6. यह भी गुजर जाएगा

6. यह भी गुजर जाएगा


यह भी गुजर जाएगा⇒

              एक राजा था। उसने अपने राज्य में ढिंढोरा पिटवाया कि कोई ऐसा सूत्र बतलावे जो दुःख-सुख, लाभ-हानि, जीवन-मरण, आया, जीत-हार, अपने-पराये सभी परिस्थितियों में समान लाभदायी हो। महीनों बीत गए। किसी के दिमाग में ऐसा सूत्र नहीं जो सभी परिस्थितियों में समान लाभदायी हो। राजा जंगल की ओर बढ़ गया। कुछ दूर जाने पर एक संत एक पेड़ के नीचे बैठे दिखाई दिए। राजा की आंखों में आशा की ज्योति चमकी। उन्होंने संत के चरणों में नतमस्तक हो नम्रतापूर्वक अपने प्रश्न को श्रीचरणों में निवेदन किया।

यह भी गुजर जाएगा

            महात्मा हंसे। एक कागज पर कुछ लिखकर उसे एक ताबीज में बंद कर राजा के गले में पहनाते हुए बोले-‘वत्स! यह सूत्र सभी अवसरों में समान लाभदायी है। जब कभी अवसर आए, इससे लाभ ले लेना। ‘

          संतचरणों में नतमस्तक हो राजा अपने राज्य लौट आया। ताबीज गले में लटकती रही और राजा राज्यकार्य में व्यस्त रहा। समय व्यतीत होता गया। दो वर्ष बीत गए। एक बार पड़ोसी देश के राजा ने उसके राज्य पर आक्रमण कर दिया। सेनाएं तैयार न थीं, अतः घबराए हुए उसके सैनिकों को रौंदती हुई पड़ोसी देश की सेना राजमहल में प्रवेश कर गई। परेशान राजा भयभीत हो प्राण रक्षा के उद्देश्य से भाग निकला। पीछे-पीछे शत्रु सेना और आगे-आगे घोड़े पर सवार राजा।

           किंकर्तव्यविमूढ राजा बेतहाशा घोड़े को दौडाए जा रहा था। अचानक घोड़ा बिदका और ठिठककर रूक गया। सामने एक गहरा खड्ड था। खड्ड लांघना कठिन था। भयभीत राजा शीघ्रता से पास की झाड़ी में जा छुपा। पसीने से लथपथ वह थर-थर कांप रहा था कि सहसा उसे ताबीज का ख्याल आया। ताबीज खोला तो उसमें रखे पूर्जे में एक छोटा सा वाक्य लिखा था-‘यह भी गुजर जाएगा।’

            पढ़कर राजा सोचने लगा- ‘सचमुच आज तक न जाने जीवन में क्या-क्या आया, क्या-क्या देखा, क्या-क्या पाया- लेकिन कुछ भी ठहरा नहीं, गुजरते चला गया। मान-अपमान, सुख-दुख, अच्छा-बुरा कितना कुछ आया, किंतु सब-के-सब गुजरते चला गया। घबराहट कुछ कम हुई। उसे विश्वास हो गया, निश्चय ही ‘यह भी गुजर जाएगा।’

             अब तक वह परेशान था, भयभीत था, घटना का नायक भोक्ता था, अब वह द्रष्टा है, शांत, निश्चित, प्रसन्न। सचमुच कुछ ही देर बाद दुश्मन के घोड़ों की टापों की आवाज कम होने लगी। शायद दुश्मन रास्ता भटक गए थे। राजा श्रद्धा-भक्तिपूर्वक ताबीज पहना और वहाँ से निकल पड़ा। कुछ दिन बाद पुनः सैन्य संगठन कर वह शत्रुओं पर धावा बोल दिया और अंततः विजयी हुआ।

दृश्य का परिवर्तन

           अब उसके राज्य में चारों ओर खुशियाँ मनाई जा रही है। दीपमालाएँ सजाई गई हैं। राजमहल सजाया गया है। चारो ओर उत्सव का-सा वातावरण है। विजयी राजा अपने महल की ओर लौट रहा है। सभी उनपर फूलों की वर्षा कर रहे है। महल के पास आकर राजा सहसा रुक गया। ताबीज निकाला और पढ़ा-‘यह भी गुजर जाएगा।’ राजा हंसने लगा।

लोग पूछे-‘आप हंस क्यों रहे हैं?”

