1. बेबर के औद्योगिक स्थानीयकरण का सिद्धांत (Weber’s theory of industrial localization)

1. बेबर के औद्योगिक स्थानीयकरण का सिद्धांत 

(Weber’s theory of industrial localization)


बेबर के औद्योगिक स्थानीयकरण का सिद्धांत⇒

प्रश्न प्रारूप 

1. औद्योगिक स्थानीयकरण सिद्धांत की चर्चा करें। 

2. बेबर के औद्योगिक स्थानीयकरण का सिद्धत की आलोचनात्मक व्याख्या प्रस्तुत करें तथा वर्तमान समय में इसकी उपयोगिता की चर्चा करें। 

औद्योगिक अवस्थिति का सिद्धांत

                     उद्योगों के स्थानीयकरण पर कई कारकों का प्रभाव पड़ता है। इनमें कच्चा माल, बाजार, परिवहन, श्रमिक, तकनीकी उपलब्धता, ऊर्जा और अन्य संरचनात्मक सुविधाएँ प्रमुख हैं। सभी उद्योगों पर इन सभी कारकों का एक समान प्रभाव नहीं पड़ता है। इसी असमानता को देखते हुए कई भूगोल‌वेताओं एवं अर्थशास्त्रियों ने उद्योगों के स्थानीयकरण की प्रवृति को सैद्धांतिक रूप देने का प्रयास किया है। इनमें से बेबर, हुबर, लॉश, फेटर, हौर्टलीन तथा स्मिथ का सिद्धांत प्रमुख हैं। इनमें से बेबर का सिद्धांत सबसे पुराना है। इस सिद्धांत को बेबर ने 1909 में दक्षिणी जर्मनी के औद्योगिक क्षेत्रों का अध्ययन कर प्रस्तुत किया। इनका सिद्धांत निम्नलिखित मान्यताओं पर आधारित है:- 

मान्यताएँ :- 

         बेबर ने बताया कि मेरा सिद्धांत वहीं पर लागू होगा जहाँ-

(1) एकाकी प्रदेश होगा तथा वह संपूर्ण प्रदेश एक ही प्रशासन के अन्तर्गत होगा।

(2) सम्पूर्ण प्रदेश में एक ही जलवायु, एक ही संस्‌कृति और एक समान जनसंख्या उपलब्ध हो या सम्पूर्ण प्रदेश में भौगोलिक समरूपता एक समान हो।  

(3) एक समय में एक ही उद्योग की स्थानीयकरण का विश्लेषण किया जाता हो। 

(4) कच्ची सामाग्री के स्रोत और इसकी भौगोलिक अवस्थिति का पूर्ण ज्ञान हो। 

(5) बाजार की अवस्थिति का पूर्ण ज्ञान हो।

(6) श्रम उपलब्धता निश्चित हो तथा उसकी पूरी जानकारी हो।

(7) परिवहन लागत भार और दूरी के सापेक्ष में वास्तविक वृद्धि हो।

सिद्धांत / परिकल्पना

        बेबर के अनुसार औद्योगिक स्थानीकरण सिद्धांत को न्यूतम परिवहन लागत का सिद्धांत कहते है। बेबर के अनुसार “न्यूनतम परिवहन लागत वाला स्थान ही न्यूनतम उत्पादन लागत वाला स्थान होता है और न्यूनतम लागत वला स्थान ही उद्योगों की स्थापना के लिए उपयुक्त स्थान होता है।”

      बेबर ने दूसरा परिकल्पना भी प्रस्तुत किया है। जैसे- “सस्ता श्रम और संरचनात्मक सुविधाएं इत्यादि उद्योगों के स्थानीयकरण को न्यूनतम परिवहन लागत वाला स्थान से विचलित करता है।” अर्थात न्यूनतम  श्रम लागत और संरचनात्मक सुविधाएं उद्योगों को अपनी ओर आकर्षित करती है।

स्थानीयकरण का मॉडल

             ऊपर वर्णित मान्यताओं और परिकल्पनाओं के संदर्भ में बेबर ने प्रयोगों के स्थानीयकरण की दो परिस्थितियाँ बतायी है-

