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अध्याय-5 बिन पानी सब सून

बिहार बोर्ड वर्ग-7 वाँ भूगोल प्रश्नोत्तर 

अध्याय-5 बिन पानी सब सून


अध्याय-5 बिन पानी सब सून

अभ्यास के प्रश्नोत्तर

i. सही विकल्प पर सही (✓) का निशान लगाएँ-

1. पृथ्वी पर जलमंडल का हिस्सा है:
(क) 51
(ख) 41
(ग) 71
(घ) 29
उत्तर- (ग) 71

2. मुम्बई किस सागर के किनारे स्थित है:
(क) हिन्द महासागर
(ख) अरब सागर
(ग) आकर्टिक महासागर
(घ) फतेह सागर
उत्तर- (ख) अरब सागर

3. चन्द्रमा के गुरुत्वाकर्षण से जल ऊँचाई की ओर बढ़ता है। यह स्थिति कहलाती है:
(क) भाटा
(ख) ज्वार
(ग) ग्रहण
(घ) तरंगे
उत्तर- (ख) ज्वार

4. इनमें से कौन झील है:
(क) काला सागर
(ख) लाल सागर
(ग) फतेह सागर
(घ) अरब सागर
उत्तर- (ग) फतेह सागर

ii. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

1. पानी के कौन-कौन से स्रोत हैं? सबसे बड़ा स्रोत कौन-सा है? उसका उपयोग क्या है?
उत्तर- पानी के निम्नलिखित स्रोत हैं:-

⇒ भूमि के अन्दर का जल जिसे हम कुआँ या हैण्ड पम्प द्वारा प्राप्त करते हैं

⇒ वर्षा से प्राप्त जल

⇒ नदियाँ

⇒ पहाड़ों पर के बर्फ, जो गल कर पानी बनते हैं और नदियों में पहुँच जाते हैं।

⇒ तालाब

⇒ झरना

⇒ समुद्र।

         पानी का सबसे बड़ा स्रोत समुद्र है। इसका उपयोग है कि उसमें बड़े-बड़े जहाज चलाकर उससे देश-विदेश से व्यापारिक सामान मंगाया और भेजा जाता है। समुद्र के जल से नमक बनाते हैं। समुद्र जल में मछलियाँ मिलती हैं, जो मछुआरों को रोजगार और मांसाहारियों को भोजन देती हैं। समुद्र में शंख, सीपी, कौड़ी आदि-आदि अनेक सामान मिलते हैं। सीपी से मोती मिलता है। मूंगा भी समुद्र से ही मिलता है।

2. जमीन के नीचे का जल स्तर दिन-प्रतिदिन कम होता जा रहा है। इसे बनाये रखने के लिये आप क्या-क्या कर सकते हैं?
उत्तर- जमीन के नीचे जलस्तर को बनाये रखने के लिए हम गाँव के आस-पास तालाब और गड्ढा बनाएँगे। उसमें एकत्र जल में मछली पालन करेंगे और जरूरत के अनुसार सिंचाई भी करेंगे। इसी का पानी रिस-रिस कर जमीन में जाता रहेगा और नीचे का जल-स्तर बना रहेगा।

      वर्षा जल को एकत्र कर पाइपों के सहारे जमीन के अन्दर तक भेजा जा सकता है। इससे जलस्तर बना रहेगा। लेकिन यह काम सबको करना होगा।

3. आप अपने दैनिक जीवन में जल का कहाँ-कहाँ एवं कितना उपयोग करते हैं? सूची बनाइए। इनमें कहाँ-कहाँ मितव्ययिता बरतकर इस उपयोग को कम कर सकते हैं?
उत्तर- अपने दैनिक जीवन में जल के उपयोग का सूची-

⇒ सबेरे शौच में- 7 लीटर

⇒ स्नान में- 15 लीटर

⇒ कपड़ा साफ करने में- 30 लीटर

⇒ पीने में- 6 लीटर

⇒ संध्या शौच में- 7 लीटर

         इनमें से हम नहाने, कपड़ा साफ करने में कुछ बचत कर सकते हैं। इस सभी पानी को बेकार नहीं जाने देंगे। इसको किसी बर्तन में एकत्र कर उससे फुलवारी की सिंचाई करेंगे, या घर की धुलाई करेंगे।

4. पाठ्यपुस्तक के पृष्ठ 40 पर दिये गये चित्रों में से कौन-कौन सी आदत सही और कौन-कौन सही आदत गलत है और क्यों?
उत्तर- चित्र में लड़का बाल्टी में पानी निकाल कर नहा रहा है। यह अच्छी आदत है क्योंकि इससे पानी की बर्बादी नहीं होती।

        दूसरे चित्र में नल को खोल कर छोड़ दिया गया है। बाल्टी में पारी भर कर बेकार बह रहा है। यह आदत गलत है, क्योंकि पानी की बर्बादी हो रही है।

        तीसरे चित्र में लड़का नल को खोल कर ब्रश कर रहा है और पानी बेकार गिरा रहा है। यह आदत गलत है, क्योंकि पानी बर्बाद हो रहा है।

         नीचे चौथे चित्र और पाँचवें चित्र में भी लड़का बाल्टी में पानी लेकर नहा रहा है और एक लड़का लोटा में पानी लेकर दातून कर रहा है। ये दोनों आदतें अच्छी हैं, क्योंकि इन दोनों प्रक्रमों में पानी की बचत हो रही है।

5. यदि आपके घर में दो दिनों तक पानी न रहे तो सोचिये और सूची बनाइए कि आपको क्या-क्या परेशानियाँ होंगी?
उत्तर- सबसे पहले तो मुझे शौच की परेशानी होगी। उन दोनों दिन हम नहा भी नहीं पाएंगे। भोजन बनाने के लिए कहीं दूर कुएँ या हैंडपंप से पानी लाना पड़ेगा। उसी पानी से बरतन भी साफ किया जायेगा। कुल मिला-जुलाकर काफी कठिनाई होगी।

6. जल के वितरण को स्पष्ट कीजिए। जल का संरक्षण आवश्यक है, कैसे और क्यों?
उत्तर- पृथ्वी पर जल विचित्र रूप में वितरीत है। लगभग 71% जल तो समुद्र अपने गर्भ में रखे हुए है। यह जल न तो कृषि के काम आता है और न ही पीने के। पीने योग्य जल केवल छत्रक, पहाड़ों पर के बर्फ, भूमिगत जल, झील, नदियाँ, वायुमंडल के जल से कृषि कार्य तो होता ही है, पीने के काम भी आता है।

         ये ही जल मानवोपयोगी हैं। लेकिन इनका दोहन आसान नहीं। भूमिगत जल को कुआं खोद कर या हैंड पंप धंसा कर पानी निकालते हैं। वायुमंडल के जल के लिये बादल बनने, फिर वर्षा होने तक प्रतीक्षा करनी पड़ती है। छत्रक और पहाड़ों पर के बर्फ गर्मी आने पर ही गलते हैं और नदियों के माध्यम से हम तक पहुँचते हैं।

