All posts by Dr. Amar Kumar

General Geography Capsule 6

General Geography Capsule 6

सामान्य भूगोल


General Geography Capsule 6

1. विश्व का सबसे बड़ा मांस निर्यातक देश है-

उत्तर- अर्जेंटीना 

2. दक्षिण अमेरिका का वह स्थान जहाँ जड़ों में वर्षा होती है-

उत्तर- मध्य चिल्ली

3. विश्व का एकमात्र महाद्वीप जिससे कर्क वृत्त, मकर वृत्त एवं विषुवत वृत्त होकर गुजरता है-

अफ्रीका महाद्वीप

4. एण्डीज पर्वतमाला (द० अमेरिका) की सर्वोच्च पर्वत चोटी का नाम है-

उत्तर- अकांकागुआ

5. मैनीगॉट रेखा किन दो देशों के बीच की सीमा रेखा है-

उत्तर- जर्मनी एवं फ़्रांस 

6. जपान पहले किस नाम से जाना जाता था-

उत्तर- निप्पन

7. अर्जेन्टीना देश की राजधानी है-

उत्तर- ब्यूनस ऑयर्स

8. सीयर्स टावर स्थित है-

उत्तर- शिकागो में 

9. उत्तरी सागर और बाल्टिक सागर को जोड़ने वाली नहर है-

उत्तर- कील नहर 

10. बेरूत किस देश की राजधानी है-

उत्तर-  लेबनान

11. ब्लैक हिल, ब्लू हिल तथा ग्रीन हिल नामक पहाड़ियाँ किस देश में है-

उत्तर- संयुक्त राज्य अमेरिका में

12. पहले ‘स्याम’ के नाम से जाना जाने वाला देश है-

उत्तर- थाईलैंड

13. विश्व के मानचित्र के सर्वप्रथम निर्माणकर्त्ता थे-

उत्तर- अनेग्जीमेंडर

14. ‘पृथ्वी का अंतिम स्वर्ग’ कहा जाता है-

उत्तर- इंडोनेशिया द्वीप को

15. संयुक्त राज्य अमेरिका तथा कनाडा की बीच की सीमा रेखा है-

उत्तर- 49वीं समांतर रेखा

16. ‘महाद्वीपों का महाद्वीप’ कहा जाता है-

उत्तर- एशिया को 

17. विश्व का सबसे बड़ा मरुस्थल सहारा स्थित है-

उत्तर- उत्तरी अफ्रीका में 

18. विश्व में जूट उत्पादन में अग्रणी देश है-

उत्तर- बांग्लादेश 

19 आर्कटिक एवं प्रशांत महासागर को जोड़ती है-

उत्तर- बेरिंग जलडमरूमध्य

20. लेब्रोडोर उत्तरी अटलांटिक महासागर की जलधारा की प्रक्रति है-

उत्तर-  ठंडी जलधारा

21. गल्फस्ट्रीम उत्तरी अटलांटिक महासागर की जलधारा की प्रक्रति है-

उत्तर- गर्म जलधारा

22. दक्षिणी अमेरिका का उष्ण मरूस्थल है-

उत्तर- पेंटागोनिया 

23. मिसीसिपी-मिसौरी नदी का उद्गम स्थल, जो मैक्सिको की खाड़ी में गिरती है-

उत्तर- लटास्का झील” (उत्तरी मिनेसोटा)

24. ‘सूर्योदय का देश’ कहा जाता है-

उत्तर- जापान को

25. नील नदी का उदग्न स्थल है-

उत्तर- विक्टोरिया झील 

26. ‘मध्यरात्रि के सूर्य का देश’ कहा जाता है-

उत्तर- नार्वे को

27. ‘आँसूओं का प्रवेश द्वार’ अथवा दुःख का द्वार के रूप में जाना जाता है-

उत्तर- बाब-उल-मंदब जलडमरूमध्य को 

नोट : बाब-उल-मंदब अरब प्रायद्वीप पर यमन और अफ़्रीका के सींग पर जिबूती, इरिट्रिया  और उत्तरी सोमालिया के बीच स्थित एक जलडमरूमध्य है।  

28. ‘यांगटीसीक्यांग नदी’ का उद्गम स्थल है-

उत्तर- सीकांग के पहाड़ी क्षेत्र से (तिब्बत की पठार, चीन)

29. ‘मृतक घाटी’ (Death Valley) स्थित है-

उत्तर- पूर्वी कैलीफोर्निया में

30. पिग्मी जनजाति निवास करती है-

उत्तर- कांगो बेसिन (अफ्रीका) में

31. आस्वान बांध किस नदी पर निर्मित है-

उत्तर- नील नदी पर 

32. वोल्गा नदी किस सागर में गिरती है-

उत्तर- कैस्पियन सागर

33. करा नहर (Kra Canal) किस देश में स्थित है-

उत्तर- थाईलैंड

नोट: प्रस्तावित “करा नहर” का मुख्य उद्देश्य दक्षिण चीन सागर एवं हिंद महासागर के बीच की नौवहन दूरी को कम करना है। नहर का निर्माण करा के स्थलडमरूमध्य के माध्यम से किया जाएगा। ये नहर थाईलैंड की खाड़ी और अंडमान सागर को जोड़ने का काम करेगी।

