अध्याय 3 जनसंख्या संघटन

इकाई-2 अध्याय 3 जनसंख्या संघटन

बिहार बोर्ड कक्षा 12वीं के भूगोल का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

(खण्ड 1: मानव भूगोल के मूल सिद्धांत)


अध्याय 3 जनसंख्या संघटन

अध्याय 3 जनसंख्या संघटन

1. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए:

(i) निम्नलिखित में से किस ने संयुक्त अरब अमीरात के लिंग अनुपात को निम्न किया है?

(क) पुरुष कार्यशील जनसंख्या का चयनित प्रवास।

(ख) पुरुषों की उच्च जन्म दर

(ग) स्त्रियों की निम्न जन्म दर

(घ) स्त्रियों का उच्च उत्प्रवास

उत्तर – (क) पुरुष कार्यशील जनसंख्या का चयनित प्रवास।

(ii) निम्नलिखित में से कौन सी संख्या जनसंख्या के कार्यशील आयु वर्ग का प्रतिनिधित्व करती है?

(क) 15 से 65 वर्ष

(ख) 15 से 66 वर्ष

(ग) 15 से 64 वर्ष

(घ) 15 से 59 वर्ष
उत्तर – (घ) 15 से 59 वर्ष

(iii) निम्नलिखित में से किस देश का लिंग अनुपात विश्व में सर्वाधिक है?

(क) लैटविया

(ख) जापान

(ग) संयुक्त अरब अमीरात

(घ) फ्रांस

उत्तर – (क) लैटविया

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए:

(i) जनसंख्या संघटन से आप क्या समझते हैं?

उत्तर- किसी राज्य अथवा देश में निवास करने वाली कुल जनसंख्या में स्त्रियों एवं पुरुषों की संख्या, लिंगानुपात, आयु-वर्ग संरचना, व्यवसाय, शिक्षा का स्तर, जीवन-प्रत्याशा के जनांकिकीय विशेषताओं को जनसंख्या संघटन कहते हैं।

(ii) आयु-संरचना का क्या महत्व है?

उत्तर- आयु संरचना के द्वारा किसी भी देश में निवास करने वाले  विभिन्न आयु वर्ग के लोगों की संख्या को प्रदर्शित किया जाता है। जनसंख्या संघटन का यह एक महत्वपूर्ण सूचक है, क्योंकि 15 से 59 आयु वर्ग के बीच जनसंख्या का बड़ा आकार एक विशाल कार्यशील जनसंख्या को इंगित करता है। 

(iii) लिंग-अनुपात कैसे मापा जाता है?

उत्तर- किसी देश कि कुल जनसंख्या में स्त्रियों और पुरुषों की संख्या के बीच के अनुपात को लिंग अनुपात कहा जाता है।

कुछ देशों में यह निम्न सूत्र द्वारा परिकलित किया जाता है –

पुरुष की कुल जनसंख्या / स्त्रियों की कुल जनसंख्या ×1000

अर्थात प्रति हजार स्त्रियों पर पुरुषों की संख्या।

भारत में इस सूत्र का प्रयोग कर लिंग अनुपात ज्ञात किया जाता है :

स्त्रियों कि कुल जनसंख्या / पुरुषों की कुल जनसंख्या ×1000

अर्थात प्रति हजार पुरुषों पर स्त्रियों की संख्या।

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए।

(i) जनसंख्या के ग्रामीण-नगरीय संघटन का वर्णन कीजिए।

उत्तर- जनसंख्या का ग्रामीण और नगरीय संघटन में विभाजन निवास के आधार पर होता है। यह विभाजन आवश्यक है क्योंकि ग्रामीण और नगरीय जीवन आजीविका और सामाजिक दशाओं में एक-दूसरे से भिन्न होते हैं। ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों में आयु-लिंग संघटन, व्यवसायिक संरचना, जनसंख्या का घनत्व तथा विकास के स्तर अलग-अलग होते हैं।

      यद्यपि ग्रामीण और नगरीय जनसंख्या में अंतर करने के मापदंड सभी देशों में अलग-अलग होते हैं। सामान्य रूप से ग्रामीण क्षेत्र वे होते हैं जिनमें अधिकांश लोग प्राथमिक क्रियाओं में संलग्न रहते हैं और नगरीय क्षेत्र वे होते हैं जिनमें अधिकांश कार्यशील जनसंख्या द्वितीयक एवं तृतीयक क्रियाओं में संलग्न होती है।

     कनाडा और फिनलैंड जैसे पश्चिमी यूरोपीय देशों में ग्रामीण और नगरीय लिंग अनुपात में अंतर अफ्रीकी और एशियाई देशों क्रमशः जिंबाब्वे तथा नेपाल के ग्रामीण और नगरीय लिंग अनुपात के विपरीत है। पश्चिमी देशों में ग्रामीण क्षेत्रों में स्त्रियों की अपेक्षा पुरुषों की संख्या अधिक है, जबकि नगरीय क्षेत्रों में स्त्रियों की संख्या पुरुषों की अपेक्षा अधिक है। नेपाल, पाकिस्तान और भारत जैसे देशों में स्थिति इससे विपरीत है। नगरीय क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों की अधिक संभावनाओं के कारण ग्रामीण क्षेत्रों से महिलाओं के आगमन के परिणामस्वरुप यूरोप, कनाडा और संयुक्त राज्य अमेरिका के नगरीय क्षेत्रों में महिलाओं की अधिकता है।