राजा ने कहा-‘हंसने की ही तो बात है। यहाँ कुछ भी नहीं ठहरता, सभी गुजर जाते हैं। काल की वेगवती धारा में सब बहे जा रहे हैं लेकिन… !” सहसा राजा कुछ गंभीर हो गया और सोचने लगा-‘क्या इस गुजरने वाली भीड़ में न गुजरने वाला कोई स्थायी तत्त्व नहीं है? और यदि है तो उसे ढूंढना चाहिए।’

         राजा पुनः संत के पास गया और अपनी जिज्ञासा को संत चरणों में निवेदित किया।

संत बोले, ‘न गुजरने वाला स्थायी तत्त्व कहीं खो नहीं गया है, जो उसे ढूंढोगे। वह तो नित्य प्राप्त है। गुजरने वाली वस्तु से संबंध न जोड़, इसका भोक्ता न बन, द्रष्टा बन जा, स्वयं अविनाशी तत्त्व का बोध हो जाएगा। वह अविनाशी न गुजरने वाला तत्त्व तू ही है।’

          राजा सुखी हो गया। राज्य किया पर द्रष्टा बनकर। ‘यह भी गुजर जाएगा’– इस बोध को पाकर वह सुख में ‘अहंकार और राग’ तथा दुख में ‘तनाव और द्वेष’ दोनों से ऊपर उठकर ‘स्व’ में स्थित हो आनंदमग्न हो गया।

        ठीक ही कहा गया है, ‘यदि जीवन है तो सुख एवं दुख, उन्नति या विपत्ति का क्रम बना ही रहता है। इस विश्व में कोई ऐसा नहीं हुआ, जिस पर विपत्ति नहीं आई हो। अतः इस पर चिंता करना व्यर्थ है विपत्ति का निस्तारण धैर्य एवं युक्तिपूर्ण पौरुष से होता है, चिंता से नहीं।’– महात्मा विदूर

         इसलिए सद्गुरु कबीर साहब कहते हैं-

कबीर मैं तबही डरूँ, जो मुझ ही में होय।

मीच बुढ़ापा आपदा, सब काहु को जोय।।       – (कबीर साखी दर्पण, भाग-२)

         अर्थात् ‘ कबीर साहब कहते हैं, मैं तब डरूं जब केवल मुझमें ही होता हो, परंतु मृत्यु, बुढ़ापा, आपदा तो सब किसी में देखा जाता है। फिर दुख और डर कैसा?”

स्रोत:चिंता क्यों

5. आपका मददगार आप स्वयं हैं

5. आपका मददगार आप स्वयं हैं


आपका मददगार आप स्वयं हैं⇒

             आप सोचते हैं, कोई दृश्य-अदृश्य मददगार आवे जो आपको संकट से मुक्त करे। आप मददगार दूर कहां ढूंढते हैं? मददगार तो आपके पास है। आप ही अपने मददगार हैं। आपकी जीवटता, साहस, धैर्य और किसी भी पहलू को विधेयक रूप में देखने- विचारने की प्रवृत्ति ही आपका सच्चा मददगार है।

          निराशा के स्थान पर आशा, भय के स्थान में निर्भयता, हतोत्साह के स्थान पर उमंग और विश्वास, अकर्मण्यता के स्थान पर कर्मठता, भूत-भविष्य के व्यर्थ की चिंताओं में सिर खपाने के स्थान पर वर्तमान को सुनहला बनाने के संकल्प को अपनाइए। यह आपके जीवन को आनंद और सफलताओं से साराबोर कर देगा। विधेयक विचारों के अंतर्गत पुनः रामबाण चार सूत्र दिए जाते हैं, जिसे अपनाने पर निश्चय ही आप आशातीत शांति पाएंगे-