34. अंकोरवाट कहाँ है-

उत्तर- कम्बोडिया 

35. प्रायद्वीपों का महाद्वीप’ कहा जाता है-

उत्तर- यूरोप को 

36. आस्ट्रेलिया में किस नदी के किनारे घना आबादी है-

उत्तर- मर्रे-डार्लिंग 

37. नियाग्रा जल प्रपात किन दो देशों को विभाजित करती है-

उत्तर– USA और कनाडा को 

General Geography Capsule 6

नियाग्रा जल प्रपात

General Geography Capsule 6

38. ‘प्रशांत महासागर के चौराहा’ के उपनाम से जाना जाता है-

उत्तर- हवाई द्वीप को 

39. विश्व का सर्वाधिक व्यस्त एवं महत्त्वपूर्ण जलमार्ग है-

उत्तर- उत्तरी अतलांतिक जलमार्ग

40. मलक्का जलसंधि (इंडोनेशिया) जोड़ती है-

उत्तर- अंडमान सागर एवं दक्षिणी चीन सागर को

41. कोलोराडो नदी स्थित है-

उत्तर-  USA में

42. महत्त्वपूर्ण मत्स्य ग्रह क्षेत्र ‘ग्रैण्ड बैंक’ स्थित है-

उत्तर- उत्तरी अतलांतिक महासागर में 

43. आस्ट्रेलिया के ऊपर चलने वाला उष्ण कटिबंधीय चक्रवात है-

उत्तर- विली-विली

44. जर्मनी और पोलैण्ड की बीच की सीमा रेखा है-

उत्तर- ऑडरनीस रेखा

45. विश्व का सबसे प्राचीन राजतंत्र है-

उत्तर- जापान

46. विश्व में निम्नत्तम प्रजनन दर है-

उत्तर- स्वीडन की 

47. विश्व में सर्वाधिक अम्लीय वर्षा वाला देश है-

उत्तर- नार्वे 

48. ‘चकमा’ शरणार्थी है-

उत्तर-  बांग्लादेश की

49. नील नदी (6690 किमी०) का उद्गम स्थल है-

उत्तर- विक्टोरिया झील

50. पेट्रोनेस टावर स्थित है-

उत्तर- मलेशिया में

General Geography Capsule 5

General Geography Capsule 5

सामान्य भूगोल


General Geography Capsule 5

एक नजर में इसे जरुर पढ़ें

1. विश्व का सबसे बड़ा प्रायद्वीप है-

उत्तर- अरब प्रायद्वीप

2. विश्व की छत (Roof of the World) कहा जाता है-

उत्तर- पामीर के पठार को

3. विश्व की कुल जनसंख्या है-

उत्तर-  7.78 अरब (लगभग)

4. विश्व में जनसंख्या दृष्टि से सबसे बड़ा देश हो गया है-

उत्तर- भारत

5. विश्व का सबसे छोटा देश है-

उत्तर- वेटिकन सिटी (44 हेक्टेयर)

6. महाद्वीपों की कुल संख्या है-

उत्तर- 7

7. विश्व का सबसे बड़ा महाद्वीप है-

उत्तर- एशिया

8. विश्व का सबसे छोटा महाद्वीप है-

उत्तर- आस्ट्रेलिया

9. विश्व में ग्रामीण जनसंख्या है-

उत्तर- लगभग (50%)

10. सबसे ऊँचा पर्वत शिखर है-

उत्तर- माउन्ट एवरेस्ट (नेपाल में 8848 मी०)

11. विश्व में सर्वाधिक जन्म दर वाला महाद्वीप है-

उत्तर- अफ्रीका

12. विश्व में सर्वाधिक मृत्यु दर वाला महाद्वीप है-

उत्तर- अफ्रीका

13. विश्व में न्यूनत्तम साक्षरता वाला देश है-

उत्तर- नाइजर (17.6%)

14. विश्व में सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व वाला देश है-

उत्तर- बांग्लादेश (926 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी०)

15. विश्व का सर्वाधिक गरीब देश है-

उत्तर- पूर्वी तिमोर

16. विश्व में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है-

उत्तर- चीनी (मंदारिन)

17. विश्व की सबसे गहरी झील है-

उत्तर- बैकाल झील  (धरातल से 1940 मीटर गहरा)

18. एशिया को उत्तरी अमेरिका से अलग करता है-

उत्तर- बेरिंग जलसन्धि

19. विश्व में सिंचाई नहरों का सबसे बड़ा जाल है-

उत्तर- पाकिस्तान में

20. विश्व का सबसे बड़ा सिनकोना उत्पादक केंद्र है-

उत्तर- इंडोनेशिया 

21. विश्व में सर्वाधिक जलयान बनाने वाला देश है-

उत्तर- जापान

22. जनसंख्या दृष्टि से विश्व का सबसे छोटा महानगर है-

उत्तर- शंघाई  (चीन)

23. विश्व का सबसे बड़ा देश (क्षेत्रफल में) है-

उत्तर- रूस (यूरोप महाद्वीप)

