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अध्याय-7 मानचित्र अध्ययन

बिहार बोर्ड वर्ग-6 Geography Solution

अध्याय-7 मानचित्र अध्ययन


अध्याय-7 मानचित्र अध्ययन

अभ्यास

1. सही विकल्प को चुनें।

(i) जमीन के बड़े भाग को कागज पर दिखाने के लिए प्रयोग करते हैं:

(क) छोटे मापक का

(ख) बड़े मापक का

(ग) दोनों मापक का

(ङ) उपर्युक्त सभी

उत्तर- (क) छोटे मापक का

(ii) जिस मानचित्र में पर्वत पठार, मैदान इत्यादि को दर्शाते हैं उसे कहते हैं-

(क) थिमेटिक मानचित्र

(ख) भौतिक मानचित्र

(ग) राजनैतिक मानचित्र

(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं।

उत्तर- (ख) भौतिक मानचित्र

(iii) मानचित्र में मैदान को दिखाते हैं-

(क) काले रंग से

(ख) नीले रंग से

(ग) हरे रंग से

(घ) लाल रंग से

उत्तर- (ग) हरे रंग से

(iv) मानचित्र में दक्षिण दिशा होती है-

(क) दायीं ओर

(ख) बायीं ओर

(ग) ऊपर की ओर

(घ) नीचे की ओर

उत्तर- (घ) नीचे की ओर

(v) मानचित्र निर्माण में ध्यान रखना चाहिए-

(क) संकेतों का

(ख) दिशाओं का

(ग) मापक का

(घ) उपर्युक्त सभी का

उत्तर- (घ) उपर्युक्त सभी का

2. खाली जगहों को भरिए।

(i) मानचित्र में जलीय भाग को नीला रंग से दिखाया जाता है।

(ii) मानचित्र में उत्तर दिशा हमेशा ऊपर की तरफ होती है।

(iii) जनसंख्या मानचित्र थिमेटिक मानचित्र का उदाहरण है।

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें।

(i) चित्र एवं मानचित्र में क्या अंतर है?

उत्तर- चित्र एवं मानचित्र में निम्नलिखित आधारभूत अंतर है-

⇒ चित्रों में आमतौर पर चीजें वैसी ही बनाई जाती हैं, जैसी वह दिखती हैं परन्तु मानचित्र में चीजों को चिह्न या संकेत के रूप में दिखाई जाती है।

⇒ चित्र आमतौर पर ऐसे बनाये जाते हैं जैसे कोई उस जगह किनारे खड़े होकर देखता हो और वह उसी प्रकार दिखाई भी देता है लेकिन मानचित्र हमेशा ऐसा बनाया जाता है जैसे उस जगह को ऊपर या आसमान से देख रहे हैं।

⇒ चित्र में मापक (स्केल) का उपयोग नहीं होता परन्तु मानचित्र में मापक (स्केल) का उपयोग किया जाता है।

(ii) अगर आपको विश्व का मानचित्र बनाना हो तो किन-किन बातों का ध्यान रखना होगा?

उत्तर- अगर विश्व का मानचित्र बनाना हो तो निम्न बातों को ध्यान में रखकर बना सकते-

⇒ नक्शे में अगर कोई दुरी सेमी० में है तो वह वास्तविक रूप में कमरे में 1 मीटर के बराबर होगा।

⇒ 1 सेमी = 1 मीटर, जिससे पता किया जा सकता है कि नक्शे में जो दूरी है वह वास्तव में कितनी दूरी के बराबर है। इस प्रकार हम मानचित्र को छोटा, बड़ा कर सकते हैं। जितना बड़ा मानचित्र बनाना होता है पैमाने का निर्धारण भी उसी प्रकार करते हैं।

⇒ मानचित्र में दिशा सूचक रेखा बनाई जाती है।

जैसे-
अध्याय-7 मानचित्र अध्ययन

⇒ मानचित्र से हमें बहुत अधिक जानकारी प्राप्त होती है। मानचित्रों में दी गई सूचनाओं के आधार पर उनका नामकरण किया जाता है। जैसे- जलवायु मानचित्र, वनस्पति मानचित्र, जनसंख्या मानचित्र, वर्षा मानचित्र, उद्योग मानचित्र आदि।

⇒ नक्शे में रंगों एवं चिह्नों की सहायता से हमें वहाँ की जानकारी प्राप्त करने में सहायता होती है। जैसे- जलाशय-नीला रंग, पर्वत- भूरा रंग, पठार- पीला रंग, मैदान- हरा रंग आदि।

इस प्रकार हम उपर्युक्त इन सभी बातों को ध्यान में रखकर विश्व का मानचित्र बना सकते हैं।

(iii) मानचित्र में इस्तेमाल किए गए रंग किसके प्रतीक हैं?