      कृषि भी इन विकसित देशों में अत्यधिक मशीनीकृत है और यह लगभग पुरुष प्रधान व्यवसाय है। इसके विपरीत एशिया के नगरीय क्षेत्रों में पुरुष प्रधान प्रवास के कारण लिंग अनुपात भी पुरुषों के अनुकूल है। उल्लेखनीय है कि भारत जैसे देशों में ग्रामीण क्षेत्रों के कृषि कार्यों में महिलाओं की सहभागिता काफी ऊँची है। नगरों में आवास की कमी, रहन-सहन की उच्च लागत, रोजगार के अवसरों की कमी और सुरक्षा की कमी महिलाओं के गाँव से नगरीय क्षेत्रों में प्रवास को रोकता है।

(ii) विश्व के विभिन्न भागों में आयु-लिंग में असंतुलन के लिए उत्तरदाई कारकों तथा व्यावसायिक संरचना की विवेचना कीजिए।

उत्तर- आयु-लिंग अनुपात किसी  देश में स्त्रियों की स्थिति के संबंध में महत्वपूर्ण सूचना होती है। जिन प्रदेशों में लिंग भेदभाव अनियंत्रित होता है वहाँ लिंग अनुपात निश्चित रूप से स्त्रियों के प्रतिकूल होता है। इन क्षेत्रों में स्त्री भ्रूण हत्या तथा स्त्री-शिशु हत्या और स्त्रियों के प्रति घरेलू हिंसा की प्रथा प्रचलित है। इसका एक कारण इन क्षेत्रों में स्त्रियों की सामाजिक-आर्थिक स्तर का निम्न होना हो सकता है।

     सामान्यत:  एशिया में लिंग अनुपात निम्न है। चीन, भारत, सऊदी अरब, पाकिस्तान और अफगानिस्तान जैसे देशों में लिंग अनुपात और भी भिन्न है दूसरी ओर रूस, सहित यूरोप के एक बड़े भाग में पुरुष अल्प संख्या में है। यूरोप के अनेक देशों में पुरुषों की कमी, वहाँ स्त्रियों की बेहतर स्थिति तथा भूतकाल में विश्व के विभिन्न भागों में अत्यधिक पुरुष उत्प्रवास के कारण है।

व्यावसायिक संरचना 

     व्यावसायिक संरचना से तात्पर्य किसी भी देश या प्रदेश के कार्यशील जनसंख्या (अर्थात 15 से 59 आयु वर्ग में स्त्री और पुरुष) से है जो कि कृषि, वानिकी, मत्स्यन, विनिर्माण, निर्माण, व्यवसायिक परिवहन, सेवाओं, संचार तथा अन्य अवर्गीकृत सेवाओं जैसे व्यवसायों से जुड़े होते हैं। व्यावसायिक संरचना को मुख्यतः चार भागों में बाँटा जा सकता है:-

(क) प्राथमिक कार्यशील जनसंख्या- इसके अंतर्गत कृषि, वानिकी, मत्स्यन तथा खनन जैसे कार्यों को रखा जाता है।

(ख) द्वितीयक कार्यशील जनसंख्या- इसके अंतर्गत निर्माण, विनिर्माण से संबंधित कार्य किए जाते हैं। शक्ति उत्पादन से संबंधित क्रिया भी इसी समूह में शामिल है।

(ग) तृतीयक  कार्यशील जनसंख्या- इसके अंतर्गत व्यापार, आयात-निर्यात तथा अन्य कार्य सम्मिलित है।

(घ) चर्तुथक कार्यशील जनसंख्या- अनुसंधान और वैचारिक विकास से जुड़े कार्यों को चतुर्थक कार्यशील जनसंख्या के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।

        उपरोक्त चार खंडों में कार्यशील जनसंख्या का अनुपात किसी राष्ट्र के आर्थिक विकास के स्तरों का एक अच्छा सूचक है। इसका कारण यह है कि केवल उद्योगों और अवसंरचना से युक्त एक विकसित अर्थव्यवस्था ही द्वितीयक, तृतीयक और चतुर्थक क्षेत्रों में अधिक कर्मियों को समायोजित कर सकती है। यदि अर्थव्यवस्था अभी भी आदिम अवस्था में है तब प्राथमिक क्रियाओं में संलग्न लोगों का अनुपात अधिक होगा क्योंकि इसमें मात्र प्राकृतिक संसाधनों का दोहन होता है।



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(खण्ड 1: मानव भूगोल के मूल सिद्धांत)

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(खण्ड 2: भारत- लोग और अर्थव्यवस्था)
Part 2: India- People and Economy

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अध्याय 2 विश्व जनसंख्या वितरण, घनत्व और वृद्धि

 इकाई-2 अध्याय 2 विश्व जनसंख्या वितरण, घनत्व और वृद्धि

बिहार बोर्ड कक्षा 12वीं के भूगोल का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

(खण्ड 1: मानव भूगोल के मूल सिद्धांत)



अध्याय 2 विश्व जनसंख्या वितरण, घनत्व और वृद्धि

अध्याय 2 विश्व जनसंख्या

1. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए:

(i) निम्नलिखित में से किस महाद्वीप में जनसंख्या वृद्धि सर्वाधिक है?

(क) अफ्रीका

(ख) एशिया

(ग) दक्षिण अमेरिका

(घ) उत्तर अमेरिका

उत्तर – (ख) एशिया

(ii) निम्नलिखित में से कौन-सा एक विरल जनसंख्या वाला क्षेत्र नहीं है?

(क) अटाकामा

(ख) भूमध्यरेखीय प्रदेश

(ग) दक्षिण-पूर्वी एशिया

(घ) ध्रुवीय प्रदेश

उत्तर – (ग) दक्षिण-पूर्वी एशिया

(iii) निम्नलिखित में से कौन-सा एक प्रतिकर्ष कारक नहीं है?

(क) जलाभाव

(ख) बेरोजगारी

(ग) चिकित्सा/शैक्षणिक सुविधाएँ

(घ) महामारियाँ

उत्तर – (ग) चिकित्सा/शैक्षणिक सुविधाएँ

(iv) निम्नलिखित में से कौन-सा एक तथ्य सही नहीं है?

