जल/WATER/NCERT CHAPTER-5 CLASS7

       NCERT CLASS-7 Geography Solutions 
  (हिन्दी माध्यम)      

अध्याय-5. जल (Water)

एनसीईआरटी के 7वीं कक्षा का भूगोल विषय का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

सरल एवं आसान शब्दों में उत्तर देना सीखें




Water
1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
 
(क) वर्षण क्या है?
उत्तर – सूर्य के ताप के कारण जल वाष्पित हो जाता है और ये जलवाष्प ठंडा होने पर संगठित होकर बादलों का रूप ले लेता है। फिर यहाँ से यह वर्ष, हिम तथा सहिम वृष्टि के रूप में धरती या समुद्र पर नीचे गिरता है, जिसे वर्षण कहा जाता है। 
(ख) जल चक्र क्या है?
उत्तर – जिस प्रक्रम में जल लगातार अपने स्वरूप को बदलता रहता है और झील, नदी, सागर, महासागरों वायुमंडल एवं धरती के बीच चक्कर लगाता रहता है उसे जलचक्र कहते हैं।
(ग) लहरों की ऊँचाई प्रभावित करने वाले कारक कौन-से हैं?
उत्तर – लहरों की ऊँचाई प्रभावित करने वाले कारकों में पवन, भूकंप, ज्वालामुखी उद्गार, जल के नीचे भूस्खलन, ज्वार-भाटा इत्यादि है।
(घ) महासागरीय जल की गति को प्रभावित करने वाले कारक कौन-से हैं?
उत्तर – महासागरीय जल की गति को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित हैं –
◆ समुद्री जल का तापमान
◆ सागरीय जल की लवणता
◆ सागर में आने वाले ज्वार-भाटा
◆ सागरीय सतह पर लगने वाले वायुदाब
◆ सागरीय जल का घनत्व
(च) ज्वार-भाटा क्या है तथा ये कैसे उत्पन्न होते हैं?
उत्तर – दिन में दो बार नियम से महासागरीय जल का उठना एवं गिरना ज्वार-भाटा कहलाता है। जब सर्वाधिक ऊँचाई तक उठकर जल, तट के बड़े हिस्से को डुबो देता है, तब उसे ज्वार कहते हैं। जब जल अपने निम्नतम स्तर तक आ जाता है एवं तब से पीछे चला जाता है, तो उसे भाटा कहते हैं।
     सूर्य एवं चंद्रमा के शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण बल के कारण पृथ्वी की सतह पर ज्वार-भाटे आते हैं। जब पृथ्वी का जल चंद्रमा के निकट होता है उस समय चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण बल से जल अभिकर्षित होता है, जिसके कारण उच्च ज्वार आते हैं। पूर्णिमा एवं अमावस्या के दिनों में सूर्य, चंद्रमा एवं पृथ्वी तीनों एक सीध में होते हैं और इस समय सबसे ऊँचे ज्वार उठते हैं। इस ज्वार को बृहत ज्वार कहते हैं। लेकिन जब चाँद अपने प्रथम एवं अंतिम चतुर्थांश में होता है तो पृथ्वी एवं सूर्य का गुरुत्वाकर्षण बल विपरीत दिशाओं से महासागरीय जल पर पड़ता है परिणामस्वरूप, निम्न ज्वार-भाटा आता है ऐसे ज्वार को लघु ज्वार भाटा करते हैं।
