खोज में दूर पर्वतीय भागों में कठिनाइयों का सामना करते हुए भटकना मंजूर कर लेता है। पर्वतों पर खान खोदना भी अत्यन्त मुश्किल का कार्य है।
अधिक ऊँचाई पर वायुदाब की कमी की वजह से श्रमिकों को कार्य करने में भी कठिनाई होती है। भारी मशीनों को ले जाकर स्थापित करना भी कठिन होता है क्योंकि उत्तम किस्म के सड़कों के निर्माण में कठिनाई होती है। इसके अलावा खानों से निकले पदार्थ को ढ़ोने की समस्या भी अत्यन्त जटिल होती है क्योंकि परिवहन के साधन अपर्याप्त होते हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में अपनी-अपनी अलग समस्याएँ हैं।
पर्वतीय क्षेत्रों में औद्योगिक केन्द्रों की स्थापना भी सरल नहीं उद्योगों की स्थापना के लिए तरह-तरह की वस्तुएँ जुटानी पड़ती हैं। कच्चे माल, श्रमिकों की व्यवस्था, शक्ति के साधनों की सफलता तथा परिवहन के साधनों की व्यवस्था करना आवश्यक है।
प्रश्न प्रारूप
1. पर्वतीय वातावरण मानवीय क्रियाओं को किस प्रकार प्रभावित करता है? संक्षेप में लिखिए।
अथवा, पर्वतीय वातावरण में मानवीय क्रिया-कलापों का वर्णन कीजिए।
मानव भूगोल में मानव एवं वातावरण के पारस्परिक सम्बन्ध अटूट हैं। मानव की आर्थिक, सामाजिक एवं राजनीतिक क्रियाएँ उस पर्यावरण या वातावरण द्वारा प्रभावित और प्रायः निश्चित होती हैं जिनमें वह रहता है। इसीलिए कभी-कभी कहा जाता है कि मानव अपनी परिस्थितियों का जीव है। इसमें सन्देह नहीं कि मानव का प्रत्येक पहलू पर्यावरण द्वारा प्रभावित होता है, अतः पर्यावरण का विस्तृत अध्ययन आवश्यक हो जाता है।
साधारण शब्दों में, “वातावरण उन सभी तथ्यों या दशाओं को कहते हैं जो किसी स्थान (आवास) या वस्तु को घेरे हैं एवं उसको प्रभावित करते हैं।” दूसरे अर्थों में, “वातावरण अर्थात् भौतिक वातावरण में वे सभी दशाएँ, तथ्य एवं प्रभाव सम्मिलित हैं जिनकी उपस्थिति पृथ्वी पर मानव के न होने पर भी बनी रहेगी।” यही बात महान् समाजशास्त्रीय प्रो० सोरोकिन ने भी कही।
ताँसले के अनुसार, “प्रभावकारी दशाओं का वह सम्पूर्ण योग जिनमें जीव रहते हैं, वातावरण कहलाता है।”
अमेरिकी भूगोलवेत्ता डॉ० डेविस के अनुसार, “मनुष्य के सन्दर्भ में मानव भूगोल से अर्थ भूमि या मानव के चारों ओर फैले उन सभी भौतिक स्वरूपों से है जिनका उसकी आदतों एवं कार्यों पर प्रभाव पड़ता है।”
जर्मन वैज्ञानिक ए० फिटिंग के अनुसार, “जीवन की परिस्थिति के समस्त तथ्य मिलकर वातावरण कहलाते हैं।”
इसी भाँति अमेरिकी मानवशास्त्री डॉ० हर्सकोविट्ज के अनुसार, “वातावरण उन सभी बाहरी दशाओं और प्रभावों का योग है जो कि किसी प्राणी के विकास व क्रियाओं को प्रभावित करते हैं।
वर्तमान में वातावरण शब्द के उपयोग के साथ-साथ परिस्थिति की विद्वानों (Ecologist) द्वारा आवास या परिस्थान (Habitat) अथवा निवास (Milieu) शब्दों का प्रयोग किया जाने लगा है।
पार्क के अनुसार, “वातावरण (पर्यावरण) का अर्थ उन दशाओं के योग से होता है जो मनुष्य को निश्चित समय में निश्चित स्थान पर आवृत्त करती हैं।”
ए० गाउडी ने ‘The Nature of the Environment’ में पृथ्वी के भौतिक घटकों को ही वातावरण का प्रतिनिधि माना तथा पर्यावरण को प्रभावित करने में मानव को एक महत्वपूर्ण इकाई माना।
के० आर० दीक्षित के अनुसार, “वातावरण विश्व का समग्र दृष्टिकोण है क्योंकि यह किसी समय सन्दर्भ में बहुस्थानिक तत्वीय एवं सामाजिक-आर्थिक तन्त्रों, जो जैविक एवं अजैविक रूपों के व्यवहार/आचरण पद्धति तथा स्थान की गुणवत्ता तथा गुणों के आधार पर एक-दूसरे से अलग होते हैं, के साथ कार्य करता है।”
मानव जिस धरती पर रहता है, उसे प्राकृतिक तत्वों के चारों ओर से घेर रखा है। ये प्राकृतिक तत्व मानव के कार्यकलापों पर प्रभाव डालते हैं और उनके प्रभाव से मानव के कार्यकलापों में परिवर्तन हो जाता है। आधुनिक समय में मानव इन प्राकृतिक तत्वों का दास तो नहीं है परन्तु इनके प्रभाव से वंचित भी नहीं रह सकता है।
मानव समयानुसार और क्षमतानुसार इन तत्वों का रूपान्तरण कर देता है और जहाँ रूपान्तरण सम्भव नहीं होता है, वहाँ अनुकूलन कर देता है। भौगोलिक वातावरण से तात्पर्य उन अवस्थाओं से है जिनका अस्तित्व एवं कार्य स्वतन्त्र हैं जो मानव रचित नहीं और जो मानव के अस्तित्व एवं कार्यों से प्रभावित हुए बिना स्वतः परिवर्तित होती है।