24. विश्व का सबसे छोटा गणतंत्र है-

उत्तर- नौरु

25. एशिया महादेश में विश्व का सर्वाधिक वर्षा वाला क्षेत्र है-

उत्तर- मासिनराम (मेघालय, भारत)

26. विश्व की कुल जनसंख्या का कितना प्रतिशत एशिया में निवास करती है-

उत्तर – 60 प्रतिशत

27. एशिया में सर्वाधिक घना रूप से बसा द्वीप है-

उत्तर- जावा

28. श्रीलंका की सबसे लम्बी नदी है-

उत्तर-  महावेली

29. संसार का सबसे बड़ा सागर है-

उत्तर- दक्षिण चीन सागर

30. लाल सागर एवं भूमध्य सागर को जोड़ने वाली नहर है-

उत्तर- स्वेज नहर 

31. एशिया महादेश में क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा देश है-

उत्तर- चीन

32. एशिया महादेश में क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे छोटा देश है-

उत्तर- मालदीव

33. विश्व का सर्वाधिक मछली पकड़ने वाला देश है-

उत्तर- चीन

34. विश्व का सर्वाधिक प्राकृतिक रबड़ उत्पादित करने वाला देश है-

उत्तर- थाईलैंड

35. विश्व का सर्वाधिक अबरख उत्पादित करने वाला देश है-

उत्तर- भारत

36. विश्व का सर्वाधिक चाय उत्पादित करने वाला देश है-

उत्तर- भारत

37. विश्व में सर्वाधिक टिन उत्पादित करने वाला देश है-

उत्तर- मलेशिया

38. अंध महाद्वीप (Black/Dark Continent) कहा जाता है-

उत्तर- अफ्रीका को

39. बुशमैन (कलाहारी) तथा पिग्मी (कांगो बेसिन) प्रमुख जनजातियाँ है-

उत्तर- अफ्रीका महादेश का

40. विश्व का प्रमुख स्वर्ण उत्पादक नगर है-

उत्तर- जोहांसबर्ग (अफ्रीका में)

41. अफ्रीका के उष्ण तथा शीतोष्ण घास का मैदान कहलाता है-

उत्तर- सवाना तथा वेल्ड्स

42. विश्व को सबसे बड़ी हीरे की खान है-

उत्तर- किम्बरले (दक्षिण अफ्रीका)

43. विश्व में सर्वाधिक कोको उत्पादन देश है-

उत्तर- आइबरी कोस्ट (अफ्रीका)

44. उत्तरी अमेरिका की खोज की गई थी-

उत्तर- कोलंबस

45. रेड इंडियन और नीग्रो प्रजातियाँ निवास करती है-

उत्तर- उत्तरी अमेरिका में

46. कालगुर्ली और कूलगार्डी सोने कि प्रसिद्ध खाने है- 

उत्तर-  आस्ट्रेलिया में

47. आस्ट्रेलिया में भेड़ पालक मजदूरों को कहा जाता है-

उत्तर- जेकारू

48. गोल्ड कोस्ट के नाम से जाना जाने वाला देश है-

उत्तर- घाना

General Geography Capsule 5

गोल्ड कोस्ट

49. वनों का देश किसे कहा जाता है-

उत्तर- कांगो देश को

50. मिस्र के किसान को क्या कहा जाता है-

उत्तर– फेल्लाह


 

20. हीदरग्राफ, क्लाइमोग्राफ, मनारेख और अरगोग्रफ

20. हीदरग्राफ, क्लाइमोग्राफ, मनारेख और अरगोग्रफ


हीदरग्राफ

       हीदरग्राफ का निर्माण सर्वप्रथम टेलर महोदय ने किया था।

⇒ हीदरग्राफ में जलवायु के आँकड़े को प्रदर्शित किया जाता है।

⇒ हीदरग्राफ में X-अक्ष पर वर्षा और Y-अक्ष पर तापमान को दिखाया जाता है।

⇒ हीदरग्राफ का प्रयोग औपनिवेशिक काल में अँग्रेज लोग बड़े पैमाने पर किया करते थे।

⇒ हीदरग्राफ पर बहुत अधिक गर्म, बहुत अधिक ठण्डा, बहुत अधिक सूखा और बहुत अधिक आर्द्रता के साथ-2 अधिवासित होने के लिए उपयुक्त क्षेत्र को प्रदर्शित किया जाता था।

हीदरग्राफ

 

 

क्लाइमोग्राफ

       Climograph का आविष्कार सर्वप्रथम ग्रिफिथ टेलर महोदय ने किया था।

⇒ Climograph X-अक्ष पर Relative Humidity (सापेक्षिक आर्द्रता) को और Y-अक्ष पर Wet Bulb Temperature (आर्द्र बल्ब तापमान) को ध्यान में रखकर मानचित्र या ग्राफ बनाया जाता है।

⇒ इंग्लैण्ड के निवासी औपनिवेशिक काल में Climograph का उपयोग वैश्विक स्तर पर निवास करने योग्य स्थान के निर्धारण में किया कर‌ते थे।

⇒ जबकि हीदरग्राफ का प्रयोग स्थानीय स्तर पर निवास करने योग्य स्थान का निर्धारण किया करते थे।

