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6. Physics (भौतिक विज्ञान)

6. Physics (भौतिक विज्ञान)



1. प्रकाश वर्ष मात्रक है

⇒ दूरी का

2. एक प्रकाश वर्ष बराबर होता है

⇒ 9.46×1015 मी० या 9.46×1012किमी०

3. दूरी मापने की सबसे बड़ी इकाई है

⇒ पारसेक

4. 1 पारसेक बराबर होता है

⇒ 3.26 प्रकाश वर्ष या 3×1016मी०

5. 1 पीको सेकेण्ड बराबर होता है

⇒ 10-12 सेकेण्ड

6. ठोस कोण की इकाई होता है

⇒ स्टेरेडियन

7. एक माइक्रोन बराबर होता है

⇒ ०.001 मिमी०

8. एक अश्वशक्ति बराबर होता है

⇒ 746 वाट

9. ताप का SI तथा CGS मात्रक होता है

⇒ क्रमशः केल्विन तथा सेल्सियस

10. दाब की विमा होती है

⇒ [ML-1T-2]

11. बल का SI मात्रक तथा CGS मात्रक होता है

⇒ क्रमश: न्यूटन (N) तथा डाईन

12. एक बार बराबर होता है

⇒ 105 पास्कल

13. 1 न्यूटन बराबर होता है

⇒ 105 डाईन

14. बल, विस्थापन, त्वरण, वेग, संवेग, भार तथा बल आघूर्ण राशियाँ है

⇒ सदिश राशियाँ

15. क्षेत्रफल, आयतन, लम्बाई, मात्रा दूरी, कार्य, ऊर्जा तथा दबाव राशियाँ है

⇒ अदिश राशियाँ

16. एंगस्ट्रम इकाई है

⇒ लम्बाई का

17. कोणीय वेग की इकाई है

⇒ रेडियन/सेकेण्ड

18. 1 ऐंग्स्ट्रम (1A°) बराबर होता है

⇒ 10-10मी०

19. पृष्ठ तनाव, पृष्ठीय ऊर्जा तथा बल प्रवणता की विमा होती है

⇒ [M1L0T-2]

20. ऊपर फेंकी जाने वाली वस्तु का त्वरण होता है

⇒ ऋणात्मक

21. वेग तथा त्वरण का SI मात्रक होता है

⇒ क्रमश: मी०/से० तथा मी०/से०2

22. 1 kg राशि का वजन होता है

⇒ 9.8 N

23. एक वस्तु का भार अधिकत्तम होता है

⇒ वायु में

24. किसी पिंड के द्रव्यमान और वेग का गुणनफल होता है

⇒ संवेग

25. जड़त्व के नियम का प्रतिपादन किया था

⇒ गैलेलियो ने

26. गति का नियम दिया था

⇒ न्यूटन ने

27. रॉकेट का पलायन आधारित होता है

⇒ न्यूटन के तृतीय गति नियम पर

28. प्रक्षेप्य पथ होता है

⇒ परवलयाकार

29. गुरूत्वीय त्वरण (g) का मान बराबर होता है

⇒ 9.8 मी०/से०2 के

30. g का मान अधिकत्तम तथा न्यूनतम होता है

⇒ क्रमश: ध्रुवों तथा भूमध्य रेखा पर

31. ‘g’ का मान शून्य (0) होता है

⇒ पृथ्वी के केंद्र पर

32. भू-स्थिर उपग्रह का परिक्रमण काल होता है

⇒ 24 घंटा

33. भू-स्थिर उपग्रह स्थित होते है

⇒ 36000किमी०

34. पृथ्वी की अपेक्षा चन्द्रमा का द्रव्यमान लगभग होता है

⇒ 1/81

35. गुरुत्त्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम का प्रतिपादन किया था

⇒  न्यूटन

36. पृथ्वी तल से ऊपर या नीचे आने पर गुरुत्वीय त्वरण का मान

⇒ घटता जाता है

37. पृथ्वी तथा सौरमंडल के लिए पलायन वेग का मान होता है

⇒ क्रमशः 11.2 किमी०/से० तथा 42 किमी०/से०

38. चन्द्रमा के लिए पलायन वेग का मान होता है

⇒ 2.37 किमी०/सेकंड

39. चन्द्रमा पर किसी पिण्ड का भार पृथ्वी पर उसके भार का होता है

⇒ 1/6 गुणा

40. यदि किसी मनुष्य का भार पृथ्वी पर 600 N हो, तो उसका चन्द्रमा पर भार होगा

⇒ 100N

41. कार्य तथा ऊर्जा का मात्रक होता है

⇒ जूल (J) या न्यूटन 

42. 1 जूल बराबर होता है

⇒ 107 अर्ग

43. खींचे हुए रबर, खींचे हुए धनुष तथा खींची हुई कमानी में भंडारित होता है

⇒ स्थितज उर्जा

44. यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करता है

⇒ डायनेमो

45. विधुत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में परिवर्तित करता है

⇒ विद्युत मोटर

46. किसी वस्तु की चाल आधी कर दी जाये, तो उसकी गतिज ऊर्जा हो जायेगी

⇒ एक चौथाई

47. यदि किसी वस्तु की चाल दुगुनी कर दी जाये, तो उसकी गतिज ऊर्जा हो जायेगी

⇒ चार गुनी

48. वायुमंडलीय दाब का SI मात्रक होता है

⇒ बार (bar)

49. वायुमंडलीय दाब को मापा जाता है

⇒ बैरोमीटर से

50. आपेक्षिक घनत्व को मापा जाता है

⇒ हाइड्रोमीटर से

51. दाब बढ़ने पर बर्फ का गलनांक

⇒ घटता है

52. जल का घनत्व अधिकत्तम तथा आयतन न्यूनत्तम होता है

⇒ 4°C पर

53. बैरोमीटर का पाठ्यांक एकाएक नीचे गिरता प्रदर्शित करता है

⇒ आंधी-तूफान आने का

54. बैरोमीटर का पाठ्यांक धीरे-धीरे गिरना प्रदर्शित करता

⇒ वर्षा होने का

55, बैरामीटर का पाठ्यांक का धीरे-धीरे ऊपर चढ़ना प्रदर्शित करता है

⇒ दिन साफ रहने का

56. सेल्सियस एवं फारेनहाइट स्केल समान मान प्रदर्शित करता है

⇒ -40° ताप पर

57. वर्षा की छोटी-छोटी बूंदे गोल होती है

⇒ पृष्ठ तनाव के कारण

58. द्रव-बूँद को संकुचित होकर न्यूनतम क्षेत्र घेरने की प्रवृत्ति का कारण है-

⇒ पृष्ठ तनाव

59. सेकेंडी लोलक का आवर्तकाल होता है-

⇒ 2 सेकेण्ड

60. आवृत्ति और आवर्तकाल के गुणनफल का मान होता है

⇒ एक

61. ध्वनि की चाल अधिकत्तम तथा न्यूनत्तम होती है

⇒ क्रमशः ठोसों तथा गैसों में

62. ध्वनि तथा प्रकाश तरंगे होती है

⇒ क्रमश: अनुदैर्ध्य तथा अनुप्रस्थ तरंगे

63. ध्वनि का मात्रक होता है

⇒ डेसिबल

64. ध्वनि की चाल होती है

⇒ 760 मील/घंटा या 332 मी./से.०

65. किसी पदार्थ के एकांक द्रव्यमान का ताप 1°C बढ़ाने के लिए आवश्यक उष्मा की मात्रा को कहते है

⇒ विशिष्ट ऊष्मा

66. मानव शरीर का सामान्य ताप होता है

⇒ 37°C या 98.6°F या 310K

67. दो समान्तर दर्पण के बीच रखे वस्तु का प्रतिबिम्ब बनता है

⇒ अनंत पर

68. कैण्डिला मात्रक है

⇒ ज्योति तीव्रता का

69. प्रकाश का रंग निश्चित किया जाता है

⇒ तरंगदैर्ध्य द्वारा

70. तरंगदैर्ध्य सबसे अधिक तथा सबसे न्यूनत्तम मान होता है

⇒ क्रमशः लाल रंग तथा बैंगनी रंग का

71. निर्वात में रेडियो तरंग या प्रकाश तरंग की गति होती है

⇒ 3×108 मी./से.

72. प्रकाश की चाल को सबसे पहले ज्ञात की थी

⇒ रोमर ने

73. लेंस की क्षमता तथा प्रतिरोध का मात्रक होता है

⇒ क्रमश: डाईऑप्टर तथा ओम

74. आँख के रेटिना पर बना प्रतिबिम्ब होता है

⇒ वास्तविक और उल्टा

75. निकट दृष्टि दोष (मायोपिया) को दूर करने में प्रयुक्त होता है

⇒ अवतल लेंस का

76. दीर्घ दृष्टि दोष (हाइपरमेट्रोपिया) को दूर करने के लिए प्रयुक्त होता है

⇒ उत्तल लेंस का

77. सामान्य आँख के लिए सुस्पष्ट दृष्टि की न्यूनत्तम दूरी होती है

⇒ 25 सेमी.

78. प्राथमिक रंग कहा जाता है

⇒ लाल, हरा तथा नीला रंग को

79. ‘इलेक्ट्रॉन-वोल्ट’ मात्रक होता है

⇒ ऊर्जा का

80. ट्रांसफार्मर का क्रोड बना होता है

⇒ नर्म लोहा का

81. अपवर्तनांक सबसे अधिक तथा सबसे कम होता है

⇒ क्रमशः बैंगनी तथा लाल रंग का

82. अंतरिक्ष यात्री को आकाश दिखाई देता है

⇒ काला

83. समुद्र की गहराई तथा समुद्र दूरी मापने का मात्रक है

⇒ क्रमश: फैदम तथा नॉटिकल मील

84. ‘हाइड्रोलिक ब्रेक’ आधारित होता है

⇒ पास्कल के नियम पर

85. विद्युत बल्ब का फिलामेन्ट बना होता है

⇒ टंगस्टन का

86. हीटर का तार बना होता है

⇒ नाइक्रोम का

87. फ्यूज तार का होता है

⇒ प्रतिरोध उच्च तथा ग्लनांक निम्न

88. कमरे में रखे रफ्रिजरेटर का दरवाजा खोल दिया जाए तो कमरे का ताप

⇒ बढ़ जायेगा

89 दूध से क्रीम को अलग करने पर दूध का घनत्व

⇒ बढ़ जाता है

90. प्रतिध्वनि सुनने के लिए श्रोता एवं परावर्तक सतह के बीच की दूरी होनी चाहिए

⇒ 17 मी०

91. कान पर ध्वनि का प्रभाव रहता है

⇒ 1/10 सेकेण्ड तक

92. पृथ्वी के भौगोलिक तथा चुम्बकीय अक्ष के बीच का कोण होता है

⇒ 18०

93. अस्थायी तथा स्थायी चुम्बक बनाये जाते है

⇒ क्रमशः नर्म लोहा तथा इस्पात का

94 कपड़ा सुखाने की मशीन तथा दूध से मक्खन निकालने की मशीन कार्य करता है

⇒ अपकेन्द्रीय बल के सिद्धांत पर

95. लालटेन की बत्ती के तेल का ऊपर चढ़ना तथा ब्लॉटिंग पेपर का स्याही सोखने का कारण है

⇒ केशिकत्व क्रिया

96. हीरा का चमकना तथा मृग मरीचिका का बनने का कारण है

⇒ पूर्ण आंतरिक परावर्त्तन

97. पानी के अंदर हवा का बुलबुला कार्य करता है

⇒ अवतल लेंस के भांति

98. कार्बन, सिलिकॉन तथा जर्मेनियम उदाहरण है

⇒ अर्द्धचालक का

99. तड़ित चालक बनाया जाता है

⇒ ताँबा का (आविष्कारक- बेंजामिन फ्रैंकलिन)

100. चुम्बक को स्वतंत्रतापूर्वक लटकाने पर वह सदैव रूकती है

⇒ उत्तर-दक्षिण दिशा में

101. चुम्बकत्व समाप्त हो जाता है

⇒ हथौड़े से पीटने तथा गर्म कर लाल करने से

102. परमाणु बम तथा हाइड्रोजन बम आधारित हैं

⇒ क्रमशः नाभिकीय विखंडन तथा नाभिकीय संलयन सिद्धांत पर

103. जीवों के अवशेषों के आयु का पता लगाया जाता है

⇒ कार्बन डेटिंग विधि द्वारा

104. पुरानी चट्टानों तथा निर्जीव पदार्थों आदि की आयु ज्ञात की जाती है

⇒ यूरेनियम डेंटिंग विधि द्वारा

105. नाभिकीय रिएक्टर में होने वाले अभिक्रिया के नियंत्रण के लिए प्रयोग किया जाता

⇒ कैडमियम (Cd) या बोरॉन (B) की छड़ का

106. पहाड़ों पर खाना देर से पकता है

⇒ क्योंकि वायुमंडलीय दाब कम होने से जल का क्वथनांक घट जाता है

107. X किरणों की खोज की गयी थी

⇒ रॉन्टजन द्वारा (1895 में)

108. कैंसर के इलाज में प्रयोग किया जाता है

⇒ कोबाल्ट-60

109. साबून का बुलबुला रंगीन दिखाई पड़ता है

⇒ व्यतिकरण के कारण

110. बादल वायुमंडल में तैरते है

⇒ कम घनत्व के कारण

111. बादलों की दिशा या गति मापने वाला यंत्र कहलाता है

⇒ नेफोस्कोप

112 यदि लोलक की लम्बाई चार गुनी कर दी जाए, तो लोलक झूलने की समय (अवधि) होगी

⇒ दोगुनी

113. किसी सरल लोलक की लम्बाई 4% बढ़ा दी जाए, तो उसका आवर्तकाल

⇒ 2% बढ़ जाएगा

114. स्प्रिंग को अपनी सामान्य लम्बाई पर आपस लौटने के लिए लगने वाले बल को कहते है

⇒ प्रत्यानयन बल

115. जब एक गैस के पात्र में दाव बढ़ाया जाता है, तो उसका द्रव्यमान

⇒ अपरिवर्तित रहता है

116. क्रायोजेनिक इंजनों का प्रयोग होता है

⇒ रॉकेट प्रौद्योगिकी में

117. पानी से भरे गिलास में बर्फ का एक टुकड़ा तैर रहा है, यदि बर्फ का टुकड़ा पूरा पिघल जाए तो पानी के स्तर पर क्या प्रभाव पड़ेगा