(1) प्रथम स्थिति में एक ही कच्चे माल पर उद्योग आधारित होता है। 

(2) दूसरी परिस्थिति में एक से अधिक कच्चे माल पर उद्योग आधारित होते हैं।

I. पहली दश एक बाजार और एक कच्चा माल (R1) 

                       एक कच्चे माल पर आधारित उद्योगों का स्थानीयकरण की तीन प्रवृति होती हैं-

(1) वैसा उद्योग जिसका कच्चा माल सर्वत्र उपलब्ध है। ऐसी स्थिति है। उद्योगों की स्थापना बजार के केन्द्र में होती है, क्योंकि वहाँ पर परिवहन लागत नगण्य होता है। जैसे- जूता मरम्मत उद्योग, छाता मरम्मत उद्योग।   (2) दूसरी परिस्थिति के अनुसार कच्चा माल अशुद्ध हो तथा स्थानीय हो तो वैसी स्थिति में उद्योगों की स्थापना माल के केन्द्र में होती है क्योंकि परिष्कृत समान की दुलाई कच्चे माल की दुलाई के तुलना में परिवहन लागत कम होता है। जैसे:- चीनी उद्योग।

नोट:- यहाँ अशुद्ध का तात्पर्य वजन ह्रास वाले उद्योग से है।

(3) तीसरी परिस्थिति के अनुसार वैसे उद्योग आते हैं जिनका कच्चा माल शुद्ध हो और स्थानीय तौर पर उपलब्ध हो। ऐसी उद्योगों की स्थापना बाजार क्षेत्र या कच्चे माल के क्षेत्र में किया जा सकता है। जैसे- वस्त्र उद्योग, रेडिमेट गार्मेन्ट उद्योग। 

II. दूसरी दशा:- एक बाजार तथा दो से अधिक कच्चा माल (R2)

              एक से अधिक कच्चे माल पर आधारित उद्योग के लिए बेबर ने त्रिभुजाकार मॉडल प्रस्तुत किया है। वेबर ने कहा है कि कई ऐसे उद्योग हैं जिसमें एक से अधिक कच्चे माल का प्रयोग होता है। जैसे लौह-इस्पाल उद्योग में लौह अयस्क, चूना पत्थर, कोयला, मैंगनीज, क्रोमियम जैसे खनिजों का प्रयोग होता है।

           बेबर के अनुसार ऐसे उद्योगों का स्थानीयकरण सभी कच्चे माल से प्रभावित नहीं होता बल्कि कुछ ‌कच्चे माल उद्योगों के स्थानीयकरण को प्रभावित करते हैं। जैसे- लौह-इस्पात उद्योग को लौह अयस्क एवं कोयला,  सीमेन्ट उद्योग को चूना पत्थर एवं कोयला, एल्युमिनियम उद्योग को बॉक्साइट एवं विद्युत इत्यादि।

           एक से अधिक कच्चे माल पर आधारित उद्योगों की स्थानीयकरण की व्याख्या करने हेतु दो परिस्थिति की चर्चा किया है।- 

(1) वजन ह्रास उद्योग के संदर्भ में 

(2) वजन वृद्धि उद्योग के संदर्भ में

(1) वजन ह्रास उद्योग के संदर्भ में

           लौह-इस्पात उद्योग, सीमेन्ट उद्योग इत्यादि इसके अच्छे उदा० है। वजन द्वास उद्योग के अन्तर्गत सर्वाधिक अनुकूल स्थान दो कच्चे माल के बीच त्रिभुज के अन्तर्गत होता है। इसे नीचे के मॉडल से समझा जा सकता है-बेबर के औद्योगिक

            उपरोक्त त्रिभुजाकार मॉडल सही अर्थों में लौह इस्पात उद्योग के संदर्भ में प्रस्तुत किया गया द्वितीय विश्वयुद्ध के पूर्व अधिकांश लौह इस्पात उद्योग का विकास इसी अवधारणा के अनुसार हुआ है। जमशेदपुर का कौह इस्पात केन्द्र इस मॉडल का एक अच्छा उदा० है।

          वेबर ने अपने त्रिभुजाकार मॉडल में बताया कि अगर उद्योग वजन ह्रास वाला है तो उसका स्थानीयकरण कच्चे माल के क्षेत्र से नजदीक होता है। जैसे-

(2) वजन वृद्धि उद्योग के संदर्भ में

            बेबर ने वजन वृद्धि वाले उद्योग के स्थानीयकरण का व्याख्या करते हुए बताया कि ऐसे उद्योगों का स्थानीयकारण भी त्रिभुजाकार मॉडल के अनुरूप ही होगा लेकिन ऐसे उद्योग नगर से नजदीक होते हैं। जैसे- बेकरी उद्योग, सौन्दर्य प्रसाधन उद्योग, वस्त्र उद्योग। 