(क) विगत 500 वर्षों में मानव जनसंख्या 10 गुणा से अधिक बढ़ी है।

(ख) 5 अरब से 6 अरब तक बढ़ने में जनसंख्या को 100 वर्ष लगे।

(ग) जनांकिकीय संक्रमण की प्रथम अवस्था में जनसंख्या वृद्धि उच्च होती है।

उत्तर – (ग) जनांकिकीय संक्रमण की प्रथम अवस्था में जनसंख्या वृद्धि उच्च होती है।

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए:

(i) जनसंख्या के वितरण को प्रभावित करने वाले तीन भौगोलिक कारकों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर – जनसंख्या वितरण को प्रभावित करने वाले तीन भौगोलिक कारण निम्नलिखित है:-

(क) जल की उपलब्धता-

         जल जीवन का सर्वाधिक महत्वपूर्ण कारक है। अतः लोग उन क्षेत्रों में बसने को प्राथमिकता देते हैं जहां जल आसानी से उपलब्ध होता है।

(ख) भू-आकृति-

        अधिकांश लोग समतल मैदानों और मन्द ढालों पर बसने को प्राथमिकता देते हैं। क्योंकि ऐसे क्षेत्र फसलों के उत्पादन, सड़क निर्माण, और उद्योगों के लिए अनुकूल होते हैं।

(ग) जलवायु-

        अनुकूल जलवायु वाले क्षेत्र जिनमें अधिक मौसम परिवर्तन नहीं होते, अधिक लोगों को आकृष्ट करते हैं।

(ii) विश्व मे उच्च जनसंख्या घनत्व वाले अनेक क्षेत्र हैं। ऐसा क्यों होता है?

उत्तर- विश्व के अनेकों ऐसे क्षेत्र है जहाँ जनसंख्या घनत्व उच्च है क्योंकि यहाँ पर्याप्त जल की मात्रा, अनुकूल जलवायु, विस्तृत समतल भूमि की उपलब्धता, उपजाऊ मिट्टियाँ जैसे भौगोलिक कारक तथा खनिजों, नगरीकरण, औद्योगिकरण जैसे आर्थिक कारक उपलब्ध है।  जैसे- संयुक्त राज्य अमेरिका का उत्तरी पूर्वी-भाग, यूरोप का उत्तरी-पश्चिमी भाग तथा दक्षिणी, दक्षिणी-पूर्वी और पूर्वी एशिया के भाग इत्यादि।

(iii) जनसंख्या परिवर्तन के तीन घटक कौन-से है?

उत्तर- जनसंख्या परिवर्तन के तीन घटक है- जन्म, मृत्यु और प्रवास।

3. अंतर स्पष्ट कीजिए:

(i) जन्म दर और मृत्यु दर

उत्तर – जन्म दर– किसी क्षेत्र विशेष में किसी वर्ष के दौरान प्रति एक हजार स्त्रियों द्वारा जन्म दिए जीवित बच्चों की संख्या को जन्म दर कहा जाता है।

अशोधित जन्म दर= किसी वर्ष विशेष में जीवित जन्म / किसी क्षेत्र विशेष में वर्ष के मध्य जनसंख्या ×1000

मृत्यु दर- किसी क्षेत्र विशेष में किसी वर्ष के दौरान प्रति एक हजार जनसंख्या के पीछे मरने वालों संख्या को मृत्यु दर कहा जाता है।

अशोधित मृत्यु दर= किसी वर्ष विशेष में मृतकों की संख्या / उस वर्ष के मध्य में अनुमानित जनसंख्या ×1000

(ii) प्रवास के प्रतिकर्ष कारक और अपकर्ष कारक

उत्तर – प्रवास के प्रतिकर्ष- वे सभी कारक जो किसी स्थान पर जनसंख्या को बसने के लिए आकर्षित नहीं करता हो उसे प्रवास के प्रतिकर्ष कारक कहते है। जैसे – बेरोजगारी, रहन-सहन की निम्न दशाएं, राजनीतिक उपद्रव, प्रतिकूल जलवायु, प्राकृतिक विपदाएँ, महामारीयाँ तथा सामाजिक आर्थिक पिछड़ेपन इत्यादि।

प्रवास के अपकर्ष कारक- वे सभी कारक जो किसी स्थान पर जनसंख्या को बसने के लिए आकर्षित करता हो उसे प्रवास के अपकर्ष कारक कहते है। जैसे – बेहतर रोजगार के अवसर, रहन-सहन की अच्छी दशाएं, शांति व स्थायित्व, जीवन व संपत्ति की सुरक्षा तथा अनुकूल जलवायु इत्यादि।

4. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए।

(i) विश्व में  जनसंख्या के वितरण और घनत्व को प्रभावित करने वाले कारकों की विवेचना कीजिए।

उत्तर- जनसंख्या वितरण एवं घनत्व को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित है:-

(A) भौगोलिक कारक-

(i) जल की उपलब्धता-

     जल जीवन का सर्वाधिक महत्वपूर्ण कारक है। अतः लोग उन क्षेत्रों में बसने को प्राथमिकता देते हैं जहाँ जल आसानी से उपलब्ध होता है। यही कारण है कि नदी-घाटियाँ विश्व के सबसे सघन घने बसे हुए क्षेत्र हैं।

(ii) भू-आकृति-

     लोग समतल मैदानों और मंद ढालों पर बसने को वरीयता देते हैं क्योंकि ऐसे क्षेत्र फसलों के उत्पादन सड़क, निर्माण और उद्योगों के लिए अनुकूल होते हैं। गंगा का मैदान विश्व के सर्वाधिक सघन जनसंख्या वाले क्षेत्रों में से एक है जबकि हिमालय के पर्वतीय भाग विरल जनसंख्या वाले क्षेत्र हैं।