इस प्रकार पृथ्वी पर घटित होने वाली ये प्राकृतिक दशाएँ जिनका प्रभाव मानव जीवन पर पड़ता है, प्राकृतिक पर्यावरण कहलाता है।
मानव भूगोल के सिद्धान्तों को पूर्ण रूप से समझने के लिए मानव और उसके वातावरण के पारस्परिक सम्बन्धों को समझना आवश्यक है। इसके लिए वातावरण के प्रभावों का अध्ययन किया जाता है। ह्राइट और रैनर ने भौगोलिक वातावरण के महत्व को निम्नांकित शब्दों में व्यक्त किया है-
“भौतिक वातावरण मानव के बड़े समूहों को बहुत ही प्रत्यक्ष रूप से और प्राथमिक तरीके से प्रभावित करता है। प्रत्येक ऐसे समूह, जनजाति, राज्य, राष्ट्र और पृथ्वी के सभी साम्राज्य (देश-प्रदेश) इसके द्वारा सीधे तौर पर निरन्तर रूप से प्रभावित होते हैं। मानव की सभी महत्वपूर्ण क्रियाएँ भौतिक वातावरण की अनुकूलता की रुकावटों एवं उनमें निहित निर्देशों से स्वतंत्र नहीं हैं। प्राकृतिक वातावरण मानव समाज के लिए वही करता है जो कि सांस्कृतिक वातावरण व्यक्तिगत मनुष्य के लिए।”
मानव और वातावरण के सम्बन्ध को इस प्रकार स्पष्ट किया जा सकता है-
1. सीधे भौतिक प्रभाव (Direct Physical Effects):-
पर्यावरण के सभी तत्वों में जलवायु का प्रभाव सबसे अधिक महत्वपूर्ण है जो मानव को सीधा प्रभावित करता है। जलवायु का प्रभाव प्राकृतिक वनस्पति और मिट्टियों द्वारा मनुष्य पर पड़ता है। जलवायु का प्रभाव मनुष्य के कद, शरीर की बनावट, रंग आदि पर पड़ता है। इसी प्रकार वातावरण मनुष्य की शारीरिक शक्ति को भी अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है जिससे उसके शरीर का एक भाग दूसरे की अपेक्षा अधिक सुदृढ़ और बलिष्ठ बन जाता है।
कुमारी सैम्पल ने उदाहरण देते हुए स्पष्ट किया है कि पर्वतीय भागों में मनुष्य के पैर बलिष्ठ और हाथ कम बलिष्ठ होते हैं, जबकि नदियों वाले मैदानी भागों में जहाँ उसे हाथ से नाव चलानी पड़ती है, हाथ बलिष्ठ और पैर कम बलिष्ठ होते हैं। प्रतिकूल वातावरण में रहने पर आँखों और त्वचा पर भी प्रभाव पड़ता है। तुर्कमान लोगों की आँखें छोटी और पलकें भारी होती हैं क्योंकि वे हमेशा मरूस्थलीय भागों में रहते हैं। इसी प्रकार कुमारी सैम्पल ने बताया कि मानव के क्रिया-कलापों पर भौतिक वातावरण के सभी तत्वों (कारकों) का प्रभाव बहुरूपी एवं निर्णायक रहता है।
2. मानसिक प्रभाव (Mental Effects):-
इस प्रकार के प्रभाव मनुष्यों के धर्म, उनके साहित्य, भाषा, आचार-विचार में दिखाई देते हैं। मनुष्य के धार्मिक विचार उसके वातावरण की ही उपजें हैं। उदाहरण के लिए, मनुष्य के धार्मिक विश्वास उसके पर्यावरण की ही उपज है। एक एस्किमो के लिए नर्क वह स्थान है जहाँ सदैव अंधेरा रहता है, तूफान आते हैं और कठोर सर्दी पड़ती है, जबकि एक ज्यू के लिए नर्क निरन्तर जलती हुई आग का स्थान है।
हिन्दू धर्म में स्वर्ग का अर्थ निर्वाण या मोक्ष प्राप्त करना माना गया है। भाषा पर भी वातावरण का अमिट प्रभाव पड़ता है। उदाहरण के लिए, उत्तरी रूस के सेमोइड लोग अपने रेण्डियरों के लिए 11 या 12 शब्दों का प्रयोग करते हैं। यही बात पशुपालक लोगों के बारे में; जैसे-मैग्यार, मलैय एव खिरगीज लोगों पर लागू होती है किन्तु सैम्पल का कथन है कि मानसिक प्रभाव केवल अनुमान लगाने की ही वस्तु है जिससे भूगोलशास्त्री का कोई मतलब नहीं।
3. आर्थिक और सामाजिक प्रभाव (Economic and Social Effects):-
किसी स्थान की भौगोलिक अवस्थाएँ ही इस बात का निर्धारण करती हैं कि वहाँ आवश्यक वस्तुओं की प्राप्ति सरलता से होगी अथवा कठिनाई से, वहाँ किस प्रकार के उद्योग स्थापित किये जा सकते हैं। इस प्रकार के प्रभाव ही मानव समाज में आकार को निर्धारित करते हैं। जिन क्षेत्रों, द्वीपों या पर्वतीय भागों में आर्थिक संसाधन कम मात्रा में पाये जाते हैं, वहाँ मनुष्य भी छोटे समुदायों में पाये जाते हैं क्योंकि उन क्षेत्रों में उनके लिए उपयुक्त वातावरण नहीं मिलता।
4. मानव की गतियों को प्रभावित करने वाले प्रभाव:-
मानव समूह को प्रभावित करने वाले ये तत्व वास्तव में अधिक प्रभावी होते हैं। पहाड़ों, मरूस्थलों, दलदलों, समुद्रों आदि का प्रभाव मानव के प्रवास पर पड़ता है। यह सभी उनके मार्ग का निर्धारण करते हैं, सहयोग अथवा असहयोग देते हैं। नदियों द्वारा मार्गों को सुलभ करना तथा यातायात के साधनों के रूप में सहयोग प्रदान करना जिससे अनेक मानव जातियों ने दूर-दूर जाकर अपनी बस्तियाँ स्थापित की। पर्वत अवरोध उत्पन्न करते हैं। भारतवर्ष के उत्तर में हिमालय पर्वत ने मध्य एशिया से सम्पर्क को हमेशा से ही रोकने का प्रयास किया है।