          नदियाँ भी हर गाँव में नहीं होती और उनसे भी जल निकालकर हर गाँव तक पहुँचाना एक कठिन कार्य है। सबसे आसानी से प्राप्त होनेवाला जल भूमि के अन्दर का जल है। तालाब का जल भी उपयोग करना आसान होता है। अतः हमें इन्हीं जलों को संरक्षित करना चाहिए। भूमि के अन्दर जल की कमी न होने पाये या फिर बढ़ता जाय इसके लिए वर्षा जल को किसी तरकीब से भूमि के अन्दर तक पहुंचा दिया जाय।

      छत पर के वर्षा जल को पाइपों के सहारे भूमि के जल स्तर तक पहुँचा सकते हैं या तालाब और गड्ढों में जल एकत्र करेंगे जो धीरे-धीरे रीस-रीस कर भूमि के अन्दर जाते हैं। यदि जल एक बार समाप्त हो जाय तो बहुत-बहुत दिनों तक प्रतीक्षा के बाद जल प्राप्त होता है। इसी कारण जल का संरक्षण आवश्यक है।

7. प्रमुख महासागरों के नाम विश्व के नक्शे पर दर्शाइए।
उत्तर- विश्व में मुख्यतः चार महासागर हैं:

(क) हिन्द महासागर

(ख) प्रशान्त महासागर

(ग) अटलांटिक महासागर तथा

(घ) आर्कटिक महासागर

बिन पानी सब सून

विश्व के प्रमुख महासागरों के नाम

8. भारत में मीठे पानी की झीलें कहाँ-कहाँ हैं? पता कीजिए कि ये किस राज्य में अवस्थित हैं?
उत्तर- भारत में मीठे पानी की झीलें निम्नलिखित हैं:

(क) डल झील– श्रीनगर (जम्मू कश्मीर)

(ख) नैनी झील– नैनीताल (उत्तराखंड)

(ग) काँवर झील– बेगूसराय (बिहार)

(घ) बरैला झील– वैशाली (बिहार)

        इसके अलावा बुलर झील, पिछोला झील, लूनर झील, कोलरू झील, फतेह सागर झील आदि मीठे पानी की झीलें हैं।

9. ज्वार-भाटा क्या है? ये किस प्रकार उत्पन्न होते हैं?
उत्तर- समुद्र का पानी जब ऊपर उठे और तटवर्ती भूमि को डूबो दे तो इसे ज्वार कहते हैं। फिर यह समुद्र जल कम होकर पीछे लौट जाय तब इसे भाटा कहते हैं। यह प्रतिदिन होता है। पहले ज्वार उठता है और बाद में भाटा होता है।

            सूर्य और चन्द्रमा के गुरुत्वाकर्षण के कारण महीना में दो बार ज्वार-भाटा आता जाता है। अर्द्ध मासिक ज्वार ऊँचा होता है, जिसके बल पर बड़े-बड़े जहाज आंतरिक पत्तनों तक पहुँच जाते हैं। फिर वह भाटा के समय लौटकर समुद्र में चले जाते हैं।

10. जल-चक्र किसे कहते हैं?
उत्तर- जल-चक्र क्रिया हमारे वायुमंडल एवं पृथ्वी तंत्र की महत्वपूर्ण विशेषता है। पृथ्वी पर अवस्थित जल का वाष्प बनना, वाष्प से बादल बनना और पुन: वर्षा के रूप में बरसकर पृथ्वी पर पहुँचकर जल बनना आदि क्रिया को जल-चक्र कहते हैं। जल-चक्र का प्रक्रम सदैव चलते रहता है।

बिन पानी सब सून

जल-चक्र

11. समुद्र के जल में तैरना मुश्किल है। क्यों?
उत्तर- समुद्र के जल में हमेशा तरंगे उठती और गिरती रहती हैं। ऐसी स्थिति में तैराक अपने को सम्भाल नहीं पाता। अपने को संभालने की कोशिश में वह थक जाता है और कभी-कभी इसमें डूब भी जाता है। इसीलिये कहा गया है कि समुद्र के जल में तैरना मुश्किल है।

12. समुद्र का जल खारा होता है। क्यों?
उत्तर- समुद्र का जल इसलिए खारा होता है, क्योंकि इसके एक लीटर पानी में 35 ग्राम नमक होता है। इसी कारण यह पानी पीने के काम नहीं आता। इसमें नमक की मात्रा बढ़ने का कारण है कि नदियाँ इसमें विभिन्न पदार्थों को पहुँचाते रहती हैं, जिनमें कि नमक भी होता है। इधर समुद्र में वाष्पीकरण बराबर होते रहता है। इस कारण पानी तो उड़ जाता है और नमक एकत्र होते रहता है। यह प्रक्रम लाखों-लाख वर्ष से हो रहा है। फलतः समुद्र में पर्याप्त नमक एकत्र हो गया है।

13. भूगर्भीय जलस्तर में कमी आ रही है। क्यों?
उत्तर- विभिन्न कल-कारखानों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। इन कारखानों में जल की खपत बढ़ती जा रही है। नगरों में पाइपों द्वारा जल का वितरण होता है। लापरवाही से नल को खुला छोड़ देते हैं। जहाँ एक लीटर जल का उपयोग करते हैं, वहीं 10 लीटर बेकार बहा देते हैं। पहले जहाँ एक लोटा जल से शौच कर्म पूरा हो जाता था, वहीं अब फ्लश के कारण 5 से 10 लीटर तक जल खर्च करना पड़ता है। इधर भूगर्भीय जल का उपयोग तो बढ़ा लेकिन भू-गर्भीय जल के स्तर को बचाये रखने या ऊपर करने का प्रयत्न नहीं हुआ। यही कारण हैं कि भूगर्भीय जल में कमी आ रही है।

14. वाटर हार्वेस्टिंग कैसे करेंगे?
उत्तर- वर्षा के पानी को एकत्र कर किसी प्रक्रम द्वारा जमीन के अन्दर पहुँचाकर हम ‘वाटर हार्वेस्टिंग’ कर सकते हैं। वर्षा जल को छतों पर एकत्र कर पाइपों के सहारे जमीन में जलस्तर तक पहुँचाया जा सकता है। गाँवों में गड्ढा, तालाब आदि खोद कर उसमें वर्षा जल एकत्र करेंगे। इससे धीरे-धीरे रिसकर पानी जलस्तर तक पहुँचता रहेगा।

15. आप फुटबॉल के खिलाड़ी हैं, क्रिकेट खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर कहते हैं कि पानी बचाइए। क्या आप उनकी बात मानेंगे और क्यों?
उत्तर- हाँ, हम मानेंगे, क्योंकि यह सबके हित की बात है।