आपका मददगार आप स्वयं हैं

1. चिंताजन्य परिस्थिति का ईमानदारीपूर्वक विश्लेषण कीजिए और पता लगाइए कि यदि आप असफल हुए तो कौन-सा अनिष्ट घटित हो सकता है।

2. संभावित अनिष्ट को निर्भयतापूर्वक स्वीकार कर लीजिए। अपनी परिस्थति को यथावत स्वीकार कर लेने की हिम्मत रखना किसी भी दुर्भाग्यपूर्ण परिणाम पर विजय पाने का पहला चमत्कारिक कदम है।

3. तदुपरांत शांतिपूर्वक विचार करें कि स्वीकृत अनिष्ट से उबरने के कौन-कौन से उपाय हो सकते हैं। गहन चिंतन-मनन से जो उपाय आपको दिखते हैं, उन्हें किसी पन्ने पर नोट करें।

4. उन लिखे उपायों में से मंथन करके सर्वश्रेष्ठ उपाय को ढूंढ निकालिए और अपने समस्त सामर्थ्य के साथ; आत्मविश्वास, उत्साह, कर्मठता के साथ उसमें जुट जाइए। मन में संकल्प लाइए कि जो होगा उसे सहर्ष झेल लेंगे, पर बिना युद्ध किए (अनिष्ट, असफलता पर विजय प्राप्त करने का प्रयत्न किए बिना) हार नहीं मानेंगे।

            उपरोक्त सूत्रों को अपनाते के साथ आप तत्काल शांति, उत्साह और जोश का अनुभव करेंगे। किसी अनिष्ट की आशंका से कांपते रहने की अपेक्षा डटकर उसका सामना करना श्रेष्ठ है।

स्रोत: चिंता क्यों

4. जो बांटोगे वही पाओगे

4. जो बांटोगे वही पाओगे


जो बांटोगे वही पाओगे⇒

जो बांटोगे वही पाओगे

             जो पाना चाहते हैं, उसे बांटना शुरू कर दें। एक दोहा है-

सब सन्तन के एक मत, बात कही है दोय।

सुख देवे सुख होत है, दुख देवे दुख होय।।

              अर्थात् दूसरों को सुख देने पर स्वयं सुख मिलता है और दूसरों को दुख देने पर दुख। अतएव सुख चाहते हैं तो सुख बांटना शुरू कर दें, दुखियों की मदद करें, गिरते को सहारा दें। धन चाहते हैं तो इसे मिथ्या भोग-विलास से बचाकर धर्मार्थ, लोकहितार्थ उत्सर्ग करना सीखें। मान चाहते हैं तो मान देना सीखें। आपत्ति-विपत्ति में दूसरों की मदद चाहते हैं तो आपत्ति-विपत्ति में पड़े लोगों की यथाशक्ति मदद करना सीखे। विवेक-बुद्धि का विकास चाहते हैं तो प्राप्त बुद्धि से लोगों को ज्ञान और सहारा देना सीखें। क्षमा चाहते हों तो क्षमा करना सीखें। नित्य जीवन की इच्छा है तो प्राप्त जीवन को सद्प्रयोजनों में सन्नद्ध करना सीखें।

             अधिकारों को गौण एवं कर्तव्यों को प्रधान जाने। माता-पिता, परिवार, बच्चे, समाज, राष्ट्र, स्वधर्म के प्रति निर्धारित अपने कर्तव्यों को स्वार्थ तले कुचल न डालें। अपने कर्तव्यों-दायित्वों को सभी के प्रति ठीक-ठीक निर्वहण करें।

             विवेक को विकसित करें। अमूल्य मानव तन का उद्देश्य परिवार बढ़ाने, भोग भोगने और शरीर पोषण तक सीमित नहीं है। ऐसा तो सभी पशु-पक्षी, कीट-पतंगे भी करते हैं। यदि इतना ही कर्तव्य होता तो भगवान मानव को पशुओं से विलक्षण विवेक बुद्धि, अगणित प्रतिभासम्पन्न एवं सत्यासत्य निर्णय की क्षमता से युक्त क्यों बनाते?