उत्तर- मानचित्र में जलाशय- नीले रंग का, पर्वत- भूरा रंग का, पठार- पीला रंग का और मैदान- हरा रंग का प्रतीक है।

(iv) मानचित्र के कितने प्रकार है? लिखें।

उत्तर- मानचित्र के निम्नलिखित प्रकार होते हैं:-

⇒ पर्वत, पठारों, मैदानों, नदियों, महासागरों आदि को दर्शाने वाले मानचित्र, प्राकृतिक मानचित्र कहलाते हैं।

⇒ गाँव, शहर, राज्य, देश एवं विश्व के विभिन्न देशों तथा उनकी सीमाओं को दर्शाने वाले मानचित्र, राजनीतिक मानचित्र कहलाते हैं।

⇒ इन मानचित्रों में दी गई सूचनाओं के आधार पर उनका नामकरण किया जाता है। जैसे-जलवायु मानचित्र, वनस्पति मानचित्र, जनसंख्या मानचित्र, वर्षा मानचित्र, उद्योग मानचित्र आदि।

(v) मानचित्र में दिशाओं का निर्धारण कैसे करते हैं?

उत्तर- मानचित्र में दिशाओं का निर्धारण दिशा सूचक रेखा के द्वारा किया जाता है। मानचित्र में उत्तर दिशा जो ऊपर की ओर है उसे उत्तर दिशा सूचक रेखा के माध्यम से दिखाई जाती है। जैसे-उत्तर की ओर चिह्न को दर्शाया जाता है।

जैसे-
अध्याय-7 मानचित्र अध्ययन

(vi) मापक क्या है? उदाहरण देकर समझाएँ।

उत्तर- मानचित्र पर दो किन्हीं स्थानों के बीच की दूरी और धरातल पर उन्हीं दो स्थानों के बीच की वास्तविक दूरी के अनुपात को मापक/पैमाना (Scale) कहते हैं। उदाहरण के लिए यदि किन्हीं दो स्थानों के बीच की वास्तविक दूरी 500 किमी० है, और इसे मानचित्र पर 5 सेमी० द्वारा दिखाया जाता है तो संबंधित मानचित्र का पैमाना 1 सेमी० = 100 किमी० होगा।


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अध्याय-6 पृथ्वी और ग्लोब

बिहार बोर्ड वर्ग-6 Geography Solution

अध्याय-6 पृथ्वी और ग्लोब


अध्याय-6 पृथ्वी और ग्लोबअभ्यास

1. सही विकल्प चुनें-

(i) एक देशांतर से दूसरे देशांतर की दूरी तय करने में समय लगता है-
(क) चार मिनट
(ख) पाँच मिनट
(ग) चालीस मिनट
(घ) चार संकेण्ड
उत्तर- (क) चार मिनट

(ii) सबसे अधिक गर्मी पड़ती है-
(क) शीत कटिबंध में
(ख) शीतोष्ण कटिबंध में
(ग) उष्ण कटिबंध में
(घ) उत्तरी ध्रुव में
उत्तर- (ग) उष्ण कटिबंध में

(iii) कर्क रेखा है-
(क) 90° अक्षांश पर
(ख) 23½° उत्तरी अक्षांश
(ग) 23½° दक्षिणी अक्षांश
(घ) ध्रुव पर
उत्तर- (ख) 23½° उत्तरी अक्षांश

(iv) अन्तर्राष्ट्रीय तिथि रेखा से पूरब जाने पर-
(क) दिन-रात में परिवर्तन होता है
(ख) एक तिथि घटा दी जाती है
(ग) एक तिथि बढ़ा दी जाती है
(घ) तिथि में कोई परिवर्तन नहीं करते हैं
उत्तर- (ग) एक तिथि बढ़ा दी जाती है

अध्याय-6 पृथ्वी और ग्लोब

2. कम शब्दों में उत्तर दें-

(क) पृथ्वी के दिये गये नमूने का क्या नाम है?
उत्तर- पृथ्वी के दिये गये नमूने का नाम ग्लोब है।

(ख) यह नमूना किस आकृति का होगा? जैसे त्रिकोण, गोल, त्रिभुजाकार आदि।
उत्तर- यह नमूना गोल आकृति का होगा।

(ग) इस नमूने की आकृति वाले किन्हीं अन्य दो वस्तुओं के नाम लिखिये।
उत्तर- इस नमूने की आकृति वाले संतरा, खरबूजा हैं।