⇒ अपरिवर्तित रहेगा

118. ‘लॉ ऑफ फ्लोटिंग’ सिद्धांत की खोज की थी

⇒ आर्किमिडीज ने

119. बर्फ के दो टुकड़ों को आपस में दबाने पर टुकड़े आपस में चिपक जाते है क्योंकि

⇒ दाब अधिक होने से बर्फ का ग्लनांक घट जाता है

120. सबसे शुद्ध जल होता है

⇒ वर्षा का जल

121. पारा का हिमांक तथा स्वथनांक होता है

⇒ क्रमशः -39°C तथा 357°C

122. सूर्य के प्रकाश में प्रकीर्णन सबसे अधिक होता है

⇒ बैंगनी रंग का

123. गाड़ी के साइड मिरर में प्रयुक्त दर्पण तथा दंत चिकित्सक का दर्पण होता है

⇒ क्रमशः उत्तल तथा अवतल

124 प्रतिध्वनि का कारण होता है

⇒ ध्वनि तरंगों का परावर्तन

125 ‘ल्यूमेन’ तथा ‘वाट’ मात्रक है

⇒ क्रमशः ज्योति फ्लक्स तथा शक्ति का

126. नाभिक का आकार होता है

⇒ 10-15 मी०

127. रेडियोधर्मिता का आविष्कार किया था

⇒ हेनेरी बेकुरल ने


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3. Political Science (भारतीय राज्यव्यवस्था)

Political Science

(भारतीय राज्यव्यवस्था)



1. भारत में संविधान सभा का गठन किया गया था

⇒ कैबिनेट मिशन (1946) की सिफारिस पर

2. संविधान सभा का गठन हुआ था

⇒ जुलाई, 1946 में

3. सविधान सभा का पुनर्गठन (3 जून, 1947 को विभाजन के बाद) हुआ था

⇒ 31 अक्टूबर 1947 को

4. संविधान सभा में कुल सदस्यों की संख्या निर्धारित की गई थी

⇒ 389

5. संविधान के मूल मसौदे पर हस्ताक्षर थे

⇒ 284 सदस्यों के

6. संविधान सभा में ब्रिटीश प्रान्तों, देशी रियासतों तथा कमीशनरी से प्रतिनिधि थे

⇒ क्रमश: 292, 93 तथा 4

7. देश के विभाजन होने पर प्रान्तों तथा देशी रियासतों की सदस्य संख्या रह गई

⇒ क्रमश: 235, तथा 89 ( कुल-324)

8. संविधान सभा की प्रथम बैठक हुई थी

⇒ 9 दिसंबर 1946 को प्रात: 11 बजे

9. संविधान सभा की प्रथम बैठक की अध्यक्षता (अस्थायी) की थी

⇒ डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा ने

10 सविधान सभा का स्थायी अध्यक्ष 11 दिसम्बर, 1946 को चुना गया

⇒ डॉ. राजेंद्र प्रसाद को

11. संविधान सभा के संवैधानिक सलाहकार थे

⇒ श्री बी. एन. राव (श्री बेनेगल नरसिंह राव)

12. 29 अगस्त 1947 को गठित 7 सदस्यीय प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे

⇒ डॉ० भीम राव अम्बेदकर

13. संविधान के प्रारूप पर बहस हुई थी

⇒ 114 दिन

14. भारतीय संविधान को पारित एवं अंगीकार किया गया

⇒ 26 नवम्बर, 1949 को

15. सम्पूर्ण संविधान लागू या प्रवृत हुआ

⇒ 26 जनवरी, 1950 को

16. संविधान निर्माण में लगा समय है

⇒ 2 वर्ष 11 महीना तथा 18 दिन

17. विश्व में सबसे लम्बा लिखित संविधान है

⇒ भारत का

18. मूल संविधान में अनुच्छेद, अनुसूचियों तथा भागों की संख्या थी

⇒ 395 अनुच्छेद, 8 अनुसूचियाँ तथा 22 भाग

19. वर्तमान में अनुच्छेद एंव अनुसूचियों की संख्या है

⇒ 470 अनुच्छेद तथा 12 अनुसूचियाँ

20. अनुच्छेद-1 में भारत को कहा गया है

⇒ राज्यों का संघ

21. ‘संघ’ अर्थात् यूनियन शब्द लिया गया है

⇒ कनाडा के संविधान से

22. ‘भारतीय संविधान का जनक’ कहा जाता है

⇒ डॉ भीम राव अम्बेडकर

23. पाकिस्तान के लिए अलग संविधान सभा का गठन किया गया

⇒ 3 जून, 1947 को

24. वर्तमान में भारतीय संघ में है

⇒ 28 राज्य तथा 8 संघ शासित प्रदेश

25. ‘संविधान की कुंजी’ कहा जाता है

⇒ प्रस्तावना को

26. पंथ निरपेक्ष, समाजवादी और अखण्डता शब्द प्रस्तावना में जोड़ा गया

⇒ 42वें संविधान संशोधन (1976) के द्वारा

27. लघु संविधान (Mini Constitution) कहा जाता है

⇒ 42वें संविधान संशोधन को

28. भीमराव अम्बेदकर ने ‘संविधान की मूल आत्मा’ कहा है

⇒ संवैधानिक उपचार को

29. संविधान की संप्रभुता निहीत होती है

⇒ भारत के लोगों में

30. भारतीय ‘संसदीय शासन प्रणाली’ प्रभावित है

⇒ ब्रिटेन के संविधान से

31. ‘संविधान संशोधन की प्रक्रिया’ लिया गया है

⇒ दक्षिण अफ्रीका के संविधान से

32. संविधान संशोधन की प्रक्रिया वर्णित है

⇒ अनुच्छेद-368 तथा भाग-20 में

33. प्रथम संविधान संशोधन हुआ था

⇒ 1951 में

34. ‘राज्य के नीति-निर्देशक तत्व’ प्रभावित है

⇒ आयरलैंड के संविधान से

35. ‘राज्य के नीति-निर्देशक तत्व’ वर्णित है

⇒ भाग-IV (अनुच्छेद-36 से 51 में)

36. संविधान सभा के ‘झंडा समिति’ तथा ‘संचालन समिति’ के अध्यक्ष थे

⇒ क्रमश: जे० बी० कृपलानी तथा डॉ० राजेंद्र प्रसाद

37. भारतीय विधान में ‘न्यायिक पुनरावलोकन तथा मौलिक अधिकार’ प्रभावित है

⇒ संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान से

38. भारतीय संविधन में ‘मौलिक कर्तव्य’ लिया गया है

⇒ सोवियत रूस के संविधान से

39. मौलिक कर्त्तव्य (संख्या-11) वर्णित है

⇒ भाग-4 (क) तथा अनु०-51 (क)

40. संविधान में मौलिक कर्तव्य (42वें संविधान संशोधन 1976 द्वारा) जोड़ा गया

⇒ सरदार स्वर्ण सिंह समिति का अनुशंसा पर

41. मौलिक अधिकार वर्णित है

⇒ भाग-3 (अनु०-12 से 35) में

42. भारत के 22 भाषाओं का उल्लेख है

⇒ 8वीं अनुसूची में (भाग-17)

43. दल-बदल निरोधक उपबंध वर्णित है

⇒ 10 वीं अनुसूची में

44 . संघ-सूची, राज्य सूची तथा समवर्ती सूची का संबंध है

⇒ 7वीं अनुसूची से (अनुच्छेद-246)

45. संघ-सूची समवर्ती सूची एवं राज्य सूची में उल्लेखित विषयों की संख्या है

⇒ क्रमश: 98, 52 एवं 62

46. रक्षा, विदेश, नागरिकता, रेलवे, डाक-तार प्रमुख विषय है

⇒ संघ सूची का

47. पुलिस, जेल, कृषि, लोक-व्यवस्था, स्थानीय शासन प्रमुख विषय है

⇒ राज्य सूची का

48. शिक्षा, वन, परिवार नियोजन, समाजिक सुरक्षा, दण्डसंहिता प्रमुख विषय है

⇒ समवर्ती सूची का

49. भारतीय संविधान में ‘आपात उपबंध’ लिया गया है

⇒ जर्मनी के संविधान से

50. भारतीय संविधान में ‘नागरिकता’ संबंधी व्यवस्था की गई है

⇒ भाग-2 (अनु. 5 से 11 ) में

51. कोई व्यक्ति भारत का नागरिक माना जायेगा, यदि उसका जन्म हुआ हो

⇒ 26 जनवरी 1950 के उपरान्त भारत में हुआ हो

52. भारत से लगातार कितने वर्ष बाहर रहने पर नागरिकता समाप्त हो जाती है

⇒ 7 (वर्ष)

53. भारत में लगातार कितने वर्ष रहने पर नागरिकता प्राप्त हो जाती है

⇒ 10 (वर्ष)

54. मूल संविधान में मौलिक अधिकारों की संख्या थी

⇒ 7 (वर्तमान में 6)

55. वर्तमान में संपत्ति का अधिकार है

⇒ विधिक अधिकार (अनु.- 300 क)

56. संपति के अधिकार को मूल अधिकार से हटा दिया गया

⇒ 44वाँ संशोधन (1978) द्वारा

57. मौलिक अधिकारों को संशोधित करने का अधिकार है

⇒ संसद को

58. ‘अस्पृश्यता का अंत’ किया गया है

⇒ अनुच्छेद-17 द्वारा

59. भारतीय संविधान को अर्द्धसंघीय संविधान कहा है

⇒ व्हीयर ने

60. स्वतंत्रता के समय भारत में देशी रियासते थी

⇒ 542

61. ‘प्रेस की स्वतंत्रता’ वर्णित है

⇒ अनु०-19 (अ) में

62. ‘प्राण व दैहिक स्वतंत्रता’ दी गई है

⇒ अनु-21 में

63. देश का प्रथम नागरिक तथा कार्यपालिका का संवैधानिक प्रधान होता है

⇒ राष्ट्रपति

64. राष्ट्रपति तथा उपराष्ट्रपति पद के लिए न्यूनत्तम आयु सीमा है

⇒ 35 वर्ष

65. राष्ट्रपति अपना त्याग पत्र देता है

⇒ उपराष्ट्रपति को

66. राष्ट्रपति को पद से हटाया जा सकता है

⇒ महाभियोग द्वारा (अनु-61, कोई भी सदन)

67. लोकसभा भंग (अनु-85) तथा मृत्यु दण्ड क्षमा (अनु-72) कर सकता है

⇒ राष्ट्रपति

68. राष्ट्रपति लोकसभा तथा राज्यसभा में मनोनीत करता है

⇒ क्रमशः 2 एवं 12 सदस्यों को

69. निर्विरोध निर्वाचित होने वाले एकमात्र राष्ट्रपति थे

⇒ नीलम संजीव रेड्डी

70. राष्ट्रपति पर महाभियोग लगाने की सूचना दी जाती है

⇒ 14 दिन पूर्व

71. राष्ट्रपति शासन सबसे पहले लागू किया गया था

⇒ पंजाब में (1951 ई. में अनु- 356 के तहत)

72. सर्वाधिक समय तक राष्ट्रपति शासन प्रयोग में रहा

⇒ पंजाब में (1987-1992)

73. राष्ट्रपति शासन की न्यूनत्तम तथा अधिकतम अवधि है

⇒ क्रमशः 6 मास तथा 3 वर्ष

74. दोनों सदनों (राज्यसभा एवं लोकसभा) के संयुक्त बैठक को बुलाता तथा उसकी अध्यक्षता करता है

⇒ क्रमशः राष्ट्रपति तथा लोकसभाध्यक्ष

75. उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, महान्यायवादी तथा उच्च एवं उच्चत्तम न्यायालय के न्यायाधीशों को नियुक्ति करता है

⇒ राष्ट्रपति

76. राष्ट्रपति के चुनाव में भाग लेते है

⇒ संसद व राज्यों के विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्य

77. संसद का निम्न तथा उच्च सदन कहलाता है

⇒ क्रमशः लोकसभा एवं राज्यसभा

78. राज्य सभा एक स्थायी सदन है

⇒ क्योंकि इसे भंग नहीं किया जा सकता

79. राज्यसभा का अध्यक्ष या पदेन सभापति होता है

⇒ उपराष्ट्रपति

80. राज्यसभा तथा लोकसभा के सदस्यों की अधिकत्तम संख्या है

⇒ क्रमशः 250 तथा 552

81. राज्यसभा या लोकसभा के दो सत्रों के बीच अधिकत्तम अंतर होता है

⇒ 6 माह का

82. कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं इसका निर्णय करता है

⇒ लोकसभा अध्यक्ष

83. राज्यसभा के एक-तिहाई सदस्य अवकाश ग्रहण करते है

⇒ प्रत्येक 2 साल पर

84. धन विधेयक प्रस्तुत किया जाता है

⇒ केवल लोकसभा में

85. धन विधेयक को राज्यसभा विचारार्थ अपने पास रखती है

⇒ केवल 14 दिनों तक (अनु-110 में वर्णित)

86. लोकसभा की कोरम या गणपूर्ति के लिए आवश्यक है

⇒ कुल का 1/10 सदस्य का होना

87. लोकसभा तथा राज्यसभा के सदस्यों का कार्यकाल होता है

⇒ क्रमशः 5 वर्ष तथा 6 वर्ष

88. पहली लोकसभा की पहली बैठक हुई थी

⇒ 6 मई, 1952 को

89. राज्यसभा का गठन सर्वप्रथम हुआ था

⇒ 3 अगस्त, 1952 को

90. लोकसभा तथा राज्यसभा के सदस्यों की न्यूनत्तम आयु-सीमा होती है

⇒ क्रमश: 25 वर्ष तथा 30 वर्ष

91. प्रधानमंत्री के लिए न्यूनत्तम आयु सीमा तथा कार्यकाल है

⇒ क्रमशः 25 वर्ष तथा 5 वर्ष

92. मंत्रीपरिषद् सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है

⇒ लोकसभा के प्रति (अनु-73 (3))

93. भारत सरकार का सबसे बड़ा कानूनी अधिकारी होता है

⇒ महान्यायवादी (अनु-73)

94. भारत के संसद के तीन अंग है

⇒ राष्ट्रपति, लोकसभा एवं राज्यसभा

95. ‘संविधान का रक्षक’ बनाया गया है

⇒ उच्चत्तम न्यायालय को

96. राज्य पुनर्गठन आयोग का गठन किया गया था

⇒ 1953 में

97. राज्य पुनर्गठन आयोग के अध्यक्ष थे

⇒ फजल अली

98. राष्ट्रपति तथा उपराष्ट्रपति को वेतन मिलता है

⇒ क्रमशः 1,50,000 तथा 1,25,000

99. प्रथम उपप्रधानमंत्री थे

⇒ सरदार वल्लभ भाई पटेल

100. प्रत्येक बैठक के आरंभ में एक घंटे का समय कहलाता है

⇒ प्रश्नकाल

101. प्रश्नकाल के तुरंत बाद का समय (12 से 1 बजे तक) कहलाता है

⇒ शून्यकाल

102. एक भी दिन संसद का सामना नहीं करने वाले प्रधानमंत्री थे

⇒ चौधरी चरण सिंह

103. उपराष्ट्रपति के चुनाव में भाग लेते है

⇒ संसद के दोनों सदनों के सदस्य

104. धन विधेयक को लोकसभा के प्रस्तुत करने से पूर्व अनुमति लेना आवश्यक है

⇒ राष्ट्रपति का

105. किसी भी राज्य में राष्ट्रपति शासन की घोषणा करता है

⇒ राष्ट्रपति (अनुच्छेद 356)