(छ) महासागरीय धाराएँ क्या है?
उत्तर – महासागरीय धाराएँ, निश्चित दिशा में महासागरीय सतह पर नियमित रूप से बहने वाली जल की धाराएँ होती है। महासागरीय धाराएँ गर्म या ठंडी हो सकती है। सामान्यतः गर्म महासागरीय धाराएँ भूमध्य रेखा के निकट उत्पन्न होती है एवं ध्रुवों की ओर प्रवाहित होती है। ठंडी धाराएँ,  ध्रुवों या उच्च अक्षांशों से उष्णकटिबंधीय निम्न अक्षांश की ओर प्रवाहित होती है।
2. कारण बताइए –
(क) समुद्री जल नमकीन होता है ।
उत्तर – महासागरों एवं समुद्रों का जल लवणीय होता है। क्योंकि इसमें अधिकांश नमक – सोडियम क्लोराइड या खाने में उपयोग किए जाने वाला नमक होता है। 
नोट : ◆ लवणता 1000 ग्राम जल में मौजूद नमक की मात्रा होती है। महासागर की औसत लवणता 35 भाग प्रति हजार ग्राम है।
◆ इजरायल के मृत सागर में 340 ग्राम प्रति लीटर लवणता होती है।
(ख) जल की गुणवत्ता का ह्रास हो रहा है ।
उत्तर – आज कल मनुष्य की क्रियाकलापों के कारण ही  काफी मात्रा में जल प्रदूषित हो रहा है। उद्योगों से निकलने वाले हानिकारक रसायन युक्त जल तथा शहरों से निकलने वाले प्रदूषित जल के विभिन्न जलाशयों में मिलने से जल की गुणवत्ता का निरंतर ह्रास हो रहा है।
3. सही उत्तर चिह्नित कीजिए –
(क) वह प्रक्रम जिस में जल लगातार अपने स्वरुप को बदलता रहता है और महासागर, वायुमंडल एवं स्थल के बीच चक्कर लगाता रहता है ?
(i) जल चक्र
(ii) ज्वार भाटा 
(iii) महासागरीय धाराएँ
उत्तर – (i) जल चक्र
(ख) सामान्यत: गर्म महासागरीय धाराएँ उत्पन्न होती है :
(i) ध्रुव के निकट
(ii) भूमध्य रेखा के निकट
(iii) दोनों में से कोई नहीं
उत्तर – (ii) भूमध्य रेखा के निकट
(ग) दिन में दो बार नियम से महासागरीय जल का उठना एवं गिरना कहलाता है ?
(i) ज्वार-भाटा
(ii) महासागरीय धाराएँ
(iii) तरंगें
उत्तर –(i) ज्वार-भाटा
4. निम्नलिखित स्तंभों को मिलाकर सही जोड़ी बनाइए-
                               उत्तर 
(क) कैस्पियन सागर- (i) विशालतम झील
(ख) ज्वार-भाटा- (ii) जल में आवधिक चढ़ाव एवं उतार
 (ग) सुनामी- (iii) तीव्र भूकंपीय तरंगें