(घ) पृथ्वी के इस नमूने पर कौन-सी रेखाएँ बनी हैं? उनके नाम लिखिये।
उत्तर- पृथ्वी के इस नमूने पर अक्षांश रेखा,भूमध्य रेखा, कर्क रेखा, मकर रेखा, आर्कटिक रेखा और अन्टार्टिक बनी है।

(ङ) इस नमूने के अलावा, आप और किन माध्यमों से पृथ्वी पर स्थित किसी स्थान का पता लगा सकते हैं?
उत्तर- इस नमूने के अलावा, मैं आसमान में सूरज की स्थिति या रात में ध्रुवतारे को देखकर किसी स्थान की स्थिति का अनुमान लगा सकते हैं, लेकिन इसमें बहुत समस्या होती है।

       पृथ्वी पर स्थित स्थानों को जानने के लिए कम्पास (दिक् सूचक) और नक्शे से ठिकाना खोजना आसान हो गया। इस प्रकार इन माध्यमों के द्वारा भी हम पृथ्वी पर स्थित स्थानों को पता लगा सकते हैं।

3. ग्लोब पर कुछ पड़ी एवं खड़ी रेखाएँ बनी हुई हैं। इन्हें गौर से देखकर निम्न प्रश्नों के उत्तर तालिका में लिखिए-

अध्याय-6 पृथ्वी और ग्लोब

(क) पड़ी/खड़ी रेखाएँ किन दिशाओं के बीच में खींची गयी-
उत्तर- पड़ी रेखायें पूरब-पश्चिम और खड़ी रेखाएँ उत्तर-दक्षिण दिशाओं के बीच में खींची गयी हैं।

(ख) अन्तर्राष्ट्रीय तिथि रेखा क्या है?
उत्तर- पृथ्वी का आकार गोल है जो एक वृत्त के समान है। एक वृत्त में 360° होते हैं। इसी आधार पर पृथ्वी पर 360 देशांतर रेखाएँ खींची जा सकती हैं। इनमें दो देशांतर रेखाएँ महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। ये हैं 0° तथा 180° देशांतर रेखाएँ।

        0° देशांतर को प्रधान देशांतर रेखा या प्रधान मध्याह्न रेखा तथा 180º देशांतर रेखा को अन्तर्राष्ट्रीय तिथि रेखा कहते हैं।

(ग) किन्हीं दो पड़ी अथवा खड़ी रेखाओं के बीच किस प्रकार की दूरी है? (समान/असमान)
उत्तर- किन्हीं दो पड़ी रेखाओं के बीच की दूरी समान और खड़ी रेखाओं के बीच की दूरी असमान होती है।

(घ) पड़ी/खड़ी रेखाओं को क्या कहते हैं?
उत्तर- पड़ी रेखाओं को अक्षांश रेखा और खड़ी  को देशांतर रेखा कहते हैं।

(ङ) पड़ी एवं खड़ी रेखाओं में से कौन-सी आपस में मिलती है?
उत्तर- पड़ी एवं खड़ी रेखाओं में से खड़ी रेखा आपस में मिलती है।

4. बताइये-

(i) अक्षांश वृत्त किसे कहते हैं?
उतर- भूमध्य रेखीय वृत्त एवं किसी स्थान के बीच जो कोण बनता है उसे उस स्थान का अक्षांश वृत्त कहा जाता है।

(ii) दो प्रमुख अक्षांश रेखाओं के नाम बताइये।
उत्तर- दो प्रमुख अक्षांश रेखाओं के नाम-विषुवत एवं कर्क रेखा हैं।

(iii) पृथ्वी पर कितने कटिबंध हैं? इन कटिबंधों की विशेषताएँ बतलाइये।
उत्तर- पृथ्वी पर तीन कटिबंध हैं।

(क) उष्ण कटिबंध- कर्क एवं मकर रेखाओं के बीच अन्य अक्षांशों की तुलना में सबसे अधिक गर्मी पड़ती है जिसके कारण इसे उष्ण कटिबंध कहा जाता है। यहाँ दिन और रात की स्थितियाँ सालों भर होती है तथा सूर्य की  किरणें लम्बवत् पड़ती हैं।

(ख) सम शीतोष्ण कटिबंध- कर्क एवं मकर रेखा के बाद उत्तरी गोलार्द्ध में उत्तरी ध्रुव वृत्त तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में दक्षिणी ध्रुव वृत्त के बीच वाले क्षेत्र में तापमान मध्यम रहता है। यहाँ जाड़े में सर्दी पड़ती है तथा गर्मी में तापमान अधिक रहता है। इसे सम शीतोष्ण कटिबंध कहते हैं। दिन और रात की स्थितियाँ होती हैं परन्तु सूर्य की किरणें कभी लम्बवत् नहीं पड़ती हैं।

