खण्ड (क) इकाई 6 मानचित्र अध्ययन / BSEB CLASS -10 Geography Solutions

BSEB CLASS वर्ग-10वाँ Geography Solutions

खण्ड (क)

इकाई-6. मानचित्र अध्ययन


मानचित्र अध्ययन

वस्तुनिष्ठ प्रश्रोत्तर
1. उच्चावच प्रदर्शन के लिए हैश्यूर विधि का विकास किसने किया था? 
 (a) गुटेनबर्ग
(b) लेहमान
(c) गिरार
(d) रिटर
उत्तर- (b) लेहमान
2. पर्वतीय छायाकरण विधि में भू-आकृतियों पर किस दिशा से प्रकाश पड़ने की कल्पना की जाती है?
(a) उत्तर-पूर्व
(b) पूर्व-दक्षिण
(c) उत्तर-पश्चिम
(d) दक्षिण-पश्चिम
उत्तर- (c) उत्तर-पश्चिम
3. छोटी,महीन एवं खंडित रेखाओं को ढाल की दिशा में खींचकर उच्चावच प्रदर्शन की विधि को क्या कहा जाता है?
(a) स्तर रंजन
(b) पर्वतीय छायाकरण
(c) हैश्यूर
(d) तल चिन्ह
उत्तर- (c) हैश्यूर
4. तल चिन्ह की सहायता से किसी स्थान विशेष की मापी गयी ऊँचाई को क्या कहा जाता है?
(a) स्थानिक ऊँचाई
(b) विशेष ऊँचाई
(c) समोच्च रेखा
(d) त्रिकोणमितीय स्टेशन
उत्तर- (a) स्थानिक ऊँचाई
5. स्तर रंजन विधि के अंतर्गत मानचित्रों में नीले रंग से किस भाग को दिखाया जाता है ?
(a) पर्वत
(b) पठार
(c) मैदान
(d) जल
उत्तर- (d) जल
 
लघु उत्तरीय प्रश्रोत्तर
प्रश्न 1. हैश्यूर विधि तथा पर्वतीय छायाकरण विधि में अंतर स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर- हैश्यूर विधि– इस विधि का विकास ऑस्ट्रिया के एक सैन्य अधिकारी लेहमान ने किया था। उच्चावच- निरूपण के लिए इस विधि के अंतर्गत मानचित्र में छोटी, महीन एवं खंडित रेखाएं खींची जाती है। फलतः अधिक या तीव्र ढाल वाले भागों के पास-पास इन रेखाओं को मोटी एवं गहरी कर दिया जाता है। जबकि, मंद ढालों के लिए ये रेखाएं पतली एवं दूर-दूर बनाई जाती है । इसमें समतल क्षेत्र को खाली छोड़ दिया जाता है। इस विधि से से उच्चावच प्रदर्शित करने में काफी समय एवं मेहनत लगता है।
छायाकरण विधि– इस विधि के अंतर्गत उच्चावच-प्रदर्शन के लिए भू-अकृतियों पर उत्तर पश्चिम कोने पर ऊपर से प्रकाश पड़ने की कल्पना की जाती है। इसके कारण अंधेरे में पड़ने वाले हिस्से को या ढाल को गहरी आभा से भर देते है  जबकि प्रकाश वाले हिस्से या कम ढाल को हल्की आभा से भर देते है या फिर खाली छोड़ सकते है। 
           इस विधि से पर्वतीय देशों के उच्चावच को प्रभावशाली ढंग से दिखाना संभव होता है परंतु इन मानचित्रों से भी  ढाल की मात्रा का सही ज्ञान नहीं हो पाता है।
 
प्रश्न 2. तल चिन्ह और स्थानिक ऊंचाई क्या है ?
उत्तर- तल चिन्ह– वास्तविक सर्वेक्षण के द्वारा भवनों, पुलों, खंभों, पत्थरों जैसे स्थाई वस्तुओं पर समुद्र तल से मापी गई ऊँचाई को प्रदर्शित करने वाले चिन्ह को तल चिन्ह (Bench Mark) कहा जाता है । मानचित्र पर ऐसे ऊँचाई को प्रदर्शित करने के लिए ऊँचाई फीट अथवा मीटर किसी भी एक इकाई में लिखा जाता है ।
 
स्थानिक ऊँचाई– तल चिन्ह की सहायता से किसी स्थान विशेष की मापी गई ऊँचाई को स्थानिक ऊँचाई (Spot Height) कहा जाता है । इस विधि में बिंदुओं के द्वारा मानचित्र में विभिन्न स्थानों की ऊँचाई संख्या में लिख दिया जाता है ।
 
प्रश्न 3. समोच्च रेखा से आप क्या समझते है?
उत्तर-  भूतल पर समुद्र जल तल से एक समान ऊँचाई वाले बिंदुओं को मिलाकर मानचित्र पर खींची जाने वाली काल्पनिक रेखाएँ को समोच्च रेखा कहा जाता है ।
               यह एक मानक विधि है। समोच्च रेखाओं की सहायता से उच्चावच प्रदर्शन की विधि को सर्वश्रेष्ठ माना गया है । मानचित्र में प्रत्येक समोच्च रेखा के साथ उसकी ऊँचाई का मान लिख दिया जाता है । मानचित्र पर इन समोच्च रेखाओं को बादामी रंग से दिखाया जाता है।
 
प्रश्न 4. स्तर रंजन क्या है?
उत्तर – रंगीन मानचित्रों में रंगों की विभिन्न अभाओं के द्वारा उच्चावच प्रदर्शन का एक मानक निश्चित किया गया है जिसे स्तर रंजन कहा जाता है।
            ऊंचाई में वृद्धि के अनुसार रंगों की आभाएँ हल्की होती जाती है । इनमें समुद्र या जलीय भाग को नीले रंग से मैदान को हरे रंग से पर्वतों को बादामी हल्का कत्थई रंग से और बर्फीले क्षेत्र को सफेद रंग से दिखाया जाता है।
 
प्रश्न 5. समोच्च रेखाओं द्वारा शंक्वाकार पहाड़ी का प्रदर्शन किस प्रकार किया जाता है?
उत्तर – शंक्वाकार पहाड़ी के लिए बनाए जाने वाले समोच्च रेखाओं के मान बाहर से अंदर की ओर बढ़ता हुआ होता है, यानि अधिक ऊँचाई वाली समोच्च रेखा अंदर की ओर होती है।
मानचित्र अध्ययन
दीर्घ उत्तरीय प्रश्रोत्तर
प्रश्न 1. उच्चावच प्रदर्शन की प्रमुख विधियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर – धरातल पर पायी जानेवाली उच्चावच को प्रदर्शित करने के लिए विकसित की गई कुछ प्रमुख विधियाँ निम्नलिखित है-
(i) हैश्यूर विधि-  इस विधि का विकास ऑस्ट्रिया के एक सैन्य अधिकारी लेहमान ने किया था। उच्चावच- निरूपण के लिए इस विधि के अंतर्गत मानचित्र में छोटी, महीन एवं खंडित रेखाएं खींची जाती है। फलतः अधिक या तीव्र ढाल वाले भागों के पास-पास इन रेखाओं को मोटी एवं गहरी कर दिया जाता है। जबकि, मंद ढालों के लिए ये रेखाएं पतली एवं दूर-दूर बनाई जाती है। इसमें समतल क्षेत्र को खाली छोड़ दिया जाता है । इस विधि से से उच्चावच प्रदर्शित करने में काफी समय एवं मेहनत लगता है।
(ii) पर्वतीय छायाकरण- इस विधि के अंतर्गत उच्चावच-प्रदर्शन के लिए भू-अकृतियों पर उत्तर पश्चिम कोने पर ऊपर से प्रकाश पड़ने की कल्पना की जाती है। इसके कारण अंधेरे में पड़ने वाले हिस्से को या ढाल को गहरी आभा से भर देते है  जबकि प्रकाश वाले हिस्से या कम ढाल को हल्की आभा से भर देते है या फिर खाली छोड़ सकते है। 
(iii) तल चिन्ह- वास्तविक सर्वेक्षण के द्वारा भवनों, पुलों, खंभों, पत्थरों जैसे स्थाई वस्तुओं पर समुद्र तल से मापी गई ऊँचाई को प्रदर्शित करने वाले चिन्ह को तल चिन्ह (Bench Mark) कहा जाता है। मानचित्र पर ऐसे ऊँचाई को प्रदर्शित करने के लिए ऊँचाई फीट अथवा मीटर किसी भी एक इकाई में लिखा जाता है।
(iv) स्थानिक ऊँचाई- तल चिन्ह की सहायता से किसी स्थान विशेष की मापी गई ऊँचाई को स्थानिक ऊँचाई (Spot Height) कहा जाता है। इस विधि में बिंदुओं के द्वारा मानचित्र में विभिन्न स्थानों की ऊँचाई संख्या में लिख दिया जाता है।
(v) त्रिकोणमितीय स्टेशन- त्रिकोणमितीय स्टेशन का संबंध उन बिंदुओं से है जिनका उपयोग त्रिभुजन विधि द्वारा सर्वेक्षण करते समय स्टेशन के रूप में हुआ था। मानचित्र पर त्रिभुज बनाकर उसके बगल में धरातल की समुद्र तल से ऊँचाई लिख दी जाती है।
(vi) स्तर रंजन- रंगीन मानचित्रों में रंगों की विभिन्न अभाओं के द्वारा उच्चावच प्रदर्शन का एक मानक निश्चित किया गया है जिसे स्तर रंजन कहा जाता है।
(vii) समोच्च रेखाएँ- भूतल पर समुद्र जल तल से एक समान ऊँचाई वाले बिंदुओं को मिलाकर मानचित्र पर खींची जाने वाली काल्पनिक रेखाएँ को समोच्च रेखा कहा जाता है। 
  