106. मंत्रिपरिषद् का निर्माणकर्त्ता तथा संहारकर्त्ता होता है

⇒ प्रधानमंत्री

107. वैसे राष्ट्रपति जिनकी मृत्यु उनके कार्यकाल के दौरान हुई थी

⇒ फखरूद्दीन अली अहमद और जाकिर हुसैन

108. राज्य कार्यपालिका का प्रधान होता है

⇒ राज्यपाल

109. राज्यविधानमंडल का उच्च सदन (स्थायी सदन) तथा निम्न सदन है

⇒ क्रमशः विधानपरिषद् तथा विधानसभा

110. विधानसभा में राज्यपाल आंग्ल भारतीय सदस्य को मनोनीत कर सकता है

⇒ केवल एक

111. राज्यमंत्रिमंडल सामूहिक रूप से उत्तरदायी होता है

⇒ विधानसभा के प्रति

112. संविधान सभा के कुल अधिवेशन एवं बैठकें हुई थी

⇒ क्रमश: 11 अधिवेशन एवं 105 बैठकें

113. राष्ट्रपति तथा उपराष्ट्रपति को वेतन प्रदान किया जाता है

⇒ संचित निधि द्वारा

114. प्रथम लोकसभा अध्यक्ष थे

⇒ गणेश वासुदेव मावलंकर

115. व्यक्तिगत स्वतंत्रता के रक्षा के लिए महत्त्वपूर्ण रिट याचिका है

⇒ हैबियस कॉपर्स (बंदी प्रत्यक्षीकरण)

116. संसद भवन का उद्घाटन हुआ था

⇒ 18 जनवरी 1927 को (लार्ड इरविन द्वारा)

117. राज्यसभा की गणपूर्ति संख्या है

⇒ समस्त संख्या का 10वीं भाग

118. पहली बार लोकसभा समय से पूर्व भंग की गयी थी

⇒ 27 दिसम्बर 1970 को (14 मास पहले)

119. साधारण विधेयक को राज्यसभा रोक सकती हैं

⇒ 6 माह तक

120. प्राक्कलन या अनुमान समिति में (केवल लोकसभा के) सदस्य होते है

⇒ 30

121. सार्वजनिक उपक्रम समिति में सदस्य होते है

⇒ 15 (10 लोकसभा तथा 5 राज्य सभा से)

122. लोक लेखा समिति का प्रारंभ हुआ

⇒ 1967 ई. से

123. लोक लेखा समिति (प्राक्कलन समिति को जुड़वा बहन) में सदस्य होते हैं

⇒ 22 (15 लोकसभा तथा 7 राज्य सभा के)

124. मूल संविधान में न्यायाधिशों की संख्या थी

⇒ 8 (1 मुख्य तथा 7 अन्य न्यायाधीश)

125. वर्तमान में सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या है

⇒ 31 (1 मुख्य तथा 30 अन्य न्यायाधिश)

126. सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का कार्यकाल (अवकाश ग्रहण) होता है

⇒ 65 वर्ष

127. संविधान का व्याख्या करने वाला तथा संरक्षक माना जाता है

⇒ सर्वोच्च न्यायालय को

128. राष्ट्रपति तथा उपराष्ट्रपति के चुनाव संबंधी विवादों का निपटारा करता है

⇒ सर्वोच्च न्यायालय (अनु. 71 के तहत)

129. राज्य की कार्यपालिका का प्रधान होता है

⇒ राज्यपाल

130. प्रत्येक राज्य के लिए उच्च न्यायालय की व्यवस्था की गई है

⇒ संविधान की धारा-214 के अन्तर्गत

131. उच्च न्यायालय के न्यायाधिशों को अवकाश ग्रहण की आयु सीमा है

⇒ 65 वर्ष

132. सबसे अधिक तथा सबसे कम न्यायाधीशों की संख्या है

⇒ क्रमश: इलाहाबाद उच्च न्यायालय (58) तथा गुवाहाटी उच्च न्यायालय (3)

133. 14 वर्ष से कम आयु वाले किसी बच्चे को कारखानों, खानों या अन्य किसी जोखिम भरे काम पर नहीं लगाया जा सकता है

⇒ अनुच्छेद 24 के तहत

134. शिक्षा को संविधान की धारा-21 के अंतर्गत शामिल कर मौलिक अधिकार का दर्जा दिया गया है

⇒ 86वाँ संविधान संशोधन, 2002 द्वारा

135. राज्य का विधान मंडल बनता है

⇒ राज्यपाल, विधान सभा तथा राज्य विधान परिषद् से

136. नवीनत्तम राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारतीय संसद द्वारा स्वीकृत की गई

⇒ 1968 ई. में

137. 1952 में भारत का पहला आम बजट प्रस्तुत किया था

⇒ पी० के० शनमुखम चेट्टी (वित्तमंत्री) ने

138. ‘भारत का मैग्नाकार्टा’ कहा जाता है

⇒ संविधान के भाग- III को

139. राज्यसभा की पहली बैठक हुई थी

⇒ 13 मई 1952

140. राज्यसभा के पहले समूह की सेवा निवृत्ति हुई थी

⇒ 2 अप्रैल 1954 को

141. राज्यसभा की पहली महिला महासचिव थी

⇒ वी. एस. रमादेवी

142. ‘भारतीय संविधान की आत्मा’ कहा गया है

⇒ अनु-32 को

143. केन्द्रीय बजट वित्तमंत्री द्वारा पेश किया जाता है

⇒ फरवरी के अंतिम सप्ताह में

144. संसद की दोनों सदनों का सत्रावसान करता है

⇒ राष्ट्रपति

145. राज्य में सर्वप्रथम गैर कांग्रेसी सरकार गठित हुई

⇒ केरल (1957) में

146. एक मात्र राज्य जिसका अपना अलग सविधान था

⇒ जम्मू-काश्मीर 

147. जम्मू-कश्मीर के संविधान को अंगीकृत और लागू किया गया था

⇒ 1957 में

148. जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा दिया गया था

⇒ अनु- 370 के तहत

149. निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति करता है

⇒ राष्ट्रपति

150. प्रथम मुख्य निर्वाचन आयुक्त थे

⇒ सुकुमार सेन

151. राज्यमंत्री परिषद् का प्रधान होता है

⇒ मुख्यमंत्री

152. संसद की दोनों संदनों की संयुक्त बैठक का प्रावधान किया गया है

⇒ अनु-108 में

153. पहली बार विपक्ष दल के नेता को मान्यता दी गई

⇒ 1969 में

154. जम्मू-कश्मीर की संविधान सभा का प्रथम अधिवेशन हुआ था

⇒ 30 अक्टूबर, 1991 को

155. जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन सर्वप्रथम लागू हुआ था

⇒ 27 मार्च, 1977 को

156. 73वाँ संविधान संशोधन (1992 ई०) संबंधित है

⇒ पंचायती राज से

157. पंचायती राज (उद्घाटनकर्ता पं. जवाहर लाल नेहरू) सर्वप्रथम लागू हुआ था

⇒ 2 अक्टूबर 1959 को राजस्थान के नागौर जिला में

158. पंचायती राज से संबंधित भाग, अनुच्छेद तथा अनुसूची है

⇒ भाग-9, अनुच्छेद 243 (क से ण) तथा अनुसूची-11

159. पंचायती राज का सबसे छोटा अंग है

⇒ ग्राम पंचायत

160. भारत में पंचायती राज शुरू किया गया

⇒ बलवन्तराय मेहता समिति की अनुशंसा पर (1957 ई.)

161. पाकिस्तान तथा बांग्लादेश भारत के अंश थे

⇒ 3 जून, 1947 तक

162. धर्मनिरपेक्ष का अर्थ है

⇒ सभी धर्मों के महत्व को स्वीकार करना

163. स्वतंत्र भारत के प्रथम कानून मंत्री थे

⇒ डॉ. भीमराव अम्बेदकर

164. ग्राम पंचायत का निर्वाचन कराना निर्भर करता है

⇒ राज्य सरकार पर

165. खण्ड (ब्लॉक) स्तर पर पंचायत समिति है

⇒ एक प्रशासनिक प्राधिकरण

166. समान नागरिक संहिता (Common Civil Code) लागू है

⇒ गोवा, उतराखंड राज्य में

नोट: आजादी के बाद समान नागरिक संहिता कानून लागू करने वाला उत्तराखंड पहला राज्य बन गया है।

167. नागरिको के लिए एक समान सिविल संहिता से संबंधित अनुच्छेद है

⇒ अनुच्छेद-44

168. राष्ट्र-ध्वज राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री की मृत्यु पर झुका रहता है

⇒ 12 दिनों तक

169. मौलिक अधिकार को प्रवृत कराने के लिए जारी की जाने वाली रिट है

⇒ बन्दी प्रत्यक्षीकरण

170. नागरिकों के मौलिक अधिकारों के रक्षा के लिए सर्वोच्च न्यायालय (अनु०-32) तथा उच्च न्यायालय (अनु-226) रिट जारी करता है

⇒ 5 प्रकार के (बन्दी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, उत्प्रेषण तथा अधिकार पृच्छा)

171. यदि राष्ट्रपति का पद खाली है तो इसे भरना आवश्यक होता है

⇒ 6 महीने के अंदर

172. राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति दोनों का पद खाली होने पर राष्ट्रपति के कार्यों को सम्पादित करता है

⇒ भारत का मुख्य न्यायाधीश

173. सर्वोच्च न्यायालय से राष्ट्रपति परामर्श मांग सकता है

⇒ अनुच्छेद 143 के तहत

174. राष्ट्रपति राज्यों में राष्ट्रपति शासन आरोपित करता है

⇒ अनुच्छेद 356 (1) के तहत

175. राष्ट्रपति को पद की शपथ दिलाता है

⇒ भारत के मुख्य न्यायाधीरा

176. लोकसभा का कोई सदस्य अयोग्य ठहराया जाएगा, यदि बिना सदन के अनुमति के अनुपस्थित रहता है

⇒ 60 दिनों तक

177. मंत्रीमंडल की बैठक की अध्यक्षता करता है

⇒ प्रधानमंत्री

178. सामूहिक रूप से मंत्रिपरिषद् अपने आचरण एवं कार्यों के लिए उत्तरदायी होती है

⇒ लोकसभा के प्रति

179. उच्चत्तम न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि करने की शक्ति है

⇒ संसद को (अनु-124 (1) के अन्तर्गत)

180. भारतीय संविधान के संघीय न्यायपालिका का उल्लेख है

⇒ भाग-5 में

181. केरल राज्य का उच्च न्यायालय स्थित है

⇒ एर्नाकुलम में (स्थापना 1958 में)

182. सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों को शपथ दिलाता है

⇒ राष्ट्रपति

183. न्यायिक पुनरीक्षण का अधिकार प्राप्त है

⇒ सर्वोच्च न्यायालय को (अनु-139 के अन्तर्गत)

184. भारतीय दंड संहिता 302 संबंधित है

⇒ हत्या से

185. एक राज्य जहाँ किसी सरकार का राज्य नहीं होता, कहलाता है

⇒ एनार्की

186. तीन नये राज्य छतीसगढ़, उत्तरांचल तथा झारखंड का गठन हुआ था

⇒ 84वाँ संविधान संशोधन 2000 द्वारा

187. भारत का वह राज्य जिसने उर्दू को राजकाज की भाषा के रूप में स्वीकार किया है

⇒ जम्मू-कश्मीर

188. गवर्नर द्वारा जारी किया गया अध्यादेश मंजूर किया जाता है

⇒ राज्य विधानमण्डल द्वारा

189. राज्य के राज्यपाल की सेवानिवृत्ति की आयु सीमा है

⇒ आयु सीमा नहीं है

190. गोवा को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया

⇒ 56वाँ संविधान संशोधन 1987 द्वारा

191. सिक्किम को पूर्ण राज्य (22वीं) का दर्जा दिया गया

⇒ 36वाँ संविधान संशोधन 1975 द्वारा

192. किसी राज्य में विधानसभा में सदस्यों की अधिकत्तम तथा न्यूनत्तम संख्या निर्धारित की गई है

⇒ अधिकत्तम 500 तथा न्यूनतम 60

193. पंचायत स्तर पर राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व करता है

⇒ ग्राम सेवक

194. भारत की पहली निर्वाचित लोकसभा अस्तित्व में आई थी

⇒ अप्रैल 1952 को

195, मताधिकार की न्यूनत्तम आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष निर्धारित की गई

⇒ 61वाँ संविधान संशोधन (1989 ई.) द्वारा

196. भारत में पहली बार राष्ट्रीय आपातकाल (अनु-352 के तहत) घोषित किया गया था

⇒ 26 अक्टूबर 1962 (चीनी आक्रमण के समय)

197. राष्ट्रीय आपातकाल (अनु- 352 ) के समय लोकसभा की अवधि को प्रथम बार राष्ट्रपति द्वारा बढ़ाया जा सकता है

⇒ 6 माह तक

198. राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान स्थगित नहीं होता

⇒ अनुच्छेद-21

199. नागालैंड (1 दिसम्बर, 1963 को विधिवत राज्य) को एक राज्य का दर्जा दिया गया

⇒ 13वाँ संविधान संशोधन 1962 के अन्तर्गत

200. ‘चौथा स्तंभ’ (फोर्थ इस्टेट) इंगित करता है

⇒ प्रेस तथा समाचार पत्र को

201. ‘सामाजिक सुरक्षा तथा सामाजिक बीमा’ शामिल है

⇒ समवर्ती सूची में

202. संविधान में संघ की राजभाषा के रूप में हिन्दी को मान्यता मिली

⇒ 14 सितम्बर 1947 को

203. अब तक अनुच्छेद-352 के तहत राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय आपात की घोषणा की है

⇒ तीन बार (1962, 1971 तथा 1975)

204. 1964 ई० में गठित प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग के चेयरमैन थे

⇒ मोरारजी देसाई

205. लोक लेखा समिति अपनी वार्षिक रिपोर्ट पेश करती है

⇒ लोकसभा को

206. नियंत्रक तथा महालेखा परीक्षक के कार्यों की निगरानी की जाती है

⇒ लोक लेखा समिति द्वारा

207. भाषा के आधार पर गठित प्रथम राज्य है

⇒ आंध्र प्रदेश (1953)

208. राज्य भाषा आयोग (गठन 1955 में) के प्रथम अध्यक्ष थे

⇒ बी. जी. खेर

209. ‘संविधान की आत्मा’ कहा जाता है

⇒ अनुच्छेद-32 को

210. वित्तीय आपात का संबंध है

⇒ अनुच्छेद-360 से

211. राज्य के नीति-निर्देशक तत्व का मुख्य उद्देश्य है

⇒ लोक कल्याणकारी राज्य की स्थापना करना

212. दल-बदल विरोधी अधीनियम पारित हुआ था

⇒ 52वाँ संविधान संशोधन 1985 द्वारा

213. लोकसेवा आयोग की स्थापना की गई थी

⇒ 1926 में (अनुच्छेद-315)