⇒ टेलर ने कुछ विशेष प्रकार की जलवायु को भी दर्शाया है जो क्लाइमोग्राफ के चारों कोनों पर होता है। इसके चार प्रकार हैं:

1. झुलसता हुआ (SCORCHING):-

        NW कोने पर, आर्द्र बल्ब तापमान 60° F से अधिक तथा सापेक्षिक आर्द्रता 40% से कम अर्थात् उष्ण-शुष्क जलवायु।

2. उमसदार (MUGGY):-

       NE कोने पर तापमान 60° F से अधिक तथा सापेक्षिक आर्द्रता 70% से अधिक अर्थात् उष्णार्द्र जलवायु।

3. शीतार्द्र (RAW):-

      SE कोने पर, तापमान 40° F से कम तथा सापेक्षिक आर्द्रता 70% से अधिक अर्थात् ठंडी आर्द्र जलवायु।

4. शीत-शुष्क (KEEN):-

       SW कोने पर, तापमान 40° F से कम तथा सापेक्षिक आर्द्रता 40% से कम अर्थात् शीत व शुष्क जलवायु।

 

Cartogram (मानारेख)

        मानारेख में किसी क्षेत्र की मूल आकृति को किसी विशेष उद्देश्य से विकृत कर सांख्यिकीय आंकड़ों का आरेखी विधि से मानचित्र पर प्रदर्शन किया जाता है। यह एक अति सारगर्भित एवं सरल मानचित्र होता है तथा आधुनिक भूगोल में काफी लोकप्रिय है।

⇒ इरविन रेख ने मानारेख को परिभाषित करते हुए कहा कि-“किसी एकल विचार को आरेखी ढंग से दिखाने के लिए बनाया गया अमूर्त और सरलीकृत मानचित्र को मानारेख कहते हैं।”

       मानारेख चार प्रकार का होता है:-

(1) क्षेत्र मूल मानारेख

        क्षेत्र मूल मानारेख में संसार अथवा किसी महाद्वीप, देश अथवा राज्य के क्षेत्रफल को आयत चित्र के रूप में प्रदर्शित किया जाता है।

क्षेत्र मूल मानारेख

(2) यातायात परिवहन मानारेख (Traffic flow Cartogram)

        वैसा मानारेख जिस पर सड़‌क पर चलने वाली गाड़ियों के भार को प्रदर्शित किया जाता है। इसे Star Diagram भी कहते हैं।

⇒ Star Diagram पर नियत समय में दिशा के अनुरूप चलने वाली वायु को प्रदर्शित किया जाता है।

⇒ इस आरेख में  शांत दिनों की संख्या को केन्द्र में लिख दिया जाता है या नहीं तो Calm Days लिख दिया जाता है। ऐसे Diagram को Wind Diagram कहते है।

यातायात परिवहन मानारेख

(3) Isochronic Diagram (समकालीन मानारेख)

         किसी निश्चित बिन्दु से समान समय में पहुँच वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा को समकालीन रेखा कहते हैं।

⇒ जब परिवहन मार्ग पर समकालीन रेखा को प्रदर्शित किया जाता है तो Isochronic Diagram का निर्माण होता है।

Isochronic Diagram

(4) समान मूल्य दूरी मानारेख

         किसी भी क्षेत्र के संदर्भ में सड़क अथवा रेलमार्ग पर तय की जाने वाली समान दूरी अन्तराल पर खींचे जाने वाली क्रमिक ट्रैफिक को प्रदर्शित करने वाले मानचित्र को समान मूल्य दूरी मानारेख कहते है।

⇒ समान मूल्य दूरी मानारेख पर दूरी एवं परिवहन के भार को साथ-2 प्रदर्शित किया जाता है।

समान मूल्य दूरी मानारेख

अरगोग्राफ

       अरगोग्राफ का निर्माण सर्वप्रथम गेडिज महोदय ने किया था।

⇒ अरगोग्राफ कृषकों के लिए काफी उपयोगी है।

⇒ अरगोग्राफ पर तापमान, वर्षा, फसलों की संख्या और उत्पादन को एक साथ प्रदर्शित किया जाता है।


Read More:

3. मानचित्र प्रक्षेपों का वर्गीकरण

3. मानचित्र प्रक्षेपों का वर्गीकरण


मानचित्र प्रक्षेपों का वर्गीकरण

      प्रकाश या ज्यामितीय विधि द्वारा समतल सतह पर निर्मित अक्षांश व देशांतर रेखाओं के जाल या भू-ग्रिड को मानचित्र प्रक्षेप कहा जाता है। गोलाकार पृथ्वी अथवा इसके किसी बड़े भू-भाग का समतल सतह पर मानचित्र बनाने के लिए मानचित्र प्रक्षेप का प्रयोग किया जाता है। अक्षांश एवं देशांतर रेखाओं के जाल को Graticule, Net या Mesh के नाम से भी जाना जाता है।

मानचित्र प्रक्षेपों

           पृथ्वी की आकृति का यथार्थ चित्रण केवल ग्लोब के द्वारा ही संभव है एवं कोई भी मानचित्र प्रक्षेप आकार, क्षेत्रफल एवं दिशा, तीनों ही दृष्टि से सही नहीं होता है। परन्तु समक्षेत्र, यथाकृतिक अथवा शुद्ध दिशा के गुणों में से किसी विशेष गुण का प्रक्षेप बनाना संभव है। अतः मानचित्र के उद्देश्य को ध्यान में रखकर उपयुक्त प्रक्षेप का चयन किया जाता है।