(घ) महासागरीय धाराएँ- (iv) निश्चित मार्ग में प्रवाहित होने वाली जल-धाराएँ


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वायु/AIR/NCERT CHAPTER-4 CLASS 7

NCERT CLASS-7 Geography Solutions    

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          अध्याय-4. वायु (Air)  

एनसीईआरटी के 7वीं कक्षा का भूगोल विषय का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

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Air
      
1.निम्न प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
 
(क) वायुमंडल क्या है ?
उत्तर – पृथ्वी के चारों ओर घिरी हुई वायु के आवरण को वायुमंडल कहा जाता है। पृथ्वी पर सभी जीव जीवित रहने के लिए वायुमंडल पर निर्भर है। यह सूर्य की हानिकारक किरणों के प्रभाव से हमारी रक्षा भी करता है।
(ख) वायुमंडल का अधिकतर भाग किन दो गैसों से बना है?
उत्तर – वायुमंडल का अधिकतर भाग नाइट्रोजन तथा ऑक्सीजन जैसी दो गैसों से बना है।
(ग) वायुमंडल में कौन-सी गैस हरित गृह प्रभाव पैदा करती है ?
उत्तर – कार्बन डाइऑक्साइड वायुमंडल में फैलकर पृथ्वी से विकिरित ऊष्मा को पृथ्वी पर रोककर ग्रीन हाउस प्रभाव पैदा करती है। इसीलिए इसे ग्रीन हाउस गैस भी करते हैं। इसके अभाव में धरती इतनी ठंडी हो जाती कि इस पर रहना असंभव होता।
(घ) मौसम किसे कहते हैं ?
उत्तर – किसी स्थान या क्षेत्र के खास समय में वायुमंडलीय दशाओं को मौसम का कहा जाता है। अर्थात मौसम वायुमंडल की प्रत्येक घंटे तथा दिन-प्रतिदिन की स्थिति होती है। वायुदाब का क्षैतिज वितरण किसी स्थान पर उपस्थित वायुदाब के ताप द्वारा प्रभावित होता है।
(च) वर्षा के तीन प्रकार लिखें  ।
उत्तर – वर्षा के तीन प्रकार निम्नलिखित है –
(i) संवहनीय वर्षा
(ii) पर्वतीय वर्षा
(iii) चक्रवातीय वर्षा
(छ) वायुदाब क्या है ?
उत्तर – पृथ्वी की सतह पर वायु के भार द्वारा लगाया गया दाब, वायुदाब कहलाता है। वायुमंडल में ऊपर की ओर जाने पर दाब तेजी से गिरने लगता है। समुद्र स्तर पर वायुदाब सर्वाधिक होता है और ऊँचाई पर जाने पर यह घटता जाता है।
2. सही उत्तर चिह्नित कीजिए –
(क) निम्नलिखित में से कौन-सी गैस हमें सूर्य की हनिकारक किरणों से बचाती है ?
(i) कार्बन डाईऑकसाईड
(ii) नाईट्रोजन
(iii) ओजोन
उत्तर – (iii) ओजोन
(ख) वायुमंडल की सबसे महत्वपूर्ण परत है
(i) क्षोभमंडल
(ii) बाह्य वायुमंडल
(iii) मध्यमंडल
उत्तर – (i) क्षोभमंडल
(ग) वायुमंडल की निन्म परतों में कौन सी बादल विहीन है?
(i) क्षोभमंडल
(ii) समतापमंडल
(iii) मध्यमंडल
उत्तर – (ii) समतापमंडल
(घ) वायुमंडल की परतों में जब हम ऊपर जातें हैं, तब वायुदाब
(i) बढ़ता है
(ii) घटता है
(iii) समान रहता है
उत्तर –(ii) घटता है
(च) जब वृष्टि तरल रूप में पृथ्वी पर आती है, उसे हम कहते हैं
(i) बादल
(ii) वर्षा
(iii) हिम
उत्तर –(ii) वर्षा
3. निम्नलिखित स्तंभों को मिलाकर सही  जोड़े बनाइए –
                            उत्तर-
(क) व्यापारिक पवनें – (v) स्थायी पवन
(ख) लू –      (vi) स्थानीय पवन
(ग) मानसून –  (ii) मौसमी पवन
(घ) पवन –   (iii) पवन की क्षैतिज गति
 
4. कारण बताइए
(क) आर्द्र दिन में गीले कपड़े सूखने में अधिक समय लेते हैं।
उत्तर – जब जल पृथ्वी एवं विभिन्न जलाशयों से वाष्पित होता है तो यह जलवाष्प बन जाता है। वायु में किसी भी समय जलवाष्प की मात्रा को आर्द्रता कहते हैं। जब वायु में जलवाष्प की मात्रा अत्यधिक होती है तो उसे हम आर्द्र दिन कहते हैं।
   
       जैसे-जैसे वायु गर्म होती जाती है इसकी जलवाष्प धारण करने की क्षमता बढ़ती जाती है और इस प्रकार यह और अधिक आर्द्र हो जाती है। यही कारण है कि आर्द्र दिन में कपड़े सूखने में काफी समय लगता है एवं हमारे शरीर से पसीना आसानी से नहीं सूखता और हम असहज महसूस करते हैं।
(ख) भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर जाने पर आपतन की मात्रा घटती जाती है ।