(iii) जलवायु-

     अति उष्ण अथवा ठंडे मरुस्थलों की विषम जलवायु मानव बसाव के लिए सुविधाजनक नहीं होती है अर्थात सुविधाजनक जलवायु वाले क्षेत्र जिनमें अधिक मौसमी परिवर्तन नहीं होते वहाँ अधिक लोगों का बसाव होता है।

(iv) मृदाएँ-

      कृषि तथा इससे संबंधित क्रियाओं के लिए उपजाऊ मृदाओं का महत्वपूर्ण है इसीलिए उपजाऊ दोमट मिट्टी वाले प्रदेशों में अधिक लोगों का निवास होता है क्योंकि यह मृदाएँ गहन कृषि का कार्य के लिए उपयुक्त होती है।

(B) आर्थिक कारक-

(i) खनिजों की उपस्थिति-

     खनिजों से युक्त क्षेत्र उद्योगों को आकृष्ट करते हैं क्योंकि खनन और औद्योगिक गतिविधियाँ रोजगार उत्पन्न करते हैं। अतः कुशल एवं अर्ध कुशल कर्मी इन क्षेत्रों में पहुँचते हैं और जनसंख्या को सघन बना देते हैं।

(ii) नगरीकरण-

    नगर रोजगार के बेहतर अवसर, शैक्षणिक व चिकित्सा संबंधी सुविधाएँ तथा परिवहन और संचार के बेहतर साधन प्रस्तुत करते हैं। इस कारण ग्रामीण क्षेत्रों से नगरीय क्षेत्रों में प्रवास होता है। इस प्रकार नगर के आकार में वृद्धि होती है।

(iii) औधोगिकरण-

     औद्योगिक पेटियाँ रोजगार के अवसर उपलब्ध कराती है और बड़ी संख्या में लोगों को आकर्षित करती है। इनमें केवल कारखानों के श्रमिक ही नहीं होते बल्कि परिवहन परिचालक, दुकानदार, बैंक कर्मी, डॉक्टर, अध्यापक तथा अन्य सेवाएँ उपलब्ध कराने वाले भी होते हैं।

(C) सामाजिक एवं सांस्कृतिक कारक-

     कुछ स्थान धार्मिक अथवा सांस्कृतिक महत्व के कारण अधिक लोगों को आकर्षित करते हैं। ठीक इसी प्रकार लोग उन क्षेत्रों को छोड़कर चले जाते हैं जहाँ सामाजिक और राजनीतिक अशांति होती है। कई बार सरकारें लोगों को विरल जनसंख्या वाले क्षेत्रों में बसने अथवा भीड़-भाड़ वाले स्थानों से चले जाने के लिए प्रोत्साहित करती है।

(ii) जनांकिकीय संक्रमण की तीन अवस्थाओं की विवेचना कीजिए।

उत्तर- जनांकिकीय संक्रमण सिद्धांत का प्रतिपादन थॉम्पसन एवं नॉटेस्टीन द्वारा किया गया था। इस सिद्धांत का उपयोग किसी क्षेत्र की जनसंख्या के वर्णन तथा भविष्य की जनसंख्या के पूर्वानुमान के लिए किया जा सकता है। इस सिद्धांत से हमें पता चलता है कि जैसे ही ग्रामीण समाज खेतिहर और अशिक्षित अवस्था से उन्नति करके नगरीय औद्योगिक और साक्षर बनता है तो किसी प्रदेश की जनसंख्या उच्च जन्म और निम्न जन्म व निम्न मृत्यु में परिवर्तित होती है। यह परिवर्तन मुख्यतः तीन अवस्थाओं में होते हैं जिन्हें सामूहिक रूप से जनांकिकीय चक्र के रूप में जाना जाता है।:-

(क) प्रथम अवस्था- 

        उच्च जन्म दर तथा उच्च मृत्यु दर इस अवस्था की प्रमुख विशेषता है। जनसंख्या वृद्धि धीमी होती है और अधिकांश लोग खेती में कार्यरत होते हैं। यहाँ बड़े परिवारों को परिसंपत्ति माना जाता है। जीवन-प्रत्याशा निम्न होती है। अधिकांश लोग अशिक्षित होते हैं और उनके प्रौद्योगिकी स्तर निम्न होते हैं। 200 वर्ष पूर्व विश्व के लगभग सभी देश इसी अवस्था में थे। जैसे- बांग्लादेश, वर्षा वानों के आदिवासी इत्यादि।

(ख) द्वितीय अवस्था-

      इस अवस्था में जन्म दर उच्च रहती है परंतु मृत्यु दर में तेजी से गिरावट आती है। स्वास्थ्य संबंधी दशाओं व स्वच्छता में सुधार के साथ मृत्यु दर में कमी आती है। इस अंतर के परिणामस्वरूप जनसंख्या में विस्फोटक वृद्धि होती है। जैसे- पेरू, श्रीलंका, केन्या आदि देश इस अवस्था से गुजर रहे हैं।

(ग) तृतीय अवस्था-

        इस अवस्था में जन्म दर में तेजी से कमी आती है साथ ही मृत्यु दर भी धीरे-धीरे घटती जाती है। इस प्रकार इस अवस्था में जनसंख्या वृद्धि दर या तो स्थिर हो जाती है या मन्द गति से बढ़ती है। जनसंख्या नगरीय और शिक्षित हो जाती है तथा उसके पास तकनीकी ज्ञान होता है। ऐसी जनसंख्या विचार पूर्वक परिवार के आकार को नियंत्रित करती है। जैसे- जापान, संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, जर्मनी, इत्यादि।


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(खण्ड 1: मानव भूगोल के मूल सिद्धांत)