कुमारी सैम्पल, प्रो० रेटजल एवं अन्य नियतिवादी विद्वानों ने जो कुछ कहा, उसका सार यह है कि अल्प विकसित एवं जनजाति समाज में भौतिक वातावरण का प्रभाव आज भी पूरी तरह शासक बना रहता है। ऐसे मानव समूह वही क्रिया-कलाप, उद्यम एवं व्यवसाय अपनाते हैं जो कि वहाँ की प्राकृतिक दशा की विशेष व्यवस्था में सम्भव है। ध्रुवीय प्रदेश का मानव समाज मात्र शिकार करके अपना पेट पालता है। चारागाह प्रदेशों में घुमन्तु पशुपालन (Trans-humnance) ही महत्वपूर्ण व्यवसाय रहा है।
इसी भाँति उष्ण मरूस्थलीय जैसे सीमित संसाधनों वाले प्रदेशों में मनुष्य या समाज को ऐसे सीमित साधनों में ही संघर्षपूर्ण जीवन जीना पड़ता है। इस प्रकार मानव भौतिक वातावरण की प्रतिकूलता में सीमित समूहों में ही रहकर विशेष प्रकार से सामंजस्य स्थापित करने का निरन्तर प्रयास करता रहता है।
द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात् अनेक प्रकार से मानवीय तकनीक, उद्यम एवं सामंजस्य स्थापित करने के सबल तौर-तरीके विकसित होते जाने से अब प्रतिकूल प्रदेशों में भी स्थिति पहले से अनुकूल बनने लगी है किन्तु बाढ़, सूखा व अकाल मौत की छाया यह सभी प्रतिकूल प्रदेशों में आज भी अभिशाप हैं। इसके साथ-साथ मानव ने वनों की निर्दयतापूर्वक काटकर प्राकृतिक सन्तुलन को बिना सोचे-समझे नष्ट करके अपनी कठिनाइयों को बढ़ाया है। प्रकृति मानव पर अब बाढ़, सूखा, रोग, प्रदूषण, नये-नये प्रतिकूल कीटाणु व उनके जहरीले प्रभाव से (अब विकसित समाज पर भी अपना स्पष्ट प्रभाव दिखा रही है। इनसे छुटकारा पाने के लिए मानव को भी वातावरण का मित्र बनना व उससे सार्थक रूप से सामंजस्य करना आवश्यक है।
प्रश्न प्रारूप
1. मानव एवं वातावरण के बीच के सम्बन्धों की व्याख्या कीजिए।
अथवा, मानव एवं पर्यावरण में संबंधों की विवेचना कीजिए।
1. सम्पूर्ण ग्लोब के कितने प्रतिशत भाग पर जलमण्डल का विस्तार पाया जाता है: [A] 51% [B] 61% [C] 71% [D] 81%
[C] 71%
Correct Answer: C [71%]
2. निम्न में से कौन जलसन्धि अन्तर्राष्ट्रीय तिथि रेखा के समानान्तर स्थित है? [A] पनामा [B] स्वेज [C] डोवर [D] बेरिंग
[D] बेरिंग
Correct Answer: D [बेरिंग]
3. निम्न में से कौन-सा महासागर उत्तरी अमेरिका को स्पर्श नहीं करता? [A] अटलांटिक महासागर [B] आर्कटिक महासागर [C] हिन्द महासागर [D] प्रशांत महासागर
[C] हिन्द महासागर
Correct Answer: C [हिन्द महासागर]
4. बेरिंग जलडमरूमध्य किन स्थल भागों को अलग करता है? [A] भारत और मलेशिया [B] एशिया तथा उत्तरी अमेरिका [C] मलेशिया और मोजाम्बिक [D] यूरोप तथा अफ्रीका
[B] एशिया तथा उत्तरी अमेरिका
Correct Answer: B [एशिया तथा उत्तरी अमेरिका]
5. निम्न में से कौन-सा महासागर एक ओर एशिया को स्पर्श करता है तथा दूसरी ओर अमेरिका को? [A] प्रशांत महासागर [B] अंध महासर [C] हिन्द महासागर [D] इनमें से सभी
[A] प्रशांत महासागर
Correct Answer: B [प्रशांत महासागर]
6. डाल्फिन चैलेन्जर कटक (रिज) स्थित है: [A] आर्कटिक महासागर में [B] प्रशान्त महासागर में [C] हिन्द महासागर में [D] अटलाण्टिक महासागर में
[D] अटलाण्टिक महासागर में
Correct Answer: D [अटलाण्टिक महासागर में
7. समुद्र की ज्ञात अधिकतम गहराई है: [A] 8 किमी [B] 10 किमी [C] 22 किमी [D] 11 किमी
[D] 11 किमी
Correct Answer: D [11 किमी]
8. पाक जलडमरूमध्य स्थित है: [A] भारत-पाकिस्तान के बीच [B] भारत-बांग्लादेश के बीच [C] भारत-इण्डोनेशिया के बीच [D] भारत-श्रीलंका के बीच
[D] भारत-श्रीलंका के बीच
Correct Answer: D [भारत-श्रीलंका के बीच]
9. प्रशान्त महासागर, अटलाण्टिक महासागर से बड़ा है: [A] लगभग तीन गुना [B] लगभग चार गुना [C] लगभग बराबर है [D] लगभग दो गुना
[D] लगभग दो गुना
Correct Answer: D [लगभग दो गुना]
10. किस महासागर का आकार अंग्रेजी के ‘एस’ अक्षर से मिलता-जुलता है? [A] प्रशान्त महासागर [B] हिन्द महासागर [C] अण्टार्कटिक महासागर [D] अटलाण्टिक महासागर
[D] अटलाण्टिक महासागर
11. निम्न में से कौन-सी जल सन्धि जापान से सम्बंधित नहीं है?
[A] सुशीमा [B] सुगारू [C] टोकारा [D] डेविस
[D] डेविस
12. निम्नांकित में से कौन-सा सागर हिन्द महासागर से सम्बंधित नहीं है?
