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अध्याय-9 मानव पर्यावरण अंतःक्रिया : थार प्रदेश में जन-जीवन

बिहार बोर्ड वर्ग-7 वाँ भूगोल प्रश्नोत्तर 

अध्याय-9 मानव पर्यावरण अंतःक्रिया : थार प्रदेश में जन-जीवन


अध्याय-9 मानव पर्यावरण अंतःक्रिया : थार प्रदेश में जन-जीवन

अभ्यास के प्रश्नोत्तर

i. सही विकल्प पर सही (✓) का चिह्न लगाएँ।

1. थार का रेगिस्तान फैला है-
(क) गुजरात-महाराष्ट्र
(ख) गुजरात-राजस्थान
(ग) पंजाब-राजस्थान
(घ) राजस्थान-मध्यप्रदेश
उत्तर- (ख) गुजरात-राजस्थान

2. साफा कहते हैं-
(क) सफाई वाले कपड़े को
(ख) पूरी आस्तीन वाली कमीज को
(ग) सिर पर बाँधने वाली पगड़ी को
(घ) कमर में बांधने वाला कपड़ा
उत्तर- (ग) सिर पर बाँधने वाली पगड़ी को

3. थार प्रदेश में पाये जाने वाले खनिज हैं-
(क) संगमरमर-अभ्रक
(ख) बॉक्साइट-संगमरमर
(ग) संगमरमर-जिप्सम
(घ) संगमरमर-कोयला
उत्तर- (ग) संगमरमर-जिप्सम

4. नखलिस्तान का अर्थ है-
(क) एक बहुत छोटा प्रदेश
(ख) ठंड वायु का क्षेत्र
(ग) रेगिस्तान में हरियाली व जल वाला क्षेत्र
(घ) राजस्थान-मध्यप्रदेश
उत्तर- (ग) रेगिस्तान में हरियाली व जल वाला क्षेत्र (मरूद्यान)

ii. खाली जगहों को भरिए-

(1) भारत के पश्चिमी भाग में थार का रेगिस्तान है।

(2) रेगिस्तान का जहाज ऊँट कहलाता है।

(3) राजस्थान नहर सतजल नदी पर बनाया गया बांध है।

नोट : राजस्थान नहर को इन्दिरा गाँधी नहर भी कहा जाता है। 

(4) बीकानेर,जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर थार रेगिस्तान का मुख्य शहर है।

iii. निम्न प्रश्नों के उत्तर दें-

(1) थार प्रदेश में जनसंख्या कम क्यों है?
उत्तर- थार प्रदेश में जनसंख्या इसलिए कम है क्योंकि वहाँ का जीवन बहुत ही संघर्षपूर्ण है। जीवन-यापन के साधनों का अभाव है। सड़कों की कमी से यात्रा करना कठिन है। दिन में काफी गर्म तथा रात में भारी ठंड झेलना पड़ता है।

(2) आपके प्रदेश के जनजीवन और थार प्रदेश के जनजीवन में अंतरों की सूची बनाइए।
उत्तर- हमारे प्रदेश के जनजीवन और थार प्रदेश के जनजीवन में अंतरों की सूची निम्नलिखित है-

हमारे प्रदेश का जन-जीवन-

⇒ केवल गर्मी के मौसम में ही गर्मी पड़ती है।

⇒ केवल जाड़े में रात में जाड़ा पड़ता है।

⇒ वर्षा ऋतु में सामान्य वर्षा होती है।

⇒ हर प्रकार का वाहन मिलता है।

⇒ पानी की कोई किल्लत नहीं है।

⇒ हर तरह के अन्न की प्रमुखता है।

थार प्रदेश का जन-जीवन-

⇒ सालों भर गर्मी पड़ती है।

⇒ सालों भर रात में जाड़ा पड़ता है।

⇒ वर्षा नहीं के बराबर होती है।

⇒ केवल ऊँट ही वाहन है।

⇒ पानी की भारी किल्लत है।

⇒ केवल बाजरे की प्रमुखता है।

(3) थार प्रदेश में जल की उपलब्धता कैसे बढ़ाई जा सकती है?
उत्तर- पक्का टैंक बनाकर वर्षा के जल को एकत्र किया जा सकता है। वर्षा ऋतु में जो भी वर्षा हो, पूरे गाँव के वर्षा जल को इसमें एकत्र किया जाय। यह जल पीने से लेकर सिंचाई के काम में भी आ सकता है।

(4) थार प्रदेश में बहने वाली नदियों में पानी कैसे बढ़ सकता है?
उत्तरे- नदियाँ प्राकृतिक होती हैं। वह भी राजस्थान की नदियाँ शुष्क है। अतः नदियों में पानी बढ़ाना कठिन है हाँ, उसके स्थान पर इन्दिरा नहर से उप-नहरों की संख्या बढ़ाकर नदियों की कमी दूर की जा सकती है।

(5) यातायात, सुरक्षा, खानपान के लिए ऊँट जीवन रेखा है कैसे? अपने प्रदेश के ऐसे किसी उपयोगी जानवर के बारे में बताएँ।
उत्तर- थार प्रदेश के ऊँट ही मुख्य सवारी है। यातायात के लिये यही एकमात्र साधन है। बालू पर दूसरी सवारी चल भी नहीं सकती। यह क्षेत्र पाकिस्तान सीमा पर अवस्थित है, अतः सुरक्षा की अति आवश्यकता है, कम-से-कम बार्डर सिक्युरिटी फोर्स के लिए भी ऊँट का ही उपयोग करते हैं। ऊँटनी का दूध ही यहाँ मिलता है। उसी के दूध से चाय बनती है। खोवा, पनीर सब ऊँटनी के दूध से ही बनते हैं। इस प्रकार हम देखते हैं कि यातायात, सुरक्षा, खानपान के लिए ऊँट ही जीवन रेखा है।