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(खण्ड 2: भारत- लोग और अर्थव्यवस्था)
Part 2: India- People and Economy

PREVIOUS YEAR QUESTION PAPER सम्पूर्ण हल सहित (बिहार बोर्ड भूगोल 12वीं कक्षा)

अध्याय 4 मानव विकास

इकाई-2 अध्याय 4 मानव विकास

बिहार बोर्ड कक्षा 12वीं के भूगोल का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

(खण्ड 1: मानव भूगोल के मूल सिद्धांत)


अध्याय 4 मानव विकास

अध्याय 4 मानव विकास

1. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए:
(i) निम्नलिखित में से कौन-सा विकास का सर्वोत्तम वर्णन करता है?
(क) आकार में वृद्धि
(ख) गुण में धनात्मक परिवर्तन
(ग) आकार में स्थिरता
(घ) गुण में साधारण परिवर्तन
उत्तर – (ख) गुण में धनात्मक परिवर्तन
(ii) मानव विकास की अवधारणा निम्नलिखित में से किस विद्वान की देन है?
(क) प्रो. अमर्त्य सेन
(ख) डॉ. महबूब-उल-हक
(ग) एलन सी. सेम्पुल
(घ)  रैटजेल
उत्तर – (ख) डॉ. महबूब-उल-हक
 2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए:
(i) मानव विकास के तीन मूलभूत क्षेत्र कौन-से है?
उत्तर – मानव विकास के तीन मूलभूत क्षेत्र संसाधनों तक पहुँच, स्वास्थ्य एवं शिक्षा है। इन पक्षों में से प्रत्येक के मापन के लिए उपयुक्त सूचकों का विकास किया गया है। दीर्घ एवं स्वस्थ जीवन जीना, ज्ञान प्राप्त कर पाना तथा एक शिष्ट जीवन जीने के पर्याप्त साधनों का होना मानव विकास के सर्वाधिक महत्वपूर्ण पक्ष है।
(ii) मानव विकास के चार प्रमुख घटकों के नाम लिखिए।
उत्तर – मानव विकास के चार प्रमुख घटक समता, सतत पोषणीयता, उत्पादकता और सशक्तिकरण है। जिस प्रकार किसी इमारत को स्तंभों का सहारा होता है ठीक उसी प्रकार मानव विकास के लिए भी ये सभी घटकों काफी महत्वपूर्ण होते हैं।
(iii) मानव विकास सूचकांक के आधार पर देशों का वर्गीकरण किस प्रकार किया जाता है?
उत्तर – मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) स्वास्थ्य, शिक्षा और संसाधनों तक पहुँच जैसे प्रमुख क्षेत्रों में निष्पादन के आधार पर देशों का क्रम तैयार करता है। यह क्रम 0 से 1 के बीच के स्कोर पर आधारित होता है जो एक देश, मानव विकास के महत्वपूर्ण सूचकों में अपने रिकॉर्ड से प्राप्त करता है।
3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए।
(i) मानव विकास शब्द से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर – मानव विकास की अवधारणा का प्रतिपादन डॉ० महबूब-उल-हक के द्वारा किया गया था। डॉ० महबूब-उल-हक ने मानव विकास का वर्णन एक ऐसे विकास के रूप में किया जो लोगों के विकल्पों में वृद्धि करता है और उनके जीवन में सुधार लाता है। दीर्घ और स्वस्थ्य जीवन जीना, ज्ञान प्राप्त कर पाना और उच्च जीवन स्तर मानव विकास के सर्वाधिक महत्वपूर्ण पक्ष  हैं।
          मानव विकास के अन्य विकल्प हैं, राजनीतिक स्वतंत्रता, मानव अधिकारों की गारंटी, आत्म निर्भरता तथा स्वाभिमान के विविध घटक। लोगों के विकल्पों के परिवर्धन की प्रक्रिया और जनकल्याण के स्तर को ऊँचा उठाना ही मानव विकास है। मानव विकास की कल्पना केवल अर्थव्यवस्था के विकास से संबंधित न होकर, मानव के संपूर्ण विकास से संबंधित है। आर्थिक कारकों के समान राजनीतिक, सांस्कृतिक और सामाजिक कारकों को भी उतना ही महत्त्व दिया जाता है।
       
       इसके अतिरिक्त विकास के लक्ष्य और साधनों, दोनों पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। मानव विकल्पों के विस्तार को तो विकास का लक्ष्य माना जाता है लेकिन आपके विस्तार हो इसका आवश्यक साधना माना जाता है।
(ii) मानव विकास अवधारणा के अंतर्गत समता और सतत पोषणीयता से आप क्या समझते हैं?
उत्तर – मानव विकास के चार प्रमुख घटक समता, सतत पोषणीयता, उत्पादकता और सशक्तिकरण है। जिस प्रकार किसी इमारत को स्तंभों का सहारा होता है ठीक उसी प्रकार मानव विकास के लिए भी ये सभी घटकों काफी महत्वपूर्ण होते हैं।

          समता का तात्पर्य प्रत्येक व्यक्ति को उपलब्ध अवसरों के लिए समान पहुँच की व्यवस्था करने से है। लोगों को उपलब्ध अवसर लिंग, प्रजाति, आय और भारत के संदर्भ में जाति के भेदभाव के विचार के बिना समान होने चाहिए। यद्यपि ऐसा ज्यादातर तो नहीं होता फिर भी यह लगभग प्रत्येक समाज में घटित होता है। उदाहरण के तौर पर किसी भी देश में यह जानना रुचिकर होता है कि विद्यालय में विरत अधिकांश छात्र किस वर्ग से हैं। तब ऐसी घटनाओं के पीछे कारणों का पता लगना चाहिए।