(ग) शीत कटिबंध- उत्तरी गोलार्द्ध में उत्तरी ध्रुव तथा दक्षिण गोलार्द्ध में दक्षिणी ध्रुव क्षेत्रों में सालों भर ठंड पड़ती है। इसे शीत कटिबंध कहा जाता है। यहाँ छ: महीने का दिन एवं छः महीने की रात होती है।

(iv) देशान्तर रेखा किसे कहते हैं?
उत्तर- ग्लोब पर उत्तरी ध्रुव एवं दक्षिणी ध्रुव को जोड़ती हुई रेखाएँ खींची गई हैं। ये सभी लम्बवत् रेखाएँ देशांतर रेखाएँ हैं। 0° तथा 180° दो प्रमुख देशांतर रेखाएँ है। एक वृत्त में 360° होते हैं। इसी आधार पर पृथ्वी पर 360 देशांतर रेखाएँ खींची गई हैं। इनकी लम्बाई समान होती है। इसकी संख्या 360 होती है। देशांतर रेखाएँ तिथि निर्धारण में सहयोग देती हैं।

(v) प्रधान मध्याह्न रेखा क्यों महत्वपूर्ण हैं?
उत्तर- 0° देशांतर को प्रधान देशांतर रेखा या प्रधान मध्याह्न रेखा कहते हैं। पृथ्वी पर किसी स्थान की स्थिति दर्शाने तथा समय निश्चित करने के लिए देशांतर रेखाओं का ज्ञान होना आवश्यक है। इससे तिथि निर्धारण में भी सहयोग मिलता है।

(vi) अक्षांश रेखाओं तथा देशांतर रेखाओं की कुल संख्या कितनी है?
उत्तर- ग्लोब पर कुल अक्षांश रेखाओं की संख्या 179 तथा देशांतर रेखाओं की कुल संख्या 360 है।


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अध्याय-8 हमारा राज्य बिहार

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अध्याय-8 हमारा राज्य बिहार


अध्याय-8 हमारा राज्य बिहार

अभ्यास

1. सही विकल्पों पर (√) का निशान लगाएँ

(i) रबी फसलों के लिए मशहूर ताल क्षेत्र अवस्थित है-
(क) तराई क्षेत्र
(ख) पटना से पूरब
(ग) पटना से पश्चिम
(घ) शाहाबाद में
उत्तर- (ख) पटना से पूरब

(ii) सोमेश्वर पहाड़ियाँ हैं-
(क) तराई क्षेत्र में
(ख) राजगीर में
(ग) कैमूर में
(घ) मंदार हिल में
उत्तर- (क) तराई क्षेत्र में

(iii) सरैसा क्षेत्र में शामिल जिले हैं-
(क) सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल
(ख) सुपौल, सहरसा, अररिया
(ग) वैशाली, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर
(घ) जहानाबाद, गया, पटना
उत्तर- (ग) वैशाली, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर

(iv) गन्ना उत्पादक जिले हैं-
(क) किशनगंज, अररिया, जोगबनी
(ख) पूर्णिया, कटिहार, भागलपुर
(ग) गया, नवादा, बिहार
(घ) गोपालगंज, बेतिया, मोतिहारी
उत्तर- (घ) गोपालगंज, बेतिया, मोतिहारी

2. प्रश्नों के उत्तर लिखें-

(क) बिहार की चौहद्दी लिखें।
उत्तर- बिहार के उत्तर दिशा में नेपाल देश, पूरब में पश्चिम बंगाल, दक्षिण में झारखंड तथा पश्चिम में उत्तर प्रदेश राज्य स्थित है।

(ख) ताल क्षेत्र की विशेषताओं का वर्णन करें।
उत्तर- ताल क्षेत्र में किसी का भी घर नहीं होता है। ताल क्षेत्र में हम रबी की फसल ही केवल उगाई जाती हैं। खरीफ की फसल तो बोते ही नहीं हैं। बरसात में नदियों का पानी का बड़ा हिस्सा पूरे इलाके में दूर-दूर तक फैल जाता है और एक बड़ा ताल-सा दृश्य दिखाई देता है, इसीलिए इसे ताल क्षेत्र कहते हैं।

          अक्टूबर के महीने में जब सारा पानी धरती सोख लेती है और जमीन दलदली होती है तब हम इनमें दलहन और रबी की फसलों को बो देते हैं। इनमें चना, मसूर, सरसों, तीसी, गेहूँ होता है। मिट्टी दलदली होने के कारण रबी की जबरदस्त फसल होती है।