       हमारे प्रदेश बिहार में ऐसी बात नहीं है। यातायात के लिए घोड़ा समेत अनेक साधन मौजूद है। सुरक्षा के लिए उत्तर नेपाल की सीमा पर घोड़ा और जीप का उपयोग होता है। दूध के लिए बकरी, गाय और भैंस बहुतायत में उपलब्ध हैं।

iv. क्रियाकलाप-

(1) नखलिस्तान का मॉडल या चित्र बनाइए।

उत्तर-

(2)  रवि को रेगिस्तानी देश ‘थार’ में जाने के लिए किन आवश्यक चीजों को ले जाना होगा ? सूची बनाइये और कारण भी लिखिये।
उत्तर- ‘थार’ में जाने के लिये निम्नलिखित वस्तुएँ साथ ले जाना चाहिए-

⇒ रात में ओढ़ने के लिये कंबल।

⇒ पहनने के लिये काफी कपड़े।

⇒ खाने के तैयार समान, जैसे- बिस्कुट, पावरोटी, मक्खन।

⇒ एक बड़ा थर्मस तथा एक गिलास।

⇒ थार क्षेत्र का नक्शा।


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अध्याय-8 मानव पर्यावरण अंतःक्रिया : लद्दाख प्रदेश में जन-जीवन

बिहार बोर्ड वर्ग-7 वाँ भूगोल प्रश्नोत्तर 

अध्याय-8 मानव पर्यावरण अंतःक्रिया : लद्दाख प्रदेश में जन-जीवन


अध्याय-8 मानव पर्यावरण अंतःक्रिया : लद्दाख प्रदेश में जन-जीवन

मानव पर्यावरण अंतःक्रिया

अभ्यास के प्रश्नोत्तर

i. सही विकल्प पर सही (✓) का चिह्न लगाएँ:

(i) लद्दाख की जलवायु शुष्क है, क्योंकि लद्दाख का-
(क) ऊँचाई पर होना
(ख) वनस्पतियों का न होना
(ग) हिमालय की वृष्टि-छाया में होना
(घ) नीचाई पर होना
उत्तर- (क) ऊँचाई पर होना

(ii) लद्दाख में पाया जाने वाला महत्त्वपूर्ण जानवर है-
(क) पांडा
(ख) जंगली भैंसा
(ग) याक
(घ) शेर
उत्तर- (ग) याक

(iii) कश्मीर से लद्दाख होते हुए तिब्बत को जोड़ता है-
(क) रोहतांग दर्रा
(ख) काराकोरम दर्रा
(ग) जोजीला दर्रा
(घ) नापूला दर्रा
उत्तर- (ख) काराकोरम दर्रा

(iv) लद्दाख में बहने वाली नदियाँ हैं:
(क) सिंधु-नर्मदा
(ख) सिंधु-श्योक
(ग) सिंधु-गंगा
(घ) सिन्धु-चिनाव
उत्तर- (ख) सिंधु-श्योक

अध्याय-8 मानव पर्यावरण अंतःक्रिया : लद्दाख प्रदेश में जन-जीवन

ii. खाली जगहों को भरिए-

(1) खा-पा-चान का अर्थ है हिम भूमि।

(2) लद्दाख क्षेत्र की सामान्य ऊँचाई है 3600 मीटर।

(3) अच्छे किस्म का जीरा द्रास घाटी में होता है।

(4) काराकोरम दर्रा कश्मीर को तिब्बत से जोड़ता है।

(5) बड़े मठों को गोप्पा कहते हैं।

iii. निम्न प्रश्नों के उत्तर दें:

1. हम प्रकृति के साथ अनुकूलित हैं। कैसे?
उत्तर- हम जिस पारितंत्र में रहते हैं वहीं के वातावरण के अनुकूल अपने को अनुकूलित कर लेते हैं। साथ ही वहाँ के पशु-पक्षी, फसलें, वनस्पतियाँ जलवायु के अनुकूल ढालने में हमारा साथ देती हैं, हालांकि उन्हें भी अनुकूलित होने में समय लगा होगा।

2. जम्मू कश्मीर के नक्शे में सिंधु नदी का बहाव, कराकोरम दर्रा और जोजिला दर्रा को चिह्नित करें।
उत्तर- छात्र स्वंय करें।

3. लद्दाख क्षेत्र की जलवायु कैसी है?
उत्तर- लद्दाख क्षेत्र की जलवायु शुष्क और ठंडा है। यह दुनिया की छत कहे जाने वाला तिब्बत के पठार का पश्चिमी भाग है। इसे हम उच्च भूमि भी कह सकते हैं। यहाँ की सामान्य ऊँचाई 6700 मीटर है। अधिक ऊँचाई के कारण ही जलवायु ठंडी है। हिमालय पहाड़ की वृष्टिछाया में पड़ जाने से यहाँ वर्षा नहीं होती। इसी कारण यह क्षेत्र शुष्क हो गया है। यहाँ जाड़ा कभी बहुत अधिक और कभी थोड़ा कम लेकिन सालों भर पड़ता है।

4. लद्दाख में विरल वनस्पति और विरल जनसंख्या क्यों है?
उत्तर- उच्च शुष्कता के कारण यह उजाड़ है और वनस्पतियाँ कम है। हरियाली कहीं नहीं दिखती। कृषि योग्य भूमि की भारी कमी है। जीवन-यापन की असुविधा के कारण जनसंख्या भी विरल ही है।

5. याक की उपयोगिता हमारे यहाँ के किस पशु से मिलती है?
उत्तर- याक की उपयोगिता हमारे यहाँ के भैंस से है। मादा याक बच्चे पैदा करती है। इनसे दूध मिलता है, जिससे खोवा, पनीर और मक्खन बनता है। नर याक बोझ ढोने, गाड़ी और हल खींचने के काम आते हैं।