214. लोक सेवाओं हेतु ‘ली कमीशन’ गठित हुआ था

⇒ 1912 ई. में

215. संघ राज्य क्षेत्रों में केवल अपना उच्च न्यायालय है

⇒ दिल्ली का

216. भारत में वर्तमान में कुल उच्च न्यायालय है

⇒ 24

217. प्रत्येक राज्य में एक उच्च न्यायालय होगा

⇒ अनुच्छेद 214 के तहत

218. देश के सार्वजनिक धन का संरक्षक होता है

⇒ नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (नियुक्ति राष्ट्रपति)

219. बिना संसद का सदस्य होते हुए सदन की बैठक में भाग लेने या बोलने का अधिकार है

⇒ भारत के महान्यायवादी को

220. राज्यपाल के पद का सृजन किया गया है

⇒ अनुच्छेद-153 द्वारा

221. सबसे पुरानी वित्तीय समिति है

⇒ लोक लेखा समिति

222. पहली बार विपक्ष दल के नेता को मान्यता दी गई

⇒ 1969 ई. में

223. संविधान के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक का प्रावधान किया गया है

⇒ अनुच्छेद 108 में

224. राष्ट्रपति के अभिभाषण को तैयार करता है

⇒ मंत्रिमंडल

225. बम्बई उच्च न्यायालय के अधीन है

⇒ दमन, दीव तथा नगर हवेली

226. मद्रास तथा केरल उच्च न्यायालय के अधीन है

⇒ पाण्डीचेरी तथा लक्षद्वीप

227. पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के अधीन है

⇒ चंडीगढ़

228. कोलकाता उच्च न्यायालय के अधीन है

⇒ अण्डमान निकोबार द्वीप समूह

229. उतराखंड में समान नागरिक संहिता कब से लागू हुआ

⇒ 11 मार्च, 2024 से 

नोट: राष्ट्रपति ने उत्तराखंड विधान सभा द्वारा पारित ‘समान नागरिक संहिता’, उत्तराखंड 2024 विधायक पर दिनांक 11 मार्च, 2024 को स्वीकृति प्रदान की।

230. राज्य मंत्री परिषद् का प्रधान होता है

⇒ मुख्यमंत्री

231. राज्यसभा में प्रथम विपक्षी दल के नेता थे

⇒ कमला पति त्रिपाठी

232. धन विधेयक तथा वित्त विधेयक की परिभाषा दी गई है

⇒ क्रमशः अनु-110 तथा अनु-117 में

233. द्वैध शासन प्रणाली शुरू होकर चली थी

⇒ 1921 से 1937 तक

234. संविधान के 15 वें तथा 18 वें भाग का विषय है

⇒ क्रमशः निर्वाचन तथा आपात उपबंध

235. अशोक मेहता समिति का गठन किया गया था

⇒ 1977 में (सदस्य 13)

236. जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन सर्वप्रथम लागू हुआ था

⇒ 27 मार्च 1977 को

237. मंडल आयोग गठित हुआ था

⇒ 1979 में

238. अनुच्छेद 343 संबंधित है

⇒ संघ की राजभाषा से

239. वारेन हेस्टिंग्स बंगाल का गवर्नर जनरल बना था

⇒ 1773 के रेग्युलेटिंग एक्ट द्वारा

240. कम्पनी के व्यापारिक अधिकार समाप्त कर दिया गया

⇒ चार्टर अधिनियम 1813 द्वारा

241. बंगाल का गवर्नर जनरल को भारत का गवर्नर जनरल कहा जाने लगा

⇒ चार्टर अधिनियम 1833 द्वारा

242. विलियम बेंटिक भारत का प्रथम गवर्नर जनरल बना

⇒ चार्टर अधिनियम 1833 द्वारा

243. गवर्नर जनरल का नाम बदलकर वायसराय कर दिया गया

⇒ भारत सरकार अधिनियम 1858 द्वारा

244. प्रांतीय स्वायत्तता लागू हुआ था

⇒ 1 अप्रैल, 1938 को

245. केन्द्र में द्वैध शासन लागू तथा प्रांतों में समाप्त कर दी गई

⇒ भारत सरकार अधिनियम 1935 द्वारा

246. सविधान की आठवीं अनुसूची में बोडो, मैथली, डोगरी और संथाली भाषा जोड़ा गया

⇒ 92वाँ संशोधन (2003 ई.) द्वारा

247. मार्ले मिण्टो सुधार अधिनियम लागू हुआ

⇒ 1909 ई. में

248. माण्टेग्यू- चेम्सफोर्ड सुधार अधिनियम लागू हुआ

⇒  1919 ई. में

249. नए संसद भवन का उद्घाटन हुआ

⇒ 28 मई 2023 को (प्रधानमंत्री मोदी द्वारा)


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1. Ancient History (प्राचीन इतिहास)

1. Ancient History

(प्राचीन इतिहास)



1. आग का आविष्कार हुआ था

⇒ पुरापाषाण काल में

2. कृषि तथा पहिये का आविष्कार हुआ था

⇒ नवपाषाण काल में

3. नवपाषाण शब्द का सबसे पहले प्रयोग किया था

⇒ जॉन लुवाक ने

4 चाक का आविष्कार हुआ था

⇒ नवपाषाण काल में

5. सिंधु घाटी सभ्यता का काल माना जाता है

⇒ 2350 ई० पू० से 1750 ई० पू० तक

6. सिंधु घाटी सभ्यता थी

⇒ आद्य ऐतिहासिक या कास्ययुगीन

7. सिंधु सभ्यता की मुख्य विशेषता थी

⇒ नगर नियोजन

8. सिंधु घाटी सभ्यता के लोगों का मुख्य व्यवसाय था

⇒ व्यापार-वाणिज्य

9. सिंधु सभ्यता का प्रमुख फसल था

⇒ गेहूँ और जौ

10. सिंधु सभ्यता की लिपि थी

⇒ भाव चित्रात्मक

11 आदि मानव ने सर्वप्रथम सीखा था

⇒ आग जलाना

12 सर्वप्रथम पालतु बनाया गया जानवर था

⇒ कुत्ता

13. ‘इतिहास का पिता’ कहा जाता है।

⇒ हेरोडोटस को

14 हड़प्या किस नदी के तट पर स्थित है

⇒ रावी नदी

15. हड़प्पा की खुदाई किया गया था

⇒ 1921 में दयाराम सहनी द्वारा

16. हड़प्पा सभ्यता को ‘सिंधु सभ्यता’ का नाम दिया था

⇒ जॉन मार्शलने

17. हड़प्पा का दो बार सर्वेक्षण किया था

⇒ जनरल कनिंघम ने

18. हड़प्पा की सर्वप्रथम खोज की थी

⇒ चार्ल्स मैसन ने 1826में

19. सिंधु सभ्यता के सर्वाधिक पश्चिमी पुरास्थल था

⇒ सुतका गेंडोर (बलूचिस्तान)

20. सिंधु सभ्यता के सर्वाधिक पूर्वी पुरास्थल था

⇒ आलमगीर

21. सिंधु सभ्यता के सर्वाधिक उत्तरी पुरास्थल था

⇒ मांदा (अखनूर, जम्मू-कश्मीर)

22. सिंधु सभ्यता के सर्वाधिक दक्षिणी पुरास्थल था

⇒ दाइमाबाद (अहमद नगर, महाराष्ट्र)

23. सिंधु सभ्यता का कुल क्षेत्रफल है

⇒ 129960० किमी०

24. सिंधु सभ्यता के समूचे क्षेत्रफल का आकार है

⇒ त्रिभुजाकार

25. हड़प्पा को ‘मेसोपोटामिया का उपनिवेश’ कहा था

⇒ ह्वीलर

26. सिंधु सभ्यता का प्रमुख बन्दरगाह था

⇒ लोथल (गुजरात में भोगवा नदी के तट पर)

27 मोहनजोदड़ो किस नदी के तट पर स्थित है

⇒ सिन्धु नदी (पाकिस्तान के लरकाना जिले में)

28. मोहनजोदड़ो की खोज की थी

⇒ राखलदास बनर्जी ने (1922 में) 

29 मोहनजोदड़ो (आधुनिक पाकिस्तान) का अर्थ है

⇒ मृतकों का टीला

30. मोहनजोदड़ो से प्राप्त प्रमुख स्मारक है

⇒ वृहद् स्न्नानागार

31. मोहनजोदड़ो से प्राप्त बड़ी इमारत है

⇒ अन्नागार

32. हडप्पा के लोग अनभिज्ञ थे

⇒ लोहा धातु

33. प्रेसोपोटामिया (आधुनिक नाम इराक) का अर्थ है

⇒ दो नदियों के बीच की भूमि

34. सिंधु सभ्यता का स्थल कालीबंग (राजस्थान) का शाब्दिक अर्थ है

⇒ काली रंग की चूड़ी

35. सिंधु घाटी के लोगों ने पूजा की थी

⇒ मातृदेवी की

36. सिंधु घाटी के लोगों का सबसे महत्त्वपूर्ण वृक्ष था

⇒ पीपल

37. भारत का सबसे बड़ा हड़प्पाई नगर है

⇒ धौलावीर (अर्थ- सफेद कुआँ)

38. चावल का साक्ष्य मिले है

⇒ रंगपुर एवं लोथल से (गुजरात)

39. लिपिस्टिक, काजल, चार पहियों वाला गाड़ी के साक्ष्य मिले है

⇒ चन्हुदड़ो से

40. कांसे की नर्तकी, पुजारी का भवन के साक्ष्य मिला है

⇒ मोहनजोदरों से

41. हड़प्पा के लोगों का सबसे प्रिय पशु था

⇒ कुबर वाला साढ़

42. मिट्टी के हल, खिलौना के साक्ष्य मिले है

➤ बनवाली से

43. हड़प्पा वासियों का प्रमुख खेल था

➤ पाशा

44. हड़प्पावासी तौल में व्यवहार करते थे

➤ 16 या उसके आवर्तों का

45. वेदों की कुल संख्या है

➤ 4 (ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद)

46. सबसे प्राचीन वेद है

➤ ऋग्वेद

47. ऋग्वेद में मंडलों, सुक्तों एवं मंत्रों की संख्या है

➤ 10 मंडल, 1028 सूक्त एवं 10580 मंत्र

48. ऋग्वेद का नौवा मंडल समर्पित है

➤ सोम देवता को

49. गायत्री मंत्र (रचयिता विश्वामित्र) लिया गया है

➤ ऋग्वेद के तीसरा मंडल से

50. ऋग्वैदिक सभ्यता का काल माना जाता है

➤ 1500-1000 ई० पू०

51. ऋग्वेद में सबसे बाद का मंडल है

➤ दसवाँ (पुरुष सुक्त)

52. ऋऋग्वेद में सर्वाधिक पवित्र नदी माना गया है

➤ सरस्वती को

53. ऋग्वेद में सर्वाधिक उल्लेखित नदी है

➤ सिंधु

54. ऋग्वेद में वर्णित सबसे महत्त्वपूर्ण देवता है

➤ इन्द्र

55. ऋग्वेद में बाद में जोड़ा गया मंडल है

➤ पहला एवं दसवाँ

56. सबसे पुरानी भारतीय दवा आयुर्वेद का उद्गम है

➤ अथर्ववेद

57. ऋग्वेद में गंगा तथा यमुना का उल्लेख हुआ है

➤ क्रमशः एक बार तथा तीन बार

58. भारतीय संगीत का जनक है

➤ सामवेद

59. सामवेद का प्रथम लेखक माना जाता है

➤ जैमनी को

60. गद्य एवं पद्य वाला वेद है

➤ यजुर्वेद

61. तंत्र-मंत्र वाला वेद है

➤ अथर्ववेद (सबसे बड़ा वेद)

62. वेदांगों, स्मृतियों तथा पुराणों की संख्या है

➤ क्रमश: 6, 6 तथा 18

63. पुराणों के रचयिता व संग्रहकर्ता माना जाता है

➤ लोमहर्ष तथा उनका पुत्र उग्रश्रवा को

64. सर्वाधिक प्राचीन एवं प्रमाणिक पुराण है

➤ मत्स्य पुराण

65. मत्स्य पुराण से जानकारी मिलती है

➤ सातवाहन वंश की

66. सामवेद तथा यर्जुवेद में मंत्रों की सख्या है

➤ क्रमश: 1549 तथा 1990

67. उपनिषदों की कुल संख्या है

➤ 108 (प्रमाणिक-13)

68. भारत का प्रसिद्ध राष्ट्रीय वाक्य ‘सत्यमेव जयते’ लिया गया है

➤ मुण्डाकोपनिषद् से

69. अथर्ववेद में मंडलों, सुक्तों एवं मंत्रों की संख्या है

➤ 20 मंडल, 731 सुक्त, 5839 मंत्र

70. सबसे प्राचीन एवं प्रमाणिक स्मृति है

➤ मनुस्मृति (शुंग वंश के समय रचित)

71. उत्तर वैदिक काल माना गया है

➤ 1000-600 ई० पू० को

72. उत्तर वैदिक काल के प्रमुख देवता है

➤ प्रजापति

73. महाभारत के रचयिता है

➤ वेद व्यास (वास्तविक नाम-द्वैपायन)

74. महाभारत के अन्य नाम है

➤ जयसंहिता

75. सबसे प्राचीन बौद्ध ग्रंथ है

➤ त्रिपिटक

76. बुद्ध की पूर्व जन्म की कहानी वर्णित है

➤ जातक में

77. जैन साहित्य को कहा जाता है

➤ आगम

78. 16 महाजनपदों का वर्णन है

➤ अंगुत्तर निकाय में

79. जैन धर्म के प्रवर्तक, संस्थापक एवं प्रथम तीर्थकर थे

➤ ऋषभदेव

80. जैन धर्म के 24 वें या अंतिम तीर्थंकर थे

➤ महावीर स्वामी (23वें तीर्थंकर-पार्श्वनाथ)

81. महावीर का जन्म हुआ था

➤ 540 ई पू० वैशाली के कुण्डग्राम में

82. जैन धर्म का वास्तविक संस्थापक माना जाता है

➤ महावीर को

83. महावीर के पिता, माता तथा पत्नी का नाम था

➤ क्रमशः सिद्धार्थ, त्रिशला और यशोदा

84. महावीर के बचपन का नाम था

➤ वर्द्धमान

85. महावीर थे

➤ क्षत्रिय वर्ण के (ज्ञातृक कुल)

86. मझवीर गृह त्याग कर संयासी हुए थे

➤ 30 वर्ष की अवस्था में

87. महावीर को 42 वर्ष की अवस्था में कैवल्य (ज्ञान) की प्राप्ति हुई थी

➤ ऋजुपालिका नदी के किनारे साल वृक्ष के नीचे

88. जैनधर्म का प्रारंभिक इतिहास ज्ञात होता है

➤ कल्पसूत्र से (भद्रबाहु द्वारा रचित)

89. महावीर के जीवन कृत्यों का विवरण मिलता है

➤ भगवती सूत्र में

90. ऋषभदेव का प्रतीक चिन्ह है

➤ साढ़

91. पार्श्वनाथ के चार महाव्रतों में पाँचवां महाव्रत ‘ब्रह्मचर्य’ को जोड़ा था

➤ महावीर ने

92. महावीर की पुत्री तथा दामाद का नाम था

➤ प्रियदर्शनी तथा जमाली

93. महावीर का प्रथम अनुयायी था

➤ जमाली (दामाद)