उत्तर – आपतन एक महत्वपूर्ण कारक जो तापमान के वितरण को प्रभावित करता है। सूर्य से आने वाली वह ऊर्जा जिसे पृथ्वी रोक लेती है, आप आपतन कहलाती है। आपतन (सूर्यातप) की मात्रा भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर जाने पर घटती जाती है। इसीलिए तापमान भी उसी प्रकार घटता जाता है।


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 हमारी बदलती पृथ्वी/OUR CHANGING EARTH/NCERT CHAPTER 3,CLASS 7

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         अध्याय-3. हमारी बदलती पृथ्वी (OUR CHANGING EARTH)

एनसीईआरटी के 7वीं कक्षा का भूगोल विषय का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

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OUR CHANGING EARTH
1. निम्न प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(क) प्लेटें क्यों घूमती है?
उत्तर – पृथ्वी के अंदर पिघले हुए मैग्मा में होने वाली गति के कारण प्लेटें घूमती है। पृथ्वी के अंदर पिघला हुआ मैग्मा एक वृत्तीय रूप में घूमता रहता है।
(ख) बहिर्जनिक एवं अंतरर्जनिक बल क्या है?
उत्तर – जो बल पृथ्वी के आंतरिक भाग में घटित होते हैं उन्हें अन्तर्जनित बल (एंडोजेनिक फोर्स) कहते हैं।अंतरर्जनिक बाल कभी आकस्मिक गति उत्पन्न करते हैं तो कभी धीमी गति एवं जो बल पृथ्वी की सतह पर उत्पन्न होते हैं उन्हें बहिर्जनिक (एक्सोजेनेटिक फोर्स) कहते हैं। 
(ग) अपरदन क्या है?
उत्तर – भू-दृश्य पर जल, पवन एवं हिम जैसे विभिन्न घटकों के द्वारा होने वाले क्षय को अपरदन कहते हैं। 
(घ) बाढ़कृत मैदान का निर्माण कैसे होता है?
उत्तर – बाढ़ के कारण नदी के तटों के निकटवर्ती क्षेत्रों में महीन मिट्टी एवं अन्य पदार्थों का निक्षेपण करती है। ऐसी मिट्टी एवं पदार्थों को अवसाद कहते है और इससे बनने वाले समतल उपजाऊ मैदान को ही बाढ़कृत मैदान कहते है। 
(च) बालू टिब्बा क्या है?
उत्तर – मरुस्थलीय क्षेत्र में जब पवन चलती है तो वह अपने साथ रेत को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुँचाती है और जब पवन का बहाव रुकता है तो रेत गिरकर छोटी पहाड़ी का निर्माण करती है जिसे बालू टिब्बा कहा जाता है।
(छ) समुद्री पुलिन का निर्माण कैसे होता है?
उत्तर – समुद्री तरंगे किनारों पर अवसाद जमा कर समुद्री पुलिन का निर्माण करती है। 
(ज) चाप झील क्या है ?
उत्तर – जब कुछ समय के बाद विसर्प लूप नदी से कट जाते हैं और एक अलग झील बनाते हैं तो ऐसे झील को ही चाप झील कहा जाता हैं।
 2. सही (√) उत्तर चिह्नित कीजिए –
(क) इनमें से कौन-सी समुद्र तरंग की विशेषता नहीं है?
(i) शैल
(ii) किनारा
(iii) समुद्री गुफा
उत्तर – (ii) किनारा
(ख) हिमनद की निक्षेपण विशेषता है –
(i) बाढ़कृत मैदान
(ii) पुलिन
(iii) हिमोढ़
उत्तर – (iii) हिमोढ़
(ग) पृथ्वी की आकस्मिक गतियों के कारण कौन-सी घटना होती है?
(i) ज्वालामुखी
(ii) वलन
(iii) बाढ़कृत मैदान
उत्तर – (i) ज्वालामुखी
(घ) छत्रक शैलें पाई जाती है
(i) रेगिस्तान में
(ii) नदी घाटी में
(iii) हिमनद में
उत्तर –(i) रेगिस्तान में 
(च) चापझील यहाँ पाई जाती हैं
(i) हिमनद
(ii) नदी घटी
(iii) रेगिस्तान
उत्तर – (ii) नदी घटी 
3. निम्नलिखित स्तंभों को मिलाकर सही जोड़े बनाइए- 
                          उत्तर 
(क) हिमनद – (iii) बर्फ की नदी
(ख) विसर्प –  (iv) नदियाँ
(ग) पुलिन –    (i) समुद्री तट
(घ) बालू टिब्बा  –  (viii) रेगिस्तान
(च) जलप्रपात  –  (vii) कठोर संस्तर
(छ) भूकंप –    (v) पृथ्वी का कंपन
 