6. लद्दाख जैसे ठंडे रेगिस्तानी क्षेत्र में पर्यटन की क्या संभावनाएँ हैं?
उत्तर- जाड़े की अधिकता तथा कोई प्राचीन स्मारक के नहीं रहने के कारण यहाँ पर्यटन की कोई संभावना नहीं है। यातायात की भी कोई खास सस्ती व्यवस्था नहीं है।

7. ठंडे रेगिस्तानी प्रदेशों में आपको जाना है। साथ ले जाने वाले सामानों की सूची बनाइए।
उत्तर- ठंडे रेगिस्तानी प्रदेश में जाने के लिए हमें मोटे-मोटे कम्बल, गर्म कपड़े जिसमें ओभर कोट अवश्य हो, ऊनी मोजा, कांटेदार जूता, रात बिताने के लिए रावटी भी साथ में होना चाहिए। तैयार खाने का सामान भी साथ ले जाना पड़ेगा।

नोट: रावटी- कपड़े का बना हुआ एक प्रकार का छोटा घर या डेरा जिसके बीच में एक बँडेर होती है और जिसके दोनों ओर दो ढालुएँ परदे होते हैं, छौलदारी, टेंट, तंबू।

8. आप अपने और लद्दाख के निवासियों के जीवन शैली की तुलना करके पता करें कि कहाँ का जीवन अधिक कठिन है और क्यों?
उत्तर- हम धान, गेहूँ और विभिन्न प्रकार की सब्जियाँ उगाते हैं। ये सुविधा लद्दाख के लोगों के पास बहुत कम है। हमारा वातावरण सुखमय है जबकि लद्दाख वासियों को मशक्कत का जीवन-जीना पडता है। हम तीनों मौसमों जाड़ा, गर्मी और बरसात का मजा लेते हैं। लद्दाख में तो केवल जाड़ा पड़ता है और वह भी भीषण।


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अध्याय-5 बिन पानी सब सून

बिहार बोर्ड वर्ग-7 वाँ भूगोल प्रश्नोत्तर 

अध्याय-5 बिन पानी सब सून


अध्याय-5 बिन पानी सब सून

अभ्यास के प्रश्नोत्तर

i. सही विकल्प पर सही (✓) का निशान लगाएँ-

1. पृथ्वी पर जलमंडल का हिस्सा है:
(क) 51
(ख) 41
(ग) 71
(घ) 29
उत्तर- (ग) 71

2. मुम्बई किस सागर के किनारे स्थित है:
(क) हिन्द महासागर
(ख) अरब सागर
(ग) आकर्टिक महासागर
(घ) फतेह सागर
उत्तर- (ख) अरब सागर

3. चन्द्रमा के गुरुत्वाकर्षण से जल ऊँचाई की ओर बढ़ता है। यह स्थिति कहलाती है:
(क) भाटा
(ख) ज्वार
(ग) ग्रहण
(घ) तरंगे
उत्तर- (ख) ज्वार

4. इनमें से कौन झील है:
(क) काला सागर
(ख) लाल सागर
(ग) फतेह सागर
(घ) अरब सागर
उत्तर- (ग) फतेह सागर

ii. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

1. पानी के कौन-कौन से स्रोत हैं? सबसे बड़ा स्रोत कौन-सा है? उसका उपयोग क्या है?
उत्तर- पानी के निम्नलिखित स्रोत हैं:-

⇒ भूमि के अन्दर का जल जिसे हम कुआँ या हैण्ड पम्प द्वारा प्राप्त करते हैं

⇒ वर्षा से प्राप्त जल

⇒ नदियाँ

⇒ पहाड़ों पर के बर्फ, जो गल कर पानी बनते हैं और नदियों में पहुँच जाते हैं।

⇒ तालाब

⇒ झरना

⇒ समुद्र।

         पानी का सबसे बड़ा स्रोत समुद्र है। इसका उपयोग है कि उसमें बड़े-बड़े जहाज चलाकर उससे देश-विदेश से व्यापारिक सामान मंगाया और भेजा जाता है। समुद्र के जल से नमक बनाते हैं। समुद्र जल में मछलियाँ मिलती हैं, जो मछुआरों को रोजगार और मांसाहारियों को भोजन देती हैं। समुद्र में शंख, सीपी, कौड़ी आदि-आदि अनेक सामान मिलते हैं। सीपी से मोती मिलता है। मूंगा भी समुद्र से ही मिलता है।

2. जमीन के नीचे का जल स्तर दिन-प्रतिदिन कम होता जा रहा है। इसे बनाये रखने के लिये आप क्या-क्या कर सकते हैं?
उत्तर- जमीन के नीचे जलस्तर को बनाये रखने के लिए हम गाँव के आस-पास तालाब और गड्ढा बनाएँगे। उसमें एकत्र जल में मछली पालन करेंगे और जरूरत के अनुसार सिंचाई भी करेंगे। इसी का पानी रिस-रिस कर जमीन में जाता रहेगा और नीचे का जल-स्तर बना रहेगा।

      वर्षा जल को एकत्र कर पाइपों के सहारे जमीन के अन्दर तक भेजा जा सकता है। इससे जलस्तर बना रहेगा। लेकिन यह काम सबको करना होगा।

3. आप अपने दैनिक जीवन में जल का कहाँ-कहाँ एवं कितना उपयोग करते हैं? सूची बनाइए। इनमें कहाँ-कहाँ मितव्ययिता बरतकर इस उपयोग को कम कर सकते हैं?
उत्तर- अपने दैनिक जीवन में जल के उपयोग का सूची-