16. ज्वार-भाटा से क्या-क्या लाभ और नुकसान हैं। सूची बनाकर कक्षा में प्रदर्शित कीजिए।
उत्तर-
ज्वार-भाटा से लाभ-

⇒ मछलियाँ तट के निकट आ जाता है।

⇒ शंख सोपी, कौड़ियां तट के निकट आ जाता है।

⇒ आंतरिक पत्तनों तक जहाज आ जाता है।

ज्वार-भाटा से नुकसान-

⇒ लोगों के सामान बहा ले जाती हैं।

⇒ आर्थिक नुकसान की आशंका मिलती हैं।

⇒ कभी-कभी अनजान लोग बह जाते हैं आ जाते हैं।

17. पानी के उपयोग से संबंधित अच्छी आदतों संबंधी अखबार को इकट्ठा कीजिए और स्क्रैप बक बनाकर कक्षा में प्रदर्शित कीजिए।
उत्तर- छात्र स्वयं करें।


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अध्याय-7  जीवन का आधार पर्यावरण

बिहार बोर्ड वर्ग-7 वाँ भूगोल प्रश्नोत्तर 

अध्याय-7 जीवन का आधार पर्यावरण


अध्याय-7 जीवन का आधार पर्यावरण

अभ्यास के प्रश्नोत्तर

i. सही विकल्प पर सही (✓) का निशान लगाएँ।

1. जल प्रदूषण हो रहा है:
(क) पौधो के कटाव से
(ख) वाहन चलाने से
(ग) पानी पीने से
(घ) पानी में दूषित पदार्थ मिलने से
उत्तर- (घ) पानी में दूषित पदार्थ मिलने से

2. पानी की शुद्धता हो सकती है:
(क) मच्छर पालने से
(ख) तोता पालने से
(ग) बत्तख पालने से
(घ) मछली पालने से
उत्तर- (घ) मछली पालने से

3. बढ़ती जनसंख्या के कारण हो रहा है
(क) वृक्षों का तेजी से कटाव
(ख) भवनों का निर्माण
(ग) आधारभूत संरचना का निर्माण
(घ) इनमें सभी
उत्तर- (घ) इनमें सभी

4. पर्यावरण संरक्षण के लिए किया जाना चाहिए:
(क) खूब पौधे लगाना
(ख) गंदे जल की उचित निकासी का प्रबंध
(ग) गाड़ियों का कम उपयोग
(घ) इनमें सभी
उत्तर- (घ) इनमें सभी

अध्याय-7 जीवन का आधार पर्यावरण

ii. खाली जगहों को भरिए।

(1) कार्बन मोनोआक्साइड, कार्बन डाइआक्साइड गैसें वायु प्रदूषण पैदा करता है।

(2) ध्वनि की तीव्रता को डेसिबल में मापा जाता है।

(3) सोंस/ डॉल्फिन को संरक्षित राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया गया है।

जीवन का आधार पर्यावरण

सोंस/ डॉल्फिन 

अध्याय-7 जीवन का आधार पर्यावरण

iii. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

1. वृक्षों की संख्या-वृद्धि के लिए आप क्या-क्या कर सकते हैं?
उत्तर- वृक्षों की संख्या-वृद्धि के लिए हमें संकल्पबद्ध होना पड़ेगा। हमें संकल्प लेना होगा कि प्रत्येक वर्ष हम कुछ-न-कुछ वृक्ष अवश्य लगायेंगेऔर उसकी देखभाल करेंगे, बहुत नहीं तो कम-से-कम वर्ष में 5 वृक्ष। फलदार वृक्ष हो तो बहुत अच्छा, पत्तेदार वृक्ष तो पर्यावरण के लिए प्राण माने जाते हैं। हम न तो वृक्ष काटेंगे और न किसी को काटने देंगे। पशुओं से रक्षा के लिए हम वृक्षों की घेराबन्दी कर देंगे।

2. नदियों के जल को स्वच्छ बनाने के लिए आप क्या-क्या कर सकते हैं?
उत्तर- नदियों के जल को स्वच्छ रखने के लिए हम गाँव-नगर के नाले-नलियों को नदियों तक पहुँचने के पहले ही रोक कर गन्दे जल की सफाई करके नदियों में छोड़ेंगे। नदी तट पर अवस्थित कारखानों पर दबाव डालेंगे कि कारखानों के कचरा की सफाई कर ही उसके जल को नदी में छोड़ें। मृत पशुओं के शव को नदी में नहीं बहाने देंगे। इस काम के लिए एक संगठन खड़ा करना होगा और नदी तट के सभी गांवों में उसकी शाखाएँ संगठित करनी होंगी।

3. उन क्रियाकलापों की सूची बनाइए जिनसे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है?
उत्तर- वे क्रियाकलाप निम्नांकित हैं जिनसे पर्यावरण को नकसान पहँचता है:-

⇒ खनिज ईंधनों से चलने वाली सवारियों के साधनों से निकलने वाले धुएँ से।

⇒  खनिज कोयला जलाने वाले कल-कारखानों से निकले धुएँ से।

⇒ आवाज करनेवाले कारखानों तथा मोटर-वाहनों के कर्कश हॉर्न की आवाज से।

⇒ पेड़-पौधों की अंधा-धुंध कटाई से।

⇒ नदी, तालाब, कुआँ आदि के जल को गंदा करने से।

⇒ पॉलीथीन के उपयोग से।

⇒ मरे हुए जानवरों को खुले वातावरण में फेंकने से।

4. पॉलीथीन के विकल्प क्या-क्या हो सकते हैं?
उत्तर- रद्दी कागज के ठोंगा के साथ जूट के थैला, कपड़े का थैला या इसी प्रकार किसी प्रकार के थैला पॉलीथीन के विकल्प हो सकते हैं।

5. पता कीजिए कि कितने घरों का बेकार पानी बाहर गली या सड़क पर गिरता है। कितने घरों का पानी सोख्ता गड्ढे में गिरता है?
उत्तर- मेरे गाँव के किसी भी घर का पानी गली या सड़क पर नहीं गिरता। सभी ने कोई-न-कोई व्यवस्था कर रखी है। गली में जो घर हैं उनका पानी नाली में गिरता है। नाली का पानी मुख्य सड़क के बड़े नाले में गिरता है, जो गाँव के बाहर दक्षिण में अवस्थित एक गड्ढे में एकत्र होता है जो कुछ घर नाली से सम्बद्ध नहीं हैं, उन्होंने सोख्ता गड्ढा बना रखा है और घर का पानी उसी में गिराते हैं।

