Archives September 2022

अध्याय 3.1 लौह इस्पात उद्योग

इकाई 3. अध्याय 3.1 (क) लौह इस्पात उद्योग

बिहार बोर्ड के 8वीं कक्षा का भूगोल विषय का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

सरल एवं आसान शब्दों में उत्तर देना सीखें



लौह इस्पात उद्योग
I. बहुवैकल्पिक प्रश्नोत्तर
सही विकल्प को चुनें।
1. भद्रावती लौह इस्पात उत्पादक केंद्र किस राज्य में है?
(क) झारखंड
(ख) तमिलनाडु
(ग) कर्नाटक
(घ) छतीसगढ़
उत्तर- (ग) कर्नाटक
2. जमशेदपुर स्थित टाटा लौह इस्पात केंद्र की स्थापना किस वर्ष की गई थी?
(क) 1910
(ख) 1905
(ग) 1917
(घ) 1907
उत्तर- (घ) 1907
3. बोकारो लौह इस्पात केंद्र किस पंचवर्षीय योजना में लगाया गया था?
(क) पहली
(ख) दूसरी
(ग) तीसरी
(घ) चौथी
उत्तर- (घ) चौथी
4. इनमें से कौन लौह इस्पात उत्पादक केंद्र सेल के अंतर्गत नहीं है?
(क) दुर्गापुर
(ख) बोकारो
(ग) भिलाई
(घ) बर्नपुर
उत्तर- (घ) बर्नपुर
5. सेलम लौह इस्पात केंद्र किस राज्य में अवस्थित है?
(क) तमिलनाडु
(ख) कर्नाटक
(ग) झारखंड
(घ) केरल
उत्तर – (क) तमिलनाडु
II. सही मिलान करें:-
                                   उत्तर
1. दुर्गापुर-            (ग) प. बंगाल
2. विशाखपत्तनम- (क) आंध्रप्रदेश
3. भिलाई –         (घ) छत्तीसगढ़
4. भद्रावती –       (ख) कर्नाटक
III. खाली स्थान को उपयुक्त शब्दों से पूरा करें।
1. दांतो को रोलिंग प्रोसिंग एवं ढलाई के द्वारा निश्चित आकार दिया जाता है।
2. उड़ीसा में राउरकेला (सेल) लौह इस्पात केंद्र है।
3. विजयनगर लौह इस्पात केंद्र कर्नाटक राज्य में है।
4. टिस्को को झरिया की खानों से कोयला मिलता है।
5. बोकारो लौह इस्पात केंद्र प्रसिद्ध उद्योगपति जमशेद जी टाटा की सहायता से लगाया गया था।
IV. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें। (अधिकतम 50 शब्दों में)
1. बोकारो लौह इस्पात केंद्र को मैंगनीज किन-किन स्थानों से प्राप्त होता है? केंद्रों के नाम लिखिए।
उत्तर- बोकारो लौह इस्पात केन्द्र को मैंगनीज बादाम पहाड़, गुरु महिसानी एवं सुलायपत से प्राप्त होता है।
2. टिस्को को जल की सुविधा कहाँ से मिलती है?
उत्तर- टिस्को को जल की सुविधा स्वर्णरेखा और खरकई नदियों से मिलती है।
3. टिस्को में कामगार के रूप में मुख्यतः कौन से लोग हैं?
उत्तर- टिस्को में कामगार के रूप में मुख्यत: स्थानीय संथाली लोग हैं तथा इनके साथ-साथ बिहार, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा तथा मध्यप्रदेश के लोग भी कार्य करते हैं।
4. बोकारो लौह इस्पात केंद्र कब और किसके सहयोग से स्थापित की गई थी?
उत्तर- बोकारो लौह इस्पात केन्द्र 1964 ई. में रूस (तत्कालीन सोवियत संघ) के सहयोग से स्थापित की गई थी।
5. टिस्को में बनने वाली कुछ चीजों के नाम लिखिए।
उत्तर- सलाखें, गर्डर, पहिए, पटरियाँ, चादरें, स्लीपर एवं फिश प्लेट आदि।
 
V. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें। (अधिकतम 200 शब्दों में)
1. टिस्को लौह इस्पात केंद्र को मिलने वाली सुविधाओं का विस्तृत विवरण दीजिए।
उत्तर- टिस्को लौह इस्पात केन्द्र को लौह-अयस्क नोआमंडी (प० सिंहभूम), बादाम पहाड़ एवं गुरु महिसानी (उड़ीसा) की पहाड़ियों से प्राप्त होता है जो यहाँ से लगभग 100 किलोमीटर दूर स्थित है। कुल अयस्क की आवश्यकता का 50% भाग अकेले नोआमंडी से आता है।
          कोयला झरिया की खानों से मिलता है। चूनापत्थर 320 किलोमीटर की दूरी से विशेषकर विरमित्रपुर, हाथीबारी, बिसरा और कटनी से आता है। डोलोमाइट पागपोश से आता है।  पानी की आवश्यकता स्वर्णरेखा और खरकई नदियाँ पूरा करती हैं। टिस्को लौह इस्पात संयत्र से सलाखें, गर्डर, पहिए और पटरियाँ, चादरें, स्लीपर एवं फिश प्लेट बनाये जाते हैं।
2. बोकारो लौह इस्पात केंद्र को उपलब्ध भौगोलिक सुविधाओं का वर्णन करें।
उत्तर- बोकारो लौह इस्पात केन्द्र को बोकारो स्टील लिमिटेड (B.S.L.) के नाम से भी जाना जाता है। चतुर्थ पंचवर्षीय योजना के तहत इसे 1964. ई० में रूस (तत्कालीन सोवियत संघ) के सहयोग से सार्वजनिक क्षेत्र के प्रक्रम के रूप में इसकी स्थापना की गई थी। इसकी स्थापना कच्चे माल की उपलब्धता वाले स्थानों के नजदीक की गई है जिससे यहाँ तैयार इस्पात कम लागत पर उपलब्ध है।
       इस संयंत्र के लिए लौह-अयस्क किरीबुरू (उड़ीसा) से प्राप्त होता है। चूना पत्थर विरमित्रपुत्र (बंगाल), कोयला झरिया और बोकारो की खानों से, पानी दामोदर नदी से, मैंगनीज बादाम पहाड़, गुरु महिसानी एवं सुलायपत से प्राप्त होता है।
3. इस्पात निर्माण की प्रक्रिया को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर- लौह-इस्पात उद्योग को किसी भी देश के उद्योगों की रीढ़ माना जाता है क्योंकि औद्योगिक विकास हेतु बुनियादी वस्तु, औजारों, मशीनों व आधारभूत ढाँचे का निर्माण लौह-इस्पात से ही होता है। यदि हम विश्व स्तर पर देखें तो पाते हैं कि जिन देशों में लौह इस्पात की खपत अधिक है वे देश ही विकसित है। जैसे-जापान, संयुक्त राज्य अमेरिका, फ्रांस इत्यादि।
        भारतीय परिप्रेक्ष्य में देखें तो स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद राष्ट्र निर्माताओं ने इस उद्योग की आवश्यकता को समझते हुए सर्वप्रथम इस उद्योग को स्थापित किया और आज यह उद्योग देश की अधिकांश आवश्यकता की पूर्ति के साथ इस्पात को नियत भी कर रहा है।
      भारत केवल उच्च कोटि के कुछ इस्पात का आयात करता है। भारत विश्व में स्पंज लोहे का सबसे बड़ा उत्पादक है। अब तो भारत में विदेशों से प्राप्त लोहा-इस्पात स्क्रैपर (अन्न-उपयोगी) से नया इस्पात तैयार कर धन व साधनों की बचत कर रहा है।
        वित्तीय वर्ष 19-20 के दौरान भारत में लौह इस्पात का उत्पादन
⇒ कुल उत्पादन- 111.245 मिलियन टन
⇒ आयात- 5.51 मिलियन टन
⇒ निर्यात- 6.52 मिलियन टन