प्रश्न 2. समोच्च रेखा क्या है ? इसके द्वारा विभिन्न प्रकार के ढालों का प्रदर्शन किस प्रकार किया जाता है?
उत्तर-  भूतल पर समुद्र जल तल से एक समान ऊँचाई वाले बिंदुओं को मिलाकर मानचित्र पर खींची जाने वाली काल्पनिक रेखाएँ को समोच्च रेखा कहा जाता है। यह एक मानक विधि है। समोच्च रेखाओं की सहायता से उच्चावच प्रदर्शन की विधि को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। मानचित्र में प्रत्येक समोच्च रेखा के साथ उसकी ऊँचाई का मान लिख दिया जाता है। मानचित्र पर इन समोच्च रेखाओं को बादामी रंग से दिखाया जाता है।
              विभिन्न प्रकार के उच्चावच को प्रदर्शित करने के लिए समोच्च रेखाओं के खींचने या बनाने का प्रारूप अलग-अलग होता है। एक समान ढाल को दिखाने के लिए समोच्च रेखाओं को समान दूरी पर खींचा जाता है। खड़ी ढाल को दिखाने के लिए समोच्च रेखाएँ पास-पास बनाई जाती है। जबकि मंद ढाल के लिए इन रेखाओं को दूर-दूर बनाया जाता है। जब किसी मानचित्र में अधिक ऊँचाई की समोच्च रेखाएँ पास-पास तथा कम ऊँचाई की समोच्च रेखाएँ दूर-दूर बनी होती है तब यह समझना चाहिए कि इन समोच्च रेखाओं के समूह अवतल ढाल का प्रदर्शन कर रहा है।
              इसके विपरीत स्थिति उत्तल ढाल का प्रतिनिधित्व करती है। सीढ़ीनुमा ढाल के लिए दो-दो रेखाएँ अंतराल खींची जाती है। इसी तरह अन्य अनेक भूआकृतियों को मानचित्र पर समोच्च रेखाओं द्वारा दिखाया जाता है।
जैसे-

पर्वत-

मानचित्र अध्ययन
 

पठार-

 

जलप्रपात-

 

‘V’आकर की घाटी –


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बिहार : (ग) जनसंख्या एवं नगरीकरण / BSEB CLASS-10 Geography Solutions खण्ड (क) इकाई-5.

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खण्ड (क)

इकाई-5. बिहार : (ग) जनसंख्या एवं नगरीकरण

जनसंख्या एवं नगरीकरण


जनसंख्या एवं नगरीकरण

वस्तुनिष्ट प्रश्नोत्तर
 
1. 2001 में बिहार की कुल जनसंख्या थी- 
(a) 8 करोड़ से कम
(b) 9 करोड़ से अधिक
(c) 8 करोड़ से अधिक
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर- (c) 8 करोड़ से अधिक
 
2. 1991-2001 के दौरान बिहार की जनसंख्या वृद्धि दर है।
(a) 30 प्रतिशत
(b) 28 प्रतिशत
(c) 28.63 प्रतिशत
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर- (c) 28.63 प्रतिशत
 
3. बिहार में ग्रामीण आबादी है-
(a) 89.5 प्रतिशत
(b) 79.5 प्रतिशत
(c) 99.5 प्रतिशत
(d) शून्य प्रतिशत
उत्तर- (a) 89.5 प्रतिशत (2001)
 
4. 2001 की जनगणना के अनुसार बिहार में प्रतिवर्ग किलोमीटर कितने व्यक्ति रहते है?
(a) 772 व्यक्ति
(b) 881व्यक्ति
(c) 981 व्यक्ति
(d) 782व्यक्ति
उत्तर- (b) 881 व्यक्ति
 
5. सबसे अधिक आबादी वाला कौन जिला है?
(a) भागलपुर
(b) पटना
(c) नालंदा
(d) मुंगेर
उत्तर- (b) पटना
 
6. सासाराम नगर का विकास हुआ था-
(a) मध्ययुग में
(b) प्राचीन युग में
(c) वर्तमान युग में
(d) आधुनिक समय में
उत्तर- (a) मध्ययुग
 
7. अविभाजित बिहार में एक मात्र नियोजित नगर था-
(a) पटना
(b) मुंगेर
(c) टाटानगर
(d) गया
उत्तर- (c) टाटानगर
 
8. 2001 की जनगणना के अनुसार बिहार की नगरीय आबादी है-
(a) 20.5 प्रतिशत
(b) 15.5 प्रतिशत
(c) 10.5 प्रतिशत
(d) 25.5 प्रतिशत
उत्तर- (c) 10.5 प्रतिशत
 
9. बिहार का सबसे बड़ा नगर है?
(a) पटना
(b) गया
(c) भागलपुर
(d) दरभंगा
उत्तर- (a) पटना
 
लघु उत्तरीय  प्रश्नोत्तर:

प्रश्न 1. बिहार के अत्यधिक घनत्व वाले जिले का नाम लिखिए।

उत्तर – बिहार के अत्यधिक घनत्व वाले जिले का नाम- पटना, दरभंगा, वैशाली, बेगूसराय, सीतामढ़ी, सारण एवं सीवान।

प्रश्न 2. बिहार में अत्यन्त कम घनत्व वाले जिले कौन-कौन हैं।

उत्तर- बिहार में अत्यन्त कम घनत्व वाले जिले- पश्चिमी चम्पारण, बाँका, जमुई और कैमूर।

प्रश्न 3. बिहार की जनसंख्या आकार को बताइए।

उत्तर – 2001 की जनगणना के अनुसार यहाँ की कुल जनसंख्या 829,98,509 है। इनमें 432,43,795 पुरुष और 3,97,54,714 महिलाएं हैं। यह भारत की कुल जनसंख्या का 8.07% है। बिहार की दशकीय वृद्धि दर 1991-2001 के दौरान 28.62 प्रतिशत था जबकि राष्ट्रीय वृद्धि दर 21.11 प्रतिशत है । बिहार में लिंग अनुपात 919 महिलाएँ प्रति हजार पुरुष हैं। यह राष्ट्रीय अनुपात 933 से कम है।
 
प्रश्न 4. बिहार की जनसंख्या सभी जगह एक समान नहीं है। स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – बिहार की जनसंख्या वितरण सभी जगह समान रूप से नहीं है। कहीं पर जनसंख्या बहुत अधिक है तो कहीं पर बहुत ही कम । इसका मुख्य कारण यहाँ की आर्थिक, सामाजिक परिवेश और भौतिक विविधता है । जहाँ भी धरातल समतल जलोढ़ एवं मैदानी है वहाँ घनी आबादी है। जहाँ कृषि कार्य, प्रति व्यक्ति आय ज्यादा है वहाँ जनसंख्या अधिक है। पटना, नालंदा, मुजफ्फरपुर और भोजपुर जिलों में इन्हीं कारणों से जनसंख्या अधिक है।

प्रश्न 5. मध्ययुग में बिहार में नगरों का विकास किस प्रकार हुआ?

उत्तर- मध्यकाल में नगरों का विकास एवं सड़कों के विकास प्रशासनिक कारणों से हुआ था। ऐसे नगरों में सासाराम, दरभंगा, पूर्णिया, छपरा, सिवान आदि हैं।

प्रश्न 6. दो प्राचीन एवं दो आधुनिक नगरों का नाम लिखिए।

उत्तर- प्राचीन नगर- पाटलीपुत्र, नालन्दा ,
आधुनिक नगर- दानापुर, मुंगेर।
 
 दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर:
 
प्रश्न 1. बिहार की जनसंख्या घनत्व पर विस्तार से चर्चा कीजिए।
उत्तर- 2001 की जनगणना के अनुसार बिहार में प्रतिवर्ग किमी. घनत्व 881 व्यक्ति है। सबसे अधिक घनत्व पटना जिला में है जहाँ प्रतिवर्ग किमी. 1,471 व्यक्ति निवास करते हैं। इसके बाद दरभंगा और वैशाली का स्थान आता है। जहाँ क्रमशः 1,342 और 1,332 व्यक्ति प्रतिवर्ग किमी. रहते हैं। चौथे स्थान पर बेगुसराय जिला है, यहाँ घनत्व 1,222 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी. है।

                               यहाँ के विभिन्न जिलों की जनसंख्या घनत्व बहुत ही असमान है। इस आसमान घनत्व के आधार पर बिहार को निम्नलिखिति पाँच वर्गों में बाँट सकते है –