6. शहरी एवं ग्रामीण पर्यावरण में क्या-क्या अंतर दिखाई पड़ते हैं?
उत्तर- शहरी पर्यावरण दमघोंटू रहता है, जबकि गाँव का पर्यावरण खुला-खुला होता है। शहरों में पेड़-पौधों की कमी होती है जबकि गाँवों में अपेक्षाकृत अधिकता है। शहरों में छोटे-बड़े वाहनों की अधिकता है तो वहीं गाँवों में खनिज तेल (पेट्रोल, डीजल) चालित वाहन एक-दो ही दिखाई पड़ते हैं। गाँवों में सायकिल, बैलगाड़ा, टमटम ही अधिक दिखते हैं।

7. प्रदूषण के क्या कारण हैं? इनका हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर- प्रदूषण के कारण- अधिक भीड़-भाड़ में पेट्रोल-डीजल चालित वाहन चलाने से उनके द्वारा निकले धुएँ से वायु प्रदूषण होता है। मशीनों, वाहनों, हॉर्न, लाउडस्पीकरों द्वारा निकले कर्कश आवाज से ध्वनि प्रदूषण होता है। नदियों में गन्दगी मिलाने, तालाबों में कपड़ा साफ करने और पशुओं को नहलाने, कुआँ के निकट कचड़ा एकत्र करने से जल प्रदूषण होता है।

प्रदूषण का हमारे जीवन पर प्रभाव- वायु प्रदुषण से श्वास रोग होता है, जबकि ध्वनि प्रदूषण से कान की बीमारी होती है और कभी-कभी बहरेपन का शिकार भी होना पड़ता है। जल प्रदूषण से पेट की बीमारियाँ होती हैं। खासकर डायरिया का प्रकोप बढ़ता है।

8. हम ग्लोबल वार्मिग को कैसे कम कर सकते हैं?
उत्तर- ग्लोबल वार्मिंग अर्थात भूमंडलीय तापन को कम करने के लिए हमें अपनी सुविधाओं में कटौती करनी होगी। जेनरेटर, फ्रीज, ए.सी., खनिज तेल (पेट्रोल, डीजल) चालित वाहनों का उपयोग कम करना होगा। हमें वे सब उपाय अपनाने पड़ेंगे, जिनसे ओजन परत की क्षति न हो और सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणें पृथ्वी तक नहीं पहुँच पाएँ।


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अध्याय-6 हमारा पर्यावरण

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अध्याय-6 हमारा पर्यावरण


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अभ्यास के प्रश्नोत्तर

i. सही विकल्प चुने-

(1) इनमें कौन सी प्राकृतिक पर्यावरण की वस्तु है।

(क) पुल

(ख) मकान

(ग) जल

(घ) सड़क

उत्तर- (ग) जल

(2) पर्यावरण कितने प्रकार का होता है?

(क) दो

(ख) तीन

(ग) चार

(घ) अनगिनत

उत्तर- (क) दो (प्राकृतिक और मानव निर्मित पर्यावरण)

(3) पृथ्वी के चारों ओर क्या है?

(क) वायु

(ख) जल

(ग) पर्यावरण

(घ) सड़क

उत्तर- (ग) पर्यावरण

ii. खाली जगहों को भरिए-

(1) पेड़-पौधे एवं जीव मिलकर  जैव पर्यावरण बनाते हैं।

(2) पेड़-पौधे जीव-जन्तु जैव मंडल  के अंग हैं।

(3) मनुष्य ने अपनी आवश्यकता की पूर्ति के लिए चीजों को बनाया है।

iii. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

1. पर्यावरण किसे कहते हैं?
उत्तर- हमारे चारों ओर पाए जाने वाले प्राकृतिक एवं मानवीय दशाओं के आवरण को पर्यावरण कहते है। अर्थात हमारे आस-पास जो भी दृश्य और अदृश्य वस्तुएँ हैं, इन सभी को मिलाकर बनने वाले अन्तर्जाल को पर्यावरण कहते हैं। नदी, पहाड़, जंगल, जीव-जंतु, घर, सड़क, पुल, कल-कारखाने आदि दृश्य वस्तुएँ हैं। वायु, मानवीय रीति-रिवाज, परम्पराएँ, आदतें आदि अदृश्य वस्तुएँ हैं। इन सभी को मिलाकर पर्यावरण का निर्माण होता है।

2. पर्यावरण कितने प्रकार के होते हैं? वर्णन कीजिए।
उत्तर- पर्यावरण मुख्यत: दो प्रकार के होते हैं-

(क)  प्राकृतिक पर्यावरण तथा

(ख) मानव निर्मित पर्यावरण।

(क) प्राकृतिक पर्यावरण- प्राकृतिक पर्यावरण के अंतर्गत नदी, पहाड़, जंगल, जैव मंडल आदि आते हैं। जैव मंडल में सभी जीव-जन्तुओं को रखा गया है।

(ख) मानव निर्मित पर्यावरण- छोटे-बड़े घर और भवन, कल-कारखाने, कृषि से संबंधित उपकरण, कुआँ, तालाब, सड़क, पुल, पुलिया, गली-कुची आदि मानव निर्मित पर्यावरण है।

3. स्थलमंडल, जलमंडल एवं वायुमंडल किसे कहते हैं?
उत्तर- स्थलमंडल- भूमि का वह भाग, जिस पर जीव-जंतु रहते हैं। जैसे- मकान, पेड़-पौधे, पहाड़, पठार, मैदान और खेत-खलिहान आदि को स्थलमंडल कहते हैं। 

जलमंडल- सागर, महासागर, झील, नदी, कुआँ, तालाब, बादल, वर्षा आदि सभी मिलकर जलमंडल का निर्माण करते हैं।

वायुमंडल- जिस गैसीय आवरण से पृथ्वी घिरी हुई है उसे वायुमंडल कहते हैं। इनमें मुख्य गैसे हैं- नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड। ऑक्सीजन को मनुष्य सॉस में लेता है तथा कार्बन डाइऑक्साइड से पौधे अपना भोजन बनाते हैं।

4. सांस्कृतिक पर्यावरण के तहत कौन-कौन सी बातें आती हैं?
उत्तर- समाज में तरह-तरह के रीति-रिवाज, परम्पराएं, उत्सव आदि देखने को मिलते हैं। शादी-ब्याह के अवसर पर खुशियों में शरीक होना, छोटों को प्यार एवं बड़े-बुजुर्गों का सम्मान ये सभी हमारी सांस्कृतिक पर्यावरण के अंग हैं। मुलाकात होने पर अभिवादन के तरीके, खुशियों को व्यक्त करने के तरीके, शोक प्रकट करने के भाव, पर्व-त्योहारों पर गाए जाने वाले मंगलगीत, पहनावा, विशेष प्रकार के पकवान ये सब संस्कृति की पहचान है। यही सब मिलकर सांस्कृतिक पर्यावरण का निर्माण करते है।