⇒ उपभोग (घरेलू)- 75.05 मिलियन टन


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इकाई 3 अध्याय 3 उद्योग

इकाई 3 अध्याय 3 उद्योग

बिहार बोर्ड के 8वीं कक्षा का भूगोल विषय का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

सरल एवं आसान शब्दों में उत्तर देना सीखें



अध्याय 3 उद्योग
I. बहुवैकल्पिक प्रश्नोत्तर
सही विकल्प को चुनें।
1. उद्योग का संबंध किस प्रकार की गतिविधि से होता है?
(क) सामाजिक
(ख) सांस्कृतिक
(ग) आर्थिक
(घ) जैविक
उत्तर- (ग) आर्थिक
2. वृहद उद्योग में पूंजी निवेश की सीमा होती है-
(क) 1 करोड़ से अधिक
(ख) 50 करोड़ से अधिक
(ग) 10 लाख से कम
(घ) 50 हजार मात्र
उत्तर- (क) 1 करोड़ से अधिक
3. दवा उद्योग किस प्रकार का उद्योग है?
(क) आधारभूत उद्योग
(ख) संयुक्त क्षेत्र उद्योग
(ग) हल्का उद्योग
(घ) उपभोक्ता उद्योग
उत्तर- (घ) उपभोक्ता उद्योग
4. इनमें कौन औद्योगिक प्रदेश नहीं है?
(क) दक्कन प्रदेश
(ख) छोटानागपुर प्रदेश
(ग) मुंबई-पुणे क्षेत्र
(घ) गुड़गाँव-दिल्ली मेरठ प्रदेश
उत्तर- (क) दक्कन प्रदेश
5. इनमें कौन कृषि आधारित उद्योग है?
(क) फर्नीचर उद्योग
(ख) कागज उद्योग
(ग) वस्त्र उद्योग
(घ) ताम्बा प्रगलन उद्योग
उत्तर- (ग) वस्त्र उद्योग
II. खाली स्थान को उपयुक्त शब्दों से पूरा करें।
1. भिलाई लौह इस्पात छत्तीसगढ़ राज्य में है।
2. उद्योग के अंतर्गत कच्चे माल को अधिक मूल्य के उत्पादों में बदल जाता है।
3. फर्नीचर उद्योग लघु उद्योग का उदाहरण है।
4. पूँजी निवेश के आधार पर उद्योग तीन प्रकार के होते है।
5. सीमेंट उद्योग खनिज आधारित उद्योग के अंतर्गत आता है।
III. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें। (अधिकतम 50 शब्दों में)
1. उद्योग से क्या समझते हैं?
उत्तर- विभिन्न प्रकार के कच्चे माल को अधिक मूल्य के उत्पादों के रूप में परिवर्तित किया जाना ही उद्योग है। इसे द्वितीयक गतिविधि के अंतर्गत रखा जाता है।
2. लघु एवं वृहद उद्योग के बीच अंतर कीजिए।
उत्तर- लघु एवं वृहत् उद्योग के बीच अन्तर निम्नलिखित हैं-
लघु उद्योग- 
⇒ लघु उद्योग में पूँजी निवेश की सीमा एक करोड़ से कम होती है।
⇒ विभिन्न प्रकार के उत्पादों का निर्माण छोटी-छोटी मशीनों द्वारा होता है।
वृहत् उद्योग-
⇒ वृहत् उद्योग में पूँजी निवेश की सीमा एक करोड़ से अधिक होती है।
⇒ विभिन्न प्रकार के उत्पादों का निर्माण वृहत पैमाने पर होता है।
3. वन आधारित उद्योगों के कोई तीन उदाहरण दीजिए।
उत्तर- वन आधारित उद्योगों के तीन उदाहरण- कागज उद्योग, औषधि (आयुर्वेद) निर्माण उद्योग, फर्नीचर उद्योग।
4. संयुक्त क्षेत्र का उद्योग किसे कहा जाता है? उदाहरण दीजिए।
उत्तर- जिस उद्योग का संचालन सरकार एवं निजी व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह द्वारा होता है उसे संयुक्त क्षेत्र का उद्योग कहा जाता है।
   जैसे- मारूति उद्योग, एनटीपीसी, नबीनगर पावर जेनरेटिंग कं. प्रा. लि.।
5. सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के उद्योगों के बीच अंतर उपयुक्त उदाहरण के साथ कीजिए।
उत्तर- सार्वजनिक क्षेत्र-
               वैसे उद्योग जिसका संचालन पूर्ण रूप से सरकार द्वारा किया जाता हो उसे सार्वजानिक क्षेत्र के उद्योग कहा जाता है।
जैसे- SAIL, BHEL, रेल कारखाना, आयुध कारखाना आदि।
निजी क्षेत्र- 
        वैसे उद्योग जिसका संचालन पूर्ण रूप से निजी व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह द्वारा किया जाता हो उसे निजी क्षेत्र के उद्योग कहा जाता है।
जैसे- टाटा, बजाज, रिलायंस, बिड़ला आदि।
6. भूमिका के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर- भूमिका के आधार पर उद्योगों को दो भागों में बाँटा गया है-
(i) आधारभूत उद्योग- 
          वैसे उद्योग जिनके उत्पादों या कच्चे माल पर दूसरे उद्योग निर्भर हैं, उन्हें आधारभूत उद्योग कहते हैं।
जैसे- लोहा इस्पात, तांबा गलाना, खनिज गलाना इत्यादि।
(ii) उपभोक्ता उद्योग- 
         वैसा उद्योग जिनके उत्पादों को उपभोक्ताओं को सीधे उपयोग के लिए किया जाता है।
जैसे- दवा उद्योग, बर्तन उद्योग, टूथपेस्ट, मंजन, शृंगार, प्रसाधन उद्योग, कागज उद्योग, रेडिमेड वस्त्र उद्योग आदि।
7. भार के आधार पर उद्योग कितने प्रकार के होते हैं? उपयुक्त उदाहरण के साथ लिखें।
उत्तर – भार के आधार पर उद्योग दो प्रकार के होते हैं।
(i) भारी उद्योग- 
         वैसे उद्योगों जिनके उत्पादों का वजन काफी अधिक होता है उसे भारी उद्योग कहते हैं।
जैसे- लोहा इस्पात, मोटर गाड़ी उद्योग, सीमेंट उद्योग, पोत निर्माण उद्योग इत्यादि।
(ii) हल्के उद्योग- 
          वैसे उद्योग जिनमें कम भार वाले कच्चे माल का प्रयोग कर हल्के तैयार माल का उत्पादन किया जाता है उसे हल्के उद्योग कहते है।
जैसे- विद्युतीय उद्योग, घड़ी उद्योग, बल्ब उद्योग, पीतल के बर्तन उद्योग इत्यादि।
8. भारत के कुछ प्रमुख औद्योगिक प्रदेशों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर- भारत के प्रमुख औद्योगिक प्रदेश निम्नलिखित हैं-
⇒ मुम्बई-पूर्ण क्षेत्र,
⇒ बंगलुरू-चेन्नई सेलम,
⇒ अहमदाबाद-बड़ोदरा-सूरत क्षेत्र,
⇒ विशाखापटनम्-गुंटूर औद्योगिक क्षेत्र,
⇒ गुड़गांव दिल्ली-मेरठ औद्योगिक प्रदेश
⇒ कोल्लम-तिरूवन्तपुरम् औद्योगिक प्रदेश
⇒ छोटानागपुर औद्योगिक क्षेत्र एवं
⇒ हुगली क्षेत्र।
IV. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें। (अधिकतम 200 शब्दों में)
1. उद्योग को परिभाषित कीजिए तथा इसका विस्तृत वर्गीकरण प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर- विभिन्न प्रकार के कच्चे माल को अधिक मूल्य के उत्पादों के रूप में परिवर्तित किया जाना ही उद्योग है। इसे द्वितीयक गतिविधि के अंतर्गत रखा जाता है।
उद्योगों का विस्तृत वर्गीकरण-
         