94. मुहावीर के प्रथम भिक्षुणी (शिष्या) थी

➤ पद्मावती (चम्पा नरेश दधिवाहन की पुत्री)

95. महावीर ने सर्वप्रथम उपदेश दिया था

➤ पावापुरी में (प्राकृत भाषा में)

96. जैन धर्म के प्रचार के लिए अपनाया गया था

➤ प्राकृत भाषा

97. कल्पसूत्र लिखा गया है

➤ संस्कृत में

98. महावीर के ग्यारह शिष्य थे, जो कहलाते थे

➤ गणधर

99. जैन धर्म के दो सम्प्रदाय थे

➤ श्वेताम्बर (स्थूलभद्र) और दिगम्बर (भद्रबाहु)

100. जैन धर्म के त्रिरत्न है

➤ सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान, सम्यक् आचरण

101. जैन धर्म का प्रतीक चिह्न था

➤ साढ़

102. महावीर का प्रतीक चिह्न था

➤ सिंह

103. महावीर की मृत्यु 72 वर्ष की अवस्था में 468 ई० पू० हुई थी

➤ पावापुरी में (राजगृह के समीप)

104. प्रथम जैन सभा (322 से 298 ई० पू०) हुई थी

➤ पाटलिपुत्र में (स्थूलभद्र की अध्यक्षता में)

105. द्वितीय जैन सभा (512 ई० में) हुई थी

➤ वल्लभी में (देवर्धिक्षमा श्रमण की अध्यक्षता में)

106. खजुराहो में जैन मंदिरों का निर्माण कराया था

➤ चंदेल शासकों ने

107. जैन धर्म में जीवन का अंतिम लक्ष्य है

➤ निर्वाण

108. सबसे पुराना जैन कहा जाता है

➤ चौदह पूर्व को

109. महावीर स्वामी को निर्माण प्राप्त हुआ था

➤ मल्लराजा सस्तिपाल के राजप्रासाद में

110. महावीर के मृत्यु के बाद जैन संघ का अध्यक्ष बना

➤ सुधर्मन

111. बौद्ध धर्म के संस्थापक थे

➤ गौतम बुद्ध

112. गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था

➤ 563 ई०पू० (लुम्बनी नामक ग्राम, कपिलवस्तु में)

113. गौतम बुद्ध के पिता, माता, पत्नी तथा पुत्र का नाम था

➤ शुद्धोधन, महामाया, यशोधरा तथा राहुल

114. बुद्ध का लालन पालन किया था

➤ प्रजापति गौतमी (मौसी) ने

115. बुद्ध के बचपन का नाम था

➤ सिद्धार्थ

116. बुद्ध का वंश, वर्ण तथा गोत्र था

➤ शाक्य, क्षत्रिय तथा गौतम

117. 29 वर्ष की अवस्था में बुद्ध द्वारा गृहत्याग की घटना कहलाता है

➤ महाभिनिष्क्रमण (प्रतीक-घोड़ा)

118. 35 वर्ष की अवस्था में 49 वें दिन बुद्ध को बोधगया में ज्ञान प्राप्त हुआ

➤ निरंजना नदी के तट पर पीपल वृक्ष के नीचे

119. बुद्ध द्वारा ज्ञान प्राप्ति की घटना कहलाता है

➤ सम्बोधि (Great Enlightment) या निर्वाण

120. बुद्ध ने प्रथम उपदेश दिया था

➤ सारनाथ में (पाली भाषा में)

121. बुद्ध द्वारा दिया गया प्रथम उपदेश कहलाया

➤ धर्मचक्रप्रवर्त्तन

122. बुद्ध के जन्म, ज्ञान तथा मृत्यु का प्रतीक है

➤ कमल, पीपल तथा स्तुप

123. बुद्ध के घोड़ा तथा सारथी का नाम था

➤ छंदव तथा चाण

124. बुद्ध के प्रथम गुरू थे

➤ आलारकलाम

125. बुद्ध ने सर्वाधिक उपदेश दिए थे

➤ श्रावस्ती (कौशल प्रदेश की राजधानी) में

126. बौद्ध धर्म के त्रिरत्न है

➤ बुद्ध, धम्य और संघ

127. 80 वर्ष की अवस्था में बुद्ध की मृत्यु हुई थी

➤ कुशीनगर (उत्तर प्रदेश, 483 ई०पू०) में

128. बुद्ध की मृत्यु की घटना कहलाया

➤ महापरिनिर्वाण

129. बौद्ध संघ में प्रवेश पाने को कहा जाता था

➤ उपसम्पदा

130. बुद्ध के अनुयायी शासक थे

➤ बिम्बिसार, प्रसेनजित, अशोक एवं उदयन 

131. पाटलिपुत्र (कुसुमपुर) नगर की स्थापना की थी

➤ उदयिन ने (गंगा एवं सोन नदी के संगम पर)

132. बौद्ध धर्म का परम लक्ष्य है

➤ निर्वाण (अर्थ- दीपक का बुझ जाना)

133. बौद्ध संघ में प्रवेश करने वाली पहली महिला थी

➤ सौतेली माँ प्रजापति गौतमी

134. ‘आजीवक सम्प्रदाय’ के प्रवर्तक थे

➤ मक्खलीपुत्र गोसाल

135. महावीर एवं बुद्ध दोनों ने उपदेश दिए थे

➤ बिम्बिसार के शासनकाल में

136. आष्टागिक मार्ग का संबंध है

➤ बौद्ध धर्म से

137. प्रथम बौद्ध संगीति महाकश्यप की अध्यक्षता में हुआ था

➤ 483 ई० पू० (राजगृह में, अजातशत्रु के काल में)

138. द्वितीय बौद्ध संगीति सबाकामी की अध्यक्षता में हुआ था

➤ 383 ई० पू० (वैशाली में, कालाशोक के समय

139. तृतीय बौद्ध संगीति मोग्गालिपुत्ततिस्स की अध्यक्षता में हुआ था

➤ 251 ई० पू० (पाटलिपुत्र में, अशोक के समय)

140. चतुर्थ बौद्ध संगीति वसुमित्र व अश्वघोष की अध्यक्षता में हुआ था

➤ प्रथम शताब्दी (कश्मीर में, कनिष्क के समय)

141. हर्यक वंश (544-412 ई० पू०) का प्रथम शक्तिशाली शासक था

➤ बिम्बिसार

142. हर्यक वंश का अंतिम शासक था

➤ नागदशक (उ‌दयन का पुत्र)

143. शिशुनाग वंश का संस्थापक तथा अंतिम शासक था

➤ क्रमशः शिशुनाग तथा नन्दीवर्द्धन

144. नन्द वंश का संस्थापक था

➤ महापद्मनन्द (उग्रसेन)

145. नन्द वंश का अंतिम शासक था

➤ धनानन्द (अग्रमीज)

146. भारत पर प्रथम विदेशी आक्रमण किया था

➤ ईरानीयों ने (दूसरा आक्रमण- सिकन्दर ने)

147. सिकन्दर (यूनानी) ने भारत विजय का अभियान प्रारंभ किया

➤ 326 ई० पू०

148. मगध की प्रारंभिक राजधानी थी

➤ गिरिवज्र (राजगृह)

149. सिकन्दर और पोरस के बीच के युद्ध को कहा जाता है

➤ हाइडेस्पीज (वितस्ता या झेलम) का युद्ध

150. सिकन्दर की मृत्यु हुई थी

➤ बेबीलोन में (323 ई० पू०)

151. ‘कश्मीर के इतिहास’ से संबंधित पुस्तक है

➤ राजतरंगनी (रचयिता-कल्हण)

152. ‘अष्टाध्यायी’ के (संस्कृत भाषा में व्याकरण की प्रथम पुस्तक) लेखक है

➤ पाणिनी

153. इस्लाम धर्म के संस्थापक थे

➤ हजरत मुहम्मद

154. हजरत मुहम्मद का जन्म हुआ था

➤ मक्का में (570 ई० को)

155. हिजरी संवत् की शुरूआत हुई थी

➤ 622 ई० में

156. हजरत मुहम्मद की मृत्यु हुई थी

➤ 8 जून 632 ई० को (मदीना में)

157. सिकन्दर (अलेक्जेन्डर) का जन्म-मृत्यु हुआ था

➤ 356-323 ई० पू० (पिता-फिलिप)

158. सिकन्दर (गुरू- अरस्तु) का सेनापति था

➤ सेल्युकस निकेटर

159. विपासा नदी के नाम से जाना जाता है

➤ व्यास नदी को

160. नंद वंश के पतन तथा मौर्य वंश के उत्थान की जानकारी मिलती है

➤ मुद्राराक्षस में (विशाखदत्त रचित)

161. भारतीय पटल पर आर्य उभरे थे

➤ 2500-1500 ई० पू०

162. आर्य लोग भारत आये थे

➤ मध्य एशिया (यूराल पर्वत) से

163. आर्य सर्वप्रथम बसे थे

➤ पंजाब एवं अफगानिस्तान में

164. आर्यों का मुख्य पेय, व्यवसाय तथा धातु था

➤ क्रमशः सोमरस, पशुपालन तथा लोहा

165. आर्यों का सर्वाधिक प्रिय देवता तथा पशु था

➤ क्रमशः इंद्र एवं घोड़ा

166. आर्यों की मूल भाषा थी

➤ संस्कृत

167. मूर्ति पूजा का प्रारंभ हुआ था

➤ उत्तर वैदिक काल (1000-600 ई० पू०) में

168. इस्लाम जगत में ‘खलीफा’ पद को समाप्त करने वाला शासक था

➤ मुस्तफा कमालपाशा (1924 में)

169. मौर्य वंश के संस्थापक चन्द्रगुप्त मौर्य का जन्म हुआ था

➤ 345 ई० पू० (मृत्यु-298 ई० पू०)

170. चन्दाप्त मौर्य ने मौर्य वंश की नींव डाली थी

➤ धनानन्द को पराजित कर (अंतिम नन्द शासक)

171. अर्थशास्त्र (राजनीति पर आधारित पुस्तक) के लेखक है

➤ चाणक्य (कौटिल्य)

172. अर्थशास्त्र (संस्कृत) की तुलना किससे की जाती है

➤ अरस्तु की ‘पॉलिटिक्स’ एवं मैकियावेली की ‘प्रिंस’

173. चन्द्रगुप्त मौर्य के गुरू और महामंत्री थे

➤ चाणक्य (विष्णुगुप्त)

174. सर्वप्रथम भारत को इंडिया से संबंधित किया

➤ यूनानीयों ने

175. चन्द्रगुप्त मौर्य ने जैनधर्म की शिक्षा ली थी

➤ भद्रबाहु से

176 बन्द्रगुप्त के दरबार में आने वाला प्रसिद्ध यूनानी था

➤ मेगास्थनीज (सेल्युकस निकेटर का राजदूत)

177. ‘चंद्रगुप्त’ शब्द का पहला उल्लेख मिलता है

➤ रूद्रदामन के जूनागढ़ अभिलेख में

178. चन्द्रगुप्त मौर्य की मृत्यु हुई थी

➤ 298 ई० पू० श्रवणबेलगोला (कर्नाटक) में

179. बिन्दुसार के अन्य नाम है

➤ अमित्रघात्, अमित्रकोड्स, सिंह सेन

180. ‘इंडिका’ पुस्तक को लिखा था

➤ मेगास्थनीज ने

181. भारत में शिलालेख का प्रचलन शुरू किया था

➤ अशोक ने

182. अशोक का नाम ‘अशोक’ किस अभिलेख में मिलता है

➤ मॉस्की (आंध्र प्रदेश) एवं गुर्जरा (मध्य प्रदेश)

183. साँची का स्तुप (मध्य प्रदेश) बनवाया था

➤ अशोक ने

184. श्रीनगर की स्थापना किया था

➤ अशोक ने (वितस्ता नदी के तट पर)

185. अशोक के गुरू थे

➤ मोगलिपुत्रतिस्स

186. अशोक ने बौद्ध धर्म को दीक्षा ली थी

➤ उपगुप्त से

187. अशोक का सबसे छोटा अभिलेख है

➤ रूम्मनदेई अभिलेख

188. अशोक का सबसे बड़ा स्तंभ लेख है

➤ 7वाँ स्तम्भ लेख

189. अशोक का अन्य नाम था

➤ देवनाम प्रिय और प्रियदर्शी

190. अशोक ने बौद्ध धर्म के प्रचार (पाली भाषा में) के लिए श्रीलंका भेजा था

➤ पुत्र महेन्द्र एवं पुत्री संघमित्रा को

191. अशोक के शिलालेख की खोज की थी

➤ टी फैन्थलर ने (1750 ई० में)

192. अशोक के अभिलेख को सर्वप्रथम पढ़ा था

➤ जेम्स प्रिसेंप ने (1837 ई० में)

193. पुसणों में अशोक को कहा गया है

➤ अशोकवर्द्धन

194. अशोक के कुल शिलालेखो की संख्या है

➤ 14

195. अशोक ने ‘धम्म’ स्वीकार किया था

➤ कलिंग युद्ध (261 ई०पू०) के बाद

196. मौर्य वंश का अंतिम शासक था

➤ वृहद्रथ

197. अशोक का राज्याभिषेक हुआ था

➤ 269 ई० पू० (पिता-बिन्दुसार, माता-सुभद्रांगी)

198. सर्वप्रथम सोने के सिक्के चलाने का श्रेय जाता है

➤ इण्डो-ग्रीक (यूनानी शासकों को)

199. अशोक के कलिंग युद्ध का वर्णन है

➤ 13वें अभिलेख में

200. शुंग वंश का संस्थापक तथा अंतिम शासक था

➤ क्रमशः पुष्यमित्र शुंग तथा देवभूति

201. दो अवश्वमेघ तथा एक राजसूय यज्ञ किया था

➤ गौतमी पुत्र शातकर्णी ने

202. खरोष्ठी लिपि लिखी जाती है

➤ दाईं ओर से बाई ओर

203. कण्व वंश का संस्थापक तथा अंतिम शासक था

➤ वसुदेव तथा सुशर्मा कण्व

204. सातवाहन वंश (आंध्र प्रदेश) की नींव डाली थी

➤ सिमुक ने

205. सर्वप्रथम सीसे के सिक्के का प्रचलन किया था

➤ सातवाहन शासक ने

206. कुषाण वंश का सर्वाधिक प्रसिद्ध शासक था

➤ कनिष्क

207. शक संवत् का प्रारंभ किया था

➤ कनिष्क ने (78 ई० में)

208. कनिष्क की प्रथम राजधानी थी

➤ पुरुषपुर या पेशावर (दूसरा-मथुरा)