(i)अत्यधिक घनत्व वाले जिले- जिन जिलों का घनत्व 1200 व्यक्ति प्रतिवर्ग किमी० है। इसे इस वर्ग में रखा गया है। पटना, दरभंगा, वैशाली, बेगुसराय, सीतामढ़ी, सारण, सीवान इसके अन्तर्गत हैं। इन जिलों में राज्य की 17.50% भूमिपर 28.17% आबादी रहती है।

(ii) उच्च घनत्व के जिले- इसके अन्तर्गत वे जिले हैं, जहाँ औसत घनत्व 1000-1200 व्यक्ति प्रतिवर्ग किमी. के बीच है। मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, गोपालगंज, मधुबनी तथा नालन्दा इस वर्ग में आते हैं। इस समूह में नालन्दा जिला को छोड़कर सभी जिले उत्तरी बिहार में स्थित है।

(iii) मध्यम घनत्व के जिले- इसके अन्तर्गत 1000-800 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी. में रहते हैं। पूर्वी चम्पारण, भागलपुर, जहानाबाद, अरवल, भोजपुर, सहरसा, खगड़िया, मधेपुरा, बक्सर और मुंगेर जिले इस वर्ग में सम्मिलित हैं । इन जिलों में राज्य की 24% से अधिक भूमि और राज्य की कुल जनसंख्या की 18% अबादी निवास करती है।

(iv) कम घनत्व जिले- इस वर्ग के अन्तर्गत पूर्णिया, कटिहार, अररिया, नवादा, शेखपुरा, सुपौल, गया, किशनगंज, लक्खीसराय, रोहतास और औरंगाबाद जिले आते हैं । इसमें औसत 600-800 व्यक्ति प्रतिवर्ग किमी० निवास करते हैं । इन जिलों की लगभग 30% भूमि पर 26% अबादी निवास करती है।

(v) अत्यंत कम घनत्व वाले जिले- इस वर्ग में वे जिले आते हैं जिनकी अबादी 600 व्यक्ति प्रतिवर्ग किमी. से कम है। इस वर्ग के अन्तर्गत पश्चिमी चम्पारण, बाँका, जमुई और कैमूर जिला आते हैं। जिनका घनत्व 382 व्यक्ति प्रतिवर्ग किमी. है। इन जिलों में राज्य की भूमि का 14.58 % एवं कुल जनसंख्या का 9% आबादी निवास करती है।

प्रश्न 2.बिहार में नगर विकास पर एक विश्लेषण प्रस्तुत कीजिए।

उत्तर – बिहार में नगरों के विकास का इतिहास बहुत पुराना है। यहाँ के अधिकतर प्रमुख नगर किसी न किसी नदी के तट पर विकसित है। यहाँ के प्राचीन नगरों का विकास राजधानी, शिक्षा, धार्मिक एवं व्यापारिक केंद्र के रूप में हुआ है। इनमें पाटलिपुत्र, नालन्दा, राजगीर, गया, वैशाली, बोधगया उदवेतपुरी, सीतामढ़ी आदि प्राचीन नगरों के उदाहरण हैं।

              मध्यकाल में भी यहाँ नगरों का विकास सड़कों के विकास एवं प्रशासनिक कारणो से हुआ था। ऐसे नगरों में, सासाराम, दरभंगा, पूर्णिया, छपरा, सिवान आदि आते हैं। अंग्रेजों के समय में बिहार में कुछ बदलाव आया रेल और सड़क मार्गों का विकास हुआ जिसके किनारे नगर विकसित होने लगे।

               आजादी के बाद यहाँ नगरों के विकास में तेजी आयी, राज्यों में औद्योगिक विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं जीवन की मौलिक सुविधाओं के कारण कई नए नगर भी विकसित हुए। इनमें बरौनी, हाजीपुर, दानापुर, डालमिया नगर, मुंगेर, जमालपुर कटिहार आदि हैं।

              किन्तु आज के बिहार में नगरों का विकास भारत के बड़े राज्यों की तुलना में बहुत ही कम हुआ है । यह सबसे कम शहरीकृत राज्य है ।  वर्तमान में बिहार में 1 लाख से अधिक जनसंख्या वाले नगरों की संख्या मात्र 19 है। 10 लाख से ऊपर आबादी वाले महानगर में केवल पटना नगर है। 2001 की जनगणना के अनुसार कुल नगरीय बस्तियों की संख्या 131 है।

             बिहार के नगरों का कार्यात्मक स्वरूप इनकी उत्पत्ति से सम्बंधित है। यहाँ के पुराने नगर प्रशासन तथा व्यापार से जुड़े हो परन्तु आधुनिक नगर उद्योग, यातायात, व्यापार एवं शिक्षा से सम्बन्धित है। यहाँ के लगभग सभी जिला मुख्यालय शुरू से ही प्रशासनिक कार्य के साथ-साथ थोक व्यवसाय, शिक्षा तथा स्वास्थ्य जैसे नगरियो कार्यों से विकसित है । बिहार में कुछ चुने हुए नगरों में ही औद्यौगिक इकाइयाँ स्थापित हैं। इनमें मुंगेर, बरौनी, जमालपुर, कटिहार प्रमुख हैं।

           बिहार विभाजन से पूर्व टाटानगर इस राज्य का मात्र नियोजित नगर था, जमशेदजी टाटा ने केवल बिहार को बल्कि भारत को आधुनिक नगर नियोजन से सर्वप्रथम परिचय कराया। किन्तु विभाजन के उपरांत बिहार में एक भी नियोजित नगर विकसित नहीं है । बिहार की राजधानी पटना भी आंशिक रूप से विकसित है। बिहार के अधिकतर नगर अनियोजित एवं अव्यवस्थित हैं।


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बिहार : (ख) उद्योग एवं परिवहन /  बिहार बोर्ड-10 Geography Solutions खण्ड (क) इकाई 5.

        बिहार बोर्ड वर्ग-10वाँ Geography Solutions

खण्ड (क)

इकाई 5. बिहार : (ख) उद्योग एवं परिवहन

उद्योग एवं परिवहन


उद्योग एवं परिवहन

वस्तुनिष्ट प्रश्नोत्तर
 
1. बिहार के किस शहर में कांच उद्योग स्थापित है?
(a) हाजीपुर
(b) शाहपुर
(c) मुरकुंडा
(d) भवानी नगर
उत्तर- (a) हाजीपुर
 
2. सिगरेट का कारखाना कहाँ है?
(a) मुंगेर में
(b) पटना में
(c) शाहपुर में
(d) गया में
उत्तर- (a) मुंगेर में
 
3. रेल वर्कशॉप कहाँ स्थित है?
(a) जमालपुर
(b) भागलपुर
(c) मुंगेर
(d) पटना
उत्तर- (a) जमालपुर
 
4. खाद कारखाना कहाँ स्थित है?
(a) बरौनी
(b) बाढ़
(c) मोकामा
(d) लक्खीसराय
उत्तर- (a) बरौनी
 
5. किस नगर में कालीन तैयार होता है?
(a) ओबरा
(b) दाउदनगर
(c) बिहारसरीफ
(d) गया
उत्तर- (a) ओबरा
 
6. अशोक पेपर मिल किस जिला में स्थित है?
(a) समस्तीपुर
(b) पटना
(c) पूर्णिया
(d) अररिया
उत्तर- डालमियानगर
 
7. बिहार की पहली रेल लाईन थी?
(a) मार्टीन लाइट रेलवे
(b) ईस्ट इंडिया रेल मार्ग
(c) भारत रेल
(d) बिहार रेल सेवा
उत्तर- (b) ईस्ट इंडिया रेल मार्ग
 
8. पटना हवाई अड्डा का क्या नाम है?
(a) जय प्रकाश अंतरराष्ट्रीय हवाई पत्तन
(b) पटना हवाई अड्डा
(c) राजेन्द्र प्रसाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा
(d) बिहार हवाई अड्डा
उत्तर- (a) जय प्रकाश अंतरराष्ट्रीय हवाई पत्तन
 
9. ग्रांड ट्रंक रोड का राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या क्या है?
(a) 1
(b) 2
(c) 3
(d) 4
उत्तर- (b) 2
 
10. बिहार में रेल परिवहन का शुभारंभ कब से माना जाता है?
(a) 1842 से
(b) 1860 से
(c) 1858 से
(d) 1862 से
उत्तर- (b) 1860
 
11. मध्य पूर्व रेलवे का मुख्यालय कहाँ है?
(a) पटना में
(b) हाजीपुर में
(c) मुज़फ़्फ़रपुर में
(d) समस्तीपुर में
उत्तर- (b) हाजीपुर में
 
12. बिहार की सीमा में रेलमार्ग की कुल लम्बाई कितनी है?
(a) 6283 कि०मी०
(b) 5283 कि०मी०
(c) 7283 कि०मी०
(d) 8500 कि०मी०
उत्तर- (a) 6283 कि०मी०(वर्ष 2001)
 
13.बिहार में रज्जुमार्ग कहाँ है?
(a) बिहारसरीफ
(b) राजगीर
(c) गया
(d) बांका
उत्तर- (b) राजगीर
 
14. मंदार झील किस जिला में स्थित है?
(a) मुंगेर
(b) भागलपुर
(c) बांका
(d) बक्सर
उत्तर- (c) बांका
 