       उद्योगों का विस्तृत वर्गीकरण कई आधारों पर किया गया है-
⇒ कच्चे माल के आधार पर
(क) कृषि आधारित उद्योग
(ख) खनिज आधारित उद्योग
(ग) वन आधारित उद्योग
(घ) समुद्र आधारित उद्योग
 
⇒ पूँजी निवेश के आधार पर
(क) कुटीर उद्योग
(ख) लघु उद्योग
(ग) वृहत् उद्योग
 
⇒ स्वामित्व के आधार पर
(क) निजी क्षेत्र
(ख) सार्वजनिक क्षेत्र
(ग) संयुक्त क्षेत्र
(घ) सहकारी क्षेत्र
 
⇒ प्रमुख भूमिका के आधार पर
(क) आधारभूत उद्योग
(ख) उपभोक्ता उद्योग
 
⇒ कच्चे एवं तैयार माल की मात्रा एवं भार के आधार पर
(क) भारी उद्योग
(ख) हल्के उद्योग
 
2. कच्चे माल की प्रकृति के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण उपयुक्त उदाहरण के साथ कीजिए।
उत्तर – कच्चे माल की प्रकृति के आधार पर उद्योगों को दो भागों में बाँटा गया है-
 
(i) भारी उद्योग- वैसे उद्योगों जिनके उत्पादों का वजन काफी अधिक होता है उसे भारी उद्योग कहते हैं। जैसे– लोहा इस्पात, मोटर गाड़ी उद्योग, सीमेंट उद्योग, पोत निर्माण उद्योग इत्यादि।
 
(ii) हल्के उद्योग- वैसे उद्योग जिनमें कम भार वाले कच्चे माल का प्रयोग कर हल्के तैयार माल का उत्पादन किया जाता है उसे हल्के उद्योग कहते है। जैसे- विद्युतीय उद्योग, घड़ी उद्योग, बल्ब उद्योग, पीतल के बर्तन उद्योग इत्यादि।
 
3. स्वामित्व के आधार पर उद्योग कितने प्रकार के होते हैं? प्रत्येक का उदाहरण भी दीजिए।
उत्तर – स्वामित्व के आधार पर उद्योग चार प्रकार के होते हैं-
(क) निजी क्षेत्र
(ख) सार्वजनिक क्षेत्र
(ग) संयुक्त क्षेत्र
(घ) सहकारी क्षेत्र
(i) निजी क्षेत्र के उद्योग- वैसे उद्योग जिसका संचालन पूर्ण रूप से निजी व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह द्वारा किया जाता हो उसे निजी क्षेत्र के उद्योग कहा जाता है। जैसे– टाटा, बजाज, रिलायंस, बिड़ला आदि।
(ii) सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग- वैसे उद्योग जिसका संचालन पूर्ण रूप से सरकार द्वारा किया जाता हो उसे सार्वजानिक क्षेत्र के उद्योग कहा जाता है। जैसे- SAIL, BHEL, रेल कारखाना, आयुध कारखाना आदि।
(iii) संयुक्त क्षेत्र के उद्योग- जिस उद्योग का संचालन सरकार एवं निजी व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह द्वारा होता है उसे संयुक्त क्षेत्र का उद्योग कहा जाता है। जैसे- मारूति उद्योग, एनटीपीसी, नबीनगर पावर जेनरेटिंग कं. प्रा. लि.।
(iv) सहकारी क्षेत्र के उद्योग- वैसे उद्योग जिसका स्वामित्व कच्चे माल की पूर्ति करने वाले उत्पादकों, श्रमिकों या दोनों के हाथों में होता है तथा लाभ-हानि का विभाजन भी आनुपातिक होता है, उसे सहकारी क्षेत्र के उद्योग कहा जाता है। जैसे- सुधा डेयरी, केरल के नारियल आधारित उद्योग आदि।
 
4. उद्योगों की अवस्थिति को प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन कर भारत के पाँच औद्योगिक प्रदेशों के नाम लिखिए।
उत्तर- उद्योगों की अवस्थिति को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित हैं:-
(i) कच्चे माल की उपलब्धता
(ii) अनुकूल जलवायु
(iii) सस्ते श्रमशक्ति
(iv) पूँजी की उपलब्धता
(v) विद्युत की सुविधा
(vi) उद्योगपतियों की इच्छाशक्ति
(vii) विस्तृत बाजार की उपलब्धता इत्यादि।
            भारत के प्रमुख औद्योगिक प्रदेश निम्नलिखित हैं-
⇒ मुम्बई-पूर्ण क्षेत्र,
⇒ बंगलुरू-चेन्नई सेलम,
⇒ अहमदाबाद-बड़ोदरा-सूरत क्षेत्र,
⇒ विशाखापटनम्-गुंटूर औद्योगिक क्षेत्र,
⇒ गुड़गांव दिल्ली-मेरठ औद्योगिक प्रदेश
⇒ कोल्लम-तिरूवन्तपुरम् औद्योगिक प्रदेश
⇒ छोटानागपुर औद्योगिक क्षेत्र एवं

⇒ हुगली क्षेत्र।


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अध्याय 2 भारतीय कृषि

 इकाई-2 अध्याय 2 भारतीय कृषि

बिहार बोर्ड के 8वीं कक्षा का भूगोल विषय का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

सरल एवं आसान शब्दों में उत्तर देना सीखें



भारतीय कृषि

I. बहुवैकल्पिक प्रश्नोत्तर

सही विकल्प को चुनें।

1. कृषि कार्य में शामिल है-
(क) भूमि को जोतना
(ख) पशुओं को पालना
(ग) मछली पालन करना
(घ) उपर्युक्त सभी
उत्तर – (घ) उपर्युक्त सभी
2. भूमि पर जनसंख्या के अत्यधिक दबाव वाले क्षेत्रों में कौन-सी खेती की जाती है?
(क) झूम खेती
(ख) अंतर कृषि
(ग) गहन कृषि
(घ) ट्रक फार्मिंग
उत्तर – (ग) गहन कृषि
3. इनमें कौन समूह रबी की फसलों से संबंधित है?
(क) गेहूँ, चावल
(ख) चना, धान
(ग) मक्का, जूट
(घ) गेहूँ, मटर
उत्तर – (घ) गेहूँ, मटर
4. जूट की फसल प्रमुखत: होती है-
(क) किशनगंज-पूर्णिया में
(ख) अररिया-आरा में
(ग) गया-औरंगाबाद में
(घ) गया-जहानाबाद में
उत्तर- (क) किशनगंज-पूर्णिया में
5. बिस्कोमान उपलब्ध कराती है-
(क) बेस्ट किसानों को खाद बीज
(ख) कृषि उपकरण
(ग) ऋण
(घ) सिंचाई की सुविधा
उत्तर- (क) बेस्ट किसानों को खाद बीज
II. खाली स्थान को उपयुक्त शब्दों से पूरा करें।
(i) स्थानांतरित कृषि को दहन कृषि भी कहते हैं।
(ii) उत्तरी बिहार में मखाना, केला और तम्बाकू की खेती वाणिज्य कृषि है।
(iii) जायद फसल का उदाहरण तरबूज, ककरी, खीरा, सब्जियाँ  है।
(iv) किसान क्रेडिट कार्ड से किसानों को वित्तीय सुविधा उपलब्ध होती है।
(v) जैविक खादों से भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ती है।
 
III. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें। (अधिकतम 50 शब्दों में)
1. कृषि कार्य किसे कहते हैं
उत्तर- भूमि को जोतकर विभिन्न प्रकार की फसलें, सब्जियाँ, फल-फूल उपजाना, पशुपालन, मत्स्य-पालन इत्यादि करना कृषि कार्य है। यह प्राथमिक क्रियाकलाप के अंतर्गत आता है।
2. खरीफ और रबी फसलों में क्या अंतर है? उदहरण बताएँ।
उत्तर- खरीफ फसल- वैसे फसल जिसकी बोआई जून-जुलाई में की जाती है और अक्टूबर- नवम्बर में काटी जाती है, खरीफ फसल कहलाता है। जैसे – धान, मक्का, जूट, मूंगफली इत्यादि।
रबी फसल- वैसे फसल जिसकी बोआई अक्टूबर-नवम्बर में की जाती है तथा मार्च-अप्रैल में काटी जाती जाती है, रबी फसल कहलाता है। जैसे – गेहूँ, चना, मटर, मसूर, जौ इत्यादि।
3. जीवन निर्वाहन कृषि क्या है?
उत्तर- वैसी कृषि जो कृषि जीवन निर्वहन के लिए किया जाता है, उसे जीवन-निर्वहन कृषि कहते हैं। यह कृषि वैसे देश या क्षेत्रों में की जाती है जहाँ जनसंख्या का अत्यधिक बोझ, रोजगार के अन्य साधनों के अभाव होता है।
4. व्यापारिक और बागवानी फसलों के बारे में क्या जानते हैं? लिखिए।
उत्तर- व्यापारिक फसलें- वैसे फसल जो व्यापार की दृष्टि से की जाती हो उसे व्यापारिक फसलें कहा जाता है। जैसे – रबर, मखाना, तम्बाकू, मिर्च, गन्ना ये सब व्यापारिक फसलें हैं। रबर को छोड़कर बाकी फसलें बिहार में बहुतायत में उपजायी जाती हैं। ये फसलें कई उद्योगों के लिए कच्चे माल का काम करती है।
बागवानी फसलें- ये फसलें ‘ट्रक फार्मिंग’ के नाम से भी जानी जाती है। इसके अंतर्गत केला, आम, चीनी, फूलों आदि की खेती की जाती है। इसका घरेलू खपत बहुत है। फूलों की खेती पर्व-त्योहारों, शादी-विवाह और औषधियों की आपूर्ति करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
IV. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें। (अधिकतम 200 शब्दों में)
1. बिहार की कृषि की क्या विशेषताएँ हैं?
उत्तर- बिहार की कृषि की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
⇒ बिहार प्रांत की कृषि मानसून पर आधारित है। वर्षा पर निर्भर होने के कारण फसलों के उत्पादन में अनिश्चितता बनी रहती है। पर्याप्त वर्षा से अच्छी फसल होती है जबकि अल्पवृष्टि से फसलों का नुकसान होता है। इस तरह यहाँ की फसलें प्राकृतिक वर्षा पर निर्भर करती हैं।
⇒ खेती करने के तरीके पुराने हैं। हल-बैल. कुदाल, खुरपी ही प्रमुख उपकरण हैं। खेती श्रम पर अधिक आश्रित है। परंपरागत कृषि यहाँ की विशेषता है।
⇒ छुपी हुई बेरोजगारी हमारी कृषि की खास विशेषता है। यहाँ परिवार के अधिकांश सदस्य फसल बुआई-कटाई के दौरान कृषि कार्यों में लगे रहते हैं। ऐसे में उन्हें स्वयं के लिए रोजगार में लगा होना समझ में आता है जबकि वे वस्तुतः रोजगार के अभाव में ही इन कार्यों में संलग्न होते हैं।
⇒ यहाँ के अधिकांश कृषक अंधविश्वासी होते है। वे अपनी फसल की उपज को ईश्वरीय देन मानते है अर्थात वे अपनी मेहनत से ज्यादा ईश्वर पर विश्वास करते है।
2. कृषि किन कारणों से प्रभावित होती है?
उत्तर – कृषि निम्नलिखित कारणों से प्रभावित होती है-
⇒ मानसूनी वर्षा पर निर्भरता- भारतीय कृषि क्षेत्र का एक-तिहाई भाग ही सिंचित है, शेष क्षेत्र मानसून पर निर्भर करती है। कभी अतिवृष्टि तो कभी अनावृष्टि फसलों के उत्पादन को प्रभावित कर देते हैं।
⇒ जोतों के छोटे आकार- भारत में छोटे और सीमान्त किसानों की संख्या अधिक है। जमीन के पारिवारिक बँटवारे के कारण खेतों का आकार छोटा होता जा रहा है। चकबंदी के अभाव में भू-जोत बिखरे हैं। छोटे भू-जोत आर्थिक दृष्टि से अहितकारी होते हैं।
⇒ भूमि का असमान वितरण- भूमि का असमान वितरण से भी भारतीय कृषि प्रभावित है। अंग्रेजी शासन के दौरान भू-राजस्व वसूली के लिए लागू की गई। जमींदारी प्रथा ने किसानों का शोषण किया। स्वतंत्रता के बाद भू-सुधारों की प्रक्रिया शुरू तो हुई लेकिन इसमें गति लाने की आवश्यकता है।
⇒ कृषि ऋण- छोटे किसान बीज, खाद, कीटनाशक, श्रमिक आदि के लिए महाजनों या अन्य संस्थाओं से कर्ज लेते हैं। ऊँची ब्याज दर, कम उत्पादन, प्रतिकूल मौसम, बिचौलियों के कारण किसानों को पर्याप्त लाभ नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति में वे ऋण नहीं लौटा पाते। यह इनके कृषि उत्पादन क्षमता को प्रभावित करती है।
⇒ कृषि विपणन का अभाव- अच्छी बाजार व्यवस्था के अभाव में किसान अपने उत्पादों को बिचौलियों व व्यापारियों को सस्ते दामों पर बेचने के लिए बाध्य है जो उनको उचित मूल्य नहीं देते। फसलों की अत्यधिक उत्पादकता को न तो सही ढंग से बाजार में पहुंचा पाते हैं और न ही बिक्री कर पाते हैं। इस स्थिति में किसानों से बिचौलिये लाभ उठा लेते हैं।
⇒ अंधविश्वासी- यहाँ के अधिकांश कृषक अंधविश्वासी होते है। वे अपनी फसल की उपज को ईश्वरीय देन मानते है अर्थात वे अपनी मेहनत से ज्यादा ईश्वर पर विश्वास करते है।