             बेबर ने स्वयं यह बताया है कि ऊपर वर्णित उद्योगों के स्थानीयकरण में दो कारणों से विचलन हो सकता-

(1) यदि किसी स्थान पर श्रमिक अत्यधिक सस्ते हो तो उस स्थिति में उद्योग न्यूनतम परिवहन लागत वाला स्थान पर स्थापित न होकर न्यूनतम मजदूरी लागत वाला स्थान पर स्थापित होता है। न्यूनतम श्रमिक लागत वाला स्थान के निर्धारण हेतु उन्होंने Isodapane Line खींचा है। यह एक ऐसी काल्पनिक रेखा है जो उन सभी बिन्दुओं को मिलाती है जहाँ न्यूनतम परिवहन लागत केन्द्र से परिवहन लागत में समान वृद्धि होती है। जैसे-

बेबर के औद्योगिक

बेबर का Isodapane Line

            वह आइसोडापेन रेखा जिसपर न्यूनतम श्रम लागत आता है उसी स्थान पर उद्योगों की स्थापना की जाती है। न्यूनतम श्रमिक लागत वाला आइसोडापेन लाइन को Critical Isodapane Lime कहते हैं।     

             इसका सबसे अच्छा उदहारण USA में देखने को मिलता है। जैसे – USA में सूती वस्त्र उद्योग का विकास न्यू इंगलैण्ड क्षेत्र में हुआ लेकिन सस्ते श्रम के कारण यह उद्योग स्थानांतरित होकर टेक्सॉस एवं अल्वामा जैसे राज्यों में चला गया है। इसी तरह से इलेक्ट्रॉनिक्स एवं साफ्टवेयर उद्योग सस्ते श्रम वाले क्षेत्र की ओर स्थानांतरित हो रहे हैं।
 
(2) बेबर के अनुसार संरचनात्मक सुविधाएँ भी उद्योगों के स्थानीयकरण को न्यूनतम परिवहन लागत वाले स्थानों से विचलित करते हैं। ये सुविधाएँ भारी उद्योगों को प्रभावित नहीं कर पाते हैं बल्कि छोटे एवं हल्के उद्योगों को विशेष रूप से प्रभावित करती हैं। खासकर फूटलूज उद्योग। जैसे – सौंदर्य प्रशाधन उद्योग, इलेक्ट्रॉनिक उद्योग, माँग आधारित उद्योग, रेडिमेट गार्मेन्ट उद्योग इत्यादि। दिल्ली, मुम्बई, कोलकाता, चेन्नई जैसे महानगरों में इस तरह के उद्योगों का विकास न्यूनतम परिवहन लागत के कारण नहीं बल्कि संरचनात्मक सुविधाओं के कारण हुआ है।

नोट: फुटलुज उद्योग – वैसा उद्योग जिसकी स्थापना कहीं भी की जा सकती है जहाँ संरचनात्मक सुविधाएँ उपलब्ध हो।

आलोचना

                 बेबर के द्वारा प्रस्तुत न्यूनतम परिवहन लागत सिद्धांत के आलोचकों में हुबर, हॉटलीन फेटर, और स्मिथ अग्रणी है।

1. हुबर न्यूनतम परिवहन लागत वाला स्थान न्यूनतम उत्पादन लागत का स्थान नहीं हो सकता क्योंकि उद्योगों के स्थानीयकरण को न केवल परिवहन प्रभावित करता है बल्कि तकनीकी लागत, श्रमिक लागत, ऊर्जा लागत इत्यादि का भी प्रभाव पड़ता है।

हूबर – दो से अधिक कच्चे माल का प्रयोग करने वाले उद्योगों का स्थानीयकरण त्रिभुज के अन्दर हो यह कोई जरूरी नहीं है। आज विश्व में अधिकांश इस्पात उद्योगों का विकास समुद्र के तटवर्ती क्षेत्र में हो रहा है न कि बेबर के त्रिभुजाकार मॉडल के अनुसार। 

            फेटर, हाटलीन और स्मिथ जैसे आचारपरक भूगोलवेताओं ने कहा है कि उद्योगों का स्थानीयकरण उपभोक्ताओं की इच्छा और क्रय क्षमता पर निर्भर करता है। हॉटलीन एवं फेटर ने मियामी बिच (USA) के पास विकसित आइसक्रीम उद्योगो का हवाला देते हुए यह बताया है कि यहाँ पर आइसक्रीम उद्योग विश्व का सर्वाधिक लागत वाला उद्योग है। फिर भी पर्यटकों के व्यवहार (मांग) के कारण इस उद्योग का यहाँ विकास हुआ है।