[A] अरब सागर [B] लाल सागर [C] तस्मान सागर [D] फारस की खाड़ी
[C] तस्मान सागर
13. निम्नांकित में से प्रशान्त महासागर का तटवर्ती महाद्वीप नहीं है:
[A] एशिया [B] उत्तरी अमेरिका [C] दक्षिणी अमेरिका [D] अफ्रीका
[D] अफ्रीका
14. जो देश हिन्द महासागर के तट पर स्थित नहीं है, वह है:
[A] मेडागास्कर [B] इण्डोनेशिया [C] सोमालिया [D] पापुआ न्यू गिनी
[D] पापुआ न्यू गिनी
15. किस महासागर में सबसे अधिक व विशेष चौड़े मग्न तट पाए जाते हैं:
[A] उत्तरी अटलाण्टिक में [B] दक्षिणी हिन्द महासागर में [C] पूर्वी प्रशान्त महासागर में [D] द.-प. प्रशान्त महासागर में
[B] दक्षिणी हिन्द महासागर में
23. मध्य महासागरीय श्रेणियों (कटकों) का अधिकांश विस्तार मिलता है:
[A] अटलाण्टिक एवं हिन्द महासागर में [B] प्रशान्त व हिन्द महासागर में [C] आर्कटिक व अण्टार्कटिक महासागर में [D] प्रशान्त महासागर में
[A] अटलाण्टिक एवं हिन्द महासागर में
24. कथन (A): अगाध महासागरीय मैदान के पार्श्वों एवं मध्य में महासागरीय कटक या श्रेणियां पायी जाती हैं।
कारण (R): महाद्वीपीय ढाल के पश्चात् ही वास्तविक महासागरीय बेसिन प्रारम्भ होते हैं।
[A] A तथा R दोनों सही हैं R, A की सही व्याख्या करता है [B] A तथा R दोनों सही हैं किन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं करता है [C] A सही है जबकि R गलत है [D] A गलत है जबकि R सही है
[B] A तथा R दोनों सही हैं किन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं करता है
25. प्रशान्त महासागर का नितल बना है:
[A] बेसाल्ट चट्टानों का [B] ग्रेनाइट चट्टानों का [C] निकल धातुपिण्ड का [D] कठोर अवसादी चट्टानों का
[A] बेसाल्ट चट्टानों का
26. कथन (A): फियोर्ड तट हिम प्रभावित क्षेत्रों में ही पाए जाते हैं।
कारण (R): यहां कभी घाटी हिमानी वर्तमान के सागर तट तक प्रभावी रही।
[A] A तथा R दोनों सही हैं R, A की सही व्याख्या करता है [B] A तथा R दोनों सही हैं किन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं करता है [C] A सही है जबकि R गलत है [D] A गलत है जबकि R सही है
[A] A तथा R दोनों सही हैं R, A की सही व्याख्या करता है
27. हैफ तट रेखा बनती है:
[A] हिमानी की जमाव क्रिया से [B] वायु द्वारा तटीय भागों में जमाव क्रिया से [C] लहरों के कटाव से [D] रासायनिक अपरदन से
[B] वायु द्वारा तटीय भागों में जमाव क्रिया से
28. फियोर्ड तट का सुन्दर उदाहरण है
[A] नार्वे का उत्तर-पश्चिमी तट [B] जर्मनी का तट [C] मेक्सिको का खाड़ी तटीय भाग [D] चीन का तट
[A] नार्वे का उत्तर-पश्चिमी तट
29. डाल्मेशियन तट रेखा बनती है:
[A] तटीय लहरों के गहरे अपरदन से [B] खाड़ियां व भृगु बनने से [C] तटीय श्रेणियों के निमज्जन आदि से डूबने से [D] हिमानी घाटी के डूबने से
[C] तटीय श्रेणियों के निमज्जन आदि से डूबने से
30. अधिकांशतः कटी-फटी व निमज्जन वाली तट रेखा कहलाती है:
[A] प्रशान्त तुल्य तट रेखा [B] ज्वालामुखी से बनी तट रेखा [C] अटलाण्टिक तुल्य तट रेखा [D] पूर्वी भारत की तट रेखा
[C] अटलाण्टिक तुल्य तट रेखा
31. रिया नामक समुद्र तट चौड़ी खाड़ी से बना है जिसके किनारे मामूली कटाव वाले हैं और जो बने हैं:
[A] नदियों से [B] ग्लैशियर से [C] समुद्री जल से [D] इनमें से कोई नहीं
[A] नदियों से
32. पानी के समानान्तर पर्वत श्रृंखलाओं के डूबने से जो समुद्र तट बनता है, उसे कहते हैं?
[A] हिमानीकृत उच्च धरातल के आंशिक निमज्जन से [B] हिमानीकृत अपरदन से रहित उच्च धरातल के आंशिक निमज्जन से [C] सागरीय तटों के समानान्तर विस्तृत पर्वतीय भागों के निमज्जन से [D] उपर्युक्त में से किसी से भी नहीं
[B] हिमानीकृत अपरदन से रहित उच्च धरातल के आंशिक निमज्जन से
34. समुद्र में डूबी हिमघाटियों वाले तट को कहते हैं:
[A] हिमोढ़ [B] फियोर्ड [C] एस्कर [D] केम
[B] फियोर्ड
35. सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए:
सूची I सूची II
(गहरे स्थान) (सागर)
a. मिण्डानाओ 1. हिन्द महासागर
b. सुण्डा गर्त 2. भूमध्य सागर
c. माटापान 3. प्रशान्त महासागर
d. प्यूर्टोरिको खाई 4. आर्कटिक सागर
a b c d
[A] 3 1 2 4 [B] 1 2 3 4 [C] 4 3 2 1 [D] 1 2 4 3
[A] 3 1 2 4
36. निम्न में से कौन सही सुमेलित नहीं है:
[A] एल्यूशियन गर्त- उत्तरी प्रशान्त [B] टोंगा गर्त- दक्षिणी प्रशान्त [C] प्यूर्टोरिको गर्त- दक्षिणी अटलाण्टिक [D] सुण्डा गर्त- हिन्द महासागर
[C] प्यूर्टोरिको गर्त- दक्षिणी अटलाण्टिक
37. भूमि का वह डूबा हुआ भाग जो महाद्वीप से जुड़ा होता है और 600 फीट से अधिक गहरा नहीं होता है, कहलाता है?
[A] महाद्वीपीय छज्जा तट (शेल्फ) [B] महाद्वीपीय द्वीप [C] मोंगा द्वीप [D] इनमें से कोई नहीं
[A] महाद्वीपीय छज्जा तट (शेल्फ)
38. निम्नलिखित में से कौन-सी स्थलाकृति समुद्री नितल से सम्बन्धित है?