3. आप के राज्य में कृषि कार्य उत्पादन में बढ़ोतरी के लिए क्या प्रयास हुए हैं? लिखिए।
उत्तर- राज्य में कृषि कार्य उत्पादन में बढ़ोतरी के लिए निम्नलिखित प्रयास हुए हैं-
⇒ नहर की सुविधा का विस्तार किया गया है। 
⇒ किसानों को ऋण के लिए किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा उपलब्ध कराया गया है।  
⇒ सिंचाई के लिए सस्ते दर पर बिजली की सुविधा उपलब्ध कराया गया है। 
⇒ राज्य सरकार द्वारा कृषि बिमा की व्यवस्था किया गया है। 
⇒ उचित दर पर उर्वरकों को उपलब्ध कराया जाता है। 
⇒ बीज, कीटनाशक दवाई सब्सिडी पर उपलब्ध कराया जाता है। 
⇒ कृषि सम्बंधित औजार या यंत्र  पर राज्य सरकार द्वारा सब्सिडी की सुविधा दिया जाता है।
⇒ किसानों का समय-समय ऋण की माफी भी की जाती है। 

⇒ सरकारी दर पर किसानों का अनाज भी खरीदा जाता है।  इत्यादि 


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1.4 ऊर्जा संसाधन 

 इकाई 1. अध्याय 1.4 (घ) ऊर्जा संसाधन

बिहार बोर्ड के 8वीं कक्षा का भूगोल विषय का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

सरल एवं आसान शब्दों में उत्तर देना सीखें



ऊर्जा संसाधन

I. बहुवैकल्पिक प्रश्नोत्तर

सही विकल्प को चुनें।
1. गोंडवाना कालीन चट्टानों में किस खनिज के भंडार मिलते हैं?
(क) पेट्रोलियम
(ख) कोयला
(ग) प्राकृतिक गैस
(घ) सौर ऊर्जा
उत्तर – (ख) कोयला

2. कोयला का सर्वोत्तम किस्म कौन सा है?
(क) पीट
(ख) लिग्नाइट
(ग) बिटुमिनस
(घ) एंथ्रासाइट
उत्तर – (घ) एंथ्रासाइट
3. सिंगरौली कोयला क्षेत्र किस राज्य में है?
(क) मध्यप्रदेश
(ख) आन्ध्रप्रदेश
(ग) झारखंड
(घ) बिहार
उत्तर – (क) मध्यप्रदेश
4. हुगड़ीजन में किसका उत्पादन होता है?
(क) कोयला
(ख) पवन ऊर्जा
(ग) सौर ऊर्जा
(घ) पेट्रोलियम
उत्तर- (घ) पेट्रोलियम
5. पवन-ऊर्जा उत्पादन से सम्बंधित क्षेत्र है?
(क) साम्बा
(ख) ताम्बा
(ग) लाम्बा
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर- (ग) लाम्बा
6. पूगा घाटी प्रसिद्ध है-
(क) भूताप के लिए
(ख) ज्वारीय ऊर्जा के लिए
(ग) कोयला उत्पादन के लिए
(घ) पेट्रोलियम उत्पादन के लिए
उत्तर – (क) भूताप के लिए
II. खाली स्थान को उपयुक्त शब्दों से पूरा करें।
1. कलपक्कम में  परमाणु ऊर्जा का उत्पादन होता है।
2. भाखड़ा नंगल 255.55 मीटर (740 फीट) ऊंची परियोजना है।
3. अंकलेश्वर में तेल का उत्पादन किया जाता है।
4. मथुरा तेल शोधन केंद्र उत्तर प्रदेश राज्य में है।
5. हीराकुंड जल विद्युत परियोजना महानदी पर विकसित है।
III. सही मिलान करें।
                             उत्तर 

1. मोहपानी –  (ङ) कोयला

2. रूद्र सागर- (ग) पेट्रोलियम

3. फरक्का –  (क) ताप विद्युत

4. तारापुर –    (ख) परमाणु ऊर्जा

5. तातापानी-  (घ) सौर ऊर्जा

 

IV. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें। (अधिकतम 50 शब्दों में)
(i) भारत में कोयले के वितरण व क्षेत्र के कुछ केंद्रों के नाम लिखिए।
उत्तर- भारत में कोयले का प्रमुख क्षेत्र –
झारखंड – झरिया, बोकारो, धनबाद, गिरीडीह, कर्णपूरा एवं रामगढ़ क्षेत्र,
छत्तीसगढ़ – चिरिमिरी, विश्रामपुर, झिलमिली, कोरबा,
उड़ीसा – तालचर,
पश्चिम बंगाल – रानीगंज,
मध्यप्रदेश – सिंगरौली, सोहागपुर, उमरिया तथा मोहपानी एवं
महाराष्ट्र – चांदा-वर्धा, कांपटी एवं बर्दर।
(ii) भारत के जल विद्युत परियोजना पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर- भारत में पहला जलविद्युत का संयंत्र 1887 ई० में असम के दार्जिलिंग में लगाया गया था। इसके बाद देश में बहुद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं द्वारा कई जलविद्युत उत्पादन केन्द्र विकसित किए गए। इनमें भाखड़ा नांगल परियोजना, दामोदर घाटी परियोजना इत्यादि प्रमुख हैं।
(iii) परमाणु ऊर्जा उत्पादक पांच केंद्रों के नाम लिखिए।
उत्तर – परमाणु ऊर्जा उत्पादक पाँच केन्द्र निम्नलिखित हैं-
(i) तारापुर (महाराष्ट्र)
(ii) राणाप्रताप सागर केन्द्र (कोटा राजस्थान)
(iii) कालापक्कम् (तामिलनाडु)
(iv) नरौरा (उत्तर प्रदेश)
(v) ककरापारा (गुजरात)।
(iv) संसाधन के संरक्षण हेतु क्या उपाय किए जा सकते हैं किन्हीं तीन उपायों को लिखिए।
उत्तर- संसाधन के संरक्षण हेतु विवेकपूर्ण उपयोग तीन बातों पर निर्भर है-
(1) संसाधनों के निरंतर दोहन पर नियंत्रण,
(2) उनका बचतपूर्वक उपयोग एवं
(3) कच्चे माल के रूप में सस्ते विकल्पों की खोज।
(v) गैर परंपरागत ऊर्जा स्रोतों के नाम लिखिए।
उत्तर- गैर परम्परागत ऊर्जा स्रोतों के नाम- सौर ऊजा, पवन ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा, भूतापीय ऊर्जा एवं जल विद्युत् उर्जा आदि।
 
V. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें। (अधिकतम 200 शब्दों में)
(i) ऊर्जा संसाधन पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर- हमलोगों के लिए ऊर्जा की आवश्यकता जीवन के प्रारंभिक काल से ही रही है। विकास के आरंभिक दौर में शारीरिक ऊर्जा का उपयोग किया गया। कालांतर में लकड़ी, कोयला, पेट्रोलियम, जलविद्युत, परमाणु ऊर्जा का उपयोग बढ़ा। परंतु वर्तमान समय में सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा, भूतापीय ऊर्जा एवं बायोगैस का भी हम उपयोग करने लगे हैं।
⇒ ऊर्जा केउपरोक्त साधनों को मुख्य रूप से दो वर्गों में रखा गया है – परंपरागत और गैर परंपरागत स्रोत।