            अनेक आलोचकों ने बेबर के मान्यता को ध्यान में रखकर आलोचना किया है। जैसे- वर्तमान समय में कोई प्रदेश एकाकी प्रदेश नहीं हो सकता है और न ही उसमें भौगोलिक समरूपता पायी जा सकती है। इसी तरह बढ़ते दूरी एवं भार के अनुसार परिवहन मूल्य (भाड़ा) में सापेक्षिक वृद्धि भी नहीं हो सकती है। 

आलोचनात्मक मूल्यांकन

         इन आलोचनाओं के बावजूद बेबर के सिद्धांत का अपना महत्व है क्योंकि आज भी यह सिद्धांत चीनी उद्योग, वस्त्र उद्योग, खाद्य सामाग्री उद्योग के स्थानीयकरण की सटीक व्याख्या करता है। कुछ भूगोलवेताओं का यह भी कहना है कि समुद्री तट के किनारे विकसित होने वाले इस्पात उद्योग वर्तमान समय में बेबर के सिद्धांत के अनुरूप ही हो रहा है। जैसे- भारत का विशाखापतनम, जापान कोबे, USA का बाल्कि मोर इसके अच्छे उदाहरण हैं। भारत का विशाखापतनम कारखाना, बेलाडीला और डॉलीराजहरा से लौह-अयस्क प्राप्त करता है। और कोयला  का आयात न्यूनतम परिवहन लागत के कारण विदेशों से ही किया जाता है। इस तरह विशाखापतनम न्यूनतम परिवहन लागत इस्पात का प्रमुख केन्द्र बना है।

निष्कर्ष : 

      अतः ऊपर के तथ्यों से स्पष्ट है कि कुछ खामियों के बावजूद बेबर का न्यूनतम परिवहन लागत सिद्धांत चिरसंवतकालीन सिद्धांत है। यह सिद्धांत सुती वस्त्र उद्योग, चीनी उद्योगो, लौह- इस्पात उद्योगों के स्थानीयकरण की सटीक व्याख्या करने में सक्षम है।

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भारत का भूगोल

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एक नजर में इन्हें जरुर देखें 

1. भारत मे अधिकांश वर्षा होती है-

उत्तर- दक्षिण-पश्चिम मानसून से

2. भारत मे दक्षिणी पश्चिमी मानसून का आगमन होता है-

उत्तर- 1-5 जून (केरल में)

3. जाड़े के दिनों में तमिलनाडु के तटों पर वर्षा होती है-

उत्तर- लौटती हुई मानसून या उतरी-पूर्वी मानसून से

4. भारत की जलवायु कैसी है-

उत्तर- उष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु

5. भारत में मौसम संबंधित मानचित्र कहाँ से प्रकाशित होते है-

उत्तर- पुणे से

6. उत्तरी भारत के मैदानी भागों में शीत ऋतु में वर्षा होती है-

उत्तर- पश्चिमी विक्षोभ या जेट स्ट्रीम से

7. विश्व मे सर्वाधिक वर्षा होती है-

उत्तर- मासिनराम (मेघालय, 1141 सेमी०)

8. मानसून प्रत्यावर्तन का काल (Retreating Monsoon Season) कहा जाता है-

उत्तर- शरद ऋतु

9. दक्षिण-पश्चिमी मानसून द्वारा आर्द्रता क्रमशः लाया जाता है-

उत्तर- 65% और 35%

10. भारत मे सर्वाधिक क्षेत्र में तथा सर्वाधिक उपयुक्त मिट्टी है-

उत्तर- जलोढ़ मिट्टी

11. नवीन जलोढ़ मिट्टी को कहा जाता है-

उत्तर- खादर

12. पुरानी जलोढ़ मिट्टी को कहा जाता है-

उत्तर- बांगर

13. काली मिट्टी का निर्माण हुआ है-

उत्तर- बेसाल्ट चट्टानों के टूटने-फूटने से

14. काली मिट्टी का अन्य नाम है-

उत्तर- रेगुर मिट्टी या लावा मिट्टी

15. कपास की खेती के लिए  सर्वाधिक उपयुक्त मिट्टी है-

उत्तर- काली मिट्टी (रेगुर मिट्टी)