15. राष्ट्रीय पोत संस्थान पटना के किस घाट पर स्थित है?
(a) महेन्द्रू घाट
(b) गाँधी घाट
(c) दीघा घाट
(d) बांस घाट
उत्तर- (a) महेन्द्रू घाट
 
लघु उत्तरीय  प्रश्नोत्तर:
 
प्रश्न 1.बिहार में जूट उद्योग पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर- जूट बिहार का ही नहीं बल्कि पूर्व भारत का एक महत्वपूर्ण उद्योग है। आजादी से पूर्व भारत में जूट के 110 कारखाने थे जो अधिकांशतः प.बंगाल और बिहार में ही केन्द्रित थे। लेकिन आजादी के बाद अधिकतर क्षेत्र बंगलादेश में चले गये। बिहार में जूट के तीन बड़े कारखाने कटिहार, पूर्णिया एवं दरभंगा में स्थित है हालांकि वर्तमान में सिर्फ कटिहार का कारखाना ही कार्यरत है।
 

प्रश्न 2. गंगा किनारे स्थित महत्वपूर्ण औद्योगिक केन्द्रों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर- गंगा नदी के दोनों ओर तटीय जिलों में दलहन का अधिक उत्पादन होता है, इसलिए यहाँ दलहन की छोटी-छोटी मिलें विकसित है । इनमें बाढ़, मोकामा, बरबीघा, शेखपुरा, पटना, बिहार शरीफ प्रमुख हैं।
            पटना के दीघा एवं मोकामा में बाटा चर्मशोधन एवं निर्माण उद्योग की दो बड़ी इकाइयाँ स्थित हैं। भागलपुर में रेशमी वस्त्र उद्योग विकसित है। पटना, हाजीपुर और भागलपुर में काँच उद्योग स्थित है।
 

प्रश्न 3.औद्योगिक विकास हेतु बिआडा के पहल को बताऐं।

उत्तर- बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार (Bihar Industrial Area Development Authority,बीआडा) द्वारा औद्योगिक विकास हेतु कई साहसिक कदम उठाए गए हैं। उनमें मुख्य कदम यह है कि वर्ष 2006-07 में 172.45 करोड़ रुपये परियोजना लागत वाली 15 इकाइयों को जमीन दी गई। इसके विपरीत इस वर्ष 4218.62 करोड़ रु० निवेश वाली 627 नई इकाइयों को जमीन दी गई। पहले आवंटन में काफी समय लगता था। बिआडा ने नई इकाइयों को 24 घंटे में जमीन आवंटन की व्यवस्था की।
 

प्रश्न 4.नई औद्योगिक नीति के मुख्य बिन्दुओं का वर्णन कीजिए।

उत्तर- नई औद्योगिक नीति 2006 की मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं-

●निवेशकों को प्रोत्साहित करने के लिए उचित कदम उठाना।

●आधारभूत औद्योगिक संरचना को विकसित करने हेतु प्रोत्साहित करना।

●उपभोक्ता रुचि वाले औद्योगिक इकाइयों को विकसित करने हेतु प्रोत्साहन देना।

प्रश्न 5.जमालपुर में किस चीज का वर्कशाप है, और क्यों प्रसिद्ध है ?

उत्तर- जमालपुर में 1875 ई. में एक बड़ा रेलवे वर्कशाप स्थापित हुआ था जिसमें करीब 10 हजार मजदूरों को रोजगार मिला था और यह एशिया का सबसे पहला वर्कशाप था। जमालपुर मुंगेर जिला अन्तर्गत आता है जहाँ डीजल इंजन का कार्य होता है। यह एक बड़ा रेलवे वर्कशाप है।

प्रश्न 6. राजगीर के औद्योगिक विकास पर अपना विचार प्रकट कीजिए।
उत्तर- राजगीर बिहार का एक ऐतिहासिक पर्यटन स्थल है। यह स्थल मुख्य रूप से गर्मजल के झरने एवं विभिन्न प्रकार के पाये जाने वाले  कुंडों के लिए प्रसिद्ध है। इसके अलावे यहाँ गृद्धकूट पर्वत पर शांति स्तूप स्थापित है, जो विश्व को भगवान बुद्ध का शांति संदेश देता है।
                            यह मनोरम दृश्यों से भरपूर पर्यटन स्थल है जहाँ कई दर्शनीय स्थान हैं जैसे—स्वर्ण भंडार, वेणुवन, नौलखा मंदिर, जरासंध का अखाड़ा, अजातशत्रु के किला का भग्नावशेष आदि। अतः पर्यटन उद्योग के विकास की यहाँ असीम संभावनाएं हैं । इसके अलावे यहाँ आयुद्ध निर्माणी कारखाना भी स्थापित किया गया है जो राजगीर के औद्योगिक विकास में चार चाँद लगाता है। यह क्षेत्र रेलवे लाइन, सड़क मार्ग से सीधे जुड़ा हुआ है।
प्रश्न 7. मुंगेर में कौन-कौन से उद्योग विकसित हैं, वर्णन कीजिए।
उत्तर- मुंगेर में सबसे प्रमुख सिगरेट बनाने का कारखाना है। यहां 250 से अधिक बीड़ी के कारखाने है । मुंगेर के ही दिलावरपुर में इम्पेरियल टोबैको स्थापित है । इसके अलावे यहाँ स्थानीय भेड़ों से प्राप्त ऊन से कम्बल बनाया जाता है। 
                 जमालपुर मुंगेर जिला अन्तर्गत  ही आता है जहाँ कि डीजल इंजन का कार्य होता है। यह एक बड़ा रेलवे वर्कशाप है।
 
प्रश्न 8. उत्तरी बिहार की अपेक्षा दक्षिणी बिहार में सड़कों का विकास अधिक हुआ है, क्यों?
उत्तर- उत्तरी बिहार का अधिकांश हिस्सा कोसी बेसीन और टाल, चाउर एवं दियारा क्षेत्र के अन्तर्गत आता है जो बाढ़ प्रभावित है । यहाँ लगभग प्रतिवर्ष भयंकर बाढ़ की तबाही देखनी पड़ती है। इस कारण जो सड़कें बनती भी हैं वे बाढ़ की भेंट चढ़ जाती हैं ।अतः यही कारण है कि उत्तरी बिहार की अपेक्षा दक्षिणी बिहार में सड़कों का विकास अधिक हुआ है।
 
प्रश्न 9. बिहार में नदियों का परिवहन क्षेत्र में क्या योगदान है?
उत्तर- बिहार एक भू-आवेशित राज्य है। इस कारण इसका समुद्री मार्ग से कोई सम्पर्क नहीं है । यहाँ जलमार्ग के लिए नदियों का उपयोग किया जाता है। बिहार की कई बड़ी नदियाँ हैं जिनमें सालोभर जल प्रवाहित होता रहता है । शायद यही कारण है कि इस राज्य में प्राचीन काल से ही जल परिवहन का कार्य होता रहा है। मध्यकाल में परिवहन का मुख्य साधन भी यही था, इसी कारण से नगरों का विकास नदियों के तट पर हुआ । गंगा, घाघरा, कोसी, गण्डक और सोन नदियाँ मुख्य रूप से जल परिवहन के लिए उपयोग की जाती हैं । घाघरा नदी से खाद्यान, गंडक से लकड़ी, फल, सब्जी, सोन नदी से बालू और पुनपुन से बाँस ढोए जाते हैं । गंगा में  कई बड़े-बड़े स्टीमर चलाए जाते हैं । वर्तमान में गंगा नदी में हल्दिया-इलाहाबाद राष्ट्रीय जलमार्ग विकसित किया गया है। हाल ही में पटना के महेन्द्रु घाट के पास एक राष्ट्रीय पोत संस्थान की स्थापना की गई है।
 
प्रश्न 10. बिहार के प्रमुख हवाई अड्डों के नाम लिखिए और वे कहाँ स्थित हैं ?
उत्तर- बिहार के प्रमुख हवाई अड्डों के नाम-
(i) जय प्रकाश अन्तर्राष्ट्रीय हवाई पत्तन- पटना
(ii) बोधगया अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे – गया                            
                 इसके अलावा मुजफ्फरपुर, जोगबनी, रक्सौल, भागलपुर, बिहटा आदि 7 हवाई अड्डे हैं।
 
 प्रश्न 11. उत्तरी बिहार के रेलमार्ग की विवेचना कीजिए।
उत्तर- उत्तरी बिहार के रेलमार्ग का काफी विकास हुआ है। मध्य-पूर्व रेलवे का कार्यालय उत्तरी बिहार के हाजीपुर में ही स्थित है । स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद 1959 ई. में ही मोकामा के पास राजेन्द्र सेतु का निर्माण किया गया था जो उत्तरी और दक्षिणी बिहार को जोड़ता है। हाजीपुर जक्शन से होते हुए कई लम्बी दूरी की रेलगाड़ियाँ भी चल रही हैं। दीघा-सोनपुर के बीच गंगा पर रेलपुल निर्माण का कार्य चल रहा है।
 