(ii) भारत में कोयला उत्पादन एवं वितरण का विवरण लिखिए।
उत्तर- भारत में प्रमुखतः गोडवाना समूह की चट्टानों में कोयला पाया जाता है। कोयला भंडार का 98% हिस्सा गोंडवाना समूह का है। इस प्रकार के कोयले दामोदर, सोन, महानदी, गोदावरी-वर्धा नदियों की भ्रंश घाटियों में पाई जाती है। कोयला उत्पादक राज्यों में झारखंड का झरिया, बोकारो, धनबाद, गिरीडीह, कर्णपुरा एवं रामगढ़ क्षेत्र, छत्तीसगढ़ का चिरिमिरी, विश्रामपुर, झिलमिली, कोरबा, उड़ीसा का तालचर, पश्चिम बंगाल का रानीगंज मध्यप्रदेश का सिंगरौली, सोहागपुर, उमरिया तथा मोहपानी एवं महाराष्ट्र का चांदा-वर्धा, कांपटी एवं बर्दर प्रमुख हैं।
⇒ टर्शियरीकालीन कोयला असम, अरूणाचल प्रदेश, मेघालय, जम्मू-कश्मीर में निकाला जाता है। टर्शियरी युग की चट्टानों में निम्न कोटि का कोयला पाया जाता है। 
⇒ लिग्नाइट कोयला का उत्पादन तमिलनाडु के लिग्नाइट बेसिन तथा राजस्थान, गुजरात एवं जम्मू कश्मीर में किया जाता है। 
⇒1951-52 में देश में कोयला का उत्पादन लगभग 3.5 करोड टन हुआ जो 2021-22 में 778.19 मि. टन हो गया।
(iii) भारत में ऊर्जा के परंपरागत ऊर्जा स्रोत पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर- ऊर्जा के परम्परागत स्रोत सदियों से ऊर्जा प्रदान करते आ रहे हैं परंतु ये स्रोत क्षयशील तथा अनवीकरणीय है। ऊर्जा के परंपरागत स्रोत के अन्तर्गत कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, जलविद्युत इत्यादि को शामिल किया जाता है। इनमें जलविद्युत को छोड़कर सभी अनवीकरणीय स्रोत हैं। इन खनिजों का उपयोग एक बार हो जाने पर वे समाप्त हो जाते हैं। उनकी नवीकरण या पुन:चक्रण  करना संभव नहीं होता है। कुल भंडार में से उपयोग की गई मात्रा हमेशा घटती जाती है इसलिए यह क्षयशील संसाधन है।
(iv) भारत में पेट्रोलियम के उत्पादन एवं वितरण का विवरण लिखिए।
उत्तर – भारत में पेट्रोलियम पहली बार 1866 में पता चला तथा 1890 में डिगबोई से पहली बार तेल मिला। इसके बाद 1959 में खंभात के क्षेत्र में और फिर 1975 में मुंबई हाई तेल क्षेत्र का पता चला। भारत में तेल उत्पादन की दृष्टि से असम, अरूणाचल प्रदेश, नागालैंड महत्त्वपूर्ण है। यहाँ डिगबोई, नहरकटिया, हुगड़ीजन, मोरान, रूद्रसागर, निगरू एवं बौरहोल्ला मुख्य तेल उत्पादन केन्द्र हैं। गुजरात राज्य में अंकलेश्वर, कलोल, बलोल, कोसंबा, मेहसाना, बकरोल, नवगाँव इत्यादि मुख्य पेट्रोलियम उत्पादन केन्द्र हैं। महाराष्ट्र राज्य से पश्चिम अरब सागर में मुंबई हाई प्रमुख पेट्रोलियम उत्पादन केन्द्र है। यहाँ समुद्र में सागर सम्राट नामक एक जलमंच बनाया गया है जो तेल खनन का काम करने में मदद करता है। देश के पूर्वीभाग में कृष्णा-गोदावरी तथा कावेरी नदियों के बेसिन में विशेष रूप से नरीमानन एवं कोविलकप्पल में पेट्रोलियम मिले हैं। इसके अलावा पश्चिमी राज्य राजस्थान में बाडमेर बेसिन के मंगला क्षेत्र में पेट्रोलियम मिला है।
(v) ऊर्जा के गैर परंपरागत स्रोतों पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर- वर्तमान समय में ऊर्जा के ऐसे कई स्रोत खोज लिए गए हैं जिनके भंडार असीमित हैं। ये कभी खत्म नहीं हो सकते हैं । इसलिए इन स्रोतों को अक्षय स्रोत या नवीकरणीय स्रोत कहे जाते हैं। इन स्रोतों में सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा, भूतापीय ऊर्जा एवं जैव ऊर्जा आदि शामिल हैं।
⇒ भारत में प्रतिवर्ग 20 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पन्न करने की क्षमता है।
⇒ सोलर प्लेटों की सहायता से सूर्य की गर्मी से उत्पन्न की जानेवाली ऊर्जा, सौर ऊर्जा कहलाता है। इसका सबसे बड़ा संयंत्र गुजरात के भुज में लगाया गया है।
⇒ पृथ्वी के अंतर प्रति 32 मीटर की गहराई पर 1°C तापमान की वृद्धि होती जाती है। इस दृष्टि से पृथ्वी के भीतर ऊर्जा या ताप संग्रहित है। इस ऊर्जा को विशेष तकनीक द्वारा पृथ्वी के ऊपर लाकर विद्युत उत्पन्न की जाती है। जिसे भूतापीय ऊर्जा कहा जाता है। हिमाचल प्रदेश के मणिकरण, लद्दाख के पूगा घाटी तथा मध्य प्रदेश के तातापानी में इसके संयंत्र लगे हैं।
⇒ तेज बहते हुए पवन से ऊर्जा का उत्पादन पवन ऊर्जा कहलाता है। देश के गुजरात, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक में इसके दोहन की अच्छी संभावनाएं हैं। भारत में पवन ऊर्जा की उत्पादन क्षमता 50 हजार मेगावाट है। गुजरात के लांबा में एशिया का सबसे बड़ा संयंत्र लगाया गया है। तमिलनाडु के तूतीकोरिन में भी पवन-फार्म लगाए गए हैं।

⇒ तटीय भागों में आनेवाले ज्वार से पैदा की जानेवाली ऊर्जा ज्वारीय ऊर्जा है। भारत के तटीय भागों में इसके विकास की असीम संभावनाएँ हैं। अनुमान है कि देश में 8000-9000 मेगावाट संभाव्य ज्वारीय ऊर्जा है। खंभात की खाड़ी इसके लिए सबसे अनुकूल है। कच्छ की खाड़ी और सुंदरवन क्षेत्र में भी ज्वारीय ऊर्जा का उत्पादन की संभावना है।


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इकाई 1. अध्याय 1.3 (ग) खनिज संसाधन

 इकाई 1. अध्याय 1.3 (ग) खनिज संसाधन

बिहार बोर्ड के 8वीं कक्षा का भूगोल विषय का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