16. काली मिट्टी का सर्वोत्तम क्षेत्र है-

उत्तर- महाराष्ट्र

17. काली मिट्टी का रंग काला होता है-

उत्तर- टिटेनिफेरस मैग्नेटाइट तथा जीवांश के कारण

18. लाल मिट्टी का रंग लाल होता है-

उत्तर- लौह ऑक्साइड की उपस्थित के कारण

19. चाय की खेती के लिए सर्वाधिक उपयुक्त मिट्टी है-

उत्तर- लैटेराइट मिट्टी

20. लाल मिट्टी का निर्माण हुआ है-

उत्तर- ग्रेनाइट तथा नाइस चट्टानों के विखण्डन से

21. लैटेराइट मिट्टी का सर्वाधिक विस्तार पाया जाता है-

उत्तर- केरल में 

22. काली मिट्टी का सर्वाधिक विस्तार पाया जाता है-

उत्तर- महाराष्ट्र में

23. काली मिट्टी में प्रचुर मात्रा में मिलने वाले तत्व है-

उत्तर- लोहा एवं मैग्नीशियम

24. लैटेराइट मिट्टी में बहुलता है-

उत्तर- आयरन एवं सिलिका

25. लाल मिट्टी की प्रकृति होती है-

उत्तर- अम्लीय

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26. ग्रीष्म ऋतु में असम एवं पश्चिम बंगाल राज्यों में चलने वाली तीव्र आर्द्र हवाएँ कहलाती है-

उत्तर- नार्वेस्टर (असम) या काल वैशाखी (पश्चिम बंगाल)

27. चाय तथा इलायची की खेती के लिए सर्वाधिक उपयुक्त मिट्टी है-

उत्तर- लैटेराइट

28. मिट्टी के अध्ययन के विज्ञान को कहा जाता है-

उत्तर- मृदा विज्ञान

29. अक्टूबर-नवंबर में बोयी तथा मार्च-अप्रैल में काट ली जाने वाली फसल है-

उत्तर- रबी की फसल

30. जून-जुलाई में बोयी तथा मार्च-अप्रैल में काट ली जाने वाली फसल है

उत्तर- खरीफ की फसल

31. गेहूँ, चना, जौ, मटर, सरसों, आलू, राई इत्यादि उदाहरण है-

उत्तर- रबी की फसल का

32. धान, गन्ना, ज्वार, बाजरा, मक्का, अरहर इत्यादि उदाहरण है-

उत्तर- खरीफ की फसल की

33. भारत के कुल क्षेत्रफल का कितने प्रतिशत भाग पर कृषि होती है-

उत्तर- लगभग 51%

34. विश्व मे चावल उत्पादन में भारत का स्थान है-

उत्तर- दूसरा (प्रथम चीन का)

35. विश्व मे गेहूँ उत्पादन में भारत का स्थान है-

उत्तर- दूसरा (प्रथम चीन का)

36. भारत मे गेहूँ उत्पादन में प्रथम स्थान है-

उत्तर- उत्तर प्रदेश का

37. भारत मे चावल उत्पादन में प्रथम स्थान है-

उत्तर- पश्चिम बंगाल का

38. भारत मे हरित क्रांति लाने का श्रेय जाता है-

उत्तर-  डॉ० एम. एस. स्वामीनाथन को

39. भारत मे हरित क्रांति की शुरुआत हुई थी-

उत्तर- 1967-68 में

40. अन्न भण्डारण करते समय दानों में नमी होनी चाहिए-

उत्तर- 10% से नीचे

41. दलहनी फसलों के उत्पादन हेतु आवश्यक तत्व है-

उत्तर- कोबाल्ट

42. फलों एवं सब्जियों के उत्पादन में विश्व में भारत का स्थान है-

उत्तर- दूसरा (प्रथम चीन का)