प्रश्न 12. बिहार के जलमार्ग पर अपना विचार प्रस्तुत करें।
उत्तर- बिहार एक भू-आवेशित राज्य है। इस कारण इसका समुद्री मार्ग से कोई सम्पर्क नहीं है। यहाँ जलमार्ग के लिए नदियों का उपयोग किया जाता है। बिहार की कई बड़ी नदियाँ हैं जिनमें सालोभर जल प्रवाहित होता रहता है। शायद यही कारण है कि इस राज्य में प्राचीन काल से ही जल परिवहन का कार्य होता रहा है। मध्यकाल में परिवहन का मुख्य साधन भी यही था, इसी कारण से नगरों का विकास नदियों के तट पर हुआ। गंगा, घाघरा, कोसी, गण्डक और सोन नदियाँ मुख्य रूप से जल परिवहन के लिए उपयोग की जाती हैं । घाघरा नदी से खाद्यान, गंडक से लकड़ी, फल, सब्जी, सोन नदी से बालू और पुनपुन से बाँस ढोए जाते हैं । गंगा में  कई बड़े-बड़े स्टीमर चलाए जाते हैं। वर्तमान में गंगा नदी में हल्दिया-इलाहाबाद राष्ट्रीय जलमार्ग विकसित किया गया है। हाल ही में पटना के महेन्द्रु घाट के पास एक राष्ट्रीय पोत संस्थान की स्थापना की गई है।
 
दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर:
 
प्रश्न 1.बिहार के कृषि आधारित किसी एक उद्योग के विकास एवं वितरण पर प्रकाश डालिए।
उत्तर- बिहार एक कृषि प्रधान राज्य है यहाँ की 80% आबादी कृषि पर ही आधारित है और कृषि पर आधारित यहाँ कई उद्योग हैं, जैसे- चीनी उद्योग, जूट उद्योग, तम्बाकू उद्योग इत्यादि इनमें चीनी उद्योग प्रमुख है।
चीनी उद्योग- यह बिहार का एक मुख्य कृषि आधारित उद्योग है। 20वीं शताब्दी के मध्य तक भारत के चीनी उद्योग के क्षेत्र में बिहार का स्थान महत्वपूर्ण था। किन्तु 1960 के बाद इसमे ह्रास होने लगा, जबकि यहाँ इस उद्योग के लिए सभी अनुकूल भौगोलिक परिस्थितियाँ विद्यमान हैं । अतः हाल के कुछ वर्षों में पुनः इसमें सुधार होने लगा है। ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना में इस पर विशेष ध्यान दिया गया है। बिहार राज्य चीनी निगम के बंद पड़े 15 चीनी मिलों एवं दो निर्माणधीन इकाइयों को पुनः जीवित करने की योजना है। राज्य सरकार द्वारा यह भी निर्णय लिया है कि ग्यारह चीनी मिलों के परिचालन की जिम्मेदारी रिलायस, हिन्दुस्तान पेट्रोलियम एवं बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को दे दी जाएगी। 
                     बिहार में चीनी की अधिकतर मिलें उत्तरी-पश्चिमी क्षेत्र में विकसित हैं। पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चम्पारण, सिवान, गोपालगंज और सारण जिला में चीनी मिलें केन्द्रित हैं, क्योंकि यह क्षेत्र गन्ना उत्पादन के लिए अत्यन्त ही अनुकूल है।
                       बिहार में कुछ चीनी मिलें दरभंगा जिला के सकरी, लोहार, हसनपुर एवं मुजफ्फरपुर जिला के मोतीपुर में हैं। राज्य के दक्षिणी भाग में भी चीनी के कुछ कारखाने स्थित हैं। इनमें विक्रमगंज, बिहटा और गुरारू की चीनी मिलें हैं। नवादा के वारिसलीगंज में भी एक चीनी मिल थी जो पिछले कई वर्षों से  बंद पड़ी है।   
                       चीनी मिलों से सह उत्पादन के रूप में विद्युत, कागज, छोवा एवं एथेनॉल निर्माण भी होता है।
प्रश्न 2.बिहार में वस्त्र उद्योग पर विस्तार से चर्चा कीजिए।
उत्तर- वस्त्र उद्योग बिहार का एक प्राचीन उद्योग है। इस उद्योग में एक विशेष समुदाय की भागीदारी रही है। यह काम यहाँ ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र दोनों में होता है। भागलपुर के तसर कपड़े, लुंगी एवं चादर देश-विदेश में प्रसिद्ध हैं। औरंगाबाद जिले के ओबरा तथा दाउदनगर के बने कालीन की मांग सम्पूर्ण भारत में है। बिहार में सूती, रेशमी एवं ऊनी वस्त्र तैयार किये जाते हैं।
                      कच्चे माल के अभाव में यहाँ सूती मिल का अधिक विकास नहीं हुआ है, लेकिन सस्ते मजदूर तथा बाजार की उपलब्धता के कारण डुमरांव, गया, मोकामा, मुंगेर, फुलवारीशरीफ, ओरमांझी, भागलपुर में यह उद्योग विकसित हुआ है। यहाँ छोटी-छोटी मिलें स्थापित हैं जिसके लिए सूत कानपुर एवं अहमदाबाद से मंगाया जाता है।

                मुंगेर, मुजफ्फरपुर एवं पटना जिलों में स्थानीय भेड़ों से प्राप्त उन से कम्बल बनाया जाता है।

बिहार में हस्तकरघा प्रक्षेत्र राज्य का एक बड़ा औद्योगिक प्रक्षेत्र है। यहाँ 34,320 करघे हैं जिनमें 10817 सहकारी एवं 23503 गैर सहकारी क्षेत्र में हैं। इसके अलावे 11361 विद्युत चालित करघे हैं। यह उद्योग पटना, गया, भागलपुर, बांका, दरभंगा, अरवल, जहानाबाद, औरंगाबाद, भभुजा, नवादा, खगड़िया, नालन्दा एवं मधुबनी जिलों में केन्द्रित हैं। हस्तकरघा उद्योग को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार ने कई योजनाएं बनाई हैं।
 
प्रश्न 3.बिहार के प्रमुख सड़क मार्गों के विस्तार एवं विकास पर प्रकाश डालिए।
उत्तर- परिवहन के साधनों में सड़कमार्ग का विस्तार बिहार में सबसे पहले हुआ था। अशोक एवं शेरशाह दो सम्राटों ने सड़कमार्ग के विकास में यहाँ काफी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। आजादी के बाद सड़क का विस्तार काफी हुआ है। यहाँ वर्तमान में सड़कों की कुल लम्बाई 81,680 किमी. है। वर्तमान सड़क मार्ग को प्रशासनिक एवं कार्मिक दृष्टि से पाँच वर्गों में बाँटा गया है-राष्ट्रीय उच्च पथ, राज्य उच्च पथ, मुख्य जिला सड़कें, अन्य जिला सड़कें एवं ग्रामीण सड़कें।

राज्य में सबसे अधिक विस्तार ग्रामीण सड़कों का हुआ है, इसकी कुल लंबाई 8.3261.36 किमी. हैं इनमें 27,400 किमी. पक्की एवं 35861.63 किमी. सड़कें कच्ची हैं। इनके निर्माण एवं रख-रखावे का कार्य ग्राम पंचायत या प्रखंड विकास कार्यालय द्वारा होता है।   

            वर्तमान में सड़कों के विकास पर अधिक बल दिया जा रहा है। इसमें सम्पूर्ण उच्च पथों की मरम्मती, नवीकरण और उन्नयन कार्य सम्मिलित है। वर्ष 2006-07 में 773 किमी. और जनवरी 2008 तक 552 किमी. राष्ट्रीय उच्चपथों का नवीकरण किया गया। राज्य एवं जिला पथों  का भी तेजी से उन्नयन हो रहा है। वर्ष 2006 में 1054 किमी. सड़कों को राज्यपथ घोषित किया गया और एशियन बैंक के सहयोग से इन्हें दो लेनेवाले उच्चपथों में उन्नयन का कार्य जारी है। वर्ष 2008 में 772 किमी. सड़कों को राज्य पथ घोषित किया गया है। बिहार की कई सड़कें अन्तर्राष्ट्रीय सीमा तक भी जाती हैं। जैसे नेपाल सीमा तक उत्तरी बिहार में बाढ़ जैसी प्राकृतिक बाधा के कारण सड़कों का विकास कम हुआ है।