⇒ सबेरे शौच में- 7 लीटर

⇒ स्नान में- 15 लीटर

⇒ कपड़ा साफ करने में- 30 लीटर

⇒ पीने में- 6 लीटर

⇒ संध्या शौच में- 7 लीटर

         इनमें से हम नहाने, कपड़ा साफ करने में कुछ बचत कर सकते हैं। इस सभी पानी को बेकार नहीं जाने देंगे। इसको किसी बर्तन में एकत्र कर उससे फुलवारी की सिंचाई करेंगे, या घर की धुलाई करेंगे।

4. पाठ्यपुस्तक के पृष्ठ 40 पर दिये गये चित्रों में से कौन-कौन सी आदत सही और कौन-कौन सही आदत गलत है और क्यों?
उत्तर- चित्र में लड़का बाल्टी में पानी निकाल कर नहा रहा है। यह अच्छी आदत है क्योंकि इससे पानी की बर्बादी नहीं होती।

        दूसरे चित्र में नल को खोल कर छोड़ दिया गया है। बाल्टी में पारी भर कर बेकार बह रहा है। यह आदत गलत है, क्योंकि पानी की बर्बादी हो रही है।

        तीसरे चित्र में लड़का नल को खोल कर ब्रश कर रहा है और पानी बेकार गिरा रहा है। यह आदत गलत है, क्योंकि पानी बर्बाद हो रहा है।

         नीचे चौथे चित्र और पाँचवें चित्र में भी लड़का बाल्टी में पानी लेकर नहा रहा है और एक लड़का लोटा में पानी लेकर दातून कर रहा है। ये दोनों आदतें अच्छी हैं, क्योंकि इन दोनों प्रक्रमों में पानी की बचत हो रही है।

5. यदि आपके घर में दो दिनों तक पानी न रहे तो सोचिये और सूची बनाइए कि आपको क्या-क्या परेशानियाँ होंगी?
उत्तर- सबसे पहले तो मुझे शौच की परेशानी होगी। उन दोनों दिन हम नहा भी नहीं पाएंगे। भोजन बनाने के लिए कहीं दूर कुएँ या हैंडपंप से पानी लाना पड़ेगा। उसी पानी से बरतन भी साफ किया जायेगा। कुल मिला-जुलाकर काफी कठिनाई होगी।

6. जल के वितरण को स्पष्ट कीजिए। जल का संरक्षण आवश्यक है, कैसे और क्यों?
उत्तर- पृथ्वी पर जल विचित्र रूप में वितरीत है। लगभग 71% जल तो समुद्र अपने गर्भ में रखे हुए है। यह जल न तो कृषि के काम आता है और न ही पीने के। पीने योग्य जल केवल छत्रक, पहाड़ों पर के बर्फ, भूमिगत जल, झील, नदियाँ, वायुमंडल के जल से कृषि कार्य तो होता ही है, पीने के काम भी आता है।

         ये ही जल मानवोपयोगी हैं। लेकिन इनका दोहन आसान नहीं। भूमिगत जल को कुआं खोद कर या हैंड पंप धंसा कर पानी निकालते हैं। वायुमंडल के जल के लिये बादल बनने, फिर वर्षा होने तक प्रतीक्षा करनी पड़ती है। छत्रक और पहाड़ों पर के बर्फ गर्मी आने पर ही गलते हैं और नदियों के माध्यम से हम तक पहुँचते हैं।

          नदियाँ भी हर गाँव में नहीं होती और उनसे भी जल निकालकर हर गाँव तक पहुँचाना एक कठिन कार्य है। सबसे आसानी से प्राप्त होनेवाला जल भूमि के अन्दर का जल है। तालाब का जल भी उपयोग करना आसान होता है। अतः हमें इन्हीं जलों को संरक्षित करना चाहिए। भूमि के अन्दर जल की कमी न होने पाये या फिर बढ़ता जाय इसके लिए वर्षा जल को किसी तरकीब से भूमि के अन्दर तक पहुंचा दिया जाय।

      छत पर के वर्षा जल को पाइपों के सहारे भूमि के जल स्तर तक पहुँचा सकते हैं या तालाब और गड्ढों में जल एकत्र करेंगे जो धीरे-धीरे रीस-रीस कर भूमि के अन्दर जाते हैं। यदि जल एक बार समाप्त हो जाय तो बहुत-बहुत दिनों तक प्रतीक्षा के बाद जल प्राप्त होता है। इसी कारण जल का संरक्षण आवश्यक है।

7. प्रमुख महासागरों के नाम विश्व के नक्शे पर दर्शाइए।
उत्तर- विश्व में मुख्यतः चार महासागर हैं:

(क) हिन्द महासागर

(ख) प्रशान्त महासागर

(ग) अटलांटिक महासागर तथा

(घ) आर्कटिक महासागर

बिन पानी सब सून

विश्व के प्रमुख महासागरों के नाम

8. भारत में मीठे पानी की झीलें कहाँ-कहाँ हैं? पता कीजिए कि ये किस राज्य में अवस्थित हैं?
उत्तर- भारत में मीठे पानी की झीलें निम्नलिखित हैं:

(क) डल झील– श्रीनगर (जम्मू कश्मीर)

(ख) नैनी झील– नैनीताल (उत्तराखंड)

(ग) काँवर झील– बेगूसराय (बिहार)

(घ) बरैला झील– वैशाली (बिहार)

        इसके अलावा बुलर झील, पिछोला झील, लूनर झील, कोलरू झील, फतेह सागर झील आदि मीठे पानी की झीलें हैं।

9. ज्वार-भाटा क्या है? ये किस प्रकार उत्पन्न होते हैं?
उत्तर- समुद्र का पानी जब ऊपर उठे और तटवर्ती भूमि को डूबो दे तो इसे ज्वार कहते हैं। फिर यह समुद्र जल कम होकर पीछे लौट जाय तब इसे भाटा कहते हैं। यह प्रतिदिन होता है। पहले ज्वार उठता है और बाद में भाटा होता है।