4. कारण बताइए –
(क) कुछ शैल छत्रक के आकार में होते हैं।
उत्तर – पवन शैल के ऊपरी भाग के अपेक्षा निचले भाग को आसानी से काटती है। इसीलिए ऐसी शैल के आधार संकीर्ण एवं शीर्ष विस्तृत होते हैं जो देखने में छत्रक के आकार में होते है।
(ख) बाढ़कृत मैदान बहुत उपजाऊ होते हैं।
उत्तर – बाढ़कृत मैदान बहुत उपजाऊ होते हैं इसके निम्नलिखित कारण है-
◆ बाढ़ के कारण नदी तट के आसपास के क्षेत्र जलमग्न हो जाते हैं।
◆ निकटवर्ती क्षेत्रों में महीन मिट्टी एवं अन्य पदार्थों का निक्षेपण हो जाता है।
◆ निक्षेपित पदार्थों में ह्यूमस की मात्रा काफी अधिक होती है।
◆ यह मैदान लगभग समतल होने के कारण कृषि कार्य के लिए काफी उपयुक्त  है।
(ग) समुद्री गुफा स्टैक के रूप में परिवर्तित हो जाती है।
उत्तर – समुद्री तरंग के अपरदन एवं निक्षेपण से तटीय स्थलआकृतियाँ बनती है। समुद्री तरंगे लगातार शैलों से टकराती रहती है, जिससे दरार विकसित होती है। समय के साथ यह बड़ी और चौड़ी होती जाती हैं। इनको समुद्री गुफा कहते हैं। इन गुफाओं के बड़े होते जाने पर इनमें केवल छत ही बचती है, जिससे तटीय मेहराब बनते हैं। लगातार अपरदन छत को भी तोड़ देता है और केवल दीवारें बचती हैं। दीवार जैसी इन आकृतियों को ही स्टैक करते हैं।
(घ) भूकंप के दौरान इमारतें गिरती है।
उत्तर – भूकंप के दौरान इमारतें गिरने का निम्नलिखित कारण हो सकते हैं-
◆ भूकंप के दौरान कंपन बहुत होती है।
◆ भूकंप की तीव्रता सामान से ज्यादा होना।

◆ मकान का भूकंपरोधी न होना।


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हमारी पृथ्वी के अन्दर/ INSIDE OUR EARTH/CHAPTER-2 NCERT CLASS-7

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              अध्याय-2. हमारी पृथ्वी के अन्दर (INSIDE OUR EARTH)

एनसीईआरटी के 7वीं कक्षा का भूगोल विषय का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

सरल एवं आसान शब्दों में उत्तर देना सीखें


अध्याय-2. हमारी पृथ्वी के अन्दर INSIDE OUR EARTH

1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

(क) पृथ्वी के तीन परतें है क्या है? 

उत्तर – पर्पटी, मैंटल तथा क्रोड

(ख) शैल क्या है?

उत्तर – पृथ्वी की पर्पटी बनाने वाले खनिज पदार्थ के किसी भी प्राकृतिक पिंड को शैल करते हैं। शैल विभिन्न रंग, आकार एवं गठन की हो सकती है।

(ग) तीन प्रकार की शैलों के नाम लिखें।

उत्तर – मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती है-

◆ आग्नेय (इग्नियस) शैल

◆ अवसादी (सेडीमेंट्री) शैल एवं 

◆ कायांतरित (मेटामॉरफिक) शैल

(घ) बहिर्भेदी एवं अंतर्भेदी शैल का निर्माण कैसे होता है?