43. सेरीकल्चर सम्बंधित है-

उत्तर- रेशमकीट पालन से

44. हॉर्टिकल्चर सम्बंधित है-

उत्तर- बागवानी से

45. पिसीकल्चर संबंधित है-

उत्तर- मत्स्य पालन से

46. हरित क्रांति सम्बन्धित है-

उत्तर- खाद्यान्न उत्पादन से

47. श्वेत क्रांति सम्बंधित है-

उत्तर- दुग्ध उत्पादन से

48. नीली क्रांति सम्बंधित है-

उत्तर- मत्स्य पालन से

49. रजत क्रांति सम्बंधित है-

उत्तर- अंडा उत्पादन से

50. पोमोकल्चर सम्बंधित है

उत्तर- फलों के उत्पादन से

नोट : ⇒ ग्रीष्म ऋतु में असम एवं पश्चिम बंगाल राज्यों में तीव्र आर्द्र हवाएँ चलने लगती हैं, जिससे गरज के साथ वर्षा होती है। इन हवाओं को पूर्वी भारत में नार्वेस्टर एवं बंगाल में काल वैशाखी के नाम से जाना जाता है। कर्नाटक में इसे चेरी ब्लास्म एवं कॉफी वर्षा कहा जाता है, जो कॉफी की कृषि के लिए लाभदायक होता है। आम की फसल के लिए लाभदायक होने के कारण इसे दक्षिण भारत (केरल) में आम्र-वर्षा (Mango Shower) कहते हैं।

⇒ उत्तर पश्चिम भारत के शुष्क भागों में ग्रीष्म ऋतु में चलने वाली गर्म एवं शुष्क हवाओं को ‘लू’ (Loo) कहा जाता है।

⇒ वर्षा ऋतु में उत्तर-पश्चिमी भारत तथा पाकिस्तान में उष्णदाब का क्षेत्र बन जाता है, जिसे मानसून गर्त कहते हैं। इसी समय उत्तरी अंतः उष्ण अभिसरण (NITC) उत्तर की ओर खिसकने लगती है, जिसके कारण विषुवतरेखीय पछुआ पवन एवं दक्षिणी गोलार्द्ध की दक्षिण-पूर्वी वाणिज्यिक पवन विषुवत रेखा को पार कर फेरेल के नियम का अनुसरण करते हुए भारत में प्रवाहित होने लगती है, जिसे दक्षिण-पश्चिम मानसून के नाम से जाना जाता है। भारत की अधिकांश वर्षा (लगभग 80%) इसी मानसून से होती है।


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 भारत का भूगोल


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एक नजर में इन्हें जरुर देखें
भारत में नदियों के किनारे बसे प्रमुख नगर
क्रम  नगर का नाम  नदियाँ  
1. आगरा यमुना
2.  बद्रीनाथ      अलकनंदा
3. प्रयागराज    गंगा, यमुना
4. दिल्ली, कोंटासाहेब, मथुरा यमुना 
5. फिरोजपुर सतलज
6. हरिद्वार, ऋषिकेष गंगा
7. कानपुर, बक्सर गंगा
8. अयोध्या, फैजाबाद सरयू
9. कोलकाता, हल्दिया, डायमण्ड हार्बर हुगली
10. लखनऊ गोमती
11.   डिब्रूगढ़ ब्रह्मपुत्र
12. गुवाहाटी ब्रह्मपुत्र 
13. जबलपुर नर्मदा
14. कोटा चम्बल
15. कुर्नूल तुंगभद्रा
16. सोकोवा घाट ब्रह्मपुत्र
17. कन्नौज गंगा
18. श्रीनगर, लेह झेलम
19. सूरत ताप्ती
20. हैदराबाद मूसी
21. मथुरा यमुना
22. अहमदाबाद, गांधीनगर साबरमती
23. राँची, जमशेदपुर स्वर्णरेखा नदी
24. पंढरपुर  भीमा नदी
25. बरेली रामगंगा
26. कटक, भुवनेश्वर महानदी
27. नासिक गोदावरी
28. सम्बलपुर महानदी
29. श्रीरंगपट्टनम कावेरी
30. जौनपुर गोमती
31. ओरछा बेतबा
32. वाराणसी गंगा
33. उज्जैन, कोटा क्षिप्रा
34. लुधियाना सतलज
35. विजयवाड़ा कृष्णा
36. तिरुचिरापल्ली, मैसूर कावेरी
37. पटना  गंगा
38. भागलपुर, फरक्का गंगा
39. मुंगेर  गंगा
40. सोनपुर, हाजीपुर गंडक
41. गोरखपुर  रापती
42. गंगटोक तिस्ता
43. बोधगया निरंजना
44. गया फल्गु
45. लखीसराय किऊल
46. मुम्बई माहिम
47. जम्मू तवी
48. दुर्ग, रायपुर शिवनाथ
 