       वृक्ष-पूजा, कुआँ पूजा, गंगा पूजन, सूर्य को जल अर्पण आदि सांस्कृतिक पर्यावरण में ही आते हैं। जिन प्राकृतिक साधनों से हमें लाभ पहुँचता है उन सभी को आदर देने के लिये हमारे पूर्वजों ने किसी-न-किसी रूप में उन्हें पूजना आरम्भ कर दिया।

5. मानव निर्मित पर्यावरण के कारण प्राकृतिक पर्यावरण को नुकसान पहुंचा है। कैसे?
उत्तर- मानव अपने लाभ और आराम के लिए अनेक प्रकार के कार्य करता है। वह मकान बनाता है, सड़क बनाता है, कारखाने बनाता है, आवागमन के साधन बनाता है। इन सबको संचालित करने के लिए खनिज इंधनों की आवश्यकता होती है। खनिज निकालने में प्राकृतिक पर्यावरण को नुकसान पहुँचता है।

          भवन और कारखाने तथा सड़क बनाने के लिए पत्थर की गिट्टी की आवश्यकता पड़ती है। सीमेंट बनाने के लिए चूना-पत्थर और विभिन्न खनिजों की आवश्यकता पड़ती है। पत्थर गिट्टी के लिए पहाड़ तोड़े जाते हैं। इस प्रकार इन सभी कार्यों से पर्यावरण को नुकसान पाएँचता है।

6. किन घटनाओं से सांस्कृतिक पर्यावरण को क्षति होती है?
उत्तर- आज यह प्रथा-सी चल गई है कि पढ़-लिखकर अपना गृह गाँव छोड़कर लोग अन्यत्र नौकरी पर चले जाते हैं। वहाँ विभिन्न स्थानों और परंपरा रिवाजों वाले लोग रहते हैं। उनके रहन-सहन और खाने-पीने में भी समानता नहीं रहती। अत: पड़ोसी होकर भी व्यक्ति एक-दूसरे के पर्व-त्योहार में हिस्सा नहीं ले पाता और इधर अपने गाँव-नगर के त्योहार तो छूट ही जाते हैं। इन्हीं कारणों से सांस्कृतिक पर्यावरण को क्षति होती हे।

7. आपके पास कौन-सा पारितंत्र है? चित्र बनाकर किसी एक का वर्णन करें।
उत्तर- हमारे पास स्थलीय पारितंत्र है। इस पारितंत्र में नदी, पहाड़, पेड़-पौधे, सड़क, घर, विद्यालय, आवागमन के साधन, कुआँ, चापाकल आदि हैं। इसमें खेत-खलिहान भी शामिल हैं जहाँ से हमें अनाज और सब्जियाँ मिलती है। स्थलीय पारितंत्र का चित्र निम्नांकित है:-

हमारा पर्यावरण

स्थलीय पारितंत्र

8. हम किन उपायों को अपनाकर पानी के खर्च को कम कर सकते हैं?
उत्तर- पानी का सही उपयोग करके ही हम पानी के खर्च को कम कर सकते हैं। हमें इसका अपव्यय नहीं होने देना चाहिए।

9. पर्यावरण को नुकसान पहुँचाकर हम अपना ही जीवन संकट में डाल रहे हैं। कैसे?
उत्तर- हम कभी-कभी अनजाने में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं और कभी-कभी हम जान-बूझ कर भी पर्यावरण को नुकसान पहुंचा देते हैं। हम कभी गन्दी बाल्टी को कुएँ में डाल देते हैं। गाँव या शहर की नालियों को नदी में मिला देते हैं। इससे नदी जल गंदा हो जाता है। गन्दे कएँ और गन्दी नदी का पानी पी कर हम स्वयं बीमार हो जाते हैं। विभिन्न कारगुजारियों से हम वायु को दूषित कर देते हैं और हम ही उस वायु में सांस लेते हैं और बीमार पड़ जाते हैं। इस प्रकार हम देखते हैं कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचा कर हम अपना ही जीवन संकट में डाल लेते हैं।

iv. प्रातःकालीन बाल सभा में चर्चा कीजिए-

1. पर्यावरण संरक्षण- हमें हर हाल में पर्यावरण को संरक्षित रखना चाहिए। शुद्ध और साफ पर्यावरण में ही हम या हमारा समाज स्वस्थ रह सकता है। अतः सबको स्वस्थ रखने के लिए हमें पर्यावरण संरक्षण करना ही होगा।

2. वृक्षारोपण- आजकल बड़ी तेजी से पेड़ों की कटाई हो रही है। घर बनवाने और फर्निचर तथा जलावन के लिए लकड़ियों की आवश्यकता बढ़ चली हे। इस कारण वायुमंडल में कार्बन डाईऑक्साइड की मात्रा बढ़ने लगी है। इस पर रोक लगाने के लिए हमें वृक्षारोपण पर जोर देना चाहिए।

3. कटता जंगल-घटता जीवन- जैसे-जैसे जंगल कटते जा रहे हैं वैसे-वैसे कार्बन डाइऑक्साइड और ऑक्सीजन का संतुलन बिगड़ने लगा है। इससे हमें एक तो ऑक्सीजन की कमी हो रही है और दूसरी ओर वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ने लगी है। इन दोनों बातों का कुप्रभाव हमारे स्वास्थ्य पर पड़ने लगा है। इससे औसत आयु वर्ष घटने लगा है। अतः अपने जीवन को बचाने के लिए हमें जंगलों को बचाना होगा।

4. जैविक कचरा समाप्त करने में जानवरों की भूमिका- जैविक कचरा से तात्पर्य है मृत पशु। इनको समाप्त करने के लिए गिद्ध, चील, कुत्ते सियार आदि बड़े काम के सिद्ध होते हैं। बल्कि इन्हें तो प्राकृतिक सफाई कर्मचारी तक भी कहा जाता है।


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अभ्यास के प्रश्नोत्तर

i. सही विकल्प को चुनें।

(1) पृथ्वी की सतह से ऊपर की ओर जाने पर साँस लेना कठिन होता है क्योंकि-

(क) वातावरण में कार्बनडाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ जाती है।

(ख) वातावरण में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ जाती है।

(ग) वातावरण में नाइट्रोजन की मात्रा कम जाती हैं।

(घ) वातावरण में ऑक्सीजन की मात्रा कम जाती है।

उत्तर- (घ) वातावरण में ऑक्सीजन की मात्रा कम जाती है।

(2) पहले कौन-सा भाग गर्म होता है?