            सूर्य और चन्द्रमा के गुरुत्वाकर्षण के कारण महीना में दो बार ज्वार-भाटा आता जाता है। अर्द्ध मासिक ज्वार ऊँचा होता है, जिसके बल पर बड़े-बड़े जहाज आंतरिक पत्तनों तक पहुँच जाते हैं। फिर वह भाटा के समय लौटकर समुद्र में चले जाते हैं।

10. जल-चक्र किसे कहते हैं?
उत्तर- जल-चक्र क्रिया हमारे वायुमंडल एवं पृथ्वी तंत्र की महत्वपूर्ण विशेषता है। पृथ्वी पर अवस्थित जल का वाष्प बनना, वाष्प से बादल बनना और पुन: वर्षा के रूप में बरसकर पृथ्वी पर पहुँचकर जल बनना आदि क्रिया को जल-चक्र कहते हैं। जल-चक्र का प्रक्रम सदैव चलते रहता है।

बिन पानी सब सून

जल-चक्र

11. समुद्र के जल में तैरना मुश्किल है। क्यों?
उत्तर- समुद्र के जल में हमेशा तरंगे उठती और गिरती रहती हैं। ऐसी स्थिति में तैराक अपने को सम्भाल नहीं पाता। अपने को संभालने की कोशिश में वह थक जाता है और कभी-कभी इसमें डूब भी जाता है। इसीलिये कहा गया है कि समुद्र के जल में तैरना मुश्किल है।

12. समुद्र का जल खारा होता है। क्यों?
उत्तर- समुद्र का जल इसलिए खारा होता है, क्योंकि इसके एक लीटर पानी में 35 ग्राम नमक होता है। इसी कारण यह पानी पीने के काम नहीं आता। इसमें नमक की मात्रा बढ़ने का कारण है कि नदियाँ इसमें विभिन्न पदार्थों को पहुँचाते रहती हैं, जिनमें कि नमक भी होता है। इधर समुद्र में वाष्पीकरण बराबर होते रहता है। इस कारण पानी तो उड़ जाता है और नमक एकत्र होते रहता है। यह प्रक्रम लाखों-लाख वर्ष से हो रहा है। फलतः समुद्र में पर्याप्त नमक एकत्र हो गया है।

13. भूगर्भीय जलस्तर में कमी आ रही है। क्यों?
उत्तर- विभिन्न कल-कारखानों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। इन कारखानों में जल की खपत बढ़ती जा रही है। नगरों में पाइपों द्वारा जल का वितरण होता है। लापरवाही से नल को खुला छोड़ देते हैं। जहाँ एक लीटर जल का उपयोग करते हैं, वहीं 10 लीटर बेकार बहा देते हैं। पहले जहाँ एक लोटा जल से शौच कर्म पूरा हो जाता था, वहीं अब फ्लश के कारण 5 से 10 लीटर तक जल खर्च करना पड़ता है। इधर भूगर्भीय जल का उपयोग तो बढ़ा लेकिन भू-गर्भीय जल के स्तर को बचाये रखने या ऊपर करने का प्रयत्न नहीं हुआ। यही कारण हैं कि भूगर्भीय जल में कमी आ रही है।

14. वाटर हार्वेस्टिंग कैसे करेंगे?
उत्तर- वर्षा के पानी को एकत्र कर किसी प्रक्रम द्वारा जमीन के अन्दर पहुँचाकर हम ‘वाटर हार्वेस्टिंग’ कर सकते हैं। वर्षा जल को छतों पर एकत्र कर पाइपों के सहारे जमीन में जलस्तर तक पहुँचाया जा सकता है। गाँवों में गड्ढा, तालाब आदि खोद कर उसमें वर्षा जल एकत्र करेंगे। इससे धीरे-धीरे रिसकर पानी जलस्तर तक पहुँचता रहेगा।

15. आप फुटबॉल के खिलाड़ी हैं, क्रिकेट खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर कहते हैं कि पानी बचाइए। क्या आप उनकी बात मानेंगे और क्यों?
उत्तर- हाँ, हम मानेंगे, क्योंकि यह सबके हित की बात है।

16. ज्वार-भाटा से क्या-क्या लाभ और नुकसान हैं। सूची बनाकर कक्षा में प्रदर्शित कीजिए।
उत्तर-
ज्वार-भाटा से लाभ-

⇒ मछलियाँ तट के निकट आ जाता है।

⇒ शंख सोपी, कौड़ियां तट के निकट आ जाता है।

⇒ आंतरिक पत्तनों तक जहाज आ जाता है।

ज्वार-भाटा से नुकसान-

⇒ लोगों के सामान बहा ले जाती हैं।

⇒ आर्थिक नुकसान की आशंका मिलती हैं।

⇒ कभी-कभी अनजान लोग बह जाते हैं आ जाते हैं।

17. पानी के उपयोग से संबंधित अच्छी आदतों संबंधी अखबार को इकट्ठा कीजिए और स्क्रैप बक बनाकर कक्षा में प्रदर्शित कीजिए।
उत्तर- छात्र स्वयं करें।


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अध्याय-7  जीवन का आधार पर्यावरण

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अध्याय-7 जीवन का आधार पर्यावरण


अध्याय-7 जीवन का आधार पर्यावरण

अभ्यास के प्रश्नोत्तर

i. सही विकल्प पर सही (✓) का निशान लगाएँ।

1. जल प्रदूषण हो रहा है:
(क) पौधो के कटाव से
(ख) वाहन चलाने से
(ग) पानी पीने से
(घ) पानी में दूषित पदार्थ मिलने से
उत्तर- (घ) पानी में दूषित पदार्थ मिलने से

2. पानी की शुद्धता हो सकती है:
(क) मच्छर पालने से
(ख) तोता पालने से
(ग) बत्तख पालने से
(घ) मछली पालने से
उत्तर- (घ) मछली पालने से