प्रश्न 4.बिहार के रेल अथवा जलमार्ग का विस्तार से चर्चा कीजिए।
उत्तर- रेलमार्ग- बिहार में रेलमार्ग का विकास ब्रिटिश काल में सर्वप्रथम 1860 में हुआ था । इस अवधि में गंगा के किनारे ईस्ट इंडिया कम्पनी ने कोलकाता तक पहली रेल लाइन बिछाई । यह रेलमार्ग मुख्यतः सुरक्षा और प्रशासनिक कार्य के लिए बनाया था और इससे पटना का सम्पर्क पश्चिमी और पूर्वी भारत से स्थापित हो गया। इसके बाद उत्तरी-बिहार में पूरब-पश्चिम रेलमार्ग का निर्माण हुआ। 
                  उन्नीसवीं सदी के अन्तिम दशक तक कोलकाता से तत्कालीन बिहार के कई स्थानों को मिला दिया गया। बीसवीं सदी के मध्य तक अर्थात आजादी के समय तक उत्तरी बिहार में मीटरगेज के विकास के साथ कई शहरों को जोड़ दिया गया था। जबकि दक्षिण बिहार में अधिकतर बड़ी गेज का विकास हुआ था। स्वतंत्रता के बाद 1959 में राजेन्द्र सेतु निर्माण के उपरान्त उत्तरी और दक्षिणी बिहार का रेलमार्ग द्वारा सम्पर्क स्थापित हो गया।           
               2001 तक इस राज्य में रेल लाइन की कुल लम्बाई 6,283 किमी. हो गई है और हाजीपुर में 2002 में पूर्व-मध्य रेलवे का मुख्यालय स्थापित हो गया। 2003 में रेल लाइन को और विकसित किया गया और फतुहा-इस्लामपुर बड़ी लाइन बिछाई गई, इसके बाद राजगीर-नटेसर रेल-लाइन विस्तृत हुआ। बाँका को भागलपुर मन्दार हिल रेल लाइन से जोड़ दिया गया। दीघा-सोनपुर के बीच गंगा पर रेलपुल का निर्माण काम चल रहा है। किऊल-गया मार्ग में तिलैया स्टेशन के दक्षिण में कोडरमा तथा उत्तर में राजगीर से जोड़ने का काम चल रहा है। वर्तमान समय में बिहार के रेलमार्ग का नक्शा काफी बदल चुका है। सभी राज्यों की राजधानियों या मुख्य नगरों के लिए पटना से रेलगाड़ी रवाना होती है।   

            राज्य के भीतरी भागों में सवारी, एक्सप्रेस, शटल इ. एम. यू. तथा डी. एम. यू. गाड़ियाँ दौड़ती हैं। रेलवे के विकास एवं विस्तार के क्रम में कई बड़ी योजनाएं चल रही हैं। किऊल-मुगलसराय रेल लाइन पटना-गया रेललाइन का विद्युतीकरण हो चुका है। पटना जंक्शन का विस्तार कर राजेन्द्रनगर तक कर दिया गया है। पटना-गया लाइन का दोहरीकरण हो रहा है।


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बिहार बोर्ड वर्ग-10वाँ Geography Solutions

खण्ड (क)

इकाई-5. बिहार : (क) खनिज एवं ऊर्जा संसाधन

खनिज एवं ऊर्जा संसाधन


खनिज एवं ऊर्जा संसाधन

वस्तुनिष्ट प्रश्नोत्तर
1. बिहार में खनिज तेल मिलने की संभावनाएँ है:-
(a) हिमालय क्षेत्र में
(b) दक्षिण बिहार के मैदान में
(c) दक्षिण बिहार के पहाड़ी क्षेत्र में
(d) गंगा के द्रोणी में
उत्तर- (d) गंगा के द्रोणी में 
2. चुना पत्थर का उपयोग मुख्य रूप से किस उद्योग में होता है?
(a) सीमेंट उद्योग
(b) लोहा उद्योग
(c) शीशा उद्योग
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर- (a) सीमेंट उद्योग 
3. पाइराइट खनिज है-
(a) धात्विक
(b) अधात्विक
(c) परमाणु
(d) ईंधन
उत्तर- (b) अधात्विक
4. बिहार के सोना अयस्क से प्रतिटन शुद्ध सोना प्रलत होता है-
(a) 05 से 06 ग्राम
(b) 0.1 से 0.6 ग्राम
(c) 00.00 से 0.1 ग्राम
(d) 0.001 से 0.003 ग्राम
उत्तर- (b) 0.1 से 0.6 ग्राम
5. कहलगाँव तापीय विद्युत परियोजना किस ज़िला में अवस्थित है?
(a) भागलपुर
(b) मुंगेर
(c) जमुई
(d) साहेबगंज
उत्तर- (a) भागलपुर
6. कांटी तापीय विद्युत परियोजना किस जिले में स्थापित है?
(a) पूर्णिया
(b) सिवान
(c) मुज़फ्फरपुर
(d) पूर्वी चंपारण
उत्तर- (c) मुजफ्फरपुर
7. बिहार में बी०एच०पी०सी० द्वारा वृहत्त परियोजनाओं की संख्या कितनी है?
(a) 3
(b) 10
(c) 5
(d) 7
उत्तर- (b) 10
8. बिहार में कार्यरत जल-विद्युत परियोजनाओं की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता कितनी है?
(a) 35.60 मेगावाट
(b) 44.20 मेगावाट
(c) 50.69 मेगावाट
(d) 30 मेगावाट
उत्तर- N/A (b) 44.20 मेगावाट
लघु उत्तरीय  प्रश्नोत्तर:
प्रश्न 1.अभ्रक कहाँ मिलता है? इसका क्या उपयोग है?
उत्तर- बिहार में अभ्रक का भंडार झारखण्ड के संलग्न क्षेत्रों नवादा, जमुई और बाँका जिलों में है। यहाँ मस्कोव्हाइट अभ्रक पाया जाता है।
                अभ्रक का उपयोग निम्नलिखित रूपों में किया जाता है-
(i) इलेक्ट्रॉनिक उद्योगों में 
(ii) आयुर्वेदिक दवाओं के निर्माण में  
(iii)  विद्युत उपकरण बनाने में
(iv) सजावटी सामानों के निर्माण में
प्रश्न 2. बिहार में ग्रेफाइट एवं यूरेनियम के वितरण को लिखिए।
उत्तर- ग्रेफाइट का वितरण- बिहार में ग्रेफाइट मुंगेर एवं रोहतास जिले में मिलता है।
यूरेनियम का वितरण- बिहार में यूरेनियम गया जिले के सुईगार के निकट अखबारी पहाड़ी के अलावे जहानाबाद, अरवल, मुंगेर, जमुई, तथा भागलपुर जिलों में नगण्य मात्रा में मिलता है।
प्रश्न 3. बिहार में तापीय विद्युत केन्द्रों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर- परम्परागत ऊर्जा स्रोतों में बिहार में कई तापीय विद्युत केन्द्र हैं। जैसे- कहलगांव, कांटी और बरौनी तापीय विद्युत केन्द्र प्रमुख है। इन परियोजनाओं के अतिरिक्त बाढ़ और नवीनगर तापीय विद्युत परियोजना  हैं।
प्रश्न 4.सोन नदी घाटी परियोजना से उत्पादित जल विद्युत का वर्णन करें।
उत्तर- सोन नदी घाटी परियोजना के पश्चिमी नहर एवं पूर्वी नहर से क्रमशः 6.6 तथा 3.3 मेगावाट पनबिजली का उत्पादन हो रहा है।
प्रश्न 5.बिहार में जल विद्युत के विकास पर प्रकाश डालें।
उत्तर- बिहार में जल विद्युत के विकास के लिए बिहार राज्य जल विद्युत निगम की स्थापना 1982 में की गयी। बिहार में इसकी विकास की संभावनाएं हैं जिन पर तेजी से काम हो रहा है। कैमूर एवं औरंगाबाद जिलों में BHPC के अधीन कई प्रस्तावित जल विद्युत परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इसके अतिरिक्त कई निर्माणाधीन जल विद्युत परियोजनाएं भी हैं। जैसे कलेर (अरवल) अगनूर बगहा (प. चम्पारण, ओगरा(औरंगाबाद), तेजपुर डेहरी(रोहतास) का डेलबाग, नासरीगंज (रोहतास), नोखा (रोहतास) का जयनगर इत्यादि जल विद्युत परियोजनाएं।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर :
प्रश्न 1.बिहार में पाए जाने वाले खनिजों को वर्गीकृत कर किसी एक वर्ग के खनिज का वितरण एवं उपयोगिता को लिखिए।
उत्तर- बिहार में पाए जाने वाले खनिजों को निम्नांकित वर्गों में रखा जा सकता है:-
  • धात्विक खनिज- इसके अन्तर्गत बॉक्साइट, मैग्नेटाइट और सोना अयस्क आते हैं।
  • अधात्विक खनिज- इसके अन्तर्गत चूनापत्थर, अभ्रक, डोलोमाइट, सिलिका सैंड, पाइराइट, क्वार्ट्स, फेल्सपार, चीनी मिट्टी, स्लेट एवं शोरा इत्यादि आते हैं।

धात्विक खनिज –

             बॉक्साइट का भंडार बिहार में 1.5 हजार मीट्रिक टन है। यह गया, जमुई और बांका जिले में मिलता है। मैग्नेटाइट पत्थर का कुल भण्डार 0.59 हजार मीट्रिक टन है। यह बिहार के  पहाड़ी क्षेत्र में मिलता है।

 सोना अयस्क यहाँ बहुत अल्प मात्रा में दक्षिणी बिहार की नदियों के बालू की रेत के साथ मिलता है जिसमें सोना धातु की मात्रा 0.1 से 0.6 ग्राम प्रतिटन प्राप्त होता है। सोना अयस्क का कुल भंडार 128.88 मीट्रिक टन है। बिहार में इसका वाणिज्यिक उत्पादन नहीं है।

प्रश्न 2. बिहार के प्रमुख ऊर्जा स्रोतों का वर्णन कीजिए और किसी एक स्रोत का विस्तार से चर्चा कीजिए।

उत्तर- ऐसे तो बिहार में ऊर्जा का कोई भी स्रोत विकसित नहीं है फिर भी इस क्षेत्र में कुछ इकाई विकसित है भी तो परम्परागत ऊर्जा स्रोतों में तापीय विद्युत केन्द्र है।