209. कनिष्क का राजकवि तथा राजवैद्य था

➤ क्रमशः अश्वघोष तथा चरक

210. भारतीयों के लिए महान ‘सिल्क मार्ग’ को आरंभ कराया था

➤ कनिष्क ने

211. ‘भारत का आइन्स्टीन’ कहा जाता है

➤ नागार्जून (शुन्यवाद के प्रवर्त्तक) को

212. गंधार शैली तथा मथुरा शैली का विकास हुआ था

➤ कनिष्क के शासन काल में

213. कुषाण वंश का अंतिम राजा था

➤ वासुदेव

214. गुप्तवंश का संस्थापक था

➤ श्री गुप्त

215. भारतीय इतिहास में ‘स्वर्ण युग’ के नाम से जाना जाता है

➤ गुप्त काल को

216. गुप्त वंश का प्रथम महान सम्राट था

➤ चन्द्रगुप्त प्रथम

217. भारत का नेपोलियन कहा जाता है

➤ समुद्रगुप्त को (चन्द्रगुप्त प्रथम का उतराधिकारी)

218. समुद्रगुप्त का दरबारी कवि था

➤ हरिषेण

219. समुद्रगुप्त का उत्तराधिकारी हुआ

➤ चन्द्रगुप्त-॥ (विक्रमादित्य)

220 चीनी यात्री फाह्यान (399-414 ई०) भारत आया था

➤ चन्द्रगुप्त द्वितीय के शासनकाल में

221. चन्द्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) के दरबार में प्रसिद्ध कवि व नाटककार थे

➤ कालिदास

222. नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना की थी

➤ कुमार गुप्त ने (विक्रमादित्य का उत्तराधिकारी)

Ancient History

223. अंतिम गुप्त शासक था

➤ भानुगुप्त

224. सर्वाधिक स्वर्ण मुद्राएँ जारी किए थे

➤ गुप्त राजाओं ने

225. मंदिर निर्माण की कला का जन्म हुआ था

➤ गुप्तकाल में

226. मेहरौली (दिल्ली) में स्थित राजाचन्द्र के लौह स्तंभ को बनवाया था

➤ चन्द्रगुप्त द्वितीय ने

227. गुप्तकाल के खगोलविद् थे

➤ वाराहमिहिर

228. पुष्यभूति वंश का संस्थापक था

➤ नरवर्द्धन (महत्त्वपूर्ण शासक- हर्षवर्द्धन)

229. चीनी यात्री ह्वेंसांग  (630-644 ई०) भारत आया था

➤ हर्षवर्धन के शासनकाल में

230. हर्षवर्धन का दरबारी कवि था

➤ बाणभट्ट (हर्षचरित के लेखक)

231. हर्षवर्धन को दक्षिण भारत के शासक पुलकेशिन द्वितीय ने हराया था

➤ नर्मदा नदी किनारे (630 ई० में)

232. वर्धन वंश (पुष्यभूति) की राजधानी थी

➤ थानेश्वर

233. भूमि देने की सामंती प्रथा प्रारंभ की थी

➤ हर्ष ने

234. पल्लव वंश का संस्थापक तथा प्रथम शासक था

➤ सिंहविष्णु (राजधानी- तमिलनाड में काँचीपुरम्)

235. पल्लव वंश का अंतिम शासक था

➤ अपराजित (879-897 ई०)

236. महाबलीपुरम् के एकाश्मक रथों का निर्माण करवाया गया था

➤ पल्लव राजा नरसिंह वर्मन प्रथम द्वारा

237. काँची के कैलाशनाथ मंदिर (राजसिद्धेश्वर मंदिर) का निर्माण करवाया था

➤ पल्लव राजा नरसिंहवर्मन द्वितीय ने

238. राष्ट्रकुट राजवंश का संस्थापक था

➤ दंतिदुर्ग (752 ई०)

239. राष्ट्रकुट वंश का अंतिम महान शासक था

➤ कृष्ण तृतीय

240. एलोरा के प्रसिद्ध कैलाश मंदिर का निर्माण करवाया था

➤ कृष्ण प्रथम (राष्ट्रकुट वंश) ने

241. राष्ट्रकुट राजवंश की राजधानी थी

➤ मान्यखेट

242. विक्रमशीला विश्वविद्यालय की स्थापना की थी

➤ धर्मपाल ने (पाल वंश)

243. कल्याणी के चालुक्य वंश की स्थापना की थी

➤ तैलप-॥ ने (राजधानी- मान्यखेट)

244. वातापी के चालुक्य वंश की स्थापना की थी

➤ जयसिंह  ने (राजधानी- वातापी)

245. वेंगी के चालुक्य वंश का संस्थापक था

➤ विष्णुवर्धन

246. हिन्दु विधि की पुस्तक मीताक्षरा’ की रचना की थी

➤ विज्ञानेश्वर (विक्रमादित्य-VI के दरबारी)

247. चोल वंश का संस्थापक था

➤ विजयालय (राजधानी- तंजौर)

248. चोल वंश का अंतिम राजा था

➤ राजेन्द्र-III

249. गंगो की प्रारंभिक राजधानी थी

➤ कोलर (बाद में- तलकाडु)

250. पाल वंश का संस्थापक था

➤ गोपाल (राजधानी- मुंगेर)

251. सेनवंश का संस्थापक था

➤ सामन्त सेन (राजधानी- लखनौती)

252. सेनवंश का अंतिम प्रसिद्ध शासक था

➤  लक्ष्मण सेन

253. ‘गीत गोविन्द’ के रचयिता ‘जयदेव’ दरबारी कवि थे

➤ लक्ष्मण सेन के

254. महमूद गजनवी ने 1025 ई० में सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण किया था

➤ भीम प्रथम के शासन काल में (सोलंकी वंश)

255. सोलंकी वंश का संस्थापक तथा अंतिम शासक था

➤ क्रमश: मूलराज प्रथम तथा कुमार पाल

256. गहड़वाल वंश का संस्थापक था

➤ चंद्रदेव

257. दिल्ली नगर की स्थापना की थी

➤  तोमर नरेश अंगपाल ने (11वीं शताब्दी में)

258. चौहान वंश का संस्थापक था

➤ वासुदेव

259. चौहान वंश का अंतिम शासक था

➤ पृथ्वीराज ।।। (पृथ्वीराज चौहान)

260. पृथ्वीराज चौहान एवं मुहम्मद गोरी के बीच तराईन का प्रथम युद्ध हुआ था

➤ 1191 ई० में (विजयी- पृथ्वी राज चौहान)

261. पृथ्वीराज चौहान एवं मुहम्मद गोरी के बीच तराईन का दूसरा युद्ध हुआ था

➤ 1192 ई. में (विजयी- मुहम्मद गौरी)

262. ‘पृथ्वीराज रासो’ के रचयिता थे

➤ चन्दवरदाई (पृथ्वीराज चौहान का राजकवि)

263. महमुद गजनवी ने 1001 से 1027 के बीच भारत पर आक्रमण किया था

➤ 17 बार

264. चंदेल वंश का संस्थापक था

➤ नन्नुक (प्रारंभिक राजधानी- कालिंजर)

265. खजुराहों के मंदिरों (1000 वर्ष पुराना) का निर्माण करवाया था

➤ चंदेल शासकों ने

266. विजय स्तंभ का निर्माण करवाया था

➤ राणा कुम्भा ने (चित्तौड़ में)

267. भारत पर प्रथम मुस्लिम आक्रमण हुआ था

➤ अरबों द्वारा (712 ई० में)

268. होयसल वंश (यादवों की एक शाखा) की राजधानी थी

➤ द्वार समुद्र

269. सोमवार मंदिर का पुननिर्माण कराया था

➤ कुमारपाल ने

270. पुलकेशिन द्वितीय पराजित हुआ था

➤ नरसिंहवर्मन प्रथम (पल्लव शासक) द्वारा

271. पाण्ड्यों का राजनीतिक एवं सांस्कृतिक केन्द्र था

➤ मदुरै

272. पंजाब के हिन्दू शाही राजवंश को स्थापित किया था

➤ कल्लर ने

273. चोल वंश का अंतिम शासक था

➤ राज राजा द्वितीय

274. मौर्य साम्राज्य में प्रचलित मुद्रा का नाम था

➤ पण

275. बिम्बिसार के समय में मगध की राजधानी थी

➤ राजगृह

276. अरबों ने भारत पर सफल आक्रमण किया था

➤ मुहम्मद बिन कासिम के नेतृत्व (712 ई०) में

277. ओदन्तपुरी विश्वविद्यालय की स्थापना की थी

➤ गोपाल ने (पालवंश के संस्थापक)

278. मंदिर निर्माण कला में विमान शैली का प्रचलन हुआ था

➤ चोल शासन काल में

279. ‘योग दर्शन’ तथा ‘सांख्य दर्शन’ के प्रवर्तक थे

➤ क्रमशः पंतजलि तथा कपिल मुनि

280. ‘न्याय दर्शन’ तथा ‘पूर्व मीमांसा दर्शन’ के प्रवर्तक थे

➤ क्रमशः गौतम तथा जैमिनी

281. ‘लिंगायत दर्शन’ के प्रवर्तक थे

➤ वासवराज

282. शुन्यवाद के प्रतिपादक है

➤ नागार्जून

283. भुवनेश्वर (उड़ीसा) में लिंगराज मंदिर का निर्माण (11वीं शदी में) करवाया था

➤ राजा ययाति केसरी ने

284. पुरी स्थित भगवान जगन्नाथ के मंदिर को बनवाया था

➤ राजा अवन्तिवर्मन ने (11वीं सदी में)

285. विख्यात तट मंदिर (मामल्लपुरम् में) को बनवाया था

➤ पल्लव शासक नरसिंह वर्मन द्वितीय ने

286. मदुरई स्थित मीनाक्षी मंदिर का निर्माण करवाया था

➤ मदुरा नरेश तिरूमल्लाई नायक ने

287. कोणार्क के सूर्य मंदिर को बनवाया था

➤ नरसिंह देव प्रथम ने (1238-64 ई० में)

288. तंजौर में वृहदेश्वर (राजराजेश्वर) मंदिर का निर्माण करवाया था

➤ राज राज-। ने

289. माउंट आबू पर्वत पर दिलवाड़ा का प्रसिद्ध जैन मंदिर को बनवाया था

➤ भीम प्रथम के सामंत (बड़ा किसान) बिमल ने

290. अष्टछाप की स्थापना की थी

➤ आचार्य विट्ठलनाथ ने

291. भारत में चिश्ती सिलसिले की शुरूआत की थी

➤ ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती ने

292. मोहम्मद साहब के जन्म पर मनाया जाने वाला पर्व है

➤ ईद-ए-मिलाद-उनवी

293. बेलूर और हेलबिड में मंदिर का निर्माण करवाया था

➤ होयसलों ने (12वीं शताब्दी में)

294. बीजापुर के गोलगुम्बज मकबरा है

➤ मोहम्मद आदिल शाह का

295. हैदराबाद स्थित चारमीनार का निर्माण करवाया था

➤ मुहम्मद कुली कुतुबशाह ने

296. पुष्टिमार्ग के दर्शन की स्थापना की थी

➤ बल्लभाचार्य ने

297. विशिष्ट द्वैत सिद्धांत के प्रतिपादक थे

➤ रामानुजम

298. अद्वैतवाद सिद्धांत तथा द्वैता द्वैतवाद सिद्धांत के प्रतिपादक थे

➤ क्रमशः श्री शंकराचार्य तथा निम्बकाचार्य

299. द्वैतवाद तथा शुद्धाद्वैत सिद्धांत के प्रतिपादक थे

➤ क्रमशः माधवाचार्य तथा बल्लभाचार्य


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6. Concept of Resources(संसाधनों की अवधारणा)

6. Concept of Resources

(संसाधनों की अवधारणा)



संसाधन का अर्थ

     प्रकृति के वे सभी पदार्थ या वस्तुएँ जो मानवजीवन की परिसंपत्ति (assets) बन जाएँ, संसाधन ( resources) कहलाती हैं। दूसरे शब्दों में, पर्यावरण के वे सारे पदार्थ जो मानवजीवन की आवश्यकताओं की पूर्ति तथा सुख-सुविधा प्रदान करने के लिए उपयोगी हों, संसाधन हैं। ये अवयव प्रकृति में विभिन्न रूपों में पाए जाते हैं।

मानव-एक संसाधन के रूप में

      मानव शरीर स्वयं भी सबसे बड़ा संसाधन है, क्योंकि इससे जीवन के अनेक कार्य किए जाते हैं; जैसे- बोझा ढोना, कार्यालय का काम आदि। मानव स्वयं ही अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अपने शरीर और अपनी विभिन्न तकनीकों का उपयोग करता है तथा प्रकृति की अन्य वस्तुओं का भी उपयोग करने के लिए अपनी कार्यात्मकता, अर्थात कार्य करने की योग्यता का विकास करता है।

        मानवीय क्रियाकलाप सर्वाधिक महत्त्व के हैं। मानव न रहे तो सारे पदार्थ या धन यों ही पड़े रह जाएँगे। अपने अनुपम साहस, अपितु दुःसाहस, पराक्रम, शौर्य, संघर्षशीलता, ज्ञान, विलक्षण प्रतिभा, जिज्ञासा और सूझ-बूझ, अन्वेषण करने की तीव्र उत्कंठा इत्यादि गुणों के कारण मनुष्य सभी प्रकार के संसाधनों में सर्वोच्च स्थान रखता है। यह स्वयं संसाधन होते हुए भी संसाधनों का उपभोक्ता भी है।

मानव-सभी प्रकार के संसाधनों के निर्माता के रूप में

        संसाधन के रूप में किसी पदार्थ का अस्तित्व उसकी उपयोगिता या उपयोगी कार्य/संक्रिया (function/operation) पर निर्भर करता है। कोई पदार्थ जब तक जीवन के लिए उपयोगी सिद्ध नहीं होता तब तक वह संसाधन नहीं कहलाता।

       छोटानागपुर पठार के खनिज भंडार का युगों तक कोई महत्त्व न था, अतः वे खनिज पदार्थ संसाधन न बन पाए। किंतु, जब खनिजों का महत्त्व समझा जाने लगा और लोगों ने अपनी कुशलता का प्रदर्शन कर उनका निष्कासन आरंभ किया तथा उपयोग करने लगा तब वे खनिज संसाधन बन गए। इन खनिजों ने छोटानागपुर क्षेत्र को आर्थिक विकास का सुअवसर प्रदान किया।

Concept of Resources

       इसी तरह, पश्चिमी घाट के पश्चिमी भाग में जोग जलप्रपात (Jog Falls) युगों तक जल की धारा बहाता रहा, किंतु जब शक्ति के विकास में उसका उपयोग जलविद्युत उत्पादन के लिए किया जाने लगा तब वह संसाधन के रूप में उभर आया।

        नदियाँ तभी संसाधन बन पाती हैं जब मानव उनका उपयोग सिंचाई में, जलविद्युत उत्पादन में, मत्स्योद्यम में, जल यातायात में और ऐसी ही अनेक आर्थिक क्रियाओं में करने लगता है। भूगोलवेत्ता जिम्मरमैन ने ठीक ही कहा था कि- “संसाधन हुआ नहीं करते, बना करते हैं।”

संसाधनों का महत्त्व

         विश्व में अनेक पदार्थ बिखरे पड़े हैं। मानव पहले उनका पता लगाता है, फिर वह अपनी बुद्धि, प्रतिभा, क्षमता, तकनीकी ज्ञान और कुशलता अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए, अपने आर्थिक विकास के लिए, उनके उपयोग की योजना बनाता है और उनका उपयोग करता है।