[A] उत्तरी अटलाण्टिक कटक [B] मध्य हिन्द महासागर कटक [C] दक्षिणी अटलाण्टिक कटक [D] उत्तरी अमेरिका
[A] उत्तरी अटलाण्टिक कटक
43. अधखुले महासागरों में सर्वोच्च तापमान अंकित किए जाते हैं:
[A] मेक्सिको की खाड़ी में [B] फारस की खाड़ी में [C] लाल सागर में [D] जापान सागर में
[C] लाल सागर में
44. न्यूनतम लवणता वाले सागर का नाम है।
[A] सारगैसो सागर [B] श्वेत सागर [C] पूर्वी भूमध्य सागर [D] दक्षिणी कैस्पियन सागर
[B] श्वेत सागर
45. लवणता पर जिस कारक का प्रभाव नहीं पड़ता, वह है:
[A] वाष्पीकरण [B] भारी वर्षा [C] ऊंचे तापमान [D] प्रवाहित जल का वेग
[D] प्रवाहित जल का वेग
46. महासागर जल का तापमान गहराई बढ़ने के साथ-साथ:
[A] स्थिर रहता है [B] निरन्तर बढ़ता है [C] धीमी गति से बढ़ता है [D] निरन्तर शनैः शनैः घटता जाता है
[D] निरन्तर शनैः शनैः घटता जाता है
47. विषुवत् रेखीय प्रदेश में खारापन विशेष कम रहता है।
[A] जितनी वर्षा होती है उतना ही ऊंचा वाष्पीकरण होता है [B] जितनी वर्षा होती है उसमें अधिक वाष्पीकरण होता है [C] अधिक वर्षा कम वाष्पीकरण व नदियों से ताजा जल प्राप्ति [D] नदियों से मौसमी जल प्राप्ति
[C] अधिक वर्षा कम वाष्पीकरण व नदियों से ताजा जल प्राप्ति
48. शीतोष्ण सागरों के सागर जल का तापमान भी उष्ण प्रदेश के सागर जल से ही विशेष प्रभावित रहता है, क्योंकि:
[A] यहां पर महाद्वीप शीतल रहते हैं [B] सूर्य की किरणें तिरछी चमकती हैं [C] शीतोष्ण सागरों की ओर उष्ण सागरों में गर्म जल धारा बहती हैं [D] पछुआ पवनों के शीर्ष भागों में ठण्डी व गर्म पवने मिलती हैं
[C] शीतोष्ण सागरों की ओर उष्ण सागरों में गर्म जल धारा बहती हैं
49. कथन (A): महासागरों पर समताप रेखाएं अक्षांशों की दिशा का अनुसरण नहीं कर पातीं।
कारण (R) : यहां के तापमान पर प्रचलित धाराओं की दिशा एवं प्रवाहित पवनों का भी प्रभाव पड़ता है।
[A] A तथा R दोनों सही हैं एवं R, A की सही व्याख्या करता है [B] A तथाR दोनों सही हैं किन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं करता है [C] A सही है जबकि R गलत है [D] A गलत है जबकि R सही है
[A] A तथा R दोनों सही हैं एवं R, A की सही व्याख्या करता है
50. निम्नांकित में से कौन-सा कथन असत्य है?
[A] सागरीय जल में लवणता का प्रतिशत 35 है। [B] उच्च अक्षांशों में गहराई पर लवणता बढ़ती है। [C] लवणता के कारण जल का घनत्व कम हो जाता है। [D] निम्न अक्षांशों में गहराई पर लवणता घटती है।
[C] लवणता के कारण जल का घनत्व कम हो जाता है।
51. सागरों में अधिकतम लवणता पाई जाती है:
[A] 20° से 40° दक्षिणी अक्षांशों के मध्य [B] 20° से 40° उत्तरी अक्षांशों के मध्य [C] 50° से 60° अक्षांशों के मध्य [D] भूमध्य रेखा पर
[B] 20° से 40° उत्तरी अक्षांशों के मध्य
52. सर्वाधिक खारापन निम्नलिखित में से किस झील में पाया जाता है?
कथन (A) : काला सागर में खारापन भूमध्य सागर की अपेक्षा कम है।
कारण (R) : काला सागर में अनुपाततः नदियों द्वारा जलापूर्ति अधिक है।
निम्न कूट से सही उत्तर चुनिए:
कूट :
[A] A तथा R दोनों सही हैं एवं R, A की सही व्याख्या करता है [B] A तथाR दोनों सही हैं किन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं करता है [C] A सही है जबकि R गलत है [D] A गलत है जबकि R सही है
[A] A तथा R दोनों सही हैं एवं R, A की सही व्याख्या करता है
54. समुद्री जल का घनत्व बढ़ता है यदि:
[A] गहराई एवं लवण की सान्द्रता दोनों घटती हैं [B] गहराई एवं लवण की सान्द्रता दोनों बढ़ती हैं [C] गहराई घटती है किन्तु लवण की सान्द्रता बढ़ती है [D] गहराई बढ़ती है किन्तु लवण की सान्द्रता घटती है
[B] गहराई एवं लवण की सान्द्रता दोनों बढ़ती हैं
55. निम्नांकित में से सही कथन है?
[A] वाष्पीकरण में वृद्धि के साथ लवणता घटती है। [B] वर्षण एवं लवणता में विलोम सम्बन्ध होता है। [C] वायुमण्डलीय दाब एवं लवणता में विलोम सम्बन्ध होता है। [D] महासागरों में नदियों द्वारा जल के मिश्रण से लवणता बढ़ती है।
[B] वर्षण एवं लवणता में विलोम सम्बन्ध होता है।
56. बोथेनिया की खाड़ी) में लवणता कम होने का कारण है:
[A] इसमें नदियों का आकर मिलना [B] वाष्पीकरण कम होना [C] तापमान का कम होना [D] वायुमण्डल में आर्द्रता अधिक होना
[A] इसमें नदियों का आकर मिलना
57. भूमध्य सागर में लवणता की अधिक मात्रा का कारण है:
[A] वाष्पीकरण की ऊंची दर [B] कम वर्षा [C] वाहि जल के रूप में ताजे जल की कम प्राप्ति [D] उपर्युक्त सभी
[D] उपर्युक्त सभी
58. महासागरीय जल में विद्यमान लवणता का औसत प्रतिशत है:
[A] 20 [B] 35 [C] 30 [D] 40
[B] 35
59. मानचित्र पर समान लवणता वाले स्थानों को मिलाकार खींची गई रेखा कहलाती है:
[A] पछुआ हवाओं द्वारा [B] स्थायी पवनों द्वारा [C] आवर्ती पवनों द्वारा [D] मानसून पवनों द्वारा
[B] स्थायी पवनों द्वारा
69. निम्न में से कौन-सी धारा ‘उष्ण धारा’ (warm current) कहलाती है:
[A] बेंगुला धारा [B] गल्फस्ट्रीम [C] कनारी धारा [D] पश्चिमी पवन प्रवाह (West wind drift)
[B] गल्फस्ट्रीम
70. निम्नलिखित में से कौन-सी जलधारा ‘यूरोप का गर्म कम्बल’ (Warm Blanket of Europe) के उपनाम से जानी जाती है।
[A] कनारी [B] गल्फस्ट्रीम [C] इरमिंजर [D] बेंगुला
[B] गल्फस्ट्रीम
71. लेब्राडोर धारा की उत्पत्ति का मुख्य कारण है?