                                 
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बद्रीनाथ 



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भारत का भूगोल



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एक नजर में इन्हें जरुर देखें
भारत के प्रमुख झील
क्रम झील का नाम  सम्बंधित राज्य
1. वुलर झील  जम्मू कश्मीर
2. बैरीनाग झील जम्मू कश्मीर
3. मानसबल झील जम्मू कश्मीर
4. शेषनाग झील जम्मू कश्मीर
5.   अनंतनाग झील जम्मू कश्मीर
6. डल झील जम्मू कश्मीर
7. नागिन झील जम्मू कश्मीर
8. राजसमंद झील राजस्थान
9. पिछौला झील राजस्थान
10. सांभर झील राजस्थान
11. लूणकरनसर झील राजस्थान
12.   जयसमंद झील राजस्थान
13. फतेहसागर झील राजस्थान
14. डीडवाना झील राजस्थान
15. सातताल झील उत्तराखंड   
16. नैनीताल झील उत्तराखंड   
17. राकसताल झील उत्तराखंड   
18. मालताल झील  उत्तराखंड   
19.     देवताल झील उत्तराखंड   
20. खुरपताल झील उत्तराखंड   
21. नौकुछियाताल झील उत्तराखंड   
22. हुसैनसागर झील आंध्र प्रदेश 
23. कोलेरू झील  आंध्र प्रदेश 
24. पुलीकट  झील तमिलनाडु व आंध्र प्रदेश 
25. बेम्बनाड  झील केरल
26. पेरियार झील केरल
27. अष्टमुदि झील केरल
28. लोकटक झील   मणिपुर
29. चिल्का झील ओडिशा
30. लोनार झील  महाराष्ट्र
       
भारत के प्रमुख जलप्रपात
क्रम जलप्रपात  स्थिति ऊँचाई
1. धुँआधार नर्मदा नदी 10 मीटर
2. येन्ना  नर्मदा नदी 183 मीटर
3. चूलिया चम्बल नदी 18 मीटर
4. पुनासा चम्बल नदी 12 मीटर
5. शिवसमुद्रम कावेरी नदी 90 मीटर
6. गोकक गोकक नदी 55 मीटर
7.  बिहार टोंस नदी 100 मीटर
8. हुंडरू स्वर्णरेखा नदी  74 मीटर
9. जोग या गरसोप्पा शरावती नदी  255 मीटर
10. पायकारा नीलगिरि क्षेत्र —

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एक नजर में इन्हें जरुर देखें

1. गंगा का उद्गगम स्रोत है-

उत्तर- गंगोत्री हिमानी

2. अलकनंदा का उद्गगम स्रोत है-

उत्तर- सतोपंथ हिमानी

3. देवप्रयाग में भागीरथी और अलकनंदा के संगम के बाद किस नाम से जानी जाती है-

उत्तर- गंगा

4. भागीरथी और अलकनंदा का संगम है-

उत्तर- देवप्रयाग

5. अलकनंदा और मंदाकिनी का संगम है-

उत्तर- रुद्रप्रयाग

6. गंगा की सबसे बड़ी सहायक नदी है-

उत्तर- यमुना

7. गंगा को बांग्लादेश में किस नाम से जाना जाता है-

उत्तर- पदमा

8. तिब्बत (चीन) में ब्रह्मपुत्र नदी को कहा जाता है-

उत्तर- सांग्पो

9. गंगा एवं ब्रह्मपुत्र नदी की संयुक्त धारा को कहा जाता है-

उत्तर- मेघना

10. ब्रह्मपुत्र नदी को भारत मे प्रवेश करने पर अरुणाचल प्रदेश में कहा जाता है-

उत्तर- दिहांग

11. ब्रह्मपुत्र नदी बांग्लादेश में किस नाम से बहती है-

उत्तर- जमुना

12. पोंग बाँध स्थित है-

उत्तर- व्यास नदी पर (हिमाचल प्रदेश में)

13. थीन बाँध स्थित है-

उत्तर- रावी नदी पर (पंजाब में)

14. वृद्धा गंगा या दक्षिण गंगा के नाम से जाना जाता है-

उत्तर- गोदावरी नदी

15. नर्मदा नदी का उद्गगम स्थल है-

उत्तर- अमरकंटक की पहाड़ियाँ

16. पश्चिम की ओर बहने वाली नदियाँ जो डेल्टा नहीं बनती है-

उत्तर- नर्मदा एवं ताप्ती

17. नर्मदा नदी की जुड़वाँ नदी कहा जाता है-

उत्तर- ताप्ती नदी को

18. गुजरात की जीवन रेखा कहा जाता है-

उत्तर- नर्मदा नदी को

19. नर्मदा नदी सर्वाधिक बहती है-

उत्तर- मध्यप्रदेश में

20. प्रायद्वीपीय भारत की सबसे बड़ी नदी है-

उत्तर- गोदावरी नदी

21. गोदावरी नदी का उद्गगम स्थान है-

उत्तर- नासिक के निकट ऋयंबक पहाड़ी

22. नासिक स्थित है-

उत्तर- गोदावरी नदी के तट पर

23. प्रायद्वीपीय भारत की दूसरी सबसे बड़ी नदी है-

उत्तर- कृष्णा नदी

24. विंध्याचल एवं सतपुड़ा पर्वत श्रेणी के बीच बहने वाली नदी है-

उत्तर- नर्मदा

25. गंगा, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी, महानदी, पेन्नार तथा बैगाई नदियाँ गिरती है-