        भारत में स्त्रियाँ और सामाजिक एवं आर्थिक दृष्टि से पिछड़े हुए वर्ग के व्यक्ति बड़ी संख्या में विद्यालय से विरत होते हैं। इससे पता चलता है कि शिक्षा तक पहुँच न होना किस प्रकार इन वर्गों के विकल्पों को सीमित करता है।


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बिहार बोर्ड कक्षा 12वीं के भूगोल का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

(खण्ड 1: मानव भूगोल के मूल सिद्धांत)

Part 1: Principal of Human Geography
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(खण्ड 2: भारत- लोग और अर्थव्यवस्था)
Part 2: India- People and Economy

PREVIOUS YEAR QUESTION PAPER सम्पूर्ण हल सहित (बिहार बोर्ड भूगोल 12वीं कक्षा)

अध्याय-1. मानव भूगोल प्रकृति एवं विषय क्षेत्र

इकाई-1 अध्याय-1. मानव भूगोल प्रकृति एवं विषय क्षेत्र

बिहार बोर्ड कक्षा 12वीं के भूगोल का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

(खण्ड 1: मानव भूगोल के मूल सिद्धांत)


मानव भूगोल प्रकृति एवं विषय क्षेत्र

मानव भूगोल प्रकृति

1. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए:

(i) निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा एक भूगोल का वर्णन नहीं करता?

(क) समाकलनात्मक अनुशासन

(ख) मानव और पर्यावरण के बीच अंतर-संबंधों का अध्ययन

(ग) द्वैधता पर आश्रित

(घ) प्रौद्योगिकी के विकास के फलस्वरूप आधुनिक समय में प्रासंगिक नहीं।

उत्तर – (ग) द्वैधता पर आश्रित

(ii) निम्नलिखित में से कौन-सा एक भौगोलिक सूचना का स्रोत नहीं है?

(क) यात्रियों के विवरण

(ख) प्राचीन मानचित्र

(ग) चन्द्रमा से चट्टानी पदार्थों के नमूने

(घ) प्राचीन महाकाव्य

उत्तर – (घ) प्राचीन महाकाव्य

(iii) निम्नलिखित में से कौन-सा एक लोगों और पर्यावरण के बीच अन्योन्यक्रिया का सर्वाधिक महत्वपूर्ण कारक है?

(क) मानव बुद्धिमता

(ख) प्रौद्योगिकी

(ग) लोगों के अनुभव

(घ) मानवीय भाईचारा

उत्तर – (ख) प्रौद्योगिकी

(iv) निम्नलिखित में से कौन-सा एक मानव भूगोल का उपागम नहीं है?

(क) क्षेत्रीय विभिन्नता

(ख) मात्रात्मक क्रांति

(ग) स्थानिक संगठन

(घ) अन्वेषण और वर्णन

उत्तर – (ग) स्थानिक संगठन

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए:

(i) मानव भूगोल को परिभाषित कीजिए।

उत्तर- मानव भूगोल, मानव विकास के विभिन्न चरणों में उस पर पड़ने वाले भौगोलिक प्रभाव का आदर्श अध्ययन है।  अर्थात मानव भूगोल, मानव और उसके भौतिक वातावरण के संबंधों का संपूर्ण अध्ययन करता है।

     दूसरे शब्दों में मानव भूगोल वह विज्ञान है जिसमें मनुष्य तथा वातावरण के पारस्परिक संबंधों का क्षेत्रीय आधार पर अध्ययन किया जाता हैं।

(ii)  मानव भूगोल के कुछ उप-क्षेत्रों के नाम बताइए।

उत्तर – मानव भूगोल के उप-क्षेत्र  निम्नलिखित है-

    व्यवहारवादी भूगोल, सामाजिक कल्याण का भूगोल, ऐतिहासिक भूगोल, सांस्कृतिक भूगोल, संसाधन भूगोल, कृषि भूगोल, उद्योग भूगोल, पर्यटन भूगोल, इत्यादि।

(iii) मानव भूगोल किस प्रकार अन्य सामाजिक विज्ञानों से संबंधित है?

उत्तर- मानव भूगोल, मानव जीवन के सभी तत्वों तथा अंतराल, जिसके अंतर्गत वे घटित होते हैं के मध्य संबंध की व्याख्या करने का प्रयत्न करती है। इस प्रकार मानव भूगोल की प्रकृति अत्यधिक अंतर विषयक है। पृथ्वी तल पर पाए जाने वाले मानवीय तत्वों को समझने व उनकी व्याख्या करने के लिए मानव भूगोल अन्य सामाजिक विज्ञानों के सहयोगी विषयों के साथ घनिष्ठ अंतर्संबंध विकसित करती है

 3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए।

(i) मानव के प्रकृतीकरण की व्याख्या कीजिए।

उत्तर – मनुष्य अपने प्रौद्योगिकी की सहायता से अपने भौतिक पर्यावरण से अन्योन्यक्रिया करता है। यह महत्वपूर्ण नहीं है कि मानव क्या उत्पन्न और निर्माण करता है बल्कि यह अत्यन्त महत्वपूर्ण है कि ‘वह किन उपकरणों और तकनीकों की सहायता से उत्पादन और निर्माण करता है’।

    प्रौद्योगिकी किसी समाज के सांस्कृतिक विकास के स्तर की सूचक होती है। मानव प्रकृति के नियमों को बेहतर ढंग से समझने के बाद ही प्रौद्योगिकी का विकास कर पाया। जैसे घर्षण और ऊष्मा की संकल्पनाओं ने अग्नि की खोज में हमारी सहायता की। इसी प्रकार डीएनए और अनुवांशिकी के रहस्य की समझ ने हमें अनेक बीमारियों पर विजय पाने के योग्य बनाया। अधिक तीव्र गति से चलने वाले यान विकसित करने के लिए हम वायु गति के नियमों का प्रयोग करते हैं। इस प्रकार प्रकृति का ज्ञान प्रौद्योगिकी को विकसित करने के लिए महत्वपूर्ण है और प्रौद्योगिकी मनुष्य पर पर्यावरण की बंदिशों को कम करती है।