(क) जल की सतह

(ग) पर्वतीय भाग

(ख) स्थल की सतह

(घ) वायुमंडल

उत्तर- (ग) पर्वतीय भाग

(3) वायुमंडल में ऑक्सीजन की मात्रा है-

(क) 25.42

(ख) 78.03

(ग) 20.99

(घ) 2

उत्तर- (ग) 20.99

(4) वायुमंडल की सबसे पहली परत है-

(क) समताप मंडल

(ख) क्षोभमंडल

(ग) वाह्यमंडल

(घ) मध्यमंडल

उत्तर- (ख) क्षोभमंडल

(5) रेडियो तरंगे किस परत से परावर्तित होकर पृथ्वी पर वापस लौटती हैं-

(क) क्षोभ मंडल

(ख) आयनमंडल

(ग) ओजोनमंडल

(घ) बर्हिमंडल

उत्तर- (ख) आयनमंडल

ii. रिक्त स्थानों को भरिए

1. समताप मंडल का आरंभ क्षोभ मंडल के बाद होता है।

2. बाह्यमंडल का फैलाव 80 से 400 किलोमीटर तक है।

3. हल्की गैसें बर्हिमंडल से अंतरिक्ष में तैरती रहती हैं।

4. वायुमंडल का विस्तार पृथ्वी की सतह से 1000 किलोमीटर की ऊँचाई तक है।

5. वायुमंडल में सबसे अधिक नाइट्रोजन गैस पाई जाती है।

6. तापमान बढ़ने से समुद्र के जल स्तर में वृद्धि हो रही है।

7. कार्बन डाइऑक्साइड गैस को ग्रीन हाउस गैस भी कहते हैं।

iii. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

1. वायुमंडल किसे कहते हैं? वायुमंडल के गैसों के घटक को वृत्त में दिखाइए।
उत्तर- धरातल से लेकर ऊपर कई सौ मीटर तक वायु पाई जाती है। अर्थात हमारी पृथ्वी के चरों ओर घिरी हुई वायु के आवरण को ही ‘वायुमंडल’ कहते हैं। जैसा कि हम जानते हैं कि पृथ्वी हमेशा सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाती रहती है तो इसके साथ ही वायुमंडल भी चक्कर लगाते रहता है। एक खास ऊँचाई तक ही जहाँ हमारी नाक रहेगी वहाँ वायु भी रहेगी। वायुमंडल के गैसों के घटकों का वृत्त निम्नलिखित है-

वायुमंडल एवं इसका संघटन

पृथ्वी के वातावरण के इकाई आयतन में गैसों की मात्रा

2. ग्रीन हाउस को समझाइए।
उत्तर- ऐसा प्रक्रम जिससे ताप को ह्रासित होने से बचाया जा सके, उसे ग्रीन हाउस कहते हैं। बहुत ठण्डे देशों में प्लास्टिक या कांच के मकान बनाकर उसी में बगवानी की जाती है। ऐसे घर में ताप प्रवेश तो कर जाता है, लेकिन उससे निकल नहीं पाता। इसी तरह के मकान को ‘ग्रीन हाउस’ कहते हैं। ग्रीन हाउस के पौधों पर बाहरी आवो-हवा का असर नहीं पड़ता, जिससे वे सदा हरे-भरे रहते हैं। इसी से उसका नाम ‘ग्रीन हाउस’ रखा गया है।

वायुमंडल एवं इसका संघटन

ग्रीन हाउस

3. कार्बन डाइऑक्साइड भी जीवन के लिये जरूरी है। कैसे?
उत्तर- वैसे तो कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा एक सीमा से अधिक वृद्धि होने पर हारिकाकरक मानी जाती है, लेकिन यह जीवन के लिये जरूरी भी है क्योंकि पेड़-पौध ‘कार्बन डाइऑक्साइड’ से ही अपना भोजन बनाते हैं। सूर्य के प्रकाश में पेड़-पौध अपने हरे पत्तों द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग कर प्रकाश संश्लेषण के माध्यम से अपना भोजन तैयार करते हैं। ये इस प्रक्रम में कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग तो कर ही लेते हैं, बदले में पर्याप्त ऑक्सीजन निकालते हैं जो जीव-जंतुओं के लिये प्राण वायु का काम करता है। इस प्रकार स्पष्ट है कि कार्बन डाइऑक्साइड भी जीवन के लिये बहुत ही जरूरी है।

4. वायुमंडल में पाई जाने वाली विभिन्न परतों के नाम लिखिए। मोटे कूट या थर्मोकोल की मदद से इन परतों को क्रमबद्ध दिखाइए।
उत्तर- वायुमंडल में नीचे से ऊपर पाई जानेवाली विभिन्न परतों के नाम निम्नलिखित हैं:

(क) क्षोभमंडल

(ख) समतापमंडल

(ग) मध्यमंडल

(घ) बाह्य मंडल/आयनमंडल 

(ड़) बर्हिमंडल।

         इस प्रकार पृथ्वी से सटे सबसे नीचे क्षोभमंडल है और सबसे ऊपर बर्हिमंडल है।
(नोट : प्रश्न के दूसरे भाग को छात्र स्वयं करें।)

5. किसी एक मंडल के न होने से क्या कठिनाइयाँ होंगी? लिखिए।
उत्तर- सभी मंडलों की अपनी-अपनी उपयोगिता है। एक मंडल के काम को कोई दूसरा मंडल नहीं कर सकता। अतः किसी एक मंडल के भी न रहने से सम्भव है जलवायु में भारी परिवर्तन हो जाय, जिससे मानव जीवन ही खतरे में पड़ जाय या इसका कोई क्रियाकलाप बाधित हो जाय। इस प्रकार यह स्पष्ट नहीं कहा जा सकता कि किस मंडल के नहीं रहने से क्या कठिनाई होगी। लेकिन यह निश्चित है कि कोई-न-कोई कठिनाइयाँ अवश्य ही होगी।

6. पृथ्वी पर तापमान बढ़ने से जीवन के लिये खतरा बढ़ता है। कैसे?
उत्तर- पृथ्वी पर तापमान बढ़ने से जीवन के लिये खतरा बढ़ता है, क्योंकि पृथ्वी पर तापमान के बढ़ने से पहाड़ों पर जमें बर्फ तो गलते ही हैं साथ में ध्रुवों के पास के बर्फ भी गलने लगते हैं। जिसके परिणामस्वरूप समुद्रों का जलस्तर बढ़ने लगता है जिससे समुद्रों के बीच बसे द्वीप पानी में डूब जाते हैं। वहाँ के लोगों को पलायन करना पड़ता है। गंगा नदी के डेल्टा के कुछ द्वीप पानी में विलीन हो चुके हैं। तटवर्ती निवासियों के जीवन पर खतरे की तलवार लटक रही है, कब उनका आवास समुद्र में समा जाएगा, कोई ठीक नहीं।