              इस विलक्षण बुद्धि और प्रतिभा का दुरुपयोग पशुवत् जीवन जीकर न करें। आप स्वतंत्र हैं कि प्राप्त जीवन सम्पदा का दुरुपयोग कर नर से नरपशु बन जाएं या इसका सदुपयोग कर नर से नारायण; जीवत्व से शिवत्व की ओर अग्रसर हों या जीवत्व से शवत्व की ओर।

               याद रखें-जो चिंतन और चरित्र मानवीय गरिमा के अनुरूप हो और नर से नारायण बनने के क्रम में प्रेरित करता हो, वही धर्मसम्मत एवं सुखदायी है तथा जो नर से नारायण की दिशा में न ले जाकर नर से नरपिशाच, नरपशु बनाता हो, वह अधर्म और दुखदायी है, चाहे शास्त्रसम्मत ही क्यों न दिखता हो।

             अतएव विवेक बुद्धि के द्वारा मानव से महामानव तथा नर से नारायण बनने के क्रम में ही अपने चिंतन और आचरण का विकास करें। रात्रिशयन के पूर्व एक बार मनोविश्लेषण अवश्य कर लें कि आज आपके चिंतन और चरित्र से किसका पोषण हुआ असुरत्व-पशुत्व का या देवत्व-मनुजत्व का। चुन-चुन कर अपने दुर्गुणों-दुष्प्रवृत्तियों का मूलोच्छेद करें और संपूर्ण सद्गुणों को अपने में अभिवर्धन।

स्रोत : चिंता क्यों करें 

General Geography Capsule 4

General Geography Capsule 4

सामान्य भूगोल


General Geography Capsule 4

एक नजर में इसे जरुर पढ़ें

1.  क्षुद्र ग्रह स्थित है-

उत्तर- मंगल और वृहस्पति ग्रह के बीच

2. सूर्य के उतरायन और दक्षिणायन की सीमा को कहते है-

उत्तर- संक्राति (कर्क और मकर संक्रांति)

3. भारत वर्ष की जल क्षेत्र सीमा (प्रादेशिक) फैली हुई है-

उत्तर-  12 नॉटिकल मील तक

4. 1 नॉटिकल मील (समुद्री मील) बराबर होता है-

उत्तर-  1.852 किमी.

5. किसी स्थान पर दो ज्वारों के बीच का अंतराल होता है-

उत्तर-  12घंटा 26 मिनट

6. ज्वार के कितने समय बाद भाटा आता है-

उत्तर-  6घंटा 13 मिनट

7. ज्वार-भाटा उत्पन्न होने का कारण है-

उत्तर- सूर्य एवं चन्द्रमा का गुरुत्वाकर्षण शक्ति

8. सीस्मोग्राफ (भूकंपमापी) की खोज किसने किया था-

उत्तर- जॉन मिल ने

9. पृथ्वी पर जल भाग है-

उत्तर- 71 %

10. महासागरों की औसत गहराई है-

उत्तर- 4000 मी०

11. समुद्री तल की औसत लवणता होती है-

उत्तर- 35 ‰ (प्रति हजार ग्राम)

12. सर्वाधिक लवणता पायी जाती है-

उत्तर- तुर्की के वॉन झील में (330‰)

13. पृथ्वी पर जलमंडल का स्वच्छ जल क्षेत्र है-

उत्तर- 2.7 भाग

14. समुद्री लवणता में सर्वाधिक मात्रा में पाया जाने वाला तत्व है-

उत्तर- सोडियम क्लोराइड

15. लवणता के संघटकों में सबसे ज्यादा मिलने वाला तत्व है-

उत्तर- क्लोरीन

16. पृथ्वी के चारों ओर का गैसीय आवरण कहलाता है-

उत्तर- वायुमंडल

17. वायु हैं-

उत्तर- गैसों का मिश्रण

18.  वायुमंडल में सर्वाधिक मात्रा में पाई जाने वाली गैस है-

उत्तर- नाइट्रोजन (78.03%)

19. वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा होती है-

उत्तर- 0.03%

20. वायुमंडल में सर्वाधिक मात्रा में विद्यमान अक्रिय गैस है-

उत्तर- आर्गन (0.93)

21. वायुमंडल में जलवाष्प की मात्रा होती है-

उत्तर- 5%

22. पृथ्वी पर पहुँचने वाली सौर विकिरण की मात्रा है-

उत्तर- 51%

23. वायुमंडल की सबसे निचली परत है-

उत्तर- क्षोभमण्डल

24. वायुमंडल की सबसे बाहरी परत है-

उत्तर- बहिर्मंडल

25. मौसम परिवर्तन से संबंधित सभी घटनाएँ घटित होती है-

उत्तर- क्षोभमण्डल

26. क्षोभमंडल की ऊंचाई (मोटाई) में वृद्धि होती है-

उत्तर- ग्रीष्म ऋतु में

27. क्षोभ मंडल में उपर जाने पर प्रति 165 मी. की ऊँचाई पर ताप घटता है-

उत्तर- 1ºC

28. क्षोभ मंडल में प्रति 1 किमी. की ऊँचाई पर जाने पर ताप घटता है-

उत्तर- 6.5ºC

29. क्षोभमंडल का विस्तार ध्रुवों तथा विषुवत रेखा पर होती है-

उत्तर- क्रमशः 8 किमी. तथा 18 किमी.

30. सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणों से रक्षा करती है-

उत्तर- ओजोन परत

31. पृथ्वी का ‘रक्षा कवच’ कहा जाता है-

उत्तर- ओजोन परत को

32. ओजोन परत को नष्ट करने वाली गैस है-

उत्तर- क्लोरो-फ्लोरोकार्बन

33. वातावरण तथा जीवमंडल के बीच का संबंध कहलाता है-

उत्तर- पारिस्थितिकी (Ecosystem)

34. जेट विमान तथा हवाई जहाज उड़ते है-

उत्तर- समताप मण्डल में

35. रेडियो तथा संचार उपग्रह किस मण्डल से संचारित होते हैं-

उत्तर- आयन मण्डल

36. उल्का से संबंधित अधिकांश घटनाएँ होती है-

उत्तर- मध्यमण्डल में

37. अंतरिक्ष यात्री तथा उपग्रह पृथ्वी की परिक्रमा करते है-

उत्तर- बहिर्मंडल में

38. बहिर्मंडल की प्रधान गैसें है-

उत्तर- हीलियम और हाइड्रोजन

39. पृथ्वी के ताप को बनाये रखता है-

उत्तर- जलवाष्प तथा CO2

40. वायु में जल की उपस्थिति कहलाती है-

उत्तर- आर्द्रता

41. वायुमंडल की आर्द्रता की माप की जाती है-

उत्तर- हइग्रोमीटर

42. ग्रीन हाउस गैसें है-

उत्तर-  CO2 तथा क्लोरोफ्लोरोकार्बन 

43. सागर तल से समान वायुदाब वाले क्षेत्रों को मिलाने वाली काल्पनिक रेखा कहलाती है-

उत्तर-  समदाब रेखा

44. वायुमंडलीय दाब को मापने वाला यंत्र कहलाता है-

उत्तर-  बैरोमीटर

45. किसी भी देश का मानक समय  का निर्धारण ग्रीनवीच मीन टाइम से कितने गुणक पर किया जाता है-

उत्तर- आधे घंटे के गुणक पर

46. सबसे अधिक समय जोन किस देश में बनाया गया है-

उत्तर- रूस

47. विश्व का सबसे ऊँचा ज्वालामुखी पर्वत है-

उत्तर- कोटापैक्सी (इक्वाडोर)