[A] दाब में वृद्धि [B] तापमान में विषमता [C] लवणता में भिन्नता [D] चलने वाली हवाएं
[B] तापमान में विषमता
72. निम्न में से कौन गर्म धारा है?
[A] कनारी धारा [B] ब्राजील धारा [C] पिरूवियन धारा [D] बेंगुला धारा
[B] ब्राजील धारा
73. निम्नलिखित में से कौन-सी ठण्डी धारा नहीं है?
[A] फाकलैण्ड [B] कैलिफोर्निया [C] पश्चिमी आस्ट्रेलियन [D] अगुल्हास
[D] अगुल्हास
74. न्यूफाउण्डलैण्ड के आस-पास हमेशा कोहरा क्यों छाया रहता है?
[A] क्योंकि ठण्डी और गर्म जल की धाराएं वहां आकर मिलती हैं [B] क्योंकि यहां पर हमेशा बर्फ पिघलती रहती है [C] क्योंकि वहां पर ओस पड़ती है [D] उपर्युक्त में से कोई नहीं
[A] क्योंकि ठण्डी और गर्म जल की धाराएं वहां आकर मिलती हैं
83. निम्न में से कौन कारक युग्म पृथ्वी के महासागरीय तल पर दो प्रत्यक्ष ज्वारों के मध्य 52 मिनट के विलम्ब हेतु उत्तरदायी है:
1. पृथ्वी का घूर्णन
2. पृथ्वी का परिक्रमण
3. चन्द्रमा का घूर्णन
4. चन्द्रमा का परिक्रमण
[A] 1 एवं 2 [B] 3 एवं 4 [C] 2 एवं 3 [D] 1 एवं 4
[D] 1 एवं 4
84. सूर्य की ज्वारीय शक्ति चन्द्रमा की शक्ति की तुलना में कितने भाग कम होती है:
[A] 1/2 [B] 3/4 [C] 4/9 [D] 7/10
[C] 4/9
85. वृहत् ज्वार-भाटा नवचन्द्र व पूर्णचन्द्र के दिनों में आते हैं क्योंकि इन दिनों में:
[A] चन्द्र व पृथ्वी परस्पर समकोण पर होते हैं [B] सूर्य, चन्द्र व पृथ्वी एक सीधी रेखा में होते हैं [C] सूर्य और चन्द्र एक-दूसरे के विपरीत होते हैं [D] चन्द्र व सूर्य पृथ्वी के अधिक निकट होते हैं
[B] सूर्य, चन्द्र व पृथ्वी एक सीधी रेखा में होते हैं
86. समुद्र में ज्वार-भाटा आने का कारण है:
[A] चन्द्रमा का आकर्षण [B] पृथ्वी की गोलीय सतह [C] पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण [D] सूर्य व चन्द्रमा का गुरुत्वाकर्षण
[D] सूर्य व चन्द्रमा का गुरुत्वाकर्षण
87. ‘प्रगामी तरंग सिद्धान्त’ निम्न में से किसकी उत्पत्ति की व्याख्या करता है?
98. उष्ण व अर्द्धोष्ण प्रदेशों में प्रवाल रचना के विकास का अक्षांशीय विस्तार है:
[A] 25° उ. से 25° द. [B] 20° उ. से 45° द. [C] अयनवृत्तों से ध्रुवीय वृत्तों तक [D] सभी असत्य हैं
[A] 25° उ. से 25° द.
99. जिस विद्वान ने प्रवाल विकास में हिमनद नियंत्रण सिद्धान्त की व्याख्या की, उसका नाम है।
[A] डार्विन [B] जॉन मर्रे [C] डेली [D] गार्नियर
[C] डेली
100. वर्तमान में डेविस व अन्य विद्वानों से जिस सिद्धान्त को महत्वपूर्ण माना है, वह है।
[A] जॉन मर्रे का स्थिर स्थल सिद्धान्त [B] अगासिस व गार्नियर की सैद्धान्तिक व्याख्या [C] डार्विन एवं डाना का अवतलन सिद्धान्त [D] सभी सत्य हैं
[C] डार्विन एवं डाना का अवतलन सिद्धान्त
101. प्रवाल जीव सुरक्षित रहता है
[A] मरे हुए जीवों पर [B] चूने की सख्त पॉलिप या खोल में [C] ज्वालामुखी द्वीपों के निकट [D] गहरे महासागरों में
[B] चूने की सख्त पॉलिप या खोल में
102. विश्व की सबसे बड़ी मूंगे की चट्टान ‘ग्रेट बैरियर रीफ’ निम्न में से किसके तटवर्ती भाग में स्थित है:
[A] उत्तरी अमेरिका [B] जापान [C] यूरोप [D] आस्ट्रेलिया
[D] आस्ट्रेलिया
103. प्रवाल के निक्षेपण के लिए महत्व की दृष्टि से उपयुक्त दशा होती है?
[A] गहरा सागर, अवसाद युक्त जल, कम तापक्रम [B] उबला सागर, अवसादयुक्त जल, सामान्य तापक्रम [C] उथला सागर, अवसादयुक्त जल, अधिक तापक्रम [D] गहरा सागर, अवसादयुक्त जल, क्रम तापमान
[B] उबला सागर, अवसादयुक्त जल, सामान्य तापक्रम
104. प्रवाल भित्तियों की उत्पत्ति से सम्बन्धित अवतलन सिद्धान्त के प्रतिपादक कौन हैं?
[A] डार्विन [B] हैरिस [C] न्यूटन [D] जॉन मर्रे
[A] डार्विन
105. आस्ट्रेलिया के पूर्वी तट पर स्थित ग्रेट बैरियर रीफ निम्न में से किस प्रवाल भित्ति का उदाहरण है?