उत्तर- बंगाल की खाड़ी में

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26. सिन्धु, नर्मदा तथा ताप्ती नदियाँ गिरती है-

उत्तर- अरब सागर में

27. गोकक जल प्रपात स्थित है-

उत्तर- गोकक नदी पर (कर्नाटक में)

28. दिल्ली तथा आगरा स्थित है-

उत्तर- यमुना नदी के किनारे

29. श्रीरंगपट्टम अवस्थित है-

उत्तर- कावेरी नदी तट पर

30. दक्षिण से उत्तर की ओर बहने वाली नदी है-

उत्तर- बेतबा

31. भारत के सबसे दक्षिण में स्थित नदी है-

उत्तर- वैगई 

32. देश की पहली बहुद्देश्यीय परियोजना है-

उत्तर- दामोदर घाटी परियोजना (1948 में)

33. शिवसमुद्रम जल विद्युत परियोजना स्थित है-

उत्तर- कावेरी नदी पर

34. भारत की प्रथम जल विद्युत परियोजना है-

उत्तर- शिवसमुद्रम (1902 में)

35. भारत मे मानव निर्मित अर्थात कृत्रिम सबसे बड़ी झील है-

उत्तर- गोविंदसागर झील (भाखड़ा-नांगल बाँध से निर्मित)

36. सर्वाधिक सीधी बहने वाली नदी है-

उत्तर- नर्मदा नदी

37. भारत की सबसे लम्बी नहर इंदिरा गाँधी नहर (राजस्थान) जल प्राप्त करता है-

उत्तर- सतजल नदी से

38. जो नदी डेल्टा का निर्माण नहीं करती है उसके मुहाने को कहा जाता है-

उत्तर- एश्चुअरी या ज्वारमुख

39. नदी द्वारा लाये गए मलवो का जमाव जब मुहाने पर होता है तो निर्माण होता है-

उत्तर- डेल्टा का

40. राजस्थान की एकमात्र नदी जो सालोंभर बहती है-

उत्तर- चम्बल नदी

41. चूलिया जलप्रपात स्थित है-

उत्तर- चंबल नदी पर

42. सिंधु नदी भारत के किस राज्य से होकर बहती है-

उत्तर- केवल जम्मू एवं कश्मीर से

43. कावेरी नदी का उद्गगम स्थान है-

उत्तर- ब्रह्मगिरि पहाड़ी (कर्नाटक)

44. ब्रह्मपुत्र नदी का उद्गगम स्थल है-

उत्तर- मानसरोवर झील (तिब्बत में)

45. व्यास नदी का उद्गगम स्थल है- 

उत्तर- व्यास कुण्ड

46. झेलम नदी का उद्गगम स्थल है-

उत्तर- शेषनाग झील

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शेषनाग झील

47. सतजल नदी का उद्गगम स्थल है-

उत्तर- मानसरोवर झील के पास स्थित राकस ताल झील

48.  सिंधु नदी का उद्गगम स्थल है-

उत्तर- मानसरोवर झील के पास सानोख्याबाब हिमनद से

49. सोन नदी का उद्गगम स्थल है-

उत्तर- अमरकंटक की पहाड़ियाँ

50. कृष्णा नदी का उद्गगम स्थल है-

उत्तर- महाबलेश्वर के समीप पश्चिमी घाट पहाड़ से



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नोट :  मैं आशा करता हूँ कि भारत का भूगोल से सम्बंधित सभी Capsule आपके परीक्षा के लिए नींव का पत्थर साबित होंगे। अगर किसी भी प्रश्न के उत्तर को लेकर आपके मन में कोई संदेह हो तो हमसे Contact With us के माध्यम से, Comment या Email से Contact कर सकते है। मैं हमेशा आपके मंगल भविष्य की कामना करता हूँ।

Thank You @ By Dr. Amar Kumar


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