General Geography Capsule 4

कोटापैक्सी

48. अंत: सागरीय भूकम्पों द्वारा उत्पन्न लहरों को जापान में कहा जाता है-

उत्तर- सुनामी

49. विश्व की सबसे लम्बी रिफ्ट घाटी है-

उत्तर- जॉर्डन नदी घटी

50. आगरा का किला तथा दिल्ली का लाल किला किस अवसादी चट्टानों से निर्मित है-

उत्तर- बलुआ पत्थर 

General Geography Capsule 3

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सामान्य भूगोल


General Geography Capsule 3

एक नजर में इसे जरुर पढ़ें

1. सूर्य और पृथ्वी की बीच की दूरी अधिकतम (15.2 करोड़ किमी०) अर्थात अपसौर होती है-

उत्तर- 4 जुलाई को

2. सूर्य और पृथ्वी की बीच की दूरी न्यूनत्तम (14.73 करोड़ किमी०) अर्थात उपसौर होती है-

उत्तर- 3 जनवरी को

3. उपसौरिक एवं अपसौरिक को मिलाने वाली रेखा कहलाती है-

उत्तर- एपसाइड रेखा

4. वर्तमान भूगोल का जनक किसे कहा जाता है-

उत्तर- हम्बोल्ट को

5. व्यवस्थित भूगोल का जनक किसे कहा जाता है-

उत्तर- इरैटोस्थनीज

6. सूर्य प्रकाश को पृथ्वी तक पहुँचने में समय लगता है-

उत्तर-  लगभग 8 मिनट

7. सौर ज्वाला को उत्तरी ध्रुव पर कहा जाता है-

उत्तर- आरोरा बोरियालिस

8. सौर ज्वाला को दक्षिणी ध्रुव पर कहा जाता है –

उत्तर- आरोरा ऑस्ट्रेलिस

9. पृथ्वी अपने अक्ष पर कितने कोण पर झुकी हुई है-

उत्तर- 23½º

10. ग्लोब पर उत्तर से दक्षिण की ओर खीची जाने वाली काल्पनिक रेखा है-

उत्तर- देशांतर रेखा

11. ग्लोब पर पश्चिम से पूरब की ओर खींची गई काल्पनिक रेखा है-

उत्तर- अक्षांश रेखा

12. दो अक्षांश रेखाओं के मध्य दूरी होती है-

उत्तर- 111 किमी०

13. विषुवत रेखा पर दो देशान्तर रेखाओं के मध्य दूरी होती है-

उत्तर- 111.32 किमी०

14. दो देशान्तर रेखाओं के बीच की दूरी को कहा जाता है-

उत्तर- गोरे

15. ग्लोब पर देशान्तर रेखाओं की कुल संख्या होती है-

उत्तर- 360

16. ग्लोब पर अक्षांश रेखाओं की कुल संख्या होती है-

उत्तर- 179 

17. पृथ्वी एक घंटे में घुमती है-

उत्तर- 15० देशांतर

18. 23½० उत्तरी अक्षांश  रेखा कहलाता है-

उत्तर- कर्क रेखा

19. 23½ ० दक्षिणी अक्षांश रेखा कहलाता है-

उत्तर- मकर रेखा

20. 66½० उत्तरी अक्षांश रेखा कहलाता है-

उत्तर- आर्कटिक रेखा

21. 66½० दक्षिणी अक्षांश  रेखा कहलाता है-

उत्तर- अंटार्कटिक रेखा

22. 1° देशान्तर के बीच का अंतर होता है-

उत्तर- 4 मिनट 

23. पृथ्वी को 1° देशान्तर पार करने में समय लगता है-

उत्तर- 4 मिनट

24. कर्क संक्रांति (उत्तरी अयनांत) एवं मकर संक्रांति (दक्षिणी अयनांत) होता है-

उत्तर- क्रमशः 21जून तथा 22 दिसंबर को

25. 0° से 30° उत्तरी एवं दक्षिणी अक्षांशों के मध्य का भाग कहलाता है-

उत्तर- उष्णकटिबंधीय क्षेत्र