          टाल या ताल क्षेत्र में दुधारू पशुओं के लिए पर्याप्त भूसा मिलता है। यह पशुओं के लिए अत्यंत ही लाभदायक होता है। रबी की फसल अच्छी होने के कारण ही यहाँ दाल छाँटने वाली कई मिलें भी हैं। ताल क्षेत्र में दलहन की फसल अत्यधिक मात्रा में होती है जिससे यहाँ खेती की पैदावार काफी अच्छी होती है।

(ग) सरैसा क्षेत्र में कौन-कौन से जिले आते हैं और उनका क्या महत्व है?
उत्तर- उत्तर बिहार में समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर और वैशाली जिलों के कुछ-कुछ प्रखंडों में तम्बाकू उपजाया जाता है। इस इलाके को संयुक्त रूप से ‘सरैसा क्षेत्र’ कहा जाता है। यह किसी खास क्षेत्र न होकर पूरे इलाके का ही नाम है। इस इलाके का तम्बाकू देश के अन्य राज्यों में भी भेजा जाता है। वहाँ के किसानों की खेती-बाड़ी का अर्थ खेतों को साफ करके तम्बाकू के पौधों को लगाना उसके पत्तों को सुखाना और उन्हें व्यापारियों के हाथों में बेचना है।

           इस इलाके के किसान बड़ी मेहनत से तम्बाकू के पौधे को उगाते हैं। यहाँ की मिट्टी भी चूनायुक्त होती है। तंबाकू के पौधे धीरे-धीरे बड़े होकर फैलते हैं। बाद में इसे सुखाते हैं। इसको धीरे-धीरे पत्ते को लपेटकर रखते हैं। चूँकि सरैसा इलाके के तम्बाकू काफी कड़कदार होते हैं। इसलिए तम्बाकू बेचने वाले सरैसा के नाम का इस्तेमाल तम्बाकू को प्रभावशाली बनाने के लिए करते हैं।

(घ) बिहार की ज्यादातर चीनी मिलें उत्तर बिहार में हैं। क्यों?
उत्तर- बिहार की ज्यादातर चीनी मिलें उत्तर बिहार में ही हैं। क्योंकि उत्तर बिहार में नेपाल की पहाड़ियों से पानी बहकर आता है और मिट्टी में चूने का अंश चला आता है। यह मिट्टी ईख की खेती के लिए काफी उपयुक्त है।

              यहाँ भारी मात्रा में ईख की खेती की जाती है, और उसकी पैदावार भी अच्छी होती है। एक बड़े किसान अकेले सौ सवा सौ ट्रैक्टर गन्ने बेचते हैं और किसानों के गन्ने खरीदने के लिए मिलें तैयार रहती हैं और उन्हें नकद पैसा भी देती है। इसलिए यहाँ के किसान गन्ना उपजाना पसंद करते हैं। किसान भी गन्ने के फसल एक ही खेत में बार-बार लगातार उपजाते हैं जिससे यहाँ उसकी खरीद-बिक्री भी ज्यादा मात्रा में होती है।

(च) बाढ़ का पानी उतरते ही गाँवों एवं घरों की प्राथमिक जरूरतें क्या होती होगी?
उत्तर- बाढ़ का पानी उतरते ही गाँवों एवं घरों की प्राथमिक जरूरत अपने मवेशियों को ऊँचे स्थानों पर रखकर सुरक्षित करते हैं। ऐसा इसलिए कि बाढ़ का पानी इनकी मवेशियों को बहा न ले जाएँ। बरसात के दिनों में वे लोग बाढ़ से बचने के लिए तटबंधों और स्परों पर रहने चले जाते हैं।

         उसकी प्राथमिक जरूरत अपने और अपने मवेशियों को सुरक्षित जगहों तक पहुँचाना होता है ताकि अपने मवेशियों की जान बचा सकें, इसलिए वे फुस और प्लास्टिक के कामचलाऊ छत और दीवार बनाकर रहते हैं। घरों को छोड़कर तटबंध पर जाने से पहले खेतों में मनीजर के बीज छींट देते हैं। बाद में बाढ़ का पानी उतरने पर मनीजर के पौधे डंठल के रूप में तैयार हो जाते हैं। इस प्रकार वह अपने-आपको तैयार करते हैं जिससे वह अपना बचाव कर सकें।