3. बढ़ती जनसंख्या के कारण हो रहा है
(क) वृक्षों का तेजी से कटाव
(ख) भवनों का निर्माण
(ग) आधारभूत संरचना का निर्माण
(घ) इनमें सभी
उत्तर- (घ) इनमें सभी

4. पर्यावरण संरक्षण के लिए किया जाना चाहिए:
(क) खूब पौधे लगाना
(ख) गंदे जल की उचित निकासी का प्रबंध
(ग) गाड़ियों का कम उपयोग
(घ) इनमें सभी
उत्तर- (घ) इनमें सभी

अध्याय-7 जीवन का आधार पर्यावरण

ii. खाली जगहों को भरिए।

(1) कार्बन मोनोआक्साइड, कार्बन डाइआक्साइड गैसें वायु प्रदूषण पैदा करता है।

(2) ध्वनि की तीव्रता को डेसिबल में मापा जाता है।

(3) सोंस/ डॉल्फिन को संरक्षित राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया गया है।

जीवन का आधार पर्यावरण

सोंस/ डॉल्फिन 

अध्याय-7 जीवन का आधार पर्यावरण

iii. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

1. वृक्षों की संख्या-वृद्धि के लिए आप क्या-क्या कर सकते हैं?
उत्तर- वृक्षों की संख्या-वृद्धि के लिए हमें संकल्पबद्ध होना पड़ेगा। हमें संकल्प लेना होगा कि प्रत्येक वर्ष हम कुछ-न-कुछ वृक्ष अवश्य लगायेंगेऔर उसकी देखभाल करेंगे, बहुत नहीं तो कम-से-कम वर्ष में 5 वृक्ष। फलदार वृक्ष हो तो बहुत अच्छा, पत्तेदार वृक्ष तो पर्यावरण के लिए प्राण माने जाते हैं। हम न तो वृक्ष काटेंगे और न किसी को काटने देंगे। पशुओं से रक्षा के लिए हम वृक्षों की घेराबन्दी कर देंगे।

2. नदियों के जल को स्वच्छ बनाने के लिए आप क्या-क्या कर सकते हैं?
उत्तर- नदियों के जल को स्वच्छ रखने के लिए हम गाँव-नगर के नाले-नलियों को नदियों तक पहुँचने के पहले ही रोक कर गन्दे जल की सफाई करके नदियों में छोड़ेंगे। नदी तट पर अवस्थित कारखानों पर दबाव डालेंगे कि कारखानों के कचरा की सफाई कर ही उसके जल को नदी में छोड़ें। मृत पशुओं के शव को नदी में नहीं बहाने देंगे। इस काम के लिए एक संगठन खड़ा करना होगा और नदी तट के सभी गांवों में उसकी शाखाएँ संगठित करनी होंगी।

3. उन क्रियाकलापों की सूची बनाइए जिनसे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है?
उत्तर- वे क्रियाकलाप निम्नांकित हैं जिनसे पर्यावरण को नकसान पहँचता है:-

⇒ खनिज ईंधनों से चलने वाली सवारियों के साधनों से निकलने वाले धुएँ से।

⇒  खनिज कोयला जलाने वाले कल-कारखानों से निकले धुएँ से।

⇒ आवाज करनेवाले कारखानों तथा मोटर-वाहनों के कर्कश हॉर्न की आवाज से।

⇒ पेड़-पौधों की अंधा-धुंध कटाई से।

⇒ नदी, तालाब, कुआँ आदि के जल को गंदा करने से।

⇒ पॉलीथीन के उपयोग से।

⇒ मरे हुए जानवरों को खुले वातावरण में फेंकने से।

4. पॉलीथीन के विकल्प क्या-क्या हो सकते हैं?
उत्तर- रद्दी कागज के ठोंगा के साथ जूट के थैला, कपड़े का थैला या इसी प्रकार किसी प्रकार के थैला पॉलीथीन के विकल्प हो सकते हैं।

5. पता कीजिए कि कितने घरों का बेकार पानी बाहर गली या सड़क पर गिरता है। कितने घरों का पानी सोख्ता गड्ढे में गिरता है?
उत्तर- मेरे गाँव के किसी भी घर का पानी गली या सड़क पर नहीं गिरता। सभी ने कोई-न-कोई व्यवस्था कर रखी है। गली में जो घर हैं उनका पानी नाली में गिरता है। नाली का पानी मुख्य सड़क के बड़े नाले में गिरता है, जो गाँव के बाहर दक्षिण में अवस्थित एक गड्ढे में एकत्र होता है जो कुछ घर नाली से सम्बद्ध नहीं हैं, उन्होंने सोख्ता गड्ढा बना रखा है और घर का पानी उसी में गिराते हैं।

6. शहरी एवं ग्रामीण पर्यावरण में क्या-क्या अंतर दिखाई पड़ते हैं?
उत्तर- शहरी पर्यावरण दमघोंटू रहता है, जबकि गाँव का पर्यावरण खुला-खुला होता है। शहरों में पेड़-पौधों की कमी होती है जबकि गाँवों में अपेक्षाकृत अधिकता है। शहरों में छोटे-बड़े वाहनों की अधिकता है तो वहीं गाँवों में खनिज तेल (पेट्रोल, डीजल) चालित वाहन एक-दो ही दिखाई पड़ते हैं। गाँवों में सायकिल, बैलगाड़ा, टमटम ही अधिक दिखते हैं।

7. प्रदूषण के क्या कारण हैं? इनका हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर- प्रदूषण के कारण- अधिक भीड़-भाड़ में पेट्रोल-डीजल चालित वाहन चलाने से उनके द्वारा निकले धुएँ से वायु प्रदूषण होता है। मशीनों, वाहनों, हॉर्न, लाउडस्पीकरों द्वारा निकले कर्कश आवाज से ध्वनि प्रदूषण होता है। नदियों में गन्दगी मिलाने, तालाबों में कपड़ा साफ करने और पशुओं को नहलाने, कुआँ के निकट कचड़ा एकत्र करने से जल प्रदूषण होता है।