26. 0° अक्षांश तथा 0º देशान्तर रेखा स्थित है-

उत्तर- अटलांटिक महासागर में

27. 45º से 66½º उत्तरी और दक्षिणी अक्षांशों के मध्य का भाग कहलाता है-

उत्तर- शीतोष्ण कटिबंधीय

28. 0° से 5° उत्तरी एवं दक्षिणी अक्षांश का क्षेत्र कहलाता है-

उत्तर- डोलड्रम या शांत पेटी

29. 40º  दक्षिणी अक्षांश (पछुआ पवन) का क्षेत्र कहलाता है-

उत्तर- गरजता चलीसा

30. 50º  दक्षिणी अक्षांश (पछुआ पवन) का क्षेत्र कहलाता है-

उत्तर- प्रचण्ड पचासा

31. 60º  दक्षिणी अक्षांश (पछुआ पवन) का क्षेत्र कहलाता है-

उत्तर- चीखता साठा

32. जब ‘पृथ्वी’ सूर्य और चन्द्रमा के बीच आ जाती है, तो होता है-

उत्तर- चन्द्रग्रहण

33. जब ‘चन्द्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है, तो होता है-

उत्तर- सूर्यग्रहण

34. पूर्ण सूर्यग्रहण हमेशा होता है-

उत्तर- अमावस्या के दिन

35. पूर्ण चन्द्रग्रहण हमेशा होता है-

उत्तर- पूर्णिया के दिन

36. सम्पूर्ण पृथ्वी पर दिन-रात बराबर होता है-

उत्तर- क्रमशः 21 मार्च तथा 22 दिसंबर को

37. पृथ्वी पर दिन-रात किस गति के कारण होता है-

उत्तर-  घुर्णन गति

38. पृथ्वी के मध्य से होकर जाने वाली अक्षांश रेखा है-

उत्तर- विषुवत या भूमध्यरेखा

39. विषुवत रेखा पर दिन और रात की अवधि होती है-

उत्तर- बराबर

40. वसंत विषुव (Vernal Equinox) तथा शरद विषुव (Autumn Equinox) कहलाता है-

उत्तर- क्रमशः 21 मार्च और 23 दिसंबर

41. 0° देशान्तर को कहा जाता है-

उत्तर- प्रधान देशांतर रेखा या ग्रीनवीच रेखा 

42. 0º देशान्तर रेखा (ग्रीनवीच मीन टाइम) स्थित है-

उत्तर- इंग्लैण्ड में

43. भारत का मानक समय, जो प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) के नैनी से गुजरती है-

उत्तर- 82½º पूर्वी देशांतर रेखा को

44. भारतीय मानक समय तथा ग्रीनवीच समय के मध्य अंतर है-

उत्तर- 5 घंटा 30 मिनट आगे

45. अंतराष्ट्रीय तिथि रेखा माना गया है-

उत्तर- 180º देशांतर रेखा को 

46. 180° देशान्तर को वाशिंगटन सभा में अंतराष्ट्रीय तिथि रेखा माना गया-

उत्तर- 1884 ई० में

47. अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा के समानान्तर स्थित है-

उत्तर- बेरिंग जल संधि

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बेरिंग जल संधि

48. पृथ्वी पर सबसे लम्बा दिन उत्तरी गोलार्द्ध तथा दक्षिण गोलार्द्ध में होता है-

उत्तर- क्रमशः 21 जून तथा 22 दिसंबर 

49. पृथ्वी पर सबसे छोटा दिन उत्तरी गोलार्द्ध तथा दक्षिण गोलार्द्ध में होता है-

उत्तर- क्रमशः 22दिसंबर तथा 21 जून को 

50. विश्व ग्लोब के निर्माता है-

उत्तर- मार्टिन बैहम 

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