    प्राकृतिक पर्यावरण से अन्योन्यक्रिया की आरंभिक अवस्थाओं में मानव से अधिक प्रभावित हुआ था। उन्होंने प्रकृति के आदेशों के अनुसार अपने आप को ढाल लिया। इसका कारण यह है कि प्रौद्योगिकी का स्तर अत्यंत निम्न था और मानव के सामाजिक विकास की अवस्था भी आदिम थी। आदिम मानव समाज और प्रकृति की प्रबल शक्तियों के बीच इस प्रकार की अन्योन्यक्रिया को पर्यावरणीय निश्चयवाद कहा गया। प्रौद्योगिकी विकास की उस अवस्था में हम प्राकृतिक मानव की कल्पना कर सकते हैं जो प्रकृति को सुनता था उसकी प्रचंडता से भयभीत होता था और उसकी पूजा करता था।

(ii) मानव भूगोल के विषय क्षेत्र पर एक टिप्पणी लिखिए।

उत्तर– मानव भूगोल भौतिक अथवा प्राकृतिक एवं मानव जगत के बीच संबंध मानवीय परिघटनाओं का स्थानिक वितरण तथा उनके घटित होने के कारण एवं विश्व के विभिन्न भागों में सामाजिक और आर्थिक विविधताओं का अध्ययन  है। अर्थात मानव एवं भौतिक पर्यावरण के बीच अंतर संबंधों का अध्ययन ही मानव भूगोल कहलाता है।

    इस प्रकार मानव भूगोल की प्रकृति अत्यधिक अंतर-विषयक है। पृथ्वी तल पर पाए जाने वाले मानवीय तत्वों को समझने व उनकी व्याख्या करने के लिए मानव भूगोल सामाजिक विज्ञानों के सहयोगी विषयों के साथ घनिष्ठ अंतरा पृष्ठ विकसित करती है। ज्ञान के विस्तार के साथ नए क्षेत्रों का विकास होता है और मानव भूगोल के साथ भी ऐसा ही हुआ है।

     मानव भूगोल के कई क्षेत्र जैसे- सामाजिक भूगोल, नगरीय भूगोल, राजनीतिक भूगोल, जनसंख्या भूगोल, आवास भूगोल, आर्थिक भूगोल इत्यादि है। मानव भूगोल के कई उपक्षेत्र भी है जैसे- व्यवहारिक भूगोल, सामाजिक कल्याण का भूगोल, अवकाश का भूगोल, सांस्कृतिक भूगोल, लिंग भूगोल, ऐतिहासिक भूगोल, चिकित्सा भूगोल, निर्वाचन भूगोल, सैन्य भगोल, संसाधन भूगोल, कृषि भूगोल,  विपणन भूगोल, पर्यटन भूगोल, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का भूगोल इत्यादि।



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अध्याय 3.2 वस्त्र उद्योग

इकाई 3. अध्याय 3.2 (ख) वस्त्र उद्योग

बिहार बोर्ड के 8वीं कक्षा का भूगोल विषय का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

सरल एवं आसान शब्दों में उत्तर देना सीखें



वस्त्र उद्योग

I. बहुवैकल्पिक प्रश्नोत्तर

सही विकल्प को चुनें।
1. टेक्सटाइल का मतलब होता है-
(क) जोड़ना
(ख) बुनना
(ग) नापना
(घ)सिलना
उत्तर – (ख) बुनना

2. देश में कपड़े की मील सबसे पहले लगाई गयी-
(क) कोलकाता में
(ख) मुंबई में
(ग) लुधियाना में
(घ) वाराणसी में
उत्तर – (क) कोलकाता में

3. 1854 में कपड़े की मील लगी-
(क) कोलकाता में
(ख) हैदराबाद में
(ग) सूरत में
(घ) मुंबई में
उत्तर- (घ) मुंबई में

4. सिल्क प्राप्त होता है-
(क) कपास से
(ख) रेयान से
(ग) कोकून से
(घ) पेड़ों से
उत्तर- (ग) कोकून से

5. वस्त्र उद्योग के लिए आवश्यक है-
(क) ऊर्जा
(ख) कच्चा माल
(ग) श्रम
(घ) उपर्युक्त सभी
उत्तर- (ख) कच्चा माल

II. खाली स्थान को उपयुक्त शब्दों से पूरा करें।

1. भागलपुर शहर रेशमी वस्त्र उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है।

2. सूती वस्त्र उद्योग एक कुटीर उद्योग है।

3. कपड़ों की बुनाई को टेक्सटाइल कहा जाता है।

4. ढाका मलमल के लिए प्रसिद्ध है रहा है।

5. अहमदाबाद को भारत का मैनचेस्टर कहा जाता है।

III. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें। (अधिकतम 50 शब्दों में)

(1) प्राकृतिक रेशे क्या है?
उत्तर- जो रेशे प्राकृतिक रूप से अर्थात भेड़ों, बकरियों, कोकून तथा पौधों से तैयार किये जाते हैं उसे प्राकृतिक रेशे कहा जाता है।

(2) मानव निर्मित रेशे का नाम लिखिए।
उत्तर- मानव निर्मित रेशे का नाम – नाइलान, पालिस्टर, एक्रोलियम, रेयॉन इत्यादि।