         उपयोग में लाकर ही वह उन्हें संसाधन बना पाता है। मनुष्य के आर्थिक विकास के लिए संसाधनों की उपलब्धि अत्यावश्यक है। संसाधनों का महत्त्व इसी तथ्य से स्पष्ट होता है कि इनकी खोज और प्राप्ति के लिए ही मनुष्य कठिन से कठिन परिश्रम करता है। दुर्गम मार्गों पर चलकर दुःसाहसिक यात्राएँ करता है। विश्व के प्रायः सभी युद्ध इन्हीं संसाधनों को पाने या छीनने के लिए हुए हैं।

संसाधनों की परिभाषा

        संसाधन को कई रूपों में पारिभाषित किया जा सकता है। मनुष्य अपने जीवन को सुखद-समृद्ध बनाने तथा अपने आर्थिक विकास के लिए जिन वस्तुओं का उपयोग करता है, उनका निर्माण कुछ मूलभूत पदार्थों से होता है। इन मूलभूत पदार्थों को संसाधन कहते हैं।

        हमारे वातावरण में विद्यमान वे सभी पदार्थ जो हमें उपलब्ध हो तथा हमारे जीवन की विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति कर सके, वे केवल उसी स्थिति में संसाधन कहे जा सकते हैं जब हमें उन तक पहुँचने की तकनीक ज्ञात हो साथ ही, उनके परिष्करण और परिवर्द्धन के विभिन्न स्तरों पर होनेवाले खर्चे के लिए हमारे पास पर्याप्त धन हो, श्रमशक्ति हो तथा उनके उपयोग करने पर भी हमारी संस्कृति और परंपरा अक्षुण्ण रह सके।

        वस्तुतः, व्यापक रूप से मनुष्य की इच्छाओं और आवश्यकताओं की पूर्ति करनेवाले सभी पदार्थ संसाधन कहे जा सकते हैं। मनुष्य अपनी व्यापक समझ और सूझ-बूझ से अपने तथा विश्व के वातावरण को बिना प्रभावित किए जिन प्रकृतिप्रदत्त वस्तुओं का उपयोग और उपभोग करता है तथा प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाए रखता है उन्हें ही मूलरूप से संसाधन कहा जाता है।

         कोई गायक, चित्रकार या साहित्यकार अपने क्रियाकलाप से धन कमाता है तो ये कार्य भी संसाधन कहलाते हैं।

संसाधनों का वर्गीकरण

         संसाधनों का वर्गीकरण विभिन्न दृष्टिकोणों से किया जाता है। कुछ वर्गीकरण निम्नलिखित हैं:-

(क) उपलब्धता के आधार पर प्रकृतिप्रदत्त और मानवकृत,

(ख) स्रोत या उत्पत्ति के आधार पर जैविक और अजैविक,

(ग) पुनः प्राप्ति के आधार पर नवीकरणीय और अनवीकरणीय,

(घ) स्वामित्व के आधार पर निजी, सामुदायिक, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय,

(ङ) विकास के स्तर के आधार पर- संभाव्य, ज्ञात, भंडारित और संचित,

(क) प्रकृतिप्रदत्त और मानवकृत संसाधन:-

       प्रकृति में उपस्थित पदार्थों के साथ ही जलवायु, उच्चावच जैसी भौगोलिक परिस्थितियाँ जो मनुष्य के क्रियाकलापों पर व्यापक प्रभाव डालती है, उन्हें प्रकृतिप्रदत्त या प्राकृतिक संसाधन कहा जाता है। परंतु, केवल उसी स्थिति में जब उन्हें प्राप्त करने और परिष्कृत एवं परिवर्द्धित करने की व्यापक तकनीक उपलब्ध हो तथा उन्हें उपयोगी बनाने हेतु की जानेवाली विभिन्न प्रक्रियाओं के अंतर्गत होनेवाले खर्च को वहन करने के लिए समुचित धन जुटाने की क्षमता हो।

       इसी प्रकार, भवन, सड़कें, रेल लाइनें, विभिन्न प्रकार के निर्मित सामान तथा शिक्षण-प्रशिक्षण, खोज और विकास की विभिन्न संस्थाएँ मानवकृत संसाधन कहलाते हैं।

        व्यावहारिक रूप में प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग मानवीय क्रियाकलापों के प्रथम चरण में किया जाता है, जिसके उपरांत द्वितीयक, तृतीयक और चतुर्थ कोटि के क्रियाकलापों में मुख्यतः मानवकृत संसाधनों का उपयोग किया जाता है।

(ख) जैविक और अजैविक संसाधन:-

        जीवमंडल में विद्यमान और उससे प्राप्त होनेवाले विभिन्न प्रकार के जीव जैसे पक्षी, मछलियाँ, पेड़-पौधे और स्वयं मानव भी जैविक संसाधन कहे जाते हैं। जीव जगत के जीवित सदस्यों में संतानोत्पत्ति की क्षमता होती है। अनुकूल प्राकृतिक परिस्थतियों में ये नई संतानों को उत्पन्न करते रहते हैं। अतः, सभी जैविक संसाधन नवीकरणीय संसाधन होते हैं।

      इसी प्रकार, वातावरण में उपस्थित सभी प्रकार के निर्जीव पदार्थ; जैसे- खनिज, चट्टानें, मिट्टी, नदियाँ, पर्वत इत्यादि अजैविक संसाधन कहे जाते हैं।

(ग) नवीकरणीय और अनवीकरणीय संसाधन:-

           वातावरण में उपलब्ध सूर्य का प्रकाश, हवा, तालाब, झीलें, नदियाँ और समुद्र, मछलियाँ, पेड़-पौधे, उनपर बसेरा लगाए हुए पक्षी एवं वन्य जीव सभी नवीकरणीय संसाधन कहलाते हैं, क्योंकि या तो वे प्राकृतिक रूप से स्वतः उपलब्ध होते हैं या विभिन्न प्रकार की प्राकृतिक, भौतिक, रासायनिक या जैविक प्रक्रियाओं द्वारा उत्पन्न होते रहते हैं। इनमें से वन और वन्य जीव-जंतु, तालाबों और समुद्रों में एकत्रित जल हमेशा उपलब्ध होते हैं। अतः, इन्हें सतत उपलब्ध संसाधन कहते हैं।

        सूर्य का प्रकाश वर्ष के कुछ दिनों में प्रचुर मात्रा में मिलता है जबकि वर्षाकाल या अन्य कारणों से कुछ दिनों तक या तो कम उपलब्ध होता है अथवा उसकी तीव्रता कम रहती है। इसी प्रकार, नदियों में बहता जल वर्षाऋतु में बाहर निकलकर बाढ़ के रूप में अभिशाप बन जाता है और संसाधन के रूप में नहीं रह पाता है। हवा भी समान गति से उपलब्ध नहीं रहती और आँधी-तूफान में यह लाभप्रद होने के स्थान पर हानिकारक हो जाती है। इन प्रकार के संसाधनों को प्रवहनीय संसाधन कहते हैं।

         कोयला और पेट्रोलियम लाखों वर्षों की जटिल जैव-रासायनिक तथा अन्य भौतिक-रासायनिक प्रक्रियाओं के फलस्वरूप बने है और पृथ्वी के अंदर उनका भंडार जहाँ-तहाँ जमा हो गया है।

         धात्विक खनिजों के साथ भी यही स्थिति है। इनका संचित भंडार सीमित है तथा इन्हें अल्पकाल में कृत्रिम रूप से पुनः बनाना प्रायः असंभव है, अर्थात एक बार इनके समाप्त हो जाने के बाद पुनः इन्हें प्राप्त करना संभव नहीं। ऐसे संसाधनों को अनवीकरणीय संसाधन कहा जाता है।

          कुछ धातुओं को बार-बार पिघलाकर शोधित करके प्रयोग किया जा सकता है, अर्थात इनका चक्रीकरण हो सकता है जबकि कोयले और तेल को जला देने पर प्राप्त राख से कोयला एवं तेल नहीं बन सकता। इनका उपयोग केवल पुनः एक ही बार हो सकता है। इन्हें अचक्रीय संसाधन कहते हैं।

(घ) निजी, सामुदायिक, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संसाधन:-

       स्वामित्व के आधार पर संसाधन निजी, सामुदायिक, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय होते हैं। इनका विवरण निम्नलिखित है-

(i) निजी संसाधन-

        उपयोग की अनेक वस्तुएँ; जैसे- कृषि भूमि, उद्यान, मकान, कार, मोटर साइकिल, मोबाइल फोन इत्यादि निजी संसाधन हैं। इनका स्वामी अपनी इच्छानुसार इनका किसी प्रकार से किसी भी समय उपयोग करने के लिए स्वतंत्र होता है।

(ii) सामुदायिक संसाधन-

       सामुदायिक संसाधन वे संसाधन हैं जिनका उपयोग समुदाय, गाँव और नगर के सभी लोगों के लिए सुलभ हो। गाँवों में चरागाह, खेल के मैदान, तालाब, श्मशान भूमि, साप्ताहिक बाजारों की भूमि, पंचायत भवन, विद्यालय, पर्यटन स्थल इत्यादि सामुदायिक संसाधन हैं।

(iii) राष्ट्रीय संसाधन-

        वैधानिक रूप से किसी राज्य या देश की सीमा के अंदर सभी प्रकार के संसाधनों पर उस राज्य या देश का स्वामित्व होता है। कृषि भूमि को निजी माना जा सकता है, क्योंकि सरकार के द्वारा इसपर खेती करने अथवा निजी उपयोग के लिए किसानों और उपभोक्ताओं को अधिकृत किया गया है जिसके बदले उनसे लगान अथवा अन्य कर लिए जाते हैं।

         प्राचीनकाल में राजाओं को राज्य की संपत्ति का स्वामी माना जाता था। वर्तमान काल में यह अधिकार सरकार के पास है, इसीलिए आवश्यकता पड़ने पर सरकार द्वारा सड़क या रेल लाइन बिछाने, नहरों और कारखानों के निर्माण इत्यादि कार्य के लिए किसी भी भूमि का अधिग्रहण कर लिया जाता है। इसके बदले सरकार कुछ मुआवजा राशि भी देती है तथा विस्थापितों के पुनर्वास का प्रबंध किया जाता है, क्योंकि नागरिकों को यह सुविधा प्रदान करना सरकार का प्रमुख उत्तरदायित्व भी है। सागरतटों के पास 12 समुद्री मील, अर्थात 19.2 किलोमीटर तक के महासागरीय क्षेत्र में पाए जानेवाले संसाधन भी देश की संपत्ति हैं।

(iv) अंतरराष्ट्रीय संसाधन-

       पृथ्वी के अधिकांश भाग में सागर और महासागर हैं। यथार्थ में मात्र 29 प्रतिशत भूतल ही विभिन्न राष्ट्रों की राष्ट्रीय संपत्ति है और शेष 71 प्रतिशत भाग किसी की अपनी संपत्ति नहीं है। ज्ञातव्य है कि जलीय जीवों के साथ ही विभिन्न संसाधनों का विपुल भंडार इन समुद्रों में विद्यमान है। इनके उपयोग के लिए कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ हैं। अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार, सागरतट से 200 किलोमीटर तक के महासागरीय क्षेत्र को किसी देश का अपवर्जक आर्थिक क्षेत्र माना जाता है जहाँ से मछलियाँ पकड़ने तथा भूतल से धातुएँ एवं अन्य वस्तुएँ प्राप्त करने का उसे अधिकार है, परंतु अन्य देशों के जहाजों के परिवहन अथवा अन्य उपयोगों की भी स्वतंत्रता रहती है।

(ङ) संभाव्य, ज्ञात, भंडारित और संचित संसाधन-

       विकास के स्तर के आधार पर संसाधनों की निम्नलिखित चार श्रेणियाँ होती हैं-

(i) संभाव्य संसाधन-

       ऐसे सभी संसाधन जिनका उपयोग किया जा सके, भले ही उचित तकनीक, अर्थाभाव या अन्य किसी कारण से उनका उपयोग नहीं होता हो, संभाव्य संसाधन कहे जाते हैं। उदाहरणस्वरूप, भारत में पेट्रोलियम मिलने की संभावना पूर्वी और पश्चिमी तटों के साथ ही असम, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान इत्यादि अनेक स्थानों पर है, परंतु केवल असम तथा पश्चिमी घाट के पास से लगभग 20 प्रतिशत पेट्रोलियम निकाला जा सका है।

        इसी प्रकार, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, सागरीय ज्वार ऊर्जा इत्यादि के लिए भारत में अपार संभावना है, परंतु कुछ ही स्थानों पर इनका उपयोग हो पाता है सस्ती, सुगम तकनीक के विकास से इनके उपयोग की बड़ी संभावना है अन्वेषण या सर्वे (survey) विभाग द्वारा इनकी खोज की जाती है।

(ii) ज्ञात संसाधन-

        जिन संसाधनों को ढूंढकर उनका उपयोग किया जाता हो उन्हें ज्ञात संसाधन कहते हैं, जैसे असम, बॉम्बे हाई. गुजरात के तेल कूपों से पेट्रोलियम निकाला जा रहा है। ज्ञात संसाधन वे संसाधन है जिनकी तकनीक विकसित हो चुकी हो तथा सार्थक उपयोग ज्ञात हो।

(iii) भंडारित संसाधन-

      विकसित देशों ने ऐसी तकनीकों की खोज की है जिनसे पृथ्वी के अंदर उपस्थित खनिजों की पहचान संभव हो सकी है। विकसित देश कई किलोमीटर गहराई तक भूतल को भेदकर खनिज निकालते हैं जबकि भारत जैसे विकासशील देश एक किलोमीटर से अधिक गहराई तक नहीं खोद पाते। अविकसित देशों में तो इतना भी उपयोग नहीं हो पाता।

      अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका की नदियों की विपुल जल राशि व्यर्थ बहकर समुद्र में गिरती है, परंतु अपार संभावनाओं के बाद भी तकनीक और धन के अभाव में जलविद्युत का उत्पादन नहीं हो पाता। यह संसाधन भंडारित नहीं हो पाता है। वस्तुतः इसके विकास से ही अर्थव्यवस्था में व्यापक परिवर्तन संभव है।

(iv) संचित संसाधन-

       कुछ संसाधन जिनके उपयोग करने की तकनीक ज्ञात हो, परंतु और सस्ती तकनीक के अभाव अथवा अन्य कारणों से उनका उपयोग वर्तमान में न होता हो तथा भविष्य में उपयोग करना संभव हो, उन्हें संचित संसाधन कहते हैं। अमेरिका के तटीय प्रदेशों में पेट्रोलियम का प्रचुर भंडार है, परंतु वह खाड़ी या अन्य देशों के पेट्रोलियम का उपयोग करता है। इन भंडारों के समाप्त होने पर ही अपने संचित भंडारों का उपयोग करेगा।