सरल एवं आसान शब्दों में उत्तर देना सीखें



इकाई 1

I. बहुवैकल्पिक प्रश्नोत्तर

सही विकल्प को चुनें।

1. खनिजों को कितने भागों में बांट सकते हैं?
(क) दो
(ख) चार
(ग) छः
(घ) आठ
उत्तर- (क) दो
2. हेमाटाइट किस खनिज का मुख्य अयस्क है?
(क) लोहा
(ख) कोयला
(ग) सोना
(घ) ग्रेफाइट
उत्तर- (क) लोहा
3. रोडोनाइट किस खनिज का अयस्क है?
(क) लोहा
(ख) कोयला
(ग) सोना
(घ) मैंगनीज
उत्तर- (घ) मैंगनीज
4. एलुमिनियम किस खनिज से प्राप्त होता है?
(क) कोबालाइट
(ख) बॉक्साइट
(ग) रोडोनाइट
(घ) साइलोमेलेन
उत्तर- (ख) बॉक्साइट
5. बायोटाइट किस खनिज का प्रकार है?
(क) एलुमिनियम
(ख) अभ्रक
(ग) लोहा
(घ) मैंगनीज
उत्तर – (ख) अभ्रक
II. सही मिलान कर लिखें।
1. लोहा    –   (घ) हेमाटाइट
2. मैंगनीज –  (ग) रोडोनाइट
3. अभ्रक   –  (क) बायोटाइट
 4. तांबा    –  (ख) कोबाटाइट
III.  निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें। (अधिकतम 50 शब्दों में)
1. खनिजों का वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर – खनिज मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं-
1. धात्विक खनिज-  वैसे खनिज जिस धातु होती है जैसे लौह अयस्क, ताँबा, निकेल, मैंगनीज आदि। पुनः इसे दो भागों में बाँटा जा सकता है
(क) लौहयुक्त खनिज- जिन धात्विक खनिज में लोहे का अंश अधिक पाया जाता है उसे लौहयुक्त खनिज कहते हैं, जैसे– लौह अयस्क, निकेल, टंगस्टन।
(ख) अलौहयुक्त खनिज- जिन धात्विक खनिज में लोहे की मात्रा न्यून होती है या नहीं होती है, अलौहयुक्त खनिज कहलाते हैं। जैसे– सोना, चाँदी, शीशा, बॉक्साइट ताँबा।
2. अधात्विक खनिज- वैसे खनिज जिसमें धातु की  मात्रा  नहीं होती है उसे  अधात्विक खनिज कहते है। जैसे-चूना पत्थर, अभ्रक, जिप्सम आदि। 
 अधात्विक खनिज भी दो प्रकार के होते हैं –
(क) कार्बनिक खनिज- इसमें जीवाश्म होते हैं, ये पृथ्वी में दबे प्राणी, पादप जीवों के परिवर्तन से बनते हैं। जैसे-कोयला, पेट्रोलियम इत्यादि।
(ख) अकार्बनिक खनिज- इसमें जीवाश्म नहीं होते हैं। जैसे– अभ्रक, ग्रेफाइट।
2. अयस्क किसे कहते हैं
उत्तर – वैसे चट्टान जिससे विभिन्न उपयोग के लिए धातु की प्राप्ति होती है उसे अयस्क कहा जाता है। 
3. मैंगनीज के क्या-क्या उपयोग हो सकते हैं
उत्तर –  मैंगनीज का उपयोग निम्नलिखित रूपों में किया जाता है –
(i) जंगरोधी इस्पात बनाने में।
(ii) शुष्क सेल के निर्माण में।
(iii) फोटोग्राफी में।
(iv) चमड़ा एवं माचिस उद्योग में।
(v) पेंट तथा कीटनाशक दवाओं के उत्पादन में इत्यादि।
4. भारत में अभ्रक उत्पादक क्षेत्रों के बारे में लिखिए।
उत्तर – भारत में उत्पादन की दृष्टि से अभ्रक निक्षेप की तीन पट्टियाँ हैं जो बिहार, झारखंड, आन्ध्रप्रदेश तथा राजस्थान राज्यों के अन्तर्गत आती हैं। भारत में अभ्रक के कुल भण्डार 59065 टन है। 2002-03 में इसका उत्पादन 1217 टन था। बिहार एवं झारखण्ड में उत्तम कोटि के रूबी अभ्रक का उत्पादन होता है। पश्चिम में गया जिले में हजारीबाग, मुंगेर होते हुए पूर्व में भागलपुर तक फैला हुआ है। इसके अतिरिक्त धनबाद, पलामू, राँची एवं सिंहभूम जिलों में भी अभ्रक के भण्डार मिले हैं।
     
         बिहार एवं झारखंड भारत का 80% अभ्रक का उत्पादन करते हैं। आन्ध्रप्रदेश के नेल्लोर जिले में अभ्रक का उत्पादन होता है। राजस्थान देश का तीसरा अभ्रक उत्पादक राज्य है। यहाँ जयपुर, उदयपुर, भीलवाड़ा, अजमेर आदि जिलों में अभ्रक की पेटी फैली हुई है। यू. एस. ए. भारतीय अभ्रक का मुख्य आयातक है।
5. बॉक्साइट के क्या-क्या उपयोग हैं। लिखिए।
उत्तर – बॉक्साइट – यह एक अलौह धातु निक्षेप है जिससे अल्यूमीनियम नामक धातु निकाली जाती है। भारत में बॉक्साइट का इतना भण्डार है कि अल्यूमीनियम में हम आत्मनिर्भर हो सकते हैं। इसका बहुमुखी उपयोग वायुयान निर्माण, बर्तन बनाने, सफेद सीमेंट तथा रासायनिक वस्तुएं बनाने में किया जाता है।
 