अध्याय-8 हमारा राज्य बिहार

(छ) बरसात में उत्तर बिहार के लोगों को किस प्रकार की कठिनाइयाँ झेलनी पड़ती हैं?
उत्तर- बरसात में उत्तर बिहार के लोगों को निम्नलिखित प्रकार की कठिनाइयाँ झेलनी पड़ती हैं:-

⇒ बरसात में उत्तर बिहार के लोगों को वर्ष में लगभग 3-4 महीने दोहरी जिंदगी जीते हैं।

⇒ मवेशियों को बचाने के लिए उसे ऊँचे स्थानों पर रखकर सुरक्षित करना पड़ता है जिससे वह बाढ़ के पानी में बहकर कहीं चले न जाएँ।

⇒ गाँव से पानी उतरते ही लोग वापस गाँव में आते हैं और फिर आठ महीनों के लिए फिर से गृहस्थी जमाते हैं। फिर अगले साल पुनः चार महीने बाढ़ की विभीषिका झेलने को तैयार रहना पड़ता है।

⇒ बरसात के मौसम में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में जनजीवन पर बहुत ही गहरा असर पड़ता है।

⇒ बरसात में किसानों, गरीब मजदूरों पर अन्न, जल और आवास की समस्या उत्पन्न हो जाती है।

⇒ बाढ़ का पानी बढ़ने से परेशान लोगों को अपने घरों को छोड़कर तटबंधों या अन्य सुरक्षित जगहों पर रहने के लिए जाना पड़ता है।

(ज) बाढ़ से बचाव का क्या समाधान है?
उत्तर- बाढ़ से बचाव का निम्नलिखित समाधान किया जा सकता है:-

⇒ बाढ़ की समस्या का सामना सभी को एक साथ मिल-जुलकर करना चाहिए।

⇒ बाढ़ से बचने के लिए सभी को भूमि अपरदन की क्रिया को रोकना चाहिए।

⇒ बड़े-बड़े नदियों के जल को मजबूत बाँध बनाकर उसकी दिशाओं को बदलकर उससे बचाव किया जा सकता है।

⇒ बरसात के पानी से बचने के लिए नावों की व्यवस्था भी रखनी चाहिए जिससे पानी बढ़ने पर हम उन नावों के द्वारा दूसरे गाँवों की ओर पलायन कर सके।

⇒ बाढ़ से बचने के लिए हमें अपने घरों को छोड़कर किसी दूसरे स्थान पर सुरक्षित पहुँचना चाहिए।

⇒ अपने मवेशियों को किसी ऊँचे स्थानों पर ले जाकर रखना चाहिए।

⇒ अपनी जरूरत की चीजों को पहले से ही अपने पास उपलब्ध करा लेना चाहिए। जिससे सही समय पर उसका उपयोग कर सकें।


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अभ्यास

1. सही विकल्प को चुनें।

(i) गौतम बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति कहाँ हुई थी?

(क) पावापुरी

(ख) वैशाली

(ग) बोधगया

(घ) सासाराम

उत्तर- (ग) बोधगया

(ii) गया में अवस्थित विष्णुपद मंदिर किसने बनवाया था?

(क) रानी अहिल्या बाई

(ख) अजातशत्रु

(ग) अशोक

(घ) जरासंध

उत्तर- (क) रानी अहिल्या बाई

(ii) बिहार में गर्म जलकुंड कहाँ अवस्थित है?

(क) पावापुरी

(ख) राजगीर

(ग) गया

(घ) चाँदचारा

उत्तर- (ख) राजगीर

(iv) ककोलत प्रसिद्ध है-

(क) ठंडे जल के लिए

(ख) गर्म जल के लिए

(ग) मंदिरों के लिए

(घ) घाटों के लिए

उत्तर- (क) ठंडे जल के लिए

(v) जरासंध का अखाड़ा अवस्थित है-

(क) राजगीर में

(ग) बोधगया में

(ख) नालंदा में

(घ) वैशाली में

उत्तर- (क) राजगीर में

2. खाली जगहों को भरिए।

(i) पितृ पक्ष का मेला कृष्ण पक्ष में लगता है।

(ii) महाबोधि मंदिर के निकट मुचलिंद सरोवर है।

(iii) पावापुरी में जल मंदिर है।

(iv) महावीर ने  शरीर त्यागकर महापरिनिर्वाण प्राप्त किया था।

(v) नालंदा विश्वविद्यालय ज्ञान-विज्ञान का अन्तर्राष्ट्रीय केंद्र था।

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें।

(i) बोधगया क्यों प्रसिद्ध है?