7. रेडियो और दूरदर्शन की तरंगें किन माध्यमों से हम तक पहुँचती हैं? पता कीजिए।
उत्तर- पृथ्वी से प्रसारित रेडियो और दूरदर्शन की तरंग बाह्य मंडल से होकर पुन: पृथ्वी पर हमारे रेडियो या दरदर्शन पर दिखाई पड़ता है। ऊँचे फ्रीक्वुऐंसी (Frequency) की तरंगों को यह मंडल आसानी से प्रसारित कर देता है। इसी सुविधा का लाभ उठाकर आज घर-घर में टेलिविजन और गाँव-गाँव तक मोबाइल फोन पहुँच गये हैं।

8. शीत प्रदेशों या ध्रुवों पर सब्जियों का उत्पादन कैसे करते है?
उत्तर- शीत प्रदेशों या ध्रुवों पर अत्यधिक ठंड पड़ती है। इस कारण-वहाँ कोई वनस्पति नहीं उग पाती। लेकिन ‘ग्रीन हाउस’ का उपयोग कर वहाँ भी सब्जियाँ उगा ली जाती है। यदि ग्रीन हाउस (मकान) बड़ा हो तो अनाज भी उपजाया जा सकता है।

9. वायमंडल की विभिन्न परतों को चार्ट पेपर पर अलग-अलग रंगों से दिखलाइए।
उत्तर- छात्र स्वयं करें।

10. ओजोन परत को खतरे से बचाना जरूरी है? क्यों और कैसे?
उत्तर- आजोन परत को खतरे से बचाना इसलिये जरूरी है क्योंकि यह परत पृथ्वी और पृथ्वीवासियों की रक्षा करता है। सूर्य से निकलने वाली किरणों में एक खतरनाक किरण ‘पराबैंगनी किरण’ है। यदि यह किरण पूरी तरह पृथ्वी पर पहुँच जाय तो शायद जीवन ही समाप्त हो जाय। लेकिन गनीमत है कि इन खतरनाक पराबैंगनी किरणों को ओजोन परत सोख लेती है और उन्हें पृथ्वी पर पहुँचने नहीं देती। लेकिन मानव की लापरवाही और स्वार्थ के चलते ओजन परत पर खतरा मंडरा रहा है। इसका कारण है कि हम धड़ल्ले से ऐसे वाहनों और उपकरणों का उपयोग करने लगे हैं, जिनसे निकली गैसें ओजोन परत को नष्ट करने पर उतारू हैं। अत: उसे बचाने के लिए हमें खनिज तेज चालित वाहनों तथा सुविधा देने वाले उपकरणों का उपयोग कम करना चाहिए।

11. पता कीजिए कि समुद्र का जलस्तर बढ़ने से कौन-कौन से शहर, द्वीप और देश पर खतरा है?
उत्तर- समुद्र का जल स्तर बढ़ने से वैसे तो विश्व के सभी तटवर्ती गाँव और शहरों पर खतरा है लेकिन अपने देश भारत में पूर्वी डेल्टा के द्वीपों, मुंबई तथा चेन्नई शहरों को विशेष खतरा है। मुंबई में थोडी वर्षा से ही सड़कें जलमग्न हो जाती हैं, क्योंकि समुद्र में पानी जा नहीं पाता और जाता भी है तो बहुत धीरे-धीरे। कई देशों जैसे- श्रीलंका, मालद्वीप, मारीशस तथा मेडागस्कर पर भारी खतरा है। हिन्द महासागर, बंगाल की खाड़ी तथा अरब सागर में अवस्थित छोटे-छोटे भारतीय द्वीप तो पहले ही डूबेंगे।


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बिहार बोर्ड वर्ग-7 वाँ भूगोल प्रश्नोत्तर 

अध्याय-3 आंतरिक बल एवं उससे बनने वाली भू-आकृतियाँ


अध्याय-3 आंतरिक बल एवं उससे बनने वाली भू-आकृतियाँ

अभ्यास के प्रश्नोत्तर

i. सही विकल्प को चुनें।

(1) छोटानागपुर क्या है?

(क) एक पठार

(ख) एक मैदान

(ग) एक झील

(घ) एक पर्वत

उत्तर- (क) एक पठार

(2) भूसतह पर भूकंप के केन्द्र के ऊपर स्थित स्थान क्या कहलाता है?

(घ) भू-पटल

(क) क्रेटर

(ख) अधिकेन्द्र

(ग) लावा

उत्तर- (ख) अधिकेन्द्र

(3) भारत को कितने भूकंप तीव्रता के क्षेत्रों में बाँटा गया है?

(क) 5

(ख) 4

(ग) 3

(घ) 7

उत्तर- (ख) 4

(4) सतपुड़ा पर्वत उदाहरण है-

(क) भ्रंश घाटी का

(ख) वलित पर्वत का

(ग) ब्लॉक पर्वत का

(घ) भ्रशोत्थ पर्वत का

उत्तर- (ग) ब्लॉक पर्वत का

अध्याय-3 आंतरिक बल एवं उससे बनने वाली भू-आकृतियाँ

ii. सही मिलान कर लिखिए-

                            उत्तर

1. हिमालय- (ख) वलित पर्वत

2. फ्यूजियामा- (क) संचयन पर्वत

3. अरावली- (घ) अवशिष्ट पर्वत

4. दक्कन- (ग) लावा निर्मित पठार

अध्याय-3 आंतरिक बल एवं उससे बनने वाली भू-आकृतियाँ

iii. निम्नलिखित को स्पष्ट कीजिए:

अधिकेन्द्र, उद्गम केन्द्र, सिस्मोग्राफ तथा रिक्टर स्केल

उत्तर- अधिकेन्द्र- पृथ्वी के ऊपर उद्गम क्षेत्र के ठीक सामने का भाग ‘अधिकेन्द्र’ कहलाता है। भूकम्प का अधिक कुप्रभाव अधिकेन्द्र के पास ही होता है और उसके चारों ओर क्रमशः कम होते जाता है।

उद्गम केन्द्र- पृथ्वी के अन्दर का वह भाग, जहाँ से भूकम्प की उत्पत्ति होती है उस भाग को ‘उद्गम केन्द्र’ कहा जाता हैं। अर्थात उद्गम केन्द्र तथा अधिकेन्द्र ठीक आमने-सामने होते हैं।

सिस्मोग्राफ- भूकम्प की तीव्रता मापने वाले यंत्र को ‘सिस्मोग्राफ’ कहा जाता हैं। सिस्मोग्राफ रिक्टर पैमाने का बना होता है।

रिक्टर पैमाना- जिस पैमाने में भूकम्प की तीव्रता को मापते हैं उस पैमाने को ‘रिक्टर पैमाना’ कहते हैं। सिस्मोग्राफ का पैमाना ‘रिक्टर’ ही होता है।

अध्याय-3 आंतरिक बल एवं उससे बनने वाली भू-आकृतियाँ

iv. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

(1) भूकंप के झटके क्यों आते हैं?
उत्तर- पृथ्वी के अन्दर गतिशील प्लेटों के टकराने से भूकंप के झटके आते है।