IV. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें। (अधिकतम 200 शब्दों में)
1. भारत के लौह अयस्क उत्पादक क्षेत्रों के बारे में लिखिए।
उत्तर- भारत में लौह अयस्क प्रायः सभी राज्यों में पाया जाता है परन्तु यहाँ के कुल भण्डार का 96% कर्नाटक, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, गोवा, झारखण्ड, राज्यों में सीमित है। शेष भण्डार तमिलनाडु, आन्ध्रप्रदेश, महाराष्ट्र एवं अन्य राज्यों में अवस्थित है। भारत में 1950-51 में 42 लाख टन लोहे का उत्पादन हुआ जो 2004-05 में बढ़कर 1427.1 लाख टन हो गया। अतः लोहे के उत्पादन में भारी विकास हुआ है।
⇒   कर्नाटक राज्य भारत का लगभग एक-चौथाई लोहा उत्पादन करता है। यहाँ बेल्लारी, हास्पेट, सुदूर क्षेत्रों में लौह अयस्क की खानें हैं।
⇒  छत्तीसगढ़ देश का दूसरा उत्पादन राज्य है जो देश का करीब 20 प्रतिशत लोहा उत्पन्न करता है। दाँतेवाड़ा जिले का बैलाडिला तथा दुर्गा जिले के डल्ली एवं राजहरा प्रमुख उत्पादक हैं। रायगढ़, विलासपुर तथा सरगुजा अन्य उत्पादक जिले हैं। यहाँ का अधिकांश लोहा विशाखापट्नम बंदरगाह से जापान को निर्यात किया जाता है।
⇒  उड़ीसा देश का 19 प्रतिशत लोहा उत्पादन करता है। यहाँ की प्रमुख खानें गुरु माहिषानी, बादम पहाड़ (मगूरगंज) एवं किरिबुरू हैं।
⇒  गोवा देश का चौथा बड़ा लोहा उत्पादक राज्य है तथा 16 प्रतिशत देश का लोहा यहीं से प्राप्त होता है। यहाँ की प्रमुख खाने साहक्वालिम, संग्यूम, क्यूपेम, सतारी, पौडा एवं वियोलिम में स्थित हैं। यहाँ के मर्मागांव पतन से लोहा निर्यात किया जाता है।
⇒  झारखण्ड देश का पांचवां बड़ा अयस्क उत्पादक राज्य है और 15 प्रतिशत से अधिक लोहे का उत्पादन करता है। यहाँ के सिंहभूम, पलामू, धनबाद, हजारीबाग, लोहरदगा तथा राँची मुख्य उत्पादक जिले हैं।
⇒  महाराष्ट्र में लौह अयस्क की खाने चन्द्रपुर, रत्नागिरि और भण्डारा जिलों में स्थित हैं।
⇒ आन्ध्रप्रदेश के कसीमनगर, बारंगल, कुर्नुल, कड़प्पा आदि जिले लौह अयस्क उत्पादक हैं जबकि तमिलनाडु के तीर्थ मल्लाई पहाड़ियों (सलेम) एवं यादपल्ली (नीलगिरी) क्षेत्र में लोहे के भण्डार हैं।
2. भारत के मैंगनीज के उत्पादन एवं वितरण का वर्णन कीजिए।
उत्तर- मैंगनीज अयस्क- 
           मैंगनीज के उत्पादन में भारत का स्थान विश्व में रूस एवं दक्षिण अफ्रीका के बाद तीसरा है। यह मुख्य रूप से जंगरोधी इस्पात बनाने तथा लोहा एवं मैंगनीज के मिश्रधातु बनाने के उपयोग में आता है। इसका उपयोग शुष्क बैटरियों के निर्माण में, फोटोग्राफी में, चमड़ा एवं माचिस उद्योग में भी होता है। साथ ही इसका उपयोग पेंट तथा कीटनाशक दवाओं के बनाने में भी किया जाता है। भारत के कुल उत्पादन का 85% मैंगनीज का उपयोग मिश्रधातु बनाने में किया जाता है।
वितरण- भारत में मैंगनीज का संचित भण्डार 1670 लाख टन है। विश्व में जिम्बाब्वे के बाद भारत में ही मैंगनीज का सबसे बड़ा संचित भण्डार है जो विश्व के कुल संचित भण्डार का 20 प्रतिशत है।
         भारत  मैंगनीज के उत्पादन में मुख्य क्षेत्र उड़ीसा, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक एवं आन्ध्रप्रदेश हैं। भारत का 78% से ज्यादा मैंगनीज अयस्क के भण्डार महाराष्ट्र के नागपुर तथा भण्डारा जिलों से लेकर मध्यप्रदेश के बालघाट एवं छिन्दवाड़ा जिलों तक फैली पट्टी में मिलते हैं।
⇒ उड़ीसा भारत में मैंगनीज के उत्पादन में अग्रणी है। यहाँ देश के कुल उत्पादन का 37.6% मैंगनीज उत्पादन होता है। यहाँ मैंगनीज के मुख्य खादानें, सुन्दरगढ़, कालाहांडी, रायगढ़ बोलांगीर, क्योंझर, जालसुर एवं मयूरभंज जिलों में हैं। 
⇒ महाराष्ट्र भारत के कुल उत्पादन का लगभग एक चौथाई मैंगनीज उत्पादन करता है। इस राज्य की मुख्य मैंगनीज उत्पादन पेटी नागपुर तथा भण्डारा जिले में हैं। इस पेटी में उत्तम कोटि के मैंगनीज अयस्क मिलते हैं। रत्नागिरि में उच्चकोटि का मैंगनीज का उत्पादन होता है।
⇒ मध्यप्रदेश 21% मैंगनीज पैदा कर देश का तीसरा बड़ा उत्पादक राज्य है। बालघाट तथा छिन्दवाड़ा जिलों में मैंगनीज का उत्पादन होता है।
⇒ कर्नाटक में मैंगनीज शिमोगा, तुमकुर, बेलारी, धारवाड़, चिकमंगलूर और बीजापुर जिले मुख्य उत्पादक हैं। पहले यहाँ देश का एक चौथाई मैंगनीज उत्पादन होता था किन्तु अब उत्पादन कम हो रहा है।
⇒ आन्ध्रप्रदेश में देश के सकल उत्पादन का 6 प्रतिशत ही मैंगनीज का उत्पादन होता है। यहाँ । मुख्य उत्पादक जिला श्रीकाकुलम है। अन्य उत्पादक जिलों में विशाखापतनम, कुडप्पा, विजयनगर, गुंटूर हैं।
3. विश्व के तांबा उत्पादक क्षेत्रों के बारे में लिखिए।
उत्तर – विश्व में तांबा उत्पादन में अमेरिका का बुट्टा क्षेत्र, कनाडा का सडबरी क्षेत्र, चिली का चुकीकामाटा, मध्य चिली का एलतेनियेन्स, जांबिया का मुफिल आरा तथा जायरे का कटांगा क्षेत्र अत्यंत महत्वपूर्ण है।
4. खनिजों के उपयोग के बारे में विस्तृत वर्णन कीजिए।
उत्तर- खनिज क्षयशील एवं अनवीकरणीय संसाधन है। इनकी मात्रा सीमित है। इनका पुनर्निर्माण असंभव है। खनिज उद्योगों का आधार है, किन्तु औद्योगिक विकास के लिए खनिजों का अतिशय दोहन एवं उपयोग उनके अस्तित्व के लिए संकट है। खनिज संसाधन के विवेकपूर्ण उपयोग तीन बातों पर निर्भर है-
(i) खनिजों के निरंतर दोहन पर नियंत्रण, 
(ii) उनका बचतपूर्वक उपयोग एवं
(iii) कच्चे माल के रूप में सस्ते विकल्पों की खोज।
5. भारत में अभ्रक के उत्पादन एवं वितरण का विवरण कीजिए।
उत्तर- भारत विश्व में शीट अभ्रक का अग्रणी उत्पादक है। अब तक इलेक्ट्रॉनिक उद्योगों में इसका उपयोग होता रहा है, किन्तु कुछ कृत्रिम विकल्प आ जाने से अभ्रक के उत्पादन एवं निर्यात दोनों पर बुरा असर पड़ा है। वैसे तो प्राचीन काल से अभ्रक का प्रयोग आयुर्वेदिक दवाओं के लिए किया जाता रहा है, लेकिन विद्युत उपकरण में इसका खास उपयोग होता है। क्योंकि यह विद्युत रोधक होने के कारण उच्च विद्युत शक्ति को सहन कर सकता है।

            भारत में उत्पादन की दृष्टि से अभ्रक निक्षेप की तीन पट्टियाँ हैं जो बिहार, झारखंड, आन्ध्रप्रदेश तथा राजस्थान राज्यों के अन्तर्गत आती हैं। भारत में अभ्रक के कुल भण्डार 59065 टन है। 2002-03 में इसका उत्पादन 1217 टन था। बिहार एवं झारखण्ड में उत्तम कोटि के रूबी अभ्रक का उत्पादन होता है।

        पश्चिम में गया जिले में हजारीबाग, मुंगेर होते हुए पूर्व में भागलपुर तक फैला हुआ है। इसके अतिरिक्त धनबाद, पलामू, राँची एवं सिंहभूम जिलों में भी अभ्रक के भण्डार मिले हैं। बिहार एवं झारखंड भारत का 80% अभ्रक का उत्पादन करते हैं। आन्ध्रप्रदेश के नेल्लोर जिले में अभ्रक का उत्पादन होता है। राजस्थान देश का तीसरा अभ्रक उत्पादक राज्य है। यहाँ जयपुर, उदयपुर, भीलवाड़ा, अजमेर आदि जिलों में अभ्रक की पेटी फैली हुई है। यू. एस. ए. भारतीय अभ्रक का मुख्य आयातक है।


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