        इसी प्रकार, हाइड्रोजन गैस सर्वोत्तम ईंधन है और इसे पानी से प्राप्त किया जा सकता है। पानी नदी, तालाब और समुद्रों में आसानी से बड़ी मात्रा में उपलब्ध भी है। फिर भी, इसका उपयोग सीमित मात्रा में ही होता है, क्योंकि इसे पानी से अलग करना कुछ कठिन है। परंतु, पेट्रोलियम के सीमित भंडार के समाप्त होने पर एकमात्र हाइड्रोजन ईंधन ही ऊर्जा का प्रमुख साधन होगा। अभी इसे भंडारित संसाधन भी कहा जा सकता है और संचित भी।

         प्रायः, संचित भंडार के कुछ भाग को ज्ञात तकनीक द्वारा उपयोग में लाया जाता है और शेष भाग को भावी पीढ़ी के लिए सुरक्षित रखा जाता है। सिंचाई के लिए नदियों से नहरें निकाली जाती है, परंतु बरसात के दिनों में इनका उपयोग नहीं होता। खेतो में वर्षा जल प्राप्त होता रहता है। इस समय नहरों में जमा जल संचित भंडार है जिसका उपयोग वर्षा के बाद सिंचाई के लिए किया जाता है।

30. Interpretation of Topographical Maps (स्थलाकृतिक मानचित्र का प्रदर्शन)

Interpretation of Topographical Maps

(स्थलाकृतिक मानचित्र का प्रदर्शन)



स्थलाकृतिक मानचित्र का अर्थ:-

         स्थलाकृतिक मानचित्र पृथ्वी की सतह पर दिखाई देने वाली विशेषताओं के विस्तृत चित्रमय एवं सटीक प्रतिनिधित्व को संदर्भित करता है। ये समतल तथा भूगणितीय सर्वेक्षणों पर आधारित ऐसे बहु-उद्देशीय मानचित्र होते हैं जिन्हें वृहत् मापक या मापनी (Large Scale) पर बनाया जाता है। इन्हें सामान्य उपयोग वाले मानचित्र भी कहा जाता है।

    इन मानचित्रों पर प्राकृतिक व सांस्कृतिक विवरण या लक्षणों जैसे- उच्चावच, धरातल, जल-प्रवाह, जलाशय, वनस्पति, गाँव, नगर, सड़कें, नहरें, रेल लाइनें पूजा स्थल आदि को देखा जा सकता है। मानचित्रों पर इन सभी विवरणों को रूढ़ चिह्नों एवं प्रतीकों द्वारा प्रदर्शित किया जाता हैं।

   अर्थात् स्थलाकृतिक मानचित्र ऐसे मानचित्र है जो भौगोलिक विशेषताओं के स्थानों का प्रतिनिधित्व करते है। ये भौगोलिक विशेषताएँ पहाड़, घाटियाँ, मैदानी सतह, जल निकाय और बहुत कुछ हो सकती हैं। अतः स्थलाकृतिक मानचित्र बड़े और मध्यम पैमाने के मानचित्रों को संदर्भित करते हैं जिनमें विभिन्न प्रकार की जानकारी शामिल होती है।

       स्थलाकृतिक मानचित्र के सभी घटक समान महत्व रखते हैं। किसी विशेष सतह के व्यापक विश्लेषण के कारण ये मानचित्र भू-विज्ञान के क्षेत्र का एक अनिवार्य हिस्सा या भाग हैं। ये मानचित्र सभी देशों की राष्ट्रीय मानचित्र संगठनों द्वारा तैयार एवं प्रकाशित किए जाते हैं।

        उदाहरण के लिए भारतीय सर्वेक्षण विभाग, भारत में, पूरे देश के लिए स्थलाकृतिक मानचित्र तैयार करता है। भारत में स्थलाकृतिक मानचित्र दो श्रृंखलाओं में तैयार किए जाते हैं- भारत एवं पडोसी देशों की श्रृंखला एवं विश्व के अंतर्राष्ट्रीय मानचित्रों की श्रृंखला।

स्थलाकृतिक मानचित्र को परिभाषित करते हुए फिलिस डिन्क महोदय ने लिखा है- “स्थलाकृतिक मानचित्र दीर्घमापक मानचित्र हैं किन्तु इनका आकार भू-मानचित्रों से छोटा होता है। चूंकि इनका आकार बड़ा होता है अतः ये प्राकृतिक एवं मानव द्वारा निर्मित विभिन्न लक्षणों, जैसे- पर्वतों, नदियों, जंगलों, नगरों, गाँवों, सड़कों, रेलों व नहरों आदि को प्रदर्शित करते हैं। ये मानचित्र यात्री व मोटर चालकों, युद्ध भूमि में सैनिकों तथा किसी क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्ययन में भूगोलवेत्ताओं के लिए गाइड का कार्य करते हैं।

जोन बाइगोट के अनुसार, “स्थलाकृतिक मानचित्र सूक्ष्म सर्वेक्षण पर आधारित वृहद् मापक मानचित्र होते है जिनमें प्राकृतिक एवं मानव निर्मित विभिन्न लक्षणों को विस्तार से प्रदर्शित किया जाता है।”

इरविन रेज के अनुसार, “वृहद् एवं मध्यवर्ती मापनी पर बने सामान्य मानचित्र जिनमें उच्चावच सहित सभी महत्त्वपूर्ण लक्षणों को प्रदर्शित किया जाता है, स्थलाकृतिक मानचित्र कहलाते हैं।”

 भारतीय सर्वेक्षण विभाग द्वारा प्रकाशित मानचित्र एवं धरातल पत्रक

         भारतीय सर्वेक्षण विभाग (देहरादून) द्वारा प्रकाशित मानचित्र एवं धरातल पत्रक के निम्न प्रकार हैं-

(1) भारत एवं निकटवर्ती देशों की श्रृंखला (India and adjacent Countries)

       इस श्रृंखला के मानचित्रों का मापक भी 1:1,000,000 है। इस मापक पर ही भारत और उसके समीपवर्ती देशों के मानचित्र बनाए जाते है। इसमें प्रत्येक मानचित्र का विस्तार 4° अक्षांश तथा 4° देशान्तर है। अतः 4° उत्तरी अक्षांश से 40° उत्तरी अक्षांश तक तथा 44° पूर्वी देशान्तर से 104° पूर्वी देशान्तर के मध्य स्थित क्षेत्र को शामिल किया गया है।

       इसमें सम्पूर्ण भारतीय उपमहाद्वीप जैसे- अफगानिस्तान, पाकिस्तान, भारत, श्रीलंका, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश एवं म्यामार और मध्य पूर्व के देश थाईलैण्ड, वियतनाम, कम्बोडिया, तिब्बत, कैस्पियन सागर का दक्षिणी भाग, तुर्कमिनिस्तान, उज्बेकिस्तान, तजाकिस्तान, किर्गिजस्तान देश शामिल हैं। इस सम्पूर्ण क्षेत्र को 4×4 के कुल 106 भागों में विभाजित किया गया है। इनमें से प्रत्येक क्षेत्र को संख्या में 1 से 106 तक क्रमशः दिया गया है।

       भारतीय क्षेत्र 40 से 92 के बीच क्रम संख्या में पाए जाते हैं। ये संख्याएँ सूचक संख्याएँ (Index Number) कहलाती है। उदाहरण के लिए, 47 व 43 सूचकांक मुम्बई व श्री नगर के पत्रकों के नाम से जाना जाता है। यह श्रृंखला वर्तमान में प्रकाशित नही होती है, परन्तु यह भारत में छपने वाली अन्य सभी श्रृंखलाओं का आधार है। इस श्रृंखला का प्रत्येक मानचित्र 4 डिग्री शीट या एक मिलियन शीट कहलाता है।

Interpretation of Topo

(2) अन्तर्राष्ट्रीय श्रृंखला (International Series):-

      भारतीय सर्वेक्षण विभाग, अन्तर्राष्ट्रीय समिति 1909 के समझौते के अनुसार अब अन्तर्राष्ट्रीय श्रृंखला का प्रकाशन करता है। इस श्रृंखला के मानचित्र 1:1,000,000 मापक पर बनाए जाते हैं। 60° उत्तरी व 60° दक्षिणी अक्षांशों के मध्य स्थित क्षेत्रों के प्रत्येक मानचित्र का विस्तार 4° अक्षांश तथा 6° देशान्तर है। इस क्षेत्र हेतु 1800 शीटे तैयार की गयी है।

         60° अक्षांश-88° अक्षांश के मध्य स्थित क्षेत्र की 4° अक्षांश तथा 12° देशान्तर विस्तार की 420 सीटे हैं। इसके अतिरिक्त दो अर्धव्यास वाले 2 मानचित्र ध्रुवीय क्षेत्रों के हैं। सम्पूर्ण विश्व के लिए 2222 शीट इस श्रृंखला में हैं। इस श्रृंखला की प्रत्येक शीट एक मिलियन शीट कहलाती है।

स्थलाकृतिक शीट के प्रकार

       भारतीय सर्वेक्षण विभाग के स्थलाकृतिक अंशचित्रों का अंकन ‘भारत एवं निकटवर्ती देशों की श्रृंखला’ (India and Adjacent Countries Series) पर आधारित है।

स्थलाकृतिक 

         मानचित्र के पैमाने के आधार पर स्थलाकृतिक शीटों को निम्नलिखित प्रकारों में वर्गीकृत किया गया है।

1. 4×4 डिग्री या मिलियन शीट 

          इस श्रृंखला के सभी मानचित्र 1:1,000,000 मापनी (1 इंच=16 मील) पर तैयार किए गए हैं। इनमें से प्रत्येक मानचित्र 4° अक्षांश व 4° देशांतर (4° x 4°) के बीच स्थित क्षेत्र को प्रदर्शित करता है।

        पहचान के लिए प्रत्येक 1 मिलियन मानचित्र पर उसकी सूचक संख्या (Index Number) जैसे- 51, 52, 53, 54 आदि लिखी होती है। प्रत्येक मिलियन मानचित्र को 16 चौथाई इंच (1″ = 4 मील) अंशचित्रों में, प्रत्येक चौथाई इंच अंशचित्रों को 4 आधा इंच (1″ = 2 मील) अंशचित्रों में तथा प्रत्येक आधा इंच अंशचित्रों को 4 एक इंच (1″ = 1 मील) अंशचित्रों में विभाजित किया गया है।

चित्र: मिलियन शीट या चार डिग्री शीट

नोट: कभी-कभी किसी शीट का नामकरण उस शीट में अंकित प्रमुख नगर के नाम पर किया जाता है। जैसे 43, 47, 53, 57, 72 सूचकांक वाली शीटों को क्रमशः श्रीनगर शीट, बम्बई शीट, दिल्ली शीट, मद्रास शीट एवं पटना के नाम से भी जाना जाता है।

⇒ समोच्च अंतराल 500 मीटर है।

⇒ चूंकि, इन मानचित्रों में विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है, इसलिए टोपो शीट के रूप में इसका प्रकाशन बंद कर दिया गया है।

2. एक डिग्री शीट (Degree Sheet):

        किसी 1 इंच = 16 मील मापनी वाले मानचित्र को 1 इंच = 4 मील मापनी वाले 16 अंशचित्रों में विभाजित करने पर, प्रत्येक अंश चित्र 1° अक्षांश x 1° देशांतर क्षेत्र को प्रदर्शित करता है। अतः इन अंशचित्रों को चौथाई इंच शीट कहा जाता है। डिग्री शीटों को सूचित करने के लिए A से P तक के 16 अक्षरों का प्रयोग किया जाता है। इसका R.F. 1:250000 होता है।

एक डिग्री शीट

चित्र: एक डिग्री शीट

     किसी डिग्री शीट का नामकरण करने के लिए उस शीट के अंग्रेजी अक्षर को संबंधित 1 मिलियन मानचित्र की सूचक संख्या के बाद लिख दिया जाता है। जैसे- 53A, 53B, 53C 53P.

⇒ समोच्च अंतराल 250 मीटर है।

3. आधा डिग्री शीट (Half Degree Sheet):-

      इसके अंतर्गत किसी डिग्री शीट को चार आधा डिग्री शीटों में विभाजित किया जाता है। इस शीट की मापनी 1 इंच = 2 मील होती है। अतः इसे आधा इंच शीट भी कहा जाता है। इसका R.F. 1:100000 होता है। इसका विस्तार 30° अक्षांश x 30° देशांतर होता है।

      प्रत्येक आधा इंच शीट की सूचक संख्या में उसकी दिशा के साथ-साथ संबंधित 1 मिलियन की सूचक संख्या व डिग्री शीट का अंग्रेजी अक्षर लिखा जाता है। जैसे : 53 A/NE, 53 A/SE, 53 A/SW, 53 A/NW। अत: यदि किसी शीट की सूचक संख्या 53 A/NE है, तो इसका अर्थ है कि वह शीट 53 सूचक संख्या वाले 1 मिलियन के A अक्षर वाले डिग्री शीट का NE भाग सूचित करता है।

⇒ इसका समोच्च अंतराल 100 मीटर है।

चित्र: आधा डिग्री शीट

4. चौथाई डिग्री शीट (Quarter Degree Sheet):-

    इसके अंतर्गत किसी डिग्री शीट को 16 चौथाई डिग्री शीटों में विभाजित किया जाता है। इस शीट की मापनी 1 इंच = 1 मील होती है। अतः इसे एक इंच शीट भी कहा जाता है। इसका विस्तार चौथाई डिग्री (15′ अक्षांश x 15′ देशांतर) होता है। इसका R.F. 1 : 50,000 होता है।

       इस प्रकार किसी 1 मिलियन मानचित्र में 256 डिग्री शीट में 16 तथा आधा डिग्री शीट में 4 एक इंच शीटें होती हैं। किसी एक इंच शीट की सूचक संख्या को उस शीट की संबंधित डिग्री शीट में क्रमांक संख्या के अनुसार निश्चित किया जाता है। जैसे – 53 A/1, 53 A/2, ……..453A/16।

⇒ इसका समोच्च अंतराल 50 मीटर है।

चित्र: चौथाई डिग्री शीट

            इस प्रकार  तीनों एक साथ देखा जा सकता है-

5. नई श्रृंखला टोपो शीट्स:-

            टोपो शीट की यह श्रृंखला चौथाई डिग्री टोपो शीट के भीतर 1/8° अक्षांश (7.5 मिनट) और 1/8° देशांतर (7.5 मिनट) तक फैले क्षेत्र को कवर करती है। जब चौथाई डिग्री शीट को 4 बराबर भागों में विभाजित किया जाता है, तो हमें बहुत सारी जानकारी के साथ बहुत बड़े पैमाने की टोपो शीट मिलती हैं। इन्हें 53A 1/NE, 53A 1/NW, 53A 1/SE, और 53A 1/SW क्रमांकित किया गया है। इसका स्केल 1:25000 है।

⇒ उद्देश्य और क्षेत्र के आधार पर इसका समोच्च अंतराल 5-20 मीटर के बीच होता है। उदाहरण के लिए, पहाड़ी क्षेत्र की ऊँचाई अधिक है और समोच्च अंतराल थोड़ा बड़ा होना चाहिए। जबकि मैदानी क्षेत्रों में समोच्च अंतराल छोटा होना चाहिए।


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