(2) भूकम्प का मानव जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर- भूकम्प का मानव जीवन पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। छोटे-बड़े मकान ध्वस्त हो जाते हैं। बहुत से आदमी उसके मलवे में दब जाते हैं। इस प्रकार भारी जानमाल की हानि होती है।

(3) ज्वालामुखी किसे कहते हैं?
उत्तर- कभी-कभी और कहीं-कहीं पृथ्वी के अन्दर से तरल अग्नि की ज्वाला निकलने लगती है, उसी को ज्वालामखी कहते हैं।

(4) ज्वालामुखी ने मानव जीवन को प्रभावित किया है, कैसे?
उत्तर- पहले तो ज्वालामुखी ने अपने लपेटे में मनुष्य को तो लिया ही, उसके खेत-खलिहान और बाग-बगीचों को जला डाला। जहाँ ज्वालामुखी मृत हो गई और निकला लावा ठंडा हो गया वहाँ मनुष्य को उपजाऊ जमीन मिल गई। इस प्रकार मानव जीवन कुप्रभावित हुआ तो लाभान्वित भी हुआ है।

(5) पृथ्वी की आंतरिक शक्तियों के परिणामस्वरूप निर्मित होनेवाली स्थलाकृतियाँ कौन-कौन सी हैं? वर्णन कीजिए।
उत्तर- पृथ्वी की आंतरिक शक्तियों के परिणामस्वरूप निर्मित होने वाली स्थलाकृतियाँ अनेक हैं। ज्वालामुखी पर्वत पृथ्वी की आंतरिक शक्ति का परिणाम है। पृथ्वी की आंतरिक शक्ति से ही पर्वत/पहाड़, पहाड़ियाँ और पठार बनते हैं। पठारों पर भी पहाड़ियाँ दिख जाती हैं।

(6) मोड़दार एवं संचयन पर्वतों में क्या भिन्नता है एवं क्या समानता है?
उत्तर- धरातलीय भाग पर उत्पन्न दबाव के कारण जब मोड़ पड़ता है तो वह भाग ऊपर उठ जाता है और मोड़दार पर्वत का रूप धारण कर लेता है। इसके विपरीत ज्वालामुखी से निकले मैग्मा और लावा जब काफी मात्रा में एकत्र हो जाते हैं तब कालक्रम में ठंडा होकर संचयित पर्वत बन जाते हैं। दोनों पर्वत ऊंचे होते हैं। लेकिन मोडदार पर्वत काफी ऊंचे होते हैं, जिससे उनपर बर्फ जम जाती है, लेकिन संचयन पर्वत उतने ऊँचे नहीं होते जिससे उन पर बर्फ नहीं जमती। समानता यह है कि दोनों को पर्वत ही कहा जाता है।

(7) पर्वत और पठार में क्या अंतर है?
उत्तर- पर्वत और पठार में यह अंतर है कि पर्वत की ऊँचाई धीरे-धीरे बढ़ती है और ऊपर बहुत कम बराबर स्थान होता है जबकि पठार की ऊँचाई अकस्मात बढ़ती है और ऊपर काफी बराबर स्थान रहता है। अधिक ऊँचे पहाड़ों पर बर्फ जमती है, लेकिन पठारों पर खनिज मिलते हैं।

अध्याय-3 आंतरिक बल(8) पर्वत के प्रकारों का उदाहरण के साथ वर्णन कीजिए।
उत्तर- पर्वत चार प्रकार के होते हैं:-

(क) वलित पर्वत

(ख) भ्रंशोत्थ पर्वत

(ग) संचयन पर्वत और

(घ) अवशिष्ट पर्वत

(क) वलित पर्वत- धरातलीय भाग पर उत्पन्न दाब के कारण चट्टानों में बल पड़ने लगते हैं। इससे वहाँ की धरातल ऊपर उठ जाता है और वलित पर्वत बनता है। उदाहरण में एशिया का हिमालय, यूरोप का रॉकी।

(ख) भ्रंशत्य पर्वत- धरातल पर कभी-कभी समांतर भ्रंश के बाद बीच का भाग ऊपर उठ जाता है और पर्वत-सा दिखने लगता है। ऐसे ही पर्वत को भ्रंशोत्थ पर्वत कहते हैं। जैसे यूरोप का ब्लैक फॉरेस्ट और भारत का विन्ध्याचल।

(ग) संचयन पर्वत- ज्वालामुखी द्वारा निकले लावा ठंडा होकर संचित होते जाते हैं। कालक्रम में इस संचित लावा का ढेर लग जाता है और पर्वत बन जाता है। इसी को संचयन पर्वत कहते हैं। जैसे जापान का फ्यूजियामा तथा अफ्रिका का किलोमंजारो।

(घ) अवशिष्ट पर्वत- हवा, वर्षा, बर्फबारी आदि अपरदन की शक्तियों द्वारा पर्वत की चोटी कटती-छंटती तथा घिसती रहती है। इससे इसकी ऊंचाई बहुत कम हो जाती है। जैसे- अरावली, पूर्वी और पश्चिमी घाट पर्वत।

(9) पृथ्वी की आंतरिक शक्तियों के क्या-क्या प्रभाव नजर आते हैं?
उत्तर- पृथ्वी की आंतरिक शक्तियों के निम्नलिखित प्रभाव नजर आते हैं:-

⇒ भूकम्प,

⇒ ज्वालामुखी तथा

⇒ विभिन्न प्रकार के पर्वतों का बनना।

(10) भूकम्प से सर्वाधिक नुकसान कब एवं कहाँ होता है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर- भूकम्प से सर्वाधिक नुकसान तब होता है जब वहाँ के निवासी लापरवाह रहते हैं। इससे बचने के उपायों से अवगत नहीं रहते। पुनः भूकम्प का अधिक नुकसान वहाँ होता है जहाँ के मकान भूकम्परोधी नहीं बने होते।

(11) भूकम्प से होनेवाली क्षति से हम कैसे बच सकते हैं?
उत्तर- भूकम्प से होनेवाली क्षति से हम तभी बच सकते हैं जब लोगों को इससे बचने के उपायों से अवगत करायें। जो भी भवन बनें उनको वैज्ञानिक ढंग से भूकम्परोधी बनाया जाय। इससे भूकम्प से होनेवाली क्षति को कम किया जा सकता है या क्षति से बचा जा सकता है।

(12) पठार कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर- पठार निम्नलिखित छः प्रकार के होते हैं:-

(क) महाद्वीपीय पठार

(ख) वायूढ़ निक्षेप पठार

(ग) हिमनदीय निक्षेपण पठार

(घ) लावा निर्मित पठार

(ड़) अंतरपर्वतीय पठार और

(च) गिरिपद पठार


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