Archives January 2024

3. What do you understand by environment? Discuss its components. (पर्यावरण से आप क्या समझते हैं? इसके प्रमुख घटक की विवेचना करें।)

3. What do you understand by environment? Discuss its components.

(पर्यावरण से आप क्या समझते हैं? इसके प्रमुख घटक की विवेचना करें।)



भूगोल परिभाषा कोश के अनुसार, “चारों ओर उन बाहरी दशाओं का योग, जिसके अन्दर एक जीव अथवा समुदाय रहता है या कोई वस्तु रहती है।”

ए. जी. टेन्सले के अनुसार, “प्रभावकारी दशाओं का सम्पूर्ण योग, जिसमें जीव रहते हैं, पर्यावरण कहलाता है”

विद्वान रॉस के अनुसार, “पर्यावरण वह बाह्य शक्ति है, जो प्रभावित करती हैं।”

भूगोलवेत्ता डडले स्टाम्प के अनुसार, “पर्यावरण प्रभावों का ऐसा योग है, जो जीव के विकास एवं प्रकृति को परिवर्तित तथा निर्धारित करता है ।”

हर्सकोविट्स के अनुसार, “वातावरण उन सब बाहरी दशाओं और प्रभावों का योग है, जो प्राणी के जीवन और विकास पर प्रभाव डालते हैं।”

        संक्षेप में हम कह सकते हैं कि पर्यावरण में वे सभी प्राकृतिक एवं मानव निर्मित कारक सम्मिलित हैं, जो चारों ओर से घेरे हुए हैं और प्रभावित करते हैं।

      दूसरे शब्दों में, पर्यावरण के अन्तर्गत भौतिक, सांस्कृतिक अथवा जैविक-अजैविक प्रभावशील घटकों को सम्मिलित किया जाता है, जो जीव की दशाओं और कार्यों को प्रभावित करता है। इस प्रकार भौतिक कारक के अलावा सांस्कृतिक कारकों के प्रभावों को भी सम्मिलित किया जाता है। इस प्रकार पर्यावरण को पाँच बिन्दुओं में विश्लेषित किया जा सकता है-

(1) पर्यावरण बाह्य शक्ति है।

(2) ये शक्तियाँ परस्पर संबंधित हैं।

(3) इन शक्तियों का संयुक्त प्रभाव पड़ता है।

(4) ये शक्तियाँ गत्यात्मक (परिवर्तनशील) हैं।

(5) इन शक्तियों का जीव पर प्रभाव स्पष्ट देखा जा सकता है।

      पर्यावरण को दो प्रमुख प्रकारों में बाँटा जा सकता है-

1. भौतिक पर्यावरण (Physical Environment):-           

        भौतिक पर्यावरण प्रकृति का अनुपम उपहार है। इसका कोई विकल्प नहीं है। यह अमूल्य संसाधन सहज सभी को उपलब्ध है। भौतिक पर्यावरण से तात्पर्य उन भौतिक अथवा प्राकृतिक कारकों से है, जिन पर प्रकृति का सीधा नियंत्रण है, जिन्हें भगवान ने बनाया अर्थात् मानव का हस्तक्षेप इसके निर्माण में नहीं है।

        यदि मनुष्य को इस पृथ्वी से हटा लिया जाय, तो जिन क्रियाओं-प्रक्रियाओं और प्रतिक्रियाओं पर कोई अन्तर न आये, उन सब कारकों को भौतिक पर्यावरण के अन्तर्गत रखा जाता है। इसका आशय यह है कि जिसका निर्माण और नियंत्रण मनुष्य से परे है, जो प्रकृति प्रदत्त है, वह सब कुछ भौतिक पर्यावरण के अन्तर्गत आता है, जैसे- सूर्य ताप, ऋतु परिवर्तन स्थिति, भू-वैज्ञानिक संरचना, धरातल, भूकंप, ज्वालामुखी, खनिज, मिट्टियाँ, वनस्पति, जलराशियाँ, जीव-जन्तु ऐसे कारक हैं, जो प्रकृति जन्य हैं। इसलिए उक्त सभी कारकों को प्राकृतिक अथवा भौतिक पर्यावरण के अन्तर्गत रखा जाता है।

2. सांस्कृतिक पर्यावरण (Cultural Environment):-               

        सांस्कृतिक पर्यावरण मानव निर्मित होता है तथा मानव का इस पर पूर्ण नियंत्रण होता है। जैसे- संविधान, धर्म, दर्शन, संस्कृति, प्रतिमान, आदर्श मूल्य, सामाजिक परम्पराएँ, रीति-रिवाज, सामाजिक संबंध। इन अमूर्त तथ्यों के अलावा मूर्त कारक भी सांस्कृतिक पर्यावरण के अन्तर्गत आते हैं, जैसे- सड़कें, पुल, भवन, तालाब, आवास, शहर, सुरक्षा, चिकित्सा, शिक्षा केन्द्र, परिवहन स्थान, मनोरंजन स्थल आदि। मनुष्य पहले इनका निर्माण करता है और फिर इनसे प्रभावित होता है। नगरीय एवं औद्योगिक स्थलों पर सांस्कृतिक पर्यावरण विशेष प्रभावी होता है।

       शिक्षा केन्द्र और सुरक्षा केन्द्रों पर भी सांस्कृतिक कारक अत्यधिक प्रभावी होते हैं जबकि पर्यटन स्थलों पर भौगोलिक और सांस्कृतिक दोनों कारक प्रभावी होते हैं। सांस्कृतिक पर्यावरण वस्तुतः मनुष्य के भौतिक कारकों के प्रति अनुकूलन, समायोजन, संघर्ष आदि की प्रतिक्रिया-अनुक्रिया के परिणामस्वरूप जन्मा है; जो कृषि, उद्योग के साथ-साथ संस्कृति में भी देखा जा सकता है।

पर्यावरण के अवयव (घटक)

(Components of Environment)

      पर्यावरण अनेक अवयवों से मिलकर बना है। स्थूल रूप में अध्यात्म में इसे जड़ और चेतन कहा गया है। जिसे आधुनिक वैज्ञानिक अजैविक एवं जैविक कह कर विभाजित करते हैं। इसे भौतिक एवं अभौतिक अवयवों में विभक्त किया जा सकता है। इन घटनों की सर्वप्रथम वैज्ञानिक विवेचना 1948 में वनस्पतिशास्त्री ओस्टिंग ने की और निम्नलिखित प्रमुख घटकों में विभाजित किया-

1. पदार्थ (मिट्टी+पानी),

2. दशाएँ (ताप+प्रकाश)

3. बल (पवन+गुरुत्व)

4. जीव (जन्तु+वनस्पति)

5. काल (ऋतु+समय)।

      पर्यावरणविद् डौरेनमिर (1954) ने पर्यावरण के कारकों को सात वर्गों में विभाजित किया है-

1. मिट्टी,

2. हवा,

3. पानी,

4. आग,

5. ताप,

6. रोशनी,

7. जीव-जन्तु।

      संक्षेप में, पर्यावरण अध्ययन को सरल करते हुए पर्यावरण घटकों को दो वर्गों में विभक्त किया जा सकता है-

1. भौतिक कारक (Physical Factor)

A. पार्थिक कारक (Terrestrial factors):-

(i) भू रचना- (भूवैज्ञानिक संरचना खनिज, चट्टानें एवं मृदा)।

(ii) धरातल- (उच्चावच पर्वत, पठार, मैदान)।

(iii) स्थिति- (अवस्थिति, ज्यामिति परिस्थिति एवं क्षेत्र के संदर्भ में स्थिति)

2. सांस्कृतिक घटक (Cultural Factor):-

(i) आर्थिक घटक- कृषि, उद्योग, तथा व्यापार।

(ii) सामाजिक घटक-  संस्कृति, दर्शन, व्यवहार और आदर्श।

(iii) धार्मिक घटक- संस्कार तथा परम्पराएँ।

(iv) राजनैतिक घटक- नीतियाँ और चेतना।


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6. A glimpse of world history (विश्व इतिहास का एक झलक)

A glimpse of world history

(विश्व इतिहास का एक झलक)



1. पुनर्जागरण का अर्थ होता है

⇒ फिर से जगना (बौद्धिक जागरण)

2. पुनर्जागरण का आरंभ माना जाता है

⇒ इटली के फ्लोरेंस नगर से (16वीं सदी में)

3. पुनर्जागरण का अग्रदूत माना जाता है

⇒ दाँते को (इटली के महान कवि)

4. ‘डिवाइन कॉमेडी’ के लेखक है

⇒ दाँते (1260-1321 ई०)

5. ‘मानववाद’ का संस्थापक माना जाता है

⇒ पेट्रॉक को (इटली निवासी 1304-1367 ई.)

6. आधुनिक राजनीतिक दर्शन का जनक कहा है

⇒ मैकियावेली को (प्रसिद्ध पुस्तक द प्रिंस)

7. ‘द लास्ट सपर’ और ‘मोनालिसा’ नामक अमर चित्रों के चित्रकार है

⇒ लियोनार्डो द विंची (इटली का)

8. ‘द लास्ट जजमेंट’ एवं ‘द फॉल ऑफ मैन’ महान कृतियाँ है

⇒ माइकल एंजेलो की (इटली का)

9. ‘ओथैलो’, ‘रोमियो एण्ड जुलियट’ और ‘हेमलेट’ अमर कृति है

⇒ शेक्सपीयर (इंगलैंड) की

10. धर्म सुधार आन्दोलन (शुरुआत 16वीं सदी,  इंगलैंड में) इंग्लैंड का प्रवर्तक था

⇒ मार्टिन लुथर (जर्मनी का)

11. समुद्री मार्ग से सम्पूर्ण विश्व का चक्कर लगाने वाला प्रथम व्यक्ति था

⇒ मैगलन (स्पेन निवासी)

12. अमेरिका का स्वतंत्रता युद्ध समाप्त हुआ था

⇒ पेरिस संधि (1783 ई०) द्वारा

13. अमेरिका को पूर्ण स्वतंत्रता मिली

⇒ 4 जूलाई, 1776 को (विद्रोह शुरू 1775 में)

14. अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम का तात्कालिक कारण था

⇒ बोस्टन की चाय पार्टी (16 दिसम्बर 1773 को)

15. ‘बोस्टन टी पार्टी’ का नायक था

⇒ सैम्युल एडम्स

16. प्रजातंत्र एवं धर्मनिरपेक्ष राज्य की स्थापना सर्वप्रथम हुई थी

⇒ अमेरिका में

17. संसार में सर्वप्रथम लिखित संविधान लागू हुआ

⇒ संयुक्त राज्य अमेरिका में (1789 में)

18. मनुष्यों की समानता तथा उसके मौलिक अधिकारों की घोषणा करने वाला पहला देश था

⇒ अमेरिका

19. वाटरलू (बेल्जियम) का युद्ध हुआ था

⇒ 16 मई 1815 ई० को

20. अमेरिका (मूल निवासी रेड इंडियन) की खोज की थी

⇒ किस्ट्रोफर कोलम्बस ने

21. अमेरिका के प्रथम राष्ट्रपति थे

⇒ जार्ज वाशिंगटन

22. अब्राहम लिंकन ने दास प्रथा का उन्मूलन किया

⇒ जनवरी 1863 को

23. अमेरिका में फिलोसोफिकल सोसाइटी की स्थापना की थी

⇒ बेंजामिन फ्रैंकलिन ने

24. अमेरिकी गृहयुद्ध की समाप्ति हुई थी

⇒ 26 मई 1865 को

25. अब्राहम लिंकन की हत्या की थी

⇒ जॉन विल्कीज बूथ ने (4 मार्च, 1865 ई० को)

26. फ्रांस की राज्यक्रांति लुई सोलहवाँ के शासन काल में हुई थी

⇒ 1789 ई. में

27. समानता, स्वतंत्रता और बन्धुत्व का नारा देन है

⇒ फ्रांस की राज्यक्रांति की

28. मैं ही राज्य हूँ और मेरे शब्द ही कानून है।’ यह कथन है

⇒ लुई चौदहवाँ का

29. ‘सौ चूहों की अपेक्षा एक सिंह का शासन उत्तम है’ यह उक्ति है

⇒ वाल्टेयर की

30. ‘कानून की आत्मा’ की रचना की थी

⇒ मन्टेस्क्यू ने

31. ‘माप-तौल की दशमलव प्रणाली’ देन है

⇒ फ्रांस की

32. नेपोलियन का जन्म कोर्सिका द्वीप की राजधानी अजासियों में हुआ था

⇒ 15 अगस्त 1769 को

33. इंगलैंड को ‘बनियों का देश’ कहा था

⇒ नेपोलियन ने (पिता काली बेनापर्ट)

34. नेपोलियन (अन्य नाम- लिट्ल कारपोल) फ्रांस का सम्राट बना

⇒ 1804 ई. में

35. ‘आधुनिक फ्रांस का निर्माता’ माना जाता है

⇒ नेपोलियन को (उपनाम लिटिल कारपोरल)

36. मित्र राष्ट्रों की सेना ने नेपोलियन को वाटरलू के युद्ध (18 जून, 1915 ई.) में पराजित कर नजरबंद किया था

⇒ सेंट हेलेना द्वीप पर

37. भारत और चीन के बीच ‘पंचशील समझौता’ हुआ था

⇒ 20 अप्रैल 1954 को

38. इटली के एकीकरण का जनक माना जाता है

⇒ जोसेफ मेजनी को (जन्म- जेनेवा)

39. ‘लाल कुरती’ नामक सेना संगठित किया था

⇒ गैरीबाल्डी ने

40. इटली का एकीकरण किया था

⇒ काउण्ट कावूर ने (1871 ई. में)

41. जर्मनी का एकीकरण किया था

➤ बिस्मार्क ने (जन्म- ब्रेडनबर्ग में)

42. जर्मनी का सबसे शक्तिशाली राज्य था

➤ प्रशा

43. आस्ट्रिया का चांसलर था

➤ मेटरनिख

44. फ्रांस और प्रशा के बीच सुडान का युद्ध हुआ था

➤ 15 जुलाई 1870 ई० को

45. फ्रांस और प्रशा के बीच ‘फ्रैंकफर्ट की संधि’ हुई थी

➤ 10 मई 1871 ई० को

46. ‘दास कौपिटल’ और ‘काम्यूनिस्ट मैनीफेस्टो (1848 ई० में)’ पुस्तक के रचनाकार है

➤ कार्ल मार्क्स

47. ‘दुनिया के मजदूरों एक हो’ का नारा दिया था

➤ कार्ल्स मार्क्स ने (वैज्ञानिक समाजवाद का संस्थापक)

48. रूस के शासक को कहा जाता था

➤ जार

49. रूस का अंतिम जार शासक था

➤ निकोलस द्वितीय

50. रूसी क्राति हुई थी

➤ मार्च, 1917 ई० में

51. पोल्सेविक क्राति हुई थी

➤ 7 नवम्बर 1917 को (नेता-लेनिन)

52. लाल सेना का संगठन किया था

➤ ट्रॉटस्की ने

53. ‘एक जार, एक चर्च और एक रूस’ का नारा दिया था

➤ जार निकोलस द्वितीय ने

54. लेनिन ने रूस में नई आर्थिक नीति (NEP) लागू की थी

➤ 1921 ई० में

55. ‘मदर’ पुस्तक की रचना की है

➤ मैक्सिम गोर्की ने

56. औद्योगिक क्राति की शुरूआत हुई थी

➤ इंगलैंड में (सूती कपड़ा उद्योग से)

57. इंगलैंड में गृह-युद्ध हुआ था

➤ 1642 ई० में (चार्ल्स प्रथम के शासन काल में)

58. इंगलैंड में गौरवपूर्ण क्रांति (जेम्स द्वितीय के समय) हुई थी

➤ 1688 ई० में

59. सौ वर्षीय युद्ध हुआ था

➤ इंगलैंड एवं फ्रांस के बीच (1338-1453)

60. गुलाबों का युद्ध हुआ था

➤ इंगलैण्ड में (1455-1485) 

61. प्रथम विश्व युद्ध की शुरुआत हुई थी

➤ 28 जुलाई 1914 को

62. प्रथम विश्व युद्ध में भाग लेने वाले देशों की संख्या थी

➤ 37

63. प्रथम विश्व युद्ध का तात्कालिक कारण था

➤ आस्ट्रिया के राजकुमार फर्डिनेंड की सेराजेवो में हत्या

64. प्रथम विश्व युद्ध में धूरी राष्ट्रों का नेतृत्व किया था

➤ जर्मनी ने

65. इंगलैंड प्रथम विश्व युद्ध में शामिल हुआ था

➤ 8 अगस्त 1914 को

66. प्रथम विश्व युद्ध के समय अमेरिका के राष्ट्रपति थे

➤ वुडरो विल्सन

67. अमेरिका प्रथम विश्वयुद्ध में शामिल हुआ था

➤ 6 अप्रैल 1917 को

68. प्रथम विश्वयुद्ध समाप्त हुई थी

➤ 11 नवम्बर 1918 ई० को

69. वर्साय की संधि हुई थी

➤ 28 जून 1919 को (जर्मनी व मित्र राष्ट्रों के बीच)

70. 1911 ई. में हुई चीनी कांति का नायक था

➤ डॉ॰ सनयात सेन

71. चीन का राष्ट्रपिता कहा जाता है

➤ डॉ॰ सनयात सेन को

72. चीन में गृह-युद्ध शुरू हुआ था

➤ 1928 ई० में

73. ‘खुले द्वार की नीति’ अपनाई गयी थी

➤ चीन में (प्रतिपादक- जॉन हे)

74. ‘एशिया का मरीज’ कहा जाता है

➤ चीन को 

75. ‘यूरोप का मरीज’ कहा जाता है

➤ तुर्की को

76. ‘आधुनिक तुर्की का निर्माता’ माना जाता है

➤ मुस्तफा कमालपाशा को (अतातुर्क)

77. 1923 ई में लोजान को संधि हुई थी

➤ तुर्की एवं युनान के बीच

78. इस्ताम्बुल का पुराना नाम थी

➤ कुस्तुनतुनिया

79. हिटलर का जन्म हुआ था

➤ 20 अप्रैल 1889 को (वान में)

80. ‘एक राष्ट्र एक नेता’ का नारा दिया था; जो ‘फ्यूहरर’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ

➤ एडोल्फ हिटलर ने (आत्मकथा- माई कैम्फ)

81. द्वितीय विश्व युद्ध में भाग लेने वाले देश थे

➤ 61

82. द्वितीय विश्व युद्ध का तत्कालिक कारण था

➤ जर्मनी का पोलैण्ड पर आक्रमण

 83. अमेरिका का द्वितीय विश्व युद्ध में प्रवेश हुआ था

➤ 8 सितम्बर 1941 को

8. What is meant by regional imbalance? Explain the reasons for regional imbalance. (प्रादेशिक असन्तुलन से क्या तात्पर्य है? प्रादेशिक असन्तुलन के कारणों का विवरण को समझाइए।)

8. What is meant by regional imbalance? Explain the reasons for regional imbalance.

(प्रादेशिक असन्तुलन से क्या तात्पर्य है? प्रादेशिक असन्तुलन के कारणों का विवरण को समझाइए।)regional imbalance    

     सापेक्षतः विकसित एवं आर्थिक दृष्टि से दबे हुए राज्यों का सह-अस्तित्व और प्रत्येक राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति की दृष्टि से भिन्नता को ही प्रादेशिक (क्षेत्रीय) असन्तुलन (Regional Imbalance) कहा जाता है। भारत जैसे संघीय राज्य के समन्वित विकास के लिए प्रादेशिक (क्षेत्रीय) विकास अनिवार्य है, किन्तु यहां प्रादेशिक भिन्नता स्पष्टतः दिखाई देती है।

      पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र, गुजरात, पश्चिम बंगाल, आदि कुछ राज्य आर्थिक दृष्टि से बहुत विकसित हैं जबकि बिहार, झारखण्ड, उड़ीसा, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ उत्तरांचल, उत्तर प्रदेश, आदि राज्य पिछड़े हुए हैं। वस्तुतः एक क्षेत्र के संसाधनों के अधिक क्षमतापूर्ण प्रयोग से वह क्षेत्र अत्यधिक विकसित हो जाता है तथा दूसरे क्षेत्र के संसाधनों के सम्भावित अधिकतम क्षमतापूर्ण उपयोग न होने से वह क्षेत्र अविकसित रह जाता है। यही प्रादेशिक असन्तुलन है।

प्रादेशिक असन्तुलन के कारण

      प्रादेशिक असन्तुलन के निम्नलिखित कारण हैं:-

(1) संसाधनों का असमान वितरण:-

      देश के विभिन्न भागों में प्रकृति प्रदत्त संसाधन जैसे- मिट्टी एवं जल, वन तथा खनिज असमान रूप से वितरित होने के कारण देश में कृषि एवं उद्योगों के विकास में विषमताएँ उत्पन्न होती हैं जिससे प्रादेशिक असन्तुलन उत्पन्न होता है।

(2) जनसंख्या का वितरण:-

       प्राकृतिक संसाधनों के साथ-साथ देश के विभिन्न क्षेत्रों में जनसंख्या का वितरण असमान पाया जाता है जिसके कारण भी प्रादेशिक असन्तुलन को बढ़ावा मिलता है।

(3) आवश्यक आर्थिक संरचना का अभाव:-

      देश के जिन क्षेत्रों में आर्थिक विकास के लिए आवश्यक आर्थिक संरचना, जैसे- यातायात एवं सन्देश वाहन के साधन, विद्युत् शक्ति, विपणन व्यवस्था खाद्य सुविधाओं का पर्याप्त विकास नहीं होता, वे क्षेत्र अपेक्षाकृत पिछड़े रहते हैं। इससे भी प्रादेशिक असन्तुलन को बढ़ावा मिलता है।

(4) आर्थिक शक्तियों का प्रभाव:-

         वे क्षेत्र जो पहले से विकसित होते हैं और जहां आर्थिक संरचनाएँ पहले से ही उपलब्ध होती हैं, उन क्षेत्रों में निजी पूँजी अधिक आकर्षित होती है। फलतः विकसित क्षेत्र और अधिक विकसित हो जाते हैं और क्षेत्रीय विषमताएँ बढ़ती हैं।

(5) सामाजिक एवं सांस्कृतिक घटकों का प्रभाव:-

       वे क्षेत्र जो पिछड़े हुए रूढ़िवादी होते हैं, वहां के निवासियों में सामान्यतया जीवन स्तर को सुधारने, अधिक बचत करने सम्बन्धी आदतों का अभाव रहता है जिसके परिणामस्वरूप ऐसे क्षेत्रों का अपेक्षाकृत कम विकास होता है जिससे प्रादेशिक असन्तुलन को बढ़ावा मिलता है।

(6) राजनीतिक प्रभाव:-

     ऐसे क्षेत्र जिनमें नागरिक शिक्षित होते हैं तथा राजनीतिक रूप से जागरूक होते हैं, अपने राजनीतिक महत्व के कारण सरकार पर इन क्षेत्रों के विकास के लिए अधिक दबाव डाल देते हैं। अतः ऐसे क्षेत्रों का अधिक विकास हो जाता है।

(7) सरकारी नीति:-

       सरकारी नीति भी प्रादेशिक असन्तुलन को प्रोत्साहन देती है। उदाहरण के लिए, भारत में योजनाकाल में सरकारी नीति पर इस बात का प्रभाव रहा है। विकसित क्षेत्रों में विनियोग करने से शीघ्र परिणाम सामने आ सकेंगे और यदि सीमित साधनों का इतने विशाल पिछड़े क्षेत्र में विनियोग किया गया तो साधन गरीबी के दुश्चक्र को तोड़ने में अधिक प्रभावशाली नहीं रह जाएंगे। परिणामस्वरूप विकसित क्षेत्रों में ही विनियोजन किया गया जिसके कारण भी प्रादेशिक असन्तुलन में वृद्धि हुई है।

(8) विदेशी व्यापार:-

      अर्द्ध विकसित देश विदेशी व्यापार के क्षेत्र में भी पिछड़े हुए होते हैं। अतः उन्हें निर्यात का मूल्य कम मिलता है तथा आयात का मूल्य अधिक देना पड़ता है फलतः वे अपना विकास तेजी से नहीं कर पाते हैं। इसके विपरीत विकसित देशों में विकास की गति और तेज हो जाती है फलस्वरूप प्रादेशिक असन्तुलन उत्पन्न हो जाता है।


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7. Description of the effects of regional imbalance (प्रादेशिक असन्तुलन के प्रभावों का वर्णन)

7. Description of the effects of regional imbalance

(प्रादेशिक असन्तुलन के प्रभावों का वर्णन)



effects of regional imbalance  

   प्रादेशिक असन्तुलन का प्रभाव निम्नलिखित रूपों में देखा जा सकता है :

(A) आर्थिक प्रभाव:-

    प्रादेशिक असन्तुलन के आर्थिक प्रभाव निम्नांकित हैं:

(1) साधनों का अपूर्ण उपयोग:-

    प्रादेशिक असन्तुलनों के कारण देश के सम्पूर्ण साधनों का प्रयोग सम्भव नहीं हो पाता। प्रादेशिक असन्तुलनों की अटल स्थिति, विकास के एक कुशल तरीके का प्रतिनिधित्व करती है।

(2) बेरोजगारी में वृद्धि:-

     प्रादेशिक असन्तुलन कुछ क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों में वृद्धि कर देता है जबकि अन्य क्षेत्रों में बेरोजगारी व्याप्त रहती है और उसमें वृद्धि होती है।

(3) साधनों का समुचित उपयोग:-

      प्रत्येक देश के प्राकृतिक साधन सीमित होते हैं अतः उनका उपयोग अत्यन्त मितव्ययिता से किया जाना चाहिए ताकि भविष्य के लिए उनका संरक्षण किया जा सके। उद्योगों का क्षेत्रीय असन्तुलन इस उद्देश्य की पूर्ति में बाधक होता है।

(4) जीवन-स्तर में भिन्नता:-

      प्रादेशिक असन्तुलन से विभिन्न क्षेत्र के लोगों के जीवन-स्तर में बहुत अन्तर आ जाता है। विकसित क्षेत्रों में आय का उच्च स्तर होने से जीवन स्तर भी उच्च होता है, जबकि पिछड़े क्षेत्रों में आय का स्तर निम्न होता है अतः वहां का जीवन स्तर भी निम्न होता है, परिणामस्वरूप लोगों में असन्तोष की भावना बढ़ती है।

(5) श्रम शक्ति का एकांगी होना:-

     असन्तुलित विकास श्रम शक्ति को पंगु बना देता है। क्षेत्र विशेष में कुछ उद्योगों के विकास के कारण श्रम शक्ति भी उसी उद्योग विशेष के लिए कुशल होती है।

(6) अन्य आर्थिक प्रभाव:-

(i) क्षेत्रीय असन्तुलन में अर्थव्यवस्था का एकांगी विकास ही हो पाता है।

(ii) क्षेत्र विशेष के विकसित होने तथा दूसरे क्षेत्र के अविकसित रहने से श्रम की गतिशीलता में कमी आती है।

(B) सामाजिक प्रभाव:-

       सामाजिक प्रभाव निम्नलिखित हैं:

(1) आय एवं सम्पत्ति की असमानताओं में वृद्धि:-

     प्रादेशिक असन्तुलन के कारण गांव व नगरों के मध्य आय एवं सम्पत्ति की असमानताओं में निरन्तर वृद्धि होती रहती है।

(2) असामाजिक कृत्यों को बढ़ावा:-

     प्रादेशिक असन्तुलनों के कारण एक ही क्षेत्र या कुछ ही क्षेत्रों की ओर श्रमिकों का प्रवास बढ़ जाता है जिसके कारण अनेक समस्याएं जैसे- भीड़-भाड़ की समस्या, आवास व्यवस्था की कमी, बिजली एवं जलापूर्ति की समस्या उत्पन्न हो जाती है। सभी व्यक्तियों को रोजगार न मिलने के कारण असामाजिक कृत्यों को बढ़ावा मिलता है। इसके साथ ही मानव शक्ति का यथोचित विकास नहीं हो पाता है।

(3) सामाजिक लागतों में वृद्धि:-

     प्रादेशिक असन्तुलन के परिणामस्वरूप किसी क्षेत्र विशेष में अत्यधिक औद्योगीकरण होने पर वहां प्रदूषण, आदि के कारण श्रमिकों में व्याप्त रोगों के उपचार के लिए अस्पताल, स्वास्थ्य सदन, आदि की अतिरिक्त लागत देनी पड़ती है।

(C) राजनीतिक प्रभाव:-

         राजनीतिक प्रभाव निम्नलिखित हैं:

(1) राजनीतिक अस्थिरता:-

          विभिन्न क्षेत्रों में व्याप्त अत्यधिक असमानताएँ अस्थिरता को बढ़ावा देती हैं। भारत में पंजाब व जम्मू-कश्मीर में उग्रवाद के लिए प्रादेशिक असन्तुलन भी उत्तरदायी है।

(2) क्षेत्रवाद को बढ़ावा:-

      जब अर्थव्यवस्था के कुछ क्षेत्रों का अधिक विकास एवं कुछ का कम विकास होता है तो उससे क्षेत्रवाद को बढ़ावा मिलता है।

(3) सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव:-

     प्रादेशिक असन्तुलन सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। एक क्षेत्र में उद्योगों, आदि का विकास होने पर वहां युद्ध के समय शत्रु देश आसानी से हवाई हमला कर सकता है।


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15. What is religion? Characteristics of religion and description of Indian religions (धर्म क्या है? धर्म की विशेषताएँ तथा भारतीय धर्मों का विवरण)

15. What is religion? Characteristics of religion and description of Indian religions

(धर्म क्या है? धर्म की विशेषताएँ तथा भारतीय धर्मों का विवरण)



  What is religion

     धर्म शब्द का अर्थ है ‘धारणा’। धारणा से तात्पर्य उन आदर्शों की अन्तरंग प्रतिष्ठापना से है जो व्यक्ति और समाज को श्रेष्ठता और सद्भावना की दिशा में प्रेरित करते हैं। धर्म का दूसरा अर्थ है अभ्युदय और निश्रेयस अर्थात् उन गतिविधियों को अपनाया जाना जो कल्याण और प्रगति का शालीनता युक्त पथ प्रशस्त करती हैं।

      स्मृतिकारों ने धर्म को कर्तव्यपालन के अर्थ में लिया है। सामान्य अर्थों में धर्म अलौकिक शक्ति पर विश्वास है। प्रत्येक समाज व समुदाय में धर्म किसी न किसी रूप में अवश्य पाया जाता है। धर्म जीवन को सम्पूर्णता प्रदान करने की एक विधि है।

डॉ. राधाकृष्णन के अनुसार, जिन सिद्धान्तों के अनुसार हम अपना दैनिक जीवन व्यतीत करते हैं तथा जिनके द्वारा हमारे सामाजिक सम्बन्धों की स्थापना होती है, वही धर्म है। यह जीवन का सत्य है और हमारी कृति को निर्धारित करने वाली शक्ति है।”

जेम्स फ्रेजर के अनुसार, “धर्म से मैं मनुष्य से श्रेष्ठ उन शक्तियों की सन्तुष्टि या आराधना समझता हूं जिसके सम्बन्ध में यह विश्वास किया जाता है कि प्रकृति और मानव जीवन को मार्ग दिखलाती व नियन्त्रित रखती है।

प्रसिद्ध समाजशास्त्री मैलिनोवस्की के अनुसार, धर्म क्रिया का एक तरीका है, साथ ही विश्वासों की एक व्यवस्था भी। धर्म समाजशास्त्रीय घटना के साथ-साथ एक व्यक्तिगत अनुभव भी है।” इस परिभाषा से स्पष्ट है कि धर्म विश्वासों की एक व्यवस्था है। यह विश्वास आत्मा, परमात्मा या अलौकिक शक्ति आदि पर हो सकता है। तथा व्यवस्था का आशय आराधना, पूजा-पाठ, प्रार्थना या भक्ति से है।

ईमाइल दुर्खीम के अनुसार, “धर्म पवित्र वस्तुओं से सम्बन्धित विश्वासों एवं आचरणों की समग्रता है, जो इन पर विश्वास करने वालों को एक नैतिक समुदाय के रूप में संयुक्त करती है।”

जॉनसन के अनुसार, “धर्म कम या अधिक रूप में उच्च आलौकिक क्रम या प्राणियों, शक्तियों, स्थानों एवं अन्य तत्वों के सम्बन्ध में विश्वास व व्यवहारों की एक स्थिर प्रणाली है।”

स्वामी विवेकानन्द के अनुसार, “धर्म वह है जो मानव को इस संसार एवं परलोक में आनन्द की खोज के लिए प्रेरित करता है।”

मजूमदार एवं मदान के अनुसार, “धर्म किसी आलौकिक और अतीन्द्रिय शक्ति के भय का एक मानवीय प्रत्युत्तर है। यह व्यवहार की अभिव्यक्ति अथवा परिस्थितियों से किए जाने वाले अनुकूलन का वह रूप है, जो आलौकिक शक्तियों की धारणा से प्रभावित होता है।”

धर्म की विशेषताएँ-

       धर्म की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं।:-

(1) अतिमानवीय व अलौकिक शक्ति पर प्रभाव:-

    धर्म में यह स्वीकार किया जाता है कि निश्चित रूप से कोई न कोई ऐसी अलौकिक शक्ति है जो मानव शक्ति से श्रेष्ठ व मानव से परे रहकर विश्व का संचालन करती है।

(2) पवित्रता की धारणा:-

    धर्म पवित्र वस्तुओं से सम्बन्धित विश्वासों एवं क्रियाओं की एक समन्वित व्यवस्था है अर्थात् धार्मिक विश्वासों, वस्तुओं, स्थानों, आदि में पवित्रता का भाव पाया जाता है।

(3) धार्मिक क्रियाकलाप:- 

    प्रत्येक धर्म में कुछ न कुछ क्रियाकलाप अवश्य पाए जाते हैं जिन्हें पूर्ण करके व्यक्तियों को आत्मिक सुख प्राप्त होता है।

(4) भय की धारणा:-

   धर्म में भय की धारणा होती है, इसलिए व्यक्ति धार्मिक क्रियाकलापों के माध्यम से पारलौकिक या अलौकिक शक्ति को प्रसन्न करने का प्रयास करता है तथा धार्मिक क्रियाकलापों में ऐसे कार्य करता है जिससे अलौकिक शक्ति द्वारा उसकी इच्छाएं पूर्ण हों और वह ऐसा कोई भी कार्य नहीं करना चाहता जो धर्म के विरुद्ध हो।

(5) धर्म वैयक्तिक व सामाजिक:-

    धर्म व्यक्तिगत अनुभवों के साथ-साथ सामाजिक अनुभवों से भी सम्बन्धित होता है।

(6) तर्क का अभाव:-

      धर्म का आधार विश्वास है, अतः इसमें तर्क का कोई स्थान नहीं होता है और न ही वैज्ञानिक आधार पर इसे सही या गलत बताया जा सकता है।

(7) सार्वभौमिकता:-

    धर्म प्राचीन समय से ही किसी न किसी रूप में रहा है। इसका रूप परिवर्तन अवश्य हो सकता है।

भारतीय धार्मिक संरचना

      भारतीयों के जीवन में धर्म का प्रमुख स्थान रहा है। वह जन्म से मृत्यु तक धार्मिक संस्कारों से आबद्ध है। हमारे अनेक धार्मिक कृत्य, रीति-रिवाज व स्तुतियाँ, आदि वैदिक काल से चले आ रहे हैं और आज भी हमारे धर्म सम्बन्धी कार्य वेदों के अनुसार होते हैं। भारत में धार्मिक स्वतन्त्रता प्राचीन काल से रही है, यही कारण है कि भारत-भू पर विविध धर्मों एवं धार्मिक विचारों व सम्प्रदायों का प्रादुर्भाव समय के साथ होता रहा है। इसके साथ ही बाहर से आए धर्म एवं धार्मिक विचारों का परिष्कार भी हुआ। भारत के प्रमुख धर्म निम्नलिखित हैं:

(1) हिन्दू धर्म देश का सबसे प्रमुख धर्म है। अखिल भारतीय हिन्दू महासभा के अनुसार, हिन्दू वह है जो भारत में उत्पन्न किसी धर्म को मानता है तथा जो भारत में भारतीय माता-पिता की सन्तान है। इस महासभा के अनुसार सनातनी, आर्य समाजी, जैन, सिख, बौद्ध, ब्राह्मण, आदि सभी हिन्दू कहे जा सकते हैं। यह सत्य ही कहा है कि भाषा भारतीय लोगों को भौगोलिक समुदायों में बांटती है, धर्म उन्हें समान्तर परतों में बांटता है।

         हिन्दू धर्म की तीन विशेषताएँ हैं:-

(i) एक सर्वोच्च सत्ता तथा अनेक छोटे देवताओं में प्रत्येक हिन्दू धर्मावलम्बी पूर्ण आस्था रखता है।

(ii) इसकी प्रवृत्ति सहनशीलता की है तथा कोई भी हिन्दू देवी या देवता विशेष की आराधना कर सकता है, उस पर कोई प्रतिबन्ध नहीं है।

(iii) यह कर्म, पुनर्जन्म और मृत्यु के बाद मोक्ष मिलने में विश्वास रखता है। गीता की यह सूक्ति ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचनः’ (Action is the duty, Reward is not the concern)

      सभी भारतीयों में मान्यता पाती है।

    हिन्दू धर्म की अपनी एक विशेष सामाजिक व्यवस्था होती है जिसके मुख्य तत्व जाति, समुदाय, संयुक्त परिवार प्रणाली, बाल-विवाह की प्रथा, सार्वभौमिक विवाह प्रथा, आदि हैं।

भारत में धर्म के अनुसार जनसंख्या का वितरण- 2011

क्रम संख्या धार्मिक समुदाय प्रतिशत
1.

2.

3.

4.

5.

6.

7.

हिंदू

मुस्लिम

ईसाई

सिख

बौद्ध

जैन

अन्य

79.8

14.2

2.3

1.7

0.7

0.4

0.9

कुल योग 100.00

(2) मुस्लिम (Muslims) या इस्लाम धर्म का जन्म अरब देश में हुआ, किन्तु यह भारत में 12वीं शताब्दी के लगभग उत्तर-पश्चिम की ओर आने वाले आक्रमणकारियों द्वारा लाया गया। अतः इसका विस्तार उत्तर-पश्चिमी भारत तक ही सीमित रहा, किन्तु शनैः-शनैः यह गंगा की घाटी में फैल गया तथा पश्चिम बंगाल में भी इसने अपनी जड़ें जमा लीं। प्रायद्वीप भारत में यह अधिक नहीं फैल सका और इसलिए वहां 15% से अधिक मुस्लिम नहीं हैं। मुस्लिम अधिकतर पश्चिमी भागों में पाए जाते हैं।

(3) ईसाई (Cristians):–

       सीरिया के ईसाई जो ईसा शताब्दी के प्रारम्भिक काल में ट्रावनकोर-कोचीन में आ बसे थे, वह अन्य मिशनरी ईसाइयों से भिन्न हैं। रोमन, कैथोलिक, ऐंग्लिकन तथा बैपटिस्ट ईसाइयों की संख्या ही भारत में अधिक है। ईसाई धर्म का विस्तार भारत में पहाड़ी जातियों तथा हिन्दुओं की निम्न जातियों में अधिक हो पाया है। इस समय ईसाइयों का केन्द्रीकरण विशेषतः केरल, गोआ, दमन, दीव, पाण्डिचेरी, नगालैण्ड, तमिलनाडु, आन्ध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में ही है।

(4) सिख (Sikhs):-

       इस धर्म का जन्म 16वीं शताब्दी में वैष्णव धर्म से पृथक् होकर हुआ। यह धर्म प्राचीन हिन्दू धर्म को एक शुद्ध धर्म के रूप में अपनाने का ही प्रयास था जिसने बहु-देवों, मूर्ति पूजा, जाति प्रथा, तीर्थयात्रा और पुनर्जन्म का खण्डन किया। मुसलमानों की राजनीतिक क्रूरता तथा हिन्दुओं की सामाजिक क्रूरता के फलस्वरूप ही सिक्खों ने एक शान्तिमय पथ के स्थान पर एक सैनिक धर्म का अवलम्बन किया।

      इस धर्म के दो सिद्धान्त हैं- लम्बे बाल रखना तथा धूम्रपान न करना। इनके पास सदैव कच्छा, कृपाण, कंघी, कड़ा और केश रहते हैं जिनसे इन्हें अन्य धर्मावलम्बियों के बीच सरलतापूर्वक पहचाना जा सकता है। यह प्रारम्भ में अविभाजित पंजाब में केन्द्रित थे। अब पंजाब, हरियाणा, उत्तरी गंगा नहर (राजस्थान एवं दिल्ली व चण्डीगढ़) में अधिक फैले हैं। ये बड़े हट्टे-कट्टे होते हैं और इसलिए ये भारतीय सेना में बड़ी संख्या में मिलते हैं।

(5) जैन (Jains):-

   जैन धर्म हिन्दू धर्म की ही एक शाखा मानी जाती है। यद्यपि जैन धर्मावलम्बी हिन्दू धर्म के सिद्धान्तों को मानते हैं, किन्तु यह जीवों के प्रति अहिंसा पर अधिक जोर देते हैं। ये अधिकांशतः व्यापारी और धनवान होते हैं तथा भारत में दूर-दूर तक फैले हैं।

(6) बौद्ध (Buddhist):-

     बौद्ध धर्म भी हिन्दू धर्म की ही एक शाखा है। इसे गौतम बुद्ध ने छठी शताब्दी ई. पू. में चलाया था। इसका सबसे अधिक प्रचार गंगा की घाटी में ही हुआ। यह धर्म नीति पर अवलम्बित है। यद्यपि भारत में यह धर्म 10वीं शताब्दी के बाद से लोप हो गया, किन्तु आज महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम तथा सिक्किम के पहाड़ी भागों में इनके अनुयायी मिलते हैं।

(7) पारसी (Zoroastrian):–

   पारसी लोग भारत में 7वीं शताब्दी में फारस के मुस्लिम धर्म की क्रूरता से बचने के लिए आए और भारत के पश्चिमी तटीय भागों में बस गए। यह लोग सूर्य और अग्नि की पूजा करते हैं। यह अधिकांशतः व्यापारी उद्योगी हैं। इनका सबसे अधिक केन्द्रीकरण मुम्बई नगर में है।

निष्कर्ष:

   उपर्युक्त वर्णन के आधार पर कहा जा सकता है कि भारत के निवासियों का सम्बन्ध किसी-न-किसी धर्म से है। अधिकांश धर्मों का सम्बन्ध तीर्थ स्थानों से बताया जाता है। उदाहरणार्थ, काशी धर्म और संस्कृति से सम्बन्धित है। यहाँ अनेक हिन्दू मन्दिर हैं। हिन्दुओं के लिए गंगा सबसे पवित्र नदी है जिसके तट पर मृत्यु अथवा अन्त्येष्टि क्रिया से आत्मा को शान्ति प्राप्त होना माना जाता है।

      अलीगढ़, हैदराबाद और देवबन्द के विश्वविद्यालय मुस्लिम संस्कृति के केन्द्र हैं। सिखों के पंजाब में ननकाना साहब और अमृतसर तथा बिहार में पटना साहिब, जैनियों के राजस्थान (महावीरजी, दिलवाड़ा, रणकपुर, ऋषभदेव), गुजरात (पालीताना, गिरनार) बिहार (सम्मेद शिखर) तथा पारसियों के मुम्बई नगर में सांस्कृतिक केन्द्र हैं। बौद्ध गया (बिहार), सारनाथ (उत्तर प्रदेश), सांची (मध्य प्रदेश) में बोध के विहार हैं। बद्रीनाथ, केदारनाथ, जगन्नाथपुरी, द्वारिका, रामेश्वरम्, वाराणसी, कांजीवरम् सभी हिन्दुओं के लिए पूज्य स्थान हैं।


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