उत्तर- बोधगया में ही महाबोधि मंदिर है। यह मंदिर विश्व के धरोहरों में जाना जाता है। इसी मंदिर में ध्यानरत बुद्ध की प्रतिमा है। यहीं बोधिवृक्ष के नीचे गौतम को ज्ञान प्राप्त हुआ था और वे गौतम बुद्ध कहलाने लगे। इस प्रकार बोधगया मुख्य रूप से गौतम बुद्ध के ज्ञान प्राप्ति स्थान के लिए प्रसिद्ध है।

(ii) अपने स्कूल से आप राजगीर जायेंगे तो रास्ते में आपको क्या-क्या नजर आएगा?

उत्तर- अपने स्कूल से राजगीर जाएँगे तो रास्ते में हमें सर्वप्रथम महाबोधि मंदिर के दर्शन होंगे और रास्ते में बोधिवृक्ष जहाँ गौतम बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था, स्थित है, और वे उसके बाद ही गौतम बुद्ध कहलाने लगे थे। फल्गू नदी के तट पर गया में स्थित ‘विष्णुपद’ मंदिर है। राजगीर के गर्म जलकुंड, मनियारमठ और जरासंध का अखाड़ा, शांति स्तूप नजर आएंगे।

(ii) विष्णुपद मंदिर का निर्माण किसने करवाया था? इसमें किस तरह के पत्थरों का उपयोग किया गया है?

उत्तर-  विष्णुपद मंदिर का निर्माण रानी अहिल्याबाई ने करवाया था। यह काले पत्थरों से बनवाया गया है। यहाँ भगवान विष्णु के पदचिह्न हैं।

(iv) राजगीर में गर्म जल कुंड है। क्यों?

उत्तर- राजगीर चारों ओर पहाड़ियों से घिरा हुआ है और इन पहाड़ियों में गंधक है। इसलिए यहाँ से गर्म पानी का स्राव होता रहता है। इसलिए राजगीर में गर्म जलकुंड हैं। राजगीर के गर्म जलकुंड में हाथ-पाव धोने से सभी की थकावट मिट जाती है।

(v) जलमंदिर कहाँ है और क्यों प्रसिद्ध है?

उत्तर- जलमंदिर पावापुरी में स्थित है। तालाब के बीचों-बीच स्थित जलमंदिर में भगवान महावीर हैं। तालाब में मछलियों और कमल के फूल प्राकृतिक रूप में मंदिर की शोभा बढ़ाते हैं। यही वह जगह है जहाँ भगवान महावीर ने शरीर त्यागकर महापरिनिर्वाण प्राप्त किया था। इसलिए जलोदर अपना खास योगदान के द्वारा ही जलोदर मनमोहक और आकर्षित लगता है। इसी वजह से जलमंदिर दुनिया में सुप्रसिद्ध है।

अध्याय-9 बिहार दर्शन-1

4. सही मिलान करें।

                                  उत्तर-

(i) मुचलिंद सरोवर- (घ) बोध गया

(ii) रानी अहिल्या बाई- (ग) विष्णुपद मंदिर

(iii) शांतिस्तूप- (ख) राजगीर की पहाड़ी

(iv) ककोलत जल प्रपात- (क) नवादा जिला


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अध्याय-10 बिहार दर्शन-2अभ्यास

1. सही विकल्प को चुनें।

(i) गुरु गोविंद सिंह का जन्म स्थान है-

(क) पटना

(ख) आरा

(ग) सासाराम

(घ) पटना सिटी

उत्तर- (क) पटना

(ii) गोलघर कहाँ अवस्थित है?

(क) आरा

(ख) पूर्णिया

(ग) पटना

(घ) वैशाली

उत्तर- (ग) पटना

(iii) दीदारगंज कहाँ है?

(क) वैशाली

(ख) समस्तीपुर

(ग) पटना

(घ) गया

उत्तर- (ग) पटना

2. खाली जगहों को भरिये-

(i) गोलघर का निर्माण 1786 ई. में करवाया गया था।

(ii) शेरशाह का मकबरा सासाराम में है।

(iii) पटना स्थित संग्रहालय में 5000 वर्ष पुरानी एक विशाल पेड़ की डाल रखी है।

(iv) यक्षिणी की मूर्ति दीदारगंज में मिली थी।

(v) तख्त श्री हरमंदिर पटना साहिब में स्थित है।

(vi) शेरशाह का मकबरा अष्ट कोणीय है।

(vii) ग्रैंडकोर्ड रेलवे दिल्ली-हावड़ा को जोड़ती है।

(viii) गोलघर का निर्माण  कैप्टन जान गॉलस्टीन ने करवाया।

3. सही मिलान करें।

                                उत्तर-

(i) गुरु गोविंद सिंह- (ख) पटना साहिब

(ii) पटना संग्रहालय- (ग) राजेन्द्र कक्ष

(ii) गोलघर- (घ) अनाज का भंडारण

(iv) रोहतास- (क) सासाराम

प्रश्न 4. सही कथनों में सही (√) का चिह्न लगाएँ एवं गलत कथन में गलत (x) का चिह्न लगाएँ-