[A] वलयाकार प्रवाल-भित्ति [B] अवरोधक प्रवाल भित्ति [C] तटीय प्रवाल भित्ति [D] इनमें से कोई नहीं
[B] अवरोधक प्रवाल भित्ति
106. प्रवाल क्या है?
[A] एक वन काष्ठ [B] एक समुद्री जीव [C] एक जड़ी-बूटी [D] इनमें से कोई नहीं
[B] एक समुद्री जीव
107. निम्नांकित में से कौन-सा सिद्धान्त प्रवाल भित्ति तथा ऍटाल की उत्पत्ति की व्याख्या करता है?
[A] महाद्वीपीय फिलसन सिद्धान्त [B] महाद्वीपीय प्रवाह सिद्धान्त [C] प्रत्यास्थ पुनश्चलन सिद्धान्त [D] हिमानी नियंत्रण सिद्धान्त
[D] हिमानी नियंत्रण सिद्धान्त
108. निम्नांकित में से कौन-सा सिद्धान्त प्रवाल भित्तियों की उत्पत्ति से सम्बन्धित नहीं है?
[A] निमज्जन सिद्धान्त [B] हिमनद नियंत्रण सिद्धान्त [C] स्थिर स्थल या विलयन सिद्धान्त [D] महाद्वीपीय फिसलन सिद्धान्त
[A] निमज्जन सिद्धान्त
109. निम्नांकित में से कौन-सा युग्म सुमेलित है?
[A] निमज्जन सिद्धान्त- चार्ल्स डार्विन [B] हिमनद नियंत्रण सिद्धान्त- मर्रे [C] स्थिर स्थल सिद्धान्त- डैली [D] नहर सिद्धान्त- एयरी
[A] निमज्जन सिद्धान्त- चार्ल्स डार्विन
110. प्रवाल भित्ति की उत्पत्ति सम्बन्धी सिद्धान्त आधारित है
[A] स्थल तल में परिवर्तन से [B] उन्मज्जन से [C] निमज्जन से [D] उपर्युक्त सभी से
[D] उपर्युक्त सभी से
111. प्रवाल भित्ति के सम्बन्ध में कौन-सा कथन असत्य है?
[A] यह प्रवालों से निर्मित होती है। [B] इसकी स्थिति प्रायद्वीप के चारों ओर या जलगमग्न पठार के ऊपर अण्डाकार रूप में पायी जाती है। [C] इसका कोई न कोई भाग खुला अवश्य रहता है। [D] इसके बीच में लैगून होती है।
[D] इसके बीच में लैगून होती है।
112. सिलिका प्रधान सिन्धु पंक के अन्तर्गत आते हैं:
[A] डायटम व रेडियोलेरियन [B] टेरोपॉड व ग्लोबिजेरिना [C] दोनों सत्य हैं [D] दोनों गलत हैं
[A] डायटम व रेडियोलेरियन
113. किस सिन्धु पंक के जमाव हिन्द महासागर में सर्वाधिक हैं:
[A] डायटम [B] ग्लोबिजेरिना [C] लाल पंक [D] कॉस्मिक धूल
[B] ग्लोबिजेरिना
114. लाल मृत्तिका (चीका) का निर्माण होता है:
[A] सिन्धु पंक के विस्तार से [B] अगाध सागरीय लौह ऑक्साइड एवं ऐलुमिनियम सिलिकेट से जो कि ज्वालामुखी पदार्थों के विघटन से प्राप्त होती है [C] महासागरों के धात्विक पदार्थों से [D] सभी असत्य हैं
[B] अगाध सागरीय लौह ऑक्साइड एवं ऐलुमिनियम सिलिकेट से जो कि ज्वालामुखी पदार्थों के विघटन से प्राप्त होती है
115. प्रशान्त महासागरीय तली में सर्वाधिक विशिष्ट जमाव पाए जाते हैं।
[A] अजैविक जमाव [B] ज्वालामुखी पदार्थ के विघटन से प्राप्त पदार्थ [C] लघु रूप जीवों के मरने से प्राप्त पदार्थ [D] कॉस्मिक व अणु पदार्थ
[C] लघु रूप जीवों के मरने से प्राप्त पदार्थ
117. चूना-प्रधान सिन्धु पंक के अन्तर्गत आते हैं:
[A] डायटम व रेडियोलेरियन [B] टैरोपॉड व ग्लोबिजेरिना [C] डायटम [D] सभी सत्य हैं
[B] टैरोपॉड व ग्लोबिजेरिना
118. प्रशान्त महासागर में जो सिन्धु पंक सर्वाधिक मिलता है, वह है:
[A] डायटम [B] टेरोपॉड [C] ग्लोबिजेरिना [D] लाल पंक
[A] डायटम
119. महासागरीय तली के किस भाग में सबसे अधिक धातुओं के संग्रथित (Nodular) जमाव पाए जाते हैं
[A] महासागरीय मग्न ढाल पर [B] खाइयों या गर्त में [C] अगाध सागरीय मैदान पर [D] सभी सत्य हैं
[C] अगाध सागरीय मैदान पर
120. स्थलजात निक्षेप का विस्तार सर्वाधिक किस सागर क्षेत्र में पाया जाता है:
[A] महासागर के गहरे भागों में [B] महाद्वीपीय मग्न तट या चबूतरे पर [C] तटीय भाग में [D] अनियमित रूप से ज्वार-भाटे के साथ
[B] महाद्वीपीय मग्न तट या चबूतरे पर
121. कथन (A): गम्भीर सागरीय जमाव सागर बेसिन पर ही अधिक पाए जाते हैं।
कारण (R): गम्भीर सागरीय जमावों में सिन्धु पंक का विशेष महत्व है।
[A] A तथा R दोनों सही हैं एवं R, A की सही व्याख्या करता है [B] A तथा R दोनों सही हैं किन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं करता है [C] A सही है जबकि R गलत है [D] A गलत है जबकि R सही है
[B] A तथा R दोनों सही हैं किन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं करता है
122. चूना-प्रधान ऊज है:
[A] ग्लोबिजेरिना [B] रेडियोलेरियन [C] डायटम [D] इनमें से कोई नहीं
[A] ग्लोबिजेरिना
123. निम्नांकित महासागरीय निक्षेपों का उनके विस्तार क्षेत्र के प्रतिशत के आधार पर सही अवरोही क्रम है:
[A] डायटम, लाल मृत्तिका, रेडियोलेरिया और ग्लोबिजेरिना [B] लाल मृत्तिका, रेडियोलेरिया, डायटम और ग्लोबिजेरिना [C] लाल मृत्तिका, ग्लोबिजेरिना, डायटम और रेडियोलेरिया [D] ग्लोबिजेरिना, लाल मृत्तिका, डायटम और रेडियोलेरिया
[C] लाल मृत्तिका, ग्लोबिजेरिना, डायटम और रेडियोलेरिया
124. पैलेजिक पदार्थों का निक्षेपण महासागरों के किस भाग में होता है?