            बिहार में तापीय विद्युत के मुख्य केन्द्र कहलगाँव, कांटी और बरौनी में स्थित है। कहलगांव की उत्पादन क्षमता 840 मेगावाट है, कांटी की उत्पादन क्षमता 120 मेगावाट और बरौनी की 145 मेगावाट है।
 इन परियोजनाओं के अतिरिक्त कुछ प्रस्तावित तापीय परियोजनाएं भी है, इनमें बाढ़ और नवीनगर तापीय विद्युत केन्द्र निर्माणाधीन हैं। यहाँ सोन, गंडक और कोसी तीन प्रमुख नदी घाटी परियोजनाएं भी हैं जिनसे 44.10 मेगावाट जल विद्युत उत्पन्न हो रहा है। कुछ योजनाएं प्रस्तावित भी हैं।
               बिहार में गैर-परम्परागत ऊर्जा स्रोतों में बायोगैस, सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा की भारी संभावनाएं हैं परन्तु विकसित नहीं है।

 बायोगैस गांवों में भोजन बनाने सम्बन्धी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिये नवीकरणीय ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। इस दिशा में लगातार प्रयासरत है  और अबतक 1.25 लाख संयंत्र ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित किए जा चुके हैं।


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बिहार : कृषि एवं वन संसाधन / बिहार बोर्ड-10 Geography Solutions खण्ड (क) इकाई-5.

बिहार बोर्ड वर्ग-10वाँ Geography Solutions
खण्ड (क)

इकाई-5. बिहार : कृषि एवं वन संसाधनकृषि एवं वन संसाधन


बिहार : कृषि एवं वन संसाधन  

वस्तुनिष्ट प्रश्नोत्तर
1. बिहार में कितने प्रतिशत क्षेत्र में खेती की जाती है?
(a) 50
(b) 60
(c) 80
(d) 36.5
उत्तर- (b) 60
2. राज्य की कितनी प्रतिशत जनसंख्या कृषि कार्य में लगी हुई है?
(a) 80
(b) 75
(c) 65
(d) 86
उत्तर- (a) 80
3. इनमें से कौन गन्ना उतपादक जिला नहीं है?
(a) दरभंगा
(b) पश्चिम चंपारण
(c) मुजफ्फरपुर 
(d) रोहतास
उत्तर- (d) रोहतास
4. बिहार के जूट उत्पादन में-
(a) वृद्धि हो रही है
(b) गिरावट हो रही है
(c) स्थिर है
(d) इनमें कोई नहीं
उत्तर- (b) गिरावट हो रही है
5. तम्बाकू उत्पादन क्षेत्र है-
(a) गंगा का उत्तरी मैदान
(b) गंगा का दक्षिणी मैदान
(c) हिमालय की तराई
(d) गंगा का दियारा
उत्तर- (d) गंगा का दियारा
6. कोसी नदी घाटी परियोजना का आरंभ हुआ-
(a) 1950 में
(b) 1948 में
(c) 1952 में
(d) 1954 में
उत्तर- (d) 1954 में
7. गण्डक परियोजना का निर्माण किस स्थान पर हुआ-
(a) बेतिया
(b) बाल्मीकीनगर
(c) मोतिहारी
(d) छपरा
उत्तर- (b) बाल्मीकीनगर
8. बिहार में नहरों द्वारा सर्वाधिक सिंचाई किस जिले में होती है?
(a) रोहतास
(b) सिवान
(c) गया
(d) पश्चिमी चंपारण
उत्तर- (a) रोहतास
9. बिहार में कुल कितने अधिसूचित क्षेत्र में वन का विस्तार है?
(a) 6374 कि०मी०
(b) 6370 कि०मी०
(c) 6380 कि०मी०
(d) 6350 कि०मी०
उत्तर- (a) 6374 कि०मी०
10. कुशेश्वर स्थान किस ज़िला में स्थित है?
(a) वैशाली में
(b) दरभंगा में
(c) बेगूसराय में
(d) भागलपुर में
उत्तर- (b) दरभंगा में
11. काँवर झील स्थित है-
(a) दरभंगा जिला में
(b) भागलपुर जिला में
(c) बेगूसराय जिला में
(d) मुज़फ़्फ़रपुर जिला में
उत्तर- (c) बेगूसराय जिला में
12. संजय गांधी जैविक उद्यान किस नगर में स्थित है?
(a) राजगीर
(b) बोधगया
(c) बिहारसरीफ
(d) पटना
उत्तर- (d) पटना 
लघु उत्तरीय  प्रश्नोत्तर :
प्रश्न 1. बिहार में धान की फसल के लिए उपयुक्त भौगोलिक दशाओं का उल्लेख करें।
उत्तर- बिहार में धान की फसल के लिए उपयुक्त भौगोलिक दशाएं निम्नलिखित है:-
 (i)तापमान  – 20-27° से. ग्रे.  
  (ii) वर्षा – 75-200 सेमी. 
 (iii)  मिट्टी- उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी
 (iv) भूमि – समतल 
प्रश्न 2. बिहार में दलहन के उत्पादन एवं वितरण का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर- उत्पादन- बिहार में दलहन फसलों में चना, मसूर, खेसारी, मटर, मूंग, अरहर, उड़द तथा कुरथी प्रमुख हैं।
वितरण- चना, अरहर, मूंग, मसूर, आदि की खेती यों तो बिहार के सभी जिलों में होती है परंतु गंगा के दक्षिणी इलाका इसके लिए ज्यादा प्रसिद्ध है। दलहन उत्पादन में पटना जिला का स्थान सबसे आगे है, जबकि औरंगाबाद और कैमूर क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर है।
प्रश्न 3. कृषि बिहार की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है- इस कथन की व्याख्या कीजिए।
उत्तर- बिहार एक कृषि प्रधान राज्य है। इसकी तीन-चौथाई भूमि कृषि क्षेत्र के अंतर्गत आती है तथा यहाँ की 80 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है। झारखंड के अलग हो जाने के बाद बिहार के लोगों के लिए कृषि का महत्व अधिक बढ़ गया है। कृषि के अलावे यहाँ अन्य रोजगार के साधनों का अभाव है। अतः कृषि बिहार की अर्थव्यवस्था का की रीढ़  है।
प्रश्न 4. नदी घाटी परियोजनाओं के मुख्य उद्देश्यों को लिखें।
उत्तर- नदी घाटी  परियोजना के विकास के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित है-
● बाढ़ नियंत्रण
● मृदा अपरदन पर रोक
● पेयजल एवं सिंचाई हेतु जलापूर्ति
● विद्युत उत्पादन
● उद्योगों के जलापूर्ति
● परिवहन
● मनोरंजन
● वन्य जीव संरक्षण, मत्स्य पालन, जल कृषि, पर्यटन इत्यादि।
प्रश्न 5. बिहार के नहरों के विकास से सम्बंधित समस्याओं को लिखिए।
उत्तर- बिहार के नहरों के विकास से सम्बंधित समस्याएं निम्नालिखित है:-
(i) दक्षणी बिहार की अधिकांश नदियाँ बरसाती है जिससे जलापूर्ति की समस्या उत्पन्न होती है।
(ii) पूंजी का अभाव
(iii) धरातल का स्वरूप
(iv) सरकार की इच्छाशक्ति का अभाव
(v) जल का असमान वितरण
प्रश्न 6. बिहार के किस भाग में सिंचाई की आवश्यकता है और क्यों?
उत्तर- बिहार के दक्षिणी भाग में सिंचाई की आवश्यकता अधिक है क्योंकि दक्षिणी बिहार की अधिकांश नदियाँ बरसाती है साथ ही  यहाँ नहरों का विकास उतना अधिक नहीं हुआ है।
प्रश्न 7. बिहार में वनों के अभाव के चार कारणों को लिखिए।
उत्तर- बिहार में वनों के अभाव के चार कारण निम्नलिखित है:-
(i) बिहार विभाजन के बाद अधिकतर वनाच्छादित क्षेत्र झारखण्ड में चला गया है। वर्तमान में बिहार में 6.87% भौगोलिक क्षेत्र में ही वन है।
(ii) कृषि एवं निर्मित क्षेत्रों के विस्तार के कारण वनों का विनाश काफी तेजी से हुआ है।
(iii) वनों के महत्व से संबंधित जागरुकता का अभाव है।
(iv) वनों की अंधाधुंध कटाई के कारण भी यहाँ वनों का अभाव है।
प्रश्न 8. संक्षेप में शुष्क पतझड़ वन की चर्चा कीजिए।
उत्तर- बिहार के पूर्वी मध्यवर्ती भाग तथा दक्षिणी-पश्चिमी पहाड़ी भागों में इस प्रकार के वनों का विस्तार है। कैमूर और रोहतास जिले में इसका अधिक विस्तार है। यहाँ के प्रमुख वृक्ष खैर, बहेड़ा, प्लास, महुआ, अमलतास, शीशम, नीम, हर्रे आदि हैं।
प्रश्न 9. बिहार में ऐसे जिलों का नाम लिखिए जहाँ वन विस्तार एक प्रतिशत से भी कम है।
उत्तर- बिहार के सिवान, सारण, भोजपुर, बक्सर, पटना, गोपालगंज, वैशाली, मुजफ्फरपुर, मोतीहारी, दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, बेगुसराय, मधेपुरा, खगड़िया, नालन्दा जिलों में एक प्रतिशत से भी कम भूमि में वन मिलते हैं।
प्रश्न 10. बिहार में स्थित राष्ट्रीय उद्यान एवं अभ्यारण्यों की संख्या बतायें और दो अभ्यारण्यों की चर्चा करें।
उत्तर- यहाँ 14 अभयारण्य एवं एक राष्ट्रीय उद्यान है। बिहार का संजय गांधी जैविक उद्यान एकलौता राष्ट्रीय उद्यान है।
        दरभंगा जिला में कुश्वेश्वर स्थान वन्य जीवों के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है। बेगुसराय जिला अन्तर्गत मंझौल अनुमंडल में 2500 एकड़ पर फैला कांवर झील एक पक्षी विहार है जहाँ 300 प्रजातियों के पक्षियों का अध्ययन एक साथ संभव है।
 
दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर :
प्रश्न 1. बिहार की कृषि की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा करें।
उत्तर- बिहार एक कृषि प्रधान राज्य है और यहाँ की 90 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है, साथ ही यहाँ की 80 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है। झारखण्ड के अलग हो जाने के बाद बिहार के लोगों के लिए कृषि का महत्व और अधिक बढ़ गया है। 
     यहाँ की कृषि निम्नलिखित समस्याओं से जूझ रही है :- 
  • कृषि का परंपरागत तरीका।
  • किसानों का शिक्षा एवं पूंजी का अभाव होना।
  • खेतों के छोटा आकार।
  • उन्नत किस्म के कृषि यंत्रों का अभाव।
  • परम्परागत बीजों का अभाव।
  • सिचाई की समुचित व्यवस्था का अभाव।
  • वर्षा की अनियमितता अर्थात मानसून पर निर्भरता।
  • बाढ़ एवं सुखाड़ की समस्य।
  • अंधाधुन रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग।
  • मिट्टी का कटाव और भूमि निम्नीकरण की समस्या।
  • रूढ़िवादिता एवं अंधविश्वास।
  • यातायात के साधनों का अभाव।
  • खेतों का दूर-दराज में स्थित होना इत्यादि।

प्रश्न 2. बिहार में कौन-कौन सी फसलें लगाई जाती हैं ? किसी एक फसल के मुख्य उत्पादनों की व्याख्या कीजिए।

उत्तर- बिहार की प्रमुख फसलों में धान, गेहूँ, मकई, जौ, गन्ना, तम्बाकू, मडुआ, ज्वार, दलहन और तेलहन हैं। इसके अतिरिक्त सब्जियों, फल, फूल की भी खेती बड़े पैमाने पर की जाती है।

धान- धान बिहार की खाद्यान फसलों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। भदई, अगहनी तथा गरमा, अर्थात धान की तीन फसलें लगाई जाती हैं और इसकी खेती राज्य के सभी भागों में की जाती हैं। 2006-07 में यहाँ 33-54 लाख हेक्टेयर भूमि पर लगभग 50 लाख टन धान का उत्पादन दर्ज किया गया।

         उत्तरी तथा पूर्वी भागों में भदई धान की खेती की जाती है, जबकि अगहनी धान की खेती पूरे राज्य में की जाती है।

       धान का सबसे अधिक उत्पादन पश्चिमी चंपारण, रोहतास तथा औरंगाबाद में होता है, इन तीन जिलों में बिहार का 18 प्रतिशत से अधिक धान का उत्पादन होता है। पहले स्थान पर पश्चिमी चम्पारण है जबकि रोहतास और औरंगाबाद का क्रमशः द्वितीय और तृतीय स्थान है। यदि क्षेत्रफल की दृष्टि से देखा जाय तो रोहतास (5.76%) अव्वल है।

प्रश्न 3. बिहार की मुख्य नदी घाटी परियोजनाओं का नाम बतायें एवं सोन अथवा कोसी परियोजना के महत्व पर प्रकाश डालें।

उत्तर- बिहार की मुख्य नदी घाटी परियोजनाएँ निम्नलिखित हैं:-

  • सोन नदी घाटी परियोजना
  • गण्डक नदी घाटी परियोजना
  • कोसी नदी घाटी परियोजना
  • दुर्गावती जलाशय परियोजना
  • चन्दन बहुआ परियोजना
  • बागमती परियोजना
  • बरनार जलाशय परियोजना।

सोन नदी घाटी परियोजना- यह बिहार की सबसे पुरानी और पहली नदी घाटी परियोजना है। इसका विकास अंग्रेज सरकार ने 1874 में सिंचाई के लिए किया था। इससे डेहरी के पास से पूरब एवं पश्चिम की ओर नहरें निकाली गई हैं। जिसकी कुल लंबाई 130 किमी0 थी। इस परियोजना से पटना, गया, औरंगाबाद, भोजपुर, बक्सर, रोहतास इत्यादि जिलों में सिंचाई की जाती है। इस परियोजना से सूखा प्रभावित क्षेत्र को सिंचाई की सुविधा प्राप्त होने से बिहार का दक्षिणी पश्चिमी क्षेत्र का प्रति हेक्टेयर उत्पादन काफी बढ़ गया जिससे इस क्षेत्र में धान की खेती अधिक होती है। इस कारण से इस क्षेत्र को बिहार का ‘चावल का कटोरा’ कहा जाता है।

         इस परियोजना के अन्तर्गत जल-विद्युत उत्पादन के लिए शक्ति-गृहों की स्थापना की गई है। पश्चिमी नहर पर डेहरी के पास 6.6 मेगावाट उत्पादन क्षमता का शक्ति-गृह स्थापित है। इसी प्रकार पूर्वी नहर शाखा पर बारूण नामक स्थान पर 3.3 मेगावाट क्षमता का शक्ति गृह का निर्माण किया गया है। सोन नदी पर इन्द्रपुरी के पास एक बाँध का निर्माण प्रस्तावित है जिससे 450 मेगावाट पनबिजली उत्पादन का लक्ष्य है।

कोसी नदी घाटी परियोजना- यह परियोजना नेपाल सरकार, भारत सरकार और बिहार सरकार के सामूहिक प्रयास का फल है। इसका मुख्य उद्देश्य नदी के बदलते मार्ग को रोकना, उपजाऊ भूमि की बर्बादी पर नियंत्रण, भयानक बाढ़ से क्षति पर रोक, जल से सिंचाई का विकास, पन बिजली उत्पादन, मत्स्य पालन, नौकायान एवं पर्यावरण पर नियंत्रण आदि है।

           इस परियोजना को कई चरणों में पूरा किया गया है। पहले चरण में मार्ग परिवर्तन पर नियंत्रण, बिहार, नेपाल सीमा पर स्थित हनुमाननगर स्थान पर बैराज का निर्माण, बाढ़ नियंत्रण के लिए दोनों ओर तटबंध का निर्माण, पूर्वी एवं पश्चिमी कोसी नहर एवं उसकी शाखाओं का निर्माण सम्मिलित किया गया।

         पूर्वी नहर तथा इसकी प्रमुख सहायक नहरों द्वारा 14 लाख एकड़ भूमि में सिंचाई की जाती है। इससे पूर्णिया, सहरसा, मधेपुरा और अररिया जिलों में सिंचाई की जाती है। पश्चिमी नहर से नेपाल एवं बिहार के मधुबनी एवं दरभंगा जिलों में सिंचाई की जाती है।

प्रश्न 4. बिहार में वन्य जीवों के संरक्षण पर विस्तार से चर्चा करें।
उत्तर- बिहार में वन एवं वन्य प्राणियों के संरक्षण के लिए आदि काल से कई रीति-रिवाजों का प्रचलन है। कई धार्मिक अनुष्ठान तो वृक्षों के नीचे ही किए जाते हैं। कई ऐसे आंचलिक त्योहार भी हैं जो वृक्षों के नीचे ही किए जाते हैं। इस राज्य में परम्परागत रूप से वट, पीपल, आँवला और तुलंसी के पौधों की पूजा की जाती है। हमारे यहाँ चींटी से लेकर साँप जैसे विषैले जन्तु को भोजन दिया जाता है और उनकी पूजा की जाती है। पक्षियों को भी दाने दिए जाने का प्रचलन है। साथ ही वन्य प्राणियों के संरक्षण के लिए कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। यहाँ संजय गाँधी जैविक उद्यान एवं अन्य 14 अभयारण्य हैं। जैसे- बेगुसराय जिला अन्तर्गत कांवर झील, दरभंगा जिला अन्तर्गत कुशेश्वर स्थान इत्यादि।

                 वन एवं वन्य प्राणियों के संरक्षण में राज्य सरकार की  कई संस्थाएँ भी कार्यरत हैं। इनमें वन, पर्यावरण एवं जल संसाधन विकास विभाग प्रमुख हैं। इनके अतिरिक्त इस क्षेत्र में कई स्वयंसेवी संस्थाएँ भी काम कर रही हैं। इनमें प्रयास, तरुमित्र , प्रत्यूष और भागलपुर में मंदार नेचर क्लब इत्यादि प्रमुख है।


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