(3) मशीनों से कपड़ों का उत्पादन सस्ता होता है। क्यों?
उत्तर- धागे से कपड़े बुनना एक प्राचीन कला है। लेकिन अब यही कला उद्योग का रूप ले चुका है। मशीनों से कपड़े बनाने में कम समय लगता है।इसमें मजदूर भी कम लगते हैं और बहुत अधिक मात्रा में कच्चा माल खरीदना भी सस्ता पड़ता है। इसलिए मशीनों से कपड़ों का उत्पादन सस्ता होता है और जल्दी बनता है।

(4) गर्म कपड़ों की थोक खरीदारी किस जगह पर होती है और क्यों?
उत्तर- गरम कपड़ों की थोक खरीदारी लुधियाना तथा दिल्ली से होती है क्योंकि वहाँ अत्यधिक मात्रा में मिल हैं तथा कच्चा माल आसानी से उपलब्ध हो जाता है जिससे कपड़े कम कीमत पर उपलब्ध हो जाते हैं।

IV. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें। (अधिकतम 200 शब्दों में)

1. वस्त्र उद्योग की स्थापना में सहायक कारकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर- (i) कच्चे माल की उपलब्धता- वस्त्रोद्योग हेतु कच्चे माल की उपलब्धता महत्त्वपूर्ण कारक है। समुद्री हवाओं और नमी के कारण गुजरात, महाराष्ट्र में अच्छी गुणवत्ता के कपास कच्चे माल के रूप में उपलब्ध होती है। गुजरात की काली मिट्टी कपास के उत्पादन के लिए काफी उर्वर है। ऊन से बनने वाले कम्बल, स्वेटर आदि गर्म कपड़े पंजाब कश्मीर में ज्यादा उपलब्ध हैं क्योंकि इन क्षेत्रों में भारी संख्या में ऐसे जानवर पाये जाते हैं।

(ii) परिवहन की सुविधा- वस्त्रों से संबंधित उत्पादन क्षेत्र निर्यात व आयात करने के लिए मुम्बई, कोलकाता, सौराष्ट्र, कोयम्बटूर (तमिलनाडु) इत्यादि बन्दरगाहों, सड़क, रेलमार्गों व वायुमार्गों से नजदीक अवस्थित है। इससे कच्चा व तैयार माल सम्पूर्ण देश में पहुँचाया जाता है। साथ ही यूरोपीय देशों से आधुनिक मशीनें भी आयात करने में सुविधा होती है।

(iii) जलवायु- वस्त्र उद्योग के लिए नम जलवायु आवश्यक है। अंगर जलवायु नम नहीं होगी तो कपास के रेशे से निर्मित धागे टूटने लगते हैं। इस अवस्था में धागों में गाँठे पड़ जाएँगी तथा कपड़े की बुनावट अच्छी और मजबूत नहीं हो पायेगी। ऐसी जलवायु के अभाव में कृत्रिम रूप से आर्द्र जलवायु उपलब्ध करायी जाती है।

(iv) पूँजी की उपलब्धता- इसके बिना उद्योगों की कल्पना भी नहीं कर सकते है। मुम्बई, कोलकाता और अहमदाबाद जैसे स्थानों में पर्याप्त पूँजी निवेशक उपलब्ध है। मुम्बई के प्रमुख पारसी व्यापारियों ने विदेशी व्यापार से जो धन अर्जित किया उसे वस्त्र उद्योग में लगाया, जिससे वस्त्रोद्योग को काफी विस्तार मिला।

(v) श्रम की उपलब्धता- मुम्बई की मिलों में काम करने के लिए मजदूर, कोंकण, सतारा, शोलापुर, रत्नागिरि जैसी जगहों से आते हैं। उसी प्रकार कलकत्ता की मिलों के लिए मजदूर बंगाल, बिहार, उड़ीसा, उत्तर प्रदेश और असम से उपलब्ध होते हैं जिसके कारण इस उद्योग को विकसित होने में सुविधा हुई है।

(vi) विस्तृत बाजार की उपलब्धता- वस्त्र उद्योग की स्थापना बाजार को देखते हए भी की जाती है। दिल्ली, कलकत्ता, लुधियाना, कानपुर इत्यादि में स्थापित वस्त्रोद्योग की इकाईयाँ बाजार के आधार पर ही विकसित की गई हैं।

(vii) सस्ती ऊर्जा की सुविधा- मुम्बई की कपड़ा मिलों को पश्चिमी-घाट पर स्थित टाटा जल विद्युत योजना से सस्ती विद्युत शक्ति प्राप्त हो जाती है। उसी प्रकार कलकत्ता की मिलों को रानीगंज, झरिया से कोयले की प्राप्ति हो जाती है। तमिलनाडु की मिलों को पायकारा जल विद्युत योजना से सस्ती बिजली प्राप्त होती है।

(vi) इच्छाशक्ति- किसी भी उद्योग की स्थापना के लिए इच्छाशक्ति का होना बहुत जरुरी है।

2. भारत के सूती वस्त्र उद्योग का विवरण दीजिए।
उत्तर- भारत का सूती वस्त्र उद्योग अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का लगभग एक चौथाई भाग है। भारत में कपड़े का उत्पादन लगातार बढ़ता जा रहा है। वर्ष 1950-51 में 4 अरब वर्ग मीटर कपड़ा तैयार किया गया था जो अब 34 अरब वर्ग मीटर हो गया है। आधुनिक सूती वस्त्र उद्योग में वस्त्र निर्माण की प्रक्रिया कई स्तरों से गुजरती है। शुरू में मशीनों द्वारा कपास से बीज निकाले जाते हैं, जिसे ‘गिनिंग’ कहते हैं। इसके बाद कपास को इकट्ठा कर गाँठ तैयार किया जाता है। गाँठों द्वारा कपास के धागे बनाए जाते हैं। फिर इन धागों की सहायता से मशीनों द्वारा कपड़ा तैयार किया जाता है।


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