प्रदूषण का हमारे जीवन पर प्रभाव- वायु प्रदुषण से श्वास रोग होता है, जबकि ध्वनि प्रदूषण से कान की बीमारी होती है और कभी-कभी बहरेपन का शिकार भी होना पड़ता है। जल प्रदूषण से पेट की बीमारियाँ होती हैं। खासकर डायरिया का प्रकोप बढ़ता है।

8. हम ग्लोबल वार्मिग को कैसे कम कर सकते हैं?
उत्तर- ग्लोबल वार्मिंग अर्थात भूमंडलीय तापन को कम करने के लिए हमें अपनी सुविधाओं में कटौती करनी होगी। जेनरेटर, फ्रीज, ए.सी., खनिज तेल (पेट्रोल, डीजल) चालित वाहनों का उपयोग कम करना होगा। हमें वे सब उपाय अपनाने पड़ेंगे, जिनसे ओजन परत की क्षति न हो और सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणें पृथ्वी तक नहीं पहुँच पाएँ।


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अभ्यास के प्रश्नोत्तर

i. सही विकल्प चुने-

(1) इनमें कौन सी प्राकृतिक पर्यावरण की वस्तु है।

(क) पुल

(ख) मकान

(ग) जल

(घ) सड़क

उत्तर- (ग) जल

(2) पर्यावरण कितने प्रकार का होता है?

(क) दो

(ख) तीन

(ग) चार

(घ) अनगिनत

उत्तर- (क) दो (प्राकृतिक और मानव निर्मित पर्यावरण)

(3) पृथ्वी के चारों ओर क्या है?

(क) वायु

(ख) जल

(ग) पर्यावरण

(घ) सड़क

उत्तर- (ग) पर्यावरण

ii. खाली जगहों को भरिए-

(1) पेड़-पौधे एवं जीव मिलकर  जैव पर्यावरण बनाते हैं।

(2) पेड़-पौधे जीव-जन्तु जैव मंडल  के अंग हैं।

(3) मनुष्य ने अपनी आवश्यकता की पूर्ति के लिए चीजों को बनाया है।

iii. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

1. पर्यावरण किसे कहते हैं?
उत्तर- हमारे चारों ओर पाए जाने वाले प्राकृतिक एवं मानवीय दशाओं के आवरण को पर्यावरण कहते है। अर्थात हमारे आस-पास जो भी दृश्य और अदृश्य वस्तुएँ हैं, इन सभी को मिलाकर बनने वाले अन्तर्जाल को पर्यावरण कहते हैं। नदी, पहाड़, जंगल, जीव-जंतु, घर, सड़क, पुल, कल-कारखाने आदि दृश्य वस्तुएँ हैं। वायु, मानवीय रीति-रिवाज, परम्पराएँ, आदतें आदि अदृश्य वस्तुएँ हैं। इन सभी को मिलाकर पर्यावरण का निर्माण होता है।

2. पर्यावरण कितने प्रकार के होते हैं? वर्णन कीजिए।
उत्तर- पर्यावरण मुख्यत: दो प्रकार के होते हैं-

(क)  प्राकृतिक पर्यावरण तथा

(ख) मानव निर्मित पर्यावरण।

(क) प्राकृतिक पर्यावरण- प्राकृतिक पर्यावरण के अंतर्गत नदी, पहाड़, जंगल, जैव मंडल आदि आते हैं। जैव मंडल में सभी जीव-जन्तुओं को रखा गया है।

(ख) मानव निर्मित पर्यावरण- छोटे-बड़े घर और भवन, कल-कारखाने, कृषि से संबंधित उपकरण, कुआँ, तालाब, सड़क, पुल, पुलिया, गली-कुची आदि मानव निर्मित पर्यावरण है।

3. स्थलमंडल, जलमंडल एवं वायुमंडल किसे कहते हैं?
उत्तर- स्थलमंडल- भूमि का वह भाग, जिस पर जीव-जंतु रहते हैं। जैसे- मकान, पेड़-पौधे, पहाड़, पठार, मैदान और खेत-खलिहान आदि को स्थलमंडल कहते हैं। 

जलमंडल- सागर, महासागर, झील, नदी, कुआँ, तालाब, बादल, वर्षा आदि सभी मिलकर जलमंडल का निर्माण करते हैं।

वायुमंडल- जिस गैसीय आवरण से पृथ्वी घिरी हुई है उसे वायुमंडल कहते हैं। इनमें मुख्य गैसे हैं- नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड। ऑक्सीजन को मनुष्य सॉस में लेता है तथा कार्बन डाइऑक्साइड से पौधे अपना भोजन बनाते हैं।

4. सांस्कृतिक पर्यावरण के तहत कौन-कौन सी बातें आती हैं?
उत्तर- समाज में तरह-तरह के रीति-रिवाज, परम्पराएं, उत्सव आदि देखने को मिलते हैं। शादी-ब्याह के अवसर पर खुशियों में शरीक होना, छोटों को प्यार एवं बड़े-बुजुर्गों का सम्मान ये सभी हमारी सांस्कृतिक पर्यावरण के अंग हैं। मुलाकात होने पर अभिवादन के तरीके, खुशियों को व्यक्त करने के तरीके, शोक प्रकट करने के भाव, पर्व-त्योहारों पर गाए जाने वाले मंगलगीत, पहनावा, विशेष प्रकार के पकवान ये सब संस्कृति की पहचान है। यही सब मिलकर सांस्कृतिक पर्यावरण का निर्माण करते है।