(क) शेरशाह को हराकर हुमायूँ ने भारत की गद्दी पर कब्जा किया।- (x)

(ख) पटना से गया को जोड़ने वाली रेलवे लाईन ग्रैंड कार्ड लाईन कहलाती है।-(x)

(ग) पटना का गोलघर कैप्टन जान गॉलस्टीन ने बनवाया था।- (√)

(घ) पत्थर की मूर्ति “यक्षिणी” पटना के दीदारगंज में मिली थी।- (√)

(ड़) गुरुगोविन्द सिंह का जन्म स्थल तख्त श्री हरमंदिर जी कहलाता है।- (√)

प्रश्न 5. बताइये-

(क) गोलघर कहाँ है ? इसका निर्माण क्यों करवाया गया?
उत्तर- गोलघर पटना के गाँधी मैदान के पश्चिम में स्थित है। इसका निर्माण कैप्टन जान गॉलस्टीन ने 1786 ई में अनाज के सुरक्षित भंडारण के उद्देश्य से करवाया था ताकि दुर्भिक्ष काल अर्थात अकाल के समय इस अनाज से मदद पहुँचाई जा सके, जिससे सभी को अनाज की समस्याओं का सामना करना नहीं पड़े।

(ख) शेरशाह कौन थे? इनका मकबरा कहाँ है?
उत्तर- शेरशाह के बचपन का नाम फरीद खाँ था जो युवा काल में ही अपने संरक्षक की रक्षा करते हुए शेर को तलवार से एक ही बार में दो टुकड़े कर दिये थे, तभी से उसे शेरशाह के नाम से पुकारा जाने लगा। रोहतास जिला मुख्यालय सासाराम में अफगान शासक शेरशाह का मकबरा स्थित है। यह मकबरा अष्टकोणीय है, जो लाल पत्थरों से बना हुआ है। यह मकबरा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के संरक्षण में है।

(ग) अगर आप पटना संग्रहालय जायेंगे तो आपको कौन-कौन सी चीजें नजर आएंगी?
उत्तर- पटना संग्रहालय का भवन राजस्थानी शैली में बना हुआ है। संग्रहालय के बगीचे में सामने ही तोप रखे हैं, चारों ओर कई बड़ी-बड़ी दुर्लभ मूर्तियाँ भी हैं। मुख्य भवन में जाते ही एक विशाल पेड़ देखने को मिलेगा। जो लगभग 5000 वर्ष पुराना है। उसकी लकड़ियाँ अब पत्थरनुमा हो गई हैं। यह पत्थरनुमा वृक्ष जीवाश्म का उदहारण है।

         यहाँ भगवान बुद्ध और जैन तथा मौर्यकाल की महत्वपूर्ण मूर्तियों, सिक्कों और बर्तनों को भी देखते हैं। पटना संग्रहालय में ही आगे बढ़कर जाने पर एक राजेन्द्र कक्ष बना हुआ है। यहाँ राष्ट्रपति के रूप में राजेन्द्र प्रसाद को मिले हुए उपहारों को भी देख सकते हैं जो उनकी स्मृति के रूप में रखा हुआ है।

(घ) गुरुगोविन्द सिंह का जन्म-स्थान आज किस नाम से प्रसिद्ध है? वहाँ सिक्ख क्यों आते हैं?
उत्तर- गुरुगोविन्द सिंह का जन्म-स्थान आज तख्त श्री हरमंदिर साहब गुरुद्वारा के नाम से प्रसिद्ध है। यह सफेद संगमरमर से बना हुआ है। यह सिक्खों का प्रसिद्ध तीर्थस्थल है। यहाँ सभी श्रद्धालु अपने सिर पर रुमाल रखकर जाते है। गुरुगोविन्द सिंह के जन्मदिवस पर यहाँ मेला लगता है। यहाँ देश-विदेश के सिक्ख बड़ी संख्या में भाग लेने आते हैं। सिक्खों के इस पवित्र स्थल के अंदर गुरुग्रंथ साहिब रखा हुआ है और गुरुवाणी पढ़ी जाती है। यहाँ प्रत्येक दिन लंगर भी चलता है जहाँ लोगों को नि:शुल्क भोजन कराया जाता है।


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