[A] छिछले सागरीय [B] तटवर्ती [C] अगाध सागरीय [D] इनमें से कोई नहीं
[C] अगाध सागरीय
125. महासागरों में सबसे अधिक गहराई पर पाया जाने वाला निक्षेप है:
[A] लाल पंक [B] लाल मृत्तिका [C] डायटम ऊज [D] तटवर्ती अकार्बनिक निक्षेप
[B] लाल मृत्तिका
126. निम्नांकित में से जो युग्म सुमेलित है, वह है:
[A] अकार्बनिक निक्षेप- गहन सागरीय मैदान [B] टेरोपोड ऊज- महाद्वीपीय ढाल [C] लाल मृत्तिका- प्रशान्त महासागर [D] चूनामयी निक्षेप- गर्त
[C] लाल मृत्तिका- प्रशान्त महासागर
127. चूनामयी निक्षेप अधिकांशतः पाये जाते हैं:
[A] समुद्री गर्तों में [B] छिछले सागरों में [C] गहन सागरीय मैदानों में [D] तटवर्ती क्षेत्रों में
[B] छिछले सागरों में
128. गहन सागरीय भागों में अधिकांश अवसाद जमा किए जाते हैं:
[A] हिमनदों द्वारा [B] समुद्री धाराओं द्वारा [C] नदियों द्वारा [D] सूक्ष्म जीवों द्वारा
नोट : मैं आशा करता हूँ कि भूगोल विषय से सम्बंधित सभी Question Answer Testआपके सभी प्रकार के परीक्षा के लिए नींव का पत्थर साबित होंगे। अगर किसी भी प्रश्न के उत्तर को लेकर आपके मन में कोई संदेह हो तो हमसे Contact With us के माध्यम से, Comment या Email से Contact कर सकते है। मैं हमेशा आपके मंगल भविष्य की कामना करता हूँ।
15. बांग्लादेश में किस नदी को पद्मा के नाम से पुकारा जाता है? [A] ब्रह्मपुत्र [B] गंगा [C] तिस्ता [D] कोसी
[B] गंगा
Correct Answer: B [गंगा]
16. निम्नलिखित में से किस नदी को ‘कोयला ढोने वाली नदी’ कहा जाता है? [A] टेम्स [B] नाइजर [C] राइन [D] सीन
[C] राइन
Correct Answer: C [राइन]
17. निम्नलिखित में से किस नदी को ‘तेल नदी’ के नाम से जाना जाता है? [A] राइन [B] नाइजर [C] टेम्स [D] अमेजन
[A] राइन
Correct Answer: B [नाइजर]
18. लाल नदी (Red River) किस देश में बहती है? [A] थाईलैंड [B] मलेशिया [C] म्यांमार [D] वियतनाम
[D] वियतनाम
Correct Answer: D [वियतनाम]
19. रूस की सर्वाधिक महत्वपूर्ण नदी है- [A] नीपर [B] नीस्टर [C] डॉन [D] वोल्गा
[D] वोल्गा
Correct Answer: D [वोल्गा]
20. यूगोस्लाविया, चेक, स्लोवाक, आस्ट्रिया, जर्मनी, डुंगरी और रोमानिया से होकर प्रवाहित होने वाली अन्तर्राष्ट्रीय नदी है- [A] डेन्यूब [B] एल्ब [C] राइन [D] ओडर
34. लम्बाई के घटते क्रम में विश्व की तीन सबसे लम्बी नदियाँ हैं- [A] मिसौरी- मिसीसिपी, अमेजन, नील [B] नील, मिसौरी-मिसीसिपी, अमेजन [C] अमेजन, नील, मिसौरी- मिसीसिपी [D] नील, अमेजन, मिसौरी-मिसीसिपी
[D] नील, अमेजन, मिसौरी-मिसीसिपी
Correct Answer: D [नील, अमेजन, मिसौरी-मिसीसिपी]
35. डेन्यूब नदी निम्नलिखित में किस देश से होकर गुजरती है? 1. जर्मनी 2. आस्ट्रिया 3. हंगरी 4. पोलैंड 5. रूमानिया [A] 1,2 एवं 3 [B] 1, 2, 3 एवं 4 [C] 2, 3, 4 एवं 5 [D] 1, 2, 3 एवं 5
[D] 1, 2, 3 एवं 5
Correct Answer: D [1, 2, 3 एवं 5]
36. वियतनाम में प्रवाहित होने वाली सोंग का (Song-ka) नामक नदी को किस नाम से जाना जाता है? [A] पिली नदी [B] काली नदी [C] लाल नदी [D] देव नदी
[C] लाल नदी
Correct Answer: C [लाल नदी]
37. विश्व की सबसे चौड़ी नदी है- [A] मिसीसिपी [B] अमेजन [C] नील [D] डेन्यूब
[B] अमेजन
Correct Answer: B [अमेजन]
38. विश्व की सबसे लम्बी नदी है- [A] अमेजन [B] गंगा [C] नील [D] मिसीसिपी-मिसौरी
[C] नील
Correct Answer: C [नील]
39. निम्नलिखित में से किस देश में से यूफ्रेटस व टिगरिस नदियाँ बहती है? [A] ईरान [B] जॉर्डन [C] कुवैत [D] इराक
[D] इराक
Correct Answer: D [इराक]
40. विश्व की अपवाह क्षेत्र की दृष्टि से सबसे बड़ी नदी है- [A] नील नदी [B] ब्रह्मपुत्र नदी [C] अमेजन नदी [D] मिसीसिपी नदी
[C] अमेजन नदी
41. आस्वान बाँध निम्नलिखित में से किस नदी पर स्थित है?
[A] नील नदी पर [B] जैरे नदी पर [C] लिम्पोपो नदी पर [D] जेम्बेजी नदी पर
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