       वृक्ष-पूजा, कुआँ पूजा, गंगा पूजन, सूर्य को जल अर्पण आदि सांस्कृतिक पर्यावरण में ही आते हैं। जिन प्राकृतिक साधनों से हमें लाभ पहुँचता है उन सभी को आदर देने के लिये हमारे पूर्वजों ने किसी-न-किसी रूप में उन्हें पूजना आरम्भ कर दिया।

5. मानव निर्मित पर्यावरण के कारण प्राकृतिक पर्यावरण को नुकसान पहुंचा है। कैसे?
उत्तर- मानव अपने लाभ और आराम के लिए अनेक प्रकार के कार्य करता है। वह मकान बनाता है, सड़क बनाता है, कारखाने बनाता है, आवागमन के साधन बनाता है। इन सबको संचालित करने के लिए खनिज इंधनों की आवश्यकता होती है। खनिज निकालने में प्राकृतिक पर्यावरण को नुकसान पहुँचता है।

          भवन और कारखाने तथा सड़क बनाने के लिए पत्थर की गिट्टी की आवश्यकता पड़ती है। सीमेंट बनाने के लिए चूना-पत्थर और विभिन्न खनिजों की आवश्यकता पड़ती है। पत्थर गिट्टी के लिए पहाड़ तोड़े जाते हैं। इस प्रकार इन सभी कार्यों से पर्यावरण को नुकसान पाएँचता है।

6. किन घटनाओं से सांस्कृतिक पर्यावरण को क्षति होती है?
उत्तर- आज यह प्रथा-सी चल गई है कि पढ़-लिखकर अपना गृह गाँव छोड़कर लोग अन्यत्र नौकरी पर चले जाते हैं। वहाँ विभिन्न स्थानों और परंपरा रिवाजों वाले लोग रहते हैं। उनके रहन-सहन और खाने-पीने में भी समानता नहीं रहती। अत: पड़ोसी होकर भी व्यक्ति एक-दूसरे के पर्व-त्योहार में हिस्सा नहीं ले पाता और इधर अपने गाँव-नगर के त्योहार तो छूट ही जाते हैं। इन्हीं कारणों से सांस्कृतिक पर्यावरण को क्षति होती हे।

7. आपके पास कौन-सा पारितंत्र है? चित्र बनाकर किसी एक का वर्णन करें।
उत्तर- हमारे पास स्थलीय पारितंत्र है। इस पारितंत्र में नदी, पहाड़, पेड़-पौधे, सड़क, घर, विद्यालय, आवागमन के साधन, कुआँ, चापाकल आदि हैं। इसमें खेत-खलिहान भी शामिल हैं जहाँ से हमें अनाज और सब्जियाँ मिलती है। स्थलीय पारितंत्र का चित्र निम्नांकित है:-

हमारा पर्यावरण

स्थलीय पारितंत्र

8. हम किन उपायों को अपनाकर पानी के खर्च को कम कर सकते हैं?
उत्तर- पानी का सही उपयोग करके ही हम पानी के खर्च को कम कर सकते हैं। हमें इसका अपव्यय नहीं होने देना चाहिए।

9. पर्यावरण को नुकसान पहुँचाकर हम अपना ही जीवन संकट में डाल रहे हैं। कैसे?
उत्तर- हम कभी-कभी अनजाने में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं और कभी-कभी हम जान-बूझ कर भी पर्यावरण को नुकसान पहुंचा देते हैं। हम कभी गन्दी बाल्टी को कुएँ में डाल देते हैं। गाँव या शहर की नालियों को नदी में मिला देते हैं। इससे नदी जल गंदा हो जाता है। गन्दे कएँ और गन्दी नदी का पानी पी कर हम स्वयं बीमार हो जाते हैं। विभिन्न कारगुजारियों से हम वायु को दूषित कर देते हैं और हम ही उस वायु में सांस लेते हैं और बीमार पड़ जाते हैं। इस प्रकार हम देखते हैं कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचा कर हम अपना ही जीवन संकट में डाल लेते हैं।

iv. प्रातःकालीन बाल सभा में चर्चा कीजिए-

1. पर्यावरण संरक्षण- हमें हर हाल में पर्यावरण को संरक्षित रखना चाहिए। शुद्ध और साफ पर्यावरण में ही हम या हमारा समाज स्वस्थ रह सकता है। अतः सबको स्वस्थ रखने के लिए हमें पर्यावरण संरक्षण करना ही होगा।

2. वृक्षारोपण- आजकल बड़ी तेजी से पेड़ों की कटाई हो रही है। घर बनवाने और फर्निचर तथा जलावन के लिए लकड़ियों की आवश्यकता बढ़ चली हे। इस कारण वायुमंडल में कार्बन डाईऑक्साइड की मात्रा बढ़ने लगी है। इस पर रोक लगाने के लिए हमें वृक्षारोपण पर जोर देना चाहिए।

3. कटता जंगल-घटता जीवन- जैसे-जैसे जंगल कटते जा रहे हैं वैसे-वैसे कार्बन डाइऑक्साइड और ऑक्सीजन का संतुलन बिगड़ने लगा है। इससे हमें एक तो ऑक्सीजन की कमी हो रही है और दूसरी ओर वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ने लगी है। इन दोनों बातों का कुप्रभाव हमारे स्वास्थ्य पर पड़ने लगा है। इससे औसत आयु वर्ष घटने लगा है। अतः अपने जीवन को बचाने के लिए हमें जंगलों को बचाना होगा।

4. जैविक कचरा समाप्त करने में जानवरों की भूमिका- जैविक कचरा से तात्पर्य है मृत पशु। इनको समाप्त करने के लिए गिद्ध, चील, कुत्ते सियार आदि बड़े काम के सिद्ध होते हैं। बल्कि इन्हें तो प्राकृतिक सफाई कर्मचारी तक भी कहा जाता है।


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