    मानचित्र प्रक्षेप को तीन आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।

(1) प्रकाश के प्रयोग के आधार पर

(2) गुण के आधार पर

(3) रचना विधि के आधार पर

(I) प्रकाश के प्रयोग के आधार पर

            प्रकाश के प्रयोग के आधार पर प्रक्षेप दो प्रकार के होते हैं:-

(1) संदर्श मानचित्र-प्रक्षेप (Perspective Map Projection or Geometrical Projection):-

         यह एक ऐसा Projection है जिसमें ग्लोब पर स्थित भूग्रिड को समतल कागज पर प्रकाश के माध्यम से प्रक्षेपित करते हैं।

        इस प्रक्षेप में प्रकाश के स्रोत की तीन स्थिति हो सकती है। जैसे-

(1) केन्द्र में,

(2) पृथ्वी के परिधि पर और

(3) अनन्त पर।

          इन तीनों स्थितियों के आधार पर प्रक्षेप तीन प्रकार के होते हैं:-
(i) केन्द्रक प्रक्षेप (Gnomonic Projection)

⇒ इसमें प्रकाश स्रोत ग्लोब के केंद्र में होता है।

(ii) त्रिविम प्रक्षेप (Stereograophic Projection)

⇒ इसमें प्रकाश स्रोत ग्लोब के परिधि पर होता है।

(iii) लम्ब-कोणीय प्रक्षेप (Orthographic Projection)

⇒ इसमें प्रकाश स्रोत अनंत पर होता है।

(2) असंदर्श मानचित्र प्रक्षेप (Non-Perspective Map Projection):-

          इसमें गणितीय विधि के आधार पर भूग्रिड को समतल कागज पर प्रक्षेपित किया जाता है। इस विधि में प्रकाश स्रोत को केन्द्र में स्थिर कर दिया जाता है और समतल कागज को अलग-2 स्थितियों में बदलकर प्रक्षेपण का कार्य किया जाता है। इसके आधार पर यह Projection तीन प्रकार का होता है-

(i) Polar Zenithal Projection (ध्रुवीय खमध्य प्रक्षेप)

⇒ इसमें समतल कागज को ग्लोब के ध्रुव पर फैलाकर रखा जाता है।

(ii) Equatorial Zenithal Projection (विषुवतीय खमध्य प्रक्षेप)

⇒ इसमें समतल कागज विषुवत रेखा को स्पर्श करता है।
(iii) Oblique Zenithal Projection (तिर्यक खमध्य प्रक्षेप)

⇒ इसमें समतल कागज ध्रुव और विषुवत रेखा के बीच के किसी स्थान को स्पर्श करता है।

(II) गुण के आधार पर 

             गुण के आधार पर प्रक्षेप तीन प्रकार के होते हैं:-

(1) यथाआकृति प्रक्षेप (Orthomorphic Projection)

(2) समक्षेत्र प्रक्षेप (Homolographic Projection or Equal Area Projection)

(3) शुद्ध दिशा प्रक्षेप (Azimuthal Projection)

(III) रचना विधि के आधार पर

           इसमें गणित और प्रकाश दोनों का सहारा अपने सुविधा के अनुसार लिया जाता है।

⇒ रचना विधि के आधार पर प्रक्षेप कई प्रकार के होते हैं:-
(1) शंकु प्रक्षेप (Conical Projection)

      शंकु प्रक्षेप चार प्रकार का होता है-

(i) One Standard Parallel Conical Projection (एक मानक अक्षांश वाला शंकु-प्रक्षेप)

(ii) Two Standard Parallel Conical Projection (दो मानक अक्षांशों वाला शंकु प्रक्षेप)

(iii) Bonne’s Projection (बोन प्रक्षेप)

(iv) Polyconic Projection (बहुशंकुक प्रक्षेप)

(2) बेलनाकार प्रक्षेप (Cylindrical Projection)

(i) Cylindrical Equi-Distance Projection (समदूरस्थ बेलनाकार प्रक्षेप)

(ii) Cylindrical Equal-Area Projection (बेलनाकार समक्षेत्र प्रक्षेप)

(iii) Mercator’s Projection (मर्केटर प्रक्षेप या यथाकृति प्रक्षेप)

(iv) Gall Projection (गॉल प्रक्षेप)

(3) Zenithal Projection (खमध्य प्रक्षेप)
              प्रकाशीय स्थिति के आधार पर खमध्य प्रक्षेप तीन प्रकार का होता है:-

(1) Gnomonic Projection (केन्द्रक नोमॉनिक प्रक्षेप)

(ii) Stereograophic Projection (त्रिविम प्रक्षेप)

(ii) Orthographic Projection (लम्बकोणीय प्रक्षेप)

             खमध्य प्रक्षेप कागज तल स्थिति के आधार पर तीन प्रकार का होता है:-

(i) Polar Zenithal Projection (ध्रुवीय खमध्य प्रक्षेप)

(ii) Oblique Zenithal Projection (तिर्यक प्रक्षेप)

(iii) Equatorial Zenithal Projection (विषुवतीय खमध्य प्रक्षेप)

(4) रूढ़ प्रक्षेप (Conventional Porojection)

(i) मॉलवीड प्रक्षेप (Mollveide Projection)

(ii) ज्यावक्रीय या सिनुसॉयडल प्रक्षेप (Sinusoidal or Sanson Flamstead Projection)

(iii) गोलाकार प्रक्षेप (Globular Projection)

(iv) विच्छिन्न मॉलवीड प्रक्षेप (Interrupted Mollveide Projection)

(v) विच्छिन्न सैन्सन फ्लैम्स्टीड या सिनुसॉयडल प्रक्षेप (Interrupted Sinusoidal or Sanson Flamstead Projection)

मानचित्र प्रक्षेपों का वर्गीकरण


Read More:

19. आरेख का प्रकार एवं उपयोग

आरेख का प्रकार एवं उपयोग

(Diagram: Types & uses or Statistical Representation of Data)


आरेख का प्रकार एवं उपयोग

         द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद भूगोल के विषयवस्तु एवं विधि तंत्र में मात्रात्मक क्रांति का आगमन हुआ। इसी मात्रात्मक क्रान्ति का यह प्रभाव था कि भूगोल में अनेक प्रकार के भौगोलिक तत्वों का निरूपण हेतु आरेख (Diagram) का निर्माण किया जाने लगा।

⇒ मात्रात्मक क्रान्ति- भूगोल में गणितीय विधि का प्रयोग करना।

⇒ भौगोलिक तत्वों को ग्राफ या चित्रों के माध्यम से प्रदर्शित करने की विधि को आरेख (Diagram) कहते हैं।

⇒ भूगोल में प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक वातावरण के किसी तत्व का वितरण प्रदर्शित करने वाले मानचित्र को वितरण मानचित्र कहते है।

⇒ वितरण मानचित्र को दो भागों में बाँटते हैं-

(1) अमात्रात्मक विधि के द्वारा निर्मित वितरण मानचित्र या गुण प्रधान वितरण मानचित्र

(2) मात्रात्मक विधि पर आधारित वितरण मानचित्र या सांख्यिकी मानचित्र

गुण प्रधान मानचित्र /वितरण मानचित्र

       गुण प्रधान मानचित्र मोटे तौर पर चार प्रकार का होता है:-

(1) रंगारेखा विधि (Choro-Chromatic Method)

(2) सामान्य छाया विधि (Sketching Map) पर आधारित मानचित्र

(3) चित्रीय विधि (Pictorial Map) पर आधारित मानचित्र

(4) वर्ण प्रतीकी विधि पर आधारित मानचित्र (Choros-Chematic Map)

मात्रात्मक मानचित्र

      मात्रात्मक मानचित्र भी चार प्रकार का होता है-

(i) वर्णमात्री विधि पर आधारित मानचित्र

(ii) सममान प्रतीक विधि पर आधारित मानचित्र

(iii) बिन्दु विधि पर आधारित मानचित्र

(iv) आरेखी विधि आधारित मानचित्र

(1) रंगारेखी विधि मानचित्र (Colour patch Map)

⇒ इसे Colour Map या Choro-Chromatic Map भी कहते हैं।

⇒ प्राकृतिक, राजनीतिक एवं प्रशासकीय ने प्रदेशों के विस्तार, भूमि उपयोग, मिट्टी एवं वनस्पतियों के प्रकार का वितरण प्रदर्शित करने के लिए इस विधि का प्रयोग किया जाता है।

⇒ रंगारेखी मानचित्र पर अलग-2 भौगोलिक तत्वों को अलग-2 रंग से प्रदर्शित करते हैं।

(2) Sketching Map (सामान्य छाया विधि)

⇒ sketching Map में एक भौगोलिक तत्व के उपविभाग को एक ही रंग से अलग-2 तीव्रता (Intensity) प्रदर्शित करते हैं।

(3) चित्रीय विधि पर आधारित मानचित्र

        किसी देश के दर्शनीय स्थान, पर्यटन केन्द्र, वेष-भूषा एवं ऐतिहासिक इमारतों के चित्रों के माध्यम से मानचित्र परम प्रस्तुत करना चित्रीय मानचित्र कहलाता है।

(4) वर्ण प्रतीकी मानचित्र

        वैसा मानचित्र जिस पर कई तत्त्वों के वितरण को एक ही मानचित्र पर दिखाया जाता है।

⇒ वर्ण प्रतीकी मानचित्र पर खनिजों का वितरण, औद्योगिक वितरण एवं फसल उत्पादन के वितरण प्रदर्शित करते हैं और Index बनाकर इसमें संकेत के रूप प्रदर्शित कर देते हैं।

⇒ कभी-2 Index का निर्माण कर सीधे-2 भौगोलिक तत्व के पहला अक्षर को मिलने वाले स्थान पर लिख दिया जाता है। ऐसे मानचित्र को नामांकन विधि मानचित्र कहते है।

मात्रात्मक विधि

       जब भौगोलिक तत्वों जैसे वस्तुओं के मूल्य, मात्रा, घनत्व इत्यादि को भौगोलिक मानचित्र पर या सांख्यिकी विधि द्वारा प्रकट किया जाता है तो उसे मात्रात्मक विधि घर आधारित आरेख (मानचित्र) कहते हैं।

यह कई प्रकार का होता है। जैसे-

(1) वर्णमात्री विधि (Choropleth)

        ऐसे मानचित्र में भिन्न-2 घनत्त्व वाली भौगोलिक तत्त्वों को मानचित्र पर प्रति इकाई औसत या प्रतिशत के मूल में प्रदर्शित करते हैं। जैसे- जनघनत्व (प्रति इकाई क्षेत्रफल पर निवासित जनसंख्या), कृषि भूमि का प्रतिशत, उत्पादकता (kg प्रति इकाई क्षेत्रफल) को दिखाया जाता है।

⇒ इसमें मूल्यों के बढ़ने के साथ रंगों के गहराई में भी वृद्धि होते जाती है।

(2) सममान रेखा विधि (Isopleth Map)

          मानचित्र पर किसी वस्तु के समान मूल्य या धनत्व को मिलाने वाली रेखा को Isopleth रेखा कहते हैं।

⇒ Isopleth जलवायु के तत्वों को दिखलाने के लिए काफी उपयोगी है। इसके अलावे इस पर निम्नलिखित तत्त्वों को प्रदर्शित किया जा सकता है। जैसे- समताप रेखा, सममेघ रेखा, समवर्षा रेखा, समदाब रेखा इत्यादि।

1. आइसोनीफ (Isonif)⇒ समान हिम वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा को आइसोनीफ कहते है।

2.  सममेघ रेखा या आइसोनेफ (Isoneph)⇒ समान मेघ आच्छादन वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा को आइसोनेफ कहते है।

3. आइसो बाथ (Isobath)⇒ समुद्र के अंदर समान गहराई वाले स्थानों को मिलाकर खींचे जाने वाली रेखा को आइसो बाथ कहते है।

4. आइसो ब्रांट (Isobront)⇒ एक समान समय पर तूफान आने वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

5. समपवनवेग रेखा या आइसोटैक (Isotach)⇒ मौसम मानचित्र पर पवन की समान गति वाले स्थानों को मिलाकर खींची गई रेखा।

6. समताप रेखा (Isotherm)⇒ समान तापमान वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

7. आइसोपैच (Isopach)⇒ हिमानी अथवा चट्टानों के समान मोटाई वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

8.  समकाल रेखा या आइसोक्रोन (Isochrone)⇒ किसी बिंदु से एक समान समय में तय कि गई दूरी वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

(3) बिन्दु विधि (Dot Method)

          इसे बनाने से पूर्व चार तथ्यों पर ध्यान देना पड़ता है-

(i) बिन्दुओं के आकार को निश्चित करना पड़ता है।

(ii) बिन्दु मूल्य सुनिश्चित करना पड़ता है।

⇒ बिन्दुओं के मूल्य का निर्धारण दो आधार पर होता है:

(a) क्षेत्रीय या स्टिल जेन बोअर विधि (क्षेत्रफल के लिए)

(b) आयतनी या स्टेनडी गीयर विधि (आयतन के लिए)

(iii) बिन्दुओं को अंकित करना- यह भी दो प्रकार का हो सकता है:-

(a) समवितरण प्रणाली पर आधारित

(b) असमवितरण प्रणाली पर आधारित

(iv) एक समान बिन्दु बनाना।

⇒ बिन्दु विधि या आधारित मानचित्र में केवल एक वस्तु का विवरण दिखाते हैं। जैसे:- जनसंख्या,पालतू पशु

क्षेत्रीय या स्टिल जेन बोअर विधि

⇒ यह बिन्दु विधि वितरण मानचित्र का एक संशोधित रूप है।

⇒ इस विधि के द्वारा ग्रामीण एवं नगरीय जनसंख्या को स्पष्ट रूप से दिखाया जा सकता है।

⇒ इस विधि में ग्रामीण जनसंख्या को बिंदु के द्वारा और नगरीय जनसंखा को अनुपातिक वृत के द्वारा दिखाया जाता है।

⇒ इसमें आनुपातिक वृत को क्षेत्रफल के रूप में प्रदर्शित करते हैं।

⇒ वृतों की त्रिज्या सम्बंधित जनसंख्या का वर्गमूल निकालकर बिन्दु के आकार से गुणा करके प्राप्त किया जाता है।

आयतनी या स्टेनडी गीयर विधि

⇒ इसमें भी ग्रामीण एवं नगरीय जनसंख्या के वितरण को मानचित्र पर दिखाया जाता है।

⇒ बोअर विधि में कभी-2 नगरीय केन्द्र की जनसंख्या अधिक होने पर आकार बहुत बड़ा हो जाता है, जिसके कारण वृत नगर सीमा के बाहर चली जाती है।

⇒ अत: इस समस्या से निपटने हेतु नगरीय जनसंख्या को समानुपातिक गोला के रूप में प्रदर्शित किया जाता है। 

⇒ गोला का अर्द्ध व्यास जनसंख्या के घनमूल निकालकर ज्ञात करते हैं।

⇒ स्टेन डी गियर विधि में ग्रामीण जनसंख्या को बिन्दुओं एवं नगरीय जनसंख्या को गोलों द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।

(4) आरेखी विधि पर आधारित मानचित्र

         वैसा मानचित्र जिसमें भौगोलिक तत्वों को सरल रेखा, वृत, दण्ड इत्यादि के द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। उसे आरेख कहते हैं।

आरेख चार प्रकार के होते हैं-

(i) दण्डारेख (Bar Diagram)

(ii) वृत आरेख (Pie Diagram)

(iii) रेखीय आरेख (Line Graph)

(iv) त्रिविम आरेख (Three Dimensional)

(i) दण्डारेख (Bar Diagram)

        दण्ड-आरेख पा पिछले शताब्दी के जनसंख्या को प्रदर्शित किया जा सकता है। इसमें समय को x-axis पर और जनसंख्या को Y-axis पर दिखाया जाता है।

      वस्तुतः दण्डारेख दो प्रकार का होता है:-

(a) साधारण दण्ड आरेख (Simple Bar Diagram):- साधारण दण्ड आरेख में कुल मात्रा को एक दण्ड के रूप में प्रदर्शित करते है।

साधारण दण्ड आरेख

(b) मिश्रित दण्ड आरेख (Compound Bar Diagram):- यदि दिया गया डाटा सतत (Continuous) हो तो दण्डारेख आयत चित्र के रूप में बनते है। 

मिश्रित दण्ड आरेख

(c) बहुदण्ड आरेख (Multiple Bar Diagram):- इसमें दो या अधिक वस्तुओं के आँकड़े एक साथ प्रदर्शित किये जाते हैं। तुलनात्मक अध्ययन में ये विशेष रूप से महत्वपूर्ण होते हैं।

बहुदण्ड आरेख

(ii) वृत आरेख (Pie Diagram)

                  यह आँकड़ों को प्रदर्शित करने की एक सरल ज्यामितीय विधि है। वृत्तारेख में वृत्त का कुल क्षेत्रफल आँकड़ों का कुल योग तथा विभिन्न त्रिज्याखंड आँकड़ों के प्रत्येक घटक को प्रदर्शित करते हैं। वृत्तारेख बनाने के लिए सर्वप्रथम सुविधानुसार कोई अर्द्धव्यास से वृत्त खींचकर आँकड़ों के योग को प्रदर्शित करते हैं। इसके बाद आँकड़ों के विभिन्न घटकों या उपविभागों के अंशों में मान निम्न प्रकार ज्ञात करते हैं:

आरेख का प्रकार एवं उपयोग

            इस प्रकार ज्ञात किये गये कोणों को वृत्त में कहीं भी अर्द्धव्यास खींचकर बनाया जा सकता है, परन्तु उत्तर दिशा से प्रारंभ करके घड़ी की सूई की दिशा में तथा अवरोही क्रम में बनाये गये कोण अधिक श्रेयस्कर होते हैं।

वृत आरेख

(iii) रेखीय आरेख (Line Graph)

              Line Diagram प्रवृति का द्धोतक है। Line Diagram से जनसंख्या वृद्धि, Market Price, Index को पर्दर्शित करते है। 

Line Diagram

(iv) त्रिविम आरेख (Three Dimensional)

               जैसा कि नाम से पता चलता है, इन आरेखों के तीन आयाम होते हैं, अर्थात लंबाई, चौड़ाई और गहराई। घनीय और गोलाकार आरेख त्रिविम या त्रिआयामी आरेखों के मुख्य उदाहरण हैं। त्रिविम या त्रिआयामी रेखाचित्रों का आयतन उनके द्वारा दर्शायी जाने वाली मात्राओं के समानुपाती होता है, और इसीलिए उन्हें आयतन आरेख भी कहा जाता है। यह आरेख द्विविम या द्विआयामी आरेखों की तुलना में बहुत कम जगह घेरते हैं। इस प्रकार, वे विशेष रूप से उपयोगी होते हैं जब दिए गए मात्राओं के मूल्य बहुत भिन्न होते हैं। इन आरेखों को वितरण मानचित्रों पर स्थित आरेखों के रूप में भी उपयोग किया जाता है।

त्रिविम आरेख

त्रिविम आरेख


पिरामिड आरेख (Piramidal Diagram) 

                     पिरामिड Diagram द्वारा दो विपरीत भौगोलिक आंकड़ों को विरूपित किया जाता है। जैसे- पुरुष-महिला के लिंगानुपात, आयात-निर्यात, औसत आयु (स्त्री- पुरुष) को दिखाते है।

पिरामिड आरेख

पट्टिका-ग्राफ (Band Graph)

             जब किसी उत्पादन का आंकड़ा कई वर्षों का और कई देशों का उपलब्ध हो तो उसे Band Graph के माध्यम से प्रदर्शित करते है।

पट्टिका-ग्राफ

Poly Graph 

⇒ Poly Graph  का प्रयोग जनसँख्या भूगोल में किया जाता है।

⇒ Poly Graph  पर मृत्यु दर, जन्म दर और प्राकृतिक वृद्धि दर को प्रदर्शित किया जाता है।

Poly Graph 


Read More:

error: