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22. प्रमुख सममान रेखाएँ

22. मानचित्रों पर दर्शाएँ जाने वाली प्रमुख सममान रेखाएँ


प्रमुख सममान रेखाएँ⇒

सममान रेखाएँ या आइसोप्लेथ (Isopleth):- मानचित्रों पर किसी वस्तु के समान मूल्य या घनत्व वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखाएँ को सममान रेखाएँ कहा जाता है। जैसे- समताप रेखा, सममेघ रेखा, समवर्षा रेखा, समदाब रेखा इत्यादि।

(नोट : सम = बराबर, मान = मूल्य अर्थात मानचित्र पर किसी तत्व या वस्तु के समान मूल्य / घनत्व) 

प्रमुख सममान रेखाएँ

मानचित्रों पर दर्शाएँ जाने वाली प्रमुख सममान रेखाएँ:

1. आइसोनीफ (Isonif)⇒ समान हिम वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा को आइसोनीफ कहते है।

2.  सममेघ रेखा या आइसोनेफ (Isoneph)⇒ समान मेघ आच्छादन वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा को आइसोनेफ कहते है।

3. आइसो बाथ (Isobath)⇒ समुद्र के अंदर समान गहराई वाले स्थानों को मिलाकर खींचे जाने वाली रेखा को आइसो बाथ कहते है।

4. आइसो ब्रांट (Isobront)⇒ एक समान समय पर तूफान आने वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

5. समपवनवेग रेखा या आइसोटैक (Isotach)⇒ मौसम मानचित्र पर पवन की समान गति वाले स्थानों को मिलाकर खींची गई रेखा।

6. समताप रेखा (Isotherm)⇒ समान तापमान वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

7. आइसोपैच (Isopach)⇒ हिमानी अथवा चट्टानों के समान मोटाई वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

8.  समकाल रेखा या आइसोक्रोन (Isochrone)⇒ किसी बिंदु से एक समान समय में तय कि गई दूरी वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

9. समदिक्पाती रेखा (Isogone)⇒ समान चुंबकीय झुकाव वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

10. समलवणता रेखा (Isohaline)⇒ समुद्री जल में खारेपन की समान मात्रा मात्रा वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा

11. आइसोरेमे (Isoraime)⇒पाला गिरने की समान मात्रा वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

12. आइसोस्टेड (Isostade)⇒ समान अधिवासीय संख्या को मिलाने वाली रेखा।

13. समभूकंपीय (Isoseismal)⇒ भूकंपीय तीव्रता की समानता वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

14. सहभूकंप रेखा या होमोसिस्मल (Homoseismal) ⇒ भूकंप के एक ही समय आने वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

15. आइसोथेरे (Isothere)⇒ ग्रीष्मकाल के समान तापमान वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

16. समदाब रेखा (Isobars)⇒ समान वायुदाब वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

17. इसालोबार (Isallobar)⇒ एक विशिष्ट अवधि में वायुमंडलीय दबाव में होने वाले समान परिवर्तन के स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

18. आइसोहेल (Isohel)⇒ सूर्य के प्रकाश की समान अवधि वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

19. समोच्च रेखा या आइसोहाइप (Contour lines or Isohypes)⇒ समुद्र तल से समान ऊँचाई वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

20. आइसोपाइकनिक (Isopycnic)⇒ मानव जनसंख्या के समान घनत्व वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

21. आइसोकाइनेटिक (Isokinetic)⇒ समान पवन वेग के स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

22. समवर्षा रेखा (Isohytes)⇒ वर्षा की समान मात्रा वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

23. आइसोमेर (Isomer)⇒ वर्षा की वार्षिक मात्रा की प्रतिशत के रूप में व्यक्त की जाने वाली उसकी औसत मासिक मात्रा के स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

24. आइसोपाथ (Isopath)⇒ भूगर्भिक अथवा भू भौतिक परत की समान मोटाई वाले बिंदुओं को मिलाने वाली रेखा।

25. आइसोसिस्ट (Isoseist)⇒ समान भूकंपीय लहरों को एक समय में ही अनुभव करने वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

26. आइसोटालेंटोज (Isotalantose)⇒ औसत मासिक तापांतर की समानता वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

27. आइसोइकेते (Isoikete)⇒ लोगों के रहने योग्य निवास की समान मात्रा वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

28. आइसोफीन (Isophene)⇒ समान मौसमी घटनाओं को दर्शाने वाली रेखा।

29. आइसोथर्मो बाथ (Isothermobath)⇒ सागरीय जल की गहराई के अनुसार समान ताप वाले बिंदुओं को मिलाने वाली रेखा।

30. आइसोचाइम (Isochime)⇒ औसत शीत की तापमान की समानता वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

31. आइसोफाइट (Isophite) ⇒ वनस्पतियों की समान ऊंचाई अथवा समान ऊंचाई वाले वनस्पति के स्तरों को मिलाने वाली रेखा।

32. आइसोप्रैक्ट (Isopract)⇒ मानव जनसंख्या के समान वितरण वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।



1. मानचित्र पर बनायी गई वे रेखाएँ जो समुद्र से बराबर ऊँचाई वाले स्थानों को मिलाते हैं, क्या कहलाती है?

(a) आइसोबार

(b) आइसोथर्म

(c) आइसोटोप

(d) कन्टूर

2. मानचित्र पर वर्षा का वितरण दिखाने के लिए किस रेखा का प्रयोग किया जाता है?

(a) आइसोहाइट

(b) आइसोथर्म

(c) आइसोबार

(d) आइसोहेलाइन

3. सामान जनसंख्या घनत्व वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखाएँ है-

(a) आइसोप्रैक्ट

(b) आइसोडोपेन

(c) आइसोटैक

(d) आइसोपाइक्निक

4. महासागरीय एवं सागरीय भागों में लवणता की समान मात्रा वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा निम्न में से किस नाम से जानी जाती है?

(a) आइसोबाथ

(b) आइसोहेल

(c) आइसोसैलाइन

(d) आइसोहैलाइन

5. समान मेघाच्छन्नता को मिलाने वाली रेखा क्या कहलाती है?

(a) आइसोनिफ

(b) आइसोनेफ

(c) आइसोराइम

(d) आइसोफेन

6. समान चुम्बकीय झुकाव वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा क्या कहलाती है?

(a) आइसोबाथ

(b) आइसोब्राण्ट

(c) आइसोगोनल

(d) आइसोक्रोन

7. आइसोथर्म नामक रेखाएँ मानचित्र पर उन स्थानों को दर्शाने के लिए बनायी जाती है जहाँ पर-

(a) एकसमान तापमान रहता है

(b) एकसमान दबाब रहता है

(c) एकसमान लवणता रहती है

(d) एकसमान उँचाई होती है

8. आइसोबार (Isobar) मानचित्र पर उन स्थानों को दर्शाने के लिए खींची गई रेखाएँ हैं, जहाँ पर-

(a) एक जैसा वायुमंडलीय दाब हैं

(b) एक जैसा तापमान है

(c) एक जैसा ऊँचाई है

(d) एक जैसा लवणता है

9. आइसोहेल (Isohel) रेखाओं द्वारा क्या प्रदर्शित किया जाता है?

(a) समान वर्षा

(b) समान धूप

(c) समान ऊँचाई

(d) समान हिमपात

10. विश्व मानचित्र पर एक ही समदिकपाती रेखा पर स्थित दो स्थानों पर समान होगा-

(a) भू-प्रदूषण

(b) भूकम्पीय क्रिया

(c) मेघाच्छादन

(d) चुम्बकीय विचलन

11. एकसमान समय पर तूफान आने वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा क्या कहलाती है?

(a) आइसोसीस्मल

(b) आइसोकाइम

(c) आइसोब्राण्ट

(d) आइसोक्लाइन

12. समुद्र के अन्दर समान गहराई वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा कहलाती है-

(a) आइसोबार

(b) आइसोबाथ

(c) आइसोथर्म

(d) आइसोक्रोन

13. सूर्यातप के समान अवधि वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा क्या कहलाती है?

(a) आइसोहेल

(b) आइसोनिफ

(c) आइसोक्रोन

(d) आइसोहाइप

14. समान हिमपात वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखाएँ क्या कहलाती है?

(a) आइसोनेफ

(b) आइसोहाइट

(c) आइसोनिफ

(d) आइसोब्राण्ट

15. किसी प्रदेश में समान भाषा वाले स्थानों को वर्गीकृत करने वाली सीमा रेखा क्या कहलाती है?

(a) आइसोपाइक्निक

(b) आइसोफाइट

(c) आइसोडाइन

(d) आइसोग्लॉस

16. भूकम्पीय तीव्रता की समानता वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा क्या कहलाती है ?

(a) आइसोगोनल

(b) होमोसिस्मल

(c) आइसोसिस्मल

(d) आइसोकायनेटिक

17. भूकम्प के एक ही समय पर आने वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा क्या कहलाती है?

(a) आइसोसिस्मल

(b) होमोसिस्मल

(c) आइसोब्राण्ट

(d) आइसोगोनल

18. महासागरों व सागरों की लवणीयता को मानचित्र पर प्रदर्शित करने वाली रेखाएँ क्या कहलाती है?

(a) आइसोथर्म

(b) आइसोबार

(c) आइसोहेलाइन

(d) आइसोहाइट

19. आइसोबाथ रेखाएँ प्रदर्शित करती है-

(a) समान वर्षा वाले क्षेत्र

(b) समान बादल वाले क्षेत्र

(c) समान वायुदाब वाले क्षेत्र

(d) समुद्र तल के समान गहराई वाले क्षेत्र

20. मानचित्र में वे रेखाएँ जहाँ दाब सम हो, कहलाती है-

(a) देशान्तर रेखाएँ

(b) अक्षांश रेखाएँ

(c) समदाब रेखाएँ

(d) समस्थानिक

21. मानचित्र पर आइसोहाइप्स रेखाओं द्वारा निम्न में से किसका प्रदर्शन किया जाता है?

(a) समान वर्षा की मात्रा

(b) पवन की समान गति वाले स्थान

(c) मेघाच्छादन के समान क्षेत्र

(d) समुद्रतल से समान ऊँचाई

KVS PGT SOLVED EXAM PAPER

KVS PGT SOLVED EXAM PAPER



KVS PGTKVS PGT का भूगोल के विगत वर्षों के प्रमुख प्रश्नोत्तर

1. भारत में भू-राजस्व अभिलेखों के अनुसार, ‘फसलें चीरी और काटी जाती हैं’ को निम्नलिखित में से किस भू-उपयोग वर्ग के अंतर्गत वर्गीकृत किया गया है?
(A) पेड़ की फसलें और कब्रगाहें
(B) खेती योग्य बंजर भूमि
(C) शुद्ध बोया क्षेत्र
(D) परती भूमि
उत्तर- (C) शुद्ध बोया क्षेत्र

2. उपसौर के दौरान सूर्य और पृथ्वी के बीच निम्नलिखित में से कौन सी उचित दूरी है?
(A) 146 मिलियन किमी.
(B) 147 मिलियन किमी.
(C) 148 मिलियन किमी.
(D) 150 मिलियन किमी.
उत्तर- (B) 147 मिलियन किमी. (KVS PGT 2023)

3. विश्व की प्रमुख विवर्तनिक प्लेटों को दर्शाने वाली निम्नलिखित में से कौन-सी संख्या सही है?
(A) 6
(B) 7
(C) 8
(D) 9
उत्तर- (B) 7

4. सौर ऊर्जा के निम्नलिखित आंकड़ों में से कौन-सा (कैलोरी प्रति वर्ग सेंटीमीटर प्रति मिनट) पृथ्वी के वायुमंडल के शीर्ष पर प्राप्त औसत को सही ढंग से दर्शाता है?
(A) 1.94
(B) 1.84
(C) 2.94
(D) 2.84
उत्तर- (A) 1.94

5. चंबल नदी निम्नलिखित में से किस राज्य समूह से होकर बहती है?
(A) उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश
(B) उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान
(C) उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़
(D) राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार
उत्तर- (B) उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान

6. निम्नलिखित में से कौन-सा ढलान प्रोफाइल सही है जब समोच्च अपने उच्च मूल्यों पर एक-दूसरे से दूर होते हैं?
(A) उत्तल ढलान
(B) अवतल ढलान
(C) समान ढलान
(D) लहरदार ढलान
उत्तर- (C) समान ढलान

7. समान वायुदाब वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा कहलाती है-
(A) आइसोहेल
(B) इसोहायत
(C) आइसोबार
(D) आइसोथर्म
उत्तर- (C) आइसोबार

8. वायुमंडलीय गैसों के प्रतिशत के बढ़ते क्रम में निम्नलिखित में से कौन-सा सही क्रम है?
(A) हीलियम, क्सीनन, कार्बन डाइऑक्साइड और आर्गन
(B) ऑक्सीनन, हीलियम, कार्बन डाइऑक्साइड और आर्गन
(C) हीलियम, कार्बन डाइऑक्साइड, क्सीनन और आर्गन
(D) क्सीनन, कार्बन डाइऑक्साइड, हीलियम और आर्गन
उत्तर- (A) हीलियम, ऑक्सीनन, कार्बन डाइऑक्साइड और आर्गन

9. मेरियाना ट्रेंच निम्नलिखित में से किस महासागर में स्थित है?
(A) उत्तरी अटलांटिक महासागर
(B) हिंद महासागर
(C) दक्षिण अटलांटिक महासागर
(D) पश्चिमी प्रशांत महासागर
उत्तर- (D) पश्चिमी प्रशांत महासागर

10. निम्नलिखित में से कौन-सा प्रतिशत भूपर्पटी पर सिलिकन के निर्माण के लिए सही है?
(A) 22.72
(B) 27.72
(C) 25.72
(D) 30.72
उत्तर – (B) 27.72

11. फ्रांस द्वारा प्रवर्तित SPOT कार्यक्रम में निम्नलिखित में से किस देश का महत्वपूर्ण योगदान रहा है?
(A) जर्मनी
(B) यू.एस.ए.
(C) बेल्जियम
(D) रूस
उत्तर – (C) बेल्जियम

12. निम्नलिखित में से किसने समुद्र तल प्रसार की अवधारणा प्रस्तावित की थी?
(A) बुलार्ड
(B) मैकेंजी
(C) हैरिहेस
(D) मॉर्गन
उत्तर – (C) हैरिहेस

13. ‘अंडे की स्थलाकृति की टोकरी’ निम्नलिखित में से किस भू-आकृतिक प्रक्रिया द्वारा बनाई गई है?
(A) नदी कार्य
(B) हिमानी द्वारा
(C) वायु जनित
(D) समुद्र की लहर द्वारा
उत्तर- (B) हिमानी कार्य

14. सड़क वर्गीकरण की पुरानी योजना के तहत, राष्ट्रीय राजमार्ग-1 निम्नलिखित शहरों में से किस एक को जोड़ता है?
(A) अंबाला-मुरादाबाद
(B) अमृतसर-लखनऊ
(C) अमृतसर- दिल्ली
(D) दिल्ली – हैदराबाद
उत्तर- C) अमृतसर- दिल्ली

15. नर्मदा-तापी द्रोणी निम्न में से किस राज्य से होकर गुजरती है?
(A) महाराष्ट्र – मध्य प्रदेश
(B) महाराष्ट्र – छतीसगढ़
(C) मध्य प्रदेश – गुजरात
(D) मध्य प्रदेश – राजस्थान
उत्तर- (C) मध्य प्रदेश – गुजरात

16. निम्नलिखित भू-आकृतियों में से कौन-सा बहु-चक्रीय अपरदन प्रक्रियाओं का सुराग प्रदान करता है?
(A) नदी वेदिकाएं
(B) गॉर्ज
(C) नदी विसर्प
(D) डेल्टा
उत्तर- (A) नदी वेदिकाएं

17. पौधों को खाने वाले जंतुओं के लिए निम्नलिखित में से किस शब्द का प्रयोग किया जाता है?
(A) प्राथमिक उपभोक्ता
(B) द्वितीयक उपभोक्ता
(C) अपघटक
(D) उत्पादक
उत्तर- (A) प्राथमिक उपभोक्ता

18. निम्नलिखित में से किसने अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में ‘स्थिति त्रिभुज’ की अवधारणा पेश की?
(A) ए. वेबर
(B) टी. प्लेंडर
(C) ई.एम. हूवर
(D) ए. लॉश
उत्तर- (A) ए. वेबर

19. ‘नव नियतिवाद’ के संस्थापक कौन थे?
(A) सी. डार्विन
(B) एफ. रेटजेल
(C) ई.सी.सेम्पल
(D) जी. टेलर
उत्तर – (D) जी. टेलर

20. निम्नलिखित राज्यों में से किस एक ने 2001-2011 के दौरान भारत में जनसंख्या की सबसे कम दशकीय वृद्धि दर्ज की?
(A) पंजाब
(B) अरुणाचल प्रदेश
(C) नागालैंड
(D) मध्य प्रदेश
उत्तर- (C) नागालैंड

21. निम्नलिखित में से किस चट्टान में क्रिस्टलीकरण देखा जाता है?
(A) कांग्लोमरेट
(B) शेल
(C) चूना पत्थर
(D) बेसाल्ट
उत्तर- (A) कांग्लोमरेट

22. निम्नलिखित में से किस महासागर में मालदीव द्वीप समूह स्थित हैं?
(A) उत्तरी अटलांटिक महासागर
(B) हिंद महासागर
(C) प्रशांत महासागर
(D) दक्षिण अटलांटिक महासागर
उत्तर- (B) हिंद महासागर

23. भारत का निम्नलिखित में से कौन-सा राज्य तीन देशों की सीमा को स्पर्श करता है?
(A) हिमाचल प्रदेश
(B) सिक्किम
(C) उत्तराखंड
(D) मिजोरम
उत्तर- (B) सिक्किम

24. 2011 की जनगणना के अनुसार निम्न में से किस राज्य का जनसंख्या घनत्व सबसे अधिक है?
(A) सिक्किम
(B) अरुणाचल प्रदेश
(C) जम्मू और कश्मीर
(D) मिजोरम
उत्तर- (C) जम्मू और कश्मीर

25. विश्व के निम्नलिखित में से किस क्षेत्र में अधिकतम सूर्यातप प्राप्त होता है?
(A) भूमध्यरेखीय क्षेत्र
(B) उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्र
(C) समशीतोष्ण क्षेत्र
(D) उप-ध्रुवीय क्षेत्र
उत्तर – (A) भूमध्यरेखीय क्षेत्र

26. बस्तियों के संगठन के लिए क्रिस्टालर के सेंट्रल प्लेस मॉडल में K = 3 सिद्धांत निम्नलिखित में से किस एक द्वारा दर्शाया गया है?
(A) बाजार सिद्धांत
(B) परिवहन सिद्धांत
(C) प्रशासनिक सिद्धांत
(D) आर्थिक सिद्धांत
उत्तर – (A) बाजार सिद्धांत

27. यूरोप के लिए रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट प्रोग्राम के तहत SPOT-1 लॉन्च करने के लिए निम्नलिखित में से कौन सी तारीख सही है?
(A) जून 2014
(B) सितंबर 1993
(C) जनवरी 1990
(D) फरवरी 1986
उत्तर – (D) फरवरी 1986

28. पृथ्वी पर उपोष्णकटिबंधीय उच्च दाब पेटी को ……… के रूप में भी जाना जाता है?
(A) डोलड्रम्स
(B) अश्व अक्षांश
(C) व्यापार पवन क्षेत्रों
(D) पश्चिमी
उत्तर – (B) अश्व अक्षांश

29. हिमालय के निम्नलिखित में से किस संभाग की लंबाई पूर्व से पश्चिम की ओर अधिकतम है?
(A) कुमाऊं
(B) भूटान
(C) नेपाल
(D) पंजाब
उत्तर – (C) नेपाल

30. तीस्ता नदी निम्नलिखित में से किस एक की प्रमुख सहायक नदी है?
(A) ब्रह्मपुत्र
(B) गंगा
(C) कोसी
(D) गंडक
उत्तर – (A) ब्रह्मपुत्र

31. जब जमीन पर दो स्थान 500 किमी दूर होते हैं और उन्हें मानचित्र पर 25 सेमी द्वारा दिखाया जाता है, तो निम्नलिखित में से कौन सा प्रतिनिधि अंश मानचित्र के पैमाने का प्रतिनिधित्व करता है?
(A) 1: 2000
(B) 1: 20,000
(C) 1: 200,000
(D) 1: 2,000,000
उत्तर – (D) 1: 2,000,000

32. निम्नलिखित में से किसने “द स्टडी ऑफ लैंडफॉर्म्स” पुस्तक लिखी है?
(A) आर्थर होम्स
(B) आर.जे. स्मॉल
(C) एम.जे. सेल्बी
(D) सी.ए.एम. किंग
उत्तर – (B) आर.जे. स्मॉल

33. शुद्ध प्रकाश संश्लेषण के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा सही है?
(A) पौधे में कुल प्रकाश संश्लेषण + पानी
(B) पौधे में कुल प्रकाश संश्लेषण – पानी
(C) कुल प्रकाश संश्लेषण – श्वसन
(D) कुल प्रकाश संश्लेषण + श्वसन
उत्तर – (C) कुल प्रकाश संश्लेषण – श्वसन

34. कृष्णा नदी निम्नलिखित में से किस स्थान के पास से निकलती है?
(A) नासिक
(B) प्रवर
(C) महाबलेश्वर
(D) तलकावेरी
उत्तर – (C) महाबलेश्वर

35. लक्षद्वीप की राजधानी निम्नलिखित में से कौन-सी है?
(A) सिलवासा
(B) कवारत्ती
(C) अगरतला
(D) आइजोल
उत्तर – (B) कवारत्ती

36. ‘रुको और जाओ’ निश्चयवाद के प्रतिपादक कौन थे?
(A) ई.सी.सेम्पल
(B) जे. ब्रंच
(C) जी. टेलर
(D) ई. हंटिंगटन
उत्तर – (C) जी. टेलर

37. ग्रेट बैरियर रीफ ऑस्ट्रेलिया के निम्नलिखित में से किस राज्य के तट पर स्थित है?
(A) क्वींसलैंड
(B) दक्षिण ऑस्ट्रेलिया
(C) न्यू साउथ वेल्स
(D) विक्टोरिया
उत्तर (A) क्वींसलैंड

38. निम्नलिखित में से कौन सी श्रृंखला ‘पी’ भूकंपीय तरंगों के छाया क्षेत्र को दर्शाती है?
(A) 95 ̊ से 150 ̊
(B) 100 ̊ से 155 ̊
(C) 105 ̊ से 145 ̊
(D) 105 ̊ से 155 ̊
उत्तर – (C) 105 ̊ से 145 ̊

39. निम्नलिखित में से किस भूकंपीय तरंग में चट्टानों के कणों की आगे पीछे गति देखी जाती है?
(A) ‘पी’ तरंगें
(B) ‘एस’ तरंगें
(C) ‘एल’ तरंगें
(D) रेले (R) तरंगें
उत्तर – (A) ‘पी’ तरंगें

40. कैलीफोर्निया शीत धारा विश्व के निम्नलिखित तटीय क्षेत्रों में से किस एक से होकर गुजरती है?
(A) संयुक्त राज्य अमेरिका का पश्चिमी भाग
(B) दक्षिण अमेरिका का पश्चिमी भाग
(C) कनाडा का पूर्वी भाग
(D) ऑस्ट्रेलिया का पश्चिमी भाग
उत्तर – (A) संयुक्त राज्य अमेरिका का पश्चिमी भाग

41. निम्नलिखित में से किसने भूकंप के ‘प्रत्यास्थ प्रतिक्षेप सिद्धांत’ को प्रतिपादित किया?
(A) एल ग्रीन
(B) जेम्स जीन्स
(C) हैरी हेस
(D) एच.एफ.रीड
उत्तर – (D) एच.एफ.रीड

42. एक महत्वपूर्ण तेलधारी माराकाइबो बेसिन निम्नलिखित में से किस देश में स्थित है?
(A) ईरान
(B) सऊदी अरब
(C) वेनेजुएला
(D) यू.एस.ए
उत्तर – (C) वेनेजुएला

43. सुनामी आपदा निम्नलिखित में से किस महीने में हुई, जिससे भारत को भारी नुकसान हुआ?
(A) जनवरी 2003
(B) दिसंबर 2003
(C) दिसंबर 2004
(D) दिसंबर 2005
उत्तर – (C) दिसंबर 2004

44. निम्नलिखित में से कौन-सी मिट्टी महाराष्ट्र राज्य के बड़े हिस्से पर हावी है?
(A) लाल मिट्टी
(B) लेटराइट मिट्टी
(C) काली मिट्टी
(D) ग्रे मिट्टी
उत्तर – (C) काली मिट्टी

45. बोमडी-ला दर्रा भारत के निम्नलिखित में से किस राज्य में स्थित है?
(A) सिक्किम
(B) जम्मू और कश्मीर
(C) अरुणाचल प्रदेश
(D) हिमाचल प्रदेश
उत्तर – (C) अरुणाचल प्रदेश

46. निम्नलिखित में से कौन से देश ‘डूरंड रेखा’ से अलग होते हैं?
(A) भारत और पाकिस्तान
(B) भारत और अफगानिस्तान
(C) भारत और चीन
(D) चीन और रूस
उत्तर – (B) भारत और अफगानिस्तान

47. निम्नलिखित में से कौन सा क्षोभमंडल में तापमान की सामान्य गिरावट दर का प्रतिनिधित्व करता है?
(A) 6.5 ̊ सी/किमी
(B) 5.5 ̊ सी/किमी
(C) 6.0 ̊ सी/किमी
(D) 5.0 ̊ सी/किमी
उत्तर – (A) 6.5 ̊ सी/किमी (KVS PGT 2023)

48. शिलाकरण की प्रक्रिया निम्नलिखित में से किस चट्टान में पाई जाती है?
(A) गैब्रो
(B) चूना पत्थर
(C) पेगमेटाइट
(D) बेसाल्ट
उत्तर – (B) चूना पत्थर

49. निम्नलिखित में से किस राज्य में कांडला बंदरगाह स्थित है?
(A) केरल
(B) महाराष्ट्र
(C) गुजरात
(D) तमिलनाडु
उत्तर – (C) गुजरात

50. भारतीय उपमहाद्वीप में विषुवतीय पछुआ पवनें किस महीने में स्थापित होती हैं?
(A) दिसंबर
(B) फरवरी
(C) जून
(D) अक्टूबर
उत्तर – (C) जून

51. सरगासो समुद्र निम्नलिखित में से किस महासागर में सुविकसित है?
(A) उत्तर प्रशांत महासागर
(B) दक्षिण प्रशांत महासागर
(C) उत्तर अटलांटिक महासागर
(D) दक्षिण अटलांटिक महासागर
उत्तर – (C) उत्तर अटलांटिक महासागर

52. माध्यमिक गतिविधियों में लगे श्रमिकों को निम्नलिखित में से किसके द्वारा जाना जाता है?
(A) ब्लू कॉलर
(B) लाल कॉलर
(C) सफेद कॉलर
(D) गोल्डन कॉलर
उत्तर – (A) ब्लू कॉलर

53. भूमध्यसागरीय क्षेत्र में निम्नलिखित में से कौन-सी फसल का सर्वाधिक प्रभुत्व है?
(A) खाद्यान्न फसलें
(B) वाणिज्यिक फसलें
(C) औद्योगिक फसलें
(D) फलों की फसलें
उत्तर – (D) फलों की फसलें

54. निम्नलिखित में से कौन सा अनुपात ‘समुद्री लहर वेग’ का प्रतिनिधित्व करने के लिए सही है?
(A) तरंग ऊँचाई से तरंग लम्बाई तक
(B) तरंग ऊंचाई से तरंग अवधि तक
(C) तरंग लंबाई से तरंग अवधि तक
(D) तरंग लंबाई से तरंग ऊँचाई तक
उत्तर – (C) तरंग लंबाई से तरंग अवधि तक

55. 2011 की जनगणना के अनुसार निम्न में से किस केंद्र शासित प्रदेश की साक्षरता दर सबसे कम है?
(A) दादरा और नगर हवेली
(B) लक्षद्वीप
(C) पुडुचेरी
(D) दमन और दीव
उत्तर – (A) दादरा और नगर हवेली

56. बाबाबुदन पहाड़ियाँ निम्नलिखित में से किस राज्य में स्थित हैं?
(A) महाराष्ट्र
(B) कर्नाटक
(C) तमिलनाडु
(D) केरल
उत्तर – (B) कर्नाटक

57. भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के तहत GSAT-6A को लॉन्च करने के लिए निम्नलिखित में से कौन सी तारीख सही है?
(A) 29 मार्च 2018
(B) 15 अप्रैल 2010
(C) 2 सितंबर 2007
(D) 10 अप्रैल 1982
उत्तर – (A) 29 मार्च 2018

58. एस्थेनोस्फीयर में भूकंपीय तरंगों के वेग में कमी के लिए निम्नलिखित में से कौन सा कारण सबसे उपयुक्त है?
(A) घनत्व में कमी
(B) घनत्व में वृद्धि
(C) गहराई में परिवर्तन
(D) पदार्थ की अवस्था में परिवर्तन
उत्तर – (D) पदार्थ की अवस्था में परिवर्तन

59. “निरंतर अनुपात के सिद्धांत” द्वारा समुद्र-जल की लवणता की गणना करने के लिए निम्नलिखित में से किस लवण को आमतौर पर ध्यान में रखा जाता है?
(A) क्लोरीन
(B) सोडियम
(C) मैग्नीशियम
(D) सल्फेट
उत्तर- (A) क्लोरीन

60. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय 2012 द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार निम्नलिखित में से किस राज्य में सड़कों का घनत्व सबसे अधिक है?
(A) त्रिपुरा
(B) पश्चिम बंगाल
(C) केरल
(D) कर्नाटक
उत्तर- (C) केरल

61. भूगोल के पिता कहे जाने वाले भूगोलवेता इरैटोस्थनीज निम्लिखित में से कहाँ का निवासी था-
(A) अरब
(B) यूनान
(C) रोमन
(D) भारतीय
उत्तर – (B) यूनान (KVS PGT 2023)

62. कोपेन के जलवायु वर्गीकरण के अनुसार उत्तर प्रदेश की जलवायु है-
(A) Aw
(B) As
(C) Amw
(D) Cwg
उत्तर – (D) Cwg (KVS PGT 2023)

63. नोकरेक राष्ट्रीय उद्यान स्थित है-
(A) मध्य प्रदेश
(B) अरुणाचल प्रदेश
(C) मेघालय
(D) असम
उत्तर – (C) मेघालय (KVS PGT 2023)


9. अतिवादी भूगोल या क्रांतिकारी उपागम / उग्र सुधारवाद / Radical Geography

          9. अतिवादी भूगोल या क्रांतिकारी उपागम / उग्र सुधारवाद

(Radical Geography)



 अतिवादी भूगोल ⇒

            अतिवादी भूगोल को उग्र सुधारवाद या अमूल्य चुल परिवर्तनवादी क्रांतिकारी उपागम के नाम से जानते है। अतिवादी भूगोल का जन्म 1960-70 ई० के दशक में USA में हुआ। भूगोल में अतिवाद का उदय मात्रात्मक क्रांति और स्थानिक विश्लेषण के विरोध में हुआ। यह साम्यवादी विचारधारा से प्रभावित है लेकिन इसका उद‌य साम्यवादी या समाजवादी देशों में न होकर पूँजीवादी देश USA में हुआ है। अतिवादी भूगोल के विचारधारा को विकसित करने में अमेरिका के क्लार्क विश्वविद्यालय और वहाँ से प्रकाशित होने वाला पत्रिका ‘एंटीपोड’ का विशेष योगदान है। व्यक्तिगत रूप से डेविड हार्वे और जे.आर. पीट जैसे भूगोलवेताओं का योगदान रहा है।

अतिवादी भूगोल

         USA में अतिवादी विचारधारा का जन्म उस समय हुआ जब अमेरिकी समाज में वियतनाम युद्ध में पराजय के कारण निराशा, सामाजिक विषमता, अन्याय, जातीय तनाव, गरीबों के प्रति सत्ताधारियों की नकारात्मक दृष्टिकोण तथा मार्क्सवाद के प्रति उदासीनता का वातावरण था। अमेरिका में वैसे भौगोलिक विचारक जिन्होंने आर्थिक विषमता, उत्पादक व्यवस्था और मानव-वातावरण संबंध के विश्लेषण करने के लिए जिस विचारधारा को जन्म दिया उसे अतिवादी भूगोल कहते हैं। अतिवादी भूगोल समय के संदर्भ में सामाजिक विषमता को दूर करने का प्रयास करता है।

            अतिवादी विचारधारा मात्रात्मक क्रांति के द्वारा प्रतिपादित सिद्धांत को सार्वभौमिक नहीं मानता है क्योंकि इसके द्वारा विकसित किये गए नियम एक निश्चित समाज को एक निश्चित आस्था को बताता है जबकि सामाजिक व्यवस्था में सामाजिक रूप से निरंतर परिवर्तन होता रहा है।

जैसे-

पाषाणकाल→नवपाषाणकाल→ सामंतवाद→ पूँजीवाद→समाजवाद→ साम्यवाद

          अतिवादी विचारधारा इसीलिए तत्कालिक सिद्धांतों एवं नियमों को एकांकी मानता है।

अतिवादी विचारधारा आचारपरक भूगोल पर प्रहार करते हुए कहते हैं कि आपको केवल मानव के व्यवहार उसके इच्छा, अनुभूति को समझकर केवल संतुष्ट नहीं होना चाहिए बल्कि मानव के समस्त व्यवहारों की समझकर समाजिक समस्याओं को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। इस तरह अतिवादी विचारधारा आचारपरक भूगोल से भिन्न हो जाता है।

         भूगोल में प्रत्यक्षवादी दर्शन ही काफी लोकप्रिय रहा है। यह दर्शन हमेशा प्रत्यक्ष रूप से किसी घटना को देखकर उसे समझने का प्रयास करता है। जबकि अतिवादी भूगोल के समर्थक परिवर्तन की बात करते हैं और समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करते हैं।

        पूँजीवादी देशों में पनपे अतिवादी भूगोल के कारण वहाँ के समाज पर जबड़दस्त प्रभाव पड़ा। इसी विचारधारा से प्रभावित होकर पूँजीवादी देशों में कई प्रकार के सामाजिक कल्याण के कार्यक्रम प्रस्तुत किए गये। उत्पादन के साधन में समाज के प्रत्येक वर्ग का हिस्सा सुनिश्चित करने हेतु कई संस्थागत एवं रचनात्मक कदम उठाये गये। जिसके कारण पूँजीवादी देशों में अमीरी एवं गरीबी जैसे सामाजिक विषमताओं में कमी आयी है। अमेरिका जैसे देशों में भी कोटा प्रणाली, आरक्षण प्रणाली जैसे संकल्पनाओं का अभ्युदय हुआ।

आलोचना

         अतिवादी विचारधारा की भी कई आधार पर आलोचना की जाती है। जैसे- अतिवादी विचारधारा किसी घटना का सामयिक विश्लेषण पर अधिक जोर देता है। अत: इसके कारण ये काफी नजदीक हो जाता है जबकि भूगोल स्थानिक विश्लेषण करने वाला विषय है।

          इसी तरह अतिवादी विचारधारा भूगोल के परम्परागत सिद्धांतों एवं विश्लेषण करने की तकनीक परित्याग कर देता है जो पूर्ण रूप में अतिशयोक्ति नहीं है।

निष्कर्ष

         निष्कर्षतः जा सकता है कि मात्रात्मक कांति, व्यावहारात्म्क क्रांति,  प्रत्यक्षवादी दर्शन, भूगोल को मानवीय समस्याओं के समाधान से दूर रखकर इसके आधार को ही समाप्त कर रहे थे लेकिन अतिवादी भूगोल ने सामाजिक समस्याओं का समाधान प्रस्तुत कर भूगोल में नई दृष्टि का सूत्रपात्र किया।


 8. अवस्थिति विश्लेषण या स्थानीयकरण विश्लेषण (Locational Analysis)

 8. अवस्थिति विश्लेषण या स्थानीयकरण विश्लेषण

(Locational Analysis)


अवस्थिति विश्लेषण (Locational Analysis)⇒

              मानव भूगोल में अवस्थिति विश्लेषण एक महत्वपूर्ण संकल्पना है जो इस तथ्य का विश्लेषण करता है कि आर्थिक कार्यों का सकेन्द्रण किस स्थान पर किया जाना चाहिए। अवस्थिति विश्लेषण में यह कहा गया है कि सामाजिक आर्थिक कार्यों का संकेन्द्रण उसी स्थान पर होता रहा है जहाँ पर भौगोलिक परिस्थितियाँ अनुकूलित होती है। सामाजिक आर्थिक कार्यों के संकेन्द्रण पर भौगोलिक कारकों के अलावे मानवीय कारकों का भी प्रभाव पड़ता है। अगर मानवीय कारकों के आधार पर किसी स्थान पर कृत्रिम रूप से सामाजिक-आर्थिक कार्यो का सकेन्द्रण किया जाता है तो वे दीर्घकालिक नहीं हो पाते हैं। ऐसे में इन कार्यों के स्थानीकरण हेतु कई भूगोलताओं ने सैद्धांतिकरण करने का प्रयास किया है। इन्हीं सम्पूर्ण गतिविधियों को स्थानीयकरण विश्लेषण कहते हैं।

                        इस प्रकार अवस्थिति विश्लेषण की अवधारणा का विकास और अनुप्रयोग भूगोल विषय में 1950 के दशक के बाद आयी मात्रात्मक क्रान्ति और स्थानिक विश्लेषण के विकास के दौरान हुआ था और इसी काल में “अवस्थिति” और “स्थान” में अंतर स्पष्ट करने पर बल काफी दिया गया था। इस अवधारणा के विकास में यी फू तुआन और पीटर हैगेट इत्यादि भूगोलवेताओं का योगदान महत्वपूर्ण रहा है।अवस्थिति विश्लेषण

             भूगोल में अब तक जितने भी स्थानीयकरण के संबंध में विचार प्रस्तुत किए गए हैं। उन्हें दो भागों में बाँट सकते

(1) द्वितीय विश्वयुद्ध के पूर्व का विश्लेषण

(2) द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद का विश्लेषण

             (1) भूगोल में द्वितीय विश्वयुद्ध के पूर्व स्थानीयकारण के संबंध में जो विचार प्रकट किये गये वे अनुभावाश्रित विधि पर आधारित थे। जैसे वॉन थ्यूनेन महोदय के कृषि अवस्थिति का सिद्धांत अपने अनुभव के आधार पर प्रस्तुत किया था। उन्होंने दक्षिण जर्मनी में किये गये अध्ययन के दौरान पाया कि नगरों का प्रभाव ग्रामीण जीवन पर पड़ता है और ग्रामीण लोग नगरों में माँग के अनुरूप ही कृषि स्थानीयकरण का कार्य करते हैं।

               इसी तरह बेबर एवं हुबर महोदय ने भी औद्योगिक स्थानीयकरण का सिद्धांत अपने अनुभव के आधार पर प्रस्तुत किया। बेबर महोस्य ने अपने औद्योगिक स्थानीयकरण के सिद्धांत में परिवहन लागत को ध्यान में रखते हुए यह विचार प्रकट किया कि न्यूनतम परिवहन लागत वाला स्थान ही अधिकतम लाभ देने वाला स्थान होता है। इसलिए न्यूनतम परिवहन लागत वाला स्थान पर ही उद्योगों की स्थापना की जानी चाहिए। उन्होंने अपने अनुभव के आधार पर बताया कि वजन ह्रास वाले उद्योग (चीनी उद्योग, कागज उद्योग) की स्थापना कच्चे माल के क्षेत्र में, वृद्धि वाले उद्योग ( बेकरी उद्योग, विस्कुट, पॉव रोटी, फ्रूट ब्रेड) की स्थापना बाजार क्षेत्र में और समभार उद्योग (वस्त्र उद्योग) की स्थापना कहीं भी की जा सकती है।

                 द्वितीय विश्वयुद्ध के पूर्व भी मात्रात्मक क्रान्ति के आधार पर ग्रामीण-नगरीप बस्ती के वितरण या अवस्थिति विश्लेषण किया है। इसमें उन्होंने बताया हैं कि जिन स्थानों पर द्वितीयक एवं तृतीयक कार्यों  का संकेन्द्रण अधिक का होता है। उस स्थान को केन्द्रीय स्थल कहा है। इसी केन्द्रीय स्थान के चारों ओर कई पदानुक्रम में षष्टकोणीय मॉडल के आधार पर ग्रामीण बस्तियों का वितरण होता है।

             (2) द्वितीय विश्व युद्ध के बाद मात्रात्मक विधि और आचारपरक विधि पर अवस्थिति विश्लेषण बड़े पैमाने पर किया जाने लगा जिनके कारण स्थानीयकारण का विश्लेषण में गत्यात्मक परिवर्तन आया। मात्रात्मक क्रांति के आगमन से भूगोल मे नवीन सिद्धांत एवं मॉडल के निर्माण का युग प्रारंभ हुआ। जैसे- गुरुत्वाकर्षण मॉडल के आधार पर ग्रामीण-नगरीय उपांत क्षेत्र, नगर प्रभाव क्षेत्र तथा नगर के अन्तर्गत विकसित होने वाले केन्द्रीय बाजार जिला का सीमांकन किया गया।

           जॉन बुश महोदय ने दूरी ह्रास मॉडल से यह बताया कि नगर केन्द्र में ज्यादा-से-ज्यादा लोग निवास करना चाहते हैं और ज्यों-2 नगर के केन्द्र से दूरी में वृद्धि होती है त्यो-2 जनसंख्या में कमी आते जाती है।

             निकटतम पड़ोसी विश्लेषण विधि के द्वारा भी बस्ती भूगोल में कई संकल्पनाएँ विकसित किए गए। सांख्यिकी विधि उपयोग कर विकसित किये गये विचारों को तीन भागों में बाँटते है जिसे (i) गुच्छेदार (ii) यत्र तंत्र और (iii) सामान्य वितरण में वर्गीकृत करते हैं।

          मात्रात्मक क्रांति के आगमन से अवस्थिति विश्लेषण में वैज्ञानिकता का आगमन तो हुआ लेकिन विश्लेषण में दृढ़ता का भी विकास हुआ। अत: इसके विरोध में आचारपरक विधितंत्र का विकास हुआ। आचारपरक विधितंत्र के आधार पर हेगर स्ट्रेन ने नव-उत्पाद विसरण का सिद्धांत, हॉटलीन, फेटर इत्यादि ने औद्योगिक स्थानीयकरण का सिद्धांत प्रस्तुत किया। इस तरह भूगोल में स्थानीयकरण के विश्लेषण हेतु कई तरह के विचार प्रस्तुत किये गए।

निष्कर्ष      

         उपर के तथ्यों से स्पष्ट है कि वर्तमान समय में सामाजिक-आर्थिक कार्यों के अवस्थिति विश्लेषण मूल रूप से मात्रात्मक एवं आचारपरक विधितंत्र पर किया जा रहा है। मात्रात्मक विधितंत्र विश्लेषण से स्थानीयकरण में सैद्धांतिकरण का विकास होता है वहीं आचारपरक क्रांति उसे व्यवहारिकता प्रदान करती है।

7. भूगोल में मात्रात्मक क्रांति का विकास / Development of Quantitative Revolution in Geography

 7. भूगोल में मात्रात्मक क्रांति का विकास




भूगोल में मात्रात्मक क्रांति का विकास⇒

भूगोल में मात्रात्मक क्र (नोट:- क्रांति ⇒ किसी भी विषय वस्तु में त्वरित परिवर्तन को क्रांति कहते है। मात्रात्मक क्रांति = परमाणीकरण)

        भूगोल में गणित एवं सांख्यिकी के तथ्यों का प्रयोग करना मात्रात्मक क्रांति कहलाता है। मात्रात्मक क्रांति का स्रोत गणित एवं सांख्यिकी जैसे विषय है। जबकि लक्ष्य प्रारंभ में केवल मानव भूगोल था। लेकिन वर्तमान में गणित एवं सांख्यिकी के तथ्यों का प्रयोग मानव भूगोल के अलावे भौतिक भूगोल और Cartography (चित्रात्मक भूगोल) में किया जाने लगा है।

    भूगोल में मात्रात्मक क्रांति का आगमन मूल रूप से विधितंत्र एवं विषय वस्तु में हुआ है। गणित एवं सांख्यिकी के तथ्यों के प्रयोग से त्वरित परिवर्तन हुआ जिसके कारण भूगोल में वैज्ञानिकता, तर्क, वस्तुनिष्ठता का आगमन हुआ। इस सम्पूर्ण गतिविधि को मात्रात्मक क्रांति से संबोधित करते हैं।

      भूगोल में मात्रात्मक क्रांति लाने का श्रेय अमेरिकी भूगोलवेता जिफ को जाता है क्योंकि इन्होंने 1949 ई. में सांख्यिकी के कोटि(क्रम) आकार सह-संबंध तकनीक का प्रयोग कर USA के नगरों का अध्ययन किया और यह निष्कर्ष निकाला कि ज्यों-2 कोटि वृद्धि होती है त्यों-2 नगरों के आकारिकी में परिवर्तन होता है। जिन क्षेत्रों में कोटि और आकार के बीच में यह संबंध पाये जाते हैं वह स्वस्थ्य आर्थिक विकास का घोतक है और जहाँ पर यह संबंध नहीं पाया जाता है वह अस्वास्थ्य आर्थिक विकास का घोतक है।

                भूगोल में गणित एवं सांख्यिकी से आयात कर जिन तकनीकों का प्रयोग किया गया उसे दो भागों में बाँटते हैं-

(1) अनुमोदनात्मक तकनीक

(2) विवरणात्मक तकनीक

        अनुमोदनात्मक तकनीक के तहत किसी सिद्धांत या परिकल्पना की जाँच करते हैं। इसके तहत सांख्यिकी में प्रयोग होने वाले Simple रिग्रेशन, लीनियर रिग्रेशन, संभाव्यता (Probablity), t- test, Chi- square, Index इत्यादि का प्रयोग करते हैं।

        विवरणात्मक तकनीक के अन्तर्गत सामाजिक आर्थिक आकड़ों को इकट्ठा किया जाता है और उसका औसत माध्य, मध्यिका, बहुलक, अपसरण, मानक विचलन इत्यादि का प्रयोग कर सार निकालने का प्रयास करते हैं।

भूगोल में मात्रात्मक क्रांति का इतिहास

       द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान हिरोशिमा और नागासाकी पर अमेरिका के द्वारा गिराये गये परमाणु बम ने सभी मानवीकी विषय के ऊपर प्रश्न चिह्न लगा दिए थे। कला क्षेत्र के विद्वान विज्ञान से भयभीत होने लगे थे। कई विश्वविद्यालयों में मानवीकी विषय में विद्यार्थियों की सीटें खाली रहने लगी। फलतः सामाजिक विज्ञान के विद्वानों ने 1949 ई० में अमेरिका के प्रीस्टन विश्वविद्यालय के प्रांगण में एक सम्मेलन बुलवाया। इस सम्मेलन में यह निर्णय लिया गया कि मानवीकी विषय के विधितंत्र को तार्किक एवं वैज्ञानिक बनाया जाय। इन विषयों में वैसे विषयवस्तु को शामिल किया जाय जो मानव के लिए उपयोगी हो।

      अगर इन उद्देश्यों को पूरा करता है तो विज्ञान से हमें डरने की आवश्यकता नहीं है बल्कि उसके तकनीक को मानवीकी विषय में प्रयोग करने की आवश्यकता है अर्थात इसी सम्मेलन के बाद अंतर विषयक अध्ययन पर अधिक जोर दिया जाने लगा। इसी अन्तर विषयक अध्ययन के फलस्वरूप भूगोल में मात्रात्मक क्रांति की शुरुआत हुई। भूगोल में इसके विकास के इतिहास को चार चरणों में बाँटकर अध्ययन करते हैं।

(1) प्रथम चरण (1950-58)

            प्रथम चरण का काल 1950- 58 ई० तक रहा। इस चरण में जिफ, नेल्सन, बेरी, हार्टशोन और बंगी जैसे भूगोलवेतओं ने गणितीय एवं सांख्यिकीय तकनीक का प्रयोग किया। प्रथम चरण में अवलोकन विधि, प्रश्नावली विधि, अनुसूची विधि और प्रतिदर्श / नमूना विधि से प्राथमिक आँकड़े इक्कठे किये जाने लगे। प्राप्त आँकड़ों को वर्गीकृत एवं सारणीकरण किया जाने लगा। माध्य, माध्यिका, बहुलक, मानक विचलन इत्यादि का प्रयोग कर प्राप्त आकड़ों का सार संग्रह निकालने का प्रयास किया गया।

(2) दूसरा चरण (1956-68 ई०)

          द्वितीय चरण में एकरमैन, बेरी, स्पीयर्स मैन और पीयरसन जैसे भूगोलवेताओं ने सांख्यिकी तकनीक का प्रयोग प्रारंभ किया। द्वितीय चरण में कोटि आकार सह संबंध रिग्रेशन, सूचकांक जैसे तकनीक का प्रयोग बड़े पैमाने पर किया गया। इन तकनीकों के प्रयोग से भूगोल के विभिन्न घटकों के बीच सहसंबंध स्थापित कर तथ्यों का विश्लेषण किया जाने लगा।

(3) तीसरा चरण (1968-78 ई०)

         तीसरा चरण में सोर्ले, हेगेट, इबान्स, इरासी, मॉर्स जैसे भूगोलवेताओं ने भौगोलिक तथ्यों की व्याख्या हेतु बहुचरण विश्लेषण विधि, नजदीकी पड़ोसी सांख्यिकी विधि जैसे तकनीक का प्रयोग हुआ।

(4) चौथा चरण (1978 के बाद से अब तक)

          चौथा चरण में भूगोल में मात्रात्मक क्रांति का प्रयोग अपने चरम अवस्था में पहुँच गया। इस चरण में भौगोलिक तथ्यों का विश्लेषण, वर्गीकरण, चित्र निर्माण करने में कम्प्यूटर, कृत्रिम उपग्रह, सुदूर संवेदन प्रणाली इंटरनेट, वायु फोटोग्राफी इत्यादि का प्रयोग किया जाने लगा। इन आधुनिक तकनीकों के माध्यम से प्राप्त किये गये आँकड़ों को विश्लेषण करने हेतु GIS (भौगोलिक सूचना तंत्र) का विकास किया गया है। ब्रिटिश भूगोलवेता डडले स्टम्प ने सही कहा है कि “वर्तमान समय में मात्रात्मक क्रांति का सुनहरा बछड़ा कम्प्यूटर है।”

भूगोल में मात्रात्मक क्रांति का महत्व / प्रभाव

          मात्रात्मक क्रांति के प्रयोग से भूगोल पर कई प्रकार के प्रभाव पड़े। जैसे:-

(1) मात्रात्मक कांति के प्रयोग से भूगोल में तार्किकता एवं वैज्ञानिकता का आगमन हुआ। इनके आगमन से भौगोलिक तथ्यों की वस्तुनिष्टता का आगमन हुआ।

(2) भूगोल में प्राथमिक आँकड़ों, संग्रहण, विश्लेषण और सार संग्रह निकला जाने लगा।

(3) मात्रात्मक क्रांति के पूर्व भूगोल का अध्ययन अनुभावाश्रित, वर्णात्मक और चित्रात्मक भा लेकिन मात्रात्मक कांति से भौगोलिक तथ्यों का अध्ययन प्रत्यक्ष रूप से किया जाने लगा। भूगोल में चित्र द्विआयामी से त्रिआयामी बनने लगे।

(4) भूगोलवेताओं में सांख्यिकी के ज्ञान होने के कारण इनकी माँग नियोजन एवं विकास कार्यों में होने लगा।

(5) सांख्यिकी के प्रयोग से भौगोलिक तथ्यों बीच सह-संबंध स्थापित कर उनका प्रदेशीकरण किया जाने लगा। जैसे- कृषि भूगोल में बीबर एवं डोई ने फसल संयोजन प्रदेश का निर्धारण किया। सांख्यिकी तथ्यों का प्रयोग कर अलीगढ़ विश्वविद्यालय के प्रो० एम.एस. सफी ने भारत के फसल संयोजन का निर्धारण किया।

(6) मात्रात्मक क्रांति के प्रयोग से भूगोल में मॉडल का निर्माण, सिद्धांतों का निर्माण और परिकल्पनाओं का निर्माण किया जाने लगा। हैगेट एवं सोर्ले को मॉडल निर्माण का चैम्पियन कहा जाता है। बेबर महोदय ने औद्योगिक स्थानीयकरण का सिद्धांत सांख्यिकी के नियमों पर ही प्रस्तुत किया था।

(7) नगरीय भूगोल में जनसंख्या भूगोल में, आर्थिक भूगोल में, परिवहन भूगोल में, आपदा प्रबंधन में, मौसम पूर्वानुमान में आज सांख्यिकी विधियों का प्रयोग बड़े पैमाने पर किया जा रहा हैं।

आलोचना

          मात्रात्मक क्रांति का कई भूगोलवेताओं ने आलोचना किया है। जैसे:-

(1) डडले स्टम्प महोदय ने कहा है कि भूगोल का अध्ययन वर्णात्मक एवं चित्रात्मक विधि से करना उपयुक्त है न कि मात्रात्मक विधि से अध्ययन किया जाना चाहिए।

(2) कुछ विद्वानों का यह भी मानना है कि मात्रात्मक क्रांति का प्रारंभ 1950 ई० से नहीं हुआ है बल्कि भूगोल में सांख्यिकी तथ्यों का प्रयोग इसके पूर्व काल से होता रहा है। हार्वे महोदय ने अपने पुस्तक Explanation in Geography में इसका आलोचना करते हुए कहा कि मात्रात्मक क्रांति अपने चरम अवस्था में पहुँच चुका है। अत: इसमें धीरे-2 ह्रास की प्रवृति प्रारंभ हो चुकी है।

(3) 1950 ई० में ‘आर्थिक भूगोल’ नामक पत्रिका USA से प्रकाशित होती थी। इस पत्रिका में बेरी महोदय ने सांख्यिकी के प्रयोग का समर्थन किया जबकि स्पेट महोदय ने आलोचना करते हुए कहा कि भूगोलवेताओं में सांख्यिकी सोच-विचार का अभाव होता है। ऐसे में अगर सांख्यिकी के कम जानकार व्यक्ति इसका प्रयोग करता है तो नाकारात्मक परिणाम आ सकते हैं।

(4) मात्रात्मक क्रांति के माध्यम से मानव के भावनात्मक पहलू, व्याहारिकतावाद, मानवतावाद, कल्याणकारी भूगोल के तथ्यों का विश्लेषण संभव नहीं है।

(5) वर्तमान समय में मात्रात्मक क्रांति वाहक कम्प्यूटर एवं इंटरनेट है। आज इनके माध्यम से सूचना प्रदूषण फैलाने का दौर प्रारंभ हो चुका है।

निष्कर्ष

           इन सीमाओं के बाबजूद मात्रात्मक क्रांति एक वैज्ञानिक विषय बना दिया है। यह उपलब्धि कुछ खामियों के बावजूद क्रान्ति के समतुल्य है।



भूगोल में मात्रात्मक क्रांति पर उत्तर लिखने का दूसरा तरीका



भूगोल में मात्रात्मक क्रांति

(Quantitative Revolution in Geography)

(नोट: क्रांति = त्वरित परिवर्तन, उत्परिवर्तन = अचानक परिवर्तन, आंदोलन = मंद परिवर्तन)

प्रारूप

1. परिचय

2. मात्रात्मक क्रांति का उद्देश्य / लक्ष्य

3. मात्रात्मक क्रांति में प्रयुक्त तकनीक

  3.1 विवराणात्मक तकनीक

  3.2 अनुमोदनात्मक तकनीक

4. मात्रात्मक क्रांति का इतिहास

5. मात्रात्मक क्रांति का प्रभाव / महत्त्व

6. आलोचना

7. निष्कर्ष

1. परिचय

         मात्रात्मक क्रांति दो शब्दों के मिलने से बना है। प्रथम-मात्रा और द्वितीय क्रांति। मात्रा का तात्पर्य गणित या सांख्यिकी ये है। जबकि क्रांति का तात्पर्य त्वरित परिवर्तन से है। अतः भूगोल में सांख्यिकी के आगमन से उसके तथ्यों में जो वैज्ञानिक एवं त्वरित परिवर्तन हुआ उस परिवर्तन को ही मात्रात्मक क्रांति कहते है।

           द्वितीय विश्व युद्ध के पूर्व भौगोलिक तथ्यों के अध्ययन की विधि परम्परागत थी जिसके तहत भौगोलिक तथ्यों का अध्ययन अनुभव और मानचित्र के आधार पर किया जाता था। लेकिन द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद मात्रात्मक क्रांति के आगमन ने भौगोलिक तथ्यों के अध्ययन की पद्धति को ही बदल दिया है। इस विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि मात्रात्मक क्रांति का स्रोत क्षेत्र गणित का उपभाग सांख्यिकी रहा है जबकि लक्ष्य क्षेत्र मानव भूगोल रहा है।

      वस्तुतः द्वितीय विश्व के दौरान हिरोशिमा और नागासाकी पर गिराया गया बम न केवल दो नगरों पर गिराया गया बम था बल्कि सम्पूर्ण मानवीय चिंतन पर किया गया अद्यात था। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद मानविकी विषय के विद्वानों ने देखा कि अगर विज्ञान चाहे तो सम्पूर्ण दृष्टि का विनाश कुछ ही क्षण में कर सकता है। इस वैज्ञानिक और तकनीकी विकास पर आधारित चिन्तव ने विश्व के सभी सामाजिक विज्ञान के समक्ष उपयोगिता पर ही प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया।

      अतः 1949 ई०  में USA के प्रीस्टन विश्वविद्यालय ने सभी मानविकी एवं वैज्ञानिक विषयों से सम्बंधित विद्वानों का सम्मेलन आयोजित किया। इस सम्मेलन में यह निर्णय लिया गया कि मानविकी विषय को विज्ञान की विषय से डरना नहीं चाहिए बल्कि सामाजिक विज्ञान के विधितंत्र में परिवर्तन लाकर उसे वैज्ञानिक तथा विश्वसनीय बनाया जाना चाहिए। इसी निर्णय का परिणाम था कि मानव भूगोल में सांख्यिकी के तकनीक के उपयोग पर जोर दिया गया और भूगोल को ‘अन्तरविषयक’ विषय बनाने का प्रयास किया गया।

         भूगोल में मात्रात्मक तकनीक का प्रयोग करने का प्रथम श्रेय अमेरिकी भूगोलवेता जे.के.जिफ को जाता है क्योंकि इन्होंने ही 1949 ई० में सांख्यिकी के ‘कोटि-आकार-सह-संबंध‘ तकनीक का प्रयोग कर यू.एस.ए. के नगरों का अध्ययन किया।

 2. भूगोल में मात्रात्मक क्रांति का प्रमुख उद्देश्य / लक्ष्य

(i) वर्णात्मक भूगोल को वैज्ञानिक बनाना।

(ii) भौगोलिक तथ्यों की वैज्ञानिक तथा तार्किक व्याख्या करना।

(iii) साहित्यिक भाषा की जगह गणितीय भाषा का उपयोग।

(iv) अवस्थिति वर्ग के बारे में परिशुद्ध कथन करना।

(vi) परिकल्पना के लिए मॉडल, नियमों तथा सिद्धांतों का सूत्रण करना।

(vii) भूगोल की क्रिया पद्धति को वस्तुनिष्ठ तथा वैज्ञानिक बनाना।

3. मात्रात्मक क्रांति में प्रयुक्त तकनीक

            मानव भूगोल में मात्रात्मक क्रांति से संबंधित अपनायी तकनीक को दो भागों में बाँटा जा सकता है-

3.1  विवराणात्मक तकनीक

      इसमें सामाजिक-आर्थिक आंकडों का संग्रह कर निष्कर्ष निकाला जाता है और उनका तुलनात्मक अध्ययन किया जाता है। यह औसत, माध्य, माध्यिका, बहुलक, अपसरण, मानक विचलन जैसे सांख्यिकीय तकनीक पर किया जाता है।

3.2  अनुमोदनात्मक तकनीक  

     इस तकनीक के द्वारा मानव भूगोल में विकसित किया गया सिद्धांत या परिकल्पना की वैज्ञानिक जाँच की जाती है। जैसे: इसके लिए सिम्पल रिग्रेशन (प्रतिगमन), लीनियर रिग्रेशन, संभाव्यता (Probability) जैसे तकनीक प्रयोग करते हैं।

4. भूगोल में मात्रात्मक क्रांति का इतिहास

            भूगोल में मात्रात्मक क्रांति का विकास अचानक नहीं हुआ बल्कि कई अवस्थाओं से गुजरने के बाद हुआ है।

चरण काल प्रयुक्त सांख्यिकीय तकनीक प्रमुख विद्वान एवं एजेंसी
पहला 1950-58 नमूना विधि, मानक विचलन, माध्य, माध्यिका, बहुलक बेरी, बंगी, हार्टशोन, जिफ, हार्वे, एकरमैन एवं नेल्सन
दूसरा 1958-68 को-रिलेशन, रिग्रेशन, सूचकांक बेरी, स्पीयर्समैन, पीयर्सन
तीसरा 1968-78 बहुचर विधि, विश्लेषण विधि, नजदीकी पड़ोसी सांख्यिकी विधि चोर्ले, हैगेट, इबान्स, मोसर, एल.सी.किंग, इराशी, स्कॉट
चौथा 1978 से अबतक कम्प्यूटर, GIS, एरियल फोटोग्राफी पर आधारित तकनीक IRS नासा, इसरो, यूरोपीय स्पेस एजेंसी

5. मात्रात्मक क्रांति का प्रभाव एवं महत्व

         भूगोल में मात्रात्मक क्रांति के आगमन से कई प्रकार के प्रभाव पड़े। जैसे:

(i) भूगोलवेता स्वंय प्राथमिक आंकड़ों का संग्रहण तथा उसका विश्लेषण करने लगे।

(ii) मानव भूगोल में कई नवीन सिद्धांत, परिकल्पना एवं मॉडल का विकास किया गया।

(iii) मात्रात्मक क्रांति ने मानव भूगोल को एक वैज्ञानिक विषय बना दिया।

(iv) भूगोलवेताओं में सांख्यिकी का ज्ञान होने के कारण नियोजन के कार्यों में इनकी माँग बढ़ गयी।

(v) मानचित्र के गुणों एवं स्तर में वृद्धि हुई।

(vi) प्रदेश एवं नगरों का वर्गीकरण, प्रादेशिकरण एवं नियोजन में वैज्ञानिकता का आगमन हुआ।

(vii) जटिल आर्थिक-सामाजिक चरो विश्लेषण कर भूगोल में भविष्यवाणी की जाने लगी।

(viii) भूगोल में ‘रैंक साइज’ नियम के आधार पर जनसंख्या भूगोल, नगरीय भूगोल का अध्ययन किया गया।

(ix) स्टैण्डर्ड डिविएशन के आधार पर बीबर एवं डोई ने फसल संयोजन, केन्द्रीय स्थल सिद्धांत और कई स्थानीयकरण के सिद्धांत विकसित किये गये।

6. आलोचना

        मात्रात्मक  क्रांति ही आलोचना कई भूगोलवेताओं द्वारा की गई है। जैसे:-

(i) स्पेट महोदय ने कहा कि एक भूगोलवेता में सांख्यिकी पर आधारित सोच और विचार का अभाव होता है। ऐसी स्थिति में अगर वह प्रयोग करता है तो परिणाम गलत आ सकते हैं।

(ii) डडले स्टाम्प महोदय ने इसका आलोचना करते हुए कहा है कि “कम्प्यूटर मात्रात्मक क्रांति का सुनहला बछड़ा है।”  पुन: उन्होंने कहा कि भूगोल के परम्परागत तकनीक ही सर्वोत्तम तकनीक है।

(iii) व्यावहारवादियों ने इसका आलोचना करते हुए कहा है कि मात्रात्मक क्रांति भावात्मक पहलू एवं मानवीय मूल्यों के विश्लेषण करने में सक्षम नहीं हैं।

(iv) हार्वे महोदय ने कहा कि मात्रात्मक क्रांति अपने चरम अवस्था को प्राप्त कर चुका है। अब धीरे-2 इसमें ह्रास की प्रवृत्ति देखी जा रही है।

7. निष्कर्ष

           उपरोक्त सीमाओं के बावजूद मात्रात्मक क्रांति ने मानव भूगोल को एक वैज्ञानिक विषय बनाने में अभूतपूर्व योगदान दिया है। अवः भूगोल में विकसित अन्य चिन्तन को इसकी आलोचना न कर इसके विश्लेषणात्मक क्षमता को देखा जाना चाहिए।

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