उत्तर – पृथ्वी के आंतरिक भाग से जब निकल कर द्रवित लावा पृथ्वी की सतह पर आता है तो यह तेजी से ठंडा होकर ठोस बन जाता है, पर्पटी पर इस प्रकार से बने ठोस शैल को बहिर्भेदी आग्नेय शैल कहते हैं। जैसे – बेसाल्ट।

     पृथ्वी के आंतरिक भाग से जब निकलकर द्रवित लावा कभी-कभी भूपर्पटी के अंदर गहराई में ही ठंडा हो जाता है तो इस प्रकार बने ठोस शैलों को अंतर्वेदी आग्नेय शैल कहते हैं। जैसे -ग्रेनाइट।

(च) शैल चक्र से आप क्या समझते हैं?

उत्तर – किसी निश्चित दशाओं में एक प्रकार की शैल चक्रीय तरीके से एक-दूसरे में परिवर्तित हो जाते हैं। इस प्रकार एक शैल से दूसरे शैल में परिवर्तित होने की इस प्रक्रिया को शैल चक्र कहा जाता है।

       द्रवित मैग्मा ठंडा होकर ठोस आग्नेय शैल बन जाता हैं। ये आग्नेय शैल छोटे-छोटे टुकड़ों में टूट कर एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित होकर अवसादी शैल का निर्माण करते हैं। अत्यधिक ताप एवं दाब के कारण ये आग्नेय एवं अवसादी शैल पुनः कायांतरित शैल में बदल जाते हैं।

        पुनः अत्यधिक ताप एवं दाब के कारण कायांतरित शैल पिघलकर द्रवित मैग्मा बन जाता है। यह द्रवित मैग्मा पुनः ठंडा होकर आग्नेय शैल में परिवर्तित हो जाता है।

(छ) शैलों के क्या उपयोग है ?

उत्तर – शैल का निम्नलिखित उपयोग है-

◆ सड़क बनाने में,

◆ घर एवं इमारत बनाने में,

◆ कई प्रकार के खेलों जैसे सात पत्थर, पांच पत्थर इत्यादि में।

(ज) कायांतरित शैल क्या है ?

उत्तर – जब अत्यधिक ताप एवं दाब के कारण आग्नेय एवं अवसादी शैलों का रूपांतरण हो जाता है तब इससे एक नया शैल का निर्माण होता है, जिसे कायांतरित शैल कहा जाता है। जैसे – चिकनी मिट्टी स्लेट में एवं चुना पत्थर संगमरमर में रूपांतरित हो जाता है।

2. सही उत्तर चिह्नित कीजिए –

(क) द्रवित मैग्मा से बने शैल

(i) आग्नेय

(ii) अवसादी

(iii) कायांतरित

उत्तर – (i) आग्नेय

(ख) पृथ्वी की सबसे भीतरी परत

(i) पर्पटी

(ii) क्रोड

(iii) मैंटल

उत्तर – (ii) क्रोड

(ग) सोना, पेट्रोलियम एवं कोयला किसके उदहारण है?

(i) शैल

(ii) खनिज

(iii) जीवाश्म

उत्तर – (ii) खनिज

(घ) शैल, जिसमें जीवाश्म होते हैं

(i) अवसादी

(ii) कायांतरित

(iii) आग्नेय

उत्तर – (i) अवसादी

(च) पृथ्वी की सबसे पतली परत हैं

(i) पर्पटी

(ii) मैंटल

(iii) क्रोड

उत्तर – (i) पर्पटी

3. निम्नलिखित स्तंभों को मिलाकर सही जोड़े बनाइए –

                          उत्तर

(क) क्रोड –   (v) सबसे भीतरी परत

(ख) खनिज –  (iv) इसका एक निश्चित रासायनिक मिश्रण होता है।

(ग) शैल –   (ii) सड़क एवं इमारत बनाने के लिए उपयोग होता है।

(घ) चिकनी मिट्टी – (vi) स्लेट में बदलता है ।

(च) सिएल – (iii) सिलिका एवं एलुमिना से बनता है।

4. कारण बताइए  –

(क) हम पृथ्वी के केंद्र तक नहीं जा सकते हैं?

उत्तर – पृथ्वी के केंद्र की गहराई समुद्र सतह से 6000 किलोमीटर नीचे है, साथ ही साथ केंद्रीय क्रोड का तापमान एवं दाब काफी उच्च होता है जिसकी खुदाई करना बिल्कुल असंभव है।

(ख) अवसादी शैल अवसाद से बनती है। 

उत्तर – शैल लुढ़ककर, चटककर तथा एक-दूसरे से टकराकर छोटे-छोटे टुकड़ों में टूट जाती है। इन छोटे कणों को अवसाद का कहते है। ये अवसाद हवा, जल आदी के द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुँच कर जमा कर दिए जाते हैं। यह अदृढ़ अवसाद दबकर एवं कठोर होकर शैल की परत बनाते हैं। इस प्रकार की शैलों को अवसादी शैल कहते हैं। जैसे- बलुआ पत्थर, रेत इत्यादि।

(ग) चूना पत्थर संगमरमर में बदलता है।

उत्तर – अत्याधिक उच्च ताप एवं दाब के कारण चूना पत्थर का रूपांतरण संगमरमर में  हो जाता है।

नोट : जीवाश्म – शैलों की परतों में दबे मृत पौधों एवं जीव जंतुओं के अवशेषों को जीवाश्म करते है।


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अध्पयाय 1 पर्यावरण/Environment/CHAPTER-1 NCERT CLASS-7

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अध्याय-1. पर्यावरण (Environment)

एनसीईआरटी के 7वीं कक्षा का भूगोल विषय का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

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   Environment

1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

(क) पारितंत्र क्या है?

उत्तर – वैसे तंत्र जिसमें समस्त जीवधारी आपस में एक-दूसरे के साथ तथा पर्यावरण के उन भौतिक एवं रासायनिक कारकों के साथ परस्पर क्रिया करते हैं जिसमें वे निवास करते हैं, उसे पारितंत्र कहा जाता है। वह सब ऊर्जा और पदार्थ के स्थानांतरण द्वारा सम्बद्ध है। 

      इस प्रकार सभी पेड़-पौधे, जीव-जंतु एवं मानव अपने आसपास के पर्यावरण पर आश्रित होते हैं। प्रायः वे एक-दूसरे पर भी आश्रित हैं। जीवधारियों का आपसी एवं अपने आस-पास के पर्यावरण के बीच का संबंध ही पारितंत्र का निर्माण करता है। अधिक वर्षा वाले वन घासस्थल, रेगिस्तान, पर्वत, नदी, महासागर एवं छोटे-से ताल का भी एक पारितंत्र हो सकता है।

(ख) प्राकृतिक पर्यावरण से आप क्या समझते हैं? 

उत्तर – भूमि, जल, वायु, पेड़-पौधे एवं जीव-जंतुओं से मिलकर बनने वाले पर्यावरण को प्राकृतिक पर्यावरण कहा जाता है।

(ग) पर्यावरण के प्रमुख घटक कौन-कौन से है ?

उत्तर – पर्यावरण के प्रमुख घटक दो होते हैं-

जैविक घटक (जीवीय) – पेड़-पौधे तथा जीव-जंतु

अजैविक घटक (अजीवीय) – भूमि, जल, वायु इत्यादि।

(घ) मानव निर्मित पर्यावरण के चार उदाहरण दीजिए।

उत्तर – मानव निर्मित पर्यावरण के चार उदाहरण निम्नलिखित है –

◆फसल उगाना 

◆पशुपालन 

◆ औद्योगिक क्रांति

◆ व्यापार एवं वाणिज्य

(च) स्थल मंडल क्या है ?

उत्तर – पृथ्वी की ठोस पर पर्पटी या कठोर ऊपरी परत को स्थलमंडल कहते हैं। यह चट्टानों एवं खनिजों से बना होता है एवं मिट्टी की पतली परत से ढका होता है। या पहाड़, पठार, मैदान, घाटी आदि जैसी विभिन्न स्थल आकृतियों वाला विषम धरातल होता है। ये स्थलाकृतियाँ महाद्वीपों के अलावा महासागर की सतह पर भी पाई जाती है। अर्थात स्थलमंडल वह क्षेत्र है जो हमें वन, कृषि एवं मानव बस्तियों के लिए भूमि पशुओं को चरने के लिए घास स्थल प्रदान करता है। यह खनिज संपदा का भी एक सोच है।

(छ) जीवीय पर्यावरण के दो प्रमुख घटक क्या है?

उत्तर – जीवीय पर्यावरण – पेड़-पौधे तथा जीव-जंतु।

(ज) जैवमंडल क्या है ?

उत्तर- पादप एवं जीव-जंतु मिलकर जलमंडल या सजीव संसार का निर्माण करते हैं। यह पृथ्वी वह संकीर्ण क्षेत्र है जहाँ स्थल, जल एवं वायु मिलकर जीवन को संभव बनाते हैं।

1. सही उत्तर चिह्नित कीजिए –

(क) इनमें से कौन-सा प्राकृतिक परितंत्र नहीं है?

(i) मरुस्थल

(ii) ताल

(iii) वन

उत्तर – (ii) ताल

(ख) इनमें से कौन सा मानवीय पर्यावरण का घटक नहीं है?

(i) स्थल

(ii) धर्म

(iii) समुदाय

उत्तर – (i) स्थल

(ग) इनमें से कौन-सा मानव-निर्मित पर्यावरण है?

(i) पहाड़

(ii) पर्वत

(iii) सड़क

उत्तर – (iii) सड़क

(घ) इनमें से कौन-सा पर्यावरण के लिए खतरा है?

(i) पादप-वृद्धि

(ii) जनसंख्या वृद्धि

(iii) फसल वृद्धि

उत्तर –(ii) जनसंख्या वृद्धि

3. निम्नलिखित स्तंभों को मिलाकर सही जोड़े बनाइए-

                              उत्तर 

(क) जैवमंडल  – (v) वह संकीर्ण क्षेत्र जहाँ स्थल, जल एवं वायु पारस्परिक क्रिया करते हैं।

(ख) वायुमंडल – (i) पृथ्वी को घेरने वाले वायु की चादर 

(ग) जलमंडल – (ii) जलीय क्षेत्र

(घ) पर्यावरण – (iv) हमारे आस-पास का क्षेत्र

4. कारण बताइए –

(क) मानव अपने पर्यावरण में परिवर्तन करता है।

उत्तर – कार का धूआँ वायु को प्रदूषित करता है, पानी को पात्र में एकत्रित किया जाता है, भोजन को बर्तनों में परोसा जाता है और भूमि पर कारखानों का निर्माण होता है।

           मानव कार, मिल, कारखानों एवं बर्तनों का निर्माण करता है। इस प्रकार से मानव प्राकृतिक पर्यावरण में परिवर्तन करता है।

(ख) पौधे एवं जीव जंतु एक दूसरे पर आश्रित है।

उत्तर – सभी पेड़-पौधे जीव-जंतु एवं मानव अपने आसपास के पर्यावरण पर आश्रित होते हैं। प्रायः वे एक-दूसरे पर भी आश्रित है। जीवधारियों का आपसी एवं अपने आस-पास के पर्यावरण के बीच का संबंध ही पारितंत्र का निर्माण करता है। अधिक वर्षा वाले वन, घासस्थल, रेगिस्तान, पर्वत, झील, नदी, महासागर एवं छोटे-से ताल भी एक पारितंत